samacharsecretary.com

कैलिफोर्निया गवर्नर ने WEF में ट्रंप को घेरा, कहा- देश पर डॉन की तरह कब्जा, कांग्रेस बनी तमाशबीन

कैलिफोर्निया कैलिफोर्निया के गवर्नर गैविन न्यूज़म ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) 2026 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा हमला बोला। सेमाफ़ोर के बेन स्मिथ के साथ इंटरव्यू में न्यूज़म ने कहा कि अमेरिका आज “रूल ऑफ डॉन” के तहत जी रहा है, जहाँ लोकतंत्र की बुनियादी संस्थाएँ कमजोर पड़ गई हैं। न्यूज़म ने कहा, “समानांतर सत्ता की शाखाएं, कानून का राज और जन-सत्ता क्या आज का अमेरिका वही है?” उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस निष्क्रिय बनी हुई है और कानून का शासन कमजोर हो रहा है। WEF के चौथे दिन हुई चर्चा में न्यूज़म ने अमेरिकी विश्वविद्यालयों, कानून फर्मों और कॉरपोरेट नेतृत्व पर भी निशाना साधा। उन्होंने प्रतीकात्मक तौर पर लाल नी-पैड्स दिखाते हुए कहा कि जैसे कुछ संस्थान प्रशासन के आगे झुक रहे हैं, वैसे ही ये पैड्स बिक रहे हैं हालाँकि उन्होंने किसी CEO का नाम नहीं लिया। दावोस के नियमित प्रतिभागी न्यूज़म को उनके तीखे और बहसात्मक भाषणों पर तालियाँ भी मिलीं। उन्होंने बताया कि दावोस आने का एक मकसद पूँजीवाद के भविष्य पर ट्रंप के दृष्टिकोण का विरोध करना है। इस बीच, ट्रंप ने अपने दावोस भाषण में न्यूज़म का ज़िक्र करते हुए उन्हें “गुड गाइ” कहा और पुराने अच्छे संबंधों की बात की।    हालांकि, न्यूज़म को एक तय फायरसाइड चैट के बावजूद US हाउस में प्रवेश नहीं मिला, जिस पर उन्होंने X पर तंज कसते हुए लिखा “एक बातचीत से इतना डर?” बाद में मिला VIP नाइटकैप का न्योता भी उन्होंने ठुकरा दिया। विवाद यहीं नहीं रुका। US ट्रेज़री सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने न्यूज़म पर व्यक्तिगत हमला करते हुए उन्हें “आत्ममुग्ध और आर्थिक रूप से अनभिज्ञ” कहा। हाल के वर्षों में न्यूज़म रिपब्लिकन नेताओं के मुखर आलोचक रहे हैं और फ्लोरिडा गवर्नर रॉन डीसैंटिस से भी उनकी टकराहट चर्चित रही है।

गंगा किनारे विदेशी आस्था की मिसाल: रूसी जोड़े ने अपनाया सनातन मार्ग, वैदिक रीति से हुआ विवाह

रूस   रूस आज केवल वैश्विक राजनीति और युद्ध की खबरों तक सीमित नहीं है। मॉस्को, सेंट पीटर्सबर्ग और साइबेरिया जैसे इलाकों में अब योग कक्षाएं, ध्यान शिविर और भगवद्गीता चर्चा समूह दिखाई देने लगे हैं। यह बदलाव बताता है कि रूसी समाज भीतर से किसी गहरे सुकून की तलाश में है और सनातन धर्म की ओर बढ़ रहा है। इसी की एक अन्य मिसाल  उत्तर प्रदेश की आध्यात्मिक राजधानी काशी में देखने को मिली जहां बुधवार को सनातन संस्कृति की दिव्यता का एक अद्भुत दृश्य देखने को मिला। रूस से आए एक दंपत्ति ने हिंदू धर्म और सनातन परंपराओं से प्रभावित होकर गंगा तट पर वैदिक विधि से विवाह रचाया। बाबा श्री काशी विश्वनाथ को साक्षी मानकर दंपत्ति ने सात फेरे लिए और सात जन्मों तक साथ निभाने का संकल्प लिया।   दशाश्वमेध घाट स्थित मंदिर परिसर में काशी के विद्वान ब्राह्मणों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विवाह संपन्न कराया गया। हवन कुंड के चारों ओर फेरे लेते समय दूल्हा-कन्या भावुक नजर आए। घाट पर मौजूद महिलाओं ने मंगल गीत गाकर विवाह को और भी पावन बना दिया।हिंदू विवाह की सबसे महत्वपूर्ण रस्म सिंदूर दान के दौरान दुल्हन मरीन की आंखें नम हो गईं। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद श्रद्धालु और पर्यटक भी भाव-विभोर हो उठे। रूस से आए कॉन्स्टेंट और मरीन ने बताया कि वे पेशे से व्यापारी हैं और 11 वर्ष पहले रशियन परंपरा के अनुसार विवाह कर चुके हैं। भारत भ्रमण के दौरान काशी पहुंचने पर उन्हें सनातन धर्म, भगवान महादेव और यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा ने गहराई से प्रभावित किया।   दंपत्ति ने बताया कि काशी में रहते हुए उन्होंने सनातन धर्म की मान्यताओं, संस्कारों और जीवन दर्शन को करीब से जाना, जिसके बाद उन्होंने हिंदू रीति-रिवाज से दोबारा विवाह करने का निर्णय लिया। इसके लिए उन्होंने काशी के ब्राह्मण शिवाकांत पांडे से संपर्क कर वैदिक विधि से विवाह कराया। दुल्हन मरीन ने बताया कि रूस में मौजूद उनके परिजन इस विवाह को लेकर बेहद उत्साहित थे। विवाह की सभी रस्में ऑनलाइन माध्यम से उन्हें दिखाई गईं। परिजनों ने इस निर्णय पर सहमति जताई और आशीर्वाद दिया।मरीन ने कहा कि हिंदू रीति-रिवाज से विवाह करना उनके जीवन का सबसे आध्यात्मिक और अविस्मरणीय अनुभव है। रूस और सनातन: शांति की ओर बढ़ता समाज लगातार संघर्ष, प्रतिबंध और अनिश्चित भविष्य ने रूसी समाज को मानसिक रूप से थका दिया है। ऐसे में सनातन धर्म का कर्म सिद्धांत, आत्मा की अमरता और मोह से मुक्ति का संदेश उन्हें गहराई से छू रहा है।रूस के बड़े शहरों में योग केंद्र तेजी से बढ़े हैं। भारतीय गुरुओं द्वारा सिखाया गया प्राणायाम और ध्यान रूसी युवाओं के लिए मानसिक शांति का साधन बन गया है।      गीता का गहरा संदेश और योग रूसी भाषा में भगवद्गीता के अनुवाद तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। “अपने कर्तव्य का पालन करो, परिणाम ईश्वर पर छोड़ दो”—यह विचार युद्ध और असमंजस से घिरे समाज को स्थिरता देता है।रूस में योग अब केवल व्यायाम नहीं रहा। यह तनाव, अवसाद और अकेलेपन से लड़ने का साधन बन गया है। युवा हों या बुज़ुर्ग, बड़ी संख्या में लोग ध्यान और प्राणायाम को अपना रहे हैं। इस्कॉन की भूमिका इस्कॉन जैसे संगठनों ने रूस में सनातन को जीवन पद्धति के रूप में प्रस्तुत किया। कीर्तन, प्रसाद और भारतीय पर्व अब कई रूसी परिवारों के जीवन का हिस्सा बन चुके हैं। रूसी नागरिक साफ कहते हैं कि वे किसी धर्म को नहीं, बल्कि शांति और संतुलन को अपनाना चाहते हैं। सनातन उन्हें संघर्ष के बीच भी स्थिर रहने की शक्ति देता है।

दुनिया में शांति की नई पहल! ट्रंप ने बनाया ‘बोर्ड ऑफ पीस’, PAK शामिल—उठे कई सवाल

दावोस अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को बोर्ड ऑफ पीस के पहले चार्टर का औपचारिक ऐलान कर दिया। यूनाइटेड नेशन के तर्ज पर बनाए गए बोर्ड ऑफ पीस का शुरुआती फोकस गाजा पर होगा, लेकिन इसका विस्तार दुनियाभर के विवादों को सुलझाने के लिए हो सकता है। इसमें पाकिस्तान समेत कई देशों ने सदस्य बनने के लिए सहमति दी है। बोर्ड ऑफ पीस के लॉन्च पर ट्रंप ने कहा कि गाजा सीजफायर डील के तहत हमास को हथियार छोड़ने होंगे, नहीं तो यह फिलिस्तीनी आंदोलन का अंत होगा।   ट्रंप ने कहा, "उन्हें अपने हथियार छोड़ने होंगे, और अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो यह उनका अंत होगा।'' उन्होंने आगे कहा कि इस्लामी समूह हाथों में राइफल लेकर पैदा हुए थे। स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में बोर्ड ऑफ पीस के ऐलान के समय एक दर्जन से ज्यादा देशों के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और टॉप डिप्लोमैट मौजूद रहे। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, पैराग्वे के कंजर्वेटिव राष्ट्रपति सैंटियागो पेना, उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्ज़ियोयेव आदि की मौजूदगी रही। 'हम लोग कुछ भी कर सकते हैं जो करना चाहते हैं' ट्रंप ने आगे कहा, "एक बार जब यह बोर्ड पूरी तरह से बन जाएगा, तो हम लगभग कुछ भी कर सकते हैं, जो हम करना चाहते हैं। और हम इसे यूनाइटेड नेशंस के साथ मिलकर करेंगे।'' उन्होंने आगे कहा कि यू.एन. में बहुत ज्यादा पोटेंशियल है जिसका पूरी तरह से इस्तेमाल नहीं किया गया है। ट्रंप, जो इस बोर्ड की अध्यक्षता करेंगे, ने दर्जनों दूसरे वर्ल्ड लीडर्स को इसमें शामिल होने के लिए इनवाइट किया और कहा कि वह चाहते हैं कि यह गाजा में लड़खड़ाते सीजफायर से परे की चुनौतियों का सामना करे, जिससे यह आशंका पैदा हो रही है कि यह ग्लोबल डिप्लोमेसी और कॉन्फ्लिक्ट रिजॉल्यूशन के मुख्य प्लेटफॉर्म के तौर पर यूएन की भूमिका को कमजोर कर सकता है। सदस्यों को देना होगा एक बिलियन डॉलर का फंड दूसरी बड़ी ग्लोबल पावर और अमेरिका के पारंपरिक पश्चिमी सहयोगी भी इस बोर्ड में शामिल होने से हिचकिचा रहे हैं, जिसके बारे में ट्रंप कहते हैं कि स्थायी सदस्यों को हर एक को $1 बिलियन का पेमेंट करके फंड देना होगा। अमेरिका के अलावा, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का कोई भी दूसरा स्थायी सदस्य – दूसरे विश्व युद्ध के खत्म होने के बाद से अंतरराष्ट्रीय कानून और कूटनीति पर सबसे ज्यादा दखल रखने वाले पांच देश – अभी तक इसमें शामिल होने के लिए तैयार नहीं हुआ है। देशों के प्रमुखों ने दस्तावेजों पर किया साइन बोर्ड ऑफ पीस में बतौर सदस्य शामिल होने के लिए मंच पर उपस्थित कई देशों के प्रमुखों ने दस्तावेजों पर साइन किया। इसके बाद व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलीन लेविट ने कहा कि इस तरह बोर्ड का चार्टर पूरी तरह से लागू हो गया है और यह एक अंतरराष्ट्रीय संगठन बन गया है। हस्ताक्षर समारोह स्विट्जरलैंड के दावोस में हुआ, जहां सालाना वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम हो रहा है, जिसमें ग्लोबल राजनीतिक और बिजनेस लीडर्स एक साथ आते हैं।

PAK में सियासी तूफान: Board of Peace विवाद पर PM शहबाज शरीफ निशाने पर

दावोस ,स्विट्जरलैंड संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की राजदूत रह चुकीं मलीहा लोधी ने इस बोर्ड ऑफ पीस की विश्वसनीयता पर ही सवाल उठाए हैं और कहा है कि यह लंबे समय तक नहीं टिक पाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच की बैठक के दौरान अपने बहुप्रतीक्षित 'बोर्ड ऑफ पीस' (शांति बोर्ड) को औपचारिक तौर पर लॉन्च कर दिया है। इसे संयुक्त राष्ट्र की जगह लेने वाला चार्टर बताया जा रहा है। हालांकि, इस अंतरराष्ट्रीय निकाय के चार्टर पर हस्ताक्षर समारोह के दौरान ट्रम्प ने साफ किया कि उन्होंने भले ही अतीत में संयुक्त राष्ट्र की आलोचना की है, लेकिन वह चाहते हैं कि उनका यह नया बोर्ड संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर काम करे। उन्होंने कहा कि “एक बार जब यह बोर्ड पूरी तरह से गठित हो जाएगा, तो हम जो चाहें, कर सकेंगे और हम इसे संयुक्त राष्ट्र के साथ तालमेल बिठाकर करेंगे।” गाजा में सांति स्थापना के लिुए बनाए गए ट्रंप के इस ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में पाकिस्तान समेत कई देश शामिल हुए है, जबकि यूरोपीय देशों समेत कुछ मुल्कों ने इसका सदस्य बनने का निमंत्रण ठुकरा दिया है। पाकिस्तान में बवाल इधर, पाकिस्तान में अब बवाल उठ खड़ा हुआ है। लोग इसके लिए शहबाज शरीफ सरकार की आलोचना कर रहे हैं और उन्हें ट्रंप का चाटुकार बता रहे हैं। शहबाज शरीफ सरकार के इस कदम के आलोचकों में पूर्व राजदूत से लेकर कई डिप्लोमेट्स, एक्सपर्ट और बुद्धिजीवी शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की राजदूत रह चुकीं मलीहा लोधी ने इस बोर्ड ऑफ पीस की विश्वसनीयता पर ही सवाल उठाए हैं और कहा है कि यह लंबे समय तक नहीं टिक पाएगा। उन्होंने इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा है, 'पाकिस्तान ने एक ऐसे संगठन (बोर्ड ऑफ पीस) में शामिल होने का फैसला किया है, जिसे डोनाल्ड ट्रंप संयुक्त राष्ट्र के विकल्प की तरह पेश कर रहे हैं। यह पहल सीधे तौर पर ट्रंप से जुड़ी है और उनका कार्यकाल खत्म होने के बाद इसके टिके रहने की संभावना नहीं दिखती। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ट्रंप को खुश करना सिद्धांतों पर टिके रहने से ज्यादा अहम हो गया है?' यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है पूर्व डिप्लोमेट ने इस बात पर आपत्ति जताई कि पाकिस्तान ने उस बोर्ड में शामिल होने का फैसला किया है, जिसमें पहले से इजरायल शामिल है। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि एक तरफ पाकिस्तान ने अब तक इजरायल को मान्यता नहीं दी है, दूसरी तरफ उसके शामिल बोर्ड में शामिल हो रहा है। पूर्व डिप्लोमेट के मुताबिक, यह शहबाज शरीफ सरकार की फिलिस्तीन के प्रति गद्दारी है। फिलिस्तीनी मुद्दे के साथ गद्दारी पाकिस्तान के पूर्व कानून मंत्री बाबर अवान ने भी शरीफ सरकार के इस कदम की आलोचना की है। उन्होंने लिखा है कि सिर्फ ट्रंप को खुश करने के लिए शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर ने बोर्ड ऑफ पीस में सामिल होने का फैसला किया है, जो युद्ध अपराधों के लिए बदनाम बेंजामिन नेतन्याहू जैसे अपराधियों को जिम्मेदार बताना और फिलिस्तीनी मुद्दे के साथ गद्दारी है। अवान ने लिखा कि ट्रंप के बूट पॉलिश की आदत ने पाकिस्तान को कहां से कहां पहुंचा दिया है। उन्होंने इसे ऐतिहासिक भूल करार दिया है। मुस्लिम दुनिया का सबसे बड़ा पाखंड पाक पत्रकार बकीर सज्जाद ने भी एक्स पर लिखा, 'अफसोस है कि यही वो शांति बोर्ड है जो कुछ मुस्लिम देश ट्रंप की खुशामद और चापलूसी करके बेबस फिलिस्तीनियों के लिए हासिल कर पाए हैं। उन्होंने लिखा कि यह मुस्लिम दुनिया की सबसे बड़ी पाखंड वाली राजनीतिक मिसाल है। पाकिस्तान के पूर्व सीनेटर और वकील मुस्तफा नवाज खोखर ने एक्स पर लिखा, 'पाकिस्तान का बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का फैसला बिना किसी पब्लिक डिबेट और संसद की राय के लिया गया है, इसलिए यह अमान्य है।

दुनिया की पहली पसंद बनता भारत, अंतरराष्ट्रीय कंपनियों का विस्तार जारी : अश्विनी वैष्णव

दावोस केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को कहा कि पूरी दुनिया में भारत को लेकर तेजी से विश्वास बढ़ रहा है और दिग्गज अंतरराष्ट्रीय कंपनियां और निवेशक देश में अपने ऑपरेशंस का विस्तार कर रहे हैं। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) के साइडलाइन में हुई बैठक में वैष्णव ने कहा कि भारत की विकास यात्रा, सुधार और भविष्य के लिए तैयार इन्फ्रास्ट्रक्चर ग्लोबल लीडर्स का अपनी ओर ध्यान खींच रहा है। उन्होंने कहा कि दावोस में हुई चर्चाओं से स्पष्ट रूप से यह झलका कि वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत को एक भरोसेमंद और विश्वसनीय भागीदार के रूप में देखा जा रहा है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वैश्विक लॉजिस्टिक्स कंपनी मार्सक, जहाजरानी, ​​बंदरगाहों और रेलवे सहित लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए भारत के साथ सक्रिय रूप से बातचीत कर रही है। उन्होंने आगे कहा कि चर्चा में सेमीकंडक्टर से संबंधित सामग्रियों में सहयोग पर भी बात हुई, जो भारत के दीर्घकालिक विनिर्माण और प्रौद्योगिकी लक्ष्यों के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र है। वैष्णव ने कहा, “मार्सक भारत के साथ जहाजरानी, ​​बंदरगाहों, रेलवे और सेमीकंडक्टर सामग्रियों सहित लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए सक्रिय रूप से सहयोग कर रहा है।” केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा, “हनीवेल भारत के साथ रेलवे आधुनिकीकरण में साझेदारी कर रहा है। वह भारत में अपने विनिर्माण कार्यों का विस्तार करने के लिए उत्सुक है।” उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका स्थित प्रौद्योगिकी कंपनी हनीवेल भारत के साथ रेलवे आधुनिकीकरण में साझेदारी कर रही है और उसने देश में अपने विनिर्माण कार्यों का विस्तार करने में गहरी रुचि दिखाई है। निवेशकों की रुचि के बारे में बताते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि टेमासेक के अध्यक्ष टीओ ची हीन ने भारत में टेमासेक की उपस्थिति बढ़ाने की स्पष्ट इच्छा व्यक्त की है। उन्होंने आगे कहा कि सिंगापुर भारत के भौतिक और डिजिटल अवसंरचना के साथ-साथ डीप-टेक स्टार्टअप्स में निवेश करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो भारत की आर्थिक बुनियाद में दीर्घकालिक विश्वास को दर्शाता है। वैष्णव ने कहा, “एआई, रोबोटिक्स और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में अग्रणी विशेषज्ञों के साथ हुई चर्चाएं एक विश्वसनीय मूल्य-श्रृंखला भागीदार के रूप में भारत के उदय को दर्शाती हैं।”

गाजा मुद्दे पर दोहरा रवैया? ट्रंप की ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल हुए मुस्लिम देश

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाजा के लिए चर्चित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में कई मुस्लिम देश शामिल हो गए हैं। इन देशों के विदेश मंत्रियों ने हाल ही में संयुक्त बयान जारी कर गाजा संघर्ष को खत्म करने के लिए चल रहे अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को लेकर अपना समर्थन दोहराया है। हालांकि मुस्लिम देशों का यह फैसला विवादों के घेरे में आ गया है जहां यह सवाल उठाए जा रहे हैं कि फिलिस्तीन की स्वायत्तता को लेकर चिंता जाहिर करने वाले देश अब किसी दूसरे प्रशासन को गाजा की जिम्मेदारी सौंपे जाने का समर्थन कैसे कर सकते हैं।   इससे पहले बुधवार को कतर, तुर्की, मिस्र, जॉर्डन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, सऊदी अरब और यूएई ने एक संयुक्त बयान जारी कर बोर्ड ऑफ पीस का समर्थन किया। इन देशों के विदेश मंत्रियों ने कहा कि वे अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से अपने नेताओं को भेजे गए निमंत्रण का स्वागत करते हैं और सामूहिक रूप से ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का फैसला कर रहे हैं। बयान में यह भी कहा गया है कि सभी देश अपने-अपने कानूनी और जरूरी प्रक्रियाओं के तहत बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करेंगे। क्या है ‘बोर्ड ऑफ पीस’? गौरतलब है कि ट्रंप का यह शांति बोर्ड गाजा में एक ट्रांजिशनल एडमिनिस्ट्रेशन के रूप में काम करेगा। अमेरिका का कहना है कि इसका मकसद स्थायी सीजफायर को मजबूत करना, गाजा के पुनर्निर्माण में मदद करना और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत फिलिस्तीनी लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार को एक न्यायपूर्ण और स्थायी शांति की दिशा में आगे बढ़ना है, ताकि पूरे क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता कायम हो सके। यह बोर्ड गाजा के लिए फंड जुटाने का काम भी करेगा। मुस्लिम देशों के फैसले पर सवाल कई जानकार इसे मुस्लिम देशों का ट्रंप के आगे सरेंडर बता रहे हैं। पाकिस्तानी सीनेट के विपक्ष के नेता अल्लामा राजा नासिर हुसैन ने इस बोर्ड को गलत बताते हुए कहा है कि इसे जंग के बाद गाजा को बाहरी लोगों द्वारा चलने के लिए बनाया गया था, जो असल में फिलीस्तीन के लोगों से उनका खुद का राज चलाने का अधिकार छीन लेता है और यह नए जमाने की गुलामी जैसा लगता है। भारत ने अभी तक नहीं लिया कोई फैसला इस बीच भारत ने अभी तक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शांति बोर्ड का हिस्सा बनने के लिए दिए गए आमंत्रण पर कोई फैसला नहीं लिया है। मामले से परिचित लोगों ने बुधवार को यह जानकारी दी है। बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने बोर्ड में शामिल होने के लिए कई वैश्विक नेताओं को आमंत्रित किया था। इस सूची में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम भी शामिल हैं। मामले से परिचित लोगों ने बताया कि भारत इस पहल के विभिन्न पहलुओं पर विचार कर रहा है क्योंकि इसमें संवेदनशील मुद्दे शामिल हैं।

बच्चों की ऑनलाइन दुनिया पर लग सकता है ताला, 16 वर्ष से कम उम्र के लिए सोशल मीडिया बैन पर विचार

दावोस/अमरावती आंध्र प्रदेश की चंद्रबाबू नायडू सरकार 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। यह खुलासा राज्य के आईटी मंत्री नारा लोकेश ने स्विट्ज़रलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दौरान ब्लूमबर्ग से बातचीत में किया। नारा लोकेश ने कहा कि कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया पर मौजूद कई तरह की सामग्री को सही तरीके से समझ नहीं पाते, जिससे उनके मानसिक और भावनात्मक विकास पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा, “एक निश्चित उम्र से कम के बच्चों को ऐसे प्लेटफॉर्म पर नहीं होना चाहिए। वे यह नहीं समझ पाते कि वे किस तरह के कंटेंट के संपर्क में आ रहे हैं। ऐसे में एक मजबूत कानूनी ढांचे की जरूरत है।” ऑस्ट्रेलिया के कानून से प्रेरणा गौरतलब है कि ऑस्ट्रेलिया सरकार ने पिछले महीने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए TikTok, X (ट्विटर), फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और स्नैपचैट जैसे प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस कानून के तहत न तो बच्चे नए अकाउंट बना सकते हैं और न ही पुराने अकाउंट चालू रख सकते हैं। आंध्र प्रदेश सरकार इसी मॉडल का अध्ययन कर रही है। यदि यह फैसला लागू होता है, तो आंध्र प्रदेश भारत का पहला राज्य होगा, जो बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर कानूनी पाबंदी लगाएगा। बच्चों की सुरक्षा ही मकसद तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता दीपक रेड्डी ने इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि पिछली YSRCP सरकार के दौरान सोशल मीडिया का दुरुपयोग हुआ था और खासकर महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक व अपमानजनक हमले किए गए। उन्होंने कहा, “कम उम्र के बच्चे भावनात्मक रूप से इतने परिपक्व नहीं होते कि वे ऑनलाइन मौजूद नकारात्मक और नुकसानदायक कंटेंट को समझ सकें। इसलिए आंध्र सरकार दुनिया के बेहतरीन उदाहरणों का अध्ययन कर रही है, खासकर ऑस्ट्रेलिया के अंडर-16 सोशल मीडिया कानून का।” इस कदम को सेंशरशिप ना समझें हालांकि, दीपक रेड्डी ने यह भी साफ किया कि इस कदम को सरकारी निगरानी या सेंसरशिप के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, “इसका उद्देश्य सिर्फ बच्चों को जहरीले कंटेंट, ऑनलाइन नफरत और मानसिक नुकसान से बचाना है।” फिलहाल सरकार इस प्रस्ताव पर विचार और अध्ययन के चरण में है। आने वाले समय में यदि इसे लागू किया जाता है, तो यह डिजिटल युग में बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम माना जाएगा।

नई-नवेली दुल्हन की हत्या: गुजरात में कांग्रेसी नेता के IAS भतीजे ने पत्नी को उतारा मौत के घाट, फिर खुद भी मरा

अहमदाबाद गुजरात में एक बड़े कांग्रेसी नेता के भतीजे और मैरीटाइम के अधिकारी ने अपनी पत्नी की हत्या के बाद खुद को भी गोली मारकर जान दे दी। दो महीने पहले ही दोनों की शादी हुई थी। किसी बात लेकर झगड़े के बाद अधिकारी ने पहले पत्नी की जान ली और फिर कुछ देर बाद खुद को गोली मारी। पत्नी की हत्या के बाद खुदकुशी करने वाले अधिकारी की पहचान यशराज सिंह गोहिल के रूप में हुई, जो मैरीटाइम बोर्ड (बंदरगाहों, तटीय विकास और समुद्री गतिविधियों के प्रबंधन देखने वाला एक सरकारी निकाय) के क्लास-1 अधिकारी थे। वह दिग्गज कांग्रेसी नेता और राज्य में पार्टी के पूर्व प्रमुख शक्तिसिंह गोहिल के भतीजे थे। पत्नी को गोली मारी, 108 पर कॉल किया फिर खुदकुशी पुलिस के मुताबिक बुधवार रात घर में यशराज और उनकी पत्नी राजेश्वरी गोहिल के बीच किसी बात को लेकर झगड़ा हुआ था। इस दौरान यशराज सिंह ने अपने लाइसेंसी रिवॉल्वर से पत्नी राजेश्वरी को गोली मार दी। इसके बाद उन्होंने 108 इमर्जेंसी सर्विस पर कॉल करके मदद भी मांगी। मौके पर पहुंचे डॉक्टर ने राजेश्वरी को मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने कहा कि जैसे ही इमर्जेंसी टीम फ्लैट से निकली। यशराज सिंह ने दूसरे कमरे में जाकर उसी रिवॉल्वर से खुद को गोली मार दी। मौके पर ही उन्होंने भी दम तोड़ दिया। UPSC की तैयारी कर रहे थे यशराज यशराज सिंह गोहिल हाल ही में गुजरात मैरीटाइम बोर्ड में अधिकारी बने थे और वह यूपीएससी की तैयारी में भी जुटे थे। दोनों शवों को पुलिस ने पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस परिवार के सदस्यों से बातचीत करके यह पता लगाने में जुटी है कि किन वजहों से दोनों के बीच इतना तनाव था।

अमेरिका की नई पहल में पाकिस्तान शामिल, ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को मिला 9 मुस्लिम देशों का साथ

वाशिंगटन पाकिस्तान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा गठित 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होने के निमंत्रण को आधिकारिक तौर पर स्वीकार कर लिया है। यह संस्था मुख्य रूप से गाजा में युद्ध विराम लागू कराने और युद्ध से तबाह हुए क्षेत्र के पुनर्निर्माण की निगरानी के लिए बनाई गई है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को एक बयान जारी कर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के इस बोर्ड में शामिल होने के फैसले की पुष्टि की।   मंत्रालय ने कहा, 'पाकिस्तान का यह कदम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 के तहत गाजा शांति योजना का समर्थन करने के प्रयासों का हिस्सा है। पाकिस्तान को उम्मीद है कि इस मंच के जरिए स्थायी युद्धविराम, मानवीय सहायता में वृद्धि और गाजा का पुनर्निर्माण सुनिश्चित होगा।' बयान में स्पष्ट किया गया कि पाकिस्तान 1967 से पहले की सीमाओं और 'अल-कुद्स अल-शरीफ' (यरूशलेम) को राजधानी मानकर एक स्वतंत्र फिलिस्तीन देश के गठन का पक्षधर है। क्या है 'बोर्ड ऑफ पीस'? राष्ट्रपति ट्रंप ने पिछले साल सितंबर में गाजा युद्ध को समाप्त करने की अपनी योजना के तहत इस बोर्ड का प्रस्ताव रखा था। इसमें कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों को आमंत्रित किया गया है। ट्रंप खुद इस बोर्ड के अध्यक्ष होंगे। हालांकि शुरुआत गाजा से हुई, लेकिन अब इसके जरिए अन्य वैश्विक संघर्षों को सुलझाने का लक्ष्य भी रखा गया है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, बोर्ड में स्थायी सीट के लिए 1 अरब डॉलर (करीब 8300 करोड़ रुपये) के योगदान का अनुरोध किया गया है, हालांकि पाकिस्तान या सऊदी अरब के आधिकारिक बयानों में इस भुगतान का जिक्र नहीं है। मुस्लिम देशों का बड़ा समर्थन पाकिस्तान के साथ ही अब तक 9 मुस्लिम बहुल देश इस बोर्ड का हिस्सा बनने पर सहमत हुए हैं। इनमें गाजा मध्यस्थता में अहम भूमिका निभाने वाले कतर और तुर्किये भी शामिल हैं। सऊदी अरब ने एक साझा फैसले की घोषणा करते हुए बताया कि सऊदी अरब, कतर, तुर्किये, मिस्र, जॉर्डन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देशों ने इसका समर्थन किया है। इसके अलावा, कुवैत ने भी अलग से इस बोर्ड में शामिल होने की पुष्टि की है। इजरायल और हमास के बीच जारी तनाव को कम करने के लिए यह बोर्ड एक प्रशासक की भूमिका निभा सकता है। पाकिस्तान का मानना है कि इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी मौजूदगी फिलिस्तीन के भाइयों और बहनों की पीड़ा को कम करने और उनके आत्मनिर्णय के अधिकार को दिलाने में मददगार साबित होगी।

स्वास्थ्य को बचाने की पहल: ओडिशा सरकार ने बीड़ी-सिगरेट और गुटखा पर लगाया बैन

ओडिशा ओडिशा सरकार ने राज्य को तंबाकू मुक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। 22 जनवरी 2026 से राज्य भर में गुटखा, पान मसाला, बीड़ी, सिगरेट, खैनी और जर्दा समेत सभी प्रकार के तंबाकू उत्पादों के उत्पादन, भंडारण, वितरण और बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। सख्त नियमों के साथ नई अधिसूचना जारी राज्य स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, यह प्रतिबंध केवल बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि इनके प्रोसेसिंग और पैकेजिंग पर भी लागू होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई इन नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम (FSSAI) के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।   ये प्रोडक्ट किए बैन सरकार ने प्रतिबंध का दायरा बहुत व्यापक रखा है ताकि किसी भी तरह की कानूनी खामी न रहे। प्रतिबंधित उत्पादों में शामिल हैं:     सभी प्रकार के गुटखा, पान मसाला, जर्दा और खैनी।     फ्लेवर्ड, सुगंधित (scented) या एडिटिव्स वाले चबाने वाले पदार्थ।     पैकेज्ड और खुले, दोनों तरह के तंबाकू उत्पाद।     ऐसे उत्पाद जो अलग-अलग पैकेट में मिलते हैं लेकिन मिलाकर खाए जाते हैं।     कोई भी ऐसा खाद्य पदार्थ जिसमें तंबाकू या निकोटीन मिला हो। प्रतिबंध के पीछे का बड़ा कारण ओडिशा में तंबाकू के सेवन के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। राज्य के 42% वयस्क स्मोकलेस तंबाकू का सेवन करते हैं, जो राष्ट्रीय औसत से दोगुना है।     गंभीर बीमारियाँ: WHO और इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर के अनुसार, ये उत्पाद मुंह, गले, पेट और किडनी के कैंसर की मुख्य वजह हैं।    युवाओं की सुरक्षा: सरकार का उद्देश्य नई पीढ़ी और बच्चों को इस जानलेवा लत से बचाना है।     FSSAI और सुप्रीम कोर्ट के नियम: यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देशों और खाद्य सुरक्षा मानकों (FSSAI) के अनुरूप लिया गया है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह नियम केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कानूनी रूप से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी ताकि ओडिशा को कैंसर जैसी बीमारियों से सुरक्षित रखा जा सके।