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ट्रंप ने झुककर किया ईरान से समझौता, दो हफ़्ते का सीजफायर हुआ लागू

वाशिगटन / तेहरान  मिडिल-ईस्ट में पिछले एक महीने से ज्यादा वक्त से चल रही जंग अब थम सकती है.  अमेरिका और इजरायल के ईरान पर संयुक्त हमलों से शुरू हुई महाजंग में अब सीजफायर का ऐलान हो गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को जो डेडलाइन दी थी, उसके खत्म होने से ठीक पहले ही ट्रंप ने दो हफ्तों के लिए जंग रोकने की घोषणा कर दी।  धमकियों से अचानक पीछे हटते हुए, डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई रोक देंगे, जो कूटनीति के लिए एक संभावित मौके का संकेत है. सोशल मीडिया पोस्ट में ट्रंप ने कहा, "मैं दो हफ़्तों की के लिए ईरान पर बमबारी और हमले को रोकने पर सहमत हूं." उन्होंने कहा कि यह फ़ैसला पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर के साथ बातचीत के बाद लिया गया, जिन्होंने उनसे नियोजित हमलों को टालने का आग्रह किया था।  ईरान ने पाकिस्तान के दो हफ़्तों के युद्धविराम प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है. इस युद्धविराम को देश के नए सुप्रीम लीडर ने मंज़ूरी दे दी है. ईरान ने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत को जंग के खत्म होने का संकेत नहीं माना जाना चाहिए. 10-सूत्रीय प्रस्ताव में सभी प्राथमिक और माध्यमिक प्रतिबंधों को हटाने, पूरी तरह मुआवज़ा देने और ईरान की सभी ज़ब्त संपत्तियों को जारी करने की मांग की गई है।  वहीं, ईरान ने जंग रोकने के लिए 10-Points का प्रस्ताव भेजा है. ईरानी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान ने कहा कि वह युद्ध की समाप्ति को तभी स्वीकार करेगा. ईरान की मांगों को अंतिम रूप देने के लिए अमेरिका के साथ शुक्रवार, 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में बातचीत होगी।  सीजफायर के बावजूद जारी तनाव हालांकि कागजों पर सीजफायर हो गया है, लेकिन जमीन पर हालात अब भी पूरी तरह शांत नहीं हैं। खाड़ी देशों और इजरायल में मिसाइल हमलों के अलर्ट जारी रहे। संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कुवैत और बहरीन जैसे देशों में एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय रहे। इससे साफ है कि क्षेत्र में खतरा अभी टला नहीं है और स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। इजरायल और ईरान के बीच भी हमले पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। दोनों तरफ से जवाबी कार्रवाई जारी रहने की खबरें सामने आई हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि सीजफायर को पूरी तरह लागू होने में समय लग सकता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना सबसे बड़ा मुद्दा इस पूरे संघर्ष का सबसे बड़ा केंद्र स्ट्रेट ऑफ होर्मुज रहा है। दुनिया के बड़े हिस्से में तेल और गैस की सप्लाई इसी रास्ते से होती है। ईरान ने इस जलमार्ग पर नियंत्रण कड़ा कर दिया था, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा। इसी दबाव के चलते अमेरिका और उसके सहयोगियों ने सीजफायर की दिशा में कदम बढ़ाया। सीजफायर के तहत दो हफ्तों के लिए इस स्ट्रेट को खोलने पर सहमति बनी है। हालांकि यह पूरी तरह खुला रहेगा या सीमित नियंत्रण में, इस पर अभी स्पष्टता नहीं है। आर्थिक असर और अंतरराष्ट्रीय दबाव सीजफायर की घोषणा के बाद वैश्विक बाजारों में सकारात्मक असर देखा गया। अमेरिका के तेल की कीमतों में 17 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई, जबकि जापान और दक्षिण कोरिया के शेयर बाजारों में तेजी रही।   आइए जानते हैं अब तक के बड़े अपडेट क्या हैं-   1- ट्रंप ने ईरान की ओर से पेश किए गए 10 सूत्रीय शांति प्रस्ताव को व्यावहारिक बताया. उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान के पावर प्लांट, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचों को निशाना बनाने से परहेज करेगा. मिडिल ईस्ट में शांति स्थापित करने के लिए वाशिंगटन और तेहरान के बीच 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में मीटिंग होगी।  2- कूटनीतिक प्रयासों में तेजी आने के बावजूद जमीनी स्तर पर अनिश्चितता और हिंसा जारी रही. ईरान ने सीजफायर समझौते को स्वीकार कर लिया है, लेकिन खाड़ी क्षेत्र में हमलों की आशंका बनी रही. व्हाइट हाउस की ओर से सीजफायर पर सहमति जताए जाने के बावजूद, इज़रायली सेना ने ईरान पर हमले जारी रखे।  3- ट्रंप ने ऐलान करते हुए कहा, 'मैं आज रात ईरान पर भेजे जा रहे विनाशकारी बल को रोक रहा हूं और अगर इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह, तुरंत और सुरक्षित रूप से खोलने पर सहमत होता है तो मैं दो सप्ताह की अवधि के लिए ईरान पर बमबारी और हमले को निलंबित करने पर सहमत हूं।  4- ईरान ने कहा, 'अगर उस पर हमले रोक दिए जाते हैं तो हमारी शक्तिशाली सशस्त्र सेनाएं अपने रक्षात्मक अभियान बंद कर देंगी.' ईरान ने यह भी कहा कि वह अमेरिका के 15 सूत्रीय प्रस्ताव पर आधारित वार्ता के अनुरोध पर विचार कर रहा है. साथ ही वाशिंगटन द्वारा ईरान की 10 सूत्रीय योजना को वार्ता के ढांचे के रूप में स्वीकार करने पर भी विचार कर रहा है।  5- तेहरान ने आगे कहा कि दो सप्ताह की अवधि के लिए, ईरान के सशस्त्र बलों के समन्वय और तकनीकी सीमाओं को ध्यान में रखते हुए होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित आवागमन संभव होगा।  6- ईरान ने इसे तेहरान की जीत बताया और उसकी सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने कहा कि ट्रंप ने शत्रुता समाप्त करने के लिए ईरान की शर्तें मान ली हैं. हालांकि, व्हाइट हाउस ने जवाब दिया कि वास्तविकता यह है कि राष्ट्रपति ट्रंप और अमेरिकी सेना ने ईरान को होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के लिए मजबूर किया था।  7- व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इज़राइल ईरान के खिलाफ बमबारी अभियान को रोकने पर सहमत हो गया है. हालांकि, इजरायली सैन्य अधिकारियों ने कहा कि देश अभी भी हमले कर रहा है. तेल अवीव की ओर से औपचारिक बयान का इंतजार है।  8- ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर का ऐलान हो चुका है, इसके बावजूद सऊदी अरब, बहरीन और कुवैत सहित खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल अलर्ट जारी किए गए।  9- खबरों के मुताबिक, ईरान की दीर्घकालिक शांति योजना में ओमान के साथ समन्वय में होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर टैक्स लगाना शामिल है. तेहरान का कहना है कि इस राजस्व का उपयोग पुनर्निर्माण के लिए किया जाएगा. इसके अलावा युद्ध समाप्त करने के लिए ईरान की शर्तों में क्षेत्र से अमेरिकी लड़ाकू … Read more

10 अप्रैल से टोल प्लाजा पर कैश नहीं चलेगा, UPI पेमेंट पर 1.25 गुना अधिक चार्ज

नई दिल्ली देश के टोल प्लाजा पर होने वाले पेमेंट सिस्टम में नए बदलाव होने जा रहे हैं। दरअसल, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने बताया कि 10 अप्रैल से नेशनल हाईवे पर यात्रियों के लिए टोल प्लाजा पर कैश पेमेंट बंद कर दिया जाएगा। एक गजट नोटिफिकेशन में मंत्रालय ने कहा है कि जिन मामलों में कोई गाड़ी बिना वैलिड FASTag के किसी फीस प्लाजा में घुसती है, तो यूजर फिर भी यूनफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) के जरिए पेमेंट कर सकते हैं, लेकिन उन्हें लागू टोल फीस से 1.25 गुना ज्यादा चार्ज देना होगा। यानी जिस टोल पर 100 रुपए लगते हैं, वहां UPI करने पर 125 रुपए देने होंगे। NHAI के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि इस कदम का मकसद टोल गेट पर लगने वाली लंबी कतारों को कम करना और यात्रियों के लिए हाईवे पर सफर को ज्यादा आसान बनाना है। अधिकारी ने कहा कि 10 अप्रैल से टोल बूथ पर कैश पेमेंट स्वीकार नहीं किया जाएगा। टोल कलेक्शन का मुख्य तरीका FASTag ही रहेगा, जबकि UPI उन गाड़ियों के लिए पेमेंट का दूसरा ऑप्शन होगा, जो बिना वैलिड FASTag के आती हैं। या फिर किसी अन्य वजह से FASTag से पेमेंट नहीं होता। MoRTH के नोटिफिकेशन के मुताबिक, "अगर किसी गाड़ी का यूजर बिना FASTag या बिना किसी वैलिड और काम कर रहे FASTag के (जैसा भी मामला हो) किसी फीस प्लाजा से गुजरता है और UPI के जरिए फीस देने का विकल्प चुनता है, तो उसे नियम 4 के उप-नियम (2) के प्रावधानों के मुताबिक, उस कैटेगरी की गाड़ी पर लागू यूजर फीस का 1.25 गुना पेमेंट करना होगा। यदि गाड़ी का मालिक या ड्राइवर इस नियम के तहत बताए गए तरीके से फीस देने का ऑप्शन नहीं चुनता है, तो ऐसी गाड़ी के साथ नियम 14 के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।" FASTag एनुअल पास भी महंगा हुआ नेशनल हाईवे के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने FASTag एनुअल पास को भी महंगा कर दिया है। फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए इस पास की कीमत बढ़ाकर 3,075 रुपए कर दी गई है। यह बदलाव 1 अप्रैल, 2026 से लागू हो चुका है। पहले इस पास की कीमत 3,000 रुपए थी। इस पास को 6 महीने के अंदर 50 लाख से ज्यादा यूजर्स ने एक्टिव कराया था। इस दौरान 26.55 करोड़ से ज्यादा ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड किए गए हैं। NHAI ने बताया था कि नेशनल हाईवे (NH) नेटवर्क पर होने वाले कुल कार ट्रांजैक्शन में से लगभग 28% अब FASTag एनुअल पास के जरिए किए जा रहे हैं, जो नेशनल हाईवे यूजर्स के बीच FASTag एनुअल पास की बढ़ती पसंद को दिखाता है। FASTag एनुअल पास क्या है? सबसे पहले समझते हैं कि FASTag एनुअल पास क्या है? तो ये सालाना टोल पास एक तरह की प्रीपेड टोल स्कीम है, जिसे खास तौर से कार, जीप और वैन जैसे नॉन-कमर्शियल प्राइवेट व्हीकल के लिए तैयार किया गया है। नए पास की घोषणा करते समय नितिन गडकरी ने कहा था कि इसका उद्देश्य 60 किलोमीटर के दायरे में स्थित टोल प्लाजा से जुड़ी लंबे समय से चली आ रही चिंताओं को दूर करना और सिंगल, अफॉर्जेबल लेनदेन के माध्यम से टोल भुगतान को सरल बनाना है। टोल प्लाजा पर वेटिंग टाइम को कम करके, भीड़भाड़ को कम करके और विवादों को कम करके, वार्षिक पास का उद्देश्य लाखों प्राइवेट व्हीकल ओनर्स के लिए एक फास्ट और आसान यात्रा का अनुभव देना है। खास बात ये है कि इसके लिए लोगों को नया टैग खरीदने के की जरूरत नहीं है, बल्कि ये आपके मौजूदा FASTag से जुड़ जाएगा। इसकी कंडीशन ये है कि आपका मौदूजा FASTag एक्टिव होना चाहिए और आपके व्हीकल रजिस्ट्रेशन नंबर से जुड़ा हो। यह योजना केवल NHAI और सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के अंतर्गत आने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर लागू होगा। इसके लिए बार-बार ऑनलाइन रिचार्ज करने की आवश्यकता नहीं है, जिससे यह डेली पैसेंजर्स के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। यह पास नॉन-ट्रांसफरेबल है। इसे सिर्फ रजिस्टर्ड व्हीक के साथ ही इस्तेमला कर पाएंगे। FASTag एनुअल पास कहां काम करेगा? FASTag एनुअल पास केवल NHAI द्वारा ऑपरेटेड राष्ट्रीय राजमार्गों (NH) और राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे (NE) पर स्थित टोल प्लाजा पर ही काम करता है। जैसे, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, मुंबई-नासिक, मुंबई-सूरत और मुंबई-रत्नागिरी मार्ग आदि। राज्य राजमार्गों या नगरपालिका टोल सड़कों पर आपका FASTag सामान्य रूप से काम करेगा और टोल सामान्य रूप से वसूला जाएगा। जैसे, मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे, मुंबई-नागपुर एक्सप्रेसवे (समृद्धि महामार्ग), अटल सेतु, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, बेंगलुरु-मैसूर एक्सप्रेसवे और अहमदाबाद-वडोदरा एक्सप्रेसवे। ये सभी राज्य प्राधिकरणों द्वारा संचालित होते हैं। ऐसे एक्टिवेट करें फास्टैग एनुअल पास FASTag एनुअल पास एक्टिवेट करने को लेकर इंडियन हाईवे मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (IHMCL) की तरफ एक नोटिफिकेशस जारी किया गया है। IHMCL ने नोटिफिकेशन में इस एनुअल पास से जुड़े सभी सवालों के जवाब दिए गए हैं। साथ ही, फास्टैग के एनुअल पास को एक्टिवेट करने का तरीका भी बताया है। IHMCL के मुताबिक, FASTag एनुअल पास को सिर्फ Rajmargyatra (राज मार्ग यात्रा) मोबाइल ऐप और NHAI पोर्टल पर जाकर ही एक्टिवेट किया जा सकेगा। इस पास को एक्टिवेट करने के लिए कार चालक को पहले अपने व्हीकल और उसके ऊपर लगे FASTag की एलिजिबिलिटी को वेरिफाई करना होगा। एक बार वेरिफिकेशन्स कंप्लीट होने के बाद 3,075 रुपए का पमेंट करना होगा। यूजर द्वारा किया गया 3,075 रुपए की पेमेंट कंफर्मेशन होने के बाद 2 घंटे के अंदर FASTag एनुअल पास एक्टिवेट हो जाएगा। यह एक्टिवेशन आपके मौजूदा फास्टैग पर ही होगा। FASTag एनुअल पास के लिए आपको न्यू फास्टैग खरीदने की जरूरत नहीं है। फास्टैग एनुअल पास पर पेमेंट करने से अगले 1 साल तक या फिर 200 टोल पार करने तक की वैलिडिटी मिलेगी।  

अलादीन का चिराग मिला भारत को! 50 अरब का प्रोजेक्ट 90 करोड़ में, 700 साल तक होगा चकाचक

बेंगलुरु  ईरान जंग की वजह से पूरी दुनिया में बेचैनी है. कच्चे तेल के दाम बढ़ने से हर तरफ महंगाई बढ़ रही है. अमेरिका से लेकर नेपाल तक हर मुल्क की जनता परेशान है. भारत भी इस जंग के असर से अछूता नहीं है. लेकिन, इस भारत के हाथ अलादीन का चिराग लग गया है. खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी घोषणा की है. अगर सब कुछ ठीक रहा तो इस अलादीन के चिराग के दम पर भविष्य में भारत एक जगमगाता सितारा बन जाएगा. भारत को अरब देशों या रूस से तेल पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।  दरअसल, हम बात कर रहे हैं फास्ट ब्रीडर न्यूक्लियर रिएक्टर की. कल्पक्कम में सोमवार को भारत ने इस टेक्नोलॉजी को हासिल करने की आधिकारिक घोषणा कर दी. फास्ट ब्रीडर न्यूक्लियर रिएक्टर एक बेहद जटिल टेक्नोलॉजी है. पश्चिमी देश इस तकनीक को हासिल करने में नाकाम रहे हैं. इस तकनीक वाले न्यूक्लियर रिएक्टर में यूरेनियम की जगह थोरियम का इस्तेमाल किया जाता है. और दुनिया के थोरियम भंडार का 25 फीसदी हिस्सा भारत में है. यानी इस तकनीक की बदौलत परमाणु बिजली के क्षेत्र में भारत की यूरेनियम पर निर्भरता खत्म हो जाएगी. भारत में यूरेनियम भंडार बहुत नगण्य है. इसके लिए भारत को रूस और ऑस्ट्रेलिया पर निर्भर रहना पड़ता है।  फास्ट ब्रीडर न्यूक्लियर रिएक्टर और भारत का सफर भारत ने फास्ट ब्रीडर न्यूक्लियर रिएक्टर की कल्पना 70 साल पहले की थी. जानेमाने वैज्ञानिक होमी जहांगीर भाभा ने इस दिशा में काम शुरू किया था. तब से भारत इस तकनीक को हासिल करने में लगा था. दरअसल, दुनिया के सबसे अमीर छह देशों ने फास्ट ब्रीडर न्यूक्लियर रिएक्टर्स तकनीक हासिल करने पर 50 बिलियन डॉलर (लगभग 4.25 लाख करोड़ रुपये) खर्च कर चुके हैं. लेकिन, असफलता के कारण एक-एक करके सभी ने प्रोजेक्ट छोड़ दिए. इस तकनीक को विकसित करने के लिए अमेरिका ने 15 बिलियन, जापान ने 12 बिलियन, ब्रिटेन ने 8 बिलियन, जर्मनी ने 6 बिलियन डॉलर खर्च कर दिए. फ्रांस और इटली भी भाग खड़े हुए. सबने कहा कि यह तकनीक हासिल करना बहुत मुश्किल और बहुत महंगा है।  लेकिन, भारत ने सिर्फ 90 करोड़ डॉलर (लगभग 7,700 करोड़ रुपये) में अपना पहला कमर्शियली वायबल प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर विकसित कर लिया. ऐसा करने वाला भारत, रूस और चीन के बाद तीसरा देश है. वर्ष 2004 में यह प्रोजेक्ट शुरू हुआ प्रोजेक्ट था. शुरुआती बजट 42 करोड़ डॉलर का था. अब 22 साल बाद दर्जनों बार डेडलाइन खत्म होने और लागत दोगुनी होने के बाद भारत के हाथ सफलता लगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे सिविल न्यूक्लियर के सफर में एक अहम कदम बताया है।  भारत क्यों नहीं छोड़ा ये प्रोजेक्ट? कारण बहुत सीधा है. भारत के पास दुनिया के यूरेनियम रिजर्व का सिर्फ 1-2 फीसदी भंडार है. ऐसे में 1.4 अरब लोगों वाले देश के लिए पारंपरिक न्यूक्लियर फ्यूल पर निर्भर रहना खुदकुशी करने जैसा है. दूसरी तरफ भारत के पास दुनिया के थोरियम रिजर्व का 25 फीसदी हिस्सा है. पृथ्वी पर किसी भी एक देश के पास इतना बड़ा भंडार नहीं है. परमाणु ऊर्जा विभाग के अनुसार, भारत में करीब एक करोड़ टन मोनाजाइट है, जिसमें 9,63,000 टन थोरियम ऑक्साइड भरा हुआ है. समस्या यह है कि थोरियम को यूरेनियम की तरह सीधे नहीं जलाया जा सकता. 1950 के दशक में डॉ. होमी भाभा ने इसी समस्या का हल निकाला. उन्होंने तीन चरणों वाला न्यूक्लियर प्रोग्राम बनाया।      पहला चरण: नेचुरल यूरेनियम को हेवी वाटर रिएक्टर्स में जलाओ, बाईप्रोडक्ट में प्लूटोनियम इकट्ठा करो।      दूसरा चरण: उस प्लूटोनियम को फास्ट ब्रीडर रिएक्टर में डालो. यहां रिएक्टर न सिर्फ ज्यादा प्लूटोनियम पैदा करेगा, बल्कि थोरियम को फिसाइल यूरेनियम-233 में बदल देगा।      तीसरा चरण: थोरियम को बड़े पैमाने पर जलाओ।  कल्पक्कम का फास्ट ब्रीडर न्यूक्लियर रिएक्टर भारत को स्टेज-2 में ले आया है. भाभा के कागज पर बने प्लान के 70 साल बाद यह उपलब्धि हासिल हुई है।  थोरियम का गणित वर्तमान ऊर्जा खपत की दर से भारत के थोरियम रिजर्व देश को 700 साल से ज्यादा बिजली दे सकते हैं. जबकि ज्यादातर न्यूक्लियर देश यूरेनियम पर खेल रहे हैं, जिनके पास सिर्फ 80-100 साल का ईंधन बचा है. भारत पूरी तरह अलग गेम खेल रहा है. पश्चिमी देश इसलिए भागे क्योंकि यूरेनियम सस्ता मिलता रहा और सोडियम कूलेंट बहुत खतरनाक है. यह हवा के संपर्क में आते ही आग पकड़ लेता है और पानी के संपर्क में आते ही विस्फोट कर देता है. रूस के BN-600 में 1980-1997 के बीच 27 सोडियम लीक और 14 आग की घटनाएं घटीं. फिर भी रूस ने इसे नहीं छोड़ा. भारत ने सब देखा और आगे बढ़ता रहा. जब आपके पास यूरेनियम सिर्फ एक फीसदी हो और थोरियम 25 फीसदी तब इंजीनियरिंग की मुश्किलों का बहाना नहीं बना सकते है. यही बात भारत पर लागू होती है. इस प्रयोग में भारत को 700 साल की ऊर्जा सुरक्षा दिख रही है।  चीन कहां है? चीन भी थोरियम पर काम कर रहा है. उसने गोबी डेजर्ट में दो मेगावाट थोरियम मॉल्टन सॉल्ट रिएक्टर (TMSR-LF1) लगाया है. उसने 2023 में यह सफलता हासिल की. 2024 में थोरियम फ्यूल लोड किया और 2025 में थोरियम से यूरेनियम-233 ब्रिडिंग की सफलता हासिल की. चीन का लक्ष्य 2035 तक 100 मेगावाट डेमो रिएक्टर और 2040 तक कमर्शियल थोरियम रिएक्टर बनाने की है. लेकिन चीन अभी प्रयोगात्मक स्तर पर है, जबकि भारत ने 500 मेगावाट प्रोटोटाइप को विकसित कर लिया है. अगर चीन की तकनीक आगे बढ़ी तो भारत को फायदा होगा क्योंकि थोरियम की तकनीक में हम पहले से मजबूत हैं. लेकिन फिलहाल भारत ने स्टेज-2 में कदम रखकर दुनिया को दिखा दिया कि हम थोरियम के असली गेम प्लेयर हैं।  आगे क्या?  

5 किलो LPG सिलेंडरों का कोटा दोगुना, मजदूरों और गरीबों को मिलेगा राहत

नई दिल्ली देशभर में एलपीजी गैस सिलेंडर की किल्लत के बीच सरकार ने प्रवासी मजदूरों को बड़ी राहत दी है। सरकार ने अपना गांव छोड़कर शहरों में जाकर कमाई करने वाले मजदूरों के लिए 5 किलो वाले एलपीजी सिलिंडर का कोटा डबल कर दिया है। सरकार ने कहा है कि रोजाना सप्लाई किए जाने वाले 5 किलो के सिलेंडरों की संख्या अब दोगुनी कर दी जाएगी। 2-3 मार्च 2026 को मजदूरों के लिए जितने सिलेंडर एक दिन में सप्लाई करने का लक्ष्य रखा गया था, अब उससे दोगुना सिलेंडर भेजे जाएंगे। बिना कनेक्शन मिलता है छोटू सिलेंडर बता दें कि इन सिलिंडरों को एफटीएल गैस सिलिंडर भी कहा जाता है। सराकर अब दोगुनी संख्या में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इन सिलिंडरों की सप्लाई करेगी। आम तौर पर यह सिलिंडर प्रवासी मजदूरों या फिर छात्रों के लिए ही बना है। दरअसल परमानेंट अड्रेस ना होने की वजह से लोगों को स्थायी गैस कनेक्शन मिलना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में कोई भी एक पहचान पत्र दिखाकर छोटू सिलेंडर लिया जा सकता है। मजदूरों को बड़ी राहत एक दिन पहले ही कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मोदी सरकार को घेरते हुए कहा था कि सबसे बड़ा वार मजदूरों और गरीबों पर ही किया जाता है। कोविड की तरह एक बार फिर मजदूरो को गांव की ओर चलने का वक्त आ गया है। हालांकि सरकार ने यह फैसला लेकर मजदूर क्लास को बड़ी राहत दी है। यह नया कोटा पहले से तय 20 फीसदी के कोटे के अतिरिक्त होगा। ब्लैक मार्केटिंग रोकने का प्रयास एलपीजी संकट की खबरें आते ही सिलेंडरो की ब्लैक मार्केटिंग शुरू हो गई थी। ऐसे में सरकार ने एक समय सीमा तय कर दी कि एक कनेक्शन पर उतने दिन से पहले बुकिंग नहीं हो पाएगी। इसका उद्देश्य ब्लैक मार्केटिंग और भीड़ दोनों को नियंत्रित करना था। छोटू सिलेंडर का कोट बढ़ाने का भी उद्देश्य यही है। अब राज्य सरकारों और ऑइल मार्केटिंग कंपनियों को यह सुनिश्चित करना है कि जरूतमंद लोगों तक पर्याप्त सिलेंडर पहुंच जाएं। इंडक्शन चूल्हों को लेकर भी दी गई ढील विद्युत मंत्रालय ने इस साल 01 जुलाई से इंडक्शन चूल्हों के लिए स्टार रेटिंग की व्यवस्था अनिवार्य करने के लिए पिछले साल दिसंबर में अधिसूचना जारी की थी। सोमवार को जारी नयी अधिसूचना में इस तारीख को 01 जनवरी 2027 कर दिया गया है। अधिसूचना में कहा गया है कि ऊर्जा दक्षता ब्यूरो के परामर्श से स्टार रेटिंग की अनिवार्यता को टालने का फैसला किया गया है और सरकार इस बात से संतुष्ट है कि इसे छह महीने के लिए टाला जा सकता है।

चुनावी वादों की बारिश: बंगाल में कांग्रेस ने महिलाओं-किसानों के लिए खोला खजाना, जानें पूरी घोषणा

पश्चिम बंगाल  विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने अपना चुनावी घोषणा पत्र जारी कर दिया है। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कोलकाता में घोषणा पत्र जारी कर करते हुए पार्टी को लोगों के सामने तीसरे विकल्प के रूप में पेश किया है। खरगे ने घोषणा पत्र जारी करते हुए कहा, "हमारा घोषणा पत्र ‘जनता के लिए राहत’ और ‘बंगाल के विकास’ को ध्यान में रखकर बनाया गया है।" उन्होंने कहा कि हम बहुत दिनों के बाद बंगाल में सभी सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं। इसलिए, यहाँ के लोगों को एक नया विकल्प देने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस ने इस घोषणा पत्र के जरिए महिलाओं को अपने पाले में करने की पुरजोर कोशिश की है। इसलिए महिलाओं के लिए कई वादे किए गए हैं। कांग्रेस के घोषणा पत्र में कहा गया है कि अगर पार्टी सत्ता में आती है तो बंगाल में महिलाओं को हर माह 2000 रुपये की सहायता दी जाएगी और मुफ्त परिवहन सेवा दी जाएगी। घोषणा पत्र में लड़कियों को स्नातकोत्तर स्तर तक मुफ्त शिक्षा देने का भी वादा किया गया है। महिलाओं के अलावा सीमांत भूमिहीन किसानों को 15000 रुपये सालाना देने और 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली का वादा किया गया है। इसके अलावा हर परिवार के लिए 10 लाख रुपये के स्वास्थ्य बीमा का वादा किया गया है। युवाओं के लिए रोजगार और हर जिले में AI सेंटर बनाने की भी बात कही गई है। कांग्रेस के घोषणापत्र में एक साल के अंदर सभी खाली सरकारी पदों पर राज्य के युवाओं की भर्ती के लिए 'युवा सम्मान' योजना शुरू करने का वादा किया गया है। कांग्रेस के घोषणापत्र में पश्चिम बंगाल के सभी जिलों में एआई, कौशल विकास केंद्रों का वादा किया गया है। इससे पहले 20 मार्च को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस का घोषणापत्र जारी किया था, जिसका शीर्षक "10 प्रतिज्ञा" (10 वादे) है। उस घोषणा पत्र में बनर्जी ने 'दुआरे चिकित्सा' योजना शुरू करने की घोषणा की थी, जिसके तहत हर बूथ पर कैंप लगाकर घर-घर जाकर मेडिकल सुविधा देने का वादा किया गया है। इसके अलावा उन्होंने 'लक्ष्मी भंडार' योजना के तहत सामाजिक कल्याण के उपायों को बी जारी रखने का वादा किया है। ममता ने 7-8 नए ज़िले और ब्लॉक, साथ ही नई नगरपालिकाएँ बनाने की योजनाओं पर ज़ोर दिया है। बता दें कि पश्चिम बंगाल में 294 सदस्यों वाली विधानसभा के लिए वोटिंग दो चरणों में – 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होगी, जबकि वोटों की गिनती 4 मई को होनी है।  

ईरान में भारतीयों के लिए अलर्ट: भारत सरकार की चेतावनी—48 घंटे बेहद अहम, हेल्पलाइन नंबर जारी

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की ईरान पर हमले की डेडलाइन खत्म होने का समय जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, दुनिया में इसको लेकर आशंकाएं बढ़ गई हैं। इसी बीच भारत ने ईरान में रहने वाले भारतीय नागरिकों एडवाइजरी जारी की है। एडवायजरी में कहा गया है कि जो भारतीय नागरिक अभी भी ईरान में हैं, उन्हें अगले 48 घंटों तक वहीं रहना चाहिए जहां वे हैं। उन्हें सभी बिजली और सैन्य ठिकानों के दूर रहना चाहिए। बहुमंजिला इमारतों की ऊपरी मंजिलों पर जाने से बचना चाहिए, घर के अंदर ही रहना ही चाहिए और हाइवे पर किसी भी तरह की आवाजाही के लिए दूतावास के साथ सख्ती से तालमेल बिठाना चाहिए। ए़डवायजरी दूतावास से नियमित संपर्क बनाए रखें सरकार की ओर से कहा गया है कि जो लोग दूतावास द्वारा बुक किए गए होटलों में ठहरे हैं, उन्हें वहीं अंदर रहना चाहिए और मौके पर मौजूद दूतावास की टीमों के साथ नियमित संपर्क रखना चाहिए। सभी से अनुरोध है कि वे आधिकारिक अपडेट्स पर बारीकी से नजर रखें। दूतावास ने जारी किए आपातकालीन नंबर मोबाइल नंबर: +989128109115; +989128109102; ईमेल: cons.tehran@mea.gov.in +989128109109; +989932179359

अल फलाह यूनिवर्सिटी पर शिकंजा: ED ने चेयरमैन की करोड़ों की संपत्ति जब्त की, जांच तेज

नई दिल्ली  प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अल फलाह ग्रुप के अध्यक्ष जवाद अहमद सिद्दीकी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उनकी 39.45 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क कर ली है। इस संपत्ति में दिल्ली के जामिया नगर का एक घर, फरीदाबाद में खेती की जमीन और कई बैंक खाते शामिल हैं। मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी यह जांच छात्रों के साथ हुई धोखाधड़ी के मामले में की जा रही है। 61 वर्षीय सिद्दीकी फिलहाल जेल में हैं। उनकी यूनिवर्सिटी पहले भी सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर रही है। इससे पहले ईडी इस मामले में यूनिवर्सिटी की 140 करोड़ रुपये की संपत्ति भी जब्त कर चुकी है। सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच कर रही ईडी ने अल फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी के दिल्ली के जामिया नगर में एक घर, फरीदाबाद में खेती की जमीन और कई बैंक खातों में जमा 39 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति कुर्क की है। ईडी की ओर से पीएमएलए कानून के तहत इन संपत्तियों को जब्त करने के लिए एक अस्थायी आदेश जारी किया गया है। जब्त संपत्तियों में घर, जमीन और रकम शामिल सूत्रों के अनुसार, ईडी की ओर से जब्त की गई संपत्तियों में दिल्ली के जामिया नगर का एक घर, फरीदाबाद के धौज में खेती की जमीन और बैंक खातों में जमा पैसे शामिल हैं। इन संपत्तियों की कुल कीमत 39.45 करोड़ रुपये है। बता दें कि 61 वर्षीय जवाद अहमद सिद्दीकी अभी जेल में हैं। जवाद अहमद सिद्दीकी के खिलाफ यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग के उस मामले में हुई है। यह मामला छात्रों के साथ धोखाधड़ी से जुड़ा है। लाल किला ब्लास्ट से चर्चा में अल फलाह यूनिवर्सिटी फरीदाबाद में स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी जांच एजेंसियों की नजर में तब आई जब वे 10 नवंबर 2025 को दिल्ली के लाल किला क्षेत्र में एक बम धमाका हुआ था। इस धमाके में 15 लोगों की जान गई थी। एजेंसियों की जांच में एक ह्वाइट कॉलर आतंकी मॉड्यूल का पता चला था। इस मामले में सिद्दीकी को पिछले साल ईडी ने गिरफ्तार किया था। एजेंसी ने पहले ही यूनिवर्सिटी की लगभग 140 करोड़ रुपये की जमीन और इमारत को जब्त कर लिया है। क्या आरोप? सिद्दीकी के अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से चलाए जा रहे संस्थानों पर छात्रों से धोखाधड़ी के आरोप थे। एजेंसी का आरोप है कि विश्वविद्यालय ने 2018 से 2025 के बीच 415.10 करोड़ रुपये जुटाए और छात्रों के पैसे का निजी इस्तेमाल किया। 24 मार्च को ईडी ने सिद्दीकी को एक अन्य धनशोधन मामले में गिरफ्तार किया जिसमें जांच से पता चला कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए गलत तरीके से जमीन हड़पी थी। सिद्दीकी ने कुछ लोगों के साथ मिलकर इस जालसाजी को अंजाम दिया।

हिंसा की आग में मणिपुर: बिष्णुपुर धमाके में दो मासूमों की जान गई, कई जिलों में कर्फ्यू लागू

देश   मणिपुर के बिष्णुपुर में बम हमले के बाद हुई हिंसा के चलते मणिपुर की घाटी के चार जिलों में कर्फ्यू लगा दिया है। इस हमले में दो बच्चों की मौत हो गई थी। इससे क्रुद्ध स्थानीय लोगों के हिंसक विरोध-प्रदर्शन में तेल टैंकर जलाने से लेकर अस्थायी पुलिस चौकी तक नष्ट की गई है। मुख्यमंत्री ने इस हमले को ''बर्बर कृत्य'' करार दिया और लोगों को आश्वासन दिया कि अपराध के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान की जाएगी और कानून के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। मणिपुर सरकार ने दो बच्चों की जान लेने वाले बम हमलों की जांच NIA को सौंपने का फैसला किया है। बम हमले में दो बच्चों की मौत पुलिस के अनुसार यह घटना देर रात एक बजे हुई जब संदिग्ध उग्रवादियों ने मोइरांग ट्रोंग्लाओबी क्षेत्र में एक घर पर बम फेंका। इस हमले में 5 वर्षीय लड़के और 6 महीने की दुधमुंही बच्ची की मौत हो गई। दोनों बच्चे और उनकी मां अपने बेडरूम में सो रहे थे जब घर में बम विस्फोट किया गया। स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया पुलिस अधिकारी ने बताया कि स्थानीय लोगों ने सुबह विरोध प्रदर्शन किया और क्षेत्र में एक पेट्रोल पंप के पास दो तेल टैंकर और एक ट्रक को आग लगा दी। उन्होंने मोइरांग पुलिस स्टेशन के सामने टायर जलाए और एक अस्थायी पुलिस चौकी को नष्ट कर दिया। सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है। विस्फोटक उपकरण भी बरामद ट्रोंग्लाओबी के पास एक विस्फोटक उपकरण भी बरामद किया गया। मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद ¨सह ने कहा कि यह मानवता पर सीधा हमला है और मणिपुर में अर्जित शांति को बाधित करने का प्रयास है। ऐसे उग्रवादी कृत्यों को किसी भी परिस्थिति में सहन नहीं किया जाएगा। मणिपुर सरकार हर नागरिक की सुरक्षा के लिए दृढ़ संकल्पित है और यह सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगी कि शांति-व्यवस्था और स्थिरता को कोई खतरा नहीं पहुंचे। वहीं, स्थानीय एनपीपी विधायक शांति सिंह ने ''ट्रोंग्लाओबी में कुकी नार्को-उग्रवादियों पर इस क्रूर हमले का आरोप लगाया है।  

पंचायत चुनावों में उपायुक्तों के लिए 5 प्रतिशत आरक्षण पर कोर्ट ने लगाई रोक

शिमला  हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को बड़ा झटका देते हुए पंचायत चुनावों में उपायुक्तों को 5 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने की दी गई शक्तियों पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने इस प्रावधान को प्रथम दृष्टया असंवैधानिक मानते हुए स्पष्ट किया कि इसके तहत तैयार किसी भी आरक्षण सूची को लागू नहीं किया जाएगा। न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रंजन शर्मा की खंडपीठ ने सभी जिलों के उपायुक्तों को निर्देश दिए हैं कि वे पंचायत चुनावों के लिए आरक्षण सूची 7 अप्रैल सायं 5 बजे तक हर हाल में अंतिम रूप देकर लागू करें। विस्तृत आदेश का इंतजार है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता नंद लाल ने सरकार के इस निर्णय को मनमाना और संवैधानिक प्रावधानों के विरुद्ध बताया। उन्होंने कहा कि 30 मार्च को किए गए संशोधन के तहत उपायुक्तों को 5 प्रतिशत आरक्षण देने की शक्ति दी गई, जो आर्टिकलट 243डी का उल्लंघन है। अदालत के आदेशों के बाद कुल्लू, शिमला, मंडी, कांगड़ा और हमीरपुर जिलों में जारी की गई वे सभी आरक्षण सूचियां, जिनमें यह 5 प्रतिशत आरक्षण शामिल है, अब दोबारा तैयार करनी पड़ सकती हैं। राज्य में 3,600 से अधिक पंचायतों और 73 शहरी निकायों में 31 मई से पहले चुनाव कराए जाने हैं। शहरी निकायों की आरक्षण सूचियां पहले ही जारी हो चुकी हैं, जबकि कई जिलों में पंचायत चुनावों की सूचियां अभी लंबित हैं। पंचायती राज मंत्री अनुरुद्ध सिंह ने कहा कि सरकार अदालत के आदेशों का पूरी तरह पालन करेगी और निर्देशों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे सरकार के लिए शर्मनाक बताया। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर पंचायत चुनावों को असंवैधानिक तरीके से प्रभावित करने का आरोप लगाया। हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं का कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो चुका है, जिसके बाद नए चुनाव आवश्यक हो गए हैं। सरकार ने 30 मार्च 2026 को नियमों में संशोधन कर उपायुक्तों को 5 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का अधिकार दिया था, जिसे अदालत में चुनौती दी गई। इससे पहले मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा था, जहां चुनाव प्रक्रिया पूरी करने की समयसीमा बढ़ाकर 31 मई 2026 कर दी गई थी। अब हाईकोर्ट के 7 अप्रैल तक आरक्षण सूची अंतिम करने के आदेश के बाद चुनाव प्रक्रिया पर सीधा असर पड़ने की संभावना है।

युद्ध की आंच पहुंची पाकिस्तान तक: हालात बिगड़े, आज रात से लॉकडाउन लागू—शहबाज शरीफ का फैसला

कराची  मध्य पूर्व में जारी तनाव और बढ़ते ऊर्जा संकट के बीच पाकिस्तान सरकार ने देशभर में ऊर्जा बचत के लिए बड़े कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में निर्णय लिया गया कि सिंध प्रांत को छोड़कर पूरे देश में बाजार और शॉपिंग मॉल रात 8 बजे तक बंद कर दिए जाएंगे। पाकिस्तान में बढ़ते ऊर्जा संकट और वैश्विक हालात के चलते सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। आने वाले दिनों में इन फैसलों का असर देश की अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन पर साफ दिखाई दे सकता है। नए नियम 7 अप्रैल से लागू कर दिए गए हैं प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा जारी बयान के अनुसार, यह फैसला ऊर्जा खपत को कम करने और ईंधन संकट से निपटने के उद्देश्य से लिया गया है। यह नए नियम 7 अप्रैल से लागू कर दिए गए हैं। सरकार ने राहत देते हुए मेडिकल स्टोर और दवा दुकानों को इन समय-सीमाओं से बाहर रखा है, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों। सिंध को फिलहाल छूट,अन्य राज्यों में सख्ती सरकार के फैसले के तहत पंजाब, खैबर पख्तूनख्वा (KP), बलूचिस्तान, इस्लामाबाद और गिलगित-बाल्टिस्तान में सभी बाजार और मॉल रात 8 बजे तक बंद होंगे। हालांकि, सिंध में बाजारों के समय को लेकर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है और इस पर व्यापारिक संगठनों से चर्चा जारी है। रेस्टोरेंट और शादी समारोहों पर भी असर नए नियमों के तहत रेस्टोरेंट, बेकरी, तंदूर और खाद्य पदार्थों की दुकानें रात 10 बजे तक ही खुली रह सकेंगी। इसके अलावा, मैरिज हॉल, मार्की और अन्य कमर्शियल शादी स्थलों को भी रात 10 बजे तक बंद करना अनिवार्य होगा। सरकार ने निजी घरों में भी रात 10 बजे के बाद शादी समारोह आयोजित करने पर रोक लगा दी है। ईरान संकट और तेल आपूर्ति पर असर सरकार के अनुसार, यह कदम मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के कारण उठाया गया है। 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ गया, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल आपूर्ति बाधित हुई। यह मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 25% हिस्सा संभालता है, और इसकी बाधा से ईंधन की कीमतों में तेज़ उछाल देखा गया है। मुजफ्फराबाद और गिलगित में राहत सरकार ने गिलगित और मुजफ्फराबाद में नागरिकों को राहत देते हुए एक महीने तक इंटरसिटी पब्लिक ट्रांसपोर्ट मुफ्त करने की घोषणा की है। इसका पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाएगी।इस बीच, सिंध के मुख्यमंत्री मुराद अली शाह ने कराची में व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों से बैठक की। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में सभी को जिम्मेदारी निभानी होगी और सरकार ऐसे कदम उठाएगी जिससे आम जनता, खासकर गरीब वर्ग पर कम से कम बोझ पड़े। व्यापारिक संगठनों द्वारा दिए गए सुझावों की समीक्षा के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।