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तनाव के बीच बड़ी खबर: होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरेंगे भारत के दो LPG टैंकर

नई दिल्ली कुकिंग गैस ले जा रहे दो भारतीय जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरते हुए अगले कुछ दिनों में भारत पहुंचेगे। जिससे उम्मीद बंधी है कि भारत में एलपीजी संकट कम होगा। शिप-ट्रैकिंग डेटा से पता चला है कि जहाज, जग वसंत और पाइन गैस, सुरक्षित रास्ते की मंजूरी मिलने के बाद, रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे हैं। जहाज लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) ले जा रहे हैं, जिसका इस्तेमाल भारत में खाना पकाने के लिए बड़े पैमाने पर होता है। दोनों जहाजों ने सोमवार सुबह अपनी यात्रा शुरू की, यूएई तट से रवाना हुए और केशम और लारक द्वीपों के पास ईरान के तट के पास पहुंचे। जहाजों ने अपने ट्रैकिंग सिस्टम के जरिए भारतीय मालिकाना हक का संकेत दिया, जो कई जहाजों द्वारा इस सेंसिटिव रास्ते पर चलने के लिए उठाया गया एक एहतियाती कदम था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर जहाजों की यात्रा बिना किसी रुकावट के जारी रहती है, तो उनके सोमवार शाम तक ओमान की खाड़ी पहुंचने की उम्मीद है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट से पूरा रास्ता तय करने में लगभग 14 घंटे लगते हैं। यह सब कुछ ऐसे समय में हुआ है जब स्ट्रेट, जो तेल और गैस शिपमेंट के लिए एक अहम ग्लोबल रास्ता है, फरवरी के आखिर में इस इलाके में यूएस और इजरायली हमलों के बाद बढ़ते तनाव से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। तब से, ईरान ने पानी के रास्ते से आने-जाने पर काफी हद तक रोक लगा दी है, और बातचीत के बाद सिर्फ भारत समेत कुछ देशों से जुड़े चुनिंदा जहाजों को ही गुजरने की इजाजत दी है। शिपिंग पैटर्न से पता चलता है कि ईरान जहाजों को अपने समुद्र तट के किनारे से गुजरने का निर्देश देकर ट्रैफिक को कंट्रोल कर रहा है। इसके उलट, ओमान के पास के आम रास्ते में जोखिम देखा गया है; इस महीने की शुरुआत में एक जहाज पर हमला होने की खबर है। 'जग वसंत' और 'पाइन गैस' दोनों ने फरवरी के आखिर में, लड़ाई बढ़ने से ठीक पहले, फारस की खाड़ी में एंट्री की थी। जग वसंत ने कुवैत से एलपीजी लोड की, जबकि पाइन गैस ने यूएई के रुवाइस से अपना माल उठाया। तनाव की वजह से इस इलाके में फंसे हुए थे। इस महीने की शुरुआत में, भारतीय झंडे वाले दो और एलपीजी कैरियर ने भी इसी तरह की यात्राएं सफलतापूर्वक पूरी की थीं।

मौसम का बड़ा अपडेट: 3 दिन तक तूफानी बारिश, IMD ने जारी की चेतावनी

नई दिल्ली  IMD ने देश के विभिन्न राज्यों में मौसम के बदलते मिजाज को लेकर अलर्ट जारी किया है। 24 मार्च से 26 मार्च के बीच उत्तर और पूर्वी भारत के कई इलाकों में तेज हवाओं के साथ बारिश और गर्जना की संभावना जताई गई है। खासतौर पर Western Disturbance के सक्रिय होने से राजस्थान और हिमालयी क्षेत्रों में मौसम में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। राजस्थान में पश्चिमी विक्षोभ का तांडव राजस्थान के पश्चिमी हिस्सों, जिनमें जैसलमेर, जोधपुर और बीकानेर शामिल हैं, वहां पहले ही अच्छी वर्षा दर्ज की जा चुकी है। आज यानी सोमवार को श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, सीकर, चुरू और नागौर जैसे जिलों में बादलों की आवाजाही के साथ बारिश के आसार हैं। विभाग का अनुमान है कि 25 और 26 मार्च को एक और हल्के विक्षोभ के कारण प्रदेश के कुछ हिस्सों में बूंदाबांदी का दौर जारी रह सकता है। पूर्वी भारत में आंधी-तूफान का संकट बिहार, झारखंड और ओडिशा में 24 से 28 मार्च के दौरान मौसम खराब रह सकता है। इस दौरान में 30 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और बिजली गिरने की आशंका है। पश्चिम बंगाल के गांगेय क्षेत्रों में भी 27 और 28 मार्च को भारी बारिश के साथ तेज अंधड़ चलने का अनुमान है। बिहार के कई जिलों, जैसे गया, पटना, बक्सर, रोहतास और चंपारण में 24 मार्च से विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। पटना में आज न्यूनतम तापमान 20°C और अधिकतम 29°C के आसपास रहने की उम्मीद है। दिल्ली और उत्तर प्रदेश का हाल दिल्ली में आज बारिश की संभावना तो नहीं है, लेकिन दिनभर तेज हवाएं चल सकती हैं। फिलहाल तापमान 18°C से 28°C के बीच रहेगा, जिससे प्रदूषण में कमी आने की उम्मीद है। हालांकि, 25 मार्च के बाद गर्मी बढ़ेगी और पारा 35°C को पार कर सकता है। यूपी में अगले तीन दिनों तक मौसम शुष्क रहेगा, लेकिन 27 मार्च से लखनऊ, कानपुर, आगरा और मेरठ सहित कई जिलों में 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी और बारिश का दौर शुरू हो सकता है। लखनऊ में आज अधिकतम तापमान 35°C तक जाने का अनुमान है।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत: इस साउथ अमेरिकी देश से LPG सप्लाई बढ़ी, आयात हुआ डबल

नई दिल्ली ईरान में छिड़ी जंग का सीधा असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाली सप्लाई पर पड़ा है तो वहीं उत्पादन भी प्रभावित है। इस बीच भारत के लिए साउथ अमेरिका के देश अर्जेंटीना से महत्वपूर्ण राहत आई है। अर्जेंटीना से बीते तीन महीनों में आयात दोगुना हो गया है और यह भारत के लिए बड़ी राहत है। पूरे मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों का कहना है कि अर्जेंटीना इस साल अब तक 50 हजार टन एलपीजी की खरीद की जा चुकी है, जो बीते साल 22 हजार टन ही थी। इस तरह अब तक दोगुने से ज्यादा का आयात भारत कर चुका है। ऐसे समय में जब ईरान से लेकर कतर तक में गैस फील्ड्स पर हमले हो रहे हैं, तब अर्जेंटीना से आयात का बढ़ना बड़ी राहत है। अर्जेंटीना के पोर्ट ऑफ बाहिया ब्लांका से इस जंग की शुरुआत से ठीक पहले भारत ने 39 हजार टन गैस मंगाई थी। इसके बाद 5 मार्च को फिर से 11 हजार नई खेप मंगाई गई थी। अर्जेंटीना का जनवरी महीने में गैस उत्पादन 2,59,000 टन था। उसने तेजी से अपने उत्पादन में भी इजाफा करने के प्रयास किए हैं। इससे स्पष्ट है कि मिडल ईस्ट के देशों से इतर गैस की खरीद के लिए प्रयास कर रहे भारत को इससे बड़ी राहत मिल सकती है। कतर, सऊदी अरब जैसे देशों पर ईरान के हमले हो रहे हैं। ऐसी स्थिति में अर्जेंटीना एक अच्छा विकल्प हो सकता है। भारत पहले ही नॉर्वे और अमेरिका जैसे देशों से गैस की खरीद में बढ़ोतरी कर चुका है। इसके अलावा भारत ने अपनी खरीद को डाइवर्सिफाई करने के जो प्रयास किए हैं, उसी के तहत अर्जेंटीना भी जुड़ा है। भारत 2024 से पहले अर्जेंटीना से तेल और गैस की कोई खरीद नहीं करता था। अब यह देश जुड़ा है और भारत तेजी से उससे खरीद बढ़ाने का इच्छुक है। यही नहीं मांग को देखते हुए अर्जेंटीना ने भी अपनी प्रॉसेसिंग यूनिट के विस्तार का फैसला लिया है। इस तरह भारत ने एक नया पार्टनर एनर्जी के मामले में तलाश लिया है। बता दें कि भारत पहले ही अर्जेंटीना से एडिबल ऑयल खरीदता रहा है। इसमें भी बड़ा हिस्सा सोयाबीन तेल का रहा है। इसके अलावा लेदर, सूरजमुखी का तेल, दाल और कुछ केमिकल्स आदि की खरीद करता रहा है। भारत की कंपनी ONGC विदेश ने किया है करार अर्जेंटीना से तेल और गैस की खरीद के लिए भारत की कंपनी ONGC विदेश लिमिटेड ने समझौता भी किया है। गौरतलब है कि लंबे समय से यह बात होती ही है कि भारत को अपनी तेल और गैस की खरीद को डाइवर्सिफाई करने की जरूरत है। ऐसे में देखना होगा कि आने वाले दिनों में ईरान और खाड़ी देशों से इतर किन मुल्कों से भारत अपनी खरीद में इजाफा करता है। फिलहाल गैस का संकट देश में बड़ा है और उससे निपटने की जरूरत है।  

डेडलाइन आज पूरी: क्या ट्रंप के अल्टीमेटम के बाद ईरान पर एक्शन लेगा अमेरिका?

ईरान ईरान-इजरायल युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के मेसेज से पूरी दुनिया सकते में है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को युद्ध रोकने और होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोलने के लिए 48 घंटे का वक्त दिया था। और इसकी समय सीमा आज खत्म हो रही है। ये डेडलाइन खत्म होने से पहले ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया ट्रुथ सोशल पर एक लाइन लिखा है जिससे इस बात का अंदेशा बढ़ गया है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ कड़े कदम उठा सकता है। ट्रंप के सोशल मीडिया 'ट्रुथ' पर लिखा है PEACE THROUGH STRENGTH, TO PUT IT MILDLY!!! इन शब्दों के मायने हैं कि ‘अगर आसान शब्दों में कहें तो शक्ति से शांति आती है।’ट्रंप ने ये फ्रेज रोनाल्ड रीगन के निरोध सिद्धांत (Doctrine of deterrence) से लिया है। रीगन का मानना था कि अगर आपके पास सैन्य और आर्थिक शक्ति पर्याप्त है तो दुश्मनों को संघर्ष करने से रोका जा सकता है। कोल्ड वॉर के दौरान इसे ही अहम रणनीति माना गया था। ईरान ने भी दे डाली जवाबी हमले की धमकी डोनाल्ड ट्रंप के अल्टिमेटम के जवाब में ईरान ने कहा है कि अगर अमेरिका अपने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बिजली संयंत्रों पर हमले की धमकी पर अमल करता है, तो तेल और अन्य निर्यात के लिए महत्वपूर्ण जलमार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को तत्काल ''पूरी तरह से बंद'' कर दिया जाएगा। ईरान ने इजराइल के एक गुप्त परमाणु अनुसंधान स्थल पर मिसाइल हमला किया और इस हमले में आस पास के स्थानों पर रहने वाले लोग बड़ी संख्या में घायल हुए, जिसके बाद इजराइल के नेताओं ने वहां जा कर लोगों से मुलाकात की और उनका हाल चाल जाना। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि हमले में किसी की जान नहीं गई और यह एक "चमत्कार" है। नेतन्याहू ने दावा किया कि इजराइल और अमेरिका अपने युद्ध लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इन लक्ष्यों में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल कार्यक्रम और सशस्त्र समर्थन को कमजोर करना तथा ईरान की जनता को धार्मिक शासन व्यवस्था को उखाड़ फेंकने में सक्षम बनाना शामिल है। ईरान में 2000 से ज्यादा की मौत इजराइल की मंशा के विपरीत ईरान में न तो किसी विद्रोह का कोई संकेत मिला है और न ही उस लड़ाई के अंत का जिसने वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है, तेल की कीमतों में भारी उछाल ला दिया है और दुनिया के कुछ सबसे व्यस्त हवाई मार्गों को खतरे में डाल दिया है। अमेरिका और इजराइल द्वारा 28 फरवरी को शुरू किए गए इस युद्ध में 2,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। इस बीच, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात ने सोमवार तड़के कहा कि उनकी हवाई रक्षा प्रणाली मिसाइल और ड्रोन हमलों से निपट रही है, वहीं बहरीन में हवाई हमले के संकेत देने वाले सायरन बज रहे हैं। ईरान ने फारस की खाड़ी को शेष विश्व से जोड़ने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है और कहा है कि शत्रु देशों को छोड़कर अन्य देशों के जहाजों को वहां से गुजरने की अनुमति है, लेकिन जहाजों पर हमलों ने लगभग सभी टैंकर यातायात को रोक दिया है। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान जलडमरूमध्य नहीं खोलता है तो अमेरिका उसके ''ऊर्जा संयंत्रों को नष्ट कर देगा, शुरुआत सबसे बड़े संयंत्र से होगी।'' अमेरिका का तर्क है कि ईरान का रिवोल्यूशनरी गार्ड देश के अधिकांश बुनियादी ढांचे को नियंत्रित करता है और इसका उपयोग युद्ध अभियानों को शक्ति प्रदान करने के लिए करता है। वहीं ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर कलीबाफ ने 'एक्स' पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि ईरान के बिजली संयंत्रों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जाता है, तो पूरे क्षेत्र के अहम बुनियादी ढांचे को वैध लक्ष्य माना जाएगा और उन्हें नष्ट कर दिया जाएगा, जिसमें खाड़ी देशों में पीने के पानी के लिए महत्वपूर्ण ऊर्जा और जल शोधन प्रतिष्ठान शामिल हैं।  

Kolkata Metro प्रोजेक्ट में देरी पर Supreme Court of India नाराज, बंगाल सरकार से मांगा जवाब

नई दिल्ली कोलकाता मेट्रो के निर्माण में देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को फटकार लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह सिर्फ अधिकारियों के अड़ियल रवैये को दिखाता है, जिसके तहत वे कोलकाता शहर में मेट्रो रेल प्रोजेक्ट में देरी करना और उसे रोकना चाहते हैं। सीजेआई ने कहा कि हर चीज का राजनीतिकरण न करें। यह विकास से जुड़ा मुद्दा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट द्वारा दिए गए आदेश में कोई कमी नहीं थी। हमें पूरा भरोसा है कि यह प्रोजेक्ट तय समय सीमा के भीतर ही पूरा किया जाएगा। जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने राज्य सरकार से कहा कि क्या आपके लिए विकास से ज़्यादा त्योहार जरूरी हैं? ऐसा नहीं है कि आप अपनी मर्ज़ी से कर रहे हैं, आप अपने कर्तव्य से बंधे हैं। आपने हाई कोर्ट से कहा था कि आपको त्योहारों का इंतजाम करना है। परिवहन के लिए एक अहम सड़क बनाने से ज्यादा जरूरी त्योहार हैं। हमें लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार से यह उम्मीद नहीं है कि सरकार यह कहे कि इस काम को फिलहाल नजरअंदाज़ कर दिया जाए। कोर्ट ने कहा अगर चुनाव आयोग को चुनाव कराने में कोई दिक्कत नहीं है तो यह प्रोजेक्ट तो आचार संहिता लागू होने से पहले का है। ऐसे में हम राज्य सरकार को यह बहाना बनाकर विकास के काम को फिर से रोकने की इजाज़त नहीं देंगे। सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कोलकाता मेट्रो में देरी को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट के ट्रैफिक ब्लॉक किए जाने के आदेश के खिलाफ सरकार की अपील पर सुनवाई से इनकार कर दिया। आज सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार ने कहा कि हमें मई तक का समय दें। अभी चुनाव चल रहे हैं, इसलिए देरी हो रही है। राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि उस रास्ते से एम्बुलेंस आती-जाती हैं। यहां तक कि अंग प्रत्यारोपण वाले वाहन भी उसी रास्ते से गुजरते हैं। सीजेआई ने कहा कि हाई कोर्ट ने बहुत नरमी बरती है। यह एक ऐसा मामला था जहां आपके मुख्य सचिव और डीजीपी के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए थी। यह अपने कर्तव्य के प्रति पूरी तरह से लापरवाही दिखाता है। यह सिर्फ एक ऐसे मुद्दे का राजनीतिकरण करने की कोशिश है, जहां असल में कोई मुद्दा ही नहीं है। वहीं कोलकाता मेट्रो के वकील ने याचिका वापस लेने की अनुमति दिए जाने का आग्रह किया। इस पर जस्टिस बागची ने कहा, "आपको वह मौका दिया गया था, लेकिन आपने उसका फायदा नहीं उठाया। हम आपको याचिका वापस लेने की अनुमति नहीं देंगे।" दरअसल, कोलकाता मेट्रो की ऑरेंज लाइन के एक अहम हिस्से को पूरा करने में हो रही अनिश्चित देरी को लेकर याचिका दाखिल की गई थी। इस याचिका में देरी का कारण पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा जरूरी मंजूरी नहीं दिए जाने को बताया गया था।

PM मोदी ने समझाया पूरा रोडमैप: तेल-गैस संकट में कैसे सुरक्षित रहेगा भारत

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान में जारी जंग के चलते जारी तेल और गैस को लेकर लोकसभा में भाषण दिया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि देश के लोगों के हित सुरक्षित रहेंगे और सरकार सभी जरूरी प्रयास कर रही है। उन्होंने इस दौरान यह भी कहा कि हम शांति के पक्ष में हैं और इसके लिए सारे प्रयास करेंगे। यही नहीं उन्होंने यह चिंता भी जताई कि इस जंग का असर लंबे समय तक रह सकता है और हमें संयम के साथ हालात से निपटने के लिए तैयार रहना होगा। पीएम मोदी ने कहा कि हम कोरोना में तैयार थे और उसका फायदा मिला था। उसी तरह हमें फिर से धीरज और संयम के साथ हर चुनौती का सामना करना है। यही हमारी पहचान है और यही हमारी ताकत है। हमें बहुत सावधान और सतर्क भी रहना है। हालात का फायदा उठाने वाले झूठ फैलाने का भी प्रयास करेंगे। ऐसे लोगों की कोशिशों को सफल नहीं होने देना है। करीब एक करोड़ भारतीय खाड़ी देशों में रहते हैं और वहां काम करते हैं। वहां समंदर में चलने वाले जहाजों में भी बड़ी संख्या में क्रू मेंबर भारतीय ही हैं। इसलिए यह जरूरी है कि भारत की संसद से एकजुट आवाज दुनिया में जाए। इस जंग के शुरू होने के बाद से ही प्रभावित देशों में भारतीयों को जरूरी मदद दी जा रही है। मैंने खुद पश्चिम एशिया के सभी देशों के राष्ट्राध्यक्षों से दो राउंड फोन पर बात की है। सभी ने भारतीयों की सुरक्षा का भरोसा दिया है। दुर्भाग्य से इस दौरान कुछ भारतीयों की मृत्य हुई है और कुछ घायल हुए हैं। प्रभावित देशों में हमारे मिशन भारतीयों को मदद कर रहे हैं। वहां गए पर्यटक हों या फिर काम करने वाले लोग, सभी को हेल्प की जा रही है। हमारे दूतावासों की ओर से लगातार एडवाइजरी जारी हो रही है और हेल्प लाइन भी स्थापित हैं। देश-विदेश में भारतीयों की सुरक्षा हमारे लिए प्राथमिकता रही है। युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 3 लाख 75 हजार भारतीय वापस लौट चुके हैं। ईरान समेत कई देशों में सीबीएसई के स्कूल चलते हैं। वहां सुरक्षा के लिहाज से परीक्षाएं भी रद्द की गई हैं। भारत में बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, गैस और फर्टिलाइजर होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते से आते हैं। इस जंग के बाद से ही जहाजों का आना-जाना चुनौतीपूर्ण हो गया है। इसके बाद भी हमारी सरकार का यह प्रयास रहा है कि पेट्रोल, डीजल और गैस की सप्लाई ज्यादा प्रभावित ना हो। हम सभी जानते हैं कि देश अपनी जरूरत की 60 फीसदी एलपीजी आयात करता है। इसकी सप्लाई में अनिश्चितता के कारण सरकार ने घरेलू उपयोग को प्राथमिकता दी है। इसके अलावा देश में ही इसके उत्पादन को बढ़ाया जा रहा है। पेट्रोल और डीजल की सप्लाई सुचारू रूप से होती रहे। इसके लिए भी काम किया जा रहा है। देश में कितना बड़ा है तेल का भंडार, PM मोदी ने बताई तैयारी बीते एक दशक में एनर्जी सिक्योरिटी को लेकर उठाए गए कदम और भी प्रासंगिक हो गए हैं। अपने अपने ऊर्जा आयात को डाइवर्सिफाई किया है। पहले 27 देशों से हम आयात करते थे। अब एनर्जी इंपोर्ट हमारा 41 देशों से हो रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि हमारे पास 53 लाख मीट्रिक तेल रिजर्व है। हम 65 लाख तक इसे पहुंचाने के लिए काम कर रहे हैं। कंपनियों के पास जो रिजर्व होता है, वह अलग है। हम अलग-अलग देशों के साथ भी संपर्क में है, जहां से सप्लाई ली जाए। हमारी प्राथमिकता यही है कि जहां से भी संभव हो, वहां से सप्लाई आती रहे। भारत की सरकार खाड़ी और उसके आसपास के रास्तों पर नजर बनाए हुए है। हमारी पूरी कोशिश है कि भारत आने वाले सभी जहाज सुरक्षित रूप से यहां पहुंचें। पेट्रोल, डीजल के संकट से निपटने में किस चीज का फायदा देश की एक और तैयारी इस समय काम आ रही है। बीते 10 से 11 सालों में एथेनॉल की ब्लेंडिंग पर खूब काम हुआ है। आज पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल ब्लेंडिंग हो रही है। इससे हमें प्रति वर्ष करीब 4 करोड़ बैरल तेल हर साल कम इंपोर्ट हो रहा है। इससे बड़ा फायदा हो रहा है। फिर रेलवे के विद्युतीकरण ने भी हमें फायदा पहुंचाया है। पीएम मोदी ने कहा कि मैं किसानों को भरोसा दिलाता हूं कि सरकार हरसंभव मदद करती रहेगी। पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना में भी सप्लाई बाधित थी, लेकिन किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं हुआ था। इस बार भी ऐसा ही किया जाएगा। युद्ध की बड़ी चुनौती यह भी है कि आने वाले समय में बढ़ती गर्मी के साथ बिजली की डिमांड बढ़ेगी। फिलहाल देश के सभी पावर प्लांट में कोयला की सप्लाई है। 'लंबे समय तक रहेगा असर, कोरोना की तरह रहें तैयार' उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को रोकना अस्वीकार्य है। भारत हमेशा से मानवता के हित में और शांति के पक्ष में अपनी आवाज उठाता रहा है। उन्होंने कहा कि मैं फिर कहूंगा कि कूटनीति ही इसका एक प्रयास है। हमारा प्रयास इसलिए है कि युद्ध समाप्त हो और शांति आए। भारत का प्रयास सभी पक्षों को जल्द से जल्द शांतिपूर्ण समाधान के लिए प्रोत्साहित करने का है। पीएम मोदी ने कहा कि ऐसे संकट जब आते हैं तो कुछ तत्व इसका गलत फायदा उठाने की कोशिश भी करते हैं। इसलिए कानून-व्यवस्था संभालने वाली सभी एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है। जमीन, आसमान, जल से लेकर साइबर स्पेस तक में एजेंसियां अलर्ट हैं। इस जंग से लंबे समय तक के लिए हालात खराब होने की संभावना है। इसलिए तैयार रहना होगा।  

ईरान में जंग से बढ़ी तेल-गैस की किल्लत, भारत पर कितना असर? सरकार का प्लान क्या है

नई दिल्ली ईरान में जारी जंग के चलते पैदा हुए हालातों के बारे में पीएम नरेंद्र मोदी आज देश को जानकारी देंगे। वह लोकसभा में दोपहर 2 बजे बोलने वाले हैं। सूत्रों का कहना है कि इस स्पीच में वह बताएंगे कि ईरान में जंग के बीच देश में गैस और तेल की सप्लाई की क्या स्थिति है। यदि किसी प्रकार का संकट है तो फिर सरकार उससे निपटने के लिए क्या कदम उठा रही है। इन सभी सवालों के जवाब पीएम नरेंद्र मोदी इस भाषण में दे सकते हैं। पीएमओ में रविवार को जो बैठक हुई थी, उसमें प्रधानमंत्री ने पूरी प्रजेंटेशन देखी थी। इसमें उन्होंने जाना था कि दुनिया में पैदा हुए हालातों के बीच भारत ने अब तक क्या कदम उठाए हैं और देश में तेल और गैस सप्लाई की क्या स्थिति है। इस दौरान सभी संबंधित मंत्रालयों से उन्होंने जरूरी अपडेट लिए थे। सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में ऐग्रिकल्चर, फर्टिलाइजर, फूड सिक्योरिटी, पेट्रोलियम, पावर, एक्सपोर्ट, शिपिंग, फाइनेंस, सप्लाई समेत तमाम विभागों से बात की गई। उनकी ओर से उठाए कदमों के बारे में पीएम मोदी ने जानकारी हासिल की। खरीफ सीजन में फर्टिलाइजर की कमी ना हो, PM मोदी के निर्देश बैठक की जानकारी रखने वाले सूत्रों का कहना है कि इस दौरान यह चर्चा हुई कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका क्या असर हो सकता है। फिर भारत खाद्य, ऊर्जा और ईंधन सुरक्षा को लेकर भी बैठक में चर्चा की गई। बीते कुछ दिनों में देश में फर्टिलाइजर्स की कमी पर भी काफी खबरें आई थीं। ऐसे में बैठक में इसकी उपलब्धता को लेकर भी चर्चा हुई थी। कुछ महीनों बाद खरीफ का सीजन होगा और सरकार नहीं चाहती कि उस दौरान किसी भी तरह से फर्टिलाइजर्स की कमी रहे। एक पक्ष इस दौरान बिजली आपूर्ति का भी आया। इसे लेकर आदेश दिया गया है कि देश के सभी पावर प्लांट्स में कोयले की पर्याप्त सप्लाई होती रहे ताकि बिजली उत्पादन में गिरावट न आए। संकट के बीच बिजली पर जोर, मीटिंग में हुई चर्चा एलपीजी की कमी के बीच बड़ी संख्या में लोग इंडक्शन की ओर शिफ्ट हुए हैं। ऐसी स्थिति में बिजली की सप्लाई लगातार जारी रहना भी जरूरी है। पीएम मोदी की बुलाई बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि कैसे पेट्रोकेमिकल्स, फार्मा और केमिकल्स की कमी ना होने दी जाए। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस जंग से पूरी दुनिया ही प्रभावित हो रही है, लेकिन हमें कुछ ऐसे कदम उठाने होंगे कि देश के हितों की रक्षा की जा सके। इस बैठक में उन्होंने सरकार के सभी विभागों से समन्वय के साथ काम करने की अपील की।  

असम में एम्बुलेंस-ट्रक टक्कर में 6 लोगों की जान गई, दो गंभीर रूप से घायल

तेजपुर असम के सोनितपुर जिले में बीती एक एम्बुलेंस और ट्रक की टक्कर हो गई, जिसमें एम्बुलेंस में सवार छह लोगों की मौत हो गई जबकि दो अन्य घायल हो गए. सोनितपुर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार एम्बुलेंस में एक मरीज और उसके परिवार के सदस्य सवार थे. एम्बुलेंस तेजपुर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की ओर जा रही थी, तभी ढेकियाजुली पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग 15 पर यह टक्कर हो गई. इस हादसे में छह लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और गंभीर रूप से घायल दो लोगों को तेजपुर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में भर्ती कराया गया है. घटना की सूचना मिलने पर पुलिस और आपातकालीन सेवा दल तुरंत दुर्घटनास्थल पर पहुंचे, बचाव अभियान शुरू किया और राजमार्ग को साफ किया. बताया जाता है कि नेशनल हाईवे 15 पर ढेकियाजुली पुलिस स्टेशन के अंतर्गत यह भयानक सड़क हादसा हुआ. इस घटना से पूरे इलाके में शोक की गहरी लहर है. रिपोर्टों के अनुसार यह दुखद घटना तब हुई जब तेजपुर से गुवाहाटी की ओर जा रहे एक ट्रक की, विपरीत दिशा से आ रहे एक वाहन से आमने-सामने टक्कर हो गई. टक्कर इतनी जोरदार थी कि छह लोगों की मौके पर ही मौत हो गई. दुर्घटना के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है. यह त्रासदी राष्ट्रीय राजमार्ग-15 पर सड़क सुरक्षा को लेकर जारी चिंताओं को उजागर करती है. यह एक व्यस्त हाईवे है जहां अक्सर भारी ट्रैफिक और तेज गति से वाहनों की आवाजाही देखने को मिलती है.

न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर एयर कनाडा का विमान फायर ट्रक से टकराया, चार लोग घायल

न्यूयॉर्क न्यूयॉर्क के ला गार्डिया एयरपोर्ट पर सोमवार को एक बड़ा विमान हादसा हो गया. खराब मौसम के बीच गेट की तरफ जा रहा एयर कनाडा का एक जेट रनवे पर खड़े फायर ट्रक से टकरा गया।  फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा और स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, हादसे का शिकार हुआ विमान 'एयर कनाडा एक्सप्रेस CRJ-900' है, जो मॉन्ट्रियल से न्यूयॉर्क पहुंचा था. टक्कर इतनी जोरदार थी कि इसमें चार दमकलकर्मी घायल हो गए हैं. उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है।  हादसे के समय विमान में लगभग 100 यात्री सवार थे. आपातकालीन बचाव दल तुरंत मौके पर पहुंचे और राहत कार्य शुरू किया. सोशल मीडिया पर साझा की गई तस्वीरों और वीडियो में यात्री विमान के अगले हिस्से और 'नोज' को भारी नुकसान पहुंचता दिख रहा है।  पूरा एयरपोर्ट हुआ बंद ला गार्डिया काफी बिजी और भीड़भाड़ वाला एयरपोर्ट है. प्लेन क्रैश होने की वजह से फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने ला गार्डिया एयरपोर्ट पर सभी उड़ानों के लिए 'ग्राउंड स्टॉप' जारी कर दिया है. शुरुआत में 05:30 GMT तक उड़ानों पर रोक लगाई गई थी, लेकिन स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इसे 18:00 GMT तक बंद रखा जा सकता है. एयरपोर्ट प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां रनवे से मलबा हटाने और जांच करने में जुटी हैं।  शुरुआती रिपोर्ट की मानें तो हादसे की वजह खराब मौसम और विजिबिलिटी की कमी बताई जा रही है. फिलहाल इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि दमकल की गाड़ी रनवे पर क्यों मौजूद थी. रेगुलेटर ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और सिक्योरिटी स्टैंडर्ड की भी समीक्षा की जाएगी। 

India-China कनेक्टिविटी में सुधार: बीजिंग और दिल्ली डायरेक्ट फ्लाइट दोबारा शुरू करेगा एअर चाइना

बीजिंग एअर चाइना फिर से बीजिंग और दिल्ली के बीच सीधी उड़ानें शुरू करेगा। यह जानकारी शनिवार को भारत में चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने दी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में यू जिंग ने लिखा, बीजिंग और दिल्ली के बीच एअर चाइना की सीधी उड़ानें फिर से शुरू होना केवल यात्रा तक सीमित नहीं है। यह व्यापार, पर्यटन और भरोसे को बढ़ावा देने वाला कदम है और संघाई सहयोग संगठन (एससीओ) और ब्रिक्स के सदस्य देशों के लोगों के बीच आपसी सहयोग के लिए एक बड़ा सकारात्मक संकेत है। पिछले साल करीब पांच साल के अंतराल के बाद भारत और चीन ने फिर से हवाई सेवाएं शुरू कीं, जिससे दोनों देशों के संबंधों में सुधार का संकेत मिला। एक फरवरी को एअर इंडिया ने शंघाई और दिल्ली के बीच सीधी उड़ान की घोषणा की। इस तरह दोनों शहरों के बीच छह साल बाद फिर से उड़ान सेवा शुरू हुई। इसके अलावा, चीनी एयरलाइन चाइना ईस्टर्न ने भी पिछले साल नवंबर में शंघाई से दिल्ली के लिए उड़ानें शुरू कीं। गलवां घाटी में खूनी झड़प के बाद संबंधों में तनाव साल 2020 में गलवां घाटी में हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के संबंध खराब हो गए थे। इस झड़प में 20 भारतीय सैनिकों का बलिदान हुआ। जबकि चीन ने चार सैनिकों की ही मौत की पुष्टि की थी। अगस्त 2023 में जोहान्सबर्ग में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात हुई। दोनों नेताओं ने तनाव कम करने के लिए प्रयास तेज करने पर सहमति जताई। छह साल में पीएम मोदी ने की थी चीन की यात्रा अगस्त 2025 में प्रधानमंत्री मोदी ने छह साल में पहली बार चीन का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने शी जिनपिंग से बातचीत की। यह बातचीत ऐसे समय में हुई, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों देशों पर कड़े टैरिफ लगाए थे। इसके बाद उसी महीने चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने नई दिल्ली में एक कार्यक्रम में कहा कि बीजिंग, अमेरिका की ओर से भारत पर लगाए गए भारी टैरिफ का विरोध करता है और भारत के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा।