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भारत के जहाज अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से करेंगे पार, जयशंकर और अराघची के बीच फोन पर बनी बात

 नई दिल्ली पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष (ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध) के बीच भारत को बड़ी राहत मिली है. सूत्रों ने बताया कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर की ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से हुई टेलीफोनिक बातचीत के बाद ईरान ने भारतीय टैंकरों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी गई है. ये भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा गुजरता है। सूत्रों ने गुरुवार को बताया कि विदेश मंत्री ने ईरान के अराघची से बात के बाद ईरान ने भारतीय तेल टैंकरों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी है. दोनों देशों के विदेश मंत्री की बातचीत का उद्देश्य इस अहम समुद्री मार्ग को खुला रखना था, जिससे कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति प्रभावित न हो। रूस और फ्रांस के विदेश मंत्रियों से भी की बात सूत्रों ने ये भी बताया कि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने केवल ईरान ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर अन्य प्रमुख शक्तियों के साथ भी तालमेल बिठाया. उन्होंने रूस के विदेश मंत्री सेर्गेई लावरोव और फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो से भी इस गंभीर मुद्दे पर चर्चा की. इन चर्चाओं का उद्देश्य समुद्री व्यापारिक मार्गों को खुला रखना और वैश्विक सप्लाई चेन को टूटने से बचाना था.भारत की इस सक्रिय विदेश नीति ने ये साबित कर दिया है कि तनाव के वक्त में भी वह अपने हितों की रक्षा के लिए सभी पक्षों के साथ संवाद स्थापित करने में सक्षम है। USA-यूरोप और इजरायल पर जारी रहेगा प्रतिबंध ईरान ने यह विशेष रियायत भारत को ऐसे वक्त में दी है जब अमेरिका, यूरोप और इजरायल से जुड़े जहाजों को इस मार्ग पर कड़े प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है। भारत को छूट देते हुए ईरान ने ये भी स्पष्ट किया है कि अमेरिका, यूरोप और इजरायल से जुड़े जहाजों पर फिलहाल प्रतिबंध जारी रहेंगे, लेकिन भारतीय टैंकर सुरक्षित रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर सकेंगे. ये भारत की कूटनीतिक सफलता है, क्योंकि वर्तमान में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों का ट्रैफिक 90% तक कम हो गया है और कई देशों के टैंकर फंस गए हैं।

UAE के प्रमुख शहरों और बंदरगाहों पर ईरान का हमला, सिटी बैंक ने सुरक्षा कारणों से की शाखाएं बंद

दुबई ईरान ने गुरुवार तड़के संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पर मिसाइलों और ड्रोनों से बड़ा हमला किया है. दुबई के जेबेल अली बंदरगाह से 65 किलोमीटर दूर फारस की खाड़ी में एक कंटेनर जहाज पर अज्ञात गोला गिरने से आग लग गई है. ब्रिटिश सेना के मुताबिक, जहाज के सभी कर्मचारी सुरक्षित हैं।  यूएई के एयर डिफेंस सिस्टम ने देश भर में ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों को इंटरसेप्ट किया है. कई जगह धमाकों की आवाजें सुनी गई हैं. अधिकारियों ने ओमान के सलालाह बंदरगाह पर हुए ड्रोन हमले की भी निंदा की है।  यूएई में सुरक्षा कारणों से सिटी बैंक ने एक को छोड़कर अपनी सभी शाखाएं बंद रखने का फैसला किया है।  जहाज पर हमला… दुबई तट के पास जेबेल अली पोर्ट के करीब एक कंटेनर जहाज को अज्ञात प्रोजेक्टाइल से निशाना बनाया गया. ब्रिटिश सेना के यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर ने पुष्टि की है कि यह हमला सुबह होने से ठीक पहले हुआ. हमले के बाद जहाज पर मामूली आग लग गई थी, जिसे कंट्रोल कर लिया गया है. राहत की बात यह है कि इस घटना में क्रू मेंबर्स को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।  यूएई का एयर डिफेंस… यूएई की नेशनल इमरजेंसी क्राइसिस एंड डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी ने निवासियों को सुरक्षित जगहों पर रहने की सलाह दी है. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, आसमान में सुनाई देने वाले धमाके ईरानी मिसाइलों को बीच में रोकने (इंटरसेप्शन) के कारण हुए हैं. दुबई में एक रिहायशी इमारत पर भी ड्रोन गिरने की खबर है, जहां लगी आग पर काबू पा लिया गया है. अधिकारियों ने इसे ईरान की ओर से शुरू की गई नई लहर बताया है।  फाइनेंशियल बिल्डिंग्स पर मंडराया खतरा ईरान द्वारा क्षेत्र के वित्तीय संस्थानों को निशाना बनाने की धमकी के बाद सिटी बैंक ने बड़ा कदम उठाया है. बैंक ने ऐलान किया है कि वह गुरुवार को देश की एक ब्रांच को छोड़कर बाकी सभी को बंद रखा जाएगा. बैंक मैनेजमेंट ने यह फैसला देश के अंदर बन रही स्थितियों को देखते हुए लिया है. यूएई ने ओमान के सलालाह बंदरगाह पर हुए ड्रोन हमलों को विश्वासघाती कार्रवाई बताते हुए इसकी कड़े शब्दों में निंदा की है। 

PM मोदी ने LPG संकट पर जताई चिंता, गृह मंत्रालय ने कंट्रोल रूम खोला, प्रशासन को किया अलर्ट

नई दिल्ली देश में एलपीजी सप्लाई में कमी आने की अफवाहों के बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने अपील की है कि पैनिक में न आएं। उन्होंने कहा कि हम लोग पश्चिम एशिया में छिड़े संघर्ष के चलते पैदा हुए संकट से निपटने में सफल होंगे। उन्होंने कहा कि किसी को भी परेशान होने की जरूरत नहीं है और सभी के हितों की रक्षा की जाएगी। तमिलनाडु में एनडीए की मीटिंग को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने यह अपील की। इसके अलावा होम मिनिस्ट्री की ओर से कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं। ऐसा इसलिए ताकि एलपीजी सप्लाई पर नजर रखी जा सके और जमाखोरी करने वालों पर ऐक्शन हो। गृह मंत्रालय का कहना है कि किसी भी तरह के पैनिक के हालात ना बनें क्योंकि घरेलू गैस सिलेंडरों की सप्लाई पहले की तरह ही जारी है। यदि लोग पैनिक में खरीद ना बढ़ाएं तो स्थिति सही रहेगी। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा समेत देश के तमाम राज्यों में सरकारें अलर्ट पर हैं और जिला प्रशासन की ओर से लगातार लोगों को अफवाहों से बचने की सलाह दी जा रही है। प्रशासन का कहना है कि गैस की किल्लत नहीं है और यदि कोई जमाखोरी करेगा तो उस पर ऐक्शन लिया जाएगा। सरकार की ओर से पहले ही एस्मा लागू किया जा चुका है। इसके तहत घरेलू गैस सप्लाई को प्राथमिकता दी गई है और बीते 6 महीनों से चली आ रही आपूर्ति के औसत को बनाए रखे का निर्णय हुआ है। इस बीच पीएम मोदी ने किसी भी तरह की अफवाह से बचने को कहा है। उन्होंने कहा कि मैं जनता से अपील करता हूं कि सही सूचना को ही आगे बढ़ाएं। बिना किसी वेरिफिकेशन के सूचनाओं को आगे प्रसारित ना करें। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में चल हे संकट ऊर्जा की सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। उन्होंने बुधवार को कहा, ‘मैं तमिलनाडु के लोगों से अपील करूंगा कि अफवाहों से बचें। सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। हमें उम्मीद है कि हम संकट से उबरेंगे, जैसा कोरोना के दौर में हुआ था। हमारी विचारधारा इंडिया फर्स्ट की है। किसी भी तरह के पैनिक में रहने की जरूरत नहीं है। सभी के हितों की रक्षा करने के लिए सरकार प्रयास कर रही है।’ पीएम बोले- कोरोना महामारी की तरह इस संकट से भी उबरेंगे पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना महामारी के दौर में 140 करोड़ भारतीयों ने दिखाया था कि हमारा देश कितना परिपक्व है। मुझे भरोसा है कि हम इस संकट से आसानी से उबर जाएंगे, जैसा कोरोना में हुआ था। पीएम मोदी की यह टिप्पणी अहम है क्योंकि देश भर से ऐसी खबरें आ रही हैं, जिसमें कहा जा रहा है कि एलपीजी की सप्लाई प्रभावित है और लोग पैनिक परचेजिंग करने में जुटे हैं। इसी के कारण होम मिनिस्ट्री ने कंट्रोल रूम बना दिए हैं और दिन भर नजर रखी जा रही है। फैक्ट चेक करने में भी जुटे मंत्रालय, कंट्रोल रूम ऐक्टिव होम मिनिस्ट्री ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और पेट्रोलियम मिनिस्ट्री से संपर्क साधा है। तीनों विभाग मिलकर फैक्ट चेक करने और सही सूचना देने के काम में जुटे हैं। इस बीच हालात संभालने के लिए केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और पुलिस प्रमुखों के साथ मीटिंग की है। ऐसा इसलिए ताकि कानून व्यवस्था को बनाए रखा जा सके और अफवाहों से उपजे हालातों से भी निपटने में मदद मिले।

मोनालिसा के बाल विवाह का सच, पति फरमान ने किया खुलासा, सबूत भी पेश किए

तिरुवनंतपुरम महाकुंभ में रुद्राक्ष की माला बेचकर मोनालिसा रातोरात वायरल हो गई थीं. अपनी कजरारी आंखों और मिलियन डॉलर स्माइल से मोनालिसा ने फैंस का दिल जीता था. अपनी खूबसूरती से करोड़ों दिलों में छाने वाली मोनालिसा ने करियर शुरू होने से पहले शादी रचा ली है. बुधवार को उन्होंने अपने बॉयफ्रेंड फरमान खान संग शादी की. क्योंकि फरमान मुस्लिम हैं, इसलिए एक्ट्रेस के पेरेंट्स इस रिश्ते के खिलाफ थे. लेकिन अपने प्यार को पाने की खातिर मोनालिसा ने परिवार से बगावत कर शादी की।  मोनालिसा और फरमान ने केरल में जाकर सिविल मैरिज की, फिर तिरुवनंतपुरम के अरुमनूर नैनार मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज से शादी की. फरमान ने पुलिस प्रोटेक्शन के बीच मोनालिसा की मांग में सिूंदर भरा. मोनालिसा की इंटरफेथ मैरिज ने सबको हैरानी में डाल दिया है. इंटरनेट पर उनकी वेडिंग फोटोज वायरल हो रही हैं. इनमें मोनालिसा लाल साड़ी में मांग में सिंदूर लगाए, गले में वरमाला पहने दिख रही हैं. इस बीच ऐसी भी बातें उड़ीं कि मोनालिसा नाबालिग हैं. वो 18 साल से कम हैं. इन खबरों पर उनके पति फरमान ने रिएक्ट किया है।   क्या नाबालिग हैं मोनालिसा? फरमान ने शादी के बाद मीडिया से बात करते हुए मैरिज सर्टिफिकेट दिखाकर बताया कि मोनालिसा एडल्ट हैं. फरमान ने कहा- बहुत जगह न्यूज चल रही है कि मोनालिसा मैच्योर नहीं है. वो चाइल्ड है, लेकिन ऐसा नहीं है. मैं बता दूं कि मोनालिसा एडल्ट है. वो 18 प्लस है. मैरिज सर्टिफिकेट में उसका डेट ऑफ बर्थ लिखा हुआ है. वो 18 प्लस है. इसका सबूत मैरिज सर्टिफिकेट और आधार कार्ड में मिल जाएगा।  मीडिया से बात करते हुए मोनालिसा ने बताया कि उन्हें शादी के बाद काफी अच्छा लग रहा है. वो खुश हैं. उनके पति ने कहा वो फिलहाल केरल में रहेंगे. अगर मोनालिसा को केरल में रहना पसंद आएगा तो वो यहीं पर सैटल हो जाएंगे. उनके मुताबिक, मोनालिसा के पिता इस रिश्ते के खिलाफ थे इसलिए उन्होंने केरल आकर मंदिर में शादी की. उन्होंने केरल के लोगों का सपोर्ट करने के लिए शुक्रिया अदा किया. मोनालिसा ने कहा- केरल मुझे अच्छा लगा. यहां के लोग बहुत अच्छे हैं।  लव स्टोरी कैसे हुई शुरू मोनालिसा के पति भी पेशे से एक्टर हैं. फरमान ने बताया कि हमारा 6 महीने का प्यार है. लेकिन वो 60 साल के बराबर है. इसलिए हम दोनों ने शादी की. लव स्टोरी बताते हुए फरमान ने कहा- हम दोनों एक फिल्म में साथ काम कर रहे थे. उसी वक्त हमारी बातचीत शुरू हुई. मोनालिसा ने मुझे प्रपोज किया. मैंने शुरुआत में मना किया था. लेकिन मोनालिसा ने कहा कि हमें ये रिश्ता करना है. मुझे तुम पसंद हो. फिर हमें प्यार हुआ और हमने शादी करने का फैसला किया। 

बजट सत्र के दौरान महाराष्ट्र विधान भवन में बम की धमकी, सुरक्षा के तहत खाली कराई गई इमारत

 मुंबई महाराष्ट्र विधान भवन को बम से उड़ाने की धमकी वाला मेल आया है. सुरक्षा के मद्देनजर तुरंत विधानसभा को खाली करा दिया गया है. मुंबई पुलिस और बम निरोधक दस्ते (BDS) की टीमें गुरुवार को विधान भवन परिसर में बम की धमकी मिलने के बाद गहन तलाशी अभियान चला रही हैं. कुछ विधायकों और विधान भवन की आधिकारिक आईडी पर एक धमकी भरा ईमेल प्राप्त हुआ है, जिसमें परिसर में विस्फोट करने की बात कही गई है। बजट सत्र चलने की वजह से बड़ी संख्या में मंत्रियों और विधायकों की मौजूदगी को देखते हुए पूरी इमारत को तुरंत खाली करा दिया गया है।सभी कर्मचारियों को बाहर निकाल दिया गया है. सुरक्षा बल वर्तमान में पूरे क्षेत्र और भवन परिसर को सैनिटाइज करने और संदिग्ध वस्तुओं की जांच करने में जुटे हैं। बजट सत्र के दौरान मचा हड़कंप विधानसभा में बजट सत्र की महत्वपूर्ण कार्यवाही चल रही है. इस दौरान विधायकों को धमकी भरे ईमेल की जानकारी मिली. इसके तुरंत बाद सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत 'फ्लैश' अलर्ट जारी किया गया. बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल स्क्वाड (BDDS) की टीमें चप्पे-चप्पे की तलाशी ले रही हैं, जिससे किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सके। तलाशी और सुरक्षा अभियान जारी पुलिस अधिकारियों ने बताया कि विधान भवन परिसर को पूरी तरह सील कर दिया गया है. ईमेल के जरिए दी गई इस धमकी की गंभीरता को देखते हुए तकनीकी सेल भी सक्रिय है. फिलहाल पूरी इमारत को सैनिटाइज किया जा रहा है और सुरक्षा टीमें यह सुनिश्चित कर रही हैं कि परिसर सुरक्षित है. जांच जारी रहने तक कर्मचारियों और बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई है।

शादी समारोह में चली गोली से बाल-बाल बचे फारूक अब्दुल्ला, पुलिसकर्मियों की बहादुरी से टली बड़ी वारदात

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता डॉ. फारूक अब्दुल्ला पर बुधवार रात एक शादी समारोह के दौरान जानलेवा हमला हुआ, लेकिन पुलिस के दो जांबाज जवानों- (एक इंस्पेक्टर और एक सब-इंस्पेक्टर) ने अपने साहस से गोली की दिशा बदल दी और हत्या की इस कोशिश को नाकाम कर दिया, जिससे फारूक अब्दुल्ला की जान बाल-बाल बच गई. घटना के बाद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए. वहीं, अब खुफिया सूत्र ने इस घटना को  सुरक्षा में गंभीर चूक करार दिया है। पुलिस के अनुसार, घटना जम्मू के पॉश इलाके ग्रेटर कैलाश में रॉयल पार्क बैंक्वेट हॉल में हुई, जहां फारूक अब्दुल्ला और उप-मुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी पार्टी नेता बी.एस. चौहान के बेटे की शादी में शामिल होने गए थे. समारोह खत्म होने के बाद जब दोनों नेता बाहर निकल रहे थे, तभी 63 वर्षीय आरोपी कमल सिंह ने पीछे से आकर पॉइंट-ब्लैंक रेंज से फारूक अब्दुल्ला पर गोली चला दी। सुरक्षाकर्मियों ने बदली गोली की दिशा पुलिस ने बताया कि आरोपी ने अपनी लाइसेंसी पिस्तौल से एक गोली चलाई, लेकिन सुरक्षा में तैनात दो पुलिसकर्मियों- एक इंस्पेक्टर और एक सब-इंस्पेक्टर- ने तुरंत आरोपी पर झपट्टा मारा. उन्होंने उसे दबोच लिया और गोली चलने के बावजूद उसकी दिशा बदल दी, जिससे गोली किसी को नहीं लगी. आरोपी को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया और उसके पास से इस्तेमाल की गई पिस्तौल भी बरामद कर ली गई। आरोपी का चौंकाने वाला खुलासा पुलिस ने बयान जारी कर कहा, 'फारूक अब्दुल्ला पर हत्या की कोशिश की गई थी. सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई की और हमले को नाकाम कर दिया. आरोपी को हिरासत में ले लिया. आरोपी की पहचान जम्मू के पुरानी मंडी निवासी कमल सिंह पुत्र अजीत सिंह के रूप में हुई है। जांच में पता चला है कि आरोपी ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वह पिछले 20 साल से फारूक अब्दुल्ला को निशाना बनाने का इंतजार कर रहा था। उमर अब्दुल्ला ने उठाए सवाल घटना के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (फारूक अब्दुल्ला के बेटे) ने एक्स पर पोस्ट किया, 'अल्लाह मेहरबान है. मेरे पिता को बहुत करीब से बचाया गया. क्लोज प्रोटेक्शन टीम ने गोली को डिफ्लेक्ट किया और हत्या के प्रयास को नाकाम कर दिया। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए कि Z+ सुरक्षा के बावजूद हमलावर इतने करीब कैसे पहुंच गया। सीसीटीवी फुटेज में पूरा घटनाक्रम कैद हो गया है, जिसमें दिखता है कि आरोपी पीछे से आता है, पिस्तौल तानता है और गोली चलाता है, लेकिन सुरक्षाकर्मी तुरंत उसे पकड़ लेते हैं. फारूक अब्दुल्ला और सुरिंदर चौधरी दोनों सुरक्षित हैं और किसी को चोट नहीं आई। सुरक्षा में गंभीर चूक है घटना वहीं, घटना के बाद अब खुफिया सूत्रों ने इस घटना को गंभीर सुरक्षा चूक बताया है. सूत्रों कहना है कि क्लोज प्रोटेक्शन टीम (CPT) को प्रोटेक्टी के इतने करीब किसी को आने नहीं देना चाहिए था. NSG टीम ने तब हरकत में आई, जब सुरक्षा में सेंधमारी हो चुकी थी और आरोपी ने गोली चला दी थी। सूत्रों ने खुलासा किया कि बाहरी घेरे की सुरक्षा और कार्यक्रम स्थल के सैनिटाइजेशन की जिम्मेदारी जम्मू-कश्मीर पुलिस की थी, जिसने अपनी ड्यूटी में ढिलाई की. इसके कारण हमलावर हथियार के साथ वेन्यू के अंदर पहुंच गया. हालांकि, NSG टीम ने हमला होने के बाद त्वरित कार्रवाई की, लेकिन सुरक्षा घेरा टूटने और गोली चलने के बाद उनका एक्शन में आना प्रोटोकॉल पर सवाल खड़े करता है।

बुरे वक्त के लिए खास इंतजाम, जानें भारत ने कहां बनाए भूमिगत तेल भंडार

नईदिल्ली  मिडिल ईस्ट में ईरान युद्ध और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज जैसे अहम समुद्री रास्तों पर खतरे की खबरों के बीच पूरी दुनिया की नजर तेल सप्लाई पर टिक गई है. ऐसे में भारत को लेकर भी एक बड़ा सवाल उठ रहा है कि अगर वैश्विक सप्लाई अचानक रुक जाए तो देश कितने दिनों तक अपने भंडार के भरोसे चल सकता है. बहुत कम लोगों को पता है कि भारत ने इस तरह की आपात स्थिति के लिए बेहद खास इंतजाम कर रखे हैं. देश ने पहाड़ों की मजबूत चट्टानों के भीतर विशाल गुफाओं जैसी संरचनाओं में कच्चे तेल का भंडार छिपाकर रखा है. ये गुफाएं दरअसल भारत के स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व हैं. इन्हें युद्ध, आपदा या वैश्विक सप्लाई रुकने जैसी स्थिति में इस्तेमाल करने के लिए बनाया गया है. दरअसल इस पूरी योजना की शुरुआत अचानक नहीं हुई थी. इसकी कहानी 1991 के उस आर्थिक संकट से जुड़ी है जब गल्फ वॉर के दौरान भारत के सामने गंभीर ऊर्जा संकट खड़ा हो गया था. उस समय ऐसी खबरें सामने आई थीं कि देश के पास तेल का स्टॉक बेहद सीमित रह गया था. कुछ रिपोर्टों में कहा गया कि भारत के पास सिर्फ तीन दिनों का तेल बचा था, जबकि कुछ में इसे एक सप्ताह या दस दिन बताया गया. असल समस्या यह थी कि तेल खरीदने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से खत्म हो रहा था. उस संकट ने भारत को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना जरूरी है. 1991 के संकट ने क्यों बदली भारत की सोच     1991 के समय भारत के पास जो तेल स्टॉक था वह असल में तेल कंपनियों का कमर्शियल भंडार था. यानी वह रोजमर्रा की सप्लाई के लिए रखा जाता था. सरकार के पास अलग से ऐसा कोई रणनीतिक भंडार नहीं था जिसे सिर्फ आपात स्थिति में इस्तेमाल किया जा सके. हालांकि उस समय भी तेल कंपनियां सरकारी नियंत्रण में ही थीं, लेकिन फिर भी संकट के समय अलग से सुरक्षित रिजर्व होना जरूरी समझा गया.     दुनिया के कई बड़े देशों ने पहले से ही अपने स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) बना रखे थे. इनका मकसद यही होता है कि अगर युद्ध, वैश्विक संकट या प्राकृतिक आपदा की वजह से तेल सप्लाई रुक जाए तो देश कुछ समय तक अपने भंडार के सहारे चल सके. इसे ऐसे समझा जा सकता है जैसे पुराने स्कूटरों में पेट्रोल टैंक में एक रिजर्व सिस्टम होता था. जब टैंक का पेट्रोल खत्म हो जाता था तो रिजर्व खोलकर नजदीकी पेट्रोल पंप तक पहुंचा जा सकता था. उसी तरह यह सरकारी रिजर्व होता है जिसे सिर्फ संकट की स्थिति में ही खोला जाता है.     तेल कंपनियों के कमर्शियल भंडार आम तौर पर बड़े-बड़े तेल टैंकों या डिपो में रखे जाते हैं. लेकिन रणनीतिक भंडार के लिए ऐसी जगह चाहिए होती है जहां युद्ध या हमले का असर कम से कम हो. अगर कोई दुश्मन देश तेल डिपो को निशाना बना दे या किसी आपदा में डिपो नष्ट हो जाए तो संकट और बढ़ सकता है. इसलिए तय किया गया कि रणनीतिक भंडार जमीन के ऊपर नहीं बल्कि चट्टानों के भीतर बनाए जाएं.     इसके लिए कई भौगोलिक मानकों पर विचार किया गया. पहली शर्त थी कि वहां मजबूत चट्टानें हों, जिनमें बड़ी गुफाएं बनाई जा सकें. दूसरी शर्त यह थी कि उन चट्टानों से तेल रिसना नहीं चाहिए. तीसरी शर्त थी कि उस इलाके में भूकंप का खतरा कम हो. चौथी शर्त यह थी कि समुद्री बंदरगाह पास हो, ताकि जहाजों से तेल आसानी से लाया जा सके. और पांचवीं शर्त यह थी कि रिफाइनरी भी ज्यादा दूर न हो, ताकि पाइपलाइन से तेल पहुंचाया जा सके. भारत के पास तेल भंडारों की स्थिति:     भारत के पास करीब 5.33 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता का स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) है.     यह भंडार आपात स्थिति में लगभग 9 से 10 दिनों की तेल जरूरत पूरी कर सकता है.     भारत ने ये रणनीतिक तेल भंडार पहाड़ों की चट्टानों के भीतर गुफाओं जैसी संरचनाओं में बनाए हैं.     देश में फिलहाल तीन प्रमुख स्थानों पर ये भंडार मौजूद हैं- विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पडूर.     इन भंडारों का इस्तेमाल युद्ध, वैश्विक तेल संकट, प्राकृतिक आपदा या सप्लाई रुकने जैसी स्थिति में किया जाता है.     भारत सरकार इन्हें इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड (ISPRL) के जरिए संचालित करती है.     भारत अब दूसरे चरण में ओडिशा के चंडीखोल और पडूर विस्तार के जरिए इस क्षमता को और बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है. पहले चरण में तीन जगहों पर कुल 5.33 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता के भंडार बनाने का फैसला हुआ. भारत ने कहां बनाए रणनीतिक तेल भंडार     सभी मानकों को देखते हुए दक्षिण भारत के तटीय इलाकों को चुना गया. सरकार ने इस काम के लिए एक अलग कंपनी बनाई इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड (ISPRL). इस कंपनी को जिम्मेदारी दी गई कि वह देश के लिए रणनीतिक तेल भंडार तैयार करे.     पहले चरण में तीन जगहों पर कुल 5.33 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता के भंडार बनाने का फैसला हुआ. पहला भंडार आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में बनाया गया जिसकी क्षमता 1.33 मिलियन मीट्रिक टन है. दूसरा कर्नाटक के मंगलुरु में 1.5 मिलियन मीट्रिक टन का भंडार बनाया गया. तीसरा कर्नाटक के ही पडूर (उडुपी के पास) में 2.5 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता का बनाया गया.     इन तीनों भंडारों को पहाड़ों की मजबूत चट्टानों के भीतर गुफाओं की तरह बनाया गया है. विशाखापत्तनम में ग्रेनाइट चट्टानों के भीतर सुरंग जैसी संरचनाएं बनाई गई हैं. यह स्थान इसलिए चुना गया क्योंकि यहां भूकंप का खतरा कम है और पास में बंदरगाह तथा HPCL की रिफाइनरी मौजूद है. यह भंडार 2015 में तैयार हुआ और इसमें इराक से लाकर तेल भरा गया.     मंगलुरु में बने भंडार को बसाल्ट चट्टानों के भीतर बनाया गया है. यह 2016 में तैयार हुआ और इसमें अबू धाबी से तेल लाकर रखा गया. तीसरा भंडार पडूर में बनाया गया जो 2018 में पूरा हुआ. यहां भी बसाल्ट … Read more

LPG और PNG का बड़ा अपडेट: 1.5 करोड़ घरों में PNG, हर घर में दो सिलेंडर की योजना

नई दिल्ली युद्ध की वजह से कई देशों में तेल और गैस की किल्लतें बढ़ती जा रही हैं. भारत संकट से पहले अलर्ट हो गया है, और जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं. सरकार का कहना है कि देश के लोग घबराएं, फिलहाल तेल और गैस को लेकर कोई संकट नहीं है। दरअसल, 140 करोड़ आबादी वाले देश भारत तेल और रसोई गैस के लिए काफी हदतक दूसरे देशों पर निर्भर है. यानी सीधा रसोई से जुड़ा हुआ मामला है, गैस की किल्लत की खबर से लोग परेशान हैं. लेकिन खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हालात पर नजर बनाए हुए हैं, और जरूरी आदेश दे रहे हैं, ताकि देश में रसोई गैस की कोई किल्लत न हो। केंद्र सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार देश में करीब 33 करोड़ घरेलू LPG कनेक्शन हैं. अधिकतर घरों में दो सिलेंडर होते हैं, इस हिसाब से देश में LPG सिलेंडर कुल संख्या करीब 66 करोड़ तक हो सकती है. इनमें से बड़ी संख्या प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत दिए गए कनेक्शनों की है, जिससे ग्रामीण और गरीब परिवारों तक भी रसोई गैस की पहुंच बढ़ी है. इसके अलावा देश में कमर्शियल सिलेंडर की संख्या भी करोड़ों में है।  देश में 33 करोड़ गैस कनेक्शन  सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2014 में देश में LPG कनेक्शनों की संख्या लगभग 14.5 करोड़ थी. पिछले 10 वर्षों में यह संख्या करीब दोगुनी होकर 33 करोड़ तक पहुंच गई है. प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत करीब 10.4 करोड़ गरीब परिवारों को मुफ्त या सब्सिडी वाले LPG कनेक्शन दिए गए हैं. गांव-गांव तक रसोई गैस की उपलब्धता बढ़ाने के लिए देशभर में गैस एजेंसियों और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का भी तेजी से विस्तार किया गया है. दूसरी ओर, शहरों में पाइप के जरिए घरों तक गैस पहुंचाने की व्यवस्था यानी PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) भी धीरे-धीरे बढ़ रही है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार फिलहाल देश में करीब 1.5 करोड़ घरों में PNG कनेक्शन उपलब्ध हैं. यह सुविधा मुख्य रूप से महानगरों और बड़े शहरों में उपलब्ध है,  जहां सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के जरिए घरों तक पाइपलाइन से गैस पहुंचाई जाती है.  PNG नेटवर्क का इस्तेमाल केवल घरों तक ही सीमित नहीं है. इसके अलावा देशभर में करीब 45 हजार से ज्यादा कमर्शियल प्रतिष्ठान, जैसे होटल और रेस्टोरेंट, 20 हजार से ज्यादा उद्योग भी पाइप गैस का इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे ऊर्जा आपूर्ति अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित मानी जाती है, क्योंकि इसमें सिलेंडर की जरूरत नहीं होती है.  PNG की सप्लाई बड़े शहरों में  यही नहीं, सरकार आने वाले वर्षों में PNG नेटवर्क का और विस्तार करने की योजना बना रही है. पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन परियोजनाओं के माध्यम से 2032 तक करीब 12.5 करोड़ घरों तक PNG पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है. इसके लिए देश के कई नए शहरों और जिलों में गैस पाइपलाइन बिछाने का काम जारी है.  हालांकि फिलहाल भारत में रसोई गैस की जरूरतों का बड़ा हिस्सा LPG सिलेंडरों के जरिए ही पूरा होता है, क्योंकि PNG नेटवर्क अभी सीमित शहरों तक ही पहुंच पाया है. भारत में साल 2025 के आसपास लगभग 31–33 मिलियन मीट्रिक टन LPG की खपत हुई. इस हिसाब से लगभग 85 हजार टन LPG की रोजाना खपत होती है. जबकि भारत की कुल प्राकृतिक गैस खपत लगभग 188 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन (MMSCMD) के आसपास है.  इसके अलावा सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत के पास करीब 8 हफ्ते का तेल भंडार उपलब्ध है. भारत के तेल आयात का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है और इसका एक महत्वपूर्ण भाग होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते से गुजरता है. जिस वजह से वैश्विक स्तर पर संकट दिख रहा है.  बता दें, भारत ने जोखिम कम करने के लिए पिछले कुछ वर्षों में अपनी रणनीति बदली है. देश ने रूस, अमेरिका और अफ्रीकी देशों से भी कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई है. लेकिन अगर वैश्विक स्तर पर लंबे समय तक तेल संकट बना रहता है तो इससे पेट्रोल-डीजल की कीमतों, महंगाई और देश के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है. इस बीच राहत की बात ये है कि कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट देखी जा रही है. ब्रेंट क्रूड की कीमत सोमवार की हाई 120 डॉलर प्रति बैरल से फिसलकर 90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है.

एलपीजी की भारी कमी, न बुकिंग हो रही न सिलेंडर मिल रहा, ब्लैक मार्केट में दाम बढ़ा

नई दिल्ली अमेरिका और इजरायल के खिलाफ ईरान की जंग का असर भारत के करोड़ों लोगों पर पड़ता दिख रहा है. पश्चिम एशिया में जारी इस युद्ध के बीच उत्तर प्रदेश, बिहार से लेकर तेलंगाना और तमिलनाडु तक लाखों लोग एलपीजी सिलेंडर की किल्लत से जूझ रहे हैं. एलपीजी सप्लाई बंद होने जयपुर स्थित बोरोसिल के कारखाने में काम बंद करना पड़ा और कंपनी प्रबंधन ने करीब तीन हजार श्रमिकों को बुधवार से काम पर नहीं आने के लिए कह दिया है. वहीं दिल्ली हाईकोर्ट की लॉयर्स कैंटीन में एलपीजी गैस सिलेंडर उपलब्ध न होने के कारण फिलहाल मुख्य भोजन (मेन कोर्स) तैयार और परोसा नहीं जा रहा है। बिहार सहित कई राज्यों में कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई रोक दी गई है. वहीं पटना से लेकर अयोध्या तक कई लोग सुबह ही गैस एजेंसी के गोदाम के बाहर लाइन लगाकर खड़े हैं. कई लोगों की शिकायत है कि गैस सिलेंडर की बुकिंग करवाने के बावजूद 4-5 दिनों तक एलपीजी सिलेंडर उन्हें नहीं मिल पाई है। रसोई गैस की सप्लाई में दिक्कत की खबरों के सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. पूरे देश में केंद्र सरकार ने ईसीए यानी एसेंशियल कमोडिटी एक्ट लागू कर दिया है. केंद्र सरकार ने एलपीजी और सीएनजी की आपूर्ति तय करने के लिए बड़ा फैसला लिया है. सरकार के मुताबिक, आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी और कुछ उद्योगों को सीमित गैस आपूर्ति मिलेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने भी कैबिनेट मीटिंग में मंत्रियों को साफ निर्देश दिए कि पश्चिम एशिया में जारी संकट का असर आम आदमी पर बिल्कुल नहीं पड़ना चाहिए. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस वैश्विक उथल-पुथल के समय जनता का भरोसा बनाए रखना सबसे ज़रूरी है. प्रधानमंत्री ने मंत्रियों से कहा कि तेल की क़ीमतें स्थिर हैं, ये बात लोगों तक पहुंचाएं और ये भी बताएं कि देश में तेल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. प्रधानमंत्री ने ये भी कहा कि भारत ने सप्लाई चेन मैनेजमेंट सिस्टम इस संकट को ध्यान में रखकर तैयार किया है, इसे भी जनता तक पहुंचाया जाए। भारत सरकार ने दावा किया है कि इस जंग का तेल की कीमतों पर कोई असर नहीं पड़ेगा और देश में घरेलू उपभोक्ता के लिए गैस की कोई कमी नहीं है. सरकार की तरफ से बताया गया कि भारत में फ़िलहाल पेट्रोल और डीज़ल के दाम स्थिर ही रहेंगे वो नहीं बढ़ेंगे. वहीं गैस क़ीमतों में हुआ 60 रुपये का इजाफा मौजूदा हालत की वजह से नहीं, बल्कि पिछले साल की अंडरकवरी की वजह से बढ़े हैं। दरअसल इजरायल और अमेरिका के खिलाफ ईरान की जंग के चलते मिडिल ईस्ट के प्रमुख ऊर्जा परिवहन मार्गों में आई बाधाओं के चलते पिछले एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में शनिवार को ही इजाफा किया गया था. घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की कीमत में 60 रुपये और कमर्शियल रसोई गैस सिलेंडरों की कीमत में 115 रुपये की बढ़ोतरी की गई। न रसोई गैस की बुकिंग हो रही, न एलपीजी सिलेंडर मिल रहा… ब्लैक मार्केट में 300 रुपये किलो पहुंचा दाम एलपीजी गैस सिलेंडर की किल्लत से देशभर के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. नोएडा के रहने वाले लोगों का कहना है कि पिछले 5-6 दिनों से ऑनलाइन गैस बुकिंग नहीं हो पा रही है. जब लोग गैस एजेंसी से संपर्क करते हैं तो उन्हें बताया जाता है कि सिस्टम में तकनीकी खराबी है. वहीं एजेंसी पर जाकर पूछने पर भी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है. गैस बुक कराने के लिए लोगों को घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है, लेकिन इसके बाद भी सिलेंडर मिलने की कोई गारंटी नहीं है। गैस बुकिंग में दिक्कत के चलते लोगों को ब्लैक में गैस खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि एक किलो गैस के लिए 300 से 400 रुपये तक देने पड़ रहे हैं. गैस बुकिंग कराने आई महिलाओं ने बताया कि एजेंसी वाले उनका नंबर लिखकर बाद में फोन करने की बात कहते हैं, लेकिन कई दिनों बाद भी न तो फोन आता है और न ही गैस मिलती है. लोगों का कहना है कि एजेंसी के बाहर कहा जा रहा है कि गैस उपलब्ध नहीं है, जबकि इलाके में ब्लैक में गैस बेची जा रही है। एक महिला ने नाराजगी जताते हुए कहा कि वे दिल्ली-नोएडा कमाने आए हैं, भूखे रहने के लिए नहीं. अगर सारी कमाई गैस खरीदने में ही खर्च हो जाएगी तो परिवार का गुजारा कैसे होगा. गैस की कमी के कारण कई परिवारों को मजबूरन बाहर से खाना खरीदकर गुजारा करना पड़ रहा है. रसोई गैस हुई खत्म तो इंडक्शन खरीदने भागे लोग, दुकानों पर भीड़ रसोई गैस संकट की खबरों के बीच अब इलेक्ट्रिकल शॉप्स पर इंडक्शन की मांग में इजाफा देखने को मिल रहा है. दिल्ली के दरियागंज की एक इलेक्ट्रिकल शॉप्स के मालिक विकास ने बताया कि पिछले दो तीन दिन से इंडक्शन की मांग और इंक्वायरी बढ़ गई है. इंडक्शन खरीदने आए एक ग्राहक मोहम्मद शफी ने बताया कि गैस की दिक्कत है इसलिए खरीद रहे हैं. गैस की बुकिंग नहीं हो पा रही है. फिलहाल के लिए गैस है, लेकिन सेफ साइड के लिए ले रहे हैं, अगर नहीं मिली तो इंडक्शन रहे।  दिल्ली हाईकोर्ट की कैंटीन में एलपीजी खत्म, मेन कोर्स हुआ बंद दिल्ली हाईकोर्ट की लॉयर्स कैंटीन में एलपीजी गैस सिलेंडर उपलब्ध न होने के कारण फिलहाल मुख्य भोजन (मेन कोर्स) तैयार और परोसा नहीं जा रहा है. कैंटीन प्रबंधन की ओर से जारी सूचना के अनुसार, वर्तमान में एलपीजी गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं है, जिसके चलते मुख्य भोजन की तैयारी संभव नहीं हो पा रही है. गैस सप्लाई कब तक बहाल होगी, इसकी अभी कोई जानकारी नहीं है. गैस उपलब्ध होते ही मुख्य भोजन की तैयारी फिर से शुरू कर दी जाएगी. हालांकि इस दौरान सैंडविच, सलाद, फ्रूट चाट और अन्य हल्के नाश्ते उपलब्ध रहेंगे और इन्हें परोसा जाता रहेगा। एलपीजी सप्लाई बंद होने जयपुर का बोरोसिल प्लांट ठप, 3000 मजदूरों की कर दी गई छुट्टी अमेरिका-इजरायल के साथ ईरान की जंग का असर अब भारत के उद्योगों पर भी दिखने लगा है. जयपुर के गोविंदगढ़ क्षेत्र में स्थित बोरोसिल लिमिटेड की फैक्ट्री में एलपीजी गैस की … Read more

दिल्ली सरकार के कामकाज पर सीएम रेखा गुप्ता बोलीं – तरनजीत सिंह संधू के नेतृत्व में आगे बढ़ेंगे

नई दिल्ली दिल्ली के नए उपराज्यपाल के तौर पर बुधवार को तरनजीत सिंह संधू ने पदभार ग्रहण किया। इस दौरान दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि भाजपा सरकार उपराज्यपाल के नेतृत्व में काम करेगी। सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि मैं दिल्ली के विकास को तेज करने में मदद करने के लिए आपका दिल्ली में स्वागत करती हूं। हमें पूरा भरोसा है कि आपकी मौजूदगी से दिल्ली की तरक्की और तेज़ होगी, शहर की समस्याओं का बेहतर समाधान मिलेगा और दिल्ली सरकार आपके मार्गदर्शन और दिशा में काम करेगी। हम आपका आशीर्वाद चाहते हैं। सीएम रेखा गुप्ता ने एक्स पोस्ट में लिखा कि दिल्ली के नवनियुक्त उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू को पदभार ग्रहण करने पर हार्दिक बधाई। उनके शपथ ग्रहण समारोह में सम्मिलित हुई। दिल्ली हम सबकी साझा विरासत है। इसकी प्रगति और समावेशी समृद्धि के लिए हम सभी मिलकर कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मुझे पूर्ण विश्वास है कि आपके व्यापक और दीर्घ प्रशासनिक अनुभव से दिल्ली में चल रहे विकास कार्यों को नई गति और ऊंचाइयां प्राप्त होंगी। आपके सफल और यशस्वी कार्यकाल के लिए हार्दिक मंगलकामनाएं। दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने एक्स पोस्ट में लिखा कि सीएम रेखा गुप्ता की उपस्थिति में दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने सरदार तरनजीत सिंह संधू को दिल्ली के उपराज्यपाल के रूप में शपथ दिलाई। इसी के साथ उपराज्यपाल के रूप में तरनजीत सिंह संधू ने पदभार ग्रहण किया। मुझे पूरा विश्वास है कि उनके अनुभव, दूरदृष्टि और कुशल मार्गदर्शन में दिल्ली के विकास और सुशासन को नई दिशा और गति मिलेगी। मैं पुन उन्हें उनके आगामी कार्यकाल के लिए बहुत-बहुत बधाईयां देता हूं। मंत्री प्रवेश वर्मा ने एक्स पोस्ट में लिखा कि दिल्ली के नवनियुक्त उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू को पदभार ग्रहण करने पर हार्दिक बधाई। मुझे विश्वास है कि आपके समृद्ध प्रशासनिक अनुभव और दूरदर्शी नेतृत्व में दिल्ली के विकास कार्यों को नई गति मिलेगी तथा राजधानी प्रगति नए आयाम स्थापित करेगी। आपके सफल एवं जनसेवा से परिपूर्ण कार्यकाल के लिए हार्दिक शुभकामनाएं।