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शुक्रवार को पंजाब में बड़ा ऐलान! 19 जिलों में बदले हालात, जानें पूरी खबर

चंडीगढ़ ट्रेन का सफर करने वाले यात्रियों के लिए बेहद जरूरी खबर है। दरअसल, कल यानी 5 दिसंबर को पंजाब में किसानों द्वारा रेलवे ट्रैक जाम करने का बड़ा ऐलान किया गया है। किसानों ने एक बार फिर “रेल रोको आंदोलन” की कॉल दी है। इसके चलते कल पंजाब में कई ट्रेनों को रोका जाएगा, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। अगर आपका भी कल ट्रेन से सफर करने का प्लान है, तो सोच-समझकर ही घर से निकलें। मिली जानकारी के अनुसार, किसान-मज़दूर मोर्चा और किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने यह कॉल दी है। आंदोलन के दौरान दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक ट्रेनों की आवाजाही पूरी तरह ठप रहेगी। किसानों की ओर से राज्य के 19 जिलों में 26 स्थानों पर ट्रेनों को रोका जाएगा। किसानों का कहना है कि उनकी मांगे पूरी नहीं की जा रही हैं, जिसके चलते उन्हें यह विरोध प्रदर्शन करना पड़ रहा है।  उनकी प्रमुख मांगों बिजली सुधार बिल 2025 को रद्द करना, एमएसपी की कानूनी गारंटी, प्रीपेड मीटर हटाकर दोबारा पुराने मीटर लगाना शामिल हैं। किसानों का आरोप है कि सरकार उनकी समस्याओं और मांगों पर ध्यान नहीं दे रही, इसलिए वे मजबूरी में आंदोलन कर रहे हैं। साथ ही किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही उनकी मांगे नहीं मानीं, तो वे संघर्ष और भी तेज करेंगे। 

जालौन में जल क्रांति : योगी आदित्यनाथ सरकार की नीतियों से सुधरा भूजल और किसानों का भविष्य

जिले में दो मीटर तक बढ़ा भूजल स्तर, बदली खेतों की तस्वीर पानी की उपलब्धता से कृषि चक्र हुआ स्थिर, पलायन में आई भारी कमी लखनऊ  कभी सूखे खेतों और गहराते जल संकट के लिए पहचाने जाने वाला जालौन आज उत्तर प्रदेश में जल संरक्षण की एक मजबूत मिसाल बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीतियों और निरंतर प्रयासों ने इस जिले की भाग्य रेखा को बदलने का काम किया है। जो जालौन कभी एक-एक बूंद के लिए संघर्ष करता था आज वहीं कई ब्लॉकों में भूजल स्तर 2 मीटर बढ़ा है और कहीं- कहीं तो अधिक सुधर चुका है। यह परिवर्तन एक दिन में नहीं आया। पिछले कुछ वर्षों में जिले में हजारों जल संरक्षण संरचनाएं बनी हैं। चेक डैमों से लेकर पुनर्जीवित तालाबों तक खेतों में बनाए गए फार्म पॉन्ड्स तक इन सबने जालौन में जल पुनर्भरण के मजबूत ढांचे का निर्माण किया है। बारिश का पानी अब इकट्ठा होकर जमीन में जाने लगा है, इससे भूजल वाटर लगातार रिचार्ज हो रहा है। जालौन के कई हिस्सों में किसान आवश्यकता के समय सिंचाई के लिए भूजल नहीं प्राप्त कर पाते थे। लेकिन आज बेहतर वाटर टेबल की वजह से कई ब्लॉकों में ट्यूबवेल पंपिंग के घंटे 1 से 5 गुना तक बढ़ गए हैं। बिजली आपूर्ति में सुधार और भूजल स्तर बढ़ने से किसान अब 2 से 3 अतिरिक्त घंटे पानी निकाल पा रहे हैं। इससे सिंचाई लागत कम हुई है और कृषि चक्र स्थिर हुए हैं। जालौन जिले के अंतर्गत गांव सैद नगर की निवासी महिला विद्या का कहना है कि योगी जी की सरकार ने पानी के मामले में अत्यंत सराहनीय काम किया है। खेती किसानी के लिए जहां सिंचाई व्यवस्था दुरुस्त हुई है वही हम महिलाओं को अब दूर से पानी लेने नहीं जाना पड़ता है। सरकार ने बहुत बड़ा काम किया है इसके लिए हम सभी सरकार के अत्यंत आभारी हैं। पानी की उपलब्धता ने कृषि को नई दिशा दी है। खरीफ में धान और बाजरा जैसे फसलों के क्षेत्रफल और पैदावार में तेज वृद्धि दर्ज की गई है जबकि रबी उत्पादन भी बेहतर हुआ है। बुंदेलखंड पैकेज के तहत दालों और तिलहनी फसलों के उत्पादन में 20 से 30 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है जिससे किसानों को स्थिर और भरोसेमंद आय का स्रोत मिला है। कृषि से आगे बढ़कर सामाजिक स्तर पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव दिखाई दे रहा है। कभी बुंदेलखंड के अन्य इलाकों की तरह जालौन भी मौसमी पलायन की समस्या से जूझता था। पानी की उपलब्धता बढ़ने फसल स्थिर होने और अनिश्चितता घटने से अब पलायन में भारी कमी आई है। किसानों में यह विश्वास लौट आया है कि उनकी जमीन खरीफ और रबी दोनों मौसमों में उन्हें संभालेगी। इस सफलता में आम जनता की भागीदारी ने भी अहम भूमिका निभाई है। जल पंचायतों और पानी पाठशालाओं जैसे कार्यक्रमों ने स्थानीय स्वामित्व की भावना बढ़ाई है और जल संरक्षण को सरकारी योजना के बजाय सामुदायिक आंदोलन का रूप दिया है। यह सामूहिक उपलब्धि राष्ट्रीय स्तर पर तब सम्मानित हुई जब जालौन को राष्ट्रीय जल पुरस्कार 2024 में उत्तर क्षेत्र का सर्वश्रेष्ठ जिला चुना गया। कमी से समृद्धि की यात्रा में यह एक गौरवशाली उपलब्धि है। जालौन की यह कहानी बताती है कि लगातार नीति समुदाय की साझेदारी और दृढ़ संकल्पित शासन क्या बदलाव ला सकते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व और बुंदेलखंड क्षेत्र के लोगों के प्रति उनकी संवेदना ने जल क्रांति के मामले में ऐतिहासिक मिसाल कायम की है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पंच प्रण को बताया शाश्वत मंत्र

गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह-2025 के शुभारंभ अवसर पर आत्मनिर्भर व विकसित भारत का भी जिक्र किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए पंच प्रण को शाश्वत मंत्र बताया। सीएम योगी ने कहा कि पीएम मोदी ने आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान देशवासियों के सामने लक्ष्य रखा कि 2047 में देश जब आजादी का शताब्दी महोत्सव मना रहा होगा, तब हमें आत्मनिर्भऱ, विकसित भारत चाहिए। जहां हर व्यक्ति खुशहाल और परस्पर सौहार्द के साथ मिलकर दुनिया की महाशक्ति के रूप में स्थापित करने के लिए अपनी भूमिका का निर्वहन कर रहा हो। वहां जाति, भाषा, क्षेत्र का विवाद और अभाव न हो। कोई नागरिक आपदा का शिकार न हो। हर व्यक्ति आत्मनिर्भर व स्वावलंबन का जीवन व्यतीत करते हुए राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन कर सके। सीएम ने कहा कि भारत विकसित तब हो सकता है, जब हर व्यक्ति पंच प्रण पर ध्यान दे।  एसडीआरएफ के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह-2025 का शुभारंभ किया।  सीएम ने पंच प्रण को बताया शाश्वत मंत्र  सीएम ने पंच प्रण को शाश्वत मंत्र बताया और कहा कि यह हर नागरिक पर समान रूप में लागू होते हैं।  पहला प्रणः विरासत पर गौरव की अनुभूति यानी पूर्वजों की थाती। हर भारतवासी को पूर्वजों, संस्कृति, महापुरुषों पर गौरव की अनुभूति करनी चाहिए। महाराणा प्रताप, गुरु गोविंद सिंह महाराज, छत्रपति शिवाजी महाराज, रानी लक्ष्मीबाई, पं. रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, रोशन सिंह उसी परंपरा के नायक हैं, जिसे हर भारतवासी विरासत कहता है। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण व धर्मध्वजा का आरोहण विरासत की श्रृंखला की महत्वपूर्ण कड़ी है।  दूसरा प्रणः गुलामी के अंशों को पूरी तरह समाप्त करना- सीएम ने कहा कि बीच के कालखंड में हर देशवासी भूल गया कि जब दुनिया अंधकार में थी, तब भारत बड़ी ताकत था। दो हजार वर्ष पहले दुनिया की अर्थव्यवस्था में भारत का हिस्सा 46 फीसदी और चार सौ वर्ष पहले भारत की भागीदारी का हिस्सा 26 फीसदी था। देश जब आजाद हुआ, तब दुनिया की अर्थव्यवस्था में भारत का हिस्सा महज डेढ़ फीसदी रह गया था। अंग्रेज व विदेशी आक्रांता जब भारत को लूटकर ले गए थे, उसकी कीमत उस समय लगभग 32-35 ट्रिलियन डॉलर के बराबर थी। आज भारत की अर्थव्यवस्था मात्र चार ट्रिलियन डॉलर की है। अब भारत दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित हुआ है। हाल के सर्वे के मुताबिक दुनिया ने माना है कि भारत सबसे तेज गति के साथ बढ़ने वाला राष्ट्र बन गया है। भारत की यात्रा शानदार इसलिए है, क्योंकि हमने विरासत पर गौरव की अनुभूति की और गुलामी के अंशों को समाप्त किया।  तीसरा प्रणः सैन्य बलों का सम्मानः सैनिक, यूनिफॉर्म धारी फोर्स (सेना, अर्धसेना, पुलिस बल) का सम्मान करना है। उनके बलिदान व सेवाओं के प्रति सम्मान व कृतज्ञता होनी चाहिए।  चौथे प्रण की चर्चा कर सीएम योगी ने कहा कि विदेशी आक्रांता इसलिए सफल हुए, क्योंकि हम विभाजित थे, जाति-क्षेत्र, भाषा के नाम पर बंटे थे। पड़ोस में आग लगी है और हम निश्चिंत बैठे हैं तो देर-सवेर आग आप तक भी पहुंचेगी। सामाजिक विद्वेष की खाई को चौड़ा होने से रोकना होगा। हमारी पहचान राष्ट्रीयता के आधार पर होनी चाहिए। सामाजिक भेदभाव की खाई को दूर करना, राष्ट्रीय एकता के लिए प्राण प्रण से जुड़ना होगा।  पांचवें प्रण के रूप में नागरिकों कर्तव्यों का निर्वहन का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि दूसरों के ऊपर कानून लागू होगा और हमारे ऊपर नहीं होगा। यही प्रवृत्ति ही सारी समस्याओं की जड़ है। कानून दूसरों के लिए है तो मेरे लिए भी होना चाहिए। सीएम ने कहा कि छात्र, शिक्षक, व्यापारी, जनप्रतिनिधि समेत हर नागरिक अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन करता है तो पंच प्रण आत्मनिर्भर व विकसित भारत की संकल्पना को आगे बढ़ाने में सहायक बनेगा। यदि देश एक दिशा में कार्य करने लग जाएगा तो 2047 आते-आते भारत विकसित होगा।  समारोह में महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, जिला पंचायत अध्यक्ष साधना सिंह, कुलपति प्रो. पूनम टंडन, प्रो. जेपी सैनी, प्रो. रविशंकर सिंह, डॉ. सुरेंद्र सिंह, विधायक फतेह बहादुर सिंह, विपिन सिंह, महेंद्र पाल सिंह, इंजी. सरवन निषाद, प्रदीप शुक्ला, विधान परिषद सदस्य डॉ. धर्मेंद्र सिंह, रतनपाल सिंह, पूर्व महापौर अंजू चौधरी आदि मौजूद रहे।

प्रदेश को एडवेंचर हब बनाने की मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड की पहल

भोपाल  पर्यटन, संस्कृति और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश को प्रमुख पर्यटन गंतव्य बनाने के लिये विभिन्न आयोजन एवं गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं। इसी क्रम में मध्यप्रदेश को एडवेंचर टूरिज्म का हब बनाने के उद्देश्य से उज्जैन में स्काई-डाइविंग के पाँचवे संस्करण का आयोजन 12 दिसंबर 2025 से 15 फरवरी 2026 तक दताना एयरस्ट्रिप, उज्जैन में किया जाएगा। उज्जैन में दो माह की अवधि के लिए पर्यटक 10 हजार फीट की ऊँचाई से छलांग लगाकर महाकाल की नगरी के नए और रोमांचकारी दर्शन का अवसर प्राप्त करेंगे। राज्य मंत्री श्री लोधी ने बताया कि स्काई-डाइविंग फेस्टिवल के चार सफल संस्करणों और एडवेंचर गतिविधियों के प्रति पर्यटकों के उत्साह को देखते हुए इस वर्ष पाँचवे संस्करण का आयोजन किया जा रहा है। विगत चार संस्करणों में 700 से अधिक पर्यटकों ने इस रोमांचक गतिविधि का आनंद लिया है। दताना एयरस्ट्रिप पर एडवेंचर प्रेमी आसमान में उड़ने के रोमांच का अनुभव कर सकेंगे। स्काई डाइविंग का शुल्क तीस हज़ार रुपये प्लस जीएसटी रखा गया है। इसका समय प्रतिदिन सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक निर्धारित है। इच्छुक प्रतिभागी www.skyhighindia.com पर बुकिंग  कर सकते हैं। अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति, गृह और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व श्री शिव शेखर शुक्ला ने बताया कि संस्था M/s Goforth Adventure Pvt. Ltd. (Sky-high India) द्वारा स्काई डाइविंग गतिविधि संचालित की जाएगी। इसके लिए विशेष Aircraft New CESSNA 182P (fully modified for sky-diving) का उपयोग होगा, जिसकी कुल क्षमता 6 सदस्यों की है। एक समय में 2 प्रतिभागी, 2 प्रशिक्षित इंस्ट्रक्टर्स के सहयोग से स्काई डाइविंग कर सकेंगे। भविष्य में स्काई डाइविंग के साथ अन्य एयर-बेस्ड गतिविधियाँ भी शुरू की जाएंगी। आधुनिक और बेहद सुरक्षित होगी राइड स्काई डाइविंग का संचालन Directorate General of Civil Aviation (DGCA) एवं United States Parachute Association (USPA) द्वारा प्रमाणित संस्था स्काई-हाई इंडिया द्वारा किया जा रहा है। स्काई डाइविंग में उपयोग किए जाने वाले एयरक्राफ्ट का पंजीकरण नागरिक विमानन निदेशालय से सुनिश्चित है। संस्था द्वारा अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रशिक्षित स्काई डाइवर एवं सुरक्षा प्रोटोकॉल के साथ गतिविधि संचालित की जाएगी, जिससे प्रतिभागियों को सुरक्षित और यादगार अनुभव प्राप्त हो सके।  एडवेंचर गतिविधियों का भी आयोजन मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा प्रदेश में विभिन्न एडवेंचर गतिविधियों का भी आयोजन किया जा रहा है। पर्यटक और एडवेंचर लवर्स जटाशंकर रॉक क्लाइम्बिंग चैलेंज (9 से 19 जनवरी 2026), फोरसिथ ट्रेल रन (8 फरवरी 2026), फोरसिथ ट्रेक (24 से 26 जनवरी 2026), बर्ड वॉक (वन विहार भोपाल, बिसन खेड़ी, दौलत बड़ौदा इंदौर, पोआमा नर्सरी छिंदवाड़ा), पेंच ट्रैकिंग ट्रेल सहित कई रोमांचकारी गतिविधियों का अनुभव भी ले सकते हैं।  

महाविद्यालयों में प्रवेश लेने के लिए विद्यार्थियों को किया जाएगा जागरूक

उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रदेश में चलाया जाएगा कॉलेज चलो अभियान 5 दिसम्बर से शुरू होगा पहला चरण शिक्षण सत्र 2026-27 में विद्यार्थियों को प्रवेश संबंधी दी जायेगी जानकारी भोपाल  प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों में शिक्षण सत्र 2026-27 में विद्यार्थी अधिक से अधिक प्रवेश लें, इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। विद्यार्थियों को जागरूक करने के लिए विभाग द्वारा प्रदेश में एक माह तक 'कॉलेज चलो अभियान' चलाया जाएगा। इस दौरान स्कूलों में पढ़ाई कर रहे कक्षा 12वीं के विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को महाविद्यालयों में चलाए जा रहे पाठ्यक्रम, संसाधन, इंफ्रास्ट्रक्चर सहित अन्य सुविधाओं और केंद्र एवं प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के लिए जागरूक किया जाएगा। अभियान का पहला चरण 5 दिसंबर 2025 से शुरू होगा और 5 जनवरी 2026 तक चलेगा। अभियान के दौरान विभिन्न प्रकार की जागरूकता संबंधी गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इस संबंध में उच्च शिक्षा विभाग ने समस्त विश्वविद्यालय के कुलसचिव और महाविद्यालययों के प्राचार्य को निर्देश भी जारी कर दिए हैं। कॉलेज चलो अभियान में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों सहित पूर्व छात्रों की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही पंचायत सचिव, ग्राम सभा, स्व-सहायता समूह एवं युवा संगठनों के साथ बैठक कर विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित किया जाएगा। साथ ही विद्यार्थियों एवं अभिभावकों से सुझाव भी लिए जाएंगे। एक माह तक चलेंगी गतिविधियां महाविद्यालय की टीम द्वारा विद्यालयों का एवं उनके अभिभावकों भ्रमण किया जाएगा। कक्षा 12वीं के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा, उपलब्ध पाठ्यक्रम, कैरियर अवसरों एवं प्रवेश प्रक्रिया के बारे में जागरूक किया जाएगा। इस दौरान महाविद्यालय की शैक्षणिक, प्रयोगशाला, खेल एवं अन्य आधारभूत सुविधाओं के बारे में जानकारी दी जाएगी। करियर कॉउंसलिंग के माध्यम से विद्यार्थियों को विषय चयन, उच्च अध्ययन, रोजगार एवं कौशल आधारित शिक्षा के बारे में मार्गदर्शन दिया जाएगा। नई शिक्षा, नई दिशा के अंतर्गत राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रमुख प्रावधान बहुविषयक शिक्षा, क्रेडिट बैंक, कौशल आधारित पाठ्यक्रम, पाठ्यक्रम चयन, विषय चयन के बारे में विद्यार्थियों को जानकारी दी जाएगी। आर्थिक सहायता, शैक्षिक सफलता अंतर्गत केंद्र, राज्य सरकार एवं उच्च शिक्षा विभाग द्वारा संचालित योजनाओं से अवगत कराया जाएगा।  

होमगार्ड्स का स्‍थापना दिवस 6 दिसंबर को, मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव के मुख्‍य आतिथ्‍य में होगा आयोजन

भोपाल प्रदेश में होमगार्ड्स का स्‍थापना दिवस 6 दिसम्‍बर को समारोह पूर्वक‍मनाया जाएगा। होमगार्ड्स, नागरिक सुरक्षा एवं आपदा प्रबंधन महानिदेशक श्रीमती प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्‍तव  ने बताया कि स्‍थापना दिवस मुख्‍य समारोह का आयोजन मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्‍य आतिथ्‍य में होमगार्ड्स परेड ग्राउण्‍ड जहांगीराबाद भोपाल में प्रात: 10 बजे से होगा। कार्यक्रम में परेड द्वारा मुख्‍य अतिथि को सलामी, परेड का निरीक्षण, मार्च पास्‍ट के बाद मुख्‍य अतिथि का उद्बोधन, एसडीईआरएफ तथा सिविल डिफेंस द्वारा आपदा बचाव का डेमोस्‍ट्रेशन, अदम्‍य साहसिक कार्य हेतु पुरस्‍कार तथा मेधावी छात्र-छात्राओं को पुरस्‍कार वितरण किया जाएगा।  

माता पिता नहीं, बीमारी या गरीबी का बोझ, अब अकेले नहीं लड़ेंगे बच्चे, योगी सरकार देगी 1200 रुपये तक हर माह

बरेली, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर मुख्यमंत्री बाल श्रमिक विद्या योजना के तहत कामकाजी बच्चों को आर्थिक सहयोग और शिक्षा से जोड़ने के लिए श्रम विभाग ने स्पष्ट श्रेणीवार प्राथमिकता तय कर दी है। ऐसे बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है, जो परिवार की मजबूरी में ढाबों, होटलों, फैक्टरियों या अन्य प्रतिष्ठानों पर काम करते हैं। योजना के पहले चरण में प्रदेश के 20 जिलों जिसमें बरेली भी शामिल है-को चुना गया है। प्रत्येक जिले में 100 बच्चों को लाभ देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सहायक श्रमायुक्त बाल गोविंद ने बताया कि बरेली में अब तक इस योजना से 500 बच्चों को लाभान्वित किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि योजना का मुख्य उद्देश्य है कि किसी भी बच्चे को मजबूरी में मजदूरी न करनी पड़े और उसे शिक्षा व सुरक्षा दोनों मिल सके। सबसे पहले मदद उन बच्चों को-जिनके माता-पिता नहीं, आय का एकमात्र सहारा वही योजना में बच्चों के चयन के लिए शासन ने नौ प्राथमिकता श्रेणियां तय की हैं। सबसे पहले प्राथमिकता उन बच्चों को दी जाएगी। जिनके माता-पिता दोनों नहीं रहे। परिवार की पूरी आय उन्हीं के काम पर निर्भर है। श्रम विभाग के सर्वे में उन्हें कामकाजी बच्चा चिन्हित किया गया है। ऐसे बच्चे जिनके पिता की मृत्यु, माता-पिता स्थायी दिव्यांग, माता-पिता गंभीर रोग से ग्रसित, परिवार की मुखिया विधवा/तलाकशुदा महिला, माता की मृत्यु या गंभीर बीमारी और भूमिहीन परिवारों के बच्चे शामिल किए गए हैं। सभी श्रेणियों में ऐसे बच्चे को चिन्हित किया गया है तो सर्वेक्षण में कामकाजी निकला हो। 20 जिलों में पहले चरण का संचालन, कुल 2000 बच्चों को लाभ का लक्ष्य उत्तर प्रदेश में पहले चरण में आगरा, प्रयागराज, कानपुर नगर, बलिया, लखनऊ, बाराबंकी, बरेली, बदायूं, गाजियाबाद, गोरखपुर, गोंडा, श्रावस्ती, बलरामपुर, बहराइच, मुरादाबाद, सोनभद्र, मिर्जापुर, जौनपुर, वाराणसी और गाजीपुर। इन 20 जिलों में प्रति जिले 100 लाभार्थी, यानी कुल 2000 बच्चों को सहायता दी जानी है। इसमें बच्चों को हर महीने आर्थिक सहायता-बालक 1000 रुपये, बालिका 1200 रुपये दिये जा रहे हैं। लाभार्थी बच्चा लगातार पढ़ता रहता है तो कक्षा 8, 9 और 10 उत्तीर्ण करने पर हर कक्षा पास होने पर 6000 रुपये प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी को दो लाख, पूर्वोत्तर रेलवे को एक लाख का चेक, ट्रॉफी व खिलाड़ियों को दिया मेडल

यूपी विजेता, पूर्वोत्तर रेलवे उपविजेता गोरखपुर  उत्तर प्रदेश की टीम ने ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज सप्तम् अखिल भारतीय प्राइजमनी पुरुष कबड्डी प्रतियोगिता-2025 का खिताब अपने नाम किया। पूर्वोत्तर रेलवे गोरखपुर की टीम उपविजेता बनी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने टीमों व खिलाड़ियों को पुरस्कृत किया।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विजेता उत्तर प्रदेश की टीम को दो लाख रुपये का चेक, ट्रॉफी व खिलाड़ियों को मेडल प्रदान किया। उपविजेता पूर्वोत्तर रेलवे को ट्रॉफी व एक लाख का चेक प्रदान किया। साथ ही खिलाड़ियों को भी मेडल प्रदान किया। मुख्यमंत्री ने तीसरे स्थान पर रहने वाली हरियाणा व आंध्र प्रदेश की टीम के खिलाड़ियों को पुरस्कृत किया। साथ ही ट्रॉफी व 50-50 हजार रुपये का चेक दिया। मुख्यमंत्री ने विजेता, उपविजेता व हरियाणा-आंध्र प्रदेश की टीम के खिलाड़ियों के साथ सामूहिक फोटो भी खिंचवाई।  इस अवसर पर महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, जिला पंचायत अध्यक्ष साधना सिंह, विधान परिषद सदस्य डॉ. धर्मेंद्र सिंह, विधायक फतेह बहादुर सिंह, महेंद्र पाल सिंह, प्रदीप शुक्ला, भाजपा जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी, डॉ. विभ्राट चंद कौशिक, पूर्व महापौर डॉ. सत्या पांडेय, कृषि उत्पादन आयुक्त दीपक कुमार, खेल निदेशक डॉ. आरपी सिंह आदि मौजूद रहे।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने स्व. कीर्ति नारायण द्विवेदी को श्रद्धांजलि दी

भोपाल  उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल हरिभूमि एवं आईएनएच न्यूज चैनल के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी के ग्वालियर स्थित निवास पर पहुँचे और उनके पिता स्व. कीर्ति नारायण द्विवेदी के प्रति पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने शोक संवेदनाएँ व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। उल्लेखनीय है कि वरिष्ठ पत्रकार डॉ. द्विवेदी के पिता श्री कीर्ति नारायण द्विवेदी का 25 नवम्बर को 80 वर्ष से अधिक आयु में निधन हो गया था  

अयोध्या मंडल में ग्रामीण पर्यटन से बदली तस्वीर, होमस्टे मॉडल से गांवों में आय और रोजगार में वृद्धि

  योगी सरकार के ग्रामीण पर्यटन मॉडल से अयोध्या में आर्थिक गतिविधियों में तीव्र वृद्धि महिलाओं, किसानों और कारीगर परिवारों की आमदनी में वृद्धि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई जान लखनऊ, : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ग्रामीण पर्यटन नीति से अयोध्या मंडल के गांवों में आर्थिक गतिविधियों की नई धारा बह रही है। प्रदेश सरकार ने धार्मिक पर्यटन को ग्रामीण जीवन व लोक संस्कृति से जोड़ते हुए ऐसा मॉडल तैयार किया है, जिससे गांवों की आमदनी के नए दरवाजे खुल गए हैं। अयोध्या मंडल में 19 गांवों को विशेष रूप से होमस्टे विकास के लिए चयनित किया गया है। यह पहल न केवल प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को मजबूती दे रही है, बल्कि हजारों ग्रामीण परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। गांवों में होमस्टे बनाने से रोजगार के नए अवसर योगी सरकार ने अयोध्या धाम आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को गांवों की जीवनशैली, संस्कृति और परंपरा से जोड़ने के लिए ग्रामीण पर्यटन की व्यापक योजना तैयार की है। रिपोर्ट के अनुसार पहले चरण में प्रदेश के 93 गांवों को होमस्टे विकास के लिए चयनित किया गया है। इसमें अकेले अयोध्या मंडल के 19 गांव शामिल हैं। अयोध्या जिले में अमौनी, शेरवाघाट, अबानपुर सरोहा, गौराघाट, रामपुरवा गांवों में 50 होम स्टे पर काम चल रहा है। इसमें से ज्यादातर होम स्टे ठहरने की सुविधा उपलब्ध करवा रहे हैं। जिले में 292 होटल और 1186 होम स्टे रजिस्टर्ड हैं जो पर्यटकों को ठहरने के लिए उचित रेट पर आवास उपलब्ध करा रहे हैं। इन गांवों में बुनियादी ढांचे, पर्यटक सुविधा केंद्रों, ग्रामीण आवास, सांस्कृतिक अनुभव और स्थानीय भोजन व्यवस्था को उन्नत किया गया है। इससे ग्रामीण युवाओं, महिलाओं और कारीगरों के लिए स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसर बने हैं। होमस्टे पंजीकरण बढ़ने से आमदनी में वृद्धि अयोध्या में प्रारंभ में होमस्टे की औसत मासिक आय 40,000 से 50,000 थी, जो अब बढ़कर 2 लाख तक पहुंच गई है। दिव्य अयोध्या ऐप के माध्यम से फरवरी 2025 तक 69 लाख से अधिक बुकिंग हो चुकी हैं। होमस्टे का किराया औसतन 1500 से 2500 प्रति कमरा प्रतिदिन है। है। योगी सरकार द्वारा लागू होमस्टे नीति 2025 के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में होमस्टे पंजीकरण की संख्या तेजी से बढ़ी है। इतनी बड़ी संख्या में पर्यटकों के आने से ग्रामीण क्षेत्रों में होमस्टे संचालकों की मासिक आय में 40 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। ग्रामीण परिवार अब खेती के साथ-साथ पर्यटन आधारित सेवाएं देकर एक स्थिर आय अर्जित कर रहे हैं। अयोध्या में गेस्ट हाउस चला रहे अंशुमान तिवारी का कहना है कि इससे अयोध्यावासियों को काफी फायदा हुआ है। राम मंदिर बनने के बाद स्थानीय निवासियों को होम स्टे बनाने की अनुमति मिलने से लोगों की आय में वृद्धि हुई है। लोग 2-3 कमरों का होम स्टे चलाकर धनार्जन कर रहे हैं। साधारण होम स्टे चलाने वाले भी महीने में 50000 से 100000 रुपये तक कमा रहे हैं। इन्होंने कहा कि योगी सरकार की नीतियों की वजह से अयोध्या का चहुंमुखी विकास हो रहा है। हस्तशिल्प, लोककला और महिलाओं की भागीदारी में वृद्धि राम मंदिर निर्माण के बाद स्थानीय हस्तशिल्पकारों की संख्या में 25% से अधिक की वृद्धि हुई है। होमस्टे मॉडल ने अयोध्या के पारंपरिक कारीगरों, हस्तशिल्पियों और लोक कलाकारों को भी नई पहचान दी है। पर्यटन विभाग द्वारा गठित ग्रामीण सांस्कृतिक अनुभव समूहों में अयोध्या मंडल की महिलाओं को भोजन व्यवस्था, लोक व्यंजन, घरेलू उत्पाद, साफ-सफाई और मेहमाननवाजी से जोड़कर रोजगार दिया गया है। महिलाओं की आय में औसतन 5,000-12,000 रुपये प्रति माह की वृद्धि हुई है। योगी सरकार ने पर्यटन से गांवों को बनाया आत्मनिर्भर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि अयोध्या केवल मंदिरों और धार्मिक स्थलों से नहीं, बल्कि गांवों की आत्मा, लोक संस्कृति और परंपरा से भी पहचानी जानी चाहिए। अयोध्या के गांवों में होमस्टे, सांस्कृतिक भ्रमण, ग्रामीण भोजन, खेती अनुभव, नदी किनारे गतिविधियां और हस्तशिल्प बाजार विकसित करके सरकार ने एक समग्र आर्थिक ढांचा तैयार किया है। यह मॉडल आने वाले वर्षों में लाखों ग्रामीण परिवारों की आय का स्थायी स्रोत बनेगा और उत्तर प्रदेश को ग्रामीण पर्यटन के राष्ट्रीय लीडर के रूप में स्थापित करेगा।