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देश के टॉप एजुकेशन संस्थान: IIT मद्रास, AIIMS और हिंदू कॉलेजों ने मारी बाज़ी

नई दिल्ली  शिक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को देश के टॉप कॉलेजों की लिस्ट NIRF 2025 रैंकिंग जारी कर दी है। आईआईटी मद्रास ओवरऑल और इंजीनियरिंग कैटेगरी में टॉप स्थान प्राप्त कर देश का टॉप इंस्टीट्यूट बनकर उभरा है। ओवरऑल कैटेगरी में टॉप 10 में आईआईटी इंस्टीट्यूट का दबदबा रहा है। टॉप 10 इंस्टीट्यूट की लिस्ट में 6 नाम आईआईटी इंस्टीट्यूट के शामिल हैं। दूसरा स्थान इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बैंगलुरु को प्राप्त हुआ है। NIRF की रैंकिंग कुल 17 कैटेगरी में जारी की गई है, जिसमें ओवरऑल, यूनिवर्सिटी, कॉलेज, रिसर्च संस्थान, इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, फार्मेसी, मेडिकल, डेंटल, लॉ, आर्किटेक्चर एंड प्लानिंग, एग्रीकल्चर एंड अलायड सेक्टर, इनोवेशन ओपन यूनिवर्सिटी, स्किल यूनिवर्सिटी, स्टेट पब्लिक यूनिवर्सिटी और सस्टेनेबिलिटी (एसडीजी) शामिल हैं। टॉप 10 इंस्टीट्यूट: ओवरऑल कैटेगरी 1. आईआईटी,मद्रास 2. IISc, बैंगलुरू 3. आईआईटी, बॉम्बे 4. आईआईटी, दिल्ली 5. आईआईटी, कानपुर 6. आईआईटी, खड़गपुर 7. आईआईटी, रुड़की 8. एम्स, दिल्ली 9. जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी, दिल्ली 10. बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी, वाराणसी यूनिवर्सिटी कैटेगरी इस साल 2025 NIRF रैंकिंग की यूनिवर्सिटी कैटेगरी में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISC) ने छठीं बार लिस्ट में टॉप किया है। दूसरे स्थान पर चौथी बार जेएनयू रहा है। तीसरी रैंक पाने में मणिपाल अकादमी ऑफ हायर एजुकेशन सफल रही है। चौथा और पांचवां स्थान जामिया मिलिया इस्लामिया और दिल्ली यूनिवर्सिटी को मिला है। इस वर्ष टॉप 10 यूनिवर्सिटी की कैटेगरी में बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (BITS) ने भी स्थान बनाया है। टॉप 10 यूनिवर्सिटी आईआईएससी, बेंगलुरु जे.एन.यू., नई दिल्ली मणिपाल उच्च शिक्षा अकादमी, मणिपाल जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली दिल्ली विश्वविद्यालय, नई दिल्ली बी.एच.यू., वाराणसी बिट्स, पिलानी अमृता विश्व विद्यापीठम, कोयंबटूर जादवपुर विश्वविद्यालय, कोलकाता अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अलीगढ इंजीनियरिंग कैटेगरी इंजीनियरिंग कैटेगरी में पिछले वर्ष की तरह अपना टॉप स्थान बरकरार रखते हुए आईआईटी मद्रास देश का टॉप इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट बना है। दूसरा स्थान आईआईटी दिल्ली ने हासिल किया है। वहीं,तीसरा स्थान आईआईटी बॉम्बे को प्राप्त हुआ है। पिछले वर्ष आईआईटी गुवाहटी की रैंक 7 थी जो इस वर्ष नीचे खिसक कर रैंक 8 पर पहुंच गई है। टॉप 10 इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट आईआईटी मद्रास आईआईटी दिल्ली आईआईटी बॉम्बे आईआईटी कानपुर आईआईटी खड़गपुर आईआईटी रुड़की आईआईटी हैदराबाद आईआईटी गुवाहाटी एनआईटी तिरुचिरापल्ली आईआईटी बीएचयू बेस्ट कॉलेज भारत के बेस्ट कॉलेज की कैटेगरी में NIRF रैंकिंग 2025 में दिल्ली यूनिवर्सिटी ने अपना टॉप स्थान बरकरार रखा है। पिछले साल की तरह इस बार भी कॉलेज कैटेगरी में हिंदू कॉलेज ने टॉप किया है। दूसरा स्थान मिरांडा हाउस कॉलेज को मिला है। तीसरा स्थान हंसराज कॉलेज, दिल्ली को प्राप्त हुआ है। चौथे और पांचवे स्थान पर किरोड़ीमल कॉलेज, दिल्ली और सेंट स्टीफंस कॉलेज, दिल्ली रहे हैं। टॉप 5 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के कॉलेजों का दबदबा रहा है। एनआईआरएफ रैंकिंग 2025: देश के बेस्ट कॉलेज 1. हिंदू कॉलेज, दिल्ली 2. मिरांडा हाउस, दिल्ली 3. हंस राज कॉलेज, दिल्ली 4. किरोड़ीमल कॉलेज, दिल्ली 5 सेंट स्टीफंस कॉलेज, दिल्ली 6 राम कृष्ण मिशन विवेकानन्द सेंटेनरी कॉलेज, कोलकाता 7. आत्मा राम सनातन धर्म कॉलेज, दिल्ली 8. सेंट सेंट जेवियर्स कॉलेज, कोलकाता लोयोला कॉलेज, चेन्नई 9. पीएसजीआर कृष्णम्मल महिला कॉलेज, कोयंबटूर 10. पीएसजी कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड साइंस, कोयंबटूर ये हैं टॉप-5 मेडिकल कॉलेज मेडीकल कैटेगरी में एम्स, दिल्ली ने फिर से एक बार टॉप स्थान हासिल किया है। ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (AIIMS), नई दिल्ली पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, चंडीगढ़ क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, वेल्लोर जवाहरलाल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, पुडुचेरी संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, लखनऊ  

बाढ़ और पर्यावरण पर हाईकोर्ट का सख्त रुख: अवैध कटाई रोकने के लिए जारी नोटिस

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को हिमाचल प्रदेश में बाढ़ के दौरान बहते हुए लकड़ी के लठ्ठों के वीडियो का संज्ञान लेते हुए कहा कि पहाड़ी इलाकों में बड़े पैमाने पर अवैध पेड़ों की कटाई हो रही है। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है। अदालत ने कहा, “हमने उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और पंजाब में अभूतपूर्व भूस्खलन और बाढ़ देखी है। मीडिया रिपोर्ट्स में भी सामने आया है कि बाढ़ के पानी में बड़ी संख्या में लकड़ी के लठ्ठ बह रहे थे। प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट है कि पहाड़ों में अवैध रूप से पेड़ों की कटाई हो रही है।” पीठ ने केंद्र सरकार (पर्यावरण मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय), राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड तथा जम्मू-कश्मीर राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है। आदेश लिखवाने के बाद, सीजेआई गवई ने मौखिक रूप से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा, “यह गंभीर मुद्दा है। मीडिया में हमने देखा कि हिमाचल, उत्तराखंड में बड़ी संख्या में लकड़ी के लठ्ठ बहते दिखे। अवैध पेड़ों की कटाई चल रही है।” इस पर SG तुषार मेहता ने आश्वासन दिया कि वह आज ही पर्यावरण मंत्रालय के सचिव से बात करेंगे और संबंधित राज्यों के मुख्य सचिवों से संपर्क करेंगे। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि चंडीगढ़ से मनाली के बीच 14 सुरंगें हैं, जो बारिश में भूस्खलन होने पर “मौत के जाल” बन जाती हैं। उन्होंने एक रिपोर्ट का हवाला दिया जिसमें बताया गया था कि 300 लोग एक सुरंग में फंस गए थे।  

मुरली मनोहर जोशी का बड़ा बयान, RSS मंच से उठाया आय असमानता का मुद्दा

 नई दिल्ली आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत द्वारा नई दिल्ली में संघ की शताब्दी वर्षगांठ पर आयोजित तीन दिवसीय व्याख्यानमाला से ठीक एक हफ्ते पहले संघ के आर्थिक क्षेत्र में काम करने वाले छह संगठनों के करीब 80 प्रतिनिधियों की बंद कमरे में विशेष बैठक हुई। इसमें वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व पार्टी अध्यक्ष डॉ. मुरली मनोहर जोशी मुख्य वक्ता रहे। जोशी ने इस दौरान करीब 70 स्लाइड्स दिखाईं और कहा कि केवल आर्थिक विकास को ही राष्ट्रीय लक्ष्य मानना उचित नहीं है।  एक रिपोर्ट में कहा है कि उन्होंने आय में असमानता, भारत की कम प्रति व्यक्ति जीडीपी और सामाजिक संकटों का उल्लेख करते हुए डिग्रोथ की अवधारणा पेश की। इसका अर्थ है कि विकास की दौड़ से बाहर निकलकर सादगी, साझेदारी और स्थानीय संसाधनों के संरक्षण पर जोर देना। आय असमानता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 2021 में भारत की कुल घरेलू संपत्ति का 65% केवल शीर्ष 10% लोगों के पास था। भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी मात्र 2,878 डॉलर थी, जबकि जापान की 33,955 डॉलर थी। कृषि व स्वदेशी उद्योगों पर फोकस करने की बात करते हुए उन्होंने कहा कि विदेशी सहयोग पर अधिक निर्भरता भारत के हित में नहीं है। मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि 1.58 करोड़ बच्चे नशे के शिकार हो चुके हैं। दिल्ली की झुग्गियों में रहने वाले करीब एक-तिहाई बच्चे नशे और शराब में फंस चुके हैं। उन्होंने आत्महत्या की बढ़ती दर पर भी चिंता जताई। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आत्महत्या करने वालों की संख्या 2018 में 1.34 लाख से बढ़कर 2022 में 1.70 लाख तक पहुंच चुके हैं। 2019-21 के बीच 35,950 छात्रों ने जान दी है। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्री रहे मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि उच्च शिक्षा में सकल नामांकन दर केवल 32.7%, जबकि जापान में 64.6% और पोलैंड में 75.3% है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की 43.5% आबादी अब भी कृषि पर निर्भर, जबकि जापान में यह मात्र 3% है। मुरली मनोहर जोशी ने चेतावनी दी कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सामाजिक असमानताओं को और गहरा कर सकता है। उन्होंने हालिया प्राकृतिक आपदाओं और हिमालयी सड़कों के चौड़ीकरण को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि भारत “क्लाइमेट इमरजेंसी” की ओर बढ़ रहा है। मोहन भागवत ने मुरली मनोहर जोशी की इस चिंता पर कहा, “जोशी जी ने सब कुछ कह दिया है।” संगठन के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले ने हालांकि स्पष्ट किया कि बैठक का उद्देश्य सरकार की नीतियों की आलोचना करना नहीं, बल्कि सिद्धांत और व्यावहारिक कदमों को जोड़कर भविष्य की कार्ययोजना बनाना है। इस बैठक में भारतीय मजदूर संघ, भारतीय किसान संघ, सहकार भारती, ग्राहक पंचायत, स्वदेशी जागरण मंच और लघु उद्योग भारती के प्रतिनिधि शामिल हुए। साथ ही संघ विचारक एस गुरुमूर्ति, भाजपा महासचिव बीएल संतोष, पीएम आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजय सान्याल और यूपी के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना भी विशेष आमंत्रित थे।

महिला की नग्न अवस्था देख दंपत्ति ने रखी हैरान कर देने वाली मांग

सिचुआन  चीन में एक महिला के साथ अजीब घटना घट गई है। यहां एक महिला अपने कमरे में नग्न अवस्था में सो रही थी, उसी समय उसकी खिड़की को साफ करने आए दो सफाई कर्मियों ने उसे इस हालत में देख लिया। इसके बाद उसे काफी शर्मिंदगी हुई और वह डिप्रेशन में चली गई। रिपोर्ट के मुताबिक यह महिला और उसका पति चीन के सिचुआन प्रांत के चेंगदू के एक लग्जरी बिल्डिंग के अपार्टमेंट में रहता है। इनके अपार्टमेंट का किराया करीब 1400 डॉलर प्रति महीना है। सोशल मीडिया पर लिखे अपने पोस्ट में चेंग नामक इस महिला ने पूरी घटना की जानकारी दी। दंपत्ती ने बताया कि यह घटना 25 अप्रैल की सुबह हुई जब पत्नी सो रही थी और पति लिविंग रूप में काम कर रहा था। उसी वक्त पत्नी के चीखने की आवाज आई। पति भागकर उसे देखने के लिए पहुंचा। दंपत्ति ने आगे लिखा, "मैं उसे देखने गया, मेरी पत्नी बिस्तर पर बिना कपड़ों के लेटी हुई थी और खिड़की पर दो सफाई कर्मचारी उसे घूर रहे थे। उस समय कमरे के पर्दे भी बंद नहीं थे और लाइट भी पूरी जल रही थी। मैं तुरंत ही पर्दे बंद करने के लिए भागा।" महिला के पति के मुताबिक उसकी पत्नी को आमतौर पर बिस्तर में कपड़े नहीं पहनने की आदत है। ऐसे में वह अपनी सामान्य अवस्था में ही थी। प्रॉपर्टी ऑनर के ऊपर आरोप लगाते हुए पति ने लिखा, "उन्होंने हमें खिड़की के बाहर सफाई की तारीख की सही जानकारी नहीं दी। उन्होंने हमें बस इतना बताया था कि 21 से 30 अप्रैल के बीच में सफाई की जाएगी। दस दिन तक कमरे के पर्दे बंद रखना हमारे लिए नामुमकिन है। हालांकि मैंने कई बार उनसे सही तारीख के बारे में पूछा भी लेकिन उन्होंने नहीं बताया।" चेंग ने कहा कि जब से यह घटना हुई है, उसकी पत्नी गहरे डिप्रेशन में चली गई है। कपल का कहना है कि इस घटना के लिए प्रॉपर्टी ऑनर और उनकी मैनेजमेंट कंपनी को सार्वजनिक तौर पर माफी मांगनी चाहिए। इसके साथ ही उन्हें उचित मुआवजे के तौर किराए में बड़ी छूट भी मिलनी चाहिए। हालांकि चेंग के मुताबिक उनकी दोनों ही मांगे कंपनी की तरफ से ठुकरा दी गई हैं। चेंग ने बताया कि उनके शिकायत करने पर कंपनी ने एक कर्मचारी को फलों की टोकरी के साथ मांफी मांगने के लिए भेज दिया। अब मेरी पत्नी के डिप्रेशन में जाने का सवाल है, तो किसी को कोई चिंता नहीं है। हमारा किराए का कॉन्ट्रेक्ट भी कुछ समय में खत्म हो रहा है। इतना ही नहीं हमारे बार-बार कहने पर कंपनी में किराए में सिर्फ 80 डॉलर कम करने के प्रस्ताव रखा है। चेंग ने कहा, “हम इस अपार्टमेंट के प्रति महीने करीब 10 हजार युआन देते हैं। क्या हमारे पास 600 युआन की कमी है? कंपनी का यह रवैया दर्शाता है कि उन्हें इस बात की कोई चिंता नहीं है। अगर वह चिंता करते ही तो किराए में एक लंबी छूट दे सकते थे। हम उनके रवैए से संतुष्ट नहीं है।”

बस एक दिन का इंतजार… GST छूट से TV-AC समेत 175 सामान होंगे सस्ते

नई दिल्ली जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक  शुरू हो चुकी है और कल इस बैठक के तहत लिए गए फैसले का ऐलान होगा, जिसका ब्रेसब्री से इंतजार कंपनियों से लेकर आम आदमी तक को है. क्‍योंकि 15 अगस्‍त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से एक बड़ा ऐलान करते हुए दिवाली पर नए GST रिफॉर्म लाने की बात कही थी. इस ऐलान के बाद जीएसटी परिषद (GST Council) की यह पहली बैठक है.  जीएसटी काउंसिल की इस बैठक में कई बड़े ऐलान हो सकते हैं. साथ ही दिवाली पर लागू होने वाले नए GST Reform के तहत दो टैक्‍स स्‍लैब और आम आदमी से जुड़ी चीजें सस्‍ती करने पर मुहर लग सकती है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी कहा है कि दो दिन चलने वाले इस बैठक में दरों को युक्तिसंगत बनाने के मुद्दे पर चर्चा होने की उम्‍मीद है, जिसमें डेली यूज के साथ-साथ महंगी वस्‍तुएं भी सस्‍ती होंगी.  2 स्‍लैब करने पर होगी चर्चा  केंद्र के प्रस्ताव के अनुसार, अब सिर्फ दो जीएसटी स्लैब हो सकते हैं. इसमें 28 प्रतिशत वाले स्लैब में आने वाली सभी वस्तुएं, हानिकारक वस्तुओं को छोड़कर, 18 प्रतिशत वाले स्लैब में शामिल हो सकती हैं और 12 प्रतिशत वाले स्लैब की वस्‍तुएं 5 प्रतिशत वाले स्लैब में आ सकती हैं. 40 प्रतिशत का एक और स्लैब होगा, जो 6-7 वस्तुओं पर लगाया जाएगा, जिनमें से ज्‍यादातर हानिकारक और लग्‍जरी वस्‍तुएं होंगी. भारत में टैक्स स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव आने की तैयारी है। बुधवार, 3 सितंबर को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में GST काउंसिल की 56वीं बैठक चल रही है। इस बैठक में 175 से ज्यादा सामानों और सेवाओं पर GST दरें घटाने का प्रस्ताव चर्चा में है। सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा चार टैक्स स्लैब (5%, 12%, 18%, 28%) को घटाकर सिर्फ दो मुख्य स्लैब (5% और 18%) रखने का प्लान है। वहीं, लक्ज़री आइटम्स और ‘सिन गुड्स’ पर 40% का अलग टैक्स स्लैब भी लाने पर विचार हो रहा है। 12-28% स्‍लैब में आने वाली कुछ खास वस्‍तुएं     घी     मक्खन     चीज     पैक्ड फ्रोजन सब्जि‍यां     फ्रूट जूस (अधिकतर, नॉन-एरेटेड)     छाता      सोलर वॉटर हीटर     कृषि उपकरण      एयर कंडीशनर     सीमेंट      कार/एसयूवी हेल्‍थ और इंश्‍योरेंस को जीएसटी से छूट  मंत्रियों के समूहों का प्रस्‍ताव है कि स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम को जीएसटी दायरे से अलग रखना चाहिए. यानी इसपर टैक्‍स नहीं लगाया जाना चाहिए. हालांकि इससे राजस्‍व में गिरावट आएगी. तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क के अनुसार, व्यक्तियों के लिए स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम पर पूरी छूट से अनुमानित रूप से सालाना 9,700 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान होगा.  क्या हो सकते हैं बड़े बदलाव?     5% GST स्लैब में आएंगे: टूथपेस्ट, साबुन, शैम्पू, रेडी-टू-ईट फूड्स, बटर, चीज़, स्नैक्स और आम कपड़े-खाद्य उत्पाद।     18% GST स्लैब में: टीवी, AC, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, सीमेंट और ज्यादातर इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट (पहले 28% टैक्स लगता था)।     40% टैक्स स्लैब: लक्ज़री कारें, 350cc से ऊपर की बाइकें, तंबाकू और प्रीमियम प्रोडक्ट्स। ऑटो सेक्टर पर बड़ा असर     छोटी कारें और हाइब्रिड गाड़ियां (1200cc तक) पर टैक्स 28% से घटकर 18% हो सकता है।     ₹20-40 लाख तक की महंगी इलेक्ट्रिक कारों पर टैक्स 5% से बढ़कर 18% हो सकता है।     दोपहिया वाहनों पर राहत: इंडस्ट्री की मांग के मुताबिक 28% से घटकर 18% GST की उम्मीद।     350cc से ऊपर की बाइक (जैसे रॉयल एनफील्ड) पर 40% टैक्स का प्रपोजल, कंपनियों को झटका लग सकता है। ️ आम जनता को क्या मिलेगा फायदा?     रोजमर्रा की चीज़ें जैसे साबुन, शैम्पू, टूथपेस्ट और खाने का सामान सस्ता होगा।     टीवी, AC, वॉशिंग मशीन जैसे इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स की कीमत घट सकती है।     टू-व्हीलर्स और कई कारें सस्ती होंगी।     लक्ज़री प्रोडक्ट्स और प्रीमियम इलेक्ट्रिक कारें महंगी हो जाएंगी। क्यों हो रहे हैं GST रिफॉर्म्स? प्रधानमंत्री मोदी ने 15 अगस्त को लालकिले से कहा था कि भारत को नए GST ढांचे की जरूरत है। हाल ही में अमेरिका द्वारा भारत पर 50% इंपोर्ट ड्यूटी लगाने के बाद यह कदम उपभोक्ताओं की जेब को राहत और अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए उठाया जा रहा है।     SBI रिसर्च का अनुमान: GST सुधारों से अगले 1 साल में GDP में 0.60% की बढ़त हो सकती है।     खुदरा महंगाई में भी 20-25 बेसिस पॉइंट की गिरावट की उम्मीद। सरकार को कितना होगा नुकसान?     टैक्स कटौती और स्लैब घटाने से सरकार को सालाना ₹60,000 करोड़ से ₹1.7 लाख करोड़ तक का नुकसान हो सकता है।     सरकार इसे GST कम्पनसेशन सेस फंड (₹45,581 करोड़ सरप्लस) और सिन गुड्स पर 40% टैक्स से भरने की योजना बना रही है।     कम टैक्स से खपत बढ़ने की उम्मीद, जिससे लंबी अवधि में राजस्व फिर बढ़ सकता है। ️ राज्यों को भी मिलेगा सुरक्षा कवच राज्यों को GST कटौती से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए नया कंपनसेशन मैकेनिज्म बनाने पर भी चर्चा हो रही है।

रूस का संकेत: भारत को अतिरिक्त S-400 डिफेंस सिस्टम की सप्लाई होगी तेज

नई दिल्ली भारत और रूस के रिश्ते लगातार मजबूत होते जा रहे हैं. दोनों देशों के संबंधों में मजबूती का एक और प्रमाण है हथियारों की डील. ऐसे में रूस और भारत S-400 मिसाइल सिस्टम की सप्लाई बढ़ाने पर बातचीत कर रहे हैं.रूस के डिफेंस एक्सपोर्ट अधिकारी के मुताबिक, भारत और रूस के बीच सतह से हवा में मार करने वाली S-400 मिसाइल सिस्टम की अतिरिक्त सप्लाई के लिए बातचीत जारी है. रूस के मिलिट्री विभाग के एक बड़े अधिकारी दिमित्री शुगायेव का कहना है कि भारत के पास पहले से ही S-400 मिसाइल सिस्टम है और इसकी नई खेप के लिए बातचीत जारी है. दरअसल भारत ने पांच S-400 Triumf सिस्टम के लिए 2018 में रूस के साथ 5.5 अरब डॉलर के एग्रीमेंट पर साइन किया था. चीन की लगातार बढ़ती जा रही सैन्य शक्ति का मुकाबला करने के लिए भारत ने रूस के साथ यह एग्रीमेंट किया था. हालांकि, हथियारों की इस सप्लाई में देरी हुई. इस डील के तहत आखिरी दो यूनिट 2026 और 2027 तक मिलेगी.  बता दें कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के हर हमले को भारत के S-400 डिफेंस सिस्टम ने बखूबी ध्वस्त किया था. एयर डिफेंस में मजबूत साझेदारी S-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस सिस्टम रूस की सबसे उन्नत तकनीक है. इसकी रेंज 400 किलोमीटर है जो 36 लक्ष्यों को एक साथ नष्ट कर सकती है. साथ ही विमान, मिसाइल और ड्रोन से बचाव करती है.  S-400 मिसाइल सिस्टम भारत की हवाई सुरक्षा के लिए गेम चेंजर साबित हो रहा है. यह मिसाइल सिस्टम 80 लक्ष्यों को एक साथ ट्रैक और निशाना बना सकता है, जो इसे दुश्मन के लिए खतरनाक बनाता है. ऑपरेशन सिंदूर में इसकी सफलता ने भारत को क्षेत्र में हवाई वर्चस्व बनाए रखने में मदद की है.  भारत ने 2021 से पंजाब, राजस्थान और पूर्वोत्तर में S-400 को तैनात किया है. यह डील अमेरिका के दबाव के बावजूद भारत और रूस की रणनीतिक साझेदारी को दिखाती है.

पुतिन से मिले किम जोंग उन, रूस आने का न्योता हुआ स्वीकार?

सियोल रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बुधवार को उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन को एक बार फिर रूस आने का निमंत्रण दिया। दोनों नेताओं की मुलाकात बीजिंग में द्वितीय विश्व युद्ध की 80वीं वर्षगांठ पर आयोजित सैन्य परेड के दौरान हुई। सूत्रों के अनुसार, पुतिन और किम की बैठक बीजिंग स्थित दियाओयुताई स्टेट गेस्ट हाउस में हुई। बैठक के बाद जब पुतिन किम को उनकी गाड़ी तक छोड़ने आए, तो किम ने कहा, “जल्द मिलेंगे।” इस पर पुतिन ने जवाब दिया, “मैं इंतजार करूंगा, कृपया आइए।” किम अब तक दो बार रूस का दौरा कर चुके हैं- 2019 और 2023 में। बातचीत के दौरान किम ने यूक्रेन युद्ध में रूस की मदद कर रहे उत्तर कोरियाई सैनिकों की सराहना करने के लिए पुतिन का आभार जताया। पुतिन ने कहा कि वह कभी नहीं भूलेंगे कि कैसे उत्तर कोरियाई सैनिकों ने रूस के कुर्स्क मोर्चे पर “बहादुरी और वीरता” से लड़ाई लड़ी। इस पर किम ने इसे रूस की मदद करना उत्तर कोरिया का “भाईचारे का कर्तव्य” बताया। किम ने कहा कि पिछले वर्ष जून में रणनीतिक साझेदारी संधि पर हस्ताक्षर के बाद से दोनों देशों के संबंध हर क्षेत्र में मजबूत हुए हैं। इस संधि में आपसी रक्षा समझौता भी शामिल है, जिसके तहत किसी भी पक्ष पर सशस्त्र हमले की स्थिति में तुरंत सैन्य सहयोग प्रदान किया जाएगा। उन्होंने यह भी वादा किया कि उत्तर कोरिया रूस की मदद के लिए “हर संभव प्रयास” करेगा। गौरतलब है कि अक्टूबर 2024 से उत्तर कोरिया रूस को लगभग 13,000 सैनिक और हथियार भेज चुका है।

यूक्रेन मुद्दे पर जर्मनी ने सराहा मोदी का शांति प्रयास

नई दिल्ली जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वेडफुल ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ चीन के तियानजिन में हुई बैठक के दौरान यूक्रेन में शीघ्र शांति समझौते की अपील का स्वागत किया। उन्होंने इसे यूरोप के लिए एक महत्वपूर्ण पहल करार दिया। वेडफुल ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ हुई वार्ता के बाद संयुक्त प्रेस वार्ता में कहा, “हमारे लिए जर्मनी और यूरोप में, रूस का आक्रमणकारी युद्ध अभी सबसे बड़ी सुरक्षा चुनौती है। इस संदर्भ में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात में यूक्रेन में शीघ्र शांति समझौते की आवश्यकता पर जोर देना हमारे लिए अहम है। हम यूरोपीय देश, अमेरिका और यूक्रेन के साथ मिलकर इस युद्ध को जल्द समाप्त करने और यूक्रेन को एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में शांति दिलाने के लिए प्रयासरत हैं।” वेडफुल ने कहा कि उन्होंने भारत से आग्रह किया है कि वह रूस के साथ अपने संबंधों का उपयोग कर शांति बहाली की दिशा में संदेश दें। उन्होंने कहा, “मैं इस खुले संवाद के लिए आभारी हूं। शांति ही सुरक्षा, स्वतंत्रता और समृद्धि की आधारशिला है। सुरक्षा भविष्य में भी चुनौती बनी रहेगी, लेकिन हमें खुशी है कि भारत के पड़ोस में भी युद्धविराम लागू हुआ है।” वेडफुल ने यह भी आश्वासन दिया कि जर्मनी आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने कहा कि भारत और जर्मनी का साझा उद्देश्य नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को संरक्षित करना है, जिसमें इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री व्यापार मार्गों की स्वतंत्रता भी शामिल है। उन्होंने कहा, “चीन का आक्रामक व्यवहार हमारे लिए चिंता का विषय है। हमने रक्षा, सुरक्षा और आयुध क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। इसमें हमारी सेनाओं के संयुक्त अभ्यास और इंडो-पैसिफिक में जुड़ाव के लिए निर्यात लाइसेंस प्रक्रिया को तेज करना शामिल है। पिछले वर्ष जर्मन युद्धपोत भारत आया था और हम इस सहयोग को और मजबूत करने के लिए तैयार हैं।” वेडफुल ने उम्मीद जताई कि जर्मनी के चांसलर जल्द ही भारत का दौरा करेंगे। उन्होंने कहा कि साझा चुनौतियों से निपटने और द्विपक्षीय सहयोग को और गहरा करने की आवश्यकता है। उन्होंने भारत को उभरती हुई आर्थिक शक्ति, विश्व का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश और सबसे बड़ा लोकतंत्र बताते हुए कहा कि वैश्विक व्यवस्था में भारत की रणनीतिक भूमिका बेहद अहम है।

भारत-अमेरिका टकराव: ट्रंप की पॉलिसी पर उठे सवाल, टैरिफ हटाने की बढ़ी मांग

वाशिंगटन  रूस से तेल आयात करने पर भारत पर नाराज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 50 फीसदी टैरिफ लगाया है, जिसका उनके देश में ही विरोध हो रहा है। तमाम एक्सपर्ट्स ट्रंप द्वारा भारत पर भयंकर टैरिफ लगाए जाने के खिलाफ हैं। एक एक्सपर्ट ने तो ट्रंप को भारत से माफी मांगने और जीरो टैरिफ करने की सलाह दी है। न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के सहायक प्रोफेसर एडवर्ड प्राइस ने कहा है कि 21वीं सदी को आकार देने में भारत का निर्णायक वोट है। ट्रंप के फैसले पर और अधिक आश्चर्य व्यक्त करते हुए भारत के साथ अमेरिका के संबंधों को महत्वपूर्ण बताया। प्राइस ने 'एएनआई' से कहा, “मैं भारत और अमेरिका के बीच साझेदारी को 21वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण साझेदारी मानता हूं। यह साझेदारी तय करेगी कि चीन और रूस के बीच क्या होता है। 21वीं सदी में भारत के पास निर्णायक वोट है…भारत 21वीं सदी में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी है और आगे और भी शक्तिशाली बनने की ओर अग्रसर है। मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि चीन के साथ टकराव और रूस के साथ युद्ध में, अगर आप इस पर गौर करें, तो अमेरिका के राष्ट्रपति भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ क्यों लगा रहे हैं। हमें भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ हटाकर इसे कहीं अधिक उचित स्तर पर लाना होगा, मैं शून्य प्रतिशत टैरिफ लगाने का सुझाव देता हूं और माफी मांगने के लिए कहना चाहता हूं।” एडवर्ड प्राइस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की और अमेरिका को याद दिलाया कि भारत के पास रूस-चीन गठबंधन को पूरी तरह से अपनाने के अलावा और भी विकल्प हैं, और बीजिंग की सैन्य परेड में शामिल नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी काफी स्मार्ट तरीके से काम ले रहे हैं। वह अमेरिकियों को, मेरे जैसे लोगों को याद दिला रहे हैं कि उनके पास विकल्प मौजूद हैं, लेकिन उन्होंने चीन और रूस को पूरी तरह से स्वीकार नहीं किया है और न ही सैन्य परेड में शामिल हो रहे हैं।''प्राइस ने यह भी तर्क दिया कि भारत अपनी स्वतंत्र संप्रभुता के कारण कभी भी चीनी प्रभाव में नहीं आएगा। उन्होंने आगे कहा कि भारत अपने फैसले खुद लेता है और किसी एक दिशा में कदम नहीं रखेगा।  

जंग का नया दौर… रूस ने यूक्रेन पर बरसाए सैकड़ों ड्रोन और मिसाइलें

कीव  रूस और यूक्रेन के बीच 24 फरवरी 2022 को शुरू हुआ युद्ध 42 महीने से अधिक समय से चल रहा है और अभी भी इसके रुकने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। इस युद्ध के कारण हर दिन जान-माल का नुकसान हो रहा है। यूक्रेन में अब तक हजारों लोग मारे जा चुके हैं और कई शहर तबाह हो चुके हैं। रूस के भी कई सैनिक इस युद्ध में मारे गए हैं। इतने नुकसान के बावजूद, रूस के यूक्रेन पर हमले जारी हैं। बीती रात रूस ने एक बार फिर यूक्रेन पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया। रूस ने यूक्रेन पर दागे 500 ड्रोन-मिसाइलें रूस ने एक बार फिर यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर हमला करते हुए देर रात 526 ड्रोन-मिसाइलें दागीं, जिनमें 502 ड्रोन और 24 मिसाइलें शामिल थीं। यूक्रेन की वायुसेना ने इस रूसी हमले की जानकारी दी। इस हमले में मुख्य रूप से यूक्रेन का पश्चिमी हिस्सा निशाना बना। यूक्रेनी वायुसेना के अनुसार, रूस द्वारा दागे गए 69 ड्रोन और 3 मिसाइलें 14 अलग-अलग स्थानों पर गिरीं। बाकी ड्रोन और मिसाइलों को यूक्रेनी वायुसेना ने नष्ट कर दिया, लेकिन उनका मलबा भी कई जगहों पर गिरा। इस हमले में कई लोग घायल हुए, जिन्हें नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। इस हमले से कई घरों, इमारतों और नागरिक बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा। हाल के दिनों में हमले तेज हाल के दिनों में दोनों पक्षों की ओर से हवाई हमले तेज हो गए हैं। रूस, यूक्रेन की बिजली और परिवहन व्यवस्था को निशाना बना रहा है। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जल्द से जल्द युद्ध समाप्त करना चाहते हैं। अगस्त में ट्रंप ने रूसी और यूक्रेनी राष्ट्रपतियों से अलग-अलग मुलाकात की थी। जेलेंस्की ने ट्रंप के युद्धविराम और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ आमने-सामने शांति वार्ता के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है, लेकिन क्रेमलिन ने इस पर आपत्ति जताई है। हाल ही में कूटनीतिक गतिविधियों के बीच, पुतिन ने चीन में चीनी नेता शी जिनपिंग, उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। वाशिंगटन का दावा है कि ये देश रूस के युद्ध प्रयासों का समर्थन कर रहे हैं। चीन और भारत ने रूसी तेल खरीदा है, जिससे अप्रत्यक्ष रूप से रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था को मदद मिल रही है। वहीं, यूक्रेन पर लगातार हो रहे हमलों के बीच जेलेंस्की ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने की मांग की है। मंगलवार शाम को अपने संबोधन में जेलेंस्की ने कहा कि रूसी ड्रोन हमलों की संख्या बढ़ रही है, जिसमें दिन के उजाले में भी हमले शामिल हैं। उन्होंने सहयोगी देशों से और समर्थन मांगा है, ताकि रूस के हमलों का जवाब दिया जा सके।