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मुख्यमंत्री साय ने अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए किए जा रहे कार्यों की विस्तृत समीक्षा की

रायपुर. स्वीकृत विकास कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण की प्रथम बैठक जिला मुख्यालय दुर्ग स्थित लोक निर्माण विभाग के सभाकक्ष में संपन्न हुई। बैठक में प्राधिकरण के अंतर्गत स्वीकृत प्रमुख विकास कार्यों, प्राधिकरण मद से निर्माणाधीन कार्यों के अनुमोदन, प्रावधानित बजट तथा नवीन स्वीकृत कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई।बैठक के दौरान जनप्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तुत सुझावों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के पिछड़ा वर्ग समुदाय के सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक उत्थान हेतु संचालित योजनाओं की प्रगति का आकलन करना तथा भावी विकास रणनीतियों का निर्धारण करना था, ताकि विकास का लाभ वास्तविक हितग्राहियों तक प्रभावी रूप से पहुँच सके। मुख्यमंत्री  साय ने प्राधिकरण के अंतर्गत संचालित विभिन्न निर्माण कार्यों एवं जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि स्वीकृत बजट का समय पर एवं पूर्ण उपयोग सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों का लाभ सीधे आमजन तक पहुँचना चाहिए और इसके लिए सभी स्तरों पर सतत निगरानी आवश्यक है। मुख्यमंत्री  साय ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देशित करते हुए कहा कि जिले के अंतर्गत स्वीकृत सभी विकास कार्यों, सेवाओं एवं कार्यक्रमों का बेहतर संचालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से निर्देश दिए कि अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्रों के हित को प्राथमिकता में रखते हुए सभी स्वीकृत निर्माण कार्यों को अविलंब पूर्ण किया जाए। बैठक में मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2020-21 से लेकर वित्तीय वर्ष 2024-25 तक स्वीकृत निर्माण एवं विकास कार्यों की जिलेवार समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने प्रगति की स्थिति की जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने ऐसे विकास कार्य जो अब तक अप्रारंभ हैं अथवा प्रगतिरत हैं, उन्हें चिन्हित करते हुए दो माह की समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने जिला कलेक्टरों से प्रत्यक्ष संवाद कर कार्यों की अद्यतन स्थिति की जानकारी प्राप्त की तथा समयबद्ध पूर्णता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण विकास की प्रक्रिया में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है। इसके अंतर्गत क्षेत्रीय नेतृत्व से परामर्श लेकर अल्पकालिक योजनाओं का निर्माण, बुनियादी सुविधाओं का विस्तार तथा जन अपेक्षाओं के अनुरूप छोटे-छोटे निर्माण कार्यों की त्वरित स्वीकृति का प्रावधान किया गया है। प्राधिकरण के अंतर्गत राज्य के 35 विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। इन क्षेत्रों में आधारभूत नागरिक सुविधाओं के विकास, सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रोत्साहन, शैक्षणिक सुविधाओं तथा स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। साथ ही शिक्षा एवं छात्रावासों के विकास पर प्रमुख रूप से जोर दिया गया है और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों की शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने को लेकर भी बैठक में चर्चा की गई। बैठक में उप मुख्यमंत्री  अरुण साव, स्वास्थ्य मंत्री  श्यामबिहारी जायसवाल, राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा, महिला एवं बाल विकास मंत्री मती लक्ष्मी राजवाड़े, अनुसूचित जाति विकास मंत्री  गुरु खुशवंत साहेब, स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेन्द्र यादव, सांसद  बृजमोहन अग्रवाल, छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष  ललित चंद्राकर सहित अन्य विधायकगण एवं अन्य जनप्रतिनिधि, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध कुमार सिंह, सचिव  बसवराजू एस, शासन के विभिन्न विभागों के सचिव, आईजी, कमिश्नर, कलेक्टर एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

राज्यमंत्री गौर का भरोसा—भारत की प्रगति अजेय, विकास की रफ्तार और तेज़ होगी

भोपाल. भारत सरकार द्वारा 1 फरवरी को संसद में प्रस्तुत बजट 2026-27 को लेकर भोपाल की एल.एन. सिटी यूनिवर्सिटी के आर्यभट्ट ऑडिटोरियम में महिला संवाद कार्यक्रम का आयोजिन किया गया। कार्यक्रम में पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  कृष्णा गौर ने कहा कि यह बजट देश की दिशा और तस्वीर बदलने वाला साबित होगा। राज्यमंत्री  गौर ने कहा कि बजट के प्रभाव को समझना आवश्यक है, क्योंकि इससे आने वाले समय में देश की आर्थिक और सामाजिक संरचना पर व्यापक असर पड़ेगा। कार्यक्रम की शुरुआत में सभी ने मिलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री को बजट प्रस्तुत करने पर बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि भारत ने विश्व मंच पर यह साबित कर दिया है कि वह तेज गति से प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहा है। वक्ताओं ने विश्वास जताया कि अब भारत की विकास यात्रा को कोई नहीं रोक सकता। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं की उपस्थिति को रेखांकित करते हुए कहा गया कि मातृशक्ति की भागीदारी देश के विकास की सबसे बड़ी ताकत है। उपस्थित महिलाओं ने भी बजट को लेकर सकारात्मक उम्मीदें जताईं और इसे समाज के हर वर्ग के लिए लाभकारी बताया। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज नारी शक्ति को केवल योजनाओं की लाभार्थी नहीं, बल्कि नीति-निर्माण से लेकर नेतृत्व तक भागीदार बनाया गया है। यह स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार है जब लगातार 9वीं बार किसी महिला वित्त मंत्री द्वारा देश का बजट प्रस्तुत किया गया है। विकसित भारत बजट 2026–27 को लेकर भोपाल स्थित LNCT कॉलेज के आर्यभट्ट ऑडिटोरियम में आयोजित महिला संवाद कार्यक्रम में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खंडेलवाल ने भी  नारी सशक्तिकरण, आत्मनिर्भर भारत और राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की निर्णायक भूमिका पर अपने विचार साझा किया। कार्यक्रम में प्रदेश सरकार में भोपाल महापौर  मालती राय, भाजपा मध्य प्रदेश महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष  अश्विनी परांजपे एवं भाजपा भोपाल जिला अध्यक्ष श्री रविन्द्र यति जी उपस्थित रहे।

सीएम योगी ने पौड़ी गढ़वाल के यमकेश्वर स्थित इंटर कॉलेज के नवनिर्मित भवन का किया लोकार्पण

यमकेश्वर/पौड़ी गढ़वाल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को उत्तराखंड दौरे पर पौड़ी गढ़वाल के यमकेश्वर स्थित इंटर कॉलेज के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि भौतिक विकास जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं होता, बल्कि वह केवल आवश्यकताओं की पूर्ति का माध्यम है। वास्तविक और सार्थक विकास वही है, जो अपनी सभ्यता, संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों का संरक्षण करते हुए आगे बढ़े। शिक्षा केंद्रों को इसी सोच के साथ स्वयं को तैयार करना होगा, ताकि विद्यालय केवल पुस्तक ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि संस्कार, कौशल और जीवन निर्माण के केंद्र बनें। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विद्यालय के मेधावी छात्रों को पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया। ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक शिक्षा ढांचा सरकार की प्राथमिकता नवनिर्मित इंटर कॉलेज भवन के लोकार्पण अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह भव्य शैक्षणिक भवन अब छात्रों व शिक्षकों को समर्पित हो चुका है। शीघ्र ही यहां आवश्यक फर्नीचर सहित सभी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। डबल इंजन की उत्तराखंड सरकार का स्पष्ट फोकस ग्रामीण क्षेत्रों में भी अत्याधुनिक शिक्षा व स्वास्थ्य इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर है, ताकि विद्यार्थियों को गांव छोड़कर शहरों की ओर पलायन न करना पड़े और वे अपने क्षेत्र में रहकर ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड अपनी स्थापना के रजत जयंती वर्ष में प्रवेश कर चुका है और यह कालखंड केवल भौतिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि सांस्कृतिक व आध्यात्मिक मूल्यों के संरक्षण के साथ विकास की नई ऊंचाइयों को छूने का अवसर है। विकास एकांगी नहीं हो सकता, यदि सभ्यता और संस्कृति सुरक्षित नहीं रहेंगी, तो भौतिक प्रगति भी अर्थहीन सिद्ध होगी। प्रगति का मार्ग सकारात्मक सोच से मुख्यमंत्री ने सनातन परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि गोत्र व्यवस्था, ऋषि परंपरा के प्रति हमारी कृतज्ञता का प्रतीक है। प्राचीन काल के गुरुकुल केवल अध्ययन के केंद्र नहीं थे, बल्कि कृषि, आयुर्वेद, कौशल व जीवन मूल्यों के प्रशिक्षण के समग्र केंद्र थे। वहां से निकला विद्यार्थी जीवन के किसी भी संघर्ष में स्वयं को असहाय नहीं पाता था। कोई कार्य उसके लिए न छोटा होता था, न कठिन। मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में वही व्यक्ति सफल होता है, जो सकारात्मक सोच के साथ अपने पुरुषार्थ व परिश्रम से आगे बढ़ता है। नकारात्मकता व्यक्ति को दुर्गति की ओर ले जाती है। मेहनत करने वालों पर बरसती है मां सरस्वती की कृपा उन्होंने कहा कि कुछ लोग विद्यालयों में मां सरस्वती की प्रार्थना पर भी सवाल उठाते हैं। मां सरस्वती किसी जाति, मत या संप्रदाय की नहीं हैं, जो मेहनत करता है और सही दिशा में सोचता है, उस पर उनकी कृपा स्वतः होती है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 इसी सोच को आगे बढ़ाती है कि विद्यालय केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि स्किल डेवलपमेंट और समग्र व्यक्तित्व निर्माण के केंद्र बनें।  आज बेहतर संपर्क व्यवस्था से जुड़ चुका है यमकेश्वर महादेव मुख्यमंत्री ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि 1965 में जब यह इंटर कॉलेज स्थापित हुआ था, तब न बिजली थी, न सड़कें और न आधुनिक साधन। आज गांव-गांव में बिजली, पेयजल, सड़कें और बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध है। यमकेश्वर महादेव मंदिर, जहां पहले पैदल यात्रा ही एकमात्र साधन थी, आज बेहतर संपर्क व्यवस्था से जुड़ चुका है। पहले का विद्यालय भवन जर्जर स्थिति में था, आज भव्य भवन उपलब्ध है। सरकार ने सुविधाएं दी हैं, अब शिक्षकों का दायित्व है कि शिक्षा की गुणवत्ता को उसी स्तर तक पहुंचाएं और छात्रों का कर्तव्य है कि वे पूरे मनोयोग से अध्ययन करें। विद्यालय केवल शिक्षा के ही नहीं, बल्कि संस्कृति और सभ्यता के भी आधार स्तंभ होने चाहिए। गांवों को फिर से बनाना होगा आत्मनिर्भर मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि है। यहां का युवा देश की सीमाओं की रक्षा करता है और हर क्षेत्र में अपनी प्रभावी भूमिका निभाता है। हिमालय से निकलने वाला जल पूरे उत्तर भारत की भूमि को उपजाऊ बनाता है और देश की खाद्यान्न सुरक्षा में योगदान देता है। सरकार चाहती है कि हर स्तर पर मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित हो, लेकिन उसका सही उपयोग समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने गांवों को पलायन से बचाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि गांव हमारी सभ्यता की जड़ हैं। जड़ जितनी मजबूत होगी, समाज उतना ही स्थिर और समृद्ध होगा। गांवों को शिक्षा, नवाचार, शोध और आत्मनिर्भरता के केंद्र के रूप में विकसित करना होगा। पहले गांव आत्मनिर्भर थे, सरकार पर निर्भरता न्यूनतम थी। आज जरूरत है उस आत्मनिर्भरता की भावना को फिर से जीवित करने की। प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी में हो विद्यालय भवन का उपयोग मुख्यमंत्री ने आदित्य बिरला समूह के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि उनके सहयोग से यह विद्यालय भवन समयबद्ध तरीके से बनकर तैयार हुआ। अब लक्ष्य है कि इस भवन का उपयोग प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी, विशेष कक्षाओं और कौशल विकास के लिए भी किया जाए। उन्होंने ‘अभ्युदय कोचिंग’ मॉडल का उल्लेख करते हुए कहा कि डिजिटल और फिजिकल दोनों माध्यमों से गरीब और ग्रामीण पृष्ठभूमि के बच्चों को आईआईटी जेईई, नीट जैसी परीक्षाओं के लिए तैयार किया जा सकता है। उन्होंने विद्यालयों को पर्यटन, बागवानी, कृषि और स्थानीय संसाधनों से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि यमकेश्वर क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों और शुद्ध जल जैसी अमूल्य संपदा है, जिसका संरक्षण और सदुपयोग जरूरी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जो भी नया और सकारात्मक प्रयास होगा, वही समाज के लिए प्रेरणा बनेगा और इस प्रेरणा का केंद्र हमारे शिक्षण संस्थान होंगे। इस अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार के सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत, शिक्षा व स्वास्थ्य मंत्री डॉ धनसिंह रावत, विधायक मीनू बिष्ट, भाजपा के जिला अध्यक्ष राजगौरव नौटियाल उपस्थित रहे।

मेहनत और निष्ठा का प्रतिफल, पुरस्कार: राज्यपाल पटेल ने लोक भवन में 63 पुरस्कृत पुष्प किस्मों का किया अवलोकन

मेहनत और निष्ठा का प्रतिफल, पुरस्कार : राज्यपाल  पटेल राज्यपाल ने लोक भवन की पुरस्कृत 63 पुष्प किस्मों का किया अवलोकन भोपाल  राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने राज्य स्तरीय पुष्प प्रदर्शनी में प्रदर्शित लोक भवन के पुष्पों की विभिन्न किस्मों का अवलोकन किया। उन्होंने लोक भवन को प्राप्त पुरस्कारों की जानकारी ली। लोकभवन उद्यानों के रखरखाव से जुड़े कर्मचारियों और अधिकारियों के प्रयासों की सराहना की। राज्यपाल  पटेल ने अधिकारियों-कर्मचारियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि मेहनत और निष्ठा से किए गए कार्य सदैव उत्कृष्ट होते हैं। उन्होंने कहा कि प्राप्त पुरस्कार कर्मचारियों की कार्य-निष्ठा और समर्पण का प्रतिफल हैं। फूलों की देखभाल में बहाया गया पसीना ही इन पुरस्कारों का प्रसाद है। राज्य स्तरीय प्रदर्शनी में 63 किस्मों को पुरस्कार मिलना हर्ष और गर्व का विषय है। उन्होंने बताया कि पुरस्कृत किस्मों में से 42 पुष्पों को प्रथम तथा 21 पुष्पों को द्वितीय पुरस्कार प्राप्त होना एक विशिष्ट उपलब्धि है। राज्यपाल  पटेल लोक भवन की प्रदर्शनी में पुरस्कृत पुष्पों का अवलोकन करने के लिए लाल कोठी के सामने स्थित पुरानी तोप प्रांगण पहुँचे। उन्होंने प्रत्येक पुरस्कृत पुष्प किस्म का अवलोकन किया तथा पुरस्कारों के संबंध में जानकारी प्राप्त की। राज्यपाल  पटेल को बताया गया कि भोपाल में आयोजित कृषक कल्याण वर्ष-2026 राज्य स्तरीय पुष्प प्रदर्शनी में शासकीय, अर्द्धशासकीय एवं निजी संस्थानों तथा कृषकों ने भाग लिया था। प्रतियोगिता की विभिन्न श्रेणियों में लोक भवन के पुष्पों की बड़ी संख्या में पुरस्कार प्राप्त होने के दृष्टिगत नियंत्रक, हाउसहोल्ड लोकभवन को शील्ड प्रदान कर अलंकृत किया गया। उनको बताया गया कि कृषक कल्याण वर्ष-2026 राज्य स्तरीय पुष्प प्रदर्शनी में साल्विया,  पिंक,  एस्टर,  डॉगफ्लावर, सिनेरिया, हाइब्रिड डहेलिया, देशी डहेलिया, मिनी-डहेलिया, डायनामोर, स्वीट-विलियम, स्वीट-एलायसम, वर्बीना,  कैलेंडुला,  बिजली, सिलोसिया आदि मौसमी फूलों के गमले एवं कट-फ्लावर तथा गुलाब की विभिन्न किस्में—एच.टी. रोज (लाल, गहरे गुलाबी, हल्के गुलाबी, पीले, सफेद, ऑरेंज, मौव-पर्पल,  बहुरंगी,  धारदार, सुगंधित),  फ्लोरीबंडा (गुच्छ पुष्प), फ्ल्यूटी, समर स्नो, पोलिएंथा, मिनिएचर आदि के गमले एवं कट-फ्लावर प्रदर्शित किए गए थे।     

छात्रों को प्रोत्साहन: स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी विद्यालय एनसीडीसी के 68 विद्यार्थियों को साइकिल वितरण

रायपुर. उद्योग मंत्री  लखन लाल देवांगन ने छात्राओं को बांटी साइकिल स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट हिंदी माध्यम विद्यालय एनसीडीसी कोरबा में , छत्तीसगढ़ शासन के कैबिनेट मंत्री  लखन लाल देवांगन ने सरस्वती साइकिल योजना अंतर्गत छात्राओं को  साइकिल वितरित की।     सरस्वती साइकिल वितरण कार्यक्रम में सर्वप्रथम मां सरस्वती जी के छायाचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जलवन कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई। इस दौरान मंत्री  देवांगन ने कहा कि सरस्वती साइकिल वितरण योजना के तहत आज स्कूल में छात्राओं को साइकिल वितरण किया जा रहा है।  सभी छात्राओं को बधाई व शुभकामनाएं। खूब पढ़े-खूब बढ़े,  बेटियां हैं तो कल है ,सभी बच्चें लगन से पढ़ाई करें और अपने विद्यालय का नाम रोशन करें, हमारे प्रदेश के  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय जी की सोच है कि शिक्षा के क्षेत्र में लगातार विकास करते हुए छात्र-छात्राओं को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा प्रदान करें। इसी उद्देश्य के साथ कोरबा जिले के सभी जर्जर हो चुके शासकीय स्कूलों के नवीन भवन निर्माण को तेजी से कराया जा रहा है, स्कूलों में निशुल्क नाश्ता का प्रदाय किया जा रहा है। मेधावी छात्र-छात्राओं को विशेष कोचिंग की सुविधा रायपुर भेज कर उपलब्ध कराई जा रही है। हमारी छात्राओं को स्कूल आने में परेशानी ना हो जिसके लिये सरस्वती साइकिल योजना के तहत सरकार द्वारा साइकिल वितरण किया जा रहा है, शिक्षा के क्षेत्र में बच्चों के लिए अच्छा अवसर देना हमारा कर्तव्य है। हमारी सरकार के मंशा के अनुरूप शिक्षा के क्षेत्र में आगे की ओर अग्रसर होते हुए प्रदेश में बेहतर शिक्षा देना हमारा कर्तव्य है।       इस अवसर पर मंडल अध्यक्ष  राजेश राठौर ,पार्षद मती सिमरन कौर, पार्षद  मुकुंद कंवर , पार्षद  लक्ष्मण वास, शाला प्रतिनिधि  यासीन खान ,  मिलाप बरेठ , मती ज्योति वर्मा , धर द्विवेदी , मती अर्चना रूनीझा , मती मंदाकिनी त्रिपाठी जी, प्राचार्य डॉ अलका फिलिप्स सहित अभिभावक गण, छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में किसानों के हितों से किसी प्रकार का समझौता नहीं होगा: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

राज्य सरकार किसान, उद्योग और व्यापार को साथ लेकर तैयार कर रही है विकास का नया मॉडल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में किसानों के हितों से किसी प्रकार का समझौता नहीं होगा केन्द्रीय बजट के आधार पर तय हो रही हैं वैश्विक नीतियां मध्यप्रदेश देश का फूड बॉस्केट बना, अब खाद्यान्न उत्पादन में हैं दूसरे स्थान पर उड़द और मसूर का उत्पादन बढ़ाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध जमीन हो या मशीन हर स्तर पर किसानों और व्यापारियों को सहयोग देने के लिए तत्पर है राज्य सरकार दाल उत्पादक कृषकों, मिल संचालकों, व्यापारियों, निर्यातकों और विशेषज्ञों की भोपाल में होगी कार्यशाला मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर में ऑल इंडिया दाल मिल एसोसिएशन के सम्मेलन को किया संबोधित इंदौर  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश देश का फूड बॉस्केट बन चुका है। मध्यप्रदेश को कृषि, खाद्य प्रसंस्करण और दाल उत्पादन के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने का संकल्प लिया गया है। राज्य सरकार किसान, उद्योग और व्यापार को साथ लेकर विकास का नया मॉडल तैयार कर रही है। राज्य सरकार जमीन हो या मशीन हर स्तर पर किसानों और व्यापारियों को अपनी गतिविधियों के विस्तार के लिए हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराने के लिए तत्पर है। किसान कल्याण वर्ष में राज्य सरकार ने किसानों की आय दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। राज्य सरकार ने तुअर से मंडी टैक्स हटाया है, इससे दाल मिल उद्योग को लाभ मिलेगा। उड़द और मसूर पर भी राहत देने का विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारे दैनिक जीवन में दालों का विशेष महत्व है। मूंग और मसूर की दालों पर मुहावरे बन गए। दालों से हमें प्रोटीन मिलता है। यह गर्व का विषय है कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा दाल उत्पादक और उपभोक्ता देश है। शाकाहारी संस्कृति में दालें प्रोटीन का सबसे बड़ा स्त्रोत हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव इन्दौर में ऑल इंडिया दाल मिल एसोशिएशन के ग्रेन-एक्स इंडिया प्रदर्शनी अंतर्गत कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रदेश में दूध और दलहन फसलों के उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। दूध उत्पादन को 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक करने का लक्ष्य रखा है। प्रदेश में मसूर और उड़द उत्पादन को बढ़ाने के लिए शीघ्र ही बोनस देने की योजना तैयार की जाएगी। इसके साथ ही खाद्य प्रसंस्करण पर भी जोर दिया जा रहा है। इससे किसानों सहित उद्यमियों को भी लाभ होगा, इंदौर में उद्योग-व्यापार को प्रोत्साहित करने के लिए हर संभव मदद की जाएगी। मध्यप्रदेश देश के मध्य में है, यहां से रोड, रेल और हवाई हर तरह की बहुत अच्छी कनेक्टिविटी है। प्रदेश में एयरकार्गों के विकास की दिशा में प्रयास जारी हैं, जिससे व्यापार व्यावसाय विस्तार को गति मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दाल मिल से संबंधित उद्यमियों, मशीन निर्माताओं, निर्यातकों, व्यापारियों, कृषकों, आदि के साथ राज्य सरकार के प्रतिनिधियों की कार्यशाला शीघ्र ही भोपाल में आयोजित की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में दुनिया में भारत की एक विशिष्ट छवि बनी है। भारत के बजट के आधार पर दुनिया अपनी नीतियां तय करती है। अब समय बदल चुका है। भारत सरकार पर किसी टैरिफ का असर नहीं पड़ता है। प्रधानमंत्री  मोदी के लिए अन्नदाता किसान सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसानों के हितों के साथ सरकार किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगी। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने 4 श्रेणियों- गरीब, अन्नदाता (किसान), युवा और नारी में देश को आर्थिक रूप से सशक्त करने का लक्ष्य रखा है। राज्य सरकार सभी वर्गों के विकास के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने किसान कल्याण के लिए आगामी 5 वर्षों का रोडमैप तैयार किया है। सबको प्रोत्साहन देते हुए 5 साल में राज्य के बजट को 15 प्रतिशत की वृद्धि दर के हिसाब से दोगुना करने का संकल्प लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनकल्याणकारी योजनाओं को लागू करेंगे और राज्य को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाएंगे। उन्होंने कहा कि हमारा प्रदेश, देश में खाद्यान्न उत्पादन में दूसरे स्थान पर हैं। कृषि क्षेत्र में राज्य की जीडीपी 39 प्रतिशत है और हमारी कृषि विकास दर 16 प्रतिशत के आस-पास है। गेहूं, चना, मसूर सहित तिलहन फसलों में मध्यप्रदेश अग्रणी स्थान पर है। मध्यप्रदेश आज डेयरी, पशुपालन, मत्स्य उत्पादन, पुष्प उत्पादन, सब्जी, फल सभी क्षेत्रों में अपनी विशेष पहचान बना रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अन्य राज्यों से कार्यक्रम में आए उद्योगपतियों से कहा कि आप मध्यप्रदेश में उद्योग स्थापित करें। हमारी सरकार जमीन, मशीन और टैक्स कम करने से लेकर सभी प्रकार से सहयोग प्रदान करेगी। प्रदेश की धरती पर सभी निवेशकों का स्वागत है। राज्य सरकार ने लघु-कुटीर उद्योग और एमएसएमई को प्रोत्साहित करने के लिए संभागीय स्तर पर रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव, दूसरे राज्यों में निवेश आकर्षित करने के लिए रोड शो आयोजित किए। औद्योगिक विकास के लिए नई नीतियां लागू कीं। मध्यप्रदेश सरकार ने औद्योगिक प्रोत्साहन के लिए 5500 करोड़ से अधिक राशि डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए उद्यमियों को भी अंतरित की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार उद्योगपतियों को बिजली, पानी और जमीन उपलब्ध करा रही है। इसके अलावा रोजगारपरक उद्योग लगाने पर सरकार उद्यमियों को श्रमिकों के वेतन में सहयोग के लिए 10 साल तक प्रति श्रमिक 5000 रुपए महीना की दर से प्रोत्साहन राशि उपलब्ध करा रही है। राज्य सरकार ने श्रम कानूनों को सरल किया है। इंदौर की हुकुमचंद मिल के मजदूरों की बकाया राशि उन्हें दिलवाई गई है। राज्य सरकार उद्योगपतियों और श्रमिकों सहित सबके साथ हर कदम पर साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष में राज्य सरकार किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाएगी। इसके लिये प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण गतिविधियों को बढ़ाया जा रहा है। साथ ही जिलों में फूड पार्क और नई अनाज मंडियां शुरू करने पर जोर दिया जा रहा है। उद्योगपतियों को फूड पार्क विकसित करने के लिए भी राज्य सरकार सभी सुविधाएं देगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर ने अपने सुशासन और लोक कल्याण से देशभर में ख्याति अर्जित की। उन्होंने मुगलकाल में ध्वस्त … Read more

‘संस्कृति-आधारित सुशासन’ का नया ब्लूप्रिंट बना माघमेला

प्रयागराज. संगम तट आयोजित माघ मेला 2026 ने अब तक के अपने सभी माघ मेलों के आयोजन को पीछे छोड़ दिया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता और सतत निगरानी के चलते इसे मिनी कुंभ जैसी पहचान ही हासिल नहीं हुई बल्कि संस्कृति,  सुशासन, सामाजिक समरसता और आत्मानुशासन की अभिव्यक्ति का यह अद्भुत समागम बन गया।   भारत की ‘संस्कृति-आधारित सुशासन’ संगम नगरी प्रयागराज में पावन त्रिवेणी के तट पर आयोजित माघ मेला 2026 भारत की संस्कृति पर आधारित गवर्नेंस का ऐसा ब्लू प्रिंट बन रहा है जिसका अन्य कहीं कोई उदाहरण देखने को नहीं मिलता। माघ मेला अधिकारी ऋषिराज के अनुसार पौष पूर्णिमा स्नान पर्व के साथ 3 जनवरी से शुरू हुए इस आयोजन के पांच प्रमुख स्नान पर्व सकुशल संपन्न हो जाने के बाद यहां 21 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पावन गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती में पुण्य की डुबकी लगाकर अपना संकल्प पूरा कर चुके हैं। अभी आखिरी स्नान पर्व महा शिवरात्रि शेष है। मेला प्रशासन 15 फरवरी को इसके सकुशल समापन की तैयारी में लगा है। पूर्ण अनुशासन के साथ आस्था का जन सैलाब यहां आया और सनातन की बयार की झलक दिखाकर आगे बढ़ गया।  सामाजिक समरसता, प्रकृति संतुलन और आत्मानुशासन का पर्याय कल्पवास   कुंभ और महाकुंभ को यदि सनातन के 13 अखाड़ों के वैभव का महा आयोजन माना जाता है तो माघ मेला त्रिवेणी की रेती पर एक महीने तक प्रवास करने वाले कल्पवासियों का समागम। इस बार 5 लाख से अधिक कल्पवासियों ने यहां कल्पवास किया जिन्हें प्रशासन की तरफ से हर तरह की सहूलियत मिली। कल्पवासियों को तीर्थ पुरोहित ही अपने तंबुओं से बने शिविरों में बसाते हैं। पहली बार तीर्थ पुरोहितों के लिए अलग से प्रयागवाल नगर बसाया गया। सभी तरह के जाति,  उप-जाति का भेद भुलाकर मां गंगा के पावन जल में स्नान कर इन कल्पवासियों ने अपने संकल्प पूर्ण किए। भीड़ प्रबंधन में दिखा प्रशासन का कौशल, मेला सेवा ऐप बना सारथी माघ मेले के अब तक के इतिहास में इस बार का माघ मेला सबसे अधिक विस्तारित क्षेत्र में बसाया गया। माघ मेला अधिकारी ऋषिराज के अनुसार माघ मेले का इस बार 800 हेक्टेयर तक विस्तार किया गया। मेला क्षेत्र में पहली बार सात सेक्टर और 9 पांटून पुल बनवाए गए। आवागमन सुगम बनाने के लिए मेला क्षेत्र में पहली बार गोल्फ कार्ट सेवा की शुरुआत हुई। बसंत पंचमी तक 35 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने इसकी सेवा ली। इसके अलावा शहर के अलग अलग हिस्सों से श्रद्धालुओं को मेला क्षेत्र पहुंचाने के लिए बाइक टैक्सी सेवा शुरू की गई। माघ पूर्णिमा तक 3 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने इसकी सेवा ली। श्रद्धालुओं की सहूलियत की लिए पहली बार मेला सेवा ऐप का निर्माण किया गया। भीड़ प्रबंधन के लिए 42 पार्किंग बनाई गई। माघ मेला में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए 15 हजार से अधिक पुलिस कर्मी तैनात रहे, मेला क्षेत्र में 500 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के अलावा ड्रोन के जरिए भीड़ की सतत निगरानी होती रही।

आध्यात्मिक मूल्यों के क्षरण से प्रदेश बना था अराजकता का अड्डा

लखनऊ/हरिद्वार  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश में एक समय था, जब विरासत को कोसा जाता था, अपमानित किया जाता था, लांछित किया जाता था। राम भक्तों पर गोलियां चलती थीं, उनका अपमान किया जाता था। लेकिन, यह रामभक्तों का नहीं, भारत की विरासत का अपमान होता था, भारत के आध्यात्मिक मूल्यों का अपमान होता था। इसका परिणाम यह निकला कि उत्तर प्रदेश अराजकता का अड्डा बन गया, लूट का अड्डा बन गया और दंगों की आग में झुलसने लगा। गुंडागर्दी भी चरम पर, ना बेटी सुरक्षित थी और न व्यापारी। हमारी सरकार में विरासत का सम्मान हुआ तो बेटी सुरक्षित हो गई और व्यापारी भी। आज उत्तर प्रदेश देश की दूसरे नंबर की अर्थव्यवस्था के रूप में भी आगे बढ़ रहा है। सीएम योगी शुक्रवार को हरिद्वार में आयोजित स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज की श्री विग्रह मूर्ति स्थापना समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अब उत्तर प्रदेश में न अराजकता है, न फसाद है, न गुंडागर्दी है। न कर्फ्यू है, न दंगा है – यूपी में अब सब चंगा है। दंगा और दंगाई, दोनों गायब हो गए हैं। कर्फ्यू दंगाइयों पर लग गया है। यह इसलिए संभव हुआ क्योंकि नीति स्पष्ट थी, नीयत साफ थी। कोई सोचता था कि  500 वर्षों के बाद अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हो पाएगा? लेकिन, आज भव्य राम मंदिर बन गया। आश्रम से मिला एमबीए का वास्तविक ज्ञान मुख्यमंत्री ने कहा कि लोग अक्सर पूछते हैं कि बिना किसी औपचारिक प्रशासनिक अनुभव के आप उत्तर प्रदेश कैसे चला रहे हैं,  तो मेरा उत्तर होता है कि आश्रम व्यवस्था से जुड़ा हूं। प्रशासन कैसे चलाना है, प्रबंधन कैसे करना है, भारत का संन्यासी आश्रम पद्धति से सीखता है। प्रशासन हमारे संस्कारों व जींस का हिस्सा है। एमबीए की वास्तविक शिक्षा तो भारतीय आश्रम पद्धति से ही मिलती है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश आज अराजकता से निकलकर विकास और सुशासन का मॉडल बनकर उभरा है। भारत की प्रशासनिक, आर्थिक और सांस्कृतिक शक्ति की जड़ें, आश्रम व गुरुकुल परंपरा में हैं। जहां कृषि, खगोल विज्ञान, आयुर्वेद, शिल्प व प्रशासन जैसे विषयों का केवल सैद्धांतिक नहीं, बल्कि व्यावहारिक ज्ञान दिया जाता है। जीवन से जुड़े हर प्रश्न का उत्तर मिलता है।  माघ मेले में अब तक 21 करोड़ श्रद्धालुओं का स्नान सीएम योगी ने बताया कि माघ मेले में अब तक 21 करोड़ से अधिक श्रद्धालु मां गंगा, मां यमुना और मां सरस्वती के त्रिवेणी संगम में डुबकी लगा चुके हैं। यहां पहले केवल अव्यवस्था देखने को मिलती थी, लेकिन आज अयोध्या, काशी, मथुरा-वृंदावन, प्रयागराज, हरिद्वार, बदरीनाथ धाम व केदारनाथ धाम केवल आस्था के केंद्र नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना के केंद्र बने हैं। भारत राष्ट्र यहीं से शक्ति प्राप्त करता है, और जब हमने इन आस्था केंद्रों को सम्मान के साथ आगे बढ़ाया, संरक्षित करने का काम किया, परिणाम भी सामने आया है। लंबे समय तक बीमारू रहा उत्तर प्रदेश आज भारत की अर्थव्यवस्था का ब्रेकथ्रू बनकर लगातार प्रगति पथ पर अग्रसर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मेरा जन्म इसी देवभूमि उत्तराखंड में हुआ है। वर्ष 1982 में भारत माता मंदिर के भव्य लोकार्पण का कार्यक्रम आयोजित हुआ था, जिसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी व सर संघचालक बालासाहब देवरस, दोनों की उपस्थिति रही। यह स्पष्ट करता था कि राष्ट्राध्यक्ष के प्रति हमारा सम्मान सदैव रहेगा, लेकिन मूल्यों के साथ कभी कोई समझौता नहीं होगा। जब देश विपरीत परिस्थितियों से जूझ रहा था, तब पूज्य स्वामी जी महाराज ने भारत माता मंदिर के भव्य निर्माण और उसके लोकार्पण के माध्यम से पूरे देश के सामने आध्यात्मिक नेतृत्व का चिरस्थायी स्मारक समर्पित किया। न जाति का भेद और न धर्म का अंतर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तराखंड के चार धाम भारत की चेतना के आधार हैं। जब हम लोग बचपन में हरिद्वार आते थे, तो सबके मन में यह भाव रहता था कि हरि की पैड़ी में स्नान करना है और भारत माता मंदिर के दर्शन भी करने हैं। यहां न जाति भेद था और न धर्म का कोई अंतर। भारत माता मंदिर में पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक, पूरे भारत का स्वरूप प्रतिबिंबित किया गया। यह उस समय की सबसे ऊंची (हाई-राइज) इमारत भी थी। मेरा सौभाग्य है कि देश के भीतर पिछले 11 वर्षों में हमने व्यापक परिवर्तन देखा है। अयोध्या, काशी, मथुरा, प्रयागराज से लेकर केदारपुरी और बदरीनाथ से हरिद्वार तक, विकास की एक लंबी गाथा विरासत को संजोते हुए बढ़ रही है। यह नए भारत निर्माण की वही गाथा है, जिसका सैकड़ों वर्षों से वर्तमान पीढ़ी को इंतजार था। यह पीढ़ी यह सोच रही थी कि क्या हमारी भावनाओं के अनुरूप भारत का निर्माण हो पा रहा है या नहीं। एक प्रकार की असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। उस असमंजस से उबरने का कार्य पिछले 11 वर्षों में हमने स्पष्ट देखा है। भारत ऋषि परंपरा की तपस्या से निर्मित राष्ट्र मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब हम भारत की बात करते हैं, तो भारत केवल एक भौगोलिक टुकड़ा मात्र नहीं है। भारत ऋषि परंपरा की तपस्या से निर्मित राष्ट्र है। यह किसी सत्ता की उपज नहीं है, बल्कि ऋषि परंपरा की तपस्या से निकली शाश्वत चेतना का केंद्र बिंदु है। भारत का उच्चतम न्यायालय भी इस मंत्र को अंगीकार करता है कि जहां धर्म है, वहीं विजय है। धर्म और विजय का यह शाश्वत स्वरूप हमें यह आभास कराता है कि धर्म कभी कमजोर नहीं होता, बल्कि उसे जानबूझकर कमजोर किया जाता है। इतिहास साक्षी है कि जो राष्ट्र अपनी सभ्यता और संस्कृति की उपेक्षा करता है, वह न तो वर्तमान को सुधार पाता है और न ही भविष्य को सुरक्षित रख पाता है। वैदिक भारत आत्मनिर्भर सभ्यता का प्रतीक रहा है। आक्रांताओं के आने से पहले भारत कोई अविकसित या उपेक्षित भूभाग नहीं था, बल्कि एक पूर्ण विकसित सभ्यता और समृद्ध संस्कृति था। यह राष्ट्र हमारे ऋषियों की तपस्या, किसानों के श्रम और कारीगरों की सृजनशीलता से खड़ा हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2000 वर्ष पहले, जिसे हम भारत का स्वर्ण युग कहते हैं, उस समय विश्व की अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 44 प्रतिशत थी। इसी प्रकार आज से करीब 400 वर्ष पहले भी विश्व … Read more

‘शिक्षकों के ट्रांसफर में कोई भेदभाव नहीं’: शिक्षा मंत्री सुनील कुमार

पटना. बिहार के उन सरकारी शिक्षकों से जुड़ी अच्छी खबर है, जो अपने घर के पास के ही स्कूल में ट्रांसफर के इंतजार में हैं. बिहार सरकार उन्हें उनके घर के नजदीक ट्रांसफर करने की योजना पर तेजी से काम कर रही है. दूर दराज जिलों में सालों से सेवा देने के बाद भी ट्रांसफर नहीं मिलने वाले शिक्षकों को बाकी के शिक्षकों की तरह ही समान अवसर मिलेगा. शिक्षकों के ट्रांसफर पर शिक्षा मंत्री ने क्या कहा? शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने कहा, राज्य में ट्रांसफर को लेकर किसी तरह का भेदभाव नहीं किया जा रहा है. आकांक्षी जिलों (Aspirational District) और पिछड़े इलाकों से शिक्षकों के अपेक्षाकृत कम ट्रांसफर को लेकर उठ रहे सवालों पर उन्होंने कहा कि पूरे बिहार में ट्रांसफर एक समान नीति के तहत किया जा रहा है. आकांक्षी और गैर-आकांक्षी जिलों के बीच किसी प्रकार का फर्क नहीं रखा गया है और सभी शिक्षकों का ट्रांसफर एक ही पॉलिसी के आधार पर हो रहा है. शिक्षा मंत्री ने आरोपों को बताया झूठा शिक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि ऐसे सभी आरोप लगाने वाले पूरी तरह झूठी और निराधार बातें कर रहे हैं. सरकार पारदर्शी तरीके से एक समान नियमों के तहत ट्रांसफर प्रक्रिया चला रही है. आकांक्षी जिलों में टीचरों की कमी के कारण ट्रांसफर में देरी या केंद्र के किसी दिशा निर्देश के कारण भेदभाव जैसी कोई बात नहीं है. BPSC TRE-4 की वैकेंसी पर क्या बोले? बातचीत के दौरान शिक्षा मंत्री ने शिक्षक नियुक्ति को लेकर भी क्लियर जानकारी दी. उन्होंने कहा कि टीआरई-4 का ड्राफ्ट दो दिन पहले ही सामान्य प्रशासन विभाग को भेज दिया गया है. शिक्षा विभाग ने अपनी प्रक्रिया पूरी कर ली है. दरअसल, बीपीएससी के कैलेंडर में टीआरई- 4 का जिक्र नहीं होने की वजह से शिक्षकों का गुस्सा फूट पड़ा था. शिक्षकों ने जमकर हंगामा किया था. लेकिन गुरुवार के जेडीयू के ऑफिशियल एक्स हैंडल से एक पोस्ट शेयर किया गया. जिसमें 44 हजार शिक्षकों की बहाली का एलान किया गया. बीपीएससी की तरफ से अगले महीने विज्ञापन जारी होने का भी जिक्र किया गया.

RPSC अब हर परीक्षा के नंबर करेगा सार्वजनिक

जयपुर. राजस्थान की प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने की दिशा में भजनलाल सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राजस्थान लोक सेवा आयोग ने अब उम्मीदवारों के प्राप्तांकों को लेकर चली आ रही गोपनीयता की दीवार को गिरा दिया है। आयोग ने निर्णय लिया है कि अब हर भर्ती परीक्षा के सफल अभ्यर्थियों के नंबर सार्वजनिक किए जाएंगे। प्रदेश की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित आरएएस (RAS) भर्ती-2023 इस नई व्यवस्था की पहली गवाह बनी है। आयोग ने न केवल परिणाम जारी किए, बल्कि चयनित अभ्यर्थियों के मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू के अंक भी आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दिए हैं। इससे पहले अभ्यर्थियों को अपने व्यक्तिगत अंकों के लिए एक लंबी प्रक्रिया और समय का इंतजार करना पड़ता था। पारदर्शिता कैसे बढ़ाएगा RPSC का फैसला? RPSC सचिव रामनिवास मेहता के अनुसार, आयोग की कार्यप्रणाली में यह बदलाव केवल RAS तक सीमित नहीं रहेगा। भविष्य में होने वाली सभी परीक्षाओं और वर्तमान में प्रक्रियाधीन भर्तियों के अंक भी इसी तरह सार्वजनिक किए जाएंगे। इस निर्णय के पीछे मुख्य उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया में युवाओं का विश्वास बहाल करना और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। अभ्यर्थियों को क्या होंगे सीधे फायदे? अभ्यर्थियों को अब अपनी मेरिट और स्कोर के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। छात्र यह समझ पाएंगे कि वे किस विषय में मजबूत रहे और इंटरव्यू में उनका प्रदर्शन कैसा रहा। नंबर सार्वजनिक होने से चयन प्रक्रिया पर उठने वाले सवालों और आशंकाओं पर विराम लगेगा। आयोग अब सिर्फ कट-ऑफ नहीं बताएगा, बल्कि हर सफल उम्मीदवार की मेहनत का पूरा हिसाब (मार्क्स) वेबसाइट पर देगा। स्टूडेंट्स को अब क्या ध्यान रखना चाहिए? शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस मार्कशीट के बाद अब उम्मीद जगी है कि RPSC उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन और आंसर-की विवादों को सुलझाने के लिए भी कुछ ऐसे ही कड़े और पारदर्शी कदम उठाएगा।