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ट्रंप का नया मिशन: ईरान की ओर बढ़ते जंगी जहाज, वेनेजुएला ऑपरेशन से बड़ा प्लान सामने

तेहरान  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि एक 'मैसिव अर्माडा' (बड़ा नौसैनिक बेड़ा) ईरान की ओर जा रहा है, जो वेनेजुएला ऑपरेशन से भी बड़ा है. ट्रंप चाहते हैं कि ईरान न्यूक्लियर डील पर बात करे, वरना हमला हो सकता है. ईरान ने कहा कि वह बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन अपनी शर्तों पर. अगर हमला हुआ तो बचाव करेगा. अरब देशों ने संयम बरतने की अपील की है, क्योंकि इससे बड़ा युद्ध फैल सकता है. ट्रंप ने क्या कहा? 28 जनवरी 2026 को ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया कि 'एक मैसिव अर्माडा ईरान की ओर जा रहा है.' उन्होंने ईरान से कहा कि न्यूक्लियर डील कर लो, वरना समय खत्म हो रहा है. हमला 'स्पीड और वायलेंस' से होगा. ट्रंप ने इसे वेनेजुएला ऑपरेशन से बड़ा बताया. उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु संवर्धन बंद करना होगा. बैलिस्टिक मिसाइलें सीमित करनी होंगी. हमास, हिजबुल्लाह, हूती जैसे ग्रुप्स को सपोर्ट बंद करना होगा. ट्रंप ने पिछले साल जून 2025 में ईरान के न्यूक्लियर साइट्स पर हमले का जिक्र किया और कहा कि अगला हमला और बुरा होगा. क्या है यह 'मैसिव अर्माडा'? यह अमेरिकी नौसेना का बड़ा बेड़ा है, जिसमें USS अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर, कई गाइडेड-मिसाइल डेस्ट्रॉयर्स, बॉम्बर्स और फाइटर जेट्स शामिल हैं. यह अरब सागर में तैनात है. ट्रंप ने कहा कि यह 'रेडी, विलिंग और एबल' है. हाल ही में USS Delbert D. Black इजरायल के ईलात बंदरगाह पर पहुंचा है। कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट में 35,000+ अमेरिकी सैनिक और कई जहाज तैनात हैं.  वेनेजुएला ऑपरेशन क्या था? तुलना क्यों? वेनेजुएला ऑपरेशन को 'ऑपरेशन सदर्न स्पियर' कहा जाता है. यह 2025 में शुरू हुआ, जब अमेरिका ने कैरिबियन सागर में बड़ा नौसेना बिल्डअप किया. इसमें USS Gerald R. Ford कैरियर स्ट्राइक ग्रुप, USS Iwo Jima एम्फीबियस रेडी ग्रुप और अन्य जहाज शामिल थे. कुल 15-20 हजार सैनिक और 150+ एयरक्राफ्ट थे. इसका उद्देश्य ड्रग ट्रैफिकिंग रोकना था, लेकिन यह वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हटाने के लिए था. 3 जनवरी 2026 को अमेरिका ने मादुरो को गिरफ्तार कर लिया. ट्रंप ने ईरान के लिए इससे बड़ा आर्मडा भेजा है, जो दिखाता है कि कितना बड़ा खतरा है. ईरान की प्रतिक्रिया क्या है? ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन धमकी के तहत नहीं. ईरान खुद को बचाएगा अगर हमला हुआ. तेहरान में अमेरिका विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं. ईरान ने अपना ड्रोन कैरियर शहीद बघेरी बंदर अब्बास से 6 किमी दूर रखा है.स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में लाइव-फायर एक्सरसाइज कर रहा है. ईरान ने अपने न्यूक्लियर साइट्स को और गहराई में छिपाया है. क्यों बढ़ रहा है तनाव?       न्यूक्लियर प्रोग्राम: 2018 में ट्रंप ने JCPOA डील तोड़ी. जून 2025 में अमेरिका-इजरायल ने फोर्डो, नटांज, इस्फाहान पर हमला किया. IAEA कहता है कि ईरान फिर से संवर्धन बढ़ा रहा है.       प्रदर्शन: जनवरी 2026 में ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन, 100+ मौतें. ट्रंप इसे रेजीम चेंज का मौका मानते हैं.       रीजनल वॉर: ईरान हूती, हिजबुल्लाह को सपोर्ट करता है, जो अमेरिकी सहयोगियों पर हमला करते हैं. अरब और रीजनल देशों की अपील सऊदी अरब, UAE, जॉर्डन जैसे देश युद्ध से डर रहे हैं. तुर्की ने अमेरिका से संयम बरतने को कहा है. वे चाहते हैं कि बातचीत से हल निकले, क्योंकि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद कर सकता है. इससे तेल की कीमतें बढ़ेंगी और ग्लोबल इकोनॉमी प्रभावित होगी. यूके, फ्रांस और इजरायल अमेरिका के साथ हैं, लेकिन सऊदी, कतर, ओमान, मिस्र ने हमला न करने की अपील की.  अगर हमला हुआ तो रीजनल युद्ध फैल सकता है. ईरान अमेरिकी बेस या इजरायल पर हमला कर सकता है. ट्रंप की 'मैक्सिमम प्रेशर' पॉलिसी जारी है, लेकिन डिप्लोमेसी की उम्मीद भी है. स्थिति नाजुक है – अभी हमला नहीं हुआ, लेकिन धमकियां बढ़ रही हैं.

एपस्टीन फाइल्स अपडेट: न्यूयॉर्क मेयर ममदानी की मां मीरा नायर का नाम सामने आया, वजह क्या?

न्यूयॉर्क हाल ही में अमेरिका के न्याय विभाग द्वारा जारी किए गए एपस्टीन फाइल्स के नए दस्तावेजों ने एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक विवाद खड़ा कर दिया है। इन दस्तावेजों में न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी की मां और प्रसिद्ध भारतीय-अमेरिकी फिल्म निर्देशक मीरा नायर का नाम भी सामने आया है। नए दस्तावेजों का खुलासा अमेरिकी न्याय विभाग ने शुक्रवार को दोषी यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से संबंधित लगभग 30 लाख पन्नों के दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं। इनमें न केवल टेक्स्ट फाइलें शामिल हैं, बल्कि 2000 वीडियो और 1.8 लाख तस्वीरें भी मौजूद हैं। इन फाइल्स ने कई प्रभावशाली हस्तियों के एपस्टीन और उसकी सहयोगी गिलेन मैक्सवेल के साथ संबंधों की परतें खोल दी हैं। मीरा नायर और 'अमेलिया' फिल्म की आफ्टरपार्टी दस्तावेजों में शामिल 21 अक्टूबर 2009 का एक ईमेल विशेष रूप से चर्चा में है। यह ईमेल पब्लिसिस्ट पेगी सीगल द्वारा जेफरी एपस्टीन को भेजा गया था। इसमें बताया गया है कि मीरा नायर की फिल्म 'अमेलिया' की रिलीज के बाद एक आफ्टरपार्टी का आयोजन गिलेन मैक्सवेल के टाउनहाउस पर किया गया था। ईमेल में सीगल ने लिखा- 'अभी-अभी गिलेन के टाउनहाउस से निकली हूं… फिल्म की आफ्टरपार्टी थी। वहां बिल क्लिंटन और जेफ बेजोस भी मौजूद थे… साथ ही निर्देशक मीरा नायर भी थीं।' ईमेल में यह भी जिक्र किया गया कि फिल्म को लेकर मेहमानों की प्रतिक्रिया बहुत उत्साहजनक नहीं थी, हालांकि महिलाओं को यह फिल्म काफी पसंद आई थी। हाई-प्रोफाइल हस्तियों की मौजूदगी इस खुलासे ने फिर से उन कड़ियों को जोड़ दिया है जो दिग्गज राजनेताओं और व्यापारियों को एपस्टीन के दायरे से जोड़ती हैं। पार्टी में शामिल होने वाले प्रमुख नामों में शामिल हैं- बिल क्लिंटन: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति। जेफ बेजोस: अमेजन के पूर्व सीईओ। हिलेरी स्वैंक: फिल्म की मुख्य अभिनेत्री, जो ब्लूमिगडेल्स में आयोजित एक अन्य 'अजीब' कार्यक्रम में मौजूद थीं। एलन मस्क और एपस्टीन के बीच संवाद दस्तावेजों में टेस्ला के सीईओ एलन मस्क और एपस्टीन के बीच 2012 के ईमेल संवाद का भी जिक्र है। नवंबर 2012 में एपस्टीन ने मस्क से पूछा था कि हेलीकॉप्टर से द्वीप (आइलैंड) पर जाने के लिए उनके साथ कितने लोग होंगे। एलन मस्क ने इसके जवाब में लिखा- शायद सिर्फ टालुला (उनकी तत्कालीन पत्नी) और मैं। तुम्हारे द्वीप पर सबसे 'वाइल्ड' पार्टी किस दिन/रात होगी? 30 लाख से अधिक पन्नों के दस्तावेज Fox News की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी न्याय विभाग ने कुख्यात यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े मामलों में अब तक का सबसे बड़ा खुलासा करने की घोषणा की है. इस संबंध में अमेरिका की उप अटॉर्नी जनरल ब्लैंच ने जानकारी देते हुए कहा कि विभाग 30 लाख से अधिक पन्नों के दस्तावेज़ सार्वजनिक करने जा रहा है. इन फाइलों में बड़ी संख्या में वीडियो और तस्वीरें भी शामिल हैं. ब्लैंच के अनुसार, न्याय विभाग की ओर से पेश किए जा रहे इस रिकॉर्ड में 2,000 से अधिक वीडियो और लगभग 1,80,000 तस्वीरें शामिल होंगी. अमेरिकी न्याय विभाग ने लाखों दस्तावेज किए सार्वजनिक अमेरिकी न्याय विभाग ने जेफ्री एपस्टीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से बड़ी संख्या में रिकॉर्ड सार्वजनिक किए हैं. इनमें 30 लाख से अधिक पन्नों के दस्तावेज़, करीब दो हजार वीडियो और लगभग एक लाख अस्सी हजार तस्वीरें शामिल हैं. इन फाइलों में ईमेल संवाद, गवाहियों के अंश और आंतरिक संचार से जुड़ी जानकारियां शामिल हैं. विभाग का कहना है कि इन दस्तावेजों में दर्ज अधिकांश बातें संदर्भ और आरोपों के रूप में हैं न कि किसी अदालत की तरफ से साबित किया गया फैक्ट. 2009 की आफ्टर पार्टी का खुलासा ईमेल से दस्तावेज़ों में 21 अक्टूबर 2009 का एक ईमेल भी शामिल है, जिसे प्रसिद्ध हॉलीवुड पब्लिसिस्ट पेगी सीगल ने जेफ्री एपस्टीन को भेजा था. यह ईमेल उसी रात भेजा गया था, जब वह गिस्लेन मैक्सवेल के न्यूयॉर्क स्थित टाउनहाउस में आयोजित एक आफ्टर पार्टी से लौटी थीं. ईमेल में पेगी सीगल ने लिखा कि वह अभी-अभी गिस्लेन के घर से निकली हैं, जहां एक फिल्म की आफ्टर पार्टी आयोजित की गई थी. उन्होंने ईमेल में बताया कि उस पार्टी में बिल क्लिंटन, जेफ बेजोस, जीन पिगोनी और निर्देशक मीरा नायर समेत कई जानी-मानी हस्तियां मौजूद थीं. फिल्म Amelia की आफ्टर पार्टी थी आयोजन दस्तावेजों के अनुसार, यह आफ्टर पार्टी मीरा नायर की फिल्म “Amelia” के लिए आयोजित की गई थी, जो वर्ष 2009 में रिलीज़ हुई थी. ईमेल में फिल्म को लेकर मेहमानों की प्रतिक्रिया का भी जिक्र किया गया है. पेगी सीगल ने अपने निजी ईमेल में लिखा कि फिल्म को कुल मिलाकर ठंडी प्रतिक्रिया मिली, हालांकि महिलाओं को यह फिल्म अधिक पसंद आई. ईमेल में कुछ अन्य सामाजिक आयोजनों को भी अजीब बताया गया है. यह पूरा संवाद अनौपचारिक और निजी भाषा में लिखा गया था, जिसे दस्तावेजों में ज्यों का त्यों शामिल किया गया है. पार्टी में शामिल अन्य चर्चित नाम ईमेल के अनुसार, उस आफ्टर पार्टी में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और अमेज़न के संस्थापक जेफ बेजोस भी मौजूद थे. इसके अलावा फैशन, कला और सिनेमा जगत से जुड़े कई अन्य प्रभावशाली लोगों की मौजूदगी का जिक्र है. दस्तावेज यह स्पष्ट करते हैं कि इन नामों का उल्लेख केवल एक सामाजिक कार्यक्रम में शामिल होने के संदर्भ में है और इन फाइलों के आधार पर किसी पर भी आपराधिक गतिविधियों का आरोप नहीं लगाया गया है. एलन मस्क से जुड़े ईमेल भी फाइलों में शामिल नई एपस्टीन फाइल्स में टेस्ला और स्पेसएक्स के प्रमुख एलन मस्क से जुड़े ईमेल्स का भी उल्लेख किया गया है. दस्तावेज़ों के अनुसार, नवंबर 2012 में जेफ्री एपस्टीन ने एलन मस्क को एक ईमेल भेजा था, जिसमें उनसे द्वीप पर आने वाले लोगों की संख्या को लेकर सवाल किया गया था. इसके जवाब में मस्क ने लिखा कि शायद वह और उनकी साथी तालुलाह ही होंगे और उन्होंने यह भी पूछा कि द्वीप पर सबसे बड़ी पार्टी किस दिन या रात को होती है. इन ईमेल्स को भी केवल संवाद और संदर्भ के रूप में पेश किया गया है, न कि किसी अपराध के प्रमाण के रूप में. एपस्टीन नेटवर्क को लेकर फिर तेज हुई बहस इन नए दस्तावेजों के सामने आने के बाद अमेरिकी राजनीति, हॉलीवुड और वैश्विक कारोबारी जगत … Read more

अमित शाह का TMC पर हमला: बोले– ममता सरकार का समय खत्म होने वाला

सिलिगुड़ी पश्चिम बंगाल में इस साल विधानसभा चुनाव होने वाला है. इस चुनाव को लेकर प्रदेश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. बीजेपी टीएमसी को हटाने के लिए पुरजोर कोशिशों में जुटा है. वहीं, ममता सरकार पर लगातार केंद्रीय एजेंसियों का गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाते आ रही है. इन आरोप-प्रत्यारोप के दौर के बीच शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सिलिगुड़ी की यात्रा पर हैं.  यहां अमित शाह ने कार्यकर्ताओं की बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने साफ कहा कि ममता बनर्जी सरकार की विदाई का समय अब नजदीक है. पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन निश्चित है और जनता बदलाव की उम्मीद रखती है. अमित शाह ने अपने भाषण में ममता बनर्जी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी ने अलग-अलग समुदायों को आपस में लड़ाने वाली राजनीति की है, जिससे राज्य की एकता खतरे में पड़ गई है. उन्होंने बताया कि लंबे समय से पश्चिम बंगाल में सामाजिक तनाव को बढ़ावा दिया गया है, जिससे समाज के विभिन्न वर्गों में दूरी बढ़ी है. इस दौरान अमित शाह ने BJP के कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि वे संगठन को मजबूत करें और जमीनी स्तर पर सक्रिय रहकर लोगों से जुड़ें. उनका कहना था कि केवल कार्यकर्ताओं की मेहनत से ही पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बदलाव संभव हो सकेगा. उन्होंने कहा कि जनता अब ममता सरकार की नीतियों से असंतुष्ट है और वह बदलाव चाहती है.     हिंसा, भय और भ्रष्टाचार की प्रतीक TMC की बंगाल में अब फिर वापसी नहीं होने वाली है। सिलीगुड़ी में इस संभाग के कार्यकर्ताओं से संवाद कर रहा हूँ… अमित शाह ने यह भी कहा कि राज्य में सालों से हिंसा, डर और भ्रष्टाचार का माहौल रहा है, जिसे बंगाल की जनता अब सहन नहीं करेगी. उन्होंने टीएमसी पर भी कड़ी बात करते हुए कहा कि यह पार्टी हिंसा और भय का पर्याय बन चुकी है और अब जनता इस राजनीति को स्वीकार नहीं करेगी. अमित शाह ने भरोसा जताया कि आने वाले समय में पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा, और यह बदलाव जनता की इच्छानुसार होगा. 

PAK आर्मी पर भारी दबाव: बलूचिस्तान में 12 शहरों में हमले, कई थानों पर बागियों का कब्जा

क्वेटा पाकिस्तान के बलूचिस्तान में बलोच विद्रोहियों ने कोहराम मचा दिया है. बलोच लिब्रेशन आर्मी ने बलूचिस्तान प्रांत के कई शहरों में एक साथ हमला कर कई थानों और सरकारी भवनों पर कब्जा कर लिया है. शनिवार को को बलूचिस्तान में बलोच विद्रोहियों, विशेष रूप से बलोच लिबरेशन आर्मी (BLA) के जेयंद गुट ने "ऑपरेशन हेरॉफ" के फेज 2 के तहत बड़े पैमाने पर हमले किए हैं. बागी बलोचों ने कई पुलिस स्टेशनों पर कब्जा कर लिया है. बलोच विद्रोहियों के अचानक हमले से बैकफुट पर आई पाकिस्तान फौज को अपने पोस्ट छोड़कर भागना पड़ रहा है. पाकिस्तान के जियो न्यूज के अनुसार इस हमले में अबतक 10 सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई है, जबकि पाकिस्तान सरकार का दावा है कि 58 आतंकी मारे गए हैं. यह हमले पाकिस्तानी सुरक्षा बलों, सरकारी सुविधाओं और अन्य टारगेट पर केंद्रित थे. इन हमलों को काफी बड़ा माना जा रहा है क्योंकि 12 से अधिक स्थानों पर एक साथ रिपोर्ट किए गए हैं.  समाचार एजेंसियों के अनुसार विद्रोहियों ने शनिवार सुबह ही राजधानी क्वेटा में हमले सुबह करीब 6 बजे एक जबरदस्त धमाके के साथ अटैक शुरू किया जिसके बाद दो घंटे तक ज़ोरदार गोलीबारी हुई और कई धमाके भी हुए.  सड़क पर निकले बागी, कई शहरों पर कब्जा बलोच बागियों ने क्वेटा के अलावा पसनी, मस्तंग, नुश्की और ग्वादर जिलों में एक साथ हमले किए हैं. बागी बंदूकों से हमले कर रहे हैं और कई स्थानों पर आत्मघाती हमले कर रहे हैं.  सोशल मीडिया पर स्थानीय पत्रकार इस हमले के बारे में कई दावे कर रहे हैं. एक पत्रकार के अनुसार बलूचिस्तान के कई शहरों में हथियारबंद लोगों ने कई शहरों पर कब्ज़ा कर लिया है. मस्तुंग में विद्रोहियों ने पुलिस स्टेशन और शहर पर कब्जा कर लिया है. 30 से ज़्यादा कैदी फरार हैं.  क्वेटा में हथियारबंद लोगों ने कई इलाकों पर कब्ज़ा कर लिया है. ग्वादर में हमले की खबर है. कलात में भी झड़पें जारी हैं.  एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने अपना नाम न बताने की शर्त पर अरब न्यूज़ को बताया कि बागियों ने शहर में घुसने की कोशिश की, लेकिन पुलिस और दूसरी कानून लागू करने वाली एजेंसियों ने उन्हें रोक दिया.  उन्होंने कहा, "बागियों ने सरयाब रोड पर एक पुलिस मोबाइल पर हमला किया, जिसमें दो पुलिसकर्मी मारे गए." "पुलिस और दूसरी  एजेंसियों ने क्वेटा शहर में विद्रोहियों से लड़ाई जारी रखे हुए है, अभी भी एक क्लीयरेंस ऑपरेशन चल रहा है.  पाकिस्तान के अखबार डॉन के एक रिपोर्टर के मुताबिक हमले के बाद क्वेटा, सिबी और चमन में मोबाइल फोन सर्विस तो काम कर रही थीं, लेकिन डेटा सर्विस बंद कर दी गई है.  स्वास्थ्य मंत्री बख्त मुहम्मद काकर और स्वास्थ्य सचिव मुजीबुर रहमान के निर्देशों पर पूरे प्रांत के सभी सरकारी अस्पतालों में इमरजेंसी लगा दी गई. द बलूचिस्तान पोस्ट ने यहां हुए हमलों की विस्तार से जानकारी दी है.  दस शहरों में एक साथ हमले द बलूचिस्तान पोस्ट के अनुसार बलूच लिबरेशन आर्मी ने शनिवार को अपने कमांडर-इन-चीफ बशीर ज़ेब बलूच का एक वीडियो मैसेज जारी किया है. इसमें उन्होंने बलूच लोगों से 'अपने घरों से बाहर निकलने' और पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ़ सशस्त्र संघर्ष के उस निर्णायक दौर में शामिल होने की अपील की है. इस हमले को उन्होंने निर्णायक दौर बताया है.  उन्होंने यह घोषणा भी की कि "ऑपरेशन हेरोफ़" के दूसरे चरण के तहत बलूचिस्तान के "दस शहरों में एक साथ हमले" शुरू किए गए हैं. वीडियो में बशीर जेब बलूच हथियारबंद लड़ाकों के साथ दिखाई देते हैं और अपना संदेश ब्राहुई और बलूची दोनों भाषाओं में दे रहे हैं.  BLA चीफ ने चेतावनी दी कि अगर लोग आज बाहर नहीं आए और ऑपरेशन हेरोफ़ में हिस्सा ले रहे भाइयों और बहनों के साथ खड़े नहीं हुए, तो इतिहास उनकी हार दर्ज करेगा. उन्होंने कहा कि जो लोग अपनी जान देते हैं और जो लोग जान लेते हैं, वे ही इतिहास लिखते हैं." उन्होंने कहा, "हम चरमपंथी नहीं हैं. लेकिन जब बात हमारी जमीन और हमारे देश की आती है, तो हम किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं. हमने किसी दूसरे देश पर कब्ज़ा नहीं किया है; बल्कि हम पर कब्ज़ा किया गया है. हमारी लड़ाई न्याय के लिए लड़ाई है." 48 घंटे में 70 विद्रोहियों को मारने का दावा  बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री के राजनीतिक और मीडिया मामलों के विशेष सलाहकार शाहिद रिंद ने एक्स पर कहा कि पिछले दो दिनों में प्रांत भर में सुरक्षा बलों ने अलग-अलग जगहों पर 70 से ज़्यादा विद्रोहियों को मार गिराया है.  रेलवे ट्रैक मिली IED, एंटी टैंक माइन और विस्फोटक बरामद पुलिस ने बताया कि बलूचिस्तान के नसीराबाद ज़िले में एक रेलवे ट्रैक पर संदिग्ध विस्फोटक सामग्री मिली है. नसीराबाद के सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस असदुल्लाह नासिर ने एक बयान में कहा, "रबी पुल के पास रेलवे लाइन पर एक एंटी-टैंक माइन और विस्फोटक सामग्री मिली है." उन्होंने आगे कहा, "पुलिस, FC और स्पेशल ब्रांच ने समय पर कार्रवाई करते हुए एक संदिग्ध IED को निष्क्रिय कर दिया है." SSP नासिर के अनुसार बरामद चीज़ों में आधा किलोग्राम विस्फोटक सामग्री, पेट्रोल और एक लोहे की रॉड शामिल थी.  हालात तनावपूर्ण स्थानीय लोगों और लोकल सोर्स ने क्वेटा, नुश्की, कलात, मस्तंग, दलबांदिन, खारान, ग्वादर, पसनी, टंप, बुलेदा और धदार में सुरक्षा हालात को बहुत तनावपूर्ण बताया है. यहां भारी गोलीबारी, धमाकों और पुलिस और मिलिट्री ठिकानों पर हमलों की खबरें मिलीं हैं. क्वेटा में रहने वालों ने कई इलाकों में गोलीबारी और धमाकों की सूचना दी, जिसमें बहुत संवेदनशील रेड ज़ोन भी शामिल हैं.  द बलूचिस्तान पोस्ट ने बताया है कि सरयाब रोड पर हथियारबंद लोगों ने एक पुलिस मोबाइल पर हमला किया जिसमें दो पुलिसकर्मी मारे गए और गाड़ी में आग लगा दी गई.   

शेयर बाजार को उड़ान, Union Budget 2026 में 3 बड़े ऐलान जरूरी, नितिन कामथ का दबाव

 नई दिल्‍ली देश का आगामी केंद्रीय बजट (Union Budget 2026) रविवार, 1 फरवरी को पेश होने जा रहा है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपना नौंवा बजट पेश करेंगी. इस बार के बजट से मिडिल क्‍लास से लेकर किसानों तक बजट से खास उम्‍मीद लगाए बैठे हैं. वहीं स्‍टॉक मार्केट निवेशक भी इस बार के बजट से कुछ खास उम्‍मीद लगा रहे हैं.  शेयर बाजार एक्‍सपर्ट्स भी यही चाहते हैं कि सरकार ये ऐलान करे, ताकि स्‍टॉक मार्केट निवेशकों को बड़ी राहत मिल सके. एक्‍सपर्ट्स यह भी कह रहे हैं कि सरकार की तरफ से अगर ये ऐलान कर दिए गए तो शेयर बाजार में शानदार तेजी देखने को मिल सकती है. अरबपति नितिन कामथ भी इसकी मांग कर चुके हैं.  क्‍या है ये मांग?      भारत के डीप डिस्काउंट ब्रोकर SAS ऑनलाइन के संस्थापक और CEO श्रेय जैन का मानना ​​है कि अधिक निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए, लॉन्‍गटर्म कैप‍िटल गेन (LTCG) पर अधिक टैक्‍स छूट देने की आवश्‍यकता है. जैन ने आगे कहा कि अभी हर वित्तीय वर्ष 1.25 लाख रुपये तक की कमाई पर कोई LTCG टैक्‍स नहीं देना पड़ता है, जबकि 1 लाख रुपये से अधिक के एलटीसीजी पर 12.5% टैक्‍स लगता है. इस कर-मुक्त सीमा को बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने की आवश्यकता है.      इसी तरह, शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) टैक्‍स को भी कम करने की मांग की जा रही है. इसके तहत छूट की लिमिट भी बढ़ाए जाने की मांग हो रही है. निवेशक चाहते हैं कि शॉर्ट टर्म में बेचे गए शेयरों पर 1.5 लाख रुपये तक कोई टैक्‍स ना लगे. साथ ही STCG को 20 फीसदी से कम करके 10 फीसदी कर दिया जाए.      एक और मांग STT को खत्‍म करने की है. सिक्‍योरिटी ट्रांजेक्‍शन टैक्‍स (STT)  शेयरों की खरीद और बिक्री पर लगाया जाता है. किसी भी शेयर के खरीदने या बेचने पर यह 0.1 फीसदी का टैक्‍स लगता है. वहीं डेरेवेटिव मार्केट में 0.01% का टैक्‍स लगाया जाता है, जबकि इंट्राडे में ट्रेडिंग पर 0.025%  का टैक्‍स वसूलता है. एक्‍सर्ट्स का कहना है कि यह देखने में भले ही बहुत कम दिखाई देता है, लेकिन बड़े अमांउट बेखने या खरीदने पर ज्‍यादा चार्ज होता है. ऐसे में इसमें भी कटौती या इसे समाप्‍त करने की मांग की जा रही है, जबकि इसमें कई बार बढ़ोतरी की गई है.  क्‍या होता है LTCG और STCG टैक्‍स?  लॉन्‍गटर्म कैप‍िटल गेन (LTCG) का मतलब है कि अगर कोई शेयर बाजार से जुड़ा असेट 12 महीने के बाद बेचता है तो उसपर लॉन्‍गटर्म कैपिटल गेन टैक्‍स लगाया जाएगा. वहीं शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) टैक्‍स का मतलब है कि अगर कोई असेट 12 महीने से पहले बेचा जाता है तो उसपर STCG टैक्‍स लगता है, जो  20 फीसदी होता है.  नितिन कामथ ने भी की मांग  केंद्रीय बजट 2026 से पहले जेरोधा के CEO नितिन कामथ ने इक्विटी ट्रांजैक्‍शन टैक्‍स (STT) में लगातार हो रही बढ़ोतरी पर चिंता जताई है. उनका तर्क है कि बढ़े हुए लेनदेन टैक्‍स से बाजार की गतिविधियों और यहां तक ​​कि सरकारी राजस्व पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. मैं हमेशा उम्‍मीद करता हूं कि यह कम होगा, लेकिन यह बढ़ता ही जा रहा है.  दोहरे टैक्‍स की मार नितिन कामथ ने बताया कि STT को तब लागू किया गया था, जब शेयरों पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (LTCG) टैक्‍स शून्‍य था. उन्होंने कहा कि उस समय यह सरकार के लिए मार्केट से राजस्व जुटाने का एक आसान तरीका था. हालांकि, अब जब LTCG टैक्‍स फिर से लागू हो गया है, तो उन्होंने एसटीटी को वापस लेने के बजाय बार-बार बढ़ाने के तर्क पर सवाल उठाया. उन्होंने आगे कहा कि वास्तव में देखा जाए तो निवेशकों पर दो बार टैक्‍स लगाया जा रहा है, एक बार हर ट्रांजैक्‍शन पर STT के माध्यम से और दूसरी बार LTCG या STCG के जरिए. इसे वापस लेना चाहिए. 

IND-EU डील अपडेट: पीयूष गोयल बोले– 99% आइटम पर टैक्स शून्य, डेयरी और एग्रीकल्चर पर नहीं मिलेगी छूट

 नई दिल्‍ली बजट से ठीक एक दिन पहले आजतक से एक्‍सक्‍लूसिव बातचीत के दौरान वाणिज्‍य मंत्री पीयूष गोयल ने यूरोपीय संघ के साथ FTA डील के फायदे गिनाए. साथ ही रविवार को पेश होने वाले बजट में संभाव‍ित ऐलानों के बारे में विस्‍तार से चर्चा की. उन्‍होंने कहा कि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के जरिए यूरोप के 27 देशों की तुलना में भारत को तुरंत और डायरेक्‍ट फायदा मिलने वाला है.  गोयल ने कहा कि ओभरऑल 99 फीसदी भारतीय प्रोडक्‍ट्स पर '0' टैक्‍स लगेगा. साथ ही लेबर इंटेंसिव (एक देश से दूसरे देश में सामान भेजना) में सबसे ज्‍यादा फायदा होगा. पहले दिन से ही अब कोई टैक्‍स नहीं देना होगा. इससे रोजगार बढ़ेगा, व्यापार बढ़ेगा और फैक्ट्रियां लगने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी. उन्‍होंने टाटा चेयरमैन के बयान को कोट करते हुए कहा कि भारत में 100 से ज्‍यादा फैक्ट्रियां आएंगी और बड़े स्‍तर पर निवेश के रास्‍ते खुल गए हैं.  सेंसिटिव सेक्‍टर के लिए नहीं खोला बाजार  वाणिज्‍य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि FTA डील के तहत सबसे खास बात है कि संवेदनशील क्षेत्रों में यूरोप के लिए के लिए हमने मार्केट नहीं खोला है. डेयरी, अनाज, चावल,गेहूं, मक्‍का जैसी संवेदनशील चीजों के लिए टैक्‍स कम नहीं किया है और मार्केट नहीं खोला है.  सेब पर बहुत कम राहत दी अगर कोई छोटा-मोटा कोटा दिया भी है तो बड़ा ही सोच-समझकर दिया है जैसे सेब की बात करें तो आज भी 6 लाख टन सेब आयात होता है. इसपर 50 फीसदी एम्‍पोर्ट प्राइस है और 25 फीसदी इम्‍पोर्ट ड्यूटी है. ऐसे में हमने 75 फीसदी पहले ही अपने किसानों के लिए रिजर्व रखा था. सवा लाख टन यूरोपीय यूनियन पहले से ही एक्‍सपोर्ट करता है, ऐसे में हमने एक यूरोपीय यूनियन को एक छोटा सा कोटा दिया है.  सिर्फ 45 से 50 हजार टन ही सेब इम्‍पोर्ट होंगे, जो बाद में थोड़े-थोड़े करके बढ़ेंगे, लेकिन आज हो रहे हैं, उससे कम ही होगा. उसपर भी मिनिमम इम्‍पोर्ट प्राइस 80 रुपये और 16 रुपये ड्यूटी रखी है यानी कि अब 96 फीसदी का प्रोटेक्‍शन हो गया है, जो 75 फीसदी की तुलना में ज्‍यादा है. तो एक तरीके से सोच-समझकर दी गई है.  यूरोपीय यूनियन हमारा कंम्‍पटीटर नहीं गोयल ने कहा कि हमारा और यूरोपीय संघ की अर्थव्यवस्‍था अलग-अलग चीजों पर निर्भर है. हम एक दूसरे के कंम्‍प्‍ट‍िटर नहीं हैं, जो चीजें हम उन्‍हें दे सकते हैं वे कभी बना ही नहीं पाएंगे और जो वहां से आएंगी, वह भारत की जरूरत हैं. ऐसे में संवेदनशील चीजों को इस डील से बाहर रखते हुए समझौता किया गया है.  यूरोप के देशों में जाना हुआ आसान उनके यहां पर लोगों की भी कमी है, ऐसे में एक मोबिलिटी एग्रीमेंट भी किया गया है. जिसके लिए अलग-अलग देश के लिए रास्‍ता खोल दिया गया है. इमिग्रेशन नियम को आसान किया गया है. भारत के लोग वहां जाकर सीखेंगे, पैसे कमा सकेंगे और वापस आकर अपने परिवार और भारत की सेवा करेंगे.हम चाहते हैं कि भारत के लोग वहां शॉर्टटर्म के लिए जाएं और वापस आकर देश की सेवा करें. छात्र, जो पढ़ने जाते हैं, उनके लिए 9 महीने का गारंटी वीजा दिया जाएगा.                             डिफेंस पर बड़ी डील  गोयल ने कहा कि डिफेंस पर डील हुई है. वहां टेक्‍नोलॉजी है, लेकिन लोग नहीं है. हमारे यहां लोग हैं, ऐसे में यूरोप की कंपनियां भारत आकर अपनी फैक्ट्रियां लगाएंगी और यहां मैन्‍युफैक्‍चरिंग करेंगी, जिससे भारत का आत्‍मनिर्भर लक्ष्‍य पूरा होगा. हम यहां पर डिफेंस प्रोडक्‍ट्स बनाकर अन्‍य देशों को भेज सकेंगे.                                     बजट को लेकर क्‍या बोले गोयल?  गोयल ने कहा कि पिछले बजट में 12 लाख तक टैक्‍स छूट दी गई थी. उसके बाद जीएसटी में बड़ा सुधार किया गया है. 8  देशों से फ्री ट्रेड डील की गई. हमारे सुधार तेज गति से चल रहे हैं. ऐसे में आम लोगों के जीवन को आसान और सरल बनाने के लिए जो भी कोशिश हो सकती है, हम कर रहे हैं. इस बजट में भी देश के नागरिगों के जीवन को आसान बनाने संबंधी ऐलान किए जा सकते हैं. 

ऑयल गेम में बड़ा ट्विस्ट: भारत का नया तेल साझेदार बन सकता है वेनेजुएला, ट्रंप ने दिया प्रस्ताव

नई दिल्ली/ वॉशिंगटन    अमेरिका ने भारत से कहा है कि वह जल्द ही वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदना दोबारा शुरू कर सकता है. रॉयटर्स से बात करने वाले मामले से जुड़े तीन सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका इस सप्लाई को रूसी तेल के विकल्प के तौर पर पेश कर रहा है, क्योंकि भारत रूसी तेल का आयात तेजी से घटाने जा रहा है. यह पहल ऐसे समय पर हुई है, जब वॉशिंगटन की ओर से रूसी तेल आयात से जुड़े टैरिफ बढ़ाने के बाद भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद में बड़ी कटौती का वादा किया है. सूत्रों के अनुसार, आने वाले महीनों में भारत रूसी तेल का आयात कई लाख बैरल प्रतिदिन तक घटाने की तैयारी में है. वेनेजुएला से तेल खरीदने वालों पर लगा दिया था टैरिफ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मार्च 2025 में वेनेजुएला का तेल खरीदने वाले देशों, जिनमें भारत भी शामिल है, पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था. इसके साथ ही उनकी सरकार ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ अभियान तेज किया था, जिन्हें 3 जनवरी को अमेरिकी बलों ने पकड़ लिया था. लेकिन कौन बेचेगा वेनेजुएला का तेल? इसके बाद अमेरिका के रुख में बदलाव के संकेत मिले. वॉशिंगटन ने नई दिल्ली से कहा कि वह रूसी सप्लाई में कमी की भरपाई के लिए वेनेजुएला से तेल खरीद फिर शुरू कर सकता है. यह कदम रूस के तेल निर्यात से होने वाली आय को सीमित करने की अमेरिकी रणनीति का हिस्सा है, जिससे यूक्रेन युद्ध को फंडिंग मिल रही है. सूत्रों ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वेनेजुएला का तेल किसी निजी ट्रेडिंग कंपनियों के जरिए बेचा जाएगा या सीधे वहां की सरकारी तेल कंपनी के माध्यम से. 'कच्चे तेल के स्रोतों में लाएंगे विविधता' यूक्रेन पर 2022 में रूस के हमले के बाद पश्चिमी प्रतिबंधों और भारी छूट के चलते भारत रूस का बड़ा तेल खरीदार बन गया था. हालांकि बाद में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ बढ़ा दिए. रूसी तेल खरीद से जुड़े अतिरिक्त टैरिफ जोड़ने के बाद अगस्त तक ये टैरिफ 50 प्रतिशत तक पहुंच गए. पिछले हफ्ते तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा था कि रूसी तेल का आयात घटाने के साथ भारत अपने कच्चे तेल के स्रोतों में विविधता ला रहा है. उन्होंने वेनेजुएला को लेकर सीधे तौर पर कुछ नहीं कहा. 5 से 6 लाख बैरल प्रतिदिन तक गिर सकता है आयात रॉयटर्स के दो सूत्रों के मुताबिक, भारत जल्द ही रूसी तेल आयात को 10 लाख बैरल प्रतिदिन से नीचे लाने की तैयारी में है. जनवरी में यह करीब 12 लाख बैरल प्रतिदिन था. फरवरी में इसके 10 लाख बैरल और मार्च में करीब 8 लाख बैरल प्रतिदिन तक गिरने का अनुमान है. एक अन्य सूत्र ने कहा कि आगे चलकर यह मात्रा 5 से 6 लाख बैरल प्रतिदिन तक भी आ सकती है. ऐसा होने से भारत को अमेरिका के साथ व्यापक व्यापार समझौता करने में मदद मिल सकती है. व्यापार से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में भारत का रूसी तेल आयात पिछले दो साल के सबसे निचले स्तर पर आ गया. इससे भारत के आयात में ओपेक देशों के तेल की हिस्सेदारी 11 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई. भारतीय रिफाइनरियों ने कमी पूरी करने के लिए मिडिल ईस्ट, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका से तेल की खरीद बढ़ा दी है.

हड़कंप मचा देने वाली एपस्टीन लिस्ट: इवांका ट्रंप और एलन मस्क जुड़े नए दस्तावेजों में

वाशिंगटन अमेरिकी न्याय विभाग ने जेफरी एपस्टीन से जुड़े लाखों दस्तावेजों की नई और अंतिम सूची जारी की है। इस नए बैच में कई बड़े-बड़े नाम सामने आए हैं। इसमें 30 लाख से अधिक पेज, 1 लाख 80 हजार तस्वीरें और 2000 वीडियो क्लिप्स शामिल हैं। मालूम हो कि एपस्टीन फाइल्स अमेरिकी वित्तीय और दोषी यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से जुड़े जांच के कागजात हैं। इसके जरिए नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण और ट्रैफिकिंग नेटवर्क का खुलासा हुआ है। एपस्टीन की 2019 में मौत के बाद ये फाइलें FBI और न्याय विभाग के पास थीं। 2025 में पारित एपस्टीन फाइल्स ट्रांसपेरेंसी एक्ट के तहत अमेरिकी न्याय विभाग ने इन्हें सार्वजनिक किया। नई एपस्टीन फाइल्स में नामों की सूची इस प्रकार से है… डोनाल्ड ट्रंप: राष्ट्रपति का नाम ताजा बैच में आया है। एक हिस्से में लिखा है, 'रेडैक्टेड ने एक अज्ञात महिला मित्र की रिपोर्ट की, जिसे लगभग 25 साल पहले न्यू जर्सी में राष्ट्रपति ट्रंप पर ओरल सेक्स करने के लिए मजबूर किया गया था। दोस्त ने एलेक्सिस को बताया कि वह उस समय लगभग 13-14 साल की थी और उसने कथित तौर पर ओरल सेक्स के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप को काट लिया। काटने पर हंसने के बाद दोस्त को चेहरे पर मारा गया। दोस्त ने कहा कि उसे एपस्टीन से भी दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा।' इवांका ट्रंप: एक ईमेल के सब्जेट में लिखा है, 'जैरेड कुशरर, इवांका ट्रंप विकी वार्ड की बुक के लिए तैयार हो रही हैं।' एलन मस्क: दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति का भी जिक्र है, लेकिन यह एपस्टीन के द्वीप पर संभावित यात्राओं के संदर्भ में है। बिल गेट्स: फाइलों में गेट्स के खिलाफ कई आरोप लगाए गए हैं, जिसमें रूसी लड़कियों से एसटीडी होने का दावा भी शामिल है। एपस्टीन फाइलों में कई नए नाम भी आए हैं। इनमें एहुद बाराक, लैरी समर्स, बिल रिचर्डसन, प्रिंस एंड्र्यू, सारा फर्ग्यूसन, माइकल जैक्सन, मिक जैगर, केविन स्पेसी, डायना रॉस, क्रिस टकर, वॉल्टर क्रॉनकाइट, वुडी एलन, रिचर्ड ब्रैनसन, पीटर थील, लेस वेक्सनर, नोम चॉम्स्की और स्टीफन हॉकिंग शामिल हैं। मालूम हो कि ये दस्तावेज जांच से जुड़े हैं और इनमें कई आरोप असत्यापित या टिप्स के रूप में हैं।  

आरोपी महिला का बड़ा आरोप, बोली– सिंगापुर में जुबीन के साथ रूम शेयर का दबाव था

गुवाहाटी संगीत जगत के दिग्गज जुबीन गर्ग की सितंबर 2025 में सिंगापुर में हुई रहस्यमयी मौत के मामले में कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है। शुक्रवार को गुवाहाटी सत्र न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने मुख्य आरोपी संगीतकार अमृतप्रभा महंता और जुबीन के दो व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारियों (PSOs) की जमानत याचिका खारिज कर दी है। सत्र न्यायाधीश ने अमृतप्रभा महंता की याचिका खारिज करते हुए कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप बेहद गंभीर हैं, जिनके लिए मृत्युदंड या आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष के तर्क प्रथम दृष्टया यह दर्शाते हैं कि महंता ने अन्य मुख्य आरोपियों के साथ मिलकर एक आपराधिक साजिश रची, जिसने जुबीन गर्ग की मृत्यु की राह आसान कर दी। महंता उन चार लोगों में से एक हैं जिन पर पुलिस ने सितंबर 2025 में सिंगापुर में गर्ग की मौत के सिलसिले में हत्या का आरोप लगाया है। गर्ग वहां नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल में परफॉर्म करने वाले थे। बाकी तीन लोग नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल सिंगापुर के ऑर्गनाइज़र श्यामकानु महंता, गर्ग के मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा और एक और साथी म्यूज़िशियन शेखर ज्योति गोस्वामी हैं। अपनी बेल याचिका में महंता के वकील ने कहा कि उन्होंने असम और उसके बाहर गर्ग के साथ परफॉर्म किया था और उनके कहने पर वह सिंगापुर में फेस्टिवल के लिए उनके साथ गई थीं। वह 29 साल की महंता के लिए पिता जैसे थे। इसमें कहा गया है कि पहुंचने के बाद उन्हें पता चला कि उन्हें गर्ग के साथ वही कमरा दिया गया है और वह विदेश में कमरे के इस अलॉटमेंट पर कोई आपत्ति नहीं कर सकती थीं और क्योंकि उन्हें अपने पिता जैसे व्यक्ति के साथ उसी कमरे में रहने के लिए कहा गया था, इसलिए वह उसी कमरे में रहीं। उन्हें पिछले दिन तक यॉट राइड के बारे में पता नहीं था। क्या हैं आरोप? असम पुलिस की चार्जशीट में अमृतप्रभा महंता पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने सिंगापुर के होटल रूम में जुबीन को अत्यधिक शराब पीने के लिए उकसाया। उन्होंने जुबीन के स्वास्थ्य और नींद की कमी के बारे में उनके मैनेजर या पत्नी को सूचित नहीं किया। उन्होंने जुबीन को उस गंभीर नशे की हालत में बिना लाइफ जैकेट के समुद्र में तैरने के लिए प्रोत्साहित किया। दूसरी ओर, जुबीन के दो पीएसओ नंदेश्वर बोराह और परेश बैश्य पर आपराधिक साजिश और विश्वासघात (पैसे के दुरुपयोग) का आरोप है। कोर्ट ने कहा कि उन्होंने उस पैसे का गबन किया जो जुबीन का था, जो कि समाज पर बुरा असर डालने वाला एक गंभीर अपराध है। सिंगापुर और भारत के बीच कानूनी पेच जुबीन गर्ग की मौत 19 सितंबर 2025 को सिंगापुर के लाजरस द्वीप पर एक यॉट यात्रा के दौरान हुई थी। सिंगापुर की कोरोनर कोर्ट में जांच के दौरान पुलिस ने बताया कि जुबीन अत्यधिक नशे में थे और उन्होंने लाइफ जैकेट पहनने से इनकार कर दिया था। वहां की पुलिस इसे एक दुर्घटना (डूबने से मौत) के रूप में देख रही है। वहीं, भारत में गठित विशेष जांच दल (SIT) ने इसे हत्या और साजिश का मामला मानते हुए 2,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। जुबीन की पत्नी की अपील जुबीन गर्ग की पत्नी गरिमा सैकिया गर्ग ने जमानत का कड़ा विरोध किया। उन्होंने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस मामले के लिए एक विशेष अदालत और त्वरित सुनवाई की मांग की है। गरिमा का कहना है कि जब तक मुकदमा पूरा नहीं हो जाता, किसी भी आरोपी को जमानत नहीं मिलनी चाहिए। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 13 फरवरी 2026 की तारीख तय की है।

DRDO का नया एयर डिफेंस हथियार, S-400 obsolete, JF-17 और J-10 की क्षमता पर असर

बेंगलुरु  भारत डिफेंस सेक्‍टर में खुद को आत्‍मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है. मिसाइल, तोप-टैंक, फाइटर जेट, एंटी मिसाइल सिस्‍टम के साथ ही अल्‍ट्रा मॉडर्न टेक्‍नोलॉजी से लैस एयर डिफेंस सिस्‍टम भी डेवलप किया जा रहा है. 21वीं सदी में टेक्‍नोलॉजी ने बड़ी छलांग लगाई है. रक्षा क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं है. तकनीक ने युद्ध और सशस्‍त्र संघर्ष के तौर-तरीकों को पूरी तरह बदल दिया है. अब ड्रोन वॉरफेयर का समय आ गया है. इसके अलावा लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों ने पूरी दुनिया की चिंताओं को बढ़ा दिया है. सामरिक तौर पर भारत की स्थिति काफी संवेदनशील है. हमारी देश की सीमाएं एक तरफ पाकिस्‍तान तो दूसरी तरफ चीन से लगती हैं. इस्‍लामाबाद और बीजिंग की नीतियों से हर कोई वाकिफ है, ऐसे में भारत के लिए मजबूत सुरक्षा तंत्र विकसित करना जरूरी ही नहीं, बल्कि अनिवार्य हो चुका है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन-पाकिस्‍तान की युगलबंदी देखने को मिली थी. चीनी फाइटर जेट और मिसाइल के साथ ही तुर्की निर्मित ड्रोन का इस्‍तेमाल भारत पर अटैक करने में किया गया था. इन सब सुरक्षा हालात को देखते हुए भारत ने ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ के तहत नेशनल एयर डिफेंस सिस्‍टम विकसित करने पर काम कर रहा है. इस प्रोजेक्‍ट को साल 2035 तक पूरा करने का लक्ष्‍य रखा गया है. इसके पूरी तरह से अस्तित्‍व में आने के बाद देश के हर हिस्‍से को किसी भी एरियल थ्रेट से सुरक्षित रखा जा सकेगा. मिशन सुदर्शन चक्र के तहत प्रोजेक्‍ट कुश (Project Kusha) पर काम चल रहा है. बताया जा रहा है कि प्रोजेक्‍ट कुश इस तक पावरफुल होगा कि कई मायनों में रूसी S-400 एयर डिफेंस सिस्‍टम भी इसके सामने बौना पड़ जाएगा. भारत अपनी वायु रक्षा क्षमताओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. इसी क्रम में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के तहत चल रहा प्रोजेक्ट कुश देश के लिए एक महत्वाकांक्षी पहल बनकर उभर रहा है. आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (ARDE) के प्रमुख अंकथि राजू ने इस कार्यक्रम से जुड़ी अहम जानकारियां साझा करते हुए कहा है कि इसका उद्देश्य स्वदेशी इंटरसेप्टर मिसाइल प्रणाली विकसित करना है, जिसकी क्षमता रूस के अत्याधुनिक S-400 एयर डिफेंस सिस्टम के बराबर या कुछ मामलों में उससे भी बेहतर होगी. प्रोजेक्ट कुशा के तहत तीन प्रकार की इंटरसेप्टर मिसाइलें विकसित की जा रही हैं, जिन्हें M1, M2 और M3 नाम दिया गया है. ये तीनों मिलकर एक लेयर्ड एयर डिफेंस शील्ड बनाएंगी, जो लड़ाकू विमानों, क्रूज मिसाइलों और हाई-वैल्यू एयरबोर्न एसेट्स जैसे खतरों से देश की सुरक्षा करने में सक्षम होगी. यह प्रणाली भारत को लंबी दूरी की वायु रक्षा में आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर अग्रणी देशों की श्रेणी में खड़ा करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है.   इतना खास क्‍यों है प्रोजेक्‍ट कुश? डिफेंस प्रोग्राम की पहली कड़ी M1 इंटरसेप्टर मिसाइल होगी, जिसकी मारक क्षमता लगभग 150 किलोमीटर तय की गई है. ‘इंडियन डिफेंस रिसर्च विंग’ की रिपोट के अनुसार, यह रेंज मौजूदा कई मध्यम दूरी की एयर डिफेंस मिसाइलों से अधिक है. उदाहरण के तौर पर S-400 एयर डिफेंस सिस्‍टम में इस्‍तेमाल की जाने वाली 9M96E2 मिसाइल की अधिकतम रेंज करीब 120 किलोमीटर मानी जाती है. ऐसे में M1 न केवल दूर तक लक्ष्य भेदने में सक्षम होगी, बल्कि हाई-प्रिसिजन और इंस्‍टेंट रिएक्‍शन समय के साथ हवाई खतरों को निष्क्रिय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. दूसरी मिसाइल M2 को 250 किलोमीटर की रेंज के साथ विकसित किया जा रहा है. यह क्षमता इसे S-400 प्रणाली में इस्तेमाल होने वाली 48N6DM और 48N6E3 जैसी लंबी दूरी की मिसाइलों की श्रेणी में खड़ा करती है. रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, M2 प्रोजेक्ट कुश की रीढ़ साबित होगी, क्योंकि यह हाई-स्‍पीड और हाई-अल्‍टीट्यूड पर उड़ रहे टार्गेट को भी प्रभावी ढंग से नष्ट करने में सक्षम होगी. इससे इंडियन एयर डिफेंस नेटवर्क की पहुंच और विश्वसनीयता दोनों में बड़ा इजाफा होगा. सबसे महत्वाकांक्षी घटक M3 इंटरसेप्टर है, जिसकी वर्तमान रेंज 350 किलोमीटर बताई गई है. हालांकि, पहले सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक इसके दायरे को 400 किलोमीटर तक बढ़ाने पर भी काम चल रहा है. यदि यह लक्ष्य हासिल होता है, तो यह मिसाइल रूस की S-400 प्रणाली में इस्‍तेमाल 40N6E मिसाइल के बराबर पहुंच प्रदान करेगी. इतनी लंबी दूरी तक लक्ष्य भेदने की क्षमता भारत को दुश्मन के हवाई क्षेत्र के भीतर गहराई तक निगरानी और प्रतिरोध का अवसर देगी, जिससे सामरिक बढ़त और डेटरेंस पावर दोनों में इजाफा होगा. DRDO अधिकारियों के अनुसार, M3 इंटरसेप्टर का पहला परीक्षण 2028 तक किए जाने की संभावना है. इस अवधि में इसके प्रोपल्शन सिस्टम, गाइडेंस तकनीक और रडार इंटीग्रेशन को और अधिक अपग्रेड किया जाएगा, ताकि यह मिसाइल अपने तय प्रदर्शन मानकों को पूरा कर सके या उनसे आगे निकल सके. विशेषज्ञों का मानना है कि जब M3 का पहला परीक्षण होगा, तब तक इसकी क्षमताएं लगभग 400 किलोमीटर की रेंज के आसपास पहुंच सकती हैं. चीन-पाकिस्‍तान का हमला होगा बेकार प्रोजेक्ट कुश केवल तकनीकी उपलब्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की रक्षा नीति में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को भी मजबूती प्रदान करता है. अब तक भारत को लंबी दूरी की वायु रक्षा के लिए काफी हद तक इंपोर्टेड सिस्‍टम्‍स पर निर्भर रहना पड़ा है. प्रोजेक्‍ट कुश के सफल होने से न केवल विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता कम होगी, बल्कि घरेलू रक्षा उद्योग को भी नई तकनीक, रोजगार और निर्यात के अवसर मिलेंगे. रणनीतिक दृष्टि से देखें तो यह परियोजना भारत के मल्‍टी-लेयर्ड एयर डिफेंस नेटवर्क को और सशक्त बनाएगी. M1, M2 और M3 की संयुक्त तैनाती से देश को मध्यम, लंबी और लंबी दूरी तक व्यापक सुरक्षा कवच मिलेगा. इससे सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी और किसी भी संभावित हवाई खतरे के खिलाफ त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जा सकेगी. प्रोजेक्ट कुश भारत की रक्षा अनुसंधान क्षमताओं और रणनीतिक आत्मनिर्भरता का प्रतीक बनता जा रहा है. यदि यह कार्यक्रम तय समयसीमा और लक्ष्यों के अनुरूप सफल होता है, तो भारत न केवल अपनी जरूरतों को स्वदेशी तकनीक से पूरा करेगा, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में भी एक सशक्त खिलाड़ी के रूप में उभर सकता है. … Read more