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पत्रकार हत्याकांड में गुरमीत राम रहीम HC से बरी

नई दिल्ली. पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने शनिवार को सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को बरी कर दिया है। यह फैसला विशेष सीबीआई (CBI) अदालत द्वारा राम रहीम को दोषी ठहराए जाने और उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के करीब सात साल बाद आया है। यह अहम फैसला मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति विक्रम अग्रवाल की खंडपीठ ने 2019 की सजा को चुनौती देने वाली अपीलों पर सुनवाई करते हुए सुनाया। अदालत ने राम रहीम की सजा को रद्द करते हुए उन्हें इस मामले के सभी आरोपों से मुक्त कर दिया है। जेल में ही रहेगा गुरमीत राम रहीम हालांकि अन्य तीन दोषियों कुलदीप, निर्मल सिंह और किशन लाल की सजा बरकरार रखी गई है। इन सभी को इस मामले में सीबीआई अदालत ने दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। गुरमीत राम रहीम व अन्य दोषियों ने 2019 के फैसले के खिलाफ अपील दायर की थी। हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े साक्ष्यों और दलीलों पर विस्तृत विचार करते हुए डेरा प्रमुख के खिलाफ आरोपों को पर्याप्त रूप से साबित न होने के आधार पर उसे संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का आदेश दिया। वह फिलहाल रोहतक की सुनारिया जेल में दो साध्वियों के साथ दुष्कर्म मामले में 20 साल की सजा काट रहा है। यानी इस मामले में बरी होने के बावजूद, राम रहीम बलात्कार सहित अन्य मामलों में मिली सजा के कारण फिलहाल जेल में ही रहेगा। क्या था पूरा मामला? अक्टूबर 2002 में सिरसा में अपना स्थानीय समाचार पत्र 'पूरा सच' चलाने वाले पत्रकार रामचंद्र छत्रपति को उनके घर के बाहर गोली मार दी गई थी, जिससे बाद में उनकी मौत हो गई थी। इस हत्याकांड ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा था। दरअसल, पत्रकार छत्रपति ने अपने अखबार में डेरा प्रमुख के खिलाफ लगे आरोपों से संबंधित खबरें प्रमुखता से छापी थीं। इन रिपोर्टों में एक ऐसा गुमनाम पत्र भी शामिल था जिसमें डेरा के भीतर साध्वियों के यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए गए थे। इसी के बाद राम रहीम के खिलाफ जांच का दायरा बढ़ा था। शुरुआती जांच के बाद यह हाई-प्रोफाइल मामला सीबीआई को सौंप दिया गया था। जनवरी 2019 में पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने राम रहीम और अन्य को हत्या की साजिश रचने का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, हाईकोर्ट के इस फैसले पर पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के 46 वर्षीय बेटे अंशुल छत्रपति ने गहरी निराशा व्यक्त की है और इसे एक बड़ा झटका करार दिया है। अंशुल ने स्पष्ट किया कि वे हार नहीं मानेंगे। उन्होंने कहा- हम शीर्ष अदालत का रुख करेंगे। हमारे पास कोई अन्य विकल्प नहीं है। हमारी कानूनी लड़ाई जारी रहेगी और हम सभी कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करेंगे। अदालत द्वारा अन्य आरोपियों की सजा बरकरार रखने पर अंशुल ने कहा- हमारी लड़ाई डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह के खिलाफ थी। मेरे पिता की दुश्मनी उन शूटरों या डेरा मैनेजर से नहीं थी। उस समय मेरे पिता केवल राम रहीम की ही पोल खोल रहे थे। अगर मुख्य आरोपी को ही बरी कर दिया गया है, तो निश्चित रूप से यह हमारे लिए बहुत बड़ा झटका है। 25 साल का संघर्ष अपनी लंबी कानूनी लड़ाई को याद करते हुए उन्होंने कहा- पिछले लगभग 25 वर्षों से मैं यह कानूनी लड़ाई लड़ रहा हूं। इतने प्रभावशाली व्यक्ति से टक्कर लेना कभी आसान नहीं होता। ट्रायल शुरू होने से पहले भी हमने ऐसे झटके सहे थे। हालांकि निचली अदालत ने हमें राहत दी थी, लेकिन अब हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ हम अपनी लड़ाई आगे भी जारी रखेंगे; मेरी उम्मीदें अभी भी कायम हैं। 

रूसी तेल से और बैन हटा सकता है US

नई दिल्ली. वैश्विक कूटनीति और ऊर्जा बाजार में पिछले कुछ दिनों में एक बड़ा और हैरान करने वाला बदलाव देखने को मिला है। हमेशा आक्रामक रुख अपनाने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने अचानक रूसी तेल पर लगे प्रतिबंधों में ढील दे दी। इसके साथ ही, बिना किसी शोर-शराबे के भारत ने अपने लिए एक बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक जीत हासिल कर ली है। अमेरिकी ट्रेजरी (वित्त) मंत्री स्कॉट बेसेंट ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिकी सरकार और अधिक रूसी तेल से प्रतिबंध हटाने पर विचार कर रही है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा जा रहा है। इससे ठीक एक दिन पहले, अमेरिका ने भारत को मॉस्को से तेल खरीदने की अस्थायी मंजूरी दी थी। बाजार में आपूर्ति बढ़ाने की रणनीति फॉक्स बिजनेस से बात करते हुए ट्रंप के मंत्री स्कॉट बेसेंट ने शुक्रवार को कहा, 'हम अन्य रूसी तेलों से भी प्रतिबंध हटा सकते हैं।' उन्होंने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि समुद्र में करोड़ों बैरल प्रतिबंधित कच्चा तेल जहाजों पर मौजूद है। अनिवार्य रूप से, उन पर से प्रतिबंध हटाकर ट्रेजरी बाजार में एक नई सप्लाई पैदा कर सकता है। अमेरिका ने इस बात पर जोर दिया है कि इन नए कदमों का उद्देश्य मॉस्को को राहत देना बिल्कुल नहीं है। रूस पर ये प्रतिबंध यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की बातचीत में उसके आचरण के कारण लगाए गए थे। अमेरिका का कहना है कि यह नई छूट केवल उस सप्लाई को प्रभावित करेगी जो पहले से ही ट्रांजिट में है या जहाजों पर लदी है। बेसेंट ने यह भी कहा कि इस संघर्ष के दौरान बाजार को राहत पहुंचाने के लिए अमेरिका लगातार नए कदमों की घोषणा करता रहेगा, क्योंकि तेल की ऊंची कीमतें अमेरिकी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों के लिए परेशानी का सबब बन गई हैं। भारत को मिली विशेष छूट इससे पहले गुरुवार को, अमेरिकी सरकार ने आर्थिक प्रतिबंधों में अस्थायी रूप से ढील दी थी ताकि समुद्र में फंसे रूसी तेल को भारत को बेचा जा सके। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि विभिन्न प्रतिबंध व्यवस्थाओं द्वारा रोके गए जहाजों से होने वाले लेनदेन सहित इस तरह की खरीद-फरोख्त को 3 अप्रैल, 2026 के अंत तक के लिए अधिकृत किया गया है। अचानक क्यों ढीले पड़े ट्रंप के तेवर? (अमेरिका की मजबूरी) अमेरिका द्वारा रूसी तेल पर से प्रतिबंध हटाने या ढील देने के पीछे रूस से कोई प्रेम नहीं है, बल्कि यह एक भयंकर आर्थिक और भू-राजनीतिक मजबूरी है। अमेरिका और इजरायल का ईरान के साथ जो सीधा युद्ध छिड़ गया है, उसने खाड़ी क्षेत्र में आग लगा दी है। ईरान के जवाबी हमलों के कारण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' से होने वाला व्यापार लगभग ठप हो गया है। दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल इसी संकरे समुद्री रास्ते से गुजरता है। इस चोकपॉइंट के बंद होने से महज एक हफ्ते में कच्चे तेल की कीमतों में 30% का भारी उछाल आया है। शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमतों में 8.5 प्रतिशत का भारी उछाल दर्ज किया गया। यह उछाल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद आया जिसमें उन्होंने कहा था कि मध्य पूर्व का यह युद्ध केवल ईरान के बिना शर्त आत्मसमर्पण पर ही समाप्त होगा। अमेरिका में बढ़ती महंगाई और पेट्रोल की ऊंची कीमतें राष्ट्रपति ट्रंप के लिए घरेलू स्तर पर राजनीतिक नुकसान का कारण बन सकती हैं। ट्रंप ने भले ही ईरान के बिना शर्त आत्मसमर्पण तक युद्ध जारी रखने की बात कही हो, लेकिन वे जानते हैं कि लंबे समय तक तेल की इतनी ऊंची कीमतें अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मंदी में धकेल सकती हैं। बाजार को शांत करने के लिए अमेरिका को तुरंत किसी भी कीमत पर बाजार में तेल की जरूरत है। रूसी तेल से और बैन हटा सकता है अमेरिका: इसका मतलब क्या है? अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट का बयान बहुत नपा-तुला लेकिन स्पष्ट है। अमेरिका रूस पर लगे मूल प्रतिबंधों को खत्म नहीं कर रहा है, बल्कि एक तकनीकी ढील निकाल रहा है। बेसेंट के अनुसार, प्रतिबंधों के कारण करोड़ों बैरल रूसी कच्चा तेल वर्तमान में जहाजों पर समुद्र में फंसा हुआ है। अमेरिका इन विशेष जहाजों पर से प्रतिबंध हटाकर इस तेल को बाजार में उतारना चाहता है। इससे वैश्विक आपूर्ति बढ़ेगी और तेल की कीमतों में कुछ नरमी आएगी। वाशिंगटन इसे रूस को राहत के तौर पर पेश नहीं कर रहा है। उनका तर्क है कि यह केवल ट्रांजिट में फंसे तेल के लिए है, न कि रूस के भविष्य के तेल उत्पादन के लिए। यह अमेरिका की मजबूरी में उठाया गया कदम है ताकि वैश्विक तेल संकट को टाला जा सके। खामोश रहकर भी भारत की जीत कैसे? इस पूरे वैश्विक उथल-पुथल में भारत सबसे बड़े विजेता के रूप में उभरा है, और वह भी बिना अमेरिका से कोई सीधा टकराव मोल लिए। भारत अपनी तेल जरूरतों का 85% से अधिक आयात करता है। महंगे तेल का सीधा असर भारत की महंगाई और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। अमेरिका ने भारत को 3 अप्रैल 2026 तक समुद्र में फंसे इस रूसी तेल को खरीदने की विशेष और अस्थायी छूट दे दी है। चूंकि यह तेल प्रतिबंधित और फंसा हुआ था, इसलिए भारत इसे रूस से भारी डिस्काउंट पर खरीद सकेगा। इससे भारत का आयात बिल काफी कम होगा। भारत ने इस पूरे संकट में 'स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी' बनाए रखी। भारत ने ना तो अमेरिका का विरोध किया और ना ही रूस से अपने संबंध तोड़े। खामोश रहकर भारत ने बस सही समय का इंतजार किया। अमेरिका को वैश्विक तेल बाजार को क्रैश होने से बचाने के लिए भारत जैसे बड़े खरीदार की जरूरत थी, जो इस तेल को खपा सके। पहले जो तेल खरीदने पर भारत पर अमेरिकी प्रतिबंधों का खतरा मंडराता था, अब वही तेल भारत अमेरिकी सरकार की 'आधिकारिक मंजूरी' से खरीदेगा।

भारत ने तैयार किया शाहेद ड्रोन से भी खतरनाक और एडवांस हथियार, बढ़ेगा सैन्य शक्ति

 नई दिल्ली ईरान के सस्ते शाहेद-136 ड्रोन और अमेरिका के नए LUCAS ड्रोन ने युद्ध में कम कीमत पर बहुत बड़ा नुकसान पहुंचाया है. इन ड्रोनों से दुश्मन की महंगी एयर डिफेंस को भारी संख्या में हमला करके चकमा दिया जा सकता है. इसी तरह भारत भी अपना जवाब तैयार कर चुका है। बेंगलुरु की कंपनी न्यूस्पेस रिसर्च टेक्नोलॉजीज (NRT) ने शेषनाग-150 नाम का लंबी दूरी का स्वार्म अटैक ड्रोन बनाया है. यह ड्रोन पूरी तरह स्वदेशी है. विकास परीक्षण में तेजी से आगे बढ़ रहा है. यह ड्रोन पहली बार करीब एक साल पहले उड़ा था. अब ऑपरेशन सिंदूर जैसी हाल की घटनाओं के बाद इसकी जरूरत और ज्यादा तेज हो गई है। शेषनाग-150 ड्रोन क्या है और इसकी खासियतें शेषनाग-150 एक लंबी दूरी का लॉयटरिंग मुनिशन है, यानी यह लक्ष्य के ऊपर घूम सकता है. निगरानी कर सकता है. फिर हमला कर सकता है. इसकी रेंज 1000 किलोमीटर से ज्यादा है. यह 5 घंटे से अधिक समय तक हवा में रह सकता है. इसमें 25 से 40 किलोग्राम का वॉरहेड लगाया जा सकता है, जो इमारतों, वाहनों, रडार या सैनिकों को भारी नुकसान पहुंचा सकता है. यह ड्रोन स्वार्म अटैक कर सकता है, यानी कई ड्रोन साथ मिलकर हमला करते हैं। इससे दुश्मन की एयर डिफेंस सिस्टम को ओवरलोड करके तोड़ा जा सकता है. ड्रोन खुद लक्ष्य ढूंढता है, ट्रैक करता है और हमला करता है. यह GPS बंद होने पर भी काम कर सकता है क्योंकि इसमें विजुअल नेविगेशन सिस्टम है, जो कैमरे से रास्ता देखता है। स्वार्म टेक्नोलॉजी और मदर-कोड की ताकत शेषनाग-150 का असली राज उसका स्वदेशी मदर-कोड है. यह एक खास सॉफ्टवेयर है जो कई ड्रोनों को एक साथ कंट्रोल करता है. ड्रोन आपस में बात करते हैं, खुद प्लान बनाते हैं और हमला करते हैं. अगर एक ड्रोन खराब हो जाए तो बाकी काम जारी रखते हैं. यह कोड ड्रोन को बहुत स्मार्ट बनाता है।  दुनिया में ऐसे स्वार्म ड्रोन कम हैं. भारत का यह सिस्टम ईरान के शाहेद से आगे है क्योंकि इसमें ज्यादा एडवांस्ड स्वार्म और GPS-डिनाइड नेविगेशन है. कंपनी ने इसे मॉड्यूलर बनाया है, यानी भविष्य में आसानी से बदलाव किए जा सकते हैं। क्यों अब यह ड्रोन इतना जरूरी हो गया पिछले कुछ सालों में यूक्रेन युद्ध, मध्य पूर्व में संघर्ष और हाल ही में भारत-पाकिस्तान के बीच ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाया कि सस्ते ड्रोन कितने खतरनाक हैं. पाकिस्तान ने सैकड़ों सस्ते ड्रोन से भारत की एयर डिफेंस को थका देने की कोशिश की. लेकिन भारत ने कम लेकिन ज्यादा प्रभावी ड्रोन और लॉयटरिंग मुनिशन से पाकिस्तान के रडार और एयर डिफेंस को निशाना बनाया। ऑपरेशन सिंदूर में NRT की कंपनी ने अपनी अन्य ड्रोन क्षमताएं दीं, जिससे शेषनाग-150 पर फोकस बढ़ गया. अब भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना के लिए यह ड्रोन बहुत महत्वपूर्ण है. यह सस्ता, ज्यादा संख्या में बनाया जा सकता है. दुश्मन के महंगे सिस्टम को आसानी से नष्ट कर सकता है। भविष्य में क्या होगा शेषनाग-150 अभी विकास और परीक्षण के दौर में है. हाल में वर्ल्ड डिफेंस शो में इसका मॉडल दिखाया गया. कंपनी इसे सेना को पेश कर रही है. अगर यह सफल हुआ तो भारत की ड्रोन युद्ध क्षमता बहुत मजबूत हो जाएगी।

भारत बना रहा तीनों सेनाओं का नया कमांड, ईरान जंग से कुवैत जैसी गलती न हो, अमेरिका से लिया सबक

नई दिल्ली भारत अब अपनी सेनाओं को और मजबूत बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. लंबे समय से मांग हो रही संयुक्त थिएटर कमांड (Joint Theatre Commands) को लागू करने की तैयारी तेज हो गई है. यह सुधार सेना, नौसेना और वायुसेना को एक साथ मिलाकर एकीकृत कमान बनाने का काम करेगा. यानी तीनों सेनाएं अलग-अलग नहीं बल्कि एक ही कमांडर के अधीन काम करेंगी. यह बदलाव भारत की सैन्य ताकत को बहुत बढ़ाएगा और दुश्मन के सामने बेहतर तैयारी करेगा। ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध से सबक लेते हुए भारत तैयार हो रहा मध्य पूर्व में चल रहे ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध से भारत ने बहुत कुछ सीखा है. इस युद्ध में हवाई हमलों और ड्रोन-मिसाइलों की संख्या बहुत ज्यादा है. ऐसे में भारत अपनी हवाई रक्षा और कमांड सिस्टम को मजबूत कर रहा है. इसी क्रम में तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल के लिए इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (IACCS) विकसित किया जा रहा है. यह सिस्टम ग्राउंड रडार, हवाई चेतावनी विमान (AEW&C) और फाइटर जेट्स से आने वाले डेटा को एक जगह इकट्ठा करेगा और पूरी हवाई स्थिति का एक साफ नक्शा दिखाएगा। ग्रुप कैप्टन अनुपम बनर्जी ने क्या कहा पूर्व फाइटर पायलट और वायुसेना के पूर्व प्रवक्ता ग्रुप कैप्टन अनुपम बनर्जी ने इंडिया टुडे को बताया कि रूस-यूक्रेन युद्ध हो या अब ईरान युद्ध – भारत हर बदलती स्थिति से सीख रहा है. खासकर एयर डिफेंस के मामले में तीनों सेनाओं के लिए एक ही स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) बनाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि भारत के पास पहले से ही कई सिस्टम मौजूद हैं लेकिन अब उन्हें और एकीकृत किया जा रहा है ताकि कोई गलती न हो। IACCS क्या है और यह कैसे काम करेगा IACCS एक बहुत उन्नत और ऑटोमेटिक कमांड-कंट्रोल नेटवर्क है. यह भारत के लिए एक संयुक्त हवाई रक्षा कवच (एयर डिफेंस शील्ड) बनाएगा. इस सिस्टम से…     खतरे की तुरंत पहचान होगी।     दुश्मन के हवाई हमले को जल्दी नाकाम किया जा सकेगा.     फ्रेंडली फायर (अपनी ही सेना पर गलती से हमला) की घटनाएं रुकेंगी. ईरान युद्ध में अमेरिकी F-15 फाइटर जेट्स की क्रैश जैसी घटनाओं से बचने के लिए ही यह सिस्टम बनाया जा रहा है. IACCS आर्मी के अकाशतीर सिस्टम से भी जुड़ेगा ताकि तीनों सेनाओं में पूरी तरह तालमेल रहे। कौन बना रहा है और कब तैयार होगा? यह सिस्टम भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) बना रहा है. BEL भारत की सबसे बड़ी डिफेंस कंपनी है जो रडार और कमांड सिस्टम में माहिर है. IACCS को 2026 तक पूरी तरह चालू करने का लक्ष्य है. एक बार यह काम कर गया तो भारतीय वायुसेना (IAF) किसी भी हवाई खतरे का बहुत तेज और प्रभावी जवाब दे सकेगी। संयुक्त थिएटर कमांड और IACCS का बड़ा फायदा संयुक्त थिएटर कमांड से भारत की सेनाएं अब क्षेत्रीय आधार पर काम करेंगी. जैसे उत्तरी थिएटर में चीन के खिलाफ, पश्चिमी थिएटर में पाकिस्तान के खिलाफ – एक ही कमांडर तीनों सेनाओं को नियंत्रित करेगा. IACCS इस कमांड को हवाई हिस्से में और मजबूत बनाएगा. इससे…     फैसले तेज होंगे.       संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल होगा.       दुश्मन के सामने एकजुट ताकत दिखेगी.     यह सुधार भारत को आधुनिक युद्ध के लिए तैयार कर रहा है जहां हवाई, जमीन और समुद्री ताकत एक साथ काम करती है। भविष्य में क्या होगा भारत की सेनाएं अब दुनिया के बड़े युद्धों से सीख रही हैं. अपनी कमजोरियों को दूर कर रही हैं. IACCS और संयुक्त थिएटर कमांड जैसे कदम भारत को न सिर्फ मजबूत बनाएंगे बल्कि पड़ोसी देशों को भी संदेश देंगे कि भारत की रक्षा व्यवस्था अब बहुत उन्नत हो गई है. 2026 तक IACCS चालू होने पर भारत की हवाई सुरक्षा दुनिया की सबसे बेहतरीन में शुमार हो जाएगी।  

भारत सरकार तय कर रही है क्रूड ऑयल के इस्तेमाल की प्राथमिकताएं, ईरान जंग का असर पड़ने वाला है

 नई दिल्ली ईरान जंग के मद्देनजर भारत सरकार कच्चे तेल के इस्तेमाल की प्रायरिटी फिर से तय कर रही है. कच्चा तेल कहां और कैसे इस्तेमाल हो इसके लिए सरकार योजना बना रही है. हालांकि सरकार ने कहा है कि भारत के पास इस समय होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे क्रूड से ज़्यादा क्रूड है. LPG की कोई कमी नहीं है. सरकार ने रिफाइनरियों को LPG प्रोडक्शन बढ़ाने को कहा है। वेस्ट एशिया से सप्लाई में रुकावट के बाद भारत ने ऑयल रिफाइनरीज को लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG)  प्रोडक्शन ज़्यादा से ज़्यादा करने का निर्देश दिया है. सरकार ने घरेलू प्रोड्यूसर को उपलब्ध प्रोपेन और ब्यूटेन रिसोर्स का इस्तेमाल करके LPG आउटपुट को प्रायोरिटी देने का आदेश दिया है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG इंपोर्टर है, और पिछले साल इसने 33.15 मिलियन मीट्रिक टन फ्यूल की खपत क. इंपोर्ट डिमांड का लगभग दो-तिहाई हिस्सा है, जिसमें वेस्ट एशिया 85 से 90 परसेंट सप्लाई करता है, जिससे भारत रीजनल रुकावटों के प्रति कमज़ोर हो जाता है। सरकार ने कहा है कि भारत में LPG की किल्लत नहीं होने दी जाएगी. भारत खाड़ी देशों के अलावा दूसरे क्षेत्रों से LNG खरीदना शुरू कर दिया है. इसके अलावा भारत कतर सरकार से भी बात कर रहा है ताकि LNG की सप्लाई फिर से शुरू की जा सके. बता दें कि कतर भारत का सबसे बड़ा LNG सप्लायर है. कतर के गैस प्लांट पर ईरानी हमले के बाद कतर ने गैस प्रोडक्शन बंद कर दिया है और भारत को एक्सपोर्ट रोक दिया है।  जनवरी से US से LPG भारत आनी शुरू हो गई है. नवंबर 2025 में भारतीय सरकारी तेल कंपनियों ने 2026 के लिए US गल्फ कोस्ट से लगभग 2.2 MTPA LPG इंपोर्ट करने के लिए कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है।  रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक सभी ऑयल रिफाइनर को निर्देश दिया गया है कि वे अपने पास मौजूद प्रोपेन और ब्यूटेन का ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल करें और यह पक्का करें कि LPG प्रोडक्शन के लिए उनका इस्तेमाल हो. प्रोड्यूसर को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे सरकारी रिफाइनर इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन को घरों में बांटने के लिए LPG, प्रोपेन और ब्यूटेन उपलब्ध कराएं. भारत में लगभग 332 मिलियन एक्टिव LPG कंज्यूमर हैं। LPG के लिए प्रोपेन और ब्यूटेन का ज़रूरी इस्तेमाल करने से एल्काइलेट्स का प्रोडक्शन कम हो जाएगा, जो गैसोलीन ब्लेंडिंग का एक हिस्सा है। रिफाइनर को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे प्रोपेन और ब्यूटेन को पेट्रोकेमिकल प्रोडक्शन के लिए इस्तेमाल न करें, जिससे पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनियों के लिए फीडस्टॉक कम हो जाएगा।

“ईरान युद्ध के बाद…” ट्रंप ने बताया अपना अगला बड़ा टारगेट

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी विदेश नीति की प्राथमिकताओं को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। वाइट हाउस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने स्पष्ट किया कि उनके प्रशासन का वर्तमान लक्ष्य ईरान के साथ चल रहे युद्ध को समाप्त करना है, जिसके तुरंत बाद अमेरिका का पूरा ध्यान क्यूबा की ओर मुड़ जाएगा। यह बयान अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अमेरिका के अगले रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है। मेजर लीग सॉकर चैंपियन 'इंटर मियामी सीएफ' के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने मध्य पूर्व के संघर्ष पर चर्चा की। उन्होंने कहा, "हम पहले ईरान युद्ध को खत्म करना चाहते हैं।" उन्होंने आगे संकेत दिया कि क्यूबा के साथ संबंधों में सुधार या वहां के राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव केवल समय की बात है। ट्रंप ने दावा किया कि क्यूबा की राजधानी हवाना वाशिंगटन के साथ समझौता करने के लिए बेहद उत्सुक है। उन्होंने कहा, "क्यूबा बहुत बुरी तरह से एक डील चाहता है। जल्द ही बहुत से अद्भुत लोग वापस क्यूबा जा सकेंगे।" ईरान युद्ध में बड़ी जीत का दावा राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के खिलाफ जारी सैन्य अभियान पर एक उत्साहजनक रिपोर्ट पेश की। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेना और उनके इजरायली सहयोगी दुश्मन को समय से काफी पहले ही पूरी तरह से ध्वस्त कर रहे हैं। सैन्य प्रगति का विवरण देते हुए ट्रंप ने कहा ईरान के पास अब न तो कोई वायु सेना बची है और न ही प्रभावी हवाई रक्षा प्रणाली। राष्ट्रपति ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने मात्र तीन दिनों के भीतर ईरान के 24 जहाजों को नष्ट कर दिया है, जिससे उनकी नौसेना की शक्ति खत्म हो गई है। हालांकि, इन सैन्य दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है, लेकिन ट्रंप का लहजा पूरी तरह से आक्रामक और जीत के प्रति आश्वस्त नजर आया। वार्ता की मेज पर ईरान? ट्रंप ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि ईरानी नेतृत्व अब युद्ध समाप्त करने के लिए बातचीत का रास्ता तलाश रहा है। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा, “वे फोन कर रहे हैं और पूछ रहे हैं कि डील कैसे की जाए? मैंने उनसे कहा कि आप थोड़ा देर कर चुके हैं, अब हम उनसे ज्यादा लड़ने के इच्छुक हैं।” इसके साथ ही उन्होंने ईरानी राजनयिकों को एक अवसर भी दिया। ट्रंप ने कहा कि जो लोग सहयोग करेंगे वे एक नए और बेहतर ईरान के निर्माण में मदद कर सकते हैं, जिसमें विकास की अपार संभावनाएं होंगी। उन्होंने चेतावनी भी दी कि संघर्ष जारी रखने के परिणाम और भी गंभीर हो सकते हैं। तेल बाजार की रणनीति युद्ध के आर्थिक प्रभावों, विशेषकर तेल की कीमतों पर बोलते हुए ट्रंप ने स्वीकार किया कि इस संघर्ष की वजह से उन्हें अपनी घरेलू प्राथमिकताओं से थोड़ा भटकाव लेना पड़ा। उन्होंने कहा, "तेल की कीमतें अब काफी हद तक स्थिर हो गई हैं। हमने कीमतों को बहुत कम रखा था, लेकिन इस युद्ध के कारण हमें यह छोटा सा मोड़ लेना पड़ा।" राष्ट्रपति ने यह भी संकेत दिया कि ऊर्जा बाजारों पर दबाव कम करने के लिए जल्द ही कुछ नए उपायों की घोषणा की जा सकती है।

CM ममता का दावा: SIR में जिंदा मतदाताओं को ‘मृत’ दिखाया गया, उठाए गंभीर सवाल

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (ईसीआई) पर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) एक्सरसाइज में कई जिंदा वोटर्स को मरा हुआ दिखाने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री ने अनिश्चितकालीन एसआईआर विरोधी धरने पर कहा, "इनमें से कुछ वोटर आज हमारे साथ यहां हैं। कमीशन को शर्म आनी चाहिए कि उसने एसआईआर में उन वोटरों को मरा हुआ मार्क कर दिया जो जिंदा हैं। लेकिन, आज वे यह साबित करने के लिए यहां हैं कि वे अभी भी जिंदा हैं। चुनाव आयोग भाजपा के एजेंट के तौर पर काम कर रही है, जो खुद एक बेशर्म पॉलिटिकल ताकत है।" मुख्यमंत्री ने आगे कहा, "याद रखें हम काम कर रहे हैं। हमने उन सभी 22 वोटरों को ट्रैक किया है जिन्हें मरा हुआ बताया गया है। मैं मीडिया से भी रिक्वेस्ट करूंगी कि वे ऐसे वोटरों के बारे में पूरी कवरेज दें, जो अभी जिंदा हैं लेकिन कमीशन के रिकॉर्ड के मुताबिक मर चुके हैं।" उन्होंने कहा कि इस साल के आखिर में पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव एक मजाक होंगे, जब तक कि असली वोटर उस चुनाव में अपना वोट नहीं डाल पाते। तृणमूल कांग्रेस के बड़े नेताओं के अलावा, तृणमूल कांग्रेस से जुड़े बूथ लेवल ऑफिसर्स (बीएलओ) के एसोसिएशन के सदस्य भी धरना-प्रदर्शन की जगह पर मौजूद थे। इत्तेफाक से मुख्यमंत्री के धरना-प्रदर्शन की जगह पश्चिम बंगाल के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर (सीईओ) के ऑफिस से मुश्किल से 1.5 किलोमीटर दूर है। मुख्यमंत्री का अनिश्चितकालीन प्रदर्शन ठीक उससे पहले शुरू हुआ है जब चीफ इलेक्शन कमिश्नर (सीईसी) ज्ञानेश कुमार की लीडरशिप में ईसीआई की पूरी बेंच 8 मार्च को कोलकाता आ रही है, जिसका अगले दो दिनों का शेड्यूल काफी बिजी है। तृणमूल कांग्रेस लीडरशिप ने इस बात का कोई इशारा नहीं दिया कि प्रदर्शन कब तक चलेगा, लेकिन स्टेज के आकार और वहां मौजूद सुविधाओं से ऐसा लगता है कि प्रदर्शन काफी लंबा चलने वाला है।

100 घंटे की जंग में अरबों स्वाहा: ईरान से भिड़ंत में US को 31 हजार करोड़ का झटका

वाशिंगटन ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले का आज (शुक्रवार, 6 मार्च को) सातवां दिन है। शुक्रवार को अमेरिका ने स्टेल्थ बॉम्बर और एडवांस्ड वेपन सिस्टम से ईरान पर हमला बोला है। बदले में ईरान भी इजरायल पर और मिडिल-ईस्ट में अमेरिकी सैन्य अड्डों को लगातार निशाना बना रहा है। इस बीच, अमेरिकी थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) ने युद्ध के लागत पर एक विश्लेषण में कहा है कि ईरान के खिलाफ 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' (Operation Epic Fury) के तहत पहले 100 घंटों में ही अमेरिका को लगभग 3.7 अरब डॉलर (करीब 31,000 करोड़ रुपये) का खर्च उठाना पड़ा है। यह आकलन वाशिंगटन स्थित थिंक टैंक CSIS के विशेषज्ञों मार्क कैंसियन और क्रिस पार्क द्वारा किए गए विश्लेषण में सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार युद्ध के शुरुआती 100 घंटों में अमेरिका का औसत खर्च लगभग 891 मिलियन डॉलर प्रतिदिन यानी करीब 90 करोड़ डॉलर रोज रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती चरण में सबसे अधिक खर्च महंगे हथियारों, मिसाइलों और बमों के इस्तेमाल पर हुआ है, इसलिए शुरुआती दिनों में लागत सबसे ज्यादा है। हथियारों पर खर्च थिंक टैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि 1.7 अरब डॉलर पेट्रियट जैसे एयर डिफेंस इंटरसेप्टर सिस्टम पर खर्च किए गए हैं, जबकि 1.5 अरब डॉलर मिसाइलों और अन्य आक्रामक हथियारों पर किए गए हैं। इसके अलावा 125 मिलियन डॉलर लड़ाकू विमानों और हवाई अभियानों के परिचालन पर खर्च किए गए हैं। CSIS के मुताबिक कुल खर्च में से केवल लगभग 200 मिलियन डॉलर ही पहले से अमेरिकी रक्षा बजट में शामिल था, जबकि करीब 3.5 अरब डॉलर का खर्च अतिरिक्त है, जिसके लिए अलग से फंड की जरूरत पड़ सकती है। इसका मतलब है कि अमेरिकी रक्षा मंत्रालय यानी United States Department of Defense (पेंटागन) को जल्द ही युद्ध जारी रखने के लिए अतिरिक्त बजट की मांग करनी पड़ सकती है। 2000 से ज्यादा हथियारों का इस्तेमाल रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि युद्ध के पहले 100 घंटों में अमेरिका ने 2,000 से अधिक प्रकार के हथियार और मिसाइलें इस्तेमाल कीं हैं। इन हथियारों के स्टॉक को दोबारा भरने में ही लगभग 3.1 अरब डॉलर खर्च हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि युद्ध लंबा चला तो यह खर्च और तेजी से बढ़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार यदि युद्ध जारी रहता है तो अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की सरकार को कांग्रेस से अतिरिक्त बजट की मंजूरी लेनी पड़ सकती है लेकिन अमेरिका में महंगाई, जीवनयापन की बढ़ती लागत और युद्ध के कारण बढ़ती तेल कीमतों के चलते यह मुद्दा राजनीतिक विवाद का कारण भी बन सकता है। मानवीय नुकसान भी भारी थिंक टैंक ने अपने आकलन में कहा है कि युद्ध का मानवीय नुकसान भी तेजी से बढ़ रहा है। ईरान में अमेरिकी और इजरायली हमलों में अब तक 1,300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें कई बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं। साथ ही क्षेत्र के अन्य देशों में भी हमलों और जवाबी कार्रवाई के कारण कई लोगों की जान गई है। खर्च के अलावा, कुवैत में 'फ्रेंडली फायर' की घटना में तीन F-15 लड़ाकू विमानों के नष्ट होने जैसी खबरें भी सामने आई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने संकेत दिया है कि यह सैन्य अभियान अभी कई हफ्तों तक जारी रह सकता है। ऐसे में इसका आर्थिक और राजनीतिक असर अमेरिका सहित पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।  

CISF स्थापना दिवस समारोह में पहुंचे अमित शाह, ओडिशा में जवानों का बढ़ाया हौसला

कटक गृह मंत्री अमित शाह शुक्रवार को कटक में आयोजित सीआईएसएफ के 57वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि आज 56 वर्ष पूरे करने के बाद सीआईएसएफ ने यह मुकाम हासिल किया है। 57 मात्र एक संख्या नहीं है बल्कि यह समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा की एक यात्रा का प्रतीक है, जो औद्योगिक सुरक्षा के क्षेत्र में शून्य से शिखर तक के दृढ़ प्रयास को दर्शाती है। देश के अर्थतंत्र की मजबूती की कल्पना और इस देश को दुनिया का सबसे बड़ा अर्थतंत्र बनाने की संपल्पना औद्योगिक विकास के बिना नहीं हो सकती। औद्योगिक विकास को सुरक्षित वातावरण देने के लिए जरूरी है, राष्ट्रीय स्तर पर एक इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स की और मुझे खुशी है कि इन 56 सालों में सीआईएसएफ ने अपनी स्थापना के उद्देश्यों को सिद्ध किया है। साथ ही, हर प्रकार की चुनौतियों से सीखते हुए समय के साथ अपने को बदलने का प्रयास भी किया है। उन्होंने आधुनिकता को भी अपनाया है और परंपराओं को भी जीवित रखा है। उन्होंने कहा कि मुझे बेहद खुशी है कि सुरक्षा बलों का अपना सम्मेलन आयोजित किया जाता है। देश की सीमाओं की रक्षा करने वालों को ऐसा अवसर मिलना चाहिए और देश के भीतर नागरिक क्षेत्रों में विभिन्न सुरक्षा भूमिकाओं में कार्यरत लोगों को भी ऐसा मंच मिलना चाहिए। मैं सीआईएसएफ की इस पहल को बधाई देना चाहता हूं। भारत के औद्योगिक विकास की संपल्पना सीआईएसएफ के बिना नहीं हो सकती। चाहे हवाई अड्डे हों, चाहे बंदरगाह हों या फिर बड़ी औद्योगिक इकाइयां हों, सीआईएसएफ हमेशा राष्ट्र की ढाल बनकर मजबूती से खड़ा है। गृह मंत्री ने कहा कि भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने एक निर्णय किया है कि सभी बंदरगाहों की सुरक्षा भी सीआईएसएफ को सौंपकर हम इस मामले में भी निश्चिंत होना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने देश की जनता के सामने दो महत्वपूर्ण संकल्प रखे हैं। 2047 तक पूर्ण विकसित राष्ट्र बनना, दुनिया में नंबर एक पर पहुंचना और 2027 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना। इस लक्ष्य को पाने के लिए सीआईएसएफ अहम भूमिका निभा रही है।

कृषि को ग्लोबल मार्केट से जोड़ने पर जोर, बोले पीएम मोदी– निर्यात आधारित बनानी होगी भारतीय खेती

नई दिल्ली   प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को किसानों से भारत की विविध जलवायु परिस्थितियों का लाभ उठाने और उच्च मूल्य वाली फसलों की पैदावार बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करने को कहा। उन्होंने कहा कि ऐसा करने पर देश के कृषि उत्पाद वैश्विक बाजारों में प्रभावी ढंग से प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे। 'कृषि और ग्रामीण परिवर्तन' पर बजट के बाद आयोजित एक वेब गोष्ठी को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि भारतीय कृषि उत्पादों की गुणवत्ता, ब्रांडिंग और मानकों के सभी पहलुओं पर काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कृषि विशेषज्ञों, उद्योग और किसानों को एक साथ आना होगा। प्रधानमंत्री ने बजट के बाद अपनी तीसरी वेब गोष्ठी में कहा, ''आज दुनिया के बाजार खुल रहे हैं और वैश्विक मांग बदल रही है हमारी कृषि को निर्यात-उन्मुख बनाने पर अधिक चर्चा करना आवश्यक है। हमारे पास विविध जलवायु है और हमें इसका पूरा लाभ उठाना चाहिए। हम कृषि-जलवायु क्षेत्रों के मामले में समृद्ध हैं।'' मोदी ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में काजू, कोको और चंदन सहित उच्च मूल्य वाली कृषि पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है। उन्होंने कहा कि खाद्य तेल और दलहन पर राष्ट्रीय मिशन और प्राकृतिक खेती पर राष्ट्रीय मिशन सभी कृषि क्षेत्र को मजबूत कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा, ''यदि हम उच्च मूल्य वाले कृषि क्षेत्र को बड़े पैमाने पर बढ़ाते हैं, तभी हम अपने कृषि क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में बदल सकते हैं।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि आज दुनिया स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक हो रही है और समग्र स्वास्थ्य सेवा तथा जैविक भोजन पर उनका विशेष ध्यान है। उन्होंने कहा, ''हमें रसायन मुक्त और प्राकृतिक खेती पर अधिक जोर देना चाहिए। प्राकृतिक खेती दुनिया भर के बाजारों तक पहुंचने का रास्ता बनाती है।'' मोदी ने कहा कि कृषि भारत की दीर्घकालिक विकास यात्रा का एक रणनीतिक स्तंभ है, और सरकार ने कृषि क्षेत्र को लगातार मजबूत किया है। उन्होंने आगे कहा, ''लगभग 10 करोड़ किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के माध्यम से चार लाख करोड़ रुपये से अधिक मिले हैं।''