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अफगानिस्तान पर बयानबाज़ी में भारत का पलटवार, पाकिस्तान को UN में लगाई फटकार

नई दिल्ली भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में बाल अधिकारों के गंभीर उल्लंघन और सीमापार आतंकवाद के लिए पाकिस्तान को जमकर धोया. 80वें UNGA सत्र में बोलते हुए बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत की आतंकवाद विरोधी कार्रवाई का बचाव करते हुए इसे नागरिकों, खासकर बच्चों की सुरक्षा के लिए वैध और आवश्यक बताया. सांसद पीपी चौधरी के नेतृत्व में संयुक्त राष्ट्र गए संसदीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल दुबे ने कहा कि पाकिस्तान बाल एवं सशस्त्र संघर्ष (सीएएसी) एजेंडे का सबसे गंभीर उल्लंघनकर्ता बना हुआ है. उन्होंने सीएएसी में संयुक्त राष्ट्र महासचिव की 2025 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए सीमापार आतंकवाद, गोलाबारी और हवाई हमलों में पाकिस्तान की भूमिका को उजागर किया, जिसके कारण अफगान बच्चों की हत्या और अपंगता हुई है. 'अफगान बच्चों की हत्या और अपंगता के लिए पाकिस्तान जिम्मेदार' बीजेपी सांसद ने कहा, "अपनी सीमाओं से परे इसी रिपोर्ट में पाकिस्तान द्वारा स्कूलों, खासकर लड़कियों के स्कूलों में स्वास्थ्य कर्मियों पर किए गए हमलों और अफ़ग़ानिस्तान सीमा पर हुई घटनाओं का विस्तृत विवरण दिया गया है, जहां पाकिस्तान की ओर से की गई गोलाबारी और हवाई हमले सीधे तौर पर अफ़ग़ान बच्चों की हत्या और अपंगता के लिए जिम्मेदार थे."

इकलौते हिंदू बंधक बिपिन जोशी की हमास की कैद में मौत, लौटाया गया पार्थिव शरीर

तेल अवीव हमास की ओर से बंधक बनाए गए नेपाली हिंदू छात्र बिपिन जोशी का शव इजरायल को लौटा दिया गया है। 7 अक्टूबर, 2023 को दक्षिणी इजरायल पर किए गए हमले के दौरान उसका अपहरण कर लिया गया था। अटैक के वक्त जोशी ने अपनी बहादुरी से कई सहपाठियों की जान बचाई थी। सोमवार को गाजा में संघर्ष विराम समझौते के बाद उसकी मृत्यु की पुष्टि ऐसे समय हुई, जब 20 जीवित बंधकों की रिहाई पर उत्सव का माहौल था। बंधक बनाए जाने के कुछ दिनों बाद इजरायली सेना की ओर से वीडियो फुटेज जारी किया गया, जिसमें जोशी को गाजा के शिफा अस्पताल में घसीटते हुए दिखाया गया था। यह उनकी आखिरी ज्ञात जीवित झलक थी। हमास के लड़ाकों ने जब हमला किया, तब 22 वर्षीय बिपिन जोशी नेपाल से गाजा सीमा के पास किबुत्ज अलुमिम गए थे। यहां वह खेती-किसानी को लेकर ट्रेनिंग कार्यक्रम के लिए आए थे। जोशी गाजा में जीवित माने जाने वाले एकमात्र गैर-इजरायली और हिंदू बंधक थे। नेपाल के इजरायल में राजदूत धन प्रसाद पंडित ने रिपब्लिका को उनकी मौत की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि सोमवार देर रात हमास ने जोशी के शव को इजरयइली अधिकारियों को सौंप दिया। पंडित ने कहा, 'बिपिन जोशी का शव हमास ने इजरायली अधिकारियों को सौंपा है और इसे तेल अवीव ले जाया जा रहा है।' जिंदा ग्रेनेड को पकड़कर फेंका था बाहर इजरायली सैन्य प्रवक्ता एफी डेफ्रिन ने कहा कि हमास ने बिपिन जोशी सहित 4 बंधकों के शव लौटाए हैं। उनके शव को नेपाल भेजने से पहले डीएनए टेस्ट किया जाएगा। उम्मीद है कि उनका अंतिम संस्कार नेपाली दूतावास के सहयोग से इजरायल में किया जाएगा। जोशी की इजरायल यात्रा सितंबर 2023 में शुरू हुई, जब वह 16 अन्य छात्रों के साथ किबुत्ज अलुमिम गए थे। यह पहल नेपाली छात्रों को इजरायली कृषि तरीकों के बारे ट्रेनिंग देने के लिए की गई थी। 7 अक्टूबर की सुबह हमास आतंकवादियों ने अचानक हमला कर दिया। छात्रों ने बम बंकर में शरण ली। जब बंकर के अंदर ग्रेनेड फेंके गए तो जोशी ने एक जिंदा ग्रेनेड को पकड़कर बाहर फेंक दिया, जिससे कई लोगों की जान बच गई। हालांकि, हमले में वह घायल हो गए और बाद में हमास के बंदूकधारियों ने उन्हें पकड़ लिया।

ऑस्ट्रेलिया दौरे पर शुभमन को सलाह: ‘मैनेज मत करना, बस खेल पर ध्यान दो’

नई दिल्ली भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच होने वाली तीन मैचों की वनडे सीरीज को लेकर फैन्स में जबरदस्त उत्साह है। यह सीरीज खास इसलिए भी है क्योंकि टीम इंडिया के दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली और रोहित शर्मा लंबे अंतराल के बाद मैदान पर उतरेंगे। एशिया कप 2025 (टी20 फॉर्मेट) जीतने के बाद भारतीय टीम का आत्मविश्वास चरम पर है, लेकिन अब ध्यान इस हाई-वोल्टेज सीरीज पर है। सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि इस बार टीम की कमान शुभमन गिल के हाथों में होगी। बीसीसीआई चयन समिति ने अनुभव के बावजूद रोहित शर्मा को वनडे कप्तानी से हटाकर गिल को नया कप्तान नियुक्त किया है। यह फैसला भारतीय क्रिकेट के भविष्य को ध्यान में रखकर लिया गया माना जा रहा है। अब रोहित और कोहली को लेकर पूर्व क्रिकेटर पार्थिव पटेल ने नए कप्तान गिल को खास सलाह दी है। पार्थिव पटेल ने दी शुभमन गिल को सलाह पूर्व भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज पार्थिव पटेल ने शुभमन गिल को सलाह दी है कि उन्हें विराट कोहली और रोहित शर्मा को मैनेज करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। पार्थिव का मानना है कि दोनों खिलाड़ी इतने अनुभवी और परिपक्व हैं कि उन्हें किसी तरह की विशेष गाइडेंस या नियंत्रण की जरूरत नहीं है। पार्थिव ने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि इसमें कोई समस्या होगी क्योंकि विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे खिलाड़ियों को अपनी भूमिका अच्छी तरह पता है।' पार्थिव पटेल ने कही यह बात उन्होंने कहा, 'आप विराट को देखिए, वह तब कप्तान बने जब एमएस धोनी अभी भी खेल रहे थे। उन्हें पता है कि एक सीनियर खिलाड़ी नए कप्तान को कैसे समर्थन देता है। रोहित के साथ भी यही बात रही। जब वह कप्तान बने तो विराट भले उनके सीनियर नहीं थे, लेकिन एक पूर्व कप्तान के तौर पर उन्होंने सहयोग दिया।' पार्थिव ने यह भी जोड़ा कि गिल को अपने ऊर्जा स्तर को ऐसे सीनियर खिलाड़ियों को संभालने में नहीं लगाना चाहिए। पार्थिव ने कहा, 'दोनों बहुत परिपक्व हैं और भारतीय क्रिकेट की भलाई के लिए फैसलों को समझते हैं। शुभमन को उन्हें मैनेज करने में अपनी ऊर्जा नहीं लगानी चाहिए।' गिल की कप्तानी में नया अध्याय यह पहली बार होगा जब विराट कोहली और रोहित शर्मा किसी युवा खिलाड़ी शुभमन गिल की कप्तानी में खेलेंगे। इससे पहले, कोहली ने रोहित शर्मा के नेतृत्व में खेला था जब उन्होंने खुद कप्तानी छोड़ी थी, लेकिन अब परिदृश्य अलग है। गिल न सिर्फ टीम के भविष्य का प्रतीक हैं बल्कि एक नई सोच के साथ टीम को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी भी उन पर है। टीम इंडिया के लिए नया संतुलन आने वाली सीरीज यह तय करेगी कि यह नई कप्तानी जोड़ी कितनी सहजता से काम कर पाती है। भारतीय टीम के लिए यह सीरीज न सिर्फ तैयारी का मौका है, बल्कि यह भी देखने का कि युवा कप्तान शुभमन गिल किस तरह सीनियर खिलाड़ियों के साथ तालमेल बिठाते हैं, बिना मैनेज किए और साथ लेकर।  

शहबाज शरीफ के सामने ट्रंप ने की पीएम मोदी की खुलकर तारीफ

मिस्र अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की है। उन्होंने कहा कि भारत एक महान देश है और मेरे एक बहुत अच्छे दोस्त वहीं शीर्ष पर हैं। उन्होंने शानदार काम किया है। ट्रंप ने यह बयान मिस्र के शहर शर्म अल-शेख में हुए विश्व नेताओं के शिखर सम्मेलन के दौरान दिया, जो गाजा में युद्धविराम समझौते के बाद आयोजित किया गया था। गाजा समझौते के बीच ट्रंप ने की पीएम मोदी की तारीफ  गाजा में युद्धविराम समझौते के बाद मिस्त्र में आयोजित  वैश्विक नेताओं के शिखर सम्मेलन में ट्रंप ने पीएम मोदी को अपना बहुत अच्छा मित्र करार दिया और भारत की तारीफ की। ट्रंप ने कहा कि भारत एक महान देश है और उसके शीर्ष पर मेरा एक बहुत अच्छा मित्र है, जिसने शानदार काम किया है। मुझे लगता है कि भारत और पाकिस्तान अब बहुत अच्छे से साथ रहेंगे। बता दें कि इस दौरान खास बात यह रही कि जब ट्रंप पीएम मोदी की तारीफ कर रहे थे तब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ उनके पीछे ही खड़े थे। मोदी की तारीफ करते समय ट्रंप ने शहबाज की ओर भी देखा। इस पर शरीफ ने मुस्कुराते हुए ट्रंप की बात का स्वागत किया।  बंधकों का पुनर्मिलन हो रहा है… अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वर्षों की पीड़ा और रक्तपात के बाद, गाजा में युद्ध समाप्त हो गया है। अब मानवीय सहायता पहुंच रही है, जिसमें सैकड़ों ट्रक भरकर भोजन, चिकित्सा उपकरण और अन्य सामग्री शामिल है, जिसका अधिकांश भुगतान इस कमरे में बैठे लोगों द्वारा किया जा रहा है। नागरिक अपने घरों को लौट रहे हैं। बंधकों का पुनर्मिलन हो रहा है… एक नए और खूबसूरत दिन को उगते देखना बहुत ही सुंदर है और अब पुनर्निर्माण शुरू हो रहा है। मध्य पूर्व से परे दुनिया के इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण इस दौरान ट्रंप ने गाजा शांति शिखर सम्मेलन में कहा कि यह मध्य पूर्व से परे दुनिया के इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण है। हम सभी इस बात पर सहमत हैं कि गाजा का समर्थन लोगों के उत्थान के लिए ही किया जाना चाहिए। लेकिन हम अतीत में हुए रक्तपात, घृणा या आतंक से जुड़ी किसी भी चीज को वित्तपोषित नहीं करना चाहते। हम इस बात पर भी सहमत हैं कि गाजा के पुनर्निर्माण के लिए यह आवश्यक है कि इसे विसैन्यीकृत किया जाए और गाजा में लोगों के लिए सुरक्षित वातावरण बनाने के लिए एक नए ईमानदार नागरिक पुलिस बल की स्थापना की जाए। मैं एक बेहतर भविष्य सुनिश्चित करने में भागीदार बनने का इरादा रखता हूं। उम्मीद है कि तीसरा विश्व युद्ध नहीं होगा, लेकिन यह मध्य पूर्व में शुरू नहीं होने वाला है। हम तीसरा विश्व युद्ध नहीं लड़ेंगे। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने की ट्रंप से मुलाकात इससे पहले विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने मध्य पूर्व शांति समारोह में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रम्प से मुलाकात की। इस शिखर सम्मेलन की संयुक्त रूप से मेजबानी संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी ने की और इसमें कई विश्व नेताओं ने भाग लिया।  भारत ने गाजा शांति समझौते का स्वागत किया, स्थायी शांति की उम्मीद जताई  भारत ने इस्राइल और हमास के बीच युद्ध विराम और गाजा में शांति के लिए समझौते का स्वागत किया है। भारत ने उम्मीद जताई कि इससे पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित होगी।   विदेश मंत्रालय ने देर रात जारी बयान में बातचीत द्वारा दो राष्ट्र समाधान के प्रति भारत के दीर्घकालिक समर्थन को दोहराया तथा कहा कि वह क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए सभी प्रयासों का समर्थन करेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ऐतिहासिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर का स्वागत करता है और आशा करता है कि इससे क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित होगी। मंत्रालय ने कहा कि हम राष्ट्रपति ट्रंप की गाजा शांति योजना का समर्थन करते हैं और इसे प्राप्त करने और शांति के मार्ग को आगे बढ़ाने में मिस्र और कतर की बहुमूल्य भूमिका की सराहना करते हैं। मंत्रालय ने कहा कि शांति शिखर सम्मेलन का उद्देश्य क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के प्रयासों को मजबूत करना था, जो क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए राष्ट्रपति ट्रंप के दृष्टिकोण के अनुरूप है। यह बातचीत के जरिये द्विराष्ट्र समाधान के लिए भारत के दीर्घकालिक समर्थन के अनुरूप भी है। भारत क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए सभी प्रयासों का समर्थन करेगा। शहबाज शरीफ ने ट्रंप को बताया ‘शांति दूत’ शिखर सम्मेलन में बोलते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि मध्य पूर्व में शांति स्थापित होने का श्रेय राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी टीम को जाता है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने पहले भी ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया था और अब वे उन्हें दोबारा नामित करना चाहते हैं।  

तालिबान ने कहा — इस्लामिक स्टेट को NATO-अमेरिका ने पनपाया, हमने जड़ से मिटाया

तालिबान अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी ने दावा किया कि आतंकी संगठन ISIS को अफगान जमीन से पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद इस्लामिक अमीरात ने पूरे देश में सुरक्षा और नियंत्रण स्थापित कर लिया है। नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में सोमवार को मुत्तकी ने कहा, 'जब अमेरिका और नाटो की मौजूदगी थी, तब विभिन्न प्रांतों में आईएसआईएस के बड़े केंद्र थे। उस समय भी हमें संघर्षों का सामना करना पड़ा। लेकिन इस्लामिक अमीरात ने पूरे देश पर नियंत्रण स्थापित करने के बाद मजबूत अभियान चलाया। शुक्र है कि अब अफगानिस्तान की एक इंच जमीन पर भी ISIS या कोई अन्य समूह सक्रिय नहीं है।' आमिर खान मुत्तकी ने भारतीय उद्योग जगत को आश्वासन दिया कि तालिबान शासित देश में शांति स्थापित हो गई है। भारत के साथ आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं। भारतीय उद्योग प्रतिनिधियों ने कहा कि वीजा एक गंभीर समस्या बनी हुई है और दोनों पक्षों के व्यापारियों की सुगम आवाजाही के लिए इस मुद्दे का तुरंत समाधान करने जरूरत है। फिक्की ने अफगान मंत्री के हवाले से बयान में कहा, ‘अफगानिस्तान के विदेश मंत्री ने भारतीय उद्योग जगत को आश्वासन दिया कि आवश्यक शांति स्थापित हो गई है और दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को बढ़ाने के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार की गई हैं।’ उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय व्यापार पहले ही एक अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुका है। अमृतसर और काबुल-कंधार के बीच जल्द सीधी उड़ानें अफगान विदेश मंत्री मुत्तकी ने कहा कि अमृतसर और काबुल व कंधार के बीच जल्द ही सीधी उड़ानें शुरू होंगी। उन्होंने इसे व्यापार और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने की दिशा में एक कदम बताया। राज्यसभा सांसद और वाणिज्य पर संसदीय स्थायी समिति के सदस्य डॉ. विक्रमजीत सिंह साहनी ने इस कदम को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि नई उड़ानें भारत और अफगानिस्तान के बीच तेज और सुरक्षित हवाई पुल बनाएंगी। वहीं, आमिर खान मुत्तकी ने कहा कि भारत को चाबहार बंदरगाह पर प्रतिबंध हटाने के लिए अमेरिका के साथ बातचीत करनी चाहिए। वह रणनीतिक रूप से स्थित चाबहार बंदरगाह के अधिकतम इस्तेमाल के पक्ष में हैं। उन्होंने अमेरिका के साथ अपनी बैठकों में प्रतिबंध हटाने का मुद्दा भी उठाया है।

जब कबूतर बने वजह: कैसे बनी जैनों की पहली राजनीतिक पार्टी और कितना है असर

मुंबई जैन मुनि नीलेशचंद्र विजय ने बीएमसी के दादर उपनगर में कबूतरखाना और मुंबई के अन्य कबूतर-खिलाने की जगहों को बंद करने के खिलाफ हथियार उठाने की धमकी दी थी। हालांकि, बाद में उन्होंने कहा कि उनका इरादा शांतिपूर्ण तरीके को लेकर था। अब जैन समुदाय ने अपने राजनीतिक दल ‘शांतिदूत जनकल्याण पार्टी’ की घोषणा की है, जिसका चिह्न कबूतर रखा गया है। यह कदम लंबे समय से टल रहे बीएमसी चुनावों से पहले उठाया गया है। ऐसे में मुंबई के राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है। बीएमसी भारत की सबसे धनी नागरिक संस्था है। यहां 2017 के बाद से चुनाव नहीं कराए गए हैं। मुंबई में जैन समुदाय की अच्छी-खासी संख्या है। यह नई पार्टी कई वार्डों में मतों को प्रभावित कर सकती है या कम से कम वोटों का बंटवारा कर सकती है। BMC फिलहाल किसी भी निर्वाचित राजनीतिक दल के नियंत्रण में नहीं है। इसे राज्य की ओर से नियुक्त प्रशासक ऑपरेट कर रहे हैं। मालूम हो कि जैन भारत की आबादी का केवल 0.4% हैं। वे अपनी अहिंसा और सभी जीवों के प्रति करुणा के लिए जाने जाते हैं। कबूतरों को खाना खिलाने पर पाबंदी से भड़के जुलाई में जब बीएमसी ने कबूतरों को खाना खिलाने पर प्रतिबंध की घोषणा की, तो समुदाय ने सड़कों पर उतरकर विरोध किया। दादर के कबूतरखाने में जैन समुदाय की ओर से हजारों कबूतरों को रोजाना खाना खिलाया जाता था, उसे पक्षियों को बैठने से रोकने के लिए ग्रे तिरपाल से ढक दिया गया। इसके बाद भी, समुदाय के सदस्यों ने उस स्थान के आसपास कबूतरों को खाना खिलाना जारी रखा। कबूतर स्वभाव से मजबूत पक्षी माने जाते हैं। ये आसपास की छतों पर चले जाते हैं। उनके मल से त्वचा रोग फैलने का खतरा रहता है। इनसे घरों, कारों और सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी की शिकायत की जाने लगी। BMC चुनाव में बदलेंगे समीकरण इस बीच, जैन समुदाय ने कबूतरखाना के आसपास की सड़कों पर कबूतरों को खाना खिलाना जारी रखा। यह मुद्दा जल्द ही राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया। मुंबई में श्वेतांबर और दिगंबर जैन दोनों रहते हैं। कबूतरों के मुद्दे पर दोनों संप्रदायों में एकता देखी गई। इस तरह शांतिदूत जनकल्याण पार्टी अस्तित्व में आई। यह न केवल भारत की पहला जैन राजनीतिक दल है, बल्कि संभवतः पहली ऐसी पार्टी है जिसका गठन पशु-पक्षी के अधिकारों के मुद्दे पर हुआ है। दक्षिण मुंबई से लेकर उत्तरी उपनगरों तक फैले बड़े जैन समुदाय को देखते हुए BMC इलेक्शन में समीकरण बदल सकता है। घाटकोपर, कांदिवली, बोरीवली और मुलुंड जैसे मुंबई के कुछ इलाकों में जैन आबादी काफी है।  

सेमीकंडक्टर विवाद: इस देश ने लिया चीन की बड़ी चिप कंपनी का नियंत्रण

एम्स्टर्डम वैश्विक व्यापार युद्ध के बीच नीदरलैंड्स सरकार ने एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए चीन की विंगटेक टेक्नोलॉजी के स्वामित्व वाली डच चिपमेकर कंपनी नेक्स्पेरिया का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है। यह कदम डच आर्थिक मामलों के मंत्रालय द्वारा “गुड्स अवेलेबिलिटी एक्ट के तहत उठाया गया है, ताकि देश में आवश्यक चिप्स की सप्लाई और तकनीकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि नेक्स्पेरिया में “गंभीर प्रशासनिक खामियों के हालिया और तात्कालिक संकेत” मिले हैं, जो नीदरलैंड्स और यूरोप की तकनीकी क्षमताओं के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। बयान में कहा गया कि “इन क्षमताओं का नुकसान डच और यूरोपीय आर्थिक सुरक्षा के लिए जोखिम साबित हो सकता है,” विशेष रूप से ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए, जो चिप्स पर भारी निर्भर करता है। चिप उद्योग में रणनीतिक हस्तक्षेप नीजमेगन में मुख्यालय वाली नेक्स्पेरिया दुनिया की प्रमुख चिप निर्माता कंपनियों में से एक है, जो मुख्यतः सरल कंप्यूटर चिप्स (जैसे डायोड और ट्रांजिस्टर) बनाती है। साथ ही यह कंपनी “वाइड गैप” सेमीकंडक्टर तकनीक पर भी काम करती है, जिसका उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों, चार्जिंग सिस्टम्स और एआई डेटा सेंटर्स में होता है। नीदरलैंड्स सरकार का कहना है कि यह हस्तक्षेप “अत्यंत असाधारण” स्थिति में किया गया है, ताकि आपातकालीन परिस्थितियों में चिप आपूर्ति में किसी तरह की बाधा न आए। यह निर्णय सितंबर में लागू किया गया था, लेकिन इसकी औपचारिक घोषणा अब की गई है। अमेरिका-चीन तनाव की पृष्ठभूमि में निर्णय यह कदम ऐसे समय आया है जब अमेरिका और चीन के बीच व्यापार तनाव लगातार बढ़ रहा है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के निर्यात पर 100% टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। हालांकि डच आर्थिक मामलों के मंत्रालय ने अमेरिकी दबाव से इनकार करते हुए इसे “सिर्फ एक संयोग” बताया, लेकिन यह निर्णय उस व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है जिसमें अमेरिका और नीदरलैंड्स दोनों चिप उद्योग पर निर्यात नियंत्रण को लेकर करीबी सहयोग कर रहे हैं। उधर, बीजिंग ने हाल ही में रेयर अर्थ एलिमेंट्स और मैग्नेट्स के निर्यात पर नियंत्रण लगाया है, जो यूरोप के ऑटोमोटिव सेक्टर के लिए बेहद अहम हैं। इससे यूरोप-चीन व्यापारिक रिश्तों में और तनाव आ सकता है। विंगटेक पहले से अमेरिकी निगरानी सूची में गौरतलब है कि विंगटेक टेक्नोलॉजी को दिसंबर 2024 में अमेरिका ने अपनी “एंटिटी लिस्ट” में शामिल किया था। आरोप था कि कंपनी “संवेदनशील सेमीकंडक्टर निर्माण क्षमताओं वाली संस्थाओं को हासिल करने के चीन सरकार के प्रयासों में सहायता” कर रही है। विंगटेक की तीखी प्रतिक्रिया इस फैसले पर विंगटेक ने नाराजगी जताई है। कंपनी ने अपने अब हटाए गए वीचैट पोस्ट में डच सरकार के कदम को “भू-राजनीतिक पक्षपात से प्रेरित अत्यधिक हस्तक्षेप” बताया। विंगटेक ने कहा कि उसने 2019 में नेक्स्पेरिया के अधिग्रहण के बाद से सभी स्थानीय कानूनों का पालन किया है और उसके यूरोप में हजारों कर्मचारी कार्यरत हैं- जिनमें नीदरलैंड्स, जर्मनी और ब्रिटेन शामिल हैं। नेक्स्पेरिया की प्रतिक्रिया और प्रभाव नेक्स्पेरिया के प्रवक्ता ने CNBC से कहा कि कंपनी सभी नियमों का पालन कर रही है और नियमित रूप से अधिकारियों के संपर्क में है, लेकिन उन्होंने आगे कोई टिप्पणी करने से इनकार किया। इस घोषणा के बाद शंघाई स्टॉक एक्सचेंज में विंगटेक के शेयर 10% की गिरावट के साथ अपने दैनिक सीमा तक लुढ़क गए। कंपनी की एक कॉर्पोरेट फाइलिंग (13 अक्टूबर) के अनुसार, अब नेक्स्पेरिया अस्थायी बाहरी प्रबंधन के अधीन है, जिसमें एक वर्ष तक कंपनी की परिसंपत्तियों, व्यवसाय या कर्मचारियों में बदलाव की अनुमति नहीं होगी। रिपोर्ट्स के अनुसार, विंगटेक के चेयरमैन झांग शुएझेंग को नेक्स्पेरिया में उनकी सभी भूमिकाओं से निलंबित कर दिया गया है, हालांकि कंपनी के दैनिक कार्य सामान्य रूप से जारी रहेंगे। बढ़ते यूरोप-चीन व्यापार तनाव इससे पहले 2023 में नीदरलैंड्स सरकार ने नेक्स्पेरिया द्वारा चिप स्टार्टअप “Nowi” के अधिग्रहण की जांच की थी, जिसे बाद में मंजूरी दे दी गई थी। लेकिन अब यह नया कदम चीन-नीदरलैंड्स व्यापारिक रिश्तों को और अधिक तनावपूर्ण बना सकता है, खासकर उस पृष्ठभूमि में जब डच कंपनी ASML को चीन को उन्नत चिप-मेकिंग उपकरणों के निर्यात पर रोक लगाने का आदेश दिया गया था। जैसे-जैसे वैश्विक व्यापार युद्ध और तकनीकी प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, नीदरलैंड्स सरकार का यह अभूतपूर्व कदम इस बात को रेखांकित करता है कि सेमीकंडक्टर अब केवल एक औद्योगिक उत्पाद नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और आर्थिक सुरक्षा का मूल स्तंभ बन चुके हैं।

जावेद अख्तर भड़के: भारत में तालिबानी मंत्री के स्वागत और दारुल उलूम देवबंद पर की तीखी टिप्पणी

मुंबई गीतकार जावेद अख्तर ने तालिबानी नेता आमिर खान मुत्ताकी का गर्मजोशी से स्वागत किए जाने पर गुस्सा जाहिर किया है। उन्होंने भारत सरकार की ओर से अफगान तालिबान के विदेश मंत्री को मिले रिसेप्शन पर ऐतराज जताते हुए कहा कि यह देखते हुए मेरा तो सिर शर्म से झुक गया। उन्होंने कहा कि यह स्वागत उन लोगों ने किया है, जो हर तरह के आतंकवाद की आलोचना करने की बात करते हैं। आमिर खान मुत्ताकी फिलहाल 6 दिनों के भारत दौरे पर हैं। 2021 में तालिबान ने अफगानिस्तान की सत्ता संभाली थी और तब से यह पहला मौका है, जब किसी अफगान सरकार के किसी प्रतिनिधि ने भारत का दौरा किया है। जावेद अख्तर ने एक्स पर लिखा, 'दुनिया के सबसे खूंखार आतंकवादी समूह तालिबान के प्रतिनिधि को हर तरह के आतंकवादियों के ख़िलाफ़ मंच पर बोलने वालों द्वारा दिए गए सम्मान और स्वागत को देखकर मेरा सिर शर्म से झुक गया। देवबंद को भी शर्म आनी चाहिए कि उसने अपने 'इस्लामिक हीरो' इस तरह से स्वागत किया। यह ध्यान रखना चाहिए कि तालिबान उन लोगों में से एक है, जिन्होंने लड़कियों की शिक्षा पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। मेरे भारतीय भाइयों और बहनों! हमारे साथ क्या हो रहा है?' एक यूजर ने उलटे पूछ लिया- आप पाकिस्तान क्यों गए थे? उनकी इस बात का कई लोगों ने स्वागत किया है तो कुछ ने सवाल भी उठाए हैं। एक्स पर एक यूजर ने लिखा है कि आप तो पाकिस्तान जाकर सेलिब्रेशन तक करते हैं, जिसने भारत में आतंकवाद फैलाया था। उमर अब्बास हयात नाम के यूजर ने लिखा, 'आप पाकिस्तान में क्या कर रहे थे, जबकि पाकिस्तान ने हमारे ऊपर 26/11 हमला किया और पुलवामा अटैक कराया? सेलिब्रेशन कर रहे थे ना? अब जब भारत अपने प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ सॉफ्ट पावर का इस्तेमाल कर रहा है तो आपको क्या परेशानी है।'वहीं कुछ लोगों ने तालिबानी नेता के स्वागत पर सवाल उठाए हैं और जावेद अख्तर की बात की प्रशंसा की है। बता दें कि तालिबान के नेता ने देवबंद का भी दौरा किया था और वहां उनका काफी गर्मजोशी के साथ स्वागत हुआ था।  

इंडियन एयरफोर्स को मिलने वाले हैं 114 बवंडर’ फाइटर जेट, राफेल F-4 पर फ्रांस से डील फाइनल!

नई दिल्ली इंडियन एयरफोर्स को जिस लड़ाकू विमान का इंतजार था. वो घड़ी बेहद करीब आ चुकी है. वर्तमान में भारत अपनी स्क्वाड्रन संख्या बढ़ाना चाहता है. इसी कड़ी में 114 लड़ाकू विमानों की खरीद का महत्वाकांक्षी MRFA प्रोजेक्ट अब एक अहम चरण में पहुंच चुका है. सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, भारत इस टेंडर में फ्रांस के दसॉल्ट राफेल के सबसे एडवांस वर्जन F4 स्टैंडर्ड पर अपनी रुचि और सहमति लगभग पक्की कर चुका है. आपको बता दें, राफेल F4 मौजूदा राफेल विमानों का एडवांस और डिजिटल रूप है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से संचालित कई नई और अत्याधुनिक फीचर्स हैं. IDRW की रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में इस सौदे पर हस्ताक्षर होने की संभावना है . ऐसे में स्पष्ट है कि भारत अपनी वायुसेना की स्क्वाड्रन ताकत की कमी को जल्द से जल्द दूर करना चाहता है. क्या है राफेल F4 वेरिएंट की खासियत? राफेल F4, मौजूदा राफेल लड़ाकू विमानों से कई मायनों में आगे है. यह भारतीय वायुसेना को तकनीकी ताकत प्रदान करेगा. F4 में AI-आधारित उन्नत संचार प्रणालियाँ हैं जो विमानों को आपस में और ज़मीनी कमांड सेंटरों के साथ बेहतर ढंग से जोड़ने में मदद करती हैं. यह वेरिएंट नई पीढ़ी के हथियार और सेंसर ले जाने में सक्षम होगा, जिससे उसकी मारक क्षमता और सटीक वार करने की क्षमता बढ़ेगी. इतना ही नहीं, F4 को रखरखाव के मामले में भी कम समय लेने वाला और अधिक कुशल बनाने के लिए डिजाइन किया गया है, जिससे विमान ज्यादा समय तक ऑपरेशनल रह सकेगा. क्यों पड़ी MRFA टेंडर की जरूरत? IAF को अपनी स्क्वाड्रन ताकत को बनाए रखने के लिए इन 114 मल्टी-रोल विमानों की तत्काल जरूरत है. IAF की स्वीकृत स्क्वाड्रन ताकत 42 है, लेकिन वर्तमान में यह संख्या उससे काफी कम है. जिसे करीब 29 बताया जा रहा है. MRFA इस अंतर को भरने के लिए बेहद जरूरी है. IAF के पास पहले से ही राफेल का अनुभव है. राफेल F4 को चुनना पायलटों की ट्रेनिंग और रखरखाव के बुनियादी ढांचे के लिए एक आसान विकल्प होगा, क्योंकि मौजूदा ज्ञान का इस्तेमाल किया जा सकेगा. मेक इन इंडिया के तहत होगी खरीदारी यह डील केवल विमानों की खरीद नहीं है, बल्कि भारत के रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा फैसला है. MRFA सौदे में यह शर्त है कि अधिकांश विमानों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा. राफेल F4 को चुनने पर फ्रांस से बड़े पैमाने पर तकनीकी हस्तांतरण (ToT) की उम्मीद है. साथ ही, यह सौदा भारत और फ्रांस के बीच पहले से मजबूत रणनीतिक भागीदारी को और गहरा करेगा, जो कि भारत के लिए एक विश्वसनीय रक्षा भागीदार है. 2026 तक कॉन्ट्रैक्ट साइन करने की संभावना का मतलब है कि भारत ने अब अपनी हवाई ताकत बढ़ाने के लिए समय-सीमा तय कर ली है और वह राफेल F4 को एक सबसे मजबूत विकल्प के रूप में देख रहा है.

रेलवे का फेस्टिव सरप्राइज! दिवाली पर चलाई जाएंगी स्पेशल ट्रेनें, अपनों से मिलने का सफर होगा आसान

मुंबई  दीपावली का त्यौहार नजदीक है, और हर कोई अपने परिवार के पास जाकर इस पावन पर्व को मनाने की इच्छा रखता है. मगर दूर मेट्रो सिटी या अन्य राज्यों में काम करने वाले लाखों लोगों के लिए घर पहुंचना हमेशा एक बड़ी चुनौती भरा रहा है. त्योहारों के मौसम में कंफर्म ट्रेन टिकट मिलना किसी लॉटरी से कम नहीं होता, जिसके चलते कई लोग चाहकर भी अपने अपनों से नहीं मिल पाते. लेकिन इस बार यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए भारतीय रेलवे ने एक बड़ा और भावनात्मक तोहफा दिया है. त्योहारी सीजन में यात्रियों की बढ़ती भीड़ और लंबी वेटिंग लिस्ट को देखते हुए रेलवे ने भगत की कोठी–हुबली फेस्टिवल वीकली एसी स्पेशल ट्रेन (07360/07359) के संचालन की घोषणा की है. यह ट्रेन विशेष रूप से दीपावली सीजन में उन यात्रियों को बड़ी सुविधा देगी जो पाली, मारवाड़ जंक्शन, फालना समेत आस-पास के इलाकों से पुणे, मुंबई या दक्षिण भारत की ओर यात्रा करना चाहते हैं, लेकिन जिन्हें सामान्य ट्रेनों में टिकट नहीं मिल पा रहा है. संचालन की तारीख और समय रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह स्पेशल ट्रेन अपने दूसरे ट्रिप के लिए मंगलवार, 14 अक्टूबर को भगत की कोठी से सुबह 7:50 बजे रवाना होगी. ट्रेन संख्या 07360 भगत की कोठी से हुबली तक साप्ताहिक रूप से चलेगी. यह ट्रेन हर मंगलवार को 28 अक्टूबर तक यात्रियों को सुविधा देगी. इसी प्रकार, वापसी में ट्रेन संख्या 07359 हुबली से हर सोमवार को 27 अक्टूबर तक चलेगी. इस एसी स्पेशल सेवा से यात्रियों को आरामदायक सफर सुनिश्चित होगा. इन प्रमुख स्टेशनों पर होगा ठहराव यह फेस्टिवल स्पेशल ट्रेन राजस्थान के प्रमुख स्टेशनों जैसे लूनी, पाली, मारवाड़ जंक्शन, फालना, पिंडवाड़ा, आबूरोड पर रुकेगी. इसके बाद यह गुजरात के पालनपुर, महेसाना, वडोदरा होते हुए मुंबई मार्ग पर सूरत, वापी, वसई रोड, कल्याण जैसे व्यस्त स्टेशनों पर रुकेगी. दक्षिण भारत की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए यह ट्रेन पुणे, सतारा, कराड, सांगली, मिरज, घटप्रभा, बेलगांव और धारवाड़ स्टेशनों पर रुकेगी. बुधवार दोपहर करीब 3:15 बजे यह ट्रेन अपने गंतव्य हुबली पहुंचेगी, जिससे यह यात्रा करने वालों के लिए एक बेहतरीन विकल्प बन जाएगा. रेलवे अधिकारी का आश्वासन सीनियर डीसीएम विकास खेड़ा ने बताया कि मुंबई रूट पर पहले से 2 दैनिक और 8 साप्ताहिक ट्रेनें चल रही हैं, लेकिन त्योहारों के दौरान यात्रियों का अतिरिक्त दबाव होता है. इसी को देखते हुए इस एसी स्पेशल ट्रेन की शुरुआत की गई है ताकि कोई भी यात्री दीपावली जैसे महत्वपूर्ण पर्व पर अपने परिवार से दूर न रह जाए. यह पहल सिर्फ एक ट्रेन सेवा नहीं, बल्कि रिश्तों की डोर को मजबूत करने का रेलवे का एक प्रयास है.