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पीएम मोदी ने हुगली नदी में नाव की सवारी की, नाविक को ₹1000 और गले लगाया; 5 दिन पहले खाई थी झालमुड़ी

 हुगली  पीएम नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को हुगली नदी में नाव की सवारी की है। इस दौरान पीएम ने खुद से फोटोग्राफी भी की। तस्वीरों में वे हाथ में कैमरा लिए नजर आ रहे हैं। उन्होंने नाविकों से बातचीत भी की। हुगली में नाव की सवारी कराने वाले नाविक को एक हजार रुपए भी दिए। पीएम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर नाव की सवारी वाली तस्वीरें शेयर की। उन्होंने लिखा, ‘हर बंगाली के लिए गंगा का एक बहुत ही खास स्थान है। यह कहना गलत नहीं होगा कि गंगा बंगाल की आत्मा में बहती है।’ इससे पहले पीएम 19 अप्रैल को चुनाव प्रचार के दौरान झाड़ग्राम में रास्ते में वह एक दुकान पर रुके और झालमुड़ी खाई। नाविकों से पीएम मोदी ने की मुलाकात इस दौरान उन्होंने हुगली के किनारे नाविकों और सुबह टहलने वाले लोगों से भी मुलाकात की। उन्होंने पोस्ट में लिखा, 'मुझे नाव चलाने वालों से मिलने का भी अवसर मिला, जिनकी कड़ी मेहनत की प्रवृत्ति सराहनीय है। और सुबह सैर करने वालों से भी मुलाकात हुई। हुगली नदी के तट पर, मैंने पश्चिम बंगाल के विकास और महान बंगाली लोगों की समृद्धि के लिए काम करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।'     हुगली नदी के भ्रमण के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाथ में कैमरा थामे हुए नाव की सवारी कर रहे थे। उन्होंने हुगली के तट से भी कुछ और शेयर कीं, जहां वे लोगों से मिलते हुए नजर आए। पीएम मोदी ने नदी के तट पर घूमने वाले लोगों का अभिवादन भी स्वीकार किया।     इस दौरान उन्होंने नदी की फोटोग्राफी करने का भी प्रयास किया और विद्यासागर सेतु व हावड़ा ब्रिज का करीब से नजारा देखा। पीएम मोदी ने एक अन्य पोस्ट में लिखा, "मैंने इस नदी की तस्वीरें खींचने की भी कोशिश की। साथ ही मुझे विद्यासागर सेतु और हावड़ा ब्रिज की भी करीब से झलक देखने को मिली।' महुआ मोइत्रा को समझ आई होगी 'गलती'! हाल में बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर का एक वीडियो सामने आया, जिसमें वह सिर में तिलक लगाए हुए मछली खाते हुए दिखाई दे रहे हैं। उनके इस वीडियो पर चुटकी लेते हुए टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा ने तंज भरे लहजे में कहा था। 'आपको बंगाल में मछली का आनंद लेते हुए देखकर खुशी हुई। चिंता मत कीजिए- यह कोई काल्पनिक दुनिया नहीं है। आप हुगली नदी पर क्रूज का आनंद ले सकते हैं और बिना गिरफ्तार हुए मछली खा सकते हैं। मोदी की हुगली यह सवारी महुआ को टेंशन दे सकती है। क्योंकि हुगली नदी से बड़ी संख्या में नाविक जुड़े हुए है, पीएम मोदी ने इन नाविकों और इनके परिवार को साधने की कोशिश की है। नाविक को दिए 1000 रुपए पीएम मोदी ने कोलकाता के हुगली घाट पर नाव की सवारी के बाद नाविक गौरांगो बिस्वास को गले लगाया और 1000 रुपए दिए। पीएम ने x पर एक वीडियो शेयर कर लिखा- कल शाम हावड़ा से कोलकाता तक लंबे रोड शो के दौरान हावड़ा ब्रिज पर था। आज सुबह उसे हुगली नदी से देखा। पीएम मोदी रविवार 19 अप्रैल को पश्चिम बंगाल के दौरे पर थे। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने झाड़ग्राम में एक दुकान पर रुके और झालमुड़ी खाई। झालमुड़ी बनाते हुए दुकानदार ने पूछा, ‘आप प्याज खाते हैं। पीएम ने जवाब दिया- हां प्याज खाता हूं बस दिमाग नहीं। यह सुनकर दुकानदार हंसने लगा।’ मालूम हो कि बंगाल में पहले चरण में रिकॉर्डतोड़ 92.66 फीसदी वोटिंग हुई है. अब राज्य में दूसरे चरण में 29 अप्रैल को वोटिंग होनी है. जिसके लिए चुनाव प्रचार तेज है. इस बीच पीएम मोदी ने शुक्रवार को हुगली में नाव की सवारी की. इससे पहले PM मोदी ने बंगाल में झालमुढ़ी का स्वाद चखा था. झाड़ग्राम में चुनावी रैली को संबोधित करने के बाद पीएम मोदी अचानक झालमुड़ी की दुकान पर पहुंचे थे। 

कलकत्ता हाईकोर्ट का चुनाव आयोग पर हमला, तुगलकी फरमान को लेकर सुनाई तीखी आलोचना

कलकत्ता   पश्चिम बंगाल में पहले चरण की वोटिंग के दिन यानी गुरुवार को कलकत्ता हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग की जमकर क्लास लगाई. हाईकोर्ट ने बुधवार को भी आयोग को फटकार लगाई थी. गुरुवार को हाईकोर्ट ने कोलकाता और दक्षिण 24 परगना में मोटरबाइकों पर 48 घंटे की पाबंदी लगाने के आदेश को तुगलकी फरमान करार देते हुए इसे नागरिक अधिकारों के खिलाफ बताया. गुरुवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस कृष्णा राव ने चुनाव आयोग को फटकार लगाते हुए कहा कि सिर्फ अधिकार होना किसी भी तरह के आदेश लागू करने का आधार नहीं हो सकता. उन्होंने कहा कि अगर आप सब कुछ बंद करना चाहते हैं तो आपातकाल घोषित कर दीजिए, लेकिन इस तरह नागरिकों के अधिकारों पर अंकुश नहीं लगाया जा सकता. इससे पहले बुधवार को भी हाईकोर्ट ने चुनाव को झटका दिया था. उसने राज्य में आयोग की ओर से करीब 800 लोगों को उपद्रवी करार देने के फैसले को पटल दिया था।   रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयोग ने 21 अप्रैल को एक अधिसूचना जारी कर 27 अप्रैल शाम 6 बजे से 29 अप्रैल तक मोटरसाइकिलों के उपयोग पर सख्त प्रतिबंध लगाया था. आदेश के अनुसार इस दौरान बाइक केवल सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक ही चलाई जा सकती थी. इसके अलावा पिलियन राइडिंग (पीछे बैठकर सफर) और बाइक रैलियों पर भी रोक लगा दी गई थी. हालांकि मेडिकल इमरजेंसी, पारिवारिक कार्यक्रम और आवश्यक सेवाओं को छूट दी गई थी  आयोग ने बचाव में कही ये बातें चुनाव आयोग ने अपने आदेश का बचाव करते हुए कहा था कि यह कदम स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने तथा किसी भी तरह की हिंसा, डराने-धमकाने या अवांछित घटनाओं को रोकने के लिए उठाया गया है. आयोग का मानना था कि इस तरह के प्रतिबंध से मतदान का माहौल बेहतर और सुरक्षित बनेगा. लेकिन, अदालत इस तर्क से संतुष्ट नहीं था. जस्टिस राव ने सुनवाई के दौरान आयोग के वकील से सवाल किया कि क्या अन्य राज्यों में भी इस तरह के आदेश जारी किए जाते हैं. उन्होंने कहा कि आपके पास पुलिस व्यवस्था और सीसीटीवी कैमरे हैं, फिर इतनी कड़ी पाबंदी की जरूरत क्यों? यह एक असंगत प्रयास है जिससे सब कुछ ठप करने की कोशिश हो रही है  आयोग से हाईकोर्ट के तीखे सवाल अदालत ने यह भी पूछा कि पिछले पांच वर्षों में मोटरसाइकिल चालकों के खिलाफ कितने मामले दर्ज हुए हैं, जिससे यह साबित हो सके कि ऐसा प्रतिबंध आवश्यक था. साथ ही आयोग को निर्देश दिया गया कि वह शुक्रवार तक शपथपत्र (एफिडेविट) दाखिल कर इस फैसले के पीछे की ठोस वजह बताए. हाईकोर्ट की इस सख्ती के बाद राज्यभर में दोपहिया वाहन चालकों ने राहत की सांस ली है. खासकर कोलकाता के मध्यवर्गीय नागरिकों और गिग इकॉनमी से जुड़े लोगों के लिए यह फैसला बड़ी राहत लेकर आया है।  शहर के कई प्रमुख चौराहों पर बाइक सवारों ने कहा कि अदालत ने वही सवाल उठाए हैं, जो वे अधिसूचना जारी होने के बाद से पूछ रहे थे. विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है, लेकिन इसके लिए ऐसे कदम उठाना जो आम नागरिकों के दैनिक जीवन को बुरी तरह प्रभावित करें, उचित नहीं है. अदालत ने भी स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी प्रशासन की है, न कि आम जनता पर अत्यधिक प्रतिबंध लगाकर समस्या का समाधान किया जाए।   

‘पवन खेड़ा ने निर्दोष महिला को विवादों में घसीटा’, हाईकोर्ट जज ने कस्‍टडी में लेकर पूछताछ का दिया आदेश

गुवाहाटी गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को बड़ा झटका देते हुए उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है. यह फैसला उस मामले में आया है, जिसमें असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां शर्मा द्वारा उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी. मामला कथित तौर पर एक से अधिक पासपोर्ट रखने और दस्तावेजों में गड़बड़ी से जुड़ा है. फैसला सुनाते वक्‍त कोर्ट ने पवन खेड़ा पर सख्‍त टिप्‍पणी करते हुए कहा कि उन्‍होंने एक निर्दोष महिला को राजनीतिक लाभ के लिए विवादों में घसीटा है. जस्टिस पार्थिवज्योति सैकिया की सिंगल बेंच ने 21 अप्रैल को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सुनाया गया है. अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया यह मामला केवल मानहानि का नहीं, बल्कि जालसाजी और फर्जी दस्तावेज रखने जैसे गंभीर आरोपों से जुड़ा हुआ है।  गुवाहाटी हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि पवन खेड़ा पुलिस जांच से बचने की कोशिश कर रहे हैं और इस मामले में उनकी हिरासत में पूछताछ (कस्टोडियल इंटेरोगेशन) आवश्यक है. अदालत के अनुसार, यह जानना जरूरी है कि कथित रूप से फर्जी दस्तावेज किसने जुटाए और इस पूरे मामले में उनके साथ और कौन लोग शामिल हैं. कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि रिंकी भुइयां शर्मा किसी राजनीतिक पद पर नहीं हैं, इसलिए इस मामले को राजनीतिक बयानबाजी के रूप में नहीं देखा जा सकता. कोर्ट ने कहा कि यदि मामला सीधे मुख्यमंत्री के खिलाफ होता, तो इसे राजनीतिक संदर्भ में देखा जा सकता था, लेकिन यहां एक निर्दोष महिला को राजनीतिक लाभ के लिए विवाद में घसीटा गया है।  पवन खेड़ा साबित नहीं कर सके अपना दावा अपने आदेश में हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि पवन खेड़ा अब तक यह साबित नहीं कर पाए हैं कि शिकायतकर्ता के पास तीन अन्य देशों के पासपोर्ट हैं जैसा कि उन्होंने दावा किया था. अदालत ने यह भी पाया कि इस मामले में ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है जिससे यह लगे कि खेड़ा को अपमानित करने या नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से आरोप लगाए गए हैं. सुनवाई के दौरान पवन खेड़ा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पैरवी की थी. उन्होंने दलील दी थी कि यह मामला राजनीतिक द्वेष से प्रेरित है और उनके मुवक्किल के फरार होने की कोई आशंका नहीं है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में हिरासत में पूछताछ की कोई आवश्यकता नहीं है।  एडवोकेट जनरल की जोरदार दलील असम सरकार की ओर से महाधिवक्ता देवजीत सैकिया ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह मामला गंभीर आपराधिक धाराओं से जुड़ा है, जिसमें धोखाधड़ी और जालसाजी शामिल हैं. उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि ऐसे मामलों में अग्रिम जमानत नहीं दी जानी चाहिए. अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि मामले की गंभीरता को देखते हुए अग्रिम जमानत देना उचित नहीं होगा। 

अजीत डोभाल का मुसलमानों से संदेश- एक ही जहाज के मुसाफिर हैं, डूबेंगे तो साथ डूबेंगे

नई दिल्ली भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल और भारतीय मुस्लिम समुदाय के चुनिंदा लोगों के बीच प्रधानमंत्री कार्यालय में बीते 18 अप्रैल को एक मीटिंग हुई थी। इस मीटिंग में मुस्लिम समुदाय से आने वाले अलग-अलग क्षेत्रों के लोग शामिल थे। इस बैठक के दौरान एनएसए ने कहा कि भारत में रहने वाले हिंदू और मुसलमान एक ही जहाज के मुसाफिर की तरह हैं। आपको बता दें कि इस बैठक का उद्देश्य पारंपरिक वोट-बैंक की राजनीति से परे हटकर मुस्लिम समुदाय के विकास, शिक्षा और उद्यमिता के भविष्य पर चर्चा करना था। बैठक में उपस्थित मेहमानों को करीब डेढ़ घंटे तक धैर्यपूर्वक सुनने के बाद अजीत डोभाल ने अंग्रेजी और उर्दू के मिश्रण वाली एक प्रभावशाली स्पीच दी। उनके एक वाक्य ने वहां मौजूद सभी लोगों का दिल जीत लिया। डोभाल ने कहा, "हम (हिंदू और मुसलमान) एक ही जहाज पर सवार हैं। हम या तो साथ तैरेंगे या साथ डूबेंगे!" इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व प्रसिद्ध शिक्षाविद् और व्यवसायी जफर सरेशवाला ने किया। उन्होंने सरकार से समान अवसर की मांग करते हुए कहा, "हम नया भारत का हिस्सा हैं।" बैठक में कौन-कौन हुए शामिल जफर सरेशवाला- शिक्षाविद् और व्यवसायी फारुक पटेल- चेयरमैन, केपी ग्रुप (नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में अरबों डॉलर का साम्राज्य) इनामुल राकी- सीएमडी, जर्मन स्टील कंपनी (1 बिलियन डॉलर टर्नओवर) इबरार इराकी- कार्यकारी निदेशक, जर्मन स्टील लिमिटेड जुनैद शरीफ- सीईओ, निटोन वाल्व्स लिमिटेड अल्ताफ सादिकोट- वरिष्ठ पदाधिकारी, दाऊदी बोहरा जमात नईमा खातून- कुलपति, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) समीना शेख- जूम टीवी (मीडिया) सहर भामला- पर्यावरण कार्यकर्ता डॉ. निशात हुसैन- एम्स (AIIMS) की गोल्ड मेडलिस्ट डॉक्टर डॉ. जहीर काजी- अध्यक्ष, अंजुमन-ए-इस्लाम (प्रमुख शैक्षणिक संस्थान) जफर एम. लारी- जीएलएस स्विचगियर्स लिमिटेड हाजी रयामा- कच्छ (गुजरात) से प्रतिनिधित्व कौसर जहां- अध्यक्ष, भारतीय हज समिति अजीत डोभाल की यह पहल दर्शाती है कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के भीतर हर समुदाय को सशक्त और आत्मविश्वास से भरपूर बनाना भी इसका हिस्सा है। उद्योग जगत से लेकर शिक्षा और स्वास्थ्य तक फैले इस प्रतिनिधिमंडल ने यह संदेश दिया है कि भारतीय मुस्लिम समुदाय अब केवल राजनीतिक मोहरे के रूप में नहीं, बल्कि 'आत्मनिर्भर भारत' के सक्रिय भागीदार के रूप में अपनी पहचान बना रहा है।

QUAD में भारत की सबसे बड़ी ताकत, US के पूर्व मंत्री ने बताया कैसे प्रभावित हुए थे पीएम मोदी से

नई दिल्ली QUAD यानी चार देशों के समूह में मुख्य भूमिका निभाने का श्रेय भारत को दिया जा रहा है। अमेरिका के पूर्व उप विदेश मंत्री ने बताया है कि इस समूह के पीछे सबसे बड़ी ताकत भारत था। साथ ही उन्होंने चार देशों के बीच साझेदारी बनाने में भारत की भूमिका के बारे में बताया है। इस दौरान उन्होंने भारत के साथ अमेरिका के मौजूदा रिश्तों को लेकर चिंता भी जाहिर की है। क्वाड में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। जब बाइडेन ने पीएम मोदी को मनाया हडसन इंस्टीट्यूट पहुंचे अमेरिका के पूर्व उप विदेश मंत्री कर्ट एम कैम्पबेल ने कहा, 'मैंने जो भी रिपोर्टें देखीं उनके बावजूद, मैं वहां मौजूद था और राष्ट्रपति बाइडन ने एक घंटे से अधिक समय तक काफी हिचकिचा रहे प्रधानमंत्री मोदी को क्वाड के नेता स्तर पर शामिल होने के लिए मनाया। उन्होंने सचमुच उन्हें एक समझौते के लिए इस हद तक राजी किया कि मोदी ने कहा, 'मैं वादा करता हूं कि मैं यह करूंगा, बस आप मुझे बार-बार टोकना बंद करें'…।' उन्होंने कहा, 'QUAD में पर्दे के पीछे सबसे ज्यादा काम करने वाला देश अमेरिका नहीं था। वह जापान नहीं था। वह ऑस्ट्रेलिया नहीं था। वह भारत था।' रिश्तों पर जताई चिंता कैम्पबेल ने भारत के साथ अमेरिका के मौजूदा रिश्तों पर भी चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा, 'यह थोड़ी चिंता की बात है कि आज हमें एक-दूसरे का सम्मान करने जैसी बुनियादी बात याद दिलानी पड़ रही है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि भारत और अमेरिका के रिश्ते इस मोड़ पर आ जाएंगे जहां सम्मान की बात करनी पड़े। लेकिन मैं मानता हूं कि आज हालात ऐसे ही हैं, और मेरा मानना है कि किसी भी रिश्ते को टिकाए रखने के लिए एक-दूसरे का सम्मान करना सबसे जरूरी है।' ताजा टकराव रूसी तेल, टैरिफ समेत कई मुद्दों के बाद एक बार फिर भारत और अमेरिका में तनाव देखा जा रहा है। इसकी वजह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का पोस्ट है, जिसमें भारत और चीन को नरक जैसी जगह बताया गया है। भारत ने इसपर कड़ी आपत्ति जताई है। हालांकि, अमेरिका ने भी इस मामले में डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की और भारत को महान देश करार दिया था। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, 'हमने टिप्पणियां देखी हैं, साथ ही इसके जवाब में अमेरिकी दूतावास द्वारा जारी किया गया बयान भी देखा है।' उन्होंने कहा, 'ये टिप्पणियां स्पष्ट रूप से अज्ञानतापूर्ण, अनुचित और अभद्र हैं। ये निश्चित रूप से भारत-अमेरिका संबंधों की वास्तविकता को नहीं दिखाती हैं, जो लंबे समय से आपसी सम्मान और साझा हितों पर आधारित रहे हैं।'

बंगाल चुनाव: अमित शाह बोले “दीदी जाने वाली हैं, बीजेपी आने वाली है”

कोलकाता  पश्चिम बंगाल में राज्य की 152 सीटों की वोटिंग होने के बाद गृह मंत्री अमित शाह का बड़ा बयान सामने आया है। कोलकाता में प्रेस कांफ्रेंस में अमित शाह 152 में बीजेपी को करीब 110 सीटें मिलने जा रह रही है। अमित शाह ने कहा कि बीजेपी दूसरे चरण के बाद बीजेपी अपने बूते पर सरकार ने बनाएगी। उन्हाेंने बंपर वोटिंग के बंगाल के लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहाकि यह भय से भरोसे की तरफ की सफर है। उन्होंने कहा बंगाल के पहले चरणें में एक भी मौत नहीं हुई। यह अपने आप में एक अजूबा (अनूठी उपलब्धि) है। अमित शाह ने कहा कि मेरे पास जो फीडबैक है। उसके तहत बंगाल की जनता ने पहले चरण में सबकुछ तय कर दिया है। अमित शाह ने मोटेतौर पर पहले चरण में बीजेपी के लिए फायदा होने की बात कही। उन्होंने कहा कि दीदी जाने वाली है और बीजेपी आने वाली है। भय जाने वाला है और भरोसा आने वाला है। अमित शाह की बड़ी बातें:   दीदी जाने वाली हैं बीजेपी आने वाली है।     पहले चरण की 152 सीटों में 110 जीतेंगे।     लोगों ने परिवर्तन के लिए वोट दिया है।     पहले चरण के मतदान में सभी रिकॉर्ड टूटे।     बंगाल में सुशासन के नए युग की आहट।     बंगाली बोलने वाला ही बंगाल का सीएम बनेगा।     बंगाल के लोगों ने भय से भरोस की यात्रा की है।     असम की तर्ज पर अवैध कब्जे हटाए जाएंगे।     भय जाने वाला है, भरोसा आने वाला है। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक अफवाह फैला रही हैं कि अगर बीजेपी जीती तो बाहर के लोग बंगाल चलाएंगे। दीदी मैं कहता हूं कि बंगाल का सीएम बंगाल में जन्म लेने वाला बंगाली बोलने वाला ही होगा। वह भाजपा का कार्यकर्ता होगा। हां, वह आपका भतीजा नहीं होगा। दूसरे चरण में भी बंपर बोटिंग की अपील अमित शाह ने कहा पश्चिम बंगाल में प्रथम चरण में ऐतिहासिक मतदान कर लोकतंत्र के महापर्व में सहभागिता के सभी रिकॉर्ड तोड़ने के लिए प्रदेश के मतदाताओं का अभिनंदन करता हूं।बंगाल के इतिहास के सबसे शांतिपूर्ण और सुरक्षित मतदान के लिए चुनाव आयोग, सभी केंद्रीय सुरक्षा बलों (CAPFs) के बहादुर जवानों और हमारी पश्चिम बंगाल पुलिस का भी अभिनंदन करता हूं। अमित शाह ने आगे कहा कि मैं एक बार फिर दूसरे चरण के सभी मतदाताओं से कहना चाहता हूं कि भयमुक्त होकर अपनी इच्छा से मतदान कीजिए। मतदान में गड़बड़ी न हो, इसकी बहुत अच्छी व्यवस्था चुनाव आयोग ने की है। उन्होंने कहा कि पुराने चुनाव भूल जाइए, बंगाल के सुनहरे भविष्य के लिए मतदान करें और बीजेपी की सरकार बनाएं। पश्चिम बंगाल के दूसरे चरण में 142 सीटों के लिए वोट डाले जाएंगे।

मंत्रियों की सैलरी में कटौती, इस राज्य में रिटायर्ड कर्मचारियों को मिलेगी बकाया पेंशन

 हैदराबाद तेलंगाना सरकार ने  एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए मंत्रियों के वेतन में 50% की कटौती करने का निर्णय लिया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य रिटायर्ड (सेवानिवृत्त) सरकारी कर्मचारियों के लंबे समय से पेंडिंग बकाये को चुकाने के लिए वित्तीय संसाधन जुटाना है। यह फैसला हिमाचल प्रदेश सरकार के उस हालिया कदम के बाद आया है, जिसमें वित्तीय संकट के कारण मुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्रियों के वेतन में कटौती की गई थी। स्वेच्छा से लिया गया फैसला मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक के बाद, तेलंगाना के सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी ने इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी मंत्रियों ने अपनी मर्जी से यानी स्वेच्छा से अपने वेतन में 50% की कटौती करने का संकल्प लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़ी, तो रिटायर्ड कर्मचारियों का पैसा चुकाने के लिए राज्य के सभी जनप्रतिनिधि भी अपनी सैलरी का आधा हिस्सा छोड़ देंगे। 100 दिनों का लक्ष्य और नई समिति का गठन सरकार ने इस समस्या को सुलझाने के लिए एक समय सीमा तय की है। कैबिनेट ने अगले 100 दिनों के भीतर सेवानिवृत्ति बकाये को चुकाने की व्यवस्था शुरू करने का लक्ष्य रखा है। सरकार ने एक खास समिति बनाने की घोषणा की है, जो कर्मचारी संघों, शिक्षकों और पेंशनभोगियों के साथ मिलकर बातचीत करेगी और संसाधन जुटाने के तरीके तलाशेगी। कितने करोड़ का है बकाया? कैबिनेट ने इस बात पर प्रकाश डाला कि सरकार के ऊपर कर्मचारियों का एक बहुत बड़ा आर्थिक बोझ है।     सेवारत (वर्तमान) कर्मचारियों का बकाया: लगभग 6,200 करोड़ रुपये     रिटायर्ड कर्मचारियों का बकाया: लगभग 8,000 करोड़ रुपये पेंशनभोगियों के प्रति सरकार की चिंता सरकार ने रिटायर्ड कर्मचारियों को हो रही परेशानियों पर गहरी चिंता जताई। मंत्री पोंगुलेटी ने कहा कि सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ने और पैसा मिलने में हो रही देरी के कारण पेंशनभोगियों और उनके परिवारों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कैबिनेट का स्पष्ट मानना था कि रिटायर्ड कर्मचारियों को अपने ही हक के पैसों के लिए दफ्तर-दर-दफ्तर भटकने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। पिछली सरकार पर निशाना और भविष्य की योजना कैबिनेट ने इस बात पर भी गंभीर चिंता जताई कि यह भारी-भरकम बकाया पिछले एक दशक (लगभग 10 वर्षों) में जमा हुआ है। सरकार ने याद दिलाया कि जब तेलंगाना राज्य का गठन हुआ था, तब राज्य पर ऐसा कोई बकाया नहीं था। वेतन कटौती के साथ-साथ, तेलंगाना सरकार अब इस वित्तीय बोझ से निपटने और कर्मचारियों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए संसाधन जुटाने के अन्य संभावित उपायों पर भी विचार करेगी।

मुइज्जु सरकार ने भारत ने मालदीव की संकट घड़ी में बढ़ाया हाथ, 30 अरब रुपये की सहायता जारी

नई दिल्ली संकट की घड़ी में भारत ने मालदीव को एक बार फिर बड़ी मदद भेजी है। जानकारी के मुताबिक आर्थिक तंगी का सामना कर रहे मालदीव को राहत देते हुए भारत ने 30 अरब रुपये की पहली किश्त जारी करने को मंजूरी दे दी है। यह रकम भारतीय रिजर्व बैंक और मालदीव सरकार के बीच हुए SAARC करेंसी स्वैप फ्रेमवर्क के तहत दी जा रही है। माले स्थित भारतीय उच्चायोग ने गुरुवार को इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि यह कदम मालदीव की वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है। बता दें कि करेंसी स्वैप फ्रेमवर्क की व्यवस्था भारतीय रिजर्व बैंक और मालदीव सरकार के बीच हुए एक समझौते के तहत लागू की गई थी। अक्टूबर 2024 में मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच इस समझौते पर मुहर लगी थी। मालदीव पहले भी इसी फ्रेमवर्क के तहत 400 मिलियन डॉलर की राशि का उपयोग कर चुका है। संकट में मालदीव मालदीव की अर्थव्यवस्था कई मोर्चों पर चुनौतियों का सामना कर रही है। विदेशी मुद्रा भंडार खत्म होने की कगार पर है। वहीं बढ़ते कर्ज के बोझ और राजस्व के सीमित स्रोतों के कारण सरकार को लगातार बाहरी मदद की जरूरत पड़ रही है। ऐसे में भारत की यह मदद न सिर्फ तात्कालिक राहत देती है, बल्कि मुइज्जु सरकार को आगे भी सहारा मिलेगा। भारत बना है मददगार भारत इससे पहले भी लंबे समय से मालदीव के लिए एक भरोसेमंद साझेदार रहा है और संकट के समय सबसे पहले मदद पहुंचाने वाले देशों में शामिल रहा है। 2012 में SAARC करेंसी स्वैप फ्रेमवर्क शुरू होने के बाद से भारत अब तक मालदीव को 1.1 अरब डॉलर से अधिक की वित्तीय सहायता दे चुका है। इसके अलावा, पिछले साल भारत ने मालदीव के अनुरोध पर 100 मिलियन डॉलर के ट्रेजरी बिल्स को भी रोलओवर किया था, जिससे तत्काल वित्तीय दबाव को कम करने में मदद मिली थी। क्या है SAARC करेंसी स्वैप फ्रेमवर्क? SAARC करेंसी स्वैप फ्रेमवर्क दक्षिण एशियाई देशों के लिए एक अहम सुरक्षा कवच की तरह काम करता है, जिसके जरिए जरूरत पड़ने पर तुरंत विदेशी मुद्रा उपलब्ध कराई जाती है। इससे भुगतान संतुलन के संकट और आयात-निर्यात से जुड़े दबावों को संभालने में मदद मिलती है। मालदीव जैसे छोटे द्वीपीय देश, जो पर्यटन और आयात पर काफी हद तक निर्भर हैं, उनके लिए इस तरह की व्यवस्था आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

तुर्किये ने 15 साल से कम बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन किया, संसद में विधेयक पारित

अंकारा कई देशों ने बच्चों की सुरक्षा और ऑनलाइन जोखिम कम करने के लिए सोशल मीडिया पर उम्र आधारित प्रतिबंध या सख्त नियम लागू किए हैं। इसी कड़ी में एक और देश का नाम जुड़ गया है।  तुर्किये की संसद ने देर रात एक विधेयक पारित किया, जिसमें 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया मंचों तक पहुंच सीमित करने का प्रावधान शामिल है। सरकारी मीडिया ने यह जानकारी दी। यह कानून बच्चों और किशोरों को ऑनलाइन खतरनाक गतिविधियों से बचाने की वैश्विक प्रवृत्ति के मद्देनजर लाया गया है।  सोशल मीडिया कंपनियों को चेतावनी यह विधेयक ऐसे समय में पारित हुआ है जब एक सप्ताह पहले काहरामानमाराश (दक्षिणी तुर्किये) में हुई गोलीबारी की घटना में 14 वर्षीय एक लड़के ने स्कूल में नौ छात्रों और एक शिक्षक की हत्या कर दी थी। इस घटना में हमलावर की भी मौत हो गई थी। पुलिस हमलावर की ऑनलाइन गतिविधियों की जांच कर रही है ताकि हमले के पीछे की मंशा का पता लगाया जा सके। तुर्किये की सरकारी समाचार एजेंसी अनाडोलू के अनुसार नए कानून के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को आयु सत्यापन प्रणाली लागू करनी होगी, अभिभावक नियंत्रण (पैरेंटल कंट्रोल) के साधन उपलब्ध कराने होंगे और हानिकारक मानी जाने वाली सामग्री (कंटेंट) पर तेजी से कार्रवाई करनी होगी। अब इस विधेयक को कानून बनने के लिए राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन की मंजूरी की आवश्यकता है, जिन्हें 15 दिनों के भीतर इस पर निर्णय लेना होगा। काहरामानमाराश की घटना के बाद एर्दोआन ने बच्चों की सुरक्षा और निजता के लिए ऑनलाइन जोखिम कम करने की आवश्यकता पर बल दिया था।  सोशल मीडिया मंच  गंदगी का अड्डा बनेः एर्दोआन एर्दोआन ने सोमवार को टेलीविजन पर अपने एक संबोधन में कहा, "हम ऐसे दौर में जी रहे हैं जहां कुछ डिजिटल प्लेटफॉर्म हमारे बच्चों के दिमाग को खराब कर रहे हैं और सोशल मीडिया मंच साफ शब्दों में कहें तो गंदगी का अड्डा बन गए हैं।" मुख्य विपक्षी दल रिपब्लिकन पीपुल्स पार्टी (सीएचपी) ने इस प्रस्ताव की आलोचना करते हुए कहा है कि बच्चों की सुरक्षा प्रतिबंधों से नहीं बल्कि अधिकार-आधारित नीतियों से सुनिश्चित की जानी चाहिए। कानून के तहत यूट्यूब, टिकटॉक, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया मंच 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को अकाउंट बनाने से रोकेंगे और अभिभावक नियंत्रण प्रणाली लागू करेंगे। इसके अलावा, ऑनलाइन गेम कंपनियों को भी तुर्किये में एक प्रतिनिधि नियुक्त करना होगा ताकि वे नए नियमों का पालन सुनिश्चित कर सकें। उल्लंघन की स्थिति में इंटरनेट बैंडविड्थ में कमी और जुर्माने जैसे दंड का प्रावधान है। तुर्किये सरकार पर हाल में ऑनलाइन मंचों पर प्रतिबंध लगाने के आरोप लगते रहे हैं, खासकर जब ये प्लेटफॉर्म असहमति व्यक्त करने का माध्यम बने हैं।  इन देशों में भी सख्ती कई देशों ने बच्चों की सुरक्षा और ऑनलाइन जोखिम कम करने के लिए सोशल मीडिया पर उम्र आधारित प्रतिबंध या सख्त नियम लागू किए हैं। यह सिर्फ तुर्केए  तक सीमित नहीं है, बल्कि एक वैश्विक ट्रेंड बनता जा रहा है।     Australia ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया उपयोग पर सख्त नियम लागू किए हैं। ऑस्ट्रेलिया 10 दिसंबर 2025 से 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध (NPR) लगाने वाला विश्व का पहला देश बना।       फ्रांस की संसद 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया (टिकटॉक, इंस्टाग्राम, स्नैपचैट) पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक कड़े कानून पर काम कर रही है, जो BBC के अनुसार सितंबर 2026 तक लागू हो सकता है।      China सबसे सख्त देशों में शामिल है। वहां बच्चों के लिए सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग पर समय सीमा तय है और रात में उपयोग पर भी रोक है।     ब्रिटेन सरकार 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया उपयोग पर प्रतिबंध लगाने या सख्त नियम लागू करने पर सक्रिय रूप से विचार कर रही है।   ब्रिटेन ने भी सोशल मीडिया उपयोग पर सख्त   “Online Safety” कानून के तहत प्लेटफॉर्म्स पर दबाव बढ़ाया है कि वे बच्चों को हानिकारक कंटेंट से बचाएं और उम्र सत्यापन लागू करें।

ईरान से इंटरनेट पर बड़ा खतरा, रिपोर्ट में खुलासा, भारत और अन्य देशों में हो सकता है अटैक

नई दिल्ली ईरान के निशाने पर अब दुनिया का इंटरनेट कनेक्शन हो सकता है। खबर है कि IRGC यानी इस्लामिक रिवॉल्युशनरी गार्ड्स कोर से जुड़ी तस्नीम एजेंसी ने फारस की खाड़ी में समुद्र के अंदर मौजूद इंटरनेट केबल का नक्शा जारी कर ऐसे संकेत दिए हैं। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। आशंका जताई जा रही है कि इसका असर भारत पर भी पड़ सकता है। इंटरनेट केबल्स और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर का एक नक्शा तस्नीम की तरफ से जारी किया गया है। अब इस कदम को चेतावनी के तौर पर भी देखा जा रहा है कि फारस की खाड़ी पर अब डिजिटल अटैक किया जा सकता है। बुधवार को प्रकाशित इस रिपोर्ट में खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट में स्ट्रेट को न सिर्फ एनर्जी के लिहाज से अहम रास्ता बताया गया है। बल्कि, समुद्र के नीचे बिछी केबल्स के लिए भी एक बेहद महत्वपूर्ण गलियारा माना है। ये केबल्स फारस की खाड़ी के देशों को इंटरनेट और संचार सेवाओं से जोड़ती हैं। इनमें यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत और सऊदी अरब शामिल हैं। रिपोर्ट में चेतावनी भरे सुर इसमें कहा गया है कि इस जलमार्ग से कई बड़े कबल सिस्टम गुजरते हैं। साथ ही कहा गया है कि ईरान के मुकाबले फारस की खाड़ी इन समुद्री मार्गों पर ज्यादा निर्भर है। खास बात है कि जारी युद्ध के समय डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पहले ही निशाने पर आ चुका था। ऐसे में इस ताजा रिपोर्ट ने डिजिटल अटैक की आशंका को और तेज कर दिया है। भारत के लिए है चिंता की बात? ये समुद्री नेटवर्क ओमान, संयुक्त अरब अमीरात और पाकिस्तान जैसे देशों के लैंडिंग स्टेशन से गुजरता है। खास बात है कि इनमें से कई देश युद्ध की आंच का सामना कर रहे हैं। अब कहा जा रहा है कि दुनिया के बड़े डेटा उपभोक्ता होने के चलते भारत की डिजिटल इकोनॉमी इन कनेक्शन पर काफी निर्भर है। क्या होगा असर आशंकाएं हैं कि अगर किसी तरह की परेशानी आती है, तो लाखों यूजर्स की इंटरनेट स्पीड धीमी हो सकती है। साथ ही क्लाउड सर्विसेज और डिजिटल पेमेंट सिस्टम खासे प्रभावित हो सकते हैं। खास बात है कि इससे पहले फ्रांस की सरकारी कंपनी अल्काटेल सबमरीन नेटवर्क्स ने फोर्स मेजर नोटिस जारी कर दिए हैं। खास बात है कि इस कंपनी ने ही केबल बिछाने की जिम्मेदारी है। फोर्स मेजर का मतलब ऐसी असाधारण घटना से है, जो किसी व्यक्ति या कंपनी के नियंत्रण से बाहर हो, और उस घटना के कारण वह अपना काम या अनुबंध पूरा ना कर पाए।