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ईसाई अफसर की कट्टरता पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा— सेना में ऐसी मानसिकता बर्दाश्त नहीं

नई दिल्ली  सशस्त्र बलों में धार्मिक आचरण से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को भारतीय सेना से बर्खास्त किए गए ईसाई अफसर सैमुअल कमलेसन की याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने उनके आचरण को घोर अनुशासनहीनता करार देते हुए कहा कि ऐसे कैंटैंकरस (झगड़ालू) व्यक्ति सेना में नहीं हो सकते।   मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा- यदि किसी सेना अधिकारी का यही रवैया होगा तो फिर क्या कहा जाए! यह घोर अनुशासनहीनता है। वह चाहे जितने भी अच्छे अधिकारी रहे हों, लेकिन भारतीय सेना के लिए मिसफिट हैं… सेना के पास आज जितनी बड़ी जिम्मेदारियां हैं, उनमें ऐसे व्यक्तियों को जगह नहीं दी जा सकती। क्या है मामला? तीसरी घुड़सवार सेना रेजिमेंट के पूर्व लेफ्टिनेंट सैमुअल कमलेसन भारतीय सेना अधिकारी थे जिन्हें मार्च 2017 में बर्खास्त कर दिया गया था क्योंकि उन्होंने एक ईसाई अधिकारी होने के नाते अपनी रेजिमेंट में धार्मिक परेड (मंदिर और गुरुद्वारे) में भाग लेने से इनकार कर दिया था। इस संबंध में उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारी के आदेश का पालन करने से इनकार कर दिया था। आदेश यह था कि वे पंजाब में स्थित एक गुरुद्वारे के भीतर जाकर पूजा-सम्बंधी अनुष्ठान (पूजा/पुजा) करें। 2017 में कमीशन पाए लेफ्टिनेंट कमलेसन को सिख स्क्वाड्रन में तैनात किया गया था, जहां रेजिमेंटल परेड के दौरान वह मंदिर और गुरुद्वारे के अंतरकक्ष में प्रवेश करने से लगातार इनकार करते रहे। कमलेसन का तर्क था कि- ईसाई होने के नाते वह मंदिर या गुरुद्वारे के मुख्य गर्भगृह में नहीं जा सकते। उनका यह कदम सैनिकों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने के लिए भी था ताकि किसी को न लगे कि वह किसी धार्मिक अनुष्ठान में गलत तरीके से भाग ले रहे हैं। हालांकि, सेना का कहना था कि कमांडिंग अधिकारियों ने कई बार उन्हें समझाया, ईसाई पादरी ने भी स्पष्ट किया कि ‘सर्व-धर्म स्थल’ में जाना ईसाई धर्म के विरुद्ध नहीं है, लेकिन इसके बावजूद अधिकारी ने अपना रवैया नहीं बदला। इस आधार पर 2021 में उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। दिल्ली हाई कोर्ट पहले ही कर चुका था याचिका खारिज मई 2024 में दिल्ली हाई कोर्ट ने भी कमलेसन की याचिका खारिज करते हुए कहा था कि उन्होंने अपने धर्म को वरिष्ठ अधिकारी के वैध आदेश से ऊपर रखा, जो कि स्पष्ट रूप से अनाचार और अनुशासनहीनता है। कोर्ट ने इसे भारतीय सेना की मौलिक सैन्य भावना के विपरीत बताया था। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? आज सुप्रीम कोर्ट ने भी हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाला बागची ने कहा- जब आपका अपना पादरी आपको सलाह देता है, तो आपको उसी पर चलना चाहिए। आप अपनी निजी समझ के आधार पर यह नहीं तय कर सकते कि आपकी वर्दी में रहते हुए आपका धर्म क्या अनुमति देता है और क्या नहीं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने टिप्पणी की- यह व्यक्ति सेना में किस तरह का संदेश दे रहा है? यह भारी अनुशासनहीनता है… ऐसे लोगों का सेना में कोई स्थान नहीं। सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणियां सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने तर्क दिया कि सेना में जाट, राजपूत आदि जातिगत रेजिमेंट होने पर उसे ‘धर्मनिरपेक्ष’ कैसे कहा जा सकता है? लेकिन पीठ इस तर्क से सहमत नहीं हुई। CJI सूर्यकांत ने कहा- सेना पूरी तरह धर्मनिरपेक्ष संस्थान है। आप अपनी निजी धार्मिक व्याख्या के आधार पर आदेश का पालन नहीं करने का अधिकार नहीं रखते। आपने पादरी की बात तक नहीं मानी। यह सैनिकों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कदम है। न्यायमूर्ति जॉयमाला बागची ने कहा- आपने अपने धर्म की निजी व्याख्या कर ली। जबकि ईसाई धर्म का कोई ‘आवश्यक तत्व’ ऐसा नहीं है जो मंदिर या गुरुद्वारे में प्रवेश को प्रतिबंधित करता हो। कमलेसन के वकील ने दावा किया कि बाइबिल के फर्स्ट कमांडमेंट में ‘दूसरे देवताओं’ के आगे झुकने से मना किया गया है। इस पर कोर्ट ने कहा- यह आपकी व्यक्तिगत समझ है। पादरी ने भी कहा कि ड्यूटी के हिस्से के रूप में ‘सर्व धर्म स्थल’ में जाना गलत नहीं है। कानूनी अधिकारों और अनुशासन पर टिप्पणी करते हुए अदालत ने कहा- संविधान आपको अपने धर्म का पालन करने का अधिकार देता है, लेकिन वर्दी में रहते हुए आपका व्यवहार सैन्य अनुशासन से बंधा होता है। निजी आस्था के नाम पर सेना के आदेश की अवहेलना नहीं की जा सकती।

जुबिन गर्ग केस में बड़ा खुलासा: हत्या के एंगल पर 7 सहयोगी अरेस्ट, CM ने सदन में दी जानकारी

दिसपुर  असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने मंगलवार को विधानसभा में कहा कि गायक जुबिन गर्ग की सिंगापुर में समुद्र में तैरते समय हुई मौत ‘स्पष्ट तौर पर हत्या’ का मामला है। गर्ग की मौत की परिस्थितियों की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मामले में हत्या की धाराएं भी जोड़ दी हैं। शर्मा ने असम विधानसभा में गायक जुबिन गर्ग की मौत के मुद्दे पर चर्चा के लिए विपक्ष द्वारा लाए गए कार्य स्थगन प्रस्ताव के तहत चर्चा पर यह बात कही। कार्य स्थगन प्रस्ताव को मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा के अनुरोध पर विधानसभा अध्यक्ष ने स्वीकार कर लिया था।  शर्मा ने कहा- प्रारंभिक जांच के बाद असम पुलिस को यकीन हो गया था कि यह गैर इरादतन हत्या का मामला नहीं है बल्कि यह स्पष्ट तौर पर हत्या है। उन्होंने कहा- इसीलिए, उनकी मौत के तीन दिन के भीतर ही मामले में बीएनएस की धारा 103 जोड़ दी गई। उन्होंने बताया कि राज्य पुलिस की सीआईडी ​​के तहत गठित एसआईटी ने अब तक इस मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया है, 252 गवाहों से पूछताछ की है और 29 वस्तुएं जब्त की हैं। शर्मा ने दावा किया कि एक आरोपी ने गर्ग की हत्या की और अन्य ने उसकी मदद की। हत्या के मामले में चार-पांच लोगों पर मामला दर्ज किया गया है। सीएम ने विधानसभा को बताया कि मामले में अब तक सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें प्रमुख रूप से- श्यामकानु महंता, सिद्धार्थ शर्मा (ज़ुबीन के मैनेजर), शेखर ज्योति गोस्वामी (बैंडमेट), अमृतप्रभा महंता (को-सिंगर), ये सभी वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं। इसके अलावा, ज़ुबीन के चचेरे भाई संदीपान गर्ग और उनके दो पीएसओ- नंदेश्वर बोरा और परेश बैश्य को भी गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने कहा- दिसंबर में हत्या के मामले में आरोपपत्र दाखिल होने के बाद, जांच का दायरा बढ़ाकर लापरवाही, आपराधिक विश्वासघात और अन्य पहलुओं को भी शामिल किया जाएगा। शर्मा राज्य के गृह मंत्री भी हैं। उन्होंने दावा किया कि एसआईटी एक ठोस आरोपपत्र दाखिल करेगी और अपराध के पीछे का मकसद राज्य के लोगों को झकझोर देगा। जुबिन गर्ग की 19 सितंबर को सिंगापुर में समुद्र में तैरते समय मौत हो गई थी।

मोहन भागवत का भावुक संबोधन: राम राज्य स्थापित, याद किए विशेष नाम

नई दिल्ली  राम मंदिर पर धर्मध्वजा को फहराया गया है। 161 फीट की ऊंचाई पर इस केसरिया ध्वज को फहराए जाने के बाद मोहन भागवत ने संबोधित किया। संघ प्रमुख ने कहा कि इसके साथ ही राम मंदिर का निर्माण संपूर्ण हो गया है और इससे उन लोगों की आत्मा को तृप्ति मिली होगी, जिन्होंने इसके लिए संघर्ष किया और अपनी आंखों के सामने सपना साकार होते नहीं देख सके। मोहन भागवत ने कहा कि यह धर्म ध्वज वही है, जो रामराज्य के दौरान लहराया गया था। विश्व हिंदू परिषद के संरक्षक रहे अशोक सिंहल, महंत रामचंद्र दास परमहंस और विष्णु हरि डालमिया जैसे लोगों का नाम लिया और कहा कि उनकी आत्मा को संतुष्टि मिली होगी। आरएसएस लीडर ने कहा कि अब हमारा यही संकल्प होना चाहिए कि यह धर्म ध्वजा और ऊंची प्रतिष्ठा हासिल करे। हम ऐसे समाज का निर्माण करें, जिसमें समरसता हो और देश समृद्धि के शिखर पर पहुंचे। हिंदू समाज ने लगातार 500 साल और फिर बाद के लंबे आंदोलन में हमने साबित किया कि निरंतरता रहे तो सब हासिल होता है। यही बात हमें भगवान कृष्ण और सूर्य समझाते हैं। सूर्य हर दिन सतत निकलता है और ढलता है। लेकिन उसकी प्रक्रिया कभी रुकती नहीं। ऐसे ही हिंदू समाज भी नहीं रुका और हम 500 साल बाद इस केसरिया ध्वज को अयोध्या के राम मंदिर में देख रहे हैं। मोहन भागवत ने कहा कि हमने जैसा सपना देखा था, उससे भी सुंदर यह मंदिर बन गया है। उन्होंने कहा कि दिवंगत पवित्र आत्माओं की कल्पा जैसी थी, उससे भी दिव्य यह मंदिर है। यह ध्वजा है। हम जो दृश्य देख रहे हैं, यह हमारे जन्म की सफलता है और सपनों के साकार होने जैसा है। मोहन भागवत ने कहा कि हिंदू समाज ने सदियों तक संघर्ष किया और तब यह शुभ अवसर आया है। इस मौके पर पीएम नरेंद्र मोदी, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदी बेन पटेल समेत कई गणमान्य लोग मौजूद थे। धर्म ध्वजा को पीएम मोदी ने फहराया और उसके बाद कार्यक्रम को भी संबोधित किया।  

बंगाल में SIR को लेकर हंगामा: BJP कार्यकर्ताओं और BLOs में तीखी झड़प, माहौल गर्म

कोलकाता  कोलकाता में भाजपा कार्यकर्ताओं का पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के सामने BLO के एक फोरम के प्रदर्शनकारियों से आमना-सामना हो गया। इस दौरान पुलिस ने बीच-बचाव किया। सीनियर अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। बीएलओ अधिकार रक्षा समिति के कई सदस्य सीईओ कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे थे। उनका आरोप था कि मतदाता सूची के एसआईआर के दौरान उन पर काम का अत्यधिक बोझ है। मामला तब बिगड़ गया जब कोलकाता नगर निगम पार्षद सजल घोष के नेतृत्व में लगभग 50 भाजपा कार्यकर्ता रात 11 बजे मौके पर पहुंचे। सीईओ कार्यालय में बंद चुनाव आयोग के अधिकारियों को डराकर SIR को रोकने के तृणमूल कांग्रेस के कथित प्रयास के खिलाफ नारे लगाने लगे।   रिपोर्ट के मुताबिक, स्थिति तब बिगड़ गई जब प्रदर्शनकारी बीएलओ ने जवाबी नारे लगाए। भाजपा पर पश्चिम बंगाल में वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाने के लिए निर्वाचन आयोग के साथ मिलीभगत से काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा कार्यकर्ता शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे BLO को आतंकित करने और भड़काने की कोशिश कर रहे थे, जो केवल सीईओ से मिलना चाहते थे। घोष ने दावा किया, ‘प्रदर्शनकारी बीएलओ नहीं हैं। वे तृणमूल समर्थित संगठनों के नेता हैं।’ एक-दूसरे पर जमकर किए कटाक्ष बीएलओ फोरम के सदस्यों ने आरोपों को खारिज कर दिया। जब दोनों समूह मीडियाकर्मियों के सामने एक-दूसरे पर कटाक्ष कर रहे थे, तभी उपायुक्त इंदिरा मुखर्जी के नेतृत्व में पुलिस बल उनके बीच खड़ा हो गया ताकि वे टकराव होने से रोक सकें। पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल सोमवार रात करीब 11.40 बजे अपने कार्यालय से बाहर निकले। वे बीएलओ के धरने के कारण कार्यालय में ही थे। उन्होंने देर रात के घटनाक्रम पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। तनाव उस समय कम हुआ, जब उन्हें और निर्वाचन आयोग के अन्य अधिकारियों को पुलिस ने उनके आवासों तक पहुंचाया।  

ज्वालामुखी की राख ने 4500 KM की दूरी तय की, पढ़ें 5 अहम सवालों के जवाब

इथियोपिया        अफ्रीका के एक दूरस्थ कोने में मौजूद एक ज्वालामुखी 12 हजार साल बाद अचानक फट पड़ा. और उसकी राख 4,500 किलोमीटर दूर भारत की राजधानी दिल्ली तक पहुंच रहा है. 23 नवंबर 2025 को इथियोपिया के अफार इलाके में हायली गुबी ज्वालामुखी में विस्फोट हुई. यह ज्वालामुखी इतने सालों से सोया हुआ था, लेकिन अब इसने आसमान में 14 किलोमीटर ऊंची राख की चादर बिछा दी है.  आइए समझते हैं यह राख इतनी दूर कैसे पहुंची? क्या इससे दिल्ली का प्रदूषण बढ़ेगा? अन्य महत्वपूर्ण सवालों के जवाब खोजते हैं. पहले घटना की पूरी जानकारी समझते हैं, फिर 5 सवालों पर नजर डालते हैं. हायली गुबी ज्वालामुखी: कौन है यह 'सोया हुआ राक्षस'? हायली गुबी एक शील्ड ज्वालामुखी है, जो इथियोपिया के अफार क्षेत्र में स्थित है. यह एर्ता अले ज्वालामुखी श्रृंखला का सबसे दक्षिणी हिस्सा है. अफार क्षेत्र को 'पृथ्वी का नर्क' भी कहा जाता है, क्योंकि यहां तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है. यह पूर्वी अफ्रीकी रिफ्ट वैली का हिस्सा है – जहां पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेटें (प्लेटें जो पृथ्वी की सतह को बनाती हैं) लगातार अलग हो रही हैं. विस्फोट का समय और आकार: 23 नवंबर 2025 को भारतीय समयानुसार दोपहर 2 बजे यह फटा. राख का गुबार समुद्र तल से 14 km ऊपर चला गया. वैज्ञानिकों के अनुसार, इससे पहले 12000 साल (होलोसीन काल) में इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है. सैटेलाइट डेटा से पता चला कि इसमें सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) गैस की भारी मात्रा थी. वैज्ञानिक कारण: ज्वालामुखी फटने से पहले, एर्ता अले के नीचे 50 किलोमीटर लंबी मैग्मा की दीवार (मैग्मा डैम) टूट गई. इससे घंटों पहले 4.7 तीव्रता का भूकंप आया था. पूर्वी अफ्रीकी रिफ्ट में सुपर प्लूम (गर्म मैग्मा का विशाल गुबार) का दबाव बढ़ रहा था, जो प्लेटों के अलग होने से पैदा होता है. यह रिफ्ट वैली अफ्रीका महाद्वीप को दो भागों में बांटने वाली प्रक्रिया का हिस्सा है. स्थानीय प्रभाव: राख पास के गांव अफदेरा पर गिरी. कोई मौत नहीं हुई, लेकिन चरवाहों को चिंता है कि राख से चरागाह खराब हो जाएंगे और पशु बीमार पड़ सकते हैं. दनाकिल रेगिस्तान में कुछ पर्यटक फंस गए. विमानन पर असर: राख लाल सागर पार यमन और ओमान की ओर बढ़ी, फिर पूर्व की ओर पाकिस्तान, उत्तरी भारत और चीन तक. भारत में कई उड़ानें रद्द हुईं – जैसे एयर इंडिया की मुंबई-हैदराबाद और इंडिगो की कन्नूर-अबू धाबी. डीजीसीए ने एयरलाइंस को चेतावनी दी कि राख इंजन को नुकसान पहुंचा सकती है. अब सवाल आता है – यह राख दिल्ली कैसे पहुंची? और क्या इससे हमारी हवा खराब हो जाएगी? आइए, 5 प्रमुख सवालों के सरल जवाब समझते हैं, वैज्ञानिक कारणों के साथ. 1. साढ़े 4 हजार किलोमीटर दूर से दिल्ली कैसे पहुंची ज्वालामुखी की राख? हायली गुबी से दिल्ली की दूरी लगभग 4,500 किलोमीटर है. राख इतनी दूर पहुंचने का मुख्य कारण है वायुमंडलीय हवाओं की जेट स्ट्रीम.   वैज्ञानिक कारण: ज्वालामुखी विस्फोट से राख बारीक कणों (जैसे कांच और चट्टान के टुकड़े) के रूप में निकलती है. यह इतनी ऊंची (14 किमी) जाती है कि स्ट्रेटोस्फीयर (उपरी वायुमंडल) में पहुंच जाती है. यहां जेट स्ट्रीम नाम की तेज हवाएं (100-130 किमी/घंटा की रफ्तार) चलती हैं, जो पश्चिम से पूर्व की ओर बहती हैं.  23 नवंबर को राख लाल सागर पार यमन-ओमान पहुंची, फिर अरब प्रायद्वीप से पाकिस्तान होते हुए राजस्थान में घुसी. 24 नवंबर रात 11 बजे तक यह दिल्ली पर छा गई. सैटेलाइट मैप्स (जैसे टूलूज VAAC) से पता चला कि यह 15,000 से 45,000 फीट ऊंचाई पर बह रही थी. अगर हवाएं न होतीं, तो राख बस 50-100 किमी दूर गिर जाती. याद कीजिए 2010 का आइसलैंड विस्फोट – उसकी राख भी यूरोप भर में फैली थी. 2. क्या इससे दिल्ली का प्रदूषण बढ़ जाएगा? नहीं, ज्यादा चिंता की कोई बात नहीं. राख ऊंचाई पर है, इसलिए सतह पर प्रदूषण का बड़ा असर नहीं पड़ेगा. वैज्ञानिक कारण: दिल्ली का AQI पहले से ही खराब (स्मॉग से) है, लेकिन यह राख स्ट्रेटोस्फीयर में है, जहां हवा साफ रहती है. IMD के निदेशक एम. मोहपात्रा ने कहा कि यह नीचे नहीं उतरेगी, इसलिए PM2.5 या PM10 पर ज्यादा प्रभाव नहीं. हां, आकाश धुंधला दिख सकता है. विजिबिलिटी कम हो सकती है. सल्फर डाइऑक्साइड गैस बादल बनाकर बारिश ला सकती है, जो प्रदूषण धो दे. लंबे समय में, SO₂ एसिड रेन पैदा कर सकती है, लेकिन यहां मात्रा कम है. कुल मिलाकर, स्थानीय प्रदूषण (कारें, फैक्टरियां) से ज्यादा खतरा नहीं. 3. ज्वालामुखी इतने साल बाद क्यों फटा? क्या कारण था? 12,000 साल की नींद टूटने का राज है पृथ्वी के अंदर की उथल-पुथल. वैज्ञानिक कारण: हायली गुबी पूर्वी अफ्रीकी रिफ्ट का हिस्सा है, जहां अफ्रीकी प्लेट दो भागों में बंट रही है. नीचे सुपर प्लूम नाम का गर्म मैग्मा का विशाल भंडार दबाव बना रहा था. विस्फोट से पहले मैग्मा की 50 किमी लंबी दीवार टूटी, जो एर्ता अले से मैग्मा लाई. भूकंप (4.7 तीव्रता) ने इसे ट्रिगर किया. वैज्ञानिक कहते हैं, यह रिफ्ट वैली की नया महाद्वीप बनने की प्रक्रिया है – लाखों साल बाद यहां नया समुद्र बन सकता है. पहले के विस्फोट अनदेखे रह गए क्योंकि इलाका दूरदराज है. 4. स्थानीय लोगों और पर्यावरण पर क्या असर पड़ा? इथियोपिया में तत्काल खतरा कम है, लेकिन लंबे समय के प्रभाव चिंताजनक हैं.     वैज्ञानिक कारण: राख मिट्टी की उर्वरता कम कर देती है, क्योंकि इसमें सिलिका (कांच जैसे कण) होते हैं जो पानी सोख लेते हैं.     चरवाहों के लिए खतरा: पशु राख की वजह से सांस की बीमारी पा सकते हैं. दनाकिल रेगिस्तान में पर्यटक फंस गए, क्योंकि राख से सड़कें फिसलन भरी हो गईं.     पर्यावरण पर: SO₂ से एसिड रेन हो सकती है, जो फसलों को नुकसान पहुंचाए. लेकिन कोई मौत नहीं हुई, क्योंकि इलाका कम आबादी वाला है. वैज्ञानिक अब राख के नमूने ले रहे हैं ताकि इतिहास की जांच हो सके. 5. क्या यह रिफ्ट वैली में बाढ़ का कारण बन सकता है? सुपर प्लूम का क्या रोल? यह सवाल दिलचस्प है – हायली गुबी रिफ्ट वैली के उत्तरी छोर पर है. सुपर प्लूम से बाढ़ का कनेक्शन हो सकता है, लेकिन सीधा नहीं. वैज्ञानिक कारण: … Read more

अफगानिस्तान में आतंक की बारिश, बच्चों समेत 9 की दर्दनाक मौत

काबुल  पाकिस्तान के पेशावर में आतंकी हमला हुआ, पाकिस्तान खुद के बुने जाल में फंस रहा है. हालांकि इस देश की जड़ों में जो आतंक बसा है वो खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है. अब पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर हमला कर दिया है. अफगानिस्तान के खोस्त प्रांत के एक रिहायशी इलाके में पाकिस्तानी सेना के हमले में नौ बच्चों समेत दस लोग मारे गए. अफगान सरकार ने मंगलवार को यह जानकारी दी है. घरों को बनाया गया निशाना अधिकारियों के अनुसार, यह हमला आधी रात के कुछ समय बाद हुआ और इसमें एक स्थानीय निवासी के घर को निशाना बनाया गया, जिससे सीमा पर दुश्मनी बढ़ने की चिंता फिर बढ़ गई है. तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने बताया कि यह हमला मंगलवार को सुबह करीब 12:00 बजे खोस्त के गुरबुज जिले के मुगलगई इलाके में हुआ. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी हमलावर सेनाओं ने एक लोकल नागरिक, वालियत खान, काजी मीर के बेटे के घर पर बमबारी की, इस हमले में 9 बच्चे (पांच लड़के और चार लड़कियां) और एक महिला की मौत हो गई और उनका घर तबाह हो गया. पहले भी पाकिस्तान ने किया था अटैक मुजाहिद ने यह भी बताया कि उसी रात कुनार और पक्तिका प्रांतों में अलग-अलग हवाई हमले हुए, जिनमें चार आम नागरिक घायल हो गए. खोस्त में हुआ ताजा हमला लोगों में डर पैदा कर रहा है कि पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच सीमा पर फिर से हिंसा का नया दौर शुरू हो सकता है. अक्टूबर में दोनों देशों के बीच भारी झड़पों के बाद कुछ समय के लिए लड़ाई रुकी हुई थी, लेकिन अब फिर तनाव बढ़ गया है. इससे पहले, 9 अक्टूबर को पाकिस्तान ने काबुल, खोस्त, जलालाबाद और पक्तिका में एयरस्ट्राइक की थी. इसके बाद अफगान तालिबान ने भी जवाबी कार्रवाई की. दोनों देशों में हुई थी गोलीबारी तालिबान सेनाओं ने 11 और 12 अक्टूबर की रात के बीच अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर कई पाकिस्तानी मिलिट्री पोस्ट पर हमला किया, जिससे भारी गोलीबारी हुई. हमलों के बाद, तालिबान के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि उनका ऑपरेशन खत्म हो गया है, हालांकि पाकिस्तानी अधिकारियों ने किसी भी सीजफायर की घोषणा को खारिज कर दिया और अपनी मिलिट्री कार्रवाई जारी रखी. उस समय तालिबान के एक प्रवक्ता ने कन्फर्म किया था कि लड़ाई 12 अक्टूबर की सुबह तक जारी रही. दोनों देशों ने कहा कि उन्होंने एक-दूसरे को भारी नुकसान पहुंचाया है और कई बॉर्डर पोस्ट को तबाह कर दिया है या उन पर कब्जा कर लिया है.

छोटे बच्चों को सोशल मीडिया से बचाने के लिए मलेशिया ने शुरू की नई योजना

क्वालालंपुर ऑस्ट्रेलिया के बाद मलेशिया भी बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगाने की तैयारी कर रहा है। मलेशिया अगले साल से 16 साल से कम उम्र के यूजर्स के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगा सकता है। मलेशिया के अलावा और भी कई देश ऐसे हैं, जहां बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर बैन लगा रखा है। इन देशों ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर डिजिटल प्लेटफॉर्म तक पहुंच को सीमित करने का फैसला लिया है। मलेशिया के संचार मंत्री फहमी फदजिल ने रविवार को कहा कि सरकार ऑस्ट्रेलिया और दूसरे देशों में सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर उम्र की पाबंदी लगाने के तरीकों पर विचार कर रही है। उन्होंने युवाओं को साइबरबुलिंग, फाइनेंशियल स्कैम और बच्चों के यौन शोषण जैसे ऑनलाइन अपराधों से बचाने के लिए इस फैसले की जरूरत बताई। मलेशिया की लोकल मीडिया द स्टार की रिपोर्ट में कहा गया, “हमें उम्मीद है कि अगले साल तक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स सरकार के उस फैसले को मान लेंगे, जिसमें 16 साल से कम उम्र के लोगों के यूजर अकाउंट खोलने पर रोक लगाई गई है।” बच्चों के मेंटल हेल्थ और सुरक्षा पर सोशल मीडिया का असर दुनिया भर में एक बढ़ती हुई चिंता बन गया है। चाहे टिकटॉक हो या स्नैपचैट, गूगल या फिर मेटा के सभी प्लेटफॉर्म (फेसबुक, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम), यह बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए संकट का कारण बनता जा रहा है। इन प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों के मेंटल हेल्थ संकट को बढ़ावा देने में अपनी भूमिका के लिए अमेरिका में केस भी चल रहे हैं। दूसरी ओर ऑस्ट्रेलिया में, अगले महीने से 16 साल से कम उम्र के सभी सोशल मीडिया यूजर्स के रजिस्टर्ड अकाउंट को डीएक्टिवेट किया जाएगा। इसपर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है। मलेशिया हाल ही में सोशल मीडिया कंपनियों पर कड़ी नजर रख रहा है। उनका कहना है कि ऑनलाइन जुए और नस्ल, धर्म और हानिकारक पोस्ट जैसे कंटेंट तेजी से बढ़ रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मलेशिया में 8 मिलियन से अधिक यूजर्स वाले प्लेटफॉर्म और मैसेजिंग ऐप्स को जनवरी में लागू हुए नए नियम के तहत लाइसेंस लेना अनिवार्य है।

तीन तूफान एक साथ, 4 राज्यों में भारी आफत का अलर्ट

नई दिल्ली भारतीय मौसम विभाग जिस बात का डर जता रहा था, वह अब सच होता दिख रहा है. मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बन रहा नया मौसम तंत्र तेजी से सक्रिय हो रहा है और आने वाले दिनों में यह बड़े चक्रवाती खतरे का रूप ले सकता है. आईएमडी की तरफ से जारी ताजा मौसम अपडेट में बताया गया है कि मलेशिया और स्ट्रेट ऑफ मलक्का के पास मौजूद निम्न दबाव का क्षेत्र फिलहाल वहीं पर बना हुआ है और इसके साथ जुड़ा साइक्लोनिक सर्कुलेशन 7.6 किलोमीटर ऊंचाई तक सक्रिय है. अनुमान है कि यह सिस्टम पश्चिम-उत्तरपश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए अगले 24 घंटे में दक्षिण अंडमान सागर के ऊपर डिप्रेशन में बदल जाएगा और इसके बाद अगले 48 घंटों में चक्रवाती तूफान के रूप में दक्षिण बंगाल की खाड़ी में तीव्र हो सकता है. इस बीच कोमोरिन क्षेत्र और उसके आसपास भी ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है, जिसकी वजह से 25 नवंबर के आसपास कोमोरिन क्षेत्र, दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और श्रीलंका के पास एक और लो प्रेशर एरिया बनने की पूरी संभावना है. यह सिस्टम बाद में और अधिक सक्रिय हो सकता है. वहीं दक्षिण-पूर्व अरब सागर में बना चक्रवाती परिसंचरण भी फिलहाल बरकरार है. इन तीन अलग-अलग मौसम प्रणालियों के एक साथ सक्रिय रहने के कारण दक्षिण भारत और आसपास के समुद्री इलाकों में मौसम तेजी से बिगड़ रहा है. चार राज्यों में बहुत भारी बारिश का अलर्ट इन साइक्लोनिक सिस्टम के प्रभाव से तमिलनाडु, केरल, लक्षद्वीप, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और तटीय आंध्र प्रदेश में अगले पांच दिनों में भारी से बहुत भारी बारिश का दौर शुरू होने जा रहा है. तमिलनाडु में 25 से 27 नवंबर तक भारी बारिश के साथ 28, 29 और 30 नवंबर को बहुत भारी वर्षा की चेतावनी जारी की गई है. वहीं केरल और माहे में 26 नवंबर तक भारी वर्षा की संभावना है. अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 25 से 29 नवंबर के बीच लगातार तेज बारिश होने की चेतावनी है, जबकि 26 से 28 नवंबर के दौरान यहां बहुत भारी वर्षा की आशंका है. तटीय आंध्र प्रदेश और यनम में 29 और 30 नवंबर को भारी बारिश की संभावना जताई गई है. मौसम विभाग की तरफ से जारी अपडेट के मुताबिक, तमिलनाडु में 24 से 28 नवंबर तक, केरल और माहे में 24 से 26 नवंबर तक और तटीय आंध्र प्रदेश में 27 और 28 नवंबर को आकाशीय बिजली गिरने के साथ गरज-चमक की संभावना है. अंडमान और निकोबार द्वीपों में छह दिनों तक गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं, जिनकी रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है. कुछ इलाकों में हवा की गति और बढ़कर 55 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की आशंका है. मछुआरों के लिए अलर्ट समुद्र में मौसम अत्यंत खराब रहने वाला है, इसलिए मछुआरों के लिए चेतावनी जारी की गई है. उन्हें 27 नवंबर तक दक्षिण अंडमान सागर में, 25 से 28 नवंबर तक दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी में, 29 नवंबर तक दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी, कोमोरिन और तमिलनाडु-पुदुचेरी-श्रीलंका तटों पर और 27 से 30 नवंबर तक पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी तथा आंध्र प्रदेश तट के पास समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी गई है. केरल तट, लक्षद्वीप और मालदीव के आसपास भी 27 नवंबर तक समुद्र में जाने पर रोक है. पहले से समुद्र में मौजूद नावों और नौकाओं को जल्द से जल्द सुरक्षित तटों पर लौटने की सलाह दी गई है, जबकि आंध्र प्रदेश तट के मछुआरों को 28 नवंबर से पहले वापसी अनिवार्य कर दी गई है. उत्तर भारत में बढ़ रही ठंड, यूपी में घने कोहरे का अलर्ट दूसरी तरफ देश के उत्तर-पश्चिमी राज्यों में सर्दी धीरे-धीरे दस्तक दे रही है और अगले तीन दिनों में न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट होने की संभावना है. मध्य भारत में भी अगले कुछ दिनों में ठंड बढ़ सकती है. वहीं उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से और पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में 25 नवंबर की रात और सुबह के समय घना कोहरा छाने की चेतावनी जारी की गई है. कुल मिलाकर बंगाल की खाड़ी में बन रहा निम्न दाब क्षेत्र लगातार मजबूत हो रहा है और यह सिस्टम आने वाले दिनों में बड़े चक्रवाती तूफान में तब्दील हो सकता है. दक्षिण भारत, अंडमान-निकोबार और तटीय आंध्र प्रदेश में इस सिस्टम का असर सबसे ज्यादा दिखाई देगा, इसलिए प्रशासन और जनता दोनों के लिए सावधानी बरतना बेहद जरूरी है. मौसम विभाग ने अगले दिनों में नियमित अपडेट का पालन करने की सलाह दी है.

INS माहे भारतीय नौसेना में शामिल, जनरल उपेंद्र द्विवेदी बने ऐतिहासिक समारोह के साक्षी

मुंबई मुंबई के नौसेना डॉकयार्ड में माहे-श्रेणी का पहला स्वदेशी पनडुब्बी रोधी युद्धक पोत आज नौसेना में शामिल हो गया। कोचीन शिपयार्ड में निर्मित इस श्रेणी के आठ पनडुब्बी रोधी पोत नौसेना के बेड़े में शामिल होने हैं, जिनमें से यह पहला पोत है। यह माहे-क्लास का पहला पनडुब्बी रोधी (एंटी सबमरीन) और उथले पानी (जहां पानी की गहराई कम हो) में चलने वाला युद्धपोत है, जो तटीय इलाकों के लिए खास तौर पर डिजाइन किया गया है। मुंबई में हुए समारोह में आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी मुख्य अतिथि रहे। द्विवेदी ने तीनों सेनाओं की संयुक्त ताकत पर जोर दिया। उन्होंने कहा- सशस्त्र बलों की सबसे बड़ी शक्ति सिनर्जी है। ऑपरेशन सिंदूर इसका एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह जहाज उथले पानी में ऑपरेशन, तटीय इलाकों में गश्त, समुद्री रास्तों की सुरक्षा और दुश्मन पनडुब्बियों की तलाश जैसे कामों में बड़ी भूमिका निभाएगा। ये काम बिना शोर के करने की काबिलियत के चलते इसे ‘साइलेंट हंटर’ नाम दिया गया है। INS माहे को कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) ने तैयार किया है, जो नौसेना की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल का एक मजबूत कदम माना जा रहा है। नौसेना ने इसे “नए दौर का तेज, फुर्तीला और आधुनिक भारतीय युद्धपोत” कहा है। INS माहे भारतीय नौसेना की नई पीढ़ी का युद्धपोत है, जिसे विशेष रूप से एंटी-सबमरीन वॉरफेयर के लिए तैयार किया गया है। यह शैलो वॉटर यानी कम गहराई वाले समुद्री क्षेत्रों में भी उच्च सटीकता (हाई-प्रिसिजन) के साथ ऑपरेशन करने में सक्षम है। इसका 80 प्रतिशत हिस्सा भारत में ही बना है। यह एक मल्टी-रोल वॉरशिप है, जो कोस्टल डिफेंस, अंडरवॉटर सर्विलांस और सर्च-एंड-रेस्क्यू जैसे कई महत्वपूर्ण मिशन में तैनात किया जा सकता है। इसमें माइन ले-ड्रॉपिंग की क्षमता भी है, जिससे यह समुद्री मार्गों को सुरक्षित करने और दुश्मन की गतिविधियों को रोकने में सक्षम है। युद्धपोत निर्माण में भारती की बढ़ती महारत माहे का जलावतरण स्वदेशी उथले पानी के लड़ाकू विमानों की एक नई पीढ़ी के आगमन का प्रतीक है- आकर्षक, तेज और पूरी तरह से भारतीय। 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री के साथ, माहे-श्रेणी युद्धपोत डिजाइन, निर्माण और एकीकरण में भारत की बढ़ती महारत को दर्शाता है। क्या है एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट? एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW-SWC) ऐसे युद्धपोत हैं जिन्हें तटीय क्षेत्रों के उथले पानी में पनडुब्बियों को खोजने और नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। ये जहाज नौसेना की तटीय सुरक्षा क्षमता को बढ़ाते हैं और उन्नत सोनार, टॉरपीडो और रॉकेट लॉन्चर जैसी प्रणालियों से लैस होते हैं। ये जहाज दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने, खोज और बचाव कार्यों को करने और माइन बिछाने जैसे काम भी कर सकते हैं। देश चैन से सोएगा क्योंकि आप जागते रहेंगे- थलसेनाध्यक्ष मुंबई में भारतीय नौसेना के नए युद्धपोत INS माहे के भव्य कमीशनिंग समारोह में थलसेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि यह अवसर न सिर्फ गर्व का है, बल्कि देश की बढ़ती आत्मनिर्भरता और समुद्री शक्ति का सशक्त प्रतीक भी है। उन्होंने सबसे पहले जहाज के कमांडिंग ऑफिसर और पूरी टीम को ‘ब्रावो जूलू’ कहते हुए शानदार आयोजन के लिए बधाई दी।

NCW का बड़ा फैसला: अब शॉर्ट-कोड 14490 पर मिलेगी तुरंत मदद

नई दिल्ली राष्ट्रीय महिला आयोग ने महिलाओं के हक में एक बड़ा कदम उठाया है। कमीश्न ने महिलाओं के लिए 24×7 शॉर्ट-कोड हेल्पलाइन 14490 जारी किया है। यह हेल्पलाइन चौबीसों घंटे काम करेगी। एनसीडब्ल्यू ने कहा कि यह हेल्पलाइन कॉल करने वालों को प्रथम संपर्क बिंदु के रूप में मार्गदर्शन प्रदान करेगी, प्राधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करेगी तथा आपात स्थितियों में समय पर हस्तक्षेप की सुविधा प्रदान करेगी। बयान में बताया गया है कि यह टोल-फ्री नंबर याद रखने में आसान है और आयोग की मौजूदा हेल्पलाइन ‘7827170170' से जुड़ा हुआ है, ताकि किसी भी प्रकार की देरी या शुल्क के बिना मदद सुनिश्चित की जा सके। एनसीडब्ल्यू ने कहा कि नया ‘शॉर्ट-कोड' आयोग की पहुंच को सुदृढ़ करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि जरूरतमंद महिलाओं को तत्काल सहायता प्राप्त हो।