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राजस्थान और MP में बारिश और ओलों का अलर्ट, हरियाणा में सड़कों पर पानी, गंगोत्री धाम में बर्फबारी

नई दिल्ली देश के कई हिस्सों में मौसम ने अचानक करवट ली है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में बारिश के साथ ओले गिर सकते हैं। राजस्थान में जयपुर सहित कई शहरों में बुधवार देर रात से ही घने बादल छाए हुए हैं। 20 मार्च तक ऐसा ही मौसम रहने की संभावना है। ठंडी हवाएं चलने से तापमान 2 से लेकर 9 डिग्री तक गिर गया। मध्य प्रदेश में भोपाल, इंदौर-ग्वालियर समेत 33 जिलों में आंधी-बारिश और 3 जिलों में ओले गिरने का अलर्ट है। मौसम विभाग ने अगले 3 दिन प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में 30 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटे तक की रफ्तार से आंधी चलने का अनुमान जताया है। उधर हरियाणा के रेवाड़ी में रात में हुई तेज बारिश के साथ ओले गिरे। सड़कों पर पानी भर गया। आंधी के चलते सड़कों पर लगे होर्डिंग भी उखड़ गए। बारिश के कारण दिन के तापमान में गिरावट देखने को मिल रही है। आने वाले दिनों में दिन के तापमान में 2 से 3 डिग्री की गिरावट देखने को मिलेगी। उत्तराखंड के उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ के ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी हुई। वहीं हिमाचल के चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और शिमला जिलों में तेज बारिश, आंधी, बिजली गिरने और ओले गिरने की संभावना है। नगालैंड में तूफान-बारिश से तबाही, 46 परिवार प्रभावित नगालैंड में तेज तूफान और बारिश से 46 परिवार प्रभावित हुए हैं। चुमौकेडिमा और पेरेन जिलों में कई घरों और बिजली के खंभों को नुकसान पहुंचा है। मोन जिले के एक सरकारी स्कूल को भी नुकसान हुआ, जिससे मिड-डे मील प्रभावित हुआ। हालांकि अब तक कोई जनहानि नहीं हुई है। अगले दो दिन मौसम का हाल 20-21 मार्च- मौसम विभाग ने दिल्ली में यलो अलर्ट जारी करते हुए हल्की बारिश और तेज हवाएं चलने का अनुमान जताया है। राजस्थान में ओले गिरने का अलर्ट है। हिमाचल प्रदेश में ऑरेंज अलर्ट जारी कर भारी बर्फबारी की चेतावनी दी गई है। तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश में आंधी का अलर्ट है। नॉर्थ-ईस्ट में भी तेज बारिश की आशंका है।

रुबियो और हेगसेथ के साथ अमेरिकी आर्मी बेस पर ड्रोन का खतरा, हड़कंप मचा

वाशिंगटन पश्चिम एशिया में जंग जारी है. अमेरिका और इजरायल की सेनाएं ईरान के शहरों, सैन्य ठिकानों और ऑयल फील्ड्स पर बम के रूप में तबाही बरसा रही हैं. वहीं,  ईरान युद्ध के बीच अब एक ऐसी घटना हुई है, जिसे लेकर खाड़ी देशों से बहुत दूर अमेरिका में भी हड़कंप मच गया है. अमेरिकी सेना हाईअलर्ट पर आ गई है। दरअसल, अमेरिका के एक आर्मी बेस पर ड्रोन मंडराता दिखा है. यह ड्रोन जिस आर्मी बेस पर मंडरा रहा था, उस बेस पर तब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के दो मजबूत और प्रभावशाली चेहरे मौजूद थे. वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पेटे हेगसेथ तब उसी बेस पर मौजूद थे। सऊदी का धैर्य समाप्त? ईरान को प्रिंस ने दी सख्त चेतावनी, मिसाइल-ड्रोन हमलों के बाद पश्चिम एशिया में जारी जंग अब एक नए मोड़ पर पहुंचती दिख रही है. ईरान के लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों से खाड़ी देशों की चिंता बढ़ गई है, और अब सऊदी अरब के सब्र का बांध भी टूटता नजर आ रहा है. सऊदी के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद ने ईरान को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि अब उनके देश और उसके सहयोगियों की "सहनशक्ति" खत्म हो रही है। रियाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रिंस फैसल ने साफ कहा कि ईरान को तुरंत अपनी रणनीति पर फिर से विचार करना चाहिए. उन्होंने इशारों में यह भी जता दिया कि अगर हमले नहीं रुके, तो सऊदी अरब और उसके साझेदार जवाबी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेंगे। प्रिंस फैसल ने कहा, "हम यह साफ कर देना चाहते हैं कि हमारे पास बहुत बड़ी क्षमता और ताकत है. अगर हम चाहें, तो उसका इस्तेमाल कर सकते हैं." हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि कब और किन हालात में सऊदी जवाब देगा, लेकिन उनके बयान से साफ है कि अब स्थिति बेहद संवेदनशील हो चुकी है। ईरानी गैस फील्ड पर हमले के बाद मिडल ईस्ट में 'तेल युद्ध', क़तर और UAE का काउंटर अटैक ईरान पर यूएस-इज़रायल के हमले के बाद बीसवें दिन भी मिडिल ईस्ट में भयानक जंग जारी है. ईरान की टॉप लीडरशिप बड़ा नुक़सान हुआ है लेकिन तेहरान ने खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों और इज़रायल की तरफ़ लगातार मिसाइलें दाग रहा है. इधर से इज़रायल की तरफ़ से भी एयर स्ट्राइक जारी है. मिडिल ईस्ट में चल रहा युद्ध अब सिर्फ सैन्य टकराव नहीं रहा, बल्कि बीते 24 घंटों में यह सीधे-सीधे ‘ऑयल वॉर’ में बदल गया है. क्योंकि इस जंग में एनर्जी ठिकानों पर सीधे हमले हो रहे हैं, जिसका असर दुनिया के कई अन्य इलाकों में भी पड़ा है. ऑयल की ग्लोबल सप्लाई भी बाधित हुई है और तेल की क़ीमतों में भारी उछाल आया है.

IAS अफसरों की भारी कमी: 1300 पद खाली, क्या लड़खड़ा रहा है देश का प्रशासनिक ढांचा?

नई दिल्ली देश इस समय भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी आईएएस की कमी से जूझ रहा है। मजूदा समय में देश में IAS के 1300 पद खाली हैं। आईएएस अधिकारियों की कमी के कारण प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं। सबसे ज्यादा कमी उत्तर प्रदेश में 81 अधिकारियों की कमी है। जबकि दक्षिणी राज्य केरल भी 72 अफसरों की कमी से जूझ रहा है। यह स्थिति केंद्र और राज्यों की प्रशासनिक क्षमता पर असर डाल रही है। राज्यसभा की संसदीय समिति (Parliamentary Committee of Rajya Sabha) ने 25% रिक्त पदों को तुरंत भरने, डेटा आधारित भर्ती प्रक्रिया अपनाने और अफसरों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए वेलफेयर प्लान लागू करने की सिफारिश की है। राज्यसभा की संसदीय समिति ने सरकार से कहा है कि IAS कैडर की 25% रिक्तियां तुरंत भरी जाएं। केंद्र शासित प्रदेशों और दिल्ली में प्रशासनिक जिम्मेदारियां ज्यादा हैं। छोटे कैडर वाले राज्यों के लिए अलग भर्ती रणनीति बने। पूर्वोत्तर राज्यों जैसे नागालैंड, मणिपुर, त्रिपुरा और सिक्किम में स्थिति और असंतुलित बताई गई है। समिति ने कहा है कि भर्ती प्रक्रिया डेटा आधारित हो. सेवानिवृत्ति और जरूरत को ध्यान में रखा जाए और वार्षिक भर्ती योजना साफ हो। साथ ही चंद्रमोली समिति की सिफारिशों को लागू करने की बात भी कही गई है। आईएएस अफसरों के लिए वेलफेयर प्लान की जरूरत है। रिपोर्ट में अफसरों के काम के दबाव पर भी चिंता जताई गई है। सुझाव दिए गए हैं कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए काउंसलिंग सिस्टम बने। लंबे समय तक अतिरिक्त जिम्मेदारी पर नजर रखी जाए और बार-बार ट्रांसफर से होने वाले तनाव को कम किया जाए। कुल पद और भर्ती की स्थिति कुल पद: 6,877 भरे हुए पद: 5,577 सीधी भर्ती के पद: 4,059 पदोन्नति के पद: 1,518 राज्यों में IAS पदों की स्थिति (चयनित आंकड़े) AGMUT: 542 पद, कमी 136 (25.09%) बिहार: 359 पद, कमी 56 (15.60%) गुजरात: 313 पद, कमी 58 (18.53%) हरियाणा: 215 पद, कमी 43 (20.00%) झारखंड: 224 पद, कमी 47 (20.98%) केरल: 231 पद, कमी 74 (32.03%) महाराष्ट्र: 435 पद, कमी 76 (17.47%) ओडिशा: 248 पद, कमी 63 (25.40%) राजस्थान: 332 पद, कमी 64 (19.28%) तमिलनाडु: 394 पद, कमी 51 (12.94%) उत्तर प्रदेश: 652 पद, कमी 81 (12.42%) पश्चिम बंगाल: 378 पद, कमी 75 (19.84%) कुल कमी: 1,300 (18.90%) रिपोर्ट में ‘मिशन कर्मयोगी’ के तहत तनाव प्रबंधन मॉड्यूल जोड़ने की भी बात रिपोर्ट में ‘मिशन कर्मयोगी’ के तहत तनाव प्रबंधन मॉड्यूल जोड़ने की भी बात कही गई है। इसके अलावा, प्रशासन में AI के इस्तेमाल को लेकर सुरक्षित और जवाबदेह सिस्टम बनाने की जरूरत बताई गई है। कुल मिलाकर, देश में IAS अफसरों की कमी अब एक बड़ा प्रशासनिक मुद्दा बनती जा रही है।

आटा और तेल की कमी के बीच अफगानिस्तान से युद्ध, पाकिस्तान पर क्या आएगा तबाही का त्रिकोण?

  नई दिल्ली अमेरिका और ईरान में युद्ध (US-Iran War) जारी है, जिससे दुनिया में तेल संकट गहराया हुआ है और पाकिस्तान इससे पहले ही बेहाल नजर आ रहा है, दूसरी ओर पड़ोसी देश पर कर्ज (Pakistan Debt) भी लगातार बढ़ता जा रहा है. इस बीच अफगानिस्तान के साथ जंग (Pakistan-Afghanistan War) से उसे तगड़ी मार पड़ी है. एक साथ ट्रिपल अटैक ने पाकिस्तान का तेल निकाल दिया है. पहले से ही आर्थिक संकट के चलते भारी भरकम कर्ज के बोझ तले देश का ईरान युद्ध से तेल बंद हुआ, तो अफगानिस्तान से साथ जंग ने देश की महंगाई बढ़ाकर इकोनॉमी पर संकट बढ़ा दिया है। लगातार बढ़ रहा कर्ज का बोझ  पाकिस्तान लंबे समय से आर्थिक संकट झेल रहा है और इससे उबरने के लिए वो तमाम मित्र देशों के साथ ही आए दिन आईएमएफ और विश्व बैंक के सामने कटोरा लेकर मदद मांगता नजर आता रहा है. हालांकि, भारी भरकम आर्थिक मदद मिलने के बाद भी देश के हालात बदतर ने हुए हैं. पाकिस्तानी मीडिया की एक रिपोर्ट को देखें, तो Pakistan पर जनवरी 2026 तक कुल कर्ज 79,322 अरब पाकिस्तानी रुपये तक पहुंच गया। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान द्वारा जारी डॉक्युमेंट्स के मुताबिक, पाकिस्तान के कर्ज में घरेलू उधार में तेज उछाल आया है. केंद्रीय बैंक (SBP)  के आंकड़ों को देखें, देश की संघीय सरकार का घरेलू कर्ज जनवरी 2026 तक 55,978 पाकिस्तानी अरब रुपये तक पहुंच गया था. इसके अलावा  बाहरी कर्ज 23,344 अरब पाकिस्तानी रुपये हो गया. जो जीडीपी का करीब 70% है और पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली का बड़ा उदाहरण है। यहां बता दें कि पाकिस्तान आईएमएफ का सबसे बड़ा कर्जदार है और 1958 से अब तक 26 आईएमएफ बेलआउट कार्यक्रमों के जरिए 34 अरब डॉलर के आसपास की मदद ले चुका है. तमाम रिपोर्ट्स में पाकिस्तानी इकोनॉमिस्ट बताते नजर आए हैं, कि IMF के कर्ज के सहारे चल रहा पाकिस्तान पहले से ही दिवालिया स्थिति में है और वर्तमान के बिगड़े ग्लोबल हालात इकोनॉमी को गहरी चोट पहुंचा सकते हैं। मिडिल ईस्ट में युद्ध, PAK में कोहराम पाकिस्तान पर दूसरा अटैक मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध से हुआ है. दरअसल, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग से तेल संकट गहरा गया है और पूरी तरह तेल के आयात पर निर्भर पाकिस्तान में कोहराम मचा है. हालात ये है कि पाकिस्तान में तेल की कमी के चलते पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा दिए गए, सरकारी गाड़ियों में 60% कटौती, सांसदों और मंत्रियों की सैलरी कट, सरकारी विभागों के गैर-जरूरी खर्च में 20% की कटौती, मीटिंगों को वर्चुअल और पढ़ाई को ऑनलाइन में शिफ्ट करना समेत अन्य उपाय लागू किए गए हैं, जो कोरोना काल जैसे ही हैं। Middle East War से पाकिस्तान की बदहाल इकोनॉमी को और झटका लग सकता है. डॉन की बीते दिनों आई रिपोर्ट के मुताबिक, खुद पाकिस्तान के पूर्व वित्त मंत्री पूर्व वित्त मंत्री हाफिज पाशा ने चेतावनी दी है कि अगर ये युद्ध जारी रहा और क्रूड प्राइस 100 डॉलर के पार बने रहे, तो Pakistan GDP पर 1-1.5% का निगेटिव इम्पैक्ट पड़ सकता है. पेट्रोलियम आयात में बढ़ोतरी के चलते अगले साल पाकिस्तान को 12-14 अरब डॉलर का नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने एक और संकट की ओर इशारा करते हुए कहा कि अगर कच्चे तेल की कीमतें रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine War) के बराबर 120 डॉलर के हाई पर पहुंचती हैं, तो पाकिस्तान में महंगाई कोहराम मचा सकती है और फिर उसी दौर के करीब 30% पर पहुंच सकती है. उस समय लोग आटा, दाल के लिए अपनी जान पर खेलते नजर आए थे, तो वहीं अब फिर से फ्यूल की कमी पाकिस्तान का तेल निकालती नजर आ रही है। पाकिस्तान में मिडिल ईस्ट की जंग के ताजा असर की बात करें, तो पाकिस्तान के ब्‍यूरो ऑफ स्‍टैटिस्टिक्‍स के साप्ताहिक महंगाई के आंकड़े के मुताबिक, बीते 11 मार्च को समाप्त सप्ताह में महंगाई सूचकांक SPI सालाना आधार पर 6.44% बढ़ गया. पेट्रोल और हाई स्पीड डीजल के दाम बढ़ने के साथ ही खाद्य पदार्थों की महंगाई दर में तेज इजाफा हुआ है. ब्रेड, दूध से लेकर आटा-दाल-चावल तक खाने-पीने की तमाम चीजों के दाम बेतहाशा बढ़े हैं। अफगानिस्तान से युद्ध ने बढ़ाई मुसीबत पहले से ही बदहाल पाकिस्तान के लिए मुसीबत अफगानिस्तान के साथ चल रहे उसके युद्ध ने और भी बढ़ा दी है. हालांकि, ये संघर्ष 2025 के अंत में ही सीमा पर तनाव बढ़ने के बाद शुरू हो गया था और अब ये भीषण रूप ले चुका है. युद्ध की टेंशन में आयात और निर्यात सुस्त पड़ गया है. सीमा पर तनाव ने जरूरी सामानों की आवाजाही बाधित कर दी है, जिससे पाकिस्तान में तमाम जरूरी चीजों के दाम में तेज इजाफा हुआ है और देश के लोगों पर महंगाई की तगड़ी मार पड़ रही है। खासतौर पर तोरखम और चमन जैसे बॉर्डर रूट्स बंद होने से ताजे सामान बंद हो गए हैं, तो वहीं पाकिस्तान में कारोबारियों की मुसीबत को अफगान कोयले की कमी ने बढ़ा दिया है. सीमेंट निर्माता कंपनियों की टेंशन भी कोयले की आपूर्ति बंद होने से चरम पर पहुंच गई है।

उत्तराखंड में 160KM के 51 रोपवे बनेंगे, 2026 से शुरू होंगे 4 प्रमुख प्रोजेक्ट्स

 देहरादून उत्तराखंड में पर्यटन और तीर्थ यात्रा को आसान बनाने के लिए सरकार ने बड़ा मास्टर प्लान तैयार किया है। राज्यभर में 51 रोपवे प्रोजेक्ट्स विकसित किए जाएंगे, जिनकी कुल लंबाई करीब 160.75 किलोमीटर होगी। 2026 से शुरू होंगे मेगा प्रोजेक्ट्स इन परियोजनाओं में से कुछ पर काम तेजी से चल रहा है, जबकि केदारनाथ और हेमकुंड साहिब सहित 4 बड़े रोपवे प्रोजेक्ट्स पर 2026 से निर्माण कार्य शुरू करने की तैयारी है। इंटरहेडिंग के बाद पूरे क्रम में समझें तो, कई अन्य प्रोजेक्ट्स अभी DPR और प्री-फिजिबिलिटी स्टडी के चरण में हैं, जिन्हें उत्तराखंड रोपवे डेवलपमेंट लिमिटेड के जरिए आगे बढ़ाया जा रहा है। दुर्गम इलाकों तक आसान होगी पहुंच उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड के इंफ्रास्ट्रक्चर निदेशक दीपक खंडूरी के अनुसार, रोपवे उन क्षेत्रों तक पहुंच का बेहतर विकल्प हैं जहां सड़क बनाना कठिन है। इससे तीर्थ यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। देहरादून-मसूरी रोपवे जल्द होगा शुरू देहरादून से मसूरी तक बनने वाला 5.5 किलोमीटर लंबा रोपवे प्रमुख परियोजनाओं में शामिल है। करीब 285 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस प्रोजेक्ट का लगभग 70% काम पूरा हो चुका है। इस रोपवे में 10 यात्रियों की क्षमता वाले 71 केबिन होंगे और सफर करीब 20 मिनट में पूरा होगा। इसे इस साल के अंत तक शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।     5.5 किलोमीटर का देहरादून-मसूरी रोपवे: देहरादून के पुरकुल से मसूरी के लाइब्रेरी चौक तक बनने वाला यह रोपवे राज्य के प्रमुख प्रोजेक्ट्स में शामिल है। करीब 285 करोड़ रुपए की लागत से इसका निर्माण किया जा रहा है। परियोजना का लगभग 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। इसमें 10 यात्रियों की क्षमता वाले 71 केबिन लगाए जाएंगे और देहरादून से मसूरी तक का सफर करीब 20 मिनट में पूरा होगा। इसे इस साल के अंत तक शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।     0.93 KM का ठुलीगाड़-पूर्णागिरी मंदिर रोपवे: चंपावत जिले में पूर्णागिरी मंदिर तक पहुंच आसान बनाने के लिए यह रोपवे बनाया जा रहा है। करीब 35 करोड़ रुपये की लागत वाली इस योजना का निर्माण कार्य जारी है। इसे 30 मई 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।     4.9 किलोमीटर का तपोवन-कुंजापुरी रोपवे: टिहरी में प्रस्तावित इस रोपवे के लिए मई 2025 में एक स्विस तकनीकी कंपनी को तकनीकी सहयोग के लिए चुना गया है। करीब 4.9 किलोमीटर लंबे इस रोपवे के लिए फिलहाल भूमि सर्वेक्षण और अंतिम मार्ग तय करने का काम चल रहा है। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद आगे निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।     3.38 किलोमीटर का जानकीचट्टी-यमुनोत्री मंदिर रोपवे: यमुनोत्री धाम तक पहुंच आसान बनाने के लिए यह रोपवे बनाया जा रहा है। करीब 167 करोड़ रुपए की लागत वाली इस योजना के लिए फरवरी 2023 में निर्माण एजेंसी के साथ समझौता किया गया था। मार्ग के एलाइनमेंट में बदलाव के प्रस्ताव के कारण फिलहाल शासन स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। लक्ष्य है कि निर्माण पूरा कर 1 सितंबर 2027 तक रोपवे शुरू कर दिया जाए।     12.9 किलोमीटर का गौरीकुंड-केदारनाथ रोपवे: रुद्रप्रयाग जिले में बनने वाले इस रोपवे का ठेका अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड को दिया गया है। इसके लिए 9 नवंबर 2025 को अनुबंध पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं। 4081.28 करोड़ रुपए की लागत वाली इस परियोजना में कंपनी राज्य सरकार को राजस्व का 42 प्रतिशत हिस्सा देगी। इसका निर्माण कार्य मई 2026 में शुरू कर मई 2032 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।     12.4 किलोमीटर का गोविंदघाट-हेमकुंड साहिब रोपवे: चमोली जिले में बनने वाले इस रोपवे का जिम्मा विश्व समुद्र इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड को सौंपा गया है। 2730.13 करोड़ रुपए की लागत वाली इस योजना में कंपनी सरकार को 45 प्रतिशत राजस्व देगी। इसका निर्माण कार्य मई 2026 में शुरू कर मई 2032 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। उत्तराखंड के लिए गेम-चेंजर साबित होंगे रोपवे उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड के इंफ्रास्ट्रक्चर निदेशक दीपक खंडूरी ने इन परियोजनाओं के दूरगामी फायदों पर प्रकाश डाला है। उनके अनुसार रोपवे के माध्यम से उन दुर्गम पहाड़ियों तक आसानी से पहुंचा जा सकेगा, जहां सड़क मार्ग बनाना भौगोलिक और पर्यावरणीय दृष्टि से कठिन है। केदारनाथ, यमुनोत्री और हेमकुंड साहिब जैसे कठिन ट्रेक वाले स्थानों पर बुजुर्गों और बीमार यात्रियों को सुरक्षित और आरामदायक सफर मिलेगा। पहाड़ों पर वाहनों के धुएं से प्रदूषण बढ़ रहा है। प्रमुख रोपवे प्रोजेक्ट्स की झलक केदारनाथ रोपवे गौरीकुंड से केदारनाथ तक 12.9 किमी लंबा रोपवे बनाया जाएगा। इस प्रोजेक्ट की लागत करीब 4081 करोड़ रुपये है और इसका ठेका Adani Enterprises Limited को दिया गया है। निर्माण कार्य मई 2026 से शुरू होकर 2032 तक पूरा होगा। हेमकुंड साहिब रोपवे गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक 12.4 किमी लंबा रोपवे बनेगा। इसकी लागत करीब 2730 करोड़ रुपये है और इसे 2032 तक पूरा करने का लक्ष्य है। यमुनोत्री रोपवे जानकीचट्टी से यमुनोत्री मंदिर तक 3.38 किमी लंबा रोपवे प्रस्तावित है। इसे 2027 तक शुरू करने की योजना है। अन्य प्रोजेक्ट्स टिहरी में तपोवन-कुंजापुरी रोपवे और चंपावत में पूर्णागिरी मंदिर रोपवे पर भी काम जारी है। कई परियोजनाएं सर्वे और योजना के चरण में हैं। पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा रोपवे प्रोजेक्ट्स से न केवल यात्रा आसान होगी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। साथ ही, पहाड़ों में वाहनों की संख्या कम होने से प्रदूषण में कमी आएगी। PPP मॉडल पर हो रहा निर्माण ये सभी परियोजनाएं पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर विकसित की जा रही हैं। इसमें निजी कंपनियां निवेश करती हैं और संचालन करती हैं, जबकि सरकार को तय हिस्सा राजस्व के रूप में मिलता है। इंटरहेडिंग के बाद पूरे क्रम में समझें तो, किसी भी रोपवे प्रोजेक्ट से पहले प्री-फिजिबिलिटी स्टडी और डीपीआर तैयार की जाती है, जिसके बाद निर्माण प्रक्रिया शुरू होती है। उत्तराखंड के लिए गेम-चेंजर योजना विशेषज्ञों का मानना है कि ये रोपवे प्रोजेक्ट्स उत्तराखंड के लिए गेम-चेंजर साबित होंगे। खासतौर पर बुजुर्गों और बीमार यात्रियों के लिए केदारनाथ और हेमकुंड साहिब जैसे कठिन रास्तों की यात्रा अब आसान और सुरक्षित हो जाएगी।

हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा, असम में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में 86.5% की कमी आई

गुवाहाटी   असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बुधवार को कहा कि उनकी सरकार के सत्ता में आने के बाद से राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में 86.5 प्रतिशत की कमी आई है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि उनकी सरकार ने महिलाओं के खिलाफ अपराधों को रोकने के लिए निरंतर उपाय किए हैं, हालांकि ऐसे मामलों को पूरी तरह से समाप्त करने तक प्रयास जारी रहेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा, "माताओं और बहनों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। यही कारण है कि हमारी सरकार के सत्ता में आने के बाद से महिलाओं के खिलाफ अपराधों में भारी कमी आई है। लेकिन हम तब तक चैन से नहीं बैठेंगे जब तक हम यह सुनिश्चित नहीं कर लेते कि एक दिन महिलाओं के खिलाफ अपराध शून्य हो जाएं।" सरमा ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों में 86.5 प्रतिशत की गिरावट आई है, जिसका श्रेय उन्होंने मजबूत कानून प्रवर्तन और लक्षित हस्तक्षेपों को दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने पुलिस व्यवस्था में सुधार, निगरानी तंत्र को मजबूत करने और महिलाओं की सुरक्षा से संबंधित कानूनों के सख्त कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित किया है। अधिकारियों ने कहा कि असम पुलिस ने हाल के वर्षों में महिलाओं के खिलाफ अपराधों से निपटने के लिए अपने प्रयासों को तेज किया है, जिसमें मामलों की तेजी से जांच, गश्त में वृद्धि और अपराधों की रिपोर्टिंग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से जागरूकता अभियान शामिल हैं। सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा और संरक्षा में सुधार लाने के उद्देश्य से कई पहलें भी शुरू की हैं, जिनमें महिला पुलिस स्टेशनों को मजबूत करना, समर्पित कर्मियों की तैनाती करना और बेहतर निगरानी के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाना शामिल है। शर्मा ने दोहराया कि अपराध के आंकड़ों में गिरावट उत्साहजनक है, लेकिन सरकार पूरे राज्य में महिलाओं की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना समग्र सामाजिक विकास के लिए आवश्यक है और प्रशासन अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करना जारी रखेगा। मुख्यमंत्री की ये टिप्पणी असम में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले बेहतर कानून व्यवस्था और सुशासन के परिणामों को प्रदर्शित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे निरंतर प्रयासों के बीच आई है।

इजरायल का बड़ा हमला! खुफिया मंत्री खतिब के मारे जाने का दावा, मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव

तेल अवीव इजरायल के रक्षा मंत्री ने दावा किया है कि ईरान के एक और शीर्ष नेता की एयर स्ट्राइक में मौत हो गई है। उनके अनुसार, मंगलवार रात हुए हमले में खुफिया मंत्री इस्माइल खतिब मारे गए। इजरायली रक्षा मंत्रालय के कार्यालय ने काट्ज का बयान जारी कर इसकी जानकारी दी है। हालांकि, ईरान ने अब तक इसकी पुष्टि नहीं की है। कार्ट्ज ने कहा है कि बुधवार को 'बड़े सरप्राइज' मिलने की उम्मीद है। मीडिया ने इजराइल काट्ज के बयान के हवाले से बताया कि ईरान के खुफिया मंत्री, इस्माइल खतिब, बीती रात तेहरान में एक इजरायली हवाई हमले में मारे गए; उन्होंने यह भी कहा कि आज "बड़े सरप्राइज" मिलने की उम्मीद है। उन्होंने एक सुरक्षा समीक्षा बैठक के दौरान इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा, "आज के दिन, सभी मोर्चों पर बड़े सरप्राइज मिलने की उम्मीद है, जिससे ईरान और लेबनान में हिज्बुल्लाह के खिलाफ हमारी लड़ाई और तेज हो जाएगी।" उन्होंने कहा, "ईरान में हमलों की तीव्रता बढ़ रही है। ईरान के खुफिया मंत्री खतिब को भी बीती रात मार गिराया गया।" काट्ज ने कहा कि उन्होंने और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने "आईडीएफ को किसी भी शीर्ष ईरानी अधिकारी को (मार गिराने) का अधिकार दे दिया है… जिसके लिए अब किसी अतिरिक्त मंजूरी की जरूरत नहीं होगी।" इससे पहले इजरायली मीडिया ने सूत्रों के आधार पर खतिब के मारे जाने की जानकारी दी थी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ईरान पर हुए हालिया हवाई हमलों में ईरान के खुफिया मंत्री इस्माइल खतिब को निशाना बनाया गया। साथ में ये भी कहा था कि इस ऑपरेशन के नतीजों का अभी आकलन किया जा रहा है और यह स्पष्ट नहीं है कि हमले में क्या नुकसान हुआ या लक्ष्य सफल हुआ या नहीं। एक दिन पहले ही इजरायल ने ईरान के सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी और बसीज कमांडर गुलामरेजा सुल्तानी को निशाना बनाया था, जिसमें दोनों अधिकारियों की मौत हो गई थी।

पाकिस्तान पर अफगानिस्तान का आरोप, विदेश मंत्री ने कूटनीतिज्ञों से कहा– सच उजागर करें

काबुल अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी ने बुधवार को विदेशों में स्थित अफगान दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों के राजनयिकों संग वर्चुअल बैठक की। इस बैठक में उन्होंने राजनयिकों को काबुल के स्पष्ट रुख, नीति और भविष्य की कार्ययोजना के संबंध में आवश्यक निर्देश और मार्गदर्शन दिए। यह बैठक पाकिस्तान द्वारा एक नशा मुक्ति अस्पताल पर की गई घातक बमबारी की घटना के बाद हुई, जिसमें सैकड़ों लोगों की जान चली गई थी। अफगान विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस बैठक में मंत्री ने पाकिस्तानी सैन्य शासन द्वारा अफगानिस्तान की राष्ट्रीय संप्रभुता के खिलाफ की गई आक्रामकता और हाल की घटनाओं के बारे में जानकारी साझा की। काबुल द्वारा जारी एक बयान में कहा गया, "उन्होंने इस क्रूर हमले की कड़ी निंदा की और इसे मानवीय सिद्धांतों का स्पष्ट उल्लंघन बताया। मुत्ताकी ने सभी प्रतिनिधिमंडलों के अधिकारियों को देश की ताजा स्थिति के संबंध में इस्लामिक अमीरात के रुख को अंतरराष्ट्रीय समुदाय तक पहुंचाने की अपील की।" बयान में आगे कहा गया, "देश के विदेश मंत्री ने अपने प्रतिनिधिमंडल को इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान के स्पष्ट रुख, नीति और भविष्य की कार्रवाइयों के संबंध में आवश्यक निर्देश और मार्गदर्शन दिया। बैठक का समापन पाकिस्तानी शासन की बमबारी में मारे गए शहीदों को श्रद्धांजलि के साथ हुआ।" मंगलवार को, मुत्ताकी ने काबुल पर पाकिस्तानी हवाई हमले को मानवीय और इस्लामी सिद्धांतों का गंभीर उल्लंघन बताया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी हमले में 408 से ज्यादा लोग मारे गए और 260 से ज्यादा घायल हो गए; इनमें से अधिकतर एक नशा मुक्ति केंद्र में इलाज करवा रहे मरीज थे। उन्होंने पाकिस्तान पर जान-बूझकर नागरिक सुविधाओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया। काबुल में विभिन्न संगठनों के राजनयिकों और प्रतिनिधियों से बात करते हुए, मुत्ताकी ने कहा कि पाकिस्तानी हवाई हमले ने समाज के सबसे कमजोर तबकों में से एक को निशाना बनाया—ऐसे लोग जो नशे की लत के इलाज के लिए उपचार ले रहे थे। उन्होंने कहा कि फरवरी से लगातार हो रहे हमलों, जिनमें अफगानिस्तान के विभिन्न हिस्सों में नागरिक इलाकों पर किए गए हमले भी शामिल हैं, ने कूटनीतिक समाधानों पर भरोसे को कम कर दिया है। एरियाना न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने चेतावनी दी कि अगर हमले जारी रहे तो अफगान सेना "उसी अनुपात में और वैध" रक्षात्मक जवाबी कार्रवाई जारी रखेगी; उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अफगानिस्तान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अपनी संप्रभुता और अपने क्षेत्र की रक्षा जरूर करेगा। मुत्ताकी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान के हमले की निंदा करने का आग्रह किया, और चेतावनी दी कि इस्लामाबाद द्वारा लगातार तनाव बढ़ाने से पूरे क्षेत्र में अस्थिरता फैलने और प्रमुख आर्थिक व विकास पहलों पर बुरा असर पड़ने का खतरा है। इस बीच, अफगानिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत और विशेष प्रतिवेदक रिचर्ड बेनेट ने बुधवार को, काबुल में एक नशा मुक्ति केंद्र पर पाकिस्तान द्वारा किए गए हवाई हमले की तत्काल, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की मांग की है। उन्होंने यह भी मांग की कि पीड़ितों और उनके परिवारों को मुआवजा दिया जाए।

संसद में गूंजा ‘सरके चुनर तेरी’ विवाद, अश्विनी वैष्णव का बड़ा बयान—गाने पर बैन

मुंबई  बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने हाल ही में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। समिति के अनुसार, केदारनाथ और बद्रीनाथ समेत कई मंदिरों में गैर-सनातनियों के प्रवेश को वर्जित किया जाएगा। अब केवल वही गैर-हिंदू मंदिर में प्रवेश कर पाएंगे, जो प्रवेश से पहले सनातन धर्म में आस्था का औपचारिक शपथ पत्र जमा करते हैं, जिससे मंदिर में दर्शन की अनुमति मिलेगी। फैसले को लेकर मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने उदाहरण देते हुए अभिनेत्री सारा अली खान का नाम जोड़ा। उन्होंने कहा कि अगर सारा अली खान जैसी हस्ती भी केदारनाथ आती हैं, सनातन में अपनी आस्था जताती हैं और अगर एफिडेविट देती हैं, तो उन्हें दर्शन से नहीं रोका जाएगा। अभिनेत्री अक्सर केदारनाथ के दर्शन के लिए जाती रहती हैं। साल 2018 में उन्हें अपनी पहली फिल्म 'केदारनाथ' की शूटिंग के दौरान इस स्थान से विशेष लगाव हो गया था। बुधवार को भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने संसद परिसर आईएएनएस से बातचीत में कहा कि सारा को यह कहने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए क्योंकि वे भी सनातन धर्म में विश्वास रखती हैं और अगर बद्रीनाथ और केदारनाथ में दर्शन करना चाहती हैं, तो वे लिखित रूप में दें। यहां पर सभी लोग सनातनी हैं, क्योंकि जन्म से ही हम इस परंपरा से जुड़े हुए हैं। 'सनातन' का अर्थ है, जिसका न कोई आदि है और न ही अंत। कंगना ने आगे कहा कि सारे अन्य धर्म कुछ ही साल पुराने हैं, लेकिन सनातन ही सत्य है और अनादि-अनंत है, तो मुझे लगता है कि सारा को शपथ पत्र देने में कोई घबराहट नहीं होनी चाहिए। अभिनेत्री ने आगे लोकसभा के नेता विपक्ष राहुल गांधी के व्यवहार पर बयान दिया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का संसद में व्यवहार अमर्यादित है। कंगना ने कहा, "वे तू-तड़ाक करके बोलते हैं। अगर कोई इंटरव्यू दे रहा हो तो अनुचित शब्द इस्तेमाल करते हैं, जो बहुत अनकम्फर्टेबल फील करवाते हैं।" संसद पहुंचा 'सरके चुनर तेरी' सॉन्ग विवाद, अश्विनी वैष्णव बोले- गाने पर लगाया बैन केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कहा कि नोरा फतेही के विवादित गाने 'सरके चुनर तेरी सरके' पर बैन लगा दिया गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी उचित पाबंदियों के दायरे में ही होनी चाहिए, जो समाज और संस्कृति का सम्मान करती हों। लोकसभा में बोलते हुए वैष्णव ने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी पूरी तरह से असीमित नहीं हो सकती। उन्होंने कहा, 'इस गाने पर बैन लगा दिया गया है। हमें बोलने की आजादी के तहत तय की गई उचित पाबंदियों के हिसाब से ही काम करना चाहिए। बोलने की आजादी पूरी तरह से असीमित नहीं हो सकती; इसे समाज और संस्कृति के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।' दरअसल, यह मुद्दा निचले सदन में समाजवादी पार्टी के सांसद आनंद भदौरिया ने उठाया था। उन्होंने सरकार से इस विवादित गाने के बारे में स्पष्टीकरण मांगा था।   क्या है गाने पर विवाद? इस गाने में एक्ट्रेस नोरा फतेही और संजय दत्त नजर आए थे। यह गाना आने वाली कन्नड़ फिल्म 'केडी: द डेविल' का है। ऑनलाइन रिलीज होते ही यह गाना एक बड़े विवाद में घिर गया था। कई दर्शकों ने इसके लिरिक्स को अब तक का सबसे अश्लील और इसके सीन को काफी सेक्शुअल बताते हुए इस पर आपत्ति जताई। इस गाने का हिंदी वर्जन इसी हफ्ते की शुरुआत में यूट्यूब पर अपलोड किया गया था। गाने पर विरोध तेज होने पर इसे बाद में हटा दिया गया। हालांकि  कन्नड़, मलयालम, तेलुगु और तमिल भाषाओं वाले वर्जन अभी भी वीडियो-शेयरिंग प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। यह फिल्म 30 अप्रैल को रिलीज होने वाली है और ये एक पैन इंडिया रिलीज है। इस गाने के ओरिजिनल लिरिक्स कन्नड़ भाषा में फिल्म के डायरेक्टर प्रेम ने लिखे थे। हिंदी वर्जन के गीतकार रकीब आलम ने इस विवाद से खुद को अलग कर लिया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने तो बस ओरिजिनल बोलों को ट्रांसलेट किया था।  

आम आदमी को राहत: नॉन-एसी कोच बढ़ाने के साथ रेलवे दे रहा भारी सब्सिडी

नई दिल्ली भारतीय रेलवे यात्रियों को किफायती यात्रा उपलब्ध कराने के लिए नॉन-एसी जनरल और स्लीपर कोच की संख्या बढ़ा रहा है। सरकार के अनुसार, किराए को कम रखने के लिए प्रति यात्री औसतन करीब 45 प्रतिशत की सब्सिडी दी जा रही है। रेल मंत्रालय के मुताबिक, कुल कोचों में करीब 70 प्रतिशत जनरल और स्लीपर क्लास के हैं। इसके अलावा, 2024-25 में लगभग 1,250 नए जनरल कोच जोड़े गए हैं और 2025-26 में करीब 860 और कोच जोड़े जाने की योजना है। रेलवे हर साल यात्रियों को करीब 60,000 करोड़ रुपए की सब्सिडी देता है। वहीं, मुंबई जैसे उपनगरीय इलाकों के लिए करीब 3,000 करोड़ रुपए की अतिरिक्त सब्सिडी दी जाती है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि माल ढुलाई (फ्रेट) में भी बड़ा इजाफा हुआ है। यह 2013-14 के 1,055 मिलियन टन से बढ़कर अब लगभग 1,650 मिलियन टन हो गया है, जिससे भारतीय रेलवे दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा फ्रेट कैरियर बन गया है। उन्होंने कहा कि रेलवे का विद्युतीकरण तेजी से बढ़ा है और अब लगभग 47,000 किलोमीटर ट्रैक इलेक्ट्रिफाई हो चुका है, यानी नेटवर्क का 99 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा बिजली से चल रहा है। ट्रैक निर्माण में भी तेजी आई है। पहले जहां करीब 15,000 किलोमीटर ट्रैक बनाए गए थे, वहीं अब यह बढ़कर करीब 35,000 किलोमीटर हो गया है। सुरक्षा के लिहाज से भी रेलवे ने बड़ा काम किया है। रोड ओवर ब्रिज (आरओबी) और रोड अंडर ब्रिज (आरयूबी) की संख्या करीब 4,000 से बढ़कर 14,000 हो गई है। वहीं, ऑटोमैटिक सिग्नलिंग 1,500 किलोमीटर से बढ़कर 4,000 किलोमीटर से ज्यादा हो गई है। रेल मंत्री ने बताया कि सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है, जिसके तहत ट्रैक और ट्रेन (रोलिंग स्टॉक) की मेंटेनेंस, नई तकनीक और कर्मचारियों की ट्रेनिंग पर खास ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि एलएचबी कोच (ज्यादा सुरक्षित कोच) की संख्या तेजी से बढ़ी है और हाल के वर्षों में करीब 48,000 कोच जोड़े गए हैं। इसके अलावा, लोकोमोटिव (इंजन) की संख्या करीब 12,000 तक पहुंच गई है और वैगन (माल ढुलाई डिब्बे) की संख्या 2 लाख से ज्यादा हो गई है। सरकार ने परियोजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नीति आयोग और वित्त मंत्रालय के साथ मिलकर एक मजबूत सिस्टम बनाया है। रेल मंत्री ने बताया कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) में भी तेजी से काम हुआ है। अब तक करीब 2,800 किलोमीटर कॉरिडोर तैयार हो चुका है, जहां रोजाना लगभग 480 मालगाड़ियां चल रही हैं।