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ममता बनर्जी ने कई नेताओं पर कार्रवाई की, यूथ विंग अध्यक्ष सायोनी घोष हटाई गईं

कोलकाता ममता बनर्जी की TMC के ज्यादातर विधायकों और सांसदों ने बगावत कर ली है और नया गुट बना लिया है। TMC बनने के बाद से ममता बनर्जी के ऊपर आया यह सबसे बड़ा संकट है। विधानसभा में करीब 64 विधायक अलग हो गए, जबकि लोकसभा में 20 सांसदों ने नया गुट बनाकर एनडीए को समर्थन देने का फैसला किया है। जिन सांसदों ने बगावत की है, उसमें एक समय सबसे ममता और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी की करीबी नेता मानी जाने वाली सायोनी घोष भी शामिल हैं। अब ममता बनर्जी ने सायोनी को बड़ा झटका दिया है। उन्हें तृणमूल यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष के पद से हटा दिया गया है। सायोनी घोष वही नेता हैं, जिन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान काबा-मदीना वाला गीत गाकर सुर्खियां बंटोरी थीं। टीएमसी की शनिवार को वर्किंग कमेटी की बैठक हुई। इसमें जिन नेताओं ने विरोधी गुट का दामन थाम लिया था, उन्हें उनके पदों से हटा दिया गया। सायोनी के अलावा, सुदीप बंद्दोपाध्याय को कोलकाता उत्तर के पार्टी प्रमुख पद से हटा दिया गया। उनकी जगह कुणाल घोष को यह जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा, माला रॉय को भी वर्किंग कमेटी से हटा दिया गया है। ममता बनर्जी के घर पर हुई बैठक के बाद, पार्टी सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा, "यह वर्किंग कमेटी की बैठक थी। सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव ने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है, इसलिए दो पद खाली हो गए। सुदीप बंद्योपाध्याय, माला रॉय और एक और व्यक्ति, जो दूसरी तरफ चले गए हैं और अलग गुट बना रहे हैं, उन्हें वर्किंग कमेटी से हटा दिया गया है। सौगत रॉय और ज्योतिप्रिय मल्लिक को वर्किंग कमेटी में शामिल किया गया है। सुदीप बंद्योपाध्याय की जगह कुणाल घोष को कोलकाता उत्तर का अध्यक्ष बनाया गया है। सायोनी घोष को तृणमूल युवा कांग्रेस के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया है। 4000 EVM का जलना एक गंभीर मामला है, हम इसे आगे उठाएंगे।" ममता के एक और सांसद हुए बागी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद और ममता के करीबी नेताओं में गिने जाने वाले सुदीप बंद्योपाध्याय भी बागी हो गए। उन्होंने शनिवार को नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की। उनके साथ पार्टी की बागी सांसद शताब्दी रॉय भी थीं। बंद्योपाध्याय और यादव की मुलाकात ने पार्टी के भीतर जारी संकट के बीच नई राजनीतिक अटकलों को जन्म दिया, जिससे यह सवाल उठने लगे कि क्या वरिष्ठ सांसद बंद्योपाध्याय बागी गुट में शामिल हो सकते हैं। सूत्रों ने बताया कि ये अटकलें तब और तेज हो गईं जब बंद्योपाध्याय ने यादव से मुलाकात के बाद राष्ट्रीय राजधानी में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी कथित तौर पर मुलाकात की।

TMC संकट गहराया: सांसदों का NDA समर्थन की ओर झुकाव

पश्चिम बंगाल TMC (तृणमूल कांग्रेस) के 20 से ज्यादा सांसद पार्टी छोड़ने की कगार पर हैं. ये सांसद अब खुद को एक अलग गुट बनाना चाहते हैं और NDA (BJP) का साथ देने की बात कर रहे हैं. सोमवार को ये सब लोकसभा स्पीकर से मिलने दिल्ली जा रहे हैं. TMC यानी ममता बनर्जी की पार्टी में इस वक्त बड़ा घमासान चल रहा है. पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद से पार्टी के अंदर खींचतान बढ़ती जा रही है. बागी सांसदों का दावा क्या है? TMC सांसद काकोली घोष दस्तीदार, जो इस बागी गुट की लीडर बन गई हैं, उन्होंने कहा कि उनके साथ अब 22 सांसद हैं. इससे पहले उन्होंने 20 का दावा किया था. दो नए सांसद और जुड़े हैं, लेकिन उनके नाम अभी नहीं बताए गए. काकोली ने कहा कि जब वो लोग औपचारिक रूप से शामिल होंगे, तभी नाम सामने आएंगे. स्पीकर से मुलाकात क्यों? सोमवार को ये सांसद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मिलने वाले हैं. मांग यह है कि उन्हें एक अलग संसदीय गुट के तौर पर मान्यता दी जाए, यानी वो TMC से अलग एक नया पार्लियामेंट्री ब्लॉक बनाना चाहते हैं. काकोली ने खुद कोलकाता एयरपोर्ट पर मीडिया से यह बात कही. 19 सांसदों के दस्तखत वाला दस्तावेज शुक्रवार को एक कागज सामने आया जिस पर 19 TMC सांसदों के दस्तखत थे. इन नामों में काकोली घोष दस्तीदार, सताब्दी रॉय, बापी हल्दर, शर्मिला सरकार, प्रसून बनर्जी, जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया, असित माल, अरूप चक्रवर्ती, कालीपद सोरेन, दीपक अधिकारी यानी देव, जून मालिया, पार्थ भौमिक, खलीलुर रहमान, अबू ताहेर खान, यूसुफ पठान, मिताली बाग और माला रॉय शामिल हैं. रचना बनर्जी और सायनी घोष के दस्तखत भी अलग से दिखे. ये सभी स्पीकर को चिट्ठी लिख चुके हैं कि उन्हें काकोली की अगुवाई में अलग गुट माना जाए. हालांकि यह साफ नहीं है कि स्पीकर के दफ्तर को यह चिट्ठी मिली या नहीं. दस्तखतों की असलियत की भी कोई पक्की पुष्टि नहीं हुई है. NDA का साथ देने की बात इस बागी गुट ने यह भी कहा है कि वो केंद्र में BJP की अगुवाई वाली NDA सरकार को समर्थन देंगे. यानी यह सिर्फ पार्टी से अलग होना नहीं है, बल्कि सीधे विरोधी खेमे में जाने की तैयारी है. दिल्ली में मीटिंग और शुवेंदु अधिकारी बागी सांसदों की एक मीटिंग पहले कोलकाता में होनी थी, लेकिन अब वो दिल्ली शिफ्ट हो गई है. पश्चिम बंगाल के CM शुवेंदु अधिकारी के इस मीटिंग में आने की उम्मीद थी, लेकिन एक सरकारी काम की वजह से वो शायद नहीं आ पाएंगे. कौन नहीं है इनके साथ? TMC के कई बड़े नेता इस बागी गुट में नहीं हैं. अभिषेक बनर्जी, कल्याण बनर्जी, सौगत रॉय, महुआ मोइत्रा, किर्ती आजाद, शत्रुघ्न सिन्हा, प्रतिमा मंडल और सज्दा अहमद के दस्तखत उस कागज पर नहीं थे. सुदीप और भूपेंद्र की मुलाकात बीच में एक और दिलचस्प बात हुई. TMC के वरिष्ठ सांसद सुदीप बंदोपाध्याय शनिवार को दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मिले. इससे अटकलें लगने लगीं कि क्या सुदीप भी बागी गुट में शामिल हो सकते हैं. हालांकि अभी इस बारे में कुछ पक्का नहीं कहा जा सकता. कुल मिलाकर ऐसा है कि TMC के 20 से ज्यादा सांसद ममता बनर्जी से बगावत कर एक अलग गुट बनाने की कोशिश में हैं. वो NDA का साथ देना चाहते हैं और स्पीकर से मान्यता मांग रहे हैं. पार्टी के भीतर बड़ी टूट देखने को मिल रही है.

संवैधानिक संशोधन बिल पर नजर, एनडीए बढ़ा रहा है संख्याबल

नई दिल्ली  तृणमूल कांग्रेस में बगावत से संसद में बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। बीजेपी सरकार अहम संवैधानिक संशोधन बिल पास कराने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने की कोशिश कर रही है। हालांकि राज्यसभा चुनाव का मौजूदा दौर एनडीए को दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े के करीब पहुंचने में मदद करेगा, लेकिन लोकसभा में टीएमसी के पाला बदलने के बावजूद वह अभी भी 363 के जादुई आंकड़े से काफी दूर है। क्या कहता है गणित? सूत्रों का कहना है कि झारखंड और मिजोरम में हो रहे राज्यसभा चुनावों में निर्दलीय सीटों पर जीत हासिल करके एनडीए अपनी मौजूदा 148 सांसदों की संख्या में तीन सीटें और जोड़ लेगा। टीएमसी के तीन सांसदों के इस्तीफे और उपचुनावों के बाद एनडीए पश्चिम बंगाल से तीनों सीटें हासिल कर लेगा, जिससे उसकी संख्या 154 हो जाएगी, जो उच्च सदन में दो-तिहाई बहुमत से नौ कम है। चूंकि उच्च सदन में टीएमसी के और सांसदों के इस्तीफे की संभावना है, इसलिए एनडीए 163 का आंकड़ा छू सकता है, जिससे उसे सभी संवैधानिक संशोधन बिल पास कराने के लिए जरूरी संख्या बल मिल जाएगा। नवंबर में फिर घट जाएगी संख्या नवंबर तक सत्ताधारी गठबंधन की ताकत कम हो सकती है क्योंकि उत्तर प्रदेश से 10 सांसद रिटायर होंगे और राज्य विधानसभा में अपनी बेहतर संख्या के कारण समाजवादी पार्टी राज्यसभा में कुछ सीटें हासिल कर सकती है। विपक्षी गठबंधन के 64 सांसद विपक्षी इंडी गठबंधन के पास अभी 64 सांसद हैं, क्योंकि डीएमके (आठ सांसदों के साथ) इससे बाहर हो गई है और आप (तीन सांसदों के साथ) ने खुद को इस समूह से अलग कर लिया है। वाईएसआरसीपी और बीजेडी जैसी निर्दलीय पार्टियां (जिनके पास क्रमशः सात और छह सीटें हैं) और एमडीएमके राज्यसभा में किसी भी तरफ जा सकती हैं। हालांकि, लोकसभा में एनडीए की संख्या 213 तक पहुंच सकती है, क्योंकि टीएमसी के लगभग 20 और सांसद एक अलग समूह बनाकर इसे समर्थन दे सकते हैं। पार्टी छोड़ने वाले ये सांसद सोमवार को स्पीकर ओम बिरला से मिलेंगे और टीएमसी से अलग होने की घोषणा करने वाला पत्र उन्हें सौंपेंगे। लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत पाने के लिए 363 सांसदों की जरूरत होती है।

वित्त मंत्री बोलीं—भारत सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, विपक्ष संकट का माहौल बनाता है

नई दिल्ली केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा है। वित्त मंत्री ने कहा कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश में भारत और उसके लोगों की उपलब्धियों को कमतर आंकते हैं। सीतारमण ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी कोविड-19 वैश्विक महामारी और पश्चिम एशिया में संघर्ष जैसे बड़े संकटों के दौरान भी भारत की उपलब्धियों को नजरअंदाज करते हैं। देश के सामने ऐसा कोई संकट नहीं है, जैसा राहुल गांधी पेश कर रहे हैं। 'लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष जब भी बोलते हैं, तो…' प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश में बीजेपी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में बेंगलुरू में ‘विकसित भारत संकल्प समावेश’ का आयोजन किया गया है। इसमें पार्टी पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए निर्मला सीतारमण ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष जब भी बोलते हैं, तो हर चीज की केवल आलोचना करते हैं और भारत के लोगों की उपलब्धियों को कमतर आंकते हैं। उन्हें लगता है कि ऐसा करके वह प्रधानमंत्री मोदी या केंद्र सरकार को कमतर दिखा रहे हैं। बार-बार कहते हैं बड़ा संकट आने वाला है लेकिन कोई संकट नहीं आया: सीतारमण सीतारमण ने कहा कि राहुल गांधी लगातार कहते रहते हैं कि अगले कुछ सप्ताह में सब कुछ ढह जाएगा। नेता प्रतिपक्ष बार-बार कहते हैं कि कोई बड़ा संकट आने वाला है, लेकिन भारत के सामने ऐसा कोई संकट नहीं है। उन्होंने कहा कि इसके विपरीत, तिमाही दर तिमाही और साल दर साल भारत सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना हुआ है। जब भी कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष (राहुल गांधी) लोकसभा में बोलते हैं, तो उनका लहजा हर चीज की बुराई करने और भारत के लोगों की उपलब्धियों को कमतर आंकने वाला होता है। भारत पर कोई आपदा नहीं आने वाली है। IMF अप्रैल-मई में अपने आकलन के दौरान और फिर अक्टूबर में डेटा जारी करके बताता है कि भारत अभी भी सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था क्यों बना हुआ है। भले ही मिडिल ईस्ट में संकट चल रहा हो और होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावटें आ रही हों। बात सिर्फ कच्चे तेल या LPG की कीमत की नहीं है, इन सभी चुनौतियों के बावजूद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि सप्लाई में कोई रुकावट न आए। अर्थव्यवस्था और आम घरों की जरूरतों पर इसी तरह का ध्यान दिया जा रहा है। पश्चिम एशिया संकट, फ्यूल का जिक्र कर क्या बोलीं वित्त मंत्री केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत के सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था होने की बात सरकार नहीं कह रही, बल्कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़े और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) भी यही कहते हैं। सीतारमण ने पश्चिम एशिया संकट का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने यह सुनिश्चित किया कि ईंधन की आपूर्ति में कोई बाधा न आए। वित्त मंत्री ने अपनी बात स्पष्ट करने के लिए पश्चिम एशिया से ईंधन की ढुलाई में आने वाली चुनौतियों का भी उल्लेख किया।

ममता बनर्जी ने संगठन में किया बदलाव, महिला मोर्चे की जिम्मेदारी बदली

पश्चिम बंगाल बंगाल में चुनाव के बाद टीएमसी में शुरू हुए बड़े संकट के बीच ममता बनर्जी पार्टी में बड़े बदलाव करने में जुटी हैं। उन्होंने चुनाव के दौरान 'काबा-मदीना' और अन्य गीत गाकर जनता को लुभाने की कोशिश करने वाली सायोनी घोष को युवा मोर्चे के अध्यक्ष पद से हटा दिया है और यह जिम्मेदारी अर्णब बनर्जी को दे दी है। सायोनी घष जादवपुर से सांसद हैं। उन्हें एक सप्ताह पहले ही युवा मोर्चे का अध्यक्ष बनाया गाय था। सायोनी घोष भी बागी गुट में शामिल सूत्रों की मानें तो ममता बनर्जी ने महिाल मोर्चे की अध्यक्ष को भी बदल दिया है।कोलकाता दक्षिण से सांसद माला रॉय अब तक यह जिम्मेदारी संभाल रही थीं। अब ममता बनर्जी ने नाडिया जिले की कालीगंज सीट से विधायक आलिफा अहमद को महिला मोर्चे का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया है। बताया जा रहा है कि सायोनी और माला रॉय दोनों ही बागी नेताओं के साथ शामिल हो गई हैं। बताया जा रहा है कि टीएमसी के बागी सांसद सोमवार को लोकसभा स्पीकर से मिलकर अपने गुट को 'वास्तविक टीएमसी' घोषित करने का दावा पेश कर सकते हैं। लोकसभा में एनडीए के समर्थन को तैयार बागी गुट जानकारी के मुताबिक सांसद संदीप बंधोपाध्याय भी बागी गुट में शामिल हो गए हैं। टीएमसी के 28 लोकसभा सांसद हैं जिनमें से 20 बागी गुट में शमिल हैं। सांसद काकोली गोष दस्तीदार ने तो यहां तक कह दिया है कि उनके गुट को टीएमसी का तमगा मिलते ही वे संसद में बीजेपी की अगुआई वाली एनडीए सरकार का समर्थन कर देंगे। बता दें कि विधानसभा में विधायकों की बगावत के बाद ही ममता बनर्जी ने 5 जून को संगठन समिति में बदलाव किए थे। ममता बनर्जी ने पहले की सारी समितियों को भंग कर दिया था और एक नया स्टरक्चर बनाया था। वहीं ममता बनर्जी ने अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव के पद पर बरकरार रखा था। एक राज्यसभा सांसद ने कहा, ममता बनर्जी ने जिन लोगों को दूध और शहद खिलाया वही आज उनके लिए सांप बन गए हैं। बालाघाट से सांसद कुणाल घोष को पार्टी के उत्तर कोलकाता संगठन का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। पहले इस पद पर संदीप बंधोपाध्याय थे। चर्चा यह भी चल रही है कि ममता बनर्जी टीएमसी के कांग्रेस में विलय की घोषणा कर सकती हैं। हालांकि डेरेक ओ ब्रायन ने इस खबर को सिरे से खारिज कर दिया है। ब्रायन ने कहा, 'मैं टीएमसी के किसी दूसरी पार्टी में विलय की इस फर्जी खबर को खारिज करना चाहता हूं। यह निराधार है। हां, मेरे दोस्त केसी वेणुगोपाल ने इसके लिए बिल्कुल सही शब्द इस्तेमाल किया है।'

TMC सांसद अभिषेक बनर्जी पर राहत राशि में अनियमितता के गंभीर आरोप, CID जांच भी तेज

पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल में सियासी घमासान के बीच भाजपा के एक नेता ने शनिवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और सांसद अभिषेक बनर्जी पर अम्फान चक्रवात राहत कोष में 200 करोड़ रुपये से अधिक की कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. भाजपा नेता अभिजीत दास बॉबी ने डायमंड हार्बर के बिष्णुपुर थाने में 17 पन्नों की शिकायत सौंपी. इस बीच पश्चिम बंगाल सीआईडी ने जाली हस्ताक्षर करने के मामले में अभिषेक बनर्जी को पूछताछ के लिए एक और नोटिस जारी किया है. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2020 में आए सुपर साइक्लोन अम्फान के पीड़ितों के लिए जारी राहत राशि के वितरण में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां की गईं. इसमें डुप्लीकेट और संदिग्ध एंट्री, एक ही मोबाइल नंबर और बैंक खाते के जरिए कई लाभार्थियों को भुगतान और एक ही आवासीय भवन से कई लोगों को लाभार्थी दिखाने जैसे आरोप शामिल हैं. अभिजीत दास बॉबी ने कहा, 'आज की शिकायत में मैंने विशेष रूप से डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत बिष्णुपुर के दो ब्लॉकों का उल्लेख किया है, जहां लगभग 57 हजार लाभार्थियों के बीच 57.86 करोड़ रुपये वितरित किए गए थे.' डायमंड हार्बर लोकसभा सीट से दो बार अभिषेक बनर्जी के खिलाफ चुनाव लड़ चुके बॉबी ने आरोप लगाया कि राहत राशि का बड़ा हिस्सा कथित तौर पर तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व द्वारा हड़प लिया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय सांसद अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व में यह खेल हुआ और इसमें ब्लॉक विकास अधिकारियों (BDO) और तत्कालीन अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (विकास) सहित कई सरकारी अधिकारी भी शामिल थे. 2020 में आया था अम्फान चक्रवात बता दें कि 20 मई 2020 को आए अम्फान चक्रवात ने पश्चिम बंगाल के कई जिलों में भारी तबाही मचाई थी. पूर्वी मेदिनीपुर और उत्तर एवं दक्षिण 24 परगना जिलों में व्यापक नुकसान हुआ था और 96 लोगों की मौत हुई थी. भाजपा नेता ने दावा किया कि पूरे डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के आंकड़ों के आधार पर करीब 238 करोड़ रुपये के राहत घोटाले की आशंका है. उन्होंने मामले की जांच के लिए एसआईटी (SIT) गठित करने की मांग की है. अभिजीत दास बॉबी ने कहा कि जल्द ही डायमंड हार्बर क्षेत्र के अन्य थानों में भी इसी तरह की शिकायतें दर्ज कराई जाएंगी. साथ ही उन्होंने पूरे खर्च का फॉरेंसिक ऑडिट कराने और प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जांच कराने की मांग की. अभिषेक बनर्जी की भूमिका पर क्यों उठे सवाल? शिकायत में कहा गया है कि सार्वजनिक राहत पोर्टल से डाउनलोड किए गए आधिकारिक दस्तावेजों में हजारों स्वीकृत आवेदनों के 'Recommended By' कॉलम में अभिषेक बनर्जी और उनके कार्यालय का नाम बार-बार दिखाई देता है. इससे यह सवाल उठता है कि राहत वितरण प्रक्रिया में उनकी भूमिका कितनी व्यापक थी और क्या उनके कार्यालय से जारी सिफारिशों ने सामान्य प्रशासनिक और भौतिक सत्यापन प्रक्रिया को प्रभावित किया. ममता बनर्जी सरकार ने अम्फान प्रभावित लोगों के लिए 6,250 करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा की थी और पीड़ितों के खातों में सीधे धनराशि भेजने का वादा किया था. इसके लिए अम्फान साइक्लोन राहत कोष भी बनाया गया था. वहीं केंद्र सरकार ने नेशनल डिजास्टर​ रिलीफ फंड (NDRF) से अम्फान राहत और पुनर्वास के लिए 3,077 करोड़ रुपये मंजूर किए थे. राज्य सरकार ने पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 20,000 रुपये और आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 5,000 रुपये की सहायता देने की व्यवस्था की थी. हालांकि आरोप है कि घरों के पुनर्निर्माण के लिए जारी राशि का कुछ हिस्सा पंचायत प्रतिनिधियों और उनके करीबी लोगों के खातों में पहुंच गया. अम्फान राहत वितरण को लेकर वर्ष 2020 में राज्य के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन भी हुए थे. इसके बाद ममता सरकार ने तृणमूल से जुड़े कुछ पंचायत पदाधिकारियों को निलंबित किया था और सुधारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया था. एक मोबाइल नंबर से कई लाभार्थियों को भुगतान भाजपा नेता ने अपनी शिकायत में दावा किया है कि भ्रष्टाचार एक सुनियोजित और संस्थागत तंत्र के जरिए किया गया. उन्होंने ऐसे दस्तावेज भी संलग्न किए हैं, जिनमें कथित तौर पर एक ही मोबाइल नंबर का इस्तेमाल 14 लाभार्थियों के लिए किया गया और उन सभी को मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने के आधार पर 20-20 हजार रुपये दिए गए. इसके अलावा चार अन्य मोबाइल नंबरों के जरिए भी 6 से 9 लाभार्थियों को राहत राशि मिलने का आरोप लगाया गया है. बॉबी ने कहा, 'एक ही मोबाइल नंबर का इस्तेमाल अलग-अलग गांवों के लाभार्थियों के लिए किया गया. ये सभी विसंगतियां सरकारी धन के दुरुपयोग की ओर इशारा करती हैं.' वहीं तृणमूल कांग्रेस के सूत्रों ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है. पार्टी के एक सूत्र ने कहा, 'यह हमारे नेता के खिलाफ भाजपा की राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई है. हम इसका कानूनी तरीके से मुकाबला करेंगे.'

महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल: उद्धव ठाकरे के 6 सांसदों के बागी होने के दावे, फिर चर्चा में शिंदे फैक्टर

मुंबई संसद में अपना संख्या बल बढ़ाने की कोशिशों में जुटे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी बगावत से नई उम्मीदें दिखाई देने लगी हैं. टीएमसी के बागी गुट ने 19 लोकसभा सांसदों का समर्थन हासिल करने का दावा किया है और ये सभी बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए का समर्थन करने को तैयार हैं. अगर यह दावा सही साबित होता है तो संसद में NDA की ताकत बढ़ेगी और उसके लिए कई महत्वपूर्ण विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाना आसान हो सकता है।  दरअसल, पिछले संसद सत्र में एनडीए को संविधान संशोधन से जुड़े कुछ अहम विधेयकों पर बहुमत नहीं मिलने के कारण मुश्किलों का सामना करना पड़ा था. ऐसे में गठबंधन अब विपक्षी दलों के सांसदों को अपने पक्ष में लाने की संभावनाएं तलाश रहा है. सूत्रों का कहना है कि टीएमसी के बाद अब शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पर भी नजरें टिक गई हैं।  उद्धव सेना में टूट की अटकलें तेज रिपोर्ट के मुताबिक, राजनीतिक गलियारों में ये चर्चा जोरों पर है कि महाराष्ट्र में महायुति की विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत के बाद से ही उद्धव ठाकरे की पार्टी में असंतोष गहराता जा रहा है. अब यह चर्चा फिर तेज हो गई है कि पार्टी के कुछ सांसद अलग राह चुन सकते हैं. लोकसभा में शिवसेना (UBT) के कुल 9 सांसद हैं और दल-बदल कानून से बचने के लिए कम से कम 6 सांसदों को किसी अन्य दल में विलय करना होगा।  रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि अगर ऐसा कोई कदम उठता है तो उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना सबसे स्वाभाविक विकल्प हो सकती है. माना जा रहा है कि शिंदे ने पिछले कुछ वर्षों में राज्यभर में अपना संगठनात्मक आधार मजबूत किया है और कई स्थानीय नेताओं को अपने साथ जोड़ने में सफलता हासिल की है. वहीं दूसरी तरफ उद्धव ठाकरे का प्रभाव अब मुख्य रूप से मुंबई और कुछ शहरी इलाकों तक ही सिमट कर रह गया है।  ‘विचारधारा बदलने का खामियाजा भुगत रहे उद्धव’ शिवसेना (यूबीटी) गुट के सांसदों के एकनाथ शिंदे के संपर्क में होने की खबरों पर बीजेपी नेता राम कदम ने बड़ा बयान दिया है. ANI से बातचीत में कदम ने कहा कि उद्धव ठाकरे विचारधारा बदलने का खामियाजा पहले ही भुगत चुके हैं और आगे भी भुगतेंगे. उन्होंने कहा कि उनके सभी नेता निश्चित रूप से उन्हें छोड़ देंगे. राम कदम ने कहा, ‘जिस तरह ममता बनर्जी ने अपनी विचारधारा बदली और उसका असर उद्धव ठाकरे पर भी पड़ा और उन्होंने भी अपनी विचारधारा बदल ली, तो विचारधारा बदलने का नुकसान उद्धव ठाकरे पहले भी झेल चुके हैं और भविष्य में भी झेलेंगे. उनके सभी नेता उन्हें छोड़ देंगे, यह तय है।  360 के आंकड़े पर NDA की नजर सूत्रों के मुताबिक, संसद में एनडीए की आगे की रणनीति काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि वह लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े के कितना करीब पहुंच पाता है. वर्तमान में 540 सदस्यीय लोकसभा में तीन सीटें खाली हैं और किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए 360 सांसदों के समर्थन की जरूरत होती है. टीएमसी में संभावित टूट और विपक्षी दलों के कुछ सांसदों के समर्थन की संभावनाओं ने एनडीए को उम्मीद दी है कि वह भविष्य में अपने संख्या बल को और मजबूत कर सकता है। 

सुप्रीम कोर्ट पर टिप्पणी से घिरे दिग्विजय सिंह, इंदौर महापौर ने की कानूनी कार्रवाई की मांग

भोपाल  मध्य प्रदेश में तीन राज्यसभा सीटों पर भाजपा के कब्जे के बाद शुरू हुई राजनीतिक जंग अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गई है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने के बाद कांग्रेस जहां दिल्ली में विरोध प्रदर्शन कर रही है, वहीं इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। महापौर ने भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को एक शिकायती पत्र लिखकर दिग्विजय सिंह के खिलाफ देश की सर्वोच्च अदालत की आपराधिक अवमानना का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। 'चोरी में सुप्रीम कोर्ट भी शामिल' बयान पर आपत्ति महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने सॉलिसिटर जनरल को लिखे पत्र में आरोप लगाया है कि दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस उम्मीदवार का नामांकन रद्द होने को मिली-जुली सीट चोरी करार दिया था। सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है, जिसकी ट्रांसक्रिप्ट भी शिकायत के साथ संलग्न की गई है। वीडियो में कांग्रेस नेता कथित तौर पर कह रहे हैं कि, 'इस चोरी में सभी शामिल हैं। न केवल राज्य बल्कि केंद्र भी, चुनाव आयोग भी और मुझे कहना पड़ रहा है कि सुप्रीम कोर्ट भी।' दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस की याचिका पर सुनवाई में देरी को लेकर अदालत पर यह टिप्पणी की थी। कंटेम्प्ट एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग इंदौर मेयर ने पत्र में स्पष्ट किया है कि दिग्विजय सिंह का यह बयान माननीय न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला और अदालत को बदनाम करने की श्रेणी में आता है। उन्होंने मांग की है कि कांग्रेस नेता के खिलाफ 'कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट 1971' के सेक्शन 15(1)(बी) के तहत सर्वोच्च न्यायालय की आपराधिक अवमानना की सख्त वैधानिक कार्रवाई शुरू की जानी चाहिए। 'पीड़ित महिला की बद्दुआ का असर है' इस पूरे घटनाक्रम पर महू से भाजपा विधायक उषा ठाकुर ने भी तीखा और विवादित बयान दिया है। उन्होंने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने को एक पीड़ित महिला की बद्दुआ का असर बताया। ठाकुर ने दावा किया कि तेलंगाना में एक महिला द्वारा कांग्रेस नेता के खिलाफ की गई शिकायत पर नटराजन ने कोई कार्रवाई नहीं की थी, जिसके कारण पीड़ित महिला की बद्दुआ के चलते उनका फॉर्म रिजेक्ट हुआ है। आपराधिक अवमानना क्या होती है? भारत में न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए 'कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट 1971' लागू है। इसके तहत यदि कोई व्यक्ति या नेता लिखित, मौखिक या वीडियो के जरिए अदालत की गरिमा को कम करने, उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाने या उसे 'स्कैंडलाइज्ड' करने की कोशिश करता है, तो सॉलिसिटर जनरल या अटॉर्नी जनरल की सहमति से सुप्रीम कोर्ट स्वतः संज्ञान लेकर आपराधिक अवमानना की कार्रवाई कर सकता है, जिसमें जेल और जुर्माने दोनों का प्रावधान है।  

बंगाल में सियासी हलचल: अभिषेक बनर्जी के घर रेड, मदन मित्रा के ठिकाने पर छापा; दौड़ी-दौड़ी पहुंचीं ममता

कोलकत्ता  पश्चिम बंगाल की राजनीति शनिवार को पूरी तरह गरमा गई। एक तरफ कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के आवास पर पुलिस और केंद्रीय बलों की बड़ी टीम ने छापेमारी की, तो दूसरी तरफ नगर पालिका भर्ती घोटाले में ईडी ने टीएमसी विधायक मदन मित्रा के कई ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। इन दोनों घटनाओं ने राज्य की राजनीति में जबरदस्त हलचल पैदा कर दी है। पश्चिम मेदिनीपुर जिले के एक थाने में दर्ज एक मामले के सिलसिले में शनिवार तड़के पुलिस और केंद्रीय बलों की टीम कोलकाता के कालीघाट स्थित अभिषेक बनर्जी के आवास पर पहुंची। यह कार्रवाई उस समय हुई जब तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी पहले से ही कई जांच एजेंसियों के समन और पूछताछ का सामना कर रहे हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, पश्चिम मेदिनीपुर के शालबनी थाने और कोलकाता पुलिस के अधिकारी तड़के करीब तीन बजे के बाद अभिषेक बनर्जी के पतुआपारा स्थित घर के बाहर पहुंचे। कुछ ही समय बाद केंद्रीय बलों के जवानों ने पूरे परिसर को घेर लिया और बाहर सुरक्षा व्यवस्था संभाल ली, जबकि पुलिस टीम अंदर दाखिल हुई। तृणमूल कांग्रेस ने इस कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि पुलिस ने घर का ताला तोड़कर जबरन प्रवेश किया और पूरे घर की तलाशी ली। घटना की जानकारी मिलते ही पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी तुरंत अभिषेक बनर्जी के आवास पर पहुंच गईं। इस पूरे अभियान को लेकर राजनीतिक तनाव और बढ़ गया। देर रात करीब ढाई बजे शुरू हुए इस हाई-वोल्टेज ड्रामे में पुलिस अधिकारियों ने काफी देर तक दरवाजा खटखटाया, लेकिन कोई जवाब न मिलने पर आखिरकार घर का ताला तोड़कर भीतर प्रवेश किया। इस दौरान केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवानों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर रखी थी। टीएमसी नेता की शिकायत पर की गई कार्रवाई यह सनसनीखेज कार्रवाई शालबनी के एक स्थानीय तृणमूल नेता की शिकायत पर की गई है, जिसमें अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (पीए) सुमित राय पर टिकट दिलाने के नाम पर वित्तीय धोखाधड़ी का आरोप है। मोबाइल टावर लोकेशन ट्रैक करते हुए पुलिस तड़के तीन बजे अभिषेक के घर पहुंची और करीब पांच घंटे तक सघन तलाशी अभियान चलाया। भागी-भागी आईं ममता बनर्जी इस घटना की सूचना मिलते ही पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी सुबह-सुबह गाड़ी से सीधे अभिषेक के घर पहुंचीं, जिससे सियासी हलचल और तेज हो गई। तलाशी को लेकर अभिषेक बनर्जी ने आक्रोश जताते हुए कहा कि पुलिस ने ताला तोड़कर पूरे घर की तलाशी ली है। हमारे पास इसके सारे रिकॉर्डिंग हैं, हमने जांच में पूरा सहयोग किया है। चौतरफा घिरे अभिषेक बनर्जी गौर करने वाली बात यह है कि अभिषेक बनर्जी इस वक्त चौतरफा कानूनी मुकदमों से घिरे हैं। फर्जी हस्ताक्षर मामले में गुरुवार को ही सीआईडी ने उनसे साढ़े पांच घंटे पूछताछ की थी, जिसमें उन्हें रविवार (14 जून) को फिर पेश होना है। इसके अलावा, सोमवार (15 जून) को प्राथमिक भर्ती घोटाले में ईडी ने समन किया है और मंगलवार (16 जून) को धमकी मामले में सीआइडी के सामने उन्हें पेश होना है। इन सबके बीच शनिवार तड़के हुई इस औचक छापेमारी ने राज्य की राजनीति गरमा दी है। यह तलाशी अभियान चार घंटे से अधिक समय तक चला। सुबह तक पुलिस और अधिकारी घर के अंदर मौजूद रहे। बाद में कुछ अधिकारी बाहर निकलते और फिर अंदर जाते देखे गए। घर से बाहर आने के बाद अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके घर का ताला तोड़ा और हर कमरे की गहन तलाशी ली। उन्होंने कहा, “उन्होंने ताला तोड़ा, घर में घुसे और हर कमरे की जांच की।” हालांकि, पुलिस की ओर से इस कार्रवाई के पीछे का कारण स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया। शनिवार को ही पश्चिम बंगाल में दूसरा बड़ा घटनाक्रम नगर पालिका भर्ती घोटाले से जुड़ा सामने आया, जहां प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने तृणमूल कांग्रेस के विधायक मदन मित्रा के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग यानी धन शोधन की जांच के तहत की गई। ईडी की टीम ने मदन मित्रा और उनसे जुड़े करीब सात परिसरों को निशाना बनाया। मदन मित्रा उत्तर 24 परगना जिले की कामरहाटी विधानसभा सीट से विधायक हैं और वे पहले राज्य सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि नगर पालिकाओं में भर्ती के दौरान अयोग्य उम्मीदवारों को नौकरी दिलाने के बदले रिश्वत ली गई। यह रिश्वत नकद और सोने के रूप में बिचौलियों के जरिए दी और ली गई। ईडी के अनुसार, इस पूरे मामले में करीब 125 कथित अवैध नियुक्तियों से मदन मित्रा के संबंध होने की बात सामने आई है। ईडी की टीम फिलहाल दस्तावेजों, बैंक लेन-देन और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर रही है। हालांकि, छापेमारी में क्या बरामद हुआ है, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। इस घोटाले की शुरुआत स्कूल भर्ती घोटाले से जुड़े एक मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के दौरान हुई थी। उस समय ईडी ने तृणमूल कांग्रेस से जुड़े प्रमोटर अयान शील के घर छापेमारी की थी, जहां से कई अहम दस्तावेज मिले थे। वहीं से नगर पालिका भर्ती घोटाले की जांच आगे बढ़ी। बाद में कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने भी इस मामले में समानांतर जांच शुरू की। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, कई राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आने लगे, जिससे राज्य की राजनीति और गरमा गई। इस कार्रवाई से ठीक एक दिन पहले मदन मित्रा ने नगर पालिका के सभी तृणमूल पार्षदों को इस्तीफा देने का निर्देश दिया था और पार्टी कार्यकर्ताओं से विरोध प्रदर्शन करने की अपील की थी। इसी बीच कामरहाटी नगर पालिका के चेयरमैन गोपाल साहा ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद मदन मित्रा ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गोपाल साहा को लगातार अपमान और उपेक्षा झेलनी पड़ी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी प्रशासनिक शक्तियां लगभग खत्म कर दी गई थीं, जिससे उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। मदन मित्रा ने कार्यकर्ताओं और पार्षदों से इस घटना के खिलाफ विरोध दर्ज कराने की अपील भी की। इन दोनों बड़ी कार्रवाइयों ने एक बार फिर … Read more

कोयल मल्लिक ने छोड़ी राज्यसभा सीट, TMC की संख्या घटी; ममता बनर्जी की बढ़ी चिंता

कोलकत्ता   पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। तीन राज्यसभा सांसदों के जाने का दुख मना रही ममता को चौथा झटका लगा है। राज्यसभा सांसद कोयल मलिक ने सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। इससे पहले तृणमूल कांग्रेस के सुखेंदु शेखर रे, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक इस्तीफा दे चुके हैं। कोयल मल्लिक चौथी राज्यसभा सांसद हैं, जिन्होंने इस्तीफा दिया है। हालांकि, अभी तक यह साफ नहीं है कि उन्होंने पार्टी से भी इस्तीफा दिया है या फिर नहीं। बता दें, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी को लगातार झटके लगते जा रहे हैं। पहले तीन दर्जन से ज्यादा विधायकों ने ममता को राजनीतिक हाशिए पर धकेल दिया। इसके बाद एक दर्जन लोकसभा सांसदों ने भी काकोली घोष दास्तीदार के नेतृत्व में ममता का साथ छोड़ने का ऐलान किया था। 13 राज्यसभा सांसदों के साथ केंद्र सरकार को चुनौती देने वाली ममता बनर्जी की मुश्किलें अब राज्यसभा सांसदों ने भी बढ़ाना शुरू कर दी है। पहले शुखेंदु शेखर रे ने 8 जून को इस्तीफा देकर इसकी शुरुआत की और अब हालत यह है कि चार सांसद इस्तीफा दे चुके हैं। सिर्फ दो महीने में अभिनेत्री से नेता बनी कोयल मल्लिक ने दिया इस्तीफा गौरतलब है कि स्टार लोगों को राजनीति में लाने वाली ममता बनर्जी ने बंगाली अभिनेत्री कोयल मल्लिक को इसी साल अप्रैल में राज्यसभा भेजा था। शपथ लेने के बाद उत्साहित नजर आ रही कोयल ने मीडिया से बात करते हुए देश सेवा की बात कही थी। उन्होंने कहा, "मैंने बेहद सोच समझकर यह फैसला लिया है। यह एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। देश की सेवा और लोगों की सेवा से बढ़कर कुछ नहीं है। कौन हैं कोयल मल्लिक? बंगाली फिल्म इंडस्ट्री की जानी-मानी अभिनेत्री कोयल मल्लिक का असली नाम रुक्मिणी मल्लिक है। दिग्गज बंगाली अभिनेता रंजीत मल्लिक के घर जन्मी कोयल ने शुरुआत से ही फिल्मों में अपना सफर शुरू करने की चाह रखी। 2003 में नाटेर गुरु नामक फिल्म से उन्होंने अपना फिल्मी करियर शुरू किया। इसके बाद उन्होंने बंगाली फिल्म इंडस्ट्री पर राज करना शुरू कर दिया। युवाओं के बीच में मशहूर कोयल को ममता बनर्जी ने राज्यसभा जाने के लिए मनाया और अप्रैल 2026 में उन्हें राज्यसभ का सांसद बना दिया गया। राज्यसभा सांसद बनाए जाने के बाद कोयल ने ममता बनर्जी के प्रति अपना लगाव भी जाहिर किया था। लेकिन 4 मई के बाद हालात बदल गए। लोकसभा के सांसदों के बागी होने के बाद तृणमूल कांग्रेस के तीन राज्यसभा सांसद पद छोड़ चुके थे। इसी क्रम में कोयल घोष ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया। सूत्रों के मुताबिक, कोयल ने कोलकाता से ईमेल के जरिए अपना इस्तीफा संसद को सौंपा है।