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होर्मुज से आगे की कहानी: US-Iran समझौते से भारत को मिल सकते हैं दो बड़े आर्थिक फायदे

 नई दिल्ली  अमेरिका और ईरान के बीच समझौता हो गया है और स्विट्जरलैंड में इस डील पर साइन होंगे। इसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने और व्यापार फिर से शुरू करने का एलान भी शामिल है। होर्मुज से शिपिंग फिर से शुरू होने या सामान्य होने से भारत को बड़ी राहत मिलेगी। भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल के आयातकों में से एक है। ऐसे में तेल की सप्लाई को लेकर चिंता कम होने, माल ढुलाई का खर्च घटने और महंगाई का दबाव कम होने से उसे फायदा होगा। क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट? ईरान और ओमान के बीच के इस संकरे जलमार्ग से दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाले तेल का लगभग पांचवां हिस्सा सप्लाई होता है और खाड़ी के प्रमुख उत्पादक देशों जैसे सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और कतर के लिए निर्यात का मुख्य रास्ता है। ये सभी देश भारत को ऊर्जा की सप्लाई करने वाले अहम देश हैं। फरवरी के आखिर में अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध की वजह से इस स्ट्रेट से कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई में रुकावट आई। इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों और एनालिस्ट्स का कहना है कि दोबारा खुलने और तनाव कम होने से ग्लोबल एनर्जी मार्केट में स्थिरता आने और भारत जैसे एनर्जी इम्पोर्ट करने वाले देशों के लिए हालात बेहतर होने की संभावना है। तेल की कीमतों में आई गिरावट अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के एलान के बाद तेल की कीमतों में गिरावट आई। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान के साथ युद्धविराम समझौता कर लिया है और होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की टोल-फ्री आवाजाही हो सकेगी। डोनल्ड ट्रंप ने पोस्ट किया, "मैं इसके जरिए होर्मुज स्ट्रेट को बिना किसी रोक-टोक के खोलने की पूरी मंजूरी देता हूं और साथ ही अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी को तुरंत हटाने का भी आदेश देता हूं। दुनिया भर के जहाजों अपने इंजन चालू करो। तेल का प्रवाह शुरू होने दो!" युद्धविराम की खबर से तेल की कीमतों में गिरावट आई। तेल के लिए ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 4 प्रतिशत गिरकर लगभग 84 डॉलर प्रति बैरल हो गई। युद्ध की वजह से आई रुकावटों के बाद ग्लोबल ऑयल की कीमतें फरवरी में 70-72 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। भारत को सबसे बड़ा फायदा तेल में भारत अपनी जरूरत का करीब 80-85 फीसदी कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है. इसमें खाड़ी क्षेत्र की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समझौता लागू होता है और ईरानी तेल फिर से बाजार में आता है तो ब्रेंट क्रूड की कीमतों में बड़ी गिरावट आ सकती है. इसका सीधा असर दुनिया के बाकी देशों के साथ-साथ भारत पर पड़ेगा. पहले समझें की भारत को क्या फायदा होगा।      पेट्रोल और डीजल के दामों पर दबाव कम होगा.     महंगाई को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी.     भारत का तेल आयात बिल घटेगा.     देशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा और रुपये को भी मजबूती मिलेगी. भारत के लिए सबसे अच्छी खबर क्या है? रिपोर्ट के मुताबिक ड्राफ्ट में ईरान के तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी छूट मिलेगी. साथ ही 25 अरब डॉलर की फ्रीज ईरानी संपत्तियां जारी करने पर भी सहमति बनी है. भारत पहले ईरान से बड़ी मात्रा में सस्ता तेल खरीदता था, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद यह व्यापार लगभग बंद हो गया था. खास बात ये है कि ईरान से तेल का व्यापार डॉलर में न होकर रुपये में होता था. अब अगर प्रतिबंध धीरे-धीरे हटते हैं तो भारत फिर से ईरानी क्रूड खरीद सकता है. इससे भारत को सस्ता तेल मिल सकता है।  चाबहार पोर्ट को मिलेगी नई जान इस डील का दूसरा बड़ा असर भारत के रणनीतिक चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट पर पड़ सकता है. ईरान के चाबहार बंदरगाह में भारत ने भारी निवेश किया है. यह प्रोजेक्ट भारत को पाकिस्तान को बायपास करके अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच देती है. अमेरिका और ईरान के रिश्तों में नरमी आने से चाबहार पर अमेरिकी दबाव कम हो सकता है. इससे भारत को पोर्ट के विस्तार, नए निवेश और व्यापार बढ़ाने में आसानी होगी. इसके साथ ही इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) में भी तेजी आने की उम्मीद है।  समझौते में क्या-क्या हुआ?     रॉयटर्स के मुताबिक अंतिम ड्राफ्ट में कई महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं.     ईरान तुरंत होर्मुज जलडमरूमध्य खोलेगा.     अमेरिका 30 दिनों के भीतर नौसैनिक नाकेबंदी हटाएगा.     अमेरिका नए प्रतिबंध नहीं लगाएगा.     ईरान को तेल बेचने की अनुमति मिलेगी.     25 अरब डॉलर की फ्रीज संपत्तियां जारी की जाएंगी.     ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा.     यूरेनियम एनरिचमेंट और परमाणु कार्यक्रम पर अगले 60 दिनों तक विस्तृत बातचीत होगी.   मई के मध्य तक सरकार ने रिटेल कीमतों में नहीं किया था बदलाव इससे पेट्रोल और डीजल बनाने की लागत बढ़ गई, लेकिन सरकार ने मई के मध्य तक रिटेल कीमतों में बदलाव नहीं किया। सरकार ने 27 मार्च को पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की, ताकि पश्चिम बंगाल समेत पांच अहम राज्यों में चुनाव के दौरान रिटेल कीमतों में बढ़ोतरी से बचा जा सके। विधानसभा चुनावों के बाद बढ़े तेल के दाम विधानसभा चुनावों के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में प्रति लीटर लगभग 7.50 रुपये की बढ़ोतरी की गई, जबकि सीएनजी के दाम 6 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ाए गए। एलपीजी की कीमतों में भी दो किस्तों में 14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडर पर 89 रुपये की बढ़ोतरी की गई। कीमतें बढ़ने के बावजूद, सरकारी तेल कंपनियों को रोजाना लगभग 650 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है क्योंकि रिटेल कीमतें लागत से कम हैं। इंडस्ट्री के सूत्रों और एनालिस्ट्स का कहना है कि तेल की कीमतों में नरमी और स्ट्रेट के फिर से खुलने के साथ, ये धीरे-धीरे कम हो जाएंगी।

पश्चिम बंगाल में फिर गरमाया स्कूल भर्ती घोटाला, ED ऑफिस पहुंचेंगे अभिषेक बनर्जी

कोलकाता तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और पार्टी के लोकसभा सदस्य अभिषेक बनर्जी को पश्चिम बंगाल में स्कूल में नौकरी के लिए करोड़ों रुपये नकद मामले में सोमवार को प्रवर्तन निदेशालय के सामने पेश होना है।  वह केंद्रीय एजेंसी की चल रही जांच के संबंध में पूछताछ के लिए दिन में कोलकाता के उत्तरी बाहरी इलाके में ईडी के साल्ट लेक कार्यालय में होंगे. ईडी अधिकारियों ने जून में पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे बनर्जी को पूछताछ के लिए नोटिस दिया था।  उन्हें 3 जून को आज के लिए यानी 15 जून को दोपहर तक ईडी कार्यालय में उपस्थित होने के लिए कहा गया. संयोग से अभिषेक बनर्जी का नाम केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दायर आरोप पत्र में था, जो स्कूल-नौकरी मामले में समानांतर जांच कर रहा है. हालाँकि, उन्हें वहां आरोपी के रूप में नामित नहीं किया गया था।  मामले की जांच में ईडी द्वारा दायर आरोप पत्र में उनका नाम भी सामने आया था. ईडी सूत्रों के मुताबिक अभिषेक को उनकी संलिप्तता के बारे में जांच में तार्किक निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए फिर से ईडी कार्यालय में बुलाया गया है. उनका बयान दर्ज किया जाएगा।  स्कूल नौकरी मामले में ईडी के कार्यालय में अभिषेक से पूछताछ हस्ताक्षर बेमेल मामले में चल रही जांच के संबंध में पश्चिम बंगाल पुलिस के आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) के अधिकारियों द्वारा रविवार को साढ़े आठ घंटे तक मैराथन पूछताछ का सामना करने के ठीक एक दिन बाद हो रही है।  फिर, 16 जून यानी मंगलवार को उन्हें दक्षिण कोलकाता के भबानी भवन में सीआईडी के मुख्यालय में उपस्थित होना होगा. उनके खिलाफ दर्ज एक एफआईआर के संबंध में पूछताछ के लिए जहां उन पर राज्य में हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों से पहले हिंसा भड़काने और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को धमकी देने का आरोप लगाया गया था. सीआईडी ​​अधिकारियों ने उन्हें 12 जून की शाम को नोटिस दिया था. अभिषेक बनर्जी ने पहले ही कहा था कि वह किसी भी मामले में किसी भी जांच एजेंसी के साथ पूरा सहयोग करेंगे, जैसा कि वह करते रहे हैं। 

गर्मी से मिलेगी राहत! 12 राज्यों में झमाझम बारिश के आसार, धूलभरी आंधी की चेतावनी जारी

नई दिल्ली जून की शुरुआत में हुई बारिश से लोगों को गर्मी से काफी राहत मिली थी। हालांकि अब तापमान एक बार फिर भड़ने लगा है। इसी बीच मौसम विभाग ने फिर से मौसम के करवट लेने का अलर्ट जारी किया है। IMD के मुताबिक उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल मेत पूर्वोत्तर के राज्यों में तेज आंधी के साथ बारिश की संभावना है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले 6 से सात दिनों तक पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश हो सकती है। इसके चलते पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और बाढ़ का खतरा भी बना हुआ है। कहां पहुंचा है मॉनसून मॉनसून इस समय महाराष्ट्र पहुंच चुका है और लगातार आगे बढ़ रहा है। कर्नाटक, तेलंगाना, आध्र प्रदेशष पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार के कुछ हिस्से में दक्षिण पश्चिम मॉनसून पहुंच चूका है। वहीं अगले चार से पांच दिन में यह छत्तीसगढ़ में प्रवेश कर सकता है। पश्चिमी विक्षोभ की वजह से मॉनसून की रफ्तार कम हुई है। इसी वजह से अब तक मॉनसून उत्तर प्रदेश के सीमा में दाखिल नहीं हो पाया है कहां होगी झमाझम बारिश मौसम विभाग के मुताबिक हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, गिलगित-बाल्टिस्तान, लद्दाख, मुजफ्फराबाद, उत्तराखंड में 15 से 20 तारीख तक बारिश का अनुमान है। इसके अलावा 15 जून से अगेल चार दिनों तक पूर्वी राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी राजस्थान में भी बारिश हो सकती है। पूर्वोत्तर में असम, मेघालय, त्रिपुरा, सिक्किम, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश का अनुमान है। 15 जून को पश्चिमी राजस्थान में धूल भरी आंधी चल सकती है। मध्य भारत की बात करें तो 15 जून को छत्तीसगढ़,मध्य प्रदेश और विदर्भ में भी हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान है। पूर्वोत्तर में मूसलाधार बारिश का अलर्ट आगामी छह से सात दिनों के दौरान पश्चिम बंगाल के पहाड़ी क्षेत्रों, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने आसार हैं, जबकि अगले तीन से चार दिनों के दौरान महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्रों में कुछ जगहों पर लू चलने का अनुमान है। मौसम विभाग के रविवार को जारी बुलेटिन के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून लगातार आगे बढ़ रहा है और इसकी उत्तरी सीमा हरनाई (महाराष्ट्र) सोलापुर (महाराष्ट्र), हैदराबाद (तेलंगाना) भद्राद्री कोठागुडेम (तेलंगाना), कलिंगपट्टनम (आंध्र प्रदेश), पारादीप (ओडिशा), पारीपदा (ओडिशा), पुरुलिया (पश्चिम बंगाल), धनबाद (झारखंड) और मुजफ्फरपुर (बिहार)से होकर गुजर रही है। अगले चार से पांच दिनों के दौरान महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल के बाकी हिस्सों के साथ-साथ ओडिशा, झारखंड, बिहार और दक्षिण छत्तीसगढ़ में मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हैं। दूसरी तरफ, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तथा पश्चिम बंगाल के पहाड़ी इलाकों और सिक्किम में अगले एक सप्ताह तक व्यापक बारिश होगी। बिहार में 16 जून को भारी बारिश की संभावना है, वहीं अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में 17 से 19 जून के बीच मूसलाधार बारिश का अनुमान है। तटीय कर्नाटक, केरल, कोंकण और गोवा में भी इस दौरान व्यापक स्तर पर बारिश होने का अनुमान है। कैसा रहेगा दिल्ली का मौसम दिल्ली और आसपास के इलाकों में मौसम के मिजाज की बात करें तो 14 जून की शाम या रात के समय आंधी-तूफान, बिजली कड़कने और धूलभरी आंधी के साथ हल्की बारिश हो सकती है, जिससे हवा की रफ्तार 40 से 50 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। इस दौरान दिल्ली में अधिकतम तापमान 38 से 40 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा। इसके बाद 15 और 16 जून को भी दोपहर या शाम के समय गरज-चमक के साथ मौसम बदलने की संभावना है और तापमान 38 से 41 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। हालांकि 17 जून से दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों के तापमान में बढ़ोतरी होगी और यह 40 से 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जिससे गर्मी का प्रकोप बढ़ेगा। यूपी और बिहार का मौसम का मौसम उत्तर प्रदेश के कई जिलों में आज बारिश की संभावना जताई गई है। इनमें कुशीनगर, देवरिया, गोरखपुर, गोंडा, बलिया,म ऊ, चंदौली, मिर्जापुर, वाराणसी, सोनभद्र शामिल हैं। पश्चिमी यूपी में मथुरा, फिरोजाबाद, शिकोहाबाद, मैनपुरी, कानपुर, झांसी और आसपास के इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है। बिहार की बात करें तो पश्चिमी चंपारण, सारण, सिवान, भोजपुर, कैमूर बक्सर, रोहतास और औरंगाबाद में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है।

रातों-रात गैर-अमेरिकियों के लिए बंद हुए दो बड़े AI मॉडल, भारत के लिए खतरा या मौका? जानिए

 नई दिल्ली/वाशिंगटन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है, जिसने तकनीकी विशेषज्ञों और दुनियाभर की सरकारों को चौंका दिया है। अमेरिका ने एक बेहद सख्त कदम उठाते हुए मशहूर एआई स्टार्टअप एंथ्रोपिक (Anthropic) को निर्देश दिया है कि वह अपने सबसे पावरफुल एआई मॉडल्स- क्लॉड फैबल 5 (Claude Fable 5) और मिथोस 5 (Mythos 5) का एक्सेस भारतीयों सहित सभी गैर-अमेरिकी नागरिकों के लिए तुरंत रोक दे। इस सरकारी आदेश के बाद कंपनी को मजबूरन ग्लोबल लेवल पर इन मॉडल्स को बंद करना पड़ा है। अमेरिका ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है और गैर अमेरिकियों के लिए पावरफुल AI मॉडल के एक्सेस को बैन कर दिया है. यह नियम एंथ्रोपिक के सबसे एडवांस्ड एआई मॉडल्स Claude Fable 5 और Mythos 5 पर लागू होगा. अमेरिका ने एंथ्रोपिक के लिए एक्सपोर्ट कंट्रोल के निर्देश दिए हैं, जो इन मॉडल्स पर लागू होंगे।  दरअसल, अमेरिकी सरकार के एक विभाग ने पावरफुल एआई मॉडल्स Claude Fable 5 और Mythos 5 के ग्लोबल एक्सेस पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी है, जिसकी जानकारी शनिवार को मिली. यह बैन अमेरिका के बाहर के सभी यूजर्स, जिसमें एंथ्रोपिक के विदेशी कर्मचारी भी शामिल हैं।  अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ कॉमर्स के मुताबिक, इन मॉडल्स में कुछ ऐसी खामियां हैं, जिनका इस्तेमाल करके हैकर्स सॉफ्टवेयर में मौजूद कमजोरियों का पता लगा सकते हैं और बड़े साइबर हमलों से बच सकते हैं. हैकर्स के हाथ में यह तकनीक पहुंचती है तो बड़ा नुकसान हो सकता है।  अमेरिका ने क्यों लगाया प्रतिबंध? AI जगत में इसे एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि पहली बार किसी सरकार ने सीधे AI सॉफ्टवेयर की पहुंच पर रोक लगाई है। यह कोई सामान्य प्रतिबंध नहीं है, बल्कि एक संकेत है कि दुनिया में एआई को लेकर नियम कितनी तेजी से बदल रहे हैं। आइए इस पूरे विवाद को विस्तार से समझते हैं:     12 जून को अमेरिकी प्रशासन ने एंथ्रोपिक को स्पष्ट निर्देश दिया कि कोई भी विदेशी नागरिक (चाहे वह अमेरिका के अंदर हो या बाहर) इन नए मॉडल्स का उपयोग नहीं कर सकेगा। यह आदेश इतना व्यापक था कि इसमें कंपनी के अपने गैर-अमेरिकी कर्मचारी भी शामिल थे। नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए एंथ्रोपिक के पास इन दोनों मॉडल्स को पूरी तरह से बंद करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। हालांकि, यूजर्स कंपनी के अन्य पुराने मॉडल्स का इस्तेमाल पहले की तरह कर सकेंगे।     वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेजन के कुछ शोधकर्ताओं ने टेस्टिंग के दौरान फैबल 5 (Fable 5) मॉडल में कुछ सॉफ्टवेयर कमजोरियों का पता लगाया था। यह जानकारी अमेरिकी वाणिज्य विभाग के साथ साझा की गई। अमेरिकी अधिकारियों को यह डर सताने लगा कि इस सिस्टम के सुरक्षा घेरे को आसानी से तोड़ा जा सकता है। सरकार का मानना है कि अगर इतनी शक्तिशाली तकनीक गलत हाथों में पड़ गई, तो इसका इस्तेमाल सरकारी नेटवर्क्स, बैंकों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों पर खतरनाक साइबर हमले करने के लिए किया जा सकता है।     कंपनी ने सरकार के इस फैसले को असंगत बताया है। एंथ्रोपिक का तर्क है कि जिन कमजोरियों का जिक्र किया जा रहा है, वे पहले से ही सार्वजनिक रूप से ज्ञात हैं और बाजार में मौजूद अन्य एआई मॉडल्स भी उन्हें आसानी से ढूंढ सकते हैं। कंपनी का दावा है कि उसने लॉन्च से पहले अमेरिकी और ब्रिटिश सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर इन मॉडल्स की हफ्तों तक कड़ी टेस्टिंग की थी। एंथ्रोपिक इसे एक 'गलतफहमी' मान रही है और अधिकारियों के साथ मिलकर इस प्रतिबंध को जल्द से जल्द हटाने की कोशिशों में जुटी है।     यह बैन रातों-रात नहीं लगा है। पिछले कुछ समय से अमेरिकी प्रशासन और एंथ्रोपिक के बीच मतभेद चल रहे हैं। कंपनी ने पहले अपने एआई का इस्तेमाल घरेलू निगरानी और स्वचालित हथियारों के लिए करने से साफ इनकार कर दिया था। इसके बाद पेंटागन ने एंथ्रोपिक को "सप्लाई-चेन रिस्क" तक घोषित कर दिया था। यह सब ऐसे समय हो रहा है जब कंपनी जल्द ही अपना आईपीओ (IPO) लाने की तैयारी कर रही है, जिससे इसकी वैल्यूएशन लगभग एक ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। विदेशी यूजर्स के लिए सेवा पूरी तरह बंद रिपोर्ट के अनुसार, एंथ्रोपिक के पास ऐसा कोई विश्वसनीय तंत्र नहीं है जिससे हर उपयोगकर्ता की राष्ट्रीयता की सटीक पहचान की जा सके। इसी कारण कंपनी को अमेरिका के बाहर के सभी उपयोगकर्ताओं के लिए इन मॉडलों की पहुंच बंद करनी पड़ी है। इस फैसले को सोशल मीडिया पर टेक उद्योग का ‘9/11’ तक कहा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यावसायिक एआई इतिहास में यह पहली बार है जब किसी अमेरिकी कंपनी के अत्याधुनिक और खुले बाजार में उपलब्ध मॉडल को अचानक वैश्विक स्तर पर प्रतिबंधित किया गया है। साइबर सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता विशेषज्ञों के अनुसार, ‘फेबल-5’ और ‘मायथोस-5’ जैसे उन्नत मॉडल साइबर सुरक्षा की कमजोरियों का विश्लेषण करने, मालवेयर जांचने, सैन्य रणनीति और जैविक अनुसंधान जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में उपयोग किए जा सकते हैं। यदि कोई एआई मॉडल सॉफ्टवेयर की कमियां खोजने और सिस्टम को तोड़ने के तरीके सुझाने में सक्षम हो जाए, तो वह साइबर हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। यही कारण है कि अमेरिकी सरकार ने इस पर कड़ी निगरानी और नियंत्रण लागू किया है। भारत के लिए दो बड़े सबक कोरोवर. एआई के फाउंडर और सीईओ अंकुश सभरवाल ने मीडिया को दिए इंटरव्यू में कहा कि इस फैसले से सबसे बड़ा आर्थिक नुकसान खुद एंथ्रोपिक और अमेरिका को होगा। उनका कहना है कि जब किसी कंपनी का सबसे उन्नत सॉफ्टवेयर वैश्विक बाजार में उपलब्ध नहीं रहेगा, तो उसके व्यापार और निर्यात पर सीधा असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी टेक उद्योग में बड़ी संख्या में भारतीय, चीनी और अन्य एशियाई मूल के डेवलपर्स काम करते हैं। ऐसे में पूरी तरह प्रतिबंध लागू करना व्यावहारिक चुनौती भी है। अंकुश सभरवाल के अनुसार, भारत के लिए इससे दो महत्वपूर्ण सबक निकलते हैं। पहला, भारतीय स्टार्टअप्स को केवल विदेशी एआई एपीआई पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। यदि भविष्य में जियो-ब्लॉकिंग या एक्सपोर्ट बैन लागू होते हैं, … Read more

स्लोवाकिया में पीएम मोदी का गर्मजोशी से स्वागत, पारंपरिक सम्मान के बीच दोस्ती को मिलेगी नई उड़ान

नई दिल्ली/ ब्रैटिस्लावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस के बाद अब स्लोवाकिया के दौरे पर पहुंच गए हैं. स्लोवाकिया की राजधानी ब्रातिस्लावा में भारतीय प्रधानमंत्री का शानदार स्वागत किया गया. स्लोवाकिया के गठन के बाद, वहां का दौरा करने वाले पीएम मोदी पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं. ब्रातिस्लावा पहुंचने पर स्लोवाकिया के विदेश और यूरोपीय मामलों के मंत्री जुराज ब्लानार ने प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया. पारंपरिक स्लोवाक रीति के अनुसार उन्हें ‘रोटी और नमक’ भेंट किया गया, जो वहां सम्मान, सद्भावना और आतिथ्य का प्रतीक माना जाता है।  पीएम मोदी आज स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे, जिसमें दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा और रणनीतिक सहयोग पर चर्चा होगी. इसके बाद पीएम मोदी ‘टॉम्ब ऑफ द अननोन सोल्जर’ पर पुष्पांजलि अर्पित कर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि देंगे. इसके अलावा वह डेन्यूब नदी पर आयोजित विशेष हाई-टी कार्यक्रम में भी शामिल होंगे. पीएम मोदी आज शाम राष्ट्रपति भवन में स्लोवाकिया के राष्ट्रपति के साथ बेहद अहम बैठक करने वाले हैं, जबकि दिन का समापन राष्ट्रपति की ओर से आयोजित राजकीय रात्रिभोज के साथ होगा।  प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत को और खास बनाने के लिए प्रसिद्ध स्लोवाक सांस्कृतिक समूह लुसनिका एन्सेम्बल ने ‘वंदे मातरम्’ की प्रस्तुति दी. इस दौरान भारतीय संस्कृति और स्लोवाक लोक परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिला. प्रधानमंत्री ने कलाकारों से मुलाकात भी की और उनकी प्रस्तुति की सराहना की. उनके इस दौरे को लेकर स्लोवाकिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों में भी काफी उत्साह है. पीएम मोदी के स्लोवाकिया पहुंचते ही भारतीय समुदाय के लोगों ने उनका ज़ोरदार स्वागत किया. लोगों ने मोदी-मोदी..वंदे मातरम..और भारत माता की जय के नारे लगाए।  स्लोवाकिया दौरे के बाद फिर फ्रांस लौटेंगे पीएम मोदी, करेंगे G-7 नेताओं से बात स्लोवाकिया दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी एक बार फिर फ्रांस लौटेंगे, जहां वे 16-17 जून को होने वाले जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. इसके अलावा वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सहित कई वैश्विक नेताओं के साथ सीधी बात करेंगे. इस दौरे के अंतिम चरण में मोदी 18 जून को पेरिस में आयोजित यूरोप के सबसे बड़े स्टार्टअप और टेक्नोलॉजी कार्यक्रम ‘वीवाटेक 2026’ में भी शामिल होंगे।  पीएम मोदी के दौरे से स्लोवाकिया संग रिश्तों को मिलेगी नई उड़ान पीएम मोदी की इस यात्रा के दौरान व्यापार, निवेश, नवाचार, ऑटोमोबाइल निर्माण, रेलवे क्षेत्र और नई प्रौद्योगिकी में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा. भारत और स्लोवाकिया हाल के वर्षों में आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहे हैं. अप्रैल 2025 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की स्लोवाकिया यात्रा और फरवरी 2026 में स्लोवाक राष्ट्रपति की भारत यात्रा के बाद यह दौरा संबंधों को नई गति देने वाला माना जा रहा है।  'सचमुच बहुत खास… ' ब्रातिस्लावा में मिले स्वागत पर बोले पीएम मोदी प्रधानमंत्री मोदी ने स्लोवाकिया पहुंचने के बाद सोशल मीडिया पर लिखा कि यह यात्रा भारत और स्लोवाकिया के संबंधों को नई ऊंचाई देने तथा सहयोग के नए क्षेत्रों की तलाश का अवसर है. उन्होंने राष्ट्रपति पेलेग्रिनी और प्रधानमंत्री फिको के साथ होने वाली बैठकों को लेकर उत्साह भी जताया. पीएम मोदी ने आज सुबह एक्स पोस्ट में लिखा, ‘कल शाम ब्रातिस्लावा में मिला स्वागत सचमुच बहुत खास था. मैं भारतीय समुदाय के स्नेह और आत्मीयता के लिए उनका आभारी हूं. ऐसे भाव उन मज़बूत रिश्तों को दर्शाते हैं जो हमारे लोगों को जोड़ते हैं और भारत-स्लोवाकिया की दोस्ती को और मजबूत बनाते हैं।   वंदे मातरम्, महादेव कीर्तन… पीएम मोदी की स्लोवाकिया यात्रा की बेहद खास शुरुआत प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत को बेहद खास बनाने के लिए प्रसिद्ध स्लोवाक सांस्कृतिक समूह लुसनिका एन्सेम्बल ने ‘वंदे मातरम्’ की प्रस्तुति दी. इस दौरान भारतीय संस्कृति और स्लोवाक लोक परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिला. प्रधानमंत्री ने कलाकारों से मुलाकात भी की और उनकी प्रस्तुति की सराहना की. समूह के कलाकारों ने इसे अपने जीवन का यादगार क्षण बताया।  पीएम मोदी ने ब्रातिस्लावा में स्लोवाक संगीत समूह ‘महादेव कीर्तन प्रोजेक्ट’ की आध्यात्मिक प्रस्तुति भी देखी. इसके अलावा प्रसिद्ध बाल लोकनृत्य दल ‘कोपानिचियारिक’ ने पारंपरिक स्लोवाक नृत्य प्रस्तुत कर भारतीय प्रधानमंत्री का स्वागत किया. सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर बढ़ती नजदीकियों की झलक भी दिखाई दी। 

किम जोंग उन शासन ने अमेरिका-जापान-साउथ कोरिया की बैठकों को बताया बेकार, धमकियों से नहीं बदलेंगे हालात

नई दिल्ली उत्तर कोरिया ने अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को लेकर अत्यंत सख्त और अडिग रुख अपनाते हुए लाल रेखा खींच दी है। किम जोंग उन के देश ने कहा है है कि परमाणु निरस्त्रीकरण को ‘अपरिवर्तनीय रूप से अंतिम रूप दिया गया मामला’ है। देश ने अमेरिका तथा उसके सहयोगी राष्ट्रों द्वारा लगातार की जा रही परमाणु निरस्त्रीकरण की मांगों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (KCNA) के माध्यम से जारी आधिकारिक बयान में उत्तर कोरियाई विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट रूप से कहा कि दूसरे पक्ष द्वारा उत्तर कोरिया के परमाणु हथियारों को निरस्त्र करने की मांग 'पूरी तरह तर्कहीन चर्चा' और ‘काल्पनिक दिवास्वप्न’ के अलावा कुछ नहीं है। इस दौरान प्रवक्ता ने जोर देकर कहा कि बाहरी दबाव, धमकियां या किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई से उत्तर कोरिया की परमाणु-सशस्त्र राष्ट्र के रूप में स्थापित स्थिति में कोई भी बदलाव नहीं लाया जा सकता। प्रवक्ता ने आगे कहा कि अमेरिका और उसकी सहयोगी सेनाओं द्वारा उत्तर कोरिया के खिलाफ बेबुनियाद बयानबाजी, निरंतर परमाणु खतरा पैदा करने के प्रयास और आक्रामक नीतियां हमारे देश की परमाणु हथियार संपन्न स्थिति को कभी भी प्रभावित नहीं कर सकतीं। परमाणु निरस्त्रीकरण अब एक अपरिवर्तनीय रूप से समाप्त और अंतिम रूप दिया गया मुद्दा है। 'स्थिति को कभी नहीं बदल पाएंगे' बयान में हाल ही में हुई दक्षिण कोरिया-अमेरिका और अमेरिका-जापान के उच्चस्तरीय वार्ताओं की कड़ी निंदा की गई है। इन वार्ताओं में प्योंगयांग के परमाणु कार्यक्रम को पूर्ण रूप से समाप्त करने पर विशेष जोर दिया गया था। उत्तर कोरियाई प्रवक्ता ने अमेरिका-जापान के बीच हुई एक्सटेंडेड डिटरेंस संबंधी वार्ता की भी आलोचना करते हुए कहा कि वाशिंगटन और टोक्यो द्वारा उत्तर कोरिया के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण की प्रतिबद्धता दोहराना व्यर्थ है। प्रवक्ता ने चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया कितनी भी बैठकें करें, कितनी भी बहस कर लें या संयुक्त बयान जारी कर लें, वे डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया (DPRK) की परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र के रूप में मौजूदा अपरिवर्तनीय स्थिति को कभी नहीं बदल पाएंगे। बता दें कि यह कड़ा बयान गुरुवार को दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच हुई द्विपक्षीय परमाणु परामर्श समूह (Nuclear Consultative Group) की बैठक के ठीक बाद जारी किया गया। इस बैठक में दोनों देशों ने उत्तर कोरिया के पूर्ण, सत्यापित और अपरिवर्तनीय परमाणु निरस्त्रीकरण (CVID) के साझा लक्ष्य को एक बार फिर दोहराया था। चीन के साथ संबंध इसी बीच, उत्तर कोरिया और चीन ने दोनों देशों के बीच ‘मैत्री, सहयोग और पारस्परिक सहायता संधि’ के 65 वर्ष पूरे होने के अवसर पर द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक मजबूत तथा गहरा करने की दृढ़ प्रतिबद्धता जताई है। चाइना डेली की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपनी दो दिवसीय उत्तर कोरिया यात्रा के दौरान प्योंगयांग के साथ आर्थिक सहयोग, बुनियादी ढांचागत विकास, सैन्य सहयोग और राजनयिक समन्वय को बढ़ाने पर जोर दिया। शी जिनपिंग ने उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन के साथ हुई महत्वपूर्ण मुलाकात में दोनों देशों के बीच ‘नए युग’ के संबंध स्थापित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में कितने भी बदलाव क्यों न आएं, चीन और उत्तर कोरिया के बीच पारंपरिक मित्रता और रणनीतिक साझेदारी को अटूट बनाए रखा जाएगा।

यूक्रेन युद्ध फंडिंग पर वार: ब्रिटिश सेना ने रूसी जहाज पर की छापेमारी, जांच जारी

लंदन  यूक्रेन युद्ध के लिए मॉस्को की फंडिंग रोकने के उद्देश्य से ब्रिटिश सेना ने एक बड़ा अभियान चलाते हुए पहली बार इंग्लिश चैनल में रूस के एक 'शैडो फ्लीट' (गुप्त बेड़े) के तेल टैंकर 'SMYRTOS' को रोका है। रविवार तड़के, ब्रिटेन के समुद्री क्षेत्र में छह घंटे चले एक अभियान के दौरान, रॉयल मरीन कमांडो और राष्ट्रीय अपराध एजेंसी के विशेष रूप से प्रशिक्षित अधिकारियों ने SMYRTOS नामक जहाज पर धावा बोला। इस रूसी जहाज पर चिनूक हेलीकॉप्टर और दूसरे एयरक्राफ्ट, एक फ्रिगेट और एक माइनहंटर की मदद से कब्जा किया। इस अभियान में मैरीटाइम एयर ग्रुप के विमानों, जिनमें चिनूक, मर्लिन एमके4 और वाइल्डकैट हेलीकॉप्टर शामिल थे, साथ ही आरएएफ के पी-8 निगरानी विमान और रॉयल नेवी के युद्धपोत एचएमएस सदरलैंड और एचएमएस लेडबरी ने भी सहयोग किया। रूस के लिए बड़ा झटका- कीर स्टार्मर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने X पर एक पोस्ट में कहा, "इस सफल ऑपरेशन ने रूस को एक और बड़ा झटका दिया है। यह यूक्रेन में पुतिन के युद्ध को हवा देने वालों को याद दिलाता है कि हम उन्हें छिपने नहीं देंगे।" इस ऑपरेशन के बाद ब्रिट्रेन की ओर से एक सरकारी बयान में कहा गया कि टैंकर को इंग्लैंड के दक्षिणी तट के पास एक सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है, जहां जांच जारी रहने तक उस पर निगरानी रखी जाएगी। यह ऑपरेशन फ्रांस के साथ करीबी तालमेल में किया गया है। पीएम कीर स्टार्मर ने दी कार्रवाई की अनुमति नेतृत्व की चुनौतियों से जूझ रहे और पिछले सप्ताह सैन्य खर्च के विवाद में अपने रक्षा सचिव को खो चुके प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने मार्च में ब्रिटिश सेना को रूसी जहाजों पर कार्रवाई करने और उन्हें रोकने की अनुमति दी थी। पश्चिमी सरकारों का आरोप है कि ये 'शैडो फ्लीट' जहाज कड़े पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद मॉस्को को अवैध रूप से तेल निर्यात करने में मदद करते हैं। नहीं पड़ा कोई खास असर हालांकि, रॉयटर्स के एक विश्लेषण के मुताबिक, प्रधानमंत्री के इस कड़े रुख का ब्रिटेन के जलक्षेत्र से गुजरने वाले रूसी जहाजों की संख्या पर तत्काल कोई खास असर नहीं पड़ा है। इस विश्लेषण से साफ हुआ कि इस नीतिगत घोषणा के पहले और बाद में ब्रिटेन के समुद्री क्षेत्र से गुजरने वाले रूसी जहाजों की संख्या लगभग समान बनी रही। पहली बार ऐसी कार्रवाई ब्रिटिश सेना ने रविवार को इंग्लिश चैनल में जिस कैमरून के झंडे के नीचे चल रहे जहाज को रोका, वह पहली बार यूक्रेन में रूस के युद्ध को फंड जुटाने में मदद किया था। । रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह कार्रवाई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कानून दोनों के अनुरूप की गई है। यह अभियान पहली बार है जब ब्रिटेन ने रूस के गुप्त बेड़े से जुड़े किसी पोत के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई का नेतृत्व किया है।

भारत-पाक परमाणु क्षमता पर नई रिपोर्ट, सिपरी ने किए अहम खुलासे

नई दिल्ली स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की जून 2026 में जारी नई रिपोर्ट ने दक्षिण एशिया की रणनीतिक सुरक्षा में एक ऐतिहासिक बदलाव को उजागर किया है. मई 2025 में हुए भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के उस परमाणु सुरक्षा कवच के भ्रम को तोड़ दिया है जिसके पीछे वह दशकों से छिपता आया था. इस सैन्य अभियान के दौरान भारतीय वायु सेना और सेना ने सीधे पाकिस्तान के उन चुनिंदा एयरबेस और मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाया, जो उसके परमाणु हथियारों के बुनियादी ढांचे से जुड़े माने जाते हैं. वैश्विक स्तर पर हथियारों और सैन्य सुरक्षा पर नजर रखने वाली संस्था सिपरी की इस आधिकारिक पुष्टि ने यह साफ कर दिया है कि भारत ने पाकिस्तान की परमाणु ब्लैकमेलिंग की नीति को हमेशा के लिए ध्वस्त कर दिया है. ऑपरेशन सिंदूर: जब भारत ने सीधे न्यूक्लियर ठिकानों को बनाया निशाना मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू किए गए भारत के ऑपरेशन सिंदूर को दशकों का सबसे बड़ा सैन्य टकराव माना गया है. सिपरी की 'इयरबुक 2026' में यह बात रिकॉर्ड पर लाई गई है कि भारत ने इस ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान के उन एयर और मिसाइल बेसों पर सटीक हमले किए, जिनके पास परमाणु अभियान चलाने की जिम्मेदारी थी. इसमें पाकिस्तान के कुख्यात किराना हिल्स क्षेत्र को भी निशाना बनाया गया, जिसके बारे में माना जाता है कि वहां पाकिस्तान के गुप्त परमाणु हथियार और मिसाइल सुविधाएं मौजूद हैं. भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के रणनीतिक नूर खान एयरबेस को भी निशाना बनाया, जो पाकिस्तान का मुख्य परमाणु कमांड और कंट्रोल सेंटर माना जाता है. पाकिस्तान हमेशा से यह दावा करता रहा है कि भारत की किसी भी बड़ी सैन्य कार्रवाई के जवाब में वह परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है, लेकिन भारत ने उसके परमाणु अड्डों पर ही पारंपरिक हमला कर इस खोखले दावे की हवा निकाल दी. परमाणु हथियारों की होड़ में भारत आगे: बढ़े कुल वॉरहेड्स सिपरी की रिपोर्ट में केवल सैन्य टकराव ही नहीं, बल्कि दोनों देशों के परमाणु हथियारों की संख्या के ताजा आंकड़े भी जारी किए गए हैं. जनवरी 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, भारत का परमाणु हथियारों का भंडार अब बढ़कर 190 वॉरहेड्स तक पहुंच गया है, जबकि इसके मुकाबले पाकिस्तान के पास 170 परमाणु हथियार हैं. भारत ने अपने परमाणु आधुनिकीकरण कार्यक्रम को चीन और पाकिस्तान दोनों की सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए तेज किया है, जिसके कारण पिछले एक साल में भारत के बेड़े में 10 नए परमाणु हथियार शामिल हुए हैं. हथियारों की संख्या में बढ़त ने भारत की रणनीतिक स्थिति को क्षेत्र में और अधिक मजबूत बना दिया है.    इतिहास में पहली बार: शांतिकाल में भारत ने तैनात किए परमाणु हथियार इस रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला और महत्वपूर्ण बिंदु भारत की परमाणु नीति में आया एक बड़ा रणनीतिक बदलाव है. भारत ने शांतिकाल के दौरान भी अपने कुछ परमाणु हथियारों (लगभग 12 वॉरहेड्स) को ऑपरेशनली तैनात स्थिति में रखा है. इससे पहले, भारत के सभी परमाणु हथियारों को हमेशा 'स्टोरेज' या रिजर्व में रखा जाता था, जिन्हें इस्तेमाल करने से पहले मिसाइलों के साथ असेंबल करना पड़ता था. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने संभवतः अपनी परमाणु-संचालित पनडुब्बी (SSBN) पर इन वॉरहेड्स को तैनात किया है, जो समुद्र के भीतर गश्त लगा रही है. यह बदलाव भारत की 'नो फर्स्ट यूज' को कायम रखते हुए भी दुश्मन को पलक झपकते ही 'तगड़ा और अचूक जवाबी हमला' देने की क्षमता को प्रदर्शित करता है.    साइबर वॉरफेयर का पहली बार खुला इस्तेमाल सिपरी 2026 की रिपोर्ट में एक और बेहद आधुनिक पहलू का जिक्र किया गया है. 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारत और पाकिस्तान दोनों ने पहली बार सक्रिय सैन्य संघर्ष के साथ-साथ 'साइबर ऑपरेशन्स' को भी पूरी तरह से शामिल किया था. 88 घंटे चले इस संक्षिप्त लेकिन तीव्र सैन्य टकराव में पारंपरिक मिसाइल हमलों (जैसे ब्रह्मोस मिसाइल) के साथ-साथ डिजिटल मोर्चे पर भी एक-दूसरे की सैन्य संचार प्रणालियों को ठप करने की कोशिशें की गईं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पहले भी यह संकेत दिया था कि भारत ने पाकिस्तान के परमाणु डर के गुब्बारे को फोड़ दिया है. अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'सिपरी' की स्वतंत्र रिपोर्ट ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि आधुनिक दौर की जंग में भारत का पलड़ा हर मोर्चे पर भारी रहा है.  

इनोवेशन भारत के DNA में है: नीस में पीएम मोदी ने स्टार्टअप और युवा शक्ति पर दिया जोर

नई दिल्ली फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ भारत इनोवेट्स के लॉन्च कार्यक्रम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संबोधित किया। रविवार को नीस में उन्होंने कहा कि इनोवेशन भारत के डीएनए में है। पीएम मोदी ने कहा, 'दुनिया में अलग-अलग देश एक दूसरे के साथ व्यापार करते हैं। अलग-अलग देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी भी होती है लेकिन कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जो साझा रुचि के साथ-साथ साझा विजन से भी ड्राइव होते हैं। भारत और फ्रांस का रिश्ता कुछ ऐसा ही है। इस रिश्ते भी जुड़ाव, दृढ़ विश्वास, नवाचार, प्रेरणा, साझा मूल्य, साझा विजन भी है। इसी रिश्ते की नींव पर बीते वर्षों में हमने साथ मिलकर नई पहल शुरू की है और वैश्विक चुनौतियों के समाधान खोजने का प्रयास किया है। हम दोनों देश हमेशा एक साथ चले हैं। आज हमें खुशी है कि हम भारत इनोवेट्स की शुरुआत भी फ्रांस के साथ कर रहे हैं। मैं अपने मित्र इमैनुएल मैक्रों का यहां आने के लिए धन्यवाद करता हूं।' पीएम मोदी ने कहा, 'इमैनुएल मैक्रों ने अभी भारत यात्रा के दौरान उन्होंने कहा था कि इस सदी की चुनौतियों के समाधान के लिए भारत और फ्रांस को एक साथ आगे आना होगा। आज मैं गर्व से कह सकता हूं कि ये पहल उसी दशा में एक कदम है। भारत इनोवेट्स हमारे टैलेंट और यूरोपियन कैपिटल के बीच एक ब्रिज बन रहा है। एक ऐसा प्लेटफॉर्म जहां भारत के यंग माइट्स को यूपरोपियन एक्सपर्ट से जुड़ने का अवसर मिल रहा है।' उन्होंने कहा कि आज 21वीं सदी का भारत बदलाव के एक बहुत बड़े दौर से गुजर रहा है। आज भारत में एक स्टार्टअप रिवॉल्यूशन हो रहा है। इस रिवॉल्यूशन में भारत का नौजवान एक नए मानसिकता के साथ मानवता के हित में समस्याओं के समाधान ढूंढ रहा है। हमारे नौजवानों के विश्व-स्तरीय समाधान को वैश्विक मंच पर लाने का माध्यम ही भारत इनोवेट्स है। भारत के भविष्य की एक झलक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'आज यहां इतने सारे युवा उद्यमी जुड़े हुए हैं। आपको यहां भारत के भविष्य की एक झलक दिखाई देती है। आपको भारत के युवाओं का आत्मविश्वास, आपको नए भारत की ऊर्जा दिखाई देती है। एक ऐसा भारत जो समाधान का उपभोक्ता नहीं बल्कि समाधान में योगदान देने वाला है। यहां कुछ लोग AI के जरिए ग्रामीण भारत की जिंदगी बदलने का काम कर रहे हैं, तो कुछ किसान की मदद के लिए सैटेलाइट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैं। आपकी क्षमता को देखते हुए, मैं कहूंगा कि भारत बड़े पैमाने पर और तेजी से इनोवेशन करता है। भारत टिकाऊ भविष्य के लिए इनोवेशन करता है और भारत पूरी दुनिया के लिए इनोवेशन करता है।'

ट्रैफिक और लंबी दूरी से राहत: क्यों बढ़ रहा है इंटीग्रेटेड टाउनशिप का ट्रेंड

नई दिल्ली  जरा सोच के देखिए आपको ऑफिस जाना हो और ट्रैफिक की टेंशन न हो। आपके बच्चे का स्कूल थोड़ी ही दूर पैदल रास्ते पर हो, कॉलोनी के गेट पर ही किराने की दुकान हो, सड़क के उस पार जिम हो, नीचे ही फार्मेसी हो और ऑफिस मेट्रो से या 10 मिनट की ड्राइव पर हो। वीकेंड पर मॉल, सिनेमा और रेस्टोरेंट सब पास ही हों। शहरों में रहने वाले ज्यादातर भारतीयों के लिए यह अब कोई कल्पना नहीं रही। यह जिंदगी जीने का एक नया तरीका बनता जा रहा है। तो '15-मिनट सिटी' की दुनिया में आपका स्वागत है। 15 मिनट सिटी का कॉन्सेप्ट इसका आइडिया बहुत आसान है। रोजमर्रा की जिंदगी के लिए जरूरी हर चीज काम, पढ़ाई, हेल्थकेयर, शॉपिंग, मनोरंजन और लोगों से मिलना-जुलना आपके घर से 15 मिनट की दूरी पर होनी चाहिए। चाहे आप पैदल जाएं, साइकिल से जाएं या पब्लिक ट्रांसपोर्ट से थोड़ी दूर का सफर करें। ऐसे देश में जहां रोजाना आने-जाने में आसानी से दो से तीन घंटे लगते हों वहां घर खरीदने वालों, डेवलपर्स और निवेशकों के बीच इस कॉन्सेप्ट को तेजी से अपनाया जा रहा है। JUSTO RealFintech Ltd. के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर पुष्पमित्र दास कहते हैं, "सच तो यह है कि बात एक ही चीज पर आकर रुकती है जिसे खरीदार अब बर्बाद नहीं कर सकते और वो है समय।" उन्होंने आगे कहा, रोजाना का सफर चुपचाप शहरी जिंदगी पर लगने वाला सबसे बड़ा टैक्स बन गया है। खरीदार अब सिर्फ यह नहीं पूछते कि फ्लैट कितना बड़ा है, बल्कि यह भी पूछते हैं कि ये पता उन्हें उनकी जिंदगी का कितना हिस्सा वापस देगा? यह बदलाव भारत के रिहायशी परिदृश्य को नया रूप दे रहा है। बदल रहा रहने का ढंग कई दशकों तक भारत में घर खरीदने वालों का ध्यान तीन चीजों पर रहा- लोकेशन, कीमत और कब्जा मिलने का समय। पर आज जरूरतों की लिस्ट बहुत लंबी हो गई है। लोग खुली जगहें, टहलने के रास्ते, पास में स्कूल, हेल्थकेयर की सुविधा, सुरक्षा, कम्युनिटी स्पेस, मनोरंजन की सुविधाएं और खरीदारी की आसानी चाहते हैं। इससे भी जरूरी बात यह है कि वे चाहते हैं कि ये सभी चीजें एक ही इकोसिस्टम में आपस में जुड़ी हों। दास के अनुसार, खरीदार अब सिर्फ चार दीवारों वाला घर नहीं, बल्कि एक खास तरह की जीवनशैली (लाइफस्टाइल) खरीद रहे हैं। हाइब्रिड वर्क ने घर को रोजमर्रा की जिंदगी का केंद्र बनाकर इस बदलाव को और तेज कर दिया है। यही एक वजह है कि अब बड़े शहरों में नए लॉन्च होने वाले घरों में प्रीमियम और लग्जरी घरों का हिस्सा काफी ज्यादा है। खरीदार ऐसे माहौल के लिए अपना बजट बढ़ाने को तैयार हैं जो उनके जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाए। इंटीग्रेटेड टाउनशिप बना पसंदीदा विकल्प शहरों में रहने वाले कई अमीर परिवारों के लिए 'इंटीग्रेटेड टाउनशिप' एक पसंदीदा विकल्प बनकर उभर रही हैं, क्योंकि इनमें एक ही मास्टर-प्लान वाले डेवलपमेंट में सुविधा, सुरक्षा, हरियाली और सामाजिक बुनियादी ढांचे जैसी सभी चीजें एक साथ मिलती हैं। इस सुविधा के लिए कीमत चुकानी पड़ती है और खरीदार इसके लिए पैसे देने को तैयार भी दिखते हैं। दास कहते हैं, "हां और वे खुशी-खुशी ऐसा करने को तैयार हैं, बशर्ते इसकी असल कीमत हो न कि यह सिर्फ ब्रोशर पर दिखाई गई कोई दिखावटी चीज हो।" इसका लॉजिक सीधा-सादा है। अगर स्कूल, फार्मेसी, कैफे, किराने की दुकानें और फिटनेस सेंटर पैदल दूरी पर हों तो वहां रहने वाले लोग हर हफ्ते अनगिनत घंटे बचा सकते हैं। बचाए गए उस समय का आर्थिक मूल्य है। आरएमआर ग्रुप की डेवलपमेंट मैनेजर शगुन कालरा के अनुसार, इन प्रोजेक्ट्स में रहने वाले लोग सिर्फ घर के लिए पैसे नहीं दे रहे हैं। वे उस समय के लिए पैसे दे रहे हैं जो वे हर दिन बचाते हैं। वह समय जो किराने का सामान लाने, बच्चों को स्कूल छोड़ने-लाने या मेडिकल जरूरतों के लिए आने-जाने में बर्बाद हो जाता। ऐसी जगहों पर कितनी हो सकती है फ्लैट की कीमत? मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु, चेन्नई और पुणे जैसे बड़े शहरों में एक अच्छी तरह से प्लान की गई इंटीग्रेटेड टाउनशिप में आम तौर पर 2-बीएचके अपार्टमेंट की कीमत 1.5 करोड़ रुपये से 3.5 करोड़ रुपये के बीच हो सकती है। पेंटहाउस की कीमत आम तौर पर लगभग 3.5 करोड़ रुपये से शुरू होती है और प्रीमियम डेवलपमेंट में यह आसानी से 5 करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकती है। ऐसे डेवलपमेंट में एक ही इकोसिस्टम के अंदर रेजिडेंशियल, ऑफिस, रिटेल, वेलनेस और हॉस्पिटैलिटी जैसी सुविधाएं शामिल होती हैं। जैसे-जैसे शहरी जमीन कम होती जा रही है और भीड़-भाड़ बढ़ रही है, कालरा का मानना है कि समय के साथ यह प्रीमियम और मजबूत हो सकता है। शहरों की योजना बनाने वाले अक्सर समय की कमी की बात करते हैं। शहर में रहने वाला आम व्यक्ति घर, काम की जगह, स्कूल, स्वास्थ्य सुविधाओं और शॉपिंग की जगहों के बीच आने-जाने में घंटों बिताता है। किन सिद्धातों पर आधारित है ये कॉन्सेप्ट '15-मिनट सिटी' का कॉन्सेप्ट ठीक इसी समस्या को हल करने की कोशिश करता है। कालरा के अनुसार, सफल प्रोजेक्ट्स तीन अहम डिजाइन सिद्धांतों पर आधारित होते हैं। पहला है मिक्स्ड-यूज प्लानिंग। इसमें घर, ऑफिस, स्कूल, क्लिनिक और दुकानें अलग-अलग जोन में बंटे होने के बजाय एक ही इलाके में साथ-साथ होते हैं। दूसरी बात है रोजमर्रा की सुविधाओं की सोच-समझकर की गई प्लानिंग। ग्रॉसरी स्टोर, फार्मेसी, डायग्नोस्टिक सेंटर, क्रेच और प्राइमरी स्कूल जान-बूझकर टाउनशिप के मास्टर प्लान में शामिल किए गए हैं। तीसरी बात है ट्रांसपोर्ट इंटीग्रेशन। कालरा कहते हैं, "कोई भी टाउनशिप उन सभी सुविधाओं की नकल नहीं कर सकती जो एक शहर देता है।" इसका मकसद यह पक्का करना है कि रोजमर्रा की जरूरतें पैदल दूरी पर हों, जबकि कभी-कभार होने वाली जरूरतें जैसे स्पेशलिस्ट अस्पताल, यूनिवर्सिटी या मुख्य बिजनेस इलाके मेट्रो सिस्टम या दूसरे मास ट्रांजिट नेटवर्क के जरिए आसानी से पहुंच में हों। ये सभी चीजें मिलकर लंबी दूरी की यात्रा की जरूरत को काफी हद तक कम कर देती हैं। कंपनियों को भी यह आइडिया क्यों पसंद है? '15-मिनट सिटी' का कॉन्सेप्ट सिर्फ रिहायशी रियल एस्टेट को ही नहीं बदल रहा है, बल्कि यह कंपनियों के वर्कप्लेस के बारे … Read more