samacharsecretary.com

गुरु गोरखनाथ स्वास्थ्य सेवा यात्रा समाज के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण अभियान –CM योगी

लखनऊ में आयोजित गुरु गोरखनाथ स्वास्थ्य सेवा यात्रा के कार्यकर्ताओं के सम्मान समारोह में सम्मिलित हुए मुख्यमंत्री गुरु गोरखनाथ स्वास्थ्य सेवा यात्रा समाज के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण अभियान – मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि मानव का सेवा भाव ही उसे सभी जीवों में ईश्वर की सबसे श्रेष्ठ कृति बनाता है उपचार से भी अधिक महत्वपूर्ण बचाव और जागरूकता है, इस सेवा यात्रा ने स्वास्थ्य जागरूकता फैलाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है – सीएम योगी मुख्यमंत्री ने मातृ-शिशु मृत्यु दर नियंत्रण के बारे में जागरूकता फैलाने को भी अभियान से जोड़ने की सलाह दी अपने कर्तव्य को निष्ठा से निभाकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देना ही सच्ची राष्ट्रभक्ति है – सीएम योगी आदित्यनाथ लखनऊ,  गुरु गोरखनाथ स्वास्थ्य सेवा यात्रा को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाज के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने वाला एक महत्वपूर्ण अभियान बताते हुए इसकी सराहना की है। उन्होंने कहा कि यह यात्रा केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के उपेक्षित और दूरस्थ क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने का सशक्त माध्यम बन रही है। मुख्यमंत्री मंगलवार को राजधानी में गुरु गोरखनाथ स्वास्थ्य सेवा यात्रा के कार्यकर्ता सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में नेशनल मेडिकोज ऑर्गेनाइजेशन (एनएमओ) के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि संगठन ने 2019 से इस सेवा यात्रा को निरंतर विस्तार देते हुए आज इसे एक बड़े जन-आंदोलन का रूप देने की दिशा में कार्य किया है। यह यात्रा विशेष रूप से उत्तर प्रदेश की नेपाल सीमा से सटे सात जिलों महराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी और पीलीभीत में संचालित हो रही है, जहां जनजातीय समुदायों और दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी रही है। लगभग 550 किलोमीटर लंबी भारत-नेपाल सीमा के इन इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य है, जिसे स्वयंसेवक समर्पण के साथ निभा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने मानव के सेवा भाव की व्याख्या करते हुए कहा कि “प्राणिनामार्थ नाशनम्” का भाव यह है कि मनुष्य अन्य जीवों की तुलना में ईश्वर की श्रेष्ठ कृति माना गया है, क्योंकि वही अन्य प्राणियों की सेवा कर सकता है और अपने सेवा भाव से दूसरों को प्रेरित भी कर सकता है। उन्होंने कार्यकर्ताओं की सराहना करते हुए कहा कि वे यही कार्य कर रहे हैं और उनकी जितनी भी प्रशंसा की जाए, कम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस यात्रा के माध्यम से न केवल इलाज किया जा रहा है, बल्कि लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि “उपचार से अधिक महत्वपूर्ण बचाव है” और जागरूकता के जरिए कई गंभीर बीमारियों को प्रारंभिक स्तर पर ही रोका जा सकता है। उन्होंने बताया कि इन क्षेत्रों में त्वचा रोग, जलजनित बीमारियां, एनीमिया और तपेदिक जैसी समस्याएं अधिक देखने को मिलती हैं, जिनके प्रति जागरूकता बेहद जरूरी है। साथ ही उन्होंने अभियान के कार्यकर्ताओं को मातृ-शिशु मृत्यु दर को नियंत्रित करने के लिए जागरूकता फैलाने के कार्य को भी अभियान से जोड़ने की सलाह दी और कहा कि यदि मां और बच्चा स्वस्थ हैं, तो समाज भी स्वस्थ रहता है। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने वर्ष 2007-08 के नेपाल के खूनी संघर्ष का प्रसंग साझा करते हुए बताया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले थारू समुदाय के लोगों ने किस प्रकार अपनी राष्ट्रभक्ति और आत्मसम्मान का परिचय देते हुए माओवादी प्रभाव से दूरी बनाए रखी और भारत की मुख्यधारा से जुड़े रहे। उन्होंने इस कार्य के लिए पिछले कई वर्षों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा चलाए जा रहे अभियानों की भी सराहना की। साथ ही बताया कि वर्तमान में सरकार और सामाजिक संगठनों के संयुक्त प्रयासों से इन क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हुआ है। सीएम योगी ने बताया कि वर्ष 2017 के बाद राज्य सरकार ने वनटांगिया गांवों और अत्यंत पिछड़े समुदायों के जीवन स्तर में सुधार के लिए व्यापक कार्य किए हैं। इन गांवों को राजस्व ग्राम का दर्जा देकर वहां पक्के मकान, बिजली, पानी, स्कूल, आंगनवाड़ी और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। साथ ही पात्र लोगों को पेंशन, राशन कार्ड और आयुष्मान भारत योजना के तहत स्वास्थ्य बीमा जैसी सुविधाएं भी दी गई हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार केवल थारू ही नहीं, बल्कि प्रदेश की अन्य जनजातियों मुसहर, कोल, सहरिया, बुक्सा, चेरो आदि को भी विकास योजनाओं से जोड़ते हुए उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि वह अगले दिन बहराइच के भरतापुर गांव का दौरा करेंगे, जहां थारू जनजातीय समुदाय के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर बसाकर उन्हें जमीन, आवास और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब कोई समाज एकजुट होकर किसी कार्य में पूरी निष्ठा के साथ जुटता है, तो उसके परिणाम भी व्यापक और सकारात्मक होते हैं। इसी का परिणाम है कि स्वास्थ्य सेवा यात्रा का यह अभियान, जो वर्ष 2019 में छह जिलों में 27 हजार मरीजों तक सीमित था, अब सात जिलों में लगभग 2.66 लाख लोगों तक पहुंच चुका है। उन्होंने इसे कार्यकर्ताओं की सेवा भावना और समर्पण का परिणाम बताते हुए उनके प्रयासों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने चिकित्सकों से आह्वान किया कि वे अपने दायित्वों को केवल अस्पतालों तक सीमित न रखें, बल्कि समाज के जरूरतमंद वर्गों तक स्वयं पहुंचें। प्रत्येक चिकित्सक को महीने में कम से कम एक दिन ऐसे सेवा कार्यों के लिए समर्पित करना चाहिए। इससे न केवल समाज को लाभ मिलेगा, बल्कि चिकित्सकों को भी विविध अनुभव प्राप्त होंगे। राष्ट्रभक्ति की परिभाषा स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल नारों तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने कर्तव्यों के प्रति ईमानदारी और समर्पण ही सच्ची राष्ट्रभक्ति है। चाहे छात्र हो, शिक्षक, सरकारी कर्मचारी या चिकित्सक हर व्यक्ति अपने कार्य को निष्ठा से निभाकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकता है। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार की योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के माध्यम से गरीबों को मुफ्त इलाज की सुविधा मिल रही है। राज्य सरकार ने भी इसे विस्तार देते हुए अधिक से अधिक लोगों तक इसका लाभ पहुंचाने का प्रयास किया है। मातृ मृत्यु … Read more

निराश्रित महिलाओं, वृद्ध और दिव्यांगजनों को दी जाने वाली पेंशन राशि में पिछले 9 वर्षों में हुई पांच गुना की वृद्धि

मिशन ज़ीरो पॉवर्टी और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से यूपी में समावेशी विकास को मिली नई रफ्तार निराश्रित महिलाओं, वृद्ध और दिव्यांगजनों को दी जाने वाली पेंशन राशि में पिछले 9 वर्षों में हुई पांच गुना की वृद्धि मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना से 26.81 लाख, जबकि लखपति महिला योजना से 18.55 लाख महिलाएं हुईं लाभान्वित दिव्यांगजनों के लिए प्रदेश में चलाए जा रहे हैं 21 विशेष विद्यालय, जिनमें से 16 में स्मार्ट क्लास की व्यवस्था अल्पसंख्यक समुदाय के कल्याण के उद्देश्य से प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम को किया गया पूरे राज्य में विस्तारित लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समावेशी विकास के विजन को सफल बनाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले 9 वर्षों में गरीब, वंचित और कमजोर वर्गों के सशक्तीकरण के लिए अनेक महत्त्वाकांक्षी योजनाएं लागू की हैं। इनमें योगी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना “मिशन ज़ीरो पॉवर्टी” ने विशेष रूप से उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। जिसके सफल क्रियान्वयन से उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले 9 वर्षों में लगभग 6 करोड़ लोगों को बहुआयामी गरीबी से मुक्ति दिलाने में सफलता हासिल की है। साथ ही सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रदेश की महिला, वृद्ध, दिव्यांगजन, ट्रांसजेंडर और अल्पसंख्यक समुदाय के समुचित विकास को सुनिश्चित करने के कई सार्थक प्रयास किए गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश से गरीबी के समूल उन्मूलन के उद्देश्य से गांधी जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर, 2024 से “मिशन ज़ीरो पॉवर्टी” को लागू किया है। इस कार्यक्रम के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत में गरीब परिवारों की पहचान कर उनकी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। “मिशन ज़ीरो पॉवर्टी” के तहत प्रदेश में अब तक 13.57 लाख परिवारों को चिन्हित किया जा चुका है, जिन्हें 17 विभिन्न सरकारी योजनाओं के माध्यम से लाभान्वित किया जा रहा है। योगी सरकार का लक्ष्य है कि इन परिवारों को ऐसे आर्थिक कार्यों से जोड़ा जाए, जिससे उन्हें दीर्घकाल में न्यूनतम ₹1.25 लाख की स्थायी वार्षिक आय प्राप्त हो सके। योगी सरकार ने प्रदेश में समावेशी विकास को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति की है। इस दिशा में प्रदेश की निराश्रित महिलाओं, वृद्धजनों और दिव्यांगजनों को दी जाने वाली पेंशन राशि में पिछले 9 वर्षों में लगभग पांच गुना वृद्धि की जा चुकी है। योगी सरकार के पहले वर्ष 2017 में जहां मात्र ₹300 प्रतिमाह पेंशन दी जाती थी, वहीं अब इसे बढ़ाकर ₹1000 प्रतिमाह किया गया है, जिसे अप्रैल 2026 से ₹1500 प्रतिमाह किए जाने का निर्णय लिया गया है। वर्तमान में प्रदेश के 67.50 लाख से अधिक वृद्धजनों, 26.81 लाख निराश्रित महिलाएं और 11.57 लाख दिव्यांगजन नियमित पेंशन का लाभ उठा रहे हैं। इसके साथ ही कुष्ठ रोगियों की पेंशन भी ₹2500 से बढ़ाकर ₹3000 प्रतिमाह की जा चुकी है।  गरीबों के लिए आवास और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना भी सरकार की प्राथमिकता रही है। पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में 62 लाख से अधिक लोगों को मुफ्त आवास उपलब्ध कराया जा चुका है। वहीं 15 करोड़ गरीबों को 35 किलोग्राम खाद्यान्न, एक किलोग्राम दाल या साबुत चना, एक किलोग्राम आयोडाइज्ड नमक और एक किलोग्राम रिफाइंड तेल का निःशुल्क वितरण किया जा रहा है। अंत्योदय कार्डधारकों को प्रति माह एक किलोग्राम चीनी भी दी जा रही है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत 1.86 करोड़ से अधिक परिवारों को निःशुल्क गैस कनेक्शन दिए गए हैं और होली तथा दीपावली पर दो मुफ्त एलपीजी सिलेंडर भी वितरित किए जा रहे हैं। योगी सरकार की समावेशी विकास की योजनाओं ने आधी आबादी, महिलाओं के जीवन को भी बेहतर बनाने की कई सार्थक पहल की हैं। इस दिशा में मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के तहत 26.81 लाख बेटियां लाभान्वित हुईं हैं, जबकि मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के अंतर्गत 1.05 लाख बच्चों को सहायता मिली है। मिशन वात्सल्य के तहत एक लाख से अधिक बच्चों को उनके अभिभावकों से मिलाया गया है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना से 60 लाख माताओं को लाभ मिला है। जबकि मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के माध्यम से अब तक 5.20 लाख से अधिक बेटियों के विवाह संपन्न कराए जा चुके हैं। ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत 9.43 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से 1.06 करोड़ से अधिक महिलाओं को जोड़ा गया है। लखपति महिला योजना के तहत 35 लाख से अधिक महिलाओं की पहचान की गई है, जिनमें से 18.55 लाख महिलाएं लखपति श्रेणी में पहुंच चुकी हैं। स्वयं सहायता समूहों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत 2,682 उचित मूल्य की दुकानों का आवंटन किया गया है और 60 हजार समूहों की महिलाओं के माध्यम से ड्राई राशन का वितरण किया जा रहा है। यही नहीं, औद्योगिक क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति दी गई है। इसका परिणाम है कि 2017 में जहां महिला श्रम बल भागीदारी लगभग 13 प्रतिशत थी, वह बढ़कर करीब 36 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यही नहीं, प्रदेश में दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण के लिए भी पिछले 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसके तहत कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण योजना के तहत वर्ष 2024-25 तक 3,84,543, जबकि वर्ष 2025-26 में 17,454 दिव्यांगजन लाभान्वित हुए हैं। वहीं 1,679 कॉक्लियर सर्जरी तथा 845 श्रवण बाधित बच्चों के कॉक्लियर इम्प्लांट जैसी उन्नत चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई हैं। साथ ही प्रदेश में 21 विशेष विद्यालय संचालित हैं, जिनमें से 16 में स्मार्ट क्लास की व्यवस्था है। वहीं मानसिक रूप से दिव्यांगों के लिए लखनऊ में ममता स्कूल और आजमगढ़ में समेकित विशेष माध्यमिक विद्यालय का निर्माण किया गया है। सरकारी नौकरियों में 4 प्रतिशत और शैक्षणिक संस्थानों में 5 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया गया है। अन्य पिछड़ा वर्ग की युवतियों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से चलाई जा रही विवाह अनुदान योजना के तहत वर्ष 2025-26 तक कुल 6,47,863 लाभार्थियों को ₹1,295.72 करोड़ की विवाह अनुदान राशि प्रदान की गई। जबकि अन्य पिछड़ा वर्ग कंप्यूटर प्रशिक्षण योजना के माध्यम से 9 वर्षों में 1,01,139 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। वहीं ट्रांसजेंडर समुदाय के कल्याण के लिए योगी सरकार ने ट्रांसजेंडर समुदाय के वरिष्ठ नागरिकों के लिए वृद्धाश्रम की सुविधा उपलब्ध कराई है। साथ … Read more

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद पर कड़ा रुख, गृहमंत्री बोले—समयसीमा में होगा खात्मा

रायपुर. डिप्टी सीएम एवं गृहमंत्री विजय शर्मा जगदलपुर रवाना हुए, जहां उनके सामने कुख्यात नक्सली लीडर अपने साथियों के साथ सरेंडर करेंगे। रवानगी से पहले विजय शर्मा ने कहा, 8 एके 47 और अन्य हथियारों और साथियों के साथ आज पापाराव का पुनर्वास है। समाज के सामने आत्मसमर्पण होगा। मैं प्रेस कॉन्फ्रेंस भी करूंगा। नियत समय 31 मार्च तक समूचे छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद खत्म होगा। 30-35 जो छिटपुट नक्सली बचे हैं उनका भी पुर्नवास होगा। नक्सल लीडर गणपति अभी कहां है पता नहीं, मिशीर भी अभी बचा है। 31 मार्च की रात कोई हैप्पी न्यू ईयर नहीं है। 31 मार्च के बाद भी एहतियात तो बरतना ही होगा। सुप्रीम कोर्ट के धर्मांतरण को लेकर दिए आदेश पर गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में आदेश दिया मगर यह प्रक्रिया पुरानी है। अगर कोई व्यक्ति इस्लाम या ईसाई समाज में जाएगा तो उनको SC समाज के मिलने वाले बेनिफिट नहीं मिलेंगे इसलिए संस्कृति बहुत ही महत्वपूर्ण है। गांव-गांव में विभेद उत्पन्न हो गए हैं। माओवाद पहले वर्ग संघर्ष प्रारंभ करना चाहता था, मगर नहीं कर पाया, वहीं धर्मांतरण ने यह वर्ग संघर्ष खड़ा कर दिया। वर्ग संघर्ष के चलते आदिवासी समाज के बड़े तपके की मांग है कि डीलिस्टिंग होनी चाहिए। अब निर्णय क्या होता है संविधान के आधार पर यह न्यायालय बताएगा। अफीम मामले में बोले – व्यक्ति का नहीं कानून का होता है राज अफीम की खेती पर कलेक्टरों की रिपोर्ट को लेकर गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा, कबसे यह चल रहा है इसको निकालना है।व्यक्ति का राज नहीं होता, कानून का राज होता है। दुर्ग के बाद बलरामपुर और रायगढ़ में भी कार्रवाई हुई। सीएम साय ने कलेक्टरों को आदेश किया था कि जहां भी गड़बड़ी हुई हो वहां कार्रवाई करें। जल्द इसको इंटीग्रेटेड कर सोचा जाएगा कि यह कैसे हो रहा है। अगर कोई गैंग इसके पीछे है तो उसे नेस्तानाबूत किया जाएगा।

रेल यात्रियों के लिए खुशखबरी: बिहार के स्टेशनों पर फ्री पानी और स्वास्थ्य सुविधाएं शुरू

जमुई. गर्मी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए दानापुर मंडल ने यात्रियों की सुविधा के लिए व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। मंडल प्रशासन ने प्रमुख स्टेशनों पर शीतल पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाओं और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने का निर्णय लिया है। जनसंपर्क पदाधिकारी अभिषेक कुमार ने बताया कि मंडल के वाणिज्य विभाग द्वारा पटना जंक्शन, राजेंद्रनगर टर्मिनल, दानापुर, पाटलिपुत्र जंक्शन और आरा सहित अन्य प्रमुख स्टेशनों पर सामान्य कोच यात्रियों के लिए पहले से मौजूद नलों के अलावा मुफ्त शीतल जल की व्यवस्था की जाएगी। जरूरत के अनुसार ठंडे शरबत और अन्य पेय पदार्थ भी नि:शुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे, जिसमें एनजीओ, रेलवे कर्मियों और स्वयं सहायता समूहों का सहयोग लिया जाएगा। स्टाल और मशीनों का नियमित निरीक्षण यात्रियों को सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए वाटर वेंडिंग मशीन और खानपान स्टालों का नियमित निरीक्षण किया जाएगा। सभी स्टाल संचालकों को अधिकृत बोतलबंद पानी का पर्याप्त भंडारण रखने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा, अन्य ब्रांडों को भी गर्मी के मौसम की मांग के अनुसार स्टॉक बनाए रखने की सलाह दी गई है। नई व्यवस्थाएं और सुझाव मंडल प्रशासन ने प्रमुख स्टेशनों पर भुगतान के आधार पर जनता मील और पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। नए वाटर कूलर लगाने का प्रस्ताव स्वीकृति के अंतिम चरण में है। आरआरसीटीसी द्वारा रेल नीर सेवा पूरी तरह से तैयार रखी गई है। यात्रियों से गर्मी में पर्याप्त पानी, ओआरएस और छाछ का सेवन करने, धूप से बचने के लिए छाता या टोपी का उपयोग करने की अपील की गई है। डिजिटल सुविधा और स्वास्थ्य सुरक्षा लंबी कतारों से बचने के लिए रेल आनलाइन ऐप के माध्यम से डिजिटल टिकट बुकिंग को प्रोत्साहित किया जा रहा है। दोपहर की भीषण गर्मी से राहत के लिए प्रमुख स्टेशनों पर वातानुकूलित प्रतीक्षालय उपलब्ध हैं। पटना जंक्शन, दानापुर, बक्सर, बख्तियारपुर, मोकामा, किऊल, झाझा सहित कई स्टेशनों पर रेलवे स्वास्थ्य इकाइयां सक्रिय हैं। प्राथमिक उपचार के लिए फर्स्ट एड किट की व्यवस्था की गई है। आपात स्थिति में यात्री रेलमदद (139) या स्टेशन पर मौजूद कर्मचारियों से सहायता ले सकते हैं। श्रमिकों और ट्रेनिंग वाटरिंग पॉइंट माल गोदामों में कार्यरत श्रमिकों को भी पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। वर्तमान में पटना, पाटलिपुत्र, दानापुर और राजगीर स्टेशनों पर ट्रेन वाटरिंग प्वाइंट कार्यरत हैं, जबकि किऊल, आरा, बक्सर और बख्तियारपुर में इन्हें जल्द ही शुरू किया जाएगा।

बारिश का दौर शुरू: पंजाब में दो दिन तक मौसम रहेगा खराब, चेतावनी जारी

जालंधर. पिछले दो दिनों से धूप निकलने के बावजूद तापमान में पांच डिग्री सेल्सियस की कमी आई है। मौसम विभाग के मुताबिक, 29 व 30 मार्च को वर्षा होने की संभावना है। फिलहाल अभी आने वाले चार दिनों तक आसमान साफ रहेगा। रात के समय में हल्की ठंड रहने की उम्मीद है। मंगलवार की बात करें तो 16 डिग्री न्यूनतम व 19 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान दर्ज किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार अगले चार दिन धूप खिलेगी। इससे तापमान में वृद्धि दर्ज की जा सकती है, जबकि 29 मार्च से लगातार दो दिन मौसम बिगड़ने के आसार हैं। इसके अनुसार थंडर शावर, तेज हवाएं और वर्षा हो सकती हैं। अगर पूर्वानुमान सही साबित होता है तो फिर से तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है। मौसम विभाग का पूर्वानुमान तारीख     न्यूनतम तापमान (°C)     अधिकतम तापमान (°C) 25 मार्च     17     29 26 मार्च     19     27 27 मार्च     18     28 28 मार्च     19     28 29 मार्च     20     26 30 मार्च     20     27 अगले कुछ दिनों में मौसम में मामूली बदलाव मौसम को प्रभावित करने वाला एक पश्चिमी गड़बड़ इस समय ऊपरी वायुमंडल में सक्रिय है, जिससे राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों में हल्की हवा की गति आ रही है, जबकि तेज जेट स्ट्रीम हवाएं ऊपर की ओर बह रही हैं. इन सभी कारकों के कारण, अगले कुछ दिनों में मौसम में मामूली बदलाव आ सकते हैं. 26 मार्च के आसपास एक नई, कमजोर पश्चिमी गड़बड़ी के कारण उत्तर-पश्चिमी भारत, खासकर पंजाब क्षेत्र में हल्की बारिश या बादलवाई बढ़ने की उम्मीद है. तापमान 4 से 6 डिग्री बढ़ने का अनुमान मौसम विभाग के निदेशक सुरेंद्र पाल ने कहा कि 23, 25, 26 और 28 मार्च को राज्य में विभिन्न स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है. अगले चार दिनों में दिन के तापमान में 4 से 7 डिग्री का इजाफा होगा, और उसके बाद तापमान अपेक्षाकृत स्थिर रहेगा.

MP में 5वीं और 8वीं का रिजल्ट: 5वीं में 95.14% और 8वीं में 93.83% बच्चे पास, बेटियों ने दिखाया दम

भोपाल  मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने आज कक्षा 5वीं और 8वीं का परीक्षा परिणाम आधिकारिक रूप से घोषित कर दिया है. इस वर्ष का परिणाम पिछले साल की तुलना में 3 प्रतिशत बेहतर रहा है. कक्षा 5वीं में 95.14% और 8वीं में 93.83% विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए हैं. छात्र अब पोर्टल पर जाकर अपनी मार्कशीट देख सकते हैं.  आंकड़ों के अनुसार, कक्षा 5वीं का पास प्रतिशत 95.14% रहा, जबकि कक्षा 8वीं में 93.83% छात्र पास हुए. पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार परिणाम में लगभग 3 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. परीक्षा में शामिल हुए लाखों छात्र अब आधिकारिक वेबसाइट rskmp.in पर अपना रोल नंबर और समग्र आईडी दर्ज कर स्कोरकार्ड डाउनलोड कर सकते हैं. शिक्षा मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि जो छात्र किसी कारणवश सफल नहीं हो पाए हैं, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है. उनके लिए विभाग जल्द ही विशेष कक्षाओं और पुन: परीक्षा (सप्लीमेंट्री) का आयोजन करेगा, ताकि उनका साल खराब न हो. अभिभावकों से अपील की गई है कि वे बच्चों का मनोबल बढ़ाएं. आधिकारिक लिंक अब पूरी तरह सक्रिय है, हालांकि भारी ट्रैफिक के कारण छात्रों को थोड़ा धैर्य रखने की सलाह दी गई है. इस साल 5वीं के 95.14% और 8वीं के 93.83% पास हुए हैं। दोनों कक्षाओं में छात्रों की तुलना में छात्राओं ने बेहतर प्रदर्शन किया है।     कक्षा 5वीं: छात्राएं 96.19% और छात्र 94.15% उत्तीर्ण हुए।     कक्षा 8वीं: छात्राएं 94.98% और छात्र 92.74% सफल रहे। QR कोड से देखें रिजल्ट परिणाम देखने की प्रक्रिया को इस बार बेहद आधुनिक और आसान बनाया गया है। छात्र और अभिभावक राज्य शिक्षा केंद्र के पोर्टल पर जाने के अलावा, विभाग द्वारा जारी QR कोड को स्कैन करके भी सीधे अपना रिजल्ट देख सकते हैं। इसके अतिरिक्त, स्कूल के प्राचार्य भी पोर्टल के माध्यम से अपने पूरे संस्थान का विद्यार्थीवार प्रदर्शन चेक कर सकेंगे। शहरी की तुलना में ग्रामीण स्टूडेंट ज्यादा इस साल 5वीं और 8वीं की परीक्षा में 23,68,984 छात्र शामिल हुए थे। 5वीं और 8वीं को मिलाकर कुल 16,78,567 छात्र ग्रामीण क्षेत्रों से थे। वहीं, शहरी छात्रों की संख्या मात्र 6,90,417 रही। 5वीं में शामिल: ग्रामीण स्टूडेंट 9,24,783 (72.45%) और शहरी 3,51,621 (27.55%) थे। छात्र 51.58% और छात्राएं 48.42% थीं। 8वीं में शामिल: ग्रामीण स्टूडेंट 7,53,784 (68.99%) और शहरी 3,38,796 (31.01%) थे। छात्र 51.27% और छात्राएं 48.73% थीं। बोर्ड पैटर्न पर हुई थी परीक्षा इस बार प्रदेश के सरकारी, निजी स्कूलों और मदरसों के करीब 23.68 लाख विद्यार्थियों ने बोर्ड पैटर्न पर परीक्षा दी थी। फरवरी में आयोजित इन परीक्षाओं के लिए प्रदेश भर में मूल्यांकन का विशाल कार्य किया गया। 322 केंद्रों पर 1.10 लाख से अधिक शिक्षकों ने कॉपियों की जांच की, जिसके बाद अंकों की ऑनलाइन प्रविष्टि की गई। क्यों खास है इस बार का परिणाम? शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस साल का पेपर बीते वर्षों की तुलना में कठिन था, फिर भी छात्रों का प्रदर्शन सराहनीय रहा है। बोर्ड पैटर्न लागू होने के कारण अभिभावकों और शिक्षकों के बीच रिजल्ट को लेकर सुबह से ही काफी उत्सुकता देखी गई। 2025 की तुलना में अच्छा रहा रिजल्ट 2025 में करीब 22.85 लाख स्टूडेंट्स ने 5वीं और 8वीं की परीक्षाएं दी थी। इस बार करीब 23.68 लाख (12.76 लाख + 10.92 लाख) स्टूडेंट इन परीक्षाओं में बैठे। साल 2025 में 5वीं के 92.70% स्टूडेंट पास हुए थे। साल 2026 में 95.14% बच्चे पास हुए हैं। इसी तरह 2025 में 8वीं के 90.02% बच्चे पास हुए थे। इस साल 93.83% बच्चे पास हुए हैं।

सांस्कृतिक प्रकोष्ठ भाजपा की प्रथम वर्चुवल बैठक संपन्न

सांस्कृतिक प्रकोष्ठ भाजपा की प्रथम वर्चुवल बैठक संपन्न रायपुर  छत्तीसगढ़ भाजपा की इकाई सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के नवनियुक्त पदाधिकारियों की आज प्रथम बैठक प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक अनुपम पाल के नेतृत्व में संपन्न हुई जिसका संचालन सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के प्रदेश सह संयोजक शरद श्रीवास्तव ने किया l बैठक के प्रथम सत्र में सभी 14 पदाधिकारियों ने अपना परिचय दिया और सभी ने पूरी निष्ठा से अपने दायित्व के निर्वहन की बात कही l सहसंयोजक शरद श्रीवास्तव ने अपने अनुभव और शीर्ष नेतृत्व के आदेश को साझा करते हुये कहा कि हमें एक हजार से अधिक कलाकारों की एक भव्य टीम बनाना है ताकि समय पड़ने पर हम अपने अपने कला के माध्यम से पूरे प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के लिये सकारात्मक कार्य कर सके l वही प्रदेश संयोजक अनुपम पाल ने प्रकोष्ठ के सभी पदाधिकारियों को निर्देशित किया कि कला एक ऐसा माध्यम है जिसके सहयोग से हम सरकारी योजनाओं आम जनमानस तक अल्प समय में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर सकते है साथ ही भाजपा सांस्कृतिक प्रकोष्ठ में कोई ईमानदारी और निष्ठा से संयमित होकर कार्य करने हेतु प्रोत्साहित किया। अंत में शरद अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापित कर आज के महत्वपूर्ण वर्चुवल बैठक के  समाप्ति की घोषणा की l  आज के इस बैठक में सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के संयोजक अनुपम पाल,सहसंयोजक शरद श्रीवास्तव,शरद अग्रवाल, उर्वशी साहू,रवि शर्मा, कोषाध्यक्ष मुकेश जोशी,कार्यालय प्रभारी तरल सोलंकी,सहकार्यालय प्रभारी जीवनमिश्रा, कार्यक्रम प्रभारी  तेजराम साहू, कार्यक्रम सह प्रभारी सुतापा पाल, मिडिया प्रभारी निशु पाण्डेय,सह मिडिया प्रभारी सतेंद्र सोनी,सोशल मिडिया प्रभारी रवि जग्गी,सोशल मिडिया सह प्रभारी रामानंद त्रिपाठी उपस्थित थे l

स्कॉलरशिप के लिए मिला मौका: पोस्ट-मैट्रिक आवेदन अब 27 तक, छात्रों को बड़ी राहत

रायपुर. पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए आवेदन की अंतिम तारीख बढ़ाकर 27 मार्च 2026 कर दी गई है। पहले यह तिथि 23 मार्च थी। इससे छात्रों को आवेदन करने के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है। रायपुर जिले के सभी शासकीय और निजी कॉलेज, यूनिवर्सिटी, इंजीनियरिंग, मेडिकल, नर्सिंग, पॉलिटेक्निक और आईटीआई में पढ़ने वाले विद्यार्थी ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। संस्थाओं के लिए प्रस्ताव लॉक करने की अंतिम तिथि 29 मार्च और सैंक्शन ऑर्डर लॉक करने की अंतिम तिथि 30 मार्च तय की गई है। छात्रवृत्ति के लिए एससी-एसटी वर्ग के अभिभावकों की आय सीमा 2.50 लाख रुपये और ओबीसी के लिए 1 लाख रुपये रखी गई है। आवेदन के साथ जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र और पिछले साल का रिजल्ट देना जरूरी होगा। प्रशासन ने बताया कि तय तारीख के बाद पोर्टल बंद हो जाएगा। साथ ही अब जियो-टैगिंग, NSP पर वन टाइम रजिस्ट्रेशन और नई संस्थाओं के लिए बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है।

CM मोहन यादव’ के राज में MP ने नीति और नवाचार में हासिल किया नया मुकाम, घोषणाएं नहीं, वास्तविक बदलाव

भोपाल  CM मोहन यादव ने अपने जन्मदिन के मौके पर प्रदेश की समृद्धि और विकास के लिए अपना विजन स्पष्ट किया है। मोहन सरकार राज में  वैश्विक अर्थव्यवस्था के पुनर्संतुलन के इस दौर में भारत की विकास यात्रा अब केवल राष्ट्रीय नीतियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि राज्यों की क्षमता, नेतृत्व की स्पष्टता और प्रशासनिक प्रतिबद्धता उसकी गति निर्धारित कर रही है। ऐसे समय में मध्यप्रदेश ने स्वयं को एक संसाधन आधारित राज्य से आगे बढ़ाकर एक रणनीतिक आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निवेश को केवल आंकड़ों की उपलब्धि नहीं, बल्कि उत्पादन, रोजगार और क्षेत्रीय संतुलन से जुड़े व्यापक परिवर्तन के रूप में देखा है। उनके स्पष्ट मार्गदर्शन में नीति सुधार, प्रशासनिक सरलीकरण, औद्योगिक आधार विस्तार और निवेश प्रस्तावों को धरातल तक पहुंचाने की प्रक्रिया को एकीकृत ढंग से आगे बढ़ाया गया है। यह स्पष्ट रूप से दिखाई देता है कि नीति की स्पष्टता, नवाचार की स्वीकृति और निवेश के प्रति सक्रिय प्रतिबद्धता के समन्वय से मध्यप्रदेश आर्थिक समृद्धि के ऐसे नए कीर्तिमान रच रहा है जो राष्ट्रीय स्तर पर एक उदाहरण के रूप में उभर रहे हैं। नीति आधारित पारदर्शिता और निवेश का विश्वास मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योगों के लिए भरोसे का वातावरण निर्मित करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उद्योग संवर्धन नीति 2025 सहित विभिन्न सेक्टर आधारित नीतियों के माध्यम से निवेशकों को स्पष्ट प्रोत्साहन ढांचा उपलब्ध कराया गया है। श्रम प्रधान क्षेत्रों जैसे गारमेंट, फुटवियर और खिलौना निर्माण में बड़े निवेश को मेगा उद्योग का दर्जा देकर अनुकूलित प्रोत्साहन पैकेज प्रदान किए जा रहे हैं। मोहन सरकार ने प्रक्रियाओं की जटिलता को कम करने के लिए मध्यप्रदेश जन विश्वास संशोधन अधिनियम के माध्यम से अनेक प्रावधानों का अपराधमुक्तिकरण किया गया। इससे उद्योगों में अनावश्यक भय और दंडात्मक संस्कृति की जगह विश्वास आधारित प्रशासन को बढ़ावा मिला है। सिंगल विंडो व्यवस्था को तकनीकी रूप से सशक्त करते हुए इन्वेस्ट एमपी 3 पोर्टल प्रारंभ किया गया है, जो निवेशकों को नीति, अनुमतियां, प्रोत्साहन और व्यवहार्यता से जुड़ी जानकारी एक ही मंच पर उपलब्ध कराता है। यह पहल मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उस सोच को दर्शाती है जिसमें सरकार स्वयं को नियंत्रक नहीं, बल्कि सहयोगी के रूप में स्थापित करती है। निवेश प्रस्तावों से उद्योग स्थापना तक राज्य में आयोजित वैश्विक निवेश मंचों और औद्योगिक संवादों के माध्यम से बड़े पैमाने पर निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि इन प्रस्तावों को केवल समझौता पत्र तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि उन्हें उद्योग स्थापना में बदलने के लिए निरंतर निगरानी और सीधी समीक्षा की व्यवस्था बनाई गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्वयं निवेश परियोजनाओं की प्रगति की नियमित समीक्षा करते हैं। विभागीय समन्वय को मजबूत किया गया है ताकि भूमि आवंटन, स्वीकृतियां, आधारभूत सुविधाएं और प्रोत्साहन समयबद्ध ढंग से उपलब्ध कराए जा सकें। परिणामस्वरूप अनेक परियोजनाएं उन्नत अवस्था में पहुंच चुकी हैं और कई इकाइयां उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। यह दृष्टिकोण स्पष्ट करता है कि मध्यप्रदेश में निवेश केवल घोषणा नहीं, बल्कि क्रियान्वयन की प्रक्रिया है। औद्योगिक आधार और मजबूत अधोसंरचना राज्य में विशाल औद्योगिक भूमि बैंक उपलब्ध है और नए औद्योगिक पार्कों का विकास तीव्र गति से किया जा रहा है। मौजूदा औद्योगिक क्षेत्रों के उन्नयन के साथ आधुनिक आधारभूत संरचना सुनिश्चित की जा रही है। धार जिले में विकसित हो रहा पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क योजना के अंतर्गत देश के सबसे बड़े एकीकृत टेक्सटाइल पार्क के रूप में उभर रहा है। यह परियोजना फाइबर से फैशन तक पूरी मूल्य श्रृंखला को एक स्थान पर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। रतलाम में विकसित हो रहा मेगा औद्योगिक पार्क, सागर क्षेत्र में पेट्रोकेमिकल आधारित संभावनाएं, ग्वालियर में फुटवियर पार्क, नर्मदापुरम में रिन्यूएबल एनर्जी उपकरण निर्माण क्षेत्र और मेडिकल डिवाइस पार्क जैसी पहलें औद्योगिक विविधीकरण को सुदृढ़ कर रही हैं। एशिया का प्रमुख ऑटो परीक्षण केंद्र NATRAX राज्य में स्थित है। रीवा सौर परियोजना और ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर प्लांट ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में प्रदेश की पहचान को मजबूत किया है। निर्यात और उत्पादन क्षमता का विस्तार मध्यप्रदेश का वार्षिक निर्यात निरंतर वृद्धि दर्ज कर रहा है। कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, फार्मा, इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल और खनिज आधारित उद्योग निर्यात संरचना के प्रमुख आधार हैं। राज्य भारत के ऑर्गेनिक कॉटन उत्पादन में अग्रणी है, जिससे टेक्सटाइल उद्योग को वैश्विक सस्टेनेबल सप्लाई चेन में विशेष स्थान मिला है। खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में गेहूं, सोयाबीन, दालें और मिलेट आधारित उत्पादों की बढ़ती मांग प्रदेश के लिए नए बाजार खोल रही है। स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश अधिशेष विद्युत उत्पादन वाले राज्यों में शामिल है और ऊर्जा भंडारण तथा बैटरी निर्माण जैसे उभरते क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं विकसित की जा रही हैं। समृद्ध मध्यप्रदेश 2047 की दिशा समृद्ध मध्यप्रदेश 2047 का विजन दस्तावेज प्रदेश की दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति को स्पष्ट करता है। इसमें एमएसएमई, स्टार्टअप, महिला उद्यमिता और तकनीक आधारित नवाचार को विकास का प्रमुख आधार माना गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्पष्ट किया है कि विकास का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचे। इसलिए कौशल विकास, रोजगार सृजन और क्षेत्रीय संतुलन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यह विजन केवल आर्थिक वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रतिस्पर्धात्मकता, आत्मनिर्भरता और सामाजिक समावेशन के संतुलित मॉडल की ओर संकेत करता है। राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान भारत आज वैश्विक आर्थिक संरचना में नई भूमिका निभाने की दिशा में अग्रसर है। इस यात्रा में राज्यों की सक्रिय भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। मध्यप्रदेश अपनी नीतिगत स्पष्टता, औद्योगिक विस्तार और निवेश अनुकूल वातावरण के माध्यम से राष्ट्रीय विकास में सशक्त योगदान देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश ने यह संदेश स्पष्ट किया है कि विकास घोषणाओं से नहीं, बल्कि धरातल पर स्थापित उद्योगों, सृजित रोजगार और मजबूत आर्थिक आधार से मापा जाता है। नीति, नवाचार और निवेश के सुविचारित समन्वय के साथ मध्यप्रदेश आज आर्थिक समृद्धि के नए कीर्तिमान गढ़ रहा है और राष्ट्रीय औद्योगिक मानचित्र पर अपनी भूमिका को निरंतर सुदृढ़ कर रहा है।

हरीश राणा का निधन: पिता का वो दिल छूने वाला आखिरी मैसेज, जिसने आंखों में आंसू ला दिए

  गाजियाबाद कभी जिंदगी से भरे सपनों के साथ इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने निकले हरीश राणा की सांसें मंगलवार को गहरे सन्नाटे में बदल गई. 13 साल तक कोमा में रहने के बाद हरीश ने आखिरकार दुनिया को अलविदा कह दिया. आज सुबह उनका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया. उनके जाने की खबर पिता अशोक राणा ने जैसे सोसाइटी के व्हाट्सऐप ग्रुप में जैसे ही दी लोगों की आंखें भर आईं. उन्होंने लिखा- सुबह 9 बजे पार्थिव शरीर (हरीश राणा जी) का अंतिम संस्कार ग्रीन पार्क, साउथ दिल्ली में किया जाएगा… ॐ शांति ॐ…  उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के राजनगर एक्शटेंशन निवासी हरीश राणा का 13 सालों का इंतजार आखिरकार खत्म हुआ। जीवन-मृत्यु के बीच झूल रहे 32 वर्षीय युवक ने मंगलवार शाम दिल्ली एम्स में आखिरी सांस ली। सुप्रीम कोर्ट की ओर से 11 मार्च को इच्छामृत्यु की अनुमति दिए जाने के बाद हरीश को एम्स में भर्ती कराया गया था। वहां पर दर्दरहित मृत्यु की प्रक्रिया को पूरा कराया गया। जीवनरक्षक उपकरणों को हटाए जाने के बाद उन्होंने आखिरी सांस ली। बुधवार सुबह दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित श्मशान घाट में हरीश राणा का पार्थिव शरीर पहुंचा। हिंदू रीति रिवाज और ब्रह्माकुमारी के रिवाजों के साथ अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हुई है। राज एम्पायर सोसायटी में रहते थे हरीश हरीश राणा गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित राज एम्पायर सोसाइटी में रहने थे। हरीश राणा की मंगलवार को एम्स में इच्छामृत्यु के बाद सोसायटी में गमगीन माहौल रहा। सोसायटी में रहने वाले लोगों को जैसे ही हरीश की मृत्यु की सूचना मिली, सभी भावुक हो गए। सोसायटी के लोगों ने परिवार के प्रति संवेदना जताई। सोसायटी के वॉट्सऐप ग्रुप में सुबह 9 बजे अंतिम संस्कार की सूचना में बाद मंगलवार की शाम ही लोगों ने तैयारियां कीं। हरीश के अंतिम संस्कार में सोसायटी से बड़ी संख्या में महिलाएं भी पहुंचीं। हिमाचल के रहने वाले थे हरीश हरीश राणा का परिवार मूल रूप से हिमाचल प्रदेश का रहने वाला है। हरीश राणा के पिता अशोक राणा मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के प्लेटा गांव के रहने वाले हैं। अशोक राणा वर्ष 1989 में दिल्ली आए। वह मुंबई के एक नामी होटल में शेफ का काम किया। 2013 में बेटे हरीश के साथ चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में दुर्घटना के बाद उन्होंने दिल्ली आकर परिवार की जिम्मेदारी संभाली। चंडीगढ़ में हादसे के बाद से हरीश कोमा में चले गए। वेजिटेटिव स्टेट में गए हरीश के इलाज की काफी कोशिश की गई, लेकिन वे ठीक नहीं हुए। हरीश के इलाज में अशोक राणा ने दिल्ली वाला घर बेच दिया। राज एम्पायर सोसायटी में आकर रहने लगे। घर चलाने के लिए अशोक राणा ने आसपास के इलाकों में सैंडविच बनाकर बेचना शुरू किया। 11 को आया फैसला 13 सालों के अथक इंतजार के बाद भी हरीश के ठीक नहीं होने पर अशोक राणा ने सुप्रीम कोर्ट में बेटे के लिए इच्छामृत्यु की मांग वाली याचिका दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को हरीश को इच्छा मृत्यु की अनुमति दी। 14 मार्च को एम्स में इच्छा मृत्यु की आगे की प्रक्रिया के लिए भर्ती कराया गया था। वहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में इच्छा मृत्यु की प्रक्रिया हुई। मंगलवार दोपहर को कोमा में चल रहे हरीश राणा ने अंतिम सांस ली।