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केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर! 8वें वेतन आयोग में 6% सालाना बढ़ोतरी का प्रस्ताव, DA फॉर्मूला भी बदल सकता है

नई दिल्ली केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए बनने वाले अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी संघ (AIDEF) ने 8वां केंद्रीय वेतन आयोग को कई अहम सुझाव दिए हैं। कर्मचारी संगठन ने आयोग की चेयरपर्सन न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई को भेजे अपने जवाब में कुल 17 मांगें रखी हैं। इनमें सबसे बड़ी मांग महंगाई भत्ता (DA) की गणना के तरीके को बदलने की है। AIDEF का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था कर्मचारियों को मिलने वाले वास्तविक महंगाई प्रभाव को सही तरह से नहीं दर्शाती। क्या है डिटेल अभी केंद्र सरकार के कर्मचारियों का महंगाई भत्ता औद्योगिक श्रमिकों के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI-IW) के 12 महीने के औसत के आधार पर तय होता है। इस इंडेक्स को लेबर ब्यूरो तैयार करता है, जिसमें सब्जी, फल, कपड़े और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों को शामिल किया जाता है। इसी के आधार पर साल में दो बार DA बढ़ोतरी तय होती है। क्या है DA कैलकुलेशन लेकिन, AIDEF का कहना है कि यह इंडेक्स कर्मचारियों और पेंशनरों की वास्तविक खर्च स्थिति को नहीं दिखाता। संगठन के मुताबिक CPI बास्केट में कई वस्तुओं की कीमतें पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (राशन) या सब्सिडी वाली दरों पर मानी जाती हैं, जबकि ज्यादातर कर्मचारी बाजार से ऊंची कीमत पर सामान खरीदते हैं। इसलिए महंगाई की असली मार इस इंडेक्स में दिखाई नहीं देती। इसी वजह से AIDEF ने सुझाव दिया है कि 8वें वेतन आयोग में DA की गणना के लिए नया और ज्यादा वास्तविक इंडेक्स बनाया जाए। संगठन का कहना है कि इसमें खुली रिटेल मार्केट में मिलने वाली कीमतों या सरकारी कोऑपरेटिव कंज्यूमर स्टोर्स की दरों को आधार बनाया जाना चाहिए। इससे कर्मचारियों को महंगाई के अनुसार सही भत्ता मिल सकेगा। इसके अलावा AIDEF ने कई अन्य अहम मांगें भी रखी हैं। संगठन ने सेना में लागू अग्निपथ योजना के तहत अग्निवीर जैसी फिक्स्ड टर्म भर्ती व्यवस्था को खत्म करने और सभी अग्निवीरों को नियमित करने की मांग की है। साथ ही मौजूदा मिलिट्री सर्विस पे (MSP) को हटाकर ‘डायनेमिक रिस्क एंड रेडीनेस प्रीमियम’ देने का प्रस्ताव रखा गया है, जो पुलिस और अन्य बलों की एंट्री लेवल सैलरी से कम से कम 25% ज्यादा होना चाहिए। वेतन और प्रमोशन से जुड़े मामलों में भी AIDEF ने बड़े बदलाव सुझाए हैं। संगठन ने मौजूदा 3% सालाना वेतन वृद्धि को बढ़ाकर 6% करने, सेवा के 30 साल में कम से कम 5 गारंटीड प्रमोशन देने और सबसे ज्यादा तथा सबसे कम वेतन के बीच अनुपात 1:10 रखने की मांग की है। इसके अलावा सशस्त्र बलों के लिए पुरानी पेंशन योजना को जारी रखने और सेवानिवृत्ति आयु में मानवीय तरीके से चरणबद्ध बढ़ोतरी जैसे सुझाव भी दिए गए हैं।

अमेरिका का बड़ा फैसला: पाकिस्तान के पेशावर स्थित दूतावास को हमेशा के लिए किया बंद

वाशिंगटन अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के पेशावर में स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास को स्थायी रूप से बंद करने का फैसला ले लिया है। यह दूतावास अफगान सीमा के सबसे नजदीक स्थित अमेरिकी राजनयिक मिशन था और 2001 में अफगानिस्तान पर अमेरिका के हमले से बाद से एक प्राथमिक संचालन केंद्र था। बुधवार को मिली अधिसूचना की एक प्रति के मुताबिक अमेरिका ने इस सप्ताह अमेरिकी संसद को वाणिज्य दूतावास को बंद करने के अपने इरादे के बारे में सूचित किया और कहा कि इससे प्रति वर्ष 75 लाख अमेरिकी डॉलर की बचत होगी। अमेरिका ने यह भी कहा है कि पाकिस्तान में अमेरिकी राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाने की उसकी क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। बता दें कि पेशावर वाणिज्य दूतावास में 18 अमेरिकी राजनयिक और अन्य सरकारी कर्मचारी तथा 89 स्थानीय कर्मचारी कार्यरत हैं। नोटिस में कहा गया है कि मंत्रालय इसे बंद करने के लिए 30 लाख अमेरिकी डॉलर खर्च करेगा। अमेरिका ने क्यों किया बंद? जानकारी के मुताबिक इस फैसले का ईरान युद्ध से लेना देना नहीं है। ट्रंप प्रशासन द्वारा लगभग सभी संघीय एजेंसियों में कटौती शुरू करने के बाद से यह कदम एक साल से अधिक समय तक विचाराधीन रहने के बाद यह फैसला लिया गया है। इस बीच ईरान युद्ध के कारण कराची और पेशावर सहित विभिन्न पाकिस्तानी शहरों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं जिसके कारण अमेरिकी वाणिज्य दूतावासों ने अस्थायी रूप से अपना संचालन निलंबित कर दिया है। अमेरिकी दूतावास में हुई थी हिंसा इससे पहले इजरायल-अमेरिका के हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के विरोध में, पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हाल में हुई झड़पों के बाद पाकिस्तान के सिंध प्रांत की सरकार ने अमेरिकी वाणिज्य दूतावास में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती भी बढ़ा दी थी। कराची में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास का सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश में एक मार्च को 12 से अधिक प्रदर्शनकारी मारे गए और लगभग 47 अन्य घायल हो गए। लाहौर और इस्लामाबाद में भी इसी तरह के प्रदर्शन हुए थे।

पड़ोसी देशों को डीजल सप्लाई के लिए भारत से अनुरोध, रिफाइंड पेट्रोलियम निर्यात में मजबूत स्थिति: MEA

नई दिल्ली मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत से उसके पड़ोसी देशों ने खास गुजारिश की है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि बांग्लादेश, मालदीव और श्रीलंका ने डीजल आपूर्ति का अनुरोध भारत से किया है। गुरुवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस वार्ता में कहा कि भारत अपनी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए आगे का फैसला लेगा। जायसवाल ने कहा, "भारत रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का प्रमुख निर्यातक है, विशेषकर अपने पड़ोसियों के लिए—जैसे बांग्लादेश सरकार से डीजल आपूर्ति के लिए अनुरोध प्राप्त हुआ है।" बांग्लादेश से भारत के पुराने रिश्तों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने आगे कहा, "उनके साथ हमारे जन-केंद्रित और विकासोन्मुख दृष्टिकोण को देखते हुए, 2007 से नुमालीगढ़ रिफाइनरी से हम विभिन्न माध्यमों—जैसे जलमार्ग, रेलमार्ग, और बाद में भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन—से डीजल की आपूर्ति कर रहे हैं। अक्टूबर 2017 में नुमालीगढ़ रिफाइनरी और बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉरपोरेशन के बीच हाई-स्पीड डीजल आपूर्ति को लेकर एक समग्र बिक्री-खरीद समझौते पर हस्ताक्षर किया गया था। यह 2007 से जारी है।" उन्होंने कहा कि हमें बांग्लादेश के अलावा मालदीव और श्रीलंका से भी अनुरोध प्राप्त हुआ है। भारत विचार कर रहा है, लेकिन हम अपनी ऊर्जा आवश्यकता और डीजल की उपलब्धता को देखते हुए आगे बढ़ेंगे।" एक सवाल के जवाब में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खाड़ी देशों के कई नेताओं से बातचीत की है। प्रधानमंत्री ने "संवाद और कूटनीति के जरिए जल्द शांति बहाल करने पर जोर दिया," जिससे हमारे नागरिक लौट सकें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत में नागरिकों को होने वाले नुकसान से बचाने और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। जीसीसी (खाड़ी सहयोग परिषद) में हमारे कई नागरिक रहते हैं। भारत का स्पष्ट मत रहा है कि किसी देश की संप्रभुता या अखंडता के उल्लंघन को हम सही नहीं मानते हैं।

ईरान जंग का सीधा असर दिल्ली पर: ढाबों में महंगी हुई चाय-रोटी, कई जगह दाल मखनी और कबाब बंद

ईरान ईरान और इजरायल-अमेरिका युद्ध की वजह से उपजे गैस संकट का असर राजधानी के होटलों पर देखने को मिल रहा है। होटल ईंधन बचाने के लिए कई तरह के बदलाव कर रहे हैं। खासतौर पर धीमी आंच पर पकाने वाले पकवान जैसे कबाब और दाल मखनी को मेन्यू से अस्थायी रूप से हटा दिया गया है। वहीं, अधिकतर होटल-ढाबों में खाना-पीना महंगा हो चुका है। लागत में इजाफे की वजह से ग्राहकों को चाय से रोटी तक के लिए अधिक कीमत देनी पड़ रही है। दाल मखनी और गलौटी कबाब जैसी डिशेज जिन्हें 8 से 12 घंटे तक धीमी आंच पर पकाना पड़ता है, उन्हें कई रेस्तरां ने अस्थायी रूप से अनुपलब्ध कर दिया है। गैस आधारित तंदूरों का उपयोग सीमित कर दिया गया है। कई होटलों में अब केवल पीक ऑवर्स (रात 8 से 11 बजे) में ही तंदूरी डिशेज परोसी जा रही हैं। होटलों ने अपने 10-15 पन्नों के विस्तृत मेन्यू को छोटा करके 2-3 पन्नों का लिमिटेड मेन्यू कर दिया है। फोकस उन डिशेज पर है जो सॉते या स्टीमिंग तकनीक से जल्दी बन जाती हैं, क्योंकि इनमें गैस की खपत कम होती है। कई प्रीमियम डाइनिंग आउटलेट्स अब कोल्ड ऐपेटाइज़र सलाद और सैंडविच जैसी चीजों को प्रमोट कर रहे हैं जिन्हें पकाने की आवश्यकता नहीं होती। इससे उनकी गैस की निर्भरता कम हो रही है। बड़े होटलों ने भारी कमर्शियल इंडक्शन प्लेट्स, एयर फ्रायर्स और इलेक्ट्रिक ओवन का इस्तेमाल 40% तक बढ़ा दिया है। हालांकि, इससे बिजली के बिल में बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन गैस की अनिश्चितता से बचने का यह एकमात्र तरीका बचा है। इससे उनका ब्रांड का नाम कायम रहेगा। होटलों में लाइव कुकिंग काउंटर (जहां शेफ सामने खाना बनाते थे) ग्राहकों के आकर्षण का केंद्र होते थे, उन्हें फिलहाल बंद कर दिया है क्योंकि वहां गैस की बर्बादी अधिक होती है। रेहड़ी-पटरी व छोटे ढाबों पर आजीविका का संकट यह वर्ग स्ट्रीट फूड संस्कृति का आधार है। इन्हें रोजाना नकद में सिलेंडर लेना पड़ता है। आपूर्ति कम होने से वेंडर्स छोटे दुकानदारों के बजाय बड़े होटलों को प्राथमिकता दे रहे हैं। सिलेंडर न मिलने पर कई रेहड़ी वाले अवैध रिफिलिंग (छोटे 5 किलो के अवैध सिलेंडर) का सहारा ले रहे हैं। गैस की कीमत बढ़ने से रोज़ाना की बचत में ₹200-₹400 की कमी आई है। 7 रुपये वाली रोटी 9 की हुई गैस सिलेंडर आपूर्ति प्रभावित होने से द्वारका मोड़ इलाके में एक रेस्तरां ने रोटी के दाम में अचानक दो रुपये की बढ़ोतरी कर दी। रेस्तरां मालिक का कहना था कि गैस का दाम बढ़ने के चलते रोटी का दाम भी बढ़ाना पड़ रहा है। द्वारका मोड़ इलाके में रहने वाले आकाश कुमार ने बताया कि अक्सर ऑफिस से देर से आने पर वह सब्जी तो घर में बनाते हैं लेकिन रोटी रेस्तरां से मंगा लेते हैं। उनके करीब स्थित एक रेस्तरां में तवा रोटी उन्हें सात रुपये के दर से पड़ती है, अब अचानक मालिक ने दाम बढ़ा दिए हैं। वहीं, नोएडा में एक चाय विक्रेता ने बताया कि उन्होंने 10 रुपये वाली चाय की कीमत अब 15 रुपये कर दी है। उन्होंने कहा कि जो सिलेंडर उन्हें 1000 रुपये में मिल जाता था उसके लिए अब 2500 रुपये देने पड़े हैं। इस वजह से कीमत में इजाफा करना पड़ा है। ढाबा बंद होने की कगार पर कनॉट प्लेस स्थित सिंधिया हाउस के पास एक तंग गली में स्थित ढाबा अब बंद होने की कगार पर है। यह ढाबा ऑफिस कर्मचारियों, टैक्सी ड्राइवरों और दूसरे रोजगार से जुड़े लोगों के लिए सस्ता और स्वादिष्ट भोजन का प्रमुख ठिकाना है, लेकिन कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई रुकने से मालिक की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ढाबा मालिक ने बताया कि उनके यहां रोजाना दो सिलेंडर की खपत होती है, लेकिन अब सप्लाई पूरी तरह बंद कर दी गई है। स्टॉक में सिर्फ एक सिलेंडर बचा है, जिसके बाद रसोई ठप हो जाएगी। यहां भोजन करने पहुंचे मेरठ के गोविंद प्रसाद ने कहा कि वे मार्केटिंग के जॉब में हैं, लिहाजा सुबह मेरठ से जल्दी निकलने के कारण टिफिन नहीं लाते, दोपहर में यह ढाबा ही सहारा है। यदि बंद हुआ तो महंगे रेस्टोरेंट में खाना या घर से पैक करना पड़ेगा, जो मुश्किल होगा। टैक्सी ड्राइवर वीरू मौर्या ने बताया कि मंडी हाउस के अन्य ढाबों में भी रेट बढ़ गए हैं। समारोह में खाने के मेन्यू में कटौती की सरोजिनी नगर में स्थित सामुदायिक भवन में अलग-अलग दिनों में शादी समारोह हैं। एलपीजी गैस संकट के बीच बैंक्वेट हॉल में भी परेशानी बढ़ गई है। हलवाइयों ने खाने के मेन्यू में कटौती कर दी है। पिलंजी गांव के रहने वाले रोहन ने बताया कि शुक्रवार को उनके भाई की रिसेप्शन पार्टी है। वहीं, गैस सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि अधिक रुपये देने पर भी कोई सिलेंडर देने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि घर पर मेहमान आ रहे हैं। लेकिन, अचानक आए एलपीजी संकट ने पूरी तैयारी बिगाड़ दी है। रोहन ने बताया कि उन्होंने जिसे खाने का ठेका सौंपा था, उन्होंने अंतिम मौके पर सिलेंडर की कमी होने पर तय मेन्यू तैयार करने से मना कर दिया है। उन्होंने कहा कि 30 से 40 फीसदी मेन्यू में कटौती की गई है।

मसूरी में सजेगा कुलदीप यादव की शादी का मंडप, 14 मार्च को बचपन की दोस्त से करेंगे विवाह

मसूरी भारतीय क्रिकेट टीम के चाइनामैन गेंदबाज कुलदीप यादव गुरुवार दोपहर पहाड़ों की रानी मसूरी पहुंचे। यहां 14 मार्च को वह अपने बचपन की दोस्त वंशिका के साथ सात फेरे लेंगे। लाइब्रेरी बाजार क्षेत्र स्थित होटल सेवॉय में शुक्रवार और शनिवार को शादी की रस्में होनी हैं। होटल सेवाय में होंगे कार्यक्रम बता दें भारतीय क्रिकेट टीम के चाइनामैन गेंदबाज कुलदीप यादव के शादी के बंधन में बंधने की तारीख नजदीक आ गई है। वह 14 मार्च शनिवार को मसूरी में अपने बचपन की दोस्त वंशिका के साथ सात फेरे लेंगे। वैवाहिक कार्यक्रम लाइब्रेरी बाजार स्थित होटल सेवाय में होगा। होटल के सारे कमरे बुक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, होटल सेवाय में 13 और 14 मार्च के लिए सभी कमरे बुक किए गए हैं। बताया जा रहा है कि मेहमानों के लिए होटल जेडब्लू मैरियट में भी कमरे बुक किए गए हैं। पहले नवंबर में होनी थी शादी शादी समारोह में सूर्य कुमार यादव, जय शाह सहित भारतीय टीम के अन्य खिलाड़ियों के आने की भी संभावना है। यह शादी पहले नवंबर में होनी वाली थी, लेकिन कुलदीप यादव के मैचों में व्यस्तता के कारण इसे टाल दिया गया था। जून 2025 में हुई थी सगाई कुलदीप यादव और वंशिका की सगाई जून 2025 में हुई थी। बताया जा रहा है कि रिसेप्शन 17 मार्च को लखनऊ एक होटल में होगा। उसमें भी क्रिकेटर, राजनेता, बालीवुड और बीसीसीआइ से जुड़े लोग आ सकते हैं।  

ईरान का अमेरिका पर हमला करने का खतरा, FBI की चेतावनी ने मचाया हड़कंप

तेहरान  ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद से पश्चिम एशिया में भीषण जंग छिड़ चुकी है। बौखलाए ईरान ने इजरायल के साथ साथ सऊदी अरब, बहरीन, UAE और कतर जैसे खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डों को लगातार निशाना बनाया है। अब खबर है कि ईरान सीधा अमेरिका पर ही हमला बोल सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान अमरीकी राज्य कैलिफोर्निया पर हमला करने की योजना बना रहा है। अमेरिका की फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन ने हाल ही में कैलिफोर्निया के पुलिस डिपार्टमेंट को चेतावनी दी है कि ईरान पश्चिमी तट पर ड्रोन के जरिए अमेरिकियों पर हमला कर सकता है। फर्स्टपोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक FBI के अधिकारियों ने एक अलर्ट जारी किया है जिसमें अमेरिकी सरकार को चेतावनी दी गई है कि युद्ध जारी रहा तो ईरान के बदले के लिए तैयार रहें। अलर्ट पर कैलिफोर्निया रिपोर्ट में ABC न्यूज की एक रिपोर्ट का हवाला दिया गया है। इसमें फरवरी के आखिर में भेजे गए अलर्ट के मुताबिक, "हमें हाल ही में जानकारी मिली है कि फरवरी 2026 की शुरुआत में, ईरान कथित तौर पर अमेरिकी होमलैंड के तट पर एक अनजान जहाज से UAV का इस्तेमाल करके अचानक हमला करने की सोच रहा था। अगर US ईरान पर हमला करता है तो ईरान कैलिफोर्निया को निशाना बना सकता है।" जानकारी के मुताबिक राज्य इसे लेकर हाई अलर्ट पर है। डोनाल्ड ट्रंप को भी दी थी धमकी इससे पहले ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी अपनी जान बचाने की चेतावनी दी थी। ईरान के एक शीर्ष सुरक्षा अधिकारी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए ट्रंप को धमकी दी। अली लारिजानी ने बीते मंगलवार को एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, ''ईरान जैसा बलिदानी राष्ट्र तुम्हारी खोखली धमकियों से नहीं डरता। तुमसे बड़े भी ईरान को खत्म नहीं कर सके। सावधान रहें, कहीं खुद आपका सफाया ना हो जाए।'' ईरान ने रखी शर्तें इस बीच ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए 3 शर्तें रख दी हैं। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने बुधवार को कहा है कि अमेरिका को ईरान के अधिकारों को मान्यता देनी ही होगी और यह गारंटी देनी होगी कि देश पर भविष्य में हमले नहीं होंगे। बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किए गए एक बयान में, पेजेशकियन ने कहा कि जंग का हल सिर्फ इन शर्तों के जरिए ही निकलेगा। पेजेशकियन ने लिखा, "इस जंग को, जिसे यहूदियों और अमेरिका ने शुरू किया है, को खत्म करने का एक मात्र तरीका है, ईरान के कानूनी अधिकारों को मान्यता देना, युद्ध का हर्जाना देना और भविष्य में हमले के खिलाफ पक्की अंतर्राष्ट्रीय गारंटी देना।"

लोकसभा में हरदीप पुरी का भरोसा: देश में LPG, पेट्रोल-डीजल की नहीं होगी कमी

नई दिल्ली देश में एलपीजी संकट पर लोकसभा में केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत 40 देशों से क्रूड ऑयल ले रहा है। गैस-सिलेंडर पर पैनिक होने की कोई बात नहीं है। हरदीप सिंह पुरी ने लोकसभा में वेस्ट एशिया संकट पर कहा कि एनर्जी के इतिहास में दुनिया ने ऐसा पहले कभी नहीं देखा। होर्मुज स्ट्रेट को इतिहास में पहली बार कमर्शियल शिपिंग के लिए बंद कर दिया गया। संघर्ष पैदा करने में कोई भूमिका नहीं है, भारत को इसके नतीजों से निपटना होगा। भारत की क्रूड ऑयल सप्लाई की स्थिति सुरक्षित है।  LPG का प्रोडक्शन 28% बढ़ा दिया गया- हरदीप सिंह पुरी हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि पिछले पांच दिनों में, रिफाइनरी के निर्देशों के जरिए LPG का प्रोडक्शन 28% बढ़ा दिया गया है और असल में आगे की खरीद चल रही है। मोदी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता यह है कि भारत के 33 करोड़ परिवारों, खासकर गरीबों और जरूरतमंदों की रसोई में किसी भी तरह की कमी न हो। घरेलू सप्लाई पूरी तरह से सुरक्षित है और डिलीवरी साइकिल में कोई बदलाव नहीं हुआ है। घर और इंडस्ट्री के लिए बिजली का प्रोडक्शन सुरक्षित- पुरी उन्होंने कहा कि बड़े LNG कार्गो लगभग रोज दूसरे सप्लाई रास्तों से आ रहे हैं। भारत के पास गैस प्रोडक्शन और सप्लाई के इतने इंतजाम हैं कि लंबे समय तक लड़ाई चलने पर भी यह स्थिति बनी रहेगी। हर घर और इंडस्ट्री के लिए बिजली का प्रोडक्शन पूरी तरह से सुरक्षित है। अब प्रोक्योरमेंट को एक्टिवली डायवर्सिफाई किया गया है और कार्गो को यूनाइटेड स्टेट्स, नॉर्वे, कनाडा, अल्जीरिया और रूस से मंगाया जा रहा है।  

ईरान का बड़ा ऐलान: अमेरिका से जंग खत्म करने को तैयार, लेकिन तीन शर्तें ट्रंप को नहीं हजम होंगी

वाशिंगटन ईरान के खिलाफ जारी युद्ध अमेरिका के लिए बेहद महंगा साबित हो रहा है. पेंटागन के शुरुआती अनुमान के मुताबिक जंग के पहले छह दिनों में ही अमेरिकी टैक्सपेयर्स के कम से कम 11.3 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं. इस बीच ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिका के सामने युद्ध खत्म करने का ऑफर रखा है. लेकिन इसके साथ उन्होंने तीन शर्तें भी रखी हैं. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा है कि तेहरान क्षेत्रीय शांति के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन मौजूदा संघर्ष तभी खत्म हो सकता है जब ईरान के ‘वैध अधिकारों’ को मान्यता दी जाए. उन्होंने साफ किया कि किसी भी समाधान के लिए ईरान की मुख्य मांगों को स्वीकार करना जरूरी होगा। ईरान ने युद्ध खत्म करने की क्या शर्तें रखीं? पेजेश्कियान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए बताया कि उन्होंने इस मुद्दे पर रूस और पाकिस्तान के नेताओं से बातचीत की है. उन्होंने दोहराया कि ईरान का मानना है कि मौजूदा संघर्ष की शुरुआत ‘जायनिस्ट शासन और अमेरिका’ की कार्रवाई से हुई. ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि इस संकट के समाधान के लिए तीन अहम बातें जरूरी हैं।     ईरान के वैध अधिकारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी जाए.     युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई यानी मुआवजा दिया जाए.     भविष्य में ईरान पर हमले रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय गारंटी दी जाए. अमेरिका ईरान से जीत गया- ट्रंप एक तरफ जब पेंटागन कह रहा है कि अरबों डॉलर हर रोज इस युद्ध में खर्च हो रहे हैं. तो वहीं दूसरी तरफ ट्रंप जीत का दावा कर रहे हैं. केंटकी में एक रैली करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि युद्ध अमेरिका जीत चुका है. हालांकि उन्होंने आगे बताया कि ऑपरेशन खत्म नहीं होगा. वहीं उन्होंने दावा किया कि अब तक 58 नौसैनिक जहाज नष्ट किए गए हैं. उन्होंने कहा कि अमेरिका काम पूरा होने तक अभियान जारी रखेगा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि यह युद्ध जल्द खत्म हो सकता है, लेकिन उन्होंने कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं बताई है। युद्ध में अब तक कितनी मौत? अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान पर संयुक्त हमले शुरू किए थे. इसके बाद से दोनों देशों ने ईरान के कई सैन्य और राजनीतिक ठिकानों पर हमले किए. रिपोर्टों के मुताबिक इन हमलों में 1,200 से ज्यादा ईरानी नागरिकों की मौत हो चुकी है. दूसरी ओर ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों और सहयोगी देशों पर हमले किए, जिनमें 7 अमेरिकी सैनिकों की मौत और 140 से ज्यादा घायल हुए हैं।

भारत ने रूस से तेल आयात 50% बढ़ाया, युद्ध के बीच संकटमोचक साबित हुआ रूस

नई दिल्ली पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और तनाव ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा के सामने एक गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है. विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से होने वाली आपूर्ति ठप होने से देश में कुकिंग गैस की भारी किल्लत देखी जा रही है। रूस बना संकटमोचक, कच्चे तेल के आयात में उछाल ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत ने मार्च महीने में रूस से कच्चे तेल की खरीद में 50 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी की है. फरवरी में जहां भारत रूस से 10.4 लाख बैरल प्रतिदिन (bpd) तेल खरीद रहा था, वहीं मार्च में यह आंकड़ा बढ़कर 15 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंच गया है. भारत अपनी तेल जरूरतों का 88% आयात करता है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा सऊदी अरब, इराक और यूएई जैसे देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता था. इस रास्ते के बंद होने के बाद भारत ने तेजी से अपनी निर्भरता रूस की ओर स्थानांतरित की है। LPG का असली संकट: क्यों खाली हो रहे हैं सिलेंडर? कच्चे तेल की आपूर्ति को तो रूस के जरिए काफी हद तक संभाल लिया गया है, लेकिन रसोई गैस का संकट अभी भी बरकरार है. विशेषज्ञों के अनुसार, भारत अपनी जरूरत का लगभग 55-60% LPG आयात करता है. इस आयातित गैस का 80 से 90 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज की खाड़ी से होकर आता है. युद्ध के कारण इस समुद्री मार्ग से आवाजाही लगभग बंद है. भारत प्रतिदिन करीब 10 लाख बैरल LPG की खपत करता है, लेकिन घरेलू उत्पादन केवल 40-45% ही है। आम जनता और व्यापार पर असर गैस की इस किल्लत का सबसे बुरा असर कमर्शियल सेक्टर पर पड़ा है. मुंबई, बेंगलुरु और दिल्ली जैसे महानगरों में लगभग 20% होटल और रेस्टोरेंट या तो बंद हो गए हैं या उन्होंने अपना मेन्यू सीमित कर दिया है. कई जगहों पर लोग अब पुराने समय की तरह लकड़ी के चूल्हों या इलेक्ट्रिक इंडक्शन का सहारा ले रहे हैं। सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के लिए अनिवार्य वस्तु अधिनियम लागू किया है और रिफाइनरियों को उत्पादन 25% बढ़ाने के निर्देश दिए हैं. हालांकि, स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है. केप्लर के विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले हफ्ते भारत के लिए चुनौतीपूर्ण होंगे. तेल का विकल्प तो मिल गया है, लेकिन LPG की आपूर्ति को सुचारू करना एक बड़ी कूटनीतिक और लॉजिस्टिक चुनौती है।

राहुल गांधी का पीएम मोदी पर हमला: LPG संकट के बीच बोले- संसद में नरेंद्र नहीं, घरों में सिलेंडर नहीं

नई दिल्ली कांग्रेस सहित विपक्ष के कई दलों ने आज ईरान युद्ध के कारण देश में गहराए एलपीजी संकट को लेकर संसद भवन के बाद प्रदर्शन किया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस संकट के लिए सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जिम्मेदार ठहराया। संसद के मकर द्वार के निकट कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रमुक और कई अन्य विपक्षी दलों के सांसद एकत्र हुए और उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। विपक्षी सांसदों ने गुरुवार को संसद भवन के बाद ''मोदी जी एलपीजी'' के नारे लगाए। इसके बाद राहुल गांधी ने एक्स पर तस्वीरें शेयर करते हुए पीएम पर कटाक्ष किया। राहुल लिखते हैं, ‘संसद से नरेंदर गायब, देश से सिलेंडर गायब’ आपको बता दें कि संसद के बाहर विपक्षी सांसदों ने गैस सिलेंडर की आकृति वाली तख्तियां भी ले रखी थीं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का कहना है कि ईंधन संकट को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है लेकिन वह ख़ुद अलग कारणों से घबराए हुए नजर आ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि रसोई गैस की किल्लत को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लोगों से नहीं घबराने की अपील कर रहे हैं, जबकि वह खुद अलग कारणों से घबराए हुए हैं। राहुल गांधी ने संसद परिसर में मीडिया से कहा, ''प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन खुद प्रधानमंत्री बिल्कुल अलग वजहों से घबराए हुए हैं। वह अदाणी मामले, 'एप्सटीन फाइल' के कारण घबराए हुए हैं।'' उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री सदन के अंदर नहीं आ पा रहे हैं और देश से कह रहे हैं कि घबराओ मत, जबकि वह खुद घबराए हुए हैं। आपको बता दें कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण रसोई गैस की किल्लत के बीच, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को लोगों से नहीं घबराने की अपील की थी और जनहित की रक्षा का आश्वासन दिया था। उन्होंने कहा था, ''मैं लोगों से अपील करना चाहता हूं कि हम केवल सही और सत्यापित जानकारी ही फैलाएं।''