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राहुल गांधी के वीडियो से उठा भागीरथपुरा की मौतों और प्रशासन के डेथ ऑडिट पर सवाल

इंदौर. कांग्रेस नेता राहुल गांधी के भागीरथपुरा दौरे के वीडियो से दूषित पानी पीने से हुई मौतों की संख्या पर फिर सवाल खड़ा हो गया है। सवाल राहुल गांधी ने खुद नहीं उठाया है। इंदौर में राहुल गांधी ने पत्रकारों से कहा था कि लोगों को डराया जा रहा है। अब वीडियो में राहुल गांधी से बात करते हुए भागीरथपुरा के रहवासी कहते सुनाई दे रहे हैं कि 29 जनवरी को जब क्षेत्र में फैली बीमारी मीडिया की सुर्खी बनी, उससे पहले ही लोग बीमार हो रहे थे और मौतें भी हुईं। खुद लोगों ने राहुल के सामने कह दिया कि बीमार हुए और मरने वालों का आंकड़ा छुपाया गया है। इस वीडियो के बाद प्रशासन ने जो डेथ ऑडिट किया, उस पर भी सवाल खड़े हुए हैं। रहवासी कह रहे हैं कि जब 200 से 250 मरीज अस्पताल पहुंचे, तब प्रशासन ने संज्ञान लिया। 21 मौतों का ही विश्लेषण किया गया कोर्ट के दबाव में प्रशासन ने जो डेथ ऑडिट किया, उसमें 12 जनवरी तक हुई 21 मौतों का ही विश्लेषण किया गया। इसमें अलग-अलग श्रेणी में मौतों को रखा गया। छह मौतों को सीएमएचओ ने महामारी से हुई मौत बताया। इन मृतकों के नाम उर्मिला, तारा, नंदलाल, हीरालाल, अरविंद और पांच माह का अव्यान है। इसके अलावा चार मौतों को महामारी से जुड़ी संभावित मौत माना गया। इनमें गीता, उमा कोरी, गोमती व श्रवण के नाम हैं। अस्पताल पहुंचने से पहले हुई चार मौत भी इसी से संभावित मानी गई। इनमें सीमा, जीवन, रामकली व हरकुबाई का नाम शामिल है। दो मौत महामारी से पहले हो चुकी थीं, यह भी डेथ ऑडिट में माना गया। इस श्रेणी के मृतकों में सुमित्रा व संतोष का नाम रखा गया। प्रशासन महामारी 24 दिसंबर से मानता है प्रशासन महामारी 24 दिसंबर से मानता है। कमला पत्नी तुलसीराम व सुनीता पत्नी सतीश इस तारीख से पहले मर चुकी थीं। इसलिए इन दो मौतों को भी भागीरथपुरा त्रासदी की सूची से बाहर रखा गया। इसके अलावा चार मौतों को तो महामारी से अलग कारणों से होना बताया गया। इनमें अशोक, शंकर लाल, कमला व सुनीता का नाम है। मंजुला नामक महिला की रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट नहीं है। जबकि क्षेत्रवासियों के अनुसार अन्य मृतक भी हैं, जिनमें सुमित्रा देवी, अशोकलाल पंवार, गोमती रावत, उर्मिला यादव, जीवनलाल बरेड़े, सीमा प्रजापत, संतोष बिगोलिया, अव्यान साहू, श्रवण खुपराव, रामकली, नंदलाल, उमा कोरी, मंजुला वाढ़े, ताराबाई, हीरालाल, अरविंद लिखर, गीताबाई, हरकुंवर बाई, शंकर भाया, ओमप्रकाश शर्मा, सुनीता वर्मा और भगवानदास का नाम शामिल है। एक अन्य सुभद्राबाई की मौत 15 जनवरी को हुई, जिसका प्रशासन ने खंडन किया और कहा कि डायरिया से इस मौत का कोई वास्ता नहीं है। इस तरह आम लोगों के आंकड़े में इन सभी मौतों को मिलाकर मरने वालों की संख्या 24 हो रही है।

गोमांस को भैंस का सर्टिफाइड कर डॉ. बीपी गौर की मिलीभगत से खाड़ी देशों में हो रहा सप्लाई

भोपाल. शहर के जिंसी स्थित स्लाटर हाउस से पकड़े गए 26 टन गोमांस के मामले में अब जांच ने चौंकाने वाले अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की परतें खोल दी हैं। यह कोई स्थानीय अवैध कारोबार नहीं, बल्कि एक सुनियोजित अंतरराष्ट्रीय निर्यात गिरोह का हिस्सा बताया जा रहा है। जांच में सामने आया है कि असलम कुरैशी उर्फ असलम चमड़ा, नगर निगम के कथित संरक्षण की आड़ में प्रतिबंधित गोमांस को बैंकाक, दुबई और अन्य खाड़ी देशों तक पहुंचा रहा था। इस नेटवर्क में फर्जी दस्तावेज, अत्याधुनिक पैकिंग तकनीक और समुद्री बंदरगाहों का इस्तेमाल कर सुरक्षित कॉरिडोर तैयार किया गया था। कैसे चलता था पूरा नेटवर्क जांच एजेंसियों के अनुसार, जिंसी स्लाटर हाउस में गोवंश के कटान के बाद मांस को वैज्ञानिक तरीके से पैक किया जाता था। इसके बाद फर्जी या साठगांठ वाले पशु चिकित्सक प्रमाण-पत्रों के आधार पर गोमांस को कागजों में भैंस का मांस घोषित कर दिया जाता था। आरोप है कि निगम के सरकारी पशु चिकित्सक डॉ. बीपी गौर इन प्रमाण-पत्रों में गोमांस को भैंस का मांस दिखाते थे, जिससे कस्टम और निर्यात एजेंसियों की जांच से बचा जा सके। अंतरराष्ट्रीय मानकों जैसी पैकेजिंग सूत्रों के मुताबिक, जब्त किए गए मांस की पैकेजिंग अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप पाई गई है। प्रत्येक पैकेट पर क्यूआर कोड और टैग लगे थे, ताकि विदेशी खरीदार आसानी से माल की पहचान कर सकें। मांस को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए अत्याधुनिक वैक्यूम सीलिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया था, जिससे उसकी गंध बाहर न आए और वह महीनों तक खराब न हो। बंदरगाहों तक भेजा जाता था माल तस्करी का माल सीधे मुंबई और चेन्नई के बंदरगाहों तक भेजा जाता था। कई बार रेलवे पार्सल सेवा का भी दुरुपयोग किया गया। सूत्रों का कहना है कि गिरोह ने पूरे कारोबार को कार्पोरेट मॉडल की तरह संचालित किया था, जिसमें लॉजिस्टिक्स, डॉक्यूमेंटेशन और सप्लाई चैन को व्यवस्थित ढंग से संभाला जाता था। राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने आरोप लगाया कि इस मामले में बड़े लोग शामिल हैं और असलम के दुबई में भी संपर्क हैं। उन्होंने कहा कि असलम हर सप्ताह दुबई जुआ खेलने जाता था। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अब तक न तो मुख्यमंत्री ने इस पर बयान दिया है और न ही पुलिस ने असलम को रिमांड पर लिया है। प्रशासन और पुलिस का पक्ष निगमायुक्त संस्कृति जैन ने कहा कि मामला फिलहाल पुलिस जांच में है और अभी किसी पर एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई है। जांच पूरी होने के बाद दोषियों पर कार्रवाई होगी। वहीं, एडिशनल डीसीपी जोन-एक रश्मि अग्रवाल दुबे ने बताया कि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि गोमांस कहां भेजा जा रहा था। आरोपितों को जेल भेजा गया है और दोबारा रिमांड पर लेकर विस्तृत पूछताछ की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले की जांच एसआईटी को सौंप दी गई है।

भोपाल में अवैध कब्जों पर कार्रवाई: 31 गांवों में 113 कब्जों को हटाएगा बुलडोजर

भोपाल  मध्यप्रदेश के भोपाल शहर में अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई का सिलसिला  शुरु होने जा रहा है। हुजूर तहसील ने इसके लिए तहसीलदार आलोक पारे के नेतृत्व में टीम गठित की है। आज टीएल बैठक के बाद कार्रवाई शुरू होगी। ईंटखेड़ी और कृषि भूमि पर अवैध कॉलोनियों के निर्माण को हटाया जाएगा। जानकारी के लिए बता दें कि इस दौरान संबंधित पर एफआइआर भी कराएंगे। ज्ञात हो कि प्रशासन पहले ही अवैध कॉलोनियां विकसित करने वाले 12 कॉलोनाइजर्स पर केस दर्ज कर चुका है। प्रशासन ने 31 गांवों में 113 अवैध कॉलोनियों चिह्नित की है। नामजद सूची तैयार की गई। अवैध कॉलोनियों की भरमार भोपाल में बीते कई दिनों से हुजूर और बैरसिया तहसील में एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई तेज है, लेकिन कोलार, गोविंदपुरा, एमपी नगर और बैरागढ़ सर्किल के एसडीएम अवैध कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई करने के मामले में गंभीर नजर नहीं आ रहे। जबकि, कलेक्टर इस मुद्दे पर पहले ही नाराजगी जता चुके हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि अफसर अब किस आदेश का इंतजार कर रहे हैं। लोगों से अपील- ‘इन्वेस्टमेंट नहीं करें’ जिला प्रशासन एवं जिला पंचायत की संयुक्त सर्वे रिपोर्ट पर हुजूर क्षेत्र की सवा सौ ऐसी कॉलोनियों को चिह्नित किया गया है, जिनमें बगैर किसी अनुमति के ही निर्माण कर लिया है। अवैध कब्जों को देखते हुए लोगों से अपील की है कि इन कॉलोनी में इन्वेस्टमेंट नहीं करें। जिन लोगों ने इन्वेस्टमेंट कर लिया है, उन्हें सुनवाई का मौका दिया जाएगा। जिला प्रशासन अवैध तरीके से की गई प्लॉटिंग और कंस्ट्रक्शन पर मप्र सरकार के निर्देशानुसार बुलडोजर चलाएगा। 90% कॉलोनियां किसानों की भूमि पर बीते दिनों जांच करने पर ये जानकारी मिली है कि 90 प्रतिशत अवैध कॉलोनियां किसानों की जमीन पर हैं। हुजूर, कोलार, बैरसिया और गोविंदपुरा तहसील क्षेत्रों में बीते एक साल के भीतर भूमाफिया ने बड़े पैमाने पर अवैध कॉलोनियां विकसित की हैं। ये कॉलोनियां कृषि भूमि पर काटी गई हैं, जिनके लिए न तो ले-आउट स्वीकृत है और न ही किसी तरह की वैधानिक अनुमति ली गई।

BPL कार्डधारकों के लिए अलर्ट: 40% परिवारों का नाम कटने की आशंका

भिंड  केंद्र सरकार के सख्त आदेश के बाद भिंड जिले में करीब 3 लाख 69 हजार परिवारों का राशन कार्ड खतरे में है। यह कार्रवाई उन परिवारों के लिए है जिनके पास 1 हेक्टेयर से अधिक जमीन है और जो पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ ले रहे हैं। खाद्य आपूर्ति विभाग के पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार जिले के 9.22 लाख परिवारों में से लगभग 40% परिवार अब अपात्र स्थिति में हैं। फरवरी तक इन परिवारों की सूची तैयार कर नोटिस जारी किए जाएंगे। नए फिल्टर से बाहर होंगे लाभार्थी: एनआईसी द्वारा किए गए मिलान में यह सामने आया कि कई परिवारों ने राशन और पीएम किसान के लिए अलग- अलग आईडी बनाई है, लेकिन जमीन का बंटवारा करवा कर नामांतरण नहीं करवाया। ऐसे में परिवारों के नाम पर दर्ज भूमि 1 हेक्टेयर से अधिक होने पर उन्हें BPL कार्ड और सरकारी राशन से बाहर किया जाएगा। फैक्ट फाइल राशन ले रहे परिवार: 2.13 लाख अपात्र होने वाले परिवार: 3.69 लाख हर महीने राशन वितरण: 15 मीट्रिक टन 1 हेक्टेयर से अधिक भूमि वाले परिवार होंगे बाहर करीब 40% परिवार होंगे वंचित खाद्य आपूर्ति विभाग का कहना है कि सभी परिवारों को सुनवाई का मौका मिलेगा, लेकिन नियमों के अनुसार राशन की 15 मीट्रिक टन आपूर्ति 6 मीट्रिक टन तक घट सकती है।

मध्य प्रदेश के 5 जिलों में संकरी गलियों का चौड़ीकरण, जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू

भोपाल   मेट्रोपॉलिटन रीजन की संकरी सड़कें भी अब चार लेन की होंगी। पब्लिक ट्रांसपोर्ट नेटवर्क के लिए पॉलिसी में इसे शामिल किया गया है। सड़कों की चौड़ाई न्यूनतम 12 मीटर रखी गई है। निर्माण एजेंसियों को बीडीए और टीएंडसीपी के माध्यम से इसके लिए सूचित कर दिया गया है। अब इसी आधार पर प्लानिंग तय होगी। भोपाल समेत राजगढ़, सीहोर, विदिशा, रायसेन को शामिल कर करीब 12 हजार 99 वर्ग किमी क्षेत्र का बीएमआर तय किया जा रहा है। टीएंडसीपी से नई कॉलोनियों को मंजूरी में 12 मीटर रोड चौड़ाई का विशेष ध्यान रखा जाएगा। इसमें सबसे बड़ी चुनौती पुरानी बसाहटें रहेगी। यहां तीन मीटर से भी कम की गलियां हैं। मुख्यमार्ग भी सात से दस मीटर तक है। ऐसे में यहां 12 मीटर की न्यूनतम चौड़ाई लाना बड़ी चुनौती है। इस दायरे में आने वाले मकान और दुकानों को तोड़कर सड़कों का चौड़ीकरण किया जाएगा। इसलिए जरूरी चौड़ी सड़कें रीजन में 2,524 गांव शामिल किए जा रहे हैं। भोपाल से ट्रैफिक और आबादी का भार घटाते हु़ए पास के जिलों का भोपाल की तरह विकास करना इसका मुख्य उद्देश्य है। इसके लिए भोपाल से संबंधित जिलों की आपसी कनेक्टिविटी तो जरूरी है, बीएमआर में शामिल क्षेत्रों में भविष्य की बसाहट, ट्रैफिक को देखते हुए चौड़ी सड़कें जरूरी हैं। बीएमआर में सुनियोजित विकास के तहत पॉलिसी बीएमआर में सुनियोजित विकास के तहत पॉलिसी तय हो रही है। हमारी टीम इसके लिए काम कर रही है। समग्र विकास की अवधारणा को लेकर चल रहे हैं। 

नौ महीने में 30 करोड़ की वसूली, भोपाल रेल मंडल में बेटिकट यात्रियों से बढ़ा राजस्व

भोपाल  अगर आप ट्रेन में बिना टिकट या अनियमित टिकट पर सफर करने की सोच रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। पश्चिम मध्य रेल के भोपाल मंडल ने टिकट चेकिंग अभियान के जरिए बिना टिकट सफर करने वाले मुसाफिरों की जेब पर बड़ी स्ट्राइक की है। चालू वित्तीय वर्ष के पिछले 9 महीनों (अप्रैल से दिसंबर 2025) में मंडल ने जुर्माने के रूप में 30.48 करोड़ रुपए का भारी-भरकम राजस्व वसूल किया है। 4.75 लाख यात्री धरे गए भोपाल मंडल के टिकट निरीक्षकों ने स्टेशनों और चलती ट्रेनों में सघन जांच अभियान चलाकर कुल 4 लाख 75 हजार ऐसे मामले पकड़े, जो बिना टिकट, अनियमित टिकट या अनबुक्ड लगेज के साथ यात्रा कर रहे थे। खास बात यह है कि इस बार रेलवे ने पिछले साल की तुलना में 4.45 प्रतिशत अधिक राजस्व अर्जित कर अपनी मुस्तैदी का परिचय दिया है। कुल आंकड़ा 100 करोड़ पार महाप्रबंधक के मार्गदर्शन में भोपाल सहित जबलपुर और कोटा मंडल में भी यह अभियान जोरों पर रहा। पूरे पश्चिम मध्य रेल की बात करें तो 9 महीनों में कुल 14.65 लाख मामले पकड़े गए, जिनसे 101 करोड़ 16 लाख रुपये का राजस्व मिला। यह पिछले साल की तुलना में करीब 15.80 प्रतिशत की बड़ी छलांग है। रेलवे की सख्त चेतावनी रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे हमेशा उचित टिकट लेकर ही यात्रा करें। वाणिज्य विभाग और आरपीएफ के समन्वय से यह चेकिंग अभियान आने वाले दिनों में और भी तेज किया जाएगा। गौरतलब है कि बेटिकट यात्रियों को पकड़ने के लिए समय-समय पर रेलवे की तरफ से किलाबंदी चेकिंग अभियान चलाया जाता है। इस दौरान ही बड़ी संख्या में यात्री पकड़े जाते हैं। यह रेलवे के लिए बड़ी सफलता है।  

शादी के नियम बदले गए, गहोई विवाह में 7 नहीं 8 फेरे और वचन होंगे

छतरपुर  हिन्दू रीति रिवाज की शादियों में प्राचीन समय से ही सात वचनों की परंपरा चली आई है. लेकिन छतरपुर में गहोई समाज के द्वारा अब शादियों में एक नई परंपरा शुरू कर दी है. जिसमें 7 नहीं आठ वचन वर वधू को लेने होंगे. आठवां वचन ''बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' होगा, जिससे आने वाली पीढ़ियों में लड़कियों की सख्या बढ़ सके. गहोई समाज में लगातार लड़कियों की सख्या में गिरावट आ रही है. छतरपुर में मना गहोई दिवस शहर का गहोई समाज गरीब निर्धन और जरूरतमंद बेटियों की शादी कराने के लिए एक सामाजिक कार्य हर साल अयोजित करता है. जिसे 'गहोई दिवस' के रूप में मनाया जाता है. इस अवसर पर समाज के द्वारा महीनों से तैयारी शुरू कर दी जाती है और समाज के लोगों को जिम्मेदारी सौंपी जाती है. इस वर्ष गहोई समाज के द्वारा सामूहिक कन्याय विवाह में एक नहीं परम्परा शुरू की गई. जो भी वर वधु शादी करेंगे वह 7 नहीं 8 वचन लेंगे और आठ वचन के साथ शादी सम्पन्न होगी. बेटियों को बचाने आठवां वचन आठवां वचन बेटियों को पढ़ाने और बचाने के लिए रखा गया है. जिसकी अब शहर में चर्चाओं के साथ समाज की सराहना भी हो रही है. छतरपुर में गहोई समाज के द्वारा गहोई दिवस मनाया जाता है. इस आयोजन में समाज के लोग एकत्रित होते हैं और भव्य आयोजन करते हैं. इस दिन भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है. जिसमें बैंडबाजों के साथ डीजे की धुन पर समाज की महिलाएं, पुरुष, बच्चे सभी डांस करते हुए निकलते हैं. सामूहिक विवाह में दिलवाए 8 वचन इस बार शोभायात्रा का शुभारंभ बुंदेलखंड गैरेज से शुरु हुआ. यात्रा फब्बारा चौराहा, हटवारा, गांधी चौक, गल्ला मंडी होते हुए गहोई धाम पहुंची थी. शोभायात्रा में महिलाओं में जमकर उत्साह भी देखा गया. रास्ते में जगह-जगह गहोई बंधुओं, गहोई यूथ क्लब, अग्रवाल समाज ने यात्रा का भव्य स्वागत किया तो वही कई रंगारंग कार्यक्रम अयोजित हुए. रात में एक सामूहिक कन्या विवाह का आयोजन किया गया. जिसमें 4 विवाह सम्पन्न हुए. लेकिन इस आयोजन में खास बात ये रही कि सभी वरवधू को 7 नहीं 8 वचन दिलवाए गए. क्यों लिए शादी में 8 वचन हिन्दू रीति रिवाज से होने वाली शादियों में 7 वचन वर वधू लेते हैं, लेकिन छतरपुर के गहोई समाज के द्वारा हुए सामूहिक कन्या विवाह में 8 वचन दिलवाए गए. गहोई समाज के राजेश रूसिया बताते हैं, ''समाज में लगातार लड़कियों की सख्या घट रही है, जिसको लेकर एक वचन शादी में दिलवाता गया है 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' जिससे आने वाली पीढ़ियों में लड़कियों की सख्या बढ़ेगी.'' वहीं, गहोई समाज द्वारा सामूहिक विवाह सम्मेलन में शादियों को करवाने वाले ब्राह्मण पंडित सौरभ तिवारी बताते हैं. ''हिन्दू रीति रिवाज में शादी समारोह में 7 वचन होते हैं लेकिन गहोई समाज की परंपरा के अनुसार 8 वचन दिलवाए गए हैं. महिलाओं और बेटियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए 'बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ' का वचन दिलवाया गया है.'' लड़कियों की घटती संख्या को लेकर लिया फैसला गहोई समाज के सचिव राजेश रूसिया बताते हैं, ''समाज में लगातार लड़कियों की संख्या घट रही है, जिसको लेकर समाज ने निर्णय लिया और एक और वचन शादी में जोड़ा गया.'' जब वर-वधु से बात की तो दुल्हन डोली ने बताया, ''8 वां वचन भी लिया गया है 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' का.'' दूल्हा सत्यम ने कहा, ''नई परंपरा से समाज में महिलाओं के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, भ्रुण हत्या नहीं होगी. हम ने भी शादी में आठवां वचन लिया है."

ऊर्जा मंत्री तोमर बोले: समाधान योजना के तहत ₹653 करोड़ से ज्यादा जमा, ₹281 करोड़ सरचार्ज माफ

समाधान योजना में 653 करोड़ 60 लाख मूल राशि हुई जमा, 281 करोड़ 54 लाख सरचार्ज हुआ माफ : ऊर्जा मंत्री तोमर अब 31 जनवरी 2026 तक मिलेगी योजना में सौ फीसदी तक सरचार्ज में छूट भोपाल  समाधान योजना 2025-26 के प्रथम चरण में अब तक 653 करोड़ 60 लाख रूपये मूल राशि जमा हुई है। साथ ही 281 करोड़ 54 लाख रूपये का सरचार्ज माफ किया गया है। योजना में 12 लाख 77 हजार 753 उपभोक्ताओं ने पंजीयन कराया है। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि बकायादार उपभोक्ताओं की सतत भागीदारी और उनके उत्साह को देखते हुए समाधान योजना के प्रथम चरण की अवधि में 31 जनवरी 2026 तक विस्तार किया गया है। पिछले साल 3 नवंबर से शुरू हुई समाधान योजना 2025-26 में शामिल होकर लाखों बकायादार उपभोक्ताओं ने सौ फीसदी तक छूट का लाभ लिया। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की है कि तीन माह से अधिक के बकायादार उपभोक्ता योजना के प्रथम चरण में शामिल होकर अपना बकाया बिल एकमुश्त जमा कर 100 फीसदी तक सरचार्ज माफी का लाभ उठायें। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 4 लाख 2 हजार 593 बकायादार उपभोक्ताओं ने पंजीयन कराकर लाभ लिया है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के खाते में 411 करोड़ 49 लाख से अधिक की मूल राशि जमा हुई है, जबकि 218 करोड़ 44 लाख रूपए का सरचार्ज माफ किया गया है। इसी तरह पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में 4 लाख 39 हजार 397 उपभोक्ताओं ने पंजीयन कराया है। मूल राशि 130 करोड़ 50 लाख रूपये जमा हुई है तथा 45 करोड़ 41 लाख रूपये का सरचार्ज माफ किया गया है। पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी क्षेत्रान्तर्गत 4 लाख 35 हजार 763 उपभोक्ताओं ने पंजीयन कराया है। कुल मूल राशि 111 करोड़ 61 लाख रूपये जमा हुई है। साथ ही 17 करोड़ 69 लाख रूपये का सरचार्ज माफ किया गया है। समाधान योजना 2025-26 : एक नजर में समाधान योजना 2025-26 का उद्देश्य 3 माह से अधिक अवधि के उपभोक्ताओं को बकाया विलंबित भुगतान के सरचार्ज पर छूट प्रदान करना है। यह योजना 'जल्दी आएं, एकमुश्त भुगतान कर ज्यादा लाभ पाएं' के सिद्धांत पर आधारित है। इस योजना में उपभोक्ता को प्रथम चरण में एकमुश्त भुगतान करने पर सबसे अधिक लाभ हो रहा है जबकि द्वितीय चरण के दौरान छूट का प्रतिशत क्रमशः कुछ कम हो जाएगा। दो चरणों में प्रारंभ हुई योजना को प्रथम चरण की शुरुआत 3 नवंबर 2025 से हुई जो 31 जनवरी 2026 तक चलेगी। इसमें बकाया बिल एकमुश्त जमा करने पर 60 से लेकर 100 प्रतिशत तक सरचार्ज माफ किया जा रहा। इसके बाद द्वितीय और अंतिम चरण शुरू होगा जो 01 फरवरी से 28 फरवरी 2026 तक चलेगा। दूसरे चरण में 50 से 90 फ़ीसदी तक सरचार्ज माफ किया जाएगा। समाधान योजना 2025-26 का लाभ उठाने उपभोक्ताओं के लिए कंपनी के ऐप एवं कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) तथा एमपी ऑनलाइन पर भी पंजीयन की सुविधा उपलब्ध है। पंजीयन के दौरान अलग-अलग उपभोक्ता श्रेणी के लिए पंजीयन राशि निर्धारित की गई है। घरेलू एवं कृषि उपभोक्ता कुल बकाया राशि का 10 प्रतिशत तथा गैर घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ता कुल बकाया राशि का 25 प्रतिशत भुगतान कर पंजीयन कराकर योजना में शामिल होकर लाभ उठा सकते हैं। विस्तृत विवरण तीनों कंपनियों की वेबसाइटों पर भी देखा जा सकता है। साथ ही विद्युत वितरण केंद्र में पहुंचकर भी योजना के संबंध में जानकारी प्राप्त की जा सकती है।  

शुक्रवार को बसंत पंचमी: दिनभर पूजा की अनुमति के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका

इंदौर  उत्तर प्रदेश के ज्ञानवापी की तरह ही मध्य प्रदेश के धार में मौजूद भोजशाल भी विवादों में है. वहीं बसंत पंचमी आते ही मध्य प्रदेश की 800 साल पुरानी भोजशाला की चर्चा शुरू हो जाती है, खासकर बसंत पंचमी अगर शुक्रवार को पड़े तो प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था का खास ख्याल रखना पड़ता है. इसकी वजह है कि भोजशाला को लेकर दो पक्षों के बीच स्वामित्व का विवाद चल रहा है, जो सुप्रीम कोर्ट में है. शुक्रवार को बसंत पंचमी होने पर सांप्रदायिक तनाव न बने इसे लेकर प्रशासन अलर्ट मोड पर रहता है. इस बार भी बसंत पंचमी 23 जनवरी यानि शुक्रवार को है, जिसे लेकर भारी संख्या में भोजशाला में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है. कई सालों से इस स्थिति का सामना इस साल फिर बसंत पंचमी शुक्रवार को है और इसी दिन जुमा भी पड़ रहा है. पूजा और नमाज के दौरान यहां किसी तरह का सप्रदायिक तनाव न हो, इसके लिए 20 जनवरी से ही धार शहर में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया जाएगा. करीब ढाई हजार पुलिस अधिकारी, कर्मचारी यहां मोर्चा संभालेंगे. जो फुल सिक्योरिटी प्लान के तहत बसंत पंचमी के दिन किसी भी तरह के हालात बिगड़ने पर तत्काल कार्रवाई करेंगे. एक ही दिन पूजा और नमाज वाली ऐसी ही स्थिति यहां साल 2006, 2013 और 2016 में भी बनी थी. उस दौरान पहले भी यहां तीनों मौके पर आगजनी पथराव और कर्फ्यू की स्थिति बन गई थी. हालांकि जिला प्रशासन द्वारा दोनों ही पक्षों को समझाकर इस आयोजन को शांतिपूर्ण रूप से संपन्न कराया था. इस बार फिर यहां हिंदू फ्रेंड फॉर जस्टिस नामक संगठन की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई है कि बसंत पंचमी पर आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के आदेश के आधार पर दिनभर पूजा की अनुमति दी जाए. एडवोकेट विष्णु शंकर जैन के मुताबिक "सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई यचिका पर जल्द सुनवाई की मांग की गई है, क्योंकि बसंत पंचमी 23 जनवरी को है." आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया भी बेबस भोजशाला को लेकर आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने 7 अप्रैल 2003 को जो आदेश दिया था, उसमें हिंदू समाज को बसंत पंचमी पर भोजशाला में सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा करने की अनुमति दी थी, लेकिन बसंत पंचमी पर शुक्रवार होने की स्थिति में इस आदेश में कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं था. लिहाजा बसंत पंचमी पर जुम्मा होने के कारण यहां विवाद की स्थिति बनने की आशंका रहती है. इस स्थिति के चलते इस मामले से जुड़ी याचिका की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने भोजशाला के पुरातात्विक सर्वेक्षण के आदेश दिए थे. इसके बाद यहां किए गए सर्वे की 2000 पेज वाली रिपोर्ट में आर्कियोलॉजिकल सर्वे में स्पष्ट किया गया है कि गौशाला परिसर से विभिन्न धातुओं के सिक्के प्राप्त हुए हैं, जो दसवीं से 16वीं शताब्दी के बीच के हैं. इसके अलावा यहां 94 मूर्तियों के टुकड़े मिले जो मूर्तियां गणेश, ब्रह्मा, नरसिंह और भैरव की है. वहीं पशु-पक्षियों की प्रतिकृतियों के अवशेष भी मिले हैं. हालांकि इसके स्वामित्व पर फैसला कोर्ट में ही लंबित है. यह है गौशाला को लेकर पुराना विवाद धार में पुरातात्विक इमारत को हिंदू समाज माता सरस्वती वाग्देवी का मंदिर मानकर यहां बसंत पंचमी पर पूजा अर्चना करता है. वही मुस्लिम समाज इसी स्थान को मौलाना कमाल अहमद की दरगाह मानता रहा है. 1935 में धार रियासत के दीवान ने भोजशाला में मुस्लिम समाज को शुक्रवार के दिन नमाज की अनुमति दी थी. इसके बाद से ही धार के गौशाला विवाद की शुरुआत हुई. लिहाजा बसंत पंचमी के दिन जब भी शुक्रवार अथवा जुम्मे का दिन आता है, तो यहां एक ही दिन पूजा और नमाज होने की मजबूरी के चलते पूरा शहर सांप्रदायिक हिंसा की आशंका में पुलिस छावनी में तब्दील हो जाता है. इसके बाद यहां भोजशाला परिसर पूजा और नमाज के अलग-अलग समय के निर्धारण के बाद पूजा और फिर नमाज अता कराई जाती है. यह है इस स्थान का महत्व और इतिहास धार जिला प्रशासन के मुताबिक 11वीं शताब्दी में परमार वंश के राजा भोज ने भोजशाला का निर्माण कराया था, इस दौरान यहां माता सरस्वती वाग्देवी की प्रतिमा की स्थापना का भी उल्लेख बताया जाता है. परमार काल के बाद यह स्थान राजपूत शासकों की राजधानी और मालवा की राजधानी भी रहा. मुगल काल में अलाउद्दीन खिलजी ने 1305 में भोजशाला को ध्वस्त कर दिया. इसी दौरान यहां अन्य मुगलकालीन शासकों ने परिसर में मस्जिद का निर्माण कराया. मुगल काल समाप्त होने के बाद 1875 में ब्रिटिश काल के दौरान ब्रिटिश मेजर किन केड यहां स्थापित वाग्देवी की मूर्ति को लेकर लंदन चले गए, जो आज भी लंदन के म्यूजियम में मौजूद है.

साइबर अटैक से लेकर प्राकृतिक आपदा तक, MP में पावर सप्लाई रहेगी सुरक्षित

भोपाल  बिजली की ग्रिडों पर साइबर अटैक या युद्ध जैसे हालातों में भी मध्य प्रदेश की बिजली गायब नहीं होगी. मध्यप्रदेश के जबलपुर, भोपाल और इंदौर समेत अन्य शहरों में इलेक्ट्रिकल आइलैंडिंग नाम की एक रणनीतिक बिजली व्यवस्था पर काम शुरू हो चुका है. यह सिस्टम ग्रिड से कटते ही शहर को खुद का पावर स्टेशन बना देता है. इसके लिए सबसे पहले जबलपुर को चुना गया है, जहां सेना से जुड़े बड़े रक्षा प्रतिष्ठान मौजूद हैं. इसके बाद भोपाल और इंदौर को भी इसी सुरक्षा कवच से जोड़ा जाएगा. जानें क्या होता है इलेक्ट्रिकल आइलैंडिंग क्या है इलेक्ट्रिकल आइलैंडिंग? इलेक्ट्रिकल आइलैंडिंग एक ऐसी व्यवस्था है, जिसमें बिजली सिस्टम के एक हिस्से को जानबूझकर मुख्य ग्रिड से अलग कर दिया जाता है. जब राष्ट्रीय या क्षेत्रीय ग्रिड में कोई बड़ा व्यवधान आता है, तो यह हिस्सा स्वतः आइलैंड मोड में चला जाता है. उस स्थिति में स्थानीय बिजली उत्पादन स्रोतों से शहर की जरूरी सेवाओं को बिजली मिलती रहती है. सरल शब्दों में कहें तो पूरा शहर कुछ समय के लिए खुद का स्वतंत्र पावर ग्रिड बन जाता है. आइलैंडिंग के लिए जबलपुर क्यों बना पहली पसंद? जबलपुर देश के रणनीतिक शहरों में शामिल है. यहां आर्मी प्रोडक्शन यूनिट्स, गोला-बारूद निर्माण इकाइयां और रक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण संस्थान मौजूद हैं. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जब देश रणनीतिक मोर्चे पर सक्रिय था, उसी समय जबलपुर में इलेक्ट्रिकल आइलैंडिंग परियोजना को स्वीकृति दी गई. इसके जरिए सरकार ने संदेश दिया कि अब युद्ध के हालात और आपातकालीन परिस्थितियों में भी शहर अंधेरे में नहीं डूबना चाहिए. ऐसे काम करेगा यह सिस्टम जबलपुर में पहले से एक थर्मल पावर स्टेशन से सीधी ट्रांसमिशन लाइन उपलब्ध है. आपात स्थिति में उस पावर स्टेशन की एक यूनिट सक्रिय की जाएगी और शहर को ग्रिड से अलग कर बिजली सप्लाई दी जाएगी. इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 7 करोड़ रु खर्च होंगे. इसमें 90 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार वहन कर रही है. फिलहाल टेंडर जारी हो चुके हैं और काम तेजी से चल रहा है. अगले तीन से चार महीनों में यह सिस्टम पूरी तरह तैयार हो जाएगा. भोपाल और इंदौर में क्या तैयारी? भोपाल और इंदौर में फिलहाल किसी बिजली उत्पादन केंद्र से सीधी ट्रांसमिशन लाइन नहीं है. इसलिए यहां नजदीकी थर्मल पावर स्टेशनों से समर्पित ट्रांसमिशन लाइनें बिछानी होंगी. दोनों शहरों के लिए प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं. बिजली कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि मंजूरी मिलते ही इन महानगरों में भी इलेक्ट्रिकल आइलैंडिंग लागू कर दी जाएगी. 2012 का ब्लैकआउट, जो चेतावनी बन गया विशेषज्ञ बताते हैं कि जुलाई 2012 में भारत ने अब तक का सबसे बड़ा बिजली संकट देखा. 30 और 31 जुलाई को ग्रिड ओवरलोड के कारण देश के 22 राज्य अंधेरे में डूब गए थे. उसी घटना के बाद यह समझ आया कि केवल एक राष्ट्रीय ग्रिड पर निर्भर रहना, जोखिम भरा हो सकता है. तभी से इलेक्ट्रिकल आइलैंडिंग जैसे विकल्पों पर गंभीरता से काम शुरू हुआ. इलेक्ट्रिकल ग्रिड क्या होती है? ग्रिड, जनरेटर और ट्रांसमिशन लाइनों की आपस में जुड़ी प्रणाली होती है. सभी जनरेटर एक साथ काम करते हैं. लेकिन यदि किसी एक हिस्से में बड़ी गड़बड़ी होती है, तो उसका असर पूरी प्रणाली पर पड़ सकता है. यही श्रृंखला प्रभाव पूरे देश में ब्लैकआउट की वजह बनता है. पावर आइलैंड क्यों हैं जरूरी? इलेक्ट्रिकल आइलैंडिंग से अस्पताल, रक्षा प्रतिष्ठान, ट्रैफिक सिग्नल, जलापूर्ति और संचार सेवाएं सुरक्षित रहती हैं. यह सिस्टम अपने आप ग्रिड से अलग होकर स्थानीय उत्पादन से बिजली देता है. इसी कारण इसे पावर आइलैंड या वोल्टेज आइलैंड भी कहा जाता है. शहरों को सुरक्षित रखेंगे पावर आईलैंड मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी के प्रबंध निदेशक सुनील तिवारी ने बताया, '' इलेक्ट्रिकल आइलैंडिंग परियोजना पूरी होने के बाद किसी भी आपात स्थिति में शहर की बिजली आपूर्ति प्रभावित नहीं होगी. जबलपुर में काम तेजी से चल रहा है और तीन से चार महीनों में इसे पूरा कर लिया जाएगा. भोपाल और इंदौर के लिए भी प्रस्ताव भेजे गए हैं. स्वीकृति मिलते ही वहां भी काम शुरू होगा.'' उन्होंने आगे बताया, '' इलेक्ट्रिकल आइलैंडिंग न सिर्फ युद्ध बल्कि साइबर अटैक, तकनीकी खराबी और प्राकृतिक आपदा के समय भी शहरों को सुरक्षित रखेगी.''