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पटना सिटी में ट्रैफिक की तैयारी, प्रकाश उत्सव के लिए विशेष रूट डायवर्जन

पटना आगामी 25 दिसंबर से 27 दिसंबर तक पटना सिटी में आयोजित होने वाले प्रकाश उत्सव पर्व को लेकर जिला और यातायात प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। इसी क्रम में यातायात प्रशासन ने विस्तृत रूट मैप जारी करते हुए वाहनों के आवागमन पर कई तरह की पाबंदियां लागू कर दी हैं। छोटी-बड़ी गाड़ियों से लेकर बाजार समिति में आने वाली फल मंडी की गाड़ियों तक पर यातायात प्रशासन का शिकंजा रहेगा। बिहार के अलावा अन्य राज्यों से आने वाले सिख श्रद्धालुओं सहित सभी श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पटना सिटी में तीन स्थानों पर पार्किंग स्थल भी चिन्हित किए गए हैं। पटना यातायात प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार 25 दिसंबर से 27 दिसंबर तक सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज का 359वां जन्मोत्सव प्रकाश उत्सव पर्व के रूप में श्रद्धा और धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर देश-विदेश से लाखों की संख्या में सिख श्रद्धालु तख्त श्री हरमंदिर साहिब, पटना साहिब पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण चार दिनों तक पूरे इलाके में यातायात व्यवस्था प्रभावित रहती है, जिसे सुचारु बनाए रखने के लिए प्रशासन को कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। इसी को देखते हुए जिला प्रशासन ने पहले से ही वाहनों के संचालन के लिए विशेष रूट मैप तैयार किया है। यातायात प्रशासन के अनुसार 24 दिसंबर की मध्यरात्रि से 28 दिसंबर की रात 12 बजे तक भारी वाहनों, खासकर भवन निर्माण सामग्री जैसे सीमेंट, बालू और गिट्टी लदे वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। दीदारगंज की ओर से कोई भी वाहन अशोक राजपथ में पश्चिम दिशा की ओर नहीं जाएगा। ऐसे सभी वाहनों का परिचालन न्यू बाइपास के माध्यम से किया जाएगा। बाजार समिति में आवश्यक सामग्री लेकर आने वाले मालवाहक वाहनों को केवल रात्रि 2 बजे से 4 बजे तक ही माल की डिलीवरी की अनुमति होगी। इसके अलावा 25 दिसंबर की सुबह 4 बजे से 27 दिसंबर की सुबह 6 बजे तक अशोक राजपथ में गायघाट से पूर्व दरवाजा तक ऑटो और अन्य व्यावसायिक वाहनों का परिचालन पूरी तरह बंद रहेगा। इन वाहनों को गायघाट से डंका इमली, नवाब बहादुर रोड, सुदर्शन पथ, तुलसी मंडी, अगमकुआं आरओबी होते हुए पटना साहिब तक आवागमन करना होगा। मुख्य कार्यक्रम के दौरान 25 दिसंबर से 28 दिसंबर की सुबह 6 बजे तक पश्चिम दरवाजा से पूर्व दरवाजा तक सभी प्रकार के वाहनों का परिचालन पूरी तरह बंद रहेगा। वहीं, रूट मैप के अनुसार 26 दिसंबर की सुबह 4 बजे से मध्यरात्रि तक अशोक राजपथ में गायघाट से दीदारगंज तक सभी प्रकार के वाहनों के आवागमन पर रोक रहेगी। इमरजेंसी सेवाओं के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। पीएमसीएच जाने के लिए आकस्मिक स्थिति में कंगन घाट से दाहिने जेपी सेतु पथ होते हुए पहुंचा जा सकेगा, जबकि एनएमसीएच जाने के लिए गायघाट से बाएं डंका इमली मार्ग का उपयोग किया जाएगा। प्रकाश उत्सव पर्व के दौरान वाहनों की पार्किंग के लिए बाजार समिति, दीदारगंज, मंगल तालाब चौक थाना क्षेत्र और कंगन घाट चौक थाना के पास पार्किंग स्थल निर्धारित किए गए हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे जारी रूट मैप का पालन करें और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसमें सहयोग करें।  

अगले 7 दिन में सर्दी से संभलें! बिहार के इन जिलों में कोल्ड डे अलर्ट

पटना बिहार में सर्द पछुआ हवाओं ने ठंड को और तीखा कर दिया है और मौसम के इस बदले मिजाज के बीच इस मौसम में पहली बार शीत दिवस की स्थिति  बनी है, जिसे लेकर मौसम विज्ञान केंद्र ने यलो अलर्ट जारी किया है। राजधानी पटना समेत मुजफ्फरपुर, पूर्णिया और राज्य के कई जिलों में लगातार चौथे दिन रविवार को भी धूप नहीं निकल पाई है। विभाग का कहना है कि अगले सात दिनों तक प्रदेश में मौसम शुष्क बना रहेगा। इन जिलों में अलर्ट जारी मौसम विभाग (IMD)  के अनुसार, शीत दिवस के दौरान दिन और रात के तापमान में अंतर काफी कम हो जाता है। इस समय न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस या उससे नीचे चला गया है, जबकि अधिकतम तापमान सामान्य से करीब पांच डिग्री तक नीचे दर्ज किया जा रहा है। ठंडी हवाओं और धूप की कमी के कारण लोगों को दिन में भी कड़ाके की ठंड का एहसास हो रहा है। रविवार को गोपालगंज, सिवान, सारण, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, शेखपुरा, नालंदा, जहानाबाद, नवादा, औरंगाबाद, अरवल, रोहतास, भोजपुर, बक्सर, भभुआ, पटना और गया में शीत दिवस का येलो अलर्ट जारी किया गया है। इसके साथ ही मौसम विभाग ने घने कोहरे को लेकर भी चेतावनी दी है। पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर, मधुबनी, पटना, जहानाबाद, गया जी, नालंदा, नवादा और शेखपुरा में ऑरेंज अलर्ट (IMD Alert) जारी किया गया है। अगले 7 दिनों तक शुष्क बना रहेगा मौसम विभाग का कहना है कि घने कोहरे के कारण द्दश्यता में भारी कमी आ सकती है, जिससे सड़क और हवाई यातायात प्रभावित होने की आशंका है। मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, 25 दिसंबर तक मौसम में खास बदलाव की संभावना नहीं है। पटना में दिन का तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे रह सकता है, जबकि न्यूनतम तापमान 10 डिग्री तक गिरने के आसार हैं। अगले सात दिनों तक प्रदेश में मौसम शुष्क  बना रहेगा। आगे के पूर्वानुमान के अनुसार, 21 दिसंबर को पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी और मधुबनी में घने कोहरे की संभावना है। 22 दिसंबर को पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सिवान और सारण के एक- दो स्थानों पर घना कोहरा छाया रह सकता है। इसके बाद भी अगले चार से पांच दिनों तक राज्य के कई हिस्सों में मध्यम से घना कोहरा बने रहने की आशंका है। तापमान को लेकर राहत की फिलहाल कोई उम्मीद नहीं है। मौसम विभाग के अनुसार अगले तीन दिनों में अधिकतम और अगले पांच दिनों में न्यूनतम तापमान में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है।

छुट्टियों का मौका: झारखंड के स्कूल 24, 25 और 26 दिसंबर को बंद

रांची  क्रिसमस 2025 इस बार गुरुवार को पड़ रहा है। इस दिन लगभग पूरे देश के सभी स्कूलों में छुट्टी रहती है। वहीं, बात करें झारखंड की तो हर साल की तरह इस बार भी यहां के सभी स्कूलों में 25 दिसंबर यानी क्रिसमस पर छुट्टी रहने वाली है। 24 या 26 दिसंबर को भी अवकाश सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक राज्य के स्कूलों में क्रिसमस की छुट्टी के बाद सर्दियों की छुट्टियां पड़ जाएगी जिससे बच्चों में खुशी की लहर है। कई स्कूलों में 24 या 26 दिसंबर को भी अवकाश दिया जा सकता है। क्रिसमस के मौके पर मिशनरी और CBSE/ICSE स्कूलों में छुट्टी का दायरा थोड़ा ज्यादा हो सकता है। दिसंबर के अंत में झारखंड में तापमान काफी गिर जाता है, इसलिए Winter Break दिया जाता है। बच्चों में खुशी की लहर कुछ जिलों में ठंड अधिक होने पर छुट्टियां जनवरी के पहले सप्ताह तक बढ़ सकती हैं। विंटर ब्रेक का फैसला जिला प्रशासन भी मौसम को देखते हुए करता है। इस दौरान बच्चों को कुछ दिन के लिए पढ़ाई से राहत मिल जाती है।  

मेपकास्ट द्वारा प्रदेश के 170 से अधिक संस्थानों में मनाया जाएगा राष्ट्रीय गणित दिवस

प्रदेश की वैज्ञानिक पहचान होगी अधिक सशक्त भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि उज्जैन जिले का ऐतिहासिक डोंगला पुनः भारतीय ज्ञान परंपरा, खगोल विज्ञान एवं गणितीय अनुसंधान के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।डोंगला प्राचीन काल से ही समय-गणना, सूर्य गति, पंचांग निर्माण और गणना का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।यहाँ से काल-गणना, ऋतु परिवर्तन तथा खगोलीय घटनाओं का सटीक अध्ययन किया जाता रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार इस ऐतिहासिक एवं वैज्ञानिक विरासत को पुनर्जीवित करने की दिशा में सतत प्रयास कर रही है।डोंगला को गणना, खगोल और वैज्ञानिक चेतना के केंद्र के रूप में विकसित करने का यह प्रयास प्रदेश की वैज्ञानिक पहचान को और अधिक सशक्त बनाएगा। मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा राष्ट्रीय गणित दिवस के अवसर पर प्रदेशभर में गणित के महत्व को रेखांकित करने के लिए विविध जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।इसका मुख्य कार्यक्रम उज्जैन जिले के डोंगला में सोमवार 22 दिसम्बर को होगा। इसमें ‘’भारत की वैदिक गणित परंपरा” विषय पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। कार्यशाला में प्रदेश एवं देश के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञ, शोधार्थी, शिक्षाविद् एवं शिक्षक शामिल होंगे।इसमें वैदिक गणित की वैज्ञानिकता, आधुनिक गणित से उसका संबंध तथा शिक्षा में इसके अनुप्रयोग पर गहन विमर्श किया जाएगा।कार्यशाला के दौरान सहभागी सूर्य के उत्तरायण होने के खगोलीय क्षण के साक्षी भी बनेंगे, जो भारतीय ज्योतिष, गणित और खगोल विज्ञान की समृद्ध परंपरा से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ने का एक दुर्लभ एवं प्रेरक अनुभव प्रदान करेगा। मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा प्रदेश के लगभग 38 जिलों में 170 से अधिक विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, वैज्ञानिक संस्थाओं, स्वैच्छिक संगठनों एवं विद्यालयों में गणित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।इन कार्यक्रमों के अंतर्गत व्याख्यान, प्रतियोगिताएं, संवाद सत्र एवं प्रदर्शनियां आयोजित होंगी। विद्यार्थियों और आमजन तक गणित की उपयोगिता, तार्किक सोच और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पहुंचाने में स्वैच्छिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय गणित दिवस 22 दिसम्बर को महान भारतीय गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य युवाओं में गणित के प्रति रुचि बढ़ाना, तार्किक एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना तथा यह संदेश देना है कि गणित देश के वैज्ञानिक, तकनीकी और आर्थिक विकास की सशक्त आधारशिला है।  

6720 ग्राम पंचायतों में किया जा चुका किसान पाठशाला का आयोजन

किसान पाठशाला 10 दिन में 4.37 लाख पुरुष व 2.61 लाख महिला किसान हुईं लाभान्वित  लखनऊ योगी सरकार के निर्देश पर किसानों को आधुनिक खेती व खेती में नवाचार के लिए नियमित रूप से प्रशिक्षित किया जा रहा है। कृषि विभाग के तत्वावधान में इस वर्ष रबी सीजन में भी किसानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 12 दिसंबर को बाराबंकी में पद्मश्री किसान रामसरन वर्मा के गांव दौलतपुर से किसान पाठशाला 8.0 रबीः 2025-26 का शुभारंभ किया था। 10 दिन में 6.98 लाख किसानों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। यह पाठशाला 29 दिसंबर तक चलेगी। 10 दिन में 4.37 लाख पुरुष व 2.61 लाख महिला किसानों को दिया गया प्रशिक्षण  कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि इस कार्यक्रम का आयोजन प्रदेश के 21 हजार ग्राम पंचायतों में कराए जाने के लिए जनपदीय व मंडलीय कार्यालयों को निर्देश दिया गया था। इस क्रम में 12 दिसंबर से 21 दिसंबर (10 दिन) तक 6720 ग्राम पंचायत स्तरीय गोष्ठी/ किसान पाठशाला का आयोजन किया जा चुका है। 10 दिन में 6.98 लाख किसानों को कृषि व सहवर्ती विभागों की योजनाओं एवं कृषि विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों व कृषि विज्ञान केंद्रों में किए जा रहे नवाचारों से प्रशिक्षित किया गया। 6.98 लाख किसानों में 4.37 लाख पुरुष व 2.61 लाख महिला किसान शामिल हैं।  अब तक लगभग दो करोड़ किसानों को किया जा चुका प्रशिक्षित  कृषि विभाग के मुताबिक किसान पाठशाला के अंतर्गत 2017-18 से अब तक लगभग दो करोड़ से अधिक किसानों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है। किसान पाठशाला का उद्देश्य किसानों को आधुनिक खेती के लिए शिक्षित करना और उनकी आय दोगुनी करना है। योगी सरकार की इस पहल का उद्देश्य किसानों को आधुनिक खेती की तकनीक, प्राकृतिक खेती, फसल प्रबंधन, सरकारी योजनाओं और आय बढ़ाने के तरीकों की व्यावहारिक ट्रेनिंग देना है, जिससे वे कम लागत में बेहतर पैदावार कर सकें और आत्मनिर्भर बनें। इसमें फसल सुरक्षा, मृदा स्वास्थ्य, बागवानी, नई तकनीक समेत विभिन्न पहलुओं पर जानकारी दी जाती है।

ग्रामीण महिलाओं को मिले रोजगार के अवसर तो नाविक के चेहरे खिले

गंगा नदी के तटीय गांवों में सज रही है उपलों और मिट्टी के चूल्हों की मंडी माघ मेले में साधु संतों और कल्पवासियों के अस्थाई शिविरों में रहती है उपलों और मिट्टी के चूल्हों की मांग मेला प्रशासन द्वारा मेला में हीटर और छोटे एलपीजी सिलेंडर पर लगी पाबंदी से बढ़ी उपलों और मिट्टी के चूल्हों की मांग   प्रयागराज प्रयागराज में त्रिवेणी के तट पर  03 जनवरी 2026 से आयोजित होने जा रहे  माघ मेला 2026 की शुरूआत के लिए अब दो हफ्ते का समय है । आस्था और अध्यात्म के यह महा समागम लाखों लोगों की जीविका का जरिया भी बन रहा है। महाकुंभ नगर के अंतर्गत आने वाले गांवों में की ग्रामीण महिलाओं की जीविका के महाकुंभ ने नए अवसर दे दिए हैं।   15 हजार से अधिक ग्रामीण परिवारों के लिए जीविका का जरिया संगम किनारे 3 जनवरी 2026 से आयोजित होने जा रहा माघ मेला होटल, ट्रैवल और टेंटेज , फूड जैसे औद्योगिक सेक्टर के साथ छोटे मोटे काम करने वाले लोगों के लिए भी जीविका के अवसर प्रदान कर रहा है। गंगा किनारे आकार ले रही तंबुओं के इस नगर के अंतर्गत आने वाले 27 गांवों में पशुपालन से जुड़े कार्य में लगे परिवारों की 15 हजार से अधिक आबादी के लिए इस आयोजन ने जीविका का जरिया दे दिया है। नदी किनारे बसे कई गाँवों में इन दिनों ईंधन के परम्परागत रूप उपलों का नया बाजार विकसित होने लगा है। इन गाँवों में नदी किनारे बड़ी तादाद में उपलों की मंडी बन गई है । गाँवों में इन दिनों गोबर से बने उपलों को बनाने में स्थानीय महिलाएं पूरे दिन लगी रहती हैं । मेला क्षेत्र के गंगा किनारे बसे बदरा सोनौटी गांव की विमला यादव का कहना है कि घर में चार भैंस और गाय हैं जिनसे साल भर हम उपले बनाते हैं और इन्हें इकट्ठा करते रहते हैं। माघ के महीने में कल्पवास करने आने वाले कल्पवासियों के यहां इनको भेजते हैं। मलावा खुर्द गांव की आरती सुबह से ही अपने घर की आम तौर पर खाली रहने वाली महिलाओं के साथ मिट्टी के चूल्हे तैयार करने में जुट जाती हैं। आरती बताती हैं कि माघ मेले में कल्पवास करने आने वाले श्रद्धालुओं का खाना इन्ही चूल्हों पर तैयार होता है । इसके लिए अभी तक उनके पास सात हजार मिट्टी के चूल्हे तैयार करने के ऑर्डर मिल चुके हैं। साधु संतो के शिविरों में भी इनके उपले और चूल्हों की मांग अच्छी मांग है ।  नाविकों की संख्या में इजाफा, महाकुंभ की आमदनी का असर  प्रयागराज सर्वाधिक कमाई करने वाले नाविक समाज में इस बार माघ मेले को लेकर सबसे अधिक उम्मीदें हैं। लगभग कर निषाद परिवार इस समय नई नाव संगम में उतारने की तैयारी में लगा है जिसके पीछे महाकुम्भ 2025 का उसका सुखद अनुभव है। दारागंज के दशाश्वमेध घाट की निषाद बस्ती में रहने वाले बबलू निषाद बताते हैं कि उन्होंने अपने रिश्तेदारों तक को माघ मेले के एक महीने के लिए बुला लिया है। माघ मेले में सरकार की तरफ से जिस तरह 12 से 15 करोड़ लोगों के आने का अनुमान है उसमें अगर 5 करोड़ भी नावों से त्रिवेणी आए तो एक बार नाविक समाज की तकदीर बन जाएगी।  शिविरों में बिजली के हीटर और छोटे एलपीजी सिलेंडर के इस्तेमाल में लगी रोक बनी सहायक महाकुंभ के आयोजन के बाद कल्पवास करने की शुरुआत करने वालों की संख्या में हर बार इजाफा होता है। एडीएम मेला दयानंद प्रसाद के मुताबिक इस बार माघ मेले में 6 हजार से अधिक संस्थाएं बसाई जा रही हैं । इसमें 4 लाख से अधिक कल्पवासियों को भी जगह मिलेगी । मेला क्षेत्र में बड़ी संस्थाएं वैसे तो कुकिंग के गैस के बड़े सिलेंडर का इस्तेमाल करती हैं क्योंकि इन्हें प्रतिदिन लाखों लोगों को भोजन कराना होता है। लेकिन धर्माचार्यों, साधु संतों और कल्पवासी अभी भी अपनी पुरानी व्यवस्था के अंदर ही खाना बनाते हैं। कुछ स्थानों पर आग लगने की घटनाओं में हीटर और छोटे गैस सिलेंडर का इस्तेमाल बड़ी वजह पाई जाने के मेला प्रशासन ने शिविरों में हीटर और छोटे गैस सिलेंडर के इस्तेमाल पर रोक लगा दी । इस नई व्यवस्था की वजह से भी अब गांव की इन महिलाओं के हाथ से बने उपलों और मिट्टी के चूल्हों की मांग बढ़ गई है। तीर्थ पुरोहित प्रदीप तिवारी बताते हैं कि तीर्थ पुरोहितों के यहां ही सबसे अधिक कल्पवासी रुकते हैं। उनकी पहली प्राथमिकता पवित्रता और परम्परा होती है इसके लिए वह मिट्टी के चूल्हों पर उपलों से बना भोजन ही बनाना पसंद करते हैं।

स्वच्छता का सिंहासन बरकरार रखने की कवायद, इंदौर को 9वीं बार नंबर-1 बनाने महापौर ने की मैदानी समीक्षा

इंदौर स्वच्छता में लगातार आठ वर्षों से देशभर में सिरमौर बने इंदौर ने एक बार फिर स्वच्छ सर्वेक्षण की तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी परिप्रेक्ष्य में शहर को स्वच्छता के क्षेत्र में निरंतर अग्रणी बनाए रखने और इसे और सशक्त करने के उद्देश्य से रविवार सुबह महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने जोन तीन अंतर्गत रामबाग लोखंडे पुल के पास क्षेत्रीय सफाई मित्रों के साथ आत्मीय संवाद किया। चाय एवं पोहा पर स्वच्छता व्यवस्था को लेकर चर्चा महापौर ने सफाई मित्रों के साथ चाय एवं पोहा पर स्वच्छता व्यवस्था को लेकर चर्चा की और उनसे सुधार के सुझाव भी मांगे। इस दौरान सफाई व्यवस्था को बनाए रखने में आ रही व्यवहारिक चुनौतियों और आवश्यक सुधारों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। इस अवसर पर क्षेत्रीय पार्षद सुरेश टाकलकर, गजानंद गावडे, जोनल अधिकारी, स्वास्थ्य अधिकारी, सीएसआई सहित बड़ी संख्या में सफाई मित्र उपस्थित रहे। सफाई मित्रों का आभार महापौर ने सफाई मित्रों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे इंदौर की स्वच्छता व्यवस्था की रीढ़ हैं। उनके समर्पण, मेहनत और अनुशासन के कारण ही इंदौर लगातार देश में स्वच्छता के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहा है। उन्होंने सफाई मित्रों से अपने अनुभव साझा करने का आग्रह किया और आश्वासन दिया कि उनकी समस्याओं एवं आवश्यकताओं का प्राथमिकता से निराकरण किया जाएगा।

लेखपाल भर्ती पर बड़ा फैसला: सीएम योगी ने दिखाई सख्ती, आरक्षण संबंधी खामियों पर लगेगी रोक

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नाराजगी और कड़े निर्देशों के बाद लेखपाल भर्ती प्रक्रिया में सामने आई आरक्षण संबंधी विसंगति अब दूर होने जा रही है। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) ने 12 दिसंबर को लेखपाल के 7994 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया था, लेकिन इसमें 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का समुचित पालन न होने को लेकर सवाल खड़े हो गए थे। यूपीएसएसएससी को पत्र भेज दी गई जानकारी मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद राजस्व परिषद ने यूपीएसएसएससी को पत्र भेजकर श्रेणीवार रिक्तियों में संशोधन की जानकारी दी है। परिषद ने स्पष्ट किया है कि संशोधित पदों का विवरण एक सप्ताह के भीतर आयोग को भेज दिया जाएगा। आरक्षण में विसंगति का मुद्दा उठाया गया था यूपीएसएसएससी द्वारा जारी विज्ञापन के अनुसार लेखपाल के स्थायी पदों में अनारक्षित (सामान्य) वर्ग के 4185, अनुसूचित जाति के 1446, अनुसूचित जनजाति के 150, अन्य पिछड़ा वर्ग के 1441 और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए 792 पद निर्धारित किए गए थे। इन्हीं आंकड़ों को लेकर आरक्षण में विसंगति का मुद्दा उठाया गया था।   मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आपत्ति जताई थी इस संबंध में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आपत्ति जताई थी। पत्र पर संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आरक्षण व्यवस्था का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। चयन आयोग को प्रस्ताव भेजा गया राजस्व परिषद की आयुक्त एवं सचिव कंचन वर्मा ने यूपीएसएसएससी को भेजे पत्र में बताया कि मंडलायुक्तों द्वारा मंडल स्तर पर स्वीकृत पदों के सापेक्ष कार्यरत लेखपालों के आधार पर रोस्टरवार (लंबवत एवं क्षैतिज आरक्षण सहित) श्रेणीवार रिक्तियों की गणना कर अधियाचन उपलब्ध कराया गया था। इसी आधार पर चयन आयोग को प्रस्ताव भेजा गया। श्रेणीवार रिक्तियों में संशोधन की संभावना हालांकि, अब जिला स्तर पर कार्यरत और रिक्त लेखपाल पदों की श्रेणीवार गणना से जुड़े कुछ नए तथ्य सामने आए हैं। इसके चलते आयोग द्वारा जारी विज्ञापन में दर्शाई गई श्रेणीवार रिक्तियों में संशोधन की संभावना है। राजस्व परिषद ने स्पष्ट किया है कि संशोधित जानकारी एक सप्ताह के भीतर आयोग को भेज दी जाएगी। 

आमजन से जुड़ा बजट: 22 दिसंबर को सामाजिक न्याय संचालनालय में ‘बजट पर संवाद’ कार्यक्रम

भोपाल  वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिये बजट तैयारी के संबंध में 'बजट पर संवाद' 22 दिसम्बर को सामाजिक न्याय एवं दिव्यांग कल्याण संचालनालय भोपाल में सुबह 10:30 बजे से होगा। बजट पर संवाद में उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा विभिन्न क्षेत्रों के विषय विशेषज्ञों के साथ चर्चा कर आगामी बजट को अधिकाधिक जनोपयोगी और प्रभावशाली बनाए जाने के लिए बहुमूल्य सुझाव प्राप्त करेंगे। वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प को पूर्ण करने में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में कृत संकल्पित है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए और आम जनता से जुड़ी हुई विभिन्न सुविधाओं को प्रदान करने के लिए उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा के निर्देशन में वित्त विभाग बजट की तैयारी कर रहा है। इसमें विभिन्न क्षेत्रों जैसे बैंकिंग, ग्रामीण- विकास, जनजाति, आर्थिक एवं वाणिज्यिक, जेंडर बजट, पर्यावरण के विशेषज्ञों से सुझाव प्राप्त करने के लिये बजट पर संवाद किया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा ग़रीब,किसान, युवा, नारी शक्ति पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यह लगातार पाँचवाँ वर्ष है जब 'बजट पर संवाद' आयोजित किया जा रहा है। 'बजट पर संवाद' कार्यक्रम में बैंकिंग, अर्थशास्त्र, वित्त आयोग, उद्योग क्षेत्र के विशेषज्ञों के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों जैसे कृषि, उद्यान, चिकित्सा, चार्टर्ड एकाउंटेंसी, फिल्म, में सफलता पूर्वक कार्य कर रहे हितधारकों को भी सुझाव देने के लिये आमंत्रित किया जा रहा है। आम जनता से समाचार पत्रों, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (https://mp.mygov.in/group-issue/mpbudget/), दूरभाष (0755-2700800), ई-मेल (budget.mp@mp.gov.in) व पत्राचार के माध्यम से उनके सुझाव प्राप्त किए गए हैं। इससे विकास की राह पर निरंतर आगे बढ़ रहे मध्यप्रदेश के आगामी बजट में अपने सुझावों के माध्यम से सहभागिता निभाकर प्रदेश की प्रगति और समृद्धि में आम जनता भी अपना योगदान दे सकेगी।  

दिल्ली-NCR के भविष्य की सुरक्षा: अखिलेश यादव ने अरावली संरक्षण पर दी लंबी पोस्ट

लखनऊ सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दिल्लीवासियों को अरावली पहाड़ियों को बचाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अरावली को बचाना कोई विकल्प नहीं बल्कि संकल्प होना चाहिए। एक्स पर लिखे गए एक लंबे संदेश में उन्होंने कहा कि बची रहे जो ‘अरावली’ तो दिल्ली रहे हरीभरी! उन्होंने कहा कि अरावली को बचाना कोई विकल्प नहीं है बल्कि ये तो संकल्प होना चाहिए। मत भूलिए कि अरावली बचेगी तो ही एनसीआर बचेगा। अरावली को बचाना अपरिहार्य है क्योंकि यह दिल्ली और एनसीआर के लिए एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच है या कहें क़ुदरती ढाल है। अरावली ही दिल्ली के ओझल हो चुके तारों को फिर से दिखा सकती है, पर्यावरण को बचा सकती है। अरावली पर्वतमाला ही दिल्ली के वायु प्रदूषण को कम करती है और बारिश-पानी में अहम भूमिका निभाती है। अरावली से ही एनसीआर की जैव विविधता बची हुई है। जो वेटलैंड गायब होते चले जा रहे हैं, उन्हें यही बचा सकती है। गुम हो रहे परिंदों को वापस बुला सकती है। अरावली से ही एनसीआर का तापमान नियंत्रित होता है। इसके अलावा अरावली से एक भावात्मक लगाव भी है जो दिल्ली की सांस्कृतिक-ऐतिहासिक धरोहर का हिस्सा है। अरावली को बचाना, दिल्ली के भविष्य को बचाना है, नहीं तो एक-एक साँस लेने के लिए संघर्ष कर रहे दिल्लीवासी स्मॉग जैसे जानलेवा हालात से कभी बाहर नहीं आ पाएंगे। आज एनसीआर के बुज़ुर्ग, बीमार और बच्चों पर प्रदूषण का सबसे ख़राब और ख़तरनाक असर पड़ रहा है। यहाँ के विश्व प्रसिद्ध हॉस्पिटल और मेडिकल सर्विस सेक्टर तक बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जो लोग बीमारी ठीक करने दिल्ली आते थे, वो अब और बीमार होने नहीं आ रहे हैं। – यही हाल रहा तो उत्तर भारत के सबसे बड़े बाज़ार और आर्थिक केंद्र के रूप में भी दिल्ली अपनी अहमियत खो देगी। – ⁠विदेशी तो छोड़िए, देश के पर्यटक भी यहाँ नहीं आएंगे। – ⁠न ही दिल्ली में कोई बड़ा इवेंट आयोजित होगा। – ⁠न ही कोई राजनीतिक, शैक्षिक, अकादमिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक सम्मेलन आयोजित होगा। – ⁠न ही ओलंपिक, कॉमनवेल्थ या एशियाड जैसी कोई बड़ी खेल प्रतियोगिता आयोजित होगी। – ⁠यहाँ का होटल, रेस्टोरेंट, टैक्सी-कैब, गाइड, हैंडीक्राफ़्ट बिज़नेस, हर काम-कारोबार व अन्य सभी आर्थिक-सामाजिक गतिविधियाँ ठप्प हो जाने के कगार पर पहुँच जाएंगी। – ⁠जब प्रदूषण की वजह से हवाई जहाज़ नहीं चलेंगे, ट्रेनें घंटों लेट होंगी, सड़क परिवहन असुरक्षित हो जाएगा, तो दिल्ली कौन आएगा। – ⁠यहाँ तक कि इसका असर ये भी पड़ेगा कि लोग अपने बेटी-बेटे की शादी तय करने से पहले दिल्ली के हवा-पानी के बारे में सोचने लगेंगे। – ⁠इसीलिए हर नागरिक के साथ हर स्कूल-कोचिंग, हर व्यापारी, हर कारोबारी, हर दुकानदार, हर रेहड़ी-पटरीवाले, हर घर-परिवार तक को ‘अरावली बचाओ’ अभियान का हिस्सा बनना चाहिए। – ⁠हर चैनल, हर अख़बार को ये अभियान चलाना चाहिए। अरावली को बचाना मतलब ख़ुद को बचाना है। अगर अरावली का विनाश नहीं रोका गया तो भाजपा की अवैध खनन को वैध बनाने की साज़िश और ज़मीन की बेइंतहा भूख देश की राजधानी को दुनिया की ‘प्रदूषण राजधानी’ बना देगी और लोग दिल्ली छोड़ने को बाध्य हो जाएंगे। इसीलिए आइए हम सब मिलकर अरावली बचाएं और भाजपा की गंदी राजनीति को जनता और जनमत की ताक़त से हराएं! उनका ये संदेश सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है।