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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का भव्य आयोजन: कोलकाता में पीएम मोदी की अगुवाई, दिल्ली में अक्षय कुमार भी होंगे शामिल

कोलकाता  पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में रविवार को आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मुख्य कार्यक्रम में नया रिकॉर्ड बन सकता है। कोलकाता में करीब 10 लाख लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ योगाभ्यास करेंगे। आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने यह जानकारी दी। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रम के बारे में सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा, 'यह पहली बार है जब पश्चिम बंगाल के कोलकाता में यह इवेंट हो रहा है और यहां हमारे प्रधानमंत्री का स्वागत करने के लिए बहुत उत्साह है।' उन्होंने कहा कि आज, 20 जून को एक बड़ा कार्निवल होने वाला है। एक बड़ा ड्रोन शो भी होगा। वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने की कोशिश में लगभग 500 नावें एक साथ आएंगी। पीएम मोदी करेंगे इवेंट की अगुवाई आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने यह भी बताया कि रविवार सुबह प्रधानमंत्री यहां इस इवेंट की अगुवाई करेंगे। इस जगह पर रविवार को 35 हजार लोग इकट्ठा होंगे। वहीं, पूरे कोलकाता में 10 लाख लोग प्रधानमंत्री मोदी के साथ योग करेंगे। पोर्टल पर अब तक 7 लाख लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराए हैं। रात तक यह संख्या 10 लाख के करीब तक पहुंच जाएगी। जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम 3,000 लोग करेंगे योग वहीं खेल मंत्री मनसुख मांडविया रविवार को दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर ‘योगा फोर हेल्दी ऐजिंग’ थीम के तहत 3,000 लोगों के साथ योग कार्यक्रम की अगुवाई करेंगे। खेल मंत्रालय पूरे देश में भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) के सभी क्षेत्रीय केंद्रों, राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र, साइ ट्रेनिंग केंद्र और खेलो इंडिया संस्थानों में एक साथ योग कार्यक्रम आयोजित करके अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाएगा। इसमें पूरे देश से 15,000 से अधिक लोगों के शामिल होने की उम्मीद है अक्षय कुमार भी होंगे शामिल बॉलीवुड अभिनेता और फिटनेस आइकॉन अक्षय कुमार दिल्ली में योग कार्यक्रम में मांडविया के साथ शामिल होंगे। योग को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय खेल महासंघ, राज्य के खेल विभाग और खेल विश्वविद्यालय भी एक साथ कार्यक्रम आयोजित करेंगे। मांडविया ने एक बयान में कहा, ‘‘जब से संयुक्त राष्ट्र ने हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रस्ताव के बाद 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में अपनाया है, तब से यह सालाना आयोजन शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक सेहत के लिए दुनिया भर में मनाए जाने वाले उत्सव के रूप में विकसित हुआ है। 'उन्होंने कहा, 'यह दिन अलग-अलग महाद्वीपों के लाखों योग करने वालों को एक साथ लाता है। योग भौगोलिक सीमाओं से परे जाकर एक वैश्विक कार्यक्रम बन गया है।' राजधानी में होने वाले ‘फिट इंडिया’ कार्यक्रम में लगभग 3,000 लोगों के जुटने की उम्मीद है। इस कार्यक्रम में मशहूर योग प्रशिक्षक अंशुका परवानी एक खास योग सत्र भी कराएंगी।  

लेबर पार्टी में बढ़ा बगावत का दबाव, एंडी बर्नहैम की चुनौती के बीच स्टार्मर का भविष्य अधर में

 नई दिल्ली ब्रिटेन में जारी गहरे राजनीतिक गतिरोध के बीच ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर (Keir Starmer) के सोमवार को अपने पद से इस्तीफा देने की संभावना है। ब्रिटेन के प्रतिष्ठित अखबार द ऑब्जर्वर ने अपनी रिपोर्ट में वरिष्ठ लेबर पार्टी के सूत्रों के हवाले से यह दावा किया है। हालांकि, सरकारी सूत्रों का कहना है कि स्टार्मर का पूरा ध्यान अभी भी सरकार चलाने और अपनी जिम्मेदारियों पर केंद्रित है। आपको बता दें कि पिछले कई महीनों से प्रधानमंत्री स्टार्मर के खिलाफ लेबर पार्टी के भीतर ही असंतोष पनप रहा था, जो शुक्रवार को उस समय चरम पर पहुंच गया जब उनके सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी एंडी बर्नहैम ने उपचुनाव में संसद की सीट जीत ली। इस जीत के बाद बर्नहैम के लिए स्टार्मर के खिलाफ औपचारिक रूप से नेतृत्व की चुनौती पेश करने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री स्टार्मर इस समय अपने आधिकारिक ग्रामीण निवास चेकर्स में हैं और कोई भी अंतिम निर्णय लेने से पहले अपनी पत्नी के साथ इस विषय पर गहन चर्चा कर रहे हैं। लेबर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को उम्मीद है कि सोमवार तक उनके भविष्य को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी। रिपोर्ट के अनुसार, स्टार्मर ने कैबिनेट मंत्रियों, सलाहकारों, चंदा देने वाले दानदाताओं और ट्रेड यूनियन के नेताओं से बातचीत के बाद यह निष्कर्ष निकाला है कि प्रधानमंत्री पद पर बने रहने के लिए उनकी स्थिति अब व्यावहारिक नहीं रह गई है। हालांकि, इससे पहले शुक्रवार को स्टार्मर ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा था कि वे अपनी लीडरशिप के खिलाफ किसी भी चुनौती का डटकर मुकाबला करेंगे। उन्होंने लेबर पार्टी से गुटबाजी और आपसी कलह में न उलझने की अपील भी की थी। रिकॉर्ड गिरावट पर पहुंची कीर स्टार्मर की लोकप्रियता साल 2024 के आम चुनाव में वाम-झुकाव वाली लेबर पार्टी को प्रचंड बहुमत से ऐतिहासिक जीत दिलाने वाले कीर स्टार्मर बहुत कम समय में बेहद अलोकप्रिय हो चुके हैं। सरकार के कई घोटालों, विवादों और अपनी ही नीतियों से बार-बार पीछे हटने के कारण मतदाताओं में यह संदेश गया है कि स्टार्मर जनता के जीवन स्तर को सुधारने के अपने वादों को पूरा करने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं। रॉयटर्स के आंकड़ों के मुताबिक, लेबर पार्टी के ही 100 से अधिक निर्वाचित सांसद सार्वजनिक रूप से स्टार्मर के इस्तीफे या उनके हटने का शेड्यूल तय करने की मांग कर चुके हैं। यदि स्टार्मर इस्तीफा देते हैं या उन्हें पद से हटाया जाता है तो ब्रिटेन को पिछले एक दशक में अपना सातवां प्रधानमंत्री मिलेगा। सार्वजनिक सेवाओं की बदहाली और अवैध अप्रवासन जैसी समस्याओं से जूझ रहे ब्रिटिश इतिहास में यह पिछले दो सौ वर्षों में सबसे कम समय में सबसे अधिक प्रधानमंत्री बदलने का रिकॉर्ड होगा। कतार में हैं एंडी बर्नहैम और वेस स्ट्रीटिंग 56 वर्षीय एंडी बर्नहैम को लेबर पार्टी में स्टार्मर के सबसे मजबूत उत्तराधिकारी के रूप में देखा जा रहा है। उत्तरी इंग्लैंड में ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर के रूप में अपनी मजबूत राजनीतिक जमीन तैयार करने वाले बर्नहैम ने शुक्रवार को मेकरफील्ड उपचुनाव में दक्षिणपंथी लोकलुभावन नेता नाइजेल फराज की 'रिफॉर्म यूके' पार्टी को करारी शिकस्त देकर संसद में वापसी की है। बर्नहैम ने अभी तक सीधे स्टार्मर को चुनौती नहीं दी है, लेकिन अपने विजय भाषण में उन्होंने देश के लिए एक नए रास्ते का वादा किया है। उनके समर्थकों ने स्टार्मर से गरिमा के साथ खुद पद छोड़कर सत्ता सौंपने की अपील की है। 'द टाइम्स' अखबार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यदि बर्नहैम देश के प्रधानमंत्री बनते हैं तो वे सबसे पहले वित्त मंत्री राहेल रीव्स को बर्खास्त कर सकते हैं, क्योंकि बर्नहैम के सलाहकारों का मानना है कि रीव्स की नीतियां देश में जरूरी बदलाव लाने के अनुकूल नहीं हैं।

‘कांग्रेस ने बंटवारे के समय बंगाल को बेसहारा छोड़ा’ कोलकाता से पीएम मोदी का बड़ा बयान

पश्चिम बंगाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बंगाल में कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मुखर्जी के सिद्धातों को ही अपनाकर बीजेपी ने बंगाल में चुनाव लड़ा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जिस समय बंगाल को पाकिस्तान का हिस्सा बनाने की कोशिशें हो रही थीं, तब कांग्रेस ने साजिश रचने वाली ताकतों को सामने घुटने टेक दिए थे। तभी श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने इसके खिलाफ आवाज उठाई थी। बंटवारे के समय कांग्रेस ने बंगाल को बेसहारा छोड़ा- पीएम मोदी उन्होंने कहा कि बंटवारे के समय कांग्रेस ने बंगाल को बेसहारा छोड़ दिया था और आजादी के बाद तुष्टीकरण की राजनीति की।' पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस ने लोगों को गलत इतिहास पढ़ाने की कोशिश की। हालांकि सच को छिपाया नहीं जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज बंगाल अपने बेड़ियों से मुक्त हो गया है और विकास की नई यात्रा पर निकल पड़ा है। 'बेड़ियों से आजाद हो गया बंगाल' प्रधानमंत्री ने कहा, 'चुनाव और सरकार गठन के बाद, आज मुझे पहली बार आपके बीच आने का सौभाग्य मिला है। बंगाल की हवा में अब एक नई ताजगी है। ऐसा लगता है मानो बंगाल अब अपनी बेड़ियों से आजाद हो गया है और बंगाल का गौरव फिर से लौटने लगा है।' विधानसभा चुनावों में भाजपा की जीत का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि राज्य में हो रहा बदलाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया की ताकत को दिखाता है। सीमा पर बाड़ लगाने में रुकावट डाल रही थी ममता सरकार उन्होंने कहा, 'बंगाल के लोगों के चेहरों पर चमक है और गांवों में खुशी और भरोसे का माहौल है… बंगाल में यह साफ दिखता है कि आपका एक वोट कैसे बदलाव ला सकता है।' पीएम मोदी ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के काम में तेजी के लिए राज्य सरकार की कोशिशों का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने इस प्रक्रिया में रुकावट डाली थी। प्रधानमंत्री ने कहा, 'आपने देखा होगा कि पिछली सरकार ने सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जमीन सौंपने के काम को रोक दिया था। मौजूदा सरकार के कार्यकाल में वह प्रक्रिया शुरू हो गई है।' पीएम मोदी ने यह भी कहा कि राज्य में भ्रष्टाचार और सरकारी धन के गबन के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। पीएम मोदी ने 20 जून के 'पश्चिमबंग दिवस' के ऐतिहासिक महत्व पर जोर दिया और कहा कि नयी पीढ़ी को उन हालात के बारे में पता होना चाहिए जिनकी वजह से यह राज्य बना। मोदी ने कहा, 'हमें बार-बार 'पश्चिमबंग दिवस' के महत्व को रेखांकित करने की आवश्यकता है। युवा पीढ़ी के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि उस दौरान क्या हुआ था।' बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को कोलकाता में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रम में शामिल हुए और हजारों लोगों के साथ योग किया। इसके बाद वह श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट पर जाएंगे।

India receives a new defense offer: a Belgian company has presented a 105mm tank turret.

 नई दिल्ली भारत अपनी पर्वतीय युद्ध क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है। चीन से साथ LAC पर घटते-बढ़ते तनाव और हिमालयी क्षेत्रों में सैन्य तैनाती की चुनौतियों के बीच हल्के और अधिक प्रभावी हथियारों की जरूरत महसूस की जा रही है। इस बीच बेल्जियम की डिफेंस कंपनी जॉन कॉकरिल ने भारत को अपने उन्नत 105 मिमी टैंक टरेट बेचने की पेशकश की है। कंपनी का दावा है कि यह टरेट विशेष रूप से पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में युद्ध संचालन के लिए डिजाइन किया गया है तथा हिमालयी क्षेत्र जैसी परिस्थितियों में प्रभावी साबित हो सकता है। कंपनी के अनुसार, इस टरेट की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक इसकी 42 डिग्री तक ऊंचाई पर फायर करने की क्षमता है। सामान्य टैंकों की तुलना में अधिक ऊंचाई पर निशाना साधने की यह क्षमता पहाड़ी युद्धक्षेत्र में महत्वपूर्ण मानी जाती है, जहां दुश्मन ऊंटी चोटियों और ढलानों पर तैनात हो सकता है। जॉन कॉकरिल के इस सिस्टम में ऑटोमैटिक लोडर लगाया गया है, जिससे गोला-बारूद लोड करने की प्रक्रिया तेज होती है और चालक दल का कार्यभार कम होता है। इसके अलावा इसमें अत्याधुनिक फायर कंट्रोल सिस्टम भी मौजूद है, जो कठिन भौगौलिक परिस्थितियों में भी सटीक निशाना लगाने में मदद करता है। क्या है टैंक टरेट? टरेट किसी भी टैंक का वह हिस्सा होता है जिसमें मुख्य तोप, फायर कंट्रोल सिस्टम और कई अन्य हथियार प्रणालियां लगी होती हैं। यह 360 डिग्री तक घूम सकती है और विभिन्न दिशाओं में निशाना साध सकता है। जॉन कॉकरिल का प्रस्ताव एक टैंक नहीं, बल्कि एक ऐसा टरेट सिस्टम है, जिसे अलग-अलग बख्तरबंद वाहनों पर भी लगाया जा सकता है। जॉन कॉकरिल के 105 मिमी टरेट की खासियत? कंपनी के मुताबिक, यह सिस्टम खास तौर पर कठिन और पहाड़ी इलाकों में युद्ध के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी प्रमुख विशेषताएं…     105 मिमी की मुख्य तोप     42 डिग्री तक ऊंचाई पर फायर करने की क्षमता     ऑटोमैटिक लोडर     आधुनिक फायर कंट्रोल सिस्टम     हल्के प्लेटफॉर्म पर लगाने की सुविधा 42 डिग्री एलीवेशन क्यों महत्वपूर्ण है? सामान्य टैंकों की तोपें सीमित ऊंचाई तक ही ऊपर उठ सकती हैं। लेकिन पहाड़ी युद्ध में दुश्मन अक्सर ऊंची चोटियों और ढलानों पर मौजूदा होता है। ऐसी स्थिति में 42 डिग्री तक ऊंचाई पर फायर करने की क्षमता टैंक को ऊंचाई पर स्थिति लक्ष्यों पर हमला करने में मदद कर सकती है। यही कारण है कि कंपनी इसे हिमालय जैसे क्षेत्रों के लिए उपयुक्त बता रही है। ऑटोमैटिक लोडर से क्या फायदा होगा? परंपरागत टैंकों में गोला-बारूद लोड करने के लिए एक अलग क्रू सदस्य की जरूरत होती है। जबकि ऑटोमैटिक लोडर फायरिंग की गति बढ़ाता है। चालक दल की संख्या कम कर सकता है। सीमित जगह वाले हल्के टैंकों में उपयोगी साबित होता है। कठिन परिस्थितियों में संचालन को आसान बनाता है। भारतीय सेना को इसकी जरूरत क्यों पड़ सकती है? भारतीय सेना लंबे समय से ऐसे प्लेटफॉर्म की तलाश में है जो ऊंचाई वाले क्षेत्रों में आसानी से तैनात किए जा सकें। वजन में अपेक्षाकृत हल्के हों और तेजी से मूव कर सकें। जिससे पहाड़ी इलाकों में प्रभावी फायर सपोर्ट दे सकें। लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश जैसे क्षेत्रों में ऐसी क्षमताओं का विशेष महत्व है। जॉन कॉकरिल का 105 मिमी टरेट भारतीय सेना की पर्वतीय युद्ध जरूरतों को ध्यान में रखकर पेश किया गया एक दिलचस्प प्रस्ताव है। इसकी हाई एलीवेशन कैपेसिटी, ऑटोमैटिक लोडर और आधुनिक फायर कंट्रोल सिस्टम इसे हिमालयी युद्धक्षेत्र के लिए आकर्षक बनाते हैं। हालांकि, अंतिम फैसला भारतीय सेना के परीक्षणों और परिचालन जरूरतों पर निर्भर करेगा। यदि यह प्रणाली अपेक्षाओं पर खरी उतरती है, तो भारत की पर्वतीय युद्ध क्षमताओं को मजबूत करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।

संसद समिति में विदेश मंत्रालय का बयान, चीन-पाकिस्तान नीति पर सरकार ने साफ किया स्टैंड

नई दिल्ली भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को लेकर अपना रुख साफ कर दिया है। सरकार ने कहा कि जब तक सीमा पार आतंकवाद पूरी तरह खत्म नहीं होता, तब तक दोनों देशों के बीच सामान्य माहौल या लोगों के स्तर पर संपर्क बहाल नहीं हो सकता। आरएसएस नेताओं की पाकिस्तान के साथ अधिक जुड़ाव संबंधी हालिया टिप्पणियों पर पूछे गए सवालों के जवाब में सरकार ने यह स्पष्ट रुख रखा। संसद की स्थायी समिति की बैठक में विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भारत-पाकिस्तान और भारत-चीन संबंधों पर विस्तार से जानकारी देते हुए सरकार की नीति और सुरक्षा संबंधी प्राथमिकताओं को सामने रखा। पाकिस्तान से रिश्तों पर सरकार का स्पष्ट संदेश विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति की बैठक में अधिकारियों ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच लोगों के स्तर पर संपर्क तभी संभव है, जब आतंकवाद और हिंसा का डर पूरी तरह समाप्त हो जाए। मौजूदा हालात में ऐसा वातावरण नहीं है, इसलिए किसी भी तरह के सामान्य संपर्क की संभावना फिलहाल नहीं दिखती। ट्रैक-2 और ट्रैक-1.5 वार्ता पर भी लगी रोक बैठक के दौरान अधिकारियों ने बताया कि मौजूदा परिस्थितियों में भारत और पाकिस्तान के बीच ट्रैक-2 कूटनीतिक संवाद से भी किसी सकारात्मक नतीजे की उम्मीद नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच इस समय ट्रैक-1.5 स्तर की भी कोई वार्ता नहीं चल रही है। विदेश सचिव ने समिति को दी विस्तार में जानकारी विदेश सचिव विक्रम मिसरी और विदेश मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति को भारत-पाकिस्तान और भारत-चीन संबंधों पर विस्तार से जानकारी दी। बैठक के बाद शशि थरूर ने कहा कि यह ब्रीफिंग समिति के जम्मू-कश्मीर, लेह और कारगिल दौरे से पहले काफी उपयोगी साबित होगी। उन्होंने भारत-चीन संबंधों को 'संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण' बताया। चीन के साथ 35 दौर की वार्ता का ब्यौरा सरकार ने समिति को बताया कि जून 2020 से अब तक भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव कम करने के लिए 35 दौर की वार्ता हो चुकी है। यह बातचीत वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन (WMCC) और वरिष्ठ सैन्य कमांडरों की बैठकों के माध्यम से हुई है। ताजा बैठक 27 मई को बीजिंग में आयोजित की गई थी। सीमा पर शांति, लेकिन विवाद अब भी बरकरार अधिकारियों ने कहा कि दोनों देशों ने सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने की दिशा में हुई प्रगति पर संतोष जताया है, जिससे द्विपक्षीय संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य बनाने में मदद मिली है। बातचीत में सीमांकन, विश्वास बहाली के उपाय और सीमा पार आदान-प्रदान जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। लद्दाख और अरुणाचल को लेकर चीन के दावे पर प्रतिक्रिया विदेश मंत्रालय ने समिति को दिए अपने नोट में दोहराया कि चीन अब भी लद्दाख में भारत के लगभग 38 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर अवैध कब्जा किए हुए है। इसके अलावा वह अरुणाचल प्रदेश के करीब 90 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर भी दावा करता है। भारत ने चीन के साथ जल संबंधी आंकड़ों के आदान-प्रदान और यारलुंग जांगबो नदी पर बन रही बड़ी परियोजनाओं को लेकर भी अपनी चिंताएं दर्ज कराई हैं। सिंधु जल संधि पर भी सरकार का सख्त रुख बैठक में अधिकारियों ने दोहराया कि भारत ने सिंधु जल संधि को फिलहाल स्थगित रखा है। सरकार का कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह और स्थायी रूप से बंद नहीं करता, तब तक इस संधि को सामान्य रूप से लागू करने का सवाल ही नहीं उठता।  

ट्रंप का दावा मेलोनी ने फोटो के लिए मिन्नतें कीं, इटली PM ने किया खंडन

वॉशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जियो मेलोनी हाल ही में फ्रांस में हुई G7 समिट में मिले थे। इस ग्लोबल समिट में शामिल होने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी गए थे। फ्रांस में समिट के पूरा होने के बाद डोनल्ड ट्रंप और जॉर्जियो मेलोनी के बीच फोटो खिंचवाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ट्रंप ने दावा किया कि इटली की प्रधानमंत्री ने उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए मिन्नतें कीं। 'वह फिर से दोस्त बनना चाहती हैं' ट्रंप के इस बयान के सामने के बाद जॉर्जिया मेलोनी ने शुक्रवार, 19 जून को सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर करके ट्रंप के इन सभी दावों को खारिज कर दिया और कहा- न मैं और न ही इटली ने कभी किसी से भीख मांगी है। अब इस मामले को लेकर ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट शेयर किया है और कहा है कि जॉर्जिया मेलोनी उनसे फिर से दोस्ती करना चाहती हैं। 'मेलोनी ने बार-बार फोटो लेने के लिए कहा' अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, 'फ्रांस में G-7 मीटिंग के दौरान इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने बार-बार मेरे साथ तस्वीर खिंचवाने की गुजारिश की।' ट्रंप ने आगे बताया, 'इटली में उनकी लोकप्रियता का स्तर गिर रहा है, शायद इसलिए क्योंकि जब ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने या बनाने से रोकने की बात आई, तो उन्होंने अमेरिका का साथ देने से इनकार कर दिया (हालांकि NATO ने भी ऐसा ही किया था!)।' अमेरिकी राष्ट्रपति ने आगे लिखा, 'उन्होंने हमें इटली के लैंडिंग स्ट्रिप्स या रनवे का इस्तेमाल भी नहीं करने दिया, जिससे बहुत बड़ी लॉजिस्टिकल दिक्कत हुई और यह तब हुआ जब अमेरिका इटली और दूसरे तथाकथित NATO सहयोगियों की सुरक्षा के लिए हर साल अरबों डॉलर खर्च करता है।' ट्रंप ने आगे बताया, 'अब, जब अमेरिका ने ईरान को सैन्य रूप से हरा दिया है, तो वह अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए फिर से दोस्ती करना चाहती हैं। नहीं, शुक्रिया!'

पाकिस्तान में रिश्तेदारों के बीच शादी का बढ़ता चलन, वैज्ञानिकों ने बताए इसके गंभीर प्रभाव

कराची  Cousin Marriage in Pakistan: दुनिया भर में कजिन मैरिज (चचेरे-ममेरे, फुफेरे-मौसेरे भाई-बहनों के बीच शादी) के मामले में पाकिस्तान पहले पायदान पर आता है. अमेरिका की प्रतिष्ठित संस्था 'वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू' में 2023 में छपे आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान में रक्त संबंधों के भीतर निकाह करने की दर करीब 61.2% है।  समय-समय पर सामने आईं तमाम साइंटिफिक रिसर्च इस बात की पुष्टि करती हैं कि एक ही जेनेटिक पूल या खून के रिश्तों में शादी करना आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है. डॉक्टरों और वैज्ञानिकों का मानना है कि इन शादियों से पैदा होने वाले बच्चों में जेनेटिक डिसॉर्डर यानी गंभीर आनुवांशिक विकार और कई जानलेवा बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।  लेकिन एक नई रिसर्च में सामने आया है कि पाकिस्तान में लगभग 34,000 लोग 'ह्यूमन नॉकआउट' हैं, यानी ऐसे लोग जिनमें कम से कम एक जीन ने काम करना बंद कर दिया है और इससे उनकी सेहत पर कोई खास असर नहीं हुआ है। क्या है 'ह्यूमन नॉकआउट' विज्ञान की भाषा में कहें तो जब शरीर का कोई खास जीन पूरी तरह निष्क्रिय हो जाता है या गायब हो जाता है तो उसे ह्यूमन नॉकआउट (Human Knockout) कहा जाता है. आम तौर पर इंसानों में हर जीन की दो कॉपियां (एक माता से और एक पिता से) होती हैं. रक्त संबंधों में शादी होने की वजह से बच्चों को माता-पिता दोनों से एक जैसा म्यूटेशन मिलता है जिससे उनके शरीर में कोई खास जीन पूरी तरह गायब हो जाता है।  17 जून को 'नेचर' में छपी एक स्टडी के मुताबिक, ये निष्कर्ष सबसे बड़े दक्षिण एशियाई जीनोमिक अध्ययनों में से एक का हिस्सा हैं जिसमें देश के 1,73,303 जीनोम का आकलन किया गया. इस शोध का मकसद मानव आनुवंशिकी के विकास को समझना और इससे जरूरी दवाओं के निर्माण में मदद करना था।  स्टडी में मिले चौंकाने वाले नतीजे कोलंबिया यूनिवर्सिटी वैगेलोस कॉलेज ऑफ फिजिशियन एंड सर्जन्स में मेडिकल साइंसेज के प्रोफेसर और ग्लोबल जीनोमिक्स के डायरेक्टर दानिश सालेहीन ने एक प्रेस रिलीज में कहा, 'जीनोम स्टडीज में दक्षिण एशियाई लोगों की भागीदारी बहुत कम रही है. दुनिया की आबादी का 25 प्रतिशत हिस्सा होने के बावजूद ग्लोबल जीनोमिक डेटाबेस में उनकी हिस्सेदारी सिर्फ 2 प्रतिशत है. लेकिन दक्षिण एशियाई जीनोम की खास विशेषताएं जो आबादी के इतिहास और सांस्कृतिक रीति-रिवाजों से बनी हैं. दुनिया भर में मेडिकल क्षेत्र में ऐसी बड़ी कामयाबियों का आधार बन सकती हैं जिनसे हर जगह के मरीजों को फायदा हो।  भारत में इसी तरह की एक रिसर्च 'जीनोम इंडिया प्रोजेक्ट' में देश भर के 83 ग्रुप्स के 9,768 स्वस्थ लोगों के पूरे DNA का एनालिसिस किया गया. इसमें लगभग 4.4 करोड़ ऐसे जेनेटिक वैरिएंट्स मिले जो ग्लोबल डेटाबेस में नहीं थे जो काफी चौंकाने वाली बात है।  जेनेटिक रिसर्च में कमियां कराची में सेंटर फॉर नॉन-कम्युनिकेबल डिसीजेज में सालेहीन के 'पाकिस्तान जीनोम रिसोर्स' बनाने की शुरुआत किए हुए दो दशक हो चुके हैं. उन्हें तब जो बात समझ आई थी, उसका इशारा 1960 के दशक से ही अमेरिका की अमिश समुदाय पर हुई स्टडीज कर रही थीं और वह ये है कि जिन समुदायों में चचेरे भाई-बहनों या रिश्तेदारों के बीच शादी की दर ज्यादा होती है, वहां जेनेटिक स्टडीज के मामले में रिसर्चर्स को एक खास तरह का फायदा मिलता है।  एक ही खानदान में शादी की वजह से एक ऐसे समुदायों में जीन की बनावट एक जैसी होने के कारण दुर्लभ आनुवंशिक म्यूटेशन और उनके इंसानी शरीर पर होने वाले असर को खोजना और समझना वैज्ञानिकों के लिए बहुत आसान हो जाता है, जो सामान्य आबादी में ढूंढ पाना नामुमकिन के बराबर है।  निकट संबंधी माता-पिता के बच्चों को समान जेनेटिक म्यूटेशन (आनुवंशिक उत्परिवर्तन) विरासत में मिलते हैं, जिनमें वे बदलाव भी शामिल हैं जिनमें कुछ जीन निष्क्रिय हो जाते हैं. ऐसे 'नॉक आउट' मामले वैज्ञानिकों को यह देखने का अवसर देते हैं कि एक इंसान एक विशेष जीन के बिना कैसे काम करता है और क्या कुछ ऐसे जीन हैं जिन्हें बीमारियों के इलाज के लिए 'बंद' यानी निष्क्रिय किया जा सकता है।  रिसर्च करने वालों ने पाया कि पाकिस्तान जीनोम रिसोर्स में शामिल लगभग हर पांच में से एक व्यक्ति में कम से कम एक जीन गायब है. स्टडी के दौरान, उन्होंने ऐसे लगभग 6,500 जीनों की पहचान की जो निष्क्रिय (स्विच ऑफ) हो गए थे।  सालीहीन ने कहा, 'हमारी पाकिस्तान स्टडी की खास बात यह है कि हम रिसर्च में शामिल प्रतिभागियों के पास वापस जा सकते हैं और डिटेल मेडिकल जांच कर सकते हैं ताकि यह देखा जा सके कि जीन के गायब होने का व्यक्ति पर किस तरह का असर पड़ सकता है।  ‘नॉकआउट’ वैज्ञानिकों के लिए क्यों हैं मौका? अक्सर जीन से जुड़ी खोजें तब होती हैं जब वैज्ञानिक चूहों में कुछ खास जीन को हटाकर यह देखते हैं कि इससे उनकी सेहत पर क्या असर पड़ता है. लेकिन रिसर्च से पता चल रहा है कि इंसानों और चूहों में जीन अक्सर अलग-अलग तरह से काम करते हैं. इसी वजह से चूहों पर असर करने वाली कई दवाएं इंसानों पर काम नहीं करतीं जिससे लाखों डॉलर, समय और मेहनत बर्बाद हो जाती है।  सालेहीन ने बताया, 'हम ऐसे लोगों की पहचान करना चाहते हैं जिनमें जीन की काम करने वाली कॉपी नहीं होती और यह देखना चाहते हैं कि क्या इसका उनकी सेहत पर कोई असर पड़ता है।  हाल की स्टडी में ठीक यही किया गया. रिसर्च के दौरान सामने आया, RXFP1 जीन, जो पहले चूहों के दिल के काम करने के लिए जरूरी माना जाता था, जिन लोगों में नहीं था, उनमें कोई स्वास्थ्य समस्या नहीं देखी गई. यहां तक कि PRDM9 जीन, जो चूहों की प्रजनन क्षमता के लिए जरूरी है, उसका इंसानों की प्रजनन क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ा।  इस तरह की रिसर्च दवाओं की खोज और निर्माण के लिए बहुत बड़े क्लू देती हैं. स्टडी में पाया गया कि जिन लोगों में CIDEB जीन नहीं होता, वो लिवर की बीमारियों से सुरक्षित रहते हैं. इससे पता चलता है कि CIDEB इनहिबिटर्स फैटी लिवर की बीमारी का इलाज हो सकते हैं।  कुछ मामलों में जीन की कमी डॉक्टरों को सावधान भी … Read more

दुनिया की सबसे ऊंची बिल्डिंग बनने की ओर जेद्दा टावर, बुर्ज खलीफा का रिकॉर्ड टूटना तय?

दुबई  सऊदी अरब में एक ऐसा नया टावर बन रहा है, जो बुर्ज खलीफा को भी पीछे छोड़ने के लिए बिल्कुल तैयार है. रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब के जेडा टावर (Jeddah Tower) का काम अब अपने आखिरी और सबसे ऊपरी हिस्सों की तरफ बहुत तेजी से बढ़ रहा है।  जब यह गगनचुंबी इमारत पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगी, तो इसकी ऊंचाई 1,000 मीटर (यानी 3,281 फीट) से भी ज्यादा होगी. वर्तमान में दुनिया की सबसे ऊंची इमारत दुबई का 'बुर्ज खलीफा' है, जिसकी ऊंचाई 828 मीटर है. यानी जेडा टावर बुर्ज खलीफा से भी बहुत ज्यादा ऊंचा होने वाला है।  इस शानदार टावर को एड्रियन स्मिथ और गॉर्डन गिल नाम के मशहूर आर्किटेक्ट्स ने डिजाइन किया है. दिलचस्प बात यह है कि एड्रियन स्मिथ वही शख्स हैं जिन्होंने दुबई के बुर्ज खलीफा को भी डिजाइन किया था.  रिपोर्ट के अनुसार, जेडा टावर ने अभी से ही आसमान छूना शुरू कर दिया है. यह टावर अपनी 104वीं मंजिल के बेहद करीब पहुंच चुका है, यानी इसकी ऊंचाई अभी ही 400 मीटर से ज्यादा हो चुकी है।  हर हफ्ते इस टावर की ऊंचाई लगभग 4 मीटर बढ़ रही है. इस रफ्तार से देखा जाए तो अगले 25 हफ्तों में यह टावर 500 मीटर का आंकड़ा पार कर लेगा. जेडा टावर का बनना सिर्फ एक रिकॉर्ड तोड़ने का खेल नहीं है, बल्कि यह सऊदी अरब के एक बहुत बड़े प्लान का हिस्सा है. सऊदी अरब इस समय 'विज़न 2030' पर काम कर रहा है, जिसके तहत वह अपनी कमाई के लिए सिर्फ तेल पर निर्भर नहीं रहना चाहता. वे अपने देश में टूरिज्म और बिजनेस को बढ़ावा देना चाहते हैं. यह टावर 53 लाख वर्ग मीटर में बन रहे एक आलीशान और आधुनिक शहर 'जेडा इकोनॉमिक सिटी' का सबसे मुख्य हिस्सा है।  क्या है इसकी खूबियां रिपोर्ट्स के मुताबिक जेडा टावर (Jeddah Tower) इंजीनियरिंग और वास्तुकला के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचने जा रहा है, जिसकी सबसे बड़ी खूबी इसका अगस्त 2028 तक पूरा होने का लक्ष्य और मौजूदा समय में इसकी निर्माण की तूफानी रफ्तार है. यह गगनचुंबी इमारत कम से कम 167 मंजिला होगी, जिसमें 130 से लेकर 160 से अधिक मंजिलें रहने या इस्तेमाल करने योग्य होंगी और इसके केंद्रीय कोर पर औसतन प्रति सप्ताह एक मंजिल बनाने का काम चल रहा है।  इस टावर की इंजीनियरिंग का सबसे अनोखा और ऐतिहासिक पहलू कंक्रीट को सीधे एक किलोमीटर की अभूतपूर्व ऊंचाई तक पंप करना है, जो निर्माण इतिहास में आज तक इस पैमाने पर कभी नहीं किया गया. इसके अलावा, टावर के ऊपरी हिस्से को मजबूती देने के लिए इसके डिजाइन में एक विशेष 'स्काई राफ्ट' तकनीक को शामिल किया गया है, जो इसके सबसे ऊपरी नुकीले शिखर को सुरक्षित और मजबूत सहारा देगा। 

उत्तर भारत में गर्मी से राहत की तैयारी, IMD ने बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया

नई दिल्ली यूपी समेत उत्तर भारत के कई राज्यों में गर्मी पड़ रही है। लोग बेसब्री से मॉनसून का इंतजार कर रहे हैं। इस बीच, मॉनसून पर खुशखबरी सामने आई है कि 23 जून को यह कई राज्यों में पहुंचने वाला है। मौसम विभाग ने बताया है कि महाराष्ट्र, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में यह 23 को पहुंच जाएगा। यानी कि इन राज्यों में पड़ रही गर्मी से राहत मिलेगी। इसके अलावा, सब हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, पूर्वोत्तर भारत में 21 जून तक बहुत भारी बारिश होगी। वहीं, कोंकण, गोवा, मध्य महाराष्ट्र में आज और पूर्वी उत्तर प्रदेश, विदर्भ में 25 जून, बिहार, तेलंगाना में 21 जून तक हीटवेव चलेगी। उसके बाद भारी गर्मी से राहत मिलने की संभावना है। मध्य और पूर्वी भारत में आज कई राज्यों में आंधी तूफान चलने की चेतावनी जारी की गई है। उत्तर भारत के कुछ राज्यों में बारिश का अलर्ट है। जम्मू कश्मीर, लद्दाख में 20-22 जून के बीच बारिश होगी। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड में 20-26 जून के बीच बरसात होगी। हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब में 20-23 जून, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 20 जून, 26 जून, पूर्वी उत्तर प्रदेश में 25-26 जून के बीच बारिश होगी। पश्चिमी राजस्थान में 20-24 जून, पूर्वी राजस्थान में 20-26 जून के बीच बारिश देखने को मिलेगी। हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब में 20-23 जून के बीच तेज स्पीड से आंधी तूफान और बिजली कड़कने का अलर्ट है। इसके अलावा, पूर्वी राजस्थान, पश्चिमी राजस्थान में 20 जून को आंधी चलने वाली है।जम्मू कश्मीर, लद्दाख में 20-21 जून को ओले गिरेंगे। मध्य भारत की बात करें तो छत्तीसगढ़, पूर्वी मध्य प्रदेश, विदर्भ, पश्चिमी मध्य प्रदेश में 20-26 जून के बीच बारिश होगी। पश्चिमी मध्य प्रदेश में 21-24 जून, पूर्वी मध्य प्रदेश, विदर्भ में 20-24 जून, छत्तीसगढ़ में 20-26 जून के बीच बारिश, आंधी, तेज हवाओं का अलर्ट है। पूर्वी भारत की बात करें तो अंडमान और निकोबार द्वीप, सब हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम में 20-26 जून, गंगीय पश्चिम बंगाल में 20-25 जून, ओडिशा में 20-21 जून के बीच बरसात देखने को मिलने वाली है। गंगीय पश्चिम बंगाल में 26 जून, बिहार, झारखंड में 20-26 जून, ओडिशा में 22-26 जून के बीच बरसात होगी। वहीं, अंडमान और निकोबार द्वीप में 20-26 जून, सब हिमालयी पश्चिम बंगाल में 20 जून, गंगीय पश्चिम बंगाल में 20-21 जून, झारखंड में 22-26 जून, बिहार में 20-22 जून, 25-26 जून, ओडिशा में 22-24 जून को बारिश, आंधी तूफान चलेगा। पूर्वोत्तर भारत की बात करें तो अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा में 20-26 जून को बारिश होगी। अरुणाचल प्रदेश में 20-24 जून, असम, मेघालय में 23-26 जून, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा में 20-23 जून में बहुत भारी बारिश होगी।

कुरनूल में गोल्ड रिजर्व मिलने की संभावना, जोन्नागिरी बना फोकस पॉइंट

आंध्र प्रदेश किसी भी देश की आर्थिक मजबूती में सोने का बड़ा योगदान होता है। भारत के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में सोने के अकूत भंडार का पता चला है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यहां 50 टन सोना हो सकता है। जानकारों का कहना है कि सोने का भंडार मिलने का अनुमान अगर सही साबित होता है तो आंध्र प्रदेश देश में सोने का सबसे बड़ा उत्पादक और सप्लायर राज्य बन सकता है। वहीं भारत को विदेश से कम सोना खरीदना पड़ेगा। चार जगहों पर होगा खनन आंध्र प्रदेश में खनन विभाग के प्रधान सचिव मुकेश कुमार मीणा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बताया कि जोन्नागिरी के साथ चार संभावित स्थलों को चिह्नित किया जा रहा है। रामागिरी, जव्वकुला औरचिगुरुकुंटा में खनन किया जाएगा। जोन्नागिरी पर सबसे ज्यादा सोना पाए जाने की संभावना है। अकेले इसी साइट पर 50 टन सोना मौजूद हो सकता है। इसके अलावा अन्य क्षेत्रों में भी शोध किया जाएगा। जोन्नागिरी गांव में सोने का भंडार अधिकारियों के मुताबिक जोन्नागिरी गांव में पहले भी खनन के लिए 1500 एकड़ की भूमि आवंटित की गई थी। हालांकि 500 एकड़ में ही सोने की तलाशकी गई। बताया गया था कि इस जगह पर 13 टन सोना हो सकता है। अब बाकी की 1000 एकड़ जमीन पर सोना खोजने का काम जल्द ही शुरू हो जाएगा। कैसे निकाला जाता है सोना कीमती धातुओं के खनन के लिए विशेष तकनीक की जरूरत होती है। इसका टेंडर प्राइवेट कंपनियों को दिया जाता है। लगभग एक टन मटीरियल की जब प्रोसेसिंग की जाती है तो लगभग एक ग्राम सोना निकलता है। सोना समेत अन्य धातुएं अयस्क के रूप में मौजूद रहती हैं। अयस्क से सोने को अलग किया जाता है। सीएम चंद्रबाबू नायडू इसी महने जोन्नागिरी में खनन का उद्घाटन कर सकते हैं। भारत में कितने सोने का प्रोडक्शन वर्तमान में कर्नाटक में हुट्टी गोल्ड माइन्स से ही देश में सोने का उत्पादन हो रहा है। इससे हर साल करीब 1.5 टन सोना मिलता है। हालांकि देश में सोने की मांग और खपत बहुत है। हर साल भारत में 800 टन तक सोने की खपत होती है। साल 2000 में कर्नाटक में कोलार गोल्ड फील्ड्स बंद हो गई थीं। इसके बाद से घरेलू प्रोडक्शन भी कम हो गया था। जोन्नागिरी में अगर 50 टन सोना पाया जाता है तो इसकी कीमत 7500 से 9 हजार करोड़ तक हो सकती है। इससे राज्य सरकार को सबसे बड़ा फायदा मिलने वाला है।