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गैस संकट से निपटने की तैयारी: भारत का ₹40 हजार करोड़ का मास्टर प्लान, LPG सप्लाई रहेगी जारी

नई दिल्ली  भारत में एक कहावत काफी प्रचलित है कि संकट में भविष्‍य का समाधान छिपा रहता है. जरूरत है तो बस उसे तलाशने की. ईरान जंग की वजह से एनर्जी कॉरिडोर के तौर पर विख्‍यात होर्मुज स्‍ट्रेट से तेल और गैस की सप्‍लाई बाधित होने के बाद भारत अब एक महाप्रोजेक्‍ट पर काम कर रहा है. तकरीबन 40000 करोड़ की इस परियोजना के सफल रहने पर आने वाले कई दशकों तक भारत में गैस की कमी नहीं होगी. बता दें कि पश्चिम एशिया में तनाव के चलते एशिया से लेकर यूरोप तक में एनर्जी सप्‍लाई चेन में गंभीर खलल पैदा हो गया है. इससे भारत भी प्रभावित हुआ है. नई दिल्‍ली एक एनर्जी डिपेंडेंट कंट्री है. तेल और गैस का अधिकांश हिस्‍सा खाड़ी के देशों से आयात किया जाता है. ऐसे में ईरान युद्ध की वजह से वेस्‍ट एशिया में मचे उथल-पुथल का असर भारत पर भी पड़ रहा है. इसके साथ ही ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों के साथ ही होर्मुज स्‍ट्रेट का भी विकल्‍प गंभीरता से ढूंढा जाने लगा है।  दरअसल, भारत सरकार खाड़ी क्षेत्र से निर्बाध गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ओमान से सीधे गहरे समुद्र के रास्ते गैस पाइपलाइन बिछाने की योजना को तेजी से आगे बढ़ा रही है. होर्मुज जलडमरूमध्य संकट के बाद ऊर्जा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए केंद्र सरकार इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर गंभीरता से काम कर रही है. अनुमानित 40 हजार करोड़ रुपये (करीब 4.7-4.8 अरब डॉलर) की लागत वाली इस परियोजना को मंजूरी मिलने पर इसे पूरा होने में पांच से सात वर्ष लग सकते हैं. पेट्रोलियम मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, सरकार जल्द ही सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (GAIL), इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (EIL) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) को डिटेल्‍ड रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दे सकती है. यह पहल नई दिल्ली स्थित निजी क्षेत्र के कंसोर्टियम ‘साउथ एशिया गैस एंटरप्राइज’ (SAGE) द्वारा प्रस्तुत प्री-फिजिबिलिटी अध्ययन के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।  भारत की प्‍लानिंग रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों का कहना है कि भारत अब LNG के स्पॉट बाजारों पर अत्यधिक निर्भरता से बाहर निकलना चाहता है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पश्चिम एशिया से सीधी पाइपलाइन भारत को स्थिर और अपेक्षाकृत सस्ती गैस उपलब्ध करा सकती है. साथ ही किसी ट्रांजिट देश या समुद्री मार्ग पर निर्भरता भी कम होगी. भारत में प्राकृतिक गैस की मांग लगातार बढ़ रही है. ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और एनर्जी-मिक्‍स में गैस की हिस्सेदारी बढ़ाने के प्रयासों के बीच वर्तमान खपत लगभग 190-195 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन (mmscmd) है, जो 2030 तक बढ़कर करीब 290-300 mmscmd तक पहुंचने का अनुमान है. इसी अवधि तक LNG आयात 180-200 mmscmd तक पहुंच सकता है।  ओमान से सीधे गुजरात प्रस्तावित ‘मिडिल ईस्ट-इंडिया डीप-वॉटर पाइपलाइन’ (MEIDP) करीब 2,000 किलोमीटर लंबी होगी और अरब सागर के नीचे से गुजरते हुए ओमान को सीधे गुजरात तट से जोड़ेगी. पाइपलाइन के जरिए प्रतिदिन लगभग 31 mmscmd प्राकृतिक गैस की आपूर्ति संभव होगी. प्रोजेक्‍ट रूट इस तरह तैयार किया जाएगा कि यह ओमान और UAE के रास्ते अरब सागर से होकर गुजरे तथा भू-राजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों से बचा जा सके. इस पाइपलाइन के माध्यम से भारत को ओमान, यूएई, सऊदी अरब, ईरान, तुर्कमेनिस्तान और कतर जैसे देशों के विशाल गैस भंडार तक पहुंच मिल सकेगी. इन देशों के पास संयुक्त रूप से लगभग 2,500 ट्रिलियन क्यूबिक फीट गैस भंडार मौजूद है।  3450 मीटर की गहराई में पाइप बिछाने की योजना बताया जा रहा है कि पाइपलाइन समुद्र की सतह से करीब 3,450 मीटर की गहराई तक बिछाई जा सकती है, जिससे यह दुनिया की सबसे गहरी समुद्री पाइपलाइन परियोजनाओं में शामिल हो सकती है. हालिया तकनीकी अध्ययनों में गहरे समुद्र में पाइप बिछाने और मरम्मत तकनीकों में प्रगति के कारण परियोजना को व्यवहारिक बताया गया है. SAGE ने सरकार को दी जानकारी में दावा किया है कि समुद्र तल की स्थिति का अध्ययन करने के लिए प्रस्तावित मार्ग पर लगभग 3,000 मीटर की परीक्षण पाइपलाइन भी बिछाई जा चुकी है।  होर्मुज स्‍ट्रेट का विकल्‍प दरअसल, इस परियोजना को आगे बढ़ाने के पीछे हालिया होर्मुज संकट एक बड़ा कारण माना जा रहा है. वर्ष 2025 में भारत के लगभग दो तिहाई एलएनजी आयात होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आए थे. फरवरी में ईरान द्वारा अमेरिका और इज़राइल के साथ तनाव के दौरान इस मार्ग को प्रभावी रूप से बंद करने के बाद वैश्विक एलएनजी आपूर्ति में 20 प्रतिशत से अधिक गिरावट आई थी, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला. एशियाई स्पॉट एलएनजी कीमतों का प्रमुख इंडेक्‍स प्लैट्स जेकेएम सामान्य परिस्थितियों में जहां 10-12 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू के आसपास था, वहीं भू-राजनीतिक संकट के दौरान यह बढ़कर 24-25 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू तक पहुंच गया. इस घटनाक्रम ने भारत की ऊर्जा आपूर्ति और मूल्य स्थिरता से जुड़ी कमजोरियों को उजागर कर दिया है। 

शुभेंदु सरकार का सख्त कदम, RG कर मामले में तीन IPS अफसरों पर गिरी गाज

 कोलकाता पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सूबे की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर कई तरह की बातें कही हैं. उन्होंने कहा कि बंगाल में कुल मिलाकर अराजकता का माहौल था और हमने अब सख्ती शुरू कर दी है. शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को नबन्ना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, "आरजी कर डॉक्टर रेप और मर्डर केस को ठीक से न संभालने के आरोप में तीन IPS अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है. कोलकाता पूर्व पुलिस कमिश्नर विनीत गोयल, पूर्व डिप्टी कमिश्नर ऑफ़ पुलिस (नॉर्थ) अभिषेक गुप्ता और डिप्टी कमिश्नर ऑफ़ पुलिस (सेंट्रल) इंदिरा मुखर्जी को सस्पेंड किया गया है।  CM शुभेंदु ने  में आगे आरोप लगाया कि ये अधिकारी पीड़ित परिवार को रिश्वत देने और बिना किसी लिखित आदेश के प्रेस कॉन्फ्रेंस करने में शामिल थे. इन तीनों IPS अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की जाएगी।  उन्होंने कहा, "हमें जानकारी मिली है कि कोलकाता की प्रेसिडेंसी जेल में स्मार्टफ़ोन का इस्तेमाल किया जा रहा था. हमने जांच शुरू की और पाया कि आरोप सही थे." उन्होंने बरामद किए गए मोबाइल फोन दिखाए गए, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति का पता चल सके।  'हम पता लगाएंगे…' सीएम शुभेंदु ने कहा कि मैंने आरजी कर घटना की जांच में कोलकाता पुलिस की भूमिका पर गृह विभाग से रिपोर्ट मांगी है. उस वक्त इस घटना को ठीक से नहीं संभाला गया था. पुलिस को जो भूमिका निभानी चाहिए थी, वह उसने नहीं निभाई।  "हम पता लगाएंगे कि क्या पुलिस अधिकारियों को राजनीतिक नेताओं के इशारे पर काम करना पड़ा था. एक पुलिस DC का रवैया और भाषा अनुचित थी।  बंगाल सरकार ने आरजी कर मामले से जुड़े तीन आईपीएस अधिकारियों को निलंबित कर दिया है. कोलकाता के पूर्व CP विनीत गोयल उनमें से एक हैं।  आरजी कर मामला क्या है? यह घटना 9 अगस्त, 2024 को हुई थी. कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में एक जूनियर डॉक्टर का शव अस्पताल की बिल्डिंग के अंदर एक सेमिनार हॉल में मिला था. कोलकाता पुलिस ने 33 साल के एक सिविक वॉलंटियर, संजय रॉय को, डॉक्टर के साथ रेप और उसकी हत्या करने के शक में गिरफ्तार किया था. बाद में इस मामले को सीबीआई को सौंप दिया गया।  इस घटना के बाद पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हुए और पीड़ित के लिए इंसाफ की मांग की गई. पीड़ित की मां ने हाल ही में हुए बंगाल चुनावों में पानीहाटी सीट से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।  विधानसभा चुनावों से पहले, आरजी कर की पीड़िता को इंसाफ दिलाना बीजेपी के मुख्य वादों में से एक था. 20 जनवरी, 2025 को एक ट्रायल कोर्ट ने संजय रॉय को इस मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सज़ा सुनाई. हालांकि, डॉक्टर के परिवार का आरोप है कि इस अपराध को अंजाम देने में वह अकेला नहीं था।  पिछले दिनों परिवार ने कोलकाता हाई कोर्ट को बताया कि उन्होंने कई ऐसे पहलुओं के बारे में जानकारी जुटाई है, जिनकी सीबीआई और राज्य पुलिस ने ठीक से जांच नहीं की है. उन्होंने कहा कि एक फॉरेंसिक एक्सपर्ट की राय के मुताबिक, घटना के वक्त वहां कई लोग मौजूद हो सकते हैं। 

‘कुछ मीडिया में गए, कुछ RTI एक्टिविस्ट बने’— CJI के बयान से छिड़ी नई बहस

नई दिल्ली भारत के मुख्य न्यायाधीश यानी CJI सूर्यकांत ने शुक्रवार को कोर्ट में एक ऐसी बात कही जो चर्चा में आ गई है. एक वकील के मामले की सुनवाई के दौरान उन्होंने बेरोजगार युवाओं की तुलना 'कॉकरोच' से की और कहा कि ऐसे लोग मीडिया, सोशल मीडिया और RTI एक्टिविस्ट बनकर सिस्टम पर हमले करते हैं।   उन्होंने ऐसे लोगों को 'समाज के परजीवी' भी कहा. यह टिप्पणी तब आई जब एक वकील सीनियर एडवोकेट का दर्जा पाने के लिए कोर्ट में याचिका लेकर आया था।  भारत में वकालत में एक खास रैंक होती है जिसे 'सीनियर एडवोकेट' कहते हैं. यह दर्जा कोर्ट खुद किसी वकील को देती है जब वो यह समझे कि उस वकील का अनुभव, काम और पेशेवर आचरण इसके लायक है. यह दर्जा मांगा नहीं जाता बल्कि दिया जाता है. कोई वकील खुद इसके लिए याचिका नहीं लगाता।  कोर्ट में क्या हुआ? CJI सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच के सामने एक वकील ने याचिका दाखिल की थी. वो चाहते थे कि दिल्ली हाई कोर्ट उन्हें सीनियर एडवोकेट का दर्जा दे. लेकिन उन वकील के पेशेवर आचरण और सोशल मीडिया पर उनके द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा को देखकर बेंच बहुत नाराज हो गई।  CJI ने साफ कहा कि अगर दिल्ली हाई कोर्ट उन्हें यह दर्जा दे भी दे तो सुप्रीम कोर्ट उसे रद्द कर देगा. उन्होंने वकील से पूछा कि क्या यह दर्जा कोई मेडल है जो सजावट के लिए रखा जाए. और यह भी पूछा कि क्या ऐसे व्यक्ति को सीनियर एडवोकेट बनना चाहिए।  CJI ने 'कॉकरोच' और 'परजीवी' क्यों कहा? सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि समाज में पहले से ऐसे 'परजीवी' हैं जो सिस्टम पर हमला करते हैं. फिर उन्होंने कहा कि कुछ बेरोजगार युवा जिन्हें कोई नौकरी नहीं मिलती और पेशे में कोई जगह नहीं होती, वो मीडिया, सोशल मीडिया और RTI एक्टिविस्ट बन जाते हैं और सबको निशाना बनाने लगते हैं. इन्हें उन्होंने 'कॉकरोच जैसे युवा' कहा. CJI ने वकील से पूछा कि क्या वो भी उन लोगों के साथ हाथ मिलाना चाहता है।  वकीलों की डिग्री पर भी उठाए सवाल CJI ने एक और बड़ी बात कही. उन्होंने कहा कि वो CBI से कहना चाहते हैं कि बहुत से वकीलों की डिग्रियों की जांच की जाए क्योंकि उनकी असलियत पर गंभीर सवाल हैं. उन्होंने यह भी कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया इस मामले में कभी कुछ नहीं करेगी क्योंकि उन्हें वकीलों के वोट चाहिए।  आखिर में क्या हुआ? वकील ने बेंच से माफी मांगी और अपनी याचिका वापस लेने की इजाजत मांगी. बेंच ने याचिका वापस लेने की इजाजत दे दी।   

ब्रिक्स समिट में मतभेद, 60 एजेंडों पर सहमति लेकिन ईरान मुद्दे पर विवाद

नई दिल्ली ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में कोई साझा बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि विदेश मंत्रियों के बीच ईरान के मसले को लेकर कोई आम सहमति नहीं बन सकी। ऐसी स्थिति में साझा बयान जारी नहीं किया गया। इसकी बजाय एक आउटकम स्टेटमेंट ही जारी किया गया है। जानकारी मिली है कि ईरान के मसले पर भले ही ब्रिक्स देशों के बीच कोई आम सहमति नहीं बन सकी, लेकिन कुल 60 एजेंडों पर सभी ने विचार साझा किए। सभी देशों के इन एजेंडों पर एक जैसे विचार रहे। इन एजेंडों में ऊर्जा सहयोग, डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर, व्यापार, क्लाइमेट ऐक्शन, फाइनेंशियल कनेक्टिविटी आदि शामिल हैं। दिल्ली में आयोजित विदेश मंत्रियों की इस समिट में ईरान के मसले को लेकर मतभेद हो गए। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ब्रिक्स देशों से मांग की कि वे बयान में ईरान और इजरायल के हमलों की निंदा करें। उन्होंने कहा कि इन दोनों देशों ने ईरान पर जो हमले किए, वह गलत थे और अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ थे। लेकिन ज्यादातर इस पर सहमत नहीं दिखे। इसकी वजह यह है कि भारत समेत ज्यादातर देश चाहते थे कि ईरान के साथ ही अमेरिका और इजरायल के साथ भी संतुलन बनाकर रखा जाए। इसी को लेकर मीटिंग में मतभेद पैदा हो गए और अंत में साझा बयान जारी न करने पर ही सहमति बनी। गुरुवार को इस समिट की शुरुआत हुई थी। अपने शुरुआती भाषण में भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोले जाने की वकालत की थी। उनका कहना था कि समुद्र में संचालन सुरक्षित और निरंतर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी जंग में अंतरराष्ट्रीय सीमा के तहत आने वाले समुद्री क्षेत्र में किसी तरह की बंदी नहीं होनी चाहिए। वहीं ईरान के विदेश मंत्री ने ब्रिक्स देशों से अपील करते हुए कहा कि आप सभी अमेरिका और इजरायल की ओर से हमारे ऊपर हमले की निंदा करें। इस पर सहमति ही नहीं बन पाई। कुछ देश इसके लिए तैयार थे, लेकिन कुछ मुल्कों ने इस पर सहमति नहीं जताई। जयशंकर और अराघची के बीच समिट से इतर क्या हुई बात ब्रिक्स समिट के इतर जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री अराघची के बीच बातचीत हुई। इस दौरान दोनों नेताओं ने इजराय और ईरान के बीच चल रही जंग को लेकर बात की। वहीं जयशंकर ने होर्मुज से जहाजों की आवाजाही होने देने की मांग की। एस. जयशंकर ने कहा कि हमने दोनों देशों के हितों को लेकर बात की। हमारी इस बात को लेकर सहमति है कि जरूरी मुद्दों को बातचीत से हल किया जाए। हमारी क्षेत्रीय स्थिरता और हालातों को लेकर भी बात हुई।

भारत-UAE संबंधों में नई उड़ान! PM मोदी की यात्रा में अरबों डॉलर के निवेश पर बनी सहमति

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के दौरान शुक्रवार को भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में कई समझौते हुए। इसमें द्विपक्षीय रणनीतिक रक्षा साझेदारी, एलपीजी की आपूर्ति एवं रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व और भारत के आरबीएल बैंक, सम्मान कैपिटल और इन्फ्रास्ट्रक्चर में 5 अरब डॉलर का निवेश शामिल है। इसके अलावा, दोनों देश के बीच गुजरात के वाडिनार में एक शिप रिपेयरिंग क्लस्टर को स्थापित करने के लिए समझौता हुआ है। अबू धाबी में प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के दौरान बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "भारत हर परिस्थिति में संयुक्त अरब अमीरात के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है और आगे भी खड़ा रहेगा। शांति और स्थिरता की बहाली के लिए भारत हर संभव सहयोग देगा।" उन्होंने आगे कहा कि होर्मुज स्ट्रेट का "स्वतंत्र और खुला रहना महत्वपूर्ण है ओर अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने भारत यूएई की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहह्यान को धन्यवाद दिया और कहा कि मौजूदा वैश्विक स्थिति में द्विपक्षीय सहयोग का महत्व और भी बढ़ गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जनवरी में यूएई राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान दोनों पक्षों ने संबंधों को गुणात्मक रूप से उन्नत करने पर सहमति जताई थी और कम समय में ही महत्वपूर्ण प्रगति हासिल कर ली है। उन्होंने कहा, "हमारी व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए में आपको हार्दिक धन्यवाद देता हूं। जनवरी में आपकी भारत यात्रा के दौरान, हमने अपने संबंधों को गुणात्मक रूप से उन्नत करने पर सहमति व्यक्त की थी। इतने कम समय में भी, हमने सभी मामलों में महत्वपूर्ण प्रगति की है। आज की स्थिति को देखते हुए, भारत-यूएई रणनीतिक सहयोग का महत्व बहुत बढ़ गया है। आने वाले समय में, हम हर क्षेत्र में साथ मिलकर आगे बढ़ेंगे।" प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का प्रभाव वैश्विक स्तर पर महसूस किया जा रहा है और उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संवाद और कूटनीति ही मुद्दों को सुलझाने का सर्वोत्तम तरीका है। प्रधानमंत्री आज सुबह यूएई पहुंचे और उनका औपचारिक स्वागत किया गया। बाद में, उन्होंने यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान (जिन्हें लोकप्रिय रू से एमबीजेड के नाम से जाना जाता है) के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 से 20 मई तक संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की पांच देशों की यात्रा पर हैं। इस यात्रा का उद्देश्य ऊर्जा, रक्षा, टेक्नोलॉजी, ग्रीन ट्रांजिशन और व्यापार सहित प्रमुख क्षेत्रों में भारत की रणनीतिक और आर्थिक साझेदारियों को मजबूत करना है।

अमेरिका-चीन रिश्तों पर ट्रंप का बड़ा बयान,शी जिनपिंग से बातचीत और उपलब्धियों का दावा

 नई दिल्ली  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अपनी बीजिंग यात्रा के आखिरी दिन यह दावा किया कि चीनी नेता शी चिनफिंग ने उन्हें कई शानदार सफलताओं पर बधाई दी है। ट्रंप ने कहा कि जब चिनफिंग ने बहुत ही शालीनता से अमेरिका को शायद एक पतनशील राष्ट्र बताया, तो उनका यह इशारा ट्रंप से पहले की जो बाइडन सरकार की तरफ था। यह स्पष्ट नहीं था कि ट्रंप चिनफिंग की किसी बंद कमरे में हुई बातचीत का हवाला दे रहे थे या उनके थ्यूसीडाइड्स ट्रैप वाले बयान का। यात्रा के पहले दिन शी चिनफिंग ने कहा था कि अमेरिका-चीन संबंधों को स्थिर करना सिर्फ दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए बहुत जरूरी है। थ्यूसीडाइड्स ट्रैप का जिक्र हालांकि, शी चिनफिंग ने सार्वजनिक तौर पर पतनशील राष्ट्र शब्द का इस्तेमाल नहीं किया था, लेकिन उन्होंने यह सवाल जरूर उठाया था कि क्या दोनों महाशक्तियां थ्यूसीडाइड्स ट्रैप से बच सकती हैं। यह एक ऐसा राजनीतिक सिद्धांत है जो बताता है कि एक उभरती हुई शक्ति और पहले से स्थापित महाशक्ति के बीच युद्ध होना तय होता है। सोशल प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक लंबी पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पतन के बारे में शी चिनफिंग का आकलन 100% सही था। ट्रंप के अनुसार, बाइडन प्रशासन की इमिग्रेशन, जेंडर इक्वेलिटी और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़ी नीतियों के कारण देश को अपार नुकसान उठाना पड़ा है। ट्रंप ने लिखा, "जब राष्ट्रपति शी ने बहुत ही शालीनता से अमेरिका को एक पतनशील राष्ट्र कहा, तो वह स्लीपी जो बाइडन और बाइडन प्रशासन के उन चार सालों के दौरान हुए भयानक नुकसान का जिक्र कर रहे थे। इस मामले में वह पूरी तरह सही थे।" उन्होंने आगे कहा कि खुली सीमाओं, भारी टैक्स, हर किसी के लिए ट्रांसजेंडर नीतियों, महिलाओं के खेलों में पुरुषों की भागीदारी, विविधता, समानता और समावेश, खराब व्यापार समझौतों और बढ़ते अपराध के कारण हमारे देश को बहुत नुकसान हुआ। ट्रंप ने गिनाईं अपनी उपलब्धियां ईरान और ताइवान जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भारी मतभेदों के बावजूद अमेरिकी नेता ने दावा किया कि दुनिया की दो सबसे बड़ी महाशक्तियों के बीच संबंध अच्छे हैं और लगातार बेहतर हो रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि उनके कार्यकाल के 16 शानदार महीनों के दौरान अमेरिका ने अविश्वसनीय प्रगति की है। उन्होंने शेयर बाजार के रिकॉर्ड स्तर, अपनी कथित सैन्य जीत, मजबूत जॉब मार्केट और निवेश के नए वादों का हवाला देते हुए इसे अमेरिका के पुनरुत्थान का संकेत बताया। ट्रंप ने लिखा कि राष्ट्रपति शी का इशारा अमेरिका की उस अविश्वसनीय प्रगति की ओर नहीं था जो ट्रंप प्रशासन के 16 शानदार महीनों में दुनिया ने देखी है। उन्होंने वेनेजुएला के साथ अच्छे संबंधों, ईरान के सैन्य पतन और अमेरिका में बाहरी लोगों द्वारा 18 ट्रिलियन डॉलर के रिकॉर्ड निवेश का भी जिक्र किया। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि शी चिनफिंग ने इतने कम समय में मिली इन शानदार सफलताओं के लिए उन्हें बधाई दी। उन्होंने यह स्वीकार किया कि दो साल पहले अमेरिका वास्तव में पतन की ओर था, लेकिन अब यह दुनिया का सबसे हॉट देश है। क्या है जमीनी हकीकत? हालांकि, अमेरिका-चीन संबंधों को लेकर ट्रंप का यह सकारात्मक रवैया दोनों देशों के बीच मौजूद कई कड़वी सच्चाइयों से मेल नहीं खाता है। ईरान में चल रहे संघर्ष को सुलझाने में अमेरिका ने चीन से अधिक भागीदारी की अपील की है, लेकिन बीजिंग ने सार्वजनिक तौर पर इसमें बहुत कम दिलचस्पी दिखाई है। भले ही ट्रंप ने फॉक्स न्यूज के सीन हैनिटी को दिए इंटरव्यू में दावा किया हो कि शी चिनफिंग ने मदद की पेशकश की थी। इसके अलावा, वाइट हाउस का मानना है कि मेक्सिको में जाने वाले चीनी रसायनों को रोकने के लिए चीन को अभी और कदम उठाने चाहिए, जिनका इस्तेमाल अवैध फेंटानिल ड्रग बनाने में होता है। इस ड्रग्स की वजह से अमेरिका के कई समुदाय बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।

खतरनाक इबोला वायरस का फैलाव तेज: संक्रमितों की संख्या 100 पार, अस्पतालों में अलर्ट

नई दिल्ली एक दूसरे से फैलने वाला खतरनाक इबोला वायरस इन दिनों रिपब्लिक ऑफ कॉन्गो में अपना कहर ढा रहा है। जानकारी के मुताबिक इबोला वायरस से संक्रिमत करीब 65 लोगों की जान चली गई है और 100 से ज्यादा संदिग्धों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। अब तक कॉन्गो में इबोला संक्रमण के 246 केस सामने आ चुके हैं। जानकारी के मुताबिक टेस्ट किए गए हर 20 सैंपल में से 13 लोग संक्रमित पाए गए हैं। बता दें कि 2018 से 2020 के दौरान भी कॉन्गो में इबोला वायरस से बहुत मौतें हुई थीं। उस दौरान करीब 3 हजार लोगों की मौत हो गई थी। वहीं बूनिया में भी इबोला वायरस से दो हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे। इसे दुनिया के सबसे खतरनाक वायरस में गिना जाता है। इस वायरस से संक्रमित 90 फीसदी लोगों की जान चली जाती है। इससे लोगों को डायरिया और खून बहने जासे लक्ष्ण दिखाई देते हैंय़ तीन दिन में ले लेता है जान रिपोर्ट्स के मुताबिक यह वायरस केवल तीन ही दिन में किसी की जान ले सकता है। यह वायरस छूने से या आसपास रहने से भी फैल कता है। इसके अलावा छींकने और खांसने से भी पानी के कड़ों के साथ यह वायरस फैल जाता है। इबोला वायरस संक्रामित जीव को खाने से भी हो जाता है। शरीर पर किसी तरह के घाव या फिर आंख, नाक, मुंह को छूने से यह वायरस संक्रमित कर देता है। इसके बाद बुखार, थकान र सिरदर्द जैसे लक्षणों का सामना करना पड़ता है। यह ऑर्थोबोलावायरस समूह का ही एक सदस्य है। इस वायरस से संक्रमित होने पर समय पर इलाज ना मिलने पर व्यक्ति की मौत हो जाती है। क्या हैं लक्षण इबोला वायरस से संक्रमित व्यक्ति को अत्यधिक थकान, बुखार और सिरदर्द हो जाता है। इसके अलावा उसे नॉजिया. दस्त, रैशेज और खजली जैसी समस्याएं भी होती हैं। अगर इस वायरस से कोई मुक्ति भी पा जाता है तो भी कम से कम दो साल तक इसके लक्षण दिखते रहते हैं। इसके अलावा लोगों मेंसिर दर्द और आखों में जलन की शिकायत बनी रहती है। हंटा वायरस का भी प्रकोप हंटा वायरस की चपेट में आए एक क्रूज जहाज के छह यात्री शुक्रवार को ऑस्ट्रेलिया पहुंचे, जहां उन्हें कम से कम तीन सप्ताह तक पृथक-वास में रहना होगा। नीदरलैंड से इन्हें लेकर आया 'गल्फस्ट्रीम लॉन्ग-रेंज बिजनेस जेट' पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया राज्य की राजधानी पर्थ के बाहर स्थित 'आरएएएफ बेस पियर्स' पर उतरा। यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को नजदीकी 'बुल्सब्रुक' पृथक-वास केंद्र में स्थानांतरित किया जाना था। ऑस्ट्रेलिया के स्वास्थ्य मंत्री मार्क बटलर ने बृहस्पतिवार को कहा था कि सरकार इस वायरस के प्रकोप से निपटने के लिए "दुनिया के किसी भी हिस्से की तुलना में सबसे मजबूत पृथक-वास व्यवस्थाओं में से एक" लागू करेगी।

धर्मेंद्र प्रधान का बड़ा ऐलान, NEET परीक्षा में मिलेगा एक्स्ट्रा टाइम; एडमिट कार्ड की तारीख भी तय

नई दिल्ली NEET के पेपर लीक कांड ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है और छात्रों के बीच गुस्सा देखने को मिल रहा है. इस बवाल के बीच आज पहली बार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान मीडिया ने सामने आए. प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने दो टूक कहा कि दोषियों को पाताल से भी ढूंढ निकालेंगे. हालांकि, प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले NTA ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर नई तारीखों की जानकारी पहले ही दे दी थी. 21 जून को छात्र दोबारा अपनी किस्मत आजमाएंगे. एडमिट कार्ड से लेकर परीक्षा केंद्रों तक की जानकारी NTA की ओर से दी जाएगी।  3 से 4 दिन के बाद लिया गया फैसला  केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि गेस पेपर लीक होने के 3 से 4 दिन का समय लिया जिसके बाद से परीक्षा रद्द की गई ताकि किसी छात्र को परेशानी का सामना न करना पड़े.उन्होंने कहा कि हम आज नई तारीख के साथ आए हैं. आज से एक महीने के बाद नई परीक्षा होगी. हमारी अप्रोच वही रहेगी. परीक्षा माफियाओं के साथ हमारी लड़ाई है. विभिन्न सोशल मीडिया हैंडल से भ्रमात्मक तथ्यों को रखा जाता है, गुमराह करने की कोशिश की जाती है जिससे बचना बेहद जरूरी है. ऐसे में सरकार ने तुरंत सीबीआई को जांच सौंपी. इस बार सीबीआई तह तक जाएगी और गड़बड़ी का पता लगाएगी. मंत्री ने कहा कि उसे एजेंसियां गंभीरता से ले रही हैं. जो भी दहशतगर्द घूम रहे हैं, आने वाले एग्जाम में वह इससे दूर रहें नहीं तो उन्हें दंड भुगतना पड़ेगा।  नई तारीख का हुआ ऐलान  हमने समय में NEET के लिए नई तारीख का ऐलान कर दिया है. जब से परीक्षा में पेपर लीक की बातें सामने आई हैं तब से हमने इसपर अपनी पैनी नजर बनाई है. इसके लिए CBI को जांच सौंपी गई थी।  हम आज नई तारीख के साथ आए हैं। आज से एक महीने के बाद नई परीक्षा होगी। हमारी अप्रोच वही रहेगी। परीक्षा माफियाओं के साथ हमारी लड़ाई है। विभिन्न सोशल मीडिया हैंडल से भ्रमात्मक तथ्यों को रखा जाता है, गुमराह करने की कोशिश की जाती है। ऐसे में सरकार ने तुरंत सीबीआई को जांच सौंपी। इस बार सीबीआई तह तक जाएगी। कहां चूक हुई है, उसे एजेंसियां गंभीरता से ले रही हैं। जो भी दहशतगर्द घूम रहे हैं, आने वाले एग्जाम में वह इससे दूर रहें नहीं तो उन्हें दंड भुगतना पड़ेगा। हम इस घटना से बहुत दुखी हैं, लेकिन एक बड़े उद्देश्य को देखते हुए हमें यह बड़ा निर्णय लेना पड़ा, ताकि अन्याय न हो सके। हमें अनेक सुझाव मिले हैं। एनटीए में जीरो-एरर हो यह हमारा दायित्व है और हम यह करके रहेंगे। एनटीए हर साल एक करोड़ बच्चों का एग्जाम कराती है। विद्यार्थियों पर कोई आर्थिक बोझ न पड़े उसका हम दायित्व लेते हैं। दोबारा एग्जाम की कोई फीस नहीं ली जाएगी। एनटीए ने तय किया है कि हम एक सप्ताह विद्यार्थियों को अपने पसंद का शहर में परीक्षा देने का अवसर देंगे।  परीक्षा में होने वाली फॉर्मेलिटीज के लिए अतिरिक्त समय दिया जाएगा। परीक्षा के लिए 2 से 5.15 तक का समय दिया जाएगा। सभी के पास 14 जून तक एडमिट कार्ड पहुंच जाएगा। भारत सरकार की ओर से हम बात करेंगे कि इस बार नीट की परीक्षा के समय विद्यार्थियों के आवागमन के बोझ को कम किया जा सके, इसकी बात करेंगे। मौसम खराब रहने पर क्या करेंगे इसकी भी हम व्यवस्था करेंगे। कोई भी अफवाह में न जाएं। राधाकृष्णन कमेटी का पूरा पालन करने के बाद भी इसमें चूक हुई है, इसमें सुधारने की हम जिम्मेदारी लेते हैं। अगले साल से नीट की परीक्षा कम्प्यूटर से होगी। दुख के साथ लिया गया फैसला  धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि हम इस घटना से बहुत दुखी हैं, लेकिन एक बड़े उद्देश्य को देखते हुए हमें ये फैसला लेना पड़ा ताकि अन्याय न हो सके. हमें अनेक सुझाव मिले हैं. एनटीए में जीरो एरर हो यह हमारा दायित्व है और हम यह करके रहेंगे. एनटीए हर साल एक करोड़ बच्चों का एग्जाम कराती है. विद्यार्थियों पर कोई आर्थिक बोझ न पड़े उसका हम दायित्व लेते हैं.  एनटीए ने तय किया है कि हम एक सप्ताह विद्यार्थियों को अपने पसंद का शहर में परीक्षा देने का मौका देंगे. उन्होंने आगे कहा कि जांच के दौरान 12 मई तक यह साफ हो गया कि गेस पेपर के नाम पर असली प्रश्नपत्र के सवाल बाहर पहुंचे थे. उन्होंने कहा कि सरकार नहीं चाहती थी कि शिक्षा माफिया की वजह से किसी ईमानदार और मेहनती छात्र का हक छीना जाए।  अगले साल से ऑनलाइन होगी एग्जाम  केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि अगले साल से नीट यूजी (NEET UG) की परीक्षा ऑनलाइन आयोजित की जाएगी जिससे पेपर लीक जैसी घटनाओं पर लगाम लगाया जा सके।  14 जून को आएगा एडमिट कार्ड  केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस दौरान बताया कि नीट यूजी 2026 के री-एग्जाम के एडमिट कार्ड 14 जून तक जारी कर दिए जाएंगे. इसके अलावा छात्रों को 15 मिनट का अतिरिक्त समय दिया जाएगा। 

इंतजार खत्म! 21 जून को आयोजित होगी NEET परीक्षा, छात्रों के लिए नया अपडेट जारी

नई दिल्ली  नीट परीक्षा की नई तारीखें जारी हो गई हैं। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने नीट-री एग्जाम की नई डेट घोषित कर दी हैं। मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के लिए देश की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षा नीट कैंसिल होने के बाद लाखों स्टूडेंट्स निराश और नाराज आए। पेपर कैंसिल होने के बाद उनके दिमाग में एक ही सवाल बार-बार आ रहा था कि अब नीट की परीक्षा फिर से कब होगी? इसका जवाब आ गया है। एनटीए नीट का री-एग्जाम 21 जून को आयोजित करेगा। इसकी ऑफिशियल जानकारी आ गई है। एनटीए ने हाल ही में नीट परीक्षा को लेकर आधिकारिक जानकारी दी है। जिसमें बताया गया है कि भारत सरकार की स्वीकृति से NEET (UG) 2026 की पुन: परीक्षा, रविवार 21 जून 2026 को आयोजित करने का फैसला किया गया है। ऐसे में अब स्टूडेंट्स के पास फिर से परीक्षा की तैयारी करने का एक महीने से ज्यादा का समय है। परीक्षा के लिए छात्रों के एडमिट कार्ड फिर से जारी किए जाएंगे। इस बार पेपर को लेकर सुरक्षा के पूरे इंतजार किए जाएंगे। नई तारीख और समय  मेडिकल की पढ़ाई करने का सपना देख रहे लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए बड़ी खबर सामने आई है. NTA की ओर से जारी ऑफिशियल सोर्स के मुताबिक, पूरे देश में 21 जून को परीक्षा का आयोजन किया जाएगा. छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे अब अपनी तैयारी को अंतिम रूम देना शुरू कर दें।  अफवाहों से सावधान रहने की सलाह  पोस्ट में NTA ने छात्रों और अभिभावकों के लिए एक विशेष अपील भी की है. ऐजेंसी ने कहा कि सोशल मीडिया पर परीक्षा को लेकर लगातार चल रही खबरों पर ध्यान न दें. केवल ऑफिशियल वेबसाइट या चैनलों पर दी गई जानकारी पर भरोसा करें. किसी भी अनाधिकारिक लिंक या मैसेज के जरिए साझा की गई सूचना को सच न मानें।  ले सकते हैं हेल्पलाइन नंबर की मदद  अगर किसी भी छात्र को अपनी परीक्षा, केंद्र या एडमिट कार्ड से जुड़ी किसी भी परेशानी है तो वे सीधे NTA से संपर्क कर सकते हैं. इसके लिए आधिकारिक ईमेल और फोन नंबर के जरिए मदद ले सकते हैं. इसके लिए ईमेल आईडी और हेल्पलाइन नंबर दिया गया है।  ईमेल- neet-ug@nta.ac.in हेल्पलाइन नंबर-   011-40759000 और 011-69227700 

भारत-UAE संबंधों में बड़ा कदम,रक्षा, ऊर्जा और निवेश पर अहम समझौते

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अपने पांच देशों के विदेशी दौरे के पहले चरण में UAE की राजधानी अबू धाबी पहुंचे. एयरपोर्ट पर उतरते ही प्रधानमंत्री का भव्य स्वागत किया गया. पीएम मोदी के विमान के अबू धाबी की धरती पर उतरते ही वहां के उच्च अधिकारियों ने उनका वेलकम किया की. इस मौके पर पीएम मोदी को 'गार्ड ऑफ ऑनर' दिया गया. अबू धाबी में यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान ने पीएम मोदी से मुलाकात की. इस दौरान पीएम मोदी ने यूएई के साथ ऊर्जा सहयोग पर चर्चा की और यूएई का धन्यवाद दिया. उन्होंने कहा, 'भारतीयों की मदद के लिए यूएई का आभार. हम हर क्षेत्र में साथ मिलकर आगे बढ़ेंगे. भारत शांति, स्थिरता और सहयोग के लिए तैयार है.' प्रधानमंत्री ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोले जाने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि भारत यूएई के साथ खड़ा है और खड़ा रहेगा. पीएम मोदी ने यूएई को हर मुमकिन मदद का भरोसा दिलाया. उन्होंने कहा कि यूएई ने संयम का परिचय दिया है. 'UAE पर हुए हमलों की कड़ी निंदा करते हैं…' पीएम मोदी मे आगे कहा, 'हम UAE पर हुए हमलों की कड़ी निंदा करते हैं. जिस तरह से UAE को निशाना बनाया गया है, वो किसी भी तरह से मंजूर नहीं है, देश की एकता, सुरक्षा और इलाके की एकता बनाए रखने के लिए आपके उठाए गए कदमों का हम स्वागत करते हैं. इस मुश्किल समय में UAE में रहने वाले भारतीय लोगों की जिस तरह से देखभाल की गई, जिस तरह से उन्हें अपने परिवार के सदस्यों जैसा माना गया, उसके लिए मैं UAE सरकार, आपका और रॉयल फैमिली का दिल से शुक्रिया अदा करता हूं.' भारत-UAE के बीच अहम समझौते पीएम मोदी ने आगे कहा, 'पश्चिम एशिया संकट का पूरी दुनिया पर असर हो रहा है और भारत जल्द से जल्द शांति चाहता है.'  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूएई यात्रा भारत के लिए बड़ी उपलब्धियां भी लेकर आई है. इस दौरान दोनों देशों के बीच कई अहम समझौतों पर मुहर लगी है. भारत और यूएई के बीच 'सामरिक रक्षा साझेदारी' समझौता हुआ है, जिससे दोनों देशों के सैन्य संबंध और मजबूत होंगे रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व और LPG की सप्लाई को लेकर भी अहम सहमति बनी है. गुजरात के वाडिनार में 'शिप रिपेयर क्लस्टर' स्थापित करने के लिए एक MoU पर हस्ताक्षर किए गए हैं. इसके अलावा, भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र के साथ-साथ RBL बैंक और 'सम्मान कैपिटल' में कुल 5 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की घोषणा की गई है. यूएई के राष्ट्रपति का पीएम मोदी ने जताया आभार पीएम मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति नहयान के साथ अपनी एक तस्वीर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर की है. इसके साथ कैप्शन में उन्होंने लिखा, 'मैं अपने भाई, यूएई के प्रेसिडेंट, हाइनेस शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान को अबू धाबी एयरपोर्ट पर मेरा स्वागत करने के लिए धन्यवाद देता हूं. मैं एनर्जी, इन्वेस्टमेंट, सप्लाई चेन जैसे खास सेक्टर में भारत और UAE के बीच रिश्तों को मजबूत करने के मकसद से हमारी बातचीत का इंतजार कर रहा हूं.'