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NHAI ने FASTag के गलत इस्तेमाल पर की कार्रवाई, चालाक यूजर्स को ब्लैकलिस्ट और दोगुना टोल

नई दिल्ली नया गंगा एक्सप्रेस-वे हो या फिर अन्य कोई हाइवे, टोल कलेक्शन के लिए FASTag का यूज होता है. अब भारत सरकार के भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने एक पोस्ट करके कुछ लोगों की चालाकी के बारे में बताया है. साथ ही उनको सलाह दी है कि फास्टैग के साथ गलती ना करें।  NHAI ने X प्लेटफॉर्म (पुराना नाम) पर एक पोस्ट किया है. इस पोस्ट में अथॉरिटी ने बताया है कि फास्टैग को अगर विंड स्क्रीन पर चिकपाया नहीं जाता है तो इसकी वजह से फास्टैग ब्लैकलिस्ट हो सकता है. फास्टैग को लेकर अथॉरिटी ने कहा है कि इसको विंड स्क्रीन पर पेस्ट करना चाहिए. साथ ही वह क्लियर दिखना भी चाहिए।  फास्टैग के लिए लगा रहे ट्रांस्पेरेंट पॉकेट  बहुत से कार चालक ऐसा नहीं कर रहे हैं. वे विंड स्क्रीन पर एक ट्रांस्पेरेंट पॉकेट लगा देते हैं. इसके बाद जब वह एक्सप्रेस-वे या हाईवे पर पहुंचते हैं तो उस पॉकेट के अंदर फास्टैग को रख देते हैं, जबकि फास्टैग को विंडस्क्रीन पर चिपकाना चाहिए।  सफर के बाद निकाल लेते हैं  बहुत से लोग जब एक्सप्रेसवे या हाइवे पर नहीं जाते हैं तो उस फास्टैग को निकालकर रख लेते हैं. आशंका है कि एक फास्टैग का यूज दूसरे नंबर की कार में भी हो सकता है. अथॉरिटी ने बताया है कि ऐसा करना सरासर गलत है. इसकी वजह से फासल्टैग ब्लैक लिस्ट भी हो सकता है।  फास्टैग ब्लैक लिस्ट होने की वजह से वह टोल गेट पर काम नहीं करेगा. ऐसे में आपको पेमेंट कैश में करनी पड़ सकती है, जिसके लिए डबल टोल टैक्स तक की पेमेंट करनी पड़ सकती है।  FASTag क्या है?  FASTag, असल में एक इलेक्ट्रोनिक टोल कलेक्शन सिस्टम है. यह फास्टैग एक वॉलेट अकाउंट से कनेक्ट होता है. जैसे ही कार टोल प्लाजा पर पहुंचती है, सिस्टम विंड स्क्रीन पर लगे फास्टैग को ट्रैक करता है और एक्टिवेट फास्टैग के लिए गेट ओपन कर देता है।  फास्टैग अगर ब्लैक लिस्ट है या फिर उसमें पर्याप्त बैलेंस नहीं है तो टोल गेट ओपन नहीं होंगे. ऐसे में आपको दोगुना टोल तक पे करना पड़ सकता है।   

पाकिस्तान के F-16 लड़ाकू विमानों के लिए अमेरिका का बड़ा कदम, जारी किया विशाल कॉन्ट्रैक्ट

इस्लामाबाद अमेरिकी वायु सेना ने F-16 फाइटर जेट्स के रडार सिस्टम को लॉन्ग-टर्म तकनीकी और इंजीनियरिंग सपोर्ट देने के लिए 488 मिलियन डॉलर के नए कॉन्ट्रैक्ट का ऐलान किया है। खास बात यह है कि अमेरिका की इस बड़ी रक्षा डील के दायरे में पाकिस्तान भी शामिल है। यह अहम कॉन्ट्रैक्ट प्रमुख रक्षा कंपनी नॉर्थरोप ग्रुम्मन सिस्टम्स कॉर्पोरेशन को सौंपा गया है। इस कदम को अमेरिका के सहयोगी देशों की वायु सेना में F-16 की ऑपरेशनल तैयारियों को बनाए रखने के लिए अमेरिका की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता के तौर पर देखा जा रहा है। डील और अपग्रेड से जुड़ी मुख्य बातें:     रडार सिस्टम की बढ़ेगी क्षमता: आधिकारिक नोटिस के मुताबिक, इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत मुख्य रूप से F-16 लड़ाकू विमानों में इस्तेमाल होने वाले 'APG-66' और 'APG-68' रडार सिस्टम को इंजीनियरिंग सपोर्ट दिया जाएगा।     2036 तक चलेगा काम: फाइटर जेट्स के अपग्रेड और सपोर्ट का यह काम अमेरिका के मैरीलैंड स्थित लिंथिअम हाइट्स में किया जाएगा और इसके 31 मार्च, 2036 तक जारी रहने का कार्यक्रम है।फंडिंग और मंजूरी: यूटाह स्थित अमेरिकी वायु सेना के लाइफसाइकिल मैनेजमेंट सेंटर द्वारा यह कॉन्ट्रैक्ट जारी किया गया है। इसके लिए वित्त वर्ष 2026 के फंड से शुरुआती तौर पर 2.64 मिलियन डॉलर की राशि जारी भी कर दी गई है। पाकिस्तान के अलावा किन-किन देशों को मिलेगा फायदा? यह कॉन्ट्रैक्ट अमेरिका के 'फॉरेन मिलिट्री सेल्स' (FMS) प्रोग्राम के तहत सहयोगी देशों के लिए किया गया है। इस डील में पाकिस्तान के अलावा बहरीन, बेल्जियम, चिली, डेनमार्क, मिस्र, ग्रीस, इंडोनेशिया, इराक, इजरायल, जॉर्डन, दक्षिण कोरिया, मोरक्को, नीदरलैंड, नॉर्वे, ओमान, पोलैंड, पुर्तगाल, रोमानिया, थाइलैंड और तुर्किए शामिल हैं। 2040 तक बढ़ जाएगी पाकिस्तानी फाइटर जेट्स की उम्र यह नया समर्थन पाकिस्तान को दिए जा रहे अमेरिकी सहयोग की एक कड़ी है। इससे पहले दिसंबर 2025 में अमेरिका की डिफेंस सिक्योरिटी कोऑपरेशन एजेंसी (DSCA) ने अपनी संसद को पाकिस्तान के F-16 बेड़े को अपग्रेड करने के लिए 686 मिलियन डॉलर के एक अलग पैकेज की जानकारी दी थी। इस 686 मिलियन डॉलर के पैकेज में 'लिंक-16' टैक्टिकल डेटा सिस्टम, क्रिप्टोग्राफिक उपकरण, एवियोनिक्स अपग्रेड और ट्रेनिंग सपोर्ट शामिल है। इस अपग्रेड योजना में 'आइडेंटिफिकेशन फ्रेंड-ऑर-फो' सिस्टम, सटीक नेविगेशन टूल और सुरक्षित संचार उपकरणों में बदलाव भी शामिल किए गए हैं। DSCA के अनुसार, इस पैकेज का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान के F-16 बेड़े का आधुनिकीकरण करना है ताकि विमानों की सर्विस लाइफ 2040 तक बढ़ाई जा सके। साथ ही इसका मकसद भविष्य में आतंकवाद रोधी अभियानों के लिए अमेरिका और अन्य सहयोगी बलों के साथ पाकिस्तान के तालमेल (इंटरऑपरेबिलिटी) को और ज्यादा मजबूत करना है। इस अपग्रेड कार्यक्रम के लिए 'लॉकहीड मार्टिन' को प्रमुख ठेकेदार के रूप में चुना गया था। अमेरिकी अधिकारियों ने साफ किया था कि इस काम के लिए अमेरिकी कर्मियों को पाकिस्तान भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पाकिस्तान ने किया अमेरिकी मदद का स्वागत मामले से जुड़े एक राजनयिक सूत्र के मुताबिक, पाकिस्तान ने अपने F-16 प्रोग्राम के लिए अमेरिका के लगातार मिल रहे सपोर्ट का स्वागत किया है। सूत्रों का कहना है कि इन अपग्रेड्स से विमानों की उम्र बढ़ेगी और सहयोगी प्रणालियों के साथ तकनीकी अनुकूलता बनी रहेगी। सूत्र ने यह भी बताया कि पाकिस्तानी वायु सेना ने हाल के वर्षों में अपने बेड़े में कई नए विकल्प शामिल किए हैं जिससे किसी एक प्लेटफॉर्म पर निर्भरता कम हुई है, लेकिन इसके बावजूद वे अपनी मौजूदा F-16 क्षमताओं को बनाए रखने को काफी अहमियत देते हैं।

सुरक्षा के साए में बंगाल री-पोलिंग, 15 बूथों पर रिकॉर्ड 86.90% मतदान

कोलकाता बंगाल के डायमंड हार्बर व मगराहट पश्चिम विधानसभा क्षेत्रों के 15 बूथों पर शनिवार को कड़ी सुरक्षा में पुनर्मतदान हुआ। डायमंड हार्बर के चार (बूथ नंबर 117, 179, 194 व 243) और मगराहाट पश्चिम के 11 (बूथ नंबर 46, 126, 127, 128, 142, 214, 215, 216, 230, 231 व 232) बूथों पर फिर से वोट पड़े। राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार शाम पांच बजे तक इन 15 बूथों पर कुल 86.90 प्रतिशत मतदान हुआ। मगराहाट पश्चिम में 86.11 प्रतिशत व डायमंड हार्बर में 87.60 प्रतिशत वोट पड़े। चूंकि मतदान जारी था, इसलिए वोट प्रतिशत बढ़ स्वाभाविक है। इन बूथों पर गड़बड़ी की शिकायतें मिलने के बाद चुनाव आयोग ने वहां नए सिरे से मतदान कराने का निर्णय लिया था। सुबह मतदान शुरू होने के साथ ही इन बूथों के सामने लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी। फलता में फिर से कराया जा सकता है मतदान वहीं फलता विधानसभा क्षेत्र में भी फिर से मतदान कराने का आयोग निर्णय ले सकता है। इसे लेकर जल्द उच्च स्तरीय बैठक की जाएगी। सीईओ सूत्रों के अनुसार पुनर्मतदान का निर्णय लिए जाने पर आगामी चार मई को उक्त विस क्षेत्र के वोटों की गिनती स्थगित की जा सकती है। मालूम हो कि इस विधानसभा क्षेत्र में भी बूथों में गड़बड़ी की आयोग को कई शिकायतें मिली हैं। फलता में फिर तनाव, तृणमूल पर भाजपा समर्थकों को धमकाने का आरोप इस बीच शनिवार को फलता के कासिमनगर में फिर तनाव फैल गया। तृणमूल पर भाजपा समर्थकों को मारने-पीटने व धमकाने का आरोप लगा है। इसका प्रतिवाद करते हुए भाजपा समर्थकों ने राष्ट्रीय राजमार्ग अवरुद्ध कर विरोध-प्रदर्शन किया। दूसरी तरफ तृणमूल ने इस आरोप को सिरे से नकारा है। आयोग ने इसे लेकर जिला प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। मालूम हो कि फलता में उत्तर प्रदेश के सख्त मिजाज आइपीएस अधिकारी व बंगाल में चुनाव आयोग के पुलिस पर्यवेक्षक अजयपाल शर्मा व यहां से तृणमूल कांग्रेस प्रत्याशी जहांगीर खान के बीच गत मंगलवार को वाकयुद्ध देखने को मिला था। अजयपाल शर्मा ने जहांगीर को डराने-धमकाने से बाज आने की चेतावनी दी थी, इसपर जहांगीर ने पलटवार करते हुए कहा था कि अगर अजयपाल शर्मा 'सिंघम' हैं तो वे भी 'पुष्पा' हैं और किसी के दबाव में नहीं झुकेंगे।

एनएमडीसी ने 16% की वृद्धि के साथ वित्त वर्ष 27 की मजबूत शुरुआत की

हैदराबाद खनन पावरहाउस एनएमडीसी ने अप्रैल 2026 में लौह अयस्क का 46.4 लाख टन उत्पादन और 36.8 लाख टन बिक्री की है ।  देश की सबसे बड़ी लौह अयस्क खनन कंपनी ने पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में वित्त वर्ष 27 के पहले महीने में उत्पादन में 16% की वृद्धि दर्ज की है । बैलाडीला लौह अयस्क परियोजनाओं में अपने अब तक के सर्वोत्तम खनन प्रदर्शन के आधार पर एनएमडीसी ने अप्रैल 2026 में अप्रैल माह का अबतक का सर्वोच्च उत्पादन किया है ।  हाल के चार वर्षों के लौह अयस्क उत्पादन को ट्रैक करने पर भारत के लिए 3.9% की नियमित सीएजीआर का पता चलता है । इस पृष्ठभूमि में, एनएमडीसी ने इस उद्योग की वृद्धि से बेहतर प्रदर्शन करते हुए 6.8% सीएजीआर प्राप्त किया और इस प्रकार उत्पादन के क्रमिक-वृद्धि से अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है । इस उपलब्धि पर  अमिताभ मुखर्जी, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, एनएमडीसी ने कहा कि, “एनएमडीसी की क्षमताओं और योग्यताओं में विस्तार पूरे जोरों पर है । हमने अपनी रणनीतिक प्रगति को सक्षम बनाने के लिए लॉजिस्टिक्स, बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी और आपूर्ति-श्रृंखला एकीकरण में आवश्यक आधारभूत कार्य किए हैं । अप्रैल में 4.6 मिलियन टन से शुरू होकर एनएमडीसी का इस वित्तीय वर्ष के लिए 60 मिलियन टन से अधिक का लक्ष्य है । टीम तैयार है, संरेखित है और विकास के अगले स्तर तक पहुंचने के लिए आश्वस्त है ।” वित्त वर्ष 26 में 53+ मिलियन टन और एनएमडीसी से सकारात्मक प्रारंभिक अपडेट ने भारत के लौह और इस्पात क्षेत्र को और अधिक आशान्वित किया है ।

अप्रैल में यूपीआई लेनदेन में 25% की बढ़त, 22 अरब के पार हुई संख्या, वैल्यू 29 लाख करोड़ रुपए से अधिक

नई दिल्ली   यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) लेनदेन की संख्या अप्रैल में सालाना आधार पर 25 प्रतिशत बढ़कर 22.35 अरब हो गई है। वहीं, इनकी वैल्यू सालाना आधार पर 21 प्रतिशत बढ़कर 29.03 लाख करोड़ रुपए हो गई है। यह जानकारी नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) की ओर से शुक्रवार को दी गई। दैनिक आधार पर अप्रैल में यूपीआई के औसत लेनदेन की संख्या बढ़कर 74.5 करोड़ हो गई है, जो कि मार्च में 73 करोड़ थी। औसत दैनिक यूपीआई लेनदेन की वैल्यू बढ़कर 96,766 करोड़ रुपए हो गई है, जो कि मार्च में 95,243 करोड़ रुपए थी। आईएमपीएस पर मासिक लेनदेन की संख्या अप्रैल में 36.2 करोड़ रही है, जिसमें 7.01 लाख करोड़ रुपए का लेन-देन हुआ, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में तुलना में 13 प्रतिशत की वृद्धि को दिखाता है। दैनिक औसत लेन-देन की संख्या 1.2 करोड़ रही, जो मजबूत वृद्धि दर्शाता है। मार्च में, यूपीआई ने 2016 में लॉन्च होने के बाद से अब तक का सबसे अधिक मासिक लेनदेन 22.64 अरब दर्ज किया है। यूपीआई अब संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, फ्रांस, मॉरीशस और कतर सहित आठ से अधिक देशों में उपलब्ध है, जिससे भारत डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी बन गया है। यूपीआई की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय पहुंच से प्रेषण में वृद्धि हो रही है, वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिल रहा है और वैश्विक फिनटेक परिदृश्य में भारत की स्थिति मजबूत हो रही है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, भारत के प्रमुख डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म ने पिछले एक दशक में लेनदेन की मात्रा में लगभग 12,000 गुना की असाधारण वृद्धि दर्ज की है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की नियामक निगरानी में एनपीसीआई द्वारा 11 अप्रैल, 2016 को लॉन्च किया गया यूपीआई, भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम की रीढ़ बन गया है। मंत्रालय ने बताया कि वित्त वर्ष 2016-17 में मात्र 2 करोड़ लेनदेन के मामूली आधार से शुरू होकर, इस प्लेटफॉर्म ने वित्त वर्ष 2025-26 में 24,162 करोड़ से अधिक लेनदेन प्रोसेस किए। वैल्यू में भी यूपीआई की वृद्धि उतनी ही मजबूत रही है। लेनदेन का मूल्य परिचालन के पहले वर्ष में 0.07 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 314 लाख करोड़ रुपए हो गया, जो 4,000 गुना से अधिक की वृद्धि दर्शाता है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘काउंटिंग में केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति नियमों के खिलाफ नहीं’

नई दिल्ली केंद्रीय कर्मचारियों को काउंटिंग सुपरवाइजर नियुक्त करने के चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची टीएमसी को अदालत से झटका लगा है. चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ पहुंची ममता बनर्जी की पार्टी से शीर्ष अदालत ने कहा कि हम चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ नहीं जाएंगे और इसपर कोई आदेश जारी नहीं करेंगे. कोर्ट ने साफ कहा कि ईसी को अपना अधिकारी चुनने का पूरा अधिकार है. शीर्ष अदालत ने कहा कि हम उनके काम में कोई दखल नहीं देंगे. बता दें कि टीएसी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल पैरवी कर रहे थे. कोर्ट ने आगे कहा कि केंद्र सरकार के कर्मचारी के साथ एक राज्य सरकार के कर्मचारी की भी तैनाती की जाएगी।  पश्चिम बंगाल में 4 मई को होने वाली मतगणना से ठीक पहले सियासी माहौल और गरमा गया है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट से तृणमूल कांग्रेस (TMC) को राहत नहीं मिली। अदालत ने उस याचिका पर कोई दखल देने से इनकार कर दिया, जिसमें Election Commission of India के फैसले को चुनौती दी गई थी। मामला मतगणना केंद्रों पर केंद्रीय सरकार और पीएसयू कर्मचारियों की तैनाती को लेकर था। टीएमसी चाहती थी कि इस व्यवस्था पर रोक लगे, लेकिन कोर्ट ने साफ कहा कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है। कोर्ट का साफ संदेश, नियमों के खिलाफ नहीं सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि मतगणना में केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति नियमों के दायरे में आती है। बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में किसी नए आदेश की जरूरत नहीं है। यानी चुनाव आयोग का फैसला फिलहाल बरकरार रहेगा। कोर्ट ने आयोग के उस भरोसे को भी रिकॉर्ड में लिया, जिसमें कहा गया था कि जारी सर्कुलर को पूरी तरह लागू किया जाएगा। सिब्बल ने उठाए सवाल इससे पहले टीएमसी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने निर्वाचन आयोग की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि हमें उनसे न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है।  जब कपिल सिब्बल ने हर टेबल पर एक केंद्रीय कर्मचारी की अनिवार्यता पर सवाल उठाए, तो बेंच ने नियमों का हवाला देते हुए स्थिति स्पष्ट की. अदालत ने कहा, “आइए, हम इस प्रावधान को दोबारा पढ़ते हैं. यदि हम यह मान लें कि काउंटिंग सुपरवाइज़र और सहायक केंद्र सरकार के कर्मचारी होंगे, तो इसे गलत नहीं कहा जा सकता, क्योंकि प्रावधान में स्पष्ट है कि इनकी नियुक्ति राज्य या केंद्र, किसी भी पूल से की जा सकती है।  कोर्ट ने सिब्बल की दलीलों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “ऐसा नहीं है जैसा आप बता रहे हैं.” सिब्बल ने अदालत के सामने चार मुख्य मुद्दे उठाए: सूचना का अभाव: सिब्बल ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग बैठकें कर रहा है लेकिन उनके बारे में जानकारी साझा नहीं की जा रही है।  अतिरिक्त पर्यवेक्षक पर सवाल: उन्होंने कहा कि पहले से ही केंद्र सरकार का नामांकित माइक्रो ऑब्जर्वर मौजूद है, तो अब हर टेबल पर एक और केंद्रीय कर्मचारी की क्या आवश्यकता है? नियमों की अनदेखी: सिब्बल ने दलील दी कि सर्कुलर के अनुसार राज्य सरकार का नामांकित व्यक्ति होना चाहिए, लेकिन चुनाव आयोग अपनी मर्जी से नियुक्तियां कर रहा है।  क्या है पूरा विवाद? चुनाव आयोग ने 30 अप्रैल को एक निर्देश जारी किया था जिसके अनुसार मतगणना की हर टेबल पर सुपरवाइजर या असिस्टेंट में से कम से कम एक कर्मचारी केंद्र सरकार या पब्लिक सेक्टर (PSU) का होना अनिवार्य है. टीएमसी का आरोप है कि केंद्र सरकार के कर्मचारी बीजेपी के प्रभाव में काम कर सकते हैं, जबकि कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस आशंका को खारिज करते हुए आयोग के फैसले को वैध बताया था।  सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? केंद्रीय कर्मचारियों को काउंटिंग सुपरवाइजर नियुक्त करने के फैसले के खिलाफ पहुंची टीएमसी को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी आदेश की जरूरत नहीं है. सर्कुलर का पूरी तरह से पालन होगा. इलेक्शन कमीशन को अधिकारी चुनने का हक है. चुनाव आयोग अपने कर्मचारी पर खुद नियंत्रण कर सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ इस मामले पर दखल देने से इनकार कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कर्मचारियों की तैनाती नियमों के खिलाफ नहीं है. चुनाव आयोग का सर्कुलर ही लागू होगा।  जस्टिस जे. बागची ने सुनवाई के दौरान कहा कि केवल एक ही पूल से चयन करना गलत नहीं कहा जा सकता. कपिल सिब्बल ने जवाब देते हुए कहा कि चयन राज्य सरकार और केंद्र सरकार के कर्मचारियों में से यादृच्छिक (रैंडम) तरीके से होना चाहिए. तब जस्टिस बागची ने कहा कि काउंटिंग सुपरवाइजर और काउंटिंग असिस्टेंट में से कम से कम एक केंद्र सरकार का कर्मचारी होना चाहिए. कपिल सिब्बल ने तब कहा कि तो फिर दूसरा राज्य सरकार का होना चाहिए, लेकिन यहां तो राज्य सरकार का कोई प्रतिनिधि नहीं है. सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि यहां एक और गलतफहमी यह है कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार के कर्मचारी अलग‑अलग माने जा रहे हैं, जबकि वे सभी सरकारी कर्मचारी ही हैं।  वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने कहा कि रिटर्निंग ऑफिसर के पास ओवरऑल अधिकार होते हैं और वह राज्य सरकार कैडर से होता है.प्रत्येक उम्मीदवार के पास अपना अलग काउंटिंग एजेंट भी होगा इसलिए इसको लेकर जताई जा रही आशंका पूरी तरह गलत और निराधार है. अदालत ने कहा कि किसी अतिरिक्त आदेश की आवश्यकता नहीं है, सिवाय इसके कि नायडू के बयान को दोहराते हुए 13 अप्रैल 2026 का सर्कुलर पूरी तरह लागू किया जाएगा।  'चुनाव आयोग को कहां से आशंका हो गई?' चुनाव आयोग के PSU कर्मचारियों को काउंटिंग सुपरवाइजर नियुक्त करने के फैसले के खिलाफ टीएमसी की ओर से कपिल सिब्बल ने ममता सरकार का पक्ष रखा. तृणमूल कांग्रेस के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि ऐसी चीजें पहले नहीं हुईं. चुनाव आयोग को कहां से आशंका हो गई? कपिल सिब्बल ने कहा कि सर्कुलर में खुद ही कहा गया है कि राज्य सरकार के नोमिनी होने चाहिए,लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. सिब्बल ने कहा कि इस बात की आशंका है कि आयोग के इस कदम से चुनाव की निष्पक्षता प्रभावित होगी. 'डर है कि हर एक बूथ में दिक्कत होगी….' कपिल सिब्बल ने कहा कि यह सर्कुलर DEO को जारी किया गया है और हमें … Read more

बंगाल में 15 केंद्रों पर री-पोलिंग जारी, सुबह 9 बजे तक 16.23% मतदान

 कोलकाता पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले की डायमंड हार्बर और मगराहाट पश्चिम विधानसभा सीटों के 15 मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान हो रहा है. इन केंद्रों पर सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक वोट डाले जाएंगे. इनमें से 11 बूथ मगराहाट पश्चिम और 4 बूथ डायमंड हार्बर में हैं. निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक री पोलिंग के दौरान सुबह 9 बजे तक 16.23% मतदान दर्ज किया गया है. मगराहाट पश्चिम सीट के चार बूथों पर सुबह 9 बजे तक 16.88% और डायमंड हार्बर सीट के 11 बूथों पर सुबह 9 बजे तक 15.83% मतदान हुआ है।  बीजेपी ने इन मतदान केंद्रों पर ईवीएम के साथ छेड़छाड़ के आरोप लगाए थे, जिसका संज्ञान लेते हुए निर्वाचन आयोग ने इन सभी जगहों पर पुनर्मतदान कराने का फैसला किया है. बीजेपी ने आरोप लगाया था कि फलता इलाके में एक मतदान केंद्र पर ईवीएम में कमल के फूल निशान वाले बटन पर टेप लगाकर उसे छिपाने की कोशिश की गई. इसका फोटो और वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. इस संबंध में मतदाताओं और राजनीतिक दलों की ओर से शिकायतें भी दर्ज कराई गई थीं, जिनमें ईवीएम से छेड़छाड़, बूथ कैप्चरिंग और धांधली के आरोप लगाए गए।  सूत्रों के मुताबिक, फलता विधानसभा क्षेत्र के 30 और बूथों पर भी पुनर्मतदान हो सकता है, जिस पर चुनाव आयोग का फैसला आना बाकी है. इन बूथों पर मतदान 29 अप्रैल को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण में हुआ था, लेकिन चुनाव आयोग ने अब जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 58(2) के तहत इसे रद्द कर दिया है. यह प्रावधान चुनाव आयोग को अधिकार देता है कि अगर किसी मतदान केंद्र पर गंभीर गड़बड़ी- जैसे ईवीएम में खराबी, बूथ कैप्चरिंग, हिंसा या प्रक्रिया में उल्लंघन होता है, तो वह मतदान को निरस्त कर दोबारा मतदान करा सकता है।  बाहिरापुरा कुरकुरिया एफपी स्कूल स्थित मतदान केंद्र के बाहर मतदाताओं की लंबी कतारें देखी गईं. मतदाताओं का कहना है कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि इन तीन बूथों पर दोबारा मतदान क्यों कराया जा रहा है. कुछ लोगों का दावा है कि दूसरे चरण के मतदान के दौरान किसी भी तरह की कोई गड़बड़ी या बाधा नहीं हुई थी. वहीं, कई मतदाता सरकार से नाराज नजर आए. उनका कहना है कि इलाके की सड़कें बेहद खराब हालत में हैं, जिससे लोगों में गुस्सा है. गांवों और आसपास के क्षेत्रों में पानी और नलों की कमी से लोग परेशान हैं. स्थानीय लोगों ने इस समस्या को लेकर चिंता भी जताई।  मतगणना कर्मियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बीच मतगणना से जुड़े कर्मचारियों को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। तृणमूल कांग्रेस की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है। टीएमसी ने चुनाव आयोग के उस निर्देश को चुनौती दी है, जिसमें मतगणना के लिए केवल केंद्र सरकार और सार्वजनिक उपक्रमों के कर्मचारियों को तैनात करने की बात कही गई है। इस मामले को लेकर राजनीतिक माहौल भी गरमाया हुआ है। अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी है, जो मतगणना की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। यह पूरा मामला वोटों की गिनती करने वाले कर्मचारियों की नियुक्ति से जुड़ा हुआ है। चुनाव आयोग ने निर्देश दिया था कि बंगाल में वोटों की गिनती के लिए केंद्रीय कर्मचारियों को मतगणना पर्यवेक्षक (सुपरवाइजर) बनाया जाएगा। टीएमसी इस फैसले का विरोध कर रही है। उनका मानना है कि इस प्रक्रिया में राज्य सरकार के कर्मचारियों को भी बराबर शामिल किया जाना चाहिए। इसी आदेश को चुनौती देने के लिए टीएमसी ने अर्जी दी है, जिस पर जस्टिस नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच सुनवाई कर रही है। सुप्रीम कोर्ट के जजों ने नियमों को लेकर क्या स्पष्ट किया?       मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने नियमों को लेकर स्थिति साफ की।     उन्होंने कहा कि नियमों में यह विकल्प पूरी तरह से खुला है कि काउंटिंग सुपरवाइजर और काउंटिंग असिस्टेंट केंद्र सरकार के भी हो सकते हैं और राज्य सरकार के भी।     कोर्ट ने कहा कि जब यह विकल्प खुला हुआ है, तो हम यह बिल्कुल नहीं कह सकते कि चुनाव आयोग का यह नोटिफिकेशन नियमों के खिलाफ है।     जस्टिस बागची ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग के पास यह अधिकार है कि वह कह सकता है कि दोनों अधिकारी केंद्र सरकार के ही होंगे।  कपिल सिब्बल ने कोर्ट में क्या दलील दी?      टीएमसी की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग के सर्कुलर (परिपत्र) पर सवाल उठाए।     सिब्बल ने कोर्ट में दलील दी कि चुनाव आयोग के सर्कुलर में खुद ऐसा स्पष्ट तौर पर नहीं कहा गया है कि केवल केंद्रीय कर्मचारी ही होंगे।     टीएमसी का तर्क है कि चुनाव आयोग का यह कदम जानबूझकर राज्य सरकार के कर्मचारियों को गिनती से दूर रखने के लिए उठाया गया है।       सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी की दलीलों पर क्या जवाब दिया? वकील सिब्बल की दलीलों पर जस्टिस बागची ने तुरंत अपना पक्ष रखा। उन्होंने ने कहा कि अगर चुनाव आयोग ने ऐसा कहा भी होता, तब भी हम उन्हें इस बात के लिए गलत नहीं ठहरा सकते थे। इसका मुख्य कारण यह है कि नियम साफ तौर पर कहते हैं कि मतगणना के लिए केंद्र सरकार या राज्य सरकार के अधिकारियों को नियुक्त किया जा सकता है।    फलता में EVM के साथ छेड़छाड़ के आरोप पश्चिम बंगाल में 29 अप्रैल को हुए दूसरे चरण के मतदान के दौरान काफी हंगामा और राजनीतिक विवाद देखने को मिला. बीजेपी ने आरोप लगाया कि ईवीएम में उनके उम्मीदवारों से जुड़े बटन को जानबूझकर टेप से ढक दिया गया था ताकि मतदाता उनके नाम न देख सकें. बता दें कि फलता से अभिषेक बनर्जी के करीबी जहांगिर खान चुनाव मैदान में हैं. बीजेपी नेताओं ने ऐसे वीडियो भी साझा किए, जिनमें ईवीएम पैनल पर बीजेपी और सीपीएम उम्मीदवारों के नाम के पास टेप लगे दिखाए गए।  इस पूरे विवाद के बीच पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने कहा कि … Read more

BJP की नई टीम पर फोकस, 33% महिला भागीदारी के साथ ड्रीम पूरा करने की तैयारी

  नई दिल्ली पश्चिम बंगाल और असम सहित पांच राज्यों के चुनाव नतीजे के बाद बीजेपी में कई अहम फैसले होंगे. बीजेपी अध्यक्ष की कमान संभाल रहे नितिन नवीन को अपनी टीम का गठन करना हो तो उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार तक कैबिनेट विस्तार पेंडिग है. बीजेपी संगठन और सरकार के हिसाब से मई का महीना कई बड़े बदलाव लेकर आएगा।  माना जा रहा है कि 4 मई को बाद बीजेपी नवीन टीम के साथ यूपी से बिहार तक कैबिनेट गठन को अमलीजामा पहनाने का काम करेगी. लंबे समय से लटके पड़े कई फ़ैसले मई में लागू होने की संभावना है. इनमें सबसे महत्वपूर्ण उत्तर प्रदेश में योगी सरकार में फेरबदल शामिल है।  उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, जिसे पहले बीजेपी कैबिनेट विस्तार करके सियासी समीकरण को साधने की कवायद करना चाहती है. बिहार में सीएम और डिप्टीसीएम बनाए जाने के बाद अब कैबिनेट विस्तार होना है, जिसे अब बीजेपी अमलीजामा पहनाना चाहती है? बीजेपी शीर्ष नेतृत्व ने सारी तैयारी कर ली है, जिसे चार मई के बाद किसी भी दिन अमल में लाया जा सकता है?    नवीन टीम में युवा और महिलाओं को तवज्जे?  जेपी नड्डा की जगह नितिन नवीन बीजेपी के अध्यक्ष 2025 के आखिर में बन गए हैं, लेकिन पांच महीने के बाद भी अपनी टीम का गठन नहीं कर सके हैं. बीजेपी शीर्ष नेतृत्व ने चार मई के बाद नवीन टीम के गठन का प्लान बनाया है. इस तरह संगठन में राष्ट्रीय स्तर पर बदलाव करने का है.  बीजेपीके राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में जल्द ही एक नई टीम बनने की संभावना है।  माना जा रहा है कि नितिन नवीन की टीम में अनुभवी और युवा नेताओं का मिश्रण होगा ताकि एक संतुलन टीम बन सके. युवाओं के साथ महिलाओं को भी शामिल करने की रणनीति है. बीजेपी की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी में 33 फीसदी महिलाओं को शामिल करने की योजना है।  यूपी में योगी कैबिनेट का विस्तार का प्लान उत्तर प्रदेश में बीजेपी ने भूपेंद्र चौधरी की जगह पर पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष तो बना दिया है, लेकिन अभी तक उनकी टीम नहीं बन सकी है. सूत्रों के अनुसार यूपी में ख़ाली पड़ें पदों को भरने के अलावा कुछ फेरबदल भी हो सकता है. इसमें कुछ मौजूदा मंत्रियों की ज़िम्मेदारी में बदलाव की भी संभावना है.पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र चौधरी की सरकार में वापसी तय मानी जा रही है।  2027 के चुनावों को ध्यान में रख कर क्षेत्रीय जातीय समीकरणों को भी साधा जाएगा. बीजेपी नेताओं के अनुसार योगी कैबिनेट में फेरबदल के साथ ही प्रदेश बीजेपी में भी नई टीम का गठन होने की संभावना है. प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की नई टीम और योगी कैबिनेट दोनों का निर्णय करते समय आगामी 2027 विधानसभा चुनाव का ध्यान रखा जाएगा।  बिहार में सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल का गठन यूपी कैबिनेट विस्तार के साथ बिहार में सम्राट चौधरी के अगुवाई में बनी एनडीए सरकार के मंत्रिमंडल का गठन होना है. बीजेपी जेडीयू के फार्मूले के अनुसार दोनों के पास सोलह-सोलह मंत्री पद रहने की संभावना है, वर्तमान में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पास जो विभाग हैं, वो सभी बीजेपी कोटे से बनने वाले मंत्रियों को दिए जा सकते हैं. ऐसे ही जेडीयू के दोनों उपमुख्यमंत्रियों के पास के विभाग जेडीयू कोटे से बनने मंत्रियों को दिए जाएंगे।  उम्मीद है कि मई का महीना बीजेपी में संगठन और सरकार, दोनों ही स्तरों पर बड़े बदलाव लेकर आएगा. इन बदलावों की मुख्य वजह आगामी चुनाव और राजनीतिक संतुलन बनाए रखना होगा। 

2032 तक डिजिटल जर्नलिस्ट की मांग में 13% का इजाफा, इंवेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग में सबसे बड़ी वृद्धि: पत्रकारों के लिए अच्छी खबर

 नई दिल्ली पत्रकार‍िता में जिस तरह एआई ने दख‍ल दिया है, हर तरफ से नकारात्मक खबरें ही सुनने को मिलती हैं. इस बीच जर्नलिज्म के छात्रों के लिए एक बड़ी और सकारात्मक खबर आई है. ग्लोबल रिपोर्ट्स और एम्प्लॉयमेंट प्रोजेक्शन के आंकड़ों ने साफ किया है कि साल 2032 तक डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स और मल्टीमीडिया जर्नलिस्ट्स की मांग में 13% की जबरदस्त तेजी आने वाली है. बता दें कि ये विकास दर अन्य सभी व्यवसायों की औसत वृद्धि दर से कहीं अधिक है।  बढ़ी'AI लिटरेट' पत्रकारों की तलाश मार्केट एनालिसिस से ये भी साफ हुआ है कि अब मीड‍िया कंपनियों को सिर्फ पारंपरिक रिपोर्टर नहीं, बल्कि ऐसे पत्रकार चाहिए जो AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और डेटा के साथ काम करने में सक्षम हों. डेटा जर्नलिज्म और सोशल मीडिया स्पेशलिस्ट की मांग जिस तेजी से बढ़ रही है, उसके पीछे मुख्य कारण डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर ऑडियंस का बढ़ता जुड़ाव और रियल-टाइम एंगेजमेंट की जरूरत है।  इन क्षेत्रों में मिल रहे हैं सबसे ज्यादा मौके: डिजिटल कंटेंट स्पेशलिस्ट: कंपनियां ब्रांड लॉयल्टी और सोशल मीडिया ऑप्टिमाइजेशन के लिए स्टोरीटेलिंग के माहिर लोगों को ढूंढ रही हैं।  मल्टीमीडिया जर्नलिस्ट: पॉडकास्ट, वीडियो और मोबाइल-फर्स्ट न्यूज के दौर में उन पत्रकारों की मांग बढ़ी है जो मल्टीपल चैनल्स पर कहानी कह सकें।  मीडिया एनालिस्ट: बिग डेटा और AI टूल्स के जरिए ऑडियंस के व्यवहार को समझने वाले प्रोफेशनल्स अब संपादकीय फैसलों में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।  टेक्निकल राइटर्स: हेल्थकेयर और फाइनेंस जैसे जटिल क्षेत्रों में सरल भाषा में जानकारी देने वाले पत्रकारों की भारी जरूरत है।  सैलरी में भी उछाल का रुझान हायरिंग ट्रेंड्स बताते हैं कि खोजी पत्रकारिता (इनवेस्ट‍िगेट‍िव रिपोर्ट‍िंग) और ब्रांडेड कंटेंट जैसे खास क्षेत्रों में सालाना सैलरी में 8% से ज्यादा की बढ़ोतरी देखी जा रही है. यह साफ संकेत है कि जो जर्नलिस्ट अपनी स्किल्स को अपग्रेड करेंगे, उनके लिए करियर और कमाई, दोनों के रास्ते खुले हैं। 

बंगाल में BJP की सत्ता से होगा भूचाल, बांग्लादेशी MP ने दी शरणार्थियों को लेकर चेतावनी

ढाका  पश्चिम बंगाल में आगामी 4 मई को विधानसभा चुनाव के नतीजे आने वाले हैं। इससे पहले बंगाल से लेकर बांग्लादेश तक खलबली मची हुई है। हाल ही में एक बांग्लादेशी सांसद ने नतीजों को लेकर चिंता जताई है और कहा है कि अगर 4 मई को भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आती है तो यह बांग्लादेश के लिए बुरी स्थिति होगी क्योंकि बीजेपी सैकड़ों लोगों को सीमा पार धकेल देगी। MP ने कहा कि इससे बांग्लादेश में शरणार्थी संकट खड़ा हो सकता है। नेशनल सिटीजन पार्टी के संसद सचिव अख्तर हुसैन ने देश की संसद में यह बयान दिया है। उन्होंने कहा कि बंगाल में बीजेपी की जीत के बाद से ही अवैध प्रवासियों को बांग्लादेश की तरफ भेज दिया जाएगा, जो देश के लिए चिंता की बात है। हुसैन ने कहा, “पश्चिम बंगाल के एग्जिट पोल में BJP को जीतते हुए दिखाया जाता है और अगर BJP वहां सरकार बनाती है, तो वे सभी बांग्लादेशियों को इस तरफ धकेल देंगे। इससे हमारे लिए एक बड़ा शरणार्थी संकट खड़ा हो जाएगा। हम इस बात को लेकर चिंतित हैं।” मुसलमानों को लेकर जताई चिंता सांसद ने आगे कहा, "BJP प्रवासियों के एक सैलाब को बांग्लादेश पहुंचा देगी। इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि मुसलमानों को हमारे पड़ोसी देश से वापस नहीं भेजा जाएगा। हमें एकजुट रहना होगा।" बता दें कि बंगाल चुनाव में अवैध प्रवासियों का मुद्दा अहम रहा था और भाजपा ने वादा किया है कि वह घुसपैठियों को चुन-चुन कर देश से बाहर कर देगी। निशिकांत दुबे ने शेयर किया वीडियो बांग्लादेशी सांसद के वीडियो को भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने शेयर किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट पर उन्होंने यह वीडियो शेयर पर तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधा। निशिकांत दुबे ने लिखा, "बांग्लादेश के सांसद अख़्तर हुसैन ने आज बांग्लादेश के संसद में कहा कि भाजपा की पश्चिम बंगाल की जीत घुसपैठ को रोकेगी और बांग्लादेशी मुसलमानों को भगाएगी, यह खतरनाक है। तृणमूल कांग्रेस के मददगार धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं।” एग्जिट पोल में भाजपा की दिख रही जीत इस बीच बंगाल चुनाव के नतीजों से पहले एग्जिट पोल के आंकड़े सामने आए हैं जिनमें भाजपा को जीत मिलती दिख रही है। 'पोल डायरी' के आंकड़ों के मुताबिक पश्चिम बंगाल में भाजपा 142 से 171 सीटों के साथ पहली बार सत्ता में आ सकती है। इस सर्वे के आंकड़ों की मानें तो, टीएमसी को 99 से 127 से ही संतोष करना पड़ सकता है। वहीं 'मैट्रिज' एग्जिट पोल में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा 146 से 161 सीटों के साथ सरकार बना सकती है और टीएमसी को 125 से 140 सीटें मिल सकती है और वह सत्ता से बाहर हो सकती है। हालांकि कुछ पोल में ममता बनर्जी की टीएमसी की जीत का भी अनुमान है। 'पी-मार्क' के सर्वेक्षण में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा को 150 से 175 सीटें मिल सकती हैं तो टीएमसी को 118-138 सीटें मिलने का अनुमान है। 'पीपुल्स प्लस' के सर्वे के मुताबिक तृणमूल कांग्रेस 177 से 187 सीटें हासिल करके अपनी सत्ता बरकार रख सकती है। वहीं भाजपा को 95 से 110 सीटें मिलने का अनुमान है। कांग्रेस को एक से तीन सीट मिलने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा 'जनमत पोल्स' के एग्जिट पोल के मुताबिक तृणमूल कांग्रेस को 195 से 205 सीटें मिल सकती हैं तो वहीं भाजपा को 80 से 90 सीटों से ही संतोष करना पड़ सकता है। पश्चिम बंगाल में आगामी 4 मई को विधानसभा चुनाव के नतीजे आने वाले हैं। इससे पहले बंगाल से लेकर बांग्लादेश तक खलबली मची हुई है। हाल ही में एक बांग्लादेशी सांसद ने नतीजों को लेकर चिंता जताई है और कहा है कि अगर 4 मई को भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आती है तो यह बांग्लादेश के लिए बुरी स्थिति होगी क्योंकि बीजेपी सैकड़ों लोगों को सीमा पार धकेल देगी। MP ने कहा कि इससे बांग्लादेश में शरणार्थी संकट खड़ा हो सकता है। नेशनल सिटीजन पार्टी के संसद सचिव अख्तर हुसैन ने देश की संसद में यह बयान दिया है। उन्होंने कहा कि बंगाल में बीजेपी की जीत के बाद से ही अवैध प्रवासियों को बांग्लादेश की तरफ भेज दिया जाएगा, जो देश के लिए चिंता की बात है। हुसैन ने कहा, “पश्चिम बंगाल के एग्जिट पोल में BJP को जीतते हुए दिखाया जाता है और अगर BJP वहां सरकार बनाती है, तो वे सभी बांग्लादेशियों को इस तरफ धकेल देंगे। इससे हमारे लिए एक बड़ा शरणार्थी संकट खड़ा हो जाएगा। हम इस बात को लेकर चिंतित हैं।” मुसलमानों को लेकर जताई चिंता सांसद ने आगे कहा, "BJP प्रवासियों के एक सैलाब को बांग्लादेश पहुंचा देगी। इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि मुसलमानों को हमारे पड़ोसी देश से वापस नहीं भेजा जाएगा। हमें एकजुट रहना होगा।" बता दें कि बंगाल चुनाव में अवैध प्रवासियों का मुद्दा अहम रहा था और भाजपा ने वादा किया है कि वह घुसपैठियों को चुन-चुन कर देश से बाहर कर देगी। निशिकांत दुबे ने शेयर किया वीडियो बांग्लादेशी सांसद के वीडियो को भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने शेयर किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट पर उन्होंने यह वीडियो शेयर पर तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधा। निशिकांत दुबे ने लिखा, "बांग्लादेश के सांसद अख़्तर हुसैन ने आज बांग्लादेश के संसद में कहा कि भाजपा की पश्चिम बंगाल की जीत घुसपैठ को रोकेगी और बांग्लादेशी मुसलमानों को भगाएगी, यह खतरनाक है। तृणमूल कांग्रेस के मददगार धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं।” एग्जिट पोल में भाजपा की दिख रही जीत इस बीच बंगाल चुनाव के नतीजों से पहले एग्जिट पोल के आंकड़े सामने आए हैं जिनमें भाजपा को जीत मिलती दिख रही है। 'पोल डायरी' के आंकड़ों के मुताबिक पश्चिम बंगाल में भाजपा 142 से 171 सीटों के साथ पहली बार सत्ता में आ सकती है। इस सर्वे के आंकड़ों की मानें तो, टीएमसी को 99 से 127 से ही संतोष करना पड़ सकता है। वहीं 'मैट्रिज' एग्जिट पोल में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा 146 से 161 सीटों के साथ सरकार बना सकती है और टीएमसी को 125 से 140 सीटें मिल सकती है और वह सत्ता से … Read more