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वैष्णो देवी के दर्शन स्थगित, श्रद्धालु निराश: भविष्य में यात्रा कब संभव होगी?

नई दिल्ली  श्री माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए भारी संख्या में भक्त जाते हैं. ऐसे में भक्तों को मायूस कर देने वाली एक खबर आई है. आज की यात्रा एक बार फिर अगले आदेशों तक स्थगित कर दी गई है. श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने रात करीब आठ बजे यात्रा स्थगित करने की जानकारी अपने एक्स हैंडल पर दी. यात्रा को स्थगित करने की प्रमुख वजह मौसम, भवन और रास्तों में हो रही लगातार बारिश बताई जा रही है. श्राइन बोर्ड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, जय माता दी. लगातार बारिश के कारण 14 सितंबर से शुरू होने वाली वैष्णो देवी यात्रा अगले आदेश तक स्थगित की गई है. सभी श्रद्धालुओं से अनुरोध है कि वो कृपया आधिकारिक संचार माध्यमों के माध्यम से अपडेट लेते रहें.’ यात्रा स्थगित होने से भक्तों में छाई मायूसी मां वैष्णो देवी भवन परिसर के साथ ही सभी रास्तों और कटरा में देर शाम को बरसात हुई. इसके बाद श्री माता वैष्णो देवी साइन बोर्ड ने एक बार फिर ये फैसला किया कि यात्रा स्थगित की जाएगी. श्री माता वैष्णो देवी की यात्रा एक बार फिर स्थगित होने से कटरा में उन भक्तों में मायूसी नजर आई जो माता की यात्रा शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं. फिलहाल भक्तों को इंतजार करना पड़ेगा. मौसम सुधरेगा तो यात्रा होगी सुचारू श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के अनुसार, आने वाले सोमवार या फिर कुछ दिनों में मौसम सुधरता दिखाई देगा तो माता वैष्णो देवी की यात्रा एक बार फिर सुचारू कर दी जाएगी. श्राइन बोर्ड यात्रा एक बार फिर सुचारू करने को लेकर सभी तरह की तैयारीयां कर चुका है, लेकिन मौसम इसमें बाधा खड़ी कर रहा है. मौसम के हालातों को देखकर ही यात्रा सुचारू की जाएगी. ये बात पहले ही श्राइन बोर्ड साफ कर चुका है.

इजरायली पीएम की कड़ी चेतावनी: हमास नेता संघर्षविराम को बाधित कर रहे हैं, तभी खत्म होगी लड़ाई

तेल अवीव इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया कि कतर में हमास नेता संघर्षविराम के प्रयासों में बाधा डाल रहे हैं और गाजा में संघर्ष को बढ़ा रहे हैं। नेतन्याहू ने कहा कि कतर में रह रहे हमास नेताओं से छुटकारा पाकर ही शांति स्थापित हो सकती है। बेंजामिन नेतन्याहू ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में कतर सरकार पर भी निशाना साधा और हमास नेताओं को पनाह देने का आरोप लगाया। इस्राइल का कतर पर निशाना नेतन्याहू ने लिखा कि 'कतर में रह रहे हमास के आतंकी प्रमुखों को गाजा के लोगों की कोई परवाह नहीं है। उन्होंने युद्ध को अंतहीन रूप से खींचने के लिए युद्धविराम के सभी प्रयासों को बाधित कर दिया। उनसे छुटकारा पाकर ही हमारे सभी बंधक रिहा हो सकेंगे और युद्ध समाप्त हो सकेगा।' इस्राइली पीएम नेतन्याहू की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब इस्राइल ने शीर्ष हमास नेताओं को शरण देने के लिए कतर की बार-बार आलोचना की है। नेतन्याहू ने सोशल मीडिया पर साझा एक वीडियो संदेश में कहा कि 'इस्राइल, हमास नेताओं के खिलाफ, चाहे वे कहीं भी हों, कार्रवाई करेगा, जब तक कि कतर उन्हें बाहर न निकाल दे या उन्हें न्याय न हो जाए।' इस्राइल के कतर में किए गए हमले पर विवाद इस्राइली वायुसेना ने मंगलवार को हमास के नेताओं को निशाना बनाने के लिए कतर की राजधानी दोहा में बड़ा हवाई हमला किया था। इस हमले में हमास के नेताओं की मौत हो गई थी। कतर पर हुए हमले की मध्य पूर्व और उसके बाहर कई देशों ने व्यापक निंदा की। इसके बाद कतर और इस्राइल के बीच तनाव बढ़ गया। साथ ही युद्ध को समाप्त करने और गाजा में हमास द्वारा बंधक बनाए गए लोगों को मुक्त कराने के लिए चल रही बातचीत खतरे में पड़ गई है। हमले के बाद हमास ने कहा कि उसके शीर्ष नेता हमले में बच गए, लेकिन पांच निचले स्तर के सदस्य मारे गए। इसमें गाजा में हमास के नेता और उसके शीर्ष वार्ताकार खलील अल-हय्या का बेटा, तीन अंगरक्षक और अल-हय्या के कार्यालय का प्रमुख शामिल है।

53 राष्ट्रीय राइफल्स के जवान घायल, बडगाम में सेना का वाहन पलटा

श्रीनगर रविवार को जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में सेना के एक वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने से 53 राष्ट्रीय राइफल्स के चार जवान घायल हो गए। इनमें से दो जवानों की हालत गंभीर बताई जा रही है। हादसे के तुरंत बाद सभी घायलों को इलाज के लिए 92 बेस अस्पताल, बदामी बाग छावनी (श्रीनगर) में भर्ती कराया गया है, जहां उनका  इलाज जारी है। फिलहाल दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है। सेना और प्रशासन की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

PM मोदी बोले – मां को गाली देने वालों को भी माफ करता हूं, शिव का भक्त हूं

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज असम के दौरे पर थे। इस दौरान उन्होंने खुद को भगवान शिव का भक्त बताया। उन्होंने कहा कि कोई मुझे कितनी भी गाली दे, मैं सारा जहर निगल जाता हूं। उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर तंज कसते हुए कहा कि मेरा रिपोर्ट कंट्रोल सिर्फ देश की 140 करोड़ जनता है, वही मेरा मालिक है। पीएम मोदी ने कांग्रेस पर भूपेन हजारिका का अपमान करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा की ‘डबल इंजन’ सरकार भूपेन हजारिका जैसे असम के महान सपूतों के सपनों को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है। पीएम मोदी ने कहा, "मेरे लिए तो जनता-जनार्दन ही मेरा भगवान है। मेरे भगवान के पास जाकर मेरी आत्मा की आवाज नहीं निकलेगी तो और कहां निकलेगी। यही मेरे मालिक हैं, यही मेरे पूजनीय हैं, यही मेरा रिमोट कंट्रोल हैं और कोई मेरा रिमोट कंट्रोल नहीं है। 140 करोड़ देशवासी मेरा रिमोट कंट्रोल हैं।" प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने असम के दरांग में 6,300 करोड़ रुपये की स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की आधारशिला रखी। उन्होंने गुवाहाटी रिंग रोड परियोजना की भी आधारशिला रखी। इस दौरान उन्होंने कहा कि मैं ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार असम आया हूं। गौरतलब है कि पिछले दिनों इंडिया गठबंधन की वोटर अधिकार यात्रा के समय बिहार के दरभंगा में एक मंच से विपक्षी दलों के कुछ कार्यकर्ताओं ने पीएम मोदी और उनके मां को गाली दी थी जिसका वीडियो सामने आया था। इस मामले में बिहार भाजपा की तरफ से एक प्राथमिकी दर्ज करवाई थी जिसमे कहा गया था कि वोटर अधिकार यात्रा के एक कार्यक्रम के दौरान मंच से भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गाली दी गई। इस मामले में दरभंगा जिले की पुलिस ने सिंहवाड़ा थाना क्षेत्र के भवानीपुर पंचायत (वार्ड सं० 1) के भपुरा गंव निवासी अनीश कुरैशी के पुत्र मोहम्मद रिजवी उर्फ राजा को गिरफ्तार किया था। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, "भारत वर्तमान में दुनिया में सबसे तेजी से विकास करने वाला देश है और असम इसके सबसे तेजी से विकास करने वाले राज्यों में से एक है। कभी विकास के साथ तालमेल बिठाने के लिए संघर्ष कर रहा असम अब काफी बदल गया है और 13% की विकास दर के साथ उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है। यह प्रभावशाली उपलब्धि यहां के लोगों के दृढ़ संकल्प और समर्पण का प्रमाण है। यह असम के लोगों की कड़ी मेहनत और भाजपा की डबल इंजन सरकार के योगदान से प्रेरित सहयोगात्मक प्रयासों का भी परिणाम है। यही कारण है कि हिमंत बिस्वा सरमा जी और उनकी टीम को असम के लोगों का भारी समर्थन मिल रहा है।"  

PM बनते ही सुशीला कार्की का बड़ा संदेश, हिंसा में शामिल लोगों पर कार्रवाई तय

नेपाल  नेपाल की राजनीति एक बार फिर अस्थिरता के दौर से गुजर रही है। हाल ही में हुए संसद भंग और सड़कों पर भड़की हिंसा के बीच देश की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रह चुकीं सुशीला कार्की ने रविवार को अंतरिम प्रधानमंत्री का कार्यभार संभाला। कार्की ने साफ कहा कि उनकी सरकार केवल संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए है न कि सत्ता में लंबे समय तक टिके रहने के लिए। प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद कार्की ने अपने पहले संबोधन में Gen-Z को बड़ा झटका दिया है। उन्होंने साफ-साफ कहा है कि नेपाल में हाल में हुए हिंसक प्रदर्शन की जांच कराई जाएगी। प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद कार्की ने अपने पहले संबोधन में कहा, “तोड़फोड़ की घटना में शामिल लोगों की जांच होगी। मेरा दल और मैं सत्ता का स्वाद चखने नहीं आए हैं। हम छह महीने से ज्यादा नहीं रुकेंगे और नई संसद के चुने जाने के बाद जिम्मेदारी सौंप देंगे। जनता के सहयोग के बिना हम सफल नहीं होंगे।” नेपाल में यह राजनीतिक संकट तब गहराया जब सत्ता में चल रही गठबंधन सरकार आंतरिक मतभेदों और भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण गिर गई। संसद भंग होने के बाद विपक्षी दलों और नेपाल के युवाओं जिन्हें Gen-Z कहा गया, ने व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए। कई जगहों पर हिंसक झड़पें और सरकारी संपत्तियों की तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं। इन्हीं हालातों को नियंत्रित करने और अगले आम चुनाव तक व्यवस्था चलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट और संवैधानिक निकायों की सिफारिश पर कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री बनाया गया। कौन हैं सुशीला कार्की? सुशीला कार्की नेपाल की राजनीति और न्यायपालिका दोनों में ही एक चर्चित चेहरा रही हैं। वह 2016 में नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनीं और अपने कार्यकाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े फैसलों के लिए जानी गईं। कार्की की नियुक्ति को नेपाल की राजनीति में साफ-सुथरी छवि और महिला नेतृत्व को आगे लाने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। कार्की के सामने सबसे बड़ी चुनौती राजनीतिक स्थिरता बहाल करना और देश को चुनाव तक ले जाना है। हाल के वर्षों में नेपाल ने बार-बार सरकार बदलने का रिकॉर्ड बनाया है। केवल पिछले 10 वर्षों में देश में एक दर्जन से अधिक प्रधानमंत्रियों ने पदभार संभाला। इससे जनता का विश्वास कमजोर हुआ है और लोकतांत्रिक संस्थाएं दबाव में आई हैं। साथ ही, नेपाल इस समय आर्थिक संकट, बढ़ती बेरोजगारी और महंगाई से भी जूझ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि नई सरकार को सिर्फ राजनीतिक संक्रमण संभालने तक सीमित न रहकर जनहित से जुड़े तात्कालिक मुद्दों पर भी ध्यान देना होगा। कार्की ने अपने बयान में कहा कि उनकी सरकार का प्राथमिक उद्देश्य निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराना है। उन्होंने नागरिक समाज और युवाओं से अपील की कि वे लोकतंत्र की रक्षा के लिए जिम्मेदारी निभाएं। नेपाल की जनता अब इस इंतजार में है कि क्या सुशीला कार्की का कार्यकाल वास्तव में राजनीतिक स्थिरता की दिशा में एक कदम साबित होगा या फिर यह भी नेपाल की राजनीति के अस्थिर अध्यायों में से एक बनकर रह जाएगा।  

ओवैसी ने सरकार पर साधा निशाना, पूछा – ‘जान की कीमत कम, पैसा ज्यादा?’

नई दिल्ली एशिया कप में रविवार रात होने वाले भारत बनाम पाकिस्तान मुकाबले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक विवाद गहराता जा रहा है। पाहलगाम आतंकी हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की मौत और उसके बाद हुए ऑपरेशन सिंदूर के बीच इस मैच पर सवाल उठाते हुए विपक्ष और पीड़ित परिवारों ने बहिष्कार की मांग की है। वहीं एआईएमआईएम चीफ और लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी और उनकी पार्टी ने भी सवाल उठाए हैं। AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, “क्या हमारे 26 नागरिकों की जान की कीमत कुछ हजार करोड़ रुपये से कम है? प्रधानमंत्री ने कहा था कि खून और पानी साथ नहीं बह सकते, बातचीत और आतंकवाद साथ नहीं चल सकते। फिर एक क्रिकेट मैच से बीसीसीआई को कितनी कमाई होगी, 2000 करोड़, 3000 करोड़? क्या पैसों की कीमत जान से ज्यादा है?” ओवैसी ने असम और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों से भी सवाल किया कि क्या उनके पास यह ताकत नहीं है कि पाकिस्तान के खिलाफ मैच खेलने से इनकार कर सकें? कांग्रेस नेता अभिषेक दत्त ने मैच रद्द करने की मांग की और कहा कि सरकार के "नो टॉक्स विद टेरर" वाले रुख से यह निर्णय मेल नहीं खाता। AAP नेताओं ने शनिवार को पाकिस्तान का पुतला जलाया। पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने क्लबों और रेस्टोरेंट्स का बहिष्कार करने की अपील की, जो मैच का लाइव प्रसारण करेंगे। शिवसेना (UBT) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने नागरिकों से मैच न देखने की अपील की। उन्होंने कहा, “क्रिकेट पर आतंक को तरजीह न दें, पाहलगाम के 26 परिवारों के साथ खड़े हों।” शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी प्रधानमंत्री मोदी पर हमला करते हुए कहा, “युद्ध और क्रिकेट साथ-साथ कैसे हो सकते हैं? इन्होंने देशभक्ति को भी धंधा बना दिया है।” भाजपा का पलटवार बीजेपी नेता दिलीप घोष ने कहा, “कांग्रेस के शासन में भी मैच खेले जाते थे। हमने पाकिस्तान को जंग में हराया है, क्रिकेट में भी हराएंगे। मैदान छोड़ना सही नहीं।” केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि मैच और तनाव को अलग-अलग मुद्दे समझना चाहिए। उन्होंने कहा, “खेल का भी महत्व है। खिलाड़ियों ने मेहनत की है। जो फैसला लिया गया है, सोच-समझकर लिया गया है।” आपको बता दें कि यह मैच पहले भारत में होना था, लेकिन भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते राजनीतिक तनाव को देखते हुए टूर्नामेंट को UAE स्थानांतरित किया गया। मैच रविवार रात 8 बजे दुबई में शुरू होगा।

सुशीला कार्की ने संभाली पीएम की कमान, नई कैबिनेट के गठन पर जारी मंथन

काठमांडू नेपाल की नवनियुक्त अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की रविवार सुबह 11 बजे सिंह दरबार में आधिकारिक रूप से कार्यभार संभाल लिया। पूर्व मुख्य न्यायाधीश कार्की को शुक्रवार रात को अंतरिम सरकार की प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त किया गया था। इसके साथ ही प्रधानमंत्री सुशीला कार्की रविवार को अपने मंत्रिमंडल का विस्तार कर सकती हैं। वह मंत्रियों के नामों को अंतिम रूप देने में अपने सहयोगियों के साथ विचार-विमर्श कर रही हैं। बताया जा रहा है कि मंत्रिमंडल का विस्तार छोटा होगा। वहीं दूसरी ओर पीएम कार्की गृह, विदेश और रक्षा समेत लगभग दो दर्जन मंत्रालय अपने पास रख सकती हैं। मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाओं के बीच शनिवार को समय निकालकर वह सरकार विरोधी प्रदर्शन में घायलों से मिलने सिविल अस्पताल भी गईं थीं। शुक्रवार को शपथ लेने के तुरंत बाद भी वह अस्पताल जाकर घायलों का हाल जाना था। मंत्रिमंडल में शामिल किए जा सकते हैं 15 मंत्री काठमांडू पोस्ट के मुताबिक, कार्की ने अपने मंत्रिमंडल को अंतिम रूप देने की तैयारी के लिए जेन जी आंदोलन के करीबी सलाहकारों और प्रमुख हस्तियों के साथ परामर्श शुरू कर दिया है। उनके एक सहयोगी ने दावा किया है कि कार्की रविवार सुबह अपने मंत्रिमंडल के गठन के लिए गहन चर्चा शुरू करेंगी। सभी 25 मंत्रालयों पर अधिकार रखने के बावजूद वह कथित तौर पर 15 से अधिक मंत्रियों के साथ एक सुव्यवस्थित मंत्रिमंडल बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इन नामों पर चल रहा है विचार काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार मंत्री पदों के लिए जिन नामों पर विचार किया जा रहा है उनमें कानूनी विशेषज्ञ ओम प्रकाश आर्यल, पूर्व सेना अधिकारी बालानंद शर्मा, सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति आनंद मोहन भट्टाराई, माधव सुंदर खड़का, अशीम मान सिंह बसन्यात और ऊर्जा विशेषज्ञ कुलमन घीसिंग शामिल हैं। चिकित्सा क्षेत्र से डॉ. भगवान कोइराला, डॉ. संदुक रुइत, डॉ. जगदीश अग्रवाल और डॉ. पुकार चंद्र श्रेष्ठ जैसे प्रमुख लोगों के नामों पर विचार चल रहा है। नामों को लेकर हो रही है ऑनलाइन वोटिंग काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, जेनरेशन जेड के सदस्य भी समानांतर परामर्श कर रहे हैं। इसके लिए वह ऑनलाइन वोटिंग का भी सहारा ले रहे हैं। अगर इन नामों पर आम सहमति बन जाती है, तो मंत्रिमंडल रविवार शाम तक शपथ ले सकता है, हालांकि चर्चा के नतीजों के आधार पर इसे सोमवार तक के लिए भी टाला जा सकता है। 5 मार्च 2026 को होंगे संसदीय चुनाव नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने शुक्रवार को नव नियुक्त अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की की सिफारिश पर देश की संसद (प्रतिनिधि सभा) को भंग कर दिया था। राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी सूचना के अनुसार सदन का विघटन 12 सितंबर 2025 की रात 11 बजे से प्रभावी हुआ। अंतरिम सरकार बनने के साथ ही अधिकारियों ने देश में नए सिरे से संसदीय चुनाव कराने का भी एलान कर दिया। नेपाल में अब 5 मार्च 2026 को आम चुनाव कराए जाएंगे। सोमवार से खुलेंगे स्कूल काठमांडू महानगरपालिका क्षेत्र के स्कूलों में सोमवार से कक्षाएं शुरू होंगी। शनिवार को जारी सूचना में महानगर ने कहा कि शिक्षक और कर्मचारी रविवार को ही स्कूल में उपस्थित होंगे, लेकिन पढ़ाई सोमवार से शुरू होगी। रविवार को स्कूलों में प्रशासनिक काम, क्षति का मूल्यांकन और विवरण संकलन किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, जो स्कूल संचालन योग्य स्थिति में होंगे वहां कक्षाएं होंगी। युवाओं के आंदोलन के कारण 8 सितंबर से स्कूल बंद थे। नेपाल में धीरे-धीरे सामान्य हो रहा जनजीवन कई दिनों की अशांति के बाद नेपाल में अब धीरे-धीरे जनजीवन सामान्य हो रहा है। काठमांडो घाटी समेत देश के अन्य हिस्सों से शनिवार को कर्फ्यू और प्रतिबंधात्मक आदेश हटा लिया गया। दुकानें, किराना स्टोर, सब्जी बाजार और शॉपिंग मॉल दोबारा खुल गए हैं। सड़कों पर भी वाहनों की चहल-पहल बढ़ गई है। मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि सेना ने प्रतिबंधात्मक आदेश या कर्फ्यू को शनिवार से आगे नहीं बढ़ाया है। प्रतिबंध हटने के साथ ही सार्वजनिक परिवहन सेवा पुनः शुरू हो गई। काठमांडू से देश के कई भागों के लिए लंबी दूरी की बसों का संचालन भी शुरू हो गया है। हालांकि, काठमांडू के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बिश्वो अधिकारी के अनुसार, हालांकि काठमांडू घाटी के अधिकांश क्षेत्र अब प्रतिबंधों से मुक्त हैं, लेकिन संभावित विरोध प्रदर्शनों को रोकने और व्यवस्था बनाए रखने के लिए कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में प्रतिबंध जारी रहेंगे। प्रमुख सरकारी भवनों समेत कई स्थानों पर सफाई अभियान चलाया गया, जिन्हें हाल ही में हिंसक विरोध प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों की तरफ से तोड़फोड़ कर आग के हवाले कर दिया गया था। सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के खिलाफ केपी शर्मा ओली सरकार के खिलाफ शुरू हुए जेन-जी के आंदोलन के दौरान कम से कम 51 लोग मारे गए थे। पीएम ओली समेत उनके मंत्रियों को पद छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। इसके बाद नेपाल की सेना ने सुरक्षा व्यवस्था को अपने हाथों में ले लिया था।

लंदन की सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब: दक्षिणपंथी गुटों ने उठाई ये मांगें

लंदन ब्रिटेन की राजधानी लंदन में शनिवार को एक लाख से अधिक लोग सड़कों पर उतर आए। हालिया इतिहास का यह सबसे बड़ा दक्षिणपंथी संगठनों का प्रदर्शन है। एंटी इमिग्रेशन कार्यकर्ता टॉमी रॉबिन्सन के नेतृत्व में करीब 1.10 लाख प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे। इस दौरान पुलिस अधिकारियों पर हमले की भी खबरें सामने आईं। यह रैली यूनाइट द किंगडम मार्च के नाम से आयोजित की गई थी। इसके जवाब में स्टैंड अप टू रेसिज्म नामक काउंटर-प्रदर्शन भी हुआ, जिसमें लगभग 5,000 लोगों ने भाग लिया। मेट्रोपॉलिटन पुलिस को कई बार हस्तक्षेप करना पड़ा ताकि दोनों गुट आमने-सामने न आ जाएं। पुलिस ने बताया कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा घेरों को तोड़ने और प्रतिबंधित क्षेत्रों में घुसने की कोशिश की। इस दौरान कई पुलिस अधिकारी घायल हो गए। हालात काबू में लाने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया गया और घुड़सवार दस्ते भी उतारे गए। शनिवार को लंदन में प्रदर्शन के अलावा कई बड़े फुटबॉल मैच और कॉन्सर्ट भी थे, जिसके चलते पुलिस ने 1,600 से अधिक अधिकारियों को तैनात किया। 500 अन्य शहरों से बुलाए गए थे। प्रदर्शनकारियों ने यूनियन फ्लैग और सेंट जॉर्ज क्रॉस के झंडे लहराए। कुछ ने अमेरिकी और इजरायली झंडे भी थामे हुए थे। “मेक अमेरिका ग्रेट अगेन” कैप पहने कई लोग प्रधानमंत्री कियर स्टार्मर के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। कई पोस्टरों पर लिखा था – “उन्हें घर भेजो”। टॉमी रॉबिन्सन का असली नाम स्टीफन याक्सली-लेनन है। उन्होंने मार्च को अभिव्यक्ति की आजादी का जश्न बताया। उन्होंने हाल ही में मारे गए अमेरिकी दक्षिणपंथी नेता चार्ली किर्क को भी श्रद्धांजलि दी। रॉबिन्सन ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, “हजारों लाखों लोग आज लंदन की सड़कों पर एकजुट होकर अपनी आजादियों के लिए खड़े हैं।” रॉबिन्सन अपने समर्थकों के बीच खुद को पत्रकार और व्हिसलब्लोअर बताते हैं और कहते हैं कि वे सरकार की गलतियों को उजागर करते हैं। उनके समर्थकों में टेस्ला और एक्स के मालिक एलन मस्क जैसे प्रभावशाली नाम भी शामिल हैं। हालांकि, रीफॉर्म यूके जैसी बड़ी एंटी-इमिग्रेंट पार्टी उनसे दूरी बनाए रखती है, क्योंकि रॉबिन्सन के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। रैली में शामिल एक समर्थक सैंड्रा मिशेल ने कहा – “हम अपना देश वापस चाहते हैं। हम अपनी आजादी और अभिव्यक्ति का अधिकार वापस चाहते हैं। अवैध प्रवासियों को रोका जाना चाहिए। हम टॉमी पर भरोसा करते हैं।” पुलिस कमांडर क्लेयर हेन्स ने कहा, “हम इस प्रदर्शन को वैसे ही संभालेंगे जैसे किसी और प्रदर्शन को। बिना किसी पक्षपात के। लोगों को कानूनसम्मत अधिकार दिए जाएंगे, लेकिन अव्यवस्था फैलाने वालों के खिलाफ सख्ती बरती जाएगी।” उन्होंने माना कि पहले भी कुछ प्रदर्शनों में एंटी-मुस्लिम नारेबाजी और भड़काऊ घटनाएं सामने आई थीं, लेकिन उन्होंने आश्वासन दिया कि लंदन की विविध समुदायों को भयभीत होकर घरों में रहने की जरूरत नहीं है। यह प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब ब्रिटेन में प्रवासियों के मुद्दे ने राजनीतिक बहस पर पूरी तरह कब्जा कर लिया है। इस साल अब तक 28,000 से अधिक प्रवासी छोटे नावों से इंग्लिश चैनल पार करके ब्रिटेन पहुंचे हैं। देशभर में सड़कों और मोहल्लों में लाल-सफेद झंडों की मौजूदगी बढ़ी है। समर्थकों का कहना है कि यह राष्ट्रीय गर्व का प्रतीक है, लेकिन एंटी-रेसिज्म कैंपेनरों का मानना है कि यह विदेशियों के प्रति नफरत का संदेश है।  

भरूच: फैक्ट्री में लगी आग से मचा हड़कंप, आसमान में उठे धुएं के गुबार

भरूच भरुच जिले के जीआईडीसी (GIDC) पानोली में स्थित संघवी ऑर्गेनिक्स प्राइवेट लिमिटेड (Sanghvi Organics Pvt Ltd) में शनिवार को एक बड़ी आग लग गई। दूर से ही धुएं के मोटे गुबार और आग की लपटें दिखाई दे रही थीं, जिससे औद्योगिक क्षेत्र में दहशत फैल गई। अधिकारियों ने बताया कि दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंच गई हैं और आग बुझाने का काम फिलहाल जारी है। हालांकि, आग लगने की वजह और नुकसान का अभी तक पता नहीं चल पाया है। आग पर काबू पाने के लिए मौके पर 15 से अधिक दमकल गाड़ियां मौजूद हैं। किसी के हताहत या घायल होने की खबर नहीं है। इस नई घटना से कुछ महीने पहले 2 अप्रैल को गुजरात में बनासकांठा जिले के डीसा में भी एक और भयानक आग लगी थी। वह आग एक गोदाम में चल रही अवैध पटाखा फैक्ट्री में एक बड़े धमाके से लगी थी, जिसमें कम से कम 21 लोग मारे गए थे, जिनमें से कई मध्य प्रदेश के प्रवासी मजदूर थे। उस समय के चश्मदीदों ने बताया था कि धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि आस-पास के घरों तक हिल गए और धुएं का गुबार आसमान में छा गया। गोदाम के कुछ हिस्से गिर गए, जिससे मजदूर मलबे में फंस गए। बाद में, पुलिस ने पुष्टि की कि यह यूनिट बिना किसी वैध लाइसेंस और सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करते हुए चलाई जा रही थी। इस त्रासदी के बाद फैक्ट्री के मालिक खूबचंद ठक्कर और उनके बेटे को गिरफ्तार कर लिया गया था।

मेरे दिमाग की कीमत 200 करोड़ – नितिन गडकरी का बयान बना सुर्ख़ियों में

नई दिल्ली इथेनॉल को लेकर विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने विरोधियों को करारा जवाब दिया है। उन्होंने कहा, मेरा दिमाग की ही कीमत हर महीने 200 करोड़ की है। मेरे पास पैसे की कोई कमी नहीं है और मैं कभी नीचे नहीं गिर सकता हूं। उन्होंने कहा कि वह जो कुछ भी करना चाहते हैं वह किसानों के हित के लिए है। इसका कमाई से कोई लेना-देना नहीं है। नागपुर में एग्रीकोज वेलफेयर सोसाइटी के एक कार्यक्रम में संबोधन के दौरान उन्होंने कहा, आपको क्या लगता है कि ये सब मैं पैसे के लिए कर रहा हूं? मैं कोई दलाल नहीं हूं, ईमानदारी से कमाना जानता हूं। उन्होंने कहा, बहुत सारे राजनेता लोगों को लड़ाकर खुद फायदा उठाना जानते हैं, लेकिन हम उनमें नहीं हैं। गडकरी ने कहा, मेरा भी घर-परिवार है। मैं कोई संत नहीं हूं। मुझे हमेशा लगता है कि विदर्भ में 10 हजार किसानों की आत्महत्या शर्म की बात है। जब तक कि हमारे किसान समृद्ध नहीं हो जाते, हम अपने प्रयास कम नहीं करेंगे। गडकरी ने अपने बेटे की कंपनी को लेकर कहा कि वह केवल आइडिया देने का काम करते हैं। उन्होंने कहा, मेरा बेटा इंपोर्ट-एक्सपोर्ट का बिजनेस करता है। उसने हाल ही में ईरान से 800 कंटेनर सेब ऑर्डर किए और यहां से 100 कंटेनर केले भेज दिए। गडकरी ने कहा, मेरे बेट ने गोवा से 300 कंटेनर मछलियां सर्बिया को सप्लाई कीं। उन्होंने कहा, बेटे ने ऑस्ट्रेलिया में दूध के प्रोडक्ट की फैक्ट्री लगाई है। वह अब अबू धाबी और अन्य जगहों पर भी कंटेनर भेजता है। उन्होंने बताया कि उनका बेटा आईटीसी के साथ मिलकर 26 चावल मिलें चलाता है। गडकरी ने कहा, मुझे पांच लाख टन चावल के आटे की जरूरत पड़ती है। इसलिए वह मिल चलाता है और मैं उससे आटा खरीद लेता हूं। उन्होंने कहा कि ये कुछ उदाहरण है जिससे पता चलता है कि बिजनेस में इंटरेस्ट रखने वाले लोग कृषि क्षेत्र में कैसे अवसर पैदा कर सकते हैं।