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Su-30 MKI फाइटर जेट क्रैश, वायुसेना के दो पायलटों की मृत्यु

गुवाहाटी भारतीय वायुसेना का एक सुखोई-30 एमकेआई फाइटर जेट गुरुवार शाम को असम में लापता हो गया. देर रात इसके क्रैश होने की पुष्टि हुई. फाइटर जेट ने असम के जोरहाट से उड़ान भरी थी और शाम 7.42 बजे के बाद रडार से उसका संपर्क टूट गया. विमान का पता लगाने के लिए भारतीय वायुसेना (IAF) ने सर्च और रेस्क्यू मिशन शुरू किया है। वायुसेना ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा है कि IAF स्क्वाड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरगकर के निधन पर दुख जताता है, जिन्हें Su-30 क्रैश में जानलेवा चोटें आईं। IAF के सभी कर्मचारी गहरी संवेदना जताते हैं, और इस दुख की घड़ी में दुखी परिवार के साथ मजबूती से खड़े हैं। भारतीय वायुसेना ने अपने X हैंडल पर खोए हुए फाइटर जेट का अपडेट शेयर करते हुए लिखा, 'हमारे एक Su-30 MKI के लापता होने की खबर है. एयरक्राफ्ट ने असम के जोरहाट से उड़ान भरी थी और आखिरी बार शाम 7.42 बजे रडार के संपर्क में आया था. आगे की जानकारी का पता लगाया जा रहा है. एक सर्च और रेस्क्यू मिशन शुरू किया गया है।'  इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी सुपरमैन्यूवरबिलिटी, लंबी मारक क्षमता और दो इंजन वाला शक्तिशाली डिजाइन है. सुखोई-30 एमकेआई ब्रह्मोस जैसी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ले जाने में भी सक्षम है, जिससे इसकी स्ट्राइक कैपेसिटी कई गुना बढ़ जाती है. इसमें आधुनिक एवियोनिक्स, मल्टी-फंक्शन रडार, थ्रस्ट वेक्टर कंट्रोल और लंबी दूरी तक उड़ान की क्षमता है. यह लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना की रीढ़ माना जाता है और देश की वायु सुरक्षा व सामरिक ताकत में इसकी भूमिका बेहद अहम है। सुखोई-30 एमकेआई भारतीय वायुसेना का सबसे ताकतवर और भरोसेमंद मल्टी रोल फाइटर जेट है. इसे 2000 के दशक की शुरुआत में भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था. यह रूस के सुखोई डिजाइन ब्यूरो द्वारा विकसित किया गया है. भारतीय वायुसेना इस फाइटर जेट का विशेष रूप से कस्टमाइज संस्करण इस्तेमाल करती है, जिसमें MKI का अर्थ है मॉडर्नाइज्ड, कमर्शियल और इंडियन. यह विमान हवा से हवा, हवा से जमीन और समुद्री लक्ष्यों पर हमला करने में सक्षम है। रूस में इस एयरक्राफ्ट का प्रोडक्शन 2000 में शुरू हुआ था, जब नई दिल्ली ने मॉस्को से 140 Su-30 फाइटर एयरक्राफ्ट बनाने के लिए कहा था. पहला एयरक्राफ्ट 2002 में भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था, और तब से, समय के साथ इसकी संख्या बढ़ती ही गई है।. आज, Su-30 भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों के बेड़े में सबसे बड़ा हिस्सा रखता है

आतंकवाद की नई चाल: पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा ने महिलाओं को बनाया हिस्सा

नई दिल्ली पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा महिलाओं के लिए दो नए ट्रेनिंग सेंटर बनाने की तैयारी कर रहा है. इन सेंटर को ‘मरकज’ के रूप में डेवलप किया जाएगा, जहां महिलाओं को संगठन से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों के लिए ट्रेनिंग दिया जाएगा. यह कदम इस संगठन की रणनीति में संभावित बदलाव को दर्शाता है, क्योंकि अब तक लश्कर-ए-तैयबा अपने महिला विंग का उपयोग मुख्य रूप से राजनीतिक लामबंदी और प्रचार से जुड़े कामों के लिए करता रहा है. महिला विंग की प्रमुख इफ्फत सईद की हालिया टिप्पणियां इस बदलाव की तरफ इशारा करती हैं. माना जा रहा है कि आने वाले समय में महिलाओं को ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) जैसी भूमिकाओं में शामिल किया जा सकता है.  OGW नेटवर्क वे लोग होते हैं जो सीधे हथियारबंद गतिविधियों में शामिल नहीं होते, लेकिन संगठन के लिए जमीन पर सहयोग, सूचना को इकट्ठा और अन्य सहायता प्रदान करते हैं. महिलाओं को इस नेटवर्क में शामिल करने की कोशिश लश्कर के रणनीतिक विस्तार के रूप में देखी जा रही है. इस क्रम में संगठन के वरिष्ठ आतंकी अब्दुर रऊफ ने इस्लामाबाद स्थित मरकज कुबा अल इस्लाम का दौरा किया है. जानकारी के अनुसार, इस केंद्र का विस्तार किया जा रहा है और इसमें महिलाओं के लिए ख़ास ट्रेनिंग सुविधाएं जोड़ी जा रही हैं. सुरक्षा एजेंसियां इस पर कड़ी नजर रखे हुए हैं और सतर्कता बरत रही हैं. महिलाओं के लिए इन नए कैम्पों के जरिए लश्कर-ए-तैयबा अपने नेटवर्क को नए और व्यापक तरीकों से मजबूत करने की कोशिश कर सकता है. यह विकसित होती स्थिति क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बनी हुई है. भारत में सुरक्षाबल लश्कर-ए-तैयबा की हर नए कदम पर खास नजर बनाई हुई है.   

₹38 करोड़ की ठगी हर 24 घंटे, सरकार ने उठाया बड़ा कदम—AI की मदद से ठगी रोकने की तैयारी

नई दिल्ली Cyber Fraud Prevention India: भारत में साइबर फ्रॉड की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं और इसके आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं. हर 24 घंटे में करीब 38 करोड़ रुपये साइबर अपराधी लोगों के बैंक खातों से उड़ा ले जाते हैं. यह पैसा आम लोगों की मेहनत की कमाई होती है, जो ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट या अन्य डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल करते समय ठगी का शिकार हो जाते हैं. हैरानी की बात यह है कि इस बड़ी रकम में से सिर्फ लगभग 8 करोड़ रुपये ही बचाए जा पाते हैं. बाकी पैसा साइबर अपराधियों के खातों में पहुंच जाता है. यह आंकड़ा बताता है कि साइबर अपराधियों का नेटवर्क कितना मजबूत हो चुका है और वे लगातार नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। हर दिन हजारों शिकायतें  साइबर ठगी के मामलों को लेकर हर दिन हजारों लोग शिकायत दर्ज करा रहे हैं. केंद्रीय गृह मंत्रालय से जुड़े साइबर सिस्टम के मुताबिक, हर 24 घंटे में 7000 से ज्यादा शिकायतें दर्ज होती हैं. इनमें से करीब 6000 शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई की जाती है. जांच में सामने आया है कि इन मामलों में रोजाना करीब 38 करोड़ रुपये की ठगी हो रही है. हालांकि एजेंसियां लगातार पैसा बचाने की कोशिश करती हैं, लेकिन औसतन सिर्फ 8 करोड़ रुपये ही रिकवर हो पाते हैं. इसका मतलब यह है कि ठगों का नेटवर्क बेहद तेज और संगठित तरीके से काम कर रहा है। साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर साइबर ठगी से निपटने के लिए गृह मंत्रालय ने एक विशेष साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर (Cyber Fraud Mitigation Centre) बनाया है. यह सेंटर 24 घंटे काम करता है और यहां अलग-अलग एजेंसियों के प्रतिनिधि मौजूद रहते हैं. इस सेंटर का उद्देश्य जैसे ही किसी साइबर फ्रॉड की जानकारी मिले, तुरंत कार्रवाई करना है. यहां पुलिस, बैंक और टेलीकॉम कंपनियों के प्रतिनिधि मिलकर काम करते हैं. जब किसी फ्रॉड का अलर्ट मिलता है, तो पूरा सिस्टम एक साथ सक्रिय हो जाता है. इस समन्वय के जरिए ठगी की रकम को ट्रांसफर होने से रोकने की कोशिश की जाती है। 24×7 कंट्रोल रूम साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर में एक हाईटेक कंट्रोल रूम बनाया गया है. यहां 24×7 निगरानी रखी जाती है. जैसे ही किसी खाते से संदिग्ध ट्रांजैक्शन की जानकारी मिलती है, तुरंत सायरन बजता है और संबंधित एजेंसियां अलर्ट हो जाती हैं. इसके बाद बैंक और पुलिस मिलकर उस ट्रांजैक्शन को रोकने की कोशिश करते हैं. कई मामलों में खाते को तुरंत फ्रीज कर दिया जाता है. हालांकि ठगों की तेजी के कारण कई बार पैसा दूसरे खातों में ट्रांसफर हो जाता है, जिससे रिकवरी मुश्किल हो जाती है. पांच साल में 55 हजार करोड़ की ठगी गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक पिछले पांच वर्षों में साइबर ठगों ने लोगों के खातों से 55 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी की है. यह आंकड़ा 2021 से 2025 के बीच का है. इन पांच वर्षों में कुल 6 करोड़ 58 लाख से ज्यादा शिकायतें साइबर फ्रॉड को लेकर दर्ज की गईं. यह संख्या बताती है कि देश में डिजिटल सेवाओं के बढ़ने के साथ साइबर अपराध भी तेजी से बढ़े हैं. हालांकि सरकार और एजेंसियां लगातार इन्हें रोकने की कोशिश कर रही हैं. 2025 में सबसे ज्यादा शिकायतें रिपोर्ट के मुताबिक अकेले 2025 में ही साइबर फ्रॉड के 24 लाख से ज्यादा मामले दर्ज किए गए. यह पिछले सभी वर्षों के मुकाबले सबसे ज्यादा है. हालांकि इस साल ठगी की रकम थोड़ी कम रही, लेकिन मामलों की संख्या में भारी वृद्धि देखी गई. इससे यह साफ होता है कि साइबर अपराधी लगातार नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं. डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के कारण ठगों के लिए नए अवसर भी बन रहे हैं. 2021 से 2025 तक शिकायतों का ग्राफ अगर पिछले पांच साल के आंकड़ों को देखें तो साइबर फ्रॉड की शिकायतों में लगातार वृद्धि हुई है- 2021 में 2,62,846 शिकायतें दर्ज हुई थीं. 2022 में यह संख्या बढ़कर 6,94,446 हो गई. 2023 में 13,10,357 शिकायतें दर्ज हुईं. 2024 में यह संख्या 19,18,835 पहुंच गई. 2025 में शिकायतों का आंकड़ा बढ़कर 24,02,579 हो गया. यह आंकड़े बताते हैं कि साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहा है और लोगों को लगातार सतर्क रहने की जरूरत है. ठगी की रकम में भी बड़ा उछाल साइबर ठगी की रकम भी हर साल तेजी से बढ़ी है- 2021 में लगभग 551 करोड़ रुपये की ठगी हुई थी. 2022 में यह रकम बढ़कर 2290 करोड़ रुपये हो गई.  2023 में 7465 करोड़ रुपये की ठगी दर्ज की गई. 2024 में यह आंकड़ा 22,848 करोड़ रुपये तक पहुंच गया.  हालांकि 2025 में यह थोड़ा घटकर 22,495 करोड़ रुपये रहा.  इसके बावजूद यह बेहद बड़ी रकम है, जो साइबर अपराधियों की ताकत को दिखाती है. 2025 में बचाए गए हजारों करोड़ हालांकि एजेंसियों की कोशिशों से कुछ सफलता भी मिली है. I4C सिस्टम के जरिए 2025 में करीब 8189 करोड़ रुपये की ठगी होने से बचाई गई. यह रकम तब बचाई गई जब लोगों ने तुरंत शिकायत दर्ज कराई और बैंक तथा पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की. इससे यह साबित होता है कि समय पर शिकायत करने से कई बार पैसा वापस मिल सकता है. डिजिटल इंडिया के साथ बढ़ा खतरा भारत में इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ है. आज देश के अधिकांश घरों में इंटरनेट पहुंच चुका है. लोग ऑनलाइन बैंकिंग, यूपीआई और डिजिटल भुगतान का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे लोगों को सुविधा जरूर मिली है, लेकिन इसके साथ साइबर अपराध का खतरा भी बढ़ गया है. साइबर ठग इसी डिजिटल सिस्टम का फायदा उठाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं. म्यूल अकाउंट बना बड़ा हथियार साइबर अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला एक बड़ा तरीका म्यूल अकाउंट है. इसमें ठग दूसरे लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं. इन खातों में ठगी की रकम ट्रांसफर की जाती है और फिर उसे कई अन्य खातों में बांट दिया जाता है. इससे पैसे का ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है. एजेंसियां अब इन म्यूल खातों की पहचान करने के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं. AI के जरिए ठगी … Read more

ईरान के साथ संघर्ष: अमेरिका पूरी ताकत लगा रहा, हर हमला रोक पाना संभव नहीं—बड़ा बयान

वाशिंगटन ईरान के साथ जारी युद्ध के पांचवें दिन अमेरिका ने साफ किया है कि उसने मध्य पूर्व में तैनात अपने सैनिकों और सहयोगी देशों की सुरक्षा के लिए कोई कमी नहीं छोड़ी है। अमेरिका के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ (Pete Hegseth) ने पेंटागन में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि एयर डिफेंस सिस्टम को मजबूत करने के लिए हर संसाधन और हर क्षमता का इस्तेमाल किया गया है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि हर ड्रोन या मिसाइल हमले को पूरी तरह रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि हमला शुरू करने से पहले अधिकतम सुरक्षा व्यवस्था की गई थी, लेकिन 100 प्रतिशत सुरक्षा की गारंटी नहीं दी जा सकती। इसी बीच पेंटागन ने जानकारी दी कि अब तक इस संघर्ष में छह अमेरिकी सैनिकों की जान जा चुकी है। यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान में मरने वालों की संख्या 1,000 के पार पहुंच गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रक्षा विभाग के शीर्ष अधिकारियों ने पहले ही संकेत दिया था कि यह जंग लंबी चल सकती है और आगे भी अमेरिकी सैनिक हताहत हो सकते हैं। अमेरिका बोला- ईरान उसे थका नहीं सकता है हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका इस सैन्य अभियान में निर्णायक बढ़त बनाए हुए है और ईरान के हवाई क्षेत्र पर तेजी से नियंत्रण स्थापित कर रहा है। उनका कहना था कि अमेरिका जितना समय जरूरी होगा, उतना समय लेगा और ईरान उसे थका नहीं सकता। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका “निर्णायक, तबाही मचाने वाले और बिना किसी रियायत के” आगे बढ़ रहा है। साथ ही उन्होंने बताया कि और लड़ाकू विमान और बमवर्षक जल्द ही इस क्षेत्र में पहुंचेंगे। जंग के पांचवें दिन एक अहम सैन्य कार्रवाई भी हुई। मंगलवार रात एक अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो दागकर ईरान के युद्धपोत IRIS Dena को डुबो दिया। हेगसेथ ने कहा कि यह जहाज अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में खुद को सुरक्षित समझ रहा था, लेकिन उसे निशाना बना लिया गया। यह जहाज ईरान के नए युद्धपोतों में से एक था। श्रीलंका ने बताया कि उसके दक्षिणी तट के पास जहाज से संकट संदेश मिलने के बाद उसकी नौसेना और वायुसेना ने 180 में से 32 लोगों को बचा लिया। हेगसेथ के मुताबिक, द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहला मौका है जब किसी दुश्मन के जहाज को इस तरह अमेरिकी पनडुब्बी ने डुबोया है। उसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने कहा कि जंग की शुरुआत के मुकाबले अब ईरान कम मिसाइलें दाग रहा है। उन्होंने बताया कि अमेरिका के लगातार हमलों से ईरान की सैन्य क्षमता काफी कमजोर हो गई है। जंग कितने समय तक चलेगी, इस पर हेगसेथ ने कोई निश्चित समयसीमा नहीं दी। उन्होंने कहा कि यह चार हफ्ते भी चल सकती है, छह या आठ हफ्ते भी, और हालात के मुताबिक इससे कम या ज्यादा समय भी लग सकता है। उनके मुताबिक, युद्ध की रफ्तार और दिशा अमेरिका तय कर रहा है और दुश्मन असंतुलित स्थिति में है। उन्होंने बताया कि शुरुआत में अमेरिका ने उन्नत हथियारों का इस्तेमाल किया और अब ईरानी आसमान पर नियंत्रण स्थापित करने के बाद ग्रैविटी बम का इस्तेमाल करने की योजना है। साथ ही उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास पर्याप्त गोला-बारूद और संसाधन मौजूद हैं। एक इजरायली सैन्य अधिकारी के अनुसार, अमेरिका और इजरायल के शीर्ष अधिकारियों ने करीब तीन हफ्ते पहले हमलों की योजना बनानी शुरू कर दी थी। इस संघर्ष में अब तक ईरान में 1,000 से ज्यादा और लेबनान में दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा पश्चिम एशिया में तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है और हजारों यात्री अलग-अलग देशों में फंसे हुए हैं। सितंबर तक चल सकता है युद्ध 'पॉलिटिको' की रिपोर्ट में आंतरिक दस्तावेजों के हवाले से लिखा है कि यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने अमेरिकी रक्षा विभाग से फ्लोरिडा स्थित अपने मुख्यालय में और अधिक सैन्य खुफिया कर्मचारियों को भेजने का आग्रह किया है। इसका उद्देश्य आने वाले महीनों में ईरान के खिलाफ अभियानों को सुचारू रूप से चलाना है। इस अतिरिक्त कर्मचारियों की मांग से पता चलता है कि अमेरिका एक लंबे अभियान की योजना बना रहा है, जो सितंबर तक खिंच सकता है। यह स्थिति राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उन पिछली टिप्पणियों के बिल्कुल उलट है, जिनमें उन्होंने युद्ध शुरू होने के तुरंत बाद कहा था कि यह अभियान लगभग चार सप्ताह या उससे भी कम समय में पूरा हो सकता है। एक अमेरिकी अधिकारी ने पॉलिटिको को बताया कि रक्षा अधिकारी इस क्षेत्र में अतिरिक्त वायु रक्षा प्रणालियां तैनात करने की तैयारी कर रहे हैं। इनमें विशेष रूप से छोटी और कम खर्चीली 'एंटी-ड्रोन तकनीक' शामिल हैं, जिन्हें पेंटागन ने हाल के वर्षों में विकसित किया है। 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' अमेरिका और इजरायल द्वारा संयुक्त रूप से शुरू किया गया यह युद्ध 28 फरवरी को 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के नाम से शुरू हुआ था। इस अभियान के पहले ही दिन ईरान की राजधानी तेहरान में एक बड़े हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई उनके आवास पर मारे गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने इस युद्ध के व्यापक परिणामों का पूरी तरह से अनुमान नहीं लगाया था। नतीजतन, अमेरिकी विदेश विभाग ने पूरे मध्य पूर्व से अपने राजनयिक कर्मचारियों को सुरक्षित निकालने के लिए अतिरिक्त संसाधन लगाने शुरू कर दिए हैं। निकासी प्रक्रिया का सीधा नियंत्रण अब विदेश विभाग के वरिष्ठ नेतृत्व के हाथों में है। इस अभियान के दौरान अब तक छह अमेरिकी सैनिक अपनी जान गंवा चुके हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी दी है कि आने वाले समय में और भी अमेरिकी सैनिक हताहत हो सकते हैं। पड़ोसी देशों पर खतरा इस संघर्ष का असर अब फारस की खाड़ी के अन्य देशों पर भी पड़ने लगा है। ईरानी ड्रोन और मिसाइलें संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन, कुवैत और अन्य पड़ोसी देशों के हवाई क्षेत्र की ओर उड़ती देखी गई हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया भर में तेल निर्यात के लिए सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, वहां से जहाजों की आवाजाही काफी हद तक रुक गई है। ड्रोन हमलों के बढ़ते खतरे के कारण व्यापारिक … Read more

UPI का खास फीचर हुआ बंद! अब मोबाइल नंबर या UPI ID से पेमेंट नहीं होगी – क्या है नया नियम?

नई दिल्ली अब आप UPI ID या मोबाइल नंबर डालकर UPI पेमेंट्स नहीं कर पाएंगे। डिजिटल पेमेंट्स को ज्यादा सुरक्षित और तेज बनाने के लिए NPCI ने एक बड़ा बदलाव किया है। अभी तक ऑनलाइन भुगतान करते समय UPI ID या मोबाइल नंबर मैन्युअल तरीके से टाइप करना पड़ता था, जिसे कि ‘UPI Collect’ कहा जाता था। अब इस तरीके को ज्यादातर जगहों के लिए बंद किया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार अब आपको इस ऑप्शन की जगह सीधे पेमेंट ऐप्स के आइकन पर क्लिक करने का ऑप्शन या फिर QR Code स्कैन करने की सुविधा मिलेगी। इससे न सिर्फ पेमेंट करना ज्यादा आसान हो जाएगा बल्कि ऑनलाइन पेमेंट्स ज्यादा सुरक्षित भी हो जाएंगी। यह बदलाव 28 फरवरी 2026 से लागू होना था। क्या होता है UPI Collect? यह ऑनलाइन भुगतान करने का एक तरीका था, जिसमें खरीददार अपनी UPI ID या मोबाइल नंबर (अगर वही UPI ID के तौर पर इस्तेमाल हो रहा हो) खुद टाइप करता था। इसके बाद वह ऐप या वेबसाइट पेमेंट ऐप को पैसे काटने की रिक्वेस्ट भेजती थी। इसके बाद यूजर पेमेंट ऐप में अपना पिन डालकर भुगतान करता था। इसी वजह से इस तरीके को UPI कलेक्ट कहा जाता था क्योंकि इसमें पेमेंट लेने वाली ऐप या वेबसाइट, पेमेंट पाने के लिए पेमेंट ऐप को मैसेज भेजती थी। अब कैसे कर पाएंगे पेमेंट अब इस तरीके को बहुत आसान बनाया जा रहा है। 28 फरवरी 2026 के बाद से ज्यादातर जगहों पर आपको पेमेंट करने के लिए UPI ऐप का आइकन या QR कोड मिलेगा। अगर आप पेमेंट करने के लिए ऐप के आइकन पर क्लिक करेंगे, तो सीधा फोन पर ऐप खुल जाएगी और वहीं अगर आप QR Code को चुनेंगे तो आपके सामन एक QR Code आजाएगा और आप उसे स्कैन कर पेमेंट कर पाएंगे। इन जगहों पर चलेगा पुराना तरीका गौर करने वाली बात है कि 28 फरवरी 2026 के बाद से UPI कलेक्ट को पूरी तरह बंद नहीं किया जाएगा। कुछ खास परिस्थितियों और कामों के लिए इसका इस्तेमाल जारी रहेगा। जैसे कि:     शेयर बाजार और IPO के लिए: अगर आप स्टॉक मार्केट में निवेश करते हैं या किसी कंपनी के IPO के लिए अप्लाई करना चाहते हैं, तो वहां आपको UPI ID या मोबाइल नंबर टाइप करके ही पेेमेंट करनी होगी।     Apple और iPhone यूजर्स: अगर आप आईफोन या किसी iOS डिवाइस पर मोबाइल ऐप या ब्राउजर के जरिए खरीदारी करेंगे, तो वहां भी यही पुराना सिस्टम आपको काम करता दिखेगा।     पुराने पेमेंट को मैनेज करने के लिए: अगर आपने पहले से कोई ऑटो-पेमेंट सेट किया है, तो उसे बदलने या रोकने के लिए पुराने हाथ से UPI ID या मोबाइल नंबर टाइप करना होगा।     विदेशी पेमेंट्स के लिए: यदि आप किसी अंतरराष्ट्रीय वेबसाइट या अपने देश से बाहर किसी बिजनेस को पेमेंट करेंगे, तो भी UPI कलेक्ट वाला पुराना तरीका ही काम करेगा।

यूएई में रह रहे भारतीयों के लिए अहम सूचना, दूतावास ने जारी किए सुरक्षा दिशा-निर्देश

नई दिल्ली मिडिल ईस्ट में लगातार छठे दिन भारी तनावपूर्ण माहौल बरकरार है। तनाव के बीच तमाम देशों की सरकार और दूतावास की तरफ से लगातार एडवाइजरी जारी की जा रही है। अबू धाबी में भारतीय दूतावास ने एडवाइजरी जारी की है। दूसरी तरफ ओमान की सरकार ने लोगों को आश्वासन दिया है कि वह लगातार सभी देशों की सरकार के साथ संपर्क में हैं। इसके अलावा ईरान के अराक यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंस में फंसे भारतीय छात्रों ने भारत सरकार से उन्हें निकालने की अपील की है। ओमान के वर्तमान विदेश मंत्री सैय्यद बद्र बिन हमद अल बुसैदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "गल्फ से घर वापस आने की उम्मीद कर रहे सभी लोगों के लिए, ओमान सरकार आपकी सरकारों और इंटरनेशनल एयरलाइंस के साथ मिलकर आपको घर वापस लाने के लिए विमान की व्यवस्था की जा रही है। हमारा मतलब है हर कोई, चाहे आपके पास कोई भी पासपोर्ट हो, सभी देशों के नागरिकों को सुरक्षा का मानवाधिकार है। लोग मायने रखते हैं, चलो अब जंग रोकते हैं। वहीं, अबू धाबी में भारतीय दूतावास ने लिखा, "संयुक्त अरब अमीरात और क्षेत्र में मौजूदा स्थिति को देखते हुए, यूएई में वर्तमान में सभी भारतीय नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे सतर्क रहें। यूएई अधिकारियों के सुरक्षा दिशानिर्देशों का पालन करें और समय-समय पर जारी आधिकारिक सलाह का भी पालन करें। असाधारण परिस्थितियों को देखते हुए, हवाई क्षेत्र और नियमित निर्धारित उड़ान संचालन अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया है।" भारतीय दूतावास ने आगे कहा कि हालांकि, भारतीय और यूएई एयरलाइंस ने यूएई अधिकारियों के साथ समन्वय में, संबंधित अधिकारियों के संचालन और सुरक्षा अनुमोदन के अधीन, भारत में कई गंतव्यों के लिए सीमित गैर-निर्धारित उड़ान संचालन शुरू किया है। फंसे हुए भारतीय नागरिक अपनी संबंधित एयरलाइनों से संपर्क करके इन उड़ानों का लाभ उठा सकते हैं। जिन लोगों की वीजा अवधि समाप्ति हो चुकी है, उनके लिए दूतावास ने कहा, "28 फरवरी के बाद फंसे हुए लोगों और जिनके वीजा की अवधि समाप्त हो गई है, उनके लिए यूएई संघीय पहचान, नागरिकता, सीमा शुल्क और बंदरगाह प्राधिकरण (आईसीपी) ने आगंतुकों (पर्यटक/विजिट वीजा) और अन्य लोगों के लिए ओवरस्टे जुर्माना में छूट की घोषणा की है, जो इन असाधारण परिस्थितियों के कारण प्रस्थान करने में असमर्थ हैं। अबूधाबी में भारतीय दूतावास और दुबई में कॉन्सुलेट और उनकी आउटसोर्स पासपोर्ट, कॉन्सुलर और वीजा सर्विस नॉर्मल तरीके से काम कर रही हैं।"

मिडिल ईस्ट तनाव गहराया: कतर ने रोकी LNG सप्लाई, भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर सवाल

नई दिल्ली इजरायल-अमेरिका-ईरान युद्ध और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब भारत की गैस सप्लाई पर भी दिखने लगा है। सरकारी गैस कंपनी गेल (इंडिया) लिमिटेड ने बताया है कि कतर से मिलने वाली तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की सप्लाई फिलहाल पूरी तरह बंद हो गई है। कंपनी ने चेतावनी दी है कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो डाउनस्ट्रीम ग्राहकों को गैस आपूर्ति में कटौती करनी पड़ सकती है। कंपनी ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि उसके दीर्घकालिक सप्लायर पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड (पीएलएल) ने 3 मार्च को फोर्स मेजर नोटिस जारी किया है। यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि कतर और भारत के बीच एलएनजी जहाजों के आवागमन में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री नेविगेशन प्रतिबंधों के कारण बाधाएं आ रही हैं। इसके अलावा कतर के रास लाफान में स्थित एलएनजी लिक्विफिकेशन प्लांट भी बंद कर दिया गया है। फाइलिंग के मुताबिक, पेट्रोनेट के अपस्ट्रीम सप्लायर कतर एनर्जी ने भी क्षेत्र में हालिया सैन्य टकराव के कारण संभावित फोर्स मेजर की स्थिति की जानकारी दी है। इसी वजह से पेट्रोनेट द्वारा गेल को दिए जाने वाले एलएनजी कोटे को 4 मार्च 2026 से शून्य कर दिया गया है। गेल ने कहा है कि वह इस स्थिति का आकलन कर रही है और जरूरत पड़ने पर अपने ग्राहकों को गैस सप्लाई में कटौती करने का फैसला ले सकती है। हालांकि, कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि अन्य स्रोतों से मिलने वाली एलएनजी सप्लाई फिलहाल प्रभावित नहीं हुई है। कंपनी लगातार हालात पर नजर रखे हुए है और किसी भी बड़े अपडेट की जानकारी शेयर बाजार को देती रहेगी। भारत में गेल करीब 11,400 किलोमीटर लंबे प्राकृतिक गैस पाइपलाइन नेटवर्क का संचालन करती है और देश में गैस ट्रांसमिशन के क्षेत्र में लगभग 75 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी रखती है। यह नेटवर्क कई गैस स्रोतों को बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं और अन्य ग्राहकों से जोड़ता है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी हलचल देखी जा रही है। एशिया में स्पॉट एलएनजी की कीमतें तीन साल के उच्च स्तर के करीब पहुंचने के बाद गुरुवार को थोड़ी नरम हुईं। ट्रेडर्स के अनुसार, एशिया में स्पॉट एलएनजी की कीमत लगभग 23.80 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट कर गिर गई, जो पिछले सप्ताह की तुलना में अभी भी दोगुनी से ज्यादा है। ऊर्जा बाजार में यह उछाल उस समय आया जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर संयुक्त हवाई हमला किया, जिसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिसके बाद क्षेत्र में तेल और गैस सप्लाई को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं। बाजार को सबसे ज्यादा चिंता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला बेहद अहम समुद्री मार्ग है। इसी रास्ते से मिडिल ईस्ट से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्लाई दुनिया भर में होती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कतर के रास लाफान एलएनजी प्लांट (दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी निर्यात प्लांट) पर भी परिचालन रोक दिया गया है। इसके अलावा, कुछ एलएनजी टैंकरों ने यूरोप की बजाय एशिया की ओर अपना रास्ता बदल लिया है, जिससे सप्लाई के लिए प्रतिस्पर्धा और तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव लंबे समय तक जारी रहा तो वैश्विक ऊर्जा बाजार और भी अस्थिर हो सकता है, जिसका असर भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर भी पड़ सकता है।

सीमा पर बढ़ी सियासी गर्मी, ड्रोन अटैक के बाद अजरबैजान का सख्त कदम

बाकू अजरबैजान ने एयरपोर्ट और एक स्कूल के पास ड्रोन हमले में दो लोगों के घायल होने के बाद ईरानी दूत को तलब किया है। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “एक ड्रोन ने नखचिवन स्वायत्त गणराज्य में हवाई अड्डे की टर्मिनल बिल्डिंग पर हमला किया, जबकि दूसरा ड्रोन शकराबाद गांव में एक स्कूल बिल्डिंग के पास गिरा।” इसके साथ ही ईरान से अपील करते हुए कहा, “हम इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के इलाके से किए गए इन ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा करते हैं, जिससे एयरपोर्ट की बिल्डिंग को नुकसान हुआ और दो आम लोग घायल हो गए।” मंत्रालय के अनुसार इस हमले से अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हुआ है। अजरबैजान ने ईरान से जल्द इस मामले को स्पष्ट करने और भविष्य में ऐसी घटनाएं न होने के लिए जरूरी कदम उठाने की मांग की है। बाकू ने यह भी कहा कि अजरबैजान इस मामले में जवाबी कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है। साथ ही ईरान के राजदूत को बुलाकर इस घटना पर कड़ा विरोध दर्ज कराया गया है। ईरानी ड्रोन ने दोनों देशों की साझी सीमा के पास एक अजरबैजानी एयरपोर्ट पर हमला किया। यह पहली बार है जब तेहरान के खिलाफ यूएस-इजरायल युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने काकेशस के किसी राज्य को निशाना बनाया है। अजरबैजान, ने मिडिल ईस्ट संघर्ष में न्यूट्रल रुख अपनाया है। इसने हाल ही में इजरायल और ट्रंप प्रशासन के साथ करीबी संबंध बनाए, जबकि धीरे-धीरे काकेशस में पारंपरिक सहयोगी रहे मास्को से दूरी बनाई। देश में कोई अमेरिकी मिलिट्री बेस नहीं है, जिससे पता चलता है कि ईरान सीधे अमेरिकी सेना से जुड़े टारगेट से आगे अपने हमलों को बढ़ा सकता है। इजरायल के साथ बाकू के बढ़ते सैन्य सहयोग ने तेहरान के साथ टकराव पैदा किया है, हालांकि दोनों पड़ोसियों ने काफी हद तक प्रैक्टिकल संबंध बनाए रखे हैं। दोनों देशों में बहुसंख्यक शिया मुस्लिम हैं, और ईरान लाखों अजेरी लोगों का घर है – अनुमान है कि यह संख्या लगभग डेढ़ से 2 करोड़ से भी अधिक है – जिनमें से कई अजरबैजान की सीमा से लगे उत्तर-पश्चिमी प्रांतों में रहते हैं।

‘इजरायल के लिए ईरान पर हमला मत करो’—पूर्व सैनिक की अपील पर भड़के अमेरिकी सांसद, की मारपीट

ईरान ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमले का विरोध अमेरिका में भी हो रहा है। इस बीच, यूनाइटेड स्टेट्स सीनेट की सशस्त्र सेवा समिति  की सुनवाई के दौरान उस समय अफरा-तफरी मच गई जब ईरान पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के विरोध में एक पूर्व मरीन ने प्रदर्शन किया। इस दौरान झड़प में एक अमेरिकी सांसद ने उसका हाथ तोड़ दिया। इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। घायल प्रदर्शनकारी की पहचान ब्रायन मैकगिनेस के रूप में हुई है, जो 2000 से 2004 तक यूनाइटेड स्टेट्स मरीन कॉर्प्स में सार्जेंट रह चुके हैं। मैकगिनेस सुनवाई के दौरान ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का विरोध कर रहे थे। जब यूएस कैपिटल पुलिस ने उन्हें बाहर निकालने की कोशिश की, तो उन्होंने दरवाजे के फ्रेम को पकड़ लिया। इसी दौरान हाथ फंसने से उनका हाथ टूट गया। सीनेटर भी हटाने में शामिल वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि पुलिस अधिकारियों के साथ अमेरिकी सांसद टिम शीही भी प्रदर्शनकारी पूर्व सैनिक को बाहर निकालने में मदद करते नजर आ रहे हैं। जब झड़प चल रही थी, तब कमरे में मौजूद लोगों की आवाजें सुनाई दे रही हैं। लोग कह रहे हैं, "उसका हाथ… उसका हाथ… ओह माय गॉड!” दूसरी तरफ, पुलिस अधिकारी बार-बार प्रदर्शनकारी से दरवाजा छोड़ने के लिए कहते हुए सुनाई देते हैं। इसी दौरान पूर्व मरीन मैकगिनेस का हाथ टूट जाता है। “कोई इजरायल के लिए लड़ना नहीं चाहता” बाहर ले जाए जाने के दौरान मैकगिनेस चिल्लाते हुए कहते सुने गए, “कोई भी सैनिक इजरायल के लिए लड़ना नहीं चाहता।” यह बयान पश्चिम एशिया में जारी अमेरिकी सैन्य अभियानों को लेकर उनके विरोध को दर्शाता है। दूसरी तरफ इस घटना के बाद सीनेटर शीही ने सफाई दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी कार्रवाई का बचाव किया। उन्होंने लिखा कि कैपिटल पुलिस एक असंतुलित प्रदर्शनकारी को हटाने की कोशिश कर रही थी और वह स्थिति को शांत करने में मदद कर रहे थे। उन्होंने कहा, “यह व्यक्ति टकराव के इरादे से कैपिटल आया था और उसे वही मिला। उम्मीद है कि उसे मदद मिलेगी और आगे कोई हिंसा नहीं होगी।” इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया है और अमेरिका में ईरान नीति तथा युद्ध विरोधी भावनाओं को लेकर नई बहस छिड़ गई है। विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना अमेरिकी राजनीति में बढ़ते ध्रुवीकरण और पश्चिम एशिया के संघर्ष को लेकर गहरी असहमति को भी दर्शाती है।

नई टेक्नोलॉजी पर साथ आए भारत और फिनलैंड, एआई और 6जी में साझेदारी होगी मजबूत: पीएम मोदी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि भारत और फिनलैंड डिजिटाइजेशन और स्थिरता में रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर काम कर रहे हैं, इससे दोनों देशों के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, 6जी, क्लीन एनर्जी और क्वांटम कंप्यूटिंग में सहयोग बढ़ेगा। फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब के साथ द्विपक्षीय बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देश के बीच हाई-टेक सेक्टर्स में बढ़ रहे सहयोग का जिक्र किया और कहा कि इससे दोनों देशों के संबंधों को नई ऊर्जा मिली है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस साल की शुरुआत में भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच हुए ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) से भारत एंव फिनलैंड के बीच व्यापार निवेश और टेक्नोलॉजी में साझेदारी बढ़ेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "फिनलैंड के राष्ट्रपति के रूप में अपनी पहली भारत यात्रा पर आए राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब का स्वागत करता हूं। आप जैसे अनुभवी नेता का इस वर्ष के रायसीना डायलॉग का मुख्य अतिथि बनना सम्मान और खुशी की बात है। यूक्रेन से लेकर वेस्ट एशिया तक दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में भारत और यूरोप अपने संबंधों के सुनहरे दौर में प्रवेश कर रहे हैं।" दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठक हैदराबाद हाउस में हुई, जहां भारत एवं फिनलैंड के बीच द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के लिए विभिन्न मुद्दों पर बातचीत हुई। विदेश मंत्रालय के अनुसार, वार्ता में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से कई मुद्दों पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचार-विमर्श किया और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने वार्ता के बाद राष्ट्रपति स्टब के सम्मान में लंच का आयोजन भी किया। इससे पहले, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने फिनलैंड के राष्ट्रपति से मुलाकात की और प्रधानमंत्री के साथ उच्च स्तरीय बैठक से पहले द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की।विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि वे रायसीना डायलॉग में राष्ट्रपति स्टब के संबोधन का भी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जहां अतिथि नेता मुख्य भाषण देने वाले हैं।