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पब्लिक में इंटिमेसी पर सख्त कानून: इंडोनेशिया में 76 कोड़े की सजा

बांदा आचे इंडोनेशिया के बांदा आचे प्रांत में दो मर्दों को सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे को चूमने के लिए कोड़े मारे गए। शरिया अदालत ने उन्हें इस्लामी कानून का उल्लंघन करने का दोषी ठहराया था। मंगलवार को बांदा आचे के बुस्तानुस्सलातिन शहर के एक पार्क में मंच पर लगभग 100 लोगों की भीड़ ने यह सजा देखी। समलैंगिक यौन संबंध बनाने वालों को यहां 100 कोड़े की सजा दी जाती है। आचे में जुआ खेलने, शराब पीने, तंग कपड़े पहनने वाली महिलाओं और शुक्रवार की नमाज में शामिल न होने वाले पुरुषों को भी कोड़े मारे जाते हैं। दोनों को 80-80 कोड़े की सजा अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, दोनों व्यक्तियों को 80-80 कोड़े की सजा सुनाई गई थी। इस्लामी धार्मिक पुलिस ने बताया कि उन्हें एक सार्वजनिक पार्क के शौचालय में गले मिलते और चूमते हुए पाया गया था। इस सार्वजनिक पिटाई में प्रत्येक व्यक्ति को एक छड़ी से 76 कोड़े मारे गए। दोनों की 80 कोड़ों की सजा को कम किया गया, क्योंकि वे चार महीने तक हिरासत में थे। यह सजा प्रांतीय राजधानी बांदा आचे के एक पार्क में दी गई, जहां भीड़ ने बेंतों की सजा देखी। बताया जाता है कि ये दोनों 10 लोगों के उस समूह का हिस्सा थे, जिन्हें मंगलवार को बांदा आचे के एक पार्क में विभिन्न अपराधों के लिए कोड़े मारे गए। दोनों को भीड़ के सामने अलग-अलग छड़ी से पीटा गया। बांदा आचे शरिया पुलिस के कानून प्रवर्तन प्रमुख रोसलीना ए जलील ने बताया कि अप्रैल में स्थानीय शरिया पुलिस ने दोनों को उसी पार्क के सार्वजनिक शौचालय में एक साथ पाया था। रोसलीना ने कहा कि एक आम नागरिक ने संदिग्ध गतिविधि देखी और इसकी सूचना पुलिस को दी थी। अन्य लोगों को भी सजा इन दोनों के अलावा  तीन महिलाओं और पांच पुरुषों को विवाहेतर यौन संबंध, विपरीत लिंग के लोगों के साथ निकटता और ऑनलाइन जुआ खेलने के लिए दोषी ठहराकर कोड़े मारे गए। गौरतलब है कि शराब पीने जैसे अपराधों के लिए बेंत मारने की सजा को आचे में जनता का मजबूत समर्थन प्राप्त है। एमनेस्टी इंटरनेशनल की निंदा दूसरी ओर एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इस सजा की निंदा की। एमनेस्टी के क्षेत्रीय अनुसंधान निदेशक मोंटसे फेरर ने कहा कि समान लिंगीय आचरण को अपराध घोषित करना न्यायपूर्ण और मानवीय समाज में स्वीकार्य नहीं है। गौरतलब है कि 2001 में विशेष स्वायत्तता मिलने के बाद इस क्षेत्र ने धार्मिक कानून लागू करना शुरू किया। जकार्ता ने लंबे समय से चले आ रहे अलगाववादी विद्रोह को दबाने की कोशिश की थी।

पीएम मोदी पर ट्रंप की तारीफ, चीन यात्रा से पहले बोले- शानदार इंसान हैं मोदी

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया कि उन्होंने मई में भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य टकराव के दौरान शांति स्थापित करने में मदद की थी. उन्होंने कहा कि उनके दखल से ही दोनों देश युद्ध के कगार से पीछे हटने को मजबूर हुए. समाचार एजेंसी एएनआई की तरफ जारी वीडियो में डोनाल्ड ट्रंप व्हाइट हाउस में रक्षा मंत्री पीट हेक्सेथ के साथ बैठे दिख रहे हैं. इसी दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘शानदार व्यक्ति’ बताते हुए कहा कि उन्होंने उन्हें फोन कर साफ शब्दों में कहा था कि अगर हालात नहीं सुधरे तो अमेरिका भारत पर ट्रेड बैन और भारी टैरिफ लगाएगा. ट्रंप ने क्या किया दावा? डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा, ‘मैं एक बेहद शानदार व्यक्ति से बात रहा था… भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. मैंने पूछा कि आपका पाकिस्तान के साथ क्या चल रहा है? नफरत बहुत ज्यादा थी, यह बहुत लंबे समय से चल रहा रहा. सैकड़ों साल से अलग-अलग नामों के साथ यह जारी है.’ ट्रंप के मुताबिक उन्होंने कहा, ‘मैंने उनसे कहा मैं आपके साथ कोई ट्रेड डील नहीं करूंगा. आप लोग परमाणु युद्ध में उलझ जाओगे. मैंने कहा, कल मुझे फिर फ़ोन करना. लेकिन मैं आपके साथ कोई डील नहीं करूंगा या इतना ज्यादा टैरिफ लगाऊंगा कि आपका सिर चकरा जाएगा.’ अमेरिका राष्ट्रपति के अनुसार, उनकी बातचीत के ‘पांच घंटे के भीतर’ ही भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव कम हुआ और युद्ध जैसी स्थिति टल गई. इससे पहले उन्होंने दावा किया था कि उस दौरान ‘सात विमान गिराए गए थे’. हालांकि पिछले महीने उन्होंने ‘पांच विमान’ गिराए जाने की बात कही थी. ट्रंप ने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि विमान किस देश के थे. ट्रंप के दावों पर क्या कह रहा भारत? भारत लगातार ट्रंप के इन दावों को खारिज करता आया है. नई दिल्ली का कहना है कि 10 मई को हुई संघर्षविराम घोषणा पूरी तरह द्विपक्षीय थी और पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों ने भारत से संपर्क कर हालात सामान्य करने का आग्रह किया था. भारत ने साफ किया कि इसमें किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं थी. ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ने भारत पर नई टैरिफ पाबंदियां लागू की हैं. 27 अगस्त से लागू इन टैरिफ के बाद भारतीय उत्पादों पर कुल कर बोझ लगभग 50% तक पहुंच जाएगा. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या ट्रंप का मोदी को ‘शानदार व्यक्ति’ कहना एक तरह से व्यापारिक दबाव को संतुलित करने की रणनीति है. पीएम मोदी के चीन दौरे से पहले बयान के क्या मायने? दिलचस्प यह है कि डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान ऐसे वक्त पर आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने अहम चीन दौरे की तैयारी में हैं. कूटनीतिक हलकों में यह माना जा रहा है कि ट्रंप के बयान के पीछे कई संदेश छिपे हैं. ट्रंप जानते हैं कि चीन यात्रा से पहले पीएम मोदी की अंतरराष्ट्रीय छवि को प्रभावित करना एशिया में शक्ति समीकरणों के लिहाज से अहम हो सकता है. डोनाल्ड ट्रंप का ‘मोदी शानदार व्यक्ति हैं’ वाला बयान महज व्यक्तिगत तारीफ नहीं, बल्कि इसमें भू-राजनीति, व्यापारिक दबाव और घरेलू अमेरिकी राजनीति तीनों की झलक मिलती है. अब देखना यह होगा कि पीएम मोदी के चीन दौरे से पहले आए इस बयान के बाद आगे क्या होता है.

जम्मू-कटरा रूट पर बड़ा हादसा, भूस्खलन में 31 की जान गई, 22 ट्रेनें रद्द

कटरा जम्मू-कश्मीर में लगातार हो रही भारी बारिश की वजह से हालात बिगड़े हैं. कटरा स्थित माता वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर बुधवार को हुए बड़े भूस्खलन में कम से कम 31 लोगों की मौत हो गई और 23 लोग घायल हुए हैं. कई जगहों पर भूस्खलन के बाद मलबा जमा होने और पत्थर गिरने से जम्मू-कटरा राजमार्ग बंद हो गया है. भारी बारिश के कारण नॉर्दर्न रेलवे ने बुधवार को 22 ट्रेनें रद्द कर दीं और 27 ट्रेनों को शॉर्ट-टर्मिनेट किया. इनमें वैष्णो देवी बेस कैंप से चलने वाली 9 ट्रेनें भी शामिल हैं. बीते दिन त्रिकूट पहाड़ी पर स्थित मंदिर के मार्ग का बड़ा हिस्सा मलबे में तब्दील हो गया था. बचाव अभियान जारी है और आशंका है कि मलबे के नीचे और लोग फंसे हो सकते हैं. लगातार बारिश ने जम्मू-कश्मीर में बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति पैदा कर दी है. जम्मू में पुल ढह गए, बिजली लाइनों और मोबाइल टावरों को भारी नुकसान पहुंचा. मंगलवार को सुबह 11.30 बजे से शाम 5.30 बजे के बीच जम्मू में 6 घंटे में 22 सेंटीमीटर बारिश हुई. हालांकि आधी रात के बाद बारिश में कमी आई, जिससे जिले को थोड़ी राहत मिली. इस बीच, मंगलवार तक लगातार बारिश के कारण आई बाढ़ और जलभराव से 3,500 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया. राहत कार्य जिला प्रशासन, जेके पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, भारतीय सेना और स्थानीय वॉलंटियर्स की संयुक्त टीमों द्वारा चलाया जा रहा है. प्रभावित लोगों को अस्थायी शेल्टर्स में खाना, साफ पानी और मेडिकल सहायता दी जा रही है. वैष्णो देवी धाम के रास्ते पर भूस्खलन की घटना में जान गंवाने वालों में 9 लोगों की पहचान नहीं हो पाई है हालांकि, केंद्रशासित प्रदेश के कई हिस्सों में टेलीकॉम ब्लैकआउट हो गया है, जिससे लाखों लोग संपर्क से बाहर हैं. प्रशासन का ध्यान हाई-रिस्क इलाकों से लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर ले जाने पर है. जम्मू और आसपास के इलाकों में आंधी-तूफान और बारिश वर्तमान में जम्मू और आसपास के इलाकों में तेज आंधी-तूफान और भारी बारिश हो रही है. सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र हैं – जम्मू शहर, आरएसपुरा, सांबा, अखनूर, नगरोता, कोट भलवाल, बिश्नाह, विजयपुर, पुरमंडल, कठुआ और ऊधमपुर. वहीं रियासी, रामबन, डोडा, बिलावर, कटरा, रामनगर, हीरानगर, गूल और बनिहाल में हल्की बारिश हो रही है. जम्मू-कश्मीर के कई जिलों में रेड अलर्ट जारी किया गया है मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बादल 12 किलोमीटर ऊंचाई तक पहुंच रहे हैं, जो बेहद सक्रिय तूफानों का संकेत है. सिस्टम ईस्ट-नॉर्थईस्ट की ओर बढ़ रहा है और पहाड़ी और मैदानी इलाकों में बारिश जारी रह सकती है. 22 ट्रेनें रद्द और 27 ट्रेनों को किया गया शॉर्ट-टर्मिनेट भारी बारिश के कारण नॉर्दर्न रेलवे ने बुधवार को 22 ट्रेनें रद्द कर दीं और 27 ट्रेनों को शॉर्ट-टर्मिनेट किया. कटरा, जम्मू और ऊधमपुर से चलने वाली कई सर्विस प्रभावित हुई हैं, जिनमें वैष्णो देवी बेस कैंप से चलने वाली 9 ट्रेनें भी शामिल हैं. चक्की नदी में बाढ़ आने से पठानकोट–कंदरोरी (हिमाचल प्रदेश) के बीच रेल यातायात भी रोका गया है. हालांकि, कटरा–श्रीनगर मार्ग प्रभावित नहीं है.

ट्रम्प के भारी टैरिफ का भारत पर असर, भारत के उद्योगों पर दबाव; पीएम मोदी ने लिया रणनीतिक फैसला

नई दिल्ली  अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले सामान पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने की योजना का ऐलान कर दिया है। यह वही टैरिफ है जिसकी घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले कर चुके हैं।अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने एक ड्राफ्ट नोटिस जारी कर इसकी रूपरेखा पेश की। यह कदम तब उठाया जा रहा है, जब रूस और यूक्रेन के बीच शांति समझौते की कोशिशें ठप पड़ती नजर आ रही हैं। नोटिस में साफ कहा गया है कि यह बढ़ा हुआ टैरिफ भारत के उन उत्पादों पर लागू होगा, जो 27 अगस्त, 2025 को सुबह 12:01 बजे (पूर्वी डेलाइट समय) के बाद खपत के लिए आयात किए जाएंगे या गोदाम से निकाले जाएंगे।ट्रंप ने इस महीने की शुरुआत में भारत के सामान पर टैरिफ को 25 फीसदी से बढ़ाकर 50 फीसदी करने की घोषणा की थी, जो रूस से तेल खरीदने के कारण लगाया जा रहा है। अमेरिका की यह समयसीमा 27 अगस्त को खत्म हो रही है। पीएम मोदी ने चल दी गजब की चाल,  ट्रंप के टैरिफ की नहीं गलेगी दाल अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाने के लिए आधिकारिक नोटिस जारी कर दिया है। भारत पर पहले से ही 25% टैरिफ लगाया गया है और 27 अगस्त से अतिरिक्त टैरिफ लागू हो जाएगा। इस तरह भारत से आने वाले सामान पर कुल 50% टैरिफ लगेगा। इससे भारतीय निर्यातकों के लिए दूसरे देशों से प्रतिस्पर्द्धा करना मुश्किल होगा। लेकिन ट्रंप के टैरिफ के असर को कम से कम करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कमर कस ली है। मोदी ने 15 अगस्त को दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले से एक बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि सरकार जीएसटी सुधारों की दिशा में आगे बढ़ रही है। जीएसटी में अभी चार स्लैब हैं जिनमें से दो स्लैब खत्म करने का प्लान है। इससे खासकर खाने-पीने की चीजें काफी सस्ती हो जाएंगी और ग्राहकों को फायदा होगा। प्रधानमंत्री की इस घोषणा से कई सरकारी अधिकारी भी हैरान थे। पिछले एक साल से सरकारी अफसर जीएसटी में बदलाव करने की बात कर रहे थे। लेकिन अभी तक कोई फैसला नहीं हुआ था। पुतिन पर दवाब बनाने के लिए ट्रंप का प्लान अमेरिका का मकसद इस टैरिफ के जरिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर दबाव बनाना है, ताकि वह यूक्रेन के खिलाफ चल रही जंग को खत्म करने के लिए बातचीत की मेज पर आएं। अमेरिका रूस के तेल व्यापार को रोकने की कोशिश में है और भारत पर यह टैरिफ उसी रणनीति का हिस्सा है। लेकिन भारत ने इन तथाकथित सेकेंडरी टैरिफ को अन्यायपूर्ण ठहराया है और अपने हितों की मजबूती से हिफाजत करने का ऐलान किया है। भारतीय सरकार ने साफ कर दिया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता नहीं करेगी। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को भारत के ऊर्जा विकल्पों का पुरजोर बचाव किया। उन्होंने कहा कि भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए निशाना बनाया जा रहा है, जबकि चीन और यूरोपीय देशों जैसे बड़े आयातकों पर ऐसी कोई आलोचना नहीं की गई। जयशंकर ने इसे "तेल विवाद" के रूप में गलत तरीके से पेश करने की बात कही और भारत की रणनीतिक स्वायत्तता पर जोर दिया। मांग बढ़ाने की जुगत ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली के एक अधिकारी ने बताया कि इस बारे में बातचीत चल रही थी पर घोषणा करने में कुछ महीने और लगते। लेकिन अमेरिकी टैरिफ के कारण मोदी सरकार जीएसटी में बदलाव जैसी नीतियों को जल्दी से लागू कर रही है। इससे अर्थव्यवस्था में भरोसा बढ़ेगा और ग्रोथ में तेजी आएगी। कई साल से ट्रेडर्स और अर्थशास्त्री कह रहे थे कि कुछ सुधारों की वजह से निवेश रुका हुआ है। मोदी ने नीतियों में बदलाव करने के लिए दो बड़ी कमेटियां बनाई हैं। एक कमेटी की अगुवाई कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन कर रहे हैं। यह कमेटी राज्यों में नियमों को आसान बनाने पर ध्यान देगी। दूसरी कमेटी के प्रमुख राजीव गाबा हैं जो नीति आयोग के सदस्य हैं। यह कमेटी अगली पीढ़ी के सुधारों के लिए सुझाव देगी। हाल ही में मोदी ने अपनी आर्थिक सलाहकार परिषद के साथ बैठक की। इसमें अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए सुझाव लिए गए। बैठक में कई अर्थशास्त्रियों ने कहा कि मार्च 2026 तक 6.5% विकास दर हासिल की जा सकती है। कम महंगाई और ब्याज दरों में कटौती से अर्थव्यवस्था को मदद मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि अर्थव्यवस्था में मांग बढ़ाने के लिए नीति में बदलाव जरूरी हैं। अमेरिका को एक्सपोर्ट भारत की इकॉनमी अभी स्थिर है। इसलिए, सरकार के पास मुश्किल सुधार करने का मौका है। महंगाई 8 साल के सबसे निचले स्तर पर है। स्टैंडर्ड एंड पुअर्स ने 18 साल में पहली बार भारत की क्रेडिट रेटिंग बढ़ाई है। मोदी की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल ने कहा कि अर्थव्यवस्था के सभी आंकड़े अच्छे हैं। इससे सुधारों को तेजी से आगे बढ़ाने का मौका मिलता है, ताकि हम विकास की अगली सीढ़ी पर चढ़ सकें। नोमुरा होल्डिंग्स लिमिटेड की सोनल वर्मा ने कई सुधारों की बात की। उन्होंने कहा कि विदेशी निवेशकों के लिए नियमों को आसान बनाना, श्रम और भूमि कानूनों में ढील देना जरूरी है। सरकार निर्यातकों को आर्थिक मदद देने पर भी विचार कर रही है। इससे उन्हें टैक्स से होने वाले नुकसान से बचाया जा सकेगा। कपड़ा, गहने और जूते जैसे उद्योगों को सबसे ज्यादा नुकसान होने की आशंका है। भारत की इकॉनमी ज्यादातर घरेलू मांग पर चलती है, न कि निर्यात पर। इसलिए लोगों और व्यापारियों का भरोसा बढ़ाना जरूरी है, ताकि विकास तेजी से हो। निजी खपत भारत की जीडीपी का लगभग 60% है। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट है। साल 2024 में भारत से अमेरिका को 87.4 अरब डॉलर का सामान भेजा गया था जो भारत की कुल जीडीपी का सिर्फ 2% है। कितनी बढ़ेगी इकॉनमी सरकार को उम्मीद है कि जीएसटी में कटौती से लोग ज्यादा खर्च करेंगे। खासकर खाने-पीने और कपड़ों जैसी जरूरी चीजों पर ज्यादा खर्च होगा। अभी इन चीजों पर 12% टैक्स लगता है। माना जा रहा है कि अधिकांश चीजों को 5% वाले स्लैब में लाया जाएगा। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक … Read more

सेना अधिकारी पर कार्रवाई, स्पाइसजेट कर्मचारियों पर हमले के बाद नो-फ्लाई लिस्ट में डाला गया

नई दिल्ली श्रीनगर हवाई अड्डे पर 26 जुलाई को स्पाइसजेट कर्मचारियों पर हमला करने के आरोपी एक वरिष्ठ भारतीय सेना अधिकारी को एयरलाइन ने पांच साल के लिए अपनी 'नो-फ्लाई' सूची में डाल दिया है। इस घटना से जुड़े दो अधिकारियों ने यह जानकारी दी। एक अधिकारी ने बताया, "एयरलाइन कर्मचारियों पर हमला करने वाले यात्री को अशांत घोषित किया गया है और उसे स्पाइसजेट की नो-फ्लाई सूची में शामिल करने का फैसला लिया गया है। वह अगले पांच साल तक स्पाइसजेट की किसी भी घरेलू या अंतरराष्ट्रीय उड़ान में यात्रा नहीं कर पाएंगे।" दूसरे अधिकारी ने बताया कि यह निर्णय नागरिक उड्डयन नियमों (सीएआर) के तहत गठित समिति ने लिया, जिसने यात्री पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की थी। कश्मीर में तैनात लेफ्टिनेंट कर्नल रैंक के इस अधिकारी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 115 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। स्पाइसजेट ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय को लिखे अपने पत्र में इस घटना को "हत्यारा हमला" करार दिया था। क्या है पूरा मामला? यह घटना 26 जुलाई को श्रीनगर से दिल्ली जाने वाली स्पाइसजेट की उड़ान एसजी 386 के बोर्डिंग गेट पर हुई। विवाद तब शुरू हुआ जब बोर्डिंग के दौरान अतिरिक्त सामान शुल्क के भुगतान को लेकर असहमति हुई। एयरलाइन के अनुसार, अधिकारी के पास दो केबिन बैग थे, जिनका कुल वजन 16 किलोग्राम था, जो कि अनुमति सीमा 7 किलोग्राम से दोगुना था। एयरलाइन ने बताया कि यात्री ने नियमों का पालन करने से इनकार कर दिया और बिना बोर्डिंग प्रक्रिया पूरी किए जबरन एयरोब्रिज में प्रवेश कर गया, जो कि विमानन सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन था। इसके बाद, एक सीआईएसएफ अधिकारी ने उसे वापस गेट पर लाया। एयरलाइन के बयान के अनुसार, "गेट पर, यात्री तेजी से आक्रामक हो गया और उसने स्पाइसजेट के चार ग्राउंड स्टाफ सदस्यों पर शारीरिक हमला किया।" इस हमले में कर्मचारियों को रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर और जबड़े की चोटें आईं। 3 अगस्त को इस घटना का एक वीडियो वायरल हो गया, जिसमें अधिकारी को कतार स्टैंड से कर्मचारियों पर हमला करते देखा गया। नागरिक उड्डयन नियम विमानन नियमों के अनुसार, अशांत व्यवहार करने वाले यात्रियों पर तीन महीने, छह महीने या गंभीर मामलों में न्यूनतम दो साल या उससे अधिक समय के लिए नो-फ्लाई प्रतिबंध लगाया जा सकता है। नियमों के तहत, प्रभावित यात्री 60 दिनों के भीतर एक अपीलीय समिति के समक्ष अपील कर सकते हैं, जिसमें एक सेवानिवृत्त जिला या सत्र न्यायाधीश, दूसरी एयरलाइन का प्रतिनिधि और एक यात्री या उपभोक्ता वकालत समूह का सदस्य शामिल होता है। समिति को 30 दिनों के भीतर मामले का फैसला करना होता है, और उसका निर्णय एयरलाइन पर बाध्यकारी होता है। नो-फ्लाई सूची के आंकड़े 5 अगस्त को राज्यसभा में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में भारत ने 379 यात्रियों को नो-फ्लाई सूची में डाला है, जिसमें इस साल 30 जुलाई तक 48 लोग शामिल किए गए। 2020 में केवल 10 लोग इस सूची में थे, जबकि 2021 में 66, 2022 में 63, और 2023 में 110 लोग इस सूची में शामिल किए गए, जो अब तक का सबसे अधिक आंकड़ा है। 2024 में यह संख्या घटकर 82 रही। स्पाइसजेट की ओर से इस मामले पर अभी कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है।  

बाढ़ से पहले भारत ने किया शानदार बचाव, पाकिस्तान में अलर्ट जारी

लाहौर  भारत ने एक बार फिर मानवीयता का परिचय देते हुए पड़ोसी देश पाकिस्तान को बाढ़ के खतरे से आगाह किया, जिसके बाद पाकिस्तानी प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए लगभग डेढ़ लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। यह कदम जम्मू-कश्मीर में तवी नदी में संभावित बाढ़ की चेतावनी के बाद उठाया गया, जिसका असर सीमा पार पाकिस्तान में भी हो सकता है। भारत की इस पहल को दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण रिश्तों के बावजूद मानवीयता का एक बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। भारत ने दी समय पर चेतावनी भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग के माध्यम से पाकिस्तान को सूचित किया कि जम्मू में तवी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिसके कारण बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। यह चेतावनी ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच पहली आधिकारिक बातचीत के रूप में सामने आई है। बता दें कि पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया था। इसके बावजूद, भारत ने मानवीय आधार पर यह कदम उठाया। बता दें कि भारत ने पाकिस्तान को यह अलर्ट केवल मानवीय आधार पर दिया है और इसका सिंधु जल संधि से कोई लेना-देना नहीं है। पाकिस्तान में बाढ़ का अलर्ट भारत की चेतावनी के बाद पाकिस्तान के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने तत्काल प्रभाव से बाढ़ का अलर्ट जारी किया। पाकिस्तान का पंजाब प्रांत पहले से ही मूसलाधार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर से प्रभावित है। वहां राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए गए हैं। पंजाब आपातकालीन बचाव सेवा 1122 के प्रवक्ता फारूक अहमद ने बताया कि कसूर, ओकारा, पाकपट्टन, बहावलनगर और वेहारी जैसे जिलों में सिंधु, चिनाब, रावी, सतलुज और झेलम नदियों के किनारे बसे गांवों से पिछले 24 घंटों में करीब 20,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया। उन्होंने कहा कि भारत द्वारा जारी बाढ़ की चेतावनी के मद्देनजर ये कदम उठाए गए हैं। पाकिस्तानी प्रशासन ने निचले इलाकों में राहत शिविर स्थापित किए हैं और बचाव अभियान के लिए मशीनरी के साथ टीमें तैनात की हैं। एनडीएमए ने अगले 48 घंटों में और भारी बारिश की चेतावनी भी जारी की है, जिसके चलते इस्लामाबाद, रावलपिंडी, लाहौर और गुजरांवाला जैसे शहरों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है। डेढ़ लाख लोगों को सुरक्षित निकाला पाकिस्तान में इस साल जून से शुरू हुए मॉनसूनी मौसम ने भारी तबाही मचाई है। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (OCHA) के अनुसार, हाल के दिनों में बाढ़ और भारी बारिश के कारण लगभग 500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 190 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। इसके अलावा, आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की टीमों ने 512 अभियानों में 25,644 लोगों को सुरक्षित निकाला है। हालांकि, कुछ अनुमानों के अनुसार, अब तक डेढ़ लाख से अधिक लोगों को बाढ़ प्रभावित इलाकों से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और पंजाब प्रांतों में स्थिति विशेष रूप से गंभीर है। बच्चों की स्थिति भी चिंताजनक है, क्योंकि विस्थापन, शिक्षा में बाधा और स्वच्छ जल की कमी उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रही है। यूनिसेफ के अनुसार, 15 अगस्त के बाद खैबर पख्तूनख्वा में 21 बच्चे मारे गए हैं।

ममता बनर्जी ने कहा, PM को मेरी कुर्सी का सम्मान वैसा ही रखना चाहिए

कोलकाता  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर ताजा हमला बोलते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को कहा कि उन्हें उनसे (मोदी से) कभी यह उम्मीद नहीं थी कि वे उनकी कुर्सी का अनादर करने के साथ-साथ राज्य के लोगों को ‘चोर’ बताकर पूरे प्रांत का अपमान करेंगे। उन्होंने यह बयान पीएम मोदी की हालिया टिप्पणियों के संदर्भ में दिया। पूर्व बर्धमान जिले के बर्धमान शहर में लोगों के बीच सामाजिक कल्याण योजनाओं का लाभ वितरित करने के लिए आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम में बनर्जी ने मोदी की टिप्पणी को पश्चिम बंगाल के लोगों का ‘अपमान’ बताया और केंद्रीय धन के आवंटन पर रोक लगाने के लिए उनकी कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे राज्य के खजाने पर ‘भारी बोझ’ पड़ा है। मुख्यमंत्री ने कहा, 'प्रधानमंत्री को मेरी कुर्सी का उतना ही सम्मान करना चाहिए जितना मैं उनकी कुर्सी का करती हूं। मुझे कभी उम्मीद नहीं थी कि वे पश्चिम बंगाल के लोगों को ‘चोर' कहेंगे।' बनर्जी ने दावा किया, 'सच तो यह है कि उन्होंने उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार की तथाकथित ‘डबल इंजन’ वाली भाजपा सरकारों के कामकाज पर आंखें मूंद ली हैं, जहां भ्रष्टाचार अपने चरम पर है।' बनर्जी ने आरोप लगाया कि हर बार जब चुनाव आता है तो मोदी प्रवासी पक्षी की तरह पश्चिम बंगाल आते हैं। बनर्जी ने दावा किया कि राज्य प्रशासन ने कल्याणकारी योजनाओं के लिए केंद्रीय धन के उपयोग के बारे में केंद्र सरकार के सभी प्रश्नों का संतोषजनक उत्तर दे दिया है। बनर्जी ने कहा, 'हमने आपके सभी प्रश्नों के उत्तर दे दिए हैं, फिर भी आप धन का वितरण रोक रहे हैं और पश्चिम बंगाल को ‘चोर’ कह रहे हैं। उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए पश्चिम बंगाल में 186 केंद्रीय टीमें भेजीं और उन्हें कुछ नहीं मिला। एक छात्र सभी प्रश्नों के उत्तर देने के बाद शून्य अंक प्राप्त करना कैसे स्वीकार कर सकता है? हम इस अपमान को बर्दाश्त नहीं करेंगे।' कोलकाता में 22 अगस्त को एक जनसभा में मोदी ने कहा था कि ‘भ्रष्टाचार, अपराध और तृणमूल कांग्रेस एक-दूसरे के पर्याय हैं।’ उन्होंने आरोप लगाया था, 'केंद्र द्वारा पश्चिम बंगाल सरकार को भेजा जाने वाला धन लोगों तक नहीं पहुंचता, बल्कि तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता उसे खा जाते हैं।'  

यात्रा में हादसा: वैष्णो देवी मार्ग पर भूस्खलन से 5 लोगों की जान गई

जम्मू-श्रीनगर माता वैष्णो देवी यात्रा मार्ग में बड़ा हादसा हो गया है। खबर है कि भूस्खलन के चलते 5 लोगों की मौत हो गई है। वहीं, 14 लोग घायल बताए जा रहे हैं। जम्मू और कश्मीर में भारी बारिश का दौर जारी है। हाल ही में भारी बारिश के चलते यात्रा को अगले आदेश तक रोक दिया गया था। साथ ही भारत मौसम विज्ञान विभाग ने भी रेड अलर्ट जारी किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अर्द्धकुंवारी स्थित इंद्रप्रस्थ भोजनालय के पास बचावकार्य जारी है। घटना दोपहर 3 बजे घटी। खास बात है कि यात्रा को सुबह ही रोक दिया गया था, लेकिन पुराने मार्ग पर दोपहर 1 बजकर 30 मिनट तक यह जारी थी। हालांकि, बाद में इसपर भी खराब मौसम के चलते अस्थाई रूप से रोक लगा दी गई थी। जम्मू में बीते तीन दिनों से लगातार बारिश जारी है। अधिकारियों ने बताया कि पहाड़ी पर स्थित मंदिर तक जाने वाले 12 किलोमीटर के घुमावदार रास्ते के लगभग आधे रास्ते पर यह घटना हुई। गंभीर हैं जम्मू में हालात मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को कहा कि भारी बारिश के बाद जम्मू के विभिन्न हिस्सों में स्थिति काफी गंभीर है और उन्होंने प्रशासन को हाई अलर्ट बनाए रखने का निर्देश दिया। जम्मू में भारी बारिश के कारण तीन लोगों की मौत हो गई तथा दो दर्जन से अधिक मकान और पुल क्षतिग्रस्त हो गए। जम्मू में लगभग सभी जलाशय खतरे के निशान से ऊपर बह रहे हैं, जिससे शहर और अन्य स्थानों पर कई निचले इलाके और सड़कें जलमग्न हो गई हैं। अधिकारियों ने बताया कि जम्मू-श्रीनगर और किश्तवाड़-डोडा राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात स्थगित कर दिया गया है, जबकि दर्जनों पहाड़ी सड़कें भूस्खलन या अचानक आई बाढ़ के कारण अवरुद्ध हो गई हैं या क्षतिग्रस्त हो गई हैं।  

टैरिफ मुद्दे पर डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार कॉल किया, PM मोदी ने फोन रिसीव नहीं किया

नई दिल्ली भारत और अमेरिका के रिश्ते क्या बीते कुछ दशकों में सबसे निचले स्तर पर हैं? ऐसे कयास तेज हैं क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के ट्रेड टैरिफ का भारत ने भी सख्ती से जवाब दिया है। खबर है कि इस मामले पर बात करने के लिए डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम नरेंद्र मोदी को 4 बार कॉल किया, लेकिन उन्होंने रिसीव ही नहीं किया। माना जा रहा है कि भारत सरकार अब इस मामले में अमेरिका के दबाव में आने की बजाय सख्ती से ही जवाब देने की नीति पर विचार कर रही है। इसी पॉलिसी के तहत भारत ने चीन, रूस और ब्राजील जैसे देशों के साथ मिलकर एक नया गठजोड़ खड़ा करने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। शायद इसी नीति के तहत अब मोदी सरकार नहीं चाहती कि डोनाल्ड ट्रंप को ज्यादा महत्व दिया जाए। जर्मन अखबार Frankfurter Allgemeine Zeitung ने अपनी एक विस्तृत रिपोर्ट में ऐसा दावा किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसा लगता है कि डोनाल्ड ट्रंप के रुख से परेशान भारत सरकार अब उनसे कोई आसान डील नहीं करना चाहती। अखबार के लिए हेंड्रिक अंकेनब्रांड, विनांड वॉन पीटर्सडॉर्फ, गुस्ताव थाइले ने लिखे अपने आर्टिकल में कहा कि यह भारत सरकार की बदली हुई नीति का प्रतीक है कि उसने उस चीन के साथ भी रिश्ते बेहतर करने शुरू किए हैं, जिससे 2020 में लद्दाख में सैन्य झड़प हुई थी और 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे। अखबार में लिखा गया है, 'अब दोनों देशों के बीच संबंधों को परिभाषित करना मुश्किल है। फरवरी में ही अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने मोदी को वाइट हाउस बुलाया था और उन्हें 'महान नेता' कहकर उनकी सराहना की थी। लेकिन जब फोटो खिंचवाने का वक्त आया तो मोदी मुस्कुराए नहीं। ट्रंप ने इस दौरान पीएम मोदी के साथ अपने रिश्तों की भी बात की, लेकिन मोदी ने इसे सिर्फ रणनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण यात्रा करार दिया था। यह दर्शाता है कि भारतीय नेतृत्व अमेरिकी इरादों को लेकर सतर्क रहता है।' यही नहीं अखबार का कहना है कि ट्रंप ने अमेरिका के लिए कृषि बाजारों को खोलने की मांग की, लेकिन मोदी ने इनकार कर दिया। इसके बजाय भारत ने रूस और ईरान से सस्ता तेल खरीदा। यहां तक कि भारत ने पश्चिमी प्रतिबंधों को भी नजरअंदाज कर दिया। अखबार लिखता है, ‘अमेरिका का मानना है कि चीन को अलग-थलग करने के लिए भारत को मजबूती से अपनी ओर खड़ा करना चाहिए। लेकिन भारत इससे सहमत नहीं है। भारत चाहता है कि अमेरिका के साथ दोस्ती पर बहुत भरोसा नहीं किया जा सकता। भारत का मानना है कि उसे चीन के साथ संबंध बिगाड़कर अमेरिका का मोहरा नहीं बनना चाहिए।’ गौरतलब है कि अमेरिका में होने वाले कुल निर्यात भारत की हिस्सेदारी 20 फीसदी के करीब है। खासकर कपड़े, गहने, दवाइयाँ और ऑटो पार्ट्स। लेकिन सीमा शुल्क की वजह से अब यह व्यापार घट सकता है। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि भारत की विकास दर 6.5 प्रतिशत के बजाय सिर्फ़ 5.5 प्रतिशत रह जाएगी। कहा जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप के अप्रत्याशित रुख को भारत सरकार ने अच्छे ढंग से नहीं लिया है। जून में ही एक सर्वे के अनुसार जर्मनी में 18% लोग ट्रंप पर भरोसा करते हैं, जबकि भारत में ट्रंप को सबसे कम भरोसेमंद राष्ट्रपति माना जाता है।  

भारी बारिश ने खैबर पख्तूनख्वा में मचाई तबाही, पाकिस्तान में हालात गंभीर

इस्लामाबाद  पाकिस्तान में मानसूनी बारिश कहर बरपा रही है। खैबर पख्तूनख्वा (केपी) प्रांत में पिछले तीन महीनों से भीषण बारिश का दौर जारी है और भारी बारिश व बाढ़ से अब तक 406 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, इससे 245 लोग घायल हुए हैं। प्रांतीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (पीडीएमए) के अनुसार, मृतकों में 167 महिलाएं और 108 बच्चे शामिल हैं। वहीं, घायलों में 121 पुरुष, 92 महिलाएं और 32 बच्चे हैं। ब्यूनर जिला सबसे अधिक प्रभावित हुआ है, जहां 237 लोगों की मौत हुई और 128 लोग घायल हुए। इसके अलावा, विभिन्न जिलों में भी भारी तबाही दर्ज की गई है, स्वाबी में 42, शांगला में 36, मानसेहरा में 25, बाजौर में 22 और स्वात में 20 लोगों की मौत हुई है। पीडीएमए की रिपोर्ट के मुताबिक, भारी बारिश और बाढ़ से केपी में 2,810 मकानों को नुकसान पहुंचा है, जिनमें 2,136 आंशिक और 674 पूरी तरह नष्ट हुए। केवल ब्यूनर जिले में ही 1,469 घर क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके अलावा, 324 शैक्षणिक संस्थान प्रभावित हुए हैं, जिनमें 18 स्कूल पूरी तरह और 306 आंशिक रूप से नष्ट हुए। साथ ही, बाढ़ और बारिश से 5,916 पशुओं की मौत भी हो गई। स्थानीय मीडिया के अनुसार, पूरे पाकिस्तान में 26 जून से अब तक 788 लोगों की मौत हो चुकी है और 1,000 से अधिक घायल हुए हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के आंकड़ों के अनुसार, मृतकों में 200 बच्चे, 117 महिलाएं और 471 पुरुष शामिल हैं। प्रांतवार आंकड़ों में, पंजाब में 165, खैबर पख्तूनख्वा में सर्वाधिक 469, सिंध में 51, बलूचिस्तान में 24, पाकिस्तान-आकृत गिलगित-बाल्टिस्तान में 45, पाकिस्तान-आकृत कश्मीर में 23 और इस्लामाबाद में आठ लोगों की मौत हुई है।