नई पर्यटन नीति से उत्तराखंड में विकास और रोजगार की नई राह निजी निवेश, स्वरोजगार और नए पर्यटन स्थलों के विकास पर सरकार का विशेष फोकस देहरादून देवभूमि उत्तराखंड अपनी हिमालयी चोटियों, आध्यात्मिक आस्था, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, जैव विविधता और रोमांचकारी पर्यटन स्थलों के कारण देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। चारधाम यात्रा से लेकर योग और वेलनेस, ट्रैकिंग से लेकर एडवेंचर स्पोर्ट्स और वन्यजीव पर्यटन से लेकर स्थानीय संस्कृति तक, उत्तराखंड के पास पर्यटन के विकास की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। राज्य में लगातार बढ़ रही पर्यटकों की संख्या और पर्यटन क्षेत्र में रोजगार एवं निवेश की संभावनाओं को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने *नई राज्य पर्यटन नीति* जारी की है। यह नीति केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यटन को राज्य की अर्थव्यवस्था, स्थानीय रोजगार, स्वरोजगार और ग्रामीण विकास का मजबूत आधार बनाने की दिशा में एक दीर्घकालिक रणनीतिक पहल है। नई नीति में सरकार की भूमिका को एक व्यवसायी के बजाय *'फैसिलिटेटर' यानी सुविधा प्रदाता* के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य निजी क्षेत्र को निवेश के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना, पर्यटन परियोजनाओं की स्वीकृति प्रक्रिया को सरल बनाना और राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों तक पर्यटन के लाभ पहुंचाना है। ## पर्यटन में तेजी, बढ़ते अवसर उत्तराखंड में पर्यटन की बढ़ती लोकप्रियता का अंदाजा पर्यटकों की संख्या में हुई वृद्धि से लगाया जा सकता है। वर्ष 2014 में राज्य में करीब *2.2 करोड़ पर्यटक* पहुंचे थे, जो वर्ष 2019 में बढ़कर लगभग *3.9 करोड़* हो गए। इस अवधि में पर्यटकों की संख्या में करीब *11.97 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR)* दर्ज की गई। यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि उत्तराखंड में पर्यटन केवल धार्मिक यात्राओं तक सीमित नहीं रह गया है। अब पर्यटक यहां प्राकृतिक सौंदर्य, एडवेंचर, वेलनेस, संस्कृति, स्थानीय खान-पान और अनुभव आधारित पर्यटन के लिए भी पहुंच रहे हैं। पर्यटन क्षेत्र की वैश्विक संभावनाओं को देखते हुए भारत में भी इस क्षेत्र को अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण इंजन के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे में उत्तराखंड की नई पर्यटन नीति राज्य को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन बाजार में और मजबूत स्थिति दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। ## निजी निवेश को मिलेगा नया आधार नई पर्यटन नीति की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक है *निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देना*। सरकार का मानना है कि पर्यटन के बुनियादी ढांचे, होटल एवं हॉस्पिटैलिटी, परिवहन, टूर संचालन और विभिन्न निजी सेवाओं के विस्तार में निजी निवेश महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। नीति के तहत निवेशकों के लिए कारोबार करना आसान बनाने और परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इसके लिए *सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम* को मजबूत किया जाएगा, ताकि विभिन्न अनुमतियों और स्वीकृतियों की प्रक्रिया सरल और तेज हो सके। नई परियोजनाओं के साथ-साथ मौजूदा पर्यटन इकाइयों के विस्तार को भी प्रोत्साहन देने का प्रावधान किया गया है। इससे पहले से संचालित होटल, रिसॉर्ट, पर्यटन इकाइयों और अन्य उद्यमों को अपनी क्षमता बढ़ाने के अवसर मिलेंगे। ## पूंजीगत सब्सिडी से लेकर करों में राहत तक नई नीति में पात्र पर्यटन इकाइयों और उद्यमियों के लिए विभिन्न प्रकार के प्रोत्साहनों और सुविधाओं का प्रावधान किया गया है। हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में *पूंजीगत सब्सिडी* के माध्यम से होटल और ठहरने से जुड़ी परियोजनाओं को आर्थिक सहयोग देने की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही पर्यटन परियोजनाओं के प्रचार-प्रसार और मार्केटिंग के लिए सहायता, कौशल विकास एवं प्रशिक्षण को प्रोत्साहन तथा बिजली शुल्क एवं स्टांप ड्यूटी से संबंधित राहत जैसे प्रावधान भी निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं। इसका सीधा उद्देश्य है कि उत्तराखंड में पर्यटन परियोजनाएं केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहें, बल्कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों में निवेश और आर्थिक गतिविधियों का विस्तार हो। ## गांवों तक पहुंचेगा पर्यटन का लाभ उत्तराखंड की नई पर्यटन नीति की एक बड़ी संभावना *स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार और रोजगार सृजन* में दिखाई देती है। पर्यटन के विस्तार के साथ होमस्टे, स्थानीय गाइड, ट्रैवल सेवाएं, टैक्सी एवं परिवहन, स्थानीय हस्तशिल्प, खान-पान, साहसिक गतिविधियों और अन्य सेवाओं में रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। राज्य के स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक व्यंजनों, लोक संस्कृति और हस्तशिल्प को पर्यटन से जोड़ने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और पर्यटकों को उत्तराखंड की वास्तविक सांस्कृतिक पहचान का अनुभव भी प्राप्त होगा। इस दृष्टि से पर्यटन नीति केवल होटल और रिसॉर्ट के निर्माण की नीति नहीं, बल्कि *स्थानीय समुदाय को पर्यटन अर्थव्यवस्था का भागीदार बनाने की पहल* के रूप में भी देखी जा सकती है। ## धार्मिक पर्यटन से आगे बढ़ेगा उत्तराखंड उत्तराखंड की पहचान लंबे समय से चारधाम और प्रमुख धार्मिक स्थलों के कारण रही है। नई नीति में धार्मिक पर्यटन को मजबूत करने के साथ-साथ पर्यटन के नए आयाम विकसित करने पर जोर दिया गया है। ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों को पर्यटन नेटवर्क से जोड़ने, सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित करने और नए पर्यटन स्थलों को विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा। इससे पर्यटन का दबाव कुछ चुनिंदा प्रसिद्ध स्थलों से आगे बढ़कर राज्य के अन्य क्षेत्रों तक पहुंच सकता है। यही संतुलित पर्यटन विकास का आधार बन सकता है। ## एडवेंचर और इको-टूरिज्म बनेगा नया आकर्षण हिमालयी भौगोलिक परिस्थितियों के कारण उत्तराखंड में *ट्रैकिंग, रिवर एक्टिविटी, वॉटर स्पोर्ट्स और अन्य एडवेंचर गतिविधियों* की व्यापक संभावनाएं हैं। नई नीति में एडवेंचर पर्यटन के साथ पर्यावरण-अनुकूल यानी इको-टूरिज्म को प्राथमिकता दी गई है। इसका उद्देश्य पर्यटन विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन कायम करना है। प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करते हुए पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देना उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ## वेलनेस और मेडिकल टूरिज्म पर भी नजर योग, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में उत्तराखंड की अपनी विशिष्ट पहचान है। नई पर्यटन नीति में *वेलनेस और मेडिकल टूरिज्म* को भी प्रमुख क्षेत्र के रूप में शामिल किया गया है। योग और आयुर्वेद को पर्यटन अनुभव से जोड़कर राज्य देश-विदेश के उन पर्यटकों को आकर्षित कर सकता है, जो स्वास्थ्य, मानसिक शांति और प्राकृतिक जीवनशैली से जुड़े अनुभव चाहते हैं। इस … Read more