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Yasin Malik Divorce: 8 साल से नहीं हुई पत्नी मुशाल से बात, अब तलाक का लिया फैसला

नई दिल्ली तिहाड़ जेल में बंद कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक ने अपनी पत्नी से तलाक की इच्छा जताई है। आतंकवाद के मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहे यासीन मलिक ने जेल से अपने परिवार के लिए एक भावुक खत लिखा है। इस खत में उसने अपनी पत्नी मुशाल मलिक को तलाक देने के फैसले का जिक्र किया है। जम्मू की TADA/POTA अदालत में दाखिल 25 पन्नों के एक हलफनामे में यासीन मलिक ने अपनी पत्नी के अलावा मां और 13 साल की बेटी रजिया सुल्ताना के लिए भी संदेश भेजा है। हलफनामे में यासीन मलिक ने लिखा है कि पिछले आठ साल से वह अपनी पत्नी मुशाल से ना फोन पर बात कर पा रहा है और ना ही वीडियो कॉल पर उसे देख पाया है। यासीन मलिक ने कहा है कि जेल में रहते हुए उसे कभी परिवार से संपर्क की इजाजत नहीं मिली। पत्नी मुशाल के नाम लिखे संदेश में यासीन मलिक ने कहा कि उसने बहुत दर्द में यह फैसला लिया है। मलिक ने लिखा, “मैं नहीं चाहता कि मुशाल अपनी पूरी जिंदगी इस हालात का बोझ उठाकर या एक विधवा की तरह जिए। मैं चाहता हूं कि वह सम्मान और उम्मीद के साथ अपनी जिंदगी का नया अध्याय शुरू करे।” फांसी का डर दरअसल यासीन मलिक को फांसी की सजा मिलने का डर है। हलफनामे में उसने कहा है कि उसके सामने फांसी की सजा या जेल में लंबे समय तक रहने की आशंका है। ऐसे में वह अपनी पत्नी को इस रिश्ते से आजाद करना चाहता है, ताकि उसे अनिश्चितता और चिंता में जिंदगी न गुजारनी पड़े। बेटी से क्या बोला यासीन? अपनी 13 वर्षीय बेटी रजिया सुल्ताना के लिए यासीन मलिक ने लिखा कि वह अपनी दादी का ख्याल रखे और हर दिन कम से कम पांच मिनट उनसे बात जरूर करे, ताकि इस मुश्किल समय में उन्हें अपने परिवार का साथ महसूस हो। हालांकि हलफनामा सामने आने के बाद रजिया सुल्ताना ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। एक वीडियो जारी कर उसने कहा है कि अगर उसके पिता ने सच में उसकी मां को तलाक दे दिया, तो वह अपनी जान दे देगी। 2019 से तिहाड़ जेल में बंद है मलिक गौरतलब है कि यासीन मलिक 2019 से ही टेरर फंडिंग के मामले में जेल में बंद है। मई 2022 में एनआईए की विशेष अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हालांकि NIA ने लगातार यासीन की आजीवन कारवास की सजा को मृत्युदंड में बदलने की मांग की है। फिलहाल जम्मू में उसके खिलाफ एक हत्या के मामले की सुनवाई भी चल रही है।

7.8% GDP Growth के बावजूद टेंशन! PM मोदी के सलाहकार ने बताईं अर्थव्यवस्था के सामने 3 बड़ी चुनौतियां

नई दिल्ली भारत की GDP ग्रोथ पहली तिमाही में 7.8% रही है, जो उम्मीद से बेहतर है. लेकिन इस रफ्तार को आगे भी बनाए रखना आसान नहीं होगा. प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल वैश्विक अनिश्चितता, कच्चे तेल की कीमतों और अल नीनो को आगामी दिनों में भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने तीन सबसे बड़ी चुनौतियों के रूप में देख रहे हैं।   एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में संजीव सान्याल ने कहा कि 7.8% की ग्रोथ किसी एक सेक्टर के दम पर नहीं आई है. मैन्युफैक्चरिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और कंस्ट्रक्शन समेत अर्थव्यवस्था के कई आयामों ने इसमें योगदान दिया है. उनके मुताबिक, पब्लिक और गवर्नमेंट इंवेस्टमेंट मजबूत बना हुआ है, जबकि प्राइवेट कंपनियां भी निवेश कर रही हैं।  7% की ग्रोथ भी संतोषजनक सान्याल ने 7.8% की ग्रोथ को उम्मीद से ज्यादा मजबूत बताया. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा वैश्विक माहौल में इतनी तेज ग्रोथ को लगातार बनाए रखना मुश्किल हो सकता है. उन्होंने कहा कि अगर आने वाली तिमाहियों में भारतीय अर्थव्यवस्था की ग्रोथ 7% के आसपास भी बनी रहती है, तो वह इससे काफी संतुष्ट होंगे. उनके मुताबिक, मौजूदा ग्रोथ का आधार व्यापक है और यह सिर्फ किसी एक सेक्टर पर निर्भर नहीं है।  वैश्विक अनिश्चितता बनी बड़ी चुनौती संजीव सान्याल ने ईरान में युद्ध, ग्लोबल ट्रेड में आई बाधाओं और टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितता को भारत के लिए अहम जोखिम बताया. उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया भारत के लिए महत्वपूर्ण एक्सपोर्ट मार्केट है. इसके अलावा इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं, जिनकी ओर से भेजी जाने वाली रेमिटेंस भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है. लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण यह पूरा क्षेत्र संवेदनशील बना हुआ है।  तेल की कीमतें भी निभाएंगी भूमिका कच्चे तेल की कीमतें भी भारत के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है. संजीव सान्याल के मुताबिक, भारत ने रूस, अमेरिका और वेनेजुएला समेत अलग-अलग देशों से आयात कर अपने सप्लाई सोर्स को डायवर्सिफाई किया है. उन्होंने माना कि विश्व में बनी विपरीत परिस्थितियों के कारण भारत को कुछ बाहरी दबावों का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि, उनका कहना है कि इन चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था फिलहाल अच्छी स्थिति में है।  अल नीनो और मॉनसून का भी असर सान्याल ने अल नीनो को भी जोखिम के तौर पर गिनाया. उनके मुताबिक, इसका कुछ असर कृषि क्षेत्र पर पड़ सकता है. हालांकि, उन्होंने कहा कि फिलहाल इसके प्रभाव की तुलना यूरोप के कुछ हिस्सों में देखे गए गंभीर सूखे से नहीं की जा सकती।  मॉनसून अभी जारी है, इसलिए इसका अर्थव्यवस्था और ग्रोथ पर कुल कितना असर पड़ेगा, इस पर अभी निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।  बेरोजगारी और महंगाई पर क्या बोले? पीएम मोदी और केंद्र सरकार ने पहली तिमाही के जीडीपी आंकड़ों को वैश्विक अनिश्चितता के बीच देश की बड़ी उपलब्धि बताया. वहीं विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस ने बेरोजगारी, महंगाई और आर्थिक असमानता का मुद्दा उठाकर सरकार को घेरने की कोशिश की. इन चिंताओं पर संजीव सान्याल ने कहा कि उपलब्ध हार्ड डेटा घर-परिवारों पर व्यापक दबाव की तस्वीर नहीं दिखाता. उनके मुताबिक, सरकारी लेबर सर्वे के आंकड़े गांव और शहर दोनों में बेरोजगारी दर में धीरे-धीरे कमी की ओर इशारा करते हैं. हालांकि, उन्होंने पढ़े-लिखे युवाओं में बेरोजगारी को एक चिंता माना।  महंगाई को लेकर उन्होंने कहा कि मौजूदा 4-5% के स्तर को भारत के पुराने आंकड़ों के संदर्भ में देखना चाहिए. करीब एक दशक पहले देश में महंगाई अक्सर 8-12% के दायरे में रहती थी. संजीव सान्याल ने मजबूत उपभोक्ता मांग के संकेत के तौर पर गाड़ियों की रिकॉर्ड बिक्री और एयर कंडीशनर जैसे कंज्यूमर ड्यूरेबल्स की खरीद का भी जिक्र किया. उनके मुताबिक, ये आंकड़े बताते हैं कि घरेलू खपत में अभी मजबूती बनी हुई है।  नई GDP मेथडोलॉजी का किया बचाव सान्याल ने GDP की नई मेथडोलॉजी और बेस ईयर में बदलाव का भी बचाव किया. उनका कहना था कि कोविड का दौर सामान्य आर्थिक गतिविधियों को प्रतिबिंबित नहीं करता था, इसलिए उस समय बेस ईयर को अपडेट करना मुश्किल था. उनके मुताबिक, 2024 में अर्थव्यवस्था ज्यादा सामान्य स्थिति में लौटने के बाद बेस ईयर को अपडेट किया गया. उन्होंने कहा कि मजबूत GDP आंकड़ों की झलक कॉरपोरेट मुनाफे और कार बिक्री जैसे दूसरे आर्थिक आंकड़ों में भी दिखाई देती है।  संजीव सान्याल ने माना कि आने वाली तिमाहियों में GDP ग्रोथ की रफ्तार कुछ कम हो सकती है. ऐसे में ग्लोबल ट्रेड, तेल की कीमतों और मॉनसून से जुड़े जोखिमों पर नजर रखना जरूरी होगा. हालांकि, मौजूदा तस्वीर में भारतीय अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी मजबूती यह है कि ग्रोथ कई सेक्टर से आ रही है. यही व्यापक आधार आने वाले समय में अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों के बीच सहारा दे सकता है। 

दिशा सालियान मौत मामले में बड़ा ट्विस्ट, बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश पर CBI करेगी जांच

मुंबई  दिवंगत सेलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियान की मौत के करीब छह साल बाद मामले में बड़ा मोड़ आया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार, 2 सितंबर को दिशा सालियान की मौत की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने का आदेश दिया है। कोर्ट ने मामले में FIR दर्ज करने और जांच CBI को ट्रांसफर करने का निर्देश दिया है। दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान ने अपनी बेटी की मौत को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर CBI जांच और FIR दर्ज करने की मांग की थी। उनकी याचिका में शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे समेत अन्य लोगों के खिलाफ भी आरोप लगाए गए थे। हालांकि, कोर्ट के आदेश का अर्थ यह नहीं है कि आदित्य ठाकरे या किसी अन्य व्यक्ति को दोषी ठहरा दिया गया है। जांच के दौरान सबूत मिलने पर ही किसी के खिलाफ कार्रवाई होगी। CBI को क्या-क्या करना होगा? सतीश सालियान की ओर से पेश अधिवक्ता नीलेश ओझा ने कोर्ट के आदेश के बाद बताया कि अदालत ने कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। उनके मुताबिक, कोर्ट ने CBI को सतीश सालियान का बयान दर्ज करने, FIR रजिस्टर करने और जांच के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी नियुक्त करने को कहा है। इसके अलावा मालवणी पुलिस स्टेशन को मामले से जुड़े सभी रिकॉर्ड CBI को सौंपने का निर्देश दिया गया है। ओझा के मुताबिक, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच में जिस व्यक्ति के खिलाफ सबूत मिलेगा, उसके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी। लेकिन सिर्फ नाम या आरोप के आधार पर किसी को आरोपी नहीं बनाया जाएगा। ओझा ने यह भी कहा कि अगर CBI जांच के बाद कोई नेगेटिव रिपोर्ट दाखिल करती है तो सतीश सालियान को उस रिपोर्ट पर आपत्ति जताने और प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल करने का अधिकार रहेगा। छह साल पुराने मामले में क्यों आया नया मोड़? दिशा सालियान की मौत 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक ऊंची इमारत से गिरने के बाद हुई थी। वह अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर थीं। मुंबई पुलिस ने शुरुआत में इसे दुर्घटना से हुई मौत की रिपोर्ट (ADR) के तौर पर दर्ज किया था और जांच के बाद इसे आत्महत्या का मामला बताया था। बाद में महाराष्ट्र सरकार ने मामले की जांच के लिए SIT का गठन किया था। पुलिस और SIT की ओर से पहले अदालत में कहा गया था कि जांच में किसी तरह की आपराधिक साजिश या फाउल प्ले का सबूत नहीं मिला। 2025 में पुलिस ने बॉम्बे हाईकोर्ट को यह भी बताया था कि पोस्टमॉर्टम और अन्य जांच से यौन या शारीरिक हमले के संकेत नहीं मिले। लेकिन सतीश सालियान ने बाद में अपनी बेटी की मौत की परिस्थितियों पर गंभीर सवाल उठाते हुए ताजा जांच और FIR की मांग की। उनका आरोप था कि उनकी बेटी के साथ बलात्कार और हत्या हुई और मामले में प्रभावशाली लोगों को बचाने के लिए जांच को प्रभावित किया गया। ये आरोप अभी आरोप मात्र हैं और जांच के अधीन हैं। हाईकोर्ट ने पुलिस जांच पर उठाए थे गंभीर सवाल अगस्त में सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुलिस की जांच प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठाए थे। अदालत ने पूछा था कि जब परिवार की ओर से मौत की परिस्थितियों पर संदेह जताया गया था तो FIR दर्ज करने में क्या बाधा थी? अदालत ने यह भी सवाल किया था कि 14वीं मंजिल से गिरने के मामले में मेडिकल रिपोर्ट और चोटों से जुड़े पहलुओं की पर्याप्त जांच हुई थी या नहीं। 28 अगस्त को सुनवाई के दौरान अदालत ने CrPC की धारा 174 के तहत हुई लंबी जांच की कानूनी स्थिति पर भी सवाल उठाए थे। अदालत ने कहा था कि ऐसी जांच किसी व्यक्ति को आपराधिक मामले में ‘क्लीन चिट’ देने का विकल्प नहीं हो सकती और मामले को उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत अंतिम रूप दिया जाना चाहिए। इसी सुनवाई के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब 2 सितंबर को फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने मामले की जांच CBI को सौंपने का निर्देश दिया है। बिना सबूत किसी को भी आरोपी न माना जाए' हाई कोर्ट ने साफ कहा है कि जब तक जांच में किसी के खिलाफ ठोस सबूत न मिल जाएं, तब तक किसी को भी आरोपी न माना जाए। अदालत ने कहा, "अगर कोई गंभीर अपराध (कॉग्निज़ेबल ऑफ़ेंस) बनता है, तो इस मामले में जल्द से जल्द चार्जशीट दाखिल की जानी चाहिए। अगर कोई गंभीर अपराध नहीं बनता है, तो जजों ने जांच अधिकारी (I.O.) को आदेश दिया है कि वे सक्षम अदालत में मामले को बंद करने की उचित प्रक्रिया शुरू करें।" दिशा के पिता को प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल करने की इजाजत दी गई है। CBI दर्ज करेगी FIR, वरिष्ठ अधिकारी संभालेंगे जांच हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब मामले में संबंधित प्रावधानों के तहत FIR दर्ज की जाएगी। इसके बाद CBI जांच को आगे बढ़ाएगी। हाईकोर्ट ने विशेष रूप से निर्देश दिया है कि जांच के लिए किसी वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारी को नियुक्त किया जाए, ताकि मामले की जांच निष्पक्ष और प्रभावी तरीके से हो सके। दिशा सालियान की मौत 8 जून 2020 को मुंबई में एक बिल्डिंग से गिरने के बाद हुई थी। उस समय पुलिस ने इसे दुर्घटनावश हुई मौत के रूप में दर्ज किया था। बाद में मामले को लेकर कई सवाल और आरोप सामने आए तथा दिशा के पिता ने स्वतंत्र जांच की मांग की। सतीश सालियान का बयान भी दर्ज होगा CBI जांच के दौरान दिशा के पिता सतीश सालियान का बयान दर्ज किया जाएगा। उनके आरोपों और उन परिस्थितियों के बारे में विस्तार से जानकारी ली जाएगी। हाईकोर्ट पहले ही यह स्पष्ट कर चुका था कि किसी मामले में कानूनी रूप से उचित जांच और प्रक्रिया का पालन जरूरी है, ताकि परिवार को मामले में उचित निष्कर्ष और न्यायिक रूप से स्वीकार्य क्लोजर मिल सके। आदित्य ठाकरे को लेकर कोर्ट का अहम रुख मामले में शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे का नाम राजनीतिक और कानूनी बहस के दौरान सामने आता रहा है। हालांकि, CBI जांच का आदेश दिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि आदित्य ठाकरे या किसी अन्य व्यक्ति को आरोपी … Read more

E20 Petrol से माइलेज घटा या गाड़ी हुई खराब? गोवा सरकार ने शिकायत के लिए खोला रास्ता

पणजी E20 पेट्रोल को लेकर देशभर में चल रही बहस के बीच गोवा सरकार ने विधानसभा में बड़ा दावा किया है. मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा कि राज्य में E20 पेट्रोल शुरू होने के बाद अब तक किसी ग्राहक, वाहन मालिक, ऑटोमोबाइल एसोसिएशन या गैराज की तरफ से कोई शिकायत नहीं मिली है. मुख्यमंत्री के पास सिविल सप्लाई और कंज्यूमर अफेयर्स विभाग भी है. उन्होंने कहा कि अगर किसी वाहन मालिक को E20 पेट्रोल से जुड़ी कोई परेशानी है, तो वह सिविल सप्लाई विभाग में शिकायत कर सकता है।  विधानसभा में विधायक वेन्जी वेगास, विजय सरदेसाई और क्रूज सिल्वा ने E20 पेट्रोल का मुद्दा उठाया था. विधायकों ने खास तौर पर 2023 से पहले बने वाहनों को लेकर चिंता जताई. उनका कहना था कि ऐसे वाहनों में E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने से माइलेज कम हो रहा है, परफॉर्मेंस घट रहा और मेंटेनेंस का खर्च बढ़ रहा है. टैक्सी चालकों और बाइक चलाने वालों पर इसका असर ज्यादा पड़ने की बात भी कही गई. विधायकों ने मांग की कि ग्राहकों को बिना इथेनॉल वाला पेट्रोल या अनब्लेंडेड पेट्रोल चुनने का विकल्प दिया जाना चाहिए।  मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने विधानसभा में कहा कि E20 पेट्रोल केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र का विषय है और इसे सेंट्रल पॉलिसी के तहत लागू किया गया है. गोवा में भी इस पॉलिसी को 2023 से लागू किया गया है. उन्होंने कहा कि अभी तक कोई आधिकारिक शिकायत नहीं मिली है, लेकिन इसके बावजूद सरकार स्थिति पर नजर रखेगी. मुख्यमंत्री ने सिविल सप्लाई विभाग को स्थिति की जांच, निगरानी और पेट्रोल की टेस्टिंग करने के निर्देश देने की बात कही  अपने लिखित जवाब में मुख्यमंत्री ने बताया कि गोवा में E20 पेट्रोल तीन सरकारी तेल कंपनियों के जरिए बेचा जा रहा है. साल 2025 से राज्य के 157 रिटेल आउटलेट्स पर इसकी सप्लाई की जा रही है. सरकार का कहना है कि E20 की सेफ्टी को लेकर अलग-अलग संस्थानों की स्टडी और फील्ड ट्रायल हो चुके हैं. इनमें ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चर्स (SIAM), इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) और IIP जैसी संस्थाएं शामिल हैं।  5 फीसदी तक घट सकता है माइलेज मुख्यमंत्री ने यह भी माना कि जिन वाहनों को E10 पेट्रोल के हिसाब से डिजाइन किया गया है, उनमें माइलेज में कुछ कमी आ सकती है. उनके मुताबिक E10 कम्प्लायंट व्हीकल्स में E20 फ्यूल के इस्तेमाल के बाद माइलेज में करीब 3 से 5 फीसदी तक गिरावट आ सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि वाहन कंपनियां E20 पेट्रोल से चलने वाले वाहनों की वारंटी पर कोई असर नहीं पड़ेगा।  सरकार के मुताबिक देश में 20 करोड़ से ज्यादा दोपहिया वाहन और करीब 3 करोड़ कारें ब्लेंडेड फ्यूल पर चल रही हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी तक इंजन फेल होने की ऐसी कोई शिकायत सामने नहीं आई है, जिसे सीधे ब्लेंडेड पेट्रोल से जोड़ा जा सके. उन्होंने यह भी बताया कि पेट्रोल में मिलावट और फ्यूल की क्वॉलिटी जांच के लिए हाल के दिनों में देशभर के पेट्रोल पंपों पर 30,000 से ज्यादा क्वालिटी चेक किए गए हैं।  शिकायत मिलने पर होगी जांच गोवा सरकार का कहना है कि फिलहाल E20 पेट्रोल को लेकर राज्य में कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई है. हालांकि, सरकार ने साफ किया है कि अगर वाहन मालिकों या ग्राहकों को माइलेज, परफॉर्मेंस या किसी अन्य तरह की परेशानी महसूस होती है, तो वे सिविल सप्लाई विभाग तक अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं. इसके बाद मामले की जांच और फ्यूल की टेस्टिंग की जाएगी। 

नेपाल बाढ़-भूस्खलन का कहर जारी, 8 दिन बाद भी मलबे से मिल रहे लोग; 1127 की मौत

 काठमांडू नेपाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है. हादसे के आठवें दिन भी राहत और बचाव का काम जारी है. मलबे के बीच से अब भी लोगों को बाहर निकाला जा रहा है. नेपाल पुलिस के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अब तक इस आपदा में 1127 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं, चार हजार से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।  नेपाल पुलिस के मुताबिक अब तक 1,126 शव बरामद किए जा चुके हैं. इनमें 31 बच्चे, 45 लड़कियां, 220 महिलाएं और 370 पुरुष शामिल हैं. इसके अलावा 460 मानव अवशेष भी मिले हैं. पुलिस के 7,572 जवान राहत और बचाव काम में लगे हैं. इनमें 65 पुलिसकर्मी भी प्रभावित हुए हैं, जबकि 25 पुलिसकर्मियों का अब तक पता नहीं चल पाया है।  राहत और बचाव अभियान में 580 लोगों को बचाया गया है या घायल हालत में निकाला गया है. अब तक 55 शव उनके परिवारों को सौंपे जा चुके हैं।  दरअसल, यह हादसा 26 अगस्त को उत्तरी नेपाल में हुआ था. तेज बारिश के बाद कई इलाकों में अचानक बाढ़ आ गई. इसके साथ ही बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ. देखते ही देखते पानी और मलबे ने गांवों और कस्बों को अपनी चपेट में ले लिया. कई जगहों पर घर, सड़कें और दूसरी इमारतें मलबे में दब गईं।  तीन महीने के लिए घोषित किया गया आपदा क्षेत्र नेपाल सरकार ने प्रभावित इलाके को कम से कम तीन महीने के लिए आपदा संकट क्षेत्र घोषित किया है. सरकार का कहना है कि इससे राहत और बचाव के लिए जरूरी संसाधन तेजी से पहुंचाए जा सकेंगे. साथ ही राहत टीमों की तैनाती भी बेहतर तरीके से की जा सकेगी।  सरकार अब बचाव के साथ राहत और पुनर्वास पर भी जोर दे रही है. प्रभावित इलाकों में बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी और बचाव दल लगाए गए हैं. टीमें लगातार मलबे में लोगों की तलाश कर रही हैं. लापता लोगों के परिवार अभी भी अपनों के लौटने का इंतजार कर रहे हैं।  चीन मीडिया ग्रुप (CMG) के एक रिपोर्टर ने सोमवार को हेलीकॉप्टर से प्रभावित इलाके का जायजा लिया. यह इलाका चीन-नेपाल सीमा पर स्थित ग्यिरोंग-रसुवा सीमा चौकी के नेपाली हिस्से में है. आसमान से ली गई तस्वीरों में तबाही का बड़ा मंजर दिखाई दिया।  इस रिपोर्ट के मुताबिक, सीमा चौकी के पास नेपाल की तरफ कई गांव और छोटे कस्बे पूरी तरह तबाह हो गए हैं. कई गाड़ियां और इमारतें गहरे मलबे में दब गई हैं. जहां कभी लोगों की आवाजाही रहती थी, वहां अब चारों तरफ मिट्टी और मलबा नजर आ रहा है. कीचड़ से क्षेत्र में दलदल जैसे हालात बन गए हैं।  तबाही से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में स्याब्रुबेंसी भी शामिल है. यह शहर सीमा चौकी से सीधी दूरी में 10 किलोमीटर से भी कम दूर है. आपदा से पहले यहां काफी चहल-पहल रहती थी. लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं।  हेलीकॉप्टर से इलाके का जायजा लेने वाले रिपोर्टर का कहना है कि शहर में आम लोगों की मौजूदगी बेहद कम दिखाई दी. वहां सिर्फ राहत और बचाव दल के सदस्य नजर आए. ये टीमें मलबे में जिंदगी की तलाश कर रही हैं।  आठ दिन बीतने के बाद भी बचाव अभियान थमा नहीं है. मलबे के नीचे दबे लोगों की तलाश लगातार जारी है. हर गुजरते दिन के साथ चुनौती बढ़ रही है. इसके बावजूद रेस्क्यू टीम का सर्च ऑपरेशन जारी है. चार हजार से ज्यादा लोगों के लापता होने से उनके परिवारों की चिंता बढ़ी हुई है।  नेपाल बाढ़ में लापता पांच लोगों के शव भारत में मिले नेपाल में आई अचानक बाढ़ में बहकर लापता हुए पांच नेपाली नागरिकों के शव उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में गंडक नदी से बरामद हुए. मंगलवार को सभी शवों को सोनौली बॉर्डर पर नेपाल पुलिस को सौंप दिया गया. मृतकों में दो महिलाएं और तीन पुरुष शामिल हैं. ये शव कुशीनगर के बरवा पट्टी और खड्डा इलाके से मिले थे. शवों को शाम करीब 4 बजे सोनौली लाया गया. इसके बाद नेपाल के बेलहिया थाने के प्रभारी सब-इंस्पेक्टर हरिराम डांगी को सौंप दिया गया।  अधिकारियों के मुताबिक, शवों को नेपाल के बुटवल ले जाया गया है. वहां नेपाल पुलिस मृतकों की पहचान करेगी. इसके बाद शवों को उनके परिवारों को सौंपा जाएगा. नेपाल में लगातार हो रही बारिश और अचानक आई बाढ़ के कारण कई लोग बह गए हैं. सीमा से लगे भारतीय इलाकों में भी इसका असर देखने को मिल रहा है।  नेपाल और उत्तर प्रदेश में लगातार बारिश के कारण महाराजगंज में कई नदियों का जलस्तर बढ़ गया है. वाल्मीकिनगर के गंडक बैराज से 1,50,200 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है. महाराजगंज में पिछले 24 घंटे में 33.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है. जिले में अब तक कुल 655.5 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है।  मंगलवार दोपहर 2 बजे गंडक नदी का अपस्ट्रीम जलस्तर 355.30 फीट और डाउनस्ट्रीम जलस्तर 352.60 फीट दर्ज किया गया. रोहिन नदी अभी खतरे के निशान से नीचे बह रही है. हालांकि महाव नाला खतरे के निशान से ऊपर है. इसका जलस्तर नौ फीट पहुंच गया है. खतरे का निशान पांच फीट है. राप्ती, चंदन और प्यास नदियों का जलस्तर भी बढ़ रहा है. हालांकि ये नदियां अभी खतरे के निशान से नीचे हैं।  अपर जिलाधिकारी प्रशांत कुमार ने बताया कि प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर रख रहा है. एसडीएम, तहसील अधिकारियों, सिंचाई विभाग और बाढ़ नियंत्रण अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं. निचले और संवेदनशील इलाकों में राहत और बचाव की तैयारी पूरी रखने को कहा गया है.महाराजगंज और नेपाल से लगे इलाकों में सभी तटबंध फिलहाल सुरक्षित हैं। 

‘40 साल पुराना है, काफी खर्चा किया था’… नेपाल की विनाशकारी बाढ़ में भी डटा रहा घर

काठमांडू  नेपाल में बीते दिनों आई विनाशकारी बाढ़ के दौरान नुवाकोट जिले में स्थित एक घर अचानक पूरी दुनिया की नजर में आ गया। बाढ़ का पानी अपने साथ मिट्टी, बड़े पत्थर और मलबा लेकर तेजी से बह रहा था। आसपास के कई मकान और ढांचे बह गए या बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए, लेकिन यह घर काफी हद तक खड़ा रहा। ऐसे में इस घर की मजबूती को लेकर काफी चर्चा हो रही है। घर के मालिक प्रकाश प्याकुरेल का कहना है कि यह 35-40 साल पुराना है और इसे काफी मजबूती से बनाया गया था। प्रकाश ने बताया कि इस घर में 6 लोग फंसे थे। मेरे घर के 5 लोग और एक पड़ोसी था। जब बाढ़ आने की सूचना मिली तब मैं अपनी शॉप पर था और दौड़कर घर आया। द लल्लनटॉप से बातचीत में प्रकाश ने कहा, ‘हम लोग अपने घर के फोर्थ फ्लोर पर चले गए। जब वहां भी पानी आने लगा तो हम लोग सबसे ऊपर चले गए। करीब डेढ़ या दो घंटे बाद पानी थोड़ा कम हुआ। तब जाकर पाइप लगाकर हम लोगों को रेस्क्यू किया गया।’ इस मुश्किल समय को याद करते हुए उन्होंने कहा कि जब आपके पास जीवन का लास्ट समय होता है तो जो आप सोचते हैं, मैं भी वही सोच रहा था। ऐसा लग रहा था कि जिंदगी आज खत्म हो जाएगी। मेरा बेटा स्कूल गया था। मैं उसके बारे में सोच रहा था। घर के नीचे भी मजबूत राड डलवाए: मालिक प्रकाश प्याकुरेल ने बताया, 'यह पुराना घर है, करीब 35-40 साल पुराना होगा। उस टाइम सीमेंट और राड की क्वालिटी काफी अच्छी थी। इस घर को बनाने में काफी खर्चा किया था। यह घर रीवर साइट पर बनाया गया था। इसलिए इसके नीचे भी मजबूत राड डलवाए थे।' उन्होंने कहा कि यह घर वाकई मजबूत था। इसी घर में गोदाम था, जहां मेरी दुकान का सामान रखा हुआ था। इस बाढ़ में हमारा काफी नुकसान हुआ है। इससे रिकवर करने की कोशिश जारी है। सबसे बड़ा सवाल यही उठा कि आखिर जब आसपास की इमारतें तबाह हो गईं तो यह घर कैसे बच गया? इंजीनियरिंग डेटा के मुताबिक, इसकी एक बड़ी वजह मजबूत आरसीसी फ्रेम हो सकती है। यानी घर के कॉलम, बीम और नींव को स्टील और कंक्रीट की मजबूत संरचना से जोड़ा गया था। ऐसी संरचना तेज पानी और मलबे से पैदा होने वाले साइड के दबाव को बेहतर तरीके से सह सकती है। इसके अलावा घर की कॉम्पैक्ट बनावट और उसकी स्थिति भी अहम रही। माना जा रहा है कि बाढ़ की सबसे तेज धारा सीधे घर के बीच से नहीं टकराई, बल्कि उसका एक हिस्सा घर के आसपास से निकल गया।

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए खुशखबरी! 8वें वेतन आयोग से पहले बढ़ सकता है DA

नई दिल्ली केंद्रीय कर्मचारियों को आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों के साथ ही साल 2026 की दूसरी छमाही के महंगाई भत्ता (DA) में बढ़ोतरी का भी इंतजार है। अगर सबकुछ ठीक रहा तो जुलाई से दिंसबर छमाही के दौरान का डीए सरकार अक्टूबर तक जारी कर देगी। अब सवाल है कि इस बार की छमाही में केंद्रीय कर्मचारियों को कितना डीए मिलेगा। वहीं, जनवरी 2027 की छमाही में कितना डीए बन सकता है। यहां ये भी बता दें कि आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें भी अगले साल ही सरकार को मिलेंगी। अभी क्या है अनुमान? जुलाई 2026 में इंडस्ट्रियल वर्कर्स के लिए ऑल-इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI-IW) 1.3 पॉइंट बढ़कर 153.2 हो गया। इससे यह संकेत मिलता है कि जनवरी 2027 से केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता (DA) किस दिशा में जा सकता है। दरअसल, श्रम और रोजगार मंत्रालय के तहत आने वाले लेबर ब्यूरो ने 31 अगस्त को जुलाई का CPI-IW डेटा जारी किया। जून 2026 में यह इंडेक्स 151.9 था। जुलाई में साल-दर-साल CPI-IW महंगाई दर 4.57% रही जबकि एक साल पहले यह 2.66% थी। जनवरी 2027 के लिए DA का कैलकुलेशन अभी 64% दिखा रहा है। क्या है गणित? दरअसल, जनवरी 2027 में DA में बदलाव के कैलकुलेशन के लिए अगस्त 2025 से जुलाई 2026 तक के 12 महीनों के CPI-IW औसत का इस्तेमाल किया जाता है। इस दौरान रीडिंग 147.1, 147.3, 147.7, 148.2, 148.2, 148.6, 148.5, 149.1, 149.9, 150.8, 151.9 और 153.2 थीं। इससे 12 महीनों का औसत 149.21 आता है। डीए कैल्कुलेशन के हिसाब से जनवरी 2027 का महंगाई भत्ता लगभग 64% बैठता है। हालांकि, कैलकुलेशन में अगस्त, सितंबर, अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर 2026 के CPI-IW रीडिंग को शामिल किया जाएगा। उन रीडिंग में बदलाव से 12 महीने का औसत बदलेगा और नतीजतन, कैलकुलेट किया गया DA भी बदल जाएगा। अभी कितना है डीए? केंद्रीय कर्मचारियों के लिए DA फिलहाल 60% है। केंद्र सरकार ने जनवरी 2026 से DA में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी करके इसे 58% से बढ़ाकर 60% किया था। अब अगली DA समीक्षा जुलाई 2026 से प्रभावी होनी है, जिसकी औपचारिक घोषणा सरकार की ओर से की जानी बाकी है। DA साल में दो बार यानी 1 जनवरी और 1 जुलाई से संशोधित किया जाता है। जुलाई छमाही के डीए का ऐलान अक्टूबर के महीने में होने की उम्मीद है। जुलाई 2026 का DA और जनवरी 2027 का DA अलग यह समझना जरूरी है कि जुलाई 2026 में लागू होने वाला DA और जनवरी 2027 का संभावित DA अलग-अलग गणना चक्र हैं। जुलाई 2026 की बढ़ोतरी के लिए पहले के CPI-IW आंकड़े इस्तेमाल होते हैं, जबकि जनवरी 2027 की गणना में अगस्त 2025 से दिसंबर 2026 तक का डेटा शामिल होगा। इसलिए जुलाई 2026 का CPI-IW आंकड़ा मुख्य रूप से जनवरी 2027 के DA का शुरुआती संकेत देता है। अभी 64% को अंतिम DA दर मानना जल्दबाजी होगी। सरकार की औपचारिक घोषणा और बाकी CPI-IW आंकड़ों के बाद ही केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलने वाले वास्तविक DA की तस्वीर साफ होगी।

घेपन झील बनी चिंता का कारण! फटने पर कई बस्तियों में तबाही की आशंका, लगेगा EWS

केलांग. नेपाल में चीन अधिकृत तिब्बत की पहाड़ियों में ग्लेशियर फटने से आई बाढ़ के कारण जान माल का भारी नुकसान हुआ है. ऐसे में अब हिमाचल प्रदेश के जिला लाहौल-स्पीति प्रशासन ने 4070 मीटर की ऊंचाई पर घेपन ग्लेशियल झील को लेकर जिला प्रशासन सतर्क हो गया है और झील के पानी की निगरानी की जा रही है. अहम बात है कि इस झील का आकार बीते कुछ सालों में 173 फीसदी बढ़ गया है। जानकारी क अनुसार, अब झील के पास प्रशासन ने अर्ली वार्निंग सिस्टम लगा दिया है. डीसी लाहौल-स्पीति किरण भड़ाना ने बताया कि घेपन ग्लेशियल झील के जलस्तर और अन्य महत्वपूर्ण मानकों की निरंतर निगरानी की जा रही है औऱ सी-डैक, तिरुवनंतपुरम के जरिये झील पर अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित किया जाएगा. उन्होंने बताया कि यह प्रणाली सितंबर माह में स्थापित किए जाने का प्रस्ताव है । उपायुक्त ने बताया कि सी-डैक की ओऱ से सिस्सू झील पर अर्ली वार्निंग सिस्टम का परीक्षण सफलतापूर्वक किया गया है. इस दौरान झील से संबंधित आवश्यक आंकड़े एवं सूचनाएं सफलतापूर्वक प्राप्त की गईं. उन्होंने कहा कि घेपन झील पर भी इसी तकनीक के माध्यम से निगरानी प्रणाली स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है. यह प्रणाली स्थापित करने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) से अंतिम स्वीकृति आदेश अपेक्षित हैं। 14 दिनों तक वैज्ञानिक अध्ययन करेगी विशेषज्ञ टीम किरण भड़ाना ने बताया कि घेपन ग्लेशियल झील से जुड़े संभावित जोखिमों का विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन करने के लिए भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के पांच विशेषज्ञों की टीम 1 सितंबर, 2026 को झील क्षेत्र का दौरा करेगी. विशेषज्ञ टीम लगभग 14 दिनों तक क्षेत्र में रहकर झील एवं इसके आसपास के क्षेत्रों का विस्तृत वैज्ञानिक सर्वेक्षण करेगी. उन्होंने बताया कि विशेषज्ञ टीम की ओर से घेपन झील क्षेत्र की मैपिंग, हिमस्खलन एवं भूस्खलन की दृष्टि से संभावित संवेदनशील क्षेत्रों का सीमांकन, झील की गहराई, जल प्रवाह तथा मौसम संबंधी आंकड़ों का अध्ययन किया जाएगा. इस वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर तैयार विस्तृत रिपोर्ट राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को उपलब्ध करवाई जाएगी. डीसी उन्होंने यह भी बताया कि जिला प्रशासन की ओर से घेपन झील की वर्तमान स्थिति का प्रत्यक्ष अवलोकन करने के लिए सितंबर माह में एक अलग टीम भी झील क्षेत्र में भेजी जाएगी। इसरो ने किया था आगाह डीसी किरण भड़ाना ने बताया कि नवंबर 2023 में इसरो द्वारा विभिन्न माध्यमों से जिला प्रशासन को घेपन झील के बढ़ते आकार के संबंध में सूचित किया गया था. इसरो ने अवगत करवाया था कि झील का आकार सामान्य स्तर की तुलना में काफी बढ़ गया है तथा संभावित जोखिम को देखते हुए आवश्यक एहतियाती कदम उठाने की सलाह दी गई थी. उन्होंने बताया कि इसके बाद जुलाई 2024 में तत्कालीन उपायुक्त के नेतृत्व में विभिन्न विभागों के 23 अधिकारियों एवं कर्मचारियों की टीम ने 4070 मीटर की ऊंचाई पर स्थित घेपन झील का दौरा किया था. इस दौरान झील के संभावित रूप से फटने की स्थिति तथा उससे होने वाले संभावित नुकसान को कम करने के लिए आवश्यक उपायों पर विस्तृत अध्ययन किया गया और एक रिपोर्ट राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को प्रस्तुत की गई। झील फटने की स्थिति में नुकसान कम किरण भड़ाना ने कहा कि विशेषज्ञों की ओर से सुझाए गए उपायों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है, जिला प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी संभावित आपदा की स्थिति में जन-धन की हानि को न्यूनतम किया जा सके तथा प्रभावित क्षेत्रों में समय रहते बचाव एवं राहत कार्य शुरू किए जा सकें. उन्होंने बताया कि घेपन झील के संभावित फटने की स्थिति में सिस्सू से हिमाचल प्रदेश की अंतिम सीमा तक 34 स्थानों को संवेदनशील क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है. इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओऱ से समय-समय पर आपदा से बचाव, त्वरित प्रतिक्रिया एवं आवश्यक सावधानियों के संबंध में जागरूक और प्रशिक्षित किया जा रहा है. इस प्रक्रिया में विभिन्न विभागों को भी शामिल किया जा रहा है, ताकि आपदा की स्थिति में प्रत्येक विभाग अपनी जिम्मेदारियों एवं भूमिका से पूरी तरह अवगत रहे । उन्होंने बताया कि सिस्सू और शाशिन गांव में स्थानीय त्वरित प्रतिक्रिया दल का गठन भी किया गया है. इसके साथ ही आपदा जोखिम न्यूनीकरण से जुड़े कार्यों को और गति प्रदान करने के लिए राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण से अतिरिक्त वित्तीय सहयोग की मांग की गई है। 32 संवेदनशील स्थानों पर होगी हाई फ्लड लेवल मार्किंग उपायुक्त ने बताया कि घेपन झील की दूरी सिस्सू से लगभग 11 किलोमीटर है, जबकि झील से उदयपुर होते हुए जिले की अंतिम सीमा तक की दूरी लगभग 90 किलोमीटर है. संभावित बाढ़ के प्रभाव को देखते हुए जिले के संवेदनशील क्षेत्रों में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के तहत हाई फ्लड लेवल मार्किंग का कार्य शुरू किया गया है. उन्होंने बताया कि एचएफएल मार्किंग का मुख्य उद्देश्य बाढ़ के संभावित स्तर को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाना तथा आपदा जोखिम को कम करने के लिए जमीन पर एक स्पष्ट एवं स्थायी संदर्भ बिंदु उपलब्ध करवाना है. इसके लिए कुल 32 स्थानों की पहचान की गई है. उन्होंने कहा कि संवेदनशील स्थानों पर की जाने वाली मार्किंग से सामान्य एवं संभावित बाढ़ के स्तर का स्पष्ट संकेत मिलेगा. इससे नदी किनारे रहने वाले लोगों में बाढ़ के जोखिम को लेकर जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ आपदा की स्थिति में तैयारी एवं त्वरित प्रतिक्रिया को भी मजबूत किया जा सकेगा । ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड की निगरानी के लिए विशेष समिति उपायुक्त ने बताया कि सभी एहतियाती उपायों के अतिरिक्त जिला स्तर पर एक ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) मॉनिटरिंग कमेटी का गठन किया जा रहा है. इसमें विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा पर्वतारोहण एवं संबंधित क्षेत्र के अनुभवी लोग शामिल किए जाएंगे. यह समिति घेपन झील एवं इसके आसपास के क्षेत्र का समय-समय पर फील्ड निरीक्षण करेगी तथा संभावित जोखिमों, जिनमें आसपास की ढीली चट्टानें एवं अस्थिर भू-भाग सहित अन्य संभावित खतरे शामिल हैं, का आकलन करेगी. समिति जोखिम कम करने की रणनीतियों, आवश्यक शमन उपायों तथा आपदा की स्थिति में प्रभावी प्रतिक्रिया के लिए आवश्यक कार्ययोजना पर भी काम करेगी. उपायुक्त किरण भड़ाना ने कहा … Read more

E20 vs E100: क्या है Flex Fuel टेक्नोलॉजी और कौन-सा ईंधन है अलग? समझें पूरी बात

मुंबई  भारत में EV कंपनियां तेजी से बढ़ रही हैं लेकिन दूसरी तरफ पेट्रोल इंजन के लिए भी नए ऑप्शन तलाशे जा रहे हैं. कई कंपनियां अब भारत में E100 Flex Fuel वाहन लाने की तैयारी कर रही हैं. Maruti Suzuki Wagon R से लेकर Hyundai Creta तक Flex Fuel वर्जन में आ चुकी हैं।  अभी देश में पेट्रोल में Ethanol ब्लेंडिंग तेजी से बढ़ाई जा रही है. जहां एक तरफ लोग पेट्रोल में ज्यादा एथेनॉल मिलाने को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं सरकार और वाहन कंपनियां अब ऐसे इंजन तैयार करने की दिशा में बढ़ रही हैं, जो ज्यादा मात्रा में एथेनॉल वाले फ्यूल पर भी चल सकें. लेकिन आखिर Flex Fuel क्या है और E100 वाहन सामान्य पेट्रोल वाहन से कितने अलग होंगे? क्या होता है Flex Fuel? आसान भाषा में समझें तो Flex Fuel व्हीकल ऐसे वाहन होते हैं जो पेट्रोल और एथेनॉल के अलग-अलग मिक्स्चर वाले फ्यूल पर चल सकते हैं. ऐसे वाहन नॉर्मल पेट्रोल, E20, E85 और कुछ मामलों में E100 तक इस्तेमाल कर सकते हैं. फ्यूल में मौजूद एथेनॉल की मात्रा को E नंबर से बताया जाता है. उदाहरण के लिए E20 में 20 प्रतिशत Ethanol और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है. E85 में 85 प्रतिशत Ethanol होता है. इसी तरह E100 लगभग पूरी तरह एथेनॉल फ्यूल होता है।  हालांकि, E20 के लिए तैयार वाहन और E100 Flex Fuel वाहन एक जैसे नहीं होते हैं. E20 व्हीकल को एक निश्चित मात्रा में Ethanol वाले पेट्रोल के लिए तैयार किया जाता है, जबकि Flex Fuel वाहन को फ्यूल में Ethanol की अलग-अलग मात्रा के साथ काम करने के लिए डिजाइन करना पड़ता है. इसके लिए फ्यूल लाइन, सील्स, इंजेक्टर, फ्यूल पंप, सेंसर्स, इंजन मैपिंग और कैलिब्रेशन जैसे कई हिस्सों में बदलाव करने पड़ते हैं. वजह ये है कि Ethanol का बिहेव पेट्रोल से अलग होता है. ये अलग तरीके से जलता है और इसकी एनर्जी एफिशियंसी भी पेट्रोल से कम होती है।  E100 में सबसे बड़ा फायदा Ethanol का एक बड़ा फायदा इसका हाई ऑक्टेन रेटिंग है. हाई ऑक्टेन फ्यूल इंजन में नॉकिंग को बेहतर तरीके से रोकता है. इससे इंजीनियर ज्यादा प्रभावी इंग्निशन टाइमिंग और कुछ मामलों में ज्यादा कंप्रेशन रेश्यो का इस्तेमाल कर सकते हैं. यानी अगर इंजन को Ethanol के हिसाब से अच्छी तरह तैयार किया जाए, तो परफॉर्मेंस बेहतर हो सकती है. टर्बो चार्ज इंजन और परफॉर्मेंस कार में भी लंबे समय से Ethanol Blends के फायदे देखे जाते रहे हैं. लेकिन यहां एक बड़ी कमी भी है।  E100 वाहन के माइलेज पर हो सकता है असर Ethanol की एनर्जी डेंसिटी पेट्रोल से कम होती है. आसान भाषा में कहें तो एक लीटर Ethanol में एक लीटर पेट्रोल की तुलना में कम एनर्जी होती है. इसका मतलब है कि E100 वाहन को समान दूरी तय करने के लिए ज्यादा फ्यूल की जरूरत पड़ सकती है. इस वजह से केवल यह देखना काफी नहीं होगा कि Ethanol पेट्रोल से सस्ता है या नहीं. असली सवाल ये होगा कि प्रति किलोमीटर वाहन चलाने में कितना खर्च आता है।  अगर Ethanol की कीमत पेट्रोल से काफी कम रखी जाती है, तो ज्यादा फ्यूल कंजप्शन के बावजूद वाहन चलाना सस्ता पड़ सकता है. लेकिन अगर दोनों फ्यूल की कीमत में ज्यादा अंतर नहीं हुआ तो कम माइलेज के कारण ग्राहक को बार-बार तेल भरवाना पड़ सकता है।  E100 गाड़ी चलाने में कैसा लगेगा? रोजमर्रा की ड्राइविंग में E100 Flex Fuel वाहन सामान्य पेट्रोल वाहन से बहुत अलग महसूस नहीं होगा. मॉडर्न Flex Fuel वाहन में सेंसर्स और ECU मैपिंग फ्यूल में मौजूद Ethanol की मात्रा को पहचानकर फ्यूल सप्लाई और Ignition को अपने आप बदल सकते हैं. यानी ड्राइवर को हर बार फ्यूल भरवाते समय कोई अलग मोड चुनने या इंजन की सेटिंग बदलने की जरूरत नहीं होगी. एक्सलेरेशन सामान्य पेट्रोल वाहन जैसा हो सकता है.  लेकिन High-Ethanol फ्यूल पर माइलेज कम होना लगभग तय माना जा रहा है. इसलिए इसका असर सबसे ज्यादा फ्यूल कंजम्प्शन और हर महीने के खर्च में दिखाई देगा।  ठंड में स्टार्ट करना हो सकती है चुनौती Ethanol पेट्रोल की तरह आसानी से वेपोरॉइज नहीं होता है. ज्यादा एथेनॉल वाले फ्यूल में ठंड के मौसम में इंजन स्टार्ट करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है. भारत ठंडा देश नहीं है लेकिन उत्तर भारत के सर्द इलाकों और पहाड़ी क्षेत्रों में यह वाहन की कैलिब्रेशन के लिए चुनौती बन सकता है. कंपनियों को ये सुनिश्चित करना होगा कि अलग-अलग मौसम में वाहन आसानी से स्टार्ट हो। 

PF खाताधारकों के लिए बड़ी खबर! EPFO 3.0 में ATM-UPI से जोड़ने का प्लान

 नई दिल्ली प्रोविडेंट फंड (PF) से पैसे निकालने वाले करोड़ों नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपने मौजूदा सिस्टम को अपग्रेड कर EPFO 3.0 लाने की तैयारी में है. इसके तहत एडवांस क्लेम की प्रक्रिया को तेज और आसान बनाने पर फोकस किया जा रहा है।  रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीमारी, शादी या घर खरीदने जैसी जरूरतों के लिए ₹5 लाख तक के एडवांस क्लेम 3 से 4 दिन में सेटल किए जा सकते हैं. हालांकि, इस प्रस्तावित सुविधा को लेकर EPFO की ओर से अंतिम आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है. इसलिए फिलहाल इसे संभावित बदलाव के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।  क्या है EPFO 3.0? EPFO 3.0 को मौजूदा आईटी सिस्टम का ज्यादा आधुनिक और सेंट्रलाइज्ड वर्जन माना जा रहा है. इसका मकसद PF से जुड़े कामकाज को ज्यादा तेज, आसान और सुविधाजनक बनाना है. मौजूदा व्यवस्था में EPFO का डेटा अलग-अलग रीजनल ऑफिस के सर्वर से जुड़ा हुआ है. इसकी वजह से कई बार पोर्टल पर तकनीकी दिक्कतें और सर्वर डाउन जैसी समस्याएं सामने आती हैं. नए सिस्टम में डेटा और प्रोसेसिंग को ज्यादा सेंट्रलाइज्ड और आधुनिक बनाने की योजना है. सीधे शब्दों में कहें तो EPFO चाहता है कि PF खाते से जुड़े काम बैंकिंग सेवाओं की तरह ज्यादा आसान और डिजिटल तरीके से किए जा सकें।  ऑटो सेटल होंगे ₹5 लाख तक के क्लेम? EPFO 3.0 में ऑटो-सेटलमेंट को और व्यापक बनाने की योजना बताई जा रही है. इसके तहत एडवांस क्लेम को सिस्टम खुद प्रोसेस कर सकता है. बीमारी, शादी और घर खरीदने जैसी जरूरतों से जुड़े क्लेम में अगर सभी जरूरी जानकारी और शर्तें पूरी होती हैं, तो कंप्यूटराइज्ड सिस्टम डेटा का वेरिफिकेशन कर सकता है. ऐसे मामलों में हर क्लेम को मैनुअली अप्रूव करने के लिए अधिकारी के हस्तक्षेप की जरूरत कम हो सकती है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ₹5 लाख तक के एडवांस क्लेम को करीब 3 से 4 दिन में सेटल करने का लक्ष्य हो सकता है. क्लेम मंजूर होने के बाद पैसे सीधे कर्मचारी के बैंक खाते में ट्रांसफर किए जाएंगे।  क्लाउड-बेस्ड होगा नया EPFO सिस्टम EPFO 3.0 को क्लाउड-बेस्ड सिस्टम में अपग्रेड करने की तैयारी है. इसका मकसद मौजूदा तकनीकी समस्याओं को कम करना और पोर्टल की क्षमता व स्थिरता बढ़ाना है. अभी कई बार कर्मचारी PF से जुड़ा काम करने के लिए पोर्टल पर लॉगिन करते हैं, लेकिन सर्वर या वेबसाइट की तकनीकी समस्या के कारण उन्हें परेशानी होती है. नए सिस्टम से ऐसी दिक्कतों को कम करने और ऑनलाइन सेवाओं को ज्यादा सुचारू बनाने की उम्मीद है।  ATM और UPI से PF विड्रॉल की सुविधा? EPFO के डिजिटल बदलाव की चर्चा सिर्फ ऑनलाइन क्लेम तक सीमित नहीं है. भविष्य में PF खाते को आधुनिक बैंकिंग सिस्टम और UPI जैसे डिजिटल पेमेंट नेटवर्क से जोड़ने की योजना पर भी काम होने की बात सामने आई है. इसके तहत छोटे एडवांस या इमरजेंसी जरूरतों के लिए कर्मचारियों को लंबी प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत कम हो सकती है. मेडिकल इमरजेंसी जैसी परिस्थितियों में तय सीमा तक ATM या UPI के जरिए PF से पैसे निकालने की सुविधा देने के विकल्प पर भी विचार किए जाने की बात कही जा रही है. हालांकि, यह सुविधा अभी लागू नहीं हुई है और इसके लिए आधिकारिक नियम व प्रक्रिया का इंतजार करना होगा।  EPFO 3.0 के लॉन्च में क्यों हो रही देरी? EPFO 3.0 की कुछ सुविधाओं को पहले जुलाई में लॉन्च किए जाने की चर्चा थी. हालांकि, वेबसाइट और सिस्टम से जुड़ी तकनीकी दिक्कतों के कारण लॉन्च टल गया. इसके बाद अगस्त में लॉन्च होने की संभावना जताई गई, लेकिन यह भी नहीं हो सका. अब सितंबर में इसके कुछ फीचर्स शुरू किए जाने की उम्मीद की जा रही है. हालांकि, जब तक EPFO की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं होती, तब तक लॉन्च की तारीख और सुविधाओं को लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं मानी जा सकती।