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भाषा विवाद गरमाया, हिंदी भाषी ने दी मराठी न बोलने की कसम

मुंबई महाराष्ट्र में बीते कई महीनों से मराठी बनाम हिंदी भाषा का विवाद देखने को मिल रहा है। देवेंद्र फडणवीस सरकार की ओर से त्रिभाषा नीति स्कूलों में लागू किए जाने के फैसले के खिलाफ राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने मोर्चा खोल दिया था। इन नेताओं का कहना था कि मराठी भाषा के खिलाफ साजिश के तहत ऐसा फैसला लिया गया है। इस पर फडणवीस सरकार ने पीछे हटते हुए फैसला वापस ले लिया, लेकिन भाषा पर विवाद समाज में वैमनस्यता की वजह अब भी बन रहा है। इस बीच महाराष्ट्र के ही पनवेल में विवाद का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें मराठी बोलने के दबाव और धमकियों के आगे हिंदी भाषी शख्स झुका नहीं। मिली जानकारी के अनुसार गणेश उत्सव को लेकर वीडियो शुरू हुआ था, जिस पर विजय चंदेल से एक महिला कहती है कि मराठी में बात करो। वायरल हो रहे वीडियो में सुना जा सकता है कि महिला विजय से कहती है- मराठी में बात करिए। इस पर वह कहते हैं कि मैं हिंदी में बात करता हूं। और हिंदी में ही बोलूंगा। इस पर महिला और उसके साथ कार में सवार एक शख्स ने कहा कि महाराष्ट्र में रहते हो। इसलिए मराठी में बोलना पड़ेगा। इस पर महिला ने कहा कि पुलिस आएगी तब बताना। इस बीच महिला ने ट्रैवल व्लॉगर विजय चंदेल से कहा कि आप महाराष्ट्र में रहते हैं। हमारे कल्चर की इज्जत करो और मराठी में बात करो। इस पर विजय चंदेल ने कहा कि मैं महाराष्ट्र की इज्जत करता हूं, लेकिन मुझे मराठी बोलने पर मजबूर नहीं कर सकते। विजय ने कहा कि मैं हिंदी बोलता हूं। भारत की भाषा हिंदी है और मैं हिंदी में ही बात करूंगा। विजय ने कहा कि यह भारत देश है और मैं केवल हिंदी बोलूंगा। उन्होंने कहा कि मराठी मैं बोलता भी नहीं हूं और ना ही बोलूंगा। इस पर विजय चंदेल ने कहा कि मैं तो मरते दम तक हिंदी में ही बात करूंगा। हालांकि इस मामले में दोनों परिवारों ने पुलिस से संपर्क नहीं किया और ना ही मीडिया से बात की। कहा जा रहा है कि बाद में दोनों परिवारों ने आपसी सहमति से मामले को सुलझा लिया, लेकिन वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।  

कितनी मुश्किल होती है एस्ट्रोनॉट्स की ट्रेनिंग? नासा से सामने आई एक्सक्लूसिव तस्वीरें

न्यूयॉर्क भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने एस्ट्रोनॉट्स की कड़ी ट्रेनिंग की एक झलक दिखाई है। उन्होंने नासा के मल्टी-एक्सिस ट्रेनर (मैट) स्पेस सेंटर से एक वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में शुभांशु शुक्ला कुछ खास मशीनों के साथ दिखाई देते हैं। ऐसी ही एक मशीन है, जिस पर एस्ट्रोनॉट्स को लगातार घुमाया जाता है। असल में स्पेस में अगल-अलग तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में उन्हें काफी कड़ी ट्रेनिंग दी जाती है। शुभांशु शुक्ला ने इसका वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर करते हुए इसके कैप्शन में लिखा है, ‘लेट्स गेट स्पिनिंग।’ दिखाई वॉमिट कॉमेट चेयर शुभांशु शुक्ला ने जिस मशीन का वीडियो दिखाया है, उसे ‘वॉमिट कॉमेट चेयर’ कहा जाता है। यह एक तरह का सिम्यूलेटर है। इसमें ट्रेनिंग लेकर अंतरिक्ष यात्री स्पेस में होने वाली चीजों को महसूस कर सकता है। इसमें तीन रिंग्स लगी होती हैं, जो घूमती रहती हैं। जब एक एस्ट्रोनॉट अपनी सीट से बंधा होता है, तो रिंग कई दिशाओं में घूमती है। ऐसा इसलिए किया जाता है कि अगर कभी अंतरिक्ष यान अस्थिर हो जाए तो उस दौरान होने वाला अनुभव अंतरिक्ष यात्री महसूस कर सके। साथ ही वह ऐसे हालात में अपने ऊपर नियंत्रण बनाए रखने में भी सफल रहे और ध्यान केंद्रित कर सके। नील आर्मस्ट्रांग का बताया अनुभव अंदर की जानकारी देते हुए शुभांशु शुक्ला बताते हैं कि मैं मार्शल स्पेस फ्लाइट सेंटर के मैट में हूं। इस ट्रेनर का उपयोग मर्करी एस्ट्रोनॉट्स को ऑर्बिट के अनुभवों को देने के लिए किया गया है। इसके बाद उन्होंने बताया कि नील आर्मस्ट्र्रांग को जेमिनी 8 मिशन के दौरान समस्याएं आई थीं। तब थ्रस्टर में समस्या होने के चलते काफी ज्यादा घुमाव हो रहे थे। उन्होंने बाद में मैनुअल तरीके से स्पेसक्राफ्ट पर नियंत्रण पाया था।  

सरकार का खजाना भर गया, GST से आया ₹1.86 लाख करोड़ — अब तक का तगड़ा उछाल

नई दिल्ली सरकार ने सोमवार को जीएसटी कलेक्शन के आंकड़े शेयर किए, जो राहत भरे हैं. सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें, तो अगस्त महीने में कलेक्शन 1.86 लाख करोड़ रुपये रहा है, जो बीते साल की समान अवधि की तुलना में 6.5 फीसदी ज्यादा है. बता दें कि अगस्त 2024 में 1.75 लाख करोड़ रुपये रहा था. वहीं बात इससे पिछले महीने की करें, तो जुलाई 2025 में जीएसटी संग्रह से सरकार के खजाने में 1.96 लाख करोड़ रुपये आए थे.  रेवेन्यू में जोरदार उछाल का असर सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, घरेलू राजस्व में उछाल की वजह से अगस्त में ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन 1.86 लाख करोड़ रुपये से अधिक पर पहुंच गया. बीते महीने ये रेवेन्यू 9.6 फीसदी बढ़कर 1.37 लाख करोड़ रुपये हो गया, जबकि आयात कर 1.2 फीसदी की गिरावट के साथ 49,354 करोड़ रुपये रह गया. जीएसटी रिफंड पर नजर डालें, तो साल-दर-साल 20 फीसदी घटकर 19,359 करोड़ रुपये रह गया. अप्रैल 2025 में रिकॉर्ड कलेक्शन जीएसटी कलेक्शन के अब तक के सबसे बड़े आंकड़े पर नजर डालें, तो ये इस साल अप्रैल महीने में रहा था, जब सरकार के जीएसटी संग्रह से 2.37 लाख करोड़ रुपये की कमाई हुई थी. ये जीएसटी के लागू होने के बाद से अब तक का सबसे ज्यादा कलेक्शन था.  गौर करने वाली बात है कि जोरदार जीएसटी कलेक्शन का ये आंकड़ा ऐसे समय में आया है, जबकि दो दिन बाद जीएसटी काउंसिल की बैठक होने वाली है. इसमें जीएसटी रिफॉर्म के तहत टैक्स स्लैब की संख्या को कम करने, जीएसटी रेट्स को युक्तिसंगत बनाने पर चर्चा होने वाली है.  देश में जीएसटी में बदलाव की तैयारी  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से नेक्स्ट जनरेशन जीएसटी रिफॉर्म को लेकर ऐलान किया था. उन्होंने अपने संबोधन में कहा था कि सरकार अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधार लेकर आ रही है और इससे आम आदमी पर टैक्स का बोझ कम होगा. उन्होंने इसके दिवाली से पहले लागू होने की उम्मीद जताई थी. नई जीएसटी व्यवस्था में कर प्रणाली को सरल बनाने के लिए सिर्फ दो दरें, 5% और 18%, लागू करने का प्रस्ताव है. जीओएम की मंजूरी, 3-4 सितंबर को बैठक  बीते 20 और 21 अगस्त को ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स (जीओएम) की नई दिल्ली में हुई बैठक में दो टैक्स स्लैब के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए 12% और 28% जीएसटी स्लैब को खत्म करने पर सहमति जताई गई. इसमें शामिल सदस्यों ने 5% और 18% जीएसटी स्लैब के प्रस्ताव को मंजूर किया. हालांकि, सरकार को इस जीएसटी रिफॉर्म ससे करीब 40,000 करोड़ रुपये के राजस्व के नुकसान की आशंका है. अब जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक 3 और 4 सितंबर को होने वाली है, जिसमें इस मुद्दे पर अंतिम मुहर लगेगी. 

ब्राह्मणों को फायदा वाली बात पर ट्रंप के सलाहकार से कांग्रेस नेता भी सहमत

वाशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी के ब्राह्मणों को लेकर किए गए दावों पर कांग्रेस नेता उदित राज सहमति जता रहे हैं। उन्होंने कहा कि रूसी तेल की खरीद से ब्राह्मणों के फायदा हो रहा है। व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने कहा कि ब्राह्मण भारतीय जनता की कीमत पर मुनाफाखोरी कर रहे हैं और इसे रोकने की जरूरत है। इंडिया टुडे के अनुसार, राज ने कहा, 'मैं पीटर नवारो की इस बात से पूरी तरह सहमत हूं कि ब्राह्मणों को रूसी तेल की खरीद से फायदा हो रहा है। यह सच है कि भारत में अधिकांश कॉर्पोरेट घराने सवर्ण चला रहे हैं। वो रूस से तेल खरीदते हैं, रिफाइन करते हैं और बेहद ऊंचे दामों में बेचते हैं। आम भारतीयों को इससे कोई फायदा नहीं हो रहा है।' उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि देश में पिछड़ी जातियां और दलित भेदभाव के कारण अगले 100 साल कॉरपोरेट घराने स्थापित करने में सक्षम होंगे। नवारो ने जो कहा वह तथ्यात्मक रूप से सही है और इससे कोई इनकार नहीं कर सकता।' ट्रंप के सलाहकार का दावा नवारो ने साक्षात्कार में कहा, 'देखिए (प्रधानमंत्री नरेन्द्र) मोदी एक महान नेता हैं।' उन्होंने कहा कि मोदी दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के नेता हैं और उन्हें 'समझ नहीं आता कि भारतीय नेता किस तरह रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ सहयोग कर रहे हैं।' नवारो ने कहा, 'तो मैं बस इतना ही कहना चाहूंगा, भारतीय जनता कृपया समझिए कि यहां क्या हो रहा है। आपके पास ब्राह्मण हैं जो भारतीय लोगों की कीमत पर मुनाफाखोरी कर रहे हैं। हमें इसे रोकने की जरूरत है।' नवारो व्यापार तथा शुल्क (टैरिफ) पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों को लेकर वाशिंगटन और नयी दिल्ली के बीच रिश्तों में आयी गिरावट के बाद पिछले कुछ दिनों से लगातार भारत को निशाना बना रहे हैं।  

गडकरी ने क्यों कहा- बेवकूफ बनाने वाला होता है ‘बेस्ट लीडर’?

नई दिल्ली  केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का कहना है कि बेवकूफ बनाने वाले लोग अच्छे नेता बनते हैं। महाराष्ट्र के नागपुर में अखिल भारतीय महानुभाव परिषद के एक कार्यक्रम में शामिल हुए गडकरी ने मजाकिया अंदाज में राजनीति पर खुलकर बात की। साथ ही उन्होंने कहा कि शॉर्टकट जल्दी परिणाम दे सके हैं, लेकिन इसके भी दुष्प्रभाव हो सकते हैं। सोमवार को गडकरी ने कहा, 'कुछ भी हासिल करने का एक शॉर्टकट होता है। कोई भी व्यक्ति शॉर्टकट के जरिए जल्दी पहुंच सकता है। अगर आप नियम तोड़कर सड़क पार करना चाहते हैं, तो हो सकता है कि रेड लाइट हो और आप क्रॉस कर लें। शॉर्टकट का एक मतलब यह भी है कि यह आपको शॉर्ट कर देता है। इसलिए हमें ईमानदारी, विश्वसनीयता, समर्पण और सच्चाई जैसे मूल्य दिए गए हैं।' उन्होंने आगे कहा, 'लंबे समय की सफलता सच्चाई से ही मिलती है। जैसे कि भगवान कृष्ण ने भगवत गीता में लिखा है कि अंत में जीत सत्य की होती है।' केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उनकी फील्ड में सच बोलना मना है। उन्होंने कहा, 'मैं जिस फील्ड में काम करता हूं, वहां पूरे दिल से सच बोलना मना है। जो लोगों को बेवकूफ बना सकता है, वह सबसे अच्छा नेता बन सकता है।' नागपुर में गडकरी ने कहा, 'चक्रधर स्वामी ने सत्य, अहिंसा, शांति, मानवता और समानता के मूल्यों की शिक्षा दी। सत्य हमारे जीवन का आधार है और हमें इसका पालन करना चाहिए।' उन्होंने कहा, 'महानुभाव संप्रदाय के संस्थापक चक्रधर स्वामी की शिक्षाएं प्रेरणादायी हैं जिनका सभी को जीवन में अनुसरण करना चाहिए। किसी व्यक्ति में परिवर्तन उसे दिये गए संस्कारों से जुड़ा होता है।'

UN स्टाफ को हूती विद्रोहियों ने किया किडनैप, आखिर किस बात से भड़के?

सना यमन में सक्रिय हूती विद्रोहियों ने संयुक्त राष्ट्र के दफ्तरों में ही बोल दिया। इन विद्रोहियों ने यूएन के 11 कर्मचारियों को बंधक बना लिया है। हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना और पोर्ट सिटी कहे जाने वाले हुदेदा में हमले किए। इस दौरान उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के दफ्तरों में काम करने वाले करीब एक दर्जन लोगों को ही बंधक बना लिया। संयुक्त राष्ट्र के दफ्तरों पर ये हमले इजरायल की एयरस्ट्राइक के बाद किए गए है, जिसमें उसके पीएम समेत कई सीनियर कमांडर मारे गए हैं। यमन के सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि हूती विद्रोहियों ने कई दर्जन अन्यलोगों को भी बंधक बना लिया है। इन लोगों पर आरोप है कि वे इजरायल के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुतारेस ने कहा कि हूती विद्रोही जबरन ही संगठन की ओर से संचालित वर्ल्ड फूड प्रोग्राम के दफ्तर में घुस आए। यूएन की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। इसके अलावा अन्य दफ्तरों में भी तोड़फोड़ करने की कोशिश की। यमन में संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत हांस ग्रंडबर्ग ने कहा कि यह बड़ा अत्याचार है। हम मांग करते हैं कि संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारियों को तत्काल और बिना किसी शर्त के रिहा किया जाए। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र और उसके लोगों का काम तो बिना किसी पक्षपात के होता है। हम तटस्थता, निष्पक्षता, स्वायत्तता के तहत मानवता के लिए काम करते हैं। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र के दफ्तर में हमला करना और उसके लोगों को बंधक बना लेना ठीक नहीं है। यूएन ने कहा कि यह यमन की ओर से जताए गए उस संकल्प का भी उल्लंघन करता है, जिसके तहत कहा गया है कि वह संयुक्त राष्ट्र के प्रतिष्ठानों और उसके लोगों की सुरक्षा करेगा। बता दें कि पहले से ही हूती विद्रोहियों ने यूएन से जुड़े 23 लोगों को बंधक बना रखा था। इनमें से एक की मौत हो चुकी है। दरअसल हूती विद्रोही लगातार कहते रहे हैं कि यमन में काम करने वाले यूएन के सहायता कर्मी जासूसी करते हैं और इजरायल एवं अमेरिका को खबरें देते हैं। बता दें कि गाजा में जंग छिड़ने के बाद से हूती विद्रोहियों ने अपना दायरा बढ़ा दिया है। हूती ने ड्रोन और मिसाइलों के जरिए कई कमर्शल ठिकानों को टारगेट किया है। उसका कहना है कि हम फिलिस्तीन के साथ हैं और इसके लिए इजरायल पर हमला करते रहेंगे।  

राजनीतिक दल हों सक्रिय! बिहार एसआईआर मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने भारत के चुनाव आयोग के इस कथन पर संज्ञान लिया कि बिहार ड्राफ्ट रोल में मतदाता पंजीकरण के लिए दावे और आपत्तियों पर 1 सितंबर की समय सीमा के बाद भी विचार किया जाएगा। कोर्ट ने आयोग के कथन पर संज्ञान लेते हुए 1 सितंबर की समय सीमा बढ़ाने का कोई आदेश पारित नहीं किया। कोर्ट ने बिहार विधिक सेवा प्राधिकरण को सभी जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों को निर्देश जारी करने का आदेश दिया कि वे मतदाताओं या राजनीतिक दलों को दावे, आपत्तियां, सुधार ऑनलाइन जमा करने में सहायता के लिए अर्ध-विधिक स्वयंसेवकों की नियुक्ति करें या उन्हें अधिसूचित करें। शीर्ष अदालत ने कहा कि इसके बाद प्रत्येक स्वयंसेवक को जिला एवं सत्र न्यायाधीश (डीएसएलए के अध्यक्ष) को एक गोपनीय रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। स्वयंसेवकों से प्राप्त जानकारी राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणों के स्तर पर एकत्र की जा सकती है। 1 सितंबर के बाद भी दायर किए जा सकते हैं सुधार इससे पहले निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि बिहार विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत तैयार मतदाता सूची के मसौदे में दावे, आपत्तियां और सुधार 1 सितंबर के बाद भी दायर किए जा सकते हैं, लेकिन मतदाता सूची के अंतिम रूप देने के बाद ही इन पर विचार किया जाएगा। जस्टिस सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने निर्वाचन आयोग (ईसी) के इस कथन पर गौर किया कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में नामांकन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि तक दावे और आपत्तियां दायर की जा सकती हैं। 'अर्ध-कानूनी स्वयंसेवकों को तैनात करे' शीर्ष अदालत ने बिहार एसआईआर को लेकर फैले भ्रम को काफी हद तक विश्वास का मामला बताते हुए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देश दिया कि वह 1 अगस्त को प्रकाशित मसौदा सूची पर दावे और आपत्तियां दर्ज कराने में व्यक्तिगत मतदाताओं और राजनीतिक दलों की सहायता के लिए अर्ध-कानूनी स्वयंसेवकों को तैनात करे। कोर्ट ने राजनीतिक दलों से भी खुद को 'सक्रिय' करने को कहा। 'पार्टी ने केवल 10 दावे दाखिल किए' निर्वाचन आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने कहा, 'समय सीमा में किसी भी तरह का विस्तार पूरी प्रक्रिया और अंतिम मतदाता सूची को अंतिम रूप देने में बाधा उत्पन्न करेगा।' चुनाव आयोग ने आगे कहा कि मसौदा मतदाता सूची में शामिल 2.74 करोड़ मतदाताओं में से 99.5 फीसदी ने पात्रता संबंधी दस्तावेज दाखिल कर दिए हैं। राजद के दावों (जिसमें 36 दावे दाखिल करने की बात कही गई थी) का खंडन करते हुए आयोग ने कहा कि पार्टी ने केवल 10 दावे दाखिल किए हैं। 'मतदाताओं को सात दिनों के भीतर नोटिस जारी करेगा, जिनके दस्तावेज अधूरे' द्विवेदी ने आगे कहा कि राजद पार्टी की ओर से अपनी याचिका में उल्लिखित 36 दावों को भी विधिवत स्वीकार कर लिया गया है। चुनाव आयोग ने कहा कि वह उन मतदाताओं को सात दिनों के भीतर नोटिस जारी करेगा, जिनके दस्तावेज अधूरे हैं। आयोग ने एसआईआर को निरंतर प्रक्रिया बताया। चुनाव आयोग ने कहा कि राजनीतिक दलों की ओर से दायर अधिकांश दावे और आपत्तियां मतदाता सूची से नामों को शामिल करने के लिए नहीं, बल्कि हटाने के लिए थीं। गोपनीय रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दूसरी ओर पीठ ने पैरालीगल स्वयंसेवकों को संबंधित जिला न्यायाधीशों के समक्ष गोपनीय रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया और 8 सितंबर को उस पर विचार किया जाएगा। समयसीमा बढ़ाने की मांग राजद और एआईएमआईएम ने चुनावी राज्य बिहार में चुनाव पुनरीक्षण प्रक्रिया में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समय सीमा बढ़ाने की मांग की है। मसौदा सूची में मतदाता नामों को शामिल करने या हटाने के लिए दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तिथि आज थी।

चीन में नजर आई मोदी-पुतिन की बॉन्डिंग, कार राइड ने बनाया मजबूत रिश्ता

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चीन दौरा बेहद ही खास रहा. यहां वह एससीओ शिखर सम्मेलन के लिए पहुंचे थे लेकिन कई पहलुओं से उनकी यह यात्रा ऐतिहासिक रही. पीएम मोदी ने यहां अपने "प्रिय दोस्त" व्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात की. दोनों नेताओं की दोस्ती और आपसी बातचीत की देश-विदेश में चर्चा है. खास बात ये है कि पुतिन और मोदी ने एक ही कार में ट्रैवल भी किया. SCO समिट स्थल से होटल तक की यात्रा के दौरान यह दिलचस्प वाकया सामने आया. दरअसल, राष्ट्रपति पुतिन ने पीएम मोदी के साथ एक ही कार से जाने की इच्छा जताई. इसके लिए उन्होंने लगभग 10 मिनट तक इंतजार किया. इसके बाद दोनों नेता पुतिन की 'Aurus' कार में बैठे और कई मुद्दों पर चर्चा की. होटल पहुंचने के बाद भी दोनों नेताओं ने कार में ही लगभग 45 मिनट तक बातचीत जारी रखी. इसके बाद करीब एक घंटे तक औपचारिक द्विपक्षीय बैठक भी हुई. इससे पहले एससीओ समिट स्थल पर भी मोदी-पुतिन की दोस्ती की एक शानदार झलक सामने आई, जहां दोनों नेता चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ भी खड़े होकर आपसी चर्चा करते देखे गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय चीन दौरे पर थे, जहां उन्होंने तियानजिन में आयोजित शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन (SCO) समिट में हिस्सा लिया. इनके अलावा चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत कई वैश्विक नेताओं के साथ द्विपक्षीय बातचीत की. पीएम मोदी ने अपने दौरे को "प्रोडक्टिव विजिट" बताया और कहा कि उन्होंने यहां भारत का "अहम वैश्विक मुद्दों" पर रुख स्पष्ट किया है। पीएम मोदी और पुतिन की द्विपक्षीय वार्ता चीन दौरे पर पीएम मोदी ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन के साथ आर्थिक, वित्तीय और ऊर्जा क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की और इन संबंधों में लगातार हो रही प्रगति पर संतोष जताया. पीएम मोदी ने पुतिन से कहा कि यूक्रेन संघर्ष का जल्द से जल्द अंत होना "मानवता की पुकार" है. रूस के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री मोदी को अपना 'प्रिय मित्र' कहकर संबोधित किया. इसके जवाब में पीएम मोदी ने भी पुतिन से कहा कि "मैं हमेशा महसूस करता हूं कि आपसे मिलना एक यादगार अनुभव होता है." पुतिन ने आगे कहा कि भारत और रूस के बीच की "विशेष और रणनीतिक साझेदारी" लगातार मजबूत हो रही है और समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ रही है। एससीओ समिट में भारत का रुख SCO समिट में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में "डबल स्टैंडर्ड" छोड़ने की अपील की. उन्होंने कहा कि आतंकवाद से लड़ना "मानवता के प्रति कर्तव्य" है. पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यह न सिर्फ भारत की अंतरात्मा पर हमला था बल्कि हर उस राष्ट्र के लिए खुली चुनौती है जो मानवता में विश्वास करता है. प्रधानमंत्री ने SCO के लिए "S से सिक्योरिटी, C से कनेक्टिविटी और O अपॉर्चुनिटी" के रूप में एक नया फुल-फॉर्म भी पेश किया। पीएम मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को समिट के इतर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी मुलाकात की. दोनों नेताओं ने ट्रेड और इन्वेस्टमेंट संबंधों को बढ़ाने पर जोर दिया ताकि ग्लोबल कॉमर्स को स्थिर किया जा सके. उन्होंने बॉर्डर से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की और इसे "फेयर सॉल्यूशन" की दिशा में सुलझाने पर सहमति जताई. साथ ही दोनों देशों ने कई साझा चुनौतियों से निपटने के लिए द्विपक्षीय संबंधों को गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई। SCO समिट का भारत के लिए महत्व SCO समिट में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सहित कई विश्व नेता मौजूद थे. पीएम मोदी ने आतंकवाद के मुद्दे पर सभी को एकजुट होने की अपील की. उन्होंने कहा कि आतंकवाद सिर्फ किसी एक देश की समस्या नहीं है, बल्कि पूरी मानवता के खिलाफ खतरा है। एससीओ समिट के बाद पीएम मोदी का संदेश चीन दौरे के आखिरी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, "चीन की एक उपयोगी यात्रा का समापन, जहां मैंने SCO शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया और कई विश्व नेताओं के साथ बातचीत की. साथ ही, भारत के रुख को अहम वैश्विक मुद्दों पर स्पष्ट किया." उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, चीनी सरकार और वहां की जनता को समिट के सफल आयोजन के लिए धन्यवाद भी दिया। भारत-चीन के बीच सामान्य हो रहे संबंध प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा ऐसे समय हुआ जब भारत-अमेरिका संबंध पिछले दो दशकों में सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी और भारत के खिलाफ उनकी लगातार आलोचनाओं ने इस तनाव को और गहरा दिया है. ऐसे में चीन और रूस के साथ भारत के रिश्ते और ज्यादा अहम माने जा रहे हैं। होटल पहुंचने पर भी कार से नहीं उतरे, 50 मिनट तक करते रहे बातचीत  रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपनी ऑरस लिमोजीन कार में लिफ्ट दी। दोनों नेता SCO समिट से इतर द्विपक्षीय वार्ता के लिए तय जगह तक साथ पहुंचे। रूस के राष्ट्रीय रेडियो स्टेशन वेस्तीएफएम के अनुसार, पुतिन की लिमोजीन से होटल पहुंचने के दौरान रास्ते में दोनों नेताओं के बीच बातचीत जारी रही। होटल में दोनों नेता अपनी अपनी टीम के सदस्यों के साथ एक-दूसरे से मिलने वाले थे। हालांकि, होटल पहुंचने पर वे रूसी राष्ट्रपति की लिमोजीन से नहीं उतरे और 50 मिनट तक बातचीत करते रहे। रिपोर्ट में बताया गया कि पुतिन ने खुद मोदी के साथ कार में जाने की इच्छा जताई थी। बाद में, क्रेमलिन (रूस के राष्ट्रपति का आधिकारिक आवास एवं कार्यालय) के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव का बयान आया। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने कार में लगभग एक घंटे तक आमने-सामने की बातचीत की। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर लिमोजीन के अंदर अपनी और रूस के राष्ट्रपति की एक तस्वीर भी साझा की। मोदी ने कहा, ‘एससीओ शिखर सम्मेलन स्थल पर कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद राष्ट्रपति पुतिन और मैं द्विपक्षीय बैठक स्थल पर साथ-साथ पहुंचे। उनके साथ बातचीत हमेशा सार्थक होती है।’ क्यों बेहद खास रही बातचीत मॉस्को में जानकारों का कहना है कि मोदी और पुतिन के बीच शायद यह सबसे विशेष बातचीत थी, जिसमें … Read more

भारी बारिश के चलते हिमाचल सरकार ने लिया बड़ा फैसला, शिक्षण संस्थान बंद

हिमाचल प्रदेश  हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। उच्च शिक्षा निदेशालय ने छात्रों और शिक्षकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी कॉलेज और उच्च शिक्षा संस्थानों को बंद रखने का आदेश दिया है। यह फैसला राज्य के उन जिलों में लागू होगा जहां जिला उपायुक्त (DC) या उपमंडल अधिकारी (SDM) ने पहले से ही शैक्षणिक संस्थानों को बंद करने का निर्देश जारी किया है। निदेशक उच्च शिक्षा डॉ. अमरजीत के. शर्मा ने कहा कि यह आदेश आपदा प्रबंधन अधिनियम (SDMA) के तहत जारी किया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रतिकूल मौसम की स्थिति में कोई भी छात्र या कर्मचारी खतरे में न पड़े।   निदेशक ने आगे बताया कि यह फैसला तब तक प्रभावी रहेगा जब तक कि संबंधित उपायुक्त या उपमंडलाधिकारी स्थिति के सामान्य होने की घोषणा नहीं करते। उन्होंने सभी कॉलेज प्रधानाचार्यों को यह भी निर्देश दिया है कि संस्थान बंद रहने की अवधि के दौरान छात्रों के लिए ऑनलाइन कक्षाओं की व्यवस्था की जाए। इससे यह सुनिश्चित होगा कि छात्रों की पढ़ाई किसी भी तरह से बाधित न हो और वे अपने पाठ्यक्रम को जारी रख सकें।    पिछले कुछ दिनों से, हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में भारी वर्षा और भूस्खलन की खबरें आ रही हैं, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। सड़कों पर यातायात बाधित है और कई स्थानों पर बिजली आपूर्ति भी बाधित हुई है। ऐसे में, उच्च शिक्षा विभाग का यह कदम एक जिम्मेदार और सावधानीपूर्ण निर्णय है, जो अकादमिक कैलेंडर को प्रभावित किए बिना सभी की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।  

ट्रंप की योजना: गाजा के 20 लाख लोग हटेंगे, लौटने पर मिलेगा फ्लैट

गाजा  डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन और इजरायल ने मिलकर गाजा को लेकर प्लान तैयार किया है। इस प्लान की काफी चर्चा है और वॉशिंगटन पोस्ट ने ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों के पास मौजूद दस्तावेजों के हवाले से एक रिपोर्ट छापी है। इसके मुताबिक फिलिस्तीन के बड़े हिस्से गाजा से 20 लाख लोगों को अस्थायी तौर पर हटाया जाएगा। इन लोगों को मिस्र, कतर जैसे देशों में रखा जाएगा या फिर फिलिस्तीन के ही किसी एक क्षेत्र में रखा जाएगा। इन लोगों को तब तक गाजा से बाहर रहना होगा, जब तक इलाके का पुनर्विकास नहीं हो जाता। इस दौरान गाजा छोड़ने वाले फिलिस्तीनियों को डिजिटल टोकन दिए जाएंगे। इसके अलावा कैश पेमेंट किया जाएगा। गाजा से अस्थायी तौर पर हटाए लोग जहां रहेंगे, वहां खानपान की व्यवस्था होगी। इसके अलावा रेंट सब्सिडी भी दी जाएगी। गाजा के लोगों को हटाने के प्लान को वॉलेंट्री डिपार्टर कहा जा रहा है, जिसके तहत वे दूसरे देश में जाएंगे या फिर तय स्थान पर उन्हें रखा जाएगा। गाजा के लोगों को कुल 4 साल तक बाहर रखने के प्लान पर काम चल रहा है। इसके तहत उन्हें 4 साल की रेंट सब्सिडी मिलेगी और एक साल तक खाने की व्यवस्था की जाएगी। अमेरिका और इजरायल के रणनीतिकारों ने इस प्लान का नाम भी बेहद दिलचस्प रखा है– GREAT। यहां ग्रेट से अर्थ है, Gaza Reconstitution, Economic Acceleration, and Transformation। अमेरिकी प्लान के मुताबिक गाजा को टूरिस्ट डेस्टिनेशन में तब्दील करने का प्लान है। यहां Gaza Trump Riviera विकसित किया जाएगा। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस स्मार्ट सिटी बनाए जाएंगे। स्कूल, अस्पताल, इंडस्ट्री, ग्रीन स्पेस जैसी व्यवस्था रहेगी। यहां बड़े पैमाने पर अपार्टमेंट्स बनाने की तैयारी है, जिनके फ्लैट गाजा के उन लोगों को दिए जाएंगे, जिन्हें बाहर भेजा जाएगा। वे अपनी जमीन के बदले मिले डिजिटल टोकन का इस्तेमाल करते हुए फ्लैट हासिल कर सकेंगे। अब तक इस मामले पर अमेरिकी विदेश मंत्रालय की ओर से कोई स्पष्ट बात नहीं कही गई है। अखबार ने लिखा है कि गाजा को लेकर बने इस प्लान में अमेरिकी फंड की जरूरत नहीं होगी बल्कि इससे लाभ ही होगा। इस प्रोजेक्ट के तहत दुनिया भर से निवेश को आमंत्रित किया जाएगा। यहां इलेक्ट्रिक वीकल प्लांट्स से लेकर डेटा सेंटर्स तक तैयार किए जाएंगे। इसके अलावा हाईराइज इमारतों की भरमार होगी। इस प्रोजेक्ट में कुल 100 अरब डॉलर के शुरुआती निवेश की तैयारी है। इसके बाद यह प्रोजेक्ट खुद ही फंड जनरेट करेगा।