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अशोकनगर की नेनशु का प्यार भरा फैसला, अनीता से शादी के लिए लड़का बनी, इंदौर में हुआ इश्क

अशोकनगर  प्रेम गली अति सांकरी, जा में दो न समाय… संत कबीरदास की इन पंक्तियों का अर्थ बड़ा ही गहरा है। इन पंक्तियों में संत कबीरदास कहते हैं कि प्रेम का मार्ग इतना संकरा यानी कि तंग होता है कि उसमें दो व्यक्ति 'मैं' और 'तुम' एक साथ नहीं रह सकते। यहां 'मैं' से उनका अर्थ अहंकार से है। सच है कि प्रेम के लिए आपको व्यक्तिगत पहचान से निकलकर एक होना पड़ता है। अशोकनगर में प्रेम की इसी पराकाष्ठा को पार करते हुए 25 साल की नेनशु ने अपनी पहचान ही बदल दी। नेनशु अब 'नेनशु' न होकर नमन बन गई हैं। कहानी बड़ी दिलचस्प है, आइए जानते हैं। 6 लाख खर्च, तीन ऑपरेशन हुए मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले की 25 वर्षीय नेनशु ने अपने प्यार को पाने के लिए लिंग परिवर्तन करवाया और अनीता से शादी कर ली है। उन्होंने छह लाख रुपये खर्च कर यह सर्जरी करवाई, जिसमें तीन जटिल ऑपरेशन शामिल थे। यह कहानी प्यार की ताकत और सामाजिक बेड़ियों को तोड़ने का एक उदाहरण है। नेनशु (नमन) अशोकनगर की पिपरई तहसील के बरखेड़ा गांव की रहने वाली हैं। नेनशु ने अपने प्यार को मुकम्मल करने के लिए समाज की रूढ़ियों से लड़ाई लड़ी और अपना जेंडर भी बदलवाया। अब नेनशु ‘नमन’ बनकर अपनी जीवनसंगिनी अनीता के साथ नई जिंदगी शुरू कर चुके हैं। इंदौर में हुई थी दोनों की मुलाकात उन्होंने बताया कि वह जन्म से लड़की थीं, लेकिन उनकी भावनाएं हमेशा लड़कों जैसी रहीं। यह उनके लिए एक आंतरिक संघर्ष था जिसे उन्होंने अपने प्यार के लिए दूर किया। करीब तीन साल पहले पढ़ाई के लिए इंदौर गई थीं, जहां सोशल मीडिया के जरिये असम की अनीता राजवर से उनकी पहचान हुई। यह मुलाकात उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। उनकी दोस्ती जल्द ही प्यार में बदल गई। दोनों एक-दूसरे के प्रति गहरा लगाव महसूस करने लगे। नौकरी करते हुए बचाए सर्जरी के लिए पैसे दोनों साथ रहना चाहते थे, लेकिन समाज में पति-पत्नी के रूप में पहचान पाने के लिए जेंडर चेंज सर्जरी ही एकमात्र रास्ता था। यह एक बड़ी चुनौती थी जिसे उन्होंने स्वीकार किया। दिल्ली के डाक्टरों ने सर्जरी पर करीब छह लाख रुपये खर्च बताया। यह राशि उनके लिए बहुत बड़ी थी। मध्यमवर्गीय परिवार के लिए यह बड़ी रकम थी, लेकिन नमन और अनीता ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने लक्ष्य को प्राप्त करने का दृढ़ निश्चय किया। दोनों ने इंदौर में छोटी-छोटी नौकरियां कीं, खर्च कम किए और तीन साल में पैसे जुटाये। यह उनकी लगन और समर्पण का प्रमाण है। पैसे पूरे होते ही दिल्ली में कराई सर्जरी पैसे पूरे होने पर नेनशु यानी नमन दिल्ली गई। यह उनके जीवन का एक निर्णायक कदम था। पांच महीनों में तीन जटिल सर्जरियां हुईं। यह प्रक्रिया शारीरिक और मानसिक रूप से बहुत कठिन थी। दर्द और तनाव के बीच अनीता हर कदम पर साथ रहीं। उनका साथ नमन के लिए बहुत महत्वपूर्ण था। पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद नेनशु आधिकारिक रूप से ‘नमन’ बन गई है। यह उनके नए जीवन की शुरुआत है।

मध्य प्रदेश में मावठा का असर, ठंड बढ़ाएगा वेस्टर्न डिस्टरबेंस, मौसम में बदलाव

भोपाल:  मध्य प्रदेश में करीब दो हफ्ते तक कड़ाके की ठंड के बाद लोगों को राहत मिलती दिख रही है. दिन के समय तेज धूप निकलने से तापमान में थोड़ी बढ़ोतरी हुई है. लेकिन रात और सुबह के वक्त अब भी ठंड का असर बना हुआ है. हालांकि एक मजबूत वेस्टर्न डिस्टरबेंस एमपी की तरफ बढ़ता दिख रहा है, जिसकी वजह से पहाड़ों पर बर्फबारी होगी, इसका सीधा असर एमपी में मावठा गिरने के रूप में सामने आएगा. जिससे ठंड एक बार फिर से बढ़ सकती है. मौसम विभाग के मुताबिक 19 या 20 जनवरी से पश्चिमी विक्षोभ के एक्टिव होने की संभावना है. जिसके बाद भोपाल, ग्वालियर चंबल और जबलपुर डिवीजन में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. इसी दौरान मावठा गिरने का भी आसार हैं. मध्य प्रदेश में सर्दी का सीजन आखिरी दौर में पहुंच रहा है, लेकिन इस बार अब तक मावठा नहीं गिरा है. ठंड के आखिरी दौर में हल्की से मध्यम बारिश रबी फसलों में विशेषकर गेहूं, चना, सरसों और मसूर के लिए बोनस साबित होगी. शहडोल सबसे ठंडा इलाका रहा पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के तापमान में मामूली बढ़ोतरी देखने को मिली है। इसके बावजूद शहडोल जिले का कल्याणपुर एक बार फिर सबसे ठंडा इलाका रहा, जहां न्यूनतम तापमान 4.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पहाड़ी क्षेत्रों में भी रातें ठंडी बनी हुई हैं, हालांकि पहले जैसी कंपकंपाने वाली सर्दी नहीं रही। कोहरा अभी भी बढ़ा रहा लोगों की मुश्किलें राजधानी भोपाल में रात का न्यूनतम तापमान 8 डिग्री दर्ज किया गया. हिल स्टेशन पचमढ़ी में तापमान 5.8 डिग्री, इंदौर और ग्वालियर में भी पारा 7-8 डिग्री के आसपास रहा. उज्जैन और जबलपुर में भी सर्दी का असर कम हुआ है. शीतलहर भले ही कमजोर पड़ी हो, लेकिन कोहरा अभी भी लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहा है. राजगढ़, सतना, सीधी, दतिया, ग्वालियर, रतलाम और खजुराहो में सुबह के समय हल्का कोहरा छाया रहा. मौसम विभाग की तरफ से श्योपुर, मुरैना, भिंड, आगर-मालवा, मंदसौर, राजगढ़ और नीमच समेत करीब आठ जिलों में कोहरे की चेतावनी जारी की गई है.  मौसम के पीछे क्या है कारण भोपाल मौसम केंद्र के अनुसार, इस समय पश्चिमी विक्षोभ और जेट स्ट्रीम हवाओं का असर बना हुआ है. सब-ट्रॉपिकल जेट स्ट्रीम की सक्रियता के कारण वातावरण शुष्क है, जिससे रात में ठंड बनी रहती है. हालांकि आने वाले दिनों में सुबह और रात के तापमान में धीरे-धीरे स्थिरता आने की संभावना जताई जा रही है. 

ICMR का बड़ा खुलासा, 700 सडन डेथ मामलों पर रिसर्च ने कोविड वैक्सीन को लेकर भ्रांतियों को नकारा

भोपाल   देश में कोविड वैक्सीन के बाद अचानक मौतों (सडन डेथ) को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं. सवाल ये कि क्या केविड-19 वैक्सीन और सडन डेथ के बीच कोई कनेक्शन है? इन सवालों पर इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के महानिदेशक और केंद्रीय अनुसंधान विभाग के सचिव डॉ. राजीव बहल ने रिसर्च आधारित आंकड़ों के साथ स्थिति स्पष्ट की है. उन्होंने साफ कहा, '' कोविड वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है और इससे मृत्यु का खतरा नहीं, बल्कि गंभीर कोविड में मौत की संभावना 90 प्रतिशत तक कम हुई है.'' 700 अचानक मौत के मामलों पर रिसर्च ICMR के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल के अनुसार, '' आईसीएमआर द्वारा की गई केस-कंट्रोल स्टडी में सामने आया कि जिन लोगों ने वैक्सीन ली थी, उनमें अचानक मृत्यु का जोखिम उन लोगों की तुलना में 50 प्रतिशत कम था, जिन्होंने वैक्सीन नहीं ली थी. यह अध्ययन 700 सडन डेथ मामलों पर आधारित था, जिसने वैक्सीन को लेकर फैल रही भ्रांतियों को काफी हद तक खारिज किया है. कोई भी वैक्सीन काफी रिसर्च के बाद बनाई जाती है जिसमें साइड इफेक्ट व एफेकेसी पर खासा ध्यान दिया जाता है, ऐसा हर देश में होता है. आप अगर देखें तो देश में कोविडशील्ड और कोवैक्सीन ने कई लाख लोगों की जान बचाई है'' साइड इफेक्ट्स को लेकर फिर हुईं कई रिसर्च आईसीएमआर महानिदेशक ने कहा, '' वैक्सीन को लेकर शुरुआत में कुछ रेयर साइड इफेक्ट थे पर अब तो कोविड भी खत्म हो चुका है. लेकिन लोगों ने कई तरह से चीजों को वैक्सीन के साथ जोड़ लिया और कहने लगे कि ये वैक्सीन की वजह से है. इसके बाद हमने कोविड वैक्सीन को लेकर फिर कई तरह की रिसर्च की, जिसमें 700 से ज्यादा अचानक मौत के मामलों पर भी रिसर्च की गई. सडन डेथ और वैक्सीन के बीच कोई वैज्ञानिक संबंध नहीें था.'' एम्स ने भी की थी सडन डेथ पर रिसर्च इससे पहले ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज ने भी युवाओं में बढ़ते सडन डेथ व हार्ट अटैक के मामलों पर रिसर्च की थी. इसमें भी कोविड वैक्सीन और सडन डेथ पर फोकस किया गया. हालांकि, यहां भी रिसर्च में साफ कहा गया कि वैक्सीन और सडन डेथ के मामलों में कोई वैज्ञानिक संबंध नहीं था. रिसर्च में बताया गया कि युवाओं में अचानक मौत का सबसे बड़ा कारण कोरोनरी आर्टरी डिसीज यानी ह्रदय रोग हैं. सडन डेथ के मामलों में बढ़ोत्तरी को लेकर कहा गया कि ये युवाओं की खराब होती लाइफ स्टाइल का नतीजा है. पब्लिक हेल्थ को लेकर चल रही खास रिसर्च आईसीएमआर देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने के लिए दो बड़े प्रोजेक्ट एलाइड और टैरिफ पर काम कर रहा है. एलाइड स्कीम 18 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए है, जबकि टैरिफ प्रोजेक्ट शून्य से 18 वर्ष तक के बच्चों और किशोरों पर केंद्रित है. इन प्रोजेक्ट्स के तहत स्वस्थ लोगों के हीमोग्लोबिन, बायोकेमेस्ट्री और अन्य हेल्थ पैरामीटर्स का व्यापक डेटा एकत्र किया जा रहा है, जिससे भारत की विविध जनसंख्या के अनुरूप नई स्वास्थ्य नीतियां बनाई जा सकें. डॉ. बहल के अनुसार, '' इन अध्ययनों के लिए देश के हर क्षेत्र जैसे उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम और मध्य भारत से एक-एक साइट चुनी गई है, जिससे खान-पान और जीवनशैली की विविधता को सही तरीके से दर्शाया जा सके. एम्स भोपाल का पीडियाट्रिक्स विभाग भी इस प्रोजेक्ट का हिस्सा है और अगले दो वर्षों में इसके नतीजे सामने आएंगे.'' बेअसर साबित हो रहीं एंटीबायोटिक दवाएं इस रिसर्च के साथ ही आईसीएमआर डीजी ने एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस (एएमआर) को देश के लिए गंभीर खतरा बताया. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मन की बात' कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा, '' इसे लेकर कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने भी लोगों से अपील की है. एंटीबायोटिक का ओवरयूज और मिसयूज यानी जरूरत न होने पर और गलत तरीके से इस्तेमाल बैक्टीरिया को मजबूत बना रहा है. आज आम सर्दी-खांसी में भी लोग बिना डॉक्टर की सलाह एंटीबायोटिक ले लेते हैं, जिससे बैक्टीरिया रेजिस्टेंस विकसित कर लेते हैं. इसका नतीजा यह है कि यूटीआई, निमोनिया जैसी सामान्य बीमारियों में भी दवाएं बेअसर होने लगी हैं. उन्होंने साफ संदेश दिया कि एंटीबायोटिक केवल डॉक्टर की सलाह पर, सही खुराक और तय अवधि तक ही ली जानी चाहिए. डाक्टरों की रिसर्च में कम रुचि, चिंता का विषय डॉ. बहल ने मेडिकल क्षेत्र में रिसर्च को मजबूत करने के लिए डॉक्टरों को पीएचडी के लिए प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया. उन्होंने बताया कि अमेरिका में हर 100 में से तीन डॉक्टर पीएचडी करते हैं, जबकि भारत में यह संख्या बहुत कम है. यह चिंता का विषय है. इसे बढ़ाने के लिए आईसीएमआर ने एम्स, पीजीआई जैसे संस्थानों के युवा फैकल्टी को पीएचडी के लिए ग्रांट और रजिस्ट्रेशन की सुविधा दी है. उनका मानना है कि यदि 10-20 प्रतिशत मेडिकल फैकल्टी भी पीएचडी करती है, तो देश में मेडिकल रिसर्च को नई दिशा मिलेगी. कैंसर के अर्ली डिटेक्शन और इम्यून थेरेपी पर फोकस डॉ. बहल ने बताया कि कैंसर को लेकर आईसीएमआर की प्राथमिकता अर्ली डिटेक्शन है. डॉ. बहल ने कहा, '' यदि कैंसर शुरुआती चरण में पकड़ में आ जाए, तो इसके पूरी तरह ठीक होने की संभावना बहुत अधिक होती है. देर से पता चलने पर मृत्यु दर बढ़ जाती है.इलाज के क्षेत्र में इम्यून थेरेपी पिछले एक दशक की बड़ी उपलब्धि है. इसमें मोनोक्लोनल एंटीबॉडी और कार-टी सेल जैसी तकनीकें शरीर के इम्यून सिस्टम को कैंसर सेल पहचानने और नष्ट करने के लिए प्रशिक्षित करती हैं. इसके साथ ही कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए नई जांच विधियों पर भी काम चल रहा है.''

मकर संक्रांति के मौके पर मेट्रो के नए टाइम शेड्यूल की शुरुआत, भोपाल और इंदौर ट्रेन्स में बदलाव

इंदौर/ भोपाल    मध्य प्रदेश के दो शहर अब मेट्रो सिटी की श्रेणी में आ चुके हैं. इंदौर और भोपाल की पटरियों पर धड़ाधड़ मेट्रो दौड़ रही है. बताया जा रहा है कि मकर संक्रांति पर इंदौर मेट्रो के समय में कुछ परिवर्तन लाए गए हैं. मेट्रो प्रबंधन ने 11 जनवरी को नई समय सारणी जारी कर दी है. इंदौर में मेट्रो ट्रेन गांधीनगर सुपर कॉरिडोर से चलकर मालवीय नगर स्थित रेडिसन स्क्वायर तक का सफर तय करेगी. वहीं मकर संक्रांति पर इंदौर मेट्रो में क्या बदलाव लाए गए हैं, पढ़िए. इंदौर मेट्रो में आए ये बदलाव इंदौर और भोपाल मेट्रो को इतने यात्री नहीं मिल रहे हैं. इसलिए बताया जा रहा है कि मकर संक्रांति से मेट्रो ट्रेन के संचालन में बदलाव किया जा रहा है. यात्रियों की कम संख्या को देखते हुए मेट्रो का संचालन अब केवल एक फेरे में ही किया जाएगा. जिसके परिचालन का समय अब सिर्फ 25 मिनट का होगा. पहले दोपहर 1 से शाम 7 बजे तक एक घंटे के अंतराल से ट्रेन का संचालन होता था. अब मेट्रो का संचालन दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे तक कर दिया गया है. 11 किलोमीटर का ट्रैक तैयार करने का लक्ष्य मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के मुताबिक, मेट्रो रेल के संपूर्ण प्राथमिकता कॉरिडोर (गांधी नगर से मालवीय नगर चौराहा (रेडिसन चौराहे तक निर्माण कार्यों को जल्द पूरा करने के लिए समय में बदलाव किया गया है. पूरे ट्रैक यानी 16 स्टेशन तक निर्माण पूरा करने का लक्ष्य है. अभी तक मेट्रो का संचालन गांधी नगर से सुपर कॉरिडोर स्टेशन 3 तक हो रहा है, लेकिन अब 11 किलोमीटर लंबा ट्रैक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है. एमपी मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के प्रबंधक ने इंदौर मेट्रो के प्रबंधक के साथ बैठक की. बैठक में कॉरिडोर के तहत आने वाले सभी स्टेशनों का निरीक्षण किया गया. मेट्रो कॉर्पोरेशन की तैयारी प्रॉयोरिटी कॉरिडोर को जल्द पूरा करने की है. बताया जा रहा है कि 11 किलोमीटर के ट्रैक को फरवरी के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. वहीं लंबे इंतजार के बाद साल 2025 दिसंबर के आखिरी तक भोपाल मेट्रो को भी शुरू कर दिया गया है. 21 दिसंबर 2025 को भोपाल मेट्रो की शुरुआत की गई. जो शुरुआती दौर में सुभाष नगर से एम्स तक 7 किलोमीटर तक चल रही है. इस दौरान 8 स्टेशन पड़ते हैं. भोपाल मेट्रो अभी सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे तक संचालित हो रही है, हालांकि भोपाल मेट्रो का हाल भी इंदौर मेट्रो से कुछ अलग नहीं है. यहां भी मेट्रो को उतनी सवारी नहीं मिल रही है. भोपाल-इंदौर मेट्रो में शुरू होगी AFC सुविधा बताया जा रहा है कि अगले कुछ सप्ताह में भोपाल मेट्रो में एएफसी यानि ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन लागू हो जाएगा. जबकि इंदौर में 7-8 हफ्तों में डिजिटल टिकट सिस्टम प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. डीएमआरसी यानि दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन और एमपी मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के बीए एक समझौता हुआ है. जिसके तहत यह सुविधाएं शुरू होने जा रही है. एएफसी व डिजिटल टिकट प्रक्रिया में ऑनलाइन टिकट बुकिंग होती है. इस प्रक्रिया में नकद और पेपर टिकट पर निर्भरता कम हो जाती है. जैसे पैसेंजर क्यूआर कोड, स्मार्ट कार्ड, मोबाइल, यूपीआई, डिजिटल पेमेंट के जरिए टिकट बुक कर सकता है.

2026 की लोक अदालत का टाइमटेबिल – जानिए तारीखें, स्थान और शेड्यूल

नई दिल्ली दिल्ली में रहने वाले लाखों लोग हर साल लोक अदालत का इंतजार करते हैं ताकि अपने पुराने ट्रैफिक चालान कम रकम में निपटा सकें या माफ करवा सकें। 10 जनवरी 2026 को दिल्ली के लिए लोक अदालत का आयोजन किया गया था, लेकिन अगर आप किसी वजह से इस मौके का फायदा नहीं उठा पाए, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। अब 2026 में दिल्ली में लगने वाली अगली लोक अदालत की तारीखें सामने आ चुकी हैं। दरअसल, दिसंबर 2025 में होने वाली लोक अदालत को आगे बढ़ाकर 10 जनवरी 2026 कर दिया गया था और यह आयोजन केवल दिल्ली के लोगों के लिए था। इसके बाद से लोग अगली लोक अदालत की तारीख जानने का इंतजार कर रहे थे। 2026 में दिल्ली में कब-कब लगेगी लोक अदालत पहली लोक अदालत: 14 मार्च 2026 दूसरी लोक अदालत: 9 मई 2026 तीसरी लोक अदालत: 12 सितंबर 2026 चौथी लोक अदालत: 12 दिसंबर 2026 लोक अदालत क्या होती है और इसमें क्या फायदे मिलते हैं लोक अदालत एक वैकल्पिक न्याय व्यवस्था है, जहां पुराने और छोटे मामलों का निपटारा आपसी सहमति से किया जाता है। ट्रैफिक चालानों के मामले में लोक अदालत लोगों के लिए बड़ी राहत लेकर आती है। यहां पुराने पेंडिंग चालान कम राशि में निपटाए जा सकते हैं और कई मामलों में चालान पूरी तरह माफ भी हो जाते हैं। हालांकि, हर तरह के चालान लोक अदालत में नहीं निपटाए जाते। दुर्घटना से जुड़े मामले, गंभीर अपराध या क्रिमिनल केस की सुनवाई लोक अदालत में नहीं होती। आमतौर पर छोटे ट्रैफिक उल्लंघन जैसे रेड लाइट जंप करना, हेलमेट न पहनना, सीट बेल्ट न लगाना या जेब्रा लाइन पर गाड़ी खड़ी करने जैसे मामलों का निपटारा यहां किया जाता है। लोक अदालत में जाने के लिए कौन से दस्तावेज जरूरी होते हैं बहुत से लोगों को यह जानकारी नहीं होती कि लोक अदालत वाले दिन कौन-कौन से कागजात साथ ले जाने जरूरी होते हैं। अगर आपने लोक अदालत के लिए पहले से टोकन या अप्वाइंटमेंट ले रखी है, तो आपको केवल उसी टोकन या अप्वाइंटमेंट स्लिप का प्रिंट आउट साथ रखना होता है। इस स्लिप में चालान से जुड़ी पूरी जानकारी होती है, जैसे चालान कब और कहां कटा, मोटर व्हीकल एक्ट की कौन सी धारा लगी है और आपको किस कोर्ट रूम में कितने बजे पहुंचना है। इसी स्लिप के नीचे बारकोड के साथ तीन छोटी स्लिप भी होती हैं। चालान भरने के बाद इनमें से एक स्लिप आपको लोक अदालत की तरफ से दी जाती है, जो भुगतान का प्रमाण होती है। लोक अदालत क्यों है आम लोगों के लिए फायदेमंद लोक अदालत न सिर्फ समय बचाती है, बल्कि कोर्ट की लंबी प्रक्रिया और ज्यादा जुर्माने से भी राहत दिलाती है। जिन लोगों के चालान लंबे समय से पेंडिंग हैं, उनके लिए यह एक आसान और किफायती रास्ता साबित होता है। 2026 में तय तारीखों पर आयोजित होने वाली लोक अदालतें दिल्ली वालों के लिए एक बार फिर बड़ा मौका लेकर आ रही हैं।

बारां का लहसुन बनेगा वैश्विक ब्रांड, जीआई टैग से बढ़ेगी पहचान और दाम

बारां राजस्थान के कृषि मानचित्र पर अपनी खास पहचान रखने वाला बारां जिले का लहसुन अब जल्द ही वैश्विक स्तर पर पहचान हासिल करने की ओर बढ़ रहा है। जिले के लहसुन को जियोग्राफिकल इंडिकेशन (GI) टैग दिलाने के लिए कृषि उपज मंडी समिति बारां ने औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत लहसुन की भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री के लिए प्रस्ताव तैयार कर बौद्धिक संपदा कार्यालय, चेन्नई भेजा गया है। अधिकारियों को उम्मीद है कि यह प्रस्ताव शीघ्र स्वीकृत होगा और बारां के लहसुन को जीआई टैग मिल जाएगा। कृषि उपज मंडी समिति ने करीब एक माह पूर्व इस दिशा में पहल की थी। प्रस्ताव कृषि महाविद्यालय बारां, कृषि विश्वविद्यालय कोटा और राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड जयपुर के सहयोग से तैयार किया गया है। इसे ‘आवेदक समूह उत्पादकों’ के नाम से प्रस्तुत किया गया है, जो कृषि उत्पाद बाजार समिति बारां के नाम से पंजीकृत होगा। जीआई टैग मिलने से जिले के लहसुन को कानूनी संरक्षण मिलेगा और उसकी विशिष्ट पहचान सुरक्षित रहेगी। लहसुन उत्पादन में प्रदेश में अग्रणी बारां दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के हाड़ौती क्षेत्र में स्थित बारां जिला लहसुन उत्पादन के मामले में प्रदेश में अग्रणी है। औषधीय श्रेणी की इस फसल में बारां क्षेत्रफल, उत्पादन और उत्पादकता—तीनों ही दृष्टियों से राजस्थान में प्रथम स्थान रखता है। आंकड़ों के अनुसार, राज्य में औसतन 89,805 हेक्टेयर क्षेत्र में लहसुन की बुवाई होती है, जिसकी औसत उत्पादकता 5,916 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है। वहीं बारां जिले में औसतन 30,714 हेक्टेयर क्षेत्र में लहसुन की खेती होती है और उत्पादकता 6,133 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक पहुंचती है। पिछले तीन-चार वर्षों से जिले में औसतन 16 लाख क्विंटल लहसुन मंडियों में पहुंच रहा है। क्यों खास है बारां का लहसुन बारां के लहसुन की अलग पहचान का सबसे बड़ा कारण यहां की काली मिट्टी है, जिसमें पोटाश तत्व की मात्रा अधिक पाई जाती है। पोटाश लहसुन की गुणवत्ता, स्वाद और सुगंध को बेहतर बनाता है। लहसुन की कली में पाए जाने वाले ‘डाई एमिल डाई सल्फाइड’ नामक ऑर्गेनो सल्फर यौगिक के कारण इसकी तेज गंध और औषधीय गुण लंबे समय तक बने रहते हैं। कम तापमान और अनुकूल जलवायु भी इसकी गुणवत्ता को और बढ़ाती है। जीआई टैग से क्या होगा फायदा जीआई टैग किसी उत्पाद को उसकी भौगोलिक पहचान से जोड़ता है और यह प्रमाणित करता है कि उसकी गुणवत्ता और विशेषताएं उसी क्षेत्र से जुड़ी हैं। इससे नकली या मिलावटी उत्पादों पर रोक लगेगी, किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बारां के लहसुन को नई पहचान मिलेगी। अधिकारियों का मानना है कि जीआई टैग मिलने के बाद न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि जिले के कृषि और विपणन क्षेत्र को भी नई गति मिलेगी।  

CM योगी का सख्त संदेश: अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं, भूमाफियाओं पर चलेगा कानून का डंडा

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को ‘जनता दर्शन’ में विभिन्न जनपदों से आए प्रत्येक प्रार्थी से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। आमजनों के प्रार्थना पत्र लेकर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कार्रवाई का निर्देश दिया और कहा कि अवैध कब्जा कतई बर्दाश्त नहीं है। भूमाफिया और दबंगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी है और नियमित रूप से होती रहेगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को त्वरित व संतुष्टिपरक निस्तारण का निर्देश देने के साथ ही लोगों को भरोसा दिलाया कि सरकार आपकी समस्या के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री के समक्ष कुछ वादी जमीन कब्जा व मारपीट आदि की शिकायत लेकर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने हर एक व्यक्ति के पास पहुंचकर उसकी शिकायत सुनी, प्रार्थना पत्र लिया और फिर अधिकारियों को निर्देश दिया कि जनपद स्तर पर कानून व राजस्व के प्रकरण में तेजी से सुनवाई करते हुए इसका निस्तारण किया जाए। कानून व्यवस्था सरकार की प्राथमिकता में है। इसमें हीला-हवाली कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने प्रशासन और जनपद, मंडल, रेंज व जोन के पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि दबंगों व भूमाफिया के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई नियमित रूप से जारी रखें। गंभीर बीमारी से जूझ रहे कुछ पीड़ितों ने ‘जनता दर्शन’ में पहुंचकर इलाज के लिए आर्थिक सहायता की गुहार लगाई। सीएम ने कहा कि सरकार इलाज के लिए आर्थिक सहायता दे रही है। आप भी हॉस्पिटल से जल्द एस्टिमेट बनवाकर दें, एस्टिमेट मिलते ही आपके इलाज में सरकार तुरंत आर्थिक मदद करेगी। धन के अभाव में इलाज नहीं रुकेगा। ‘जनता दर्शन’ में कई बच्चे भी अपने अभिभावकों के साथ पहुंचे। नन्हे-मुन्ने बच्चों के सामने सीएम योगी का बालप्रेम फिर उमड़ पड़ा। मुख्यमंत्री ने बच्चों का हाल जाना, उन्हें दुलारा-पुचकारा और चॉकलेट दी। सीएम ने अभिभावकों से कहा कि ठंड में बच्चों का विशेष ध्यान रखें। यह अपनत्वपूर्ण भाव सुनकर अभिभावकों ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया।

लुधियाना में एनकाउंटर: पुलिस की जवाबी कार्रवाई में रोहित गोदारा गैंग के 2 बदमाश ढेर होने से बचे

लुधियाना लुधियाना में पुलिस व गैंगस्टरों के बीच मुठभेड़ की खबर सामने आई है। जानकारी के मुताबिक, औद्योगिक नगरी में पुलिस कमिश्नरेट की टीम  और लॉरेंस बिश्नोई के खासमखास रोहित गोदारा गैंग के बीच जबरदस्त मुठभेड़ हुई है। इस क्रॉस-फायरिंग में पुलिस की गोलियों का शिकार होकर गैंग के 2 खतरनाक गुर्गे घायल हो गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, पुलिस को इन गैंगस्टरों की मौजूदगी की गुप्त सूचना मिली थी। जैसे ही पुलिस ने इन्हें घेरने की कोशिश की, गैंगस्टरों ने पुलिस पार्टी पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी मोर्चा संभाला और दोनों ओर से कई राउंड फायरिंग हुई। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए दोनों बदमाशों को दबोच लिया है। मौके से 2 अवैध पिस्तौल और भारी मात्रा में जिंदा कारतूस बरामद हुए हैं। फिलहाल पुलिस ने पूरे इलाके को सील कर दिया है और घायल गैंगस्टरों को कड़ी सुरक्षा के बीच अस्पताल ले जाया गया है। पुलिस इस मामले में अब आगे की जांच कर रही है कि इनके तार और कहां-कहां जुड़े हैं।

यमुना में क्रूज सेवा का रास्ता साफ, फरवरी से संचालन की तैयारी: कपिल मिश्रा

नवी मुंबई राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अगले महीने से यमुना क्रूज शुरू होने वाला है। यमुना क्रूज को लेकर सभी तैयारी लगभग पूरी हो चुकी हैं और फरवरी महीने से दिल्लीवासी इसका आनंद उठा सकेंगे। दिल्ली के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने यह जानकारी दी। मंत्री कपिल मिश्रा ने सोमवार को यमुना क्रूज के लिए निर्माणाधीन नाव का निरीक्षण किया। उन्होंने घोषणा करते हुए कहा कि गोवा की तर्ज पर मनोरंजनात्मक नौका यात्रा और फेरी सेवाएं अगले महीने से शुरू होंगी। उन्होंने बताया कि अस्थायी रूप से "यमुना रिवर संतोष क्रूज" नाम की यमुना नौका पर्यटन और फेरी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट का उद्घाटन अगले महीने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा किए जाने की संभावना है। उत्तर पूर्वी दिल्ली में सोनिया विहार और जगतपुर के बीच वजीराबाद बैराज के ऊपरी हिस्से में स्थित यह परियोजना दिल्लीवासियों को एक नया ग्रीन टूरिज्म अनुभव प्रदान करने और पर्यावरण के अनुकूल नदी यात्रा के माध्यम से कनेक्टिविटी बढ़ाने की उम्मीद है। कपिल मिश्रा ने आईएएनएस को बताया कि क्रूज बोट 20 जनवरी को मुंबई से रवाना होगी और 3 से 4 दिनों में दिल्ली पहुंचेगी। इसका इंजन दिल्ली में लगाया जाएगा और फरवरी में मुख्यमंत्री इसका शुभारंभ करेंगी। इसके साथ ही अन्य वॉटर स्पोर्ट्स एक्टिविटीज भी शुरू होने वाली हैं। मिश्रा ने कहा कि दिल्ली सरकार किफायती दामों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर का शानदार अनुभव और मनोरंजन गतिविधियां उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह तैयार है। अंतर्देशीय जल परिवहन और कम दूरी के शहरी पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयासों के तहत बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय सोनिया विहार और जगतपुर के बीच 6-7 किलोमीटर के राउंड-ट्रिप कॉरिडोर पर 20 करोड़ रुपए की लागत से सुविधाएं विकसित करने में दिल्ली सरकार की मदद कर रहा है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और कपिल मिश्रा ने 21 जून को सोनिया विहार में यमुना के किनारे स्थित वाटर स्पोर्ट्स क्लब में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर योग किया और क्रूज सर्विस शुरू करने की योजना की घोषणा की। मुख्यमंत्री गुप्ता ने 'यमुना के साथ योग' विषय पर योग किया और नदी को साफ रखने के अपने संकल्प को दोहराया। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए गंभीरता से काम कर रही है कि नालियों का अनुपचारित पानी नदी में न जाए और यमुना में बहने वाली हर बूंद स्वच्छ हो। उन्होंने कहा कि ‘योगा विद यमुना’ पहल के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश दिया जा रहा है कि यमुना को साफ किया जा रहा है और जल्द ही नाव पर योग सत्रों के साथ-साथ क्रूज सेवाएं भी शुरू की जाएंगी। अहमदाबाद के साबरमती रिवरफ्रंट पर इसी तरह की क्रूज सुविधा है, जिसमें दोपहर का भोजन या रात का खाना शामिल है। इसकी कीमत 1,000 रुपए से 2,000 रुपए के बीच हो सकती है।

कानपुर दौरे पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, 16 जनवरी को 15 जगहों पर भव्य अभिनंदन

कानपुर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी 16 जनवरी को कानपुर दौरे पर रहेंगे। उनके दौरे को लेकर यहां पार्टी कार्यकर्ता जोर शोर से तैयारी में जुटे हुए हैं। प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व संभालने के बाद चौधरी का यह पहला कानपुर आगमन होगा। भाजपा के प्रदेश महामंत्री अनूप गुप्ता ने रविवार को प्रस्तावित स्वागत मार्ग का स्थलीय निरीक्षण किया। प्रदेश अध्यक्ष के स्वागत में नहीं रहेगी कोई कमी दोपहर लगभग तीन बजे कानपुर पहुंचे अनूप गुप्ता ने भाजपा क्षेत्रीय अध्यक्ष प्रकाश पाल सहित वरिष्ठ नेताओं के साथ जाजमऊ से लेकर एचबीटीयू तक प्रस्तावित मार्ग का गहन निरीक्षण किया। इस दौरान विभिन्न स्वागत बिंदुओं का भी निरीक्षण कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए, ताकि प्रदेश अध्यक्ष के स्वागत में किसी प्रकार की कमी न रहे। मार्ग निरीक्षण के उपरांत शाम चार बजे एचबीटीयू सभागार में प्रदेश अध्यक्ष के स्वागत को भव्य बनाने को लेकर एक वृहत बैठक आयोजित की गई। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि आगमन से पूर्व पूरे कानपुर नगर को भाजपा व भगवा झंडों, होल्डिंग्स और स्वागत द्वारों से सजाया जाएगा। महानगर के सभी प्रमुख चौराहों को विशेष रूप से सजाया जाएगा।         इन स्थानों पर होगा भव्य स्वागत   बैठक में यह भी तय हुआ कि नगर में स्थापित सभी महापुरुषों की प्रतिमाओं पर आगमन से एक दिन पूर्व विशेष स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा तथा विधिवत माल्यार्पण किया जाएगा। प्रदेश अध्यक्ष के स्वागत के लिये 15 स्थानों पर भव्य स्वागत की योजना को अंतिम रूप दिया जा रहा है, जिसमें कानपुर महानगर के 10 विधानसभा क्षेत्रों के कार्यकर्ता सहभागिता करेंगे। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी का काफिला जाजमऊ से लाल बंगला, फूलबाग, बड़ा चौराहा, चुन्नीगंज, मोतीझील होते हुए कोका-कोला चौराहा, गोल चौराहा, रावतपुर मार्ग से एचबीटीयू पहुंचेगा। एचबीटीयू में वे कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र की महत्वपूर्ण बैठक को संबोधित करेंगे।