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दिल्ली में बिजली के दामों में होगी वृद्धि, अप्रैल से लागू होगा नया प्लान

नई दिल्ली दिल्लीवासियों के लिए बड़ी खबर है. अप्रैल से बिजली की दरों में बढ़ोतरी की जा सकती है. दावा किया जा रहा है कि ऐसा इसलिए होगा, क्योंकि दिल्ली सरकार तीन बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को 38000 करोड़ रुपये से ज़्यादा के बकाया का भुगतान करने की तैयारी कर रही है।  एक एजेंसी के मुताबिक सरकार बिजली की दरों में बढ़ोतरी पर सब्सिडी देने की भी योजना बना रही है, ताकि उपभोक्ताओं पर इसका असर कम हो सके. पिछले साल अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को एक निर्देश दिया था. जिसमें कहा गया था कि सरकार तीन निजी डिस्कॉम BRPL, BYPL और TPDDL – को 27200 करोड़ रुपये की कैरिंग कॉस्ट (ब्याज) सहित रेगुलेटरी एसेट्स का भुगतान 7 साल के अंदर करे।  रेगुलेटरी एसेट्स वे लागतें हैं जिनकी वसूली भविष्य में होने की उम्मीद होती है. आम आदमी पार्टी के शासन के पिछले एक दशक में बिजली की दरों में कोई बढ़ोतरी न होने के कारण तेज़ी से बढ़ी हैं. दिल्ली बिजली नियामक आयोग (DERC) ने जनवरी में केंद्रीय एजेंसी, अपीलीय बिजली न्यायाधिकरण (APTEL) को सूचित किया कि दिल्ली में कुल रेगुलेटरी एसेट्स 38,552 करोड़ रुपये हैं।  जानें किस डिस्कॉम की है कितनी राशि डीईआरसी की फाइलिंग के अनुसार बकाया राशि में BRPL के लिए 19,174 करोड़ रुपये, BYPL के लिए 12,333 करोड़ रुपये और TPDDL के लिए 7,046 करोड़ रुपये शामिल हैं. ये राशि डिस्कॉम द्वारा बिजली की आपूर्ति के लिए किए गए अनुमोदित खर्च है. वसूली में देरी के कारण ब्याज जमा होने से मूल रेगुलेटरी एसेट्स की राशि बढ़ गई है।  अदालत ने DERC को एक वसूली योजना तैयार करने, कैरिंग कॉस्ट (ब्याज) का हिसाब रखने और लागत वसूली में हुई लंबी देरी की व्याख्या करते हुए एक विस्तृत ऑडिट करने का भी निर्देश दिया था. यह वसूली 7 साल की अवधि में बिजली के बिलों में रेगुलेटरी एसेट सरचार्ज बढ़ाकर किए जाने की संभावना है।  दिल्ली के बिजली मंत्री आशीष सूद ने पिछले साल मार्च में कहा था कि डिस्कॉम को रेगुलेटरी एसेट्स के रूप में जमा हुए 27,000 करोड़ रुपये वसूलने का अधिकार दिया गया है. जिससे यह संकेत मिला था कि शहर में बिजली की दरें बढ़ सकती हैं। 

एमपी के 61 युवाओं ने सरकारी स्कूलों से यूपीएससी परीक्षा में सफलता पाई, इतिहास रचा

भोपाल  संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) UPSC परीक्षा में इस बार मध्यप्रदेश ने इतिहास रच दिया। इसमें प्रदेश के 61 प्रतिभाशाली युवा चयनित हुए। खास बात यह है कि इनमें से अनेक युवाओं ने सरकारी स्कूलों-कॉलेजों में पढ़ाई की है। भारत की सबसे कठिन परीक्षा क्रेक कर इन युवाओं ने न सिर्फ मध्यप्रदेश, बल्कि पूरे देश में अपना नाम रोशन किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 23 मार्च को इन सभी सफल अभ्यर्थियों को सम्मानित करेंगे। सीएम सभी युवाओं से चर्चा भी करेंगे। यूपीएससी परीक्षा में प्रदेश के हर वर्ग के युवाओं का चयन हुआ। इनमें कई छोटे गांवों के हैं ​जहां 24 घंटे बिजली भी उपलब्ध नहीं रहती। मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट का भी अभाव बना रहता है। इसके बावजूद युवाओं ने अपना हौसला नहीं खोया और जज्बा, जुनून के बल पर कामयाबी हासिल की। चयनित 15 युवाओं ने सरकारी कॉलेजों में पढ़ाई की एमपी में शिक्षा के स्तर में लगातार इजाफा हो रहा है। चयनित युवाओं में अनेक सरकारी स्कूल, कॉलेजों में पढ़े हैं। यूपीएससी में चुने गए कुल 61 विद्यार्थियों में से 15 अभ्यर्थी ऐसे हैं, जिन्होंने सरकारी कॉलेजों एवं यूनिवर्सिटी से शिक्षा प्राप्त कर सफलता अर्जित की है। यह आंकड़ा प्रदेश के सरकारी शैक्षणिक संस्थानों की गुणवत्ता तथा विद्यार्थियों की प्रतिभा को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। यूपीएससी में चयनित आशीष शर्मा, जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर के स्नातक हैं। पुलकित जैन, बीएससी उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान भोपाल, प्राची चौहान, बीएससी, सुभद्रा शर्मा, शासकीय कन्या महाविद्यालय गंजबासौदा, सौम्या जैन बीए गांधी पीआर कॉलेज, भोपाल, आयुष स्वामी, बीए जेएलएन कॉलेज सोहागपुर नर्मदापुरम, निकित सिंह बीए अर्थशास्त्र अटल बिहारी बाजपेयी महाविद्यालय इंदौर, दीपक बघेल बीए जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर, राजवर्धन सिंह सिसोदिया बीए गुजराती समाज कॉलेज, इंदौर, प्राची जैन बीकॉम सरोजिनी नायडू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर (स्वशासी) महाविद्यालय, भोपाल, रूपल बान बीएससी, एम उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान, भोपाल, रोहन जैन बीएससी मैथ्स शासकीय होल्कर साइंस कॉलेज इंदौर, अंकुश पाटीदार बीएससी देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर, गौरव जाट बैचलर ऑफ आर्ट्स देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर, पवित्र मिश्रा बीएससी प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस शासकीय विज्ञान महाविद्यालय रीवा, उज्ज्वल जैन बीए श्रीमंत माधवराव सिंधिया शासकीय महाविद्यालय कोलारस में पढ़े हैं। युवाओं ने अपना जज्बा, जुनून के बल पर कामयाबी हासिल की। 

मध्यप्रदेश में आंगनवाड़ी बच्चों के लिए पहली बार विद्यारंभ समारोह का आयोजन

मध्यप्रदेश में पहली बार आंगनवाड़ी बच्चों का विद्यारंभ समारोह मिलेगा ‘विद्यारंभ प्रमाण-पत्र’ 24 मार्च को पूरे प्रदेश के आंगनवाड़ी केंद्रों में होगा समारोह राज्य स्तरीय ‘ग्रेजुएशन सेरेमनी’ में मंत्री सुभूरिया करेंगी बच्चों को सम्मानित भोपाल मध्यप्रदेश में प्रारंभिक शिक्षा को नई पहचान देने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की जा रही है। राज्य में पहली बार आंगनवाड़ी केंद्रों में शाला पूर्व शिक्षा प्राप्त कर रहे 5 से 6 आयु वर्ष के बच्चों को “विद्यारंभ प्रमाण-पत्र” प्रदान कर उन्हें औपचारिक स्कूली शिक्षा की ओर अग्रसर किया जाएगा। प्रदेश में 24 मार्च को आयोजित होने वाले बाल चौपाल (ECCE Day)के अवसर पर प्रदेश के सभी आंगनवाड़ी केंद्रों में एक साथ समारोहपूर्वक प्रमाण-पत्र वितरण किया जाएगा, जिससे शाला पूर्व शिक्षा को सामाजिक और संस्थागत मान्यता मिल सके। इस पहल को राज्य स्तर पर प्रदर्शित करने के लिए भोपाल में विशेष राज्य स्तरीय ‘ ग्रेजुएशन सेरेमनी ’ का आयोजन किया जा रहा है। महिला एवं बाल विकास मंत्री सुनिर्मला भूरिया बच्चों को प्रमाण-पत्र वितरित कर उनके उज्ज्वल शैक्षणिक भविष्य की शुभकामनाएँ देंगी। यह कार्यक्रम भोपाल जिले की बाणगंगा परियोजना के अंतर्गत आंगनवाड़ी केंद्र क्रमांक 1061 और 859 में आयोजित होगा, जहां 35 बच्चों को विद्यारंभ प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे। यह पहल केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के निर्देशों के अनुरूप की जा रही है, जिसके अंतर्गत आंगनवाड़ी केंद्रों में पंजीकृत 5-6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को विद्यारंभ प्रमाण पत्र देकर उनके शैक्षणिक जीवन की औपचारिक शुरुआत को मान्यता दी जाएगी। इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों के अनौपचारिक शिक्षा से औपचारिक विद्यालयी प्रणाली में सुगम संक्रमण को सुनिश्चित करना, परिवार और समुदाय को शाला पूर्व शिक्षा के प्रति जागरूक करना तथा आंगनवाड़ी केंद्रों को प्रारंभिक शिक्षा के सशक्त केन्द्र के रूप में स्थापित करना है। कार्यक्रम के आयोजन में प्रारंभिक शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत संस्था रॉकेट लर्निंग का भी सहयोग प्राप्त हो रहा है। संस्था के साथ केंद्र और राज्य स्तर पर हुए समझौते के तहत वर्तमान में मध्यप्रदेश के 39 जिलों में गुणवत्तापूर्ण शाला पूर्व शिक्षा को सुदृढ़ बनाने के लिए विभिन्न गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं। विद्यारंभ प्रमाण-पत्र पहल से न केवल बच्चों की शैक्षणिक यात्रा में निरंतरता सुनिश्चित होगी बल्कि समुदाय में आंगनवाड़ी केंद्रों के प्रति विश्वास और सहभागिता भी बढ़ेगी। इससे बच्चों का स्कूल से जुड़ाव मजबूत होगा और भविष्य में ड्रॉपआउट दर कम करने में भी मदद मिलेगी।

जशपुर में ‘लखपति दीदी’ अभियान को मिली नई दिशा, बढ़ी रफ्तार

रायपुर : जशपुर में ‘लखपति दीदी’ अभियान को मिली नई रफ्तार लखपति दीदी 18 हजार से अधिक महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर, गांवों की अर्थव्यवस्था को दे रहीं मजबूती रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में प्रभावी पहल की जा रही है। इसी कड़ी में जशपुर जिले में ‘लखपति दीदी’ अभियान ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है, जहां 18 हजार से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बनकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। प्राकृतिक सौंदर्य से समृद्ध जशपुर की महिलाएं अब खेती, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प और लघु उद्यमों के माध्यम से न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे गांव की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं। गांव-गांव में सक्रिय कृषि सखियां और पशु सखियां किसानों तक आधुनिक तकनीक और उन्नत कृषि पद्धतियों की जानकारी पहुंचाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ कर रही हैं। जिले में वर्तमान में 12 हजार 808 स्व-सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनसे 1 लाख 37 हजार 912 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। सामूहिक प्रयासों से ये महिलाएं आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही हैं। राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2024 से 2027 तक जशपुर जिले में 30 हजार 877 ‘लखपति दीदी’ तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इनमें से अब तक 18 हजार 218 महिलाएं लखपति बन चुकी हैं, जबकि शेष महिलाओं को भी आगामी वर्षों में इस श्रेणी में लाने के लिए सतत प्रयास किए जा रहे हैं। महिलाओं को आजीविका से जोड़ने के लिए ‘बिहान’ योजना के माध्यम से व्यापक सहयोग प्रदान किया जा रहा है। इसके तहत लगभग 14 करोड़ रुपये मुद्रा लोन, 76 करोड़ रुपये बैंक लिंकेज और 13 करोड़ रुपये सामुदायिक निवेश निधि के रूप में सहायता दी गई है। साथ ही लगभग 70 हजार महिलाओं को कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन और उद्यानिकी गतिविधियों से जोड़ने की पहल की जा रही है। इसके अतिरिक्त करीब 8500 संभावित लखपति दीदियों को विभिन्न आजीविका गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया गया है और उनकी आय में निरंतर वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए निगरानी भी की जा रही है। महिलाएं डेयरी, बकरी पालन, पोल्ट्री और फूड प्रोसेसिंग जैसे व्यवसायों के माध्यम से अपनी आय बढ़ा रही हैं। उल्लेखनीय है कि महिलाओं को नई तकनीकों और नवाचारों से जोड़ने के उद्देश्य से 23 से 25 मार्च 2026 तक कृषि महाविद्यालय, कुनकुरी में ‘कृषि क्रांति एक्सपो 2.0’ का आयोजन किया जा रहा है, जो महिलाओं के लिए नए अवसरों का द्वार खोल रहा है। जशपुर की यह पहल दर्शाती है कि जब महिलाएं सशक्त होती हैं, तो परिवार, गांव और पूरे राज्य की प्रगति सुनिश्चित होती है।

कुमनार में माओवादियों के ‘सेफजोन’ में पुलिस का अंतिम सुरक्षा कैंप स्थापित

नारायणपुर नारायणपुर पुलिस ने दशकों से माओवादियों का 'सेफजोन' माने जाने वाले दुर्गम क्षेत्र कुमनार में नवीन सुरक्षा एवं जन सुविधा कैंप स्थापित कर एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। 'माड़ बचाओ' अभियान के तहत स्थापित यह कैंप वर्ष 2026 का आठवां और क्षेत्र का अंतिम सामरिक पड़ाव है, जिससे अब अबूझमाड़ का सीधा संपर्क बीजापुर के भैरमगढ़ से जुड़ गया है। माओवादी साम्राज्य का अंत और विकास की नई राह कुमनार वही क्षेत्र है जहां कभी माओवादी सेंट्रल कमेटी का अघोषित शासन चलता था और जहां कुख्यात नक्सली बसवा राजू को सुरक्षाबलों ने ढेर किया था। नारायणपुर पुलिस, डीआरजी, बस्तर फाइटर्स और आईटीबीपी (38वीं, 44वीं, 41वीं, 45वीं, 53वीं और 29वीं वाहिनी) के संयुक्त प्रयासों से अब यहां तिरंगा निर्भीक होकर लहराएगा। ओरछा-कुमनार-भैरमगढ़ के बीच डायरेक्ट रोड कनेक्टिविटी इस कैंप की स्थापना से ओरछा-कुमनार-भैरमगढ़ के बीच डायरेक्ट रोड कनेक्टिविटी सुनिश्चित हुई है। इससे पूर्व, वर्ष 2025 तक ओरछा के भीतर का हिस्सा नक्सलियों के नियंत्रण में था, लेकिन अब यहां विकास की मुख्यधारा पहुंच चुकी है। 96 किलोमीटर दूर बीहड़ इलाके में मजबूत कदम नारायणपुर जिला मुख्यालय से करीब 96 किलोमीटर दूर ओरछा क्षेत्र के सबसे दुर्गम और बीहड़ इलाकों में शामिल दिवालुर अब सुरक्षा बलों के नियंत्रण में है. यह वही इलाका है जहां कभी माओवादी सेंट्रल कमेटी के नेता रणनीतियां बनाते थे. कुख्यात नक्सली बसवा राजू जैसे आतंकियों की मौत का गवाह रहा यह क्षेत्र लंबे समय तक पुलिस की पहुंच से बाहर रहा, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं. पुलिस कैंप की स्थापना माओवादियों के नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में बड़ी कामयाबी मानी जा रही है. ‘माड़ बचाओ' अभियान के तहत 16 मार्च को स्थापना वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में ‘माड़ बचाओ' अभियान के तहत 16 मार्च को इस नए कैंप की स्थापना की गई. इस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन में नारायणपुर पुलिस के साथ डीआरजी, बस्तर फाइटर्स और आईटीबीपी की छह अलग-अलग वाहिनियां 38वीं, 44वीं, 41वीं, 45वीं, 53वीं और 29वीं बटालियन शामिल रहीं. जवानों को घने जंगलों, दुर्गम पहाड़ों और कठिन रास्तों से गुजरते हुए लंबी दूरी तय करनी पड़ी, लेकिन मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया. सड़क कनेक्टिविटी से खुले विकास के रास्ते दिवालुर में कैंप खुलने से कांदुलनार-ओरछा से दिवालुर और कुमनार तक की महत्वपूर्ण सड़क कनेक्टिविटी का रास्ता साफ हो गया है. यह इलाका दशकों से अलग-थलग पड़ा था, जहां न तो पक्की सड़कें थीं और न ही प्रशासन की नियमित पहुंच. अब रेकापारा, कुमनार, गुण्डेकोट और लेकवाडा जैसे गांवों तक मोबाइल नेटवर्क, बिजली, स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचने का रास्ता खुलेगा. स्थानीय लोगों के लिए यह कैंप उम्मीद की नई किरण बनकर उभरा है. मिलेंगी बुनियादी सुविधाएं जिला मुख्यालय से 102 किमी दूर स्थित इस कैंप के माध्यम से आसपास के आधा दर्जन गांवों (लेकवाडा, नेडअट्टे, डोडूम आदि) में सड़क एवं पुल-पुलिया निर्माण में तेजी आएगी। शिक्षा, चिकित्सा और मोबाइल नेटवर्क की पहुंच सुगम होगी। नक्सल विरोधी अभियानों को मजबूती मिलेगी। वरिष्ठ अधिकारियों का नेतृत्व बस्तर आईजी पी. सुन्दराज और नारायणपुर एसपी रोबिनसन गुरिया के मार्गदर्शन में संचालित इस अभियान ने अबूझमाड़ को पूरी तरह नक्सल मुक्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। पुलिस प्रशासन का लक्ष्य 'शांतिपूर्ण एवं समृद्ध नारायणपुर' बनाना है, जहां दशकों से अलग-थलग पड़े ग्रामीणों को लोकतंत्र की बुनियादी सुविधाओं का लाभ मिल सके।   बसवा राजू सहित कई माओवादियों का हुआ था एनकाउंटर नारायणपुर जिले के थाना ओरछा क्षेत्र में दिवालूर गांव है. यहां 16 मार्च 2026 को नया कैंप स्थापित किया गया है. यही वह इलाका है, जहां सुरक्षा बलों ने कुख्यात माओवादी नेता बसवा राजू सहित कई बड़े माओवादियों को मार गिराया था. यह माओवादियों की सेंट्रल कमेटी का सुरक्षित ठिकाना माना जाता रहा है. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि अब यहां कैंप खुलने से न केवल सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि दशकों से उपेक्षित इस क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं भी खुलेंगी. माड़ बचाओ अभियान नारायणपुर पुलिस ने ''माड़ बचाओ अभियान'' के तहत यह कैंप स्थापित किया है. इस कैंप का उद्देश्य नक्सल प्रभाव को समाप्त कर क्षेत्र को मुख्यधारा से जोड़ना है. नारायणपुर जिले में माड़ बचाओ अभियान के तहत लगातार नए कैंप स्थापित किए जा रहे हैं. इसके जरिए अंदरूनी गांवों तक सड़क, पुल-पुलिया, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है. कैंप खुलने से फायदा पुलिस अधिकारी ने बताया कि नए कैंप के शुरू होने से दिवालूर के साथ ही आसपास के गांवों रेकापारा, कुमनार, गुण्डेकोट, लेकवाड़ा, नेडअट्टे में विकास की गति तेज होगी. अब इन क्षेत्रों में सड़क निर्माण, मोबाइल नेटवर्क कनेक्टिविटी, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार संभव हो सकेगा. कुमनार से सोनपुर होते हुए भैरमगढ़ (जिला बीजापुर) तक सड़क संपर्क स्थापित होने से लोगों को आवागमन में बड़ी राहत मिलेगी. यह कनेक्टिविटी न केवल स्थानीय निवासियों के लिए सुविधाजनक होगी, बल्कि प्रशासनिक पहुंच भी आसान बनाएगी. संवेदनशील क्षेत्रों में नए कैंप से सुरक्षा नेटवर्क मजबूत नारायणपुर पुलिस ने साल 2025 में कुतुल सहित कई संवेदनशील क्षेत्रों में नए कैंप स्थापित किए थे. साल 2026 में जटवर, वाड़ापेंदा, कुरसकोड़ो, हच्चेकोटी, आदनार, बोटेर और अब दिवालूर में कैंप स्थापित कर सुरक्षा नेटवर्क को और मजबूत किया गया है. साल 2026 में अबूझमाड़ में खुले कैंप     जटवर     वाड़ापेंदा     कुरसकोड़ो     हच्चेकोटी     आदनार     बोटेर     दिवालूर साल 2025 में अबूझमाड़ में खुले कैंप कुतुल कोडलियार बेड़माकोटी पदमकोट कंडुलपार नेलांगुर पांगुड़ रायनार एडजूम ईदवाया आदेर कुडमेल कोंगे सितरम तोके जाटलूर धोबे डोडीमरका पदमेटा लंका परियादी काकुर बालेबेड़ा कोडेनार कोडनार आदिनपार मन्दोड़ा अबूझमाड़ के विकास पर फोकस दिवालूर में नया सुरक्षा कैंप स्थापित होना न केवल नक्सल विरोधी अभियान की बड़ी उपलब्धि है, बल्कि यह अबूझमाड़ के दूरस्थ और पिछड़े इलाकों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में भी एक निर्णायक कदम है. 

नवा रायपुर का बड़ा कदम: देश का पहला डिजिटल हब बनेगा, एआई आधारित डेटा सेंटर होगा जल्द शुरू

रायपुर  छत्तीसगढ़ अब तकनीकी क्रांति की ओर बड़ा कदम बढ़ाने जा रहा है। नवा रायपुर अटल नगर में देश का पहला एआइ आधारित डेटा सेंटर अप्रैल से शुरू होने की तैयारी में है। सेक्टर-22 में 13.5 एकड़ में विकसित हो रहा यह प्रोजेक्ट न केवल प्रदेश की पहचान को नई ऊंचाई देगा, बल्कि आम जनता के लिए भी बड़े बदलाव लेकर आएगा। करीब एक हजार करोड़ रुपये के निवेश से तैयार हो रहा यह डेटा सेंटर आइटी, डेटा एनालिटिक्स और तकनीकी क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा। करियर के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा खास बात यह है कि अब प्रदेश के युवाओं को बेहतर करियर के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा। इसके साथ ही एआइ तकनीक का फायदा किसानों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों को भी मिलेगा। डिजिटल सेवाएं मजबूत होने से शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं का लाभ दूरदराज के क्षेत्रों तक आसानी से पहुंच सकेगा। युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के रास्ते एआइ डेटा सेंटर के शुरू होने से प्रदेश में हजारों युवाओं को रोजगार मिलने की संभावना है। इसमें आइटी इंजीनियर, डेटा एनालिस्ट, साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट और नेटवर्क मैनेजर जैसे पदों पर भर्ती होगी। साथ ही आइटीआइ, इंजीनियरिंग और पालिटेक्निक संस्थानों के छात्रों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इससे स्थानीय युवाओं को तकनीकी क्षेत्र में आगे बढ़ने का मौका मिलेगा और उन्हें बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। छत्तीसगढ़ बनेगा डिजिटल हब नवा रायपुर में बन रहा यह डेटा सेंटर प्रदेश को एआइ और डिजिटल टेक्नोलाजी का बड़ा केंद्र बना सकता है। आने वाले समय में यहां स्टार्टअप, रिसर्च और टेक कंपनियों के लिए नए अवसर खुलेंगे, इससे निवेश बढ़ेगा। किसानों और आम लोगों को मिलेगा फायदा एआइ तकनीक के जरिये किसानों को स्मार्ट खेती, मौसम की सटीक जानकारी और फसल प्रबंधन में मदद मिलेगी। इससे उत्पादन बढ़ाने में सहूलियत होगी। वहीं आम लोगों को डिजिटल सेवाओं का लाभ मिलेगा। शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं की जानकारी अब ऑनलाइन और आसान तरीके से उपलब्ध होगी। दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक भी सुविधाएं तेजी से पहुंच सकेंगी। डिजिटल भारत की धड़कन बनेगा: साय मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सिर्फ एक तकनीकी परियोजना नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के भविष्य की नींव है। उन्होंने इसे राज्य के युवाओं, किसानों और आदिवासी समुदाय के लिए परिवर्तनकारी बताया। उन्होंने विश्वास जताया कि छत्तीसगढ़ अब डिजिटल भारत की धड़कन बनेगा। हेल्थटेक, डिफेंस जैसी मिलेंगी सेवाएं यहां न केवल स्टोरेज और प्रोसेसिंग की सुविधा उपलब्ध होंगी, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हेल्थटेक, डिफेंस, फिनटेक और डेटा एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों में अत्याधुनिक सेवाएं भी दी जाएंगी। पार्क में एआई प्रॉसेसिंग जैसी विश्व स्तरीय सुविधाएं होंगी। छत्तीसगढ़ में ये होंगे बदलाव     रोजगार की नई राहें: आईटी, डाटा एनालिटिक्स और तकनीकी रखरखाव जैसे क्षेत्रों में हजारों नौकरियां पैदा करेगा। युवा दिल्ली-मुंबई जाए बिना यहीं करियर बना सकेंगे।     किसानों की मदद: किसानों को स्मार्ट खेती, मौसम की सटीक जानकारी और फसल प्रबंधन में मदद मिलेगी। इससे उनकी मेहनत का ज्यादा फल मिलेगा।     आदिवासियों को डिजिटल ताकत: आदिवासी इलाकों में शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी सेवाएं डिजिटल रूप से आसानी से पहुंचेंगी।     आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़: यह राष्ट्रीय और वैश्विक डाटा ट्रैफिक को संभालेगा, जिससे सरकारी सेवाएं तेज होंगी और राज्य डिजिटल रूप से आत्मनिर्भर बनेगा।  

केंद्र सरकार का तोहफा: अमृतसर से कटरा के बीच वंदे भारत ट्रेन नए मार्ग पर दौड़ेगी

गुरदासपुर भारत सरकार के रेल मंत्रालय की ओर से गुरदासपुर जिले के लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। अमृतसर-श्री माता वैष्णो देवी कटरा वंदे भारत एक्सप्रेस को अब जालंधर की बजाय गुरदासपुर के रास्ते चलाने की मंजूरी दे दी गई है। इस फैसले से जिले के यात्रियों को आधुनिक और तेज रेल सेवा की सीधी सुविधा मिलेगी तथा धार्मिक यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए सफर और भी सुगम हो जाएगा। भारतीय जनता पार्टी जिला गुरदासपुर के जिला प्रधान बघेल सिंह बहिया ने इस फैसले पर खुशी जताते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री Ravneet Singh Bittu का धन्यवाद किया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लिया गया यह फैसला इलाके की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करता है और इससे गुरदासपुर जिले के लोगों को बड़ा लाभ होगा। रेलवे बोर्ड द्वारा जारी आदेशों के अनुसार ट्रेन नंबर 26405/26406 अमृतसर–श्री माता वैष्णो देवी कटरा वंदे भारत एक्सप्रेस अब पठानकोट कैंट, पठानकोट, गुरदासपुर और बटाला होकर गुजरेगी तथा यह ट्रेन गुरदासपुर जिले के गुरदासपुर और बटाला दोनों रेलवे स्टेशनों पर नियमित रूप से रुकेगी। नए शेड्यूल के अनुसार कटरा से अमृतसर आने वाली ट्रेन सुबह 10 बजकर 15 मिनट पर गुरदासपुर पहुंचेगी और 10 बजकर 17 मिनट पर रवाना होगी, जबकि 10 बजकर 54 मिनट पर बटाला पहुंचकर 10 बजकर 56 मिनट पर आगे के लिए चलेगी। इसी तरह अमृतसर से कटरा जाने वाली ट्रेन शाम 5 बजकर 18 मिनट के करीब बटाला पहुंचेगी और 5 बजकर 20 मिनट पर रवाना होगी, जबकि गुरदासपुर में यह ट्रेन शाम 5 बजकर 58 मिनट पर पहुंचेगी और 6 बजे आगे के लिए प्रस्थान करेगी। बघेल सिंह बाहिया ने कहा कि वंदे भारत जैसी आधुनिक रेल सेवा के गुरदासपुर और बटाला में ठहराव से इलाके के व्यापार, पर्यटन और धार्मिक यात्रा को बड़ा बढ़ावा मिलेगा तथा लोगों को तेज, आरामदायक और सुविधाजनक सफर की सुविधा प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा इलाके के विकास के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और आने वाले समय में भी लोगों को और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी।

नवनिर्माण के नौ वर्ष: स्वस्थ-समर्थ युवा बनेंगे विकसित उत्तर प्रदेश की आधारशिला

योगी सरकार ने यूपी में किया खेल सुविधाओं का अभूतपूर्व विकास, महानगरों से लेकर ग्रामीण स्तर तक सरकार ने खड़ा किया स्पोर्ट्स का बुनियादी ढांचा मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय में तैयार होंगे भविष्य के चैंपियन व विशेषज्ञ लखनऊ पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने खेलों के क्षेत्र में एक नई पहचान गढ़ी है। योगी सरकार के नेतृत्व में प्रदेश में खेल सुविधाओं का ऐसा अभूतपूर्व विकास हुआ है, जिसने महानगरों से लेकर गांवों तक खेलों की मजबूत बुनियाद खड़ी कर दी है। यह परिवर्तन केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं के सपनों को साकार करने का एक सशक्त माध्यम भी बन चुका है। सरकार की "एक मंडल-एक स्पोर्ट्स कॉलेज" की परिकल्पना ने हर क्षेत्र में खेल प्रतिभाओं को निखारने का अवसर दिया है। मेरठ में स्थापित मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय भविष्य के चैंपियनों और खेल विशेषज्ञों को तैयार करने का केंद्र बन रहा है। वहीं, उत्तर प्रदेश राज्य खेल नीति-2023 ने खिलाड़ियों को प्रोत्साहन और सुरक्षा प्रदान करते हुए खेलों को करियर के रूप में स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त किया है। इसके साथ ही प्रदेश में एकलव्य क्रीड़ा कोष की स्थापना भी की गई है। योगी सरकार में खेल क्रांति का उदय: गांव से ग्लोबल मंच तक यूपी का दबदबा खिलाड़ियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए सरकार ने पुरस्कार राशि में ऐतिहासिक वृद्धि की है। ओलंपिक में एकल वर्ग के खिलाड़ियों को स्वर्ण पदक पर ₹06 करोड़,  रजत पदक पर 04 करोड़ तथा कांस्य पदक जीतने पर ₹02 करोड़ का पुरस्कार और टीम गेम्स में स्वर्ण पदक पर ₹03 करोड़, रजत पदक पर ₹02 करोड़ तथा कांस्य पदक जीतने पर ₹01 करोड़ का पुरस्कार है। जबकि एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक पर ₹03 करोड़, रजत पदक पर ₹डेढ़ करोड़ तथा कांस्य पदक जीतने पर ₹75 लाख का प्रोत्साहन निर्धारित है। इसके अलावा कॉमनवेल्थ अथवा विश्वकप से जुड़ी प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक पर ₹1.5 करोड़, रजत पदक पर ₹75 लाख तथा कांस्य पदक जीतने पर ₹50 लाख का पुरस्कार निर्धारित है। वहीं ओलंपिक गेम्स में प्रदेश के खिलाड़ियों के प्रतिभाग किये जाने पर प्रोत्साहन स्वरूप ₹10-10 लाख और कॉमनवेल्थ गेम्स तथा एशियन गेम्स में प्रतिभाग करने वाले प्रदेश के खिलाड़ियों को ₹05-05 लाख का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। यह पहल युवाओं के मन में खेलों के प्रति लगाव और समर्पण को और मजबूत करेगी। मजबूत बुनियाद, सुनहरा भविष्य: खेल इंफ्रास्ट्रक्चर में आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश ग्रामीण स्तर पर खेलों को बढ़ावा देने के लिए "एक जनपद एक खेल" योजना से 75 जनपदों में ₹25,000/- प्रतिमाह की दर से प्रशिक्षकों को मानदेय का भुगतान एवं 30 खिलाड़ियों को किट एवं खेल सामग्री की व्यवस्था की गई।  वित्तीय वर्ष 2025-26 में 21 खेलों की टीमों में 434 बालक एवं 355 बालिका समेत कुल 789 खिलाड़ियों को किट वितरित करने जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रहीं हैं। गोरखपुर और वाराणसी में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियमों का निर्माण कार्य प्रगति पर है जबकि प्रदेशभर में स्टेडियम, क्रीड़ा हॉल, स्वीमिंग पूल और जिम जैसी सुविधाओं का विस्तार, इस बात का प्रमाण है कि खेल अब केवल शहरों तक सीमित नहीं रहा। मेजर ध्यानचंद डिजिटल हॉकी संग्रहालय से सशक्त होता उत्तर प्रदेश इसके साथ ही, मेजर ध्यानचंद डिजिटल हॉकी संग्रहालय और एकलव्य क्रीड़ा कोष जैसी पहलें खेल संस्कृति को सशक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। दरअसल कुशल खिलाड़ी कोटे के अंतर्गत प्रदेश में रोजगार के अवसर भी बढ़ाए जा रहे हैं, जिससे खिलाड़ी न केवल मैदान में बल्कि जीवन में भी सफल बन सकें। आज उत्तर प्रदेश का युवा केवल खेलों में भाग लेने वाला नहीं, बल्कि जीतने और देश का नाम रोशन करने वाला बन रहा है। यह मजबूत, स्वस्थ और समर्थ युवा ही विकसित उत्तर प्रदेश की सच्ची आधारशिला है, जो आने वाले वर्षों में प्रदेश को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।

मेट्रो परियोजनाओं से आय के नए स्रोत विकसित करने के निर्देश

उत्तर प्रदेश में मेट्रो परियोजनाओं को गति, कानपुर और आगरा में तेजी से बढ़ रहा निर्माण कार्य लखनऊ मेट्रो के विस्तार को मिली रफ्तार, 2030 तक नए कॉरिडोर के पूर्ण होने का लक्ष्य आगरा मेट्रो के नए कॉरिडोर का काम जून 2026 तक हो जाएगा पूरा लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को प्रदेश में संचालित मेट्रो परियोजनाओं की प्रगति की उच्चस्तरीय समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि सभी कार्य तय समयसीमा में और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश को आधुनिक, सुगम और विश्वस्तरीय शहरी परिवहन व्यवस्था में देश का अग्रणी राज्य बनाना सरकार की प्राथमिकता है, इसलिए निर्माण से लेकर संचालन तक हर स्तर पर दक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन और संबंधित विभागों के बीच नियमित समन्वय बैठकें आयोजित करने के निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि मेट्रो केवल आवागमन का साधन नहीं है, बल्कि शहरों की अर्थव्यवस्था को गति देने और निवेश आकर्षित करने का मजबूत माध्यम है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मेट्रो परियोजनाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए आय के नए स्रोत विकसित किए जाएं। स्टेशनों और परिसरों में व्यावसायिक गतिविधियों जैसे मल्टीलेवल पार्किंग, रिटेल, फूड कोर्ट और ऑफिस स्पेस को बढ़ावा दिया जाए, विज्ञापन और डिजिटल ब्रांडिंग के अवसरों का अधिकतम उपयोग हो, तथा मेट्रो की भूमि और अन्य परिसंपत्तियों का बेहतर ढंग से उपयोग किया जाए। ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट के माध्यम से बड़े स्तर पर राजस्व सृजन, भूमि मूल्य संवर्धन और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया, ताकि मेट्रो परियोजनाएं दीर्घकाल में आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने निर्देश दिए कि मेट्रो के साथ मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी को मजबूत किया जाए और लास्ट माइल कनेक्टिविटी को प्राथमिकता दी जाए, ताकि यात्रियों को घर से गंतव्य तक निर्बाध यात्रा मिल सके। इसके लिए मेट्रो स्टेशनों को सिटी बस, ई-रिक्शा, टैक्सी और ऐप आधारित सेवाओं से जोड़ा जाए। तीनों शहरों में अतिरिक्त पार्किंग स्थलों के विकास, फीडर रूट के निर्धारण और निजी बस सेवाओं के समन्वय पर भी तेजी से काम करने को कहा गया। बैठक में लखनऊ, कानपुर और आगरा मेट्रो परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। बताया गया कि लखनऊ मेट्रो का लगभग 23 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर पूर्ण रूप से संचालित है और इसके विस्तार के अंतर्गत चारबाग से वसंत कुंज (कॉरिडोर-1बी, लगभग 11.16 किमी) को वर्ष 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे पुराने लखनऊ के घनी आबादी वाले क्षेत्रों को आधुनिक कनेक्टिविटी मिलेगी। कानपुर मेट्रो परियोजना के कुल 32.4 किलोमीटर लंबे दोनों कॉरिडोर पर कार्य तेजी से चल रहा है, जिसमें लगभग 15 किलोमीटर सेक्शन पर संचालन प्रारंभ हो चुका है और शेष कार्य को मार्च 2027 तक पूरा करने की योजना है। आगरा मेट्रो की लगभग 29.4 किलोमीटर लंबी परियोजना में प्राथमिक सेक्शन (करीब 6.5 किमी) पर संचालन जारी है तथा कॉरिडोर-1 को जून 2026 तक और कॉरिडोर-2 को चरणबद्ध रूप से वर्ष 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। बैठक में यह भी अवगत कराया गया कि मेट्रो सेवाओं का उपयोग लगातार बढ़ रहा है और लखनऊ, कानपुर तथा आगरा में प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री मेट्रो का उपयोग कर रहे हैं, जिससे सड़कों पर यातायात का दबाव कम हुआ है और समय की बचत हो रही है। बेहतर परिचालन प्रबंधन और ऊर्जा दक्ष तकनीकों के उपयोग से संचालन लागत में नियंत्रण रखते हुए गैर-भाड़ा आय (नॉन-फेयर बॉक्स) जैसे विज्ञापन, रिटेल, ब्रांडिंग और स्टेशन परिसरों के उपयोग में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2024-25 में लगभग 222 करोड़ रुपये की आय दर्ज की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग की जाए, तकनीकी गुणवत्ता से कोई समझौता न हो, और कार्यों में पारदर्शिता बनी रहे। उन्होंने यह भी कहा कि जहां भी आवश्यक हो, नई तकनीकों का उपयोग कर कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाया जाए तथा आमजन को बेहतर, सुरक्षित और समयबद्ध परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता रहे।

दो अफसरों की हत्या से मचा हड़कंप: बदायूं में 85 कर्मचारियों की नौकरी गई

 बदायूं बदायूं के मूसाझाग थाना क्षेत्र के सैंजनी गांव स्थित एचपीसीएल के सीबीजी प्लांट में हुई दो अफसरों की हत्या के बाद कंपनी प्रबंधन ने बड़ा कदम उठाते हुए 85 कर्मचारियों को नौकरी से बाहर कर दिया है। ये सभी आउटसोर्सिंग कर्मचारी थे। इनमें मुख्य आरोपी अजय प्रताप सिंह के दो भाई केशव प्रताप और चंद्रशेखर भी शामिल बताए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार, सीबीजी प्लांट में कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मियों को सेवा समाप्ति की सूचना एन-3-ई टेक्नालॉजी प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंधक पराग हलानी द्वारा ई-मेल के माध्यम से दी गई। कंपनी की ओर से स्पष्ट किया गया है कि 13 मार्च से सभी संबंधित कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त मानी जाएंगी और नियमानुसार उक्त अवधि तक का भुगतान भी कर दिया गया है। प्लांट में घुसकर की गई थी दो अफसरों की हत्या बता दें कि बीते 12 मार्च को प्लांट परिसर में उप महाप्रबंधक सुधीर गुप्ता और सहायक मुख्य प्रबंधक हर्षित मिश्रा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने का आरोप आउटसोर्सिंग कर्मचारी अजय प्रताप सिंह पर है, जो महज 14 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन पर कार्यरत था। बताया जाता है कि उसने नौकरी के बहाने प्लांट परिसर में पहुंचकर पराली आपूर्ति का ठेका भी लेना शुरू कर दिया था। सूत्रों के मुताबिक, प्लांट में बढ़ती अराजकता और अनुशासनहीनता को देखते हुए उप महाप्रबंधक सुधीर गुप्ता ने सख्ती बरतनी शुरू की थी, जिससे आरोपी अजय प्रताप सिंह बौखला गया। इसी रंजिश में उसने इस जघन्य दोहरे हत्याकांड को अंजाम दिया। इसके बाद आरोपी ने थाने पहुंचकर खुद ही आत्मसमर्पण कर दिया था। बाद में पुलिस ने मुठभेड़ दिखाकर उसका चालान कर दिया। चार माह पहले बदली थी ठेका कंपनी, तब भी हुई थी छंटनी बताया जा रहा है कि लगभग चार माह पूर्व ही प्लांट में मानव संसाधन उपलब्ध कराने वाली पुरानी एजेंसी ‘लक्ष्य इंटरप्राइजेज’ का ठेका निरस्त कर एन-3-ई टेक्नालॉजी प्राइवेट लिमिटेड को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। नई कंपनी ने कार्यभार संभालते ही करीब 40 कर्मचारियों की छंटनी की थी, जिसमें आरोपी अजय प्रताप सिंह भी शामिल था। माना जा रहा है कि उसी समय से वह रंजिश पाले हुए था। फिलहाल प्लांट बंद, सुरक्षा व्यवस्था के बाद ही होगा संचालन हत्याकांड के बाद से प्लांट का संचालन पूरी तरह बंद कर दिया गया है। कंपनी और प्रशासन की ओर से संकेत दिए गए हैं कि जब तक सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हो जाते और माहौल पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाता, तब तक प्लांट दोबारा शुरू नहीं किया जाएगा।