samacharsecretary.com

तालिबान का इंटरनेट प्रतिबंध: अफगान नागरिकों की डिजिटल दुनिया ठप्प

जलालाबाद अफगानिस्तान में तालिबान ने अजीबोगरीब फरमान जारी किया है। तालिबानी शासन ने "अनैतिकता रोकने" के नाम पर पूरे देश में इंटरनेल और  फाइबर-ऑप्टिक सेवाओं पर प्रतिबंध लगा दिया है। इससे पूरे देश में खलबली मच गई है। तालिबान द्वारा शुरू की गई यह सख्ती अब पूरे देश में लागू हो चुकी है। देश के सर्वोच्च नेता द्वारा फाइबर-ऑप्टिक इंटरनेट पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए जाने के बाद कई और प्रांत इंटरनेट सेवाओं से कट गए हैं। 4 साल से सत्ता में है तालिबान तालिबान ने अगस्त 2021 में अफगानिस्तान की सत्ता संभाली थी। इसके बाद यह पहली बार है जब इस तरह का व्यापक प्रतिबंध लगाया गया है। इस फैसले से अब सरकारी दफ्तरों, निजी क्षेत्र, शैक्षणिक संस्थानों और आम नागरिकों के घरों में Wi-Fi इंटरनेट सेवा पूरी तरह ठप हो गई है। हालांकि मोबाइल इंटरनेट सेवा अब भी चालू है। अधिकारियों का कहना है कि "जरूरी कार्यों" के लिए वैकल्पिक उपायों की तलाश की जा रही है। मंगलवार को उत्तरी बल्ख प्रांत में Wi-Fi सेवा के बंद होने की पुष्टि की गई, वहीं देश के अन्य हिस्सों से भी भारी व्यवधान की खबरें मिल रही हैं। गुरुवार को बघलान, बदख्शान, कुंदुज़, नंगरहार और तखार जैसे प्रांतों में इंटरनेट सेवा पूरी तरह बंद कर दी गई। अफगान मीडिया ने की निंदा अफगान मीडिया समर्थन संगठन (AMSO) ने इस प्रतिबंध की कड़ी निंदा की और अपनी गहरी चिंता व्यक्त की। संगठन ने कहा, "तालिबान नेता के आदेश पर उठाया गया यह कदम न केवल लाखों नागरिकों की मुफ्त सूचना और आवश्यक सेवाओं तक पहुंच को बाधित करता है, बल्कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मीडिया कार्यों के लिए भी एक गंभीर खतरा है। पिछले वर्ष, संचार मंत्रालय के प्रवक्ता इनायतुल्लाह अलोकोज़ई ने TOLO न्यूज़ को बताया था कि अफगानिस्तान में 1,800 किलोमीटर से अधिक लंबा फाइबर-ऑप्टिक नेटवर्क है, और इसमें 488 किलोमीटर और जोड़ने की मंजूरी भी दी गई थी। नंगरहार संस्कृति निदेशालय के सिद्दीकुल्लाह कुरैशी ने एसोसिएटेड प्रेस को इस प्रतिबंध की पुष्टि की। कुंदुज़ के राज्यपाल कार्यालय ने एक आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप में इंटरनेट बंदी की सूचना साझा की।

ट्रंप का बड़ा कदम: चार्ली किर्क हत्याकांड के बाद एंटीफा को किया प्रमुख आतंकवादी संगठन घोषित

वाशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा ऐलान किया है। ट्रंप ने एंटीफा संगठन को एक प्रमुख आतंकी संगठन घोषित किया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जानकारी शेयर करते हुए कहा कि मुझे हमारे अनेक अमेरिकी देशभक्तों को यह बताते हुए खुशी हो रही है कि मैं एंटीफा, एक बीमार, खतरनाक, कट्टरपंथी वामपंथी आपदा को एक प्रमुख आतंकवादी संगठन घोषित कर रहा हूं। ट्रंप ने कहा कि एंटीफा को वित्तपोषित करने वालों की उच्चतम कानूनी मानकों और प्रथाओं के अनुसार गहन जांच की जाए। ट्रंप ने इसलिए लिया एक्शन ट्रंप ने एंटीफा को इसलिए आतंकी संगठन घोषित किया। क्योंकि हाल ही में उनके करीबी चार्ली किर्क की हत्या हुई थी। इसका हत्यारा टायलर रॉबिन्सन वामपंथी राजनीतिक विचारधारा का था। एंटीफा संगठन ऐसे ही वामपंथी विचारधारा को आगे बढ़ा रहा था। एंटीफा दूर-वामपंथी और फासीवाद-विरोधी आंदोलन करता है। ट्रंप ने समूह को वित्त पोषित करने वाले व्यक्तियों और संगठनों की गहन जांच का आह्वान किया।    ट्रंप ने पहले किया था वादा बता दें कि ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान एंटीफा को एक आतंकवादी संगठन के रूप में चिह्नित करने का वचन दिया था। उस समय उनके अटॉर्नी जनरल विलियम बार ने समूह की गतिविधियों को “घरेलू आतंकवाद” बताया था। अब ट्रंप ने करीबी चार्ली किर्क की हत्या के बाद सख्ती करना शुरू कर दिया है। क्या है एंटीफा? एंटीफा (फासीवाद विरोधी) एक औपचारिक संगठन नहीं है। यह एक शिथिल रूप से परिभाषित सामाजिक आंदोलन है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी कानून आधिकारिक तौर पर नामित विदेशी आतंकवादी समूहों को “भौतिक सहायता” देने पर प्रतिबंध लगाता है, लेकिन घरेलू संगठनों के लिए कोई समान कानून नहीं है। ‘एंटीफा’ शब्द आम तौर पर वामपंथी, अक्सर अति-वामपंथी, राजनीतिक विचारों वाले व्यक्तियों की एक विस्तृत श्रृंखला को दिखाता है। यह आमतौर पर मुख्यधारा की डेमोक्रेटिक पार्टी के एजेंडे से बाहर होते हैं। इस आंदोलन में एक केंद्रीकृत नेतृत्व संरचना या राष्ट्रीय मुख्यालय का अभाव है, हालांकि कुछ स्थानीय समूह नियमित रूप से मिलते रहते हैं।

बड़े त्योहारों पर होगी सफर आसान, नवरात्र से दिवाली तक स्पेशल ट्रेन सेवा

नई दिल्ली  भारतीय रेलवे ने यात्रियों को नवरात्र और दिवाली का तोहफा दिया है। रेलवे ने 26 सितंबर से नवंबर के अंत तक स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। भारतीय रेल अधिकारियों का दावा है कि दिवाली, छठ पूजा समेत फेस्टिव सीजन में करीब 6000 से अधिक स्पेशल ट्रेनें चलाने की प्लानिंग है। उत्तर रेलवे के प्रवक्ता के अनुसार ये स्पेशल ट्रेनें उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल, और असम समेत देश के विभिन्न राज्यों के लिए होंगी। जिससे त्यौहारों पर घर लौट रहे लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो। स्पेशल ट्रेनों के अलावा लोगों की भीड़ का अंदाजा लगाते हुए स्टेशनों पर खास अरेंजमेंट किए जा रहे हैं।   हर राज्य के यात्रियों लिए स्पेशल प्लान रेलवे मंत्रालय के अनुसार 26 सितंबर से 5 नवंबर के बीच जबलपुर से दानापुर के बीच स्पेशल ट्रेन चलाई जाएगी। ये ट्रेन हर बुधवार और शुक्रवार को चलेगी। इसी तरह मुंबई सेंट्रल से काठगोदाम के बीच 1 अक्टूबर से, उघना से सूबेदारगंज के बीच 3 अक्टूबर से और बान्द्रा टर्मिनस से बदनी के बीच 6 अक्टूबर से स्पेशल ट्रेन चलाई जाएंगी। दिवाली और छठ पर ट्रेनों में होती है ज्यादा भीड़ जानकारी के अनुसार आनंद विहार-भागलपुर के बीच स्पेशल पूजा स्पेशल ट्रेन चलाई जाएंगी। ये ट्रेन 20 सितंबर से 30 नवंबर तक रोजाना चलेगी। वहीं, 2 अक्टूबर से 6 नवंबर तक कोलकाता से लखनऊ के बीच स्पेशल ट्रेन चलेगी। दिवाली और छठ के लिए 27 सितंबर से एक नवंबर तक प्रत्येक शनिवार को मऊ और उधना के बीच स्पेशल ट्रेन चलेगी। बता दें फेस्टिवल सीजन में ट्रेनों में काफी भीड़ होती है। यात्रियों की संख्या को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने कुछ डिब्बे रिजर्व में रखे हैं जिन्हें आखिरी में भीड़भाड़ वाले रूट पर चलाया जाएगा।

पहाड़ों में कहर: बादल फटने से तबाही, लापता हुए 10 लोग

उत्तराखंड धीरे-धीरे सितंबर का महीना बीतने वाला है, लेकिन मानसूनी आफत अभी खत्म नहीं हुई है। देवभूमि उत्तराखंड में एक बार फिर आसमानी आफत आई है। गुरुवार सुबह ही चमोली में बादल फट गया। इससे चमोली और नंदानगर में भीषण बरसात शुरू हो गई है। मलबा आने से कई घर तबाह हो गए हैं। प्रशासन में राहत और बचाव दल को घटनास्थल के लिए रवाना कर दिया है। अभी तक 6 घर तबाह हो गए हैं। वहीं 10 लोगों के लापता होने की खबर है। हाल ही में देहरादून के सहशस्त्र धारा में बादल फटने की घटना हुई थी। बताया जा रहा है कि कुंतरी और धुर्मा गांव में बादल फटे हैं। भारी बारिश का अलर्ट जारी मौसम विभाग ने उत्तराखंड में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। देहरादून, ऋषिकेश, पोढ़ी गढ़वाल, उत्तरकाशी, हरिद्वार समेत कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी हुई है। प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है। संवेदनशील इलाकों पर नजर रखी जा रही है। नदी के किनारे बसे लोगों से सुरक्षित स्थान पर जाने की अपील की जा रही है।   2 लोगों को किया रेस्क्यू सूचना मिलते ही एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए घटना स्थल पर पहुंच गए। अभी तक 2 लोगों को रेस्क्यू किया जा चुका है। अधिकारियों ने बताया कि कई जानवर भी बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। । मौके पर मेडिकल टीमें और तीन एम्बुलेंस भेजी गई हैं। क्या बोले डीएम? चमोली के जिलाधिकारी संदीप तिवारी ने बताया कि चमोली जिले के नंदानगर घाट क्षेत्र में बुधवार रात बादल फटने से नुकसान हुआ। नंदानगर के कुंत्री लंगाफली वार्ड में छह घर मलबे में दब गए। जिलाधिकारी ने कहा कि 2 को बचा लिया गया है। राहत और बचाव कार्य जारी है।  

डिफेंस एग्रीमेंट से सऊदी-पाकिस्तान की नजदीकियां बढ़ीं, एक पर हमला हुआ तो दूसरा भी मानेगा अपना

दुबई   पाकिस्तान और सऊदी अरब ने बुधवार (17 सितंबर 2025) को एक अहम रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए. ‘स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट’ नाम के इस समझौते के तहत यदि किसी एक देश पर हमला होता है तो इसे दोनों देशों पर हमला माना जाएगा. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह समझौता पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सऊदी अरब दौरे के दौरान हुआ. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अपने राजकीय दौरे पर रियाद पहुंचे थे, जहां सऊदी क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान ने अल-यमामा पैलेस में उनका स्वागत किया. इसी मौके पर यह रक्षा समझौता किया गया. पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, पीएम कार्यालय की ओर से जारी बयान में साफ कहा गया कि किसी भी तरह की आक्रामकता दोनों देशों के खिलाफ मानी जाएगी. संयुक्त बयान में कहा गया कि यह समझौता आठ दशकों पुराने रिश्तों, भाईचारे, इस्लामी एकजुटता और साझा रणनीतिक हितों पर आधारित है. इसका मकसद रक्षा सहयोग को और गहरा करना और किसी भी हमले के खिलाफ साझा रोकथाम क्षमता को मजबूत बनाना है. इसमें साफ तौर पर लिखा है कि किसी एक देश पर आक्रामक कार्रवाई दोनों देशों पर आक्रमण मानी जाएगी. खाड़ी देशों के दौरे पर शहबाज पाकिस्तान की ओर से प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ विदेश मंत्री इशाक डार, रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ, वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब, सूचना मंत्री अताउल्लाह तारड़, पर्यावरण मंत्री मुसादिक मलिक और विशेष सहायक तारिक फातमी मौजूद थे. यह प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का एक हफ्ते में खाड़ी क्षेत्र का तीसरा दौरा है. इससे पहले वे कतर दो बार गए- 11 और 15 सितंबर को जहां उन्होंने इजरायल के हमले के बाद हमास नेतृत्व के समर्थन में और अरब-इस्लामिक देशों की आपात बैठक में हिस्सा लिया. डील नहीं ये बदलाव का संकेत! यह समझौता 9 सितंबर 2025 को कतर की राजधानी दोहा में इजरायल के हमले के ठीक एक हफ्ते बाद हुआ, जिसमें हमास नेताओं को निशाना बनाया गया. किसी ने सोचा नहीं था कि कतर पर इजरायल हमला कर देगा. यह हमला अमेरिकी मंजूरी के साथ हुआ था, जिससे खाड़ी देशों (सऊदी, कतर, यूएई) में अमेरिकी विश्वसनीयता पर सवाल उठे. सऊदी राजपरिवार के लिए भी यह झटका है, क्योंकि कतर भी अमेरिकी सैन्य अड्डे वाला सहयोगी है. वह अमेरिका के साथ एक नई सैन्य डील चाहता है, जिसमें उसके सुरक्षा की गारंटी हो. हालांकि अभी इसमें सऊदी कामयाब नहीं हुआ है. वहीं पाकिस्तान भी ऐसा ही कोई सहयोगी चाहता है, क्योंकि ऑपरेशन सिंदूर के बाद उसने देख लिया कि कोई भी उसे बचाने नहीं आया. यह डील ईरान को भी सीधा संदेश देती है. सऊदी अरब और ईरान के बीच हाल ही में रिश्ते सामान्य करने की कोशिश हुई थी, लेकिन पाकिस्तान के साथ यह समझौता फिर से ईरान-सऊदी प्रतिस्पर्धा को हवा दे सकता है. सऊदी की क्या मजबूरी? दरअसल, परमाणु हथियार संपन्न पाकिस्तान लंबे समय से सऊदी का सैन्य साझेदार रहा है. सऊदी अरब ने पाकिस्तान को आर्थिक सहायता प्रदान की है. साफ-साफ कहें तो पाकिस्तान ने यह डील केवल भारत से बचने के लिए की है. मगर सऊदी अरब की ओर से यह डील मजबूरी के साथ-साथ सोची-समझी चाल है. सूत्रों का कहना है कि सऊदी अरब को अब पहले की तरह अमेरिका पर भरोसा नहीं है. कहा जाता है कि यह समझौता अमेरिका की ‘धोखेबाजी’ का नतीजा है. अमेरिका शुरू से चाहता है कि सऊदी अरब इजरायल संग अपने रिश्ते सामान्य करे. सऊदी को अब अमेरिका की सुरक्षा गारंटी पर यकीन नहीं. पांच प्वाइंट में जानिए डिफेंस डील के पीछे सऊदी अरब की मजबूरी     इजरायल का कतर की राजधानी दोहा में अटैक     ईरान से सऊदी अरब के तल्ख रिश्ते     अमेरिका की सुरक्षा गारंटी पर सऊदी को भरोसा नहीं     पाकिस्तान का परमाणु संपन्न देश होना     इस्लामिक मुल्कों को एकजुट करना यह भी कारण है जिस तरह इजरायल ने कतर की राजधानी दोहा में हमला किया, इसने भी सऊदी अरब की चिंता को और बढ़ा दिया. जी हां, पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच यह रणनीतिक रक्षा समझौता पड़ोसी कतर की राजधानी दोहा में हुए हमले के ठीक बाद हुआ है. इजरायल ने दोहा में हमास नेताओं पर हमला किया था. हालांकि, दोहा में हुए हवाई हमले की अमेरिका ने निंदा की, मगर कोई ठोस कदम नहीं उठाया. इसलिए सऊदी को हमेशा यह डर सता रहा है कि इजरायल कहीं सऊदी तक न अपनी नजर बढ़ा ले. वैसे भी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने गाजा युद्ध को ‘नरसंहार’ करार दिया था. सऊदी ने अक्सर इजरायल की आलोचना की है.

देशभर में लागू होगा SIR, वोटिंग में दस्तावेजों की जरूरत होगी खत्म? जानिए पूरा मामला

नई दिल्ली पूरे देश में होने वाले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद, 50 करोड़ से ज्यादा वोटर्स को किसी भी अतिरिक्त दस्तावेज़ की जरूरत नहीं पड़ेगी. इसका कारण यह है कि उनके नाम पहले से ही मतदाता सूची में दर्ज हैं. एक जुलाई, 1987 से पहले जन्म होने की अंडरटेकिंग देने वाले मतदाताओं को कोई अन्य दस्तावेज लगाने की जरूरत नहीं होगी. निर्वाचन आयोग के अधिकारियों के मुताबिक, भारत के आधे से ज्यादा वोटर्स इस नए प्रोसेस के दायरे में आएंगे. इन मतदाताओं को कोई भी दस्तावेज देने की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि उनका नाम उनके राज्य में आयोजित पिछली विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की मतदाता सूची में शामिल होगा.  ज्यादातर राज्यों में मतदाता सूची का आखिरी एसआईआर 2002 से 2008 के बीच हुआ था, जिसे इस प्रक्रिया के लिए कट-ऑफ माना जाएगा. राज्यों की तैयारी… अधिकारियों ने बताया कि निर्वाचन आयोग जल्द ही अखिल भारतीय एसआईआर को लागू करने की तारीख तय करेगा. राज्यों में मतदाता सूचियों को सुधारने करने का काम इस साल के अंत से पहले शुरू हो सकता है. पिछले हफ्ते ही हुए एक सम्मेलन में, राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ) को अपने-अपने राज्यों में पिछली एसआईआर के बाद प्रकाशित मतदाता सूची तैयार रखने को कहा गया है. सुर्खियों में बिहार का SIR  बिहार में आखिरी एसआईआर 2003 में हुआ था. इसके मुताबिक, अभी इसमें सूचीबद्ध कुल मतदाताओं के 60%, यानी 4.96 करोड़ मतदाताओं को अपनी जन्मतिथि या जन्मस्थान स्थापित करने के लिए मतदाता सूची के प्रासंगिक भाग को छोड़कर कोई सहायक दस्तावेज देने की जरूरत नहीं है. बिहार में इस प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद भी हो चुका है, जहां विपक्षी दलों ने दस्तावेजों की कमी के कारण लोगों के मताधिकार से वंचित होने की आशंका जताई थी. अन्य मतदाताओं के लिए नियम केवल 40% मतदाताओं को ही अपनी जन्मतिथि या स्थान की पुष्टि के लिए सूचीबद्ध 12 दस्तावेजों में से कोई एक प्रस्तुत करना होगा. इसके अलावा, वोटर बनने या राज्य के बाहर से आने वाले कुछ आवेदकों के लिए एक अतिरिक्त 'घोषणा पत्र' भी शुरू किया गया है. ऐसे लोगों को यह शपथपत्र देना होगा कि उनका जन्म 1 जुलाई, 1987 से पहले भारत में हुआ था.

गुजरात में बड़ी कार्रवाई: साबरमती तट पर 700+ निर्माण ढहाए गए, प्रशासन का सख्त एक्शन

अहमदाबाद गुजरात के गांधीनगर में एक बार फिर बड़ा बुलडोजर ऐक्शन लिया गया है। साबरमती के किनारे कई इलाकों में गुरुवार सुबह से ही बुलडोजर गरजने लगे। भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सरकारी जमीन पर बने 700 से अधिक मकान और अन्य ढांचों को तोड़ा जा रहा है। गांधीनगर जिला प्रशासन के मुताबिक साबरमती नदी के किनारे जीईबी, पेथापुर, चारेदी इलाकों में सरकारी जमीनों पर अतिमक्रमण किया गया था। कई बार इन्हें जगह खाली करने की चेतावनी दी गई थी। गुरुवार सुबह भारी सुरक्षा इंतजाम के बीच तोड़फोड़ दस्तों ने बुलडोजर अभियान की शुरुआत की। एक साथ दर्जनों बुलडोजर मकानों को तोड़ते नजर आए। लोगों का भारी विरोध, बुलडोजर पलटा पेटापुर में बुलडोजर ऐक्शन के विरोध में बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हो गए। भारी सुरक्षा के बावजूद लोग जोरदार विरोध प्रदर्शन करने लगे। माहौल तनावपूर्ण हो गया। इस बीच अफरा-तफरी में एक बुलडोजर भी पलट गया। गनीमत है कि इसकी जद में कोई नहीं आया। पुलिसकर्मियों ने किसी तरह लोगों को काबू किया।

मुंबई को मिलेगी अंडरग्राउंड मेट्रो की सौगात, पीएम मोदी करेंगे उद्घाटन

मुंबई  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 30 सितंबर को मुंबई जाएंगे. इस दौरान वो मुंबईवासियों को बड़ी सौगात देंगे. पीएम मुंबई के वर्ली से कफ परेड तक की अंडरग्राउंड मेट्रो का उद्घाटन करेंगे. इस मेट्रो का फर्स्ट फेज सिप्ज एमआईडीसी से आचार्य अत्रे मेट्रो स्टेशन तक शुरू है. पीएम मोदी दूसरे फेज का उद्घाटन करेंगे. मेट्रो के अधिकारियों के मुताबिक इस मेट्रो सर्विस की लाइन 33.5 किमी लंबी होगी. बताया जा रहा है कि इसमें कुल 27 स्टेशन होंगे जिसमें 26 स्टेशन अंडरग्राउंड होंगी. आरे से वर्ली तक का लगभग 22.5 किमी का हिस्सा पहले से ही शुरू किया जा चुका है. वहीं अब कफ परेड से लेकर वर्ली तक का 11 किमी वाला दूसरा फेज भी आम लोगों के लिए शुरू कर दिया जाएगा. सफर की दूरी होगी कम बताया जा रहा है कि अंडरग्राउंड मेट्रो के इस फेज के उद्घाटन के बाद कोलाबा से आरे कॉलोनी तक का सफर एक घंटे से कम समय में पूरा किया जा सकेगा. यानि सड़क के 2-3 घंटे का सफर इस मेट्रो से बहुत कम समय में पूरा होगा. साथ ही यात्रियों का सफर भी आराम दायक रहेगा. क्या बोले सीएम फडणवीस महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मेट्रो की जानकारी देते हुए बताया कि आपने (विपक्ष) इतने सालों तक बीडीडी चॉल को विकसित नहीं होने दिया. इस देवा भाऊ ने इसे विकसित किया. उन्होंने कहा कि यह एशिया की सबसे बड़ी परियोजना है. सीएम ने कहा कि 120 फुट की जगह थी, एक मराठी व्यक्ति 520 फुट के घर में चला गया. प्रवीण दारेकर की वजह से, अभ्युदय नगर का एक मराठी व्यक्ति 600 फुट के घर में जाएगा. सीएम ने कहा कि हमने गिरगांव में पुनर्वास भवन भी बनाए. 1600 परियोजनाएं स्व-पुनर्विकास में चली गईं. उन्होंने कहा कि क्या आप इनमें से कम से कम एक भी कर पाए हैं? मुंबई की क्या हालत है जो आपने की है? 2000 के बाद, आपने लगातार मुंबई को पीछे रखने की कोशिश की है. ‘मुंबई स्टार्टअप की राजधानी बन गई’ देवेंद्र फडणवीस ने कहा पिछले 10 सालों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, मुंबई स्टार्टअप की राजधानी बन गई है. इस देश का अगला बदलाव डेटा सेंटर है, इसकी 60 फीसदी क्षमता महाराष्ट्र ने पूरी की है. अगर यह अगली क्रांति है, यह महाराष्ट्र का होगा.  

खुशखबरी! 24-25 सितंबर को ही खाते में आएगा सरकारी कर्मचारियों का वेतन

नई दिल्ली दुर्गा पूजा के त्योहार से पहले राज्य सरकार ने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए राहत भरी खबर दी है। वित्त विभाग ने घोषणा की है कि इस साल सितंबर माह का वेतन कर्मचारियों को 24 और 25 सितंबर को ही जारी कर दिया जाएगा। इसके बाद 26 सितंबर से 7 अक्टूबर तक सभी सरकारी दफ्तरों में छुट्टियां रहेंगी। इस फैसले से कर्मचारी और उनके परिवार त्योहार की तैयारियों में आर्थिक तनाव से राहत महसूस कर सकेंगे। वेतन भुगतान का नया शेड्यूल सरकार ने स्पष्ट किया है कि सितंबर महीने का वेतन निर्धारित समय से पहले ही जारी किया जाएगा ताकि कर्मचारियों को छुट्टियों के दौरान आर्थिक परेशानी न हो। केवल वेतन ही नहीं, बल्कि मजदूरी, मानदेय, पारिश्रमिक और स्टाइपेंड भी इसी दौरान समय पर दिए जाएंगे। इस फैसले का लाभ सेवानिवृत्त कर्मचारी और पेंशनभोगी भी उठाएंगे, जिनके खाते में पेंशन 1 अक्टूबर को जमा कर दी जाएगी। त्योहार के अवसर पर आर्थिक सहूलियत 1 अक्टूबर को महानवमी के दिन पेंशन के साथ-साथ ‘जय बंगला’, ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत मिलने वाली राशि भी लाभार्थियों के खातों में भेजी जाएगी। यह समय पर आर्थिक सहायता त्योहार के दौरान परिवारों के लिए खास राहत लेकर आएगी और उनकी खुशियों को दोगुना कर देगी। महंगाई भत्ता (डीए) का मामला अभी भी अधर में हालांकि, कर्मचारी महंगाई भत्ते (डीए) के मुद्दे पर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है। सुप्रीम कोर्ट में लंबित इस मामले का कोई फाइनल फैसला अभी तक नहीं आया है। कन्फेडरेशन ऑफ स्टेट गवर्नमेंट एम्प्लॉइज के वकील विकासरंजन भट्टाचार्य के मुताबिक, इस साल के भीतर ही निर्णय आने की उम्मीद है, लेकिन दुर्गा पूजा से पहले इसका हल नहीं निकल पाएगा। कर्मचारियों में मिली राहत DA विवाद के बावजूद समय पर वेतन और पेंशन मिलने की घोषणा ने कर्मचारियों के बीच उत्साह और राहत की भावना पैदा कर दी है। कई सरकारी कर्मचारियों ने इस फैसले को सराहा और बताया कि त्योहार के मौके पर वेतन मिलना परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करता है और मनोबल बढ़ाता है। साथ ही, 22 सितंबर से जीएसटी में भी आएगी राहत सरकार की ओर से यह भी बताया गया है कि 22 सितंबर से जीएसटी दरों में बदलाव होगा, जिससे जरूरी वस्तुएं सस्ती हो जाएंगी। ऐसे में त्योहार के मौसम में लोगों की खरीददारी में मदद मिलेगी और परिवारों को अतिरिक्त वित्तीय सहारा मिलेगा।  

एसआईआर को लेकर बड़ा दावा, मतदाता सूची पुनरीक्षण में अधिकांश राज्यों में नहीं चाहिए दस्तावेज़

नई दिल्ली बीते लगभग दो महीने में बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले कराए जा रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जमकर आरोप-प्रत्यारोप हुए। बिहार से उपजा यह मामला इतना गंभीर हो चुका है कि सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा हुआ और अदालत को सख्त टिप्पणी में कहना पड़ा कि अगर गड़बड़ी पाई गई तो कोर्ट पूरी एसआईआर प्रक्रिया को निरस्त कर देगा। अब ताजा घटनाक्रम में एसआईआर को लेकर निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने बड़ा दावा किया है। अधिकारियों के मुताबिक अधिकांश राज्यों में मतदाता सूची पुनरीक्षण के वक्त दस्तावेजों की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। अधिकारियों ने इस दावे के समर्थन में तर्क भी दिए हैं। जानिए अधिकारियों ने और क्या कहा… दस्तावेज और मतदाताओं का ब्योरा पहले से ही मौजूद बुधवार को चुनाव आयोग (EC) के अधिकारियों ने कहा, देश के अधिकांश राज्यों में आधे से अधिक मतदाताओं को आगामी विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के दौरान किसी दस्तावेज की जरूरत नहीं होगी। इसका कारण है कि दस्तावेज और मतदाताओं का ब्योरा पहले से ही उन राज्यों की पिछली गहन पुनरीक्षण सूची के दौरान दर्ज हो चुके हैं। दस्तावेजों की जरूरत क्यों नहीं? इस उदाहरण से समझिए अधिकारियों के अनुसार, अधिकांश राज्यों में पिछली बार विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) 2002 से 2004 के बीच हुआ था। उसी वर्ष की मतदाता सूची के आधार पर आगामी एसआईआर कराई जाएगी। उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि बिहार में 2003 की मतदाता सूची का उपयोग इस साल के विशेष गहन पुनरीक्षण के लिए किया गया। दिल्ली में पिछला SIR 2008 और उत्तराखंड में 2006 में हुआ था। इन राज्यों की उस समय की मतदाता सूचियां संबंधित CEO (मुख्य निर्वाचन अधिकारी) की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। मतदाताओं के लिए प्रावधान बिहार में जारी निर्देशों के अनुसार, 2003 के विशेष गहन पुनरीक्षण में सूचीबद्ध लगभग 4.96 करोड़ मतदाताओं (कुल वोटर्स का 60%) को जन्मतिथि या जन्मस्थान साबित करने के लिए कोई अतिरिक्त दस्तावेज देने की जरूरत नहीं होगी। उन्हें केवल उसी सूची का संबंधित हिस्सा दिखाना होगा। हालांकि, लगभग 3 करोड़ मतदाताओं (40%) के लिए जन्मस्थान या जन्मतिथि साबित करने के लिए 12 निर्धारित दस्तावेजों में से एक देना अनिवार्य होगा। नया घोषणा प्रपत्र एसआईआर को लेकर जारी गहमागहमी के बीच निर्वाचन आयोग ने एक अतिरिक्त घोषणा प्रपत्र (declaration form) भी लागू किया है। यह उन आवेदकों के लिए है जो पहली बार मतदाता बनना चाहते हैं या किसी अन्य राज्य से पता बदलकर आए हैं। इसमें उन्हें यह घोषणा करनी होगी कि उनका जन्म 1 जुलाई 1987 से पहले भारत में हुआ था। ऐसे मतदाता भी अपने जन्म से संबंधित कोई दस्तावेज प्रस्तुत करेंगे। अगर किसी शख्स का जन्म 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच हुआ हो, तो ऐसे मामले में उन्हें अपने माता-पिता के जन्म संबंधी दस्तावेज भी प्रस्तुत करने होंगे। एसआईआर पर विवाद और सुप्रीम कोर्ट का निर्देश गौरतलब है कि बिहार में हो रहे मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर विपक्षी दलों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। विरोध कर रहे दलों की दलील है कि चुनाव से चंद महीने पहले जल्दबाजी में कराए जा रहे SIR को लेकर आयोग की टाइमिंग संदिग्ध है। ऐसा करने के कारण करोड़ों योग्य नागरिकों मताधिकार से वंचित हो सकते हैं। विवाद को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि कोई भी योग्य नागरिक मतदाता सूची से बाहर नहीं रहना चाहिए।