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PM मोदी की कूटनीतिक पारी तेज, BRICS में 15 नेताओं से मुलाकात कर साधे रणनीतिक समीकरण

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स समिट से इतर तीन दिनों में देश और सरकार के प्रमुखों के साथ 15 द्विपक्षीय बैठकें कीं, इसके अलावा दुनिया के नेताओं और इंटरनेशनल संस्थाओं के नेताओं के साथ कई अलग-अलग बातचीत भी की। मीडिआ रिपोर्ट के मुताबिक, बिजी डिप्लोमैटिक शेड्यूल में पीएम मोदी रूस, चीन, ईरान, अफ्रीका, साउथ-ईस्ट एशिया, गल्फ और दूसरे इलाकों के नेताओं के साथ सीधे जुड़े। चर्चाओं में बाइलेटरल रिश्ते, ट्रेड, इन्वेस्टमेंट, कनेक्टिविटी, जरूरी मिनरल्स और बड़े रीजनल और ग्लोबल डेवलेपमेंट शामिल थे। यह मीटिंग तब हुई जब भारत 2026 में अपनी अध्यक्षता में ब्रिक्स समिट होस्ट कर रहा था, जिसमें अलग-अलग जियोपॉलिटीकल पोजीशन वाले देशों को एक साथ लाया गया। बाइलेटरल मीटिंग्स ने नई दिल्ली को समिट के बड़े एजेंडा के साथ-साथ अपनी स्ट्रेटेजिक और इकोनॉमिक प्रायोरिटीज को आगे बढ़ाने का मौका दिया। पहला दिन: पुतिन, पेजेशकियन और UN चीफ 11 सितंबर को, PM मोदी ने रूस के प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन और ईरान के प्रेसिडेंट मसूद पेजेशकियन के साथ अलग-अलग मीटिंग कीं। मोदी-पुतिन मीटिंग में इंडिया-रूस स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप पर फोकस था, जिसमें दोनों नेताओं ने डिफेंस, एनर्जी, ट्रेड, इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी, जरूरी मिनरल्स और सिविल न्यूक्लियर एनर्जी में कोऑपरेशन का रिव्यू किया। उन्होंने रूस-यूक्रेन झगड़े, वेस्ट एशिया के हालात और समुद्री ट्रेड और इंडियन सीफेयरर्स की सेफ्टी पर उनके असर पर भी चर्चा की। पीएम मोदी ने ईरान के प्रेसिडेंट मसूद पेजेशकियन से भी मुलाकात की, जिसमें इंडिया-ईरान रिलेशन, ब्रिक्स कोऑपरेशन और वेस्ट एशिया में डेवलपमेंट पर चर्चा हुई। PM मोदी ने बातचीत और डिप्लोमेसी के लिए इंडिया का सपोर्ट दोहराया और इस इलाके में लंबे समय तक चलने वाली शांति और स्टेबिलिटी की इंपॉर्टेंस पर जोर दिया। उसी दिन, PM मोदी ने UN सेक्रेटरी-जनरल एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकात की, जिससे उनके डिप्लोमैटिक एंगेजमेंट में एक मल्टीलेटरल डायमेंशन जुड़ गया। दूसरा दिन: शी के साथ मीटिंग 12 सितंबर को, PM मोदी ने इथियोपिया के प्राइम मिनिस्टर अबी अहमद अली, मलेशिया के प्राइम मिनिस्टर अनवर इब्राहिम, UAE के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, वियतनामी लीडरशिप और चीनी प्रेसिडेंट शी जिनपिंग के साथ बाइलेटरल मीटिंग की। शी के साथ मीटिंग समिट की सबसे ज्यादा देखी जाने वाली मीटिंग्स में से एक थी। दोनों लीडर्स ने इंडिया-चाइना रिलेशनशिप, बाउंड्री क्वेश्चन, बॉर्डर पर शांति, इकोनॉमिक और ट्रेड रिलेशन, सप्लाई चेन और पीपल-टू-पीपल एक्सचेंज पर चर्चा की। PM मोदी ने जोर दिया कि मतभेद विवाद नहीं बनने चाहिए और बाइलेटरल रिलेशन को गाइड करने में आपसी सम्मान, सेंसिटिविटी और इंटरेस्ट के महत्व को अंडरलाइन किया। मलेशिया के प्राइम मिनिस्टर अनवर इब्राहिम के साथ मीटिंग में ट्रेड, इन्वेस्टमेंट, डिफेंस, सेमीकंडक्टर, इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल इकोनॉमी, एनर्जी और फिनटेक जैसे एरिया शामिल थे। इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली के साथ PM मोदी की मीटिंग में बाइलेटरल कोऑपरेशन को मज़बूत करने और अफ्रीका के साथ भारत के जुड़ाव पर फोकस रहा। उन्होंने UAE के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ भी बातचीत की, जिसमें भारत-UAE स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप और डिफेंस, टेक्नोलॉजी, एनर्जी, जरूरी मिनरल्स और कनेक्टिविटी जैसे एरिया में सहयोग पर चर्चा हुई। तीसरा दिन: अफ्रीका, सेंट्रल एशिया और साउथ-ईस्ट एशिया 13 सितंबर को, PM मोदी ने साउथ अफ्रीका के प्रेसिडेंट सिरिल रामफोसा, कजाख प्रेसिडेंट कसीम-जोमार्ट टोकायेव, फिलीपींस के प्रेसिडेंट फर्डिनेंड आर. मार्कोस जूनियर, मिस्र के प्रेसिडेंट अब्देल फत्ताह अल-सिसी और बुरुंडी के प्रेसिडेंट एवरिस्टे नदायिशिमिये के साथ बाइलेटरल मीटिंग कीं। बाइलेटरल मीटिंग के शेड्यूल के मुताबिक, उन्होंने युगांडा और नाइजीरिया की लीडरशिप के साथ भी मीटिंग की। इन मीटिंग्स ने अफ्रीका, सेंट्रल एशिया और साउथ-ईस्ट एशिया में भारत की डिप्लोमैटिक पहुंच को बढ़ाया, जिसमें बाइलेटरल पार्टनरशिप को मज़बूत करने और आपसी फायदे वाले एरिया में सहयोग बढ़ाने पर फोकस रहा। साउथ अफ्रीका के प्रेसिडेंट सिरिल रामफोसा के साथ बातचीत ब्रिक्स ग्रुप के लिए खास तौर पर जरूरी थी, क्योंकि साउथ अफ्रीका इस बड़े ब्लॉक के फाउंडिंग मेंबर्स में से एक है और ग्लोबल साउथ के हितों को आगे बढ़ाने में भारत का एक जरूरी पार्टनर है। मिस्र और बुरुंडी के साथ मीटिंग्स ने अफ्रीकी पार्टनर्स के साथ भारत के जुड़ाव को और मजबूत किया, जबकि कजाकिस्तान के साथ बातचीत ने सेंट्रल एशिया में भारत की पहुंच को बढ़ाया। मलेशिया के साथ उनकी पिछली मीटिंग के साथ-साथ फिलीपींस की बातचीत ने PM मोदी के डिप्लोमैटिक शेड्यूल में एक और जरूरी साउथईस्ट एशियाई पहलू जोड़ा। फॉर्मल समिट एजेंडा से आगे बाइलेटरल मीटिंग्स 15 फॉर्मल मीटिंग्स के साथ-साथ दूसरे विजिटिंग लीडर्स और इंटरनेशनल इंस्टीट्यूशन्स के रिप्रेजेंटेटिव्स के साथ कई छोटी बातचीत भी हुईं। इस कूटनीतिक गतिविधि से पता चलता है कि भारत ने अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान द्विपक्षीय बातचीत को कितना महत्व दिया। जहां इस समिट ने बढ़े हुए ग्रुप के बीच सामूहिक चर्चा के लिए एक मंच दिया, वहीं अलग से हुई मुलाकातों ने पीएम मोदी को अलग-अलग नेताओं के साथ संबंधित देशों की खास प्राथमिकताओं पर सीधे बातचीत करने का मौका भी दिया। ये बैठकें ऐसे समय में हुईं जब भू-राजनीतिक अनिश्चितता का माहौल था। पश्चिम एशिया और यूक्रेन में चल रहे संघर्षों का असर ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और ग्लोबल सप्लाई चेन पर पड़ रहा था। इसलिए, 15 द्विपक्षीय बैठकों और उनके अलावा हुई अनौपचारिक मुलाकातों ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान पीएम मोदी की कूटनीतिक कोशिशों में एक अहम भूमिका निभाई।

मदरसों पर सर्वे के बाद बड़ा एक्शन, 252 बंद और 100 को नोटिस से मचा हड़कंप

कोलकाता पश्चिम बंगाल की शुभेंदु सरकार का राज्य के मदरसों पर कहर टूटा है। 252 मदरसों को बंद करने का आदेश दिया गया है और करीब 100 दूसरे मदरसों को कारण बताओ नोटिस भेजा है। यह आदेश राज्य भर में हुए सर्वे के बाद दिया गया है, जिसमें पाया गया कि ऐसे कई संस्थानों के पास जरूरी मंजूरी और बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग के मंत्री क्षुदीराम टुडू ने कहा कि जिन मदरसों के पास जरूरी मंजूरी है, वे चलते रहेंगे। जून की शुरुआत से पश्चिम बंगाल के सभी जिलों में सरकारी और प्राइवेट मदरसों के इंफ्रास्ट्रक्चर, मंज़ूरी की स्थिति और मैनेजमेंट सिस्टम का आकलन करने के लिए विभाग ने फील्ड-लेवल सर्वे किया था। अधिकारियों ने कहा कि मदरसों को कारण बताओ नोटिस दिया गया है। उन्होंने कहा कि उनके जवाबों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। टुडू ने कहा कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निर्देशों के बाद यह काम शुरू किया गया था ताकि अलग-अलग जिलों में अधिकृत और अनधिकृत मदरसों की संख्या का पता लगाया जा सके। मंत्री ने आगे कहा, "252 मदरसों को बंद करने का आदेश दिया गया है, जबकि 100 अन्य को जरूरी मंजूरी और बुनियादी ढांचे की कमी के लिए कारण बताओ नोटिस भेजा गया है।" बार-बार मिल रही थी शिकायतें राज्य के पंचायती राज मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि मदरसों को लेकर कई विवाद हुए हैं और दावा किया कि कई मामलों में चरमपंथी गतिविधियों में कथित रूप से शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किए गए लोग ऐसे कुछ संस्थानों में शिक्षक के तौर पर काम करते पाए गए। उन्होंने कहा, "मदरसों के खिलाफ बार-बार शिकायतें मिल रही थीं। मदरसों से देश विरोधी गतिविधियां करने वाले लोगों के मामले सामने आए हैं।" उन्होंने आगे कहा कि कानून के हिसाब से और सरकारी इजाजत से चलने वाले मदरसे चलते रहेंगे। लेकिन सरकार मदरसों को बिना सोचे-समझे खोलने और परेशानी खड़ी करने की इजाजत नहीं देगी।" विपक्षी तृणमूल कांग्रेस के विधायक कुणाल घोष ने कहा कि सभी मदरसों को एक जैसा नहीं देखना चाहिए।

BRICS देश घटाएंगे डॉलर पर निर्भरता, स्थानीय मुद्रा में कारोबार बढ़ाने की तैयारी

नई दिल्ली  दिल्ली में चल रहे ब्रिक्स सम्मेलन में अमेरिकी डॉलर के खिलाफ मुहिम शुरू हो गई है। वहीं साझा BRICS करेंसी को लेकर स्थिति साफ हो गई है। भारत सरकार ने कहा है कि फिलहाल समूह में ऐसी किसी करेंसी का प्रस्ताव नहीं है। हालांकि, सदस्य देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार निपटाने और पेमेंट सिस्टम को जोड़ने पर चर्चा जारी है। यानी ब्रिक्स देश अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता करना चाहते हैं। विदेश मंत्रालय में आर्थिक संबंध सचिव सुधाकर दलेला ने बताया कि फिलहाल ब्रिक्स में साझा करेंसी शुरू करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने कहा कि सदस्य देशों के बीच स्थानीय मुद्रा में व्यापार निपटाने को लेकर बातचीत काफी समय से चल रही है। दलेला के मुताबिक, स्थानीय मुद्रा में भुगतान को द्विपक्षीय व्यापार की लागत घटाने के एक व्यावहारिक तरीके के तौर पर देखा जा रहा है। इसका उद्देश्य वैश्विक पेमेंट और सेटलमेंट सिस्टम के विकल्प के बजाय उसे पूरक बनाना है। Navbharat TimesBRICS डिनर में परोसी गई हिमालय की गुच्छी, कीमत ₹40000 किलो तक, जानें इस महंगी मशरूम से कैसे शुरू करें बिजनेस डॉलर पर निर्भरता घटाने की कोशिश ब्रिक्स देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने की चर्चा ऐसे समय हो रही है, जब डॉलर पर निर्भरता कम करने यानी डी-डॉलराइजेशन को लेकर दुनिया भर में चर्चा तेज है। ब्रिक्स सम्मेलन में शनिवार को जारी New Delhi Declaration में भी स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और निवेश के सेटलमेंट को बढ़ावा देने पर चल रही चर्चाओं का उल्लेख किया गया है। पीयूष गोयल ने की थी अपील भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी 11 सितंबर को BRICS बिजनेस फोरम में सदस्य देशों से अपने पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ने और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने की अपील की थी। गोयल ने भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और UPI का उदाहरण देते हुए कहा था कि UPI अब 11 देशों में स्वीकार किया जाता है। उन्होंने BRICS देशों से पेमेंट सिस्टम को जोड़ने और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने का आग्रह किया। अमेरिका क्यों है चिंतित? BRICS में डॉलर से दूरी बनाने की किसी भी कोशिश को अमेरिका के लिए चुनौती के तौर पर देखा जाता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही BRICS देशों को साझा करेंसी बनाने या डॉलर के विकल्प का समर्थन करने के खिलाफ चेतावनी दे चुके हैं। नवंबर 2024 में ट्रंप ने कहा था कि अगर ब्रिक्स देश नई करेंसी बनाते हैं या डॉलर की जगह किसी दूसरी करेंसी को समर्थन देते हैं, तो उन पर 100% टैरिफ लगाया जा सकता है।

UCC को लेकर अमित शाह का बड़ा दावा, 2029 से पहले 21 राज्यों में होगा लागू

नई दिल्ली केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने यूसीसी को लेकर बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहाकि साल 2029 तक एनडीए के शासन वाले 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू हो जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर 30 दिन के सेवा संकल्प अभियान का ऐलान करते हुए अमित शाह ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि भाजपा और सहयोगी दल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक देशभर में सेवा संकल्प अभियान चलाएंगे। मुंबई में सेवा संकल्प अभियान को लेकर मीडिया को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि हमने कई राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू की है। हम इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि साल 2029 के पहले भाजपा शासित सभी 21 प्रदेशों में समान नागरिक संहिता लागू करने में सफल होंगे। प्रधानमंत्री ने दुनिया में बढ़ाया भारत का मान इस दौरान अमित शाह ने कहा कि पिछले 12 साल में दुनिया में भारत का कद काफी बढ़ा है। दुनिया का कोई भी मुद्दा हो, आज भारत के प्रधानमंत्री की राय को अहमियत दी जाती है। दुनिया भर में लोग भारतीय पासपोर्ट रखने वाले भारतीय नागरिक को सम्मान की नजर से देखते हैं। नरेंद्र मोदी जी ने भारतीय पासपोर्ट की अहमियत बढ़ाने का काम किया है। इसका नतीजा यह है कि वे दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता बनकर उभरे हैं, जिन्हें सर्वे में 68 फीसदी अप्रूवल रेटिंग मिली है। उन्होंने आगे कहा कि 36 देशों ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने सर्वोच्च अंतरराष्ट्रीय सम्मान दिए हैं, जो भारत के ‘भारत रत्न’ जैसे ही हैं। यह विदेशों में भारत के बढ़ते कद को दर्शाता है। अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों में यह विश्वास पैदा किया है कि 15 अगस्त, 2047 तक भारत सभी क्षेत्रों में सभी देशों से आगे होगा। उन्होंने ने देश में सभी क्षेत्रों में बदलाव की शुरुआत की है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि साल 2014 में भारत को ‘फ्रेजाइल फाइव’ में शामिल किया गया था, लेकिन आज यह शीर्ष पांच देशों में शामिल है।

बच्चों की धड़कन से तय होगा पास या फेल, AI स्कूल के इस मॉडल पर उठे सवाल

न्यूयॉर्क अमेरिकी स्कूलों में भविष्य की शिक्षा के नाम पर चौंकाने वाला सच सामने आया है। यहां एडमिशन के लिए बच्चों को हार्ट मॉनिटर से जोड़कर पूरी क्लास के सामने उनके पैरेंट्स की आलोचनात्मक वीडियो दिखाये जाते हैं, जहां दिल की धड़कन बढ़ने पर वे फेल हो जाते हैं। सहनशीलता सिखाने का यह अमानवीय एआई मॉडल बच्चों की मानसिक सेहत को कैसे प्रभावित कर रहा है। आइए जानते हैं। सिलिकॉन वैली का अल्फा स्कूल, कमरे में ऐसा सन्नाटा था कि सिर्फ दीवार पर लगे विशाल मॉनीटर की बीप-बीर सुनाई दे रही थी। यह अस्पताल का आईसीयू नहीं, बल्कि भविष्य की शिक्षा का दावा करने वाला अत्याधुनिक एआई स्कूल है। कमरे में 14 साल के रेयान कुर्सी पर अकेला बैठा था, उसके सीने पर एक हर्ट मॉनीटर लगा था। उसके दिल की धड़कन पूरी क्लास के सामने बड़े पर्दे पर दिख रही थी। उसकी धड़कन सामान्य थी, नियम था कि धड़कन 10 प्रतिशत से ऊपर नहीं जानी चाहिए। अगर गई तो वह फेल। तभी उसके माता-पिता का वाडियो चलाया गया। उस वीडियो में वे रेयान की कमियों, उसकी गलतियों और उसकी नाकामी की कड़ी आलोचना कर रहे थे। पूरी क्लास यह वीडियो देख रही थी। रेयान के लिए यह बहुत मुश्किल था। उसकी धड़कन बढ़ने लगी, पहले 82, फिर 85 और अंत में 87, उसने अपनी मुठ्ठियां भींच लीं और आंखें बंद कर लीं। वीडियो खत्म होने पर उसकी औसत धड़कन 87 थी, वह एक धड़कन से पास हो गया, लेकिन एक हफ्ते तक उसके हाथ कांपते रहे। यह सिर्फ एक टेस्ट नहीं है। इस स्कूल में बच्चों से बॉट्स की मदद से कुछ ही दिन में पूरा कोर्स खत्म करवाया जाता है। उनसे गंदे टॉयलेट साफ कराए जाते हैं और सोशल मीडिया पर खुद को बेचना सिखाया जाता है। इन तरीकों को सहनशीलता और हिम्मत सिखाना कहा जा रहा है, लेकिन असल में यह बच्चों की भावनाओं के कुचलने जैसा है। मशीन ने दिल की रफ्तार तो नाप ली, पर बच्चे के अंदर का डर और घुटन नहीं नाप सकी।

15 हजार करोड़ की किशाऊ परियोजना को मिलेगी रफ्तार, छह राज्यों के बीच होगा करार

 शिमला  देश के लिए महत्वपूर्ण किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के निर्माण की दिशा में 15 सितंबर को नई दिल्ली में बड़ा कदम उठाया जाएगा। ऊपरी यमुना बेसिन में प्रस्तावित 660 मेगावाट की इस परियोजना को लेकर हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और राजस्थान के बीच समझौते पर हस्ताक्षर होंगे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में राज्यों के प्रतिनिधि करार करेंगे। हिमाचल प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह, बहुउद्देशीय परियोजनाएं एवं विद्युत, गैर पारंपरिक ऊर्जा स्रोत और सतर्कता आरडी नजीम बैठक में शामिल होंगे। वह परियोजना में हिमाचल के हितों और राज्य की भूमिका को लेकर पक्ष रखेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार समझौता हस्ताक्षर समारोह दोपहर 12 से एक बजे तक कर्तव्य भवन-03, जनपथ, नई दिल्ली में होगा। क्या है किशाऊ परियोजना करीब 15,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली किशाऊ परियोजना की जल भंडारण क्षमता 1,324 मिलियन घन मीटर है। परियोजना में जल भंडारण के साथ बहुउद्देशीय उपयोग का प्रविधान है। राज्यों के बीच सहमति बनने के बाद निर्माण से जुड़ी आगे की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है। दिल्ली और राजस्थान को मिलेगा हिमाचल के हिस्से का पानी परियोजना के तहत हिमाचल के हिस्से का पानी दिल्ली और राजस्थान को दिया जाएगा। इसके बदले दोनों राज्य हिमाचल के बिजली घटक की लागत में योगदान करेंगे। वहीं, हिमाचल और उत्तराखंड को जल घटक की लागत में वित्तीय योगदान नहीं करना होगा। ऐसे में समझौता हिमाचल के लिए जल संसाधन और बिजली से जुड़े हितों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।  

पहलगाम पर चीन का भारत के साथ खड़ा होना, क्या पाकिस्तान से दूरी बढ़ा रहा ड्रैगन?

नई दिल्ली चीन और पाकिस्तान हमेशा कहते रहे हैं कि उनकी दोस्ती हर मौसम में चलती है। चीन पाकिस्तान का सबसे बड़ा साथी है। पाकिस्तान ने चीन को सीपीईसी जैसी परियोजनाओं से अरब सागर तक रास्ता दिया है। लेकिन नई दिल्ली में ब्रिक्स बैठक में एक बात खास रही। चीन उस बैठक में था, जिसमें 2025 के पहलगाम हमले की निंदा हुई। बैठक में आतंकवाद पर सख्ती की बात भी कही गई। घोषणापत्र में 22 अप्रैल 2025 के हमले की निंदा की गई। उस हमले में 26 लोग मारे गए थे। इसमें सीमा पार आतंकियों, आतंक को पैसे देने और उनके ठिकानों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। पाकिस्तान का नाम नहीं लिया गया। भारत के ऑपरेशन सिंदूर का समर्थन भी नहीं किया गया। फिर भी चीन का इस दस्तावेज पर दस्तखत करना बड़ी बात है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या दोनों देशों के रिश्ते बदल रहे हैं? चीन की मौजूदगी क्यों जरूरी है? दरअसल, पहलगाम का जिक्र नया नहीं था। मई में भी ब्रिक्स के विदेश मंत्रियों ने इस हमले की निंदा की थी। दिल्ली के लिए यह इसलिए बड़ा है क्योंकि चीन पाकिस्तान का करीबी दोस्त माना जाता है। यह बात उस समय हुई जब भारत और चीन 2020 के गलवान झगड़े के बाद रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। शी जिनपिंग नई दिल्ली आए। चीन ने ऐसे बयान पर दस्तखत किए जो भारत की बड़ी सुरक्षा चिंता से जुड़ा है। इसका मतलब यह नहीं कि चीन ने पाकिस्तान को छोड़ दिया। लेकिन सवाल यह है कि जब चीन के अपने फायदे दांव पर हों, तो वह पाकिस्तान का कितना साथ देगा। चीन की सबसे बड़ी समस्या क्या? बताया जा रहा है कि दोनों देशों के बीच तनाव का बड़ा कारण भारत नहीं है। कारण है चीनी नागरिकों की सुरक्षा। सीपीईसी पर काम कर रहे चीनी मजदूरों पर, खासकर बलूचिस्तान में, बार-बार हमले हो रहे हैं। इस कारण चीन नाराज है। अब चीन खुलकर पाकिस्तान से सुरक्षा सुधारने को कह रहा है। कुछ परियोजनाएं हमलों के बाद कुछ समय के लिए रुकी भी थीं। 2026 में भी यही समस्या है। चीन सीपीईसी 2.0 आगे बढ़ाना चाहता है, लेकिन सुरक्षा पर जोर दे रहा है। पाकिस्तान ने चीनी लोगों और परियोजनाओं की सुरक्षा सुधारने का वादा किया है। यही कारण है कि रिश्ता टूटा नहीं है। लेकिन सीपीईसी पर सुरक्षा की दिक्कतें बढ़ रही हैं। निवेश को लेकर सवाल खबर है कि दोनों देशों के बीच निवेश को लेकर भी फर्क दिख रहा है। खबर है कि चीन की एक बड़ी कंपनी ने पाकिस्तान की बिजली कंपनी खरीदने का प्लान वापस ले लिया। वजह है पैसे की समस्या और सुरक्षा का खतरा। सीपीईसी बड़े चीनी निवेश पर बना था। अब चीन सिर्फ दोस्ती के लिए पैसा नहीं लगाना चाहता। वह देख रहा है कि पैसा वापस आएगा या नहीं और काम सुरक्षित है या नहीं। पाकिस्तान को चीन के पैसे की जरूरत है, लेकिन वह कर्ज और सुरक्षा की समस्या से जूझ रहा है। बता दें कि मई 2026 में शहबाज शरीफ चीन गए। शी जिनपिंग से मुलाकात हुई। दोनों ने दोस्ती और सीपीईसी को और मजबूत करने की बात कही। चीन ने सीपीईसी 2.0 का साथ दोहराया। पाकिस्तान ने सुरक्षा सुधारने का वादा किया। अगस्त में भी दोनों पक्षों ने सीपीईसी पर बात की। यानी चीन दूर नहीं हो रहा। वह पाकिस्तान से और ज्यादा मांग कर रहा है। शायद यही कारण है कि कुछ मुद्दे पर तनाव दिख रहा है। पाकिस्तान और ब्रिक्स पाकिस्तान 2023 से ब्रिक्स में शामिल होना चाहता है। उसने चीन और रूस से मदद मांगी। लेकिन सभी देशों की सहमति चाहिए। भारत का विरोध बड़ी रुकावट है। ब्रिक्स में जाने से पाकिस्तान को ज्यादा पहचान और नई ताकतों से बात करने का मौका मिल सकता है। चीन अब तक भारत के विरोध को पार नहीं कर पाया है। लगता है चीन पाकिस्तान के साथ रिश्ता भी रखना चाहता है और भारत के साथ भी बेहतर संबंध रखना चाहता है। पहलगाम वाले बयान के पीछे क्या कारण? चीन के पाकिस्तान में बड़े हित हैं। सीपीईसी कश्मीर के उस हिस्से से जाता है जो पाकिस्तान के पास है। ग्वादर से अरब सागर तक रास्ता मिलता है। पाकिस्तान भारत के सामने संतुलन भी बनाता है। लेकिन चीन का भारत से बड़ा व्यापार भी है। वह सीमा पर शांति और भारत से अच्छे रिश्ते चाहता है। मोदी और शी रिश्ते सुधारने पर काम कर रहे हैं। ऐसे में चीन नहीं चाहता कि हर मामले में उसे सिर्फ पाकिस्तान का पक्षधर माना जाए। इसलिए ब्रिक्स में पहलगाम की बात इसी दिशा में जाती है। चीन पाकिस्तान का साथी रह सकता है, बिना हर बात पर उसका साथ दिए। क्या रिश्ते खराब हो रहे हैं? पाकिस्तान में लगातार चीनी लोगों पर हमले हो रहे हैं। सीपीईसी की सुरक्षा कमजोर है। निवेश का फायदा साफ नहीं है। परियोजनाओं में देरी है। चीन अब पैसे और सुरक्षा पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। साथ ही भारत से रिश्ते सुधारना चाहता है। लेकिन अभी बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। चीन अब भी पाकिस्तान को जरूरी साथी मानता है। पाकिस्तान अब भी चीन की मदद पर बहुत निर्भर है। चीन सीपीईसी 2.0 का साथ दे रहा है। बता दें कि पहले पाकिस्तान चीन को रास्ता और साथ देता था। चीन पाकिस्तान को पैसा, समर्थन और सुरक्षा देता था। अब चीन बदले में ज्यादा चाहता है- अपने लोगों की सुरक्षा, अपने पैसे की सुरक्षा और काम में साफ तस्वीर। इसलिए ब्रिक्स में पहलगाम का जिक्र अहम है। लेकिन यह नहीं कहा जा सकता है कि चीन ने पाकिस्तान को छोड़ दिया। बात यह है कि पाकिस्तान अब यह नहीं मान सकता कि भारत से टकराव होने पर चीन हर बार अपने आप भारत के खिलाफ खड़ा हो जाएगा। नई दिल्ली के लिए यही बात सबसे बड़ी है।

यूपी-बिहार समेत 23 राज्यों में आज मूसलाधार बारिश का अलर्ट

 नई दिल्ली देश में मानसून की विदाई से पहले मौसम विभाग ने एक बार फिर से टेंशन बढ़ाने वाला अलर्ट जारी कर दिया है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक आज यानी 14 सितंबर को यूपी, बिहार सहित 23 राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट जारी कर दिया है। इस दौरान 85 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से आंधी चलने की चेतावनी है। वहीं, इस तेज हवा के झोंके के चलते पूर्वी राजस्थान, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में तूफानी हवा लोगों की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं। इसके अलावा पूर्वी भारत में बिजली और वज्रपात का आक्रामक प्रहार देखने को मिल सकता है। वहीं, बंगाल की खाड़ी में चलने वाली तूफानी हवाओं की वजह से पूर्वी भारत के राज्यों में लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। वहीं, 4 से अधिक राज्यों में ओले गिरने की भी चेतावनी है। वहीं, मध्य असम और आसपास के इलाकों के ऊपर एक ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण मौजूद है। वहीं, कब दबाव का क्षेत्र 24 घंटों के दौरान दक्षिण छत्तीसगढ़ और विदर्भ से होते हुए पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ने की संभावना है। तो चलिए हम आपलोगों को बताते हैं देश के अन्य राज्यों में आज यानी 14 सितंबर को मौसम का हाल कैसा रहेगा। हम जिलावार भी मौसम का हाल बताने जा रहे हैं… देश के 23 राज्यों में बारिश-आंधी की चेतावनी मौसम विभाग की भविष्यवाणी के मुताबिक आज यानी 14 सितंबर को देश के 23 राज्यों यूपी, दिल्ली, बिहार, राजस्थान, हरियाणा, उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल, त्रिपुरा, असम, मेघालय और नागालैंड में भारी बारिश-आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 80 से 85 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलने का अलर्ट है। दिल्ली में आज मौसम कैसा रहेगा     दिल्ली (14 सितंबर-बारिश-आंधी का अलर्ट): दिल्ली में कल यानी 14 सितंबर को मध्यम बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से तेज आंधी चल सकती है। वहीं, दिल्ली में कल यानी 14 सितंबर को अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस रहेगा। यूपी में आज मौसम कैसा रहेगा     यूपी (14 सितंबर- बारिश-आंधी की चेतावनी): मेरठ, गौतमबुद्ध नगर, आगरा, मथुरा, अलीगढ़, बुलंदशहर, झांसी, कानपुर, इटावा, सोनभद्र, मिर्जापुर, सीतापुर, उन्नाव, सुल्तानपुर, आजमगढ़, मानपुरी, गाजीपुर, बलिया, बांदा, प्रयागराज, देवरिया, गोंडा, बलरामपुर और गोरखपुर में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की चेतावनी है। वहीं, लखनऊ में आज यानी 14 सितंबर को अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस रहेगा तो न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा। बिहार में आज मौसम कैसा रहेगा     बिहार (14 सितंबर-भारी बारिश-तूफान का अलर्ट): गया, पूर्वी चंपारण, रोहतास, गया, नवादा, लखीसराय, मुंगेर, नालंदा, बक्सर, सिवान, वैशाली, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया किशनगंज, कटिहार, अररिया, बेगूसराय, लखीसराय और खगड़िया में भारी बारिश-आंधी की चेतावनी जारी की गई है। वहीं, पटना में कल यानी 8 अगस्त को अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस जाएगा। झारखंड में आज मौसम कैसा रहेगा     झारखंड (14-15 सितंबर- भारी बारिश-आंधी की चेतावनी): रामगढ़, बोकारो, रांची, हजारीबाग, रामगढ़, जमशेदपुर, पलामू, खूंटी और दुमका में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, इस बारिश के चलते 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, रांची में कल यानी 14 सितंबर को अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस तक रहेगा। उत्तराखंड में आज मौसम कैसा रहेगा     उत्तराखंड (14 सितंबर- बारिश और आंधी की चेतावनी): बागेश्वर, रुद्रप्रयाग, नैनीताल, ऋषिकेश, हरिद्वार, पिथौरागढ़, पौड़ी गढ़वाल और अल्मोड़ा में मध्यम से भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से आंधी चल सकती है। वहीं, देहरादून में कल यानी 14 सितंबर को अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस जाएगा तो न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस तक रहेगा। हिमाचल में आज मौसम कैसा रहेगा     हिमाचल प्रदेश (14 सितंबर- बारिश-आंधी का येलो अलर्ट): कांगड़ा, सिरमौर, शिमला, मंडी, चंबा, कुल्लू और सोलन में मध्यम से तेज बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है। वहीं, मनाली में कल यानी 14 सितंबर को अधिकतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस रहेगा तो न्यूनतम तापमान 6 डिग्री सेल्सियस तक गिरने की संभावना है। जम्मू-कश्मीर में आज मौसम कैसा रहेगा     जम्मू-कश्मीर (14 सितंबर-भारी बारिश-आंधी की चेतावनी): मीरपुर, कुलगाम, कठुआ, जम्मू, शोपियां, डोडा, राजौरी, पुंछ किश्तवाड़ और अनंतनाग में भारी बारिश-आंधी की चेतावनी जारी की गई है। वहीं, श्रीनगर में कल यानी 14 सितंबर को अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस रहेगा तो न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचेगा पश्चिम बंगाल में आज मौसम कैसा रहेगा     पश्चिम बंगाल(14-15 सितंबर-भारी बारिश-आंधी का अलर्ट): पश्चिमी मेदिनीपुर, पुरबा मेदिनीपुर, दार्जिलिंग, हावड़ा, बांकुड़ा, झाड़ग्राम, दक्षिण 24 परगना, कोलकाता, नादिया, अलीपुरद्वार, बीरभूम और कलीम्पोंग में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, इस दौरान 55 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा के झोंके चलेंगे। वहीं, कोलकाता में कल यानी 14 सितंबर को अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस रहेगा तो न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस पर पहुंचेगा। पंजाब में आज मौसम कैसा रहेगा     पंजाब (14 सितंबर-भारी बारिश और आंधी की संभावना): पठानकोट, बरनाला, लुधियाना, चंडीगढ़, जालंधर, गुरदासपुर और पटियाला में भारी बारिश-आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 50 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलेगी। राजस्थान में आज मौसम कैसा रहेगा     राजस्थान (14 सितंबर-बारिश-आंधी की चेतावनी): अजमेर, भरतपुर, उदयपुर, जयपुर, भिलवाड़ा, सवाई माधोपुर, बारां, कोटा, पाली और बीकानेर में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है।। इस दौरान 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलेगी। वहीं, जयपुर में कल यानी 14 सितंबर को अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस तो न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचेगा। मध्य प्रदेश में आज मौसम कैसा रहेगा     मध्य प्रदेश (14 सितंबर- बारिश-आंधी का येलो … Read more

UK में बढ़ा बंटवारे का खतरा, तीन राष्ट्रों के नेता आजादी के रोडमैप पर जुटे

लंदन  कार्डिफ में रविवार रात हुए एक सीक्रेट राजनीतिक घटनाक्रम ने पूरे यूनाइटेड किंगडम के भविष्य पर बहुत बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। 'द टेलीग्राफ' की एक सनसनीखेज रिपोर्ट के मुताबिक यूके का इतिहास बदलने वाले एक समझौते पर दस्तखत करने के लिए स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड के शीर्ष नेता एक मंच पर जुट रहे हैं। सोमवार को होने वाली इस अभूतपूर्व बैठक में तीनों राष्ट्रों के फर्स्ट मिनिस्टर्स जॉन स्विनी, रून एप आयोवर्थ और मिशेल ओ'नील एक संयुक्त घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करेंगे, जिसका सीधा मकसद यूनाइटेड किंगडम को तीन हिस्सों में विभाजित करने और आजादी के लिए नया जनमत संग्रह कराने की राह आसान करना है। 'द टेलीग्राफ' ने बताया है कि स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड के नेता सोमवार को एक समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए इकट्ठा होंगे जिसका मकसद यूनाइटेड किंगडम को तोड़ने की प्रक्रिया शुरू करना है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि ब्रिटेन के इतिहास में यह पहला मौका है जब स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड तीनों ही स्थानों पर एक साथ आजादी का समर्थन करने वाली सरकारें सत्ता में हैं। इस त्रिस्तरीय गठबंधन ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम पर सीधा दबाव बना दिया है। एंडी बर्नहैम कुछ ही दिन पहले ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बने हैं और अब वो बड़ी मुसीबत में फंस चुके हैं। UK को 3 हिस्सों में बांटने के लिए ऐतिहासिक समझौता यह बैठक तब हो रही है जब ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने सांसदों से कहा कि अगर आजादी के पक्ष में 'स्पष्ट सहमति' बनती है तो वह एक और स्कॉटिश जनमत संग्रह की मंजूरी देंगे। यह शिखर सम्मेलन डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के दो दिन बाद होगा जिसमें उन्होंने कहा था कि वह एक संयुक्त आयरलैंड देखना 'पसंद' करेंगे। शनिवार को डबलिन की यात्रा के दौरान उन्होंने कहा कि उत्तरी आयरलैंड का रिपब्लिक (आयरलैंड गणराज्य) में शामिल होना 'बहुत अच्छी बात' होगी और पूछा 'यह बुरा कैसे हो सकता है?' अमेरिकी राष्ट्रपति ने तब हस्तक्षेप किया जब राष्ट्रवादी नेताओं ने प्रधानमंत्री पर दबाव बढ़ा दिया है जिन्होंने इंग्लैंड में सत्ता के विकेंद्रीकरण को अपने एजेंडे के केंद्र में रखा है। SNP नेता और स्कॉटलैंड के फर्स्ट मिनिस्टर जॉन स्विनी ने दावा किया कि मिस्टर बर्नहम 'इस विचार का सामना कर रहे हैं कि वह यूनाइटेड किंगडम के आखिरी प्रधानमंत्री के तौर पर इतिहास में दर्ज होंगे।' चार बड़े मुद्दों पर बन रही सहमति कार्डिफ के सेंट डेविड्स होटल में होने जा रही इस बैठक में चारों प्रमुख दलों के नेता 1-अर्थव्यवस्था, 2- ऊर्जा, यूरोपीय संघ (EU) और 3- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के साथ-साथ 4- आत्मनिर्णय के अधिकार पर विस्तृत रोडमैप पेश करेंगे। इसके तहत- स्कॉटलैंड और वेल्स- आजादी के बाद यूरोपीय संघ (EU) के स्वतंत्र सदस्य बनने की योजना पर आगे बढ़ेंगे। उत्तरी आयरलैंड– रिपब्लिक ऑफ आयरलैंड में विलय के जरिए यूरोपीय संघ का हिस्सा बनने की राह तलाशेगा। स्कॉटिश फर्स्ट मिनिस्टर जॉन स्विनी ने कहा 'यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि मौजूदा स्थिति अब टिकाऊ नहीं है और वेस्टमिंस्टर को एक 'पोस्ट-यूके फ्यूचर' के लिए तैयार रहना होगा।' इस नए गठबंधन ने वेस्टमिंस्टर की नींद उड़ा दी है और अब देखना यह होगा कि प्रधानमंत्री बर्नहैम यूके को बिखरने से बचाने के लिए क्या कदम उठाते हैं। टेलीग्राफ ने बताया है कि गुड फ्राइडे एग्रीमेंट की शर्तों के तहत आयरिश पुनर्मिलन के लिए वोटिंग कराने का एक संभावित रास्ता है। इसमें कहा गया है कि अगर ऐसा लगता है कि नॉर्दर्न आयरलैंड के ज्यादातर लोग UK से अलग होने के लिए वोट करेंगे तो जनमत संग्रह कराया जाना चाहिए।

रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने आगे आया भारत-चीन, पुतिन ने किया प्रस्ताव का स्वागत

 नई दिल्ली नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनपिंग ने रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए मध्यस्थता की पेशकश की है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव के अनुसार, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दोनों नेताओं के इस प्रस्ताव का स्वागत किया। पेस्कोव ने कहा, "अपनी द्विपक्षीय बैठकों के दौरान, मोदी और शी चिनफिंग ने यूक्रेन के समाधान में गहरी दिलचस्पी दिखाई और समाधान खोजने में मदद करने के लिए सक्रिय रूप से अपने मध्यस्थता के प्रस्ताव दिए।" आर्थिक सहयोग कार्यक्रम 2030 पर चर्चा इसके अलावा, पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक भी की। बैठक के दौरान आर्थिक सहयोग कार्यक्रम 2030 के कार्यान्वयन सहित घनिष्ठ व्यापारिक संबंधों के साथ-साथ बुनियादी ढांचे, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, रक्षा और संस्कृति में सहयोग पर चर्चा हुई। इससे पहले दोनों नेताओं की मुलाकात 31 अगस्त को बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। दो सप्ताह के भीतर दूसरी बार मुलाकात पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट में कहा, "बिश्केक में हुई हमारी मुलाकात के दो सप्ताह से भी कम समय बाद दिल्ली में राष्ट्रपति पुतिन से मिलकर बेहद खुशी हुई। आज की मुलाकात में हमने व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने के बारे में बात की, जिसमें आर्थिक सहयोग कार्यक्रम 2030 का कार्यान्वयन भी शामिल है। बुनियादी ढांचे, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, रक्षा, संस्कृति और अन्य क्षेत्रों में सहयोग पर भी चर्चा हुई।" विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया और काला सागर क्षेत्र में चल रहे संघर्षों सहित आपसी हित के प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया, जिन्होंने समुद्री व्यापार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा को प्रभावित किया है। इस दौरान पीएम मोदी ने दोहराया कि संघर्षों के समाधान में संवाद और कूटनीति ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता है और कहा कि भारत शांति प्रयासों में सहायता करने के लिए तत्पर है।