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भाजपा में शामिल हुए भूपेन बोरा, कांग्रेस छोड़ने की वजह बताकर मचाया सियासी भूचाल

गुवाहाटी असम में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। राज्य में कांग्रेस को एक और बड़ा झटका लगा है। पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा भाजपा में शामिल हो गए हैं। गुवाहाटी में रविवार को भूपेन कुमार बोरा ने भाजपा की सदस्यता ली। यह कार्यक्रम भाजपा के प्रदेश मुख्यालय वाजपेयी भवन में आयोजित किया गया। इस मौके पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया और सांसद बैजयंत पांडा भी मौजूद रहे। भूपेन बोरा के साथ कांग्रेस के पूर्व कार्यकर्ता संजू बोरा भी भाजपा में शामिल हुए। इस्तीफे के बाद बदला घटनाक्रम भूपेन बोरा ने 16 फरवरी को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि, कांग्रेस आलाकमान ने उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया। कई वरिष्ठ नेता उनसे मिलने उनके घर पहुंचे और राहुल गांधी ने भी उनसे फोन पर बात की थी। बोरा ने अपने फैसले पर फिर से विचार करने के लिए समय मांगा था। इसके अगले ही दिन मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा उनके घर गए। मुलाकात के बाद सरमा ने घोषणा की कि भूपेन बोरा 22 फरवरी को भाजपा में शामिल होंगे। इस घोषणा के बाद असम की राजनीति में अटकलों का दौर समाप्त हो गया। कांग्रेस में अपमान का लगाया आरोप भाजपा में शामिल होने के बाद भूपेन बोरा ने कांग्रेस में अपने साथ हुए व्यवहार पर दुख जताया। उन्होंने कहा, "मैंने कांग्रेस पार्टी को 32 साल दिए। कांग्रेस ने मुझे विधायक से लेकर प्रदेश अध्यक्ष तक बनाया।" उन्होंने बताया कि कैसे पार्टी में उन्हें अपमानित महसूस हुआ। बोरा ने कहा, "मैंने गठबंधन के लिए बातचीत शुरू की थी। गौरव गोगोई ने कहा कि अकेले मत जाओ, रकीबुल हुसैन को भी साथ ले जाओ। लेकिन बाद में गौरव गोगोई ने घोषणा कर दी कि भूपेन बोरा ने गलतफहमी पैदा की है। मैंने उनसे पूछा कि उन्होंने सबके सामने मेरा अपमान क्यों किया, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।" आने वाले चुनाव पर पड़ेगा असर भूपेन बोरा ने यह भी बताया कि जब वह 2021 में अध्यक्ष बने थे, तब कांग्रेस का एआईयूडीएफ के साथ गठबंधन था, जिसे उन्होंने तोड़ा था। बाद में उन्होंने इंडिया गठबंधन बनने से पहले 16 दलों के साथ साझेदारी की थी। असम की 126 सदस्यीय विधानसभा के लिए इस साल मार्च-अप्रैल में चुनाव होने की उम्मीद है।

राज्यसभा चुनाव में उलझी सियासत: आरजेडी का ग्राफ गिरा, लेफ्ट-उद्धव-पवार की रणनीति कमजोर

 नई दिल्ली     देश के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों पर 16 मार्च को चुनाव है, जिसे लेकर राजनीतिक दांव पेच सेट किए जाने लगे हैं. कांग्रेस और बीजेपी को पहले से ज्यादा सीटें मिलती दिख रही हैं तो क्षेत्रीय दलों के लिए यह चुनाव काफी मुश्किल भरा लग रहा है. लालू यादव की आरजेडी से लेकर शरद पवार की एनसीपी और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) को एक सीट मिलती नहीं दिख रही है. वहीं बीआरएस और लेफ्ट का पूरी तरह सफाया हो रहा है.  महाराष्ट्र की 7, तमिलनाडु की 6, बिहार की 5, पश्चिम बंगाल की 5, ओडिशा की 4 और असम की 3, हरियाणा, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की 2-2 और हिमाचल प्रदेश की 1 राज्यसभा सीट के​ लिए 16 मार्च को चुनाव होने हैं. इन 37 राज्यसभा सीटों में से फिलहाल बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के पास 15 और कांग्रेस नेतृत्व वाले इंडिया ब्लॉक के पास 18 सीटें हैं. इसके अलावा 4 सीटें अन्य दलों के पास हैं. हालांकि, इन सीटों के लिए अब जो चुनाव हो रहे हैं, उनमें सियासी गणित बदले हुए हैं, जिसमें एनडीए को लाभ तो इंडिया ब्लॉक के घटक दलों को सियासी नुकसान हो सकता है.  कांग्रेस-बीजेपी को फायदा तो घाटा किसे?  बिहार से लेकर महाराष्ट्र, ओडिशा और तेलंगाना विधानसभा की स्थिति पहले से काफी बदल गई है, जिसका सियासी असर सीधे तौर पर राज्यसभा के चुनाव पर पड़ता नजर आ रहा है. देश के जिन राज्यों में राज्यसभा चुनाव हो रहे हैं, उसके लिहाज से देखें तो एनडीए की सीटें 15 से बढ़कर 18 होने की संभावना है तो इंडिया ब्लॉक की सीटें 18 से घटकर 14 से 15 हो सकती हैं.  राज्यसभा की इन 37 सीटों में से फिलहाल बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के पास 15 सीटें हैं, जिसमें बीजेपी के पास 9, जेडीयू के पास 2 , AIADMK के पास 1, आरएलएम के पास 1 और 1 सीट आरपीआई के पास है. आगामी चुनावों के बाद बीजेपी की सीटें 9 से बढ़कर 12 हो सकती हैं, तो जेडीयू और AIADMK अपनी-अपनी सीटों को बचाए रख सकती हैं. वहीं, विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक की बात करें तो चुनाव वाले 37 में से 18 राज्यसभा सीटें उसके कब्जे में हैं, जिसमें से 4 सीटें कांग्रेस के पास, 4 सीटें टीएमसी के पास, 4 सीटें डीएमके के पास और आरजेडी के पास 2 सीटें हैं. एक सीट शिवसेना (यूबीटी) और एक सीट सीपीआईएम के पास है. आगामी चुनावों के बाद कांग्रेस को एक सीट का लाभ हो सकता है तो नुकसान शरद पवार की एनसीपी से लेकर उद्धव ठाकरे और लालू यादव की पार्टी को हो सकता है. ममता बनर्जी और डीएमके अपनी सीटें बचा ले जाएंगी. चुनाव वाली 37 राज्यसभा सीटों में से 4 सीटें अन्य दलों के पास हैं, जिसमें बीजेडी के पास 2 और 1 सीट बीआरएस और 1 सीट तमिलनाडु के क्षेत्रीय दल के कब्जे में है. आगामी चुनावों के बाद बीजेडी हाफ तो बीआरएस पूरी तरह साफ हो जाएगी. इसके अलावा वामदल भी अपनी राज्यसभा सीट नहीं बचा पाएंगे?  लालू की आरजेडी क्या हो जाएगी साफ बिहार की पांच राज्यसभा सीटों पर चुनाव हो रहे हैं. विधानसभा की मौजूदा स्थिति के लिहाज से एनडीए चार सीटें आसानी से जीत लेगी और एक सीट पर सियासी मिस्ट्री उलझी हुई है. एनडीए के पास 202 विधायक तो महागठबंधन के पास 35 विधायक और 7 अन्य विधायक हैं. राज्यसभा की एक सीट के लिए 41 विधायकों का समर्थन चाहिए. ऐसे में महागठबंधन अपने दम पर एक भी सीट जीतने की स्थिति में नहीं है. इसका सीधे नुकसान आरजेडी को होता दिख रहा है.  41 वोट के लिहाज से चार राज्यसभा सीटें जीतने के लिए एनडीए को 164 विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी. इसके बाद एनडीए के पास 38 सीटें बचेंगी और पांचवी सीट जीतने के लिए उसे 3 विधायकों का अतरिक्त समर्थन चाहिए होगा. वहीं, आरजेडी, कांग्रेस और लेफ्ट दलों को मिलाकर इंडिया ब्लॉक के पास 35 विधायक हैं. ऐसे में महागठबंधन को एक सीट जीतने के लिए 6 अतरिक्त वोटों की जरूरत होगी. बिहार के राज्यसभा चुनाव में जिस तरह की सियासी मिस्ट्री बन गई है, उसके लिहाज से आरजेडी को एक सीट जीतना भी मुश्किल दिख रहा है. एनडीए सभी पांचों सीटें जीतने की कवायद में है, जिसके संकेत जेडीयू नेता अशोक चौधरी ने दे दिए हैं. विपक्ष अगर संयुक्त रूप से चुनाव लड़े तो जीत सकता है, पर AIMIM से लेकर बसपा तक का सियासी स्टैंड अलग ही राह पर दिख रहा है. ऐसे में आरजेडी का राज्यसभ चुनाव में सफाया हो सकता है, क्योंकि AIMIM अपना उम्मीदवार उतारने की बात कह रहा है.  पवार और उद्धव का पावर होगा कम महाराष्ट्र की सात राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं, लेकिन विधानसभा चुनाव के बाद बदले समीकरणों ने शरद पवार और उद्धव ठाकरे की सियासी जमीन को तंग कर दिया है. महाराष्ट्र में एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 37 विधायकों के समर्थन की जरूरत है. राज्य में वर्तमान में कुल 284 विधायक हैं, जिसमें बीजेपी के पास 131, शिंदे की शिवसेना के पास 57 और अजित पवार की एनसीपी के पास 40 विधायक हैं. इस तरह एनडीए के 228 विधायक होते हैं, जिसके दम पर वह राज्य की 7 राज्यसभा सीटों में से 6 सीटें आसानी से जीत सकती है. बीजेपी को चार सीटें तो एकनाथ शिंदे और अजित पवार की पार्टी को 1-1 सीट मिल सकती हैं. दूसरी ओर शरद पवार की एनसीपी के 10, उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के 20 और कांग्रेस के 16 विधायक हैं. इस तरह तीनों दल मिलकर अगर एक उम्मीदवार को जिता सकते हैं, लेकिन उन्हें 1 अतिरिक्त विधायक के समर्थन की जरूरत पड़ेगी. वहीं अगर, एनडीए अपने 7वें उम्मीदवार को जिताना चाहता है तो उसे 31 अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी. शिवसेना (यूटीबी) के नेता आदित्य ठाकरे ने राज्यसभा सीट पर दावा ठोक दिया है. उन्होंने कहा कि विधायकों की संख्या को देखते हुए, राज्यसभा की सीट पर शिवसेना का हक बनता है. महाविकास आघाड़ी में बातचीत कर आगे बढ़ेंगे, लेकिन असल दिक्कत है कि शरद पवार का कार्यकाल भी खत्म हो रहा है. शरद पवार राज्यसभा में … Read more

24 फरवरी को भोपाल में कांग्रेस का महा आंदोलन: राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे का संयुक्त दौरा

भोपाल मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में 24 फरवरी को कांग्रेस का बड़ा किसान आंदोलन आयोजित किया जाएगा। इसमें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे हिस्सा लेंगे। कांग्रेस ने यह आंदोलन भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में किया है। पार्टी का कहना है कि यह डील देश के किसानों के हितों के खिलाफ है और मध्यप्रदेश के कपास, सोयाबीन, मक्का और फल उत्पादक किसानों पर इसका खास असर पड़ेगा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने नई दिल्ली में मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि किसानों के लिए लड़ाई की शुरुआत मध्यप्रदेश से होगी। उन्होंने बताया कि यह राष्ट्रव्यापी आंदोलन छह राज्यों में किया जाएगा। राष्ट्रव्यापी आंदोलन की औपचारिक शुरुआत मध्य प्रदेश से पार्टी ने तय किया है कि ट्रेड समझौते के विरोध में राष्ट्रव्यापी आंदोलन की औपचारिक शुरुआत मध्य प्रदेश से होगी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी का कहना है कि इस डील का सीधा असर सोयाबीन, कपास और मक्का उत्पादक किसानों पर पड़ेगा। उनके अनुसार, यह समझौता किसानों के आर्थिक हितों पर चोट करता है, इसलिए पार्टी इसे राष्ट्रीय मुद्दा बनाकर व्यापक जनआंदोलन खड़ा करेगी। किसानों के हक और अधिकारों के समर्थन में अभियान की शुरुआत जीतू पटवारी ने कहा है कि भोपाल का यह सम्मेलन केवल प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यहीं से देशभर में किसानों के हक और अधिकारों के समर्थन में अभियान की शुरुआत की जाएगी। कांग्रेस नेतृत्व इसे किसानों के भविष्य और कृषि अर्थव्यवस्था से जुड़ा निर्णायक संघर्ष बता रहा है।  इस फैसले की घोषणा नई दिल्ली में कांग्रेस की उच्चस्तरीय बैठक में हुई, जिसमें राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी मौजूद थे।कांग्रेस का यह कदम किसानों के हितों की सुरक्षा और उनकी समस्याओं को लेकर केंद्र सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर राहुल गांधी का तंज, कहा– मोदी सरकार फिर कर सकती है सरेंडर

नई दिल्ली अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का आयात शुल्क संबंधी फैसला पलटे जाने के बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर तीखा हमला करते हुए शनिवार को कहा कि वह एक बार फिर अमेरिका के सामने समर्पण करेंगे। गांधी ने कहा कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में मोदी की स्थिति कमजोर हुई है। गांधी ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा 'प्रधानमंत्री ने देशहित से समझौता किया है। उनका विश्वासघात अब सबके सामने है।' गांधी ने कहा कि मोदी अब समझौते की शर्तों पर पुनः बातचीत नहीं कर सकते। वह एक बार फिर समर्पण करेंगे। गौरतलब है कि अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न देशों पर भारी आयात शुल्क लागू करने के ट्रंप के फैसले को असंवैधानिक करार देते हुए कहा कि यह शक्ति सिर्फ अमेरिकी संसद के पास है। गांधी की यह टिप्पणी भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ते राजनीतिक टकराव के बीच आयी है। कांग्रेस ने बार-बार इस समझौते के समय, पारदर्शिता और शर्तों को लेकर चिंता जताई है। उसकी चिंता खासकर भारतीय किसानों और छोटे व्यवसायियों पर इसके संभावित असर को लेकर है। कांग्रेस ने की ट्रेड डील स्थगित करने की मांग कांग्रेस ने शनिवार को कहा कि अमेरिकी उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद अब अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते को स्थगित कर दिया जाना चाहिए और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को दो टूक कहना चाहिए कि अमेरिकी पक्ष से स्पष्टीकरण आने तक भारत की तरफ से आयात उदारीकरण नहीं होगा। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने संवाददाताओं से कहा कि सरकार को इस समझौते पर अमेरिका के साथ फिर से बातचीत करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भारत के लाखों किसानों की आजीविका पर नकारात्मक असर नहीं हो। अमेरिकी उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वैश्विक 'टैरिफ' को खारिज कर दिया, जिससे उन्हें उनके आर्थिक एजेंडे के मुद्दे पर बड़ा झटका लगा है। जजों ने बहुमत से कहा कि संविधान बहुत स्पष्ट रूप से अमेरिकी कांग्रेस को कर लगाने की शक्ति देता है, जिसमें 'टैरिफ' भी शामिल है। रमेश ने कहा, 'अमेरिकी उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद इस अंतरिम समझौते को स्थगित कर दिया जाना चाहिए और प्रधानमंत्री को यह स्पष्ट करना चाहिए कि अमेरिका की तरफ से स्पष्टीकरण आने तक हम आयात उदारीकरण नहीं करेंगे।' रमेश ने कहा, 'प्रधानमंत्री, वाणिज्य मंत्री और सरकार को दिसंबर से जानकारी थी कि इस मामले में अमेरिकी उच्चतम न्यायालय का निर्णय आने वाला है और हो सकता है कि निर्णय ट्रंप के खिलाफ का सकता है। फिर ट्रंप पर दबाव क्यों डाला गया कि समझौते की घोषणा की जाए?' उन्होंने कहा, ''ट्रंप ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के निर्णय का भारत-अमेरिका समझौते पर कोई असर नहीं होगा। क्या प्रधानमंत्री मोदी ट्रंप के इस बयान से सहमत हैं?'  

भिवंडी में खेला हुआ खेल! बीजेपी के बागी नारायण चौधरी को कांग्रेस ने दिया मेयर पद

भिवंडी महाराष्ट्र के भिवंडी में एक नाटकीय राजनीतिक उथल-पुथल देखने को मिली, जहां भाजपा को उस समय बड़ा झटका लगा जब उसके बागी नेता नारायण चौधरी कांग्रेस और शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी  (एसपी) के समर्थन से मेयर बनकर उभरे. इस साल जनवरी में हुए 23 वार्डों और 90 सीटों वाले भिवंडी-निजामपुर नगर निगम (BNMC) चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था. इसने इस नगर निगम में नए सियासी समीकरणों और गठबंधनों को जन्म दिया. पार्षदों की खरीद-फरोख्त और राजनीतिक झड़पों के आरोप लगे. विलासराव देशमुख ऑडिटोरियम में शुक्रवार दोपहर 12 बजे हाथ उठाकर मतदान की प्रक्रिया हुई, जिसमें नारायण चौधरी को स्पष्ट बहुमत मिला. नारायण चौधरी मेयर चुने गए, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार मोमिन तारिक बारी डिप्टी मेयर चुने गए. नगर निगम चुनाव में कांग्रेस ने 30, भाजपा ने 22, शिवसेना ने 12, समाजवादी पार्टी ने 6, कोणार्क विकास अघाड़ी ने 5 और भिवंडी विकास अघाड़ी ने 3 सीटें जीतीं थीं. नारायण चौधरी ने 46 के जादुई आंकड़े से दो अधिक यानी 48 वोट हासिल करके मेयर पद हासिल किया. भाजपा की स्नेहा पाटिल को 16 वोट मिले, जबकि कोणार्क विकास अघाड़ी के विलास पाटिल (शिंदे की शिवसेना के समर्थन से)  को 25 वोट प्राप्त हुए. कांग्रेस के मोमिन तारिक बारी 43 वोट पाकर डिप्टी मेयर निर्वाचित हुए. कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) ने भिवंडी में सेक्युलर फ्रंट बनाकर मेयर चुनाव लड़ा. राज्य भाजपा अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने कहा, 'नारायण चौधरी ने पार्टी की नीति का उल्लंघन किया है. उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.' बीजेपी के खिलाफ कांग्रेस का सेक्युलर फ्रंट एनसीपी (एसपी) के लोकसभा सांसद सुरेश म्हात्रे, जिन्हें बलिया मामा के नाम से भी जाना जाता है, उन्होंने इस जीत को भिवंडी की जनता की जीत बताया. उन्होंने कहा कि परिस्थितियों के चलते कांग्रेस-एनसीपी (एसपी) का सेक्युलर फ्रंट बनाना जरूरी था. सपा विधायक रईस शेख ने कहा, 'हमने भिवंडी में सेक्युलर फ्रंट बनाया है.' राज्य कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा, 'कांग्रेस ने भाजपा या एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ गठबंधन न करने का फैसला किया और अपने वैचारिक रुख से कोई समझौता नहीं किया. कुछ भाजपा पार्षदों ने पार्टी और उसकी विचारधारा छोड़कर सेक्युलर फ्रंट में शामिल होने का फैसला किया, जिससे हमें मेयर और डिप्टी मेयर चुनने में सफलता मिली.'   नारायण चौधरी ने बीजेपी से बगावत की और कुछ बीजेपी पार्षदों के साथ मिलकर एक स्वतंत्र समूह बनाया. उन्होंने कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को समर्थन देने का फैसला किया. उन्होंने मेयर चुनाव जीतने के बाद कहा, 'स्थानीय राजनीति आप जानते हैं, मैं सिर्फ विकास पर काम करूंगा.' यह राजनीतिक घटनाक्रम भाजपा के उस अंतिम समय में लिए गए फैसले के बाद हुआ, जिसमें पार्टी ने नारायण चौधरी को मेयर पद के उम्मीदवार के रूप में हटाकर उनकी जगह स्नेहा पाटिल को मैदान में उतारा था. बता दें कि भाजपा में शामिल होने से पहले नारायण चौधरी कांग्रेस में थे.

कांग्रेस में भूचाल! हेमंत कटारे का इस्तीफा, उपनेता प्रतिपक्ष पद छोड़ने के पीछे यह वजह

भोपाल:  Madhya Pradesh की राजनीति में हेमंत कटारे के इस्तीफे के बाद अब एक और बयान चर्चा में आ गया है। बताया जा रहा है कि  विधानसभा से निकलते समय अटेर से कांग्रेस विधायक Hemant Katare ने भाजपा विधायक Bhagwandas Sabnani से मजाकिया अंदाज में कहा था ‘भाईसाहब, मुझे भी साथ ले चलिए।’  इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज हो गईं कि क्या कटारे भाजपा में शामिल होने वाले हैं। हालांकि भगवानदास सबनानी ने इन कयासों को खारिज करते हुए कहा कि यह बात केवल मजाक में कही गई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे उस समय रुके भी थे और पूछा था कि कटारे को कहां जाना है। उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि कटारे बाद में कहां गए। मीडिया द्वारा पूछे गए सवाल पर कि क्या कटारे भाजपा में शामिल हो सकते हैं, सबनानी ने कहा कि उन्हें ऐसी किसी भी संभावना की जानकारी नहीं है।  क्यों दिया इस्तीफा? इस संबंध में संगठन महासचिव डॉ संजय कामले ने जानकारी देते हुए कहा कि हेमंत कटारे ने अपने इस्तीफे में पारिवारिक दायित्वों एवं समय की कमी का उल्लेख किया है. उन्होंने स्पष्ट किया है कि वर्तमान परिस्थितियों में वे अपने विधानसभा क्षेत्र को अपेक्षित समय और ध्यान नहीं दे पा रहे थे, इसी कारण उन्होंने उप नेता प्रतिपक्ष के पद से त्यागपत्र दिया है. वे कांग्रेस के साथ थे, हैं और रहेंगे- कामले कामले ने यह भी स्पष्ट किया कि हेमंत कटारे का यह इस्तीफा केवल पद से संबंधित है, न कि पार्टी की सदस्यता से. वे कांग्रेस पार्टी के साथ थे, हैं और आगे भी पूरी निष्ठा के साथ पार्टी के साथ रहेंगे. अंतिम फैसला नेतृत्व पर निर्भर- कामले इसके साथ ही, उन्होंने बताया कि हेमंत कटारे के उपनेता प्रतिपक्ष पद से इस्तीफा स्वीकार किया जाए या नहीं, इसका अंतिम निर्णय प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष तू पटवारी एवं पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के विवेकाधिकार पर निर्भर है. आज कटारे की शादी की सालगिरह हेमंत कटारे की आज शादी की सालगिरह भी है. उन्होंने आज ही इस्तीफा दे दिया. उनके समर्थक सालगिरह की बधाई दे रहे हैं. 2018 में हेमंत कटारे पर रेप के आरोप लग चुके हैं. बाद में पीड़िता ने अपना बयान बदल लिया. 2019 में छात्रा ने सुसाइड कर लिया. दिसंबर 2024 में हाई कोर्ट ने हेमंत कटारे का राहत दी. हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ मध्य प्रदेश की सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई.  कांग्रेस विधायक बोले- सब ठीक हो जाएगा वहीं जौरा से कांग्रेस विधायक Pankaj Upadhyay ने कहा कि कटारे के इस्तीफे की जानकारी उन्हें मीडिया के माध्यम से मिली। उन्होंने बताया कि हेमंत कटारे की मैरिज एनिवर्सरी थी और परिवार में कार्यक्रम भी था। वे दिन में उनके साथ थे और काफी खुश नजर आ रहे थे। उपाध्याय ने कहा कि कोई गंभीर बात नहीं है। जो भी मामला है, वह पारिवारिक है और जल्द ही सुलझा लिया जाएगा।

‘डेटा कॉलोनी’ पर सियासत तेज: राहुल गांधी ने पीएम के फैसलों पर उठाए सवाल

नई दिल्ली कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर एक बार फिर निशाना साधा और आरोप लगाया कि उनके ''शर्मनाक समर्पण'' के कारण अब भारत एक 'डेटा कॉलोनी' बनकर रह जाएगा। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने एक वीडियो जारी कर सदन में बजट पर चर्चा के दौरान दिए गए अपने भाषण के उस अंश का जिक्र भी किया जिसमें उन्होंने मार्शल आर्ट की एक आधुनिक शैली 'जिउ-जित्सु' के 'ग्रिप' और 'चोक' जैसे कुछ दांव का उल्लेख किया था। राहुल गांधी ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''व्यापार समझौते को लेकर संसद में अपने भाषण में मैंने 'जिउ-जित्सु' का उदाहरण क्यों दिया? अमेरिकियों को खुश करने के लिए हमारे किसानों की कुर्बानी क्यों दी गई? अमेरिका को हमारा तेल आयात तय करने की मंजूरी देकर भारत की ऊर्जा सुरक्षा से समझौता क्यों किया गया?'' उन्होंने सवाल किया कि बिना किसी पारस्परिक वादे के, हर साल 100 अरब डॉलर का अमेरिकी आयात बढ़ाने पर सहमति क्यों दी गई? उन्होंने दावा किया कि यह समझौता भारत को एक 'डेटा कॉलोनी' बना देगा क्योंकि सारा डेटा अमेरिका और उसकी कंपनियों के सुपुर्द किया जा रहा है। राहुल गांधी ने कहा, ''मोदी जी ऐसा समझौता क्यों मानेंगे, जिसमें भारत इतना कुछ दे रहा है और बदले में बहुत कम मिलता दिख रहा है? इस शर्मनाक आत्मसमर्पण का जवाब प्रधानमंत्री पर डाले गए 'ग्रिप' और 'चोक' में छिपा है।'' कांग्रेस नेता ने दावा किया कि प्रधानमंत्री के झुकने का कारण अमेरिका में उद्योगपति गौतम अदाणी के खिलाफ दर्ज मुकदमा और 'एप्सटीन फाइल' है। उन्होंने यह दावा भी किया कि प्रधानमंत्री की पैसे की बदौलत बनाई गई छवि की डोर अब अमेरिका के हाथों में हैं।  

कोर्ट में राहुल गांधी का बड़ा आरोप—हाइलाइट होने के लिए केस दर्ज, सबूतों से छेड़छाड़

नई दिल्ली गृह मंत्री अमित शाह को लेकर दिए गए बयान और मानहानि के मुकदमे में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शुक्रवार को अपने पक्ष रखने के लिए यूपी की सुल्तानपुर कोर्ट में पेश हुए। राहुल गांधी ने कोर्ट में कहा कि राजनीतिक द्वेष की भावना से मेरी और मेरी पार्टी की छवि धूमिल करने के लिए सत्ता पक्ष की तरफ से यह साजिश रची गई है। राहुल ने कहा कि सीडी सत्यापित नहीं है, इसमें छेड़छाड़ की गई है। मेरे ऊपर लगाए गए सारे आरोप गलत और बेबुनियाद हैं। मेरे बयान को तोड़मरोड़ कर पेश किया गया है। कहा कि मेरा आशय किसी का अपमान करने का नहीं था। कहा कि हमारी छवि खराब करने के लिए दुर्भावना वश केवल हाईलाइट होने के लिए मेरे खिलाफ यह मुकदमा दायर किया गया है। राहुल गांधी के साथ इस दौरान कोर्ट में अधिवक्ता काशी प्रसाद शुक्ल के अलावा राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी, यूपी प्रदेश अध्यक्ष अजय राय, प्रदेश महासचिव विवेकानंद पाठक व अन्य लोग भी मौजूद रहे। राहुल गांधी पर करीब 8 वर्ष पहले मानहानि का मामला एमपी-एमएलए कोर्ट में दाखिल किया गया था। मामला कर्नाटक विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान अमित शाह पर की गई टिप्पणी से जुड़ा है। भाजपा नेता विजय मिश्रा ने राहुल गांधी के खिलाफ परिवाद दायर किया था। पिछली सुनवाई में अदालत ने उन्हे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर बयान दर्ज कराने का अंतिम मौका दिया था। फिलहाल राहुल गांधी इस मामले में जमानत पर हैं। राहुल की पेशी को देखते हुए कोर्ट के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस बल की पहले से तैनाती की गई थी। बड़ी संख्या में कांग्रेसी नेता भी इस दौरान कोर्ट के बाहर पहुंचे। राहुल गांधी के अधिवक्ता काशी प्रसाद शुक्ल ने बताया कि उनका बयान कोर्ट नंबर 19 में हुई है। अब अगली सुनवाई 9 मार्च को होगी। वहीं, राहुल गांधी पर परिवाद दाखिल कराने वाले विजय मिश्रा के अधिवक्ता संतोष पांडेय ने कहा कि 2018 में राहुल गांधी ने बंगलुरु की प्रेस कांफ्रेंस में अमित शाह को हत्या का अभियुक्त बताया था। इसी से क्षुब्ध होकर विजय मिश्रा ने परिवाद दाखिल किया था। प्रथमदृष्टया कोर्ट ने केस को स्वीकार किया था। 313 के मामले में स्वयं उपस्थित होना था। आज वह खुद उपस्थित हुए और कहा कि इस बारे में हम साक्ष्य उपलब्ध कराएंगे। राहुल गांधी ने सभी आरोपों से इनकार किया है। अपने पक्ष में बयान और सफाई साक्ष्य उन्हें उपलब्ध कराना होगा। इसके लिए जो भी दस्तावेज हों वह दाखिल कर सकते हैं। यह भी कहा कि मेरा केस बहुत मजबूत है। इस मामले में दो साल तक की सजा का प्रावधान है।  

AI समिट में बवाल: यूथ कांग्रेस का अनोखा विरोध, कपड़े उतारकर किया प्रदर्शन, पुलिस ने किया हिरासत में

नई दिल्ली नई दिल्ली में आयोजित इंडिया AI इंपैक्ट समिट के दौरान शुक्रवार को यूथ कांग्रेस के कई कार्यकर्ताओं द्वारा प्रदर्शन के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। जानकारी के मुताबिक प्रदर्शनकारी शर्टलेस होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। दिल्ली पुलिस ने जुड़े सूत्रों ने कहा है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। रिपोर्ट में दिल्ली पुलिस के सूत्रों के हवाले से बताया कि यूथ कांग्रेस के सदस्य होने का दावा करने वाले करीब 10 लोगों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। एक पुलिस अधिकारी ने कहा, "चार से पांच लोगों को हिरासत में लिया गया है।" जानकारी के मुताबिक प्रदर्शन में शामिल लोग QR-कोड वाले पास का इस्तेमाल कर इवेंट में घुसे थे। फिलहाल हिरासत में लिए गए सभी लोगों को पूछताछ के लिए तिलक मार्ग पुलिस स्टेशन ले जाया गया है। दिल्ली पुलिस ने कहा है कि इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "हम इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सभी जरूरी कानूनी कदम उठाएंगे।" भड़की बीजेपी भारतीय जनता पार्टी ने राहुल गांधी का नाम लेकर इस घटना पर नाराजगी जताई है। भाजपा के IT सेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित मालवीय ने इसे पूरे देश देश के लिए शर्मिंदगी का विषय बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “ऐसे समय में जब भारत एक मशहूर ग्लोबल AI समिट होस्ट कर रहा है, जिसमें टेक्नोलॉजी में अपने इनोवेशन और लीडरशिप को दिखाया जा रहा है, कांग्रेस पार्टी ने इज्जत देने के बजाय हंगामे को चुना।” उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए लिखा, राहुल गांधी की लीडरशिप में, कांग्रेस वर्कर्स ने टॉपलेस होकर समारोह में हंगामा किया, यह काम साफ तौर पर दुनिया के मंच पर भारत को शर्मिंदा करने के लिए किया गया था। जब देश खुद को ग्लोबल टेक्नोलॉजी पावरहाउस के तौर पर बनाने की कोशिश कर रहा है, तो ऐसा बर्ताव सिर्फ उन लोगों के फायदे में है जो भारत को गिरते हुए देखना चाहते हैं। राजनैतिक विरोध एक लोकतांत्रिक हक है, लेकिन भारत की ग्लोबल इमेज को नुकसान पहुंचाना नहीं। भारत इससे बेहतर का हकदार है।”  

प्रियंका गांधी ने असम में खोला BJP के खिलाफ मोर्चा, पेश की 20 सूत्रीय चार्जशीट

असम कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाद्रा ने बृहस्पतिवार को गुवाहाटी में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली असम सरकार के खिलाफ 20 सूत्री 'आरोपपत्र' जारी किया, जिसमें राज्य प्रशासन पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने और अल्पसंख्यकों में भय पैदा करने के लिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया गया है। विपक्षी पार्टी ने विधानसभा चुनावों से पहले यह 'आरोपपत्र' जारी किया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि एक दशक के शासनकाल के बावजूद भाजपा सरकार छह आदिवासी समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिलवाने और चाय बागान श्रमिकों की दैनिक मजदूरी बढ़ाकर 351 रुपये करने के अपने वादे को पूरे करने में विफल रही। असम विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी की उम्मीदवार चयन समिति की अध्यक्ष वाद्रा दो दिवसीय असम दौरे पर हैं। कांग्रेस ने भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार पर 'व्यापक भ्रष्टाचार' का भी आरोप लगाया। पार्टी ने मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा और उनके करीबी मंत्रियों एव उनके परिवार के सदस्यों पर 'अवैध रूप से संपत्ति जमा करने' का आरोप लगाया।