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भारत के लिए बड़ी राहत: विदेश से आई गुड न्यूज, वैश्विक तनाव भी धुएं में घुला

नई दिल्ली मिडिल ईस्ट युद्ध ने ग्लोबल टेंशन चरम पर पहुंचा दी थी. हालांकि, अब अमेरिका और ईरान में सीजफायर का ऐलान हो चुका है, लेकिन दूसरी ओर इसके टूटने की खबरें भी सुर्खियां बनी हुई है. बीते कुछ समय में वैश्विक संकट ने तमाम देशों का हाल-बेहाल किया, लेकिन फिर भी दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ती भारतीय अर्थव्यस्था पर इसका असर कम ही देखने को मिला।  अब विश्व बैंक ने भी इसे माना है और Global Tension के बावजूद भारत की जीडीपी ग्रोथ के अनुमान में इजाफा कर खुशखबरी दी है. World Bank ने कहा है कि इंडियन इकोनॉमी FY27 में 6.6 फीसदी की रफ्तार से भागेगी. बता दें कि कोरोना महामारी जैसे हालातों में भी भी भारत ने अपना दम दिखाया था और इस माहामारी के संकट से सबसे तेजी के साथ उबरी थी और दुनिया ने इसका लोहा माना था।  ग्लोबल टेंशन के बीच दी खुशखबरी वर्ल्ड बैंक ने बुधवार को अप्रैल 2026 के दक्षिण एशिया आर्थिक अपडेट को जारी करते हुए चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट का अनुमान बढ़ाकर 6.6% कर दिया है. इससे पहले अक्तूबर 2025 में वर्ल्ड बैंक ने 6.3% की ग्रोथ रेट का अनुमान जाहिर किया था. India GDP Growth Rate को लेकर नया अनुमान जाहिर करने के साथ ही वैश्विक निकाय ने वेस्ट एशिया संघर्ष से पैदा हुई चुनौतियों का हवाला देते हुए आर्थिक वृद्धि दर (India's Economic Growth Rate) FY26 में अनुमानित 7.6% से कम रहने की बात कही है।   वर्ल्ड बैंक ने ये चेतावनी भी दी  विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में India GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाने के साथ ही आगे कहा कि वस्तुओं और सेवाओं पर कर यानी GST Rates में कमी से FY27 की पहली छमाही में उपभोक्ता डिमांड को समर्थन मिलता रहेगा. हालांकि, इसके साथ ही चेतावनी दी कि वैश्विक ऊर्जा कीमतों में वृद्धि (Global Energy Price Hike) से कीमतों पर दबाव बढ़ेगा और परिवारों के खर्च करने की क्षमता सीमित होगी।  खाना पकाने के फ्यूल के साथ ही फर्टिलाइजर्स पर ज्यादा सब्सिडी के कारण सरकारी खपत में ग्रोथ धीमी होने की उम्मीद है. रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि बढ़ती ग्लोबल अनिश्चितता और इनपुट कॉस्ट में इजाफा होने के बीच इन्वेस्टमेंट ग्रोथ में कमी आ सकती है।  साउथ एशिया की ग्रोथ में कमी  विश्व बैंक के मुताबिक, वैश्विक ऊर्जा बाजारों में रुकावटों के चलते दक्षिण एशिया में ग्रोथ 2025 के 7% से घटकर 2026 में 6.3% रहने का अनुमान है. इस क्षेत्र की ग्रोथ कई तरह से प्रभावित हो सकती है। 

Assembly Election 2026: 9 बजे तक केरल, असम और पुडुचेरी में मतदान प्रतिशत की ताजा स्थिति

तिरुवनंतपुरम/ बरपेटा देश के तीन राज्यों असम, केरलम और पुडुचेरी में आज विधानसभा चुनाव के लिए सिंगल फेज में वोटिंग चल रही है। कुल 296 सीटों पर मतदान हो रहा है। सुबह 9 बजे तक असम में 17.87%, केरलम में 16.23% और पुडुचेरी में 17.41% मतदान हुआ। पुडुचेरी के सीएम CM रंगास्वामी वोट डालने के लिए पोलिंग बूथ तक मोटरसाइकिल से पहुंचे। यहां आने से पहले उन्होंने मंदिर में पूजा भी की। केरल के सीएम पिनाराई विजयन ने भी सुबह ही मतदान किया। असम के सीएम हिमंता ने गुवाहाटी में मां कामाख्या मंदिर में पूजा की है। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने डाला अपना वोट कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने जोरहाट के DCB गर्ल्स हाई स्कूल में बनाए गए एक मतदान केंद्र पर अपना वोट डाला। उन्होंने कहा, "लोगों में उत्साह की एक लहर है। हमें पूरा भरोसा है कि हम असम के आदर्शों और लोकतांत्रिक मूल्यों को अक्षुण्ण रखते हुए एक 'नया असम' बनाएंगे। असम सीएम ने मां कामाख्या के मंदिर में की पूजा-अर्चना असम के मुख्यमंत्री और जालुकबारी से उम्मीदवार हिमंत बिस्वा सरमा ने गुवाहाटी स्थित मां कामाख्या मंदिर में पूजा-अर्चना की। उन्होंने कहा, "आज असम में मतदान का दिन है। मुझे मतदान के दिन मां कामाख्या के दर्शन करने का सौभाग्य मिला। मैंने मां से प्रार्थना की कि असम समृद्ध हो और राज्य के लोग आगे बढ़ें।" चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, असम में सुबह 9 बजे तक 17.87 प्रतिशत मतदान हुआ है. वहीं, शुरुआती दो घंटों में पुडुचेरी में 17.41 प्रतिशत और केरल में 16.23 प्रतिशत वोट पड़े हैं।  असम में माजुली जिले में सबसे अधिक 20.03 प्रतिशत वोटिंग हुई है, मोरीगांव जिले में 19.96 प्रतिशत, दरांग में 19.74 प्रतिशत, गोलपाड़ा में 19.66 प्रतिशत और जोरहाट में 19.01 प्रतिशत मतदान हुआ है। सुबह 9 बजे तक असम के कामरूप जिले में सबसे कम 15.36 प्रतिशत वोट पड़े हैं।  वहीं, सुबह 9 बजे तक केरल के एर्नाकुलम जिले में सबसे अधिक 17.80 प्रतिशत और कासरगोड जिले में सबसे कम 15.08 प्रतिशत मतदान हुआ है।  बता दें कि केरल में 883 उम्मीदवार मैदान में हैं, यानी प्रति सीट औसतन छह से सात प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। यहां मतदाताओं की संख्या 27 लाख है, जो 30,000 से अधिक मतदान केंद्रों में फैले हुए हैं।  चार क्षेत्रों- पुडुचेरी, कराईकल, माहे और यानम से मिलकर बने केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में कुल 9.50 लाख से ज्यादा वोटर हैं। इनमें से 24,919 वोटर पहली बार वोट डालेंगे। कुल 294 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं।  असम विधानसभा चुनाव में कुल 722 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें 59 महिलाएं शामिल हैं। असम में लगभग 25.05 मिलियन पंजीकृत मतदाता हैं जो इन चुनावों में हिस्सा लेने के योग्य हैं। राज्य ने वोटिंग प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए 31,490 मतदान केंद्र बनाए हैं।  126 सदस्यों वाली असम विधानसभा के लिए यह चुनाव बेहद अहम है, जिसमें भाजपा अपनी सत्ता बरकरार रखने की कोशिश में है, जबकि कांग्रेस को सरकार में वापसी की उम्मीद है। यह चुनाव 2023 में इस पूर्वोत्तर राज्य में हुए परिसीमन के बाद पहला चुनाव होगा।  केरल की 140 विधानसभा सीटों पर चुनावों में तीन गठबंधनों के बीच मुकाबला है, जिसमें एलडीएफ, यूडीएफ और एनडीए आमने-सामने हैं। केरल का लेफ्ट फ्रंट लगातार पांचवीं बार सत्ता में आने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। हालांकि, इस बार माकपा के नेतृत्व वाले एलडीएफ के सामने सत्ता को बरकरार रखने की चुनौती है, क्योंकि कांग्रेस नीत यूडीएफ और भाजपा नीत एनडीए उसे कड़ी टक्कर दे रहे हैं।  पुडुचेरी में 30 सीटों के लिए मतदान हो रहा है। इस केंद्र शासित प्रदेश में अभी 'ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस' (AINRC) के नेतृत्व वाला गठबंधन सत्ता में है, जिसकी कमान मुख्यमंत्री एन. रंगासामी के हाथों में है और जिसे भाजपा का समर्थन प्राप्त है।  केरलम में 70 साल में पहली बार कोई सीएम हैट्रिक के लिए चुनाव लड़ रहा है। असम में बीजेपी हिमंता बिस्व सरमा के सहारे लगातार तीसरी बार सरकार बनाने का दांव खेल रही है। जबकि पुडुचेरी में कांग्रेस से निकले एन. रंगासामी पांचवी बार सत्ता में काबिज होने की कोशिश कर रहे हैं। असम में 126 सीट पर 41 पार्टियों के 722 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं केरलम में 2.71 करोड़ वोटर 890 उम्मीदवारों में से अपना नेता चुनेंगे। पुडुचेरी में 20 पार्टियां के 294 कैंडिडेट अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। तीनों राज्यों में करीब 10 लाख से ज्यादा वोटर्स पहली बार मतदान करेंगे। असम, केरलम, पुडुचेरी चुनाव से जुड़े अपडेट्स     केरलम तिरुवनंतपुरम में एक्टर मोहनलाल ने वोट किया। केरलम भाजपा के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने तिरुवनंतपुरम में वोट किया। वे नेमम सीट से चुनाव लड़ रहे हैं।     केरलम के सीएम पिनाराई विजयन ने कन्नूर में आरसी अमला बेसिक अपर प्राइमरी स्कूल में वोट डाला। केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद सुरेश गोपी ने त्रिशूर में मतदान किया।     असम के बरपेटा में सुबह से तेज बारिश के कारण वोटिंग में परेशानी आई। पुडुचेरी में रोबोट ने पोलिंग बूथ पर आने वाले वोटर्स का स्वागत किया। ईसरो के पूर्व वैज्ञानिक मंबी नारायणन ने डाला अपना वोट इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नंबी नारायणन ने तिरुवनंतपुरम के ईनचक्कल एलपी स्कूल में अपना वोट डाला। 'इस सरकार को जाना ही होगा', बोले केसी. वेणुगोपाल अपना वोट डालने के बाद कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा, "हम 100 सीटों का आंकड़ा पार करने जा रहे हैं। मेरा यही अनुमान है। पिछले दो-तीन दिनों में कई खुलासे सामने आए हैं। इसलिए, मुझे लगता है कि सरकार पूरी तरह से बैकफुट पर है। मुख्यमंत्री और सरकार के खिलाफ स्पष्ट रूप से सत्ता-विरोधी लहर है और यह दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। केरल की जनता यह तय करेगी कि इस मुख्यमंत्री को जाना होगा और इस सरकार को भी जाना होगा। यूडीएफ इस राज्य के आम लोगों के लिए बेहतरीन गारंटियों का वादा कर रहा है। लोग उन गारंटियों पर भरोसा करेंगे और हमें वोट देंगे।" असम में भाजपा उम्मीदवार विजय कुमार गुप्ता ने डाला अपना वोट भाजपा उम्मीदवार विजय कुमार गुप्ता ने गुवाहाटी में अपना वोट डाला और नागरिकों से 'लोकतंत्र के उत्सव' में भाग लेने का आग्रह किया। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने डाला अपना वोट कांग्रेस महासचिव (संगठन) और … Read more

होर्मुज तनाव समाप्त, रूस के बाद अब भारत को मिल रही तेल की बड़ी खेप

नई दिल्‍ली मिडिल ईस्‍ट में जंग के कारण तेल संकट पैदा हुआ है, जिस कारण कई देशों में तेल की कीमतें आसमान पर पहुंच चुकी है. अभी ब्रेंट क्रूड ऑयल 112 डॉलर के करीब आ चुका है. इस बीच, भारत ने अपने कच्‍चे तेल के आयात में विविधता लाया है. भारत ईरानी और रूसी तेल की खरीद तो कर ही रहा है. इस बीच खबर है कि भारत को वेनेजुएला से एक बड़ी खेप मिल रही है।  कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म केप्लर के अनुसार, दक्षिण अमेरिकी देश से पिछली खेप आने के लगभग एक साल बाद, इस महीने लगभग 10-12 मिलियन बैरल वेनेजुएला का कच्चा तेल भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने की उम्मीद है. वेनेजुएला से कच्चे तेल की खरीद फिर से शुरू होना ऐसे समय में हुआ है, जब भारतीय रिफाइनर कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर विकल्पों में विविधता ला रही हैं।  रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल में आने वाले कार्गो को हालिया रुकावट से काफी पहले ही सुरक्षित कर लिया गया था, जो एक लंबे समय की रणनीतिक बदलाव को दिखाता है. अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण रोक लगने से पहले वेनेजुएला का कच्चे तेल का आयात औसतन 1.9 मिलियन बैरल था।  भारत के लिए बेहतर विकल्‍प है वेनेजुएला  वेनेजुएला भारत के लिए तेल का नया मार्केट है, जो भारत का एक बड़ा विकल्‍प देता है. खासकर होर्मुज रास्‍ता बंद होने के बाद से भारत के कच्‍चे तेल की आपूर्ति पूरी कर सकता है और भारत में तेल की कीमतें स्थिर रह सकती हैं और युद्ध का प्रभाव कम हो सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि वेनेजुएला से तेल आने पर इनमें से कुछ माल कोच्चि बंदरगाह पर उतारे जा सकते हैं, जहां बीपीसीएल की रिफाइनरी है।  हर तरफ से भारत के पास आ रहा तेल गौरतलब है कि अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर कंट्रोल के बाद भारतीय रिफाइनरियों और अमेरिका के बीच वेनेजुएला से तेल खरीदने की डील हुई है, जिसके तहत पहली खेप भारत आ रही है. इसके साथ ही अमेरिका द्वारा रूस और ईरानी तेल पर से प्रतिबंध हटाने के बाद भारत रूसी और ईरानी तेल खरीद रहा है. इसके साथ ही भारत अफ्रीकी देशों से भी तेल की आपूर्ति कर रहा है, जिसमें से प्रमुख देश अंगोल है।  क्‍यों खास है वेनेजुएला का तेल  वेनेजुला में दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार मौजूद हैं. यह एक हैवी और एक्‍स्‍ट्रा हैवी क्रूड ऑयल की बड़ी मात्रा रखता है. यह तेल भले ही रिफाइन करना थोड़ा महंगा पड़ता है, लेकिन इसकी उपलब्धता बहुत अधिक है, इसलिए लंबी अवधि में यह सप्लाई के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है। 

‘सुपर एल नीनो’ का कहर: सूखा, बाढ़ और हीटवेव से दुनिया परेशान, भारत के मानसून पर होगा असर

 नई दिल्ली  प्रशांत महासागर में बन रहा एल नीनो इस साल दुनिया के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह एल नीनो बेहद ताकतवर हो सकता है, जो मौसम के पैटर्न को बदलकर कई देशों में सूखा, बाढ़ और गर्मी बढ़ा सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस समय प्रशांत महासागर में तेजी से गर्मी बढ़ रही है, जिससे एल नीनो बनने के संकेत मिल रहे हैं। यूरोपीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र के ताजा अनुमान के मुताबिक, इस साल सुपर एल नीनो बनने की संभावना काफी ज्यादा है। अगर ऐसा होता है, तो यह सिर्फ एक सामान्य जलवायु बदलाव नहीं होगा, बल्कि इसका असर कई सालों तक रह सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसका प्रभाव 2027 तक वैश्विक तापमान को बढ़ा सकता है। एल नीनो तब बनता है जब प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है। यह बदलाव छोटा लगता है, लेकिन इससे हवा की दिशा, बारिश और मौसम के पूरे सिस्टम में बड़ा बदलाव आ जाता है। कब बनता है 'सुपर एल नीनो' जब समुद्र का तापमान सामान्य से करीब 2 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा बढ़ जाता है, तब इसे 'सुपर एल नीनो' कहा जाता है। ऐसे मजबूत एल नीनो हर 10 से 15 साल में एक बार आते हैं, लेकिन जब आते हैं तो उनका असर ज्यादा बड़ा और लंबा होता है। अभी के मॉडल्स बता रहे हैं कि तापमान 1997-98 और 2015-16 जैसे बड़े एल नीनो के स्तर तक पहुंच सकता है। कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि यह पिछले 100 सालों में सबसे ताकतवर एल नीनो में से एक हो सकता है। हालांकि, हर एल नीनो एक जैसा नहीं होता और इसके असर अलग-अलग जगहों पर अलग तरह से दिखते हैं। भारत और दुनिया पर असर भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता मानसून को लेकर है। मजबूत एल नीनो के दौरान अक्सर बारिश कमजोर या असमान होती है, खासकर उत्तर और मध्य भारत में। इससे खेती, पानी की उपलब्धता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। दक्षिण-पूर्व एशिया और कैरेबियन के कुछ हिस्सों में सूखा और ज्यादा गर्मी पड़ सकती है। वहीं, दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट जैसे पेरू और इक्वाडोर में भारी बारिश और बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, प्रशांत महासागर में चक्रवात और तूफान बढ़ सकते हैं, जबकि अटलांटिक महासागर में तूफानों की संख्या कम हो सकती है। एजेंसी ने यह भी कहा है कि इस साल देश में सूखे की आशंका करीब 30 फीसदी तक है, जबकि 40 फीसदी संभावना ऐसी है कि बारिश सामान्य से कम ही रहे। अब सबकी नजर सरकारी मौसम विभाग India Meteorological Department (IMD) पर टिकी हुई हैं। कहा जा रहा है कि सरकारी मौसम विभाग इस महीने के आखिर तक मानसून को लेकर अपना पहला आधिकारिक अनुमान जारी कर सकता है।  किस महीने कितनी होगी बारिश? निजी मौसम एजेंसी स्काइमेट के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक 2026 के मानसून सीजन में बारिश का पैटर्न संतुलित नहीं रहेगा। चार महीनों के इस सीजन में सिर्फ जून में सामान्य बारिश की उम्मीद जताई गई है, जबकि बाकी महीनों में बारिश औसत से कम रहने का अनुमान जताया गया है। स्काइमेट के अनुसार जून में बारिश लॉन्ग पीरियड एवरेज यानी एलपीए का करीब 101 फीसदी रह सकती है। इस महीने के सामान्य रहने की संभावना 40 फीसदी है, जबकि 40 फीसदी संभावना इसे सामान्य से कम रहने की भी है। जून का एलपीए 165.3 मिमी है। जुलाई महीने में बारिश एलपीए के 95 फीसदी तक रहने का अनुमान है, यानी यह सामान्य से कम रह सकती है। जुलाई के लिए सामान्य और कम बारिश, दोनों की संभावना 40-40 फीसदी बताई गई है। इस महीने का एलपीए 280.5 मिमी है। अगस्त-सितंबर में बारिश का हाल अगस्त में भी बारिश की स्थिति कमजोर हो सकती है। स्काइमेट का अनुमान है कि इस महीने बारिश एलपीए के 92 फीसदी तक ही रह सकती है। अगस्त में कम बारिश होने की संभावना करीब 60 फीसदी बताई गई है। इस महीने का एलपीए 254.9 मिमी है। वहीं सितंबर में भी राहत के संकेत नहीं हैं। देशभर में औसत बारिश एलपीए के 89 फीसदी रहने का अनुमान है, जो सामान्य से कम श्रेणी में आता है। सितंबर में कम बारिश होने की संभावना सबसे ज्यादा 79 फीसदी बताई गई है। इस महीने का एलपीए 167.9 मिमी है। कुल मिलाकर स्काइमेट के शुरुआती अनुमान से साफ है कि 2026 के मानसून में जून को छोड़कर बाकी तीनों महीनों में बारिश सामान्य से कम रह सकती है। इससे खेती और जल संसाधनों पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है। अल नीनो की वापसी कमजोर मानसून का संकेत स्काईमेट के मैनेजिंग डायरेक्टर जतिन सिंह के मुताबिक, पिछले डेढ़ साल से सक्रिय 'ला नीना' की स्थिति अब समाप्त हो रही है। प्रशांत महासागर अब 'ईएनएसओ-न्यूट्रल' (ENSO-neutral) की ओर बढ़ रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मानसून के शुरुआती चरण में 'अल नीनो' (El Niño) के विकसित होने की संभावना है, जो सीजन के दूसरे भाग में और मजबूत हो सकता है। अल नीनो के कारण मानसून कमजोर पड़ सकता है और बारिश के वितरण में अनियमितता देखने को मिल सकती है। तापमान और मौसम का बढ़ता खतरा एल नीनो के कारण दुनिया के कई हिस्सों में तापमान बढ़ने की संभावना है। यूरोप, अफ्रीका, मिडिल ईस्ट, दक्षिण अमेरिका और अमेरिका के कुछ हिस्सों में ज्यादा और तेज हीटवेव देखने को मिल सकती हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि मजबूत एल नीनो वैश्विक तापमान को नए रिकॉर्ड तक पहुंचा सकता है। ऐसे में 2027 का साल बेहद गर्म हो सकता है। साथ ही, गर्म हवा ज्यादा नमी को रोककर रखती है, जिससे जब बारिश होती है तो वह ज्यादा तेज और भारी होती है। इससे कुछ जगहों पर अचानक बाढ़ का खतरा भी बढ़ जाता है, जबकि दूसरी जगहों पर सूखा बना रहता है। अभी भी बनी हुई है अनिश्चितता हालांकि संकेत मजबूत हैं, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी पूरी तरह निश्चित नहीं कहा जा सकता कि एल नीनो कितना ताकतवर होगा। आने वाले महीनों में इसके असर का सही अंदाजा लगेगा। अगर समुद्र का तापमान इसी … Read more

दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज की क्रिश्चियन मिशेल की रिहाई की याचिका, अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले में रहेगी सजा

नई दिल्ली दिल्ली हाईकोर्ट ने अगस्ता वेस्टलैंड घोटाला मामले के आरोपी क्रिश्चियन मिशेल की ओर से भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच हुए प्रत्यर्पण संधि को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दिया है।  जस्टिस नवीन चावला की अध्यक्षता वाली बेंच ने याचिका खारिज करने का आदेश दिया. इसके पहले 17 नवंबर 2025 को हाईकोर्ट ने मिशेल की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था. याचिका में मिशेल ने भारत और संयुक्त अरब अमीरात से हुई प्रत्यर्पण संधि को भारतीय संसद द्वारा बनाए गए प्रत्यर्पण कानून के अधीन घोषित करने की मांग की थी. याचिका में कहा गया था कि भारतीय प्रत्यर्पण कानून की धारा 21 के तहत किसी प्रत्यर्पित व्यक्ति के खिलाफ किसी दूसरे आरोपों के मामले पर मामला नहीं चलाया जा सकता है।  याचिका में कहा गया था कि संयुक्त अरब अमीरात के प्राधिकार की ओर से जारी प्रत्यर्पण आदेश का उल्लंघन कर भारतीय दंड संहिता की धारा 467 के तहत नए आरोप लगाए गए हैं. मिशेल की ओर से पेश वकील ने कोर्ट से कहा था कि नए आरोप लगाना देश के प्रत्यर्पण कानून का उल्लंघन है. मिशेल ने कहा था कि उसके खिलाफ जो आरोप लगाए गए हैं उसकी अधिकतम सजा वो भुगत चुका है. अधिकतम सजा के बाद भी उसे हिरासत में रखना संविधान के अनुच्छेद 21, 245 और 253 का उल्लंघन है।  बता दें कि राऊज एवेन्यू कोर्ट ने 13 अक्टूबर 2025 को मिशेल को रिहा करने की मांग खारिज कर दिया था. कोर्ट ने कहा था कि मिशेल के खिलाफ दर्ज एफआईआर में भारतीय दंड संहिता की धारा 467 लगाई गई है जिसमें उम्रकैद का प्रावधान है. ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता है कि उसने अपनी अधिकतम सजा पूरी कर ली है।  सुनवाई के दौरान ईडी ने मिशेल की याचिका का विरोध करते हुए कहा कि संयुक्त अरब अमीरात से हुई प्रत्यर्पण संधि की धारा 17 के मुताबिक अगर कोई आरोपी प्रत्यर्पित किया जाता है तो उस पर न केवल वही मुकदमा चलेगा जिसके लिए उसे प्रत्यर्पित किया गया है बल्कि दूसरे संबंधित मुकदमे भी चल सकते हैं।  बता दें कि मिशेल को अगस्ता हेलीकॉप्टर घोटाला मामले में सीबीआई और ईडी दोनों के मामले में जमानत मिल चुकी है. दिल्ली हाईकोर्ट ने 4 मार्च 2025 को मिशेल को मनी लाउंड्रिंग मामले में जमानत दी थी. सीबीआई से जुड़े मामले में मिशेल को सुप्रीम कोर्ट पहले ही जमानत दे चुका है।  दरअसल अगस्ता वेस्टलैंड से 12 हेलीकॉप्टरों की खरीद के मामले में 3600 करोड़ रुपए के घोटाले का मामला दर्ज किया गया है. सीबीआई के मुताबिक मिशेल ने इस घोटाले की कुछ रकम 2010 के बाद हासिल किया और कुछ 2010 के बाद. 3600 करोड़ रुपये के इस घोटाले में ईडी ने मिशेल को जनवरी 2019 में गिरफ्तार किया था. मिशेल को दुबई से प्रत्यर्पित कर 4 दिसंबर 2018 को भारत लाया गया था. 23 अक्टूबर 2020 को कोर्ट ने सीबीआई की ओर से दायर पूरक चार्जशीट पर संज्ञान लिया था. चार्जशीट में 13 को आरोपी बनाया गया है. 19 सितंबर 2020 को सीबीआई ने पूरक चार्जशीट दाखिल की थी. चार्जशीट में क्रिश्चियन मिशेल, राजीव सक्सेना, अगस्ता वेस्टलैंड इंटरनेशनल के डायरेक्टर जी सापोनारो और वायुसेना के पूर्व प्रमुख एसपी त्यागी के रिश्तेदार संदीप त्यागी समेत 13 को आरोपी बनाया गया है। 

RBI गवर्नर की चेतावनी: वेस्ट एशिया संकट से देश की अर्थव्यवस्था पर होगा बड़ा असर

नई दिल्‍ली वेस्‍ट एशिया संकट को लेकर आरबीआई गवर्नर संजय मल्‍होत्रा ने बड़ी चेतावनी दी है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के मॉनेटरी पॉलिसी बैठक में कहा गया है कि आने वाले समय में महंगाई बढ़ने वाली है. साथ ही जीडीपी को लेकर भी चेतावनी दी है. हालांकि, आरबीआई ने राहत देते हुए रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है।  मिडिल ईस्‍ट में आए संकट का असर भारतीय नागरिकों पर कम करने के लिए रिजर्व बैंक ने रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर अनचेंज रखा है. बढ़ती ग्रोथ के साथ महंगाई को कंट्रोल में रखने के लिए आरबीआई ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया. इस बैठक में आरबीआई ने अपना रुख न्‍यूट्रल रखा है।  महंगाई को लेकर चेतावनी आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए खुदरा महंगाई अनुमान 4.6 फीसदी रखा है. वहीं वित्त वर्ष 2027 के लिए कोर महंगाई अनुमान 4.4 फीसदी किया है. वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के लिए खुदरा महंगाई अनुमान बिना बदलाव के 4 फीसदी पर रखा है. वहीं,वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही के लिए महंगाई अनुमान 4.2 फीसदी से बढ़ाकर 4.4 फीसदी कर दिया है. इसी तरह वित्त वर्ष 2027 की तीसरी तिमाही के लिए महंगाई अनुमान 4.7 फीसदी से बढ़ाकर 5.2 फीसदी किया गया है।  जीडीपी ग्रोथ कम होने का अनुमान  आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी ग्रोथ अनुमान 6.9 लगाया है, जो वित्त वर्ष 2026 के अनुमान 7.4 फीसदी से कम है.  वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में रीयल जीडीपी ग्रोथ अनुमान 6.8 फीसदी रखा है, जो पहले 6.9 फीसदी था. वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में रीयल GDP अनुमान 6.9 रखा है।  आरबीआई गवर्नर ने क्‍या दी चेतावनी?  केंद्रीय बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने अल नीनो की संभावित परिस्थितियों के उभरने की आशंका जताई है, जो भारत के महंगाई दर के लक्ष्‍यों के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं. साथ ही उन्‍होंने कहा कि तनाव के कारण एनर्जी कीमतों में हाल ही में हुई बढ़ोतरी एक रिस्‍क के तौर पर उभरा है. हालांकि,  पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें अब तक अपरिवर्तित रही हैं. खुदरा महंगाई फरवरी में बढ़कर 3.21 प्रतिशत हो गई, जो 11 महीनों में सबसे अधिक है. थोक कीमतें एक साल से अधिक समय में अपने उच्चतम स्तर 2.13 प्रतिशत पर पहुंच गईं। 

TMC ने कहा ‘GET LOST’, CEC और डेरेक ओ’ब्रायन के बीच हुआ हंगामा

नई दिल्ली टीएमसी और चुनाव आयोग में तलवार खिंच गई है. टीएमसी और चुनाव आयोग की बैठक में बड़ा बवाल हुआ है. टीएमसी नेता डेरेक ओब्रायन चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से भिड़ गए. इतना ही नहीं, टीएमसी नेता डेरेक ओब्रायन मीटिंग में ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर चिल्लाए और बोलने से रोक दिया. वहीं, टीएमसी का दावा है कि उनकी टीम को मुख्य चुनाव आयुक्त ने निकल जाने को कहा. उन्होंने टीएमसी को गेट लॉस्ट कहा. दरअसल, टीएमसी यानी तृणमूल कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल आज यानी बुधवार को निर्वाचन आयोग से मिला. यह मीटिंग पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के कारण लोगों के ‘मतदान के अधिकार से वंचित होने का मुद्दा पर थी।  तय समय के अनुसार टीएमसी का प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग के दफ्तर पहुंचा. तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य डेरेक ओ’ब्रायन ने सोमवार को निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर मिलने का समय मांगा था. इसका जवाब मंगलवार को अपराह्न करीब तीन बजे आया. चुनाव आयोग के साथ टीएमसी की यह मीटिंग केवल 7 मिनट ही चल पाई. 7 मिनट की इस बैठक में ही बवाल हो गया. बैठक के दौरान टीएमसी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के नोटिस का ज़िक्र किया. इसके बाद बैठक का माहौल जल्दी ही गरम हो गया।  ज्ञानेश कुमार पर चिल्लाए डेरेक ओब्रायन सूत्रों का कहना है कि बैठक के दौरान टीएमसी नेता डेरेक ओब्रायन ज्ञानेश कुमार पर चिल्ला उठे थे.और कहा कि आप बोलना बंद करें. इतना ही नहीं, उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को बोलने से भी रोक दिया. इसके बाद  CEC ज्ञानेश कुमार ने टीएमसी नेता डेरेक ओ’ब्रायन से आयोग कक्ष की गरिमा बनाए रखने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि चिल्लाना और अभद्र व्यवहार उचित नहीं है।  टीएमसी का दावा- हमें निकल जाने को कहा हालांकि, टीएमसी का कहना है कि चुनाव आयोग का दावा झूठा है. टीएमसी ने दावा किया कि हमें मीटिंग से भगा दिया गया. डेरेक ओब्रायन ने कहा कि हम बैठक में गए और हमें चीफ इलेक्शन अफसर ने कहा निकल जाओ यहां से. GET LOST… तो हमलोग निकल आए. चुनाव आयोग से बैठक के बाद टीएमसी ने CEC ज्ञानेश कुमार पर हमला बोला. इतना ही नहीं, टीएमसी सांसद साकेत गोखले ने भी एक्स पर पोस्ट कर ऐसा ही बयान दिया है।  डेरेक ने ज्ञानेश कुमार को बताया चोर टीएमसी सांसद डेरेक ओब्रायन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को अपराधी और चोर बताया. डेरेक ओब्रायन ने कहा कि ज्ञानेश कुमार पर भरोसा नहीं किया जा सकता. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग वोट चोरी करने की कोशिश कर रहा है. टीएमसी का कहना है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के जरिए बंगाल में लाखों नाम काटे जा रहे हैं. इससे गरीब, अल्पसंख्यक और बंगाली वोटर प्रभावित हो रहे हैं।  ECI ने टीएमसी पर लगाए गंभीर आरोप दूसरी ओर चुनाव आयोग के सूत्रों ने अलग कहानी पेश की है. सूत्रों का दावा है कि डेरेक ओ'ब्रायन ने आयोग पर चिल्लाते हुए सीईसी को चुप रहने को कहा. उन्होंने कथित तौर पर कहा कि वो वहां उनकी बात सुनने नहीं आए हैं।  आयोग के मुताबिक, टीएमसी प्रतिनिधिमंडल ने धमकी दी और बैठक से बाहर निकल गए. आयोग ने इसे 'ईसी की टीएमसी से सीधी बात' के रूप में व्हाट्सएप के माध्यम से प्लांट करने की कोशिश बताया है।  इंडिया ब्लॉक की प्रेस कॉन्फ्रेंस उधर, टीएमसी ने अब इस विवाद को बड़े राजनीतिक स्तर पर ले जाने का फैसला किया है. देश की दूसरी सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी होने के नाते, टीएमसी और 'INDIA' ब्लॉक के नेता आज शाम कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया पर चर्चा के लिए शाम 4.45 बजे का वक्त तय किया गया है. दोनों पक्षों के बीच कड़वाहट अब चरम पर पहुंच गई है।  पहले भी सीईसी को घेर चुके टीएमसी नेता गौरतलब है कि इससे पहले मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को निशाना बनाते हुए ओ’ब्रायन ने कहा था, ‘बहुत हो गया आपका अहंकार. कल हमारी बात सुनिये. हम यहां सिर्फ तृणमूल कांग्रेस के बारे में बोलने नहीं आए हैं, हम यहां इसलिए हैं ताकि आप उन लोगों की आवाज सुनिये जिन्हें आपने मताधिकार से वंचित किया है या जिन्हें आप मताधिकार से वंचित करने की कोशिश कर रहे हैं।  किस बात पर हुई मीटिंग निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के बाद मतदाता सूची से करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं. मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य के अंतिम मतदाता आधार की घोषणा अभी बाकी है. हालांकि, उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष अक्टूबर के अंत में 7.66 करोड़ मतदाताओं के आधार पर, राज्य में इस समय कुल हटाए गए मतदाताओं का प्रतिशत 11.85 प्रतिशत से अधिक है. एसआईआर प्रक्रिया की शुरुआत से अब तक कुल हटाए गए नामों की अंतिम संख्या 90.83 लाख से थोड़ा अधिक रही। 

अमेरिका में सीजफायर के बाद ट्रंप से इस्तीफे की मांग, जानें क्या है वजह

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ पिछले 40 दिन से जारी सैन्य कार्रवाई रोकने का ऐलान कर दिया है. ट्रंप ने दो हफ्ते के लिए सीजफायर का ऐलान किया है. इजरायल ने भी ईरान के खिलाफ हमले रोकने की बात कही है और आगे की बातचीत पाकिस्तान में होगी. ट्रंप के ऐलान को युद्ध खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है।  अमेरिकी राष्ट्रपति के इस संदेश से जगी शांति की आस के बाद दुनियाभर के बाजार बम-बम हैं. वहीं, अमेरिका में अब ट्रंप के इस्तीफे की मांग भी जोर पकड़ती नजर आ रही है. अमेरिकी सीनेटर क्रिस मर्फी ने ईरान के खिलाफ लड़ाई के इस अंत को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का पूर्ण समर्पण बताया है. उन्होंने अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन पर कहा है कि इससे ईरान को होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण मिल गया।  अमेरिकी सीनेटर ने दावा किया कि वह सच नहीं बता रहे हैं. अगर ईरान की मांग का कुछ हिस्सा भी मान लें, तो डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट पर उसे नियंत्रण देने की सहमति दे दी है. क्रिस मर्फी ने दुनिया के लिए इसे विनाशकारी स्थिति बताया. वहीं, अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की सदस्य ग्वेन मूरे ने युद्ध विराम के बाद राष्ट्रपति ट्रंप की आलोचना की।  उन्होंने कहा कि कांग्रेस से ट्रंप पर लगाने की मांग की और कहा कि वह (डोनाल्ड ट्रंप) राष्ट्रपति पद के लिए अयोग्य हैं. ग्वेन मूरे ने तो यहां तक कह दिया है कि डोनाल्ड ट्रंप को किसी भी संभव तरीके से पद से हटाया जाना चाहिए. ग्वेन मूरे ने कहा कि अब समय आ गया है कि रिपब्लिकन सांसद भी डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर उनकी इस पागलपन भरी नीति को खत्म करें।  वहीं, अमेरिका के पूर्व एंटी टेरर चीफ जो केंट ने कहा है कि युद्धविराम सफल बनाना है, तो इजरायल को भी संयम बरतने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि हमें सबसे पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि हम इज़राइल को नियंत्रित रखें. एक तरफ अमेरिका में ट्रंप के इस्तीफे की मांग जोर पकड़ रही है, वहीं व्हाइट हाउस ने इसे अमेरिका की बड़ी जीत बताया है।  व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लीविट ने कहा कि यह अमेरिका की जीत है. इसे राष्ट्रपति ट्रंप और हमारी शानदार सेना ने संभव बनाया है. उन्होंने दावा किया कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी की शुरुआत से ही राष्ट्रपति ट्रंप ने इस अभियान के चार से छह हफ्ते तक चलने के अनुमान लगाए थे. व्हाइट हाउस की प्रवक्ता ने यह भी कहा कि अमेरिकी सैनिकों की असाधारण क्षमता से सैन्य लक्ष्य 38 दिन में ही हासिल कर लिया, उसे पार भी कर लिया। 

अमेरिका ने ईरान को नुकसान का मुआवजा देने का किया ऐलान, पर शर्तें हैं गजब

तेहरान  अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम का ऐलान हो गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान से मिले 10 बिंदु बातचीत आगे बढ़ाने का आधार हैं। खबर है कि इसमें ईरान ने एक शर्त यह भी रखी है कि उसे हुए नुकसान का मुआवजा भी दिया जाएगा। सबसे बड़ी राहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का खुलना मानी जा रही है, जिसपर दुनिया का तेल वितरण टिका हुआ था। 3640 मौतें, 90 हजार घर गिरे जंग में लेबनान, इराक, जॉर्डन, कुवैत, बहरीन, कतर, सऊदी अरब, यूएई, ओमान जैसे देश भी शामिल हो गए। लगभग 40 दिन तक मिसाइलें, ड्रोन और बमबारी चलती रही. अब तक की रिपोर्ट के अनुसार कुल मौतें करीब 3640 बताई जा रही हैं. हजारों लोग घायल हुए हैं. बहुत बड़ी संपत्ति का नुकसान हुआ है।  जंग कब शुरू हुई और फैली? 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए. इन हमलों में ईरान के कई सैन्य ठिकाने, परमाणु सुविधाएं और सरकार से जुड़े स्थान निशाने पर थे. ईरान ने इसे जवाब दिया और इजरायल पर मिसाइल व ड्रोन दागे. साथ ही उसने मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी हमले किए।  ईरान ने खाड़ी देशों पर भी हमले किए क्योंकि वहां अमेरिकी ठिकाने हैं. लेबनान में हिजबुल्लाह ने भी इजरायल पर रॉकेट दागे. यमन के हूती विद्रोहियों ने भी इजरायल को निशाना बनाया. इस तरह एक छोटा सा संघर्ष पूरे क्षेत्र में फैल गया. कई देशों में विस्फोटों की आवाजें सुनाई दीं और तेल-गैस की कीमतें आसमान छूने लगीं।  इस 40 दिन की जंग में सबसे ज्यादा नुकसान ईरान को हुआ. ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार वहां 2076 लोग मारे गए. 26500 से ज्यादा घायल हुए. इनमें आम नागरिक भी शामिल हैं. लेबनान में 1497 मौतें हुईं और हजारों लोग घायल हुए. इजरायल में 26 लोग मारे गए जबकि 7183 घायल हुए. अमेरिकी सैनिकों में 13 मौतें हुईं और 200 से ज्यादा घायल हुए।  खाड़ी देशों में कुल 28 मौतें बताई गई हैं. इनमें कुवैत में 7, बहरीन में 3, सऊदी अरब में 2, यूएई में 12, ओमान में 3 और कतर में कुछ घायल हुए. इराक में 109 मौतें और दर्जनों घायल. जॉर्डन में 29 घायल, सीरिया में 4 मौतें और साइप्रस में भी कुछ नुकसान हुआ.  कुल मिलाकर मौतों की संख्या 3640 के आसपास पहुंच गई है. घायलों की संख्या बहुत ज्यादा है – ईरान अकेले में 26,500 से ऊपर. असली आंकड़े इससे भी ज्यादा हो सकते हैं क्योंकि स्थिति तेजी से बदल रही है।  इमारतों और संपत्ति का भारी नुकसान जंग ने सिर्फ लोगों की जान नहीं ली, बल्कि शहरों और गांवों को भी तबाह कर दिया. कुल 90 हजार घर पूरी तरह बर्बाद हो गए. स्कूलों पर भी बहुत असर पड़ा – 760 स्कूल क्षतिग्रस्त या नष्ट हो गए. अस्पतालों की संख्या 307 बताई गई है जो या तो बमबारी में टूट गए या इस्तेमाल नहीं हो पा रहे. हजारों व्यावसायिक इमारतें, दुकानें, बाजार और फैक्टरियां भी नष्ट हुईं।  ईरान में कई शहरों में आवासीय इलाके, स्कूल और अस्पताल प्रभावित हुए. लेबनान में भी बड़े पैमाने पर घर और इमारतें गिर गईं. इजरायल में कुछ इलाकों में क्षति हुई लेकिन वहां की एयर डिफेंस ने कई हमलों को रोक लिया. खाड़ी देशों में तेल और गैस के प्लांट, बंदरगाह और एयरपोर्ट पर हमले हुए जिससे ऊर्जा उत्पादन प्रभावित हुआ. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल परिवहन बाधित होने से पूरी दुनिया में तेल की कीमतें बढ़ गईं।  ईरान इस जंग का मुख्य केंद्र रहा. वहां सबसे ज्यादा मौतें और घायल हुए. उसके परमाणु और सैन्य कार्यक्रम को बड़ा झटका लगा. लेबनान में हिजबुल्लाह से जुड़े इलाकों में भारी बमबारी हुई जिससे आम लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया. इजरायल ने अपनी मजबूत रक्षा व्यवस्था से कई हमलों को रोका लेकिन कुछ मौतें और चोटें हुईं।  खाड़ी देश जैसे सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन आदि ने ईरानी हमलों का सामना किया. इन देशों में ज्यादातर हमले ऊर्जा सुविधाओं पर थे. हालांकि इन देशों की एयर डिफेंस ने ज्यादातर मिसाइलों और ड्रोन को मार गिराया, फिर भी कुछ मौतें और संपत्ति का नुकसान हुआ।  ईरान ने रखीं हैं 10 शर्तें एक-दूसरे पर हमला न करना Strait of Hormuz पर ईरान का नियंत्रण बने रहना यूरेनियम संवर्धन की अनुमति देना सभी प्राथमिक प्रतिबंधों को हटाना सभी माध्यमिक प्रतिबंधों को हटाना UNSC के सभी प्रस्तावों को समाप्त करना IAEA बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सभी प्रस्तावों को समाप्त करना ईरान को हुए नुकसान का मुआवजा देना क्षेत्र से अमेरिकी लड़ाकू बलों को वापस बुलाना सभी मोर्चों पर युद्ध रोकना, जिसमें लेबनान के 'इस्लामिक रेजिस्टेंस' के खिलाफ युद्ध भी शामिल है। ट्रंप का बयान ट्रंप ने लिखा, 'पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असीम मुनीर से हुई बातचीत के आधार पर, जिसमें उन्होंने मुझसे ईरान पर आज रात होने वाले विनाशकारी हमले को रोकने का अनुरोध किया था। साथ ही ईरान के स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरा, तत्काल और सुरक्षित तरीके से खोलने के मद्देनजर मैं दो सप्ताह के लिए ईरान पर दो हफ्ते के लिए बमबारी और हमले रोकने के लिए तैयार हो गया हूं।' ट्रंप ने कहा, 'अमेरिका और ईरान के बीच पिछले विवाद के लगभग सभी बिंदुओं पर सहमति बन चुकी है, लेकिन दो हफ्तों का संघर्ष विराम समझौते को अंतिम रूप देने और लागू करने में मदद करेगा।' पाकिस्तान में होगी वार्ता पाकिस्तान ने बुधवार को अमेरिका और ईरान को इस्लामाबाद में वार्ता के लिए आमंत्रित किया। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अमेरिका और ईरान ने तत्काल संघर्षविराम पर सहमति जताई है। शरीफ ने बताया कि पाकिस्तान ने दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों को 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में आमने-सामने बातचीत के लिए आमंत्रित किया है, ताकि 'सभी विवादों का समाधान' निकाला जा सके। चीन की है अहम भूमिका? एपी ने सूत्रों के हवाले से बताया कि चीन ने ईरान के नेताओं से बातचीत करके उन्हें अमेरिका से युद्धविराम का रास्ता तलाशने के लिए राजी करने की कोशिश की। दो अधिकारियों ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर कहा कि बातचीत के दौरान चीनी अधिकारी ईरानी अधिकारियों के संपर्क में थे। … Read more

CJI सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट में पहली बार लिया मोबाइल, कौन था संदेश भेजने वाला?

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट हो या हाईकोर्ट, आमतौर पर अदालतों में मोबाइल फोन ले जाना अच्छा नहीं माना जाता है। इसको लेकर नियम भी बने हुए हैं। हालांकि, बीते  देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत अपना मोबाइल लेकर सुप्रीम कोर्ट स्थित अपने कोर्ट रूम पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में पहली बार ऐसा किया है। इसके पीछे कारण का खुलासा करते हुए सीजेआई ने कहा कि उन्होंने एसआईआर को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का संदेश देखना था, इसलिए मोबाइल फोन लेकर कोर्ट रूम आना पड़ा। कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजॉय पॉल के मैसेज को पढ़ते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने मुस्कुराते हुए कहा, "दरअसल, मुझे अभी याद आया कि यह पहली बार है जब मैं अदालत में मोबाइल फोन लाया हूं। मैंने अपने जीवन में पहले कभी ऐसा नहीं किया।" इतना सुनते ही वहां मौजूद वकील भी मुस्कुरा दिए। बंगाल एसआईआर पर क्या बोला SC? आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court News) ने सोमवार को कहा कि चुनावी राज्य पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची से बाहर किये गए करीब 60 लाख लोगों के दावों और आपत्तियों का आज ही निस्तारण किया जाएगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य में केंद्रीय बल तैनात रहेंगे। शीर्ष अदालत ने एक महिला न्यायिक अधिकारी का अपने परिजनों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त करने वाला वीडियो देखने के बाद कहा कि ''हाल के दिनों में जिस तरह की घटनाएं हुई हैं, उन्हें देखते हुए पश्चिम बंगाल से केंद्रीय बलों को वापस नहीं बुलाया जाएगा।'' कोर्ट ने एसआईआर प्रक्रिया के दौरान न्यायिक अधिकारियों को मिली कथित धमकियों और उनके कामकाज में बाधा डाले जाने पर चिंता व्यक्त की तथा कहा कि यदि सरकारी तंत्र सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहता है, तो वह उपयुक्त उपायों पर विचार करेगा। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने कहा, ''यदि सरकारी तंत्र विफल होता है, तो हम सोचेंगे कि क्या किया जा सकता है।'' प्रधान न्यायाधीश ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से इन अधिकरणों के लिए समान प्रक्रियाएं तैयार करने के वास्ते पूर्व वरिष्ठ न्यायाधीशों की तीन सदस्यीय समिति गठित करने को कहा। पीठ ने कहा कि इस बीच, कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को एक पूर्व मुख्य न्यायाधीश से एक पत्र प्राप्त हुआ है, जिन्होंने एक अपीलीय अधिकरण की अध्यक्षता करने के लिए सहमति दी है।