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1 जुलाई से आपकी जेब पर असर! LPG, Credit Card और कारों से जुड़े 5 बड़े बदलाव जानिए

नई दिल्ली जून का महीना खत्म होने वाला है और 5 दिन बाद जुलाई महीने की शुरुआत हो जाएगी. हर महीने की तरह अगला महीना भी अपने साथ कई बड़े बदलावों (Rule Change From 1st July) को लेकर शुरू होने जा रहा है. इनमें एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बदलाव के साथ ही क्रेडिट कार्ड से जुड़े नियम भी बदलने जा रहे हैं. इसके अलावा कार के शौकीनों को महंगाई का झटका लगने वाला है. आइए ऐसे ही 5 बड़े बदलावों के बारे में जानते हैं।  पहला बदलाव: LPG सिलेंडर के दाम बदलेंगे हर महीने की पहली तारीख को देश के लोगों की नजर तेल कंपनियों द्वारा एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में किए जाने वाले संशोधन पर टिकी होती है, क्योंकि ये मामला सीधे घर की रसोई के बजट से जुड़ा हुआ है. अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते गहराई मिडिल ईस्‍ट टेंशन के बीच LPG Price Hike का कई बार झटका लगा. बीते 1 जून को भी कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर 53.50 रुपये महंगा हुआ था, जिसके बाद 19 Kg LPG Cylinder Price In Delhi 3113.50 रुपये का हो गया था. वहीं 5 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर पर भी महंगाई का बम फूटा था. हालांकि, 14 किलोग्राम वाले रसोई गैस सिलेंडर की कीमतें स्थिर रखी गई थीं।  दूसरा बदलाव: ATF की कीमतों में संशोधन जुलाई महीने की पहली तारीख से दूसरा बड़ा बदलाव हवाई सफर करने वाले यात्रियों से जुड़ा है. दरअसल, तेल कंपनियां न सिर्फ एलपीजी की कीमतों में संशोधन (LPG Price Change) करती हैं, बल्कि एयर टर्बाइन फ्यूल यानी ATF के दाम में भी बदलाव करती हैं. इसकी कीमत में होने वाली बढ़ोतरी हवाई यात्रा के खर्च में बढ़ोतरी करने वाली साबित होती है, तो वहीं इसमें गिरावट खर्च में कटौती का कारण बनती है।  तीसरा बदलाव: HDFC क्रेडिट कार्ड रूल  HDFC Bank का क्रेडिट कार्ड यूज करते हैं, तो फिर आपके लिए भी 1 जुलाई 2026 की तारीख बदलाव (Credit Card Rule Change) लेकर आ रही है. दरअसल, एचडीएफसी बैंक रेगैलिया गोल्ड क्रेडिट कार्ड यूजर्स को घरेलू एयरपोर्ट लाउंज की फ्री सर्विस जारी रखने के लिए तिमाही खर्च की नई लिमिट पूरी करनी होगी. ताजा संशोधन के मुताबिक, इस क्रेडिट कार्ड के यूजर्स को अगली तिमाही में इस फ्री सर्विस का लाभ लेने के लिए पिछली तिमाही में मिनिमम 60,000 रुपये खर्च करने होंगे।  चौथा बदलाव: फ्री में आधार अपडेट  जुलाई की पहली तारीख से UIDAI आधार कार्ड यूजर्स को राहत देने जा रहा है. रेग्युलेटर की ओर से जारी नोटिफिकेशन को देखें, तो Aadhaar Card पर आपकी ईमेल आईडी अपडेट नहीं है, तो 1 जुलाई से यह काम फ्री में होने वाला है. यूआईडीएआई आधार में ईमेल को अपडेट करने के लिए दिसंबर तक यानी 6 महीने के लिए फ्री सर्विस दे रहा है. इससे पहले इस काम को करने के लिए 75 रुपये का चार्ज लागू था।  पांचवां बदलाव: कार खरीदना होगा महंगा जुलाई के पहले दिन से कार खरीदारों को झटका लगने वाला है. KIA मोटर्स समेत कुछ ऑटोमोबाइल कंपनियां अपनी कारों के दाम बढ़ाने जा रही हैं. किआ ने अपनी कारों की कीमतों में 2 फीसदी तक की बढ़ोतरी का ऐलान किया है, तो वहीं Tata Motors भी ICE (इंटरनल कंबशन इंजन) और EV मॉडल्स की कीमतों में 1.5% तक की बढ़ोतरी करने की तैयारी में है। 

4 जुलाई पर वैश्विक नजरें, ईरान में खामेनेई को लेकर हलचल और अमेरिका में आजादी के जश्न की तैयारियां

तेहरान  जुलाई की शुरुआत में दुनियाभर में बड़ी हलचल देखी जा सकती है. अमेरिका एक तरफ जहां बड़े जोर-शोर से चार जुलाई को अपना स्वतंत्रता दिवस मना रहा होगा. वहीं, ईरान अपने सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई को अंतिम विदाई दे रहा होगा. इन दोनों ही घटनाओं पर दुनियाभर की नजरें होंगी।  चार जुलाई को अमेरिका की आजादी की 250वीं वर्षगांठ होगी. ऐसे में अमेरिका में हफ्तेभर तक कार्यक्रम किए जाएंगे. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह चार जुलाई को नेशनल मॉल में होने वाले दुनिया के सबसे शानदार आयोजन को संबोधित करेंगे।  वहीं, ईरान तीन से पांच जुलाई तक आयुतल्लाह अली खामेनई को अंतिम विदाई दे रहा है. उनके जनाजे में करोड़ों लोगों के शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है. अगर ऐसा होता है तो यह दुनिया का अब तक का सबसे बड़ा जनसैलाब होगा. इससे पहले 1989 में ईरान के पहले सर्वोच्च नेता रुहोल्लाह खुमैनी के जनाजे में तकरीबन एक करोड़ लोग जुटे थे. उनके उत्तराधिकारी अली खामेनेई पश्चिम एशिया के सबसे लंबे समय तक सत्ता में रहने वाले प्रमुख थे. इस साल 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हवाई हमलों में उनकी हत्या कर दी गई थी।  अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर 13,000 से अधिक हवाई हमले किए, जिसके कारण आयतुल्लाह को अंतिम विदाई देना बेहद जोखिम भरा हो गया था. हालांकि आठ अप्रैल से अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी युद्धविराम लागू है. इसके बाद 17 जून को राष्ट्रपति ट्रंप और उनके ईरानी समकक्ष मसूद पेजेश्कियान ने युद्ध समाप्त करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर साइन किए. दोनों देशों के बीच स्थायी शांति के लिए बातचीत जारी है।  बता दें कि ईरान ने अंतिम संस्कार के लिए तीन, चार और पांच जुलाई की तारीखें यूं ही नहीं चुनी हैं. इतिहास बताता है कि ईरान अक्सर अमेरिका को संदेश देने के लिए प्रतीकात्मक तारीखों का इस्तेमाल करता रहा है. चार नवंबर 1979 को ईरानी छात्रों ने ईरान स्थित अमेरिकी दूतावास पर कब्जा कर 66 अमेरिकी नागरिकों को बंधक बना लिया था. 444 दिनों तक चला यह संकट 20 जनवरी 1981 को खत्म हुआ था. लेकिन इसके ठीक उसी दिन जब तत्कालीन राष्ट्रपति जिमी कार्टर व्हाइट हाउस छोड़ रहे थे. कार्टर ने बंधकों को छुड़ाने की पूरी कोशिश की. अप्रैल 1980 में उन्होंने एक सैन्य बचाव अभियान भी शुरू किया, लेकिन ईरानी रेगिस्तान में एक अमेरिकी हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस हो गया, जिसमें पांच अमेरिकी सैनिक मारे गए और ये मिशन फेल  हो गया।  इस बंधक संकट ने कार्टर की राष्ट्रपति पद की छवि को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया. उनकी दोबारा चुनाव जीतने की उम्मीद खत्म हो गई और रोनाल्ड रीगन के सत्ता में आने का रास्ता साफ हो गया. बंधकों की रिहाई के लिए वही तारीख चुनना ईरान का कार्टर को आखिरी राजनीतिक झटका देना था, ताकि जीत का श्रेय उन्हें न मिल सके।  45 साल भी अमेरिका-ईरान आमने-सामने ट्रंप के नेतृत्व में चला पांच सप्ताह का युद्ध ईरान को काफी कमजोर जरूर कर गया, लेकिन अमेरिका अपने अमेरिका अपना प्रमुख लक्ष्य हासिल नहीं कर सका. ना तो ईरान में सत्ता परिवर्तन हुआ, ना उसने उच्च संवर्धित यूरेनियम छोड़ा, ना परमाणु कार्यक्रम समाप्त किया, ना क्षेत्रीय सहयोगी संगठनों का समर्थन खत्म किया और ना ही अपनी बैलिस्टिक मिसाइल परियोजना छोड़ी. इसे विपरीत, ईरान ने होर्मुज को अवरुद्ध कर दिया, जहां से दुनिया की लगभग 25 फीसदी तेल की सप्लाई होती है।  ईरान की बात करें तो यहां सत्ता पर कट्टरपंथी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स काउंसिल (IRGC) का प्रभाव और मजबूत हो गया है. उनके लिए खामेनेई की अंतिम विदाई दुनिया को कई संदेश देने का अवसर है. अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि खामेनेई को उनके पैतृक शहर मशहद में दफनाया जाएगा या फिर तेहरान स्थित करीब दो अरब डॉलर की लागत से बने रुहोल्लाह खुमैनी मकबरे में लेकिन यह तय माना जा रहा है कि पूरा आयोजन राजनीतिक संदेश देने के उद्देश्य से किया जाएगा।  ईरान पर हमला 21वीं सदी के सबसे भीषण बमबारी ऑपरेशन में से एक रहा. लेकिन इसके बावजूद ईरानी शासन कायम है. उसने अरबों डॉलर की सैन्य और बुनियादी ढांचे की क्षति उठाई, कई युद्धपोत और विमान गंवाए लेकिन दुनिया की सबसे ताकतवर सैन्य शक्ति को निर्णायक जीत हासिल नहीं करने दी।  लाखों-करोड़ों लोगों की भीड़ किसी भी सरकार के लिए वैधता और जनसमर्थन का प्रतीक होती है. इसे ट्रंप से बेहतर शायद ही कोई समझता हो. 2017 में उन्होंने मीडिया की उस रिपोर्टिंग की आलोचना की थी, जिसमें कहा गया था कि उनके शपथ ग्रहण समारोह में बराक ओबामा के 2009 के समारोह से कम भीड़ आई थी।  ईरानी शासन ने 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद सबसे बड़े जनआंदोलनों का सामना किय.। पहले 2017 में महसा अमीनी आंदोलन और फिर दिसंबर 2025 में आर्थिक संकट के खिलाफ बड़े विरोध प्रदर्शन हुए. दोनों आंदोलनों को सरकार ने कठोर बल प्रयोग के जरिए दबा दिया लेकिन जब अमेरिका और ईरान के ये दोनों बड़े आयोजन समाप्त हो जाएंगे, तब भी ईरान का सवाल ट्रंप के सामने सबसे बड़ी चुनौती बना रहेगा।  जिस ईरान को रोनाल्ड रीगन पूरी तरह नहीं संभाल पाए, वही चुनौती आज ट्रंप के सामने है. बता दें कि ट्रंप, रोनाल्ड रीगन को अपने जीवन का सर्वश्रेष्ठ अमेरिकी राष्ट्रपति बताते हैं. रीगन शीत युद्ध के अंत से लेकर सोवियत संघ के विघटन जैसे ऐतिहासिक घटनाओं के साक्षी रहे लेकिन ईरान उनके लिए भी कठिन साबित हुआ. उन्होंने सार्वजनिक रूप से कार्टर सरकार द्वारा लगाए गए हथियार प्रतिबंध को जारी रखा, लेकिन उनकी सरकार ने गुप्त रूप से ईरान को हथियार भी बेचे।  यही मामला आगे चलकर ईरान-कॉन्ट्रा के नाम से मशहूर हुआ, जिसने 1981 से 1986 के बीच उनकी सरकार को गहरे संकट में डाल दिया. मार्च 1987 में रीगन ने राष्ट्र के नाम संबोधन में इस मामले की पूरी जिम्मेदारी लेते हुए कहा था कि जो शुरुआत ईरान के साथ रणनीतिक संवाद के रूप में हुई थी, वह आखिरकार बंधकों के बदले हथियारों के सौदे में बदल गई. हालांकि, रीगन पर महाभियोग नहीं चला और उनकी लोकप्रियता फिर बढ़ गई।  अमेरिकी अर्थव्यवस्था अब भी बढ़ रही है, लेकिन महंगाई चिंता का विषय बनी हुई है. दूसरी ओर ट्रंप की लोकप्रियता 37 से … Read more

India-China Border: आदिवासियों का बड़ा दावा, सीमा क्षेत्र में चीन की गतिविधियों को लेकर बढ़ी चिंता

नईदिल्ली  भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाके से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले के स्थानीय 'नाह' आदिवासी समुदाय ने दावा किया है कि चीन इस क्षेत्र में उनकी जमीन हथिया रहा है। उन्होंने दावा किया है कि नियंत्रण रेखा (LAC) के पास चीनी सेना ने भारतीय जमीन पर बड़े पैमाने पर अवैध कब्जे किए हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक इसे लेकर आदिवासी संगठन 'नाह वेलफेयर सोसाइटी' ने जिला प्रशासन को एक आधिकारिक ज्ञापन सौंपा है। इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 6 सालों के अंदर चीनी सेना ने उनके पूर्वजों की खेती और मवेशियों को चराने वाले जमीन के एक बहुत बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक स्थानीय लोगों ने बताया कि, चीन पिछले 10 से 15 सालों से इस इलाके में धीरे-धीरे पैर पसार रहा था, लेकिन 2020 के बाद से उसकी रफ्तार बहुत ज्यादा बढ़ गई है। किन इलाकों पर कब्जा? आदिवासी संगठन ने अपर सुबनसिरी के 'ताक्सिंग' क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पांच अलग जगहों पर चीन की संदिग्ध और आक्रामक गतिविधियों की सूची प्रशासन को सौंपी है। उनके मुताबिक 2020 तक ये इलाके पूरी तरह उनके नियंत्रण में थे, लेकिन अब इस पर चीन का नियंत्रण है। ये इलाके हैं- ओयिंग- यह स्ट्रेटेजिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण इलाका है। पोत्रंग (झील): यह स्थानीय लोगों के लिए एक पवित्र तीर्थ स्थल माना जाता है। तिन्दिनतांग (टीजी): ताक्सिंग हेडक्वार्टर के बिल्कुल नजदीक स्थित इलाका। पनिआर (चुजार्टा क्षेत्र): स्थानीय आदिवासियों का पारंपरिक क्षेत्र। मरपन (मर्नाफे): यहां चीनी सैनिकों की आवाजाही देखी गई है। 'भारतीय सीमा में चीनी सड़कें और मिलिट्री कैंप' नाह वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष केरु चादर ने अपने ज्ञापन में बेहद चौंकाने वाले दावे किए हैं। उन्होंने एक बयान में कहा, "हमें अपनी भारतीय सेना पर पूरा भरोसा है और वे सालों से हमारी जमीन की रक्षा कर रहे हैं, लेकिन ये कोशिशें काफी साबित नहीं हो रही हैं। ताक्सिंग क्षेत्र में चीनी पीएलए (PLA) जिस इरादे और बिजली की रफ्तार से आगे बढ़ रही है, वह बेहद खतरनाक है।" उन्होंने आगे कहा, “हम हर दिन, इंच-दर-इंच अपनी मातृभूमि को चीन के हाथों खो रहे हैं। चीनी सेना ने भारतीय क्षेत्र के भीतर पक्की सड़कें और अपने मिलिट्री कैंप तक बना लिए हैं।” इस मामले पर नाचो विधानसभा क्षेत्र के विधायक नाकाप नालो ने भी अपनी चिंता व्यक्त की है। विधायक नालो ने एक बयान में कहा, "यह सीधे तौर पर देश की सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़ा मुद्दा है। स्थानीय लोगों ने जो आरोप लगाए हैं, जिला प्रशासन और सेना को उसकी आधिकारिक तौर पर पुष्टि करनी चाहिए।" वहीं इस पूरे मामले पर फिलहाल अरुणाचल प्रदेश की सरकार या केंद्र सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। भारत का अभिन्न हिस्सा है अरुणाचल गौरतलब है कि चीन अरुणाचल प्रदेश को भारत का हिस्सा नहीं मानता। वह इसे 'जांगनान' (दक्षिण तिब्बत) कहता है और इस पर अपना ऐतिहासिक दावा ठोकता है। अपनी संप्रभुता दिखाने के लिए चीन अक्सर अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के नए चीनी नाम जारी करता है, वहां के नागरिकों को स्टेपल वीजा देता है और सीमा के पास बुनियादी ढांचे का निर्माण करने की भी कोशिश करता है। हालांकि भारत ने कई मौकों पर यह स्पष्ट कर दिया है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है और नाम बदलने से जमीनी हकीकत नहीं बदल सकती।

चीन दौरे पर उठे सवालों के बीच बांग्लादेश के विदेश मंत्री का जवाब, बोले- PM भीख का कटोरा लेकर नहीं गए

ढाका  अक्सर 'भीख का कटोरा' की चर्चा पाकिस्तान के संदर्भ में होती है, पाकिस्तान अमूमन दुनिया भर से मदद मांगने के लिए जाता रहता है. लेकिन इस बार ये चर्चा बांग्लादेश को लेकर हो गई. चर्चा भी ऐसी हुई कि बांग्लादेश के विदेश मंत्री बुरा मान गए. दरअसल बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के चीन दौरे पर एक अजीब विवाद पैदा हो गया है. मीडिया की ओर से बार बार चीन से मिलने वाली आर्थिक मदद पर सवाल पूछने पर बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने चिढ़ते हुए कहा कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान चीन कोई भीख का कटोरा लेकर नहीं गए हैं. वे वहां दोनों देशों के बीच संबंधों की दशा-दिशा तय करने गए हैं।  बांग्लादेश के विदेश मंत्री पीएम के दौरे पर ढाका में पत्रकारों से बात कर रहे थे. उन्होंने कहा कि किसी भी देश का नेता 'भीख का कटोरा' लेकर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में शामिल नहीं होते हैं।  बीजिंग से मिलने वाली सीधी प्रोजेक्ट सहायता के बारे में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए विदेश मंत्री ने कहा, "आपने नकद राशि मिलने की बात की. भाइयों, कृपया ऐसे सवाल न पूछें; इससे हमें बहुत शर्मिंदगी होती है।  "प्रधानमंत्री दोनों देशों के बीच संबंधों की दिशा, विषय-वस्तु, कद, दायरा और गहराई तय करने के लिए वहां गए थे. सरकार का कोई भी प्रमुख दूसरे देश के नेता के साथ कागज और पेंसिल लेकर नहीं बैठता और न ही वे कोई भीख का कटोरा लेकर जाते हैं. कृपया थोड़ी आत्म-सम्मान बनाए रखें।  खलीलुर ने ये बातें  विदेश मंत्रालय में आयोजित एक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहीं, जो प्रधानमंत्री की हालिया मलेशिया और चीन यात्राओं के संबंध में थी।  बता दें कि बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनाव में भारी जीत के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी  की सरकार के मुखिया तारिक अपनी पहली विदेश यात्रा पर निकले और 21 जून को मलेशिया पहुंचे. अगले दिन वह उत्तर-पूर्वी चीन के शहर डालियान गए।  वहाां वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम की सालाना बैठक में शामिल होने के बाद, वह तीन दिन की राजकीय यात्रा शुरू करने के लिए बुधवार को बीजिंग पहुंचे।  इस यात्रा के दौरान तारिक ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रीमियर ली कियांग के साथ उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय बातचीत की. ढाका और बीजिंग ने अलग-अलग क्षेत्रों में 17 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं।  दोनों देशों के  बीच 13 समझौते पर हस्ताक्षर हुए.  इनमें तीस्ता नदी मास्टर प्लान, तकनीकी सहायता के लिए चीन का समर्थन.  मोंगला पोर्ट और अनवारा के पास आर्थिक क्षेत्र का विकास. बुनियादी ढांचा जिनमें सड़कें, पुल, रेलवे, ऊर्जा, पर्यावरण-अनुकूल विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा और मानव संसाधन विकास में सहयोग शामिल है। 

China in Mongla Port: हिंद महासागर में बढ़ी चीन की मौजूदगी, भारत ने सेशेल्स के साथ मजबूत की रणनीतिक बढ़त

नई दिल्ली  हिंद महासागर में इन दिनों बड़ी भू-राजनीतिक शतरंज बिछी हुई है. एक तरफ चीन अपने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के जरिए बंदरगाहों, लॉजिस्टिक्स और समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर में लगातार निवेश कर रहा है. पाकिस्तान का ग्वादर, श्रीलंका का हम्बनटोटा, जिबूती में नौसैनिक अड्डा और अब बांग्लादेश के मोंगला पोर्ट तक उसकी पहुंच इस रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है. दूसरी ओर भारत भी अब सिर्फ समुद्र की निगरानी तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि हिंद महासागर में अपने भरोसेमंद साझेदारों का मजबूत नेटवर्क तैयार कर रहा है।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सेशेल्स यात्रा इसी बड़ी रणनीति का अहम हिस्सा मानी जा रही है. पहली नजर में सेशेल्स एक छोटा सा द्वीपीय देश दिखता है. करीब 460 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल और लगभग एक लाख की आबादी वाले इस देश को देखकर शायद ही कोई अंदाजा लगाए कि इसकी रणनीतिक अहमियत कितनी बड़ी है. लेकिन पश्चिमी हिंद महासागर में फैले इसके 115 द्वीप ऐसे समुद्री इलाके में स्थित हैं, जहां से दुनिया के सबसे व्यस्त व्यापारिक समुद्री मार्ग गुजरते हैं।  सेशेल्स केवल एक मित्र नहीं, समुद्री सुरक्षा का अहम साझेदार एशिया, अफ्रीका और पश्चिम एशिया को जोड़ने वाले इन रास्तों से हर दिन लाखों बैरल कच्चा तेल, एलएनजी, कंटेनर कार्गो और जरूरी सामान दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचता है. भारत के विदेशी व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा भी इन्हीं समुद्री मार्गों पर निर्भर है. यही वजह है कि नई दिल्ली के लिए सेशेल्स केवल एक मित्र देश नहीं, बल्कि समुद्री सुरक्षा के लिए सबसे अहम साझेदार बन चुका है. दिलचस्प बात यह है कि जमीन के लिहाज से छोटा होने के बावजूद सेशेल्स का विशेष आर्थिक क्षेत्र करीब 13 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है।  इस विशाल समुद्री इलाके की निगरानी किसी भी छोटे देश के लिए आसान नहीं होती. भारत ने इसी जरूरत को समझते हुए पिछले कई वर्षों में सेशेल्स को डोर्नियर समुद्री निगरानी विमान, तेज गश्ती नौकाएं, तटीय निगरानी रडार नेटवर्क, हाइड्रोग्राफिक सर्वे और सैन्य प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं. इससे न केवल सेशेल्स की समुद्री क्षमता बढ़ी है, बल्कि पूरे पश्चिमी हिंद महासागर में भारत की निगरानी और साझेदारी भी मजबूत हुई है।  चीन की बढ़ती भूमिका को करेगा काउंटर यह पूरी रणनीति ऐसे समय में सामने आ रही है, जब चीन हिंद महासागर में अपनी मौजूदगी लगातार बढ़ा रहा है. बीते एक दशक में बीजिंग ने बंदरगाहों, औद्योगिक परियोजनाओं और समुद्री बुनियादी ढांचे में अरबों डॉलर का निवेश किया है. पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट, श्रीलंका के हम्बनटोटा बंदरगाह और अफ्रीका के जिबूती में उसकी मौजूदगी पहले ही भारत की रणनीतिक चिंताओं का हिस्सा रही है. अब बांग्लादेश के मोंगला पोर्ट तक चीन पहुंचने जा रहा है. चीन की इस भूमिका को भारत इसे व्यापक परिप्रेक्ष्य में देख रहा है. भारत जानता है कि भविष्य की प्रतिस्पर्धा केवल जमीन पर नहीं, बल्कि समुद्र में भी तय होगी।  हालांकि, भारत का जवाब चीन की तरह कर्ज आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल नहीं है. भारत की रणनीति भरोसे, क्षमता निर्माण और साझा विकास पर आधारित है. विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने भी साफ कहा है कि भारत किसी भी देश में वही परियोजना आगे बढ़ाता है, जिसे वहां की सरकार और जनता की सहमति प्राप्त हो. यही कारण है कि सेशेल्स के साथ रक्षा सहयोग के साथ-साथ डिजिटल गवर्नेंस, स्वास्थ्य, शिक्षा, जलवायु परिवर्तन, अक्षय ऊर्जा, पर्यटन और ब्लू इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी तेजी से बढ़ रही है।  प्रधानमंत्री मोदी की 2015 की यात्रा ने दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा दी थी. उसी दौरान कोस्टल सर्विलांस रडार सिस्टम की शुरुआत हुई, जिसने समुद्री गतिविधियों की रियल टाइम निगरानी को नई मजबूती दी. भारत ने डोर्नियर विमान और अन्य रक्षा उपकरण देकर सेशेल्स की समुद्री निगरानी क्षमता बढ़ाई. अब 2026 की यह यात्रा दोनों देशों के बीच 50 वर्षों के राजनयिक संबंधों को नई ऊंचाई देने की कोशिश है।  भारत की बदलती समुद्री सोच इस यात्रा का एक और अहम संदेश भारत की बदलती समुद्री सोच है. 2015 में प्रधानमंत्री मोदी ने ‘सागर’ यानी सेक्युरिटी एंड ग्रोथ फॉर ऑल इन द रीजन का विजन दिया था. अब इसे ‘महासागर’ यानी म्यूचुअल एंड होलिस्टिक एडवांसमेंट फॉर सेक्युरिटी एंड ग्रोथ एक्रॉल रीजन के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है. इसका मतलब सिर्फ नौसैनिक सहयोग नहीं, बल्कि डिजिटल कनेक्टिविटी, सप्लाई चेन, जलवायु सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, खाद्य सुरक्षा और आर्थिक साझेदारी को भी समुद्री रणनीति का हिस्सा बनाना है. सेशेल्स इस व्यापक रणनीति का सबसे मजबूत उदाहरण बनकर उभरा है. भारत और सेशेल्स के रिश्ते केवल रणनीति तक सीमित नहीं हैं. दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध भी दो सदियों से अधिक पुराने हैं. भारतीय मूल के हजारों लोग आज भी सेशेल्स की अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, व्यापार और प्रशासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।  यही सामाजिक जुड़ाव दोनों देशों की साझेदारी को और मजबूत बनाता है. बदलती वैश्विक राजनीति में हिंद महासागर का महत्व लगातार बढ़ रहा है. जो देश इस समुद्री क्षेत्र में मजबूत साझेदारी और भरोसेमंद उपस्थिति बनाएगा, वही आने वाले वर्षों में क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित करेगा. ऐसे में यदि चीन मोंगला, ग्वादर और हम्बनटोटा के जरिए अपनी रणनीतिक पहुंच बढ़ा रहा है, तो भारत भी सेशेल्स जैसे विश्वसनीय साझेदारों के साथ अपने समुद्री सुरक्षा तंत्र को मजबूत कर रहा है। 

पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था पर CM शुभेंदु अधिकारी का बड़ा ऐलान, दो नए विधेयकों से गुंडाराज पर होगा वार

कलकत्ता पश्चिम बंगाल विधानसभा में कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार के दो नए विधेयक पेश किए जाने से पहले मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सख्त संदेश दिया. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार राज्य में कानून का राज स्थापित करेगी और गुंडाराज का खात्मा करेगी।  मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि AJUP विधायक हुमायूं कबीर के खिलाफ उनके कथित भड़काऊ और नफरत फैलाने वाले भाषण को लेकर एफआईआर दर्ज कर ली गई है. उन्होंने कहा कि पिछले सप्ताह मुर्शिदाबाद में हुमायूं कबीर के दो भाषणों पर पहले ही उनकी पार्टी के विधायक ने सदन में आपत्ति उठाई थी।  'नफरत फैलाने वालों पर लगाम लगाने का वक्त' सीएम शुभेंदु अधिकारी ने कहा, 'अब बहुत हो चुका. ऐसे लोगों को सबक सिखाने का समय आ गया है.' उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले राज्य में कमजोर मुख्यमंत्री होने की वजह से लोग मनमानी बातें करते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि हुमायूं कबीर के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज की गई हैं और कानून अपना काम करेगा. उन्होंने कहा, 'मैं सदन को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि कोई भी इस तरह की भाषा बोलने की हिम्मत न करे।  उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष का मकसद मुर्शिदाबाद उपचुनाव से पहले मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण करना है ताकि उनके बेटे को चुनाव में फायदा मिल सके. इस दौरान उन्होंने संदेशखाली के 'शेख शाहजहां' और 'फाल्टा के पुष्पा' का उदाहरण देते हुए कहा कि कानून से कोई भी ऊपर नहीं है।  'पुलिस किसी को नहीं छोड़ेगी' मुख्यमंत्री ने कहा कि 'उनकी सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि भविष्य में कोई भी इस तरह की भाषा बोलने की हिम्मत न करे. सुवेंदु अधिकारी ने कहा, "संदेशखाली के शेख शाहजहां को याद कीजिए, उनके भड़काऊ बयानों का क्या अंजाम हुआ. 'फाल्टा के पुष्पा' को भी याद कीजिए, जिसने कहा था 'झुकेगा नहीं'. पुलिस किसी को नहीं छोड़ेगी।  मुख्यमंत्री ने कहा कि वह अगले सप्ताह मुर्शिदाबाद का दौरा करेंगे और यह साबित करेंगे कि कानून अपना काम करेगा. उन्होंने हुमायूं कबीर को चेतावनी देते हुए कहा, "अपनी बयानबाजी पर लगाम लगाइए. नफरत फैलाने वाला कोई भी बयान देने से पहले 25 बार सोचिए. पुलिस आपको नहीं छोड़ेगी। 

रिकॉर्डतोड़ गर्मी से यूरोप बेहाल! फ्रांस, जर्मनी, इटली और ब्रिटेन में 40°C पार, आखिर क्यों ज्यादा प्रभावित होते हैं यूरोपीय?

लंदन /पेरिस  यूरोप इस समय रिकॉर्डतोड़ हीटवेव की चपेट में है. फ्रांस, जर्मनी, इटली, ब्रिटेन और कई अन्य देशों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है. भीषण गर्मी का असर अब सिर्फ लोगों की सेहत तक सीमित नहीं है, बल्कि सड़कों, रेल नेटवर्क और बिजली व्यवस्था पर भी साफ दिखाई देने लगा है।  सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कई वीडियो में फ्रांस की सड़कों की ऊपरी परत भीषण गर्मी के कारण नरम पड़ती और पिघलती नजर आ रही है. वहीं जर्मनी में अत्यधिक तापमान की वजह से ट्राम की पटरियां टेढ़ी हो गईं, जिसके कारण कई जगह सेवाएं रोकनी पड़ीं या उनकी रफ्तार कम करनी पड़ी।  रॉयटर्स के मुताबिक, यह हीटवेव 20 जून के आसपास शुरू हुई और कुछ इलाकों में सामान्य से 18 डिग्री सेल्सियस तक अधिक तापमान दर्ज किया गया. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह स्थिति 'ओमेगा ब्लॉक' नाम के मौसमीय पैटर्न और जलवायु परिवर्तन के संयुक्त असर का परिणाम है. सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जो यूरोप में गर्मी की भयावह स्थिति को दिखाते हैं।  भारतीयों से ज्यादा यूरोपीय लोगों को क्यों सताता है? जब यूरोप में तापमान 40 डिग्री पहुंचता है तो लोग कहते हैं कि जीवन रुक गया है. अस्पताल भर जाते हैं. मौतें बढ़ जाती हैं. वहीं भारत में कई इलाकों में 40-45 डिग्री आम बात है, लोग काम करते रहते हैं. यह फर्क सिर्फ तापमान का नहीं, बल्कि कई अन्य कारणों की वजह से है. आइए समझते हैं दोनों में अंतर…  नमी का असर – सबसे बड़ा अंतर सबसे महत्वपूर्ण अंतर ह्यूमिडिटी (नमी) का है. भारत में गर्मी के मौसम में नमी बहुत ज्यादा होती है, लेकिन लोग इससे अभ्यस्त हैं. यूरोप में जब 40 डिग्री आता है तो अक्सर सूखी गर्मी होती है, लेकिन कई बार नमी भी बढ़ जाती है. जब नमी ज्यादा होती है तो पसीना सूखता नहीं है. शरीर का तापमान नियंत्रित नहीं हो पाता. इसे वेट बुल्ब टेम्परेचर कहते हैं. यूरोप में 40 डिग्री के साथ अगर नमी 60-70% हो जाए तो इंसान के लिए खतरनाक हो जाता है. भारत में लोग लंबे समय से गर्मी झेल रहे हैं, इसलिए उनका शरीर बेहतर तरीके से ढल जाता है।  ऐसा ही एक वीडियो सामने आया है, जिसमें एयर कंडीशनर (AC) खरीदने के लिए लोगों की लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं. दुकान के बाहर इतनी भीड़ है कि मानो खरीदारी नहीं, बल्कि होड़ मची हो। वहीं एक अन्य वीडियो में भीषण गर्मी के कारण सड़क का डामर नरम पड़ता और पिघलता नजर आ रहा है।  एक और वीडियो में यूरोप के समुद्र तटों (बीच) पर लोगों की भारी भीड़ दिखाई दे रही है. गर्मी से राहत पाने के लिए हजारों लोग समुद्र किनारे पहुंच गए, जिससे वहां मेले जैसा माहौल बन गया। फ्रांस में गर्मी के कारण अस्पतालों पर दबाव बढ़ गया है. कई इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई, जबकि गर्म नदियों के कारण कुछ परमाणु बिजली संयंत्रों का उत्पादन भी घटाना पड़ा. इटली, जर्मनी और मध्य यूरोप के कई हिस्सों में भी रेड अलर्ट जारी किया गया है।  विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि यूरोप में कभी 'सदी में एक बार' आने वाली ऐसी भीषण हीटवेव अब जलवायु परिवर्तन की वजह से कहीं ज्यादा बार देखने को मिल सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में ऐसी घटनाएं और गंभीर हो सकती हैं. इमारतें और घर कैसे बने हैं? यूरोप की इमारतें ठंड के लिए बनाई गई हैं. दीवारें मोटी, इंसुलेशन अच्छा पर गर्मी निकालने की व्यवस्था कम. जब 40 डिग्री की गर्मी पड़ती है तो घर के अंदर भी तापमान बहुत बढ़ जाता है. वहां एयर कंडीशनर कम घरों में हैं।  भारत में घरों में छतें ऊंची, खिड़कियां बड़ी, पंखे, कूलर और एसी का इस्तेमाल आम है. लोग दोपहर में आराम करते हैं. शाम को काम करते हैं. यूरोप में ऐसी आदत नहीं है. स्कूल, ऑफिस और अस्पताल भी गर्मी के लिए तैयार नहीं होते।  सूर्य की तीव्रता यूरोप हाई एल्टीट्यूड पर स्थित है, इसलिए वहां गर्मियों में दिन बहुत लंबे (15 से 17 घंटे) हो जाते हैं. साफ आसमान और कम वायु प्रदूषण के कारण सीधी धूप बहुत तेज और चुभने वाली लगती है।  रात का तापमान और आराम यूरोप की हीटवेव में रात का तापमान भी बहुत ऊंचा रहता है. शरीर को ठंडा होने का मौका नहीं मिलता. लगातार गर्मी से थकान, दिल का दौरा और मौतें बढ़ जाती हैं. भारत में दिन में गर्मी ज्यादा होती है लेकिन रात में तापमान काफी गिर जाता है. इससे शरीर को राहत मिलती है. यही वजह है कि भारत में 40 डिग्री सहन करना यूरोप की तुलना में आसान पड़ता है।  लोगों की आदत और स्वास्थ्य भारतीय शरीर गर्मी के लिए ज्यादा तैयार रहता है. बचपन से गर्मी में खेलना, काम करना सिखाया जाता है. पसीना आना, ज्यादा पानी पीना, छाछ-निम्बू पानी जैसी चीजें आम हैं।  यूरोप में ज्यादातर लोग ठंडे मौसम में रहते हैं. उनकी त्वचा पतली, शरीर गर्मी सहने के लिए कम तैयार होता है. खासकर बुजुर्ग और बच्चे जल्दी प्रभावित होते हैं. फ्रांस, जर्मनी, इटली जैसी जगहों पर 40 डिग्री में हजारों अतिरिक्त मौतें हो जाती हैं।  तैयारियां और सरकारी व्यवस्था भारत में हीटवेव एक्शन प्लान है. स्कूलों की छुट्टी, पानी की व्यवस्था, जागरूकता अभियान चलते हैं. लोग जानते हैं कि दोपहर 12 से 4 बजे तक बाहर कम निकलना चाहिए।  यूरोप में अचानक गर्मी आने पर सरकारें भी हैरान रह जाती हैं. अस्पताल तैयार नहीं होते, बिजली की मांग बढ़ने से ग्रिड फेल हो जाते हैं. ट्रेनें रुक जाती हैं, सड़कें पिघल जाती हैं।  जलवायु परिवर्तन का प्रभाव वैज्ञानिक कहते हैं कि जलवायु परिवर्तन यूरोप को तेजी से गर्म कर रहा है. पहले वहां 40 डिग्री बहुत दुर्लभ था, अब लगभग हर साल हो रहा है. यूरोप अब भी अनुकूलन (Adaptation) की प्रक्रिया में है  भारत गर्म देश है, इसलिए 40-45 डिग्री नया नहीं. लेकिन भारत को भी चिंता करनी चाहिए क्योंकि गर्मी और बढ़ रही है. दिल्ली, राजस्थान में 48-50 डिग्री भी पहुंच रहा है।  क्या सीख सकते हैं दोनों देश?     यूरोप को भारत से सीखना चाहिए- हल्के कपड़े, दिन की आदतें बदलना, … Read more

Pakistan-Afghanistan Tension: रात के हमले में 35 की मौत, सीमा पर बढ़ा तनाव, महीनेभर में चौथी बड़ी कार्रवाई

काबुल   पाकिस्तान ने एक बार फिर अफगानिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन किया है. पाकिस्तान ने अफगान सीमा से सटे इलाकों में मिलिट्री ऑपरेशन चलाने का दावा किया है. पाकिस्तान सरकार के मुताबिक सुरक्षा बलों ने पहले खुफिया सूचना के आधार पर जमीनी अभियान चलाया और उसके बाद अफगानिस्तान सीमा के पास आतंकियों के ठिकानों पर सटीक हवाई हमले (कैलिब्रेटेड स्ट्राइक) किए. इस कार्रवाई में कुल 35 लोगों के मारे जाने का दावा किया गया है. यह ऑपरेशन ऐसे समय हुआ है जब एक दिन पहले कराची में पाकिस्तान रेंजर्स के मुख्यालय पर बड़ा आतंकी हमला हुआ था. रिपोर्ट् के मुताबिक पाकिस्तान की ओर से यह एक महीने में चौथा हमला है. इससे पहले 10 जून को पाकिस्तान के हमले में 26 लोग मारे गए थे।  पाकिस्तान के सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि हाल के दिनों में देशभर में सुरक्षा बलों पर बढ़ते आतंकी हमलों के जवाब में यह अभियान शुरू किया गया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा और आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।  कराची हमले के बाद हुई कार्रवाई शनिवार को कराची स्थित पाकिस्तान रेंजर्स के क्षेत्रीय मुख्यालय पर हथियारों और विस्फोटकों से लैस आतंकियों ने हमला किया था. इस हमले में तीन पाकिस्तानी सैनिकों की मौत हो गई थी. जवाबी कार्रवाई में सुरक्षा बलों ने तीन हमलावरों को मार गिराया, जबकि एक हमलावर घायल अवस्था में गिरफ्तार किया गया. पाकिस्तानी सेना के अनुसार गिरफ्तार आरोपी अफगान नागरिक है. इस हमले की जिम्मेदारी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान से जुड़े संगठन जमात-उल-अहरार ने ली थी।  किन ठिकानों को बनाया निशाना? पाकिस्तान के मुताबिक सबसे पहले खैबर पख्तूनख्वा के बाजौर जिले में खुफिया सूचना के आधार पर जमीनी अभियान चलाया गया. इस दौरान पाकिस्तान ने दावा किया कि ‘खान फरोश’ नाम का एक प्रमुख कमांडर समेत चार आतंकवादी मारे गए. इसके बाद अफगानिस्तान सीमा से लगे इलाकों में मौजूद जमात-उल-अहरार और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) से जुड़े ठिकानों पर सटीक हमले किए गए. पाकिस्तान का दावा है कि अफगानिस्तान के पक्तिया, पक्तिका और कुनार प्रांतों में स्थित तीन ठिकाने नष्ट कर दिए गए, जहां 25 आतंकवादी मारे गए. इसके अलावा बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी नष्ट करने की बात कही गई है।  पाकिस्तान और अफगानिस्तान में क्यों बढ़ रहा तनाव? पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान में सुरक्षा बलों और पुलिस पर हमले लगातार बढ़े हैं. पाकिस्तान का आरोप है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और उससे जुड़े संगठन अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल कर पाकिस्तान में हमले करते हैं. हालांकि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार इन आरोपों को लगातार खारिज करती रही है. पाकिस्तान इससे पहले भी कई बार सीमा पार कर हवाई हमला करता रहा है। 

Pune Ketan Murder Case: सिया के खाई के किनारे बैठने की वजह से उठा पर्दा, जांच में खुला बड़ा राज

पुणे पुणे के केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में पुलिस को कई नए अहम सुराग मिले हैं. जांच अधिकारियों के मुताबिक, मुख्य आरोपी सिया गोयल का वारदात के दौरान बैठना केवल अपने कथित प्रेमी चेतन चौधरी को हमला करने का संकेत देना नहीं था, बल्कि यह उसकी अपनी सुरक्षा के लिए भी पहले से बनाई गई योजना का हिस्सा था।  पुलिस के अनुसार, 18 जून को लोहगढ़ किले पर बनाई गई योजना के तहत सिया को पानी पीने या जूते का फीता बांधने के बहाने बैठना था. जैसे ही वह बैठती, यह चेतन चौधरी के लिए संकेत होता कि अब केतन अग्रवाल को पीछे से धक्का दिया जा सकता है. पुलिस का कहना है कि दोनों ने यह तरीका इसलिए चुना ताकि धक्का दिए जाने के दौरान यदि केतन खुद को बचाने के लिए सिया को पकड़ने की कोशिश करे तो वह उसकी पहुंच से दूर रहे और खुद खाई में गिरने से बच जाए।  कार की जगह, स्कूटर से गया चेतन जांच में यह भी सामने आया है कि सह-आरोपी चेतन चौधरी ने अपनी मौजूदगी छिपाने के लिए पूरी तैयारी की थी. पुलिस के मुताबिक, वह 18 जून की सुबह पुणे से करीब 90 किलोमीटर दूर लोहगढ़ किले तक कार की बजाय स्कूटर से गया. अधिकारियों का कहना है कि उसने कार इसलिए नहीं ली क्योंकि टोल प्लाजा पर उसकी पहचान दर्ज होने का खतरा था. पुलिस ने घटना में इस्तेमाल किया गया स्कूटर भी जब्त कर लिया है।  हुडी उतारकर काली टी-शर्ट पहन ली पुलिस के अनुसार, चेतन किले पर चढ़ते समय हुडी पहनकर गया था. बाद में उसने हुडी उतारकर केवल काली टी-शर्ट पहन ली और लौटते समय फिर से हुडी पहन ली. जांचकर्ताओं का मानना है कि उसने पहचान छिपाने और लोगों का ध्यान भटकाने के उद्देश्य से ऐसा किया।   हर कोई सुनना चाहता था सिर्फ इसी सवाल का जवाब  'सिया, आपने आखिर केतन को क्यों मारा ?… ' जैसे ही पुलिस आरोपी सिया गोयल को क्राइम सीन रीक्रिएशन के लिए लोहागढ़ किले पर लेकर पहुंची, सवालों की बौछार शुरू हो गई. हर कोई उसके मुंह से एक जवाब सुनना चाहता था, लेकिन सिया पूरी तरह खामोश रही. उसने न किसी सवाल का जवाब दिया और न ही कोई प्रतिक्रिया दी. इस बीच पुलिस ने जांच में कई नए दावे किए हैं, जिनमें साजिश,  संकेत और पूरी प्लानिंग को लेकर अहम खुलासे शामिल हैं. हालांकि मामले की जांच जारी है।  रविवार को लोहागढ़ किले का माहौल सामान्य दिनों से बिल्कुल अलग था. पुलिस की कई गाड़ियां, अधिकारियों की मौजूदगी और बड़ी संख्या में मीडिया कर्मी किले के प्रवेश द्वार पर पहले से मौजूद थे. सभी की निगाहें एक ही गाड़ी पर टिकी थीं, जिसमें पुलिस आरोपी सिया गोयल को लेकर पहुंचने वाली थी. कुछ ही देर में पुलिस का काफिला वहां पहुंचा. सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच सिया को वाहन से उतारा गया. जैसे ही वह कैमरों के सामने आई, पत्रकारों ने एक साथ सवाल पूछने शुरू कर दिए. सबसे ज्यादा गूंजा एक ही सवाल सिया, आपने आखिर केतन को क्यों मारा?  इसके बाद कई और सवाल पूछे गए. किसी ने पूछा कि क्या उसे अपने किए पर पछतावा है, तो किसी ने जानना चाहा कि कथित साजिश की वजह क्या थी. लेकिन इन सभी सवालों के बीच सिया पूरी तरह शांत रही. उसने किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया और आगे बढ़ गई।  एक शब्द नहीं बोली सिया मीडिया के लगातार सवालों के बावजूद सिया ने न कोई बयान दिया और न ही किसी तरह की प्रतिक्रिया व्यक्त की. कुछ देर बाद वह वापस पुलिस वाहन में बैठ गई. पुलिस सिया गोयल को लोहागढ़ किले पर केवल पूछताछ के लिए नहीं, बल्कि क्राइम सीन रीक्रिएशन के लिए लेकर पहुंची थी. जांच अधिकारियों के मुताबिक, 18 जून को जिस स्थान पर केतन अग्रवाल की मौत हुई थी, वहां घटनाक्रम को दोबारा समझने के लिए यह प्रक्रिया अपनाई गई. डमी (पुतले) की मदद से पुलिस ने उस पूरे घटनाक्रम को दोहराने की कोशिश की, जैसा आरोपियों ने पूछताछ के दौरान बताया है. इस दौरान अधिकारियों ने घटनास्थल पर मौजूद दूरी, रास्तों, चट्टानों की स्थिति और घटनाक्रम के संभावित क्रम का भी बारीकी से परीक्षण किया।  पुलिस का दावा: पहले से बनाई गई थी योजना जांच अधिकारियों का कहना है कि अब तक की पूछताछ में सामने आया है कि यह पूरी घटना कथित तौर पर पहले से बनाई गई योजना का हिस्सा थी. पुलिस के अनुसार, 20 वर्षीय सिया गोयल और 22 वर्षीय चेतन चौधरी ने पहले ही तय कर लिया था कि लोहागढ़ किले पर किस स्थान पर घटना को अंजाम देना है. जांच में यह भी सामने आया है कि सिया को बैठकर चेतन को संकेत देना था. बैठने का बहाना पानी पीना या जूते का फीता बांधना तय किया गया था. जैसे ही वह बैठती, चेतन कथित तौर पर पीछे से आकर केतन अग्रवाल को धक्का देता. पुलिस का दावा है कि दोनों ने इसी योजना के अनुसार कथित वारदात को अंजाम दिया।  बैठने का संकेत क्यों चुना गया? जांच में सामने आई सबसे अहम बात यह है कि बैठने का संकेत केवल इशारा देने का तरीका नहीं था. पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ में यह जानकारी सामने आई कि आरोपियों को डर था कि यदि धक्का दिए जाने के बाद केतन गिरते समय सिया को पकड़ने की कोशिश करेगा तो वह भी खाई में गिर सकती है. इसी वजह से कथित तौर पर ऐसा संकेत चुना गया, जिसमें सिया कुछ दूरी पर बैठ जाए और धक्का दिए जाने के समय केतन की पहुंच से बाहर रहे. यदि यह दावा जांच में पुष्ट होता है तो यह पूरे मामले की कथित योजना को और अधिक सुनियोजित बताता है।  चेतन ने भी बनाई थी अलग रणनीति पुलिस के मुताबिक, सह-आरोपी चेतन चौधरी ने भी अपनी मौजूदगी छिपाने के लिए पहले से तैयारी कर रखी थी. जांच अधिकारियों का कहना है कि वह पुणे से करीब 90 किलोमीटर दूर लोहागढ़ किले तक कार से नहीं बल्कि स्कूटर से पहुंचा. पुलिस का मानना है कि उसने ऐसा इसलिए किया ताकि टोल प्लाजा के रिकॉर्ड में उसकी कार दर्ज न हो. जांच टीम ने वह … Read more

मुंबई में मानसून का कहर! सड़कों पर भरा पानी, अंधेरी सबवे बंद, ट्रैफिक व्यवस्था चरमराई

मुंबई मुंबई में मॉनसून की जोरदार बारिश ने शहर के कई इलाकों को पानी-पानी कर दिया है. सड़कें तालाब बन गई हैं, ट्रैफिक ठप हो गया है. लोगों को घरों से निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. अंधेरी सबवे (अंडरपास) में इतना पानी भर गया है कि उसे यातायात के लिए बंद कर दिया गया है।  रातभर की बारिश से अंधेरी, बांद्रा, खार, मालाड, गोरेगांव, जुहू, वर्सोवा जैसे इलाकों में सबसे ज्यादा असर देखा गया है. वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर भी पानी भरने से गाड़ियों की रफ्तार धीमी हो गई. बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के मुताबिक, अंधेरी सबवे में पानी भर गया है, जिसके बाद उसे बंद करना पड़ा।  बता दें कि अंधेरी सबवे मुंबई का एक ऐसा रास्ता है जो पूर्व और पश्चिम को जोड़ता है. हर रोज हजारों गाड़ियां और लोग यहां से गुजरते हैं. मॉनसून की बारिश में अंधेरी सबवे में जलजमाव होना पुरानी समस्या है।  शहर के निचले इलाकों में कई जगहों पर भारी जलभराव की तस्वीरें सामने आ रही हैं. जलजमाव को देखते हुए एहतियातन अंधेरी सबवे को देर रात 1:45 बजे से यातायात के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है. किसी भी अप्रिय घटना या हादसे को रोकने के लिए सबवे के बाहर पुलिस बंदोबस्त किया गया है।  एक तरफ जोरदार बारिश से मुंबईवासियों को उमस और गर्मी से तो बड़ी राहत मिली है, तो वहीं सुबह-सुबह दफ्तर और काम पर जाने वालों को परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है।  भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने मुंबई और आसपास के इलाकों के लिए आज भी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है. मुंबई समेत महाराष्ट्र के कई इलाकों में गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ भारी बारिश हो सकती है. बता दें कि मॉनसून इस बार 13 दिन देरी से मुंबई पहुंचा था।