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आर्मी चीफ का बड़ा बयान: जम्मू-कश्मीर में बदले हालात, 31 आतंकियों का सफाया

नई दिल्ली भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में स्थिति संवेदनशील है लेकिन पूरी तरह नियंत्रण में है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में यहां 31 आतंकवादी मारे गए, जिनमें से 65 प्रतिशत पाकिस्तानी मूल के आतंकी थे। यहां मारे गए आतंकियों में पहलगाम हमले के तीनों मुख्य अपराधी भी शामिल हैं। ये आतंकी जम्मू कश्मीर में शुरू किए गए ऑपरेशन ‘महादेव’ में मारे गए थे। मंगलवार को दिल्ली में एक वार्षिक प्रेसवार्ता में जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बताया कि जम्मू कश्मीर में अब स्थानीय सक्रिय आतंकवादी न के बराबर है। उन्होंने बताया कि इनकी संख्या अब एकल अंक (सिंगल डिजिट) में रह गई है। यहां आतंकवादी भर्ती लगभग समाप्त हो चुकी है। सेनाध्यक्ष ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में सकारात्मक बदलाव के ये स्पष्ट संकेत मिलते हैं। जम्मू कश्मीर में विकास गतिविधियां, पर्यटन का फिर से शुरू होना और शांतिपूर्ण श्री अमरनाथ यात्रा मजबूत सकारात्मक बदलावों को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि श्री अमरनाथ यात्रा में इस वर्ष 4 लाख से ज्यादा तीर्थयात्री आए। जम्मू कश्मीर में टेररिज्म टू टूरिज्म की थीम धीरे-धीरे आकार ले रही है। सेनाध्यक्ष ने यहां पूर्वोत्तर में, विशेष रूप से मणिपुर का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों की निष्पक्ष, पारदर्शी और निर्णायक कार्रवाई तथा सरकार की सक्रिय पहलों के कारण वर्ष 2025 में स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। पूर्वोत्तर की प्रमुख उपलब्धियों में शांतिपूर्ण डुरंड कप का आयोजन शामिल हैं। यहां सामाजिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों जैसे कि शिरुई लिली और संगाई जैसे सांस्कृतिक उत्सवों की वापसी हुई। सितंबर 2025 में उग्रवादी समूहों के साथ सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (एसओओ) का नवीनीकरण किया गया। सेनाध्यक्ष ने बताया कि म्यांमार में अस्थिरता के मद्देनजर, असम राइफल्स, भारतीय सेना और गृह मंत्रालय के समन्वय से एक व्यापक बहु-एजेंसी सुरक्षा तंत्र स्थापित किया गया है। यह तंत्र इसलिए है ताकि पूर्वोत्तर को किसी भी प्रकार के सीमा-पार प्रभाव से सुरक्षित रखा जा सके। म्यांमार में चुनावों के सफल आयोजन के बाद आपसी सहयोग और प्रभावी होने की संभावना जताई गई। थल सेनाध्यक्ष ने बताया कि भारतीय सेना ने वर्ष 2025 में दो पड़ोसी देशों और देश के 10 राज्यों में मानवीय सहायता एवं आपदा राहत अभियानों को अंजाम दिया। इन अभियानों में 30,000 से अधिक लोगों को बचाया गया। वहीं पंजाब में बाढ़ के दौरान पटियाला में ढहती इमारत से सीआरपीएफ कर्मियों को सेना के हेलीकॉप्टर द्वारा बचाने की साहसिक कार्रवाई का विशेष उल्लेख किया गया। इस कार्रवाई ने सेना की त्वरित प्रतिक्रिया और मानवीय प्रतिबद्धता को दर्शाया। भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि म्यांमार में जारी अस्थिरता के मद्देनजर भारत ने पूर्वोत्तर को किसी भी दुष्प्रभाव से सुरक्षित रखने के लिए यह व्यापक बहु-एजेंसी सुरक्षा ग्रिड स्थापित किया है। इसमें असम राइफल्स, भारतीय सेना और गृह मंत्रालय मिलकर कार्य कर रहे हैं। म्यांमार में दूसरे चरण के चुनावों के सफल आयोजन के बाद अब दोनों देशों के बीच सहयोग और समन्वय को और प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जा सकेगा। जनरल द्विवेदी ने कहा कि कई सीमावर्ती राज्यों में सेना ने औपचारिक अनुरोध मिलने से पहले ही राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि यह तथ्य इस बात की पुष्टि करता है कि भारतीय सेना आपदा के समय ‘नेचुरल फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ की भूमिका निभाती है। थल सेनाध्यक्ष ने कहा कि चाहे वह सीमा-पार अस्थिरता हो या प्राकृतिक आपदाएं, भारतीय सेना हर परिस्थिति में राष्ट्र की सुरक्षा और नागरिकों की सहायता के लिए तत्पर रहती है।

क्या भारत ने ईरान में अशांति के चलते अफगानिस्तान के साथ व्यापार बंद कर दिया? सच्चाई विस्तार से

ईरान सरकार ने ईरान में अशांति के कारण भारत के अफगानिस्तान के साथ व्यापारिक संबंध निलंबित करने के दावों को मंगलवार को खारिज कर दिया। पाकिस्तानी सोशल मीडिया पर ऐसी खबरें फैलाई जा रही हैं कि ईरान में अशांति के कारण भारत ने अफगानिस्तान के साथ व्यापारिक संबंध निलंबित कर दिए हैं। सरकार ने कहा कि ये खबरें पूरी तरह झूठी हैं। इस संबंध में पाकिस्तान के दुष्प्रचार करने वाले कुछ खाते मनगढ़ंत पत्र प्रसारित कर रहे हैं। ईरान में व्यापक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। पीआईबी फैक्ट चेक ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘पाकिस्तानी दुष्प्रचार खातों की ओर से मनगढ़ंत पत्र प्रसारित किया जा रहा है, जिसमें झूठा दावा किया गया है कि ईरान में बढ़ती अशांति के कारण भारत ने अफगानिस्तान के साथ व्यापारिक संबंध अस्थायी रूप से निलंबित कर दिए हैं।’ वित्त वर्ष 2024-25 में अफगानिस्तान को भारत का निर्यात 31.891 करोड़ अमेरिकी डॉलर रहा जबकि आयात 68.981 करोड़ अमेरिकी डॉलर था। विदेश मंत्रालय के अधिकारी से अहम मुलाकात इस बीच, नई दिल्ली स्थित अफगान दूतावास के नए प्रभारी ने सोमवार को विदेश मंत्रालय के सीनियर अधिकारी के साथ बैठक की। इस मुलाकात का मुख्य विषय दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को मजबूत करना था। नूर अहमद नूर अगस्त 2021 में काबुल की सत्ता पर तालिबान के काबिज होने के बाद भारत में अफगान दूतावास में नियुक्त होने वाले पहले वरिष्ठ अधिकारी हैं। प्रभारी ने विदेश मंत्रालय के अधिकारी आनंद प्रकाश से मुलाकात की, जो मुख्य रूप से व्यापार के विस्तार और वीजा प्रक्रियाओं को सुगम बनाने जैसे मुद्दों पर केंद्रित रही। अफगान दूतावास ने सोशल मीडिया पर इस बैठक का विवरण साझा करते हुए बताया कि दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय राजनीतिक और आर्थिक संबंधों, व्यापार विस्तार, वीजा प्रक्रियाओं में सुगमता और भारत में रह रहे अफगान व्यापारियों, छात्रों और नागरिकों की समस्याओं पर विस्तृत चर्चा की।

भारत में प्रत्यक्ष कर संग्रह में बढ़ोतरी, FY26 में अब तक 8.8% की तेजी

नई दिल्ली  आयकर विभाग ने सोमवार को बताया कि देश का शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह एक अप्रैल से 11 जनवरी तक की अवधि में सालाना आधार पर पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 8.8 प्रतिशत बढ़कर 18.37 लाख करोड़ रुपए हो गया है। वित्त वर्ष 25 की समान अवधि में शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 16.88 लाख करोड़ रुपए रहा था।आयकर विभाग की ओर से जारी प्रेस रिलीज में बताया गया कि समीक्षा अवधि में शुद्ध कॉरपोरेट कर संग्रह 8.63 लाख करोड़ रुपए रहा है। वहीं, शुद्ध व्यक्तिगत कर संग्रह 9.29 लाख करोड़ रुपए रहा है। सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) संग्रह 44,866.52 करोड़ रुपए रहा है। इसके साथ सरकार ने अन्य टैक्स के रूप में 321.23 रुपए एकत्रित किए हैं। आयकर विभाग ने कहा कि समीक्षा अवधि में 3.11 लाख करोड़ रुपए का रिफंड जारी किया गया है, इसमें पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 16.92 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इसमें से सरकार ने 1.83 लाख करोड़ रुपए का रिफंड कॉरपोरेट्स को, जबकि व्यक्तिगत करदाताओं को 1.28 लाख करोड़ रुपए का रिफंड जारी किया गया है। वित्त वर्ष 25 की समान अवधि में यह आंकड़ा 3.75 लाख करोड़ रुपए था। अगर रिफंड को मिला दिया जाए तो सकल कर संग्रह एक अप्रैल से 11 जनवरी की अवधि में सालाना आधार पर 4.14 प्रतिशत बढ़कर 21.49 लाख करोड़ रुपए हो गया है। इसमें से सकल कॉरपोरेट कर संग्रह 10.46 लाख करोड़ रुपए और सकल व्यक्तिगत कर संग्रह 10.58 लाख करोड़ रुपए रहा है। भारत में कर संग्रह मजबूत रहने की वजह देश की अर्थव्यवस्था का तेजी से बढ़ना है। मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2026 के लिए रियल जीडीपी वृद्धि 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है, जो कि एनएसओ के पहले अग्रिम अनुमान 7.4 प्रतिशत से अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 के लिए बाजार का औसत अनुमान 7.5 प्रतिशत है, जबकि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) का अनुमान 7.3 प्रतिशत है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारी खर्च और मौद्रिक नीति के समर्थन, लोगों की खरीदारी की क्षमता में सुधार और रोजगार की बेहतर स्थिति के चलते उपभोग यानी खपत में बढ़ोतरी होगी, जिससे आर्थिक सुधार को और मजबूती मिलेगी।

ट्रंप के तेवरों से भड़का मिडिल-ईस्ट, ईरान की चेतावनी के बीच इजरायल युद्ध तैयारी में

ईरान ईरान में बीते कुछ सप्ताह से जारी हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हस्तक्षेप करने की धमकी देकर पूरी दुनिया में खलबली मचा दी है। वहीं अमेरिका के किसी भी हमले को लेकर ईरान ने करारा जवाब देने की कसम खाई है। ऐसे में वैश्विक स्तर पर एक और जंग की आहट साफ सुनाई देने लगी है। इस बीच इजरायल ने ईरान के साथ किसी भी जंग को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसे लेकर इजरायल के उच्च अधिकारियों के बीच बैठकों का दौर शुरू हो गया है।   इजरायली सेना ने सोमवार को इस मामले की जानकारी देते हुए कहा कि सेना संभावित रूप से किसी भी स्थिति के लिए अलर्ट पर है। IDF के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफ्रिन ने सोमवार को पर एक बयान में कहा, “ईरान में विरोध प्रदर्शन एक आंतरिक मामला है लेकिन IDF रक्षात्मक रूप से तैयार है और नियमित रूप से स्थिति का आकलन कर रहा है।” बेंजामिन नेतन्याहू ने बुलाई बैठक इस बीच कान पब्लिक ब्रॉडकास्टर के मुताबिक, इजरायली अधिकारियों का मानना ​​है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड हमले की अपनी धमकियों को पूरा जरूर करेंगे और इससे इजरायल और ईरान के बीच एक और युद्ध होने वाले वाला है। इसे लेकर इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को पूर्व रणनीतिक मामलों के मंत्री रॉन डर्मर को वरिष्ठ मंत्रियों और सुरक्षा अधिकारियों के साथ एक बैठक के लिए भी बुलाया था। डोनाल्ड ट्रंप की धमकी इससे पहले ट्रंप अब तक कई बार ईरान में हस्तक्षेप की धमकी दे चुके हैं। वाइट हाउस से जुड़े सूत्रों ने बताया है कि राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम ईरान के खिलाफ संभावित कदम पर विचार कर रही है, जिनमें साइबर हमले और अमेरिका या इजरायल द्वारा सीधा सैन्य हमला शामिल है। ट्रंप ने सोमवार को कहा है कि ईरान पर हमले की उनकी चेतावनी के बाद अब ईरानी सरकार उनके साथ बातचीत करना चाहता है। वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने तेहरान में विदेशी राजनयिकों से बातचीत के दौरान कहा है कि स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है। हालांकि, अराघची ने अपने आरोप के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा है कि विरोध-प्रदर्शन के दौरान हिंसा और खूनखराबा इसलिए हुआ, ताकि अमेरिकी राष्ट्रपति को हस्तक्षेप करने का बहाना मिल सके। हालांकि अराघची ने यह भी कहा कि ईरान कूटनीति का स्वागत करता है। ईरान में बिगड़े हालात इस बीच ईरान में सोमवार को सरकार के खिलाफ प्रदर्शन में लाखों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे। मानवाधिकार समूहों के मुताबिक हिंसा के अब तक करीब 600 लोगों की मौत हो गई है। ईरान के सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित वीडियो में प्रदर्शनकारी ‘अमेरिका मुर्दाबाद’, ‘इजराइल मुर्दाबाद’ और ‘अल्लाह के दुश्मनों का अंत हो’ जैसे नारे लगाते दिखे।

पत्थर मारकर कुत्ते को बनाया गया हिंसक! सुप्रीम कोर्ट में पीड़िता ने रखा सच

नई दिल्ली   स्ट्रे डॉग्स को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आखिरी सुनवाई जारी है। मंगलवार को अदालत में कुत्ते के काटने का शिकार हुई एक महिला भी पहुंचीं, जिन्होंने जानवरों के हमले का बचाव किया। उन्होंने कहा कि कुत्ते के साथ बुरी तरह से क्रूरता की गई थी, जिसके चलते उसने हमला किया। साथ ही उन्होंने डॉग्स को काबू करने के उपाय भी सुझाए हैं।   सुनवाई के दौरान कोर्ट पहुंचीं पीड़ित महिला ने कहा कि उन्हें भी कुत्ते ने काट लिया था। उन्होंने बताया कि इसके बाद वह इस हमले की वजह का पता करने निकल गईं थीं। बार एंड बेंच के अनुसार, महिला ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, 'मैं मानती हूं कि उचित तरीके से ABC लागू करने से कुत्तों की आबादी और आक्रामकता कम होगी। मुझे एक कुत्ते ने काट लिया था। मैं जानना चाहती थी कि आखिर कुत्ते ने मुझे बगैर किसी उकसावे के क्यों काटा। उस कुत्ते के साथ लंबे समय से क्रूरता की जा रही थी। लातें मारी जा रही थीं, पत्थर मारे जा रहे थे आदि।' उन्होंने आगे कहा, 'उसे डर के जवाब में बचाव वाली आक्रामकता दिखाई। मैंने किसी और की हरकतों के कारण ये झेला। एक कुत्ते में आक्रामकता कैसे आती है। एक मिलनसार कुत्ते के साथ क्रूरता करने से उसके मन में डर पैदा होता है। डर बचाव में आक्रामकता को जन्म देता है।' 8 जनवरी को हुई सुनवाई में अदालत ने एबीसी नियमों को ठीक से लागू नहीं किए जाने का मुद्दा उठाया था। शीर्ष न्यायालय ने कहा था कि उसकी तरफ से सभी स्ट्रीट डॉग्स को हटाए जाने के निर्देश नहीं दिए गए हैं, बल्कि एबीसी नियमों के तहत इससे निपटने की बात कही गई है। पशु प्रेमियों और जानवरों के हितों के लिए काम करने वालों की तरफ से कोर्ट में सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी पेश हुए थे।  

SC में कानून पर तीखी नाराज़गी: ‘यह भ्रष्टाचार को संरक्षण देता है’, CJI तक पहुंचा विवाद

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को भ्रष्टाचार रोधी कानून पर एक लंबी और दिलचस्प बहस देखने को मिली। इस दौरान जस्टिस बीवी नागरत्ना ने भ्रष्टाचार रोधी अधिनियम की धारा 17ए को रद्द करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि यह धारा असंवैधानिक है, इसे निरस्त किए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि किसी भी करप्शन के मामले में अथॉरिटी से मंजूरी लेने की बाध्यता भ्रष्ट अधिकारियों को बचाने वाली है। ऐसी स्थिति में इस सेक्शन को रद्द किया जाना चाहिए। इससे भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई करने में देरी होती है। ऐसी स्थिति ठीक नहीं है। हालांकि इस मामले की सुनवाई में बेंच ही बंटी नजर आई।   बेंच में शामिल दूसरे जज केवी विश्वनाथन ने कहा कि प्रिवेंशन ऑफ करप्शन ऐक्ट की धारा 17A जरूरी है। इससे ईमानदार अधिकारियों को बचाने में मदद मिलती है। इस तरह बेंच का फैसला बंटा हुआ आया। अब इस मामले को चीफ जस्टिस सूर्यकांत के समक्ष रखा जाएगा। वह इस केस की सुनवाई के लिए एक बड़ी बेंच का गठन करेंगे। उस बेंच की ओर से आने वाला फैसला ही इस केस में अंतिम होगा। यह बेंच दो ही जजों की थी और उनकी राय अलग होने पर कोई अंतिम फैसला नहीं आ सका। ऐसी स्थिति में अब बड़ी बेंच का गठन होना है। कब जोड़ी गई थी करप्शन ऐक्ट में यह धारा, जिस पर सवाल दरअसल भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम, 1988 में नई धारा 17A को 2018 में जोड़ा गया था। तब यह बताया गया था कि इसका उद्देश्य है कि अनावश्यक मामलों को रोका जाए और ईमानदार अधिकारियों को बेवजह कानूनी मसलों में फंसने से बचाया जाए। इसे ईमानदार अधिकारियों के लिए एक सुरक्षा कवच बताया गया था। हालांकि अब इस धारा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की ओर से इस केस में अंतिम फैसला क्या आता है। इस पर सभी की नजर रहेगी। बता दें कि जस्टिस बीवी नागरत्ना ने सुनवाई के दौरान बेहद सख्त लहजे में कहा कि यह सेक्शन ही असंवैधानिक है और इसे निरस्त किए जाने की जरूरत है।  

आर्मी चीफ की हुंकार: PAK के 8 कैंपों पर सेना की नजर, संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत एक्शन होगा

 नई दिल्ली भारतीय सेना के प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 13 जनवरी 2026 दोपहर 12 बजे से मानेकशॉ सेंटर में वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इसमें उन्होंने कहा कि IB और LC के सामने 8 आतंकी कैंप हैं. जिसमें ट्रेनिंग जैसी गतिविधि चल रही है. सेना की नजर है. अगर एक गलती की तो तुरंत सख्त एक्शन लिया जाएगा.  यह प्रेस कॉन्फ्रेंस आर्मी डे (15 जनवरी) से पहले हुई, जिसमें उन्होंने देश की सुरक्षा स्थिति, सीमाओं पर हालात, आधुनिकीकरण और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से बात की.  उत्तरी सीमाओं पर स्थिति सेना प्रमुख ने कहा कि उत्तरी सीमाओं (चीन के साथ) पर स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है. उच्च स्तर पर बातचीत से मदद मिल रही है. स्थिति स्थिर है, लेकिन लगातार सतर्क रहने की जरूरत है. सेना की तैनाती संतुलित और मजबूत बनी हुई है. पश्चिमी मोर्चा और ऑपरेशन सिंदूर पहलगाम हमले के बाद 22 मिनट में 'ऑपरेशन रीसेट' रणनीति से कार्रवाई की गई. ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है. पाकिस्तान की कोई भी भविष्य की गलती का सख्त जवाब दिया जाएगा. जम्मू-कश्मीर में स्थिति संवेदनशील है, लेकिन नियंत्रण में है. पाकिस्तान की परमाणु धमकियों को भारत-चीन सीमा पर बेअसर कर दिया गया है. मणिपुर और पूर्वोत्तर की स्थिति मणिपुर में स्थिति स्थिर हो रही है. सुरक्षा बलों और सरकार के समन्वित प्रयासों से सुधार हुआ है. म्यांमार में चुनाव खत्म होने के बाद भारत और म्यांमार की सेनाएं बेहतर तरीके से सहयोग कर सकेंगी. पूर्वोत्तर में कुल मिलाकर हालात सुधर रहे हैं. आधुनिकीकरण पर फोकस सेना का मुख्य ध्यान अब आधुनिकीकरण पर है. जनरल द्विवेदी ने कहा कि उन्नत ब्रह्मोस मिसाइल, बेहतर क्षमता वाले ड्रोन और लॉयटरिंग म्यूनिशन (घूमने वाली मिसाइलें) जल्द आने वाली हैं. 90 प्रतिशत से ज्यादा गोला-बारूद अब स्वदेशी बन रहा है. महिलाओं की भर्ती CMP (कॉमन मेडिकल पैरामेडिकल?) के बाद अब AEC (आर्मी एजुकेशनल कोर) और मेडिकल (नॉन-टेक्निकल) में महिलाओं को सैनिक/अग्निवीर के रूप में भर्ती किया जाएगा. अन्य महत्वपूर्ण बातें सेना 2026 को 'नेटवर्किंग और डेटा सेंट्रिसिटी का वर्ष' घोषित कर चुकी है, जिससे रियल-टाइम निर्णय और युद्ध क्षमता बढ़ेगी. सेना प्रमुख ने जोर दिया कि सेना स्वदेशी तकनीक, संयुक्तता और नवाचार पर काम कर रही है.

ईरान में उथल-पुथल, US ने नागरिकों को निकलने को कहा , मलाला का महिलाओं को समर्थन संदेश

तेहरान   ईरान इस समय गंभीर राजनीतिक उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है. करीब 15 दिनों से देश के अलग-अलग हिस्सों में सरकार विरोधी प्रदर्शन जारी हैं. इन विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत 28 दिसंबर को राजधानी तेहरान से हुई थी, जो देखते ही देखते पूरे देश में फैल गए. ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक शुरुआत में आर्थिक बदहाली, महंगाई और बेरोजगारी को लेकर उठी आवाजें अब व्यापक असंतोष का रूप ले चुकी हैं. एजेंसी का दावा है कि ये प्रदर्शन अब ईरान के 186 शहरों और कस्बों तक पहुंच चुके हैं. अमेरिका में स्थित एक मानवाधिकार संगठन के मुताबिक सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अब तक लगभग 646 लोगों की मौत हो चुकी है, हालांकि इन आंकड़ों की पुष्टि नहीं हो पाई है. इस घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं भी तेज होती जा रही हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि अमेरिका ईरान में हस्तक्षेप के लिए कड़े विकल्पों पर विचार कर रहा है. ट्रंप के बयान के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. वहीं ईरान की ओर से सख्त लेकिन संतुलित रुख सामने आया है. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने कहा है कि ईरान का किसी पर सैन्य कार्रवाई करने का इरादा नहीं है, लेकिन अगर देश पर हमला हुआ तो वह युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है. इससे जुड़ी हुई हर अपडेट हम आपको दे रहे हैं, तो लगातार हमारे साथ बने रहिए.   ईरान में हालात बिगड़े, अमेरिका ने अपने नागरिकों से कहा ‘तुरंत ईरान छोड़ दें’ अमेरिका ने ईरान में चल रहे हालात के बीच अपने नागरिकों से कहा है कि वे देश छोड़ दें. अमेरिका का कहना है कि प्रदर्शन हिंसक भी हो सकते हैं. ऐसे में गिरफ्तारियां और लोगों के घायल होने का खतरा है. सुरक्षा कड़ी कर दी गई है, कई सड़कें बंद हैं, पब्लिक ट्रांसपोर्ट प्रभावित है और इंटरनेट भी कई जगह बंद कर दिया गया है. ईरान सरकार ने मोबाइल, लैंडलाइन और देश के इंटरनेट नेटवर्क पर पाबंदी लगा रखी है और एयरलाइंस ने ईरान आने-जाने वाली उड़ानें रद्द या सीमित कर दी हैं. ऐसे में अमेरिकी वर्चुअल एंबेसी ने अपने नागरिकों को चेतावनी दी है कि इंटरनेट बंद रह सकता है, इसलिए दूसरे तरीके से संपर्क की तैयारी रखें. अगर सुरक्षित हो तो ईरान छोड़कर जमीन के रास्ते आर्मेनिया या तुर्की जाने पर विचार करें. उपद्रव के बीच मलाला यूसुफजई का क्या संदेश नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई ने ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि ये विरोध अचानक नहीं हुए। ईरान में सरकार ने बहुत पहले से ही लड़कियों और महिलाओं की आजादी पर सख्त पाबंदियां लगा रखी हैं। खासकर शिक्षा में उन्हें बहुत कम अधिकार मिलते हैं। उन्होंने कहा, ‘दुनिया की बाकी लड़कियों की तरह ईरानी लड़कियां भी सम्मान और गरिमा के साथ जीना चाहती हैं। वे सिर्फ पढ़ाई नहीं, बल्कि पूरी जिंदगी में अपनी मर्जी से फैसले लेना चाहती हैं।’ मलाला यूसुफजई ने कहा, ‘ईरान के लोग कई सालों से इस अन्याय के खिलाफ बोलते आ रहे हैं। लेकिन अपनी जान जोखिम में डालकर भी उनकी आवाज दबा दी जाती रही है। ये नियम सिर्फ स्कूल तक सीमित नहीं हैं। पूरे समाज में महिलाओं पर अलग तरह के नियंत्रण हैं – जैसे अलग-अलग बैठना, हर समय निगरानी रखना और गलती करने पर सजा मिलना।’ उन्होंने कहा कि इन सबकी वजह से महिलाओं को अपनी पसंद की जिंदगी जीने, फैसले लेने और सुरक्षित महसूस करने का हक नहीं मिल पाता। ईरानी महिलाएं और लड़कियां अब अपनी आवाज सुनाई देने और अपना भविष्य खुद तय करने की मांग कर रही हैं। ट्रंप की प्रेस सेक्रेटरी बोलीं – वे जरूरी समझेंगे, तो भेज देंगे सेना व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक बड़ी खासियत यह है कि वे हमेशा सभी विकल्प खुले रखते हैं. उन्होंने बताया कि हवाई हमले भी उन कई विकल्पों में शामिल हैं, जिन पर अमेरिकी राष्ट्रपति विचार कर सकते हैं. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रंप के लिए कूटनीति हमेशा पहली पसंद रहती है. लेविट के मुताबिक राष्ट्रपति ने पिछली रात कहा था कि ईरानी सरकार सार्वजनिक रूप से जो बयान दे रही है, वह उन संदेशों से अलग हैं, जो अमेरिकी प्रशासन को निजी तौर पर मिल रहे हैं. इसके साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप जरूरत पड़ने पर सैन्य विकल्पों का इस्तेमाल करने से नहीं हिचकते. अगर और जब वे इसे जरूरी समझेंगे, तो सेना का सहारा लेने से पीछे नहीं हटेंगे. लेविट ने कहा कि यह बात ईरान से बेहतर कोई नहीं जानता. ईरानी महिलाओं के समर्थन में क्या कहा मलाला यूसुफजई ने साफ कहा कि वे ईरान की जनता और खासकर लड़कियों के साथ खड़ी हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान का भविष्य ईरान के लोग ही खुद बनाएं और इसमें महिलाओं व लड़कियों की अहम भूमिका हो। कोई बाहर का देश या दमनकारी सरकार इसमें दखल न दे। मालूम हो कि अभी ईरान में महंगाई, बेरोजगारी और महिलाओं के अधिकारों पर रोक के खिलाफ बड़े प्रदर्शन हो रहे हैं। मलाला की यह बात दुनिया भर में ईरानी महिलाओं के संघर्ष को मजबूत समर्थन दे रही है।     तुरंत ईरान छोड़ दें और ऐसा प्लान बनाएं जिसमें अमेरिकी सरकार की मदद पर निर्भर न रहना पड़े.     अगर नहीं निकल सकते, तो किसी सुरक्षित जगह पर रहें और अपने पास खाना, पानी, दवाइयां और जरूरी सामान जमा करके रखें. अमेरिका ने ईरान पर टैरिफ बम फोड़ा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने चिर-परिचित अंदाज में ईरान पर और दबाव बढ़ाने के लिए टैरिफ बम फोड़ दिया है. उन्होंने ईरान की अर्थव्यवस्था को चूर करने के लिए उन देशों पर 25 फीसदी का टैरिफ लगाने का ऐलान किया है, जो ईरान के साथ मौजूदा हालात में कारोबार कर रहे हैं. अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर पोस्ट करके उन्होंने ये जानकारी दी कि आगे ईरान और उसके साझेदारों पर आर्थिक दबाव बढ़ाया जाएगा. हालांकि अभी इस बात की जानकारी नहीं दी गई है कि इसे … Read more

ब्लिंकिट हटाएगा 10 मिनट डिलीवरी फीचर, सरकार की चेतावनी के बाद जोमैटो-स्विगी से भी मंत्री ने की चर्चा

 नई दिल्ली 10 मिनट में डिलीवरी वाले क्विक कॉमर्स मॉडल को लेकर अब सरकार सख्त हो गई है. डिलीवरी बॉय की सिक्योरिटी सुनिश्चित करने के लिए अब सरकार ने हस्तक्षेप किया है. सरकार के हस्तक्षेप के बाद ब्लिंकिट ने अभी सभी ब्रांड से 10 मिनट डिलीवरी का फीचर हटाने का ऐलान कर दिया है. श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने इस मुद्दे पर क्विक कॉमर्स सेक्टर में सक्रिय कंपनियों से बात की थी. इसका असर अब दिखने लगा है. ब्लिंकिट अब अपने सभी ब्रांड से 10 मिनट में डिलीवरी की बात हटाने जा रहा है. सूत्रों की मानें तो ब्लिंकिट के बाद बाकी कंपनियों की ओर से भी जल्द ही इस तरह का ऐलान किया जा सकता है. केंद्रीय श्रम मंत्री ने ब्लिंकिट के अलावा जेप्टो, स्विगी और जोमैटो जैसी कंपनियों के प्रतिनिधियों से भी बात की है और उन्हें भी डिलीवरी ब्यॉज की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है। यह कदम दिसंबर के आखिर में अलग-अलग प्लेटफॉर्म के डिलीवरी वर्कर्स की हड़ताल के कुछ हफ़्ते बाद आया है। गिग वर्कर्स के संगठन ने इस क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की स्थितियों, डिलीवरी के दबाव और सोशल सिक्योरिटी की कमी जैसे मुद्दे उठाए थे। केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया को सभी कंपनियों ने आश्वासन दिया है कि वो अपने ब्रांड के विज्ञापनों, सोशल मीडिया से 10 मिनट में डिलीवरी की समय सीमा हटाएंगे. बताया जाता है कि केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने ब्लिंकिट, जेप्टो, स्विगी और जोमैटो के अधिकारियों से बात की थी. मनसुख मांडविया ने इन कंपनियों के अधिकारियों से डिलीवरी के लिए समय सीमा हटाने की बात कही थी. केंद्रीय मंत्री के साथ बातचीत में सभी कंपनियों ने टाइम लिमिट अपने विज्ञापनों से हटाने पर सहमति व्यक्त की थी. गौरतलब है कि डिलीवरी बॉय की सिक्योरिटी को लेकर चिंता जताते हुए 10 मिनट डिलीवरी के खिलाफ पूरे देश में एक मुहिम सी चल पड़ी थी.  गिग वर्कर्स ने की थी हड़ताल गिग वर्कर्स का तर्क था कि इतने कम समय में डिलीवरी का वादा न केवल यातायात नियमों के उल्लंघन के लिए उकसाता है, बल्कि उनकी जान को भी जोखिम में डालता है. हड़ताल की सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण तब मिला जब केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने इस मामले में सीधे हस्तक्षेप किया. उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यवसाय का मॉडल कर्मचारियों की सुरक्षा की कीमत पर नहीं चलाया जा सकता. मंत्रालयों की बैठक और कड़े फैसले इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए, केंद्रीय मंत्री ने क्विक कॉमर्स और फूड डिलीवरी क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों- ब्लिंकिट, जेप्टो, स्विगी और जोमैटो के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई. बैठक का मुख्य एजेंडा डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा और उन पर पड़ने वाले मानसिक व शारीरिक दबाव को कम करना था. ब्लिंकिट ने हटाई 10 मिनट की डिलीवरी सूत्रों के अनुसार, ब्लिंकिट (Blinkit) ने पहले ही निर्देश पर कार्रवाई की है और अपनी ब्रांडिंग से 10 मिनट की डिलीवरी का वादा हटा दिया है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में अन्य एग्रीगेटर भी इसी राह पर चलेंगे। इस कदम का उद्देश्य गिग वर्कर्स (अस्थायी या फ्रीलांस काम करने वाले) की सुरक्षा, संरक्षा और काम करने की बेहतर स्थिति सुनिश्चित करना है। राघव चड्ढा ने की थी मांग हाल के संसद सत्र में आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने भारत के गिग वर्कर्स की परेशानियों के बारे में आवाज उठाई थी। उन्होंने क्विक कॉमर्स और अन्य ऐप-आधारित डिलीवरी और सेवा व्यवसायों के लिए नियमों की मांग की थी। साथ ही गिग वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा लाभों की आवश्यकता पर जोर दिया था। संसद में अपने हस्तक्षेप में राज्यसभा सदस्य ने गिग वर्कर्स के लिए गरिमा, सुरक्षा और उचित वेतन की मांग की। क्या है पूरा मामला? हैदराबाद में जान गंवाने वाले शख्स को जेप्टो ने अपना कर्मचारी नहीं बताया था। पहले मीडिया में ऐसी खबरें आई थीं कि वह शख्स जेप्टो के काम करता था। यह हादसा शहर के मेहदीपट्टनम पुलिस इलाके में हुआ। अभिषेक नाम के एक डिलीवरी राइडर की दोपहिया गाड़ी एक बस से टकरा गई, जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस अधिकारियों ने शुरू में बताया था कि मृतक जेप्टो के लिए डिलीवरी का काम करता था। इसके बाद गिग वर्कर्स यूनियन ने मृतक के परिवार के लिए न्याय और मुआवजे की मांग की थी। जेप्टो ने ऑनलाइन जारी अपने बयान में मृतक के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की थी। लेकिन साथ ही यह भी साफ किया कि उनकी आंतरिक जांच के अनुसार, वह व्यक्ति जेप्टो के डिलीवरी बेड़े का हिस्सा नहीं था। जेप्टो ने कहा, 'हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि जिस व्यक्ति का उल्लेख किया गया है, उसका जेप्टो से कोई संबंध नहीं था और वह हादसे के समय जेप्टो के लिए डिलीवरी नहीं कर रहा था। यह हमारे डेटाबेस की गहन जांच, फेशियल रिकग्निशन और हमारे स्टोर नेटवर्क पर सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा के माध्यम से पुष्टि की गई है।' पुलिस को दी जानकारी कंपनी ने बताया था कि उन्होंने अपनी जांच के नतीजे मेहदीपट्टनम पुलिस को सौंप दिए हैं ताकि शुरुआती गलतफहमी को दूर किया जा सके। जेप्टो पुलिस जांच में पूरा सहयोग कर रहा है। जेप्टो ने यह भी बताया कि उनके सभी सक्रिय डिलीवरी पार्टनर एक व्यापक बीमा पॉलिसी के तहत कवर होते हैं। इस पॉलिसी में 10 लाख रुपये तक का दुर्घटना बीमा और 1 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा शामिल है। राजेश भारती

1 लाख करोड़ का परमाणु युद्धपोत, समंदर में बना महाबली, 25 साल तक फ्यूल की जरूरत नहीं

नई दिल्ली कल्पना कीजिए समंदर के सीने पर तैरते एक ऐसे लोहे के पहाड़ की जिसके एक इशारे पर दुनिया के किसी भी कोने में तबाही का मंजर बिछाया जा सकता है. यह कोई हॉलीवुड फिल्म का दृश्य नहीं बल्कि अमेरिकी नौसेना का गेराल्ड आर. फोर्ड विमानवाहक पोत है. जब यह 1 लाख टन वजनी दैत्य समंदर की लहरों को चीरता हुआ आगे बढ़ता है तो दुश्मन देशों के रडार कांपने लगते हैं और सैटेलाइट्स की नजरें इसी पर टिक जाती हैं. इसे समंदर का अजेय किला कहना गलत नहीं होगा क्योंकि इसकी सुरक्षा में तैनात मिसाइलें और लेजर गन परिंदे को भी पर मारने की इजाजत नहीं देते. यह सिर्फ एक जहाज नहीं बल्कि अमेरिका का वो घमंड है जिसे चुनौती देने की हिम्मत फिलहाल दुनिया की किसी भी सेना में नहीं है. फोर्ड क्लास की बेजोड़ खासियतें फोर्ड क्लास के विमानवाहक पोत अपने पूर्ववर्ती ‘निमित्ज़ क्लास’ से कई गुना उन्नत हैं. इसकी सबसे बड़ी क्रांति EMALS (इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एयरक्राफ्ट लॉन्च सिस्टम) है. पहले विमानों को भाप (Steam) के जरिए लॉन्च किया जाता था लेकिन अब शक्तिशाली चुंबकीय तरंगों का उपयोग होता है, जिससे भारी से भारी और हल्के से हल्के (ड्रोन) विमानों को तेजी से लॉन्च किया जा सकता है. • मारक क्षमता: यह पोत एक दिन में 160 से 220 सॉर्टीज़ (उड़ानें) संचालित कर सकता है. इस पर 75 से अधिक लड़ाकू विमान तैनात रहते हैं, जिनमें F-35C और F/A-18E/F सुपर हॉर्नेट शामिल हैं. • स्वचालन (Automation): इसमें उन्नत तकनीक के कारण निमित्ज क्लास के मुकाबले 700 से 1,000 कम सैनिकों की जरूरत पड़ती है, जिससे परिचालन लागत कम होती है. • A1B न्यूक्लियर रिएक्टर: इसमें दो शक्तिशाली परमाणु रिएक्टर लगे हैं जो इसे असीमित रेंज देते हैं. यह 25 साल तक बिना ईंधन भरे समंदर में रह सकता है. • दोहरी रडार प्रणाली: इसमें ‘डुअल बैंड रडार’ (DBR) लगा है, जो दुश्मन की मिसाइल और विमानों को बहुत दूर से ही ट्रैक कर लेता है. लागत और मालिकाना हक फोर्ड क्लास दुनिया का सबसे महंगा सैन्य प्रोजेक्ट माना जाता है. पहले USS Gerald R. Ford (CVN 78) को बनाने में लगभग 13.3 बिलियन डॉलर (करीब 1.1 लाख करोड़ रुपये) की लागत आई है. इसके अलावा इसके अनुसंधान और विकास (R&D) पर अलग से 5 बिलियन डॉलर खर्च किए गए. किन देशों के पासफोर्ड क्लास की ताकत? वर्तमान में यह तकनीक केवल संयुक्त राज्य अमेरिका के पास है. अमेरिकी नौसेना ने कुल 10 फोर्ड-क्लास कैरियर बनाने की योजना बनाई है. 1. USS Gerald R. Ford (CVN 78): वर्तमान में सेवा में है. 2. USS John F. Kennedy (CVN 79): परीक्षण के अंतिम चरण में है. 3. USS Enterprise (CVN 80) और USS Doris Miller (CVN 81): निर्माणाधीन हैं. जियो पॉलिटिक्स: समंदर का ‘सुपरपावर’ संदेश जियो पॉलिटिक्स में फोर्ड क्लास एक डिप्लोमैटिक टूल की तरह काम करता है. जब भी अमेरिका को किसी देश (जैसे चीन या ईरान) को चेतावनी देनी होती है तो वह उस क्षेत्र में अपना विमानवाहक पोत तैनात कर देता है. • इंडो-पैसिफिक में चीन को चुनौती: दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए फोर्ड क्लास एक बड़ा हथियार है. यह ताइवान की सुरक्षा और मुक्त व्यापार मार्ग सुनिश्चित करने का प्रमुख जरिया है. • शक्ति का संतुलन: एक फोर्ड क्लास कैरियर के साथ पूरा ‘कैरियर स्ट्राइक ग्रुप’ चलता है जिसमें विध्वंसक, पनडुब्बियां और क्रूजर शामिल होते हैं. यह किसी छोटे देश की पूरी वायुसेना को अकेले तबाह करने की क्षमता रखता है. क्या यह भविष्य के युद्धों के लिए तैयार है? विशेषज्ञों के बीच एक बहस यह भी है कि क्या ‘हाइपरसोनिक मिसाइलों’ के दौर में इतने महंगे जहाज सुरक्षित हैं? चीन और रूस जैसे देश अब कैरियर किलर मिसाइलें विकसित कर रहे हैं. हालांकि, फोर्ड क्लास के पास उन्नत मिसाइल डिफेंस सिस्टम और लेजर हथियारों की क्षमता है जो इसे सुरक्षा कवच प्रदान करती है. फोर्ड क्लास केवल एक जहाज नहीं बल्कि अमेरिकी तकनीकी श्रेष्ठता का प्रतीक है. उच्च लागत के बावजूद यह अमेरिका को वैश्विक शक्ति संतुलन में वह बढ़त देता है जिसे तोड़ पाना फिलहाल किसी भी देश के लिए नामुमकिन है. यह 2026 और उसके बाद के दशकों में अमेरिकी नौसेना की रीढ़ बना रहेगा.