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PMFME योजना से आकांक्षा के मिलेट्स उद्यम को मिली नई उड़ान, मुनाफा 50 हजार तक पहुंचा

सफलता की कहानी PMFME योजना ने आकांक्षा के मिलेट्स उद्यम को दी नई उड़ान 10-15 हजार की मासिक आमदनी से 40-50 हजार रुपये के शुद्ध मुनाफे तक पहुँचीं आकांक्षा ‘मिली अन्ना’ ब्रांड से बनाई पहचान, दो युवाओं को भी दिया रोजगार भोपाल        हुनर के साथ सही मार्गदर्शन और आर्थिक सहयोग मिल जाए, तो छोटा-सा व्यवसाय भी सफल उद्यम का रूप ले सकता है। भोपाल जिले के फंदा विकासखंड की श्रीमती आकांक्षा वेक्टर ने इसे साकार कर दिखाया है। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (PMFME) के सहयोग से उन्होंने अपने छोटे मिलेट्स व्यवसाय को आधुनिक प्रसंस्करण एवं उत्पादन इकाई में बदल दिया है। कभी 10 से 15 हजार रुपये प्रतिमाह कमाने वाली आकांक्षा अब सभी व्यय और बैंक ऋण की किश्त चुकाने के बाद प्रतिमाह लगभग 40 से 50 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा अर्जित कर रही हैं। पूंजी की कमी से थम रहा था कारोबार आकांक्षा के पास मिलेट्स से पौष्टिक खाद्य उत्पाद तैयार करने का हुनर और व्यवसाय को आगे बढ़ाने का जज्बा था। सीमित संसाधनों और छोटी मशीनों से उत्पादन करने के कारण उनके व्यवसाय का अपेक्षित विस्तार नहीं हो पा रहा था। उत्पादों की मांग होने के बावजूद आधुनिक मशीनरी खरीदने तथा उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए आवश्यक पूंजी की कमी उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती थी। उस समय उनकी मासिक आमदनी लगभग 10 से 15 हजार रुपये तक सीमित थी। PMFME योजना ने खोला उन्नति का रास्ता आकांक्षा को उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग, जिला भोपाल के माध्यम से प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना की जानकारी मिली। विभागीय अधिकारियों के मार्गदर्शन में उन्होंने अपनी इकाई के विस्तार के लिए आवेदन किया। वर्ष 2026-27 में आईडीबीआई बैंक, भोपाल से उन्हें 4 लाख 50 हजार रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। योजना के अंतर्गत 35 प्रतिशत अनुदान का लाभ मिलने से आधुनिक मशीनरी स्थापित करने और व्यवसाय का विस्तार करने का उनका सपना साकार हुआ। आधुनिक मशीनों से बढ़ी गुणवत्ता और उत्पादन योजना से मिली सहायता से आकांक्षा ने अपनी इकाई में स्टोन-टाइप ग्राइंडर, सोलर डीहाइड्रेटर, डेक ओवन, मिक्सर तथा ऑटोमैटिक पैकेजिंग मशीन स्थापित कीं। इन मशीनों से उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ ही उत्पादों की गुणवत्ता, स्वच्छता और पैकेजिंग में भी उल्लेखनीय सुधार आया। उन्होंने अपने मिलेट्स उत्पादों को ‘मिली अन्ना’ नाम से स्थानीय ब्रांड के रूप में बाजार में उतारा। पौष्टिक उत्पादों, बेहतर गुणवत्ता और आकर्षक पैकेजिंग के कारण उनके ब्रांड को बाजार में नई पहचान मिली तथा उत्पादों की मांग लगातार बढ़ने लगी। आय बढ़ी, दो युवाओं को मिला रोजगार व्यवसाय के विस्तार का सीधा प्रभाव आकांक्षा की आय पर पड़ा। पहले जहां उन्हें प्रतिमाह लगभग 10 से 15 हजार रुपये की आमदनी होती थी, वहीं अब सभी व्यय और बैंक ऋण की किश्त चुकाने के बाद वे प्रतिमाह लगभग 40 से 50 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा अर्जित कर रही हैं। उनके उद्यम से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और दो स्थानीय युवाओं को रोजगार भी मिला है। आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बनी योजना आकांक्षा अपनी सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना, जिला प्रशासन भोपाल तथा उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग से मिले सहयोग और मार्गदर्शन को देती हैं। उनका कहना है कि योजना से मिली आर्थिक सहायता ने उनके छोटे व्यवसाय को आधुनिक एवं लाभकारी उद्यम में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आकांक्षा की सफलता बताती है कि मेहनत, हुनर और सरकारी योजनाओं के प्रभावी सहयोग से छोटे स्तर के व्यवसाय को भी आधुनिक, लाभकारी और रोजगारपरक उद्यम में बदला जा सकता है। आज वे आत्मनिर्भर बनने के साथ अन्य महिलाओं और नव उद्यमियों के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं।  

स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के तहत 49.66 करोड़ के 50 कार्यों को मंजूरी

स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के तहत 49.66 करोड़ के 50 कार्यों को मंजूरी राज्य स्तरीय तकनीकी समिति ने 42 आकांक्षी शौचालयों सहित स्वच्छता व अपशिष्ट प्रबंधन की परियोजनाओं को दी स्वीकृति जीरो वेस्ट मॉडल को बढ़ावा देने पर विशेष जोर रायपुर  शहरों को स्वच्छ, सुंदर और स्वस्थ बनाने स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के तहत 49 करोड़ 66 लाख रुपए के 50 कार्यों को मंजूरी दी गई है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा की अध्यक्षता में हुई स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के अंतर्गत गठित राज्य स्तरीय तकनीकी समिति (SLTC) की 13वीं बैठक में इन कार्यों की स्वीकृति प्रदान की गई। मंत्रालय में हुई बैठक में 42 आकांक्षी शौचालयों सहित सतत स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन एवं अनुपचारित जल प्रबंधन से जुड़े कई कार्यों को मंजूरी दी गई। इन कार्यों से शहरों में नागरिक सुविधाओं का विस्तार होगा तथा स्वच्छता व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी। राज्य स्तरीय तकनीकी समिति की बैठक में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की स्वीकृत परियोजनाओं के गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध क्रियान्वयन की निगरानी के लिए परियोजना पर्यवेक्षण सलाहकार (PMC) की नियुक्ति को स्वीकृति दी गई। साथ ही अनुपचारित जल प्रबंधन के अंतर्गत 5 नगरीय निकायों से प्राप्त निविदा दरों से संबंधित प्रस्तावों पर भी आवश्यक स्वीकृतियां जारी की गईं। इससे इन निकायों में जल प्रबंधन से जुड़े कार्यों को गति मिलेगी। स्रोत पर पृथक्करण से लेकर वैज्ञानिक प्रसंस्करण तक की कार्ययोजना बैठक में नगरीय क्षेत्रों में शून्य अपशिष्ट मॉडल को बढ़ावा देने और स्वच्छता प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने विभिन्न नवाचारों पर चर्चा की गई। कचरे के स्रोत स्तर पर पृथक्करण, पुनः उपयोग, पुनर्चक्रण और वैज्ञानिक प्रसंस्करण को प्रोत्साहित करने के साथ स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप नवाचार आधारित मॉडल विकसित करने तथा उन्हें व्यापक स्तर पर लागू करने के संबंध में महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए। समिति ने स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के अंतर्गत स्वीकृत कार्यों को तय समय-सीमा में पूरा करने और शहरों में सतत स्वच्छता व्यवस्था स्थापित करने पर विशेष बल दिया, ताकि इन परियोजनाओं का लाभ शीघ्र आम नागरिकों तक पहुंच सके। राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुमीत अग्रवाल, वित्त विभाग एवं अन्य विभागों के प्रतिनिधि, भारत सरकार के प्रतिनिधि तथा विभागीय अधिकारी ऑनलाइन एवं भौतिक रूप से बैठक में शामिल हुए।

दाऊ मंदराजी की विरासत छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की अनमोल धरोहर – राजेश अग्रवाल

दाऊ मंदराजी की विरासत छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की अनमोल धरोहर – राजेश अग्रवाल   पुण्यतिथि पर संस्कृति मंत्री ने नाचा के पुरोधा को दी भावभीनी श्रद्धांजलि रायपुर छत्तीसगढ़ी लोकनाट्य ‘नाचा’ को नई पहचान और विशिष्ट स्वरूप प्रदान करने वाले महान लोक कलाकार दाऊ दुलार सिंह मंदराजी की पुण्यतिथि पर संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने दाऊ मंदराजी के योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और नाचा की परंपरा को समृद्ध करने में उनका योगदान सदैव याद किया जाएगा। संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि दाऊ दुलार सिंह मंदराजी ने नाचा को केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रहने दिया, बल्कि उसे छत्तीसगढ़ के जनजीवन, लोकभाषा, सामाजिक सरोकारों और सांस्कृतिक भावनाओं को अभिव्यक्त करने वाले सशक्त लोकमंच के रूप में विकसित किया। उनका पूरा जीवन लोककला और कलाकारों के उत्थान के लिए समर्पित रहा। उन्होंने कलाकारों को संगठित कर ‘रैली रिगनी साज’ नाचा दल बनाया, जो छत्तीसगढ़ की पहली नाचा पार्टी है। श्री अग्रवाल ने कहा कि दाऊ मंदराजी की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि उन्होंने छत्तीसगढ़ी लोकजीवन की सहजता, हास्य, व्यंग्य और सामाजिक सरोकारों को नाचा के माध्यम से प्रभावी अभिव्यक्ति दी। उनके प्रयासों से नाचा को गांवों की सीमाओं से आगे व्यापक पहचान मिली और अनेक प्रतिभाशाली लोक कलाकारों को अपनी कला प्रस्तुत करने का मंच प्राप्त हुआ। संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध लोक परंपराओं, लोककलाओं और लोक कलाकारों से है। दाऊ मंदराजी जैसे महान कलाकारों ने अपनी साधना से इन परंपराओं को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने का कार्य किया। उनके योगदान से प्रेरणा लेकर नई पीढ़ी को छत्तीसगढ़ की लोककला और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि दाऊ मंदराजी की स्मृति में राज्य सरकार द्वारा लोक नाट्य एवं लोक शिल्प के क्षेत्र में ‘दाऊ मंदराजी सम्मान’ प्रदान किया जाना भी उनके योगदान के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का प्रतीक है। आज उनकी पुण्यतिथि पर हम दाऊ दुलार सिंह मंदराजी को नमन करते हुए छत्तीसगढ़ की लोककला एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन तथा नई पीढ़ी तक उसके विस्तार का संकल्प लेते हैं। उन्होंने कहा कि दाऊ मंदराजी का जीवन यह संदेश देता है कि अपनी मिट्टी, अपनी बोली और अपनी लोक परंपराओं से जुड़कर भी कला को व्यापक पहचान दिलाई जा सकती है। छत्तीसगढ़ी नाचा के इस महान साधक की कला-साधना और योगदान आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करते रहेंगे।

दीपावली पर पटाखे बेचने हैं तो ध्यान दें, 25 सितंबर तक करना होगा आवेदन

जयपुर  दीपावली पर आतिशबाजी की अस्थाई दुकान लगाने की तैयारी कर रहे कारोबारियों के लिए जरूरी खबर है। जिला प्रशासन ने पटाखों की अस्थाई बिक्री के लिए अनुज्ञापत्र जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। लाइसेंस लेने के इच्छुक लोगों को 25 सितंबर 2026 तक आवेदन करना होगा। तय तारीख के बाद प्राप्त होने वाले आवेदनों पर प्रशासन की ओर से कोई विचार नहीं किया जाएगा। ऐसे में पटाखा कारोबार से जुड़े लोगों के लिए आवेदन की समय सीमा बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। जिला कलक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट संदेश नायक के अनुसार, दीपावली के अवसर पर विस्फोटक नियम, 2008 के तहत आतिशबाजी की अस्थाई बिक्री के लिए अनुज्ञापत्र जारी किए जाएंगे। अस्थाई अनुज्ञापत्र की अवधि 12 अक्टूबर से 11 नवंबर 2026 तक रहेगी। इस अवधि के दौरान निर्धारित नियमों और स्वीकृत स्थानों पर ही आतिशबाजी की बिक्री की जा सकेगी। संबंधित एसडीएम कार्यालय में करना होगा आवेदन अस्थाई पटाखा बिक्री का लाइसेंस लेने के लिए आवेदकों को निर्धारित प्रपत्र में आवेदन करना होगा। आवेदन संबंधित थाना क्षेत्र के उपखण्ड मजिस्ट्रेट कार्यालय में जमा कराया जाएगा। प्रशासन ने आवेदन के साथ प्रस्तावित बिक्री स्थल से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करना भी अनिवार्य किया है। आवेदक को प्रस्तावित आतिशबाजी बिक्री स्थल का ब्ल्यू प्रिंट मानचित्र पांच प्रतियों में देना होगा। इस मानचित्र में आसपास मौजूद व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को स्पष्ट रूप से दर्शाना जरूरी होगा। इसके अलावा शपथ पत्र, स्थल के स्वामित्व संबंधी दस्तावेज अथवा किरायानामा की प्रमाणित फोटो कॉपी और आवेदक की दो पासपोर्ट साइज फोटो भी आवेदन के साथ जमा करनी होंगी। इन थाना क्षेत्रों के लिए शुरू हुई प्रक्रिया अस्थाई आतिशबाजी अनुज्ञापत्र के लिए जयपुर जिले के कई थाना क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इनमें शाहपुरा, मनोहरपुर, अमरसर, जमवारामगढ़, आंधी, चन्दवाजी, रायसर, नरैना, मांजी रेनवाल, माधोराजपुरा, सांभर, फुलेरा, जोबनेर, किशनगढ़-रेनवाल, गोविन्दगढ़, सामोद, कालाडेरा, दूदू, मौजमाबाद और फागी शामिल हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आवेदन निर्धारित समय सीमा के भीतर संबंधित कार्यालय में पहुंचना जरूरी है। अंतिम तारीख के बाद प्राप्त होने वाले आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे और न ही उन पर विचार किया जाएगा। कारोबारियों के पास अब सीमित समय दीपावली से पहले पटाखों की अस्थाई दुकान लगाने के इच्छुक कारोबारियों को अब आवेदन प्रक्रिया पूरी करने के लिए सीमित समय मिला है। उन्हें जरूरी दस्तावेज तैयार कर 25 सितंबर तक संबंधित एसडीएम कार्यालय में आवेदन जमा करना होगा। आवेदन की अंतिम तारीख निकलने के बाद लाइसेंस के लिए नया आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा एक नजर में आवेदन की अंतिम तारीख: 25 सितंबर 2026 अस्थाई अनुज्ञापत्र की अवधि: 12 अक्टूबर से 11 नवंबर 2026 आवेदन कहां करें: संबंधित थाना क्षेत्र के उपखण्ड मजिस्ट्रेट कार्यालय जरूरी दस्तावेज: ब्ल्यू प्रिंट मानचित्र की 5 प्रतियां, शपथ पत्र, स्वामित्व दस्तावेज या किरायानामा, 2 पासपोर्ट साइज फोटो लाइसेंस की प्रक्रिया: विस्फोटक नियम, 2008 के तहत महत्वपूर्ण: 25 सितंबर के बाद प्राप्त आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ के आंगनबाड़ी केंद्रों में ‘आंगन मिलन सेवा’, पौष्टिक थाली का होगा प्रदर्शन

रायपुर. सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा प्रदेशभर के आंगनबाड़ी केंद्रों में 25 सितंबर से 6 अक्टूबर तक ‘आंगन मिलन सेवा’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के समन्वय से आयोजित इस पहल का उद्देश्य आंगनबाड़ी केंद्रों से जुड़ी माताओं, बच्चों, महिलाओं और समुदाय को पोषण, स्वास्थ्य एवं महिला कल्याण योजनाओं की जानकारी से जोड़ना तथा जनभागीदारी को मजबूत करना है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आंगनबाड़ी केंद्रों में सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक एक दिवसीय आयोजन होगा। इसमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाएगा। कार्यक्रम में हितग्राही माताओं, स्वसहायता समूह की महिलाओं, बच्चों के अभिभावकों, मितानिनों तथा समुदाय की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और मितानिनों के योगदान को सम्मानित भी किया जाएगा। आंगन मिलन सेवा कार्यक्रम में समुदाय के समक्ष ‘मेरी पौष्टिक थाली’ का प्रदर्शन कर संतुलित एवं पौष्टिक आहार के महत्व की जानकारी दी जाएगी। महिलाओं और बच्चों के लिए पौष्टिक व्यंजनों की विधि का प्रदर्शन, स्वास्थ्य एवं पोषण आधारित चित्रकला तथा स्वस्थ शिशु प्रतियोगिता, माताओं एवं सुपोषित बच्चों का सम्मान और बच्चों के लिए खेल एवं सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। आंगनबाड़ी केंद्रों में सामुदायिक सहभागिता से ‘न्योता भोज’ भी कराया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान पोषण वाटिका के लिए पौधरोपण करते हुए ‘घर-घर मुनगा, हर घर मुनगा’ के लिए लोगों को प्रेरित किया जाएगा। समुदाय से आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए खिलौने एवं खेल सामग्री उपलब्ध कराने की अपील भी की जाएगी। जिलेवार तिथियों में होंगे आयोजन- 25 सितंबर को रायपुर शहरी क्षेत्र, बस्तर, सरगुजा और बिलासपुर 26 सितंबर को रायपुर ग्रामीण, कोरबा, कवर्धा और सूरजपुर 28 सितंबर को महासमुंद, दंतेवाड़ा, राजनांदगांव और गरियाबंद 29 सितंबर को धमतरी, दुर्ग, बलौदाबाजार और मुंगेली 30 सितंबर को भिलाई क्षेत्र, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, बीजापुर और जांजगीर 1 अक्टूबर को बेमेतरा, कांकेर, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई और सुकमा 2 अक्टूबर को जशपुर, कोंडागांव और मानपुर-मोहला 3 अक्टूबर को बालोद, नारायणपुर और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही 5 अक्टूबर को सक्ती, रायगढ़ और सारंगढ़-बिलाईगढ़ 6 अक्टूबर को बलरामपुर, बिलासपुर ग्रामीण और कोरिया जिले में कार्यक्रम आयोजित होंगे।

कंबोडिया से 3 बच्चों के साथ आई दुल्हन, पैरोल पर गैंगस्टर मैनपाल ने रचाई शादी

झज्जर. करीब आठ साल पहले पैरोल के दौरान जेल से फरार होकर कंबोडिया पहुंचने और वहां से प्रत्यर्पित किए गए आजीवन कारावास के दोषी मैनपाल ढिल्ला बुधवार, 24 सितंबर को अपनी कंबोडियाई पत्नी मेटा चान के साथ हिंदू रीति-रिवाजों से विवाह बंधन में बंधेंगे। हत्या सहित कई गंभीर आपराधिक मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहे मैनपाल को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के न्यायाधीश जसजीत सिंह बेदी की अदालत से 12 घंटे की कस्टडी पैरोल मिली है। कड़ी सुरक्षा के बीच सुबह आठ से रात आठ बजे तक रहेंगे बाहर जेल अधीक्षक सेवा सिंह के अनुसार मैनपाल को सामान्य पैरोल की तरह स्वतंत्र रूप से नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि वह पूरे समय पुलिस और जेल कर्मियों की कड़ी कस्टडी व सुरक्षा घेरे में रहेगा। तयशुदा कार्यक्रम के तहत उसे सुबह आठ बजे जेल से बाहर लाया जाएगा और रात आठ बजे तक वापस जेल पहुंचाना होगा।

बोधगया-राजगीर-नालंदा-वैशाली पहुंचे थाई पर्यटक, बिहार-थाईलैंड पर्यटन सहयोग पर मंथन

पटना  बिहार की समृद्ध बौद्ध विरासत अब थाईलैंड और दक्षिण-पूर्व एशिया के पर्यटकों तक नए अंदाज में पहुंचाने की तैयारी है। बिहार पर्यटन विभाग के तत्वावधान में ‘फैम टूर ऑफ लोटस ट्रायंगल-ट्रैवल टू लैंड ऑफ एनलाइटनमेंट’ के तहत थाईलैंड से आए 28 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने बोधगया, राजगीर, नालंदा और वैशाली का भ्रमण किया। बिहार यात्रा के अंतिम चरण में पटना पहुंचने पर प्रतिनिधिमंडल ने बिहार सरकार के पर्यटन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और स्थानीय पर्यटन हित धारकों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। बिहार बौद्ध पर्यटकों के स्वागत के लिए हमेशा तैयार पर्यटन निदेशालय के संयुक्त निदेशक राजेश रौशन ने कहा कि बिहार बौद्ध पर्यटकों के स्वागत के लिए हमेशा तैयार है। बिहार सरकार सीमा-पार पर्यटन को बढ़ावा देना, बेहतरीन ट्रैवल पैकेज बनाना, सीधी कनेक्टिविटी बेहतर करना और बिहार को थाईलैंड और दक्षिण-पूर्व एशिया के अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए एक बेहतरीन डेस्टिनेशन के तौर पर स्थापित करने की दिशा में कार्यरत है। थाई प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्त रूप से कहा कि बिहार पर्यटन द्वारा किया गया यह प्रयास भारत और विशेषकर बिहार की वैश्विक पर्यटन पहुंच को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। थाईलैंड-बिहार टूरिज्म के इस पहल का हिस्सा बनना खुशी की बात है। बैठक में कारोबार और पर्यटन पर चर्चा बैठक में बिहार के पर्यटन क्षेत्र से जुड़े विभिन्न संगठनों ने थाई प्रतिनिधिमंडल ने अन्य व्यवसायी संस्था से वार्ता की। इस दौरान पर्यटन उत्पादों, ट्रैवल पैकेज, व्यावसायिक अवसर और डेस्टिनेशन प्रमोशन को लेकर दोनों पक्षों ने विचार साझा किए। हित धारकों ने कहा कि इस पहल से बिहार-थाईलैंड के बीच पर्यटन सहयोग, कारोबारी साझेदारी और प्रचार-प्रसार के नए रास्ते खुलेंगे। थाई प्रतिनिधिमंडल ने बिहार पर्यटन की पहल को भारत और विशेषकर बिहार की वैश्विक पर्यटन पहुंच बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। यात्रा पूरी करने के बाद 28 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बिहार से रवाना हो गया।

राजस्व अदालतों में रिकॉर्ड 81.35% मामलों का निपटारा, आम लोगों को राहत

छत्तीसगढ़ में गति पकड़ता राजस्व न्याय रिकॉर्ड 81.35 प्रतिशत प्रकरणों के निपटारे से राजस्व अदालतों में आई अभूतपूर्व तेज़ी ​प्रशासनिक इच्छाशक्ति से आम जन को सीधी राहत                    रायपुर छत्तीसगढ़ में राजस्व प्रशासन को अधिक प्रभावी, जवाबदेह और जनोन्मुख बनाने की दिशा में राजस्व न्यायालयों के प्रदर्शन में एक नया अध्याय जुड़ गया है। दूरस्थ अंचलों से लेकर बड़े शहरों तक भूमि, नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा और स्वामित्व जैसे आम नागरिकों के जीवन से जुड़े अत्यंत संवेदनशील मामलों को समयबद्ध सीमा में सुलझाने के लिए प्रशासनिक प्राथमिकताओं में अभूतपूर्व बदलाव आया है। राज्यभर के राजस्व न्यायालयों में दर्ज कुल 4,67,415 प्रकरणों में से रिकॉर्ड 3,80,224 प्रकरणों का सफलतापूर्वक निराकरण कर लिया गया है। इस प्रकार संपूर्ण राज्य में मामलों के निराकरण की दर 81.35 प्रतिशत तक पहुँच चुकी है, जबकि शेष 87,191 प्रकरणों के निपटारे के लिए भी लक्षित एवं सुव्यवस्थित प्रयास जारी हैं। ​कोर्ट-कचहरी के चक्करों से मुक्ति, समय और धन की बचत         राजस्व मामलों का शीघ्र निपटारा केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव ज़मीन और आजीविका से जुड़े नागरिकों के रोज़मर्रा के जीवन पर पड़ता है। कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने से मुक्ति मिलने के साथ-साथ आम जन के समय और संसाधनों की बचत हो रही है, जिससे राज्य में पारदर्शी एवं नागरिक-केंद्रित व्यवस्था सुदृढ़ हुई है। ​दूरस्थ एवं आदिवासी अंचलों का शानदार प्रदर्शन         राजस्व न्याय की इस तीव्र गति में सबसे प्रेरणादायक तस्वीर राज्य के दूरस्थ एवं आदिवासी बहुल जिलों से सामने आई है, जहाँ प्रशासनिक पहुंच और त्वरित निर्णय क्षमता मिसाल बनी है। सुकमा जिला 92.70 प्रतिशत निराकरण दर के साथ पूरे प्रदेश में शीर्ष पर है, जहाँ 7,224 मामलों में से 6,697 का निपटारा किया गया है। इसी तरह नारायणपुर में 92.28 प्रतिशत (5,780 में से 5,334 प्रकरण), दंतेवाड़ा में 91.50 प्रतिशत (5,614 में से 5,137 प्रकरण) और बीजापुर में 89.67 प्रतिशत की उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। ​बड़े ज़िलों में भी तेज़ी से सुलझ रहे ज़मीन-जायदाद के मामले         भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद दूरदराज के क्षेत्रों में मिली यह सफलता प्रशासनिक तंत्र की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। वहीं, राज्य के अधिक केस भार वाले बड़े जिलों में भी प्रकरणों के निपटारे का सिलसिला पूरी तेज़ी से चल रहा है। बस्तर में 17,600 में से 15,745 प्रकरण, बलौदाबाजार-भाटापारा में 20,905 में से 18,494 प्रकरण, राजधानी रायपुर में 34,226 में से 29,824 प्रकरण, बिलासपुर में 29,495 में से 24,539 प्रकरण, जांजगीर-चांपा में 19,132 में से 16,109 प्रकरण तथा कोरबा में 19,705 में से 15,747 मामलों को हल कर नागरिकों को राहत दी गई है। ​'ई-धरती' और आधुनिक सर्वेक्षण से संवरते भू-अभिलेख        राजस्व मामलों के त्वरित निस्तारण के साथ-साथ राज्य सरकार 'ई-धरती' योजना और आधुनिक भू-सर्वेक्षण तकनीकों के ज़रिए भू-अभिलेखों के सुदृढ़ीकरण पर भी व्यापक काम कर रही है। राज्य में 431 वन ग्राम से परिवर्तित राजस्व ग्राम और 596 असर्वेक्षित या मसाहती ग्रामों को मिलाकर कुल 1,027 ग्रामों का सर्वे हेतु चिन्हांकन किया गया है। इनमें से 284 ग्रामों का सर्वेक्षण कार्य पूरा करके डाटा 'भुइयाँ पोर्टल' पर अपलोड भी कर दिया गया है, जबकि 196 ग्रामों में अंतिम प्रकाशन की प्रक्रिया चल रही है। ​अबूझमाड़ में ऐतिहासिक पहल और डिजिटल नक्शों का निर्माण       अति-संवेदनशील अबूझमाड़ क्षेत्र और नारायणपुर जिले में भी ग्राम सर्वेक्षण की शुरुआत एक ऐतिहासिक पहल है, जहाँ 6 ग्रामों का अंतिम प्रकाशन पूर्ण कर अभिलेखों एवं नक्शों को 'भुइयां' और 'भू-नक्शा' सॉफ्टवेयर पर अपलोड कर दिया गया है तथा 59 अन्य ग्रामों में अंतिम प्रकाशन की प्रक्रिया गतिमान है। इसके अतिरिक्त, ई-धरती योजना के तहत बंदोबस्त त्रुटियों को सुधारने के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में कोंडागांव जिले को 1.10 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट आवंटित किया गया है। नगरीय निकायों के कैडेस्ट्रल नक्शों को 1:500 के सूक्ष्म पैमाने पर बदलने की दिशा में भी काम तेज़ी से जारी है, जिसके तहत 22 जिलों के 396 गांवों को नए पैमाने के नक्शे प्रदान कर दिए गए हैं, जबकि नजूल व परिवर्तित अभिलेखों के डिजिटाइजेशन का कार्य भी अंतिम चरणों में है। वर्ष 2025-26 के लिए पात्र हितग्राहियों के सत्यापन एवं e-KYC की प्रक्रिया को भी प्रगति पर रखा गया है। ​वर्षों पुराने लंबित मामलों के लिए वैज्ञानिक रणनीति       न्यायालयीन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए लंबित 87,191 प्रकरणों का समयावधि के अनुसार वैज्ञानिक वर्गीकरण किया गया है।               वर्तमान में 0 से 6 माह की अवधि के 51,401 मामले लंबित हैं, जबकि 6 माह से 1 वर्ष के 13,218 मामले, 1 से 3 वर्ष के 15,918 मामले, 3 से 5 वर्ष के 3,903 मामले और 5 वर्ष से अधिक अवधि के 2,751 प्रकरण लंबित सूची में हैं। इस वर्गीकरण का मुख्य उद्देश्य वर्षों पुराने प्रकरणों को चिन्हित कर उन्हें सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ हल करना है, ताकि लंबे समय से चले आ रहे भूमि विवादों का स्थायी अंत हो सके। राज्यभर में 80% से अधिक सफलता दर और प्रभावी समीक्षा         प्रदेश के अन्य जिलों में भी 80 प्रतिशत या उससे अधिक निराकरण दर दर्ज की गई है, जिनमें राजनांदगांव 83.45 प्रतिशत, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई 83.42,कोरिया 81.87,सारंगढ़-बिलाईगढ़ 81.84,धमतरी 81.65 , बेमेतरा 81, जशपुर 80.67, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी 80.38, कबीरधाम 80.23 और कांकेर 80.21 प्रतिशत शामिल हैं। इसके अलावा सरगुजा, महासमुंद, रायगढ़, सूरजपुर, गरियाबंद, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, दुर्ग, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर और बलरामपुर-रामानुजगंज जैसे जिलों में भी निरंतर समीक्षा बैठकों, डिजिटल ट्रैकिंग और समयबद्ध सुनवाई के माध्यम से मामलों के निपटारे की प्रक्रिया को गति दी जा रही है। ​पारदर्शी और त्वरित सुशासन की ओर बढ़ते कदम        डिजिटल गवर्नेंस, आधुनिक सर्वेक्षण तकनीकों और नियमित मॉनिटरिंग के इस सशक्त संगम से छत्तीसगढ़ का राजस्व प्रशासन आज अधिक त्वरित, पारदर्शी और पूरी तरह जन-कल्याणकारी स्वरूप धारण कर चुका है। विष्णु प्रसाद वर्मा  सहायक संचालक

गाड़ी की नंबर प्लेट में बदलाव पड़ा भारी, जालंधर में नहीं मिलेगा ईंधन

जालंधर. वाहन पर हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) नहीं है या नंबर प्लेट के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ की गई है तो अब जालंधर में ऐसे वाहन को पेट्रोल, डीजल या सीएनजी नहीं मिलेगा। कमिश्नरेट पुलिस ने बिना नंबर प्लेट, जरूरी एचएसआरपी के बिना चल रहे वाहनों के साथ-साथ टूटी, मुड़ी, क्षतिग्रस्त, बदली या जानबूझकर संशोधित नंबर प्लेट वाले वाहनों को ईंधन देने पर रोक लगा दी है। पुलिस का यह आदेश 21 सितंबर 2026 से लागू हो चुका है और 20 नवंबर तक प्रभावी रहेगा। पुलिस कमिश्नर सतिंदर सिंह ने धारा 163 के तहत यह आदेश जारी किया है। इस व्यवस्था की निगरानी डीसीपी जसरूप कौर बाठ करेंगी। पुलिस का कहना है कि नंबर प्लेट वाहन की पहचान का प्रमुख माध्यम है। इसे छिपाकर या बदलकर वाहन चलाने से यातायात नियमों के उल्लंघन के साथ अपराध की जांच में भी परेशानी होती है। ऐसे में ईंधन बिक्री को वैध नंबर प्लेट से जोड़ने का उद्देश्य वाहन की पहचान सुनिश्चित करना है। नंबर प्लेट नहीं तो पंप पर ही रुक जाएगी गाड़ी नई व्यवस्था के तहत पेट्रोल पंप, डीजल डिस्पेंसिंग स्टेशन और सीएनजी स्टेशन पर वाहन में ईंधन भरने से पहले नंबर प्लेट की स्थिति देखी जाएगी। यदि वाहन पर नंबर प्लेट नहीं है या जिस वाहन पर एचएसआरपी लगना जरूरी है, उस पर एचएसआरपी नहीं लगी है तो उसे ईंधन नहीं दिया जाएगा। इसी तरह प्लेट टूटी हुई, मुड़ी हुई, क्षतिग्रस्त या ऐसी स्थिति में है जिससे वाहन का पंजीकरण नंबर स्पष्ट नहीं हो रहा, तो भी ईंधन देने पर रोक रहेगी। यदि नंबर प्लेट में बदलाव या छेड़छाड़ के संकेत मिलते हैं तो पंप संचालक को पुलिस को इसकी सूचना देनी होगी। छेड़छाड़ वाली प्लेट पर खास नजर पुलिस के आदेश में नंबर प्लेट से छेड़छाड़ को विशेष रूप से शामिल किया गया है। कई बार वाहन की पहचान छिपाने के लिए नंबर प्लेट को मोड़ दिया जाता है, उस पर कोई सामग्री लगा दी जाती है या प्लेट को इस तरह बदला जाता है कि नंबर स्पष्ट दिखाई न दे। ऐसे वाहनों को भी ईंधन नहीं मिलेगा। पंप कर्मचारी संदिग्ध वाहन के मेक, माडल, रंग और आने-जाने की दिशा जैसी जानकारी संभव होने पर नोट कर सकते हैं। पुलिस को सूचना मिलने पर सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से वाहन की गतिविधि की जांच की जा सकेगी। पेट्रोल पंपों पर सीसीटीवी अनिवार्य आदेश के तहत सभी ईंधन स्टेशनों के सीसीटीवी कैमरे चालू रखना जरूरी होगा। प्रवेश और निकास स्थान, ईंधन भरने का क्षेत्र, आने-जाने वाले वाहनों, भुगतान क्षेत्र और जहां संभव हो वहां वाहन की नंबर प्लेट की रिकार्डिंग होनी चाहिए। कानूनी और तकनीकी रूप से संभव होने पर पंप के सामने और उससे जुड़ी सड़क की भी निगरानी करनी होगी। सीसीटीवी फुटेज को कम से कम दो महीने तक सुरक्षित रखना होगा। इससे पुलिस को घटना के बाद संदिग्ध वाहन की तलाश करने में मदद मिल सकती है। वारदात के बाद भागने वाले वाहन की पहचान में मदद पुलिस की इस व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण पहलू अपराध की जांच से जुड़ा है। यदि किसी वारदात में इस्तेमाल वाहन पर नंबर प्लेट नहीं है या उसके साथ छेड़छाड़ की गई है, तो उसके पेट्रोल पंप तक पहुंचने पर पुलिस को सूचना मिल सकती है। पंप की सीसीटीवी फुटेज से वाहन का रंग, माडल और आवाजाही का समय सामने आ सकता है। जांच के दौरान पुलिस इन फुटेज को शहर के अन्य सीसीटीवी कैमरों की रिकार्डिंग से जोड़कर वाहन के संभावित रूट का पता लगा सकती है। इस तरह पेट्रोल पंप की फुटेज किसी आपराधिक मामले में एक अतिरिक्त जांच कड़ी बन सकती है। नए और आपातकालीन वाहनों को छूट इस आदेश में कुछ वाहनों को छूट दी गई है। एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड, फायर सर्विस और आपातकालीन सेवा वाले वाहनों पर यह रोक लागू नहीं होगी। नए खरीदे गए ऐसे वाहन, जिनके लिए सक्षम प्राधिकारी की ओर से वैध पंजीकरण नंबर जारी किया गया है, उन्हें भी ईंधन दिया जा सकेगा। वैध अस्थायी पंजीकरण नंबर वाले वाहनों को भी दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक प्रमाण प्रस्तुत करने पर ईंधन दिया जाएगा। पंप संचालकों की जिम्मेदारी बढ़ी पेट्रोल पंप संचालकों को पंजाबी और अंग्रेजी में प्रमुख स्थान पर नोटिस लगाकर ग्राहकों को इस नियम की जानकारी देनी होगी। संदिग्ध नंबर प्लेट वाला वाहन मिलने पर नजदीकी पुलिस स्टेशन या पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना देनी होगी। पुलिस के आदेश का पालन नहीं करने पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। फायदा क्या होगा? इस व्यवस्था से वाहन मालिकों पर वैध नंबर प्लेट लगाने का दबाव बढ़ेगा। साथ ही बिना नंबर या छेड़छाड़ वाली प्लेट वाले वाहनों की पहचान आसान हो सकती है। अपराध की जांच में पेट्रोल पंपों की सीसीटीवी फुटेज पुलिस को अतिरिक्त सुराग दे सकती है। ध्यान रखने वाली बात: वाहन मालिक पेट्रोल पंप पर परेशानी से बचने के लिए अपने वाहन की नंबर प्लेट सही स्थिति में रखें और जहां लागू हो वहां एचएसआरपी लगवाएं। पंप संचालकों के लिए कैमरों की गुणवत्ता और दो महीने तक फुटेज सुरक्षित रखना भी अहम जिम्मेदारी होगी।

मुख्यमंत्री बोले- अंग्रेजों ने भ्रम पैदा कर भारतीयों को अपनी परंपरा, मूल्यों और जड़ों से काटने का किया काम

विदेशी आक्रांताओं ने भारत का वैभव ही नहीं लूटा, ज्ञान परंपरा को भी नष्ट करने का किया प्रयास: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ   ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं और महंत अवेद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि पर सप्त दिवसीय समारोह के व्याख्यान-सत्र का शुभारंभ   मुख्यमंत्री बोले- अंग्रेजों ने भ्रम पैदा कर भारतीयों को अपनी परंपरा, मूल्यों और जड़ों से काटने का किया काम   मुख्यमंत्री ने कहा- भारत अपनी ज्ञान परंपरा के कारण था विश्वगुरु, तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्वविद्यालय इसके प्रमाण   मुख्यमंत्री बोले- सत्य को प्रमाण के साथ रखना होगा, विरोधी असत्य बताएंगे और दुष्प्रचार करने वाले पैदा करेंगे संशय   मुख्यमंत्री ने कहा- भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोड़कर नई पीढ़ी तक पहुंचाने का किया आह्वान   गोरखपुर  मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विदेशी आक्रांताओं का उद्देश्य केवल भारत का वैभव लूटना नहीं था, बल्कि उसकी ज्ञान परंपरा और बुद्धि को नष्ट करना भी था। मंदिरों पर हमले इसी सोच का हिस्सा थे। ब्रिटिश काल में तरीका बदला और भ्रम पैदा कर भारतीयों को अपनी परंपरा, मूल्यों और जड़ों से काटने का प्रयास किया गया। अब अपनी ज्ञान परंपरा को पहचानने, उसे प्रमाणों के साथ दुनिया के सामने रखने और आधुनिक तकनीक से जोड़कर नई पीढ़ी तक पहुंचाने का समय है।   मुख्यमंत्री गुरुवार को गोरखनाथ मंदिर में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि पर आयोजित सप्त दिवसीय पुण्यतिथि समारोह के व्याख्यान-सत्र को संबोधित कर रहे थे।   मंदिरों पर हमले के पीछे सनातन परंपरा पर प्रहार की सोच मुख्यमंत्री ने रामायण काल में दंडकारण्य में ऋषियों के आश्रमों पर हमलों का उल्लेख करते हुए कहा कि राक्षसी और दानवी शक्तियां हों या विदेशी आक्रांता, भारत पर हमले का उद्देश्य वैभव लूटने के साथ उसकी ज्ञान धरोहर को नष्ट करना भी रहा। उन्होंने सोमनाथ मंदिर पर महमूद गजनवी के आक्रमण का जिक्र करते हुए कहा कि मंदिर को तोड़ने का उद्देश्य केवल लूटपाट नहीं, बल्कि सनातन परंपरा को नष्ट करना भी था।   अंग्रेजों ने भ्रम पैदा कर जड़ों से काटा मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि ब्रिटिश काल में तरीका बदल गया। भारतीयों को अपनी भाषा, चिकित्सा पद्धति और ज्ञान परंपरा को लेकर भ्रमित किया गया। संस्कृत के स्थान पर अंग्रेजी और परंपरागत चिकित्सा पद्धति के स्थान पर आधुनिक चिकित्सा को महत्व दिया गया। परिणाम यह हुआ कि हम धीरे-धीरे अपनी परंपरा, मूल्यों और जड़ों से कटते गए।   ज्ञान परंपरा के कारण विश्वगुरु था भारत मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत अपनी ज्ञान परंपरा के कारण विश्वगुरु कहलाता था। आज के कई विकसित देशों का इतिहास 400 से 500 वर्षों का है, जबकि भारत में 2600 वर्ष पहले तक्षशिला और करीब 1700 से 1800 वर्ष पहले नालंदा जैसे विश्वविद्यालय थे। काशी, उज्जैन, कांची और नवद्वीप भी ज्ञान के प्रमुख केंद्र रहे।   उन्होंने कहा कि कुंभ केवल स्नान का आयोजन नहीं था। प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक-त्र्यंबकेश्वर में संत और विद्वान अपने शोध और नवाचार पर चर्चा करते थे। भारतीय समाज ने अपने पर्व, त्योहार और मांगलिक कार्यों को आज भी भारतीय पंचांग से जोड़ रखा है।   एक लाख से अधिक पांडुलिपियों का हो रहा संरक्षण मुख्यमंत्री ने बताया कि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय काशी में एक लाख से अधिक प्राचीन पांडुलिपियां एकत्र की गई हैं और उनके संरक्षण तथा डिजिटाइजेशन का कार्य चल रहा है। परिवारों, विद्वानों के घरों, प्राचीन मठों और मंदिरों में भी ऐसी ज्ञान धरोहर मौजूद है। अयोध्या, प्रयागराज, मथुरा-वृंदावन और लखनऊ समेत विभिन्न स्थानों पर पांडुलिपियां, ताम्रपत्र और शिलालेख मिले हैं।   सत्य के साथ प्रमाण भी रखना होगा योगी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने में तीन पक्ष सामने होंगे। पहला सत्य का है, इसलिए जो भी कहें, प्रमाणित करके कहें। दूसरा विरोधियों का है, जो उसे असत्य ठहराने का प्रयास करेंगे और तीसरा दुष्प्रचार करने वालों का है, जो संशय पैदा करेंगे। तकनीक ऐसे संशय को दूर करने में बड़ी मदद कर सकती है। इसे समयानुकूल बनाकर ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाना होगा।   पाणिनि से चाणक्य तक की विरासत को जानें मुख्यमंत्री ने कहा कि भाषा, व्याकरण, अर्थशास्त्र, विज्ञान, खगोल, ज्योतिष, आयुर्वेद, शिल्प और तकनीक समेत हर क्षेत्र में भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा रही है। नई पीढ़ी को पाणिनि, पतंजलि, आयुर्वेद के आचार्यों और चाणक्य के अर्थशास्त्र जैसी विरासत से परिचित कराना होगा। करीब तीन हजार वर्ष पहले नैमिषारण्य में 88 हजार ऋषि श्रवण परंपरा से प्राप्त ज्ञान को लिपिबद्ध करने के लिए एकत्र हुए थे।   जड़ों से कटकर विकास संभव नहीं: विश्वकर्मा उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा ने कहा कि विकसित भारत की संकल्पना में भारतीय ज्ञान परंपरा के सूत्र मौजूद हैं। अपनी जमीन और मूल से कटकर विकास संभव नहीं है। भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़कर ही भारत विश्वगुरु के पथ पर आगे बढ़ सकता है।   नई पीढ़ी को विरासत से जोड़ें: रामनाथन आईआईटी बीएचयू के प्रो. वी. रामनाथन ने कहा कि भारतीय सभ्यता ने ज्ञान को हमेशा प्राथमिकता दी है। नई पीढ़ी को आधुनिक माध्यमों से अपनी विरासत की जानकारी देनी होगी। अपनी धरोहर को भूलना समाज में अलगाव का कारण बनता है।   संस्कारयुक्त शिक्षा लोककल्याण का माध्यम: श्रीधराचार्य जगद्गुरु स्वामी श्रीधराचार्य ने कहा कि संस्कार के अभाव वाली शिक्षा अमंगलकारी है। भारतीयता से जुड़ी शिक्षा लोककल्याण का माध्यम बनती है। ज्ञान वही है, जो मनुष्य को आत्मबोध की ओर ले जाए।   योग केवल आसन नहीं: विश्वेश प्रपन्नाचार्य जगद्गुरु विश्वेश प्रपन्नाचार्य ने यम, नियम, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, आसन, ध्यान और समाधि का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय योग परंपरा व्यापक है। इसे केवल आसन तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए।   कार्यक्रम में ये रहे मौजूद व्याख्यान-सत्र की शुरुआत संतों ने ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की। कार्यक्रम में जगद्गुरु संतोषाचार्य सतुआ बाबा, महंत नारायण गिरि, महंत राजू दास, महंत शेरनाथ, स्वामी नरसिंह दास, महंत राम बालक दास व अन्य संतजन के साथ महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद से जुड़े संस्थानों के प्रधानाचार्य, शिक्षक, अभिभावक और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।