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त्योहारी सीजन में महंगाई का झटका, चीनी और सरसों तेल के दाम कब होंगे कम?

नईदिल्ली  चीनी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों में गिरावट जरूर देखने को मिली है। लेकिन अब भी दाम 60 रुपये प्रति किलोग्राम के ऊपर बना हुआ है। वहीं, सरसों का तेल अब भी 200 रुपये के पार ही बिक रहा है। चीनी और तेल ने मिलकर त्योहारों के इस सीजन को थोड़ा फीका बना दिया है। अब लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि कब तक दाम में गिरावट देखने को मिलेगी? चीनी के दाम में गिरावट (Chini Ka rate) बीते हफ्ते चीनी का रेट 65.08 रुपये प्रति किलोग्राम था। जोकि अब घटकर 62.57 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गया है। यानी रिटेल मार्केट में कीमतों में 3.85 प्रति किलोग्राम की गिरावट देखने को मिली है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार चीनी का रेट कल शुक्रवार को 59 रुपये प्रति किलोग्राम था। जोकि पिछले साल की तुलना में 14 रुपये अधिक है। बीते इस साल 4 सितंबर को 1 किलो चीनी के लिए लोगों को 45 रुपये खर्च करने पड़ रहे थे। ड्यूटी फ्री चीनी इम्पोर्ट की मिली परमिशन सरकार ने विदेशों से चीनी आयात करने के लिए खरीदारों को बड़ी छूट देते हुए इसे ड्यूटी फ्री कर दिया है। हालांकि, इसकी सीमा एक मिलियन टन की है। लेकिन उम्मीद की जा रही है कि इससे होलसेल के साथ-साथ रिटेल के दाम भी घटेंगे। इसके अलावा कालाबाजारी रोकने के लिए भी सरकार काफी सख्ती दिखा रही है। सरसों के तेल का दोहरा शतक (Mustard Oil Price today) पिछले एक महीने से सरसों के तेल का दाम भी सातवें आसमान पर है। कीमतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पिछले साल इसका दाम 187 रुपये प्रति किलोग्राम था। जोकि इस समय 201 रुपये के आस-पास बना हुआ है। बीते एक महीने से सरसों के तेल की कीमतों में कोई खास बदलाव नहीं देखने को मिला। कब गिरेगा चीनी और तेल का दाम चीनी की कीमतों में फिलहाल कोई खास गिरावट की उम्मीद कम ही है। इस इंडस्ट्री पर नजर रखने वाले एक्सपर्ट के अनुसार चीनी का रेट नई फसल के आने के बाद यानी अक्टूबर के बाद ही गिरने की संभावना है। वहीं, सरसों की कीमतों में आने वाले कुछ हफ्तों में आपको कटौती देखने को मिल सकती है। राजस्थान की फसल मार्केट में एंट्री करते ही दाम नीचे आ सकता है।

J&K में बड़ा ऑपरेशन, सुरक्षाबलों ने लश्कर कमांडर यासिर को किया ढेर; पाकिस्तानी नागरिक था आतंकी

श्रीनगर यूसमर्ग में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई. संयुक्त बलों के साथ हुई इस मुठभेड़ में पाकिस्तानी लश्कर कमांडर यासिर मारा गया. सूत्रों के मुताबिक, मुठभेड़ में मारा गया लश्कर कमांडर यासिर पहले सुलेमान मूसा के बड़े लश्कर ग्रुप का हिस्सा था. हालांकि, करीब एक साल पहले वह इस ग्रुप से अलग हो गया था। सुरक्षाबलों ने जिस आतंकी को मार गिराया था, उसकी पहचान यासिर के रूप में हुई है। यासिर पाकिस्तान का नागरिक था और प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा से जुड़ा हुआ था। सुरक्षाबलों ने ऑपरेशन अशदर के तहत कार्रवाई करते हुए आतंकी को मार गिराया। उसकी पहचान सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां उसके नेटवर्क और गतिविधियों से जुड़ी अन्य जानकारियां जुटाने में लगी हैं। आतंकी नेटवर्क पर सुरक्षा बलों की नजर इस कार्रवाई को आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों की मुहिम में अहम सफलता माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां इलाके में सक्रिय आतंकी नेटवर्क और उनके मददगारों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। यूसमर्ग में ऑपरेशन अशदर के दूसरे दिन सुरक्षाबलों की बड़ी कार्रवाई पिछले दो दिनों से चल रहा आतंकवाद के खिलाफ अभियान में सुरक्षाबलों को मध्य कश्मीर के बडगाम जिले के यूसमर्ग में शुक्रवार को बड़ी सफलता मिली। सेना और पुलिस ने अशदर गली के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में जारी मुठभेड़ के दूसरे दिन ऑपरेशन अशदर के तहत एक आतंकी को मार गिराया। उसके कब्जे से एके-47 राइफल और अन्य युद्ध सामग्री बरामद की गई है। सुरक्षाबलों को इलाके में चार से पांच और आतंकियों के छिपे होने की आशंका है। जंगल व पहाड़ी क्षेत्र में उनकी तलाश के लिए घेराबंदी जारी है। सेना की चिनार कोर के अनुसार, सटीक खुफिया सूचना पर अशदर गली क्षेत्र में आतंकियों की तलाश के लिए संयुक्त अभियान चलाया जा रहा था।यह क्षेत्र यूसमर्ग के दूधपथरी से करीब आठ घंटे की कठिन पैदल चढ़ाई वाला है। सेना की 53 राष्ट्रीय राइफल्स, 10 पैरा कमांडो, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के विशेष अभियान समूह (एसओजी) की टीमें बुधवार से ही इस इलाके में आतंकियों की तलाश में जुटी थीं। वीरवार को जंगल में संदिग्ध गतिविधि नजर आने पर जवानों ने आतंकियों को आत्मसमर्पण करने की चेतावनी दी। इसके जवाब में आतंकियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। सुरक्षाबलों ने भी मोर्चा संभालते हुए जवाबी कार्रवाई की। दोनों पक्षों के बीच भीषण गोलीबारी के बाद आतंकी घने जंगल में छिप गए। शुक्रवार सुबह अभियान दोबारा तेज किया गया और मुठभेड़ में एक आतंकी मारा गया। मारे गए आतंकी की अभी पहचान नहीं हो पाई है। सूत्रों के अनुसार, उसके पाकिस्तानी होने की आशंका है। साथ ही लश्कर-ए-ताइबा से जुड़े होने की बात भी सामने आ रही है। वहीं, कश्मीर जोन के आईजीपी सुजीत कुमार भी मुठभेड़ स्थल के पास पहुंचे और अभियान का जायजा लिया। यासिर की गतिविधियों का पता यूसमर्ग के ऊपरी इलाकों में चलने के बाद संयुक्त बलों ने ऑपरेशन चलाया. सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, सुलेमान उर्फ मूसा उस लश्कर ग्रुप का सदस्य था, मूसा पिछले साल श्रीनगर के डाचीगाम जंगल इलाके में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया था।  रात में घेरे के भीतर ही छिप गए थे आतंकी रक्षा सूत्रों के अनुसार, कुछ देर की गोलीबारी के बाद आतंकी घने जंगल और रात के अंधेरे का फायदा उठाकर घेरे के भीतर ही छिप गए। रात में दृश्यता कम होने के कारण सुरक्षाबलों ने जंगल से बाहर निकलने के संभावित रास्तों को सील कर घेराबंदी बनाए रखी। शुक्रवार सुबह रोशनी होते ही तलाशी अभियान को फिर से चलाया और एक आतंकी ढेर कर दिया। आतंकियों के खात्मे के लिए स्निफर डॉग्स भी लगाए सूत्रों के अनुसार, मुठभेड़ में शामिल आतंकियों की संख्या चार से पांच हो सकती है। आशंका है कि आतंकियों का यह गुट पीर पंजाल की ऊंची पहाड़ियों के रास्ते दक्षिण कश्मीर की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहा था। घने जंगलों, प्राकृतिक गुफाओं और खड़ी चट्टानों वाले इस इलाके में अन्य आतंकियों के छिपे होने की आशंका को देखते हुए सुरक्षाबलों ने तलाशी अभियान तेज कर दिया है। आतंकियों की मौजूदगी को पूरी तरह खत्म करने के लिए स्निफर डॉग्स और आधुनिक उपकरणों की मदद से जंगल में अभियान जारी है। लेफ्टिनेंट जनरल ने चिनार कोर की कार्रवाई को सराहा नॉर्दर्न कमांड के सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने अशदर गली इलाके में एक आतंकी को मार गिराने की त्वरित व सटीक कार्रवाई के लिए चिनार कोर की सराहना की। नॉर्दर्न कमांड ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि वह जम्मू-कश्मीर को आतंकवाद मुक्त बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। स्थानीय सूत्रों ने दो आतंकियों के मारे जाने का दावा किया है, लेकिन रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार, मुठभेड़स्थल से अभी तक एक ही आतंकी का शव, एक एसाल्ट राइफल व अन्य युद्धक सामग्री मिली है। जब तक दूसरे आतंकी का शव नही मिल जाता उसके मारे जाने की पुष्टि नहीं हो सकती। प्रवक्ता ने बताया कि मारे गए आतंकियों के वहीं आस पास छिने होने की संभावना को देखते हुए अभियान को जारी रखा गया है। ऊपरी युसमर्ग पीर पंजाल पर्वतीय क्षेत्र में स्थित है और घने जंगलों तथा दुर्गम पहाड़ी भूभाग के कारण सुरक्षा अभियानों के लिहाज से चुनौतीपूर्ण माना जाता है। युसमर्ग एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल भी है। अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद इसे पर्यटकों के लिए बंद किया गया था। यहां से राजौरी-पुंछ क्षेत्र की ओर जाने वाले मार्ग भी निकलते हैं। सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके में घेराबंदी और तलाशी बढ़ा दी है। अधिकारियों के अनुसार, अभियान पूरा होने के बाद ही मारे गए आतंकी की पहचान और अन्य विवरण साझा किए जाएंगे।    

अमेरिका में भारतीय नागरिक पर ड्रग्स बेचने का आरोप, घर और पिज्जा आउटलेट से नशीला पदार्थ बरामद

कैलिफोर्निया अमेरिका के कैलिफोर्निया में एक भारतीय नागरिक पर  पिज्जा आउटलेट की आड़ में ड्रग्स का कारोबार करने का मामला सामने आया है. U.S. Department of Justice के मुताबिक, 50 साल के कवल प्रीत सिंह पर बड़ी मात्रा में मेथामफेटामाइन बेचने और ड्रग्स की तस्करी में अवैध हथियार रखने के आरोप हैं।  जांच के दौरान अधिकारियों ने उसके घर और कारोबार की तलाशी ली. इस दौरान 40 पाउंड से ज्यादा मेथामफेटामाइन, तीन हथियार और 10 हजार डॉलर से ज्यादा नकद बरामद हुआ. कवल प्रीत सिंह कैलिफोर्निया के दिनुबा शहर में Round Table Pizza रेस्तरां चलाता था। कोर्ट के दस्तावेजों के मुताबिक, आरोप है कि वह इसी रेस्तरां से बड़ी मात्रा में मेथामफेटामाइन बेचता था. उस पर ड्रग्स की तस्करी से जुड़े अवैध हथियार रखने का भी आरोप है।  अमेरिकी अधिकारियों ने 18 अगस्त को सिंह के घर और उसके कारोबार की तलाशी ली. इस दौरान बड़ी मात्रा में ड्रग्स के खेप के साथ तीन बंदूकें और नकदी मिली. इस मामले की जांच FBI और Homeland Security Investigations ने की है।  अगर कवल प्रीत सिंह को दोषी ठहराया जाता है तो ड्रग्स की तस्करी के मामले में उसे कम से कम 10 साल और अधिकतम उम्रकैद की सजा हो सकती है. इसके अलावा उस पर 1 करोड़ डॉलर तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. वहीं, ड्रग्स की तस्करी के दौरान हथियार रखने के आरोप में उसे कम से कम 5 साल की अतिरिक्त सजा हो सकती है।  हालांकि, अभी ये सिर्फ आरोप हैं. अदालत में दोष साबित होने तक सिंह को कानून के तहत निर्दोष माना जाएगा. अंतिम सजा अदालत संबंधित कानून और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए तय करेगी।  क्या है मेथामफेटामाइन? मेथामफेटामाइन एक बेहद नशीला और खतरनाक सिंथेटिक ड्रग है, जो दिमाग और शरीर पर तेज असर डालता है. इसके इस्तेमाल से गंभीर स्वास्थ्य नुकसान और लत लग सकती है. अमेरिका में बड़ी मात्रा में इसकी बिक्री और तस्करी करना गंभीर अपराध है। 

CM धामी का बड़ा बयान- सरकारी नौकरी अब सिफारिश से नहीं, मेहनत और प्रतिभा के दम पर

101 युवाओं को नियुक्ति पत्र, धामी बोले—मेहनत और प्रतिभा के आधार पर मिल रही सरकारी नौकरी देहरादून  उत्तराखंड में युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और सरकारी भर्तियों को पारदर्शी बनाने की दिशा में राज्य सरकार की पहल जारी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को मुख्य सेवक सदन में पशुपालन तथा गन्ना विभाग में चयनित 101 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। इनमें 88 पशुधन प्रसार अधिकारी और 13 गन्ना पर्यवेक्षक शामिल हैं। नवनियुक्त कार्मिकों को शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नियुक्ति पत्र युवाओं की मेहनत, प्रतिभा और दृढ़ संकल्प का परिणाम है। अब वे अपने करियर के साथ जनसेवा की नई यात्रा शुरू कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने उनसे अपने ज्ञान, अनुभव और ऊर्जा का उपयोग करते हुए शासकीय कार्यप्रणाली को और बेहतर बनाने की अपेक्षा की। पांच वर्षों में 34 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने युवाओं के हितों की रक्षा और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी नौकरियों में चयन मेहनत और प्रतिभा के आधार पर हो। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में 34 हजार से अधिक युवा सरकारी नौकरी पाने में सफल हुए हैं। सरकार का प्रयास है कि भर्ती प्रक्रियाएं पारदर्शी और निष्पक्ष रहें तथा युवाओं को अपनी योग्यता के आधार पर आगे बढ़ने का अवसर मिले। पशुपालन और गन्ना क्षेत्र को मिल रहा बढ़ावा मुख्यमंत्री ने कहा कि पशुपालन और गन्ना विभाग प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था से सीधे जुड़े हुए हैं। विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में पशुपालन हजारों परिवारों की आजीविका का आधार है। यह ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री आंचल अमृत योजना, मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना और मुख्यमंत्री राज्य पशुधन मिशन के माध्यम से पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा दिया जा रहा है। किसानों और पशुपालकों को अनुदान पर गाय, बकरी, भेड़ और मुर्गी पालन की इकाइयां उपलब्ध कराने के साथ कृत्रिम गर्भाधान, टीकाकरण और पशु चिकित्सा जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। गन्ना किसानों के लिए तकनीक और बेहतर सुविधाओं पर जोर मुख्यमंत्री ने कहा कि गन्ना सर्वेक्षण की प्रक्रिया को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया गया है। किसानों को नई तकनीक, उन्नत प्रजातियों और वैज्ञानिक खेती की जानकारी देने के लिए गन्ना क्लीनिक एवं परामर्श केंद्र शुरू किए गए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में गन्ना किसानों को उत्तर प्रदेश की तुलना में पांच रुपये प्रति कुंतल अधिक मूल्य दिया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि किसानों को आधुनिक तकनीक और बेहतर कृषि पद्धतियों के साथ उनकी उपज का उचित लाभ भी मिल सके। योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्ति तक पहुंचाना जिम्मेदारी मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त कार्मिकों से कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्ति तक समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पहुंचाना उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि किसानों और पशुपालकों के साथ लगातार संवाद कर उनकी समस्याओं को समझना और उनका समाधान करना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि आम नागरिक को सरकारी कार्यालयों में अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए। प्रशासनिक व्यवस्था में संवेदनशीलता और जवाबदेही को प्राथमिकता देते हुए अधिकारियों और कर्मचारियों को जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप कार्य करना होगा। ‘सरलीकरण, समाधान, निस्तारण और संतुष्टि’ का मंत्र मुख्यमंत्री धामी ने नवनियुक्त कार्मिकों से ‘सरलीकरण, समाधान, निस्तारण और संतुष्टि’ के मूल मंत्र को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ईमानदारी, अनुशासन और संवेदनशीलता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करना ही जनसेवा की वास्तविक भावना है। उन्होंने नवनियुक्त कार्मिकों से विकसित भारत-2047 के लक्ष्य के अनुरूप सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर उत्तराखंड के निर्माण में अपनी भूमिका निभाने का आह्वान किया। 101 युवाओं को मिली यह नियुक्ति केवल रोजगार का अवसर नहीं, बल्कि प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े दो महत्वपूर्ण क्षेत्रों—पशुपालन और गन्ना क्षेत्र—को नई ऊर्जा देने का अवसर भी है। आने वाले समय में इन नवनियुक्त कार्मिकों की भूमिका किसानों और पशुपालकों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने में महत्वपूर्ण होगी।चाहें तो मैं इसके लिए मैगज़ीन के फ्रंट पेज/इनसाइड पेज के लिए 5 ज्यादा दमदार हेडलाइन और सबहेडिंग भी बना सकता हूं।

CM धामी ने देखी ‘हनुमान अंश’, नीम करौली बाबा की आध्यात्मिक यात्रा और सेवा भावना से हुए अभिभूत

‘हनुमान अंश’ में दिखी नीम करौली बाबा की आध्यात्मिक यात्रा, सीएम धामी ने देखी फिल्म देहरादून  उत्तराखंड की देवभूमि अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ संतों और आध्यात्मिक परंपराओं के लिए भी विशेष पहचान रखती है। इसी आध्यात्मिक विरासत से जुड़ी प्रसिद्ध संत एवं आध्यात्मिक विभूति नीम करौली बाबा के जीवन, उनकी भक्ति, सेवा और मानव कल्याण के संदेश पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाथीबड़कला स्थित सेंट्रियो मॉल के सिनेमा हॉल में देखा। फिल्म देखने के लिए मुख्यमंत्री के साथ उनकी धर्मपत्नी गीता धामी, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक प्रदीप बत्रा सहित विभिन्न दायित्वधारी और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। फिल्म देखने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि भारत की संत परंपरा ने सदियों से समाज को सत्य, सेवा, करुणा और आध्यात्मिकता का मार्ग दिखाया है। नीम करौली बाबा का जीवन भी इसी महान परंपरा का प्रेरणादायी उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा की भक्ति, मानव सेवा और सभी के प्रति प्रेम का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है। उनका जीवन समाज को सेवा, सद्भाव और मानवीय मूल्यों की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। कैंची धाम बना आस्था का प्रमुख केंद्र मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड केवल देवभूमि ही नहीं, बल्कि महान संतों और आध्यात्मिक परंपराओं की भूमि भी है। नीम करौली बाबा से जुड़ा कैंची धाम आज देश ही नहीं, बल्कि विश्वभर में श्रद्धा और आस्था के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना चुका है। उन्होंने कहा कि संतों के जीवन और उनके विचारों को रचनात्मक माध्यमों के जरिए नई पीढ़ी तक पहुंचाना भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों से युवाओं को जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है। भक्ति, सेवा और मानव कल्याण पर केंद्रित फिल्म ‘हनुमान अंश’ में नीम करौली बाबा की आध्यात्मिक यात्रा और उनके जीवन से जुड़े उन मूल्यों को सामने लाने का प्रयास किया गया है, जिनमें ईश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा, मानव सेवा, करुणा, प्रेम, विनम्रता और लोककल्याण प्रमुख हैं। मुख्यमंत्री धामी ने फिल्म को भारतीय संत परंपरा और आध्यात्मिक विरासत से जोड़ने वाला सकारात्मक प्रयास बताते हुए इसके निर्माताओं और पूरी टीम की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और संत परंपरा पर आधारित प्रेरणादायी फिल्में समाज में सेवा, संस्कार और मानवीय मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। नीम करौली बाबा का जीवन और उनका सेवा-संदेश आज भी लाखों लोगों को प्रेरित करता है। ऐसे में उनकी आध्यात्मिक यात्रा को सिनेमा के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास उत्तराखंड की समृद्ध संत परंपरा और भारतीय आध्यात्मिक विरासत को व्यापक मंच देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा सकता है।अगर आप चाहें तो इसे और ज्यादा मैगज़ीन फीचर जैसा बनाकर 600–700 शब्दों में, शुरुआत में एक प्रभावी आध्यात्मिक उद्धरण/ओपनिंग के साथ भी तैयार किया जा सकता है।

मदरसों में आधुनिक शिक्षा की पहल तेज, CM धामी ने 26 संस्थानों को सौंपे मान्यता प्रमाणपत्र

मदरसों में नई शिक्षा नीति की पहल, 26 संस्थानों को मिला प्रमाणपत्र देहरादून  उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा को आधुनिक शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में राज्य सरकार की पहल आगे बढ़ रही है। नई नीति के तहत निर्धारित पाठ्यक्रम तैयार करने और उसे लागू कर पढ़ाने वाले 26 मदरसों को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रमाणपत्र प्रदान किए। इसके साथ ही उत्तराखंड में नई नीति के तहत मान्यता प्राप्त मदरसों की संख्या बढ़कर 33 हो गई है। मुख्य सेवक सदन में आयोजित कार्यक्रम में प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। सरकारी कार्यक्रम होने के कारण यहां राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ का पूरा गायन हुआ। कार्यक्रम में मौजूद मदरसा संचालक भी सम्मानपूर्वक खड़े होकर वंदे मातरम् के गायन में शामिल हुए। मदरसों में साइंस और टेक्नोलॉजी जरूरी: धामी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आज के दौर में मदरसों में पारंपरिक शिक्षा के साथ साइंस और टेक्नोलॉजी की पढ़ाई भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगर बच्चों को आधुनिक शिक्षा और तकनीकी ज्ञान से नहीं जोड़ा गया तो वे बदलते समय के साथ आगे बढ़ने में पीछे रह सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार किसी वर्ग के खिलाफ नहीं, बल्कि अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई करती है। उन्होंने कहा कि सरकार के बारे में कुछ विपक्षी दल भ्रम फैलाने का प्रयास करते हैं और सरकार को मुस्लिम विरोधी बताते हैं, जबकि कानून का पालन करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने का कोई सवाल ही नहीं है। मदरसों का रजिस्ट्रेशन और नया पाठ्यक्रम उत्तराखंड सरकार ने 1 जुलाई को मदरसा शिक्षा बोर्ड को भंग कर उसके स्थान पर अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया। नई व्यवस्था के तहत राज्य के मदरसों का रजिस्ट्रेशन जरूरी किया गया है। इसी प्राधिकरण की ओर से नया पाठ्यक्रम तैयार किया गया है। नई व्यवस्था में मदरसों में NCERT आधारित पाठ्यक्रम लागू करने के साथ साइंस, मैथ्स, सोशल साइंस और इंग्लिश जैसे विषयों की पढ़ाई को अनिवार्य किया गया है। सरकार का जोर मदरसा शिक्षा को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़ने पर है, ताकि यहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों को आगे की शिक्षा और रोजगार के अवसरों के लिए बेहतर तैयारी मिल सके। मदरसा संचालकों ने बताया सकारात्मक कदम नई व्यवस्था के तहत प्रमाणपत्र प्राप्त करने वाले मदरसा संचालकों ने सरकार के कदम का समर्थन किया। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की नीति और नीयत साफ है। उनका तर्क है कि यदि बच्चों को बेहतर और आधुनिक शिक्षा मिलती है तो इससे उनके भविष्य को ही मजबूती मिलेगी। मदरसा संचालकों ने कहा कि समान शिक्षा और सरकारी सुविधाओं का लाभ मिलने से विद्यार्थियों के लिए आगे बढ़ने के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने नई व्यवस्था का विरोध करने वालों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि शिक्षा को बेहतर बनाने की पहल का विरोध व्यक्तिगत कारणों से नहीं होना चाहिए। 30 सितंबर तक रजिस्ट्रेशन उत्तराखंड में नए सिस्टम के तहत मदरसों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया 30 सितंबर तक जारी रहेगी। पुराने मदरसा बोर्ड के समय राज्य में कुल 452 मदरसे पंजीकृत थे। हालांकि नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब तक केवल 33 मदरसों ने नए सिस्टम के तहत रजिस्ट्रेशन कराया है। सरकार की नई व्यवस्था को लेकर सभी मदरसा संचालक एकमत नहीं हैं। कुछ संचालक अभी भी इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि मदरसों का मूल उद्देश्य मजहबी तालीम देना है और नए पाठ्यक्रम के जरिए धीरे-धीरे पारंपरिक मदरसा शिक्षा को कमजोर किया जा रहा है। ऐसे में आने वाले समय में सरकार और मदरसा संचालकों के बीच इस मुद्दे पर संवाद और अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है। निकाहनामे में भी बदलाव की तैयारी इसी बीच उत्तराखंड में मुस्लिम सामाजिक व्यवस्था से जुड़े एक अन्य फैसले की भी चर्चा है। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने नया निकाहनामा तैयार किया है। नए निकाहनामे में दूसरे, तीसरे और चौथे निकाह के लिए दिए जाने वाले कॉलम हटाने का निर्णय लिया गया है। मदरसा शिक्षा में बदलाव और निकाहनामे में प्रस्तावित परिवर्तन, दोनों ही फैसले उत्तराखंड में मुस्लिम समाज से जुड़े संस्थागत और सामाजिक मामलों में सरकार की सक्रियता को दर्शाते हैं। अब निगाह इस बात पर होगी कि नई शिक्षा व्यवस्था के तहत कितने और मदरसे रजिस्ट्रेशन कराते हैं और आधुनिक पाठ्यक्रम को लेकर मदरसा संचालकों की आपत्तियों का समाधान किस तरह किया जाता है।

CM धामी ने लॉन्च किया ‘मनोरमा कृषि रक्षक’ ऐप, AI बताएगा फसल की बीमारी, मौसम का मिलेगा अलर्ट

बिल्कुल। आपकी दी गई जानकारी को मैगज़ीन के लिए समाचार-आधारित, प्रभावी और सहज भाषा में इस तरह प्रस्तुत किया जा सकता है मनोरमा कृषि रक्षक: मोबाइल ऐप से किसानों को मौसम, बीमारी और बाजार की जानकारी देहरादून  खेती-किसानी में मौसम की अनिश्चितता, फसलों में होने वाली बीमारियां और बाजार भाव की सही जानकारी का अभाव किसानों के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। इन समस्याओं को डिजिटल तकनीक के माध्यम से आसान बनाने की दिशा में ‘मनोरमा कृषि रक्षक’ मोबाइल ऐप एक नई पहल के रूप में सामने आया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में इस ऐप को लॉन्च किया। ऐप को मनोरमा डबराल जन कल्याण समिति ने विकसित किया है। ‘मनोरमा कृषि रक्षक’ का उद्देश्य किसानों को फसल तैयार करने से लेकर उसे बाजार तक पहुंचाने की प्रक्रिया में डिजिटल माध्यम से जरूरी जानकारी और सहयोग उपलब्ध कराना है। ऐप में मौसम, फसल स्वास्थ्य, कृषि सलाह, बाजार और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी सुविधाओं को एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है। मौसम में बदलाव पर मिलेगा रियल टाइम अलर्ट खेती में मौसम की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। मौसम में अचानक होने वाला बदलाव कई बार किसानों के लिए नुकसान का कारण बन जाता है। ऐसे में ऐप के जरिए किसानों को रियल टाइम मौसम की जानकारी और अलर्ट उपलब्ध कराने की सुविधा दी गई है। मौसम के पूर्वानुमान और बदलाव की जानकारी के आधार पर किसान सिंचाई, फसल सुरक्षा और अन्य कृषि संबंधी फैसले अधिक बेहतर तरीके से ले सकेंगे। फोटो से फसल की बीमारी पहचानने में मदद ऐप की प्रमुख विशेषताओं में एआई आधारित फसल रोग पहचान सुविधा भी शामिल है। फसल में बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर किसान फोटो के माध्यम से समस्या की पहचान में मदद ले सकेंगे। शुरुआती स्तर पर बीमारी की जानकारी मिलने से किसान समय रहते उचित कृषि सलाह लेने और फसल को संभावित नुकसान से बचाने की दिशा में कदम उठा सकते हैं। इसके साथ ही अलग-अलग फसलों के लिए फसल-विशिष्ट कृषि सलाह उपलब्ध कराने का भी प्रयास किया गया है, जिससे किसानों को उनकी फसल के अनुरूप उपयोगी जानकारी मिल सके। बाजार भाव और लॉजिस्टिक्स की जानकारी भी किसान के लिए उत्पादन के साथ-साथ उपज को उचित बाजार तक पहुंचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। ‘मनोरमा कृषि रक्षक’ में कृषि और बाजार से संबंधित जानकारी के साथ परिवहन और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं। इसका उद्देश्य किसान को खेत से बाजार तक की पूरी प्रक्रिया में डिजिटल सहयोग उपलब्ध कराना है। स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमों को भी लाभ ऐप का दायरा केवल व्यक्तिगत किसानों तक सीमित नहीं रखा गया है। स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमों को बाजार से जोड़ने से संबंधित सुविधाएं भी इसमें शामिल की गई हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में तैयार होने वाले उत्पादों को संभावित बाजार तक पहुंचाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा सकेगा। आधुनिक तकनीक से किसानों को मिलेगी आसानी: धामी ऐप लॉन्च के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे किसानों और स्वयं सहायता समूहों के लिए उपयोगी पहल बताया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक का बेहतर इस्तेमाल कर किसानों को कृषि से जुड़ी आवश्यक जानकारियां और सेवाएं आसानी से उपलब्ध कराई जा सकती हैं। मुख्यमंत्री ने इस पहल के लिए संस्था को शुभकामनाएं भी दीं। ‘मनोरमा कृषि रक्षक’ जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म खेती को केवल उत्पादन की प्रक्रिया तक सीमित रखने के बजाय मौसम की जानकारी, फसल स्वास्थ्य, कृषि सलाह, बाजार और लॉजिस्टिक्स को एक साथ जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकते हैं। इससे तकनीक और खेती के बीच की दूरी कम करने में मदद मिल सकती है और किसानों को समय पर सही जानकारी उपलब्ध कराने की दिशा में नई संभावनाएं खुल सकती हैं।अगर आप चाहें तो मैं इसी के लिए मैगज़ीन कवर स्टोरी के अनुरूप 5 दमदार हेडलाइन और सबहेडिंग भी बना सकता हूं।

शिक्षक दिवस पर PM मोदी की गुरुओं से अपील, ‘बच्चों का बचपन बचाइए, उनकी प्रतिभा पहचानिए’

नईदिल्ली  क्लास में बैठा बच्चा सिर्फ किताबों के पन्ने नहीं पढ़ रहा होता. उसके आसपास की दुनिया भी उसे हर दिन कुछ न कुछ सिखा रही होती है. कभी मोबाइल की स्क्रीन उसे अपनी तरफ खींचती है. कभी दोस्तों का असर पड़ता है. कभी पढ़ाई का दबाव परेशान करता है. ऐसे में बच्चे के साथ सबसे ज्यादा वक्त बिताने वाले लोगों में शिक्षक भी शामिल हैं. शिक्षक दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी भूमिका की याद शिक्षकों को दिलाई. उन्होंने कहा कि बच्चों का बचपन बचाना भी शिक्षकों की बड़ी जिम्मेदारी है. प्रधानमंत्री ने नेशनल टीचर्स अवॉर्ड पाने वाले 82 शिक्षकों और एजुकेटर्स से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने सिर्फ पढ़ाई और परीक्षा के नंबरों की बात नहीं की. उन्होंने बच्चों के व्यवहार, उनकी आदतों और रोजमर्रा की जिंदगी पर भी नजर रखने की जरूरत बताई।  पीएम मोदी ने शिक्षकों से कहा कि बच्चा पढ़ाई में कैसा कर रहा है, यह जरूरी है. लेकिन उससे भी जरूरी यह समझना है कि वह सामान्य जिंदगी में कैसा व्यवहार कर रहा है. उसके स्वभाव में अचानक कोई बदलाव तो नहीं आया. वह दोस्तों से दूर तो नहीं हो रहा. वह देर रात तक मोबाइल तो नहीं चला रहा. कहीं नशे जैसी किसी बुरी आदत की तरफ तो नहीं बढ़ रहा. प्रधानमंत्री ने शिक्षकों से कहा कि ऐसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. बच्चे के व्यवहार में बदलाव दिखे तो उसकी वजह समझने की कोशिश करनी चाहिए. जरूरत पड़े तो माता-पिता से बात करनी चाहिए और बच्चे को सही रास्ते पर लाने में मदद करनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि संयुक्त परिवार कम होने के दौर में बच्चों की जिंदगी में शिक्षक की भूमिका और ज्यादा बढ़ गई है।  स्क्रीन टाइम पर पीएम मोदी की चिंता प्रधानमंत्री ने कहा कि बच्चों को सिर्फ सिलेबस पूरा कराने तक शिक्षक की भूमिका सीमित नहीं होनी चाहिए. बच्चा सवाल पूछता है तो उसकी जिज्ञासा को दबाने के बजाय उसे सही दिशा देनी चाहिए. उन्होंने शिक्षकों से कहा कि बच्चों की स्वाभाविक जिज्ञासा ही उनके सीखने की सबसे बड़ी ताकत हो सकती है. अगर बच्चा कुछ नया जानना चाहता है, अलग सवाल पूछता है या चीजों को अपने तरीके से समझना चाहता है तो उसे रोकने के बजाय प्रोत्साहित किया जाना चाहिए. पीएम मोदी ने यह भी जोर दिया कि पढ़ाई सिर्फ किताबों और क्लासरूम तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. बच्चों को वास्तविक दुनिया से जोड़ना जरूरी है।  स्क्रीन टाइम भी प्रधानमंत्री की चिंता का एक बड़ा मुद्दा रहा. उन्होंने शिक्षकों से कहा कि वे माता-पिता से बातचीत करें और यह समझें कि बच्चा मोबाइल या दूसरी स्क्रीन पर कितना समय बिता रहा है. खास तौर पर यह देखना जरूरी है कि बच्चे देर रात तक मोबाइल का इस्तेमाल तो नहीं कर रहे. ज्यादा स्क्रीन टाइम से बच्चों को निकालने के लिए उन्हें खेल, शारीरिक गतिविधियों और रचनात्मक कामों से जोड़ने की सलाह दी गई. पीएम मोदी ने शिक्षकों से कहा कि बच्चों को सिर्फ पढ़ाई में व्यस्त रखने के बजाय उनकी पूरी दिनचर्या और विकास पर ध्यान देना जरूरी है।  नशे की लत से बच्चों को बचाने की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री ने नशे की लत को लेकर भी शिक्षकों को सतर्क रहने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि अगर किसी बच्चे के व्यवहार में अचानक बदलाव नजर आता है तो शिक्षक उसे सिर्फ अनुशासन की समस्या मानकर छोड़ न दें. उसके पीछे की वजह जानने की कोशिश होनी चाहिए. शिक्षक बच्चे और उसके परिवार के बीच संवाद का पुल बन सकते हैं।  स्क्रीन टाइम पर भी रखें नजर मोबाइल और स्क्रीन आज बच्चों की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं. ऐसे में पीएम मोदी ने शिक्षकों से माता-पिता के साथ मिलकर इस पर नजर रखने को कहा. बच्चों को मोबाइल से दूर करने के लिए सिर्फ रोक-टोक पर्याप्त नहीं है. उन्हें खेल, शारीरिक गतिविधियों और क्रिएटिव कामों के विकल्प देने होंगे. इससे उनका समय भी बेहतर तरीके से इस्तेमाल होगा और उनका विकास भी होगा।  क्लासरूम से बाहर भी हो बच्चों की पढ़ाई पीएम मोदी ने कहा कि पढ़ाई सिर्फ क्लासरूम तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. बच्चों को वास्तविक दुनिया दिखानी चाहिए. उन्हें कामकाज की प्रक्रिया समझानी चाहिए. इससे किताबों में पढ़ी चीजों को जिंदगी से जोड़ना आसान होगा. प्रधानमंत्री ने शिक्षकों से बच्चों में ‘श्रम की गरिमा’ जैसे संस्कार विकसित करने पर भी जोर दिया।  82 शिक्षकों को मिला नेशनल टीचर्स अवॉर्ड इस साल 82 शिक्षकों और एजुकेटर्स को नेशनल टीचर्स अवॉर्ड के लिए चुना गया है. इनमें 48 स्कूल शिक्षक, 21 उच्च शिक्षा संस्थानों और पॉलिटेक्निक के शिक्षक और 13 स्किल ट्रेनर शामिल हैं. अवॉर्ड पाने वाले शिक्षकों ने प्रधानमंत्री के साथ अपने अनुभव भी साझा किए. उन्होंने क्लासरूम में किए गए नए और रचनात्मक प्रयोगों के बारे में बताया।  कुल मिलाकर प्रधानमंत्री का संदेश सिर्फ शिक्षकों के लिए नहीं, बल्कि स्कूल, परिवार और समाज तीनों के लिए था. बच्चे के विकास का मतलब सिर्फ अच्छे नंबर नहीं हैं. उसका व्यवहार, उसकी आदतें, उसकी जिज्ञासा और उसका आत्मविश्वास भी उतना ही जरूरी है. ऐसे समय में शिक्षक की भूमिका और बड़ी हो जाती है. क्योंकि कई बार बच्चा अपनी परेशानी घर पर नहीं बता पाता, लेकिन उसके व्यवहार में बदलाव क्लास में सबसे पहले नजर आ सकता है. यही वजह है कि पीएम मोदी ने शिक्षकों से बच्चों का बचपन बचाने और उन्हें सही दिशा देने को अपनी जिम्मेदारी का अहम हिस्सा मानने की अपील की।   

नेपाल त्रासदी में नहीं थम रही मौतों की संख्या, अब तक 1,344 लोगों की मौत

काठमांडू  नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है. अब तक 1,344लोगों की जान जा चुकी है और 5053 लोग लापता हैं. 32963 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं और 7570 घरों को नुकसान पहुंचा है। नेपाल पुलिस के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, बाढ़ में अब तक 1,344 लोगों की जान जा चुकी है. पिछले हफ्ते आई फ्लैश फ्लड ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई गांवों और कस्बों को बुरी तरह प्रभावित किया. कई इलाकों में अब भी मलबे और कीचड़ के बीच लोगों की तलाश जारी है।  मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटी NDRF तबाही के बीच सबसे बड़ी चुनौती उन लोगों को ढूंढना है, जो अभी भी मलबे और कीचड़ के नीचे फंसे हो सकते हैं. इसी को देखते हुए भारत ने 11 सदस्यीय  NDRF तकनीकी टीम नेपाल भेजी है. यह टीम स्थानीय बचाव दलों के साथ मिलकर उन जगहों पर तलाशी अभियान चला रही है, जहां लोगों के दबे होने की आशंका है।  नेपाल के दार्चुला में भूस्खलन से नदी का रास्ता बंद, निचले इलाकों में अलर्ट नेपाल के दार्चुला जिले में शुक्रवार को भारी भूस्खलन के बाद चौलानी नदी का प्रवाह बाधित हो गया। नदी का रास्ता बंद होने से आसपास के क्षेत्रों में खतरा बढ़ गया है। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने निचले इलाकों में अलर्ट जारी किया है। लोगों को नदी के आसपास और निचले क्षेत्रों में सतर्क रहने की सलाह दी गई है। चिलिमे सुरंग में भारतीय टीम क्या कर रही है? भारतीय सुरंग बचाव दल ने शुक्रवार को चिलिमे सुरंग के अंदर अभियान चलाया। टीम का प्रयास सुरंग के पानी और मलबे से प्रभावित हिस्सों तक पहुंचने और वहां फंसे लोगों की तलाश करने का है। भारी उपकरणों को सुरंग तक पहुंचाने और बचाव अभियान को गति देने के लिए एक अस्थायी ट्रैक भी तैयार किया जा रहा है। टीम ने सुरंग के भीतर सुरक्षा रस्सियां लगाई हैं, जबकि पानी और मलबे से बाधित हिस्सों में फ्लोट और पंप भी तैनात किए जा रहे हैं। रसुवा जिले के स्याब्रुबेसी गांव के पास स्थित चिलिमे जलविद्युत परियोजना का इलाका बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुआ था। सुरंग के कई हिस्से पानी और मलबे से बाधित हो गए थे, जिसके कारण वहां पहुंचना चुनौतीपूर्ण बना हुआ था। अब भारतीय टीम सुरंग के अंदर आगे बढ़कर प्रभावित हिस्सों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, ताकि खोज और बचाव अभियान को और प्रभावी बनाया जा सके।  चिलिमे सुरंग में फंसे लोगों के लिए बचाव अभियान, भारतीय टीम जुटी; मृतकों का आंकड़ा 1344 पहुंचा नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। भारतीय बचाव दल नेपाली अधिकारियों के साथ मिलकर प्रभावित इलाकों में खोज, बचाव और राहत कार्यों में जुटा है। इसी क्रम में विशेष भारतीय सुरंग बचाव टीम ने चिलिमे सुरंग में अभियान तेज कर दिया है। वहीं शुक्रवार को नेपाल सरकार ने एक रिपोर्ट जारी की जिसमें बताया गया कि बाढ़ से 32 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। इससे सड़कें, पुल, स्कूल और स्वास्थ्य केंद्रों को नुकसान पहुंचा है। सरकार की शुरुआती रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। वहीं इस त्रासदी में मरने वालों की संख्या शुक्रवार को बढ़कर 1344 हो गई। प्रभावित इलाकों से और शव मिलने के बाद मृतकों की संख्या बढ़ी है।   कहां से कितने लोगों की हो चुकी है मौत कुल मौत – 1,344     रसुवा: 140     नुवाकोट: 184     धादिंग: 67     गोरखा: 73     तनहुं: 38     नवलपरासी पूर्व: 221     नवलपरासी पश्चिम: 212     चितवन: 359     (विभिन्न मानव अंगों सहित)     शिनाख्त कर सौंपे गए शवों की संख्या: 96     घायलों की संख्या: 5,663     लापता लोगों की संख्या: 5,053     बचाए गए लोगों की संख्या: 13,095 7570 घरों को हुआ नुकसान     निजी घर: कुल 7570     सरकारी संरचना: कुल 48 (35 पूर्ण क्षति, 13 आंशिक क्षति)     विद्यालय: कुल 18 (11 पूर्ण क्षति, 7 आंशिक क्षति)     स्वास्थ्य संस्था: कुल 7 (4 पूर्ण क्षति, 3 आंशिक क्षति)     सड़क: 55 किलोमीटर पूर्ण क्षति पुल: कुल मोटरेबल 37 (33 पूर्ण क्षति) और 68 झोलुंगे (झूला) पुल 26 अगस्त को आई थी विनाशकारी बाढ़ नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को बर्फ और चट्टानों के हिमस्खलन से अचानक आई बाढ़ ने उत्तर और मध्य नेपाल के कस्बों और गांवों में भारी तबाही मचाई और व्यापक स्तर पर नुकसान हुआ। 

MP समेत 7 राज्यों में न्यायिक अधिकारियों को राहत, रिटायरमेंट उम्र 60 से बढ़कर 62 साल

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों की रिटायरमेंट उम्र 60 से बढ़ाकर 62 साल करने का आदेश दिया है। यह आदेश मध्यप्रदेश समेत सात राज्यों में लागू होगा। राज्यों को जल्द से जल्द, संभव हो तो दो महीने के भीतर सेवा नियमों में बदलाव करना होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियमों में बदलाव होने तक 60 साल की उम्र पूरी करने वाला कोई न्यायिक अधिकारी रिटायर नहीं होगा। हालांकि, इसके लिए संबंधित हाई कोर्ट की ओर से अधिकारी को सेवा के लिए उपयुक्त पाया जाना जरूरी होगा। आदेश का लाभ पहले रिटायर हो चुके न्यायिक अधिकारियों को भी मिलेगा। 31 मार्च 2026 या उसके बाद रिटायर हुए न्यायिक अधिकारी दोबारा सेवा में आने का विकल्प चुन सकेंगे। इसके लिए जरूरी होगा कि उन्होंने रिटायरमेंट के बाद कोई दूसरी नौकरी न ली हो। 60 साल की उम्र पूरी होने पर संबंधित हाई कोर्ट उनके कामकाज, योग्यता और प्रदर्शन का आकलन करेगा। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने यह आदेश मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, महाराष्ट्र, सिक्किम, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के लिए जारी किया है। कोर्ट ने कहा कि अनुभवी न्यायिक अधिकारियों को सेवा में बनाए रखने से न्यायपालिका में खाली पदों के कारण पड़ने वाले असर को कम करने में मदद मिलेगी।