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बिहार में बनेगा पहला शिव कॉरिडोर, गंगा की धारा मोड़ने की योजना, उज्जैन-वाराणसी मॉडल पर आधारित

भागलपुर.  सुल्तानगंज में बिहार का पहला शिव कॉरिडोर बनने का मार्ग अब पूरी तरह से साफ हो गया है. लंबे समय से अटकी यह योजना अब भूमि समस्याओं से मुक्त होने के बाद आगे बढ़ने वाली है. भूमि विवाद के कारण लंबे समय से अटकी शिव कॉरिडोर योजना को प्रशासन और रेलवे के बीच जमीन एक्सचेंज के फैसले ने नई गति दी है. गंगा तट पर प्रस्तावित कॉरिडोर, धर्मशाला और श्रद्धालु सुविधाओं के लिए जरूरी जमीन रेलवे की थी. अब जिला प्रशासन ने बदले में रेलवे को तीन अलग-अलग स्थानों पर जमीन देने का निर्णय लिया है, जिससे निर्माण का रास्ता पूरी तरह खुल गया है. जानकार कहते हैं कि श्रावणी मेले में कांवरियों को बेहतर सुविधा, सुरक्षा और सुव्यवस्था मिलेगी. यह परियोजना सुल्तानगंज की पहचान को नई ऊंचाई देने वाली साबित हो सकती है. पुराने विवाद का ऐसे हुआ समाधान प्रशासन और रेलवे के बीच भूमि आदान-प्रदान का निर्णय होने से अब कॉरिडोर निर्माण की प्रक्रिया शुरू होने वाली है. गंगा किनारे सुल्तानगंज के प्रसिद्ध अजगैवीनाथ मंदिर के पास बनना प्रस्तावित शिव कॉरिडोर, धर्मशाला और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए चिन्हित जमीन रेलवे की थी. इसी वजह से प्रशासन लंबे समय से कॉरिडोर निर्माण के लिए आगे नहीं बढ़ पा रहा था. अब जिला प्रशासन ने भूमि एक्सचेंज नीति के तहत रेलवे को उनकी जमीन के बदले अन्य जगह की जमीन देने का निर्णय लिया है, जिससे भूमि प्राप्ति की बाधा दूर हो जाएगी. प्रशासन की योजना है कि यह जमीन देने का प्रस्ताव जल्द ही राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को भेज दिया जाए और विभागीय मंजूरी के बाद औपचारिक भूमिस्थानांतरण (लैंड एक्सचेंज) शुरू किया जाएगा. रेलवे को कौन-सी जमीन मिलेगी? भारतीय रेलवे की लगभग 17 एकड़ 47.625 डिसमिल जमीन के बदले में प्रशासन तीन अलग-अलग स्थानों पर जमीन देने वाला है. जगदीशपुर हॉल्ट के पास 18.98 एकड़, बरारी के निकट 0.6 डिसमिल और सुल्तानगंज में एनएच के आईबी के पास 0.7 एकड़. इन तीन स्थानों की जमीन देकर रेलवे से मूल जगह की जमीन खाली करवाई जाएगी, ताकि कॉरिडोर और उसके आसपास की सुविधाओं का निर्माण संभव हो सके. विभागीय मंजूरी के बाद निर्माण शुरू शिव कॉरिडोर के निर्माण को औपचारिक रूप से शुरू करने के लिए जिला समाहर्ता ने राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव को नि:शुल्क भू-स्थानांतरण का पत्र भेज दिया है. इसके बाद विभाग की मंजूरी मिलेगी और फिर भूमि एक्सचेंज की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. प्रक्रिया पूरी होने के बाद, सुल्तानगंज में भी उज्जैन और वाराणसी की तरह शिव कॉरिडोर का निर्माण संभव हो जाएगा, जिसका लंबे समय से स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं को इंतजार था. गंगा की धारा मोड़ने का काम भी जारी शिव कॉरिडोर के साथ-साथ सुल्तानगंज में गंगा नदी की पुरानी धारा को पुरानी सीढ़ी घाट की ओर मोड़ने की योजना पर भी काम चल रहा है. जल संसाधन विभाग बड़ी परियोजना के तहत अरबों रुपये की लागत से इस कार्य को आगे बढ़ा रहा है. इस योजना के पूरा होने पर गंगा नदी का बहाव पुराने रास्ते की ओर हो जाएगा और श्रावणी मेला के दौरान कांवरियों को उत्तरवाहिनी गंगा में स्नान का सुरक्षित स्थान सीधे पुरानी सीढ़ी घाट के पास मिलेगा. यह बदलाव श्रद्धालुओं के लिए राहत की बात माना जा रहा है. सुल्तानगंज की बदलती पहचान जानकारों का मानना है कि शिव कॉरिडोर सिर्फ एक धार्मिक स्थल का विस्तार नहीं होगा, बल्कि यह सुल्तानगंज की पहचान को बदलने वाली परियोजना साबित होगी. उज्जैन और वाराणसी की तर्ज पर विकसित यह कॉरिडोर यहां के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगा. इससे न सिर्फ श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी. कॉरिडोर के बनने से श्रद्धालुओं को और सुविधाएं, बेहतर प्रबंध और सुरक्षा मिलेगी जिससे सुल्तानगंज धार्मिक मानचित्र पर एक नई ऊंचाई हासिल कर सकता है. क्या आगे का काम होगा? अब सिर्फ विभागीय मंजूरी और भूमि एक्सचेंज की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार है. मंजूरी मिलते ही भूमि की अदला-बदली और कॉरिडोर के निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठेंगे. स्थानीय प्रशासन और योजना प्राधिकरण के अनुसार यह परियोजना सुल्तानगंज को धार्मिक पर्यटन और संस्कृति के केंद्र के रूप में एक नया चेहरा देगा. शिव कॉरिडोर के निर्माण और गंगा की धारा मोड़ने की योजना के पूरा होने से सुल्तानगंज सिर्फ एक धार्मिक नगर नहीं, बल्कि बड़ा आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र बनेगा.

राजस्थान पुलिस ने लिया कड़ा कदम, अपराधियों की फोटो मीडिया और सोशल मीडिया पर सार्वजनिक करने पर रोक

 जयपुर  राजस्थान पुलिस ने गिरफ्तार किए गए आरोपियों की निजता और उनके मानवीय अधिकारों को लेकर एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (अपराध शाखा), डॉ. हवा सिंह घुमरिया ने एक नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी करते हुए प्रदेश के सभी पुलिस कमिश्नर और जिला पुलिस अधीक्षकों को सख्त निर्देश दिए हैं कि किसी भी अभियुक्त की फोटो या वीडियो अब सार्वजनिक नहीं करेंगे। यह निर्णय राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर द्वारा  दिए गए एक आदेश की अनुपालना में लिया गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत हर व्यक्ति को गरिमा के साथ जीने का अधिकार है। पुलिस के अनुसार, "अभियुक्त केवल आरोपित होता है, दोषी नहीं", इसलिए गिरफ्तारी के बाद उसकी निजता को भंग करना कानून सम्मत नहीं है। नए दिशा-निर्देशों की मुख्य बातें : सोशल मीडिया पर पाबंदी : पुलिस अब किसी भी आरोपी की फोटो या वीडियो अपने आधिकारिक या अनौपचारिक सोशल मीडिया हैंडल पर अपलोड नहीं कर सकेगी। मीडिया ट्रायल पर रोक : प्रेस ब्रीफिंग के दौरान आरोपी को अपमानजनक स्थिति में पेश नहीं किया जाएगा। पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि वे ऐसी किसी भी गतिविधि को बढ़ावा न दें जिससे 'मीडिया ट्रायल' की स्थिति पैदा हो। मर्यादित शब्दावली : पुलिस ब्रीफिंग के दौरान अभियुक्तों के लिए उपयोग किए जाने वाले शब्दों में गरिमा और सावधानी बरतनी होगी। विशेष संवेदनशीलता : महिलाओं, बुजुर्गों और कमजोर वर्ग के आरोपितों के साथ व्यवहार के दौरान विशेष संवेदनशीलता रखने के निर्देश दिए गए हैं। सुरक्षित हिरासत और सभ्य व्यवहार SOP में यह भी कहा गया है कि अभियुक्त को बैठाने, ले जाने और हिरासत में रखने की व्यवस्था सुरक्षित और सभ्य होनी चाहिए। पुलिस अब किसी भी आरोपी को सार्वजनिक रूप से अपमानित या अपराधी की तरह प्रदर्शित नहीं कर पाएगी। यह आदेश तत्काल प्रभाव से पूरे राजस्थान में लागू कर दिया गया है। इसकी प्रतियां महानिदेशक पुलिस (DGP) सहित सभी महत्वपूर्ण विभागों को भेज दी गई हैं ताकि इन नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जा सके।

स्टेट टाइगर सेल की बैठक में वन्यजीव अपराधों को रोकने के लिए साझा की जाएंगी जानकारी

 भोपाल  वन्यजीव अपराध पर सख्ती के लिए विभिन्न विभागों और एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में अहम कदम उठाया गया है। स्टेट टाइगर सेल की तीन साल बाद हुई बैठक में तय किया गया कि अपराधियों को पकड़ने, मामलों के त्वरित निराकरण और डिजिटल निगरानी को मजबूत करने के लिए सभी एजेंसियां मिलकर काम करेंगी। बैठक में तय हुआ कि वन्यजीव अपराधियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए विभिन्न विभाग आपस में सूचनाएं साझा करेंगे। हॉट स्पॉट की जानकारी वन विभाग पुलिस को देगा, ताकि त्वरित कार्रवाई संभव हो सके। रेलवे सुरक्षा बल, जीआरपी और वन विभाग के स्वान दस्ते की संयुक्त गश्त भी शुरू की जाएगी। न्यायिक प्रक्रिया को तेज करने पर जोर न्यायालय में लंबित मामलों की समीक्षा कर उनके शीघ्र निपटारे के प्रयास किए जाएंगे। जरूरत पड़ने पर आरोपितों के खिलाफ आर्म्स एक्ट, आईटी एक्ट और बीएएनएस के तहत भी कार्रवाई की जाएगी। फरार वारंटियों की गिरफ्तारी के लिए भी सभी एजेंसियां सहयोग करेंगी। संयुक्त प्रशिक्षण और पुनर्गठन वन अमले की क्षमता बढ़ाने के लिए विभिन्न विभागों के साथ संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। राज्य, संभागीय और जिला स्तर पर स्टेट टाइगर सेल को प्रभावी बनाने और पुनर्गठन के लिए राजस्व विभाग को भी शामिल करने का निर्णय लिया गया। डिजिटल निगरानी और पर्यटन ठगी पर कार्रवाई वन्यजीव से जुड़े मामलों में डिजिटल निगरानी बढ़ाने, ऑनलाइन बुकिंग से जुड़ी ठगी रोकने और टाइगर रिजर्व में पारदर्शिता लाने पर चर्चा हुई। सभी एजेंसियां अपना खुफिया तंत्र मजबूत करेंगी। बैठक में शामिल एजेंसियां यह बैठक विशेष पुलिस महानिदेशक एसटीएफ पंकज श्रीवास्तव की अध्यक्षता में वन भवन में हुई। इसमें वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो, साइबर पुलिस, डीआरआई, सीबीआई, कस्टम, इंटेलिजेंस ब्यूरो, एनटीसीए, स्टेट फॉरेंसिक साइंस, ईडी सहित कई एजेंसियों के अधिकारी मौजूद रहे।

मध्यप्रदेश में नगर निकायों की संख्या बढ़ेगी, गांवों को शहर बनाने की योजना

धार  धार जिले में नगरीय क्षेत्रों की संख्या नगर निकाय (Urban Bodies Expansion) स्थापित करके बढ़ाई जाने की कवायद शुरू हो गई है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मांग पर जिले की अलग-अलग विधानसभाओं के बड़े ग्राम पंचायत क्षेत्रों को नगर पंचायत (Nagar Panchayat) बनाने के लिए जनपद कार्यालयों से 9 बिंदुओं पर आधारित जानकारी प्रस्ताव बनाकर देने के लिए कहा गया है। बड़ी ग्राम पंचायतों को नगर पंचायत बनाने की मांग स्थानीय भाजपा नेताओं द्वारा उठाई गई है। यह सभी मांग पत्र सीएम डॉ. मोहन यादव (CM Mohan Yadav) को सौंपे गए थे। सीधे आवेदन सौंपने का असर यह हुआ कि इस मामले में जिला शहरी विकास अभिकरण द्वारा अलग अलग क्षेत्रों के राजस्व अधिकारियों को पत्र जारी करके जनपदों के माध्यम से प्रस्ताव तैयार करवाने के लिए लिखा गया है। जनपदों से प्राप्त प्रस्तावों पर स्पष्ट अभिमत स्वीकृति के लिए आता है तो ग्राम विकास को गति मिलेगी। नगर परिषदें में तब्दील होने के बाद उसके अनुरुप सुविधाएं और व्यवस्थाएं तय होगी। बदनावर को नगर पालिका बनाने की मांग बदनावर विधानसभा क्षेत्र में पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क बनने के बाद से तेजी से विकास मॉडल के रूप में विकसित हो रहा है। यहां की नगर पंचायत को अब नगर पालिका बनाने की मांग उठी है। नगर पालिका अध्यक्ष द्वारा सीएम डॉ. यादव को मांग पत्र सौंपा गया था। इस मामले में भी सीएमओ बदनावर को मप्र राजपत्र असाधारण 2011 में प्रकाशित अधिसूचना के अनुसार एवं मप्र नगर पालिका अधिनियम की धारा 5 के प्रावधानों के तहत जरूरी जानकारी जुटाकर प्रस्ताव तैयार करने के लिए कहा है। सब कुछ ठीक रहा तो बदनावर नगर पंचायत से नगर पालिका में तब्दील होगी और विकास के लिए राशि सहित सुविधाओं में बढ़ोतरी होगी। सरदापुर में सर्वाधिक नगर पंचायत के प्रस्ताव सरदारपुर विधानसभा के बड़े ग्रामीण क्षेत्रों की बड़ी ग्राम पंचायतों को नगर पंचायत बनाने की मांग भाजपा नेताओं द्वारा की गई थी। पूर्व विधायक मुकामसिंह निगवाल ने ग्राम पंचायत दसई, ग्राम पंचायत राजीद को नगर पंचायत क्षेत्र बनाने की मांग की थी। इस मामले में भी अनुविभागीय अधिकारियों को जनपदों के माध्यम से प्रस्ताव तैयार करने के लिए कहा गया है। इसमें ग्राम पंचायत को दर्शाते हुए प्रस्तावित नगर परिषद् का मानचित्र, आपस में दूरिया सहित राजस्व मानचित्र पर चिहिनत कर संपूर्ण जानकारी का प्रस्ताव स्पष्ट अभिमत के साथ तैयार करने के लिए कहा गया है। इसमें ग्राम पंचायत अमझेरा को स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा नगर पंचायत बनाने की मांग का प्रस्ताव भी शामिल है। मंत्री की मांग पर केसूर भी शामिल बदनावर विधानसभा की ग्राम पंचायत केसूर को नगर परिषद् बनाने की मांग केन्द्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर द्वारा पत्र के माध्यम से सीएम से की गई थी। इस मामले में प्रस्ताव तैयार करने के लिए कहा गया है। इसी तरह सिंधाना और गंधवानी को भी नगर पंचायत बनाने के प्रस्ताव तैयार करने के साथ अभिमत देने के लिए स्थानीय जनपदों को निर्देशित किया गया है।  प्रस्ताव मांगे है… मुख्यमंत्री को सौंपे जनप्रतिनिधियों के मांग पत्र के आधार पर अनुविभागीय अधिकारियों को जनपदों के माध्यम से प्रस्ताव और अभिमत देने के लिए कहा है। यह रिपोर्ट आने के बाद उसके आधार पर आगे की कार्रवाई के लिए प्रक्रिया शुरू होगी।-विश्वनाथ सिंह, प्रभारी डूडा अधिकारी धार

बेटी को मिलेगा माता-पिता की पेंशन में अधिकार, नए नियम जल्द होंगे लागू

भोपाल  मध्य प्रदेश में अब बेटी को माता-पिता पेंशन की पेंशन में अधिकार मिलेगा। ये नियम प्रदेशभर में 01 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो जाएंगे। राज्य सरकार पेंशन नियमों में पहली बार बड़े संशोधन करने जा रही है। प्रस्ताव तैयार किए जाने के बाद कैबिनेट में आने का इंतजार है। दरअसल, प्रस्तावित नियमों गौर करें तो भले ही घर में बेटा हो, लेकिन अगर बेटी उससे बड़ी है तो वही परिवार पेंशन की पात्र होगी। अविवाहित पुत्री/विधवा और तलाकशुदा पुत्री को आजीवन पेंशन मिलती रहेगी। आजीविका कमाने में पूरी तरह से अक्षम दिव्यांग पुत्र/पुत्री/भाई को भी पेंशन की पात्रता होगी। ये नए पेंशन नियम 1 अप्रैल से लागू होंगे। नए नियमों में दिव्यांगजनों का भी विशेष ध्यान रखा गया है। जो पुत्र, पुत्री या भाई आजीविका कमाने में पूरी तरह से अक्षम हैं, उन्हें भी परिवार पेंशन की पात्रता दी जाएगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी आश्रित को आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े। मौजूदा व्यवस्था के अनुसार, पेंशन सेवानिवृत्त कर्मचारी को जीवनभर मिलती है। ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) में यह अंतिम वेतन का 50 प्रतिशत होती है, जबकि एनपीएस में एन्युटी के आधार पर पेंशन तय होती है। वहीं यूपीएस में निश्चित पेंशन का प्रावधान है। कर्मचारी की मृत्यु के बाद परिवार पेंशन पहले पत्नी को और पति-पत्नी दोनों के निधन के बाद अवयस्क बच्चों को मिलती है। नए पेंशन नियम लागू होने के बाद बेटियों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी और उन्हें परिवार में बराबरी का अधिकार मिलेगा। सरकार का यह फैसला महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है। 1 अप्रैल से होंगे लागू  इसके अलावा अविवाहित बेटी, विधवा या फिर तलाकशुदा बेटी को भी आजीवन पेंशन मिलने की योजना रहेगी. वहीं अपना जीवन यापन न कर पाने वाले अक्षम दिव्यांग बेटे-बेटी या भाई को भी पेंशन की पात्रता दी जाएगी. नए पेंशन नियम 1 अप्रैल से लागू किए जाने की संभावना है. यानि यह योजना नए वित्त वर्ष में लागू होगी, बता दें कि पेंशन सेवानिवृत्त कर्मचारी को जीवनभर के लिए मिलती है, जबकि ओल्ड पेंशन स्कीम में आखिरी सैलरी का 50 प्रतिशत हिस्सा एनपीएस में एन्युटी के आधार पर और यूपीएस में निश्चित पेंशन की पात्रता है जो कि अंतिम एन्युटी के आधार पर बनती है. जहां अगर कर्मचारी की मौत होती है तो फिर उसकी पेंशन उसकी पत्नी को दी जाती है, जो 30 प्रतिशत होती है. ऐसे में अब यह बदलाव होगा कि अगर पति-पत्नी दोनों की मौत होती है तो इस स्थिति में पेंशन पर उनकी बड़ी संतान का अधिकार होगा, जिसमें अव्यस्क बच्चा भी शामिल होगा.  यह भी होगा बदलाव  वहीं शादी के बाद भी बड़ी बेटी या फिर बड़े बेटे को पेंशन ट्रांसफर की जाएगी. अगर कोई पति पत्नी दोनों पेंशन स्कीम के तहत आते हैं, यानि दोनों की सरकारी नौकरी होगी और उन्हें पेंशन मिलता है तो उनकी मौत के बाद इसका अधिकार दोनों की फैमिली को मिलेगा. वहीं 25 साल से ज्यादा उम्र की बेटी या बेटे को हर साल यह भी बताना होगा कि वह अविवाहित या फिर विधवा है, यानि पूरी जानकारी के बाद ही वह पेंशन के नियमों में पात्रता रखेंगे.  कैबिनेट बैठक में पास होगा प्रस्ताव  बताया जा रहा है कि जल्द ही यह प्रस्ताव कैबिनेट बैठक में भी पास होगा. सीएम मोहन यादव के विदेश दौरे से लौटने के बाद कैबिनेट की बैठक में पेंशन नियमों में बदलाव का प्रस्ताव पास होगा, जबकि इसे नए वित्त वर्ष में लागू किया जाएगा. इसके लिए वित्त विभाग की तरफ से काम शुरू हो गया है. जबकि नए बजट में इसका प्रावधान भी कर दिया जाएगा.   अव्यस्क बच्चों को पेंशन की पात्रता बता दें कि, पेंशन सेवानिवृत्त कर्मचारी को जीवनभर मिलती है, जो ओल्ड पेंशन स्कीम में अंतिम वेतन का 50 प्रतिशत है। एनपीएस में एन्युटी के आधार पर और यूपीएस में निश्चित पेंशन की पात्रता है। परिवार पेंशन कर्मचारी की मृत्यु के बाद पत्नी को पति और पत्नी दोनों की मृत्यु के बाद अव्यस्क बच्चों को पेंशन की पात्रता होती है।

PWD ने 40 हजार किमी सड़कों का सेफ्टी ऑडिट कराया, सड़क हादसों पर नियंत्रण के लिए प्रशासन की अहम शुरुआत

भोपाल  एमपी में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) पहली बार सड़कों का अनिवार्य रूप से रोड सेफ्टी ऑडिट करवाने जा रही है। एनएचएआइ के एक्सप्रेस-वे की तर्ज पर पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा निर्मित स्टेट हाई-वे सहित अन्य जिला मार्ग और मुख्य जिला मार्ग की सड़कों का रोड सेफ्टी ऑडिट किया जाएगा। जिसमें सड़कों को सुरक्षा के दृष्टिकोण से विभिन्न मापदंडों में परखा जाएगा। सुरक्षा के मापदंडों पर होगी परख प्री-डिजाइन स्टेज से लेकर कंस्ट्रक्शन तक सेफ्टी का ऑडिट विभिन्न चरणों में किया जाएगा। उसके बाद सड़क की शुरुआत होने के बाद भी उसे सुरक्षा के मापदंडों पर फिर परखा जाएगा। जहां कमी सामने आएगी उसको दोबारा दुरुस्त किया जाएगा। ऑडिट के दौरान जो सड़कें विभाग द्वारा बनाई गई हैं उनकी खामियों को सुरक्षा कारणों के तहत चिह्नित किया जा रहा है।  40 हजार किमी सड़कों का कराया ऑडिट PWD विभाग द्वारा बनाई गई प्रमुख मौजूदा सड़कों का भी विभाग द्वारा सेफ्टी ऑडिट करवाया गया। जिसमें प्रमुख रूप से 441 खामियां पाई गई हैं। इनमें से करीब 200 खामियां ऐसी थीं, जिनमें थोड़े बहुत सुधार की आवश्यकता रही। जिन्हें ठीक कर दिया गया। वहीं 200 से ज्यादा ऐसी भी गलतियां चिह्नित की गईं जिनमें कंस्ट्रक्शन से जुड़ा काम करना था। जैसे अंधा मोड़, क्यूकल अंडर पास और सेफ क्रॉसिंग का निर्माण करना, जिस पर भी विभाग द्वारा लगभग काम पूरा कर लिया गया है। सड़क हादसों को रोकने की दिशा में यह बड़ी पहल साबित होगी। तकनीकी खामी के कारण नहीं होगी दुर्घटना इसलिए रोड सेफ्टी ऑडिट पर विभाग का जोर रोड सेफ्टी ऑडिट से सड़क पर किसी तकनीकी खामी के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को कम किया जा सकता है। इसमें सड़क की डिजाइन, साइन बोर्ड, रोशनी, गति नियंत्रण, पैदल यात्रियों व साइकिल चालकों की सुरक्षा और ब्लैक स्पॉट्स का आकलन किया जाता है।  कई बार सड़कें बनने के बाद छोटी-छोटी खामियां बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बन जाती हैं, जिन्हें ऑडिट के जरिए सुधारा जा सकता है। यह प्रक्रिया नई सड़कों के निर्माण से पहले, निर्माण के दौरान और उपयोग में आने के बाद भी की जाती है। तीन चरणों में ऐसे होगा सेफ्टी ऑडिट 1. प्री-डिजाइन स्टेज -सड़क की आवश्यकता और स्थान का अवलोकन – ट्रैफिक वॉल्यूम-वाहन के प्रकार – स्कूल, अस्पताल और बाजार जैसे प्वॉइंट का चयन। 2. डिजाइन स्टेज -रोड चौड़ाई, -कर्व, ग्रेड और जंक्शन डिजाइन -फुटपाथ, स्टॉप और अन्य ट्रैक -ड्रेनेज, लाइटिंग, साइन बोर्ड और मार्किंग -कंस्ट्रक्शन स्टेज वर्क जोन सेफ्टी – बैरिकेडिंग और डायवर्जन – रात की विजिबिलिटी और चेतावनी संकेत प्री-ओपनिंग – सड़क खोलने से पहले निरीक्षण – सभी साइन, मार्किंग और स्पीड ब्रेकर की जांच – ब्लैक स्पॉट की पहचान पोस्ट-ओपनिंग – दुर्घटना डेटा का विश्लेषण – ट्रैफिक का अध्ययन – सुधारात्मक उपाय

प्रदेश में दूध और डेयरी उत्पादों की शुद्धता जांचने के लिए बनाई गई हाईटेक डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला

भोपाल  दूध और दूध से जुड़े डेयरी प्रोडक्ट्स की शुद्धता जांचने के लिए प्रदेश में पहली बार हाईटेक राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला की स्थापना की जा रही है। केन्द्र सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग की नेशनल प्रोग्राम फॉर डेयरी डेवलपमेंट परियोजना द्वारा स्वीकृत यह लैब राज्य की पहली प्रयोगशाला होगी, जहां दूध और दुग्ध उत्पादों की जांच हो सकेगी। भारत सरकार ने दिया 12.40 करोड़ का अनुदान प्रयोगशाला के निर्माण के लिए भारत सरकार ने 12.40 करोड़ का अनुदान दिया है। इसके अंतर्गत अत्याधुनिक सात मशीनों की खरीदी पूरी हो चुकी है, शेष की खरीदी प्रक्रिया जारी है। MP की इस हाइटेक प्रयोगशाला में दूध एवं दुग्ध पदार्थों की 100 से अधिक मानकों पर जांच की जाएगी। इसमें पेस्टिसाइड्स, एंटीबायोटि‚स, हेवी मेटल्स जैसी कई जांच हो सकेंगी। राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला में आम उपभोक्ता भी दूध एवं दुग्ध उत्पादों की जांच करा सकेंगे। यदि आपके घर में आने वाले दूध या उससे बने उत्पादों में मिलावट की आशंका है, तो अब जांच के लिए भटकना नहीं पड़ेगा, जहां आम उपभोक्ता के साथ देश एवं प्रदेश की खाद्य उत्पादक संस्थाएं भी दूध और दुग्ध उत्पादों का परीक्षण करा सकेंगी। उपभोक्ताओं को मिलेगा शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण दुग्ध उत्पाद परियोजना का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं की अपेक्षाओं के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाला दूध एवं दुग्ध उत्पाद उचित मूल्य पर उपलब्ध कराना तथा खाद्य सुरक्षा मानकों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। प्रदेश में अब तक दूध एवं दुग्ध उत्पादों की जांच एक बड़ी चुनौती रही है, जिसे ध्यान में रखते हुए यह अत्याधुनिक प्रयोगशाला स्थापित की जा रही है। NABL और FSSAI से मान्यता प्राप्त होगी प्रयोगशाला यह प्रयोगशाला केंद्र शासन के मार्गदर्शन एवं वित्तीय सहयोग से स्थापित की जा रही है, जिसे (नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज) तथा (भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) से मान्यता प्राप्त होगी। अत्याधुनिक मशीनें स्थापित प्रयोगशाला के निर्माण के लिये भारत सरकार द्वारा 12 करोड़ 40 लाख रुपये का अनुदान दिया गया है। इसके अंतर्गत अत्याधुनिक सात मशीनों की खरीदी पूरी हो चुकी है, जबकि शेष मशीनों, केमिकल्स एवं ग्लासवेयर की खरीदी प्रक्रिया जारी है। शीघ्र ही दूध एवं दुग्ध पदार्थों के परीक्षण का कार्य प्रारंभ किया जाएगा। 100 से अधिक मानकों पर होगा परीक्षण राज्य स्तरीय केन्द्रीय प्रयोगशाला में अत्याधुनिक उपकरणों के माध्यम से दूध एवं दुग्ध पदार्थों की 100 से अधिक मानकों पर जांच की जाएगी। इसमें पेस्टिसाइड्स, एंटीबायोटिक्स, हेवी मेटल्स, अफ्लाटॉक्सिन, वसा की शुद्धता, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट के साथ-साथ यूरिया, आयोडीन, माल्टोज, शुगर, नमक एवं अन्य प्रकार की मिलावटों की जांच शामिल होगी। आम उपभोक्ता और खाद्य उत्पादक संस्थाओं को सीधा लाभ इस प्रयोगशाला की सुविधा आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ देश की विभिन्न खाद्य उत्पादक संस्थाओं को भी उपलब्ध होगी। इसके स्थापित होने से दूध एवं दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार होगा, शुद्धता के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और प्रदेश के उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। देशभर की संस्थाओं को मिलेगा लाभ मिलावट की आशंका पर शुद्धता जांचने के लिए लैब का इस्तेमाल आम आदमी से लेकर देश एवं प्रदेश की खाद्य उत्पादक संस्थाएं कर सकेंगी। यह प्रयोगशाला केंद्र शासन के वियीय सहयोग से स्थापित की जा रही है, जिसे (नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज) तथा (भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) से मान्यता प्राप्त होगी।

25 जनवरी से लोकभवन होगा आमजनों के लिए खोल दिया गया

लोकभवन 25 जनवरी से आमजनों के लिए खुलेगा कुशाभाऊ ठाकरे सभागार परिसर में होगी पार्किंग, प्रवेश गेट नंबर 1 से भोपाल  राज्यपाल मंगुभाई पटेल के निर्देशानुसार लोकतंत्र के महापर्व गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर 25 जनवरी से लोकभवन आमजनों के लिए खोला जा रहा है। नागरिक 25 जनवरी से 27 जनवरी 2026 तक निर्धारित समयावधि में लोकभवन का भ्रमण कर सकेंगे। राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी ने बताया कि लोकभवन 25 जनवरी एवं 27 जनवरी 2026 को दोपहर 2 बजे से सायं 8 बजे तक आम नागरिकों के लिए खुला रहेगा। 26 जनवरी 2026 गणतंत्र दिवस के दिन, लोकभवन भ्रमण का समय प्रातः 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक निर्धारित किया गया है। उन्होंने बताया कि लोकभवन भ्रमण के लिए आने वाले नागरिक कुशाभाऊ ठाकरे सभागार परिसर में वाहन पार्किंग कर सकेंगे। लोकभवन में प्रवेश गेट क्रमांक-1 से होगा और निकास गेट क्रमांक- 4 से होगा। भ्रमण के समस्त रूट में आमजन लोकभवन की ऐतिहासिकता, सजावट और प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगे। राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी ने बताया कि इस अवसर पर केन्द्रीय संचार ब्यूरो द्वारा “वीबी-जी रामजी योजना तथा वंदे भारत थीम” पर आधारित विशेष आकर्षक प्रदर्शनी लगाई जाएगी। तीनों दिन केन्द्रीय संचार ब्यूरों के सांस्कृतिक दलों द्वारा विभिन्न प्रस्तुतियां दी जाएंगी। इसी प्रकार मध्यप्रदेश शासन के जनसंपर्क विभाग द्वारा “राजभवन से लोकभवन” विषय पर विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा, जिसमें लोकभवन की ऐतिहासिक, लोकतांत्रिक और प्रशासनिक यात्रा को रोचक रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। साथ ही लघु फिल्मों का प्रदर्शन भी किया जाएगा।  

1.90 करोड़ की ठगी में BJP नेता गिरफ्तार, आलीशान लाइफस्टाइल देख दंग पुलिस

चंडीगढ़ अंबाला कैंट में करोड़ों रुपये की ठगी के मामले में रेलवे पुलिस (GRP) को बड़ी सफलता मिली है। अंबाला जीआरपी और बिहार एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई में ठगी के एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया गया है। टीम ने बिहार के समस्तीपुर जिले में छापेमारी कर भाजपा के पूर्व जिला प्रवक्ता पंकज कुमार लाल समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। छापेमारी के दौरान पुलिस को आरोपियों की आलीशान कोठी, महंगी गाड़ियां और भारी मात्रा में नकदी व जेवरात मिले, जिससे ठगी के बड़े नेटवर्क की पुष्टि हुई है। क्या है पूरा मामला दरअसल, पंजाब निवासी जोशी नामक व्यक्ति ने अंबाला कैंट जीआरपी थाना में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उनसे 1 करोड़ 90 लाख रुपये ठगने का आरोप लगाया गया है। शिकायत में बताया गया है कि रुपये डबल करने और कर्ज की रकम पर भारी मुनाफा दिलाने का झांसा दिया गया था। वहीं जांच के दौरान समस्तीपुर जिले के दलसिंहसराय थाना क्षेत्र निवासी पंकज कुमार लाल और उसके साथियों की संलिप्तता सामने आई। इसके बाद जीआरपी प्रभारी हरीश कुमार के नेतृत्व में विशेष टीम का गठन किया गया और फिर बिहार के दलसिंहसराय अनुमंडल के अजनौल गांव में छापेमारी की गई। इस दौरान मुख्य आरोपी पंकज कुमार लाल के साथ उसके दो सहयोगियों कौशल और रजनीश को गिरफ्तार किया गया। बताया जा रहा है कि पंकज कुमार लाल पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड था तो वहीं कौशल और रजनीश भोले-भाले लोगों को झांसे में फंसाते थे।   करोड़ों की संपत्ति और लग्जरी कार बरामद यह कार्रवाई जाली नोट डबलिंग रैकेट से जुड़े एक मामले में की गई है। छापेमारी के दौरान पुलिस ने 6 लाख रुपये नकद, करीब 30 लाख रुपए के सोने के आभूषण और एक सफेद रंग की लग्जरी इनोवा कार बरामद की है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि पूछताछ के दौरान इस गिरोह से जुड़े कई अन्य बड़े नामों और देश के विभिन्न हिस्सों में की गई ठगी की वारदातों का खुलासा हो सकता है।

भयानक हत्या का खुलासा: चार अपराधियों को उम्रकैद, शिकार का शव निर्मम तरीके से प्रदर्शित

पटना बिहार के रोहतास जिले में प्रेम-प्रसंग में हुई एक बेहद नृशंस हत्या के मामले में अदालत ने सात साल बाद कड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मन्नू कुमार हत्याकांड में चार आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा दी है। अदालत ने सभी दोषियों पर 5,000-5,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। मृतक की प्रेमिका और उसके परिजन दोषी दरअसल, यह फैसला जिला जज-IV अनिल कुमार की अदालत ने सुनाया है। जिन लोगों को सजा मिली है, उनमें मृतक की प्रेमिका सुमन देवी उर्फ चुमन देवी, उसका पति प्रभाकर सिंह उर्फ प्रकाश चौधरी, उसका भाई फूलचंद और पिता दुधेश्वर चौधरी शामिल हैं। कोर्ट ने इस वारदात को ऑनर किलिंग से जुड़ा, पूर्व नियोजित और अत्यंत क्रूर अपराध बताया। फोन कर बुलाया गया, फिर की गई हत्या अभियोजन पक्ष के अनुसार, 4 मार्च 2019 की शाम सुमन देवी ने मन्नू कुमार को फोन कर घर से बाहर बुलाया। मन्नू बिना बताए घर से निकला लेकिन फिर वापस नहीं लौटा। अगले दिन 5 मार्च को उसका शव गांव के पास एक सरसों के खेत में मिला, जिसके बाद इलाके में हड़कंप मच गया। फिर मृतक के पिता अशोक चौधरी ने अगरेर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई। पोस्टमॉर्टम में सामने आई निर्ममता पुलिस जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पता चला कि मन्नू का पेट चाकू से चीर दिया गया था। हत्या के बाद उसके निजी अंग काटकर सरसों के पौधे पर लटका दिए गए थे। इस घटना से पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी।   ‘इज्जत’ के नाम पर रची गई साजिश अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि प्रेम संबंधों को लेकर पहले गांव में पंचायत भी हुई थी और दोनों को संबंध खत्म करने की चेतावनी दी गई थी। इसके बावजूद मन्नू और सुमन देवी का मिलना जारी रहा। इसे परिवार ने अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा से जोड़ते हुए हत्या की साजिश रची। हत्या से पहले बनी थी पूरी योजना कोर्ट में यह भी साबित हुआ कि हत्या से दो दिन पहले सुमन देवी अपने पति के साथ उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले से अपने मायके भगवानपुर आई थी। इसके बाद पूरे परिवार ने मिलकर मन्नू को फोन कर बुलाने और उसकी हत्या करने की योजना बनाई। ट्रायल के दौरान कुल नौ गवाहों ने अभियोजन पक्ष के समर्थन में गवाही दी। कोर्ट की सख्त टिप्पणी सजा सुनाते हुए अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने आरोपों को संदेह से परे साबित किया है। अतिरिक्त लोक अभियोजक अनिल कुमार सिंह ने बताया कि कोर्ट ने माना कि हत्या का तरीका अत्यंत क्रूर था और इससे समाज में भय, असुरक्षा और अमानवीयता का संदेश गया। इसी कारण दोषियों को अधिकतम सजा दी गई।