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हाईकोर्ट की महिला जज का बड़ा खुलासा: मेरे चैंबर में घुस आया था शख्स, फिर हुई जमकर पिटाई

ओडिशा ओडिशा हाईकोर्ट की जज सावित्री राठो ने रविवार को खुलकर अपनी कानूनी पेशे की यात्रा पर बात की। उन्होंने बताया कि शुरुआत में एक शख्स उनके पीछे पड़ गया था और वह जहां भी जातीं, वहां पहुंच जाता। उन्होंने बताया कि बाद में उस शख्स की जमकर कुटाई भी हुई थी। जस्टिस राठो ने बताया कि कैसे पारिवारिक परेशानी के कारण कॉलेजियम की सिफारिश के बाद भी उनके नाम पर विचार नहीं किया गया। पीछे पड़ गया था एक शख्स बार एंड बेंच के अनुसार, जस्टिस राठो ने बताया कि जब उन्होंने कानूनी पेशे की शुरुआत की, तब एक शख्स उनके पीछे पड़ गया था। उन्होंने कहा कि वह कोर्ट में जहां भी जातीं, वह उनके पीछे आ जाता। उन्होंने बताया कि बात तब बढ़ गई थी, जब वह उनके चैंबर में तक घुस आया था। जस्टिस राठो ने कहा, 'जब मैंने प्रेक्टिस शुरू की, तो एक शख्स मेरा पीछा करने लगा था। मुझे लगा कि वह हमेशा कोर्ट में है। मेरे पुरुष सहकर्मियों ने मेरी मदद की। एक बार वह मेरे चैंबर में भी आ गया था, लेकिन मैंने ऐसे दिखाया कि मैंने उसे देखा ही नहीं। हालांकि, बाद में उसकी जमकर कुटाई हुई थी।' जज बनने में हुई दिक्कत जस्टिस राठो ने कहा कि कॉलेजियम की तरफ से जज बनने के लिए दो बार उनके नाम की सिफारिश भी की गई थी। उन्होंने कहा, 'मेरे नाम की दो बार सिफारिश की गई थी, लेकिन जो इंचार्ज थे, उन्होंने इसे नहीं माना। उन्हें मेरे परिवार से कुछ परेशानी थी।' पुरुष सहकर्मियों की तारीफ की उन्होंने कहा कि ये आम धारणा है कि इस पेशे में हमेशा एक महिला दूसरी महिला की मदद करती है। उन्होंने कहा कि उनका अनुभव अलग रहा है। जज ने बताया कि करियर की शुरुआत में पुरुष सहकर्मियों ने उनकी काफी मदद की है। उन्होंने कहा कि कई वकील जज लेनदेन के कारण जज बनने में संकोच करते हैं, लेकिन वो उनके लिए कभी चिंता की बात नहीं रही। जस्टिस राठो अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर सुप्रीम कोर्ट में आयोजित Half the Nation – Half the Bench थीम पर पहली नेशनल कॉन्फ्रेंस में बोल रहीं थीं। यह आयोजन सीनियर एडवोकेट शोभा गुप्ता और महालक्ष्मी पवानी की तरफ से आयोजित किया गया था।  

संसद में कांग्रेस के विरोध पर किरेन रिजिजू का पलटवार, कहा— देश में कोई एक महाराजा नहीं

नई दिल्ली लोकसभा में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के वक्तव्य के दौरान कांग्रेस और अन्य विपक्षी सदस्यों के हंगामे पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि विपक्ष बेमतलब हंगामा करने में लगा है। सरकार हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार है। किरेन रिजिजू ने लोकसभा में कहा, "विपक्ष पूरी तरह कंफ्यूजन में है। उसके लोगों को यह नहीं पता है कि उन्हें क्या करना है। पहले ये लोग लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आए, जो अभी तक पेंडिंग है, लेकिन उसी बीच दूसरा अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दे रहे हैं, जिसका कोई मतलब नहीं है।" उन्होंने कहा कि विपक्ष जिस मुद्दे को उठा रहा है, उस पर विदेश मंत्री ने सदन में ही विस्तार से जवाब दिया है। लेकिन विपक्ष को जवाब सुनना ही नहीं है। रिजिजू ने कहा, "मैंने कभी इतनी गैर-जिम्मेदार पार्टी नहीं देखी। आपका एक परिवार या एक आदमी क्या पूरे देश का महाराजा है? इस देश में संविधान है और सदन में नियम हैं, लेकिन विपक्ष के लोग इन नियमों को ही नहीं मानते हैं।" रिजिजू ने कहा, "मैं कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से कहना चाहता हूं कि आप अपनी अंतरआत्मा में झांककर देखें कि आपकी हरकत से देश का क्या भला हो रहा है और संसद की गरिमा को कितना गिराया है।" केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष को चुनौती देते हुए कहा, "आप जो भी अनैतिक प्रस्ताव लेकर आए हैं, उस पर चर्चा के लिए सरकार पूरी तरह तैयार है। अगर विपक्ष में हिम्मत है तो अभी चर्चा शुरू करे।" इससे बावजूद विपक्ष का हंगामा नहीं रुका। कांग्रेस और अन्य विपक्षी सांसदों ने वेल में आकर नारेबाजी की और तख्तियां लहराईं। इस हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। इससे पहले, जब राज्यसभा में पश्चिमी एशिया के मुद्दे पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर वक्तव्य दे रहे थे, कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने हंगामा करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।

अंतिम मतदाता सूची से नाम हटाने पर बवाल: पश्चिम बंगाल SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों के खिलाफ एक नई याचिका पर मंगलवार को विचार करने को सहमत हुआ। यह याचिका उन लोगों ने दायर की है जिनके नाम चुनाव आयोग ने हटा दिए हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने बताया कि यह याचिका पहले के मतदाताओं के नाम हटाने से संबंधित है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने अधिवक्ता की दलीलें सुनीं। अधिवक्ता ने कहा कि ये वे मतदाता हैं जिन्होंने पहले मतदान किया था, लेकिन अब उनके दस्तावेज नहीं लिए गए हैं। मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि वे न्यायिक अधिकारियों के निर्णयों पर अपील में नहीं बैठ सकते। हालांकि, वरिष्ठ अधिवक्ता ने अपील को सुनवाई योग्य बताया, जिसके बाद पीठ ने मंगलवार को सुनवाई करने का फैसला किया। 24 फरवरी को शीर्ष अदालत ने एसआईआर अभ्यास के लिए पश्चिम बंगाल के सिविल जजों की तैनाती की अनुमति दी थी। इसके अतिरिक्त 250 जिला जज और झारखंड व ओडिशा के न्यायिक अधिकारी भी तैनात किए गए थे। इनका काम मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का सामना कर रहे 80 लाख दावों और आपत्तियों को निपटाना था। कोलकाता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल ने 22 फरवरी को एक पत्र में बताया था कि 250 जिला जजों को भी इन दावों को निपटाने में करीब 80 दिन लगेंगे। 2002 की मतदाता सूची से वंशानुक्रम को जोड़ने में तार्किक विसंगतियां पाई गई हैं। इनमें माता-पिता के नाम का बेमेल होना शामिल है। साथ ही, मतदाता और उसके माता-पिता की उम्र का अंतर 15 साल से कम या 50 साल से अधिक होना भी एक विसंगति है। मुख्य न्यायाधीश कांत ने कहा कि अगर प्रत्येक न्यायिक अधिकारी प्रतिदिन 250 दावों को निपटाता है, तो भी इस प्रक्रिया में लगभग 80 दिन लगेंगे। पश्चिम बंगाल एसआईआर की समय सीमा 28 फरवरी थी। नौ फरवरी को शीर्ष अदालत ने राज्यों को स्पष्ट किया था कि वह एसआईआर को पूरा करने में किसी को भी बाधा डालने की अनुमति नहीं देगा। अदालत ने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया था। यह निर्देश चुनाव आयोग के नोटिस जलाने के आरोपों पर एक हलफनामा दाखिल करने के लिए था। कुछ व्यक्तियों पर चुनाव आयोग के नोटिस जलाने का आरोप लगा था।

West Asia Crisis: संसद में बोले जयशंकर—समाधान का रास्ता संवाद और कूटनीति, भारतीयों को वापस लाने पर क्या कहा?

नई दिल्ली पश्चिम एशिया संकट पर विदेश मंत्री जयशंकर ने राज्यसभा में बयान दिया। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी हालात पर नजर रख रहे हैं और भारतीयों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है। इस बीच, विपक्ष ने संसद में जमकर हंगामा और नारेबाजी की। पश्चिम एशिया में फंसे भारतीयों और ऊर्जा संकट पर राज्यसभा में विपक्ष के हंगामे और नारेबाजी के बीच विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने राज्यसभा में पश्चिम एशिया के हालात पर बयान दिया। उन्होंने कहा कि सरकार इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव को लेकर काफी गंभीर है। भारत ने 20 फरवरी को ही एक बयान जारी कर अपनी चिंता जाहिर कर सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की थी। प्रधानमंत्री मोदी घटनाक्रम पर रख रहे नजर विदेश मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार नए घटनाक्रमों पर करीब से नजर रख रहे हैं। संबंधित मंत्रालय आपस में तालमेल बिठाकर काम कर रहे हैं ताकि सही कदम उठाए जा सकें। उन्होंने बताया कि यह विवाद भारत के लिए बड़ी चिंता की बात है। खाड़ी देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते हैं। ईरान में भी हजारों भारतीय छात्र और कर्मचारी मौजूद हैं। यह इलाका भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है क्योंकि यहां तेल और गैस के मुख्य सप्लायर हैं। सप्लाई चेन में रुकावट आना एक गंभीर मुद्दा है। जयशंकर ने कहा यह विवाद लगातार बढ़ रहा है जिससे इलाके की सुरक्षा की स्थिति खराब हो गई है। इसका असर आम जिंदगी और कामकाज पर पड़ रहा है। इस संकट में भारत ने अपने दो नाविकों को खो दिया है और एक नाविक अभी भी लापता है। तेहरान में भारतीय दूतावास हाई अलर्ट पर भारतीयों की सुरक्षा पर उन्होंने कहा कि तेहरान में भारतीय दूतावास छात्रों को सुरक्षित जगहों पर भेजने में मदद कर रहा है। ईरान में मौजूद व्यापारियों को आर्मेनिया के रास्ते भारत लौटने में सहायता दी गई है। तेहरान में भारतीय दूतावास पूरी तरह सक्रिय और हाई अलर्ट पर है। अब तक लगभग 67,000 भारतीय नागरिक वापस लौटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर चुके हैं। सरकार अपने लोगों को वापस लाने की पूरी कोशिश कर रही है। ईरान ने जताया आभार विदेश मंत्री ने यह भी बताया कि फिलहाल ईरान के बड़े नेताओं से संपर्क करना मुश्किल है। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्री ने भारत का शुक्रिया अदा किया है। भारत ने मानवीय आधार पर ईरानी युद्धपोत 'लवन' को कोच्चि पोर्ट पर रुकने की इजाजत दी थी, जिसके लिए ईरान ने आभार जताया है।

e-PAN डाउनलोड करने का ईमेल? सरकार ने जारी की चेतावनी, भूलकर भी न करें ये गलती

नई दिल्ली क्या आपको भी e-PAN कार्ड डाउनलोड करने को लेकर कोई ईमेल आया है? अगर हां, तो चौकन्ने हो जाएं क्योंकि ये साइबर ठगी करने वालों का नया हथकंडा है। दरअसल साइबर अपराधी लोगों को ईमेल भेजकर e-PAN कार्ड डाउनलोड करने का झांसा दे रहे हैं। PIBFactCheck ने X पर पोस्ट कर ठगी के इस नए जाल से बचकर रहने की सलाह दी है। ठग अपने इस नकली ईमेल में फर्जी लिंक पर लोगों को क्लिक करने के लिए उकसाते हैं। साइबर अपराधी नकली लिंक से लोगों का निजी डेटा जैसे कि आधार या बैंक की डिटेल्स चुराकर झूठे लोन और बैंक के साथ धोखाधड़ी को अंजाम देते हैं। PIBFactCheck ने साफ लिखा है कि ये ईमेल नकली है और इस तरह के किसी भी ईमेल पर मौजूद लिंक पर आपको क्लिक नहीं करना चाहिए। इसके अलावा इसकी शिकायत करने के बारे में भी सरकारी फैक्ट चेक संस्था ने पूरी जानकारी उपलब्ध कराई है। क्या है e-PAN कार्ड स्कैन e-PAN कार्ड स्कैम साइबर अपराधियों का ठगी करने का नया हथियार है। इसमें लोगों को e-PAN कार्ड डाउनलोड करने के लिए कहा जाता है। यह मेल इस तरह से लिखा जाता है कि जैसे इनकम टैक्स विभाग की ओर से भेजा गया हो। e-PAN कार्ड डाउनलोड करने के लिए ईमेल में मौजूद लिंक फर्जी होता है। जिसका मकसद यूजर की निजी डिटेल्स चुराकर लोगों का बैंक अकाउंट खाली करना होता है। आपको आए ईमेल तो क्या करें?     अगर आपको ऐसा ईमेल आए, तो PIBFactCheck के अनुसार ईमेल का जवाब न दे। भले कोई भी खुद को आयकर विभाग का अधिकारी बताकर संपर्क करे लेकिन उसका जवाब न दें।     इसके अलावा ईमेल मौजूद किसी भी अटैचमेंट को न खोलें। ऐसा इसलिए क्योंकि इनमें वायरस या मैलवेयर हो सकते हैं जो आपके कंप्यूटर को नुकसान पहुंचा सकते हैं।     ईमेल में मौजूद लिंक पर क्लिक न करें। अगर गलती से क्लिक हो भी जाए, तो वहां अपनी बैंक डिटेल्स या क्रेडिट कार्ड जैसी निजी जानकारी बिल्कुल न भरें।     ईमेल में मौजूद मैसेज में दिए गए लिंक को कॉपी करके अपने ब्राउजर में पेस्ट न करें। हैकर्स ऐसे लिंक बनाते हैं जो दिखने में असली लगते हैं, लेकिन वे आपको फर्जी वेबसाइट पर ले जाते हैं।     अपने कंप्यूटर में हमेशा अपडेटेड एंटी-वायरस, एंटी-स्पाइवेयर और फायरवॉल का इस्तेमाल करें। ये आपको अनचाही फाइलों और इंटरनेट पर आपकी जासूसी करने वाले सॉफ्टवेयर से बचाते हैं। ईमेल आए तो ऐसे करें शिकायत अगर आपको भी e-PAN कार्ड जैसा कोई फर्जी ईमेल आता है, तो आप इसकी शिकायत आसानी से कर सकते हैं। इसके लिए आप     संदिग्ध ईमेल या ईमेल में आए वेबसाइट के लिंक को webmanager@incometax.gov.in पर भेज दें।     इसके अलावा CERT-In को सूचना दें। इसकी एक कॉपी incident@cert-in.org.in पर भी भेजें।     इसके तुरंत बाद उस फर्जी ईमेल को अपने इनबॉक्स से डिलीट कर दें।

ईरान के तेल डिपो पर इजरायली हमलों के बाद हवा जहरीली और आसमान काला

तेहरान. इजरायल की ओर से ईरान पर ताबड़तोड़ हमले जारी हैं। इस बीच रविवार को उसने ईरान के तेल डिपो पर भी हमले किए हैं, जिसके कारण वहां की हवा खराब होने की भी शिकायतें हैं। हालात ऐसे हैं कि तेल डिपो पर हमले होने से इतना धुआं उठा कि आसमान काला हो गया है। इसके अलावा हवा में तेल के कण पाए जा रहे हैं। हवा एक तरह से जहरीली हो गई है और ईरान के लोगों को सलाह दी गई है कि मास्क लगाकर निकलें। तेहरान से जो तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं, उनमें दिखता है कि आसमान एकदम काला है। इसके अलावा सड़कों, इमारतों और वाहनों पर भी तेल के धब्बे ही दिख रहे हैं, जिन्हें साफ करना भी मुश्किल है। शहर के गवर्नर ने लोगों से अपील की है कि वे मास्क लगाकर निकलें क्योंकि शहर की हवा प्रदूषित हो गई है और लोग बीमार हो सकते हैं। ईरान के सरकारी मीडिया का कहना है कि देश के कई ऑइल डिपो पर हमले हुए हैं। इनमें शहर के पूर्वोत्तर इलाके में स्थित अघदासेह ऑइल डिपो और शाहरान के ऑइल डिपो शामिल हैं। यही नहीं एक ऑइल रिफाइनरी भी इजरायल के हमले का निशाना बनी है। इजरायल की सेना ने भी पुष्टि की है कि उसने ईरान के तेल डिपो पर हमले किए हैं। उसका कहना है कि ये हमले इसलिए हुए हैं क्योंकि ईरानी सेना इनका इस्तेमाल कर रही थी। यहीं से ईरान की सेना से जुड़े लोगों को तेल सप्लाई हो रही थी। ईरान की FARS न्यूज एजेंसी के अनुसार तेहरान में कुल 4 तेल डिपो और एक ऑइल ट्रांसफर सेंटर पर हमला हुआ है। इसके अलावा तेल टैंकरों के 4 चालक भी एक डिपो पर हमले के दौरान मारे गए हैं। इन तेल डिपो में हुए हमलों के चलते आग भड़क गई, जो घंटों तक जलती रही। इसी के चलते खूब धुआं उठा और आसमान काला नजर आ रहा है। आसपास की इमारतें और इलाके में काली परत जम गई है। हालात ऐसे हैं कि आसमान में तेल से निकला धुआं जम गया और अब वही पिघलकर नीचे गिर रहा है। तेहरान और उसके आसपास की आबादी 1 करोड़ के करीब है। इस तरह इन हमलों ने एक बड़ी आबादी के लिए संकट बढ़ा दिया है। आसमान से टपक रहा तेल, लोगों को गंभीर बीमारियों का खतरा ईरान की रेड क्रेसेंट सोसायटी का कहना है कि इन हमलों के चलते जो तेल की परत धुएं के रूप में आसमान में जम गई है। वह अब धीरे-धीरे नीचे आ रही है। इसके चलते खतरनाक कण हवा में घुल गए हैं और ये स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। यहां तक कि स्किन एलर्जी लोगों को हो रही है और उन्हें सांस लेने तक में परेशानी का सामना करना पड़ा रहा है। तेहरान के लोगों को घरों में ही रहने की सलाह दी गई है। लेबनान में भी हमले, मारे गए 394 लोग इसके अलावा किसी जरूरी काम से निकलने पर मास्क लगाने को कहा गया है। बता दें कि इजरायल ने ईरान के अलावा लेबनान पर भी हमले किए हैं। इन हमलों में 394 लोग मारे गए हैं। इनमें 83 बच्चे भी शामिल हैं। यह हमले तब हो रहे हैं, जबकि लेबनान के साथ इजरायल ने नवंबर 2024 में ही सीजफायर कर लिया था।

कर्नाटक में CM पद की अटकलों के बीच दिल्ली निकले शिवकुमार

नई दिल्ली. कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार के नई दिल्ली दौरे ने विधानसभा के बजट सत्र के बाद राज्य में संभावित नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को फिर से हवा दे दी है। सरकारी और पार्टी सूत्रों के अनुसार, शिवकुमार रविवार शाम कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ कलबुर्गी से राष्ट्रीय राजधानी के लिए रवाना हुए। इससे पहले दिन में, दोनों नेताओं ने जिले के चित्तपुर में 1,069 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं की शुरुआत की थी। मीडिया के साथ साझा किए गए शिवकुमार के यात्रा कार्यक्रम के अनुसार, वह एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए नयी दिल्ली गये हैं और सोमवार सुबह बेंगलुरु लौटेंगे। सिद्धारमैया क्या बोले मुख्यमंत्री पद को लेकर शिवकुमार के साथ जारी खींचतान के बीच, सिद्धरमैया ने शनिवार को कहा था कि अगर कांग्रेस आलाकमान उन्हें अवसर देता है तो वह दो और बजट पेश कर सकते हैं। सिद्धरमैया ने शुक्रवार को राज्य के वित्त मंत्री के रूप में अपना रिकॉर्ड 17वां बजट पेश किया। कहा जा रहा है कि शिवकुमार के समर्थक कुछ विधायक दिल्ली जाकर पार्टी आलाकमान के सामने अपने नेता को विधानसभा के बजट सत्र के बाद मुख्यमंत्री बनाए जाने की इच्छा व्यक्त चुके हैं। यह बजट सत्र 27 मार्च को समाप्त होगा। इस बीच, शिवकुमार 10 मार्च को सभी मंत्रियों, कांग्रेस विधायकों और विधान परिषद सदस्यों के लिए रात्रिभोज का आयोजन करेंगे, जो कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के अध्यक्ष के रूप में उनके छह साल पूरे होने का जश्न होगा। पहले भी दे चुके संकेत शिवकुमार ने मंगलवार को कहा कि वह 'अत्यंत धैर्य' रखे हुए हैं और उन्हें किसी भी प्रकार की क्रांति में शामिल होने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि उन्हें खुद पर विश्वास है और उम्मीद है। कांग्रेस की कर्नाटक इकाई के प्रमुख शिवकुमार ने कहा कि उन्हें न तो स्वार्थ के लिए किसी भी तरह की 'ब्लैकमेलिंग' में दिलचस्पी है और न ही कांग्रेस के लिए किसी तरह की परेशानी पैदा करने में। उन्होंने यह भी कहा कि हालांकि वह मैदान में उतरकर लड़ने वाले व्यक्ति हैं, लेकिन उनकी लड़ाई कभी भी पार्टी के भीतर नहीं होती। शिवकुमार ने एक सवाल के जवाब में कहा था, 'आज तक मैंने मुख्यमंत्री पद के मुद्दे पर कभी कुछ नहीं कहा है। हमारे बीच के मुद्दे, मेरे, मुख्यमंत्री और पार्टी आलाकमान तक ही सीमित हैं। मैंने सिर्फ इतना कहा है कि जो फैसला हुआ है उसमें हम शामिल हैं, इसके अलावा मैंने कभी कुछ नहीं कहा।' उन्होंने यहां पत्रकारों से कहा, 'कुछ लोग कह रहे हैं कि मुख्यमंत्री का पद खाली हो जाएगा, दलितों को यह पद मिलना चाहिए, दूसरों को मिलना चाहिए। ये वही लोग हैं जो मुख्यमंत्री का पद खाली करवाना चाहते हैं, चाहते हैं कि यह पद दलितों और अन्य लोगों को दिया जाए। मैंने इस बारे में कभी कुछ नहीं कहा।'

अब किम जोंग से पंगा लेकर डोनाल्ड ट्रंप ने हजारों सैनिकों की शुरू कर दी मिलिट्री ड्रिल

वासिंगटन. ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बीते 10 दिनों से जारी भीषण युद्ध का कोई अंत फिलहाल नजर नहीं आ रहा है। युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक सैंकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है और जंग का दायरा बढ़ता ही जा रहा है। इस बीच अब अमेरिका ने कुछ ऐसा कर दिया है जिससे उत्तर कोरिया का भड़कना तय है। दरअसल अमेरिका ने सोमवार को दक्षिण कोरिया के साथ मिलकर एक बड़ा सैन्य अभ्यास शुरू किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस अभ्यास में हजारों सैनिक हिस्सा ले रहे हैं, जिससे उत्तर कोरियाई तानाशाह किम जोंग उन का पारा चढ़ सकता है। दक्षिण कोरिया के 'ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ' ने जानकारी देते हुए बताया कि लगभग 18,000 कोरियाई सैनिक इस 'फ्रीडम शील्ड' अभ्यास में हिस्सा लेंगे, जो 19 मार्च तक चलेगा। हालांकि अमेरिकी सेना ने दक्षिण कोरिया में इस अभ्यास में शामिल अपने सैनिकों की संख्या नहीं बताई है इन दोनों सहयोगी देशों का यह संयुक्त अभ्यास ऐसे समय में हो रहा है जब दक्षिण कोरियाई मीडिया में अटकलें लगाई जा रही हैं कि अमेरिका कुछ सैन्य संसाधनों को दक्षिण कोरिया से हटा कर ईरान के खिलाफ लड़ाई में ले जा रहा है। पैट्रियट मिसाइल सिस्टम पश्चिम एशिया भेजे जाने की खबरें इससे पहले 'यूएस फोर्सेज कोरिया' ने पिछले सप्ताह कहा था कि सुरक्षा कारणों से वह सैन्य संसाधनों की विशिष्ट गतिविधियों पर टिप्पणी नहीं करेगी। वहीं दक्षिण कोरियाई अधिकारियों ने भी इस खबर पर टिप्पणी करने से इनकार किया कि कुछ अमेरिकी पैट्रियट मिसाइल सिस्टम और अन्य उपकरण पश्चिम एशिया भेजे जा रहे हैं। उन्होंने कहा था कि इससे सहयोगी देशों की संयुक्त रक्षा रणनीति पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। बौखला सकता है उत्तर कोरिया 'फ्रीडम शील्ड' अभ्यास को लेकर उत्तर कोरिया की ओर से तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है। उत्तर कोरिया लंबे समय से सहयोगी देशों के संयुक्त अभ्यासों को आक्रमण का पूर्वाभ्यास बताता रहा है और इसे अपने सैन्य प्रदर्शनों और हथियार परीक्षणों को बढ़ाने का बहाना बनाता रहा है। अमेरिका एवं दक्षिण कोरिया का कहना है कि ये अभ्यास रक्षा उद्देश्य के लिए होते हैं।

कांग्रेस ने याद दिलाया- इराक की भारत ने की थी 100 करोड़ की मदद

नई दिल्ली. कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों की ओर से मांग की जा रही है कि सरकार को ईरान के पक्ष में खड़ा होना चाहिए। इन दलों का कहना है कि ईरान पर हमला और अयातुल्लाह खामेनेई के कत्ल पर भारत सरकार को सख्त रुख दिखाना चाहिए। ईरान के प्रति संवेदना व्यक्त करनी चाहिए। इसी को लेकर चर्चा की मांग भी विपक्ष कर रहा है। इस बीच कांग्रेस ने 2003 में संसद में लाए गए प्रस्ताव की याद दिलाई है, जब अमेरिका ने ही इराक पर हमला किया था। तब इराक को 100 करोड़ रुपये की मदद की गई थी। इसमें नकद राशि और राशन आदि शामिल था। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने उस प्रस्ताव की प्रति को एक्स पर शेयर किया है। जयराम रमेश ने जो प्रस्ताव शेयर किया, उसमें लिखा था कि हम इराक के खिलाफ अमेरिका की लीडरशिप में हुए हमले की निंदा करते हैं। इराक में सत्ता परिवर्तन के लिए की गई सैनिक कार्रवाई स्वीकार्य नहीं है। युद्ध के फलस्वरूप में इराक के मासूम लोगों, महिलाओं और बच्चों की वेदनाएं एक गंभीर मानवीय मसला है। यह कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की विशेष मंजूरी के बिना की गई है और यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर के खिलाफ है। अत: यह सदन इराक के लोगों के लिए गंभीर संताप और गहन सहानुभूति प्रकट करता है। इसी प्रस्ताव में आगे जानकारी दी गई थी कि नकद और सामग्री के माध्यम से 100 करोड़ रुपये की सहायता देने का फैसला लिया गया है। इसमें विश्व खाद्य कार्यक्रम के लिए 50 हजार मीट्रिक टन गेहूं देना भी शामिल है। यह भी हम विश्वास दिलाते हैं कि आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी। राज्यसभा के प्रस्ताव की प्रति भी जयराम रमेश ने शेयर की है। इसमें लिखा था कि यह सदन तत्काल युद्ध समाप्ति का आह्वान करता है और गठबंधन सेनाओं की शीघ्र वापसी की मांग करता है। यह सदन संयुक्त राष्ट्र से इस बात की भी मांग करता है कि वह इराक की प्रभुसत्ता की रक्षा करे। यह सुनिश्चित करे कि इराक का पुनर्निर्माण संयुक्त राष्ट्र की देखरेख में हो। ईरानी प्रतिनिधि से मिलकर आए थे कांग्रेस के कई नेता गौरतलब है कि ईरान के मसले पर कांग्रेस नेता ऐक्टिव हैं। सांसद इमरान मसूद ने दिल्ली में स्थित ईरान के शीर्ष नेता के प्रतिनिधि से मुलाकात की थी और संवेदनाएं प्रकट की थीं। इसके अलावा ईरानी दूतावास में भी एक श्रद्धांजलि आयोजन हुआ था। इसमें भी कई नेता पहुंचे थे। वरिष्ठ वकील और राज्यसभा के सांसद कपिल सिब्बल भी इस आयोजन में गए थे।

सेंसेक्स 2400 और निफ्टी 700 अंक लुढ़का

नई दिल्ली. अमेरिका-ईरान युद्ध ने भारतीय शेयर बाजार को गहरी चोट दी है. पिछले छह सत्रों में से पांच में बाजार में गिरावट देखने को मिली है. खास बात यह है कि पिछले चार दिनों में ही निवेशकों को 13.46 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है. कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल ने दलाल स्ट्रीट का मूड बुरी तरह बिगाड़ दिया और निवेशकों ने ताबड़तोड़ बिकवाली की. आखिरी कारोबारी सत्र यानी शुक्रवार को भारतीय बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी 50 ताश के पत्तों की तरह ढह गए. कारोबार के आखिरी घंटों में बिकवाली का ऐसा भूचाल आया कि सेंसेक्स 1,097 अंक लुढ़ककर 78,918.90 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी ने भी 315.45 अंक का गोता लगाई और 24,450.45 के स्तर पर सिमट गया. बीएएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप, जो 27 फरवरी को 463.25 लाख करोड़ रुपये था वह 6 मार्च तक घटकर 449.79 लाख करोड़ रुपये रह गया. बाजार विश्‍लेषक मान रहे हैं कि युद्ध लंबा चला तो यह नुकसान और भी गहरा हो सकता है. 52 हफ्ते के निचले स्तर पर कई नामी कंपनियां बाजार में बिकवाली का आलम यह था कि बीएसई 500 की कई दिग्गज कंपनियां अपने 52 हफ्ते के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गईं. इनमें एसीसी लिमिटेड, अंबुजा सीमेंट्स, बर्जर पेंट्स इंडिया, इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड और सोनाटा सॉफ्टवेयर जैसी कंपनियां शामिल हैं. 4,374 शेयरों में से 2,304 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि 258 शेयर अपने साल के सबसे निचले स्तर को छू गए. बैंकिंग सेक्टर में ‘रक्तपात’ बाजार की इस गिरावट में सबसे बड़ी भूमिका बैंकिंग सेक्टर ने निभाई. सेंसेक्स के शेयरों में आईसीआईसीआई बैंक सबसे बड़ा लूजर रहा, जिसके शेयर 3.39% तक गिर गए. इसके अलावा एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक और भारतीय स्टेट बैंक में भी 2% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई. बीएसई बैंकेक्स और बीएसई ऑटो इंडेक्स में भारी बिकवाली रही. अल्ट्राटेक सीमेंट और लार्सन एंड टुब्रो जैसे भारी वजन वाले शेयरों ने भी बाजार को नीचे खींचने में कोई कसर नहीं छोड़ी. हालांकि, इस सुनामी के बीच भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल), रिलायंस इंडस्ट्रीज और सन फार्मास्युटिकल जैसे शेयरों ने थोड़ी मजबूती दिखाई और हरे निशान में बंद हुए. संभलेगा या और गिरेगा बाजार शेयर बाजार विश्‍लेषकों का मानना है कि निफ्टी के लिए अब 24,600 और 24,700 के स्तर बड़ी रेजिस्टेंस बन गए हैं. यदि निफ्टी 24,300 के स्तर से नीचे फिसलता है तो यह तेजी से 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर तक गिर सकता है. युद्ध की अनिश्चितता के बीच निवेशकों को फिलहाल आक्रामक खरीदारी से बचना चाहिए.