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छत्तीसगढ़ महिला आयोग का कड़ा रुख: भरण-पोषण मामले में BSP को लगाई फटकार

रायपुर. छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डाॅ. किरणमयी नायक, सदस्य सरला कोसरिया एवं ओजस्वी मंडावी ने आज आयोग के कार्यालय रायपुर में महिला उत्पीड़न से संबंधित प्रकरणों पर सुनवाई की। भिलाई स्टील प्लांट अपने पुरूष कर्मचारियों को किस तरह से बचाता है यह महिला आयोग में साबित हुआ है। पुरूष कर्मचारी दो-दो महिलाओं से अवैध रिश्ता रखता है और अपने पत्नी बच्चे को भरण-पोषण नहीं देता। महिला आयोग की सुनवाई में इनके अधिकारी उपस्थित होते हैं और आश्वासन देते हैं कि पत्नी और उनके बच्चों को पर्याप्त भरण-पोषण पति के वेतन से दिया जाएगा। सुनवाई के बाद में आफिस में जाकर मामले की लिपापोती करते हैं। इसकी पुष्टि होने पर जब पूछताछ की गई तो भिलाई स्टील प्लांट ने कहा कि हमने लाॅ डिपार्टमेंट को भेजा था, कर्मचारी ने लिखकर दे दिया इसलिए हम भरण-पोषण व वेतन की राशि नहीं दे सकते। भिलाई स्टील प्लांट ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। कुल मिलाकर कोई भी पुरूष जो भिलाई स्टील प्लांट में कार्यरत् है वह अपनी पत्नी बच्चों को परेशान कर सकता है, अवैध रिश्ते में रह सकता है, पत्नी-बच्चों को भूखे मारने के लिए छोड़ सकता है। फिर भी भिलाई स्टील प्लांट कुछ भी कार्य नहीं करेगा। अपने कर्मचारियों के खिलाफ कोई शिकायत नहीं करेगा। इस बात पर आज महिला आयोग ने बीएसपी के शीर्ष अधिकारी को जमकर लताड़ लगाई। एक प्रकरण में आवेदिका पत्नी अपने ससुराल में रहना चाहती है, लेकिन पति उसे ले जाने के लिए तैयार नहीं है। अनावेदक पक्ष द्वारा आवेदिका पर दबाव डालकर स्टाम्प पेपर पर लिखा-पढ़ी करके तलाक दिया, जिसमें समाज के कुछ लोगों ने उपस्थित होकर आवेदिका को कहा कि तुम्हारा तलाक हो गया। इस मामले में आयोग ने कहा कि इस तरह के दस्तावेज से वैधानिक तलाक नहीं होता। अनावेदक पक्ष आवेदिका को कोई भरण-पोषण नहीं देता, आवेदिका का स्त्रीधन भी वापस नहीं किया। आवेदिका अपने पति के साथ रहना चाहती है, लेकिन अनावेदक के माता, पिता व भाई उसके वैवाहिक जिंदगी में बाधा बन रहे हैं। अनावेदक को पूछने पर वह सुलहवार्ता के लिए तैयार नहीं है। इस स्तर पर आवेदिका ससुराल पक्ष के खिलाफ थाने में एफआईआर दर्ज करवा सकती है। एक अन्य प्रकरण में आवेदिका के स्व. पति से दो बेटियां है। अनावेदक उसका देवर है। गांव की संयुक्त संपत्ति बरौडा व कांपा में है, मकान व खेत भी है, जिसमें आवेदिका अपनी दोनों बेटियों का हक व हिस्सा चाहती है, जिसे अनावेदक ने स्वीकारा और बताया कि संयुक्त संपत्ति में आवेदिका की दोनों बेटियों का नाम है और हिस्सा देने के लिए वह तैयार है। आयोग ने समझाइश दिया कि आवेदिका आज ही जाकर बरौंडा व कांपा के मकान में अपना कब्जा ले व खेती की जमीन पर तहसील न्यायालय में नाम व खाता अलग कराने की कार्यवाही कर सकते हैं। कब्जा प्राप्त करने के पश्चात् आयोग को सूचित करें, ताकि प्रकरण नस्तीबध्द किया जा सके। एक अन्य प्रकरण में अनावेदक ने बताया कि भारत माला परियोजना में कोलिहापुरी की लगभग ढाई एकड़ जमीन निकली, जिसका मुआवजा लगभग 1 करोड़ 64 लाख रुपए अनावेदक के एकाउंट में है। इस संपत्ति में आवेदिका अपना एक चौथाई हिस्सा चाहती है। उसके अन्य दो भाई और है। आवेदिका के अनुसार कलेक्टर दुर्ग से इस परियोजना के तहत 2 गुना कीमत प्राप्त हुआ है, शेष 2 गुना कीमत के लिए मामला लंबित है। आयोग द्वारा कलेक्टर दुर्ग को पत्र प्रेषित कर बैंक ऑफ बडौदा के ब्रांच मैनेजर गंजपारा में अनावेदक के बैंक एकाउंट में दर्ज मो. नं. के बैंक खाते के ट्रांजेक्शन को तत्काल प्रभाव से रोक लगाने अनुशंसा की जाएगी, ताकि सुलहनामा की प्रक्रिया पूर्ण किया जा सके। अनावेदक को अगली सुनवाई में सभी अनावेदकगणों को साथ लाने को कहा गया, ताकि आयोग के समक्ष उपस्थित होकर सुलहनामा पर चर्चा किया जा सके। एक अन्य प्रकरण में आवेदक ने अपनी पत्नी व बहू की ओर से प्रकरण दर्ज किया था, जिसमें अनावेदक आरक्षक व उसकी पत्नी महिला आरक्षक के विरूध्द अपराध दर्ज किया था। शेष अनावेदक थाना- पिपरिया, जिला- कबीरधाम के पुलिस अधिकारी व कर्मचारी हैं। सभी अनावेदक पुलिस कर्मचारी है। इस प्रकरण में आरक्षक व उसकी पत्नी महिला आरक्षक आवेदकों के पड़ोसी है। वह अपनी पुलिसिया हथकंडों का इस्तेमाल करते हुए फर्जी एफआईआर दर्ज कराकर षड्यंत्र पूर्वक आवेदक की पत्नी, बहू व उसके नाबालिग 4 माह के बेटा को 2 माह तक जेल में रखा गया था। आवेदक पक्ष उनकी पत्नी व बहू ग्रामीण होने के कारण अनावेदकों के पुलिसिया चक्रव्हूह से नहीं निकल पाए और उन्हें न्यायालय से 45 दिन की सजा हुई। आवेदक पक्ष की शिकायत को किसी भी पुलिस अधिकारी ने इसलिए दर्ज नहीं किया, क्योंकि शिकायतकर्ता स्वयं पुलिस है। सभी पुलिस वालों ने अपने ही विभाग के आरक्षक की शिकायत पर आवेदक की बहू, पत्नि को नाबालिग बच्चे सहित जेल में डाल दिया था। आयोग द्वारा प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच कराने छत्तीसगढ़ राज्य पुलिस जवाबदेही प्राधिकार कार्यालय शंकर नगर को पत्र प्रेषित करने का आदेश दिया था। इस प्रकरण को छत्तीसगढ़ राज्य पुलिस जवाबदेही प्राधिकार कार्यालय में भेजकर सभी पुलिस अधिकारी कर्मचारियों के खिलाफ जांच कर प्रतिवेदन 1 माह के भीतर प्रेषित करने का आदेश आयोग ने दिया। साथ ही डीजीपी छत्तीसगढ़ को पुलिस अधिकारी व कर्मचारियों के खिलाफ अपने पद का दुरूप्योग करने के लिए उचित कार्रवाई की अनुशंसा भी आयोग द्वारा की जाएगी।

मंत्रालय सेवा अधिकारी-कर्मचारी संघ द्वारा आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह में हुए शामिल

भोपाल  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल वल्लभ भवन में मंत्रालय सेवा अधिकारी-कर्मचारी संघ द्वारा आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि कर्मचारी संगठन की यह सराहनीय पहल है कि वे केवल अपनी मांगों के लिए संघर्ष ही नहीं करते, बल्कि उत्कृष्ट और उल्लेखनीय कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित भी करते हैं। उन्होंने कहा कि अच्छा कार्य करने वालों को पहचान अवश्य मिलती है। ऐसे कार्यक्रम इस विश्वास को मजबूत करते हैं कि मेहनत और सकारात्मक कार्य को देखा और सराहा जाता है। प्रशासनिक कार्यों में प्रारंभिक टिप्पणी अत्यंत महत्वपूर्ण उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने विशेष रूप से फाइलों पर उत्कृष्ट टीप लिखने वाले कर्मचारियों की सराहना करते हुए कहा कि प्रशासनिक कार्यों में प्रारंभिक टिप्पणी का अत्यंत महत्व होता है, क्योंकि वही आगे की प्रक्रिया को दिशा देती है। सकारात्मक सोच और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने वाले कर्मचारियों को निश्चित रूप से सम्मान और पहचान मिलती है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने पत्रकारों को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बताते हुए कहा कि लोकतंत्र की मजबूती में पत्रकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका है। सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ कार्य करने वाले पत्रकार समाज के लिए प्रेरणास्रोत होते हैं। उन्होंने बच्चों, आपदा के समय साहस दिखाने वाले कर्मचारियों, वरिष्ठ पत्रकारों और अन्य प्रतिभाओं को सम्मानित करने की इस परंपरा को अत्यंत प्रशंसनीय बताया। उन्होंने कहा कि कार्य को सलीके और कुशलता से करने वाले ही सफलता प्राप्त करते हैं। ऐसे आयोजनों से उत्कृष्ट कार्य करने वालों का उत्साहवर्धन होता है और अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिलती है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने समारोह में वरिष्ठ पत्रकारों, बच्चों, आपदा के समय साहस दिखाने वाले कर्मचारियों और अन्य प्रतिभाओं को सम्मानित किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक, संरक्षक राजेश कौल, भगवान सिंह यादव तथा पदाधिकारी राजकुमार पटेल, आलोक वर्मा, संतोष बड़ोदिया, ठाकुरदास प्रजापति,मती साधना मिश्रा, सतीश शर्मा, हरिशरण द्विवेदी, दयानंद उपाध्याय, मतीन खान,मती दीप्ति बच्चानी, दिलीप सोनी, प्रियंकवास्तव, प्रहलाद उईके,मती चंदा सल्लाम, श्याम बिहारी दुबे, सुश्री नीलेश पटवा, विकास नोरंग, मंगल सोनवाने, हरीश बाथम, बादामी लाल, विष्णु नाथानी एवं विक्रम बाथम का विशेष योगदान रहा।  

नई जिम्मेदारी की शुरुआत: राज्य सूचना आयुक्तों ने ली शपथ, पारदर्शिता को मिलेगा बढ़ावा

भोपाल  राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने मध्यप्रदेश राज्य सूचना आयोग के नवनियुक्त राज्य सूचना आयुक्तों को मंगलवार को शपथ दिलाई। समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, मुख्य सचिव अनुराग जैन मंचासीन थे। शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन लोकभवन के सांदीपनि सभागार में किया गया था। इस अवसर पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  प्रहलाद सिंह पटेल भी मौजूद थे। राज्यपाल  पटेल ने  आलोक नागर और  राजेश भट्ट को राज्य सूचना आयुक्त के पद की शपथ दिलाई। उन्होंने शपथ ग्रहण के बाद राज्य सूचना आयुक्तों को पुष्प-गुच्छ भेंट कर बधाई एवं शुभकामनाएं दी। शपथ विधि का संचालन अपर मुख्य सचिव  संजय शुक्ल ने किया। शपथ ग्रहण समारोह में मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष  अवधेश प्रताप सिंह, मुख्य सूचना आयुक्त  विजय यादव, सूचना आयुक्त  ओंकार नाथ, डॉ. वंदना गांधी, डॉ. उमाशंकर पचौरी, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय  नीरज मंडलोई, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय  आलोक सिंह, पुलिस आयुक्त भोपाल  संजय कुमार, जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, सूचना आयुक्तों के परिजन, लोकभवन और सूचना आयोग के अधिकारी मौजूद रहे।    

अवैध निर्माण पर सख्ती: पोटका में प्रशासन का एक्शन, कई ठिकानों पर चला बुलडोजर

पूर्वी सिंहभूम. झारखंड के पूर्वी सिंहभूम के पोटका में अंचलाधिकारी निकिता बाला के निर्देश पर मंगलवार को पोटका थाना क्षेत्र के तुड़ी मौजा में किए गए अतिक्रमण पर प्रशासन का बुलडोजर चलाया गया. मिली जानकारी अनुसार तुड़ी मौजा में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर ठेकेदार रंजीत मिश्रा, जमशेदपुर रिसोर्सेज प्राइवेट लिमिटेड और मनोज कुमार सिंह द्वारा अवैध निर्माण कर कार्य किया जा रहा था जिसकी सूचना मिलने के बाद पोटका की अंचलाधिकारी निकिता बाला द्वारा जे पी एल ई के तहत केस दायर कर समय सीमा के तहत सभी को अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया था.  भारी सुरक्षा में कार्रवाई समय सीमा बीत जाने के वावजूद किसी के द्वारा अतिक्रमण नही हटाया गया. जिसके बाद जिला प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने के सीआई हेमंत कुमार और राजस्व कर्मचारी शांति राम षाड़ंगी को दंडाधिकारी के रूप में तैनात कर भारी संख्या में सुरक्षा बलों की नियुक्ति कर रंजीत मिश्रा, मनोज कुमार सिंह एवं जमशेदपुर रिसोर्सेज प्राइवेट लिमिटेड के द्वारा किए गए अतिक्रमण को पूरी तरह से हटा दिया गया. अभियान जारी रहेगा पोटका की अंचलाधिकारी निकिता बाला ने कहा कि क्षेत्र जहां भी अतिक्रमण की सूचना मिलती है वहां से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने बताया कि सभी अतिक्रमणकारियों पर जे पी एल ई के तहत मामला दर्ज कर समय दिया गया था. समय सीमा समाप्त होने के बाद जिला प्रशासन के निर्देश पर अतिक्रमण हटाने की कारवाई की गई है. 

स्टूडेंट्स के लिए अहम खबर: पंजाब में छुट्टी घोषित, पंजाब यूनिवर्सिटी की सभी परीक्षाएं टलीं

चंडीगढ़. पंजाब यूनिवर्सिटी (पी.यू.) ने 8 अप्रैल को होने वाली सभी परीक्षाएं स्थगित कर दी हैं। यह फैसला श्री गुरु नाभा दास जी के जन्मदिन पर पंजाब सरकार द्वारा घोषित की गई जनतक छुट्टी के कारण लिया गया है। यूनिवर्सिटी प्रशासन के अनुसार 8 अप्रैल को होने वाली सभी परीक्षाओं अब 16 अप्रैल को होंगी। विद्यार्थियों को सलाह की गई है कि वह नई तारीख के अनुसार अपनी तैयारियों को पक्का करें और किसी भी अपडेट के लिए यूनिवर्सिटी की ऑफिशियल वेबसाइट पर नजर रखें।     8 अप्रैल को जनतक छुट्टी का ऐलान दरअसल श्री गुरु नाभा दास जी का जन्मदिवस 8 अप्रैल को मनाया जा रहा है। संगत की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस दिन पंजाब में सरकारी छुट्टी घोषित की गई है। इस दौरान सभी सरकारी और निजी स्कूल-कॉलेज बंद रहेंगे। इसके साथ ही इस दिन सरकारी संस्थानों में भी छुट्टी रहेगी। 

सीटें, कई दावेदार: झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर बढ़ी हलचल, गठबंधन गणित पर टिकी नजरें

रांची  झारखंड में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज होने लगी है। राज्य से राज्यसभा की दो सीटें खाली होने जा रही हैं, जिन पर सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष दोनों की नजरें टिकी हुई हैं। इन सीटों को लेकर सत्ता पक्ष में भी अंदरूनी खींचतान के संकेत मिल रहे हैं, जबकि भाजपा सीमित संख्या के बावजूद मुकाबले को रोचक बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) दोनों सीटों पर अपनी दावेदारी मजबूत मान रहा है। पार्टी का मानना है कि राज्य की राजनीति में उसकी प्रमुख भूमिका के मद्देनजर उसे अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। हालांकि, यह राह इतनी आसान नहीं है। झामुमो को इन दोनों सीटों पर जीत सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस के सहयोग की आवश्यकता होगी। गठबंधन की मजबूती और आपसी तालमेल इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। कांग्रेस के लिए भी यह चुनाव कम अहम नहीं है। असम विधानसभा चुनाव में तालमेल की कमी के कारण पार्टी पहले से ही असहज स्थिति में है। ऐसे में झारखंड में राज्यसभा सीट पर अपनी दावेदारी छोड़ना उसके लिए राजनीतिक रूप से नुकसानदायक साबित हो सकता है। पार्टी के भीतर यह संदेश देने की कोशिश होगी कि वह गठबंधन में बराबरी की हिस्सेदार है और अपने राजनीतिक हितों से समझौता नहीं करेगी। भाजपा की मौजूदगी से रोमांचक होगा चुनाव, रेस में सीता सोरेन विपक्षी भाजपा भी इस चुनाव को हल्के में लेने के मूड में नहीं दिख रही है। भले ही पार्टी के पास अपने दम पर जीत के लिए पर्याप्त संख्या नहीं है, लेकिन सहयोगी दलों आजसू पार्टी, जदयू और लोजपा के साथ मिलाकर उसके पास 24 वोट हैं। ऐसे में यदि भाजपा चार अतिरिक्त वोटों का इंतजाम कर लेती है तो वह अपने प्रत्याशी को जीत दिलाने की स्थिति में आ सकती है। यही कारण है कि भाजपा संभावित क्रॉस वोटिंग और रणनीतिक समर्थन की संभावनाओं पर नजर बनाए हुए है। पार्टी के संभावित उम्मीदवारों को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। भाजपा की ओर से सीता सोरेन का नाम चर्चा में है। यदि उन्हें मैदान में उतारा जाता है तो चुनाव दिलचस्प हो सकता है। आंकड़ा गठबंधन के पक्ष में संख्या बल के लिहाज से देखें तो राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए एक उम्मीदवार को निर्धारित 28 वोटों की आवश्यकता होगी। सत्तारूढ़ गठबंधन के घटक दलों झामुमो, कांग्रेस, राजद, भाकपा माले को मिलाकर 56 विधायकों का आंकड़ा है, जो दो सीटों पर जीत के लिए पर्याप्त है, लेकिन इसके लिए गठबंधन के घटक दलों में आपसी तालमेल और विश्वास आवश्यक है।  

छत्तीसगढ़ सरकार का कड़ा रुख: RTE के तहत प्रवेश नहीं देने पर स्कूलों पर गिरेगी गाज

रायपुर. छत्तीसगढ़ सरकार ने शिक्षा के अधिकार कानून (RTE) को लेकर सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि RTE के तहत बच्चों को प्रवेश नहीं देने वाले निजी स्कूलों की मान्यता रद्द कर दी जाएगी। बता दें कि प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने प्रतिपूर्ति राशि नहीं बढ़ाने पर RTE के तहत बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश नहीं देने का ऐलान किया था, जिसके बाद सरकार ने कड़ा फैसला लिया है। प्रदेश के गैर-अनुदान प्राप्त निजी विद्यालयों में RTE के तहत प्रारंभिक कक्षाओं में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित हैं। इन सीटों पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS), दुर्बल वर्ग और वंचित समूह के बच्चों को उनके निवास क्षेत्र के भीतर प्रवेश दिया जाता है।सरकार ने यह भी साफ किया है कि छत्तीसगढ़ में दी जाने वाली शुल्क प्रतिपूर्ति राशि कई राज्यों के मुकाबले बेहतर या उनके बराबर है। कक्षा 1 से 5 तक: ₹7,000 प्रतिवर्ष, कक्षा 6 से 8 तक: ₹11,400 प्रतिवर्ष दिया जा रहा है। वहीं, दूसरे राज्यों में मध्य प्रदेश में ₹4,419, बिहार में ₹6,569, झारखंड में ₹5,100, उत्तर प्रदेश में ₹5,400 दिया जा रहा है। हालांकि ओडिशा, राजस्थान, महाराष्ट्र और कर्नाटक में यह राशि अधिक बताई गई है, लेकिन समग्र रूप से छत्तीसगढ़ की प्रतिपूर्ति को संतुलित और उचित बताया गया है। वर्तमान में प्रदेश के 6,862 निजी स्कूलों में RTE के माध्यम से लगभग 3,63,515 बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। वहीं इस वर्ष कक्षा पहली में करीब 22,000 सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया जारी है। राज्य सरकार गरीब बच्चों की शिक्षा के प्रति संवेदनशील छत्तीसगढ़ में निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009, अप्रैल 2010 से प्रभावी है। इसके अंतर्गत प्रदेश के गैर-अनुदान प्राप्त अशासकीय विद्यालयों की प्रारंभिक कक्षाओं में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित की गई हैं। इन सीटों पर आर्थिक रूप से कमजोर, दुर्बल वर्ग और वंचित समूह के बच्चों को उनके निवास क्षेत्र के भीतर प्रवेश दिलाया जाता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार गरीब बच्चों की शिक्षा के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और सभी के लिए शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। प्रतिपूर्ति राशि का पारदर्शी भुगतान शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत निजी स्कूलों को नर्सरी या कक्षा 1 में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करना अनिवार्य है। इसके बदले राज्य सरकार प्रति बच्चा व्यय के आधार पर स्कूलों को प्रतिपूर्ति राशि का भुगतान करती है। यह राशि सरकारी स्कूल में प्रति बच्चे पर होने वाले खर्च या निजी स्कूल की वास्तविक फीस (दोनों में से जो भी कम हो) के आधार पर निर्धारित की जाती है। ​अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर प्रतिपूर्ति छत्तीसगढ़ में शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि कई पड़ोसी राज्यों की तुलना में बेहतर या उनके समकक्ष है। प्रदेश में वर्ष 2011-12 से ही कक्षा 1 से 5 तक 7000 रूपए और कक्षा 6 से 8 तक 11 हजार 400 रूपए वार्षिक प्रतिपूर्ति राशि निर्धारित है। तुलनात्मक रूप से देखें तो मध्य प्रदेश में 4,419 रूपए बिहार में 6,569 रूपए, झारखंड में 5,100 रूपए और उत्तर प्रदेश में 5,400 रूपए वार्षिक दिए जाते हैं। यद्यपि ओडिशा, राजस्थान, महाराष्ट्र और कर्नाटक में यह राशि अधिक है, किंतु समग्र मूल्यांकन में छत्तीसगढ़ की प्रतिपूर्ति राशि संतुलित और उचित है। ​साढ़े तीन लाख से अधिक बच्चे ले रहे लाभ वर्तमान में राज्य के 6,862 निजी विद्यालयों में आर.टी.ई. के माध्यम से लगभग 3,63,515 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इस वर्ष भी कक्षा पहली की लगभग 22,000 सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया जारी है। चूंकि सभी निजी विद्यालयों को आर.टी.ई. अधिनियम के प्रावधानों के तहत ही मान्यता दी गई है, अतः यह उनकी वैधानिक जिम्मेदारी है कि वे निर्धारित सीटों पर प्रवेश सुनिश्चित करें। ​नियमों के उल्लंघन पर होगी कड़ी कार्रवाई यदि कोई निजी विद्यालय आरटीई के तहत प्रवेश देने से इंकार करता है या प्रक्रिया में व्यवधान डालता है तो राज्य शासन उनके विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगा। इसमें विद्यालय की मान्यता समाप्त करने तक का प्रावधान शामिल है। शिक्षा विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे इस संबंध में फैलाई जा रही किसी भी भ्रामक जानकारी पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक तथ्यों पर ही विश्वास करें।

सीएम मोहन यादव का एलान: प्रदेश के मजरे, टोले और सांदीपनि स्कूल जल्द सड़कों से जुड़ेंगे

भोपाल  जल्द ही प्रदेश के मजरे, टोले ओर सांदीपनि स्कूल सड़कों से जुड़ेंगे। इन्हें आपस में जोड़ने के लिए 7 हजार 135 सडकें बनाई जाएंगी। यह काम सुगम संपर्कता परियोजना के तहत किए जाएंगे। सड़क निर्माण कार्यों में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। वहीं कार्यों की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए ड्रोन का उपयोग किया जाएगा। सिपरी सॉफ्टवेयर का उपयोग अब सिर्फ डीपीआर तैयार करने के लिए ही नहीं किया जाएगा, बल्कि इससे सड़क के साथ पुल-पुलियों की स्थिति की निगरानी करने में भी मदद ली जाएगी। सीएम ने की समीक्षा एमपी के सीएम डॉ. मोहन यादव ने उक्त परियोजना की समीक्षा बैठक आयोजित की। इस बैठक में संबंधित अधिकारियों को दो टूक निर्देश दिए गए कि गांव-गांव के विकास के लिए सड़कों की इस परियोजना का काम तेजी से किया जाए। जहां आबादी 100 से पार, वहीं बिछेगी सड़क इस परियोजना की खासियत ये है कि इसके तहत 100 से अधिक आबादी वाले मजरों-टोलों को सड़क सुविधा से जोड़ा जाएगा। ये सड़कें वीबी-जीराम-जी योजना के अंतर्गत बनावाई जाएंगी। 7000 से ज्यादा सड़कों का नेटवर्क तैयार करने वाले इस काम पर 1000 करोड़ रुपए खर्च किए जाने हैं। सुगम संपर्कता परियोजना के तहत शुरू किए जाने वाले इस काम के लिए प्रदेश की प्रत्येक जनपद पंचायत तीन करोड़ तक की स्वीकृति दे सकेंगी। यह भी होगा -पूर्व में बनी सड़कों की रिम्स पोर्टल के माध्यम से जियो-इंवेंट्री की जा रही है। इससे नई सड़कों के चयन में दोहराव की स्थिति नहीं बनेगी। जियो इंवेंट्री में राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग, पीएमजीएसवाय, मुख्य जिला सड़क और संपर्कता एप से चयनित सड़कें शामिल हैं।  -निर्धारित लक्ष्य के अनुसार 33 हजार 655 सड़कों में से 17 हजार 437 सड़कों की जियो इंवेंट्री का कार्य पूरा कर लिया है। इसके साथ ही 9 जिलों में 80 प्रतिशत से अधिक सर्वे कार्य पूर्ण कर लिया गया है। रतलाम, जबलपुर, आगर-मालवा, मंदसौर और पन्ना उक्त काम में आगे है। ऐसे समझें पूरा प्लान कुल सड़कें- 7,135 बजट- करीब 1000 करोड़ रुपए कवरेज- 100+ आबादी वाले सभी मजरे-टोले योजना- वीबी-जीराम-जी योजना के तहत होना है निर्माण तकनीक- ड्रोन से मॉनिटरिंग, सिपरी सॉफ्टवेयर से निगरानी मंजूरी का अधिकार- हर जनपद पंचायत को 3 करोड़ रुपए तक की स्वीकृति प्रगति रिपोर्ट कुल चिह्नित सड़कें- 33,655 जियो इंवेंट्री पूरी- 17,437 80% से ज्यादा सर्वे वाले जिले रतलाम जबलपुर आगर-मालवा मंदसौर पन्ना क्या बदलेगा? -अब हर गांव अपने नजदीकी शहरों से जुड़ेगा -बच्चों के लिए पक्की सड़क बनीं तो स्कूल जाना आसान होगा -मरीजों को समय पर अस्पताल तक पहुंचना आसाना होगा -किसानों को मंडी तक बेहतर कनेक्टिविटी -बरसात में कटने और कीचड़ में बदलने वाली सड़कें अब पक्की होंगी  

कूनो में बोत्सवाना के चीते हुए फिट, 6 का क्वारंटाइन समाप्त, बड़े बाड़ों में पहली छलांग

 श्योपुर मध्यप्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में चीता पुनर्स्थापना प्रोजेक्ट के तीसरे चरण में बोत्सवाना से लाए गए 9 चीतों में से 6 चीतों का क्वारंटाइन समय पूरा होगया. जिसके बाद उन्हें बड़े बाड़ों में शिफ्ट कर दिया गया है. कूनो प्रबंधन ने प्रेस नोट जारी कर बताया कि एक महीने बाद सभी चीते फिट है और कूनो के नए माहौल में रच बस रहे है।  पिछले दिनों 28 फरवरी 2026 को बोत्सवाना से कुल 9 चीते कूनो पहुंचे थे, जिनमें 6 मादा और तीन नर शामिल थे. नियम के मुताबिक, इन सभी को अलग रखा गया था. अब सेहत की जांच और अफसरों की मंजूरी के बाद,चार मादा और दो नर चीतों को बड़े बाड़ों में छोड़ दिया गया है।  वन विभाग के अफसरों के मुताबिक बचे हुए तीन चीतों को भी बहुत जल्द बड़े बाड़ों में शिफ्ट कर दिया जाएगा. इसकी तैयारी चल रही है और यह काम भी जल्द ही पूरा हो जाएगा।  अधिकारियों के अनुसार,बोत्सवाना से आए सभी नौ चीते एकदम फिट हैं और उन्हें कूनो का वातावरण रास आ रहा है. भारत से बरसों पहले गायब हो चुके चीतों को वापस लाने की दिशा में इस प्रोजेक्ट को बहुत अहम माना जा रहा है।  चीता प्रोजेक्ट के फील्ड डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा ने 'आजतक' को फोन कॉल पर बताया कि इन सभी की सेहत और रहने-सहने के ढंग पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही है, ताकि आगे चलकर इन्हें सुरक्षित तरीके से खुले जंगल में छोड़ा जा सके।  यहां बता दें कि वर्तमान में कूनो नेशनल पार्क में कुल 50 चीते हो गए हैं, जिनमें से 12 चीते खुले जंगल में घूम रहे हैं।  अलग-अलग क्वारंटाइन बाड़ों में रखा गया था बता दें कि बीते 28 फरवरी 2026 को बोत्सवाना से विशेष विमान फिर सेना के हेलीकॉप्टर के जरिए कूनो पहुंचे थे। नौ चीतों के इस जत्थे में 6 मादा और 3 नर शामिल थे। बायो-सिक्योरिटी प्रोटोकॉल के तहत इन्हें अलग-अलग क्वारंटाइन बाड़ों में रखा गया था। विशेषज्ञों की निगरानी के बाद अब 4 मादा और 2 नर चीतों को बड़े शिकार वाले बाड़ों में शिफ्ट कर दिया गया है। अधिकारियों ने दी हरी झंडी वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बाकी बचे 3 चीते भी पूरी तरह स्वस्थ हैं और उन्हें भी अगले कुछ दिनों में बड़े बाड़ों में भेज दिया जाएगा। कूनो प्रबंधन के अनुसार सभी चीते कूनो के वातावरण में बहुत तेजी से ढल रहे हैं। उनकी सेहत और व्यवहार पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है। चीता प्रोजेक्ट के तहत वर्तमान में स्थिति     देश में वर्तमान में चीतों की कुल संख्या 53     कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या 50     गांधी सागर पार्क में चीतों की संख्या 3     कूनों के खुले जंगल में चीते 12     एनक्लोजर में मौजूद चीतों की संख्या 38 कूनो में चीतों का 'अर्धशतक', देश में कुल 53 चीते कूनों की धरती पर इन चीतों की शिफ्टिंग के बाद नेशनल पार्क में चीतों की कुल संख्या अब 50 पहुंच गई है। वहीं गांधी सागर नेशनल पार्क में 3 चीतों को मिलाकर देश में चीतों की कुल संख्या 53 हो गई है।  चीतों का तीसरा घर, ढाई महीने बाद होगी शिफ्टिंग देश के महत्वकांक्षी चीता पुनर्स्थापन प्रोजेक्ट के तहत मध्य प्रदेश में वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (नौरादेही) को चीतों का तीसरा घर बनाया जाएगा। यहां ग्राउंड पर तेजी से काम चल रहा है। बुंदेलखंड की धरती पर जल्द ही प्रदेश के सबसे बड़े वन्य प्राणियों के घर में चीते दौड़ लगाते नजर आएंगे। करीब 2339 वर्ग किलोमीटर में फैला यह अभयारण्य प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है, जहां अब चीता, तेंदुआ और बाघ एक साथ नजर आने की तैयारी है। मोहली रेंज में बनाया जा रहा एनक्लोजर बोमा चीता प्रोजेक्ट व वन विभाग अधिकारियों के अनुसार संभव है, बोत्सवाना से कूनो लाए गए 9 चीतों में से 4 चीतों को नौरादेही शिफ्ट किया जाएगा। इनमें 1 नर और 3 मादा शामिल हो सकते हैं। आगामी मई-जून तक शिफ्टिंग का टारगेट रखा है। नौरादेही में चीतों के लिए सबसे उपयुक्त मोहली रेंज को चुना गया है। यहां घास के विशाल मैदान, छायादार पेड़ और पर्याप्त संख्या में शाकाहारी वन्यजीव मौजूद हैं, जो चीतों के लिए आदर्श परिस्थितियां तैयार करते हैं। इसके अलावा सिंगपुर और झापन रेंज भी चयनित की गई हैं।

IAS अंशुल का अलग अंदाज: पूर्णिया DM ने किसानों के साथ खेत में काटी फसल, लोगों ने कहा—पहली बार देखा

पूर्णिया पूर्व (पूर्णिया) जिले में कृषि गतिविधियों की निगरानी और उत्पादन के सटीक आकलन को लेकर मंगलवार को पूर्णिया के जिलाधिकारी अंशुल कुमार स्वयं खेत में उतरकर गेहूं की फसल की कटाई करते नजर आए। पूर्णिया पूर्व प्रखंड क्षेत्र के रजीगंज पंचायत अंतर्गत रानीपतरा के लोखड़ा गांव में आयोजित गेहूं क्रॉप कटिंग कार्यक्रम में उन्होंने विधिवत उद्घाटन करते हुए किसानों के साथ मिलकर फसल काटी। इस दौरान जिला कृषि पदाधिकारी हरिहर प्रसाद चौरसिया, जिला सांख्यिकी पदाधिकारी अजित कुमार, प्रखंड कृषि पदाधिकारी अशोक पंजियार, नोडल कृषि समन्वयक श्याम कुमार, किसान सलाहकार संजीव कुमार, संजीव कुमार सिंह, पौरस कुमार सिंह, रविंद्र कुमार गुप्ता सहित कई अधिकारी एवं कृषि कर्मी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिक तरीके से क्रॉप कटिंग की प्रक्रिया अपनाई गई। किसान सलाहकार संजीव कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि 10 गुण 5 मीटर के प्लॉट में गेहूं की कटाई की गई, जिसमें कुल 12.5 किलोग्राम उत्पादन प्राप्त हुआ। इस आधार पर गणना करने पर प्रति हेक्टेयर लगभग 25 क्विंटल गेहूं उत्पादन का आकलन किया गया। यह उत्पादन क्षेत्र के किसानों के लिए उत्साहजनक माना जा रहा है। डीएम ने किसानों से की बातचीत डीएम अंशुल कुमार ने मौके पर मौजूद किसानों से बातचीत कर खेती के आधुनिक तरीकों, बीज की गुणवत्ता और उर्वरक उपयोग के बारे में जानकारी ली। उन्होंने किसानों को वैज्ञानिक पद्धति अपनाने, समय पर बुआई करने और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की सलाह दी, ताकि उत्पादन और आय दोनों में वृद्धि हो सके। उन्होंने अधिकारियों को भी निर्देश दिया कि वे किसानों के बीच जागरूकता बढ़ाएं और उन्हें तकनीकी सहायता समय पर उपलब्ध कराएं। क्रॉप कटिंग कार्यक्रम के बाद जिलाधिकारी ने बीरपुर चौक पर लगे मखाना की खेती का भी निरीक्षण किया। उन्होंने वहां मौजूद किसानों से मखाना उत्पादन की प्रक्रिया, लागत और लाभ के बारे में विस्तार से जानकारी ली। किसानों ने बताया कि मखाना की खेती कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाली फसल है, जिससे उनकी आय में अच्छी बढ़ोतरी हो रही है। डीएम ने मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि यह क्षेत्र के लिए आय का बेहतर स्रोत बन सकता है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि मखाना किसानों को हर संभव सहायता प्रदान की जाए, ताकि इस फसल का विस्तार हो सके। इस पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रशासन की सक्रियता और किसानों की भागीदारी ने यह संकेत दिया कि जिले में कृषि विकास को लेकर सकारात्मक प्रयास किए जा रहे हैं। डीएम का सादगी भरा अंदाज और जमीनी जुड़ाव ग्रामीणों के दिलों को छू गया। हैरान रह गए किसान-मजदूर मंगलवार को रजीगंज पंचायत के रानीपतरा मौजा स्थित लोखड़ा गांव में गेहूं की क्रॉप कटिंग के दौरान एक अनोखा और यादगार दृश्य देखने को मिला। खेत में कार्यरत मजदूर उस समय हैरान रह गए, जब एक साधारण व्यक्ति की तरह उनके बीच शामिल होकर पूर्णिया के जिलाधिकारी अंशुल कुमार गेहूं काटने लगे। शुरुआत में महिला मजदूर-मीरा देवी, रीना देवी, तेतरी देवी, अमीना खातून और कजली देवी-उन्हें पहचान नहीं सकीं, लेकिन जैसे ही उन्हें जानकारी मिली कि उनके साथ काम करने वाला व्यक्ति जिले का डीएम है, उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। मजदूरों ने बताया कि उन्होंने पहली बार किसी डीएम को इतने करीब से देखा और वह भी उनके साथ खेत में काम करते हुए। डीएम का यह सादगी भरा अंदाज और जमीनी जुड़ाव ग्रामीणों के दिलों को छू गया तथा पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया। वहीं किसान गयासुद्दीन ने भी कहा कि आप जिलाधिकारी मेरे खेत पर आए और मुझसे जानकारी ली, ये मेरे लिए काफी गर्व की बात है।