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रील के चक्कर में मौत का खेल! दिल्ली स्कॉर्पियो केस से दहली राजधानी, परिवार की इंसाफ की गुहार

नई दिल्ली दिल्ली के द्वारका इलाके में पिछले दिनों हुए दर्दनाक हादसे से हर कोई सन्न है। एक नाबालिग के रील बनाने का जुनून 23 साल के साहिल की जान पर भारी पड़ गया। घटना उस समय हुई जब एक तेज रफ्तार एसयूवी एक टैक्सी और बाइक से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक पर मौजूद साहिल धनेश्वा की मौके पर ही मौत हो गई। दिल्ली के द्वारका इलाके में पिछले दिनों हुए स्कॉर्पियों कांड से हर कोई सन्न है। एक नाबालिग के रील बनाने का जुनून 23 साल के साहिल की जान पर भारी पड़ गया। घटना उस समय हुई जब एक तेज रफ्तार एसयूवी एक टैक्सी और बाइक से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक पर मौजूद साहिल धनेश्वा की मौके पर ही मौत हो गई। इस मामले में अब खुलासे हो रहे हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। जानकारी के मुताबिक जिस एसयूवी से इतना बड़ा हादसा हुआ, वो एक 17 साल का नाबालिग चला रहा था। उसके पास ड्राइविंग लाइसेंस भी नहीं था और गाड़ी पर पहले से ही ओवरस्पीडिंग के कई चालान थे। जानकारी के मुताबिक आरोपी अपनी बहन के साथ मौजूद था और हादसे के वक्त रील बना रहा था। इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें हादसे के वक्त आरोपी अपनी बहन के साथ रील बनाते नजर आ रहा है। मां का क्या आरोप? अब इस मामले में मृक की मां इन्ना माकन ने न्याय की गुहार लगाते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि आरोपी स्टंट मारते हुए गाड़ी चला रहा था। उसे गाड़ी चलानी भी नहीं आती थी और ना ही उसके पास ड्राइविंग लाइसेंस था। उन्होंने बताया कि आरोपी अपनी बहन के साथ स्कॉर्पियो में रील बनाने निकला था और गलत लेन में स्टंट कर रहा था। इस दौरान वह बस के सामने आ गया। उन्होंने आगे कहा कि टक्कर के बाद भी एसयूवी ड्राइवर ने ब्रेक नहीं लगाए। इस हादसे में बस और पास में खड़ी टैक्सी को भारी नुकसान हुआ। इन्ना माकन ने कहा कि रील बनाने के जुनून और रईस मां-बाप की शह ने उनके बेटे की जान ले ली। उन्होंने सवाल उठाया कि बार-बार चालान कटने के बावजूद पिता ने नाबालिग को गाड़ी चलाने से क्यों नहीं रोका। उन्होंने कहा कि यह उस मानसिकता का परिणाम है जहां अमीर लोग समझते हैं कि वे पैसे के दम पर कानून को अपनी जेब में रख सकते हैं। वीडियो में मां ने कहा कि आरोपी स्टंट बनाने के लिए घर से निकला और मेरे बेटे को उड़ा दिया। उन्होंने ये भी बताया कि वह एक सिंगल मदर हैं और उन्होंने 23 साल से अपने बेटे को अकेले ही पाला है। विदेश जाने वाला था साहित साहिल की मां ने कहा, मेरा बेटा बीबीए का छात्र था, लास्ट ईयर में था और उसका आखिरी सेमेस्टर चल रहा था। कुछ ही महीनों में उसे विदेश जाना था। उसका कॉल लेटर आ चुका था और वह खूब मेहनत कर रहा था। मैंने मीडिया को सब कुछ बता दिया है। मैं इस कानून को स्वीकार नहीं करती और न ही कभी करूंगी। चाहे जो भी हो, इसे हम पर थोपा नहीं जा सकता। कानून व्यवस्था जनता के लिए है। इसे जनता पर थोपा नहीं जा सकता। हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। कानूनी कार्रवाई की बात करें तो दिल्ली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। आरोपी नाबालिग को घटना स्थल से ही पकड़ लिया गया था और उसे किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे प्रेक्षण गृह भेज दिया गया। हालांकि, 10 फरवरी 2026 को बोर्ड ने उसकी 10वीं की परीक्षाओं को आधार मानते हुए उसे अंतरिम जमानत दे दी है। पुलिस ने दुर्घटना में शामिल तीनों वाहनों को जब्त कर लिया है और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर मामले की जांच जारी है। कैसे हुआ हादसा घटना 3 फरवरी की है। दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली के द्वारका इलाके में मंदो कारों और एक बाइक की टक्कर में 23 वर्षीय मोटरसाइकिल सवार की मौत हो गई, जबकि एक टैक्सी ड्राइवर घायल हो गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया था कि शुरुआती जांच के अनुसार, एसयूवी गुरुद्वारे की दिशा से आ रही थी, जबकि मोटरसाइकिल विपरीत दिशा से आ रही थी। एसयूवी और मोटरसाइकिल की टक्कर के बाद, एसयूवी सड़क किनारे खड़ी टैक्सी से टकरा गई।

हिमंत सरमा का बंगाल पर कटाक्ष: ‘असली बाबरी मस्जिद नहीं, अब पुतला बनाकर क्या मिलेगा?’

मिर्जापुर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने तृणमूल कांग्रेस के सस्पेंड विधायक हुमायूं कबीर के पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में बाबरी मस्जिद बनाने के ऐलान पर तंज कसा है। प्रस्तावित मस्जिद के बारे में पूछे जाने पर, सरमा ने सोमवार को मिर्जापुर में रिपोर्टर्स से कहा, "यह बाबरी मस्जिद का 'पुतला' (डमी) है, असली (मस्जिद) नहीं। जब असली मस्जिद ही नहीं रही, तो 'पुतला' क्या करेगा?" पिछले बुधवार को, कबीर ने मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में अयोध्या की बाबरी मस्जिद की तरह बनी बहुत चर्चित मस्जिद का कंस्ट्रक्शन शुरू किया। कबीर, जिन्होंने हाल ही में तृणमूल कांग्रेस से निकाले जाने के बाद जनता उन्नयन पार्टी (JUP) बनाई है, ने घोषणा की कि बेलडांगा के रेजिनगर में मस्जिद दो साल में बनकर तैयार हो जाएगी और इस पर लगभग 50-55 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। निर्माण कार्य में भागीदारी दर्शाने के लिए कई समर्थक अपने सिर पर ईंटें ढोते हुए देखे गए। जेयूपी प्रमुख कबीर ने कहा, "विरोध करने वालों से मैं कहना चाहूंगा कि वे हट जाएं। लोगों को अपने-अपने धर्मों का पालन करने तथा मंदिर, गिरजाघर या जो चाहें बनाने की पूरी आजादी है। मैं इस्लाम के नाम पर किसी का विरोध नहीं करूंगा। मेरा उद्देश्य अल्लाह को प्रसन्न करना और अपनी धार्मिक आस्था को निभाना है, किसी पर कुछ थोपना नहीं।" उन्होंने कहा,''इस मस्जिद के निर्माण को रोकने वाली धरती पर कोई ताकत नहीं है। अल्लाह की कृपा से हम दो साल के भीतर इसका निर्माण पूरा कर लेंगे। इसे बनाने में 50-55 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।'' कबीर ने घोषणा की कि बोर्ड परीक्षाएं होने के चलते वह फिलहाल निर्धारित 'बाबरी यात्रा' – नादिया के पलाशी से उत्तर दिनाजपुर जिले के इटाहार तक 235 किलोमीटर की रैली – को स्थगित रखेंगे। 11 एकड़ की जमीन पर बन रही मस्जिद मस्जिद 11 एकड़ की जमीन पर बन रही है और इसमें लगभग 12,000 लोग नमाज पढ़ सकेंगे। कबीर की घोषणा के बाद, एक दक्षिणपंथी ग्रुप, विश्व हिंदू रक्षा परिषद ने उत्तर प्रदेश के लोगों से मुर्शिदाबाद तक मार्च करने की अपील की थी। 6 दिसंबर 1992 को कार सेवकों के एक बड़े ग्रुप ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिरा दी थी। सुप्रीम कोर्ट के 9 नवंबर 2019 के फैसले ने इस मामले को सुलझा दिया, जिसमें विवादित जगह पर एक ट्रस्ट द्वारा राम मंदिर बनाने का फैसला सुनाया गया और मस्जिद के लिए पांच एकड़ की दूसरी जगह दी गई। इस आदेश के बाद अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनकर तैयार हो चुका है। वहीं, उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद बनाने के लिए दी गयी पांच एकड़ जमीन पर अभी कोई काम शुरू नहीं हुआ है।  

मोहम्मद यूनुस की नहीं चली, तारिक रहमान ने संविधान पर दिखाया सख्त रुख

ढाका पड़ोसी देश बांग्लादेश में तारिक रहमान की अगुवाई में आज (मंगलवार, 17 फरवरी को) नई सरकार शपथ लेने जा रही है। उससे पहले तारिक रहमान और उनकी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNS) ने संविधान बदलने से इनकार कर दिया है और मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है, जिसमें कहा गया था कि सभी सांसदों को नई "कॉन्स्टिट्यूशन रिफॉर्म काउंसिल" के सदस्य के तौर पर एक शपथ पत्र पर दस्तखत करने हैं। सांसदों के शपथ ग्रहण समारोह की शुरुआत में ही मोहम्मद यूनुस के इस मनमानीपूर्ण फैसले को BNP ने खारिज कर दिया। BNP नेता सलाउद्दीन अहमद ने तारिक रहमान की मौजूदगी में कहा कि पार्टी प्रमुख तारिक रहमान के निर्देशों के बाद सभी नवनिर्वाचित BNP सांसदों से कहा गया है कि वे कॉन्स्टिट्यूशन रिफॉर्म काउंसिल फॉर्म पर साइन न करें, क्योंकि वे काउंसिल के सदस्य के तौर पर नहीं चुने गए हैं। BNP के इस कदम से यूनुस की उन कोशिशों को बड़ा झटका लगा है, जिसके तहत वह संविधान को बदलना चाह रहे थे। बता दें कि इस काउंसिल का मकसद पार्लियामेंट चुनावों के साथ हुए रेफरेंडम के हिसाब से बांग्लादेश के संविधान को बदलना है। कॉन्स्टिट्यूशन रिफॉर्म काउंसिल संविधान में शामिल नहीं डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, सलाउद्दीन अहमद ने इस पर स्थिति साफ करते हुए कहा कि कॉन्स्टिट्यूशन रिफॉर्म काउंसिल संविधान में शामिल नहीं है। उन्होंने कहा कि काउंसिल को पहले रेफरेंडम के नतीजों के हिसाब से संविधान में शामिल किया जाना चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि उसमें कई जरूरी नियमों की भी जरूरत है, जिसमें यह भी शामिल है कि कॉन्स्टिट्यूशन रिफॉर्म काउंसिल के सदस्यों को शपथ कौन दिलाएगा। BNP MPs ने सिर्फ बांग्लादेश संसद के सदस्य के तौर पर शपथ ली इसके बाद BNP के सांसदों ने सिर्फ बांग्लादेश संसद के सदस्य के तौर पर शपथ ली। BNP का कहना है कि कॉन्स्टिट्यूशन रिफॉर्म काउंसिल के नियम अभी मौजूदा संविधान का हिस्सा नहीं हैं और इस पर संसद में विचार-विमर्श की जरूरत है। बतौर सांसद शपथ लेने तारिक रहमान अपनी बेगम जुबैदा रहमान और बेटी ज़ाइमा रहमान के साथ करीब 10:28 बजे शपथ लेने वाले कमरे में दाखिल हुए। इसके बाद चीफ इलेक्शन कमिश्नर AMM नासिर उद्दीन ने 12 फरवरी को हुए 13वें पार्लियामेंट्री इलेक्शन में चुने गए सांसदों को शपथ दिलाई। ढाका पहुंचे ओम बिरला लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला तारिक रहमान के नेतृत्व में बांग्लादेश में नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए मंगलवार को ढाका पहुंच चुके हैं। विदेश सचिव विक्रम मिसरी और अन्य अधिकारियों के साथ ढाका पहुंचने के बाद, बिरला ने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण क्षण है जो दोनों पड़ोसी देशों के बीच जन-संबंधों और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करेगा। बिरला ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''तारिक रहमान के नेतृत्व में नयी सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए ढाका में उपस्थित होना मेरे लिए सम्मान की बात है। यह एक महत्वपूर्ण क्षण है जो हमारे दोनों देशों के बीच जन-संबंधों और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करेगा।"  

SC में अनोखी टिप्पणी: ‘ये तो कैलासा जैसा है’, असली देश पर सवाल, कोर्टरूम में छाया हल्का माहौल

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट में एक जमानत याचिका के दौरान अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई जब जस्टिस संदीप मेहता ने वानुअतु देश के अस्तित्व पर सवाल उठाते हुए उसकी तुलना भगोड़े नित्यानंद के 'कैलासा' से कर दी। जानिए क्या है पूरा मामला और क्यों खारिज हुई आरोपी की जमानत। मंगलवार को भारत के सुप्रीम कोर्ट में एक जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बेहद हैरान करने वाला वाकया सामने आया। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित एक वास्तविक देश वानुअतु के अस्तित्व पर ही सवाल उठा दिया। क्या है पूरा मामला? यह मामला भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी), 468 (जालसाजी) और 406 (विश्वासघात) के तहत आरोपी एक विदेशी नागरिक की जमानत याचिका से जुड़ा था। आरोपी खुद को वानुअतु का नागरिक बता रहा था। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, जब आरोपी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने कोर्ट को बताया कि उनका मुवक्किल वानुअतु का रहने वाला है, तो जस्टिस मेहता ने आश्चर्य जताते हुए उनसे पूछा कि क्या वह कभी वहां गए हैं? कैलासा से की गई तुलना जस्टिस मेहता ने टिप्पणी करते हुए कहा- क्या आप वहां कभी गए हैं? ऐसा कोई देश नहीं है… यह देश 'कैलासा' जैसा है। गौरतलब है कि 'कैलासा' एक स्वयंभू हिंदू राष्ट्र है जिसे भगोड़े भारतीय गुरु नित्यानंद ने 2019 में बसाने का दावा किया था। इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त नहीं है। वहीं, इसके विपरीत वानुअतु एक वास्तविक संप्रभु राष्ट्र है, जो संयुक्त राष्ट्र (UN) और कॉमनवेल्थ का सदस्य है। भौगोलिक भ्रम और कोर्ट की टिप्पणी बहस के दौरान जब वकील सिद्धार्थ दवे से पूछा गया कि यह देश कहां है, तो उन्होंने जवाब दिया कि यह कैरिबियन में कहीं है। हालांकि, भौगोलिक रूप से यह जानकारी भी गलत थी, क्योंकि वानुअतु दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित है, न कि कैरिबियन में। कोर्ट को जब यह जानकारी दी गई कि आरोपी ने अलग-अलग समय पर कई पहचानों का इस्तेमाल किया है, तो जस्टिस मेहता ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा- हमें इस व्यक्ति पर शोध करने पर विचार करना चाहिए। अंततः आरोपी की जमानत याचिका पर कोर्ट के कड़े रुख को देखते हुए इसे वापस ले लिया गया और कोर्ट ने भी इसे खारिज कर दिया।  

जमीन डील केस में राहत: अजित पवार के बेटे को क्लीन चिट, अब दो अफसरों पर लटकी तलवार

मुंबई महाराष्ट्र के पूर्व डिप्टी सीएम अजित पवार के बेटे पार्थ पवार को 1800 करोड़ रुपये के जमीन सौदे के मामले में क्लीन चिट मिल गई है। अजित पवार का बीते महीने ही प्लेन क्रैश में निधन हो गया था। इसके बाद राज्य में हुए नगर परिषद और पंचायत समिति के चुनावों में एनसीपी को बड़ी जीत मिली है। इस बीच अजित पवार के बेटे के लिए भी राहत भरी खबर आई है। इस मामले की जांच के लिए आईएएस अधिकारी विकास शंकर खरागे के नेतृत्व में जांच समिति गठित हुई थी। इस पैनल ने 1000 पन्नों की अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी है। इसमें पार्थ पवार को क्लीन चिट दी गई है, जबकि जमीन सौदे की प्रक्रिया में लापरवाही के लिए दो सरकारी अधिकारियों के खिलाफ ऐक्शन की सिफारिश की गई है। इस मामले में आरोप था कि पुणे के एक पॉश इलाके में करीब 1800 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन महज 300 करोड़ रुपये में खरीदी गई। इस जमीन सौदे में अजित पवार के बेटे का नाम भी आया था। इस केस की जांच करने वाले अधिकारी विकास शंकर खरागे फिलहाल राजस्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने इस केस की जांच रिपोर्ट विभाग के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को सौंप दी। अब इस रिपोर्ट को सीएम देवेंद्र फडणवीस के समक्ष रखा जाना है। यह मामला कुल 41 एकड़ जमीन का है, जो पुणे के तेजी से विकसित इलाके मुंधवा की है। सूत्रों का कहना है कि इस रिपोर्ट में सीधे तौर पर ऐसा कोई प्रमाण नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि पार्थ पवार ने लैंड डील में कोई आपराधिक गलती की थी। इसलिए उन्हें क्लीन चिट दी जाती है। हालांकि इस रिपोर्ट में कुछ प्रक्रिया से जुड़ी खामियां पाई गई हैं। इसके लिए दो सरकारी अधिकारियों सूर्यकांत येवाले और रविंद्र तारू के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है। येवाले फिलहाल हवेली तहसील के तहसीलदार हैं। इसके अलावा रविंद्र असिस्टेंट रजिस्ट्रार के पद पर तैनात हैं। दोनों ही अधिकारियों को इस लैंड डील पर सवाल उठने के बाद सस्पेंड कर दिया गया था और फिलहाल वे न्यायिक हिरासत में हैं। 1800 करोड़ की डील और 300 करोड़ का सौदा, किसके नाम पर इस मामले में विवाद यह था कि जमीन का मूल्य 1800 करोड़ रुपये बताया गया था, जबकि इसकी खरीद सिर्फ 300 करोड़ में हुई। यह डील Amedia Enterprises LLP के नाम से हुई थी। इस फर्म में मुख्य हिस्सेदारी पार्थ पवार की ही है, जबकि उनके साथ चचेरे भाई दिग्विजय भी इसमें हिस्सेदार हैं। यही नहीं आरोप यह भी लगे थे कि इस डील में स्टांप ड्यूटी भी नहीं वसूली गई, जो 21 करोड़ रुपये बनती थी। पार्थ पवार खुद राजनीति में बहुत दखल नहीं रखते हैं, लेकिन उनके पिता डिप्टी सीएम थे। इसके चलते वह भी आरोपों के घेरे में आए थे।  

चलती ग्रैंड ट्रंक एक्सप्रेस में लगी आग, नई दिल्ली से चेन्नई जा रही ट्रेन में हड़कंप

 नागपुर नई दिल्ली से चेन्नई जा रही ग्रैंड ट्रंक एक्सप्रेस में उस समय हड़कंप मच गया, जब ट्रैक पर दौड़ रही ट्रेन में आग लग गई। जीटी एक्सप्रेस ( ट्रेन नंबर 12616) के स्लीपर कोच में मंगलवार दोपहर आग लग गई। यह घटना सेंट्रल रेलवे के नागपुर डिविजन में सिंधी और तुलजापुर स्टेशनों के बीच हुई। ट्रेन चल रही थी तभी SLR कोच से धुआं निकलता देखा गया. धुआं देखते ही ट्रेन को सुरक्षा के मद्देनजर तुरंत रोक दिया गया। यात्रियों को सुरक्षित रखा गया और किसी को चोट नहीं आई है। रेलवे स्टाफ ने तेजी से कार्य करते हुए प्रभावित कोच को ट्रेन से अलग कर दिया। इसके साथ ही स्थानीय फायर ब्रिगेड को भी बुलाया गया। रेलवे कर्मचारियों ने शुरुआती तौर पर कोच में उपलब्ध फायर एक्सटिंग्विशर का इस्तेमाल करके आग पर काबू पाया। प्रारंभिक जांच में आग लगने का सही कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है। रेलवे अधिकारी मामले की आगे जांच कर रहे हैं। सेंट्रल रेलवे के प्रवक्ता संजय मुले ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि ट्रेन 12616 नई दिल्ली-चेन्नई (तंबरम) ग्रांट ट्रंक एक्सप्रेस सुबह नागपुर से रवाना हुई थी। वर्धा के सिंधी रेलवे स्टेशन की ओर जाते समय सुबह 11:09 बजे ट्रेन के आखिरी गार्ड कोच में धुआं देखा गया। उन्होंने बताया कि ट्रेन को सिंधी-तुलजापुर खंड पर रोक दिया गया, प्रभावित डिब्बे को तुरंत अलग कर दिया गया और दमकल कर्मियों को बुलाया गया। अधिकारी ने बताया कि ट्रेन और उस डिब्बे में सवार सभी यात्री सुरक्षित हैं. विस्तृत जांच के बाद आग लगने का कारण पता चलेगा। अधिकारी ने बताया कि प्रभावित डिब्बे के बिना ट्रेन कुछ समय बाद रवाना होगी।

शक से शुरू हुआ झगड़ा बना खौफनाक अपराध: हत्या के बाद लाश से हैवानियत, इंदौर कांड से दहशत

नई दिल्ली प्यार, शादी का दवाब, शक, हत्या, लाश से रेप और फिर आत्मा से मुलाकात की कोशिश। इंदौर में एमबीए की एक स्टूडेंट के साथ हुई दरिंदगी और उसके कातिल की हैवानियत ने सबको झकझोर दिया है। पुलिस की पूछताछ में आरोपी ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उसने बताया है कि किस तरह शादी के दबाव और शक के उपजे गुस्से में उसने गर्लफ्रेंड को बेरहमी से मार डाला और फिर बार-बार लाश के साथ रेप करता रहा। बाद में उसने तंत्र-मंत्र के जरिए गर्लफ्रेंड की आत्मा से बात करने की कोशिश की थी। मंदसौर के पीयूष धामनोदिया को मां-बाप ने इंदौर में पढ़लिखकर अपना करियर बनाने के लिए भेजा था। उसके पिता एक किराना व्यापारी हैं। एक बहन और एक भाई जो पढ़ाई कर रहे हैं। इंदौर में पीयूष एक निजी कॉलेज में पढ़ता था, जहां उसकी मुलाकात द्वारकापुरी की रहने वाली एक एमबीए स्टूडेंट से हुई। डीसीपी कृष्णलाल चंदानी ने बताया कि दोनों करीब एक साल से रिलेशन में थे। दोनों शादी करना चाहते थे पर लड़के के घरवाले इसके लिए तैयार नहीं थे। इस बात पर दोनों के बीच झगड़े होते थे। डीसीपी ने कहा कि आरोपी ने यह भी कहा है कि उसे शक था कि डेटिंग ऐप के जरिए वह दूसरे लड़कों के साथ संपर्क में थी। आधार कार्ड बनवाने निकली लड़की हो गई थी लापता मृतक लड़की 10 फरवरी को घर से यह कहकर निकली थी कि आधार कार्ड अपडेट कराने जा रही है। लेकिन वह लौटकर नहीं आई। लड़की के परिजनों ने काफी तलाश के बाद 11 फरवरी को पंढरीनाथ थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। तलाश के बीच 13 फरवरी को द्वारकापुरी के ही अंकल वाली गली में उस कमरे से उठी दुर्गंध ने लड़की की गुमशुदगी का राज खोला। पड़ोसियों की शिकायत के बाद पुलिस जब मौके पर पहुंची तो 25 वर्षीय लड़की की निर्वस्त्र लाश देखकर हैरान रह गई। शरीर को चाकू से गोदा गया था। उधर मुंबई में गर्लफ्रेंड की आत्मा बुलाने की कोशिश में जुटा था पीयूष इधर, पुलिस लड़की हत्यारे की तलाश में जुटी थी तो दूसरी तरफ इंदौर से भागकर मुंबई पहुंचा पीयूष 'जादू-टोने' में जुट गया था। यूट्यूब से कथित तौर पर कुछ 'तंत्र-मंत्र' सीखकर वह उस लड़की की आत्मा को बुलाना चाहता था। जिंदा रहते उसने जिसकी 'ना' नहीं सुन सका उसकी आत्मा को अब वह अपनी बात समझाना चाहता था। अगले ही दिन पकड़ा गया आरोपी हत्या के बाद आरोपी ने पीड़िता की लाश के साथ कई बार संबंध बनाए और अपनी इस गंदी हरकत को उसने लड़की के मोबाइल में कैद किया। आरोपी ने गिरफ्तारी के बाद बताया कि उसने उस मोबाइल को तोड़कर चलती ट्रेन से रास्ते में कहीं फेंक दिया। पुलिस अभी इस मोबाइल को बरामद नहीं कर पाई है, जिसमें कई तरह के सबूत हो सकते हैं। पुलिस ने आरोपी का लोकेशन ट्रेस कर उसे 14 फरवरी को गिरफ्तार कर लिया था। वह 18 फरवरी तक पुलिस रिमांड पर है। डेटिंग ऐप्स की वजह से हुआ झगड़ा आरोपी का कहना है कि पीड़िता ने उसे बताया था कि वह कुछ और लड़कों के साथ भी उसके अफेयर रहे हैं, लेकिन उसने वादा किया था अब उसके साथ ही रहेगी। लेकिन हाल ही में उसने देखा कि उसके मोबाइल में डेटिंग ऐप है और वह लड़कों से बातचीत करती है। उसे शक हो गया कि प्रेमिका उसे धोखा दे रही है और इस बात से वह बहुत गुस्से में था। हत्या वाले दिन दिन क्या-क्या किया उसने पीयूष ने पुलिस पूछताछ में बताया कि उस दिन जब वह पीड़िता को अपने साथ कमरे पर लेकर पहुंचा तो उसे बहुत भूख लगी थी। उसने लड़की के लिए मैगी बनाई। मैगी खिलाने के बाद वह उससे संबंध बनाना चाहता था। लेकिन लड़की ने इससे इनकार कर दिया। लड़की ने उसे बताया कि उसके पीरियड्स चल रहे हैं। उसने जबरन उसने छात्रा से संबंध बनाए। छात्रा का गला दबाकर दोबारा ज्यादती की। इस दौरान अप्राकृतिक कृत्य भी किया। उसने लड़की के हाथ-पैर बांध दिए थे और रस्सी से गला घोंट दिया। इसके बाद वह बीयर पीने चला गया। लौटा तो उसे लगा कि लड़की के प्राण बाकी हैं तो उसने चाकू से 18 बार गोद डाला। इसके बाद भी वह लाश के साथ बार-बार संबंध बनाता रहा। छात्रा के मोबाइल से वीडियो बनाया। बाद में कमरे में लाश को बंद कर वह मुंबई भाग गया। साइको जैसी कर रहा हरकत पुलिस सत्रों के मुताबिक पूछताछ के दौरान पीयूष कभी हंसने लगता है तो कभी रोने लगता है। वह लगातार साइको जैसी हरकत कर रहा है। वह खुद को साइको साबित करना चाहता है।

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: इस्तीफा नामंजूर करना कानून के खिलाफ, बंधुआ मजदूरी की तरह माना

तिरुवनंतपुरम केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में एक मामले की सुनवाई स्पष्ट किया है कि किसी कर्मचारी द्वारा इस्तीफा देने की स्थिति में कंपनी को उसे स्वीकार करना ही होगा। हाईकोर्ट ने इस दौरान कहा है कि अगर कोई एंप्लॉयर कर्मचारी का इस्तीफा स्वीकार करने से इनकार करता है तो यह ‘बंधुआ मजदूरी’ के समान माना जाएगा। बार एंड बेंच की की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले में अहम टिप्पणी करते हुए जस्टिस एन नागरेश ने कहा कि जब कोई कर्मचारी सेवा शर्तों के अनुसार इस्तीफा देता है तो नियोक्ता का कर्तव्य है कि वह उसे स्वीकार करे, बशर्ते अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन ना हुआ हो। अदालत ने साफ किया कि इस्तीफा सिर्फ कुछ खास हालात में ही रोका जा सकता है, जैसे नोटिस पीरियड पूरा ना होना, गुस्से में दिया गया इस्तीफा जिसे वापस लिया जा सकता हो, गंभीर अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित हो या संस्था को बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ हो। कोर्ट ने कहा कि मौजूदा मामले में ऐसी कोई स्थिति नहीं थी। कंपनी द्वारा वित्तीय संकट का हवाला देकर कंपनी सेक्रेटरी का इस्तीफा ना मानना कानूनी रूप से सही नहीं है। क्या था मामला? दरअसल यह मामला ट्राको केबल कंपनी लिमिटेड नाम की एक संस्था से जुड़ा था। याचिकाकर्ता ग्रीवस जॉब पनक्कल कंपनी में सेक्रेटरी के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने बताया कि अक्टूबर 2022 से उनका वेतन नियमित नहीं मिल रहा था, जिससे वे अपना और अपनी बीमार मां का खर्च नहीं उठा पा रहे थे। उन्होंने मार्च 2024 में इस्तीफा देकर सेवा से मुक्त करने का अनुरोध किया। हालांकि कंपनी बोर्ड ने यह कहकर इस्तीफा खारिज कर दिया कि उनकी भूमिका जरूरी है और कंपनी आर्थिक संकट में है। प्रबंधन ने उन्हें ड्यूटी पर लौटने के निर्देश दिए और अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी। अंत में पनक्कल ने इन नोटिस को रद्द करने और इस्तीफा स्वीकार करने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने पाया कि कंपनी सेक्रेटरी की नियुक्ति कंपनी अधिनियम 2013 के तहत रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज में दर्ज होती है। जब तक कंपनी जरूरी फॉर्म दाखिल नहीं करती, तब तक कर्मचारी दूसरी जगह नौकरी नहीं कर सकता। इससे याचिकाकर्ता के रोजगार के अवसर बाधित हो रहे थे। अनुच्छेद 23 का उल्लंघन कोर्ट ने इस्तीफा अस्वीकार करने और अनुशासनात्मक नोटिस को रद्द कर दिया। साथ ही कंपनी को दो महीने के भीतर इस्तीफा स्वीकार कर सेवा से मुक्त करने और वेतन बकाया, अवकाश समर्पण लाभ तथा अन्य देय राशि का भुगतान जल्द करने का निर्देश दिया। जस्टिस नागरेश ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा, “वित्तीय समस्या या आपात स्थिति के नाम पर किसी कंपनी सेक्रेटरी को उसकी इच्छा और सहमति के खिलाफ काम करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।” अदालत ने यह भी कहा कि कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी देना उसके इस्तीफा देने के अधिकार का उल्लंघन है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस्तीफा स्वीकार ना करना संविधान के अनुच्छेद 23 के तहत प्रतिबंधित बंधुआ मजदूरी जैसा है।

F-5 वाला राफेल और भारत-फ्रांस डील: मैक्रों के दौरे के पीछे की वजह क्या है?

नई दिल्ली  फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भारत दौरे पर आ चुके हैं. इमैनुएल मैक्रों आज यानी मंगलवार को मुंबई पहुंचे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ आज उनकी मुलाकात और बैठक होगी. इमैनुएल मैक्रों और मोदी की मुलाकात से रक्षा और तकनीक की दुनिया में हलचल मचने वाली है. इमैनुएल मैक्रों चार दिवसीय भारत यात्रा पर हैं. इसका मुख्य मकसद भारत-फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना है. मगर उनकी यात्रा सबसे बड़ा फोकस है 3.25 लाख करोड़ रुपये की महाडील. जी हां, भारत और फ्रांस के बीच 3.25 लाख करोड़ रुपए की राफेल वाली मेगा डिफेंस डील होने वाली है. यह डील भारतीय वायुसेना को 114 आधुनिक राफेल लड़ाकू विमानों से लैस करेगी. इमैनुएल मैक्रों की यह यात्रा न केवल डिप्लोमेसी का प्रतीक है, बल्कि भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ मुहिम को गति देने वाली सौगात भी है. अब सवाल है कि आखिर यह डील इतनी बड़ी क्यों है, और ‘F-5 वाला राफेल’ क्या बला है? इमैनुएल मैक्रों की यात्रा का बैकग्राउंड देखें तो भारत और फ्रांस के रिश्ते पहले से ही मजबूत हैं. 2016 में 36 राफेल जेट्स की पहली डील के बाद दोनों देशों ने कई प्रोजेक्ट्स पर हाथ मिलाया. मसलन स्कॉर्पीन पनडुब्बियां. अब 2026 में यह यात्रा इसलिए अहम है क्योंकि चीन की बढ़ती आक्रामकता और पाकिस्तान की हरकतों के बीच भारत अपनी हवाई ताकत को दोगुना करना चाहता है. इमैनुएल मैक्रों भी मानते हैं कि भारत फ्रांस का सबसे बड़ा साझेदार है. ऑपरेशन सिंदूर में भारत राफेल की ताकत का सबूत देख चुका है. यही कारण है कि इमैनुएल मैक्रों की यात्रा का मुख्य फोकस राफेल डील ही है. यह डील न सिर्फ रक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि भारत-फ्रांस साझेदारी की गारंटी भी बनेगी. भारत-फ्रांस के बीच बड़ी डील यह भारत की आजादी के बाद की सबसे बड़ी हथियार खरीद है. रक्षा मंत्रालय की डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने हाल ही में राफेल डील को हरी झंडी दी. डील के तहत फ्रांस की दसॉल्ट एविएशन कंपनी से 114 राफेल मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) खरीदे जाएंगे. इनमें से 18 विमान सीधे फ्रांस से ‘ऑफ-द-शेल्फ’ खरीदे जाएंगे यानी तैयार माल की तरह. बाकी 96 विमान भारत में ही बनाए जाएंगे. इसकी कुल लागत करीब 30 अरब यूरो (लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये) है. इसमें विमानों के अलावा रखरखाव, ट्रेनिंग, लॉजिस्टिक्स और मिसाइल सिस्टम जैसे स्कैल्प भी शामिल हैं. यह डील भारतीय वायुसेना की ताकत को 50 फीसदी तक बढ़ा देगी, क्योंकि वर्तमान में 36 राफेल ही हैं. राफेल डील में क्या अहम? इस डील में एक चीज सबसे अहम है, वह है राफेल का एफ-5 वर्जन. जी हां, राफेल एक फ्रेंच लड़ाकू विमान है. यह ‘मल्टी-रोल’ वाला विमान है. जल, थल और नभ तीनों जगह कारगर. राफेल के अलग-अलग वर्जन हैं. जैसे F3, F4. अब नई डील में F4 और F5 वेरिएंट्स आ रहे हैं. भारत-फ्रांस के बीच राफेल डील की सबसे खास बात ये है कि इनमें से 24 विमान ‘सुपर राफेल’ होंगे. इन एडवांस्ड जेट को ही F-5 वर्जन कहा जा रहा है. अभी भारत के पास जो राफेल हैं, वे F-3 वेरिएंट के हैं. ये राफेल 4.5 जेनरेशन फाइटर माने जाते हैं. अभी जो डील होने जा रही है, इनमें ज्यादातर राफेल F-4 वर्जन के होंगे. यह अधिक एडवांस सिस्टम और अपग्रेड टेक्नोलॉजी के साथ आएंगे. जबकि F-5 राफेल एक ‘सुपर अपग्रेड वर्जन’ है. यह छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों जैसा होगा. क्या है एफ-5 वाला राफेल? इसमें एडवांस्ड सेंसर, स्टील्थ फीचर्स (जो रडार से छिप जाएं), AI-बेस्ड ऑटोनॉमी (खुद फैसले लेना) और ‘किल-वेब’ तकनीक है, जो कई विमानों को एक साथ जोड़कर दुश्मन को निशाना बनाती है. F5 में नए इंजन, बेहतर मिसाइलें और ड्रोन इंटीग्रेशन होगा. भारत को 24 ‘सुपर राफेल’ भी मिलेंगे, जो F5 के प्रोटोटाइप हैं. फ्रांस इसे 2030 तक डिलीवर करेगा. यह डील सिर्फ हथियारों की नहीं, बल्कि स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप की है. भारत को राफेल डील के तहत टेक्नोलॉजी ट्रांसफर मिलेगा, जिससे हम खुद राफेल जैसे विमान बना सकेंगे. आज क्या-क्या होगा?     भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज यानी 17 फरवरी 2026 को मुंबई जा रहे हैं. यहां वे फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मिलेंगे. पीएम मोदी के निमंत्रण पर राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों 17-19 फरवरी 2026 तक भारत के ऑफिशियल दौरे पर हैं. वे भारत में हो रहे एआई इम्पैक्ट समिट में हिस्सा लेंगे और मुंबई में प्रधानमंत्री के साथ द्विपक्षीय बैठक भी करेंगे. यह राष्ट्रपति मैक्रों का भारत का चौथा और मुंबई का पहला दौरा होगा.     17 फरवरी को दोपहर करीब 3:15 बजे दोनों नेता मुंबई के लोक भवन में द्विपक्षीय मीटिंग करेंगे. इस मीटिंग के दौरान, वे भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी में हुए विकास की समीक्षा करेंगे. उनकी बातचीत रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने और इसे नए और उभरते क्षेत्र में और डाइवर्सिफाई करने पर फोकस होगी. प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों क्षेत्रीय और वैश्विक इंपॉर्टेंस के मुद्दों पर भी विचारों का लेन-देन करेंगे.     शाम करीब 5:15 बजे, दोनों नेता भारत-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन 2026 का उद्घाटन करेंगे और दोनों देशों के बिजनेस लीडर्स, स्टार्ट-अप्स, रिसर्चर्स और दूसरे इनोवेटर्स की एक मीटिंग को संबोधित करेंगे. मैक्रों के दौरे पर क्या-क्या होगा? इस दौरे के दौरान दोनों नेता हॉरिजोन 2047 रोडमैप में बताए गए कई क्षेत्रों में आपसी सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा करेंगे. इसके अलावा, आपसी फायदे के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे, जिसमें इंडो-पैसिफिक में सहयोग भी शामिल है. दोनों नेता भारत-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन का उद्घाटन करने के लिए मुंबई में उपस्थित होंगे. इस इवेंट को दोनों देशों में पूरे साल 2026 तक मनाया जाएगा. राष्ट्रपति मैक्रों 19 फरवरी को नई दिल्ली में एआई इम्पैक्ट समिट में हिस्सा लेंगे. और क्या-क्या होने की संभावना?     मोदी और मैक्रो की द्विपक्षीय बैठक के बाद करीब एक दर्जन समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना     रक्षा, व्यापार, कौशल विकास, स्वास्थ्य और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्र में होगा समझौता     मुंबई में दोनों नेता भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष का संयुक्त उद्घाटन करेंगे, जो 2026 तक दोनों देशों में मनाया जाएगा.     भारत और फ्रांस के बीच रक्षा, टेक्नोलॉजी और व्यापार संबंधों को मिलेगा बढ़ावा     भारत सरकार ने हाल ही में फ्रांस से … Read more

भारत-UK ट्रेड डील अप्रैल से प्रभावी होने के संकेत, ज्यादातर भारतीय उत्पादों पर खत्म होगी ड्यूटी

नई दिल्ली  भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) इस साल अप्रैल 2026 से लागू होने के लिए पूरी तरह तैयार है. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने पुष्टि की है कि इस समझौते के लागू होने से न केवल द्विपक्षीय व्यापार में ऐतिहासिक वृद्धि होगी, बल्कि भारतीय श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए ब्रिटेन के दरवाजे पूरी तरह खुल जाएंगे. 99% भारतीय उत्पादों पर जीरो-ड्यूटी इस ऐतिहासिक समझौते की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि ब्रिटेन को निर्यात किए जाने वाले 99 प्रतिशत भारतीय उत्पादों पर अब कोई सीमा शुल्क (Customs Duty) नहीं लगेगा. इससे भारत के उन क्षेत्रों को जबरदस्त फायदा होगा जहां बड़ी संख्या में लोग काम करते हैं. विशेष रूप से टेक्सटाइल (कपड़ा), रत्न एवं आभूषण, चमड़ा, फुटवियर, खिलौने, और समुद्री उत्पादों के निर्यातकों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है. अब ये उत्पाद ब्रिटिश बाजार में वियतनाम और बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले ज्यादा सस्ते और प्रतिस्पर्धी होंगे. IT सेक्टर और पेशेवरों को बड़ी राहत व्यापार के साथ-साथ, सेवाओं के क्षेत्र में भी बड़ी जीत हासिल हुई है. दोनों देशों ने 'डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन' (DCC) पर हस्ताक्षर किए हैं. इसका मतलब यह है कि जो भारतीय आईटी पेशेवर या अन्य कर्मचारी अस्थायी रूप से (3 साल तक) ब्रिटेन में काम करने जाएंगे, उन्हें और उनके नियोक्ताओं को वहां 'सोशल सिक्योरिटी' टैक्स नहीं देना होगा. इससे भारतीय कंपनियों की लागत कम होगी और उनके कर्मचारी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे. व्हिस्की और कारों पर घटेगा आयात शुल्क भारत ने भी ब्रिटिश उत्पादों के लिए अपने बाजार खोले हैं. भारत में बेहद लोकप्रिय स्कॉच व्हिस्की पर आयात शुल्क 150% से घटाकर तत्काल 75% कर दिया जाएगा, जिसे 2035 तक धीरे-धीरे 40% तक लाया जाएगा. इसी तरह, ब्रिटिश कारों पर लगने वाले भारी-भरकम शुल्क को अगले 5 वर्षों में घटाकर 10% तक लाया जाएगा. बदले में, भारतीय इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों को ब्रिटेन के बाजार में विशेष कोटा मिलेगा. आर्थिक लक्ष्य और भविष्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने मई 2025 में इस डील को अंतिम रूप दिया था. वर्तमान में यह समझौता ब्रिटिश संसद में अनुसमर्थन की प्रक्रिया में है. दोनों देशों का लक्ष्य है कि वर्तमान के $60 बिलियन के द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक $100 बिलियन के पार पहुँचाया जाए. विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत को एक वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के सपने को गति प्रदान करेगा.