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श्रद्धालुओं के लिए खुशखबरी! बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तारीख तय, राजदरबार में हुआ निर्णय

नई दिल्ली उत्तराखंड की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र माने जाने वाले बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तारीख का ऐलान कर दिया गया है। बसंत पंचमी के पावन अवसर पर टिहरी जिले के नरेंद्र नगर स्थित राजदरबार में शास्त्रों और पंचांग गणना के बाद यह फैसला लिया गया कि बदरीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खोले जाएंगे। जानकारी के मुताबिक, राजदरबार में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम के दौरान महाराजा मनु जयेंद्र शाह ने स्वयं कपाट खुलने की तिथि की घोषणा की। इस मौके पर राजपुरोहित आचार्य कृष्ण प्रसाद उनियाल ने पंचांग, ग्रह-नक्षत्र और शुभ योगों का अध्ययन कर बताया कि 23 अप्रैल को सुबह 6 बजकर 15 मिनट का समय कपाट खोलने के लिए शुभ है। वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक अनुष्ठानों के बाद विधिवत रूप से तिथि घोषित की गई।   कैसे खुलते हैं बदरीनाथ धाम के कपाट, क्या-क्या होती हैं खास परंपराएं बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की प्रक्रिया पूरी तरह शास्त्रों और परंपराओं के अनुसार होती है। कपाट खुलने से पहले भगवान बदरीविशाल की पूजा-अर्चना विशेष विधि से की जाती है। सबसे पहले मंदिर परिसर को फूलों से सजाया जाता है और सिंहद्वार पर पारंपरिक ढंग से पूजा होती है। कपाट खुलने के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में गणेश पूजा के साथ कार्यक्रम की शुरुआत होती है। इसके बाद शंखनाद और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मंदिर के मुख्य द्वार के ताले खोले जाते हैं। जैसे ही कपाट खुलते हैं, मंदिर परिसर “जय बद्री विशाल” के जयकारों से गूंज उठता है। कपाट खुलने के बाद सबसे पहले भगवान बदरीनाथ के अखंड दीप के दर्शन कराए जाते हैं, जो शीतकाल में भी निरंतर जलता रहता है। इसके बाद भगवान की महाभिषेक पूजा होती है और विशेष श्रृंगार किया जाता है। कपाट खुलने के पहले दिन केवल सीमित समय के लिए ही श्रद्धालुओं को दर्शन की अनुमति दी जाती है। परंपरा के अनुसार, कपाट खुलने के समय डिमरी समाज के प्रतिनिधि और मंदिर के मुख्य रावल विशेष भूमिका निभाते हैं। कपाट खुलने के बाद नियमित पूजा, दर्शन और अन्य धार्मिक अनुष्ठान शुरू हो जाते हैं। क्यों खास है कपाट खुलने का दिन मान्यता है कि बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा की औपचारिक शुरुआत हो जाती है। इस दिन दर्शन करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु इस शुभ पल के साक्षी बनने के लिए बदरीनाथ पहुंचते हैं।

सुप्रीम कोर्ट में तीखी टिप्पणी: CJI बोले– अदालत को डराने की कोशिश मत करो

नई दिल्ली हाईकोर्ट में जज के साथ कहासुनी से जुड़े मामले में फंसे वकील को सुप्रीम कोर्ट से फटकार मिली है। वकील के खिलाफ आपराधिक अवमानना का नोटिस जारी हुआ था, जिसके बाद उन्होंने शीर्ष न्यायालय का रुख किया था। मामले की सुनवाई कर रहे भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने अदालत में चेतावनी दी और कहा कि अगर वह आंख दिखाना चाहते हैं, तो हम भी देख लेंगे वह क्या कर लेंगे।   मामला बीते साल 16 अक्तूबर, झारखंड हाईकोर्ट का है। एक मामले में सुनवाई के दौरान एडवोकेट महेश तिवारी ने जस्टिस राजेश कुमार को सीमा पार नहीं करने के लिए कह दिया था। इसके बाद उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना का नोटिस जारी हुआ। इस नोटिस के खिलाफ वह सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे, जहां उन्हें सीजेआई की नाराजगी का सामना भी करना पड़ा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, CJI ने कहा, 'वह सुप्रीम कोर्ट से आदेश सिर्फ यह दिखाने के लिए चाहते हैं कि क्या बिगाड़ लिया मेरा।' उन्होंने एडवोकेट को नोटिस के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में आने पर भी फटकार लगाई। उन्होंने कहा, 'अगर वह माफी मांगना चाहते हैं, तो उन्हें माफी मांगनी चाहिए…। अगर वह जजों को आंख दिखाना चाहते हैं, तो दिखाएं। हम भी यहां बैठे हैं और फिर हम भी देख लेंगे।' हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से कहा है कि अगर वकील माफी मांग लेते हैं, तो उनके प्रति सहानुभूति रखी जाए। झारखंड हाईकोर्ट में क्या हुआ उस दौरान एडवोकेट तिवारी एक विधवा का केस लड़ रहे थे, जिनका 1 लाख 30 हजार से ज्यादा बकाया होने के कारण बिजली कनेक्शन काट दिया गया था। मामले की सुनवाई होने के बाद जस्टिस कुमार ने राज्य के बार काउंसिल अध्यक्ष से वकील के काम करने के तरीके पर संज्ञान लेने के लिए कहा। इसपर तिवारी उठे और और उंगली दिखाते हुए जज से कहा, 'मैं अपनी तरह से बहस कर सकता हूं, आप जो कह रहे हैं उस तरीके से नहीं। ध्यान रखें…। किसी भी वकील को अपमानित करने की कोशिश ना करें। मैं आपको बता रहा हूं।' इसपर जज ने कहा कि आप यह नहीं कह सकते कि कोर्ट ने अन्याय किया है। एडवोकेट ने जवाब दिया, 'क्या मैंने कहा ऐसा?' उन्होंने जज से लाइव वीडियो रिकॉर्डिंग की जांच करने के लिए कहा। साथ ही बताया कि वह दूसरे वकील थे, जिन्होंने उस वाक्य का इस्तेमाल किया जिसपर जज को आपत्ति हुई। इसके बाद झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली बेंच ने वकील के खिलाफ अवमानना का नोटिस जारी किया था।  

एक ‘गलती’ और दो जानें गईं: शक्ति सिंह गोहिल के रिश्तेदारों की मौत का पूरा घटनाक्रम

अहमदाबाद गुजरात के अहमदाबाद में बुधवार रात कांग्रेस के बड़े नेता और सांसद शक्तिसिंह गोहिल के भतीजे और बहू की गोली लगने से मौत की खबर ने सबको चौंका दिया। दो महीने पहले ही शादी करने वाले एक बड़े अफसर ने क्यों अपनी पत्नी को गोली मारकर खुदकुशी कर ली? इसको लेकर अटकलों का दौर तेज है। पत्नी की मौत के बाद अपनी कनपटी में गोली मारने वाले यशराज की मां ने दावा किया है कि गलती से गोली चली थी जिसमें बहू की मौत हो गई और दुख में बेटे ने भी अपनी जान दे दी। उन्होंने दोनों के बीच झगड़े या तनाव की बात से इनकार किया है। हालांकि, पुलिस अभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है।   घटना अहमदाबाद के जज बंगला रोड पर एनआरआई टावर में पांचवें मंजिल पर हुई। गुजरात मैरीटाइम बोर्ड में क्लास-वन ऑफिसर यशराज सिंह गोहिल की इसी साल 30 नवंबर को राजेश्वरी के साथ शादी हुई थी। बताया जा रहा है कि बुधवार रात दोनों रिश्तेदार के घर खाना खाकर लौटे थे। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक यशराज की मां ने बताया है कि लाइसेंसी रिवॉल्वर से गलती से फायर हो गया जो राजेश्वरी को लगी। इसके कुछ देर बाद 35 साल के यशराज ने भी अपनी कनपटी में गोली मार ली और मौके पर ही दम तोड़ दिया। घटना उस रात साढ़े 10 से 12 बजे के बीच हुई। यशराज की मां ने पुलिस को क्या बताया यशराज सिंह की मां देव्यानीबा ने कहा, 'दोनों एक रिश्तेदार के घर डिनर के बाद साढ़े 10 बजे घर लौटे थे। दोनों बेडरूम में थे। इस दौरान यशराज के लाइसेंसी रिवॉल्वर से गलती से एक गोली फायर हो गई जो राजेश्वरी के सिर में लग गई। बेटे ने तुरंत मेरे कमरे में आकर बताया कि क्या हो गया है। उसने कहा कि तुरंत एंबुलेंस को बुलाना होगा। मैं कमरे में गई तो राजेश्वरी बिस्तर पर अचेत पड़ी थी और खून बह रहा था।' पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक यशराज सिंह ने 11.42 पर 108 इमरजेंसी नंबर पर कॉल करके एंबुलेंस बुलाई। कुछ ही देर में पहुंची टीम ने राजेश्वरी को मृत घोषित किया। देव्यानीबा के मुताबिक, राजेश्वरी की मौत से यशराज को गहरा आघात लगा। पत्नी की मौत की बात सुनकर वह एक दूसरे कमरे में चला गया और अपने सिर में गोली मारकर खुदकुशी कर ली। पोस्टमॉर्टम के बाद अंतिम संस्कार देव्यानीबा और एंबुलेंस स्टाफ दूसरे कमरे में पहुंचे तो वहां यशराजसिंह खून से सना था। उसे भी मौके पर मृत घोषित किया गया। दोनों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए सिविल अस्पताल में ले जाया गया। मौके पर जाकर फॉरेंसिक टीम ने भी जांच। पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है और हर एंगल से मामले की तहकीकात की जा रही है। पोस्टमॉर्टम के बाद दोनों का अंतिम संस्कार किया गया। पुलिस और भी एंगल से कर रही जांच मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एसीपी ब्रह्मभट ने कहा, 'हमने मृतक की मां का बयान दर्ज किया है। प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि गलती से फायरिंग के बाद खुदकुशी का मामला है। चूंकि घटना घर की चार दीवारी के भीतर हुई, सभी एंगल से जांच की जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि गोली गलती से चली थी या जानबूझकर चलाई गई थी।' किसी विवाद की बात से इनकार करते हुए कांग्रेस के मीडिया संयोजक मनीष दोशी ने कहा कि कपल विदेश घूमने जाने की तैयारी में था और गुरुवार को उनका पासपोर्ट ऑफिस में अपॉइंटमेंट था।

सुभाष चंद्र बोस की मौत का सच क्या है? अस्थियों का राज और बेटी का बड़ा खुलासा

नई दिल्ली   देश 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती मना रहा है, इस बीच उनकी पुत्री अनीता बोस फाफ ने जापान के रेनकोजी मंदिर में रखी अस्थियों को वापस लाने की मांग की है। वह और उनके परिवार के कई सदस्य इन अस्थियों को नेताजी के अवशेष मानते हैं। फाफ ने कहा कि बेहद दुखद है कि भारत की आजादी के लिए लड़ते हुए अपने जीवन को न्यौछावर करने वाले नेताजी की मृत्यु के 80 साल बाद और देश की आजादी के 78 साल बाद भी उनके अवशेष मातृभूमि से बाहर रखे हुए हैं।   फाफ ने 'यूनीवार्ता' को भेजे एक बयान में कहा, "मैं नेताजी का सम्मान करने वाले भारतीयों को आमंत्रित करती हूं कि वे उनके अवशेषों को अंतिम और उचित संस्कार के लिए भारत लाये जाने का समर्थन करें।" नेताजी के भाई शरत बोस की पोती माधुरी बोस ने कहा कि परिवार अस्थियों की वापसी और उनके डीएनए परीक्षण की मांग कर रहा है ताकि उनके इस विश्वास की पुष्टि हो सके कि ये महान स्वतंत्रता सेनानी के ही अवशेष हैं। माधुरी बोस ने 'यूनीवार्ता' से कहा, "हम नेताजी के परिवार के सदस्य महान नेता के अवशेषों की सम्मानजनक वापसी की मांग कर रहे हैं और मुझे आशा है कि यह जल्द ही होगा।" कैसे हुई थी मौत आजाद हिंद फौज के कर्नल हबीबुर रहमान सहित कई प्रत्यक्षदर्शियों ने नेताजी की मृत्यु के संबंध गठित आयोग के समक्ष गवाही दी थी कि अगस्त 1945 में ताइपे में एक विमान दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई थी। उनके जीवित बचने या उस विशेष विमान में उड़ान न भरने की धारणाएं प्रचलित रही हैं। कुछ धारणाओं के अनुसार नेताजी किसी तरह भारत लौट आए थे और देश में भेष बदलकर रह रहे थे। किसी रूसी गुलाग (जेल) में उनकी मौत की भी धारणा प्रचलित हुई थी। DNA जांच की मांग माधुरी बोस ने बताया कि नेताजी की पुत्री अनीता फाफ, उनके बड़े भाई के पुत्र और प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी द्वारका नाथ बोस और नेताजी के एक अन्य भतीजे अर्धेंदु बोस सहित परिवार के तीन सदस्यों ने अक्टूबर 2016 और दिसंबर 2019 में सरकार से विवाद खत्म करने के लिए रेनकोजी की अस्थियों के डीएनए परीक्षण का आदेश देने का अनुरोध किया था। अब तक हालांकि ऐसा नहीं किया गया है। फाफ ने नेताजी के जीवन और संघर्ष को याद करते हुए अपने संदेश में उल्लेख किया कि उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के लिए दशकों समर्पित किए। बाद में जब कारावास में रहने से उनका मिशन असंभव हो गया तो उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम को जारी रखने के लिए भारत छोड़ने और इस लड़ाई को देश के बाहर से चलाने का निर्णय लिया।   विमान दुर्घटना यूरोप की ओर उनका पलायन, उसके बाद एक पनडुब्बी के जरिए दक्षिण-पूर्व एशिया की खतरनाक यात्रा और आजाद हिंद फौज के नेतृत्व में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान स्वतंत्र भारत की अस्थायी सरकार का गठन हुआ। फाफ ने बताया कि अगस्त 1945 में जापान के आत्मसमर्पण के बाद, नेताजी सिंगापुर से टोक्यो के लिए रवाना हुए थे, लेकिन 18 अगस्त 1945 को ताइपे में एक घातक विमान दुर्घटना का शिकार हो गए। वह हालांकि गंभीर रूप से जलने के बावजूद शुरुआती दुर्घटना में बच गए थे, लेकिन उसी दिन बाद में उन्होंने दम तोड़ दिया। ताइपे में उनका अंतिम संस्कार किया गया और उनकी अस्थियां बाद में टोक्यो ले जाई गईं। नेताजी की अस्थियां तब से जापान के रेनकोजी मंदिर के मुख्य पुजारी द्वारा सुरक्षित कस्टडी में रखी गयीं थी, जहां वे आज भी रखी हुई हैं।  

अमेरिका का नया ‘पीस बोर्ड’, पर भारत सतर्क! ट्रंप के प्रस्ताव पर दिल्ली क्यों नहीं दिखा रही जल्दबाज़ी?

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को दावोस में बोर्ड ऑफ पीस के गठन का ऐलान कर दिया। उनकी ओर से इसका जो प्रस्ताव दिखाया गया, उसमें 8 मुसलमान मुल्कों समेत कई देशों की ओर से सहमति का पत्र था। गाजा को फिर से खड़ा करने के लिए तैयार इस बोर्ड को लेकर मुसलमान देश तो जुड़ गए हैं, लेकिन यूरोपियन यूनियन के देश हिचक रहे हैं। इसके अलावा भारत, रूस और चीन जैसे बड़े देशों ने भी अब तक इससे दूरी ही बनाकर रखी है। इस बीच सवाल है कि आखिर भारत की इस संबंध में क्या रणनीति है और वह डोनाल्ड ट्रंप के इस प्रोजेक्ट से जुड़ने से हिचक क्यों रहा है। इसकी तीन वजहें हैं।   पहला कारण तो यही है कि भारत की नीति देखो और इंतजार करो की है। भारत चाहता है कि पहले यह देखा जाए कि दुनिया के कौन-कौन से देश इससे जुड़ने को तैयार हैं। अब तक रूस और चीन इसका हिस्सा नहीं बने हैं। इसके अलावा फ्रांस, इटली और ब्रिटेन जैसे देश भी दूर ही हैं। ऐसी स्थिति में भारत नहीं चाहता कि वह आगे बढ़कर इसकी मेंबरशिप ले। इसके अलावा गाजा का मसला भारत की आंतरिक राजनीति के लिहाज से भी संवेदनशील रहा है। इसीलिए भारत तुरंत इससे जुड़ने से बच रहा है और फिलहाल इंतजार करने के मूड में है। UN को कमजोर होते नहीं देखना चाहते ये देश दूसरा कारण, अब तक इस समूह से इजरायल, जॉर्डन, इंडोनेशिया, मिस्र, बुल्गारिया, बेलारूस, कजाखस्तान, कोसोवो, मोरक्को, मंगोलिया, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात जुड़े हैं। ये ज्यादातर ऐसे देश हैं, जो इस्लामी मुल्क हैं। गाजा में शांति और वहां इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार कराने में इनकी दिलचस्पी है। लेकिन यूरोप के देश तो दूर ही रहे हैं। असल में इसकी वजह यह है कि अमेरिका के करीबी रहे यूरोप के देशों को भी डर है कि कहीं अमेरिका का ही वर्चस्व ना हो जाए। विशेष तौर पर संयुक्त राष्ट्र की जगह लेने वाले डोनाल्ड ट्रंप के बयान ने भी आशंकाएं बढ़ा दी हैं। कोई देश नहीं चाहता कि यूएन जैसे बहुदेशीय संगठन की जगह अमेरिका के एकतरफा वर्चस्व वाले बोर्ड ऑफ पीस को ताकत मिले। डोनाल्ड ट्रंप हट जाएंगे तो बोर्ड ऑफ पीस का क्या होगा? तीसरा यह कि इसके अलावा बोर्ड ऑफ पीस के भविष्य को लेकर भी भारत में चिंता है। वजह यह कि डोनाल्ड ट्रंप इसके लिए जुनून रखते हैं, लेकिन उनके राष्ट्रपति पद से हटने के बाद इसका भविष्य क्या रहेगा। इसे लेकर अनिश्चितता की स्थिति है। डोनाल्ड ट्रंप का कार्यकाल तो तीन साल के बाद खत्म हो जाएगा। इसके अलावा डोनाल्ड ट्रंप की विश्वसनीयता को लेकर भी भारत में चिंताएं हैं। भारत ने हमेशा ही संयुक्त राष्ट्र संघ और बहुपक्षीयवाद को महत्व दिया है। ऐसे में भारत नहीं चाहता कि डोनाल्ड ट्रंप की पहल शुरू हुआ कोई संगठन संयुक्त राष्ट्र की जगह लेने की स्थिति में आए।  

PM स्वनिधि क्रेडिट कार्ड स्कीम की शुरुआत, मोदी ने केरल में किया शुभारंभ

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को केरल में विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन व शिलान्यास किया और नई ट्रेन सेवाओं को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने यहां सीएसआईआर-एनआईआईएसटी नवोन्मेष, प्रौद्योगिकी और उद्यम केंद्र (Innovation, Technology and Entrepreneurship Center) की आधारशिला रखी और ‘पीएम स्वनिधि क्रेडिट कार्ड’ की शुरुआत की, जो यूपीआई से जुड़ी ब्याज मुक्त रिवॉल्विंग क्रेडिट सुविधा है। मोदी ने पीएम स्वनिधि योजना के तहत कई लाभार्थियों को ऋण राशि और क्रेडिट कार्ड भी वितरित किए। उन्होंने कहा कि इस योजना का उद्देश्य केरल और पूरे देश के गरीबों का कल्याण करना है। यह पहल उन विक्रेताओं को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई गई है, जिन्होंने योजना के तहत पहली दो किस्तों के लोन पूरी तरह चुका दिए हैं। क्रेडिट अनुशासन का पालन करके, विक्रेता 20 से 50 दिनों की ब्याज-मुक्त क्रेडिट अवधि का लाभ उठा सकते हैं, जिससे उनकी नकदी प्रवाह बेहतर होगी और वित्तीय योजना मजबूत होगी। योजना के कार्यान्वयन और निगरानी की जिम्मेदारी आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) और वित्तीय सेवा विभाग (DFS) की संयुक्त जिम्मेदारी होगी। DFS का काम बैंकों/वित्तीय संस्थानों और उनके जमीनी कर्मचारियों के माध्यम से लोन/क्रेडिट कार्ड तक पहुंच को आसान बनाना होगा। मोदी ने तीन अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेन और एक त्रिशूर-गुरुवायूर यात्री ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जिससे केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के बीच क्षेत्रीय रेल संपर्क को मजबूत करने में मदद मिलेगी। क्या हैं पीएम स्वनिधि क्रेडिट कार्ड की विशेषताएं क्रेडिट सीमा: पीएम स्वनिधि क्रेडिट कार्ड की कुल क्रेडिट सीमा ₹30,000 (तीस हज़ार रुपये) होगी। हालाँकि, शुरुआत में कार्यशील सीमा ₹10,000 तय की जाएगी, जिसे संतोषजनक कार्ड इस्तेमाल देखने के बाद धीरे-धीरे बढ़ाकर ₹30,000 कर दी जाएगी। कार्ड की वैधता: कार्ड जारी होने की तारीख से पांच साल की अवधि के लिए वैध होगा। ब्याज-मुक्त अवधि: जारीकर्ता (बैंक/संस्था) अपनी मौजूदा नीति के अनुसार 20-50 दिनों की ब्याज-मुक्त क्रेडिट अवधि देंगे। यूपीआई लिंकेज: क्रेडिट कार्ड को लाभार्थी के यूपीआई आईडी से जोड़ने की सुविधा होगी। इससे विक्रेता अपनी क्रेडिट कार्ड सीमा का इस्तेमाल यूपीआई के जरिए भुगतान करने में कर सकेंगे। ईसीएस/एनएसीएच/ऑटो पे सुविधा: जारीकर्ता "पूरी देय राशि" के भुगतान के लिए कार्डधारकों को इलेक्ट्रॉनिक क्लीयरिंग सर्विस (ईसीएस)/एनएसीएच/ऑटो पे की सुविधा देंगे। यह सुविधा नियत तारीख पर ग्राहक के बैंक खाते से सीधे क्रेडिट कार्ड बिल का भुगतान करने में मदद करेगी। अंतर्राष्ट्रीय और विदेशी मुद्रा लेनदेन नहीं: इस कार्ड पर अंतर्राष्ट्रीय और विदेशी मुद्रा (फॉरेक्स) के लेनदेन की अनुमति नहीं होगी। नकद निकासी नहीं: इस कार्ड से एटीएम या किसी भी प्वाइंट ऑफ सेल (POS) मशीन के जरिए नकद निकासी की अनुमति नहीं होगी। एमसीसी प्रतिबंध: कार्ड पर कुछ विशेष व्यापार श्रेणी कोड (एमसीसी) पर प्रतिबंध होंगे (जैसे शराब, जुआ, विदेशी एयरलाइंस, कार किराए पर देने की सेवा, अंतर्राष्ट्रीय होटल चेन, कुछ प्रत्यक्ष विपणन व्यवसाय आदि), जैसा कि मंत्रालय/कार्ड जारीकर्ताओं द्वारा तय किया जाएगा। अन्य सभी प्रकार के व्यापारियों पर इसके इस्तेमाल की अनुमति होगी। प्रतिबंधित एमसीसी की एक उदाहरण सूची अनुबंध 1 में दी गई है। चक्रीय (रिवॉल्विंग) सुविधा: यह कार्ड एक चक्रीय लोन सुविधा की तरह काम करेगा। इससे उधारकर्ता स्वीकृत सीमा तक धनराशि का उपयोग कर सकते हैं, नियमों के अनुसार चुका सकते हैं, और ज़रूरत पड़ने पर स्वीकृत सीमा के भीतर उपलब्ध क्रेडिट का दोबारा इस्तेमाल कर सकते हैं। ईएमआई सुविधा: जारीकर्ता अपने विवेक से, कार्डधारकों को एक बिलिंग चक्र से न्यूनतम ₹2,500 की बिल राशि को ईएमआई में बदलने की अनुमति दे सकते हैं, बशर्ते कि अनुरोध भुगतान की नियत तारीख से पहले किया गया हो। इस सुविधा पर अधिकतम ब्याज दर प्रति माह 1.5% तक होगी और इसमें बिना किसी जुर्माने या अतिरिक्त शुल्क के पूर्व भुगतान (प्रीपेमेंट) का विकल्प भी शामिल होगा। अन्य विशेषताएँ: · यह कार्ड एक खुदरा (रिटेल) क्रेडिट कार्ड होगा, व्यापार या बिजनेस कार्ड नहीं। · संबंधित कार्ड जारीकर्ता की नीति के अनुसार इनाम अंक (रिवार्ड पॉइंट) दिए जाएंगे। · बिल जनरेशन और भुगतान की नियत तारीख संबंधित कार्ड जारीकर्ता की नीति के अनुसार होगी। · रुपे क्रेडिट कार्ड – क्लासिक वेरिएंट पर लागू होने वाली सभी अतिरिक्त विशेषताएँ, जैसी कि संबंधित कार्ड जारीकर्ता द्वारा पेश की जाती हैं, कार्डधारकों को उपलब्ध होंगी। कौन है पात्र सभी स्ट्रीट वेंडर जिन्होंने अपना दूसरा किस्त का लोन सफलतापूर्वक चुका दिया है और पीएम स्वनिधि योजना के तहत तीसरे किस्त के लोन के लिए पात्र हैं। वे स्ट्रीट वेंडर जिन्होंने पहले ही तीसरे किस्त का लोन ले रखा है – चाहे वह लोन वर्तमान में चालू हो या पूरी तरह चुका दिया गया हो – वे भी इस क्रेडिट कार्ड सुविधा के लिए पात्र हैं। आवेदक की उम्र आवेदन के समय 21 से 65 वर्ष के बीच होनी चाहिए। यह क्रेडिट कार्ड सुविधा तीसरे किस्त के लोन के अतिरिक्त प्रदान की जाएगी। स्ट्रीट वेंडर अपनी पात्रता और पसंद के अनुसार तीसरा किस्त का लोन, क्रेडिट कार्ड सुविधा, या दोनों ले सकते हैं।

ईरान को ट्रंप की धमकी, US ने भेजी बड़ी सेना, शिया देश ने किया कड़ा जवाब

तेहरान: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को धमकी दी है. उन्होंने घोषणा की है कि अमेरिका का नौसैनिक ‘आर्माडा’ ईरान की ओर बढ़ रहा है, वहीं ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि उनकी उंगली भी ट्रिगर पर है. दोनों तरफ से यह बयान तब आया जब बड़े पैमाने पर ईरान में विरोध प्रदर्शन हुए हैं. ट्रंप ने जोर देते हुए कहा कि वह नहीं चाहते कि बल प्रयोग करना पड़े, लेकिन यह तैनाती ईरान पर दबाव बनाए रखने के लिए है, क्योंकि देश के अंदर की घटनाएं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित कर रही हैं. ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, ‘हमारे पास एक विशाल सैन्य बेड़ा है जो ईरान की ओर बढ़ रहा है. देखते हैं आगे क्या होता है. हम उन पर बहुत करीब से नजर रख रहे हैं.’ एक अन्य मौके पर उन्होंने कहा, ‘हमारे पास एक आर्माडा है, जो उस दिशा में जा रहा है, और शायद हमें इसका इस्तेमाल न करना पड़े.’ न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन और कई गाइडेड-मिसाइल डेस्ट्रॉयर्स आने वाले दिनों में मिडिल ईस्ट पहुंच सकता है. अपने एयरबेस को बचाने के लिए क्या करेगा अमेरिका? एक अधिकारी ने कहा कि मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों पर संभावित ईरानी हमले से बचाव के लिए अतिरिक्त एयर-डिफेंस सिस्टम पर भी विचार किया जा रहा है. एशिया-प्रशांत क्षेत्र से पिछले हफ्ते शुरू हुई ये गतिविधियां US को अमेरिकी बलों की रक्षा और किसी भी तनाव की स्थिति का जवाब देने के लिए विकल्प देती हैं. ट्रंप ने ईरान को प्रदर्शनकारियों की हत्या या परमाणु कार्यक्रम फिर से शुरू करने के खिलाफ चेतावनी दोहराई, उन्होंने कहा कि अगर ईरान ने अमेरिकी हमलों के बाद अपने परमाणु क्षमता को फिर से बनाने की कोशिश की तो अमेरिका कार्रवाई करेगा. उन्होंने कहा, ‘अगर वे फिर से ऐसा करने की कोशिश करते हैं, तो हम वहां भी उतनी ही आसानी से हमला करेंगे.’ 'वैध लक्ष्य' वाली चेतावनी बता दें कि ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स को ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और अमेरिका सहित कई देशों ने एक आतंकवादी संगठन के रूप में चिन्हित किया है और इस पर प्रतिबंधित भी लगाए गए हैं। ईरान में जारी हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान भी रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स द्वारा क्रूरता की खबरें सामने आई हैं। इस बीच एक अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, जनरल अली अब्दुल्लाही अलीबादी, जो ईरानी संयुक्त कमान मुख्यालय का नेतृत्व करते हैं, ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने हमला किया, तो अमेरिका के सभी ठिकाने ईरान के सशस्त्र बलों के लिए वैध लक्ष्य होंगे। बहुत बड़ी सेना ईरान की ओर इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह कहकर हलचल मचा दी है कि एक बहुत बड़ी सेना ईरान की ओर बढ़ रही है। दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम से लौटते समय, ट्रंप ने एयर फॉर्स वन पर पत्रकारों से कहा कि अमेरिका सिर्फ एहतियात के तौर पर ईरान की ओर एक विशाल बेड़ा भेज रहा है। उन्होंने कहा, "मैं नहीं चाहता कि कुछ भी हो लेकिन हम उन पर बहुत करीब से नजर रख रहे हैं।” धमकियों का दौर जारी इससे पहले दोनों देशों के बीच धमकियों का दौर जारी है। डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की धमकी के बाद बीते मंगलवार को कहा है कि अगर ईरान ने उनकी हत्या कराई तो अमेरिका ईरान का नामोनिशान मिटा देगा। ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा, ‘‘मेरे बहुत सख्त निर्देश हैं कि अगर कुछ होता है तो वे उन्हें नक्शे से मिटा देंगे।’’ इससे पहले ईरान ने ट्रंप को देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ किसी प्रकार की कार्रवाई करने पर चेतावनी दी थी। ईरान के सशस्त्र बलों के प्रवक्ता जनरल अबुलफजल शेकारची ने कहा, ‘‘ट्रंप जानते हैं कि अगर हमारे नेता की ओर हाथ भी बढ़ाया गया तो हम न केवल उस हाथ को काट देंगे बल्कि उनकी दुनिया में आग लगा देंगे।’’ ईरान में प्रदर्शन के बाद सैन्य तैनाती ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिकी धमकियों के चलते ईरान ने प्रदर्शनकारियों की फांसी रोक दी, उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने करीब 840 फांसी रद्द कर दीं. रॉयटर्स के मुताबिक ट्रंप ने कहा, ‘मैंने कहा, अगर आप उन लोगों को फांसी देंगे, तो आपको पहले से भी ज्यादा जोरदार झटका लगेगा. यह आपके परमाणु कार्यक्रम पर किए गए हमारे हमले के मुकाबले कुछ भी नहीं होगा.’ अमेरिका की यह सैन्य तैनाती ईरान में उस अशांति के बीच हो रही है, जो दिसंबर के अंत में शुरू हुई थी और देशभर में फैल गई थी, हालांकि सख्त कार्रवाई के बाद यह कम होती दिख रही है. अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक कम से कम 5,002 लोगों की मौत हुई है, जबकि ईरान सरकार ने 3,117 मौतों की पुष्टि की है.

भारत का ₹26,000 करोड़ का गेमचेंजर प्लान: न ब्रह्मोस, न राफेल, फिर भी चीन-पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ेंगी

बेंगलुरु  भारत ग्‍लोबल सिक्‍योरिटी कंडीशंस को देखते हुए अपने डिफेंस सिस्‍टम को मजबूत करने के साथ ही उसे कटिंग एज टेक्‍नोलॉजी की मदद से अपडेट करने में जुटा है. खासकर एरियल थ्रेट से निपटने के लिए हजारों-लाखों करोड रुपये का निवेश किया जा रहा है. एक तरफ जहां ब्रह्मोस और 5th जेनरेशन फाइटर जेट पर फोकस किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ एयर डिफेंस सिस्‍टम पर भी गंभीरता से ध्‍यान दिया जा रहा है. अब भारत एक और सेगमेंट में काम कर रहा है. दुश्‍मनों की हर गतिविधि पर बाज से पैनी नजर रखने के लिए स्‍पेस में स्‍पाई सैटेलाइट स्‍थापित करने की योजना पर काम किया जा रहा है. भारत अपनी रक्षा क्षमताओं को अंतरिक्ष के मोर्चे पर नई ऊंचाइयों तक ले जाने की तैयारी में है. सरकार ने ₹26,000 करोड़ की लागत से 52 अत्याधुनिक सैन्य निगरानी सैटेलाइट का विशाल बेड़ा तैनात करने की योजना बनाई है, जिसे ‘स्पेस-बेस्ड सर्विलांस फेज-III’ प्रोग्राम के तहत 2029 तक पूरा किया जाएगा. यह अब तक का भारत का सबसे बड़ा सैन्य अंतरिक्ष निवेश माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य देश की सीमाओं और समुद्री क्षेत्रों की चौबीसों घंटे निगरानी को मजबूत करना है. इस सैटेलाइट ग्रुप की सबसे बड़ी विशेषता इसकी नाइट-विजन और ऑल-वेदर निगरानी क्षमता है. इनमें लगे अत्याधुनिक इंफ्रारेड सेंसर रात के अंधेरे, बादलों और खराब मौसम के बावजूद जमीन पर गतिविधियों की स्पष्ट तस्वीर देने में सक्षम होंगे. इससे भारत को पहली बार ऐसी निर्बाध निगरानी मिलेगी, जो दिन-रात और हर मौसम में लगातार जारी रह सकेगी. यह तकनीक खास तौर पर सीमावर्ती इलाकों और समुद्री क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को नई धार देगी. ‘इंडियन डिफेंस न्‍यूज’ की रिपोर्ट के अनुसार, इन सैटेलाइट्स में इंफ्रारेड सेंसर के साथ-साथ इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल कैमरे और सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) भी लगाए जाएंगे. यह मल्टी-सेंसर व्यवस्था अलग-अलग परिस्थितियों में हाई क्‍वालिटी की इमेजरी और डेटा उपलब्ध कराएगी. इससे किसी क्षेत्र पर बार-बार नजर रखने का समय अंतराल घटेगा और सेना को ज्यादा तेजी से खुफिया जानकारी मिल सकेगी. सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि कम री-विजिट टाइम का मतलब है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल प्रतिक्रिया संभव हो सकेगी. कब लॉन्‍च होगी पहली सैटेलाइट? योजना के अनुसार, इस बेड़े का पहला उपग्रह अप्रैल 2026 तक लॉन्च किया जाएगा और अगले तीन वर्षों में पूरी प्रणाली तैनात कर दी जाएगी. ये उपग्रह अलग-अलग कक्षाओं में काम करेंगे – लो-अर्थ ऑर्बिट से लेकर जियोस्टेशनरी ऑर्बिट तक. लो-अर्थ ऑर्बिट उपग्रह हाई रेजोल्यूशन और लगातार पास देने में मदद करेंगे, जबकि जियोस्टेशनरी सैटेलाइट संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार नजर बनाए रखेंगे. इस मल्‍टी-लेयर्ड तैनाती से सीमाओं और समुद्री क्षेत्रों में किसी भी तरह के ब्लाइंड स्पॉट की संभावना बेहद कम हो जाएगी. इस महत्वाकांक्षी परियोजना में इसरो 21 उपग्रह विकसित करेगा, जबकि शेष 31 उपग्रह निजी क्षेत्र की कंपनियां बनाएंगी. यह किसी भी भारतीय सैन्य अंतरिक्ष कार्यक्रम में निजी क्षेत्र की अब तक की सबसे बड़ी भागीदारी होगी. इससे रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ देश के निजी उद्योगों को अत्याधुनिक तकनीक विकसित करने का अवसर मिलेगा. सरकार इसे मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्यों के अनुरूप अहम कदम मान रही है. हर कदम पर पैनी नजर एक बार प्रणाली पूरी तरह चालू होने के बाद इसका संचालन और नियंत्रण रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी (Defence Space Agency) के पास होगा. इससे सभी उपग्रहों से मिलने वाले डेटा को एकीकृत कर सैन्य अभियानों में तेजी और सटीकता लाई जा सकेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे जमीनी बलों, वायुसेना और नौसेना के बीच समन्वय और बेहतर होगा, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी. इस परियोजना की जरूरत हालिया सैन्य अभियानों से सामने आई सीख से जुड़ी है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि आधुनिक युद्ध में उपग्रह आधारित खुफिया जानकारी कितनी निर्णायक भूमिका निभाती है. रियल-टाइम डेटा से दुश्मन की गतिविधियों, सैनिक जमावड़े और हथियारों की तैनाती पर सटीक नजर रखना संभव हुआ. नई उपग्रह प्रणाली इस क्षमता को और मजबूत करेगी. ये सैटेलाइट जमीन पर माइक्रो चेंज की पहचान करने में सक्षम होंगे. जैसे सीमावर्ती इलाकों में नई संरचनाओं का निर्माण, सैनिकों की तैनाती या समुद्र में जहाजों और पनडुब्बियों की आवाजाही. कम समय में मिलने वाले अपडेट्स से कमांडरों को स्थिति की स्पष्ट तस्वीर मिलेगी और वे तेजी से रणनीतिक फैसले ले सकेंगे. इससे भारत की प्रतिरोधक क्षमता (डेटरेंस) भी मजबूत होगी.

अमृत भारत एक्सप्रेस का विस्तार: पीएम मोदी ने शुरू कीं 3 नई ट्रेनें, किन शहरों को मिलेगा फायदा? पूरी डिटेल

तिरुवनंतपुरम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम से 4 नई ट्रेन सेवाओं को हरी झंडी दिखाई, जिसमें 3 अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें और एक पैसेंजर ट्रेन शामिल हैं। इनमें नागरकोइल-मंगलुरु अमृत भारत एक्सप्रेस, तिरुवनंतपुरम-तांबरम अमृत भारत एक्सप्रेस, तिरुवनंतपुरम-चारलपल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस और त्रिशूर-गुरुवायुर पैसेंजर ट्रेन शामिल हैं। यह कार्यक्रम पुथरिकंदम मैदान में आयोजित हुआ, जहां पीएम मोदी ने इन ट्रेनों को वर्चुअल या सीधे फ्लैग ऑफ किया। अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें किफायती किराए पर बेहतर सुविधाएं, सुरक्षा और आराम प्रदान करती हैं, जो सामान्य मेल/एक्सप्रेस और प्रीमियम ट्रेनों के बीच की खाई को भरती हैं। नई ट्रेन सुविधाओं से दक्षिण भारत में रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी, खासकर केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच यात्रा आसान बनेगी। इन नई ट्रेनों से पर्यटन, व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। तिरुवनंतपुरम-तांबरम अमृत भारत एक्सप्रेस तमिलनाडु और केरल के बीच तेज और सुविधाजनक सफर सुनिश्चित करेगी। नागरकोइल-मंगलुरु ट्रेन कर्नाटक तक कनेक्शन बढ़ाएगी। तिरुवनंतपुरम-चारलपल्ली ट्रेन तेलंगाना से केरल को जोड़ेगी। त्रिशूर-गुरुवायुर पैसेंजर ट्रेन भक्तों और यात्रियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी होगी, क्योंकि गुरुवायुर मंदिर एक प्रमुख तीर्थस्थल है। पर्यटन क्षेत्र को होगा फायदा, बोले पीएम मोदी पीएम मोदी ने कहा कि ये पहल केरल के समग्र विकास को गति देंगी और पर्यटन क्षेत्र को फायदा पहुंचाएंगी। उन्होंने कहा, 'आज देश के दूसरे हिस्सों से केरल की रेल कनेक्टिविटी और सशक्त हुई है। थोड़ी देर पहले जिन अमृत भारत एक्सप्रेस रेल को हरी झंडी दिखाई गई है इससे केरल में ईज ऑफ ट्रेवल को बल मिलेगा। इस टूरिज्म सेक्टर को बहुत फायदा होगा।' यह कदम भारतीय रेलवे की अमृत भारत योजना का हिस्सा है, जो आधुनिक सुविधाओं वाली किफायती ट्रेनें शुरू कर यात्रियों को बेहतर अनुभव दे रही है। इससे लाखों यात्रियों को लंबी दूरी की यात्रा सस्ती और आरामदायक मिलेगी। यह दक्षिण भारत में रेल नेटवर्क को मजबूत बनाने की दिशा में अहम प्रयास है।  

दावोस में भारत की नई पहचान: अब विकासशील देश नहीं, एक शक्तिशाली राष्ट्र

नई दिल्ली 1.2 ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति का प्रबंधन करने वाली कंपनी ब्लैकस्टोन के प्रमुख स्टीफन श्वार्जमैन ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की बदलती भूमिका पर मुहर लगा दी है। उन्होंने कहा कि हम जानते हैं कि भारत उभर चुका है और यह बात उन अधिकांश देशों के लिए नहीं कही जा सकती जिन्हें आप आमतौर पर 'इमर्जिंग मार्केट्स' की श्रेणी में रखते हैं। हाल के दिनों में भारतीय शेयर बाजारों से विदेशी निवेशकों की निकासी पर श्वार्जमैन ने एक अलग नजरिया पेश किया। उन्होंने कहा कि शेयर बाजार अक्सर बेहद भावुक और अप्रत्याशित होते हैं। उनके अनुसार, पिछले पांच वर्षों में भारतीय बाजार का प्रदर्शन शानदार रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी खास समय पर भारत का 'कम फैशनेबल' होना या शेयरों का गिरना एक अल्पकालिक घटना है, जबकि लंबी अवधि में भारत का शेयर बाजार एक 'बुल मार्केट' बना रहेगा। विकास की अपार संभावनाएं श्वार्जमैन ने भारत के विकास पथ को आंकड़ों के जरिए समझाया। उन्होंने तुलना करते हुए बताया कि भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी लगभग 3,000 डॉलर है। चीन की प्रति व्यक्ति जीडीपी लगभग 13,000 डॉलर है वहीं, अमेरिका की प्रति व्यक्ति जीडीपी 70,000 से अधिक है। उन्होंने कहा, "भारत के पास विकास का एक बहुत लंबा रास्ता है। यहां एक स्थिर सरकार है, पूंजी की आवश्यकता है और आबादी के जीवन स्तर में सुधार की गुंजाइश है। यहां के लोग काफी बुद्धिमान और मेहनती हैं। यही भारत के उज्ज्वल भविष्य का फॉर्मूला है।" 10 साल में बदल जाएगी दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर चर्चा करते हुए 78 वर्षीय श्वार्जमैन ने इसे बिजली के विकास और स्टीम इंजन के आविष्कार के समान क्रांतिकारी बताया। उन्होंने कहा कि जहां पिछली क्रांतियों को दुनिया बदलने में 50 साल लगे, वहीं AI यह काम महज 10 साल में कर देगा। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि वर्तमान में AI को लेकर कुछ अतिशयोक्ति है और कुछ कम पूंजी वाली कंपनियों का मूल्यांकन बहुत ज्यादा हो गया है, लेकिन उन्होंने 1999 या 2007 जैसी किसी बड़ी मार्केट उन्माद की संभावना से इनकार किया। भारत में ब्लैकस्टोन का विस्तार ब्लैकस्टोन वर्तमान में भारत में रियल एस्टेट और प्राइवेट इक्विटी में सबसे बड़ा विदेशी प्रत्यक्ष निवेशक है। श्वार्जमैन ने संकेत दिए कि कंपनी अब भारत में इन्फ्रास्ट्रक्चर और प्राइवेट क्रेडिट के क्षेत्र में भी अपना विस्तार करने की योजना बना रही है। इंटरव्यू के दौरान एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब श्वार्जमैन ने अपनी पत्नी का फोन सुनने के लिए थोड़ा ब्रेक लिया। फोन पर उन्हें खबर मिली कि उनके बेटे और फिल्म निर्माता टेडी श्वार्जमैन की फिल्म 'ट्रेन ड्रीम्स' को 98वें एकेडमी अवार्ड्स (ऑस्कर) के लिए नामांकित किया गया है। यह खबर सुनते ही उन्होंने खुशी में हवा में मुक्का मारते हुए अपनी जीत का जश्न मनाया।