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वोटर लिस्ट पुनरीक्षण का असर: नौ राज्यों-केंद्रशासित प्रदेशों में 1.70 करोड़ मतदाताओं की कमी

 नई दिल्ली भारत के छह राज्यों और कुछ केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का काम पूरा हो गया है। चुनाव आयोग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे मतदाताओं के नाम हटाए गए, जिन्हें अयोग्य पाया गया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 9 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाताओं की संख्या मिलाकर 1 करोड़ 70 लाख से ज्यादा घट गई है। आयोग ने स्पष्ट किया कि यह हटाए गए मतदाताओं और नए जोड़े गए योग्य मतदाताओं के अंतर के आधार पर नेट बदलाव है। कितने घटे मतदाता? मुख्य निर्वाचन अधिकारियों द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, गुजरात, पुडुचेरी, लक्षद्वीप, राजस्थान, छत्तीसगढ़, अंडमान-निकोबार द्वीप, गोवा और केरल समेत कुल नौ राज्यों-केंद्रशासित प्रदेशों में एसआईआर शुरू होने से पहले मतदाताओं की संख्या लगभग 21.45 करोड़ थी। अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद यह घटकर करीब 19.75 करोड़ रह गई, यानी कुल मिलाकर 1.70 करोड़ से अधिक मतदाता कम हो गए। गुजरात में 68 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम कटे सबसे ज्यादा नाम गुजरात में हटाए गए हैं। यहां कुल 68 लाख 12 हजार 711 मतदाताओं के नाम सूची से हटे, जिससे कुल मतदाता संख्या लगभग 5.08 करोड़ से घटकर 4.40 करोड़ रह गई, यानी करीब 13.40% की कमी दर्ज हुई। इसके बाद मध्य प्रदेश का नंबर रहा, जहां करीब 34.25 लाख नाम हटाए गए और मतदाता संख्या 5.74 करोड़ से घटकर 5.39 करोड़ हो गई। राजस्थान में 31 लाख तो छत्तीसगढ में 25 लाख मतदाता के नाम हटे अन्य राज्यों में भी बड़ी कटौती देखी गई। राजस्थान में लगभग 31.36 लाख मतदाताओं के नाम हटे, छत्तीसगढ़ में करीब 24.99 लाख, जबकि केरल में करीब 8.97 लाख नाम कम हुए। छोटे राज्यों में गोवा में लगभग 1.27 लाख नाम हटे। केंद्र शासित प्रदेशों में अंडमान-निकोबार, पुडुचेरी और लक्षद्वीप में भी मतदाताओं की संख्या में कमी दर्ज की गई। किस वजह से हटाए गए मतदाताओं के नाम? चुनाव आयोग के अनुसार मतदाता सूची से नाम हटाने के मुख्य कारणों में मौत, स्थायी रूप से दूसरी जगह चले जाना, एक से अधिक जगह पंजीकरण होना या पात्रता से जुड़े अन्य मुद्दे शामिल हैं। आयोग ने कहा कि मतदाता सूची को अपडेट करना लगातार चलने वाली प्रक्रिया है और पात्र नागरिक अब भी नाम जुड़वाने, हटवाने या सुधार के लिए आवेदन कर सकते हैं। यूपी, बंगाल और तमिलनाडु में SIR जारी आयोग ने बताया कि पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के आंकड़े इस महीने के अंत तक जारी किए जाएंगे। देशभर में 12 राज्यों में चल रहे इस अभियान का अगला चरण अप्रैल से शुरू होगा, जिसके तहत पूरे देश में मतदाता सूचियों का सत्यापन जारी रहेगा। विवाद और कानूनी चुनौती,  असम में अलग प्रक्रिया इस पूरे अभियान के दौरान कई जगह शेड्यूल में बदलाव भी किए गए। बिहार की तरह ही तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में राजनीतिक दलों ने इस प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। चुनाव आयोग का कहना है कि यह अभियान मतदाता सूची को अधिक सटीक और अपडेट रखने के लिए किया जा रहा है। असम में एसआईआर की जगह स्पेशल रिविजन प्रक्रिया अपनाई गई थी, जो 10 फरवरी को पूरी हो चुकी है। देशभर में चल रहा है अभियान चुनाव आयोग का यह विशेष पुनरीक्षण अभियान देश के कई हिस्सों में जारी है। बिहार में यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि अभी 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में यह काम चल रहा है, जहां लगभग 60 करोड़ मतदाता शामिल हैं। इसके बाद अगले चरण में 17 राज्यों और 5 केंद्रशासित प्रदेशों के करीब 40 करोड़ मतदाताओं को कवर किया जाएगा।

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में भीषण मुठभेड़, जैश का बड़ा आतंकी ढेर

किश्तवाड़ जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के छात्रू क्षेत्र में आज सुरक्षाबलों और जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ शुरू हुई। जिसमें संगठन का शीर्ष कमांडर मारा गया। अधिकारियों के अनुसार यह एनकाउंटर तब शुरू हुआ जब सेना ने छात्रू के जंगलों में सर्च ऑपरेशन चलाया। उन्हें दो संदिग्ध आतंकवादियों के इलाके में होने की सूचना मिली थी। इस ऑपरेशन के दौरान जैश-ए-मोहम्मद का एक शीर्ष कमांडर मारा गया। यह संयुक्त कार्रवाई जम्मू और कश्मीर पुलिस, 2 पैराशूट बटालियन विशेष बल और भारतीय सेना ने की। हालांकि, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और जारी ऑपरेशन के कारण आतंकवादी का शव अभी तक बरामद नहीं किया जा सका। सुरक्षा बलों ने पूरे क्षेत्र को घेर लिया है और अन्य आतंकवादियों की मौजूदगी को खत्म करने के लिए सर्च ऑपरेशन जारी है।  

ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी 15% बढ़ा दिया टैरिफ

नई दिल्ली. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ को लेकर एक बार फिर से बड़ा ऐलान किया है। शनिवार को उन्होंने कहा कि अब से तुरंत प्रभाव से दुनिया के सभी देशों पर लगने वाला 10% टैरिफ बढ़ाकर 15% कर दिया जाएगा। ट्रंप का कहना है कि कई देश दशकों से अमेरिका का फायदा उठाते आए हैं, लेकिन अब उनकी सरकार इसे रोक रही है। उन्होंने कहा कि आने वाले कुछ महीनों में वे और नए-नए टैक्स तय करेंगे, जो कानूनी होंगे। उनका मकसद अमेरिका को और भी मजबूत और महान बनाना है – पहले से कहीं ज्यादा! डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगाए गए टैरिफ पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी को 6-3 के फैसले में बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने माना कि ट्रंप ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का दुरुपयोग किया, जो राष्ट्रीय आपातकाल के लिए आरक्षित है और इस कानून के तहत वैश्विक टैरिफ लगाना असंवैधानिक है। इस फैसले से ट्रंप के आर्थिक एजेंडे को गहरा धक्का लगा, क्योंकि ये टैरिफ लगभग सभी अमेरिकी व्यापारिक भागीदारों पर लागू थे। हालांकि, स्टील और एल्युमिनियम जैसे क्षेत्र-विशेष टैरिफ प्रभावित नहीं हुए, जो सेक्शन 232 जैसे अलग कानूनों के तहत लगाए गए थे। इस निर्णय से अमेरिकी अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता बढ़ गई है और व्यवसायों को अरबों डॉलर के टैरिफ रिफंड की उम्मीद है। कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जॉन जी. रॉबर्ट्स जूनियर ने फैसले में लिखा कि कांग्रेस ही टैरिफ लगाने का अधिकार रखती है, राष्ट्रपति नहीं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भड़के ट्रंप ट्रंप ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी, इसे भयानक और शर्मनाक बताते हुए न्यायाधीशों को मूर्ख कहा। उन्होंने इसे गहरा निराशाजनक करार दिया और कहा कि विदेशी देश खुश हैं, लेकिन ज्यादा देर नहीं टिकेगा। फैसले के कुछ घंटों बाद ही ट्रंप ने नया 10% वैश्विक टैरिफ लागू कर दिया, जिसमें कनाडा और मैक्सिको को छूट दी गई है, क्योंकि वे उत्तर अमेरिकी व्यापार समझौते के तहत संरक्षित हैं। ट्रंप ने कहा कि उनके पास बैकअप प्लान है और उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के कुछ न्यायाधीशों पर शर्म आने की बात कही। उनकी यह प्रतिक्रिया उनके आक्रामक व्यापार नीति को दर्शाती है, जो वैश्विक बाजारों में अस्थिरता पैदा कर रही है। ट्रंप के पास अब क्या है रास्ता डोनाल्ड ट्रंप के पास अब भी कई विकल्प बचे हैं, जैसे सेक्शन 232 और 301 जांचों के तहत क्षेत्र-विशेष टैरिफ लगाना, जो स्टील, एल्युमिनियम और ऑटो जैसे उत्पादों पर पहले से लागू हैं। ये टैरिफ अगले दशक में 635 अरब डॉलर की कमाई कर सकते हैं। ट्रंप अन्य कानूनों का सहारा ले सकते हैं, जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा आधारित टैरिफ, जो सुप्रीम कोर्ट के फैसले से प्रभावित नहीं हैं। वे नए कार्यकारी आदेश जारी कर सकते हैं या कांग्रेस से नए कानून की मांग कर सकते हैं, हालांकि राजनीतिक विभाजन के कारण यह मुश्किल है। कुल मिलाकर ट्रंप की व्यापार युद्ध जारी रह सकता है, लेकिन अब अधिक कानूनी जांच के साथ।

एयरस्ट्राइक में हुई मासूमों की मौत का पाक से बदला जरूर लेंगे: अफगानिस्तान

नई दिल्ली. अफगानिस्तान ने सीमाई इलाकों में पाकिस्तान की एयर स्ट्राइक की पुष्टि करते हुए कहा है कि इस हमले में दर्जनों आम नागरिकों की जान गई है। तालिबान के प्रवक्ता जुबिउल्लाह मुजाहित ने कहा, बीती रात नांगरहार और पाकटिका प्रांतों में पाकिस्तान ने अचानक हवाई हमला कर दिया। इसमें दर्जनों लोगों की मौत हुई है जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। टोलो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी सेना ने नांगरहार में एक रिहाइशी इमारत पर हमला कर दिया जिसमें एक परिवार के करीब 23 लोग रहते थे। मलबे में परिवार दब गया है। अब तक इसमें से केवल चार लोगों को निकाला जा सका है। तालिबान ने बताया है कि पाकिस्तान ने बेरमाल और आरगुन जिलों में हवाई हमले किए हैं। इस्लामाबाद की तरफ से कहा गया था कि पाकिस्तान में हुए आतंकी हमले का बदला लेने के लिए सीमावर्ती इलाकों में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया है। बेकसूर लोगों को मारने का आरोप जबीउल्लाह मुजाबित ने कहा कि पाकिस्तान ने नापाक हरकत करके मासूमों की जान ली है। उन्होंने कहा, पाकिस्तानी सेना ने घुसपैठ की है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के जनरल इसी तरह की हरकतें करके अपनी छवि सुधारने देश में सुधारने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा, पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के हवाई क्षेत्र में दखल दिया है। ऐसे में अफगानिस्तान के पास भी जवाब देने का अधिकार है। सही समय आने पर हमला किया जाएगा। पाकिस्तान का कहना है कि खैबर-पख्तूनख्वा के बन्नू इलाके में शनिवार को एक आत्मघाती हमले में सेना के एक लेफ्टिनेंट कर्नल और एक सैनिक की मौत हो गई थी और उसी का बदला लेने के लिए यह एयर स्ट्राइक की गई है। इसके बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, पाकिस्तान के पास इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि इस्लामाबाद की शिया मस्जिद पर हमला और शनिवार को बन्नू में हुई घटना समेत आतंकवाद की ये घटनाएं कथित तौर पर ख्वारिज ने अफगानिस्तान स्थित अपने आकाओं और संचालकों के इशारे पर कीं। मंत्रालय ने कहा, ''इन हमलों की जिम्मेदारी फितना अल ख्वारिज (एफएके) से संबंधित अफगानिस्तान स्थित पाकिस्तानी तालिबान और उनके सहयोगियों तथा इस्लामिक स्टेट ऑफ खुरसान प्रांत (आईएसपीके) ने ली है।'' उसने कहा कि अफगान तालिबान शासन से बार-बार आग्रह किया गया कि वह आतंकवादी समूहों और विदेशी एजेंटों को पाकिस्तान में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए अफगान क्षेत्र का उपयोग करने से रोके लेकिन इसके बावजूद वह उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई करने में ''विफल'' रहा। उसने कहा, ''इस पृष्ठभूमि में, पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान-अफगान सीमा क्षेत्र में पाकिस्तानी तालिबान, एफएके और उसके सहयोगियों तथा आईएसकेपी से संबंधित सात आतंकवादी शिविरों और ठिकानों को खुफिया जानकारी के आधार पर सटीक और कुशलता से निशाना बनाया है।'' मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान अंतरिम अफगान सरकार से अपने दायित्वों को पूरा करने की अपेक्षा को दोहराता है। उसने कहा कि पाकिस्तान को यह भी उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय सकारात्मक एवं रचनात्मक भूमिका निभाते हुए तालिबान शासन से दोहा समझौते के तहत अपनी इन प्रतिबद्धताओं का पालन करने का आग्रह करेगा कि वह अन्य देशों के खिलाफ अपनी भूमि का उपयोग होने से रोके तथा यह कार्य क्षेत्रीय एवं वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान ने हमेशा क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने का प्रयास किया है, लेकिन ''हमारे नागरिकों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।' पाकिस्तान अफगानिस्तान पर आरोप लगाता रहा है कि वह आतंकवादियों को हमलों के लिए अपनी धरती का इस्तेमाल करने से रोकने में नाकाम रहा है। इसके कारण पाकिस्तान और अफगान तालिबान के बीच संबंध बिगड़ गए हैं। पिछले साल अक्टूबर में, दोनों पक्षों के बीच संक्षिप्त रूप से सशस्त्र संघर्ष हुआ था। पाकिस्तानी सेना के अनुसार, इसमें 23 पाकिस्तानी सैनिक और 200 से अधिक अफगान तालिबान सैनिक मारे गए थे।

पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक में मारे गए TTP के दर्जनों अफगानिस्तानी लड़ाके

नई दिल्ली. पाकिस्तान ने रविवार तड़के ही अफगानिस्तान की सीमा पर एयरस्ट्राइक की है। रिपोरट्स के मुताबिक पाकिस्तान ने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के ठिकानों को निशाना बनाया है। इस स्ट्राइक में टीटीपी के दर्जनों लड़ाकों के मारे जाने की खबर है। सोशल मीडिया पर एयरस्ट्राइक के कई वीडियो वायरल हो रहे हैं। इनमें देखा जा सकता है कि हमला कितना बड़ा था। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान के खैबर बख्तूनख्वामें शनिवार को हुए आत्मघाती हमलों के बाद यह कदम उठाया गया है। शनिवार को खुफिया जानकारी पर आधारित एक अभियान के दौरान हुए आत्मघाती हमले में दो सुरक्षाकर्मी मारे गए। सेना की मीडिया शाखा के प्रवक्ता ने यह जानकारी दी। प्रवक्ता ने बताया कि खैबर पख्तूनख्वा के बन्नू जिले में चलाए गए अभियान के दौरान फितना अल-ख्वारिज के पांच ख्वारिज भी मारे गए थे। पाकिस्तान सरकार प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के लिए फितना-अल-ख्वारिज नाम का इस्तेमाल करती है। प्रवक्ता के मुताबिक, यह अभियान क्षेत्र में एक आत्मघाती हमलावर सहित कई ख्वारिजों (आतंकवादियों) की मौजूदगी के बारे में मिली खुफिया जानकारी के आधार पर चलाया गया था। उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान आतंकवादियों ने सुरक्षाबलों के एक काफिले को निशाना बनाया था। प्रवक्ता के अनुसार, बन्नू शहर में सुरक्षाबलों ने वाहन सवार आत्मघाती हमलावर को रोक लिया, जिससे आम नागरिकों और कानून प्रवर्तन अधिकारियों को निशाना बनाने की उसकी योजना पर पानी फिर गया। प्रवक्ता ने बताया कि इस दौरान सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ छिड़ गई, जिसमें पांच ख्वारिज मारे गए थे। हालांकि, उन्होंने बताया कि आतंकवादियों ने विस्फोटकों से लदे एक वाहन से सुरक्षाबलों के काफिले में शामिल एक वाहन में टक्कर मार दी, जिससे लेफ्टिनेंट कर्नल शहजादा गुल फराज और सिपाही करामत शाह की मौत हो गई। कुछ ही दिन हले मलांगी में एक मदरसें की इमारत के पास तेज धणाका हुआ था। धमाका इतना तेज था कि इमारत जर्जर हो गई थी। आसपास की इमारतों को भी नुकसान पहुंचा थाऔर खिड़कियों के शीशे टूट गए थे। विस्फोट के पास धुआं ही धुआं हो गया था। आतंकियों ने पहले गोलीबारी की और फिर धमाका किया था। अफगानिस्तान के साथ बढ़ेगा तनाव? बता दें कि पाकिस्तान पहले भी अफगानिस्तान के सीमाई इलाकों में एयरस्ट्राइक कर चुका है। जब भी उसने ऐसा किया है, तालिबान के साथ तनाव बढ़ गया है। कई बार सीमाई इलाकों में गोलीबारी भी शुरू हो गई और युद्ध जैसी स्थिति बन गई। इस बार भी ऐसी संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता है। 

नासा ने टाल दिया अपना मून मिशन, मार्च में होनी थी लॉन्चिंग

नई दिल्ली. अमेरिकी अंतरिक्ष एजंसी नासा ने अपना मून मिशन फिलहालटाल दिया है। जानकारी के मुताबिक नासा मानवयुक्त फ्लाइबाइ मिशन आर्टेमिस-2 को मार्च में लॉन्च करने वाला था। हालांकि अब रॉकेट और यान दोनों को लॉन्च पैड से हटा लिया गया है। बताया गया कि रॉकेट में आई तकनीकी खराबी की वजह से मिशन को टाला गया है। नासा के चीफ जेरेड आइजैकमैन ने शनिवार को बताया कि स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) हीलियम लीक की समस्या देखने को मिली थी। अब मार्च में तो इस मिशन को लॉन्च नहीं किया जा सकेगा। उन्होंने कहा, इस फैसले से नासा की टीम निराश है। हम लोगों ने इस मिशन के लिए कड़ी मेहनत की है। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण मिशन बहुत सावधानी से किए जाते हैं। 1960 के दशक में भी जब नासा ने ऐसा कारनामा कर दिखाया जिसकी कल्पना भी दुनिया ने नहीं की थी. तब भी कई बाधाएं सामने आई थीं और मिशन लेट हुआ था। रॉकेट सिस्टम में हीलियम निभाता है अहम भूमिका किसी भी रॉकेट सिस्टम के लिए हीलियम बहुत जरूरी होता है। यह प्रोपेलेंट टैंक में प्रेशर बनाता है और इंजन को चलाने में मदद करता है। अब एलएलएस रॉकेट और ओरियन अंतरिक्ष यान को मरम्मत के लिए व्हीकल असेंबली बिल्डिंग में ले जाया जाएगा। क्या है नासा का प्लान नासा का प्लान था कि आर्टेमिस-II में जाने वाले अंतरिक्ष-यात्री शून्य-गुरुत्वाकर्षण में एक छोटे से केबिन में काम करेंगे। पृथ्वी की निचली ऑर्बिट में रेडिएशन का स्तर अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन की तुलना में ज़्यादा होगा, लेकिन फिर भी सुरक्षित होगा। पृथ्वी पर लौटने पर अंतरिक्ष-यात्री वायुमंडल से गुज़रते समय एक ऊबड़-खाबड़ वापसी का अनुभव करेंगे और अमेरिका के पश्चिमी तट से दूर प्रशांत महासागर में लैंडिंग करेंगे। गौरतलब है कि यह रॉकेट चांद पर उतरने वाला नहीं था। नासा के अनुसार, इस मिशन का मकसद आर्टेमिस-3 मिशन में अंतरिक्ष-यात्रियों की चांद पर लैंडिंग के लिए भूमिका तैयार करना था। नासा का प्लान है कि जब आर्टेमिस-3 आखिरकार उड़ान भरेगा, तो अंतरिक्ष-यात्री चांद के दक्षिणी ध्रुव पर जाएंगे। उस मिशन के बाद, मकसद इंसानों की लगातार मौजूदगी बनाए रखना है। आर्टेमिस-4 और आर्टेमिस-5 गेटवे बनाना शुरू करेंगे, जो चांद के चारों ओर घूमने वाला एक छोटा स्पेस स्टेशन होगा। इसके बाद और भी मून लैंडिंग होंगी, गेटवे में अतिरिक्त हिस्से जोड़े जाएंगे और सतह पर नये रोबोटिक रोवर काम करेंगे। नासा ने पिछली बार 1960 और 1970 के दशक के अपोलो कार्यक्रम के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर भेजा था। नये आर्टेमिस कार्यक्रम का लक्ष्य चंद्रमा पर अधिक स्थायी उपस्थिति स्थापित करना है।

लेबनान में इजरायली हवाई हमले में हिजबुल्लाह के कमांडर सहित 8 आतंकियों की मौत

नई दिल्ली. पूर्वी लेबनान पर हुए इजराइली हवाई हमलों में हिज्बुल्लाह आतंकवादी समूह के आठ सदस्यों की मौत हो गई है, जिनमें कई स्थानीय अधिकारी भी शामिल हैं। हिज्बुल्ला के दो अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने मृतकों की संख्या 10 बताई है लेकिन आतंकवादियों और नागरिकों के बीच अंतर स्पष्ट नहीं किया गया है। तीन मंजिला इमारत पर हमला हिज्बुल्लाह के अधिकारियों ने नाम नहीं प्रकाशित करने की शर्त पर 'एसोसिएटेड प्रेस' को बताया कि शुक्रवार देर रात उत्तरपूर्वी लेबनान के रयाक गांव के पास हुए हमलों में आठ आतंकवादी मारे गए। शनिवार सुबह हमले वाली जगह का दौरा करने वाली एसोसिएटेड प्रेस की टीम ने देखा कि तीन मंजिला इमारत की सबसे ऊपरी मंजिल ध्वस्त हो गई थी। इजरायल पर हमले की रच रहे थे साजिश? इजराइली सेना ने शनिवार को बताया कि लेबनान के बालबेक इलाके में तीन अलग-अलग कमांड अड्डों में हिजबुल्ला की मिसाइल इकाई के कई सदस्य मारे गए। सेना ने बताया कि हमले में मारे गये हिजबुल्ला के सदस्य 'इजराइल पर हमले की साजिश रचने, उसे अंजाम देने और सैन्य बल बढ़ाने की प्रक्रियाओं को तेज करने' में संलिप्त थे। हिजबुल्ला के एक अधिकारी ने बताया कि मृतकों में से तीन स्थानीय कमांडर थे और उनकी पहचान अली अल-मौसावी, मोहम्मद अल-मौसावी और हुसैन याघी के रूप में हुई है। याघी, हिज्बुल्लाह के एक प्रमुख अधिकारी और संस्थापक मोहम्मद याघी का बेटा थे। मोहम्मद याघी का 2023 में निधन हो गया था। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि पूर्वी लेबनान पर इजराइली हमलों में 10 लोग मारे गए और 24 घायल हुए, जिनमें तीन बच्चे भी शामिल हैं। रयाक अस्पताल के कार्यकारी निदेशक अली अब्दुल्ला ने एपी को बताया कि यह हमला सूर्यास्त के बाद हुआ। उन्होंने बताया कि 10 शवों और 21 घायलों को अस्पताल लाया गया था। मृतकों में सीरिया का एक नागरिक और इथियोपिया की एक महिला भी शामिल है। घायलों में पांच सीरियाई और तीन इथियोपियाई नागरिक शामिल हैं। बता दें कि लेबनान और इजरायल के बीच युद्धविराम होने के बाद भी इजरायल अकसर हिजबुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाता है। हिजबुल्लाह के अब तक दर्जनों कमांडर इजरायल ने ढेर कर दिए हैं। हिजबुल्लाह और हमास मिलकर इजरायल पर हमले की साजिश करते हैं। ऐसे में इजरायल दोनों ही कट्टरपंथी संगठनों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त करने को तैयार नहीं है। इस बार इजरायल ने पूर्वी लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकाने को निशाना बनया है।

ओडिशा में ट्रेलर की टक्कर से 5 पुलिस जवानों की मौत और 3 की हालत नाजुक

नई दिल्ली/झारसुगुड़ा. ओडिशा के झारसुगुड़ा जिले में रविवार तड़के एक बेहद दर्दनाक सड़क हादसा हुआ। एक तेज रफ्तार ट्रेलर ने पुलिस की बोलेरो गाड़ी को जोरदार टक्कर मार दी, जिससे पांच पुलिस कर्मियों की मौके पर ही मौत हो गई। तीन अन्य जवान गंभीर रूप से घायल हैं। यह दुर्घटना इतनी भीषण थी कि पुलिस वाहन के परखच्चे उड़ गए। अधिकारियों के अनुसार, यह घटना झारसुगुड़ा सदर पुलिस स्टेशन के पास सुबह के समय हुई। पुलिस की बोलेरो ड्यूटी पर थी, तभी विपरीत दिशा से आ रहे एक अनियंत्रित और तेज रफ्तार ट्रेलर ने उसे सामने से टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बोलेरो पूरी तरह पिचक गई, जिससे उसमें सवार पांच कर्मियों ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया। इस हादसे में अपनी जान गंवाने वाले जवानों की पहचान कर ली गई है। पुलिस विभाग ने मृतकों के नाम साझा करते हुए गहरा शोक व्यक्त किया है। इस दुर्घटना में ड्रिल सब-इंस्पेक्टर निरंजन कुजूर, एपीआर कर्मी काशीराम भोई, एपीआर कर्मी देबदत्त सा, एपीआर हवलदार लिंगराज धुरुआ और होमगार्ड भक्तबंधु मिर्धा का निधन हुआ है। दुर्घटना में घायल हुए तीन अन्य कर्मियों में आर्म्ड पुलिस रिजर्व (APR) के दो सदस्य और एक सार्जेंट शामिल हैं। स्थानीय पुलिस ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर उन्हें बाहर निकाला और तुरंत झारसुगुड़ा जिला मुख्यालय अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों के अनुसार, तीनों की हालत काफी नाजुक बनी हुई है और उन्हें विशेषज्ञों की कड़ी निगरानी में रखा गया है। घटना की सूचना मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने आरोपी ट्रेलर चालक को हिरासत में ले लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यह हादसा चालक की लापरवाही, नींद आने या किसी तकनीकी खराबी के कारण हुआ। ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले जवानों को श्रद्धांजलि देने के लिए जिले भर में लोग एकत्र हो रहे हैं। वरिष्ठ अधिकारियों ने शहीदों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की है और घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया है।

लिव इन पार्टनर लड़की के प्राइवेट पार्ट्स में लगाई आग

गुरुग्राम. इंदौर में एमबीए स्टूडेंट के साथ हुई दरिंदगी जैसी घटना गुरुग्राम से भी सामने आई है। यहां एक 19 साल की लड़की के साथ उसके लिव इन पार्टनर ने हैवानियत की हदें पार कर दीं। पहले तो वह उसे शादी का झांसा देकर संबंध बनाता रहा और अब उसकी जान लेने पर उतारू हो गया। आरोपी ने झगड़ा होने के बाद ना सिर्फ लड़की को बुरी तरह पीटा बल्कि उसके प्राइवेट पार्ट्स पर सेनिटाइजर छिड़ककर आग लगा दी। पीड़िता की हालत गंभीर है और वह दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती है। गुरुग्राम की एक नामी यूनिवर्सिटी से बायोटेक की पढ़ाई करने वाली पीड़िता मूल रूप से त्रिपुरा की रहने वाली है। हाथ, मुंह, पैर पर प्राइवेट पार्ट्स पर गंभीर जख्मों के साथ अस्पताल में भर्ती पीड़िता ने जो आपबीती पुलिस को बताई वह बेहद खौफनाक है। पीड़िता ने बताया कि उसका लिव इन पार्टनर शिवम (19) लगातार तीन दिन तक उस पर जुल्म करता रहा। वह शादी का झांसा देकर उसके साथ जबरन संबंध बनाता था। चाकू से वार, प्राइवेट पार्ट में आग लगाई, न्यूड वीडियो बनाए इसी दौरान आरोपी उस पर शक करने लगा और उसके साथ मारपीट करने लगा। गत 16 फरवरी को आरोपी ने पीड़िता को बेरहमी से पीटा। आरोप है कि स्टील की बोतल से आरोपी ने उसके सिर पर हमला किया। सिर को दीवार और फर्नीचर से टकराया। मटका उसके सिर पर फोड़ दिया। उसके प्राइवेट पार्ट पर सेनिटाइजर डालकर आग लगा दी। आरोपी ने चाकू से उसके पैर में कई बार वार किए। उसे धमकी दी कि वो उसे इतना मारेगा कि वो चल भी नहीं पाएगी। कभी मां नहीं बन सकेगी। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि आरोपी ने उसके न्यूड वीडियो भी बनाए हैं। ऐप से हुई दोस्ती और फिर लिव इन पार्टनर बने पीड़िता आरोपी शिवम के साथ सेक्टर-69 के एक पीजी में लिव-इन में रह रही थी। पुलिस की जांच में सामने आया कि छात्रा की शिवम से दोस्ती पिछले साल सितंबर में सोशल मीडिया ऐप के माध्यम से हुई थी। उसके बाद दोनों ने मिलना शुरू कर दिया। दोनों की दोस्ती कुछ ही दिनों में प्यार में बदलगई और बात शादी के वादे तक पहुंच गई। उसके बाद छात्रा और आरोपी लगभग डेढ़ से दो महीने से पीजी में लिव-इन में एक साथ रह रहे थे। शादी को लेकर दोनों में कई बार कहासुनी होती थी। यह भी पता चला है कि आरोपी को छात्रा के चरित्र पर शक था। गुरुवार की रात दोनों के बीच कहासुनी हुई। देखते ही देखते आरोपी ने छात्रा पर लात और मुक्के बरसाने शुरू कर दिए। छात्रा के हाथ, मुंह और पैर पर काफी निशान मिले हैं। मां का फोन आया तो बच गई जान पीड़िता की मां ने संयोग से मारपीट के दौरान ही अपनी बेटी को फोन किया। फोन पर बेटी की चीखें सुनकर मां ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। बादशाहपुर थाना पुलिस जब मौके पर पहुंची, तो कमरा अंदर से बंद था। दरवाजा तोड़ने पर पुलिस ने देखा कि छात्रा लहुलुहान हालत में पड़ी थी। आरोपी उसे पीट रहा था। पुलिस प्रवक्ता संदीप तूरन ने बताया कि मामला दर्ज कर आरोपी शिवम को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धारा 115, 118(1), 118(2), 127(2), 69 और 351(2) के तहत केस दर्ज किया है।

हमले की योजना बना रहे 8 संदिग्ध पाकिस्तानी और बांग्लादेशी गिरफ्तार

नई दिल्ली. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक बड़े अंतर्राज्यीय आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश करते हुए आठ संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने रविवार को बताया कि इस मॉड्यूल के तार पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और बांग्लादेश स्थित कट्टरपंथी संगठनों से जुड़े हैं। यह कार्रवाई तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चलाए गए एक समन्वित सुरक्षा अभियान के तहत की गई है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आठ संदिग्धों में से छह को तमिलनाडु के तिरुप्पुर जिले में स्थित विभिन्न गारमेंट फैक्ट्रियों से हिरासत में लिया गया। इनकी पहचान मिजानुर रहमान, मोहम्मद शबात, उमर, मोहम्मद लिटन, मोहम्मद शाहिद और मोहम्मद उज्ज्वल के रूप में हुई है। वहीं, दो अन्य संदिग्धों को पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया गया है। जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार किए गए कुछ व्यक्ति बांग्लादेशी नागरिक हैं, जो अपनी पहचान छिपाने के लिए जाली आधार कार्ड का इस्तेमाल कर रहे थे। इस मॉड्यूल का पर्दाफाश दिल्ली के विभिन्न हिस्सों विशेषकर दिल्ली मेट्रो नेटवर्क में हाल ही में दिखाई दिए भड़काऊ पोस्टरों के बाद हुआ। इन पोस्टरों में कश्मीर से संबंधित भड़काऊ सामग्री और आपत्तिजनक बातें लिखी गई थीं, जिससे सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं। स्पेशल सेल ने जब पोस्टरों के स्रोत की गहन जांच शुरू की, तो कड़ियां तमिलनाडु में सक्रिय इस नेटवर्क से जुड़ीं, जिसके बाद छापेमारी कर गिरफ्तारियां की गईं। बड़ी साजिश को नाकाम करने का दावा जांचकर्ताओं के अनुसार, ये संदिग्ध अपने विदेशी आकाओं के इशारे पर भारत में एक बड़े आतंकवादी हमले की योजना बना रहे थे। ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने 8 मोबाइल फोन और 16 सिम कार्ड बरामद किए हैं। इन डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है ताकि अन्य गुर्गों और उनके विदेशी संपर्कों के बारे में और अधिक साक्ष्य जुटाए जा सकें। पकड़े गए सभी संदिग्धों को ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली लाया जा रहा है, जहां उनसे सघन पूछताछ की जाएगी। पुलिस अधिकारी इसे एक बड़ी सफलता मान रहे हैं, क्योंकि इससे समय रहते एक संभावित आतंकी साजिश को टाल दिया गया है। फिलहाल, इस मॉड्यूल की फंडिंग के स्रोतों और सीमा पार संपर्कों की पहचान के लिए विस्तृत जांच जारी है।