samacharsecretary.com

रेस्क्यू ऑपरेशन जारी: पुष्कर सिंह धामी ने कहा- हर नागरिक की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी

देहरादून ईरान और इजरायल में बढ़ते तनाव के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि राज्य सरकार पूरी तरह सतर्क है और सभी एजेंसियों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। मंगलवार को हरिद्वार पहुंचे मुख्यमंत्री ने मीडिया के सामने स्पष्ट किया कि खाड़ी देशों में फंसे उत्तराखंड के लोगों को सुरक्षित वापस लाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार लगातार विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय के संपर्क में है। धामी ने कहा कि विदेशों में मौजूद उत्तराखंडियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। वहां रह रहे लोगों से भी संपर्क साधा जा रहा है। उन्हें सुरक्षित भारत लाने की व्यवस्था जल्द की जाएगी। उन्होंने दो टूक कहा कि सबको सुरक्षित निकाला जाएगा। इस दौरान गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय और डीएम मयूर दीक्षित ने अब तक की तैयारियों से अवगत कराया। एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने यातायात-पार्किंग व्यवस्था की रूपरेखा रखी। इस दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, जिला पंचायत अध्यक्ष किरन चौधरी, मेयर किरन जैसल, प्रदेश महामंत्री (संगठन) अजेय कुमार, प्रदेश महासचिव अनिल गोयल, विधायक मदन कौशिक, आदेश चौहान और प्रदीप बत्रा, दर्जाधारी ओम प्रकाश जमदग्नि, अजीत चौधरी, जयपाल सिंह चौहान, देशराज कर्णवाल, शोभाराम प्रजापति, भाजपा जिलाध्यक्ष आशुतोष शर्मा, आईजी-गढ़वाल राजीव स्वरूप, एडीजी एपी अंशुमन, महानिदेशक-सूचना बंशीधर तिवारी, एमडी-सिडकुल सौरव गहरवार, एसपी-अभिसूचना मणिकांत मिश्रा, सीडीओ ललित नारायण मिश्रा, एडीएम पीआर चौहान, अपर मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती, सचिव एचआरडीए मनीष कुमार, एसडीएम जितेंद्र कुमार, एसपी सिटी अभय प्रताप सिंह और सीओ सिटी शिशुपाल सिंह नेगी मौजूद रहे। सात मार्च से पहले हरिद्वार में हाई अलर्ट केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के सात मार्च को प्रस्तावित हरिद्वार दौरे से पहले प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को बैरागी कैंप पहुंचकर कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने अफसरों को निर्देश दिए कि सभी व्यवस्थाएं समयबद्ध तरीके से पूरी हों।

एलनाज नौरोजी का बड़ा डर, खामेनेई की मौत पर जश्न मनाने के बाद कहा- “मुझे मार डालेंगे”

नई दिल्ली एलनाज नौरोजी बीते कुछ वक्त से चर्चा में हैं। वह अपने देश ईरान के शासकों के खिलाफ खुलकर बोल रही हैं। एलनाज ने अली खामेनेई की मौत पर खुशी जाहिर की थी। इसके बाद एक वीडियो शेयर करके कहा था कि वहां जो भी हो रहा है, वहां के हुक्मरान इसके जिम्मेदार हैं। अब एक इंटरव्यू में एलनाज ने यह भी कहा है कि जब तक वो सरकार है, वह अपने देश वापस नहीं जा सकतीं। उन्हें जान से मार दिया जाएगा। इजराइल से अच्छे थे ईरान के रिश्ते एलनाज ने बॉम्बे टाइम्स से बातचीत में बताया कि वह यूएस और इजराइल का सपोर्ट क्यों कर रही हैं। वह बोलीं, 'जब हम ईरान के बारे में बात करते हैं तो मैं इस्लामिक रिपब्लिक को अलग कर देना चाहती हूं जिन्होंने ईरान के लोगों पर कब्जा कर रखा है। ईरान के ज्यादातर लोग स्मार्ट और पढ़े-लिखे हैं और उनके विचार इस्लामिक रिपब्लिक से नहीं मिलते। एक वक्त था जब ईरान और इजराइल के रिश्ते अच्छे थे। अगर आप सायरस द ग्रेट को देखें, जिस इंसान ने दुनिया का पहला मानवाधिकार लिखा, वो पर्शियन (ईरान का) था। उसने उसने यहूदियों को बेबीलोन से मुक्त करवाया था। शाह (मोहम्मद रजा पहलवी) के वक्त में भी हमारे यूएस से अच्छे रिश्ते थे। सिर्फ इस्लामिक रिपब्लिक ही है जो लगातार कह रहा है कि नक्शे से इजराइल को मिटाना चाहता है।' एलनाज ने बताया क्यों कर रहीं विरोध एलनाज आगे बोलीं, 'एक महीने पहले जो ईरानी इन शासकों का विरोध कर रहे थे, उन्हें मार दिया गया। मैं ईरान में पैर भी नहीं रख सकती। अगर मैंने ऐसा किया तो वे लोग मुझे भी मार देंगे। 2022 मूवमेंट में जो हुआ उसकी वजह से मैं ईरान नहीं जा पाई हूं, जहां उन्होंने माहसा अमीनी (22 साल की लड़की) को मार दिया था। सितंबर 2022 में पुलिस कस्टडी में जिसकी मौत होने के बाद जबरदस्त विरोध हुआ था। उस लड़की को इसलिए गिरफ्तार किया गया था कि उसने हिजाब गलत तरीके से पहना था। मैंने खामेनेई के खिलाफ बोला तो मेरे परिवार को मेरी सुरक्षा की चिंता हो गई। अगर युद्ध में लोग मारे जाते हैं तो मैं अयातुल्ला को दोष दूंगी क्योंकि लोग कई बार आए और उन्होंने कहा कि वे उन्हें नहीं चाहते लेकिन वे लोग नहीं हटे। ये डिक्टेटरशिप है।' बचपन में ही ईरान से चली गई थीं एलनाज एलनाज का जन्म ईरान में हुआ था लेकिन वह 8 साल की हुईं तो उनके परिवार ने ईरान छोड़ दिया और जर्मनी चली गईं। उनके कुछ रिश्तेदार अभी भी वहां रहते हैं। जर्मनी में एलनाज ने मॉडलिंग की फिर 20 साल की उम्र में भारत आईं। वह कई साल से ईरान नहीं गई हैं।

खामेनेई की मौत पर ईरान में जश्न, लेकिन भारत में क्यों छाया मातम?

नई दिल्ली ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मिसाइल हमले में हत्या की खबर सामने आने के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर पहुंच गया है और पूरे इलाके में हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं. अमेरिका और इजरायल की तरफ से किए गए इस हमले के बाद जहां एक तरफ कई देशों में विरोध प्रदर्शन देखने को मिले हैं और शिया मुस्लिम समुदाय के बीच गहरा शोक छा गया है. वहीं दूसरी तरफ ईरान और दुनिया के कुछ हिस्सों में लोगों ने इसे ‘फ्री ईरान' की दिशा में पहला कदम बताते हुए जश्न भी मनाया है. इसी बीच भारतीय सिनेमा में काम कर रहीं ईरानी एक्ट्रेस एलनाज नोरौजी का सोशल मीडिया रिएक्शन सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोर रहा है. ईरान से आई दो तस्वीरों ने पहले विरोध की आग दिखाई थी, अब वही तस्वीरें जश्न की कहानी बन गई हैं. कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक तस्वीर में एक युवती देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की तस्वीर जलाकर उसी आग से सिगरेट सुलगाती नजर आई थी. यह दृश्य ईरान में महिलाओं के गुस्से और सत्ता के खिलाफ खुली चुनौती का प्रतीक बना. अब खामेनेई की मौत की खबर सामने आने के बाद उसी तरह की महिलाएं ‘चीयर्स’ करती और जश्न मनाती दिखाई दे रही हैं. इन तस्वीरों ने दुनिया भर में बहस छेड़ दी है कि क्या यह सिर्फ एक राजनीतिक प्रतिक्रिया है या फिर दशकों से सख्त सामाजिक और धार्मिक पाबंदियों में जी रही ईरानी महिलाओं की आजादी की शुरुआत? ईरान में महिलाओं का संघर्ष क्यों बना वैश्विक मुद्दा?     पिछले कुछ सालों में ईरान में महिलाओं के अधिकार सबसे बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बनकर उभरे हैं. ड्रेस कोड, सार्वजनिक जीवन में पाबंदियां और मोरल पुलिसिंग के खिलाफ लगातार आंदोलन होते रहे हैं. कई बार इन आंदोलनों को सख्ती से दबाया गया, लेकिन विरोध की आवाज पूरी तरह खत्म नहीं हुई. महसा अमिनी की मौत के बाद आंदोलन और तेज हो गया.     खामेनेई की मौत के बाद सत्ता संरचना में संभावित बदलाव महिलाओं के आंदोलन को नई दिशा दे सकता है. हालांकि यह भी सच है कि ईरान की राजनीतिक व्यवस्था सिर्फ एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं है, इसलिए तुरंत बड़े बदलाव की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी. खामेनेई की मौत पर भारत में मातम क्यों  तेहरान में अमेरिका और इजरायल ने जिस तरह से ताबड़तोड़ हमले किए और इसमें ईरान के सुप्रीम लीडर 86 वर्षीय अयातुल्ला अली खामेनेई ने जान गंवाई, उसे लेकर हंगामा मचा हुआ है। खामेनेई की मौत को लेकर भारत के मुस्लिम समुदाय में कुछ वर्गों के बीच खास प्रतिक्रिया नजर आई। लखनऊ, हैदराबाद, मुंबई और अलीगढ़ में शोक सभाओं, अंतिम संस्कार की प्रार्थना और ऑनलाइन संदेशों से संकेत मिलता है कि यह एक रेयर मूमेंट है। ऐसा पहली बार है जब शिया और सुन्नी, धार्मिक मतभेदों के लंबे इतिहास के बाद भी एक नेता के निधन पर साथ में शोक जताते नजर आए। खामेनेई 1989 से कर रहे थे ईरान का नेतृत्व     खामेनेई, जिन्होंने अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी की मृत्यु के बाद 1989 से ईरान का नेतृत्व किया।     वो एक शिया धर्मगुरु थे और सुन्नियों के लिए कोई धार्मिक प्राधिकारी नहीं थे।     उनकी मृत्यु पर प्रतिक्रियाएं सांप्रदायिक सीमाओं को पार कर गईं।     कई सुन्नियों के लिए, यह भावना ईरान से कम और फिलिस्तीन से अधिक जुड़ी है।     ये एक ऐसा मुद्दा है जो दक्षिण एशिया में सांप्रदायिक विभाजनों को भी पार कर जाता है। खामेनेई पर क्यों आए शिया सुन्नी साथ? जमात-ए-इस्लामी हिंद के प्रमुख सैयद सदातुल्लाह हुसैनी ने कहा कि खामेनेई का जीवन धार्मिक अधिकार के साथ-साथ राजनीतिक दृढ़ विश्वास को भी दर्शाता था। एक बयान में कहा गया कि रमजान के पवित्र महीने में खामेनेई की शहादत ने मुस्लिम जगत के लाखों लोगों को गहरा शोक पहुंचाया है। कुछ सुन्नी मौलवियों में शोक के साथ-साथ उन मुस्लिम सरकारों की आलोचना भी शामिल थी जिन्हें चुप्पी साधे हुए देखा गया।  सुन्नियों की इस प्रतिक्रिया पर क्या कह रहे जानकार विद्वान बशारत अली ने कहा कि शिया राजनीतिक कल्पना में, शहादत एकता और राजनीतिक शक्ति का स्रोत बन जाती है। भारत में कई शियाओं के लिए, ईरान का धार्मिक महत्व है क्योंकि यह दुनिया का सबसे बड़ा शिया-बहुसंख्यक देश है। ये कोम और मशहद जैसे धार्मिक केंद्रों का घर है। सुन्नियों के लिए प्रतिक्रिया काफी हद तक राजनीतिक रही है, जो फिलिस्तीन और इजरायल के विरोध के इर्द-गिर्द केंद्रित है।  

खामेनेई की मौत के बाद भारत में बढ़ा हाईअलर्ट, कानून-व्यवस्था के उल्लंघन पर सख्त कदम उठाने की चेतावनी

नई दिल्ली  मध्य पूर्व के हालात को देखते हुए भारत में हाईअलर्ट जारी किया गया है। गृह मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियों ने सभी राज्यों को संदिग्ध लोगों पर नजर रखने और प्रदेश में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस फोर्स तैनात करने का निर्देश दिया है, जिससे देश में शांति व्यवस्था बनी रहे। अमेरिका-इजरायल के हमले में मारे गए ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के समर्थन में देश के विभिन्न राज्यों में प्रदर्शन हो रहे हैं। कुछ लोग सोशल मीडिया के माध्यम से देश में भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, राज्यों में पुलिस-प्रशासन ने सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर भी सख्त चेतावनी दी है।  नागरिकों से कहा गया है कि वे किसी भी तरह का आपत्तिजनक, भड़काऊ या अनचाहा कंटेंट पोस्ट, शेयर या फॉरवर्ड करने से बचें। अफवाहें और भ्रामक संदेश माहौल को बिगाड़ सकते हैं और कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकते हैं। पुलिस-प्रशासन ने कहा कि शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से अपनी बात रखने के अधिकार का सम्मान किया जाता है लेकिन हिंसा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और सुरक्षा बलों के साथ टकराव किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। ऐसी घटनाओं से जान-माल का नुकसान होता है और पूरे समाज को परेशानी होती है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि किसी भी तरह के उल्लंघन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल तत्वों, भड़काने वालों और असामाजिक तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसी क्रम में कर्नाटक के बांदीपुरा जिले में मौजूदा हालात को देखते हुए स्थानीय पुलिस ने आम नागरिकों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग की अपील की है। पुलिस-प्रशासन ने कहा है कि क्षेत्र में शांति व सुरक्षा बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है, इसलिए लोग किसी भी ऐसी गतिविधि से दूर रहें जिससे सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका हो। पुलिस की ओर से जारी अपील में कहा गया है कि लोग तोड़फोड़, दंगा-फसाद, पत्थरबाजी या किसी भी प्रकार की गड़बड़ी में शामिल न हों। ऐसा करना न केवल कानून के खिलाफ है, बल्कि इससे आम जनता, व्यापारियों, विद्यार्थियों और दिहाड़ी मजदूरों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। हिंसा और अशांति की वजह से शैक्षणिक संस्थानों के बंद होने, आवाजाही में रुकावट और आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ने की संभावना रहती है।

केजरीवाल-सिसोदिया को छोड़ने को तैयार नहीं सीबीआई, HC में ‘जज ने समझा नहीं’ बताया गया

नई दिल्ली दिल्ली की चर्चित आबकारी नीति मामले में एक नया मोड़ आ गया है. केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने दिल्ली आबकारी नीति मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले में गंभीर खामियां बताई हैं. सीबीआई ने अपनी अपील में कहा कि विशेष न्यायाधीश जीतेंद्र सिंह ने मामले में ‘मिनी ट्रायल’ चला दिया और एजेंसी के सबूतों को पूरी तरह समझे बिना आदेश पारित कर दिया. एजेंसी ने यह भी कहा कि जज ने अभियोजन पक्ष के मामले को चुनिंदा तरीके से पढ़ा और पूरे षड्यंत्र को समग्र रूप से नहीं देखा. यह मामला 2021-22 की दिल्ली की नई आबकारी (शराब) नीति से जुड़ा है, जिसे बाद में वापस ले लिया गया था. सीबीआई का आरोप है कि इस नीति को बनाते समय जानबूझकर ऐसे बदलाव किए गए, जिनसे कुछ निजी कंपनियों को फायदा पहुंचे और बदले में कथित रूप से आर्थिक लाभ लिया गया. ट्रायल कोर्ट ने क्या कहा था? राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश जीतेंद्र सिंह ने 27 फरवरी को जारी अपने आदेश में कहा था कि सीबीआई की तरफ से पेश किए गए दस्तावेजों और साक्ष्यों से पहली नजर में भी कोई ठोस मामला नहीं बनता. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री किसी भी आरोपी के खिलाफ गंभीर संदेह तक पैदा नहीं करती. जज ने कहा कि अभियोजन पक्ष ऐसा कोई सबूत पेश नहीं कर पाया, जिससे आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाया जा सके. उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि बड़ी साजिश की जो थ्योरी पेश की गई थी, वह उपलब्ध साक्ष्यों की जांच में टिक नहीं पाती. इसी आधार पर सभी 23 आरोपियों को आरोपों से मुक्त कर दिया गया. सीबीआई की अपील में क्या कहा गया? सीबीआई ने इस फैसले के खिलाफ 974 पन्नों की विस्तृत अपील दाखिल की है. एजेंसी का कहना है कि विशेष न्यायाधीश ने आरोप तय करने के शुरुआती चरण में ही ‘मिनी ट्रायल’ जैसा व्यवहार किया और मामले के हर हिस्से का विस्तृत विश्लेषण कर दिया, जबकि इस स्तर पर केवल यह देखना होता है कि प्रथम दृष्टया मामला बनता है या नहीं. सीबीआई के अनुसार, जज ने अभियोजन के पूरे मामले को एक साथ देखने के बजाय अलग-अलग हिस्सों में बांटकर देखा. एजेंसी का आरोप है कि फैसले में अभियोजन के सबूतों को चुनिंदा तरीके से पढ़ा गया और उन तथ्यों को नजरअंदाज कर दिया गया, जो आरोपियों की भूमिका को दर्शाते थे. सीबीआई ने यह भी कहा कि जज ने जांच एजेंसी और जांच अधिकारी के खिलाफ जो प्रतिकूल टिप्पणियां कीं, वे ‘अनुचित और समझ से परे’ हैं. शराब नीति में बदलाव को लेकर गंभीर आरोप सीबीआई का कहना है कि 2021-22 की आबकारी नीति में किए गए बदलाव सामान्य प्रशासनिक फैसले नहीं थे. एजेंसी के मुताबिक, नीति के तहत थोक व्यापार को निजी हाथों में सौंपने का फैसला किया गया और मुनाफे का मार्जिन 5% से बढ़ाकर 12% कर दिया गया. साथ ही टर्नओवर की शर्तों में भी ढील दी गई, जबकि विशेषज्ञों ने पहले की व्यवस्था बनाए रखने की सलाह दी थी. सीबीआई का आरोप है कि यह सब पहले से तय ‘क्विड प्रो क्वो’ यानी लेन-देन की योजना का हिस्सा था. एजेंसी का दावा है कि उसके पास वरिष्ठ नौकरशाहों के बयान और डिजिटल साक्ष्य हैं, जो यह संकेत देते हैं कि नीति को खास तरीके से तैयार किया गया. अपील में कहा गया है कि नीति तैयार करने से लेकर कथित रूप से रिश्वत की रकम के इस्तेमाल तक एक सतत आपराधिक साजिश चली. सीबीआई का दावा है कि कथित अवैध धन का इस्तेमाल गोवा विधानसभा चुनाव में किया गया. हालांकि, जज जितेंद्र सिंह ने अपने आदेश में कहा था कि गोवा चुनाव से जुड़े आरोप अधिकतर अनुमान और धारणाओं पर आधारित हैं, न कि ठोस कानूनी साक्ष्यों पर. जज पर उठाए गए सवाल सीबीआई ने अपनी अपील में कहा है कि विशेष न्यायाधीश ने साजिश के मूल आधार को नजरअंदाज कर दिया और छोटे-छोटे विरोधाभासों पर अधिक ध्यान दिया. एजेंसी के अनुसार, जज ने आरोपियों की भूमिकाओं को अपनी अलग समझ के आधार पर परिभाषित किया, जो अभियोजन के प्रस्तुत मामले से अलग थी. सीबीआई ने यह भी कहा कि आरोप तय करने के चरण में कानून की जो सीमाएं और सिद्धांत लागू होते हैं, उनका सही तरीके से पालन नहीं किया गया. एजेंसी का दावा है कि फैसला ‘स्पष्ट रूप से गलत, कानून के विपरीत और तथ्यों की गलत व्याख्या पर आधारित’ है. अपील में सीबीआई ने यह भी कहा कि कथित साजिश उच्च राजनीतिक स्तर पर रची गई थी. एजेंसी का आरोप है कि नीति के ढांचे में जानबूझकर बदलाव किए गए, ताकि निजी होलसेल व्यवस्था लागू की जा सके और कुछ कंपनियों को फायदा मिले. सीबीआई का कहना है कि नीति में किए गए बदलाव सिर्फ प्रशासनिक सुधार नहीं थे, बल्कि पहले से तय लेन-देन को आगे बढ़ाने के लिए बुनियादी कदम थे, जिनमें दिल्ली सरकार और आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेताओं की भूमिका थी. अब आगे क्या? सीबीआई ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए उसी दिन दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया. हाईकोर्ट इस अपील पर 9 मार्च को सुनवाई करेगा. अगर हाईकोर्ट को लगता है कि ट्रायल कोर्ट ने कानून की गलत व्याख्या की है या पर्याप्त आधार होते हुए भी आरोप तय नहीं किए गए, तो मामला दोबारा ट्रायल के लिए भेजा जा सकता है. वहीं, यदि हाईकोर्ट ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही मानता है, तो आरोपियों को मिली राहत बरकरार रहेगी.  

पाकिस्तान पर तालिबान का जोरदार वार, डूरंड लाइन पर दो और पोस्ट कब्जे में, युद्ध में बढ़ोतरी

काबुल  पाकिस्तान को अफगानिस्तान-तालिबान ने एक और झटका दे दिया है. तालिबान ने डूरंड लाइन पर दो पोस्टों पर कब्जा कर लिया है. Tolo News की रिपोर्ट के मुताबिक, इस्लामिक अमीरात ऑफ़ अफ़गानिस्तान की सेनाओं ने कंधार प्रांत के स्पिन बोल्डक और शोराबक ज़िलों में काल्पनिक डूरंड लाइन के पास पाकिस्तानी मिलिट्री पोस्ट पर कब्ज़ा कर लिया है|  पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान के बीच तनाव तब और बढ़ गया, जब अफ़गान तालिबान सेनाओं ने रावलपिंडी में नूर खान एयर बेस पर पाकिस्तान के कमांड और कंट्रोल सेंटर को निशाना बनाकर हथियारों से लैस ड्रोन हमले किए. यह घटना खास तौर पर सेंसिटिव है क्योंकि नूर खान एयर बेस उन पाकिस्तानी मिलिट्री साइट्स में से एक था, जिन्हें ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेनाओं ने टारगेट किया था|  मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिन की छोटी लेकिन ज़ोरदार लड़ाई के नौ महीने बाद भी, बेस पर रिकंस्ट्रक्शन का काम चल रहा था. बेस पर अफ़गान तालिबान के नए हमले की खबर ने रिपेयर के काम को और खतरे में डाल दिया है, जिससे और नुकसान हुआ है|  अफ़गानिस्तान के नेशनल डिफेंस मिनिस्ट्री के ऑफिशियल X अकाउंट के मुताबिक, तालिबान सेनाओं ने क्वेटा में 12th डिवीजन हेडक्वार्टर और खैबर पख्तूनख्वा में दूसरी पाकिस्तानी मिलिट्री जगहों पर ड्रोन हमले किए|  मिनिस्ट्री ने कहा, "आज, नेशनल डिफेंस मिनिस्ट्री की एयर फोर्स ने पाकिस्तान में ज़रूरी मिलिट्री ठिकानों पर सटीक और कोऑर्डिनेटेड हवाई ऑपरेशन किए. इसमें रावलपिंडी में नूर खान एयरबेस, क्वेटा (बलूचिस्तान) में 12th डिवीजन हेडक्वार्टर, खैबर पख्तूनख्वा की मोहमंद एजेंसी में ख्वाजाई कैंप और कई दूसरी ज़रूरी पाकिस्तानी मिलिट्री जगहों और कमांड सेंटर को निशाना बनाया गया|  इससे पहले, तालिबान अधिकारियों ने दावा किया था कि पूर्वी अफ़गान शहर जलालाबाद में एक पाकिस्तानी फ़ाइटर जेट को मार गिराया गया था. न्यूज़ एजेंसी AFP ने बताया कि पायलट को एयरक्राफ़्ट से पैराशूट से उतरने के बाद ज़िंदा पकड़ लिया गया. स्थानीय लोगों ने AFP को बताया कि पायलट को लैंडिंग के तुरंत बाद हिरासत में ले लिया गया था. यह घटनाक्रम दोनों देशों के बीच बड़े पैमाने पर बॉर्डर पार दुश्मनी के बीच हुआ है|  शुक्रवार को पाकिस्तान ने अफ़गानिस्तान की राजधानी काबुल और दक्षिणी शहर कंधार पर एयरस्ट्राइक की, जहां तालिबान के सुप्रीम लीडर हिबतुल्लाह अखुंदज़ादा का ठिकाना है. पाकिस्तानी सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा कि 133 तालिबान लड़ाके मारे गए, 200 से ज़्यादा घायल हुए और कई चौकियां तबाह कर दी गईं या उन पर कब्ज़ा कर लिया गया| 

कैमरों से तेहरान को पढ़ रहा था इजरायल, नेतन्याहू ने कहा- युद्ध जल्दी खत्म होगा

तेहरान  ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई की मौत के बाद एक सवाल लोगों के ज़ेहन में है. सवाल ये है की अमेरिका और इजरायल ने आख़िर कैसे इतना सटीक निशाना लगाया और खामेनेई के साथ तमाम टॉप लीडरशिप पर बॉम्बिंग कर दी |  Financial Times की एक बड़ी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इजरायल ने कई सालों तक तेहरान के ट्रैफिक कैमरा सिस्टम में सेंध लगाई |  सिर्फ कैमरे ही नहीं, मोबाइल नेटवर्क तक पहुंच बनाई गई. मकसद था ईरान के सुप्रीम लीडर अयातोल्ला अली खामेनेई और उनके सुरक्षा घेरे की हर गतिविधि पर नजर रखना |  रिपोर्ट कहती है कि तेहरान के ज्यादातर ट्रैफिक कैमरे इजरायल की निगरानी में थे. फुटेज को एन्क्रिप्ट कर बाहर भेजा जाता था. इससे एक पूरा मूवमेंट पैटर्न तैयार हुआ. कौन कब निकला. कौन साथ था. कौन सा रूट लिया गया. सब रिकॉर्ड होता रहा |  ऑपरेशन कैसे चला? बताया गया है कि यह काम एक-दो महीने का नहीं था. यह लंबा ऑपरेशन था. इजरायल की खुफिया यूनिट 8200 और मोसाद ने टेक सिस्टम में गहरी घुसपैठ की |  कैमरों की लाइव फीड एक्सेस की गई. मोबाइल नेटवर्क डेटा भी जोड़ा गया. इससे सिक्योरिटी स्टाफ की आवाजाही समझी गई. बॉडीगार्ड्स कहां पार्क करते हैं. किस समय गार्ड बदलते हैं. किस रास्ते से मूवमेंट होता है. धीरे-धीरे एक पैटर्न ऑफ़ लाइफ तैयार हुआ. यानी रोजमर्रा की आदतों का पूरा डिजिटल नक्शा |  कैमरे कैसे हथियार बने? आज शहरों में लगे CCTV सिर्फ ट्रैफिक कंट्रोल के लिए नहीं हैं. अगर कोई सिस्टम में घुस जाए तो वही कैमरे निगरानी का टूल बन जाते हैं|  रिपोर्ट के मुताबिक फुटेज को सीधे बाहर के सर्वर पर भेजा गया. यानी डेटा शहर के अंदर नहीं रहा|  मोबाइल नेटवर्क की घुसपैठ से यह पता चलता है कि कौन सा फोन किस लोकेशन पर था. इससे सिक्योरिटी मूवमेंट और साफ दिखने लगता है|  इजरायल ने ऐसे बनाया एक्शन प्लान  रिपोर्ट में दावा है कि जब पर्याप्त जानकारी इकट्ठा हो गई, तब सटीक एक्शन प्लान बनाया गया|  लोकेशन, टाइमिंग और सिक्योरिटी गैप को समझकर आगे की रणनीति तय की गई|  हालांकि आधिकारिक स्तर पर सभी दावों की पुष्टि नहीं हुई है. लेकिन यह साफ है कि डिजिटल निगरानी इस पूरे मामले में अहम रही|  डिजिटल युद्ध: साइबर वॉर      विशेषज्ञ कहते हैं कि अब युद्ध सिर्फ जमीन या आसमान में नहीं लड़ा जाता|      डिजिटल सिस्टम नया मोर्चा है. कैमरे. मोबाइल नेटवर्क. इंटरनेट. सब संभावित टारगेट हैं|      जो देश साइबर क्षमता में मजबूत हैं, वे बिना गोली चलाए भी बड़ी बढ़त बना सकते हैं|  क्या सेफ हैं कैमरा? मिडिल ईस्ट में तनाव पहले से बढ़ा हुआ है. इजरायल और ईरान के बीच टकराव खुला रहस्य है. ऐसे माहौल में अगर शहर का इंफ्रास्ट्रक्चर ही निगरानी टूल बन जाए, तो यह नई तरह की जंग है|  यह मामला दिखाता है कि अब साइबर वॉरफेयर असली दुनिया के फैसलों को प्रभावित कर रही है|  इस रिपोर्ट ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. क्या शहरों के कैमरे सुरक्षित हैं? क्या मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह सुरक्षित हैं? और क्या आने वाले समय में ऐसे ऑपरेशन आम हो जाएंगे? ये युद्ध कई साल तक नहीं चलेगा… नेतन्याहू  इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ईरान के खिलाफ जल्द और निर्णायक सैन्य कार्रवाई का ऐलान किया है. उन्होंने कहा है कि यह सैन्य संघर्ष अंतहीन नहीं होगा और इसे वर्षों तक खींचने की योजना नहीं है |  इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप मंगलवार दोपहर 2 बजे वित्त और ऊर्जा सचिवों के साथ व्हाइट हाउस में बैठक कर रहे हैं. अमेरिका और इजरायल संयुक्त रूप से ईरान में सत्ता परिवर्तन के लिए परिस्थितियां बना रहे हैं |  इजरायल का मानना है कि ईरान के खिलाफ यह सैन्य कदम सऊदी अरब के साथ संभावित शांति के द्वार खोल सकते हैं |  नेतन्याहू का युद्ध और ईरान पर रुख नेतन्याहू ने जोर देकर कहा है कि इजरायल ईरान के साथ लंबे युद्ध की स्थिति में नहीं जाना चाहता है. उनका मानना है कि ईरान के खिलाफ जो कार्रवाई की जा रही है, वह त्वरित और निर्णायक होगी. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान में सत्ता परिवर्तन की अंतिम जिम्मेदारी वहां की जनता की है. अमेरिका और इजरायल मिलकर ऐसी परिस्थितियां बना रहे हैं, जो ईरानी लोगों को अपने शासन को बदलने में सक्षम बनाएंगी. इजरायल के मुताबिक, यह सैन्य कार्रवाई कुछ वक्त तक जारी रह सकती है लेकिन यह लंबी अवधि की प्रक्रिया नहीं होगी | सऊदी-इजरायल शांति और ट्रंप की बैठक नेतन्याहू ने यह भी इशारा किया कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई सऊदी अरब और इजरायल के बीच शांति स्थापना में मदद कर सकती है |  इस बड़े घटनाक्रम के बीच व्हाइट हाउस से सूचना मिली है कि राष्ट्रपति ट्रंप मंगलवार को दोपहर 2 बजे वित्त सचिव और ऊर्जा सचिव के साथ बैठक करेंगे. इस बैठक को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, विशेषकर ईरान के खिलाफ रणनीतिक आर्थिक और ऊर्जा संबंधी फैसलों के संदर्भ में. प्रशासन इस स्थिति को लेकर लगातार सक्रिय है और कूटनीतिक और सैन्य दोनों स्तरों पर समन्वय बना रहा है | 

तेल की कीमतों में उबाल, बाजार में हलचल: क्या भारतीय निवेशकों को चिंता करनी चाहिए? इतिहास से क्या सिखें?

नई दिल्ली  क्या पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव भारत की अर्थव्यवस्था की रफ्तार थाम सकता है? मिसाइल हमलों और जवाबी कार्रवाई की खबरों के बीच वैश्विक बाजारों में घबराहट साफ दिख रही है. 2 मार्च 2026 को निफ्टी 50 और सेंसेक्स करीब 1.8% तक फिसल गए, सरकारी बॉन्ड यील्ड में हल्की तेजी आई, ब्रेंट क्रूड लगभग 6% उछला और सोने की कीमतें 3% बढ़ीं. सवाल यह है कि क्या यह उथल-पुथल भारत की लंबी अवधि की विकास यात्रा को प्रभावित करेगी, या यह केवल एक अस्थायी झटका है? हालिया विश्लेषण में एक्सिस एसेट मैनेजमेंट (Axis Asset Management) ने साफ किया है कि भले ही अमेरिका-इजराइल बनाम ईरान टकराव ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई हो, लेकिन इतिहास बताता है कि ऐसे संघर्ष भारतीय शेयर बाजारों को लंबे समय तक पटरी से नहीं उतार पाए हैं. कच्चा तेल: भारत के लिए सबसे बड़ा जोखिम इस एनालिसिस के मुताबिक, भारत अपनी जरूरत का 80% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है. इसलिए पश्चिम एशिया में अस्थिरता का सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ता है. यदि ईरान होरमुज जलडमरूमध्य को बाधित करता है, तो यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बड़ा खतरा होगा. दुनिया के लगभग 20% कच्चे तेल और 30% एलएनजी का व्यापार इसी रास्ते से गुजरता है, और भारत की करीब आधी ऊर्जा आपूर्ति भी इसी मार्ग पर निर्भर है. तेल की कीमतों में तेज उछाल से भारत का चालू खाता घाटा बढ़ सकता है, महंगाई दबाव में आ सकती है और विमानन, पेंट, सीमेंट तथा केमिकल जैसे सेक्टरों की लागत बढ़ सकती है. हालांकि, पिछले अनुभव बताते हैं कि जब तक तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची नहीं टिकतीं, तब तक शेयर बाजार स्थायी गिरावट का शिकार नहीं होते. रूस–यूक्रेन युद्ध के दौरान भी ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर गया था, लेकिन शुरुआती गिरावट के बाद बाजार संभल गए और साल अंत में सकारात्मक रिटर्न दिया. रुपये और विदेशी निवेश का असर भू-राजनीतिक तनाव के समय अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है, जिससे उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव आता है. भारतीय रुपया भी इससे अछूता नहीं रहता. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की बिकवाली से रुपये में अस्थायी कमजोरी देखी जा सकती है. फिर भी भारत की मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार स्थिति, नियंत्रित चालू खाता घाटा और संतुलित राजकोषीय स्थिति सुरक्षा कवच का काम करती है. 2013 के टेपर टैंट्रम, 2020 की महामारी और 2022 के युद्ध जैसे दौर में भी रुपया दबाव में आया, लेकिन शेयर बाजारों में लंबी अवधि की गिरावट नहीं आई. आरबीआई की भूमिका और बाजार की मानसिकता रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (Reserve Bank of India) ऐसे समय में स्थिरता का अहम स्तंभ बनता है. केंद्रीय बैंक ने अतीत में अस्थायी महंगाई झटकों को नजरअंदाज करते हुए मूल महंगाई और विकास की स्थिरता पर ध्यान केंद्रित किया है. तरलता प्रबंधन के जरिए बाजार में भरोसा बनाए रखा गया है, ताकि घबराहट स्थायी संकट में न बदले. पिछले 15 वर्षों का इतिहास देखें तो हर बड़े संघर्ष के दौरान शुरुआती गिरावट आई, लेकिन बाजारों ने जल्द ही संतुलन पा लिया.     2014 के क्रीमिया संकट     2016 की सर्जिकल स्ट्राइक     2019 के बालाकोट एयरस्ट्राइक     2022 के रूस–यूक्रेन युद्ध     2023 के इजराइल–हमास संघर्ष इन सबके दौरान यही पैटर्न दिखा कि बाजार जल्द ही पटरी पर लौट आया. यहां तक कि 2025 के ऑपरेशन सिंदूर के समय भी शुरुआती घबराहट के बाद स्थिरता लौट आई. असल में बाजार भावनाओं से ज्यादा इस बात का आकलन करते हैं कि आर्थिक असर कितना लंबा और गहरा होगा. जब यह स्पष्ट हो जाता है कि सप्लाई चेन पर असर सीमित है और घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है, तो जोखिम प्रीमियम घटने लगता है और निवेशक दोबारा सक्रिय हो जाते हैं. लंबी अवधि के निवेशकों के लिए संदेश इतिहास बताता है कि संघर्षों के समय घबराकर बाजार से बाहर निकलना अक्सर नुकसानदेह साबित हुआ है. जिन्होंने गिरावट के दौरान निवेश छोड़ा, वे बाद की तेजी से चूक गए. इसलिए अनुशासन, विविधीकरण और लंबी अवधि की सोच ही ऐसे दौर में सबसे कारगर रणनीति मानी गई है. ईरान वाला तनाव गंभीर जरूर है, लेकिन भारतीय बाजारों के लिए यह कोई अनजाना अनुभव नहीं. शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव के बावजूद देश की विकास की कहानी घरेलू खपत, पूंजीगत व्यय, डिजिटलीकरण और मैन्युफैक्चरिंग विस्तार पर टिकी है. ऐसे में हर भू-राजनीतिक झटका स्थायी मोड़ नहीं, बल्कि अस्थायी विराम साबित हुआ है.  

बड़ी सैन्य गलती! कुवैत ने अपने ही सहयोगी के 3 F-15E जेट मार गिराए, US ने जताई प्रतिक्रिया

कुवैत कुवैत ने गलती से 3 अमेरिकी F-15E Strike Eagle लड़ाकू विमानों को मार गिराया है। यूएस सेंट्रल कमांड के अनुसार, सभी 6 एयरक्रू सदस्य सुरक्षित रूप से ईजेक्ट हो गए, उन्हें बचा लिया गया है और वे स्थिर हालत में हैं। यह घटना ईरान के खिलाफ चल रही ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के दौरान हुई, जब कुवैती एयर डिफेंस सिस्टम ने इन विमानों को दुश्मन के रूप में पहचान लिया। कुवैत ने इस घटना को स्वीकार किया है और अमेरिकी सेना ने कुवैती रक्षा बलों के सहयोग की सराहना की है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह दुर्भाग्यपूर्ण फ्रेंडली फायर घटना 2 मार्च की सुबह हुई, जब अमेरिकी F-15E विमान ईरान पर हमलों में सहायता कर रहे थे। उस समय क्षेत्र में ईरानी विमान, बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन अटैक हो रहे थे, जिससे वायु क्षेत्र में भारी उथल-पुथल मची हुई थी। कुवैती एयर डिफेंस सिस्टम ने इन अमेरिकी विमानों को गलत तरीके से खतरे के रूप में पहचाना और उन्हें मार गिराया। यह घटना मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष की जटिलता को दर्शाती है, जहां सहयोगी देशों के बीच भी गलतफहमियां हो सकती हैं। खाड़ी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले ऑपरेशन एपिट फ्यूरी अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई है, जिसमें ईरान के सैन्य ठिकानों, नौसेना और IRGC मुख्यालयों पर 1 हजार से अधिक हमले किए जा चुके हैं। ईरान ने जवाबी हमलों में कुवैत सहित खाड़ी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं, जिससे क्षेत्रीय तनाव चरम पर है। इस फ्रेंडली फायर घटना से अमेरिकी वायुसेना को नुकसान हुआ है, लेकिन कोई जानमाल की हानि नहीं हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि भीड़भाड़ वाले वायु क्षेत्र और तेज गति से बदलती स्थिति ने इस गलती को जन्म दिया। दोनों देश अब जांच और बेहतर समन्वय पर काम कर रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। कुवैत में कैसे हैं हालात ईरान और ईरान समर्थित मिलिशिया ने इजरायल व अरब देशों पर मिसाइलें दागीं, जिनमें कुवैत में अमेरिकी दूतावास परिसर को निशाना बनाया गया। इजरायल और अमेरिका ने ईरान में लक्ष्यों पर बमबारी की जिससे सोमवार को युद्ध का विस्तार हुआ। इसके साथ ही युद्ध में हताहतों की संख्या भी बढ़ रही है। ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी के अनुसार, अमेरिका-इजरायल ऑपरेशन में ईरान में अब तक कम से कम 555 लोग मारे जा चुके हैं और देश भर के 130 से अधिक शहर हमलों की चपेट में आ चुके हैं। कुवैत सिटी में अमेरिकी दूतावास परिसर के अंदर से आग और धुआं उठते देखा गया। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि देश में अमेरिकी युद्धक विमान भी दुर्घटनाग्रस्त हो गए हैं। मंत्रालय ने दुर्घटनाओं के कारणों या उनमें शामिल विमानों की संख्या के बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी, लेकिन कहा कि पायलटों को अस्पताल ले जाया गया है और उनकी हालत स्थिर है।  

हवाई यात्रा पर ईरान संकट की मार: सैकड़ों उड़ानें कैंसिल, यात्रियों को रिफंड में छूट

ईरान ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई से उपजे पश्चिम एशिया संकट के बीच सोमवार को भी बड़ी संख्या में वहां जाने वाली और वहां से गुजरने वाली उड़ानें रद्द रहीं। इंडिगो की आज 162 उड़ानें रद्द हैं। उसने मंगलवार को भी 47 उड़ानें रद्द करने की घोषणा की है। एयरलाइंस ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर एक पोस्ट में बताया कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए पश्चिम एशिया के कुछ हिस्सों के होकर गुजरने वाली चुनिंदा अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों का अस्थायी निलंबन बढ़ा दिया गया है। साथ ही, अब 07 मार्च तक की यात्रा के लिए बिना शुल्क टिकट रद्द कराने या तारीख में बदलाव का विकल्प दिया जा रहा है। पहले 05 मार्च तक की यात्रा के लिए यह विकल्प दिया गया था। यह 28 फरवरी से पहले बुक कराये गये टिकटों पर लागू होगा। अंतर्राष्ट्रीय मार्गों पर देश की सबसे बड़ी विमान सेवा कंपनी एयर इंडिया ने भी 28 फरवरी या उससे पहले बुक कराये गये 05 मार्च तक की यात्रा के टिकट रद्द कराने या यात्रा की तारीख में बदलाव पर कोई शुल्क न लेने की घोषणा की है। उसने संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, इजरायल और कतर को जाने वाली और वहां से आने वाली उसकी सभी उड़ानें आज रात 11:59 बजे तक के लिए रद्द कर दी हैं। एयरलाइंस ने बताया है कि 02 मार्च को उत्तरी अमेरिका और यूरोप की उसकी सिर्फ छह उड़नें रद्द रहेंगी। दिल्ली हवाई अड्डे पर आज दोपहर बाद एक बजे तक यहां से जाने वाली 37 और यहां आने वाली 50 अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें हवाई क्षेत्र से संबंधित प्रतिबंधों के कारण रद्द रही हैं। पश्चिम एशिया संकट के कारण स्पाइसजेट की आज 17 उड़ानें (सात प्रस्थान, 10 आगमन) रद्द रही हैं। उसने 01 मार्च को 24 उड़ानें रद्द की थीं जबकि 03 मार्च को दो उड़ानें रद्द करने की घोषणा की है। अकासा एयर ने 03 मार्च तक अबू धाबी, दोहा, जेद्दा, कुवैत और रियाद की अपनी सभी उड़ानें रद्द कर दी हैं। उसने भी 07 मार्च तक की यात्रा के टिकट पर पूरा रिफंड देने या बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के यात्रा की तारीख में बदलाव का विकल्प दिया है। एयर इंडिया एक्सप्रेस ने बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात की अपनी सभी उड़ाने आज आधी रात तक के लिए रद्द करने की सूचना दी है। उसने भी 05 मार्च तक की यात्रा के टिकट रद्द करने या तारीख में बदलाव पर कोई शुल्क नहीं लगाने की घोषणा की है।