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भारत-ब्रिटेन के बीच बड़ा रक्षा समझौता, CETA डील को PM मोदी ने बताया ऐतिहासिक

मुंबई  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने गुरुवार को भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार और रणनीतिक सहयोग को मजबूती देने की प्रतिबद्धता एक बार फिर दोहराई. दोनों नेताओं ने मुंबई में कई नए समझौते किए जिनका मकसद आर्थिक संबंधों को गहरा करना, शिक्षा में साझेदारी बढ़ाना और रक्षा व समुद्री सहयोग को मजबूत करना है. प्रधानमंत्री स्टारमर बुधवार को मुंबई पहुंचे थे. आज राजभवन में दोनों नेताओं ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की. पीएम मोदी और स्टारमर ने भारत–यूके व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते के शीघ्र अनुमोदन की उम्मीद भी जाहिर की. अमेरिका के साथ भारत के व्‍यापारिक रिश्‍तों में आए तनाव के बाद ब्रिटेन व्‍यापारिक दृष्टिकोण से इंडिया के लिए बहुत अहम हो गया है. कीर स्टारमर के इस दौरे के दौरान व्यापार और निवेश से संबंधित कुछ बड़े कदम भी दोनों देशों ने उठाए हैं. कीर स्‍टारमर के इस दौरे के दौरान व्यापार और निवेश से संबंधित कुछ बड़े कदम भी दोनों देशों ने उठाए हैं. भारत-यूके सीईओ फोरम की पुनर्गठित बैठक का आयोजन किया गया. संयुक्त आर्थिक और व्यापार समिति (JETCO) को फिर से सक्रिय भी किया गया है. यह समिति भारत और ब्रिटेन के बीच हुए व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (CETA) को लागू करने में मदद करेगी और दोनों देशों में नौकरी और आर्थिक विकास को बढ़ावा देगी. इसके अलावा दोनों देशों ने क्लाइमेट टेक्नोलॉजी स्टार्टअप फंड में नया संयुक्त निवेश किया गया. यह पहल ब्रिटेन सरकार और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के बीच हुए समझौते (MoU) के तहत की गई है. इसका उद्देश्य जलवायु तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे क्षेत्रों में नए और इनोवेटिव उद्यमियों को सहयोग देना है. JETCO व्‍यापार समझौते में निभाएगा अहम भूमिका आज सुबह दोनों देशों ने JETCO को पुनर्स्थापित करने के लिए टर्म ऑफ रेफरेंस पर हस्ताक्षर किए. दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर के बाद केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने एक्‍स पर एक पोस्‍ट में लिखा, “JETCO को फिर से सक्रिय करने के लिए हस्ताक्षर करना एक बड़ा कदम है. यह हमारे रणनीतिक साझेदारी के ढांचे को मजबूत करेगा, भारत-यूके CETA के कार्यान्वयन को बढ़ावा देगा और दोनों देशों के व्यापार को नए स्तर तक ले जाएगा.” पीएम मोदी और ब्रिट‍िश पीएम की मौजूदगी में 3,884 करोड़ की मुंबई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री क‍ीर स्टार्मर की मुलाकात के दौरान दोनों देशों ने 468 मिलियन डॉलर (करीब 3,884 करोड़ रुपये) की डिफेंस डील पर सहमत‍ि जताई है. इस समझौते के तहत ब्रिटेन इंडियन आर्मी को हल्के वजन वाली मल्टीरोल मिसाइलें (Lightweight Multirole Missiles) सप्लाई करेगा. थेल्‍स की कंपनी इन मिसाइलों का निर्माण करेगी. रॉयटर्स की‍ रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटिश सरकार ने इसे अपने डिफेंस इंडस्‍ट्री और भारत के साथ गहराते सामरिक रिश्तों के लिए ऐतिहासिक मोड़ बताया है. यह मिसाइलें ब्रिटिश कंपनी थेल्स (Thales) द्वारा उत्तरी आयरलैंड में बनाई जाएंगी. ब्रिट‍िश सरकार का कहना है कि इस सौदे से करीब 700 ब्रिटिश नौकरियां सुरक्षित रहेंगी, जो फिलहाल यूक्रेन को हथियार सप्लाई करने वाले इसी संयंत्र में कार्यरत हैं. ब्रिटिश सरकार ने अपने बयान में कहा, यह डील भारत और ब्रिटेन के बीच कॉम्प्लेक्स वेपंस पार्टनरशिप की दिशा में बड़ा कदम है, जिस पर दोनों देश बातचीत कर रहे हैं. भारत के लिए यह डील क्यों महत्वपूर्ण     भारत के पास पहले से ही कई तरह की मिसाइलें हैं, लेकिन आधुनिक, हल्की और मल्‍टीरोल मिसाइलें इंडियन आर्मी को तुरंत जवाब देने में मदद करेंगी. ये मिसाइलें समुद्र और जमीन दोनों जगहों पर इस्तेमाल की जा सकती हैं, जिससे रणनीतिक फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ती है.     ब्रिटेन के साथ यह डील टेक्‍नोलॉजी ट्रांसफर का रास्ता खोलती है. इससे भारत को उन्नत मिसाइल तकनीक सीखने और संभवतः देश में स्थानीय निर्माण करने का अवसर मिलेगा. ब्रिटेन में इस सौदे से 700 नौकरियां सुरक्षित होंगी, और भारत के लिए भी यह रक्षा उद्योग में निवेश और उत्पादन बढ़ाने का संकेत है. दोहरी साझेदारी पर जोर मुंबई में हुई इस मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने भारत-ब्रिटेन व्यापार संबंधों की भी समीक्षा की. कुछ महीनों पहले हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के बाद अब दोनों देश रक्षा और टेक्नोलॉजी साझेदारी पर भी फोकस कर रहे हैं. ब्रिटेन ने यह भी घोषणा की कि भारत के साथ नौसैनिक जहाज़ों के लिए इलेक्ट्रिक इंजन तकनीक पर भी एक नया समझौता हुआ है. इस प्रोजेक्ट का प्रारंभिक मूल्य 250 मिलियन पाउंड बताया गया है. ट्रंप टैरिफ की काट है भारत-ब्रिटेन ट्रेड डील भारत और ब्रिटेन के बीच हुआ व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (CETA) भारत पर अमेरिकी टैरिफ के असर को कम करने में मदद करेगा. इससे भारत को ब्रिटेन के सर्विस सेक्टर में अहम जगह मिलेगी. इससे भारतीय टेक कंपनियों को राहत मिलेगी, जो फिलहाल ट्रंप टैरिफ की मार झेल रही है. समझौते से भारत का टेक्‍सटाइल निर्यात भी ब्रिटेन को बढ जाएगा. भारत पर बांग्‍लादेश और वियतनाम के मुकाबले ज्‍यादा टैरिफ होने से अमेरिका को इंडिया से होने वाला टेक्‍सटाइल एक्‍सपोर्ट सबसे ज्‍यादा प्रभावित हुआ है. अगले साल जुलाई तक लागू होने वाली भारत-ब्रिटेन ट्रेड डील को अपने निर्यात में विविधता लाने में भी मदद करेगी. अमेरिकी टैरिफ की वजह से भारत का 40 अरब डॉलर का निर्यात प्रभावित होगा. इसकी भरपाई भारत अन्‍य बाजारों से करने में जुटा है और ब्रिटेन का साथ इसमें काफी अहम है.

वोटर लिस्ट मामले में EC की मांग: ‘अगर मुस्लिमों के नाम कटे हैं तो ठोस डेटा पेश करें’

नई दिल्ली बिहार एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है. याच‍िकाकर्ताओं की ओर से दावे क‍िए गए क‍ि एसआईआर में बहुत सारे मुस्‍ल‍िमों के नाम वोटर ल‍िस्‍ट से हटा द‍िए गए. इस पर चुनाव आयोग की ओर से जवाब द‍िया गया है. आयोग ने कहा क‍ि वे कह रहे हैं कि बहुत सारे मुस्लिमों के नाम हटाए गए हैं लेकिन जब आपके पास डेटा ही नहीं है, तो आपको कैसे पता? आप डेटा तो दीजिए. ज‍िस मह‍िला का नाम हटाने की बात आप कह रहे हैं, वो तो वोटर ल‍िस्‍ट में दर्ज है. एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट में इस वक्‍त जोरदार बहस .  या‍च‍िकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी, प्रशांत भूषण और वृंदा ग्रोवर समेत कई वकील पेश हुए. जबक‍ि चुनाव आयोग की ओर से सीनियर एडवोकेट राकेश द्विवेदी ने दलील रखी. द्व‍िवेदी ने कहा, एडीआर समेत अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से हलफनामे में किए गए वोट काटे जाने के आरोप पूरी तरह से गलत हैं. गलत कहानी गढ़ी जा रही है. जिस महिला का नाम काटने का दावा किया जा रहा है. उसका मसौदा सूची और अंतिम सूची में भी नाम है. ECI के तरफ से कोर्ट को बताया गया कि गलत कहानी गढ़ी गई है कि यह व्यक्ति ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में था और बाद में उसका नाम हटा दिया गया. ECI के वकील ने कहा कि अदालत में एक व्यक्ति द्वारा दायर किया गया हलफनामा, जिसमें दावा किया गया है कि उसका नाम ड्राफ्ट रोल के बाद हटाया गया, ये गलत है. ECI ने कहा कि उस व्यक्ति द्वारा दिया गया बूथ नंबर ही गलत है, जिससे साबित होता है कि उसका दावा झूठा है. वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि एक तर्क यह था कि ड्राफ्ट मतदाता सूची में बड़ी संख्या में लोगों के नाम थे, लेकिन अचानक उनके नाम सूची से गायब हो गए. मुझे अब तक तीन हलफनामे मिले हैं. हमने इसकी जांच की है. यह हलफनामा पूरी तरह से झूठा है. कृपया पैरा एक देखें कि उन्होंने कहा है कि मैं बिहार का निवासी हूं और ड्राफ्ट मतदाता सूची में था. वह वहां नहीं थे. हकीकत ये है उन्होंने मतदाता गणना फॉर्म जमा नहीं किया था. यह झूठ है. फिर उन्होंने मतदाता पहचान पत्र संख्या दी, दिया गया मतदान केंद्र 52 है, लेकिन वास्तविक संख्या 653 है. लेकिन वह नाम भी एक महिला का है, उनका नहीं. वह ड्राफ्ट मतदाता सूची में नहीं थे. उन्‍होंने कहा कि याचिकाकर्ताओं का यह दावा कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से नाम गायब हो गए थे, गलत है, क्योंकि संबंधित व्यक्ति ने नामांकन फॉर्म नहीं भरा था. द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि वह व्यक्ति वोटर लिस्ट के पार्ट 63 में था, न कि पार्ट 52 में, और यह सुझाव दिया कि याचिकाकर्ता ने पुरानी जनवरी की लिस्ट का उल्लेख किया है. राकेश द्विवेदी ने दो मिनट का समय मांगा और फिर याचिकाकर्ताओं के आरोपों को चुनौती देते हुए आगे अपनी बात रखी. ECI का पक्ष:— “वे कह रहे हैं कि बहुत सारे मुस्लिमों के नाम हटाए गए हैं — लेकिन जब आपके पास डेटा ही नहीं है, तो आपको कैसे पता?” “मैं इस अदालत से आदेश चाहता हूं कि जिन लोगों को अपना नाम जोड़वाना है, वे अगले 5 दिनों में आवेदन करें, क्योंकि उसके बाद दरवाजे बंद हो जाएंगे.” “यह हलफनामा 6 तारीख का है — अगर उसे अपना नाम शामिल करवाना था, तो उसे आवेदन करना चाहिए था.” अदालत ने कहा:— “पहले सही जानकारी दी जानी चाहिए — गलत जानकारी हमें भी स्वीकार्य नहीं है.” ECI ने आगे कहा:— “यह किसी व्यक्ति का मुद्दा नहीं है, ADR ने यह दस्तावेज अदालत में रखे हैं. संगठन को अदालत में कुछ भी पेश करने से पहले उसकी सच्चाई सुनिश्चित करनी चाहिए.” अदालत ने याचिकाकर्ता से कहा:—“आपको ज़िम्मेदारी लेनी होगी.” वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा:– “अदालत लीगल सर्विस अथॉरिटी को निर्देश दे सकती है कि जाकर जांच करे कि क्या उस व्यक्ति ने वास्तव में हलफनामा दाखिल किया है.” अदालत ने कहा: “लेकिन दी गई जानकारी गलत है.” प्रशांत भूषण ने जवाब दिया:—“वे ऐसा कह रहे हैं, अदालत लीगल सर्विस अथॉरिटी से जांच करवा सकती है.” अदालत ने टिप्पणी की:— “हम इस दस्तावेज़ की प्रामाणिकता अभी कैसे जानें? हम जांच एजेंसी नहीं हैं! वे दिखा रहे हैं कि तथ्य गलत हैं.” वकील प्रशांत भूषण ने कहा: “वे केवल एक दावा कर रहे हैं, ये तथ्य नहीं हैं.” अदालत ने कहा: “देखना यह है कि क्या उस व्यक्ति का नाम ड्राफ्ट रोल में था या नहीं — अगर नहीं था तो आप ऐसा हलफनामा कैसे दे सकते हैं?” जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि —आपसे संपर्क करने वाले सभी लोग लीगल सर्विस अथॉरिटी से संपर्क क्यों नहीं कर सकते? मुफ़्त कानूनी सलाह भी दी जा सकती है. वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि— वे कहते हैं कि या तो हमारा नाम ड्राफ्ट रोल से हटा दिया गया था, फिर फॉर्म 6 भरा और फिर भी नाम फाइनल रोल में नहीं था और दूसरे कहते हैं कि उनके नाम हटा दिए गए हैं और उन्हें कभी नोटिस ही नहीं मिला. अदालत की बड़ी महत्वपूर्ण टिप्पणी:– “अगर आप (याचिकाकर्ता) अदालत के सामने यह कहते कि आपकी अपील पर अब तक फैसला नहीं हुआ है, तो हम आपके साथ होते — लेकिन मामला ऐसा नहीं है.” प्रशांत भूषण ने कहा कि— आइए हम चुनाव आयोग द्वारा अपनाए गए दिशानिर्देशों को देखें. इसमें बिल्कुल भी पारदर्शिता नहीं है. उनके पास सब कुछ कंप्यूटराइज्ड रूप में है. लेकिन अभी भी इस बारे में कोई डेटा नहीं है कि ड्राफ्ट सूची से किसे बाहर रखा गया है और इसलिए हम हर चीज़ की जाँच और पता लगाने में सैकड़ों घंटे लगा रहे हैं. चुनाव आयोग ने कहा कि पहले भूषण हलफनामा दाखिल करें फिर अदालत हमारा पक्ष सुने. एडवोकेट वृंदा ग्रोवर ने कहा कि— धारा 23(3) के अनुसार, 17 अक्टूबर को, यानी आज से 9 दिन बाद रोल फ्रीज हो जाएँगे. मुझे यह क्यों बताना चाहिए कि मैं कब तक अपील दायर कर सकती हूँ. जस्टिस बागची ने कहा कि— अपील सिर्फ़ यह कहकर की जा सकती है कि मेरा नाम हटा दिया गया है और कोई आधार नहीं … Read more

CJI गवई की प्रतिक्रिया सामने आई, सुप्रीम कोर्ट में जूताकांड ने मचाई हलचल

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट में वकील राकेश किशोर ने सीजेआई बीआर गवई पर जूता उछाला, जिसके बाद हंगामा मच गया। अब इस मामले में सीजेआई गवई ने चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने ‘जूताकांड’ पर कहा है कि जो भी हुआ, उससे मैं बहुत स्तब्ध हूं। सीजेआई बीआर गवई ने जूते से हुए हमले पर कहा, ''सोमवार को जो हुआ, उससे मैं और मेरे विद्वान साथी बहुत स्तब्ध हैं, हमारे लिए यह एक भुला दिया गया अध्याय है।'' बेंच में शामिल जस्टिस उज्जल भुइयां ने भी इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा, "इस पर मेरे अपने विचार हैं। वह भारत के मुख्य न्यायाधीश हैं, यह मजाक की बात नहीं है। यह संस्था का अपमान है।" इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) ने अदालत कक्ष के भीतर भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) बी आर गवई पर जूता फेंकने की कोशिश करने वाले वकील राकेश किशोर को ‘गंभीर कदाचार’ का दोषी मानते हुए उसकी सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी। एक चौंकाने वाली घटना में किशोर (71) ने प्रधान न्यायाधीश की ओर जूता फेंकने का प्रयास किया और उन्हें चिल्लाकर यह कहते हुए सुना गया कि ‘सनातन का अपमान नहीं सहेंगे।’ पुलिस सूत्रों के अनुसार वह वकील पिछले महीने खजुराहो में विष्णु प्रतिमा को पुनर्स्थापित करने से संबंधित याचिका पर सुनवाई के दौरान की गईं सीजेआई की टिप्पणी से नाराज था। बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने कुमार का बार लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। एससीबीए ने कहा कि किशोर का ‘‘निंदनीय, अव्यवस्थित और असंयमित व्यवहार न्यायिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला’’ और ‘‘पेशेवर नैतिकता, शिष्टाचार और सर्वोच्च न्यायालय की गरिमा का गंभीर उल्लंघन’’ है। उसने कहा, ‘‘कार्यकारी समिति का मानना ​​है कि उक्त आचरण न्यायिक स्वतंत्रता, अदालती कार्यवाही की पवित्रता और बार तथा बेंच के बीच आपसी सम्मान और विश्वास के दीर्घकालिक संबंध पर सीधा हमला है।’’ सीजेआई को निशाना बनाते हुए की गई पोस्ट पर एफआईआर सीजेआई को निशाना बनाने वाली आपत्तिजनक और अवैध सोशल मीडिया सामग्री पर सख्ती करते हुए, पंजाब पुलिस ने बुधवार को राज्य के विभिन्न जिलों में मिली अनेक शिकायतों के आधार पर 100 से अधिक सोशल मीडिया खातों के खिलाफ कई एफआईआर दर्ज की हैं। पंजाब पुलिस के प्रवक्ता ने बताया कि सीजेआई को निशाना बनाने से जुड़ीं सोशल मीडिया पोस्ट की जांच करने के बाद कानून के तहत प्राथमिकियां दर्ज की गई हैं।  

शांति और जंग के बीच संतुलन: गाजा पर बढ़ा तनाव, पड़ोसी देश ने समुद्र में तैनात किए युद्धपोत

नई दिल्ली  दो साल से तबाही झेल रहे गाजा में शांति की उम्मीद जगी है। एक हफ्ते पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित 20 सूत्री प्लान के पहले चरण पर अब हमास ने भी अपनी हामी भर दी है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पहले ही ट्रंप के प्लान पर अपनी सहमति दे चुके हैं। इसके साथ ही गाजा पट्टी में अब हमले थमने और वहां शांति स्थापना की उम्मीदें बढ़ गई हैं। इसके साथ ही दोनों तरफ से बंधकों की रिहाई की आस भी जगी है लेकिन दुनिया में तीसरे मोर्चे पर एक नई जंग की आहट तेज हो गई है। दरअसल, सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा हुआ है कि भारत के पड़ोसी देश चीन ने ताइवान के साथ बढ़ते तनाव के बीच यांग्त्जी नदी के मुहाने पर बड़ी संख्या में युद्धपोत तैनात कर दिए हैं। न्यूज वीक की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि वहां चीनी युद्धपोतों और पनडुब्बियों की तैनाती की यह एक दुर्लभ घटना है। इससे चीन और ताइवान के बीच जंग की आहट तेज हो गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह दोनों सेनाओं के बीच तनाव का उच्चतम स्तर है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इतनी बड़ी संख्या में चीनी युद्धपोतों की तैनाती ताइवान पर हमले का संकेत हो सकता है। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (PLAN) ने अपनी सैन्य शक्ति का लगातार इजाफा किया है। युद्धपोतों और पनडुब्बियों की संख्या के हिसाब से चीन के पास दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना है, जिसके पास 370 से ज़्यादा युद्धपोत और पनडुब्बियाँ हैं। इनमें लैंडिंग डॉक जहाज, हेलीकॉप्टर वाहक और विशेष लैंडिंग बार्ज शामिल हैं। बार्ज के बारे में विश्लेषकों का कहना है कि ये ताइवान जलडमरूमध्य और समंदर पार कर ताइवान पर हमले कर सकते हैं। 25,000 टन का ट्रांसपोर्टेशन शिप तैनात 6 अक्टूबर, 2025 को ली गई सैटेलाइट तस्वीरों में शंघाई के यांग्त्ज़ी नदी मुहाने में कई उभयचर जहाज़ खड़े दिखाई दे रहे हैं। यह मुहाना प्रमुख समुद्री रसद केंद्र है। ओपन-सोर्स रक्षा विश्लेषक एमटी एंडरसन ने सैटेलाइट इमेजरी में टाइप 071 युझाओ-क्लास लैंडिंग प्लेटफ़ॉर्म डॉक (LPD) की पहचान की है। यह 25,000 टन का एक ट्रांसपोर्टेशन शिप है जो किसी उभयचर हमले के दौरान लैंडिंग क्राफ्ट, बख्तरबंद वाहनों और सैकड़ों सैनिकों को विवादित तट तक ले जाने में सक्षम है। चीन और ताइवान में अदावत पुरानी बता दें कि चीन ताइवान को अपना क्षेत्र बताता है और जरूरत पड़ने पर बल प्रयोग करने की बात कह चुका है। हाल के दिनों में चीनी सेना ने बड़े पैमाने पर सैन्य अभ्यास और समंदर पार कर लगभग हर दिन ताइवान पर सैन्य विमानों की उड़ानें संचालित कर ताइवान पर हमलों का दबाव बढ़ा दिया है। ताइपे और वाशिंगटन चीन के इस कदम को अस्थिरता पैदा करने वाला कदम बताया है।  

गाजा में रुकी गोलियों की गूंज, इजरायल और हमास के बीच शांति की नई शुरुआत

गाजा  दुनिया को खुशखबरी मिल गई है. इजरायल और हमास के बीच शांति समझौता हो गया है. 2 साल से चली आ रही जंग का अब अंत हो गया है. इजरायल और हमास ने डोनाल्ड ट्रंप के पीस डील को स्वीकार कर एक गाजा में नई सुबह की शुरुआत की है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता में इजरायल और हमास ने शांति समझौते के पहले चरण पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. खुद डोनाल्ड ट्रंप ने यह खुशखबरी पूरी दुनिया को दी है. सालों से चले आ रहे गाजा युद्ध के बीच यह समझौता एक अहम मोड़ है, जो दोनों पक्षों के बीच विश्वास बहाली की दिशा में पहला कदम साबित हो सकता है. अब सवाल है कि इजरायल और हमास के बीच पहले चरण के समझौते में क्या-क्या होगा? दरअसल, अमेरिका ने ही हमास और इजरायल के बीच पीस डील का खाका तैयार किया है. इस समझौते के पहले चरण में मुख्य रूप से मानवीय पहलुओं पर फोकस किया गया है. इसमें बंधकों की रिहाई और इजरायली सेना के पीछे हटने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं. आइए जानते हैं कि इस फर्स्ट फेज में क्या-क्या होने वाला है और इसका क्या प्रभाव पड़ेगा. पीस डील के फर्स्ट फेज में क्या-क्या? सबसे पहले समझौते के तहत सभी बंधकों को रिहा किया जाएगा. हमास के पास मौजूद इजरायली बंधकों को तत्काल मुक्त किया जाएगा. अनुमान है कि करीब 100 से अधिक बंधक इस प्रक्रिया में शामिल हैं, जिनमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी हैं. हालांकि, समाचार एजेंसी एपी ने दावा किया है कि हमास इस वीकेंड तक सभी 20 जीवित बंधकों को रिहा कर देगा. वहीं, इजरायल गाजा के अधिकांश हिस्से से वापस लौट जाएगा. बंधकों को सुरक्षित रूप से उनके परिवारों तक पहुंचाने के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी. इसमें मेडिकल चेकअप और मनोवैज्ञानिक सहायता भी शामिल होगी.     उधर इजरायल भी अपनी जेलों से फिलिस्तीनी कैदियों को रिहा करेगा. हालांकि, अभी इसकी संख्या सार्वजनिक नहीं की गई है. अब चूंकि डील हो गई है, इसलिए यह रिहाई प्रक्रिया 72 घंटे के भीतर पूरी करनी होगी, जो शांति वार्ता की सफलता की पहली परीक्षा होगी.     दूसरा अहम पहलू इजरायली सेना का निर्धारित क्षेत्रों तक पीछे हटना है. समझौते के पहले चरण के मुताबिक, इजरायली फौज गाजा पट्टी के कुछ हिस्सों से हटेगी. खासकर उन क्षेत्रों से जहां हाल के महीनों में तीव्र संघर्ष देखा गया है. सेना के पीछे हटने की सीमा पूर्व-निर्धारित बफर जोन तक होगी, जो गाजा की सीमाओं पर स्थित हैं. इस प्रक्रिया में सेना की टुकड़ियां अपनी पोजीशन से पीछे हटेंगी, मगर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय शांति सेना की तैनाती की जा सकती है.     इतना ही नहीं, फर्स्ट फेज में गाजा में पानी, बिजली और चिकित्सा आपूर्ति जैसी बुनियादी सुविधाओं को बहाल करने पर जोर दिया जाएगा. ट्रंप ने वादा किया है कि सेना के पीछे हटाव के बाद गाजा में निर्माण कार्यों को अनुमति दी जाएगी, जो युद्ध से तबाह हुए इलाकों के पुनर्निर्माण में सहायक होगा.     इस फर्स्ट फेज का मकसद तत्काल संघर्ष विराम सुनिश्चित करना है. हमास और इजरायल ने अगले 30 दिनों के भीतर इस पहले चरण को पूरा करने का लक्ष्य रखा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का पूरा बयान     मुझे यह बताते हुए बहुत गर्व है कि इजरायल और हमास दोनों ने हमारे शांति समझौते के पहले चरण पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. इसका मतलब है कि सारे बंधक बहुत जल्द रिहा किए जाएंगे और इजरायल अपनी फौजों को तय की गई सीमा तक पीछे हटा लेगा. यह एक मजबूत, स्थायी और लंबे समय तक रहने वाली शांति की दिशा में पहला कदम है. सभी पक्षों के साथ इंसाफ से बर्ताव किया जाएगा. यह अरब और मुस्लिम दुनिया, इजरायल, आस-पास के सभी देशों और अमेरिका के लिए एक ऐतिहासिक और खुशियों भरा दिन है. हम कतर, मिस्र और तुर्की के उन मध्यस्थों का शुक्रिया अदा करते हैं, जिन्होंने हमारे साथ मिलकर इस ऐतिहासिक और अनोखे समझौते को संभव बनाया. शांति दूत धन्य हैं.

नोबेल पुरस्कार की दौड़ में कमजोर पड़े ट्रंप, आत्मविश्वास में भी दिखी कमी

नई दिल्ली अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नोबेल पुरस्कार जीतने की कोशिश में जुटे हुए हैं। हालांकि, जानकारों का कहना है कि इस साल ट्रंप की इच्छा पूरे होने के आसार कम हैं। खुद ट्रंप भी कह रहे हैं कि नोबेल कमेटी उनके बजाए किसी और को पुरस्कार देने की वजह खोज लेगी। अमेरिकी राष्ट्रपति दावा कर रहे हैं कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान समेत 7 युद्ध रुकवाए हैं। एएफपी से बातचीत में स्वीडन के प्रोफेसर पीटर वालेनस्टीन ने कहा, 'नहीं, ट्रंप इस साल नहीं जीतेंगे।' उन्होंने कहा, 'लेकिन शायद अगले साल? तब तक गाजा संकट समेत उनकी कई पहलों पर स्थिति साफ हो चुकी होगी।' कौन जीत सकता है पुरस्कार खबर है कि इस साल 338 लोग और संगठन नॉमिनेशन प्रक्रिया में हैं, लेकिन यह सूची गुप्त रखी जाती है। नॉमिनेट करने वालों में सांसद, सरकारी अधिकारी, पूर्व विजेता और कमेटी के सदस्य शामिल होते हैं। साल 2024 में यह पुरस्कार जापान के एटम बम पीड़ितों से जुड़े निहोन हिदान्यको को मिला था। साफ नहीं है कि 2025 की रेस में कौन-कौन है। माना जा रहा है कि सुडान के इमरजेंसी रिस्पॉन्स रूम, रूस के विपक्षी नेता एलेक्सी नवेलनी की विधवा यूलिया नवलनाया और चुनावी गतिविधियों पर नजर रखने वाले ऑफिस फॉर डेमोक्रेटिक इंस्टीट्यूशन्स एंड ह्यूमन राइट्स का नाम दौड़ में शामिल हो सकता है। इनके अलावा संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस, UNRWA के नाम पर मुहर लग सकती है। संभावनाएं जताई जा रही हैं कि इस बार नोबेल कमेटी अपने चुनाव से सभी को चौंका सकती है। भारतीय समयानुसार शुक्रवार दोपहर करीब 2 बजकर 30 मिनट पर पुरस्कार की घोषणा की जा सकती है। खुद ट्रंप क्या बोले नोबेल से जुड़े सवाल पर पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा, 'मुझे कोई आइडिया नहीं है…। मार्को आपको बताएंगे कि हमने 7 युद्ध समाप्त किए हैं। हम 8वां समाप्त करने के करीब हैं। मुझे लगता है कि हम रूसी स्थिति को भी खत्म कर लेंगे…। मुझे नहीं लगता कि इतिहास में किसी ने कभी इतने युद्ध खत्म कराए होंगे। लेकिन वो शायद पुरस्कार मुझे नहीं देने की कोई वजह खोज लेंगे।'

CJI गवई पर जूता फेंकने वाले की सराहना कर विवादों में फंसे पूर्व कमिश्नर

बेंगलुरु  बेंगलुरु के पूर्व पुलिस आयुक्त और भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता भास्कर राव ने CJI यानी भारत के मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई की ओर जूता उछालने वाले अधिवक्ता राकेश किशोर की प्रशंसा की है। हालांकि, आलोचना होने के बाद राव ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के लिए माफी मांग ली। किशोर के खिलाफ बेंगलुरु में एफआईआर दर्ज हुई है। राव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर  एक पोस्ट में कहा था, 'भले ही यह कानूनी रूप से बहुत गलत हो, लेकिन मैं इस उम्र में भी आपके साहस की प्रशंसा करता हूं कि आपने परिणामों की परवाह किए बिना एक रुख अपनाया और उस पर कायम रहे।' राव के इस पोस्ट पर कई ‘एक्स’ उपयोगकर्ताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी। नितिन शेषाद्रि ने हैरानी जताते हुए कहा, 'मान्यवर, मुझे आपसे इसकी उम्मीद नहीं थी। क्या यह नाथूराम गोडसे और नारायण आप्टे के मुकदमों में उनके बचाव में इस्तेमाल की गई भाषा जैसी नहीं थी?' एक अन्य उपयोगकर्ता ने बेंगलुरु पुलिस को टैग करते हुए लिखा, 'आपको इस पोस्ट पर कार्रवाई करनी चाहिए!' राव ने बाद में बुधवार को एक पोस्ट कर अपनी राय के लिए माफी मांगी। भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के सेवानिवृत्त अधिकारी ने कहा, 'मेरी प्रतिक्रिया हैरानी और सदमे से भरी थी कि एक व्यक्ति इतना शिक्षित, वृद्ध और अनुभवी होने के बावजूद एक भयानक और कानूनी रूप से गलत कार्य के परिणामों को पूरी तरह से जानते हुए यह कृत्य कर रहा है। मैंने न तो उच्चतम न्यायालय, न ही प्रधान न्यायाधीश या किसी समुदाय का अपमान किया है। अगर मेरे पोस्ट से किसी को गुस्सा आया है या ठेस पहुंची है, तो मुझे खेद है।' राव ने चामराजपेट विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन बी जेड जमीर अहमद खान से हार गए थे। खान मौजूदा कर्नाटक सरकार में आवास मंत्री हैं। सोमवार को अदालती कार्यवाही के दौरान 71-वर्षीय वकील ने कथित तौर पर शिष्टाचार का उल्लंघन करते हुए प्रधान न्यायाधीश गवई की ओर जूता उछालने की कोशिश की।

भारत-अर्कटिक कनेक्शन: पुतिन की पहल से चीन को टक्कर, बर्फीले मार्ग की अहमियत

मॉस्को/ नईदिल्ली  वैश्विक भू-राजनीति के बदलते परिदृश्य में, रूस और भारत के बीच सदियों पुरानी दोस्ती एक बार फिर नई ऊंचाइयों को छूने वाली है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दिसंबर में प्रस्तावित भारत यात्रा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि आर्कटिक क्षेत्र में एक ऐतिहासिक समझौते की नींव भी रखेगी। यह समझौता नॉर्दर्न सी रूट (NSR) और संसाधन विकास पर केंद्रित होगा जो भारत को आर्कटिक परिषद में बड़ी भूमिका दिलाने का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। यह कदम न केवल आर्थिक अवसरों के द्वार खोलेगा, बल्कि चीन की बढ़ती आर्कटिक महत्वाकांक्षाओं के बीच रूस के लिए एक रणनीतिक संतुलन भी साबित होगा। पारंपरिक दक्षिणी समुद्री मार्गों की तुलना में छोटा यह मार्ग ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, नई दिल्ली की नॉर्दर्न सी रूट के विकास में संभावित भागीदारी को लेकर बातचीत चल रही है और संभावना है कि इस साल होने वाले वार्षिक शिखर सम्मेलन में इस दिशा में ठोस परिणाम सामने आ सकते हैं। नॉर्दर्न सी रूट रूस के उत्तरी तट के साथ आर्कटिक महासागर से होकर गुजरता है और पारंपरिक दक्षिणी समुद्री मार्गों की तुलना में करीब 40% छोटा है। इस मार्ग से यूरोप और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के बीच तेज, सुरक्षित और किफायती कार्गो परिवहन संभव हो सकेगा। जुलाई 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मॉस्को यात्रा के दौरान दोनों देशों ने आर्कटिक शिपिंग में सहयोग की संभावनाओं को लेकर एक संयुक्त कार्य समूह बनाने पर सहमति जताई थी। यह समूह रूस के विशेष आर्कटिक विकास प्रतिनिधि व्लादिमीर पानोव (Rosatom) और भारत के नौवहन मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा की संयुक्त अध्यक्षता में काम कर रहा है। इस कार्य समूह की पहली बैठक अक्टूबर 2024 में नई दिल्ली में हुई, जिसमें आर्कटिक जहाज निर्माण परियोजनाओं में साझेदारी, भारतीय नाविकों को ध्रुवीय नौवहन प्रशिक्षण देने, और एनएसआर पर कार्गो शिपिंग सहयोग के लिए एक एमओयू तैयार करने पर चर्चा हुई। भारत को आर्कटिक काउंसिल में बड़ी भूमिका देना चाहता है रूस सूत्रों के अनुसार, रूस चाहता है कि भारत को आर्कटिक काउंसिल में अधिक प्रभावशाली भूमिका दी जाए। इसका एक प्रमुख कारण यह है कि मॉस्को क्षेत्र में चीन के बढ़ते दखल को संतुलित करना चाहता है। आर्कटिक इलाका जीवाश्म ईंधन और महत्वपूर्ण खनिजों से समृद्ध है, जिससे रूस और भारत दोनों के लिए यह रणनीतिक रूप से अहम बनता है। इसके साथ ही रूस इस बात पर भी जोर दे रहा है कि नॉर्दर्न सी रूट को ईरान के चाबहार बंदरगाह से जोड़ा जाए। भारत ने इस बंदरगाह के संचालन की जिम्मेदारी अगले दस वर्षों के लिए हासिल की है। रूस इस बंदरगाह का इस्तेमाल भारतीय महासागर क्षेत्र तक पहुंच के लिए करना चाहता है। पुतिन के आगामी भारत दौरे से उम्मीद की जा रही है कि भारत-रूस आर्कटिक सहयोग में एक नया अध्याय शुरू होगा, जो न केवल आर्थिक दृष्टि से बल्कि सामरिक दृष्टिकोण से भी दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। आर्कटिक: वैश्विक व्यापार का नया गेटवे आर्कटिक क्षेत्र पृथ्वी के सबसे ठंडे और संसाधन-समृद्ध इलाकों में से एक है। यह आज जलवायु परिवर्तन के कारण तेजी से पिघल रहा है। इससे न केवल नए शिपिंग मार्ग खुल रहे हैं, बल्कि तेल, गैस, दुर्लभ खनिजों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों तक पहुंच भी आसान हो रही है। रूस आर्कटिक महासागर के 53 प्रतिशत तट को नियंत्रित करता है। वह इस क्षेत्र में अपनी प्रभुता कायम रखने के लिए सक्रिय है। 2024 में NSR से 37 मिलियन टन से अधिक माल ढोया गया, जो 2025 में और बढ़ने की उम्मीद है। भारत के लिए यह अवसर सुनहरा है। स्वेज कनाल या पनामा चैनल जैसे पारंपरिक मार्गों की तुलना में NSR एशिया और यूरोप के बीच यात्रा को 40 प्रतिशत छोटा कर देता है। इससे न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि व्यापारिक लागत भी घटेगी। रूसी स्रोतों के अनुसार, पुतिन की यात्रा के दौरान NSR के उपयोग पर ठोस कार्रवाई की योजना बनेगी। इसमें भारत को रूसी आइसब्रेकर बेड़े (जिसमें 40 आइसब्रेकर और 8 न्यूक्लियर-संचालित जहाज शामिल हैं) का सहयोग मिलेगा। यह कदम चीन की 'पोलर सिल्क रोड' महत्वाकांक्षाओं का मुकाबला करने के लिए रूस की रणनीति का हिस्सा है। आर्कटिक में चीन की बढ़ती उपस्थिति रूस के लिए चुनौती बनी हुई है, और भारत का प्रवेश एक संतुलनकारी शक्ति के रूप में काम करेगा। भारत-रूस संबंध: इतिहास से वर्तमान तक भारत और रूस के बीच संबंध सोवियत काल से ही विशेष रहे हैं। 1971 के भारत-पाक युद्ध में सोवियत संघ का समर्थन हो या आज रूस का S-400 मिसाइल सिस्टम, दोनों देशों की साझेदारी रक्षा, ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में अटूट रही है। 2024 में द्विपक्षीय व्यापार 63 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें रूसी तेल भारत का सबसे बड़ा आयात स्रोत बना। यूक्रेन संघर्ष के बावजूद, भारत ने रूसी ऊर्जा पर निर्भरता बनाए रखी, जिसकी आलोचना अमेरिका ने की। लेकिन राष्ट्रपति पुतिन ने हाल ही में वलदाई चर्चा क्लब में कहा, "भारत हमारे ऊर्जा वाहकों को अस्वीकार करे तो उसे 9-10 अरब डॉलर का नुकसान होगा। हमारी साझेदारी मजबूत है।" पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को "प्रिय मित्र" और "बुद्धिमान नेता" कहा, जो देश की भलाई के बारे में सोचते हैं।

ट्रंप का दांव उलटा पड़ा, अमेरिकी जनता भुगत रही टैरिफ का खामियाजा

वाशिंगटन डोनाल्ड ट्रंप ने किसी देश पर 25%, तो भारत और ब्राजील जैसे देशों पर 50%  का हाई टैरिफ लगाया है, लेकिन उनका ये कदम खुद अमेरिका के लिए ही परेशानी का सबब बनता जा रहा है. दुनियाभर के तमाम दिग्गज इकोनॉमिस्ट ने इसकी आलोचना की है. अब IMF की पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ भी इसमें शामिल हो गई हैं. उन्होंने कहा है कि US Tariff के छह महीने के बाद भी इसका कोई खास असर देखने को नहीं मिला है और अमेरिका में जो राजस्व बढ़ा है, वो खुद अमेरिकी जनता और यहां की कंपनियों से ही लिया गया है.  अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर निगेटिव असर ट्रंप टैरिफ के चलते दुनिया में ट्रेड वॉर जैसी स्थिति बनी है. फिर बात चाहे चीन के साथ व्यापार युद्ध की हो, या फिर ब्राजील जैसे देशों की. भारत के बारे में देखें, तो ट्रंप ने पहले 25% टैरिफ का ऐलान किया और फिर रूसी तेल खरीद को मुद्दा बनाते हुए इसे दोगुना करते हुए 50% कर दिया. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया के तमाम देशों पर टैरिफ लगाकर आखिर अमेरिका को क्या हासिल हुआ? तो इसे लेकर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र की प्रोफेसर भारतीय मूल की गीता गोपीनाथ ने बड़ा दावा किया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए कहा कि इसका निगेटिव असर खुद US Economy पर ही हुआ है.  US के ग्राहकों-कंपनियों पर बढ़ा बोझ गीता गोपीनाथ ने अपनी एक्स पोस्ट में कहा है कि डोनाल्ड ट्रंप को टैरिफ का ऐलान किए छह महीने से ज्यादा हो गए हैं, लेकिन इसका कोई खास नतीजा नहीं निकल सका है. उन्होंने लिखा, 'अमेरिका के टैरिफ से क्या हासिल हुआ? क्या सरकार के लिए राजस्व बढ़ा? हां, काफी बढ़ा, लेकिन यह पैसा करीब-करीब पूरी तरह से अमेरिकी कंपनियों से ही वसूला गया और कुछ हद तक इसकी भरपाई अमेरिकी उपभोक्ताओं से की गई. कुल मिलकार ट्रंप का टैरिफ इनके लिए एक टैक्स जैसा ही साबित हुआ.  टैरिफ से सुधार के कोई संकेत नहीं IMF की पूर्व चीफ इकोनॉमिस्ट गीता गोपीनाथ ने टैरिफ की आलोचना करते हुए कहा कि ये सीधे तौर पर अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए निगेटिव स्कोरकार्ड रहा है. भारत और ब्राजील से आयात पर 50% तक, और कुछ भारतीय दवाओं पर तो 100% तक टैरिफ घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और व्यापार संतुलन में सुधार लाने के लिए थे. लेकिन इसका अमेरिका को बहुत कम या कोई आर्थिक लाभ नहीं हुआ है. उन्होंने लिखा कि न तो व्यापार संतुलन में सुधार और न ही अमेरिका विनिर्माण क्षेत्र में इसके पॉजिटिव असर का कोई संकेत मिला है.  उल्टा महंगाई में कर दिया इजाफा  गीता गोपीनाथ ने टैरिफ के चलते अमेरिका में महंगाई दर को लेकर कहा कि इसके लागू होने के बाद से देश में महंगाई में थोड़ा इजाफा देखने को मिला है. खासतौर पर घरेलू उपकरणों, फर्नीचर, कॉफी जैसी चीजों के दाम में बढ़ोतरी देखने को मिली है. गोपीनाथ ही नहीं, बल्कि दुनिया के तमाम एक्सपर्ट्स ने भी अपने-अपने तरीके से ट्रंप के टैरिफ की आलोचना की है और इसे खुद अमेरिका के लिए खराब करार दिया है.