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मुख्यमंत्री ने वड़क्कम काशी, हर हर महादेव, नमः पार्वती पतये हर हर महादेव से सम्बोधन की शुरुआत की

मुख्यमंत्री ने वाराणसी में ‘काशी तमिल संगमम् 4.0’ का शुभारम्भ किया, शुभारम्भ कार्यक्रम में केन्द्रीय शिक्षा मंत्री सम्मिलित हुए मुख्यमंत्री ने वड़क्कम काशी, हर हर महादेव, नमः पार्वती  पतये हर हर महादेव से सम्बोधन की शुरुआत की प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में तमिल पावन कार्तिक मास में काशी  तमिल संगमम् के चतुर्थ संस्करण का आयोजन ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’  के उनके संकल्प को सुदृढ़ करने और जीवन्त बनाने वाला : मुख्यमंत्री  काशी तमिल संगमम् भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बना काशी तमिल संगमम् की थीम ‘लर्न तमिल’ अर्थात ‘तमिल करकलाम, आओ तमिल सीखें’ यह पहल प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में ज्ञान, संस्कृति और भाषा के  माध्यम से ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को और सुदृढ़ करेगी  उ0प्र0 सरकार ने वोकेशनल एजुकेशन के क्षेत्र में तमिल, कन्नड़, मलयालम,  तेलुगू , मराठी और बंगाली भाषाओं को पढ़ाए जाने की व्यवस्था की श्री रामेश्वरम धाम, मदुरई और कन्याकुमारी का दर्शन करने के लिए प्रदेश के  श्रद्धालुओं के लिए विशेष यात्रा का आयोजन उ0प्र0 का पर्यटन विभाग करेगा त्रिवेणी संगम के जल से रामेश्वरम के श्री रामनाथ स्वामी और कोडीतीर्थम के जल  से श्री काशी विश्वनाथ के अभिषेक की परम्परा हर माह नियमित रूप से आगे बढ़ रही आई0आई0टी0 मद्रास और बी0एच0यू0 की संयुक्त शिक्षा योजनाएं  बौद्धिक और राष्ट्रीय एकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रेरक कदम अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर परिसर में महर्षि अगस्त्य का  मन्दिर बनकर तैयार, उनकी भव्य प्रतिमा की स्थापना हो चुकी  दक्षिण भारत में श्रीराम की भक्ति का गान करने वाले सन्त त्यागराजा, सन्त पुरन्दर दास और सन्त अरुणाचल कवि की प्रतिमाएं बृहस्पति कुण्ड, अयोध्या में स्थापित हुईं विगत 04 वर्षों में 26 करोड़ से अधिक श्रद्धालु काशी में पधारे भारत एक बहुभाषी देश, हमें एक दूसरे की सांस्कृतिक  विविधताओं का सम्मान करना चाहिए : केन्द्रीय शिक्षा मंत्री मुख्यमंत्री तथा केन्द्रीय शिक्षा मंत्री ने श्री काशी विश्वनाथ  मन्दिर एवं श्री काल भैरव मन्दिर में दर्शन-पूजन किया लखनऊ  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने आज वाराणसी के नमो घाट पर ‘काशी तमिल संगमम् 4.0’ का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर केन्द्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान भी सम्मिलित हुए। कार्यक्रम में भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी0पी0 राधाकृष्णन का वीडियो संदेश प्रसारित किया गया। मुख्यमंत्री जी ने शुक्ल यजुर्वेद की माध्यंदिनी शाखा के 2000 मंत्रों से युक्त दण्डक्रम पारायण को बिना किसी रुकावट के 50 दिनों में पूरा करने वाले 19 वर्षीय वेदमूर्ति देवव्रत महेश रेखे को स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। ज्ञातव्य है कि ‘काशी तमिल संगमम् 4.0’ का आयोजन केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से विभिन्न केन्द्रीय मंत्रालयों की भागीदारी से किया जा रहा है। आई0आई0टी0 मद्रास तथा बी0एच0यू0 संगमम् के नॉलेज पार्टनर हैं।  मुख्यमंत्री जी ने वड़क्कम काशी, हर हर महादेव, नमः पार्वती पतये हर हर महादेव के साथ अपने सम्बोधन की शुरुआत की। उन्होंने उनगालाई काशीयिल वरावेरकिरोम अर्थात काशी में सभी का स्वागत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में तीनों लोकों में न्यारी, मोक्षदायिनी भगवान शिव की पावन नगरी, आनन्द कानन और सर्वविद्या की राजधानी अविमुक्त क्षेत्र काशी में तमिल कार्तिक मास की पावन अवधि में काशी तमिल संगमम् के चतुर्थ संस्करण का आयोजन हो रहा है। यह ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के उस संकल्प को सुदृढ़ करने और जीवन्त बनाने वाला है, जो प्रधानमंत्री जी ने आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष के अवसर पर देशवासियों को दिया था। मुख्यमंत्री जी ने रामेश्वरम की पावन धरा से पधारे सभी तमिल भाइयों और बहनों का प्रदेश सरकार की ओर से अभिनन्दन किया।  मुख्यमंत्री जी ने कहा कि काशी और तमिल के पुराने सम्बन्धों के केन्द्र में भगवान शिव हैं। इस सम्बन्ध सेतु को आदि शंकराचार्य जी ने भारत के चार कोनों में पवित्र पीठ स्थापित कर आगे बढ़ाया। उत्तर प्रदेश में आपका यह प्रवास काशी की शिव भक्ति, प्रयागराज के पवित्र संगम और अयोध्या में धर्म ध्वजा आरोहण के उपरान्त प्रभु श्रीराम के दिव्य दर्शन का अद्वितीय और आध्यात्मिक सौभाग्य प्रदान करने वाला होगा। यह आयोजन उत्तर और दक्षिण भारत की सांस्कृतिक, शैक्षिक, आर्थिक और आध्यात्मिक साझेदारी को सशक्त करते हुए भारत के उज्ज्वल भविष्य के नए द्वार खोल रहा है।  मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इस बार काशी तमिल संगमम् की थीम ‘लर्न तमिल’ अर्थात ‘तमिल करकलाम, आओ तमिल सीखें’ है। यह पहल प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में ज्ञान, संस्कृति और भाषा के माध्यम से ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को और सुदृढ़ करेगी। तमिल करकलाम कार्यक्रम तमिल भाषा सीखने के लिए हमारे छात्रों को एक नया प्लेटफार्म उपलब्ध करा रहा है। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से उत्तर प्रदेश सरकार ने वोकेशनल एजुकेशन के क्षेत्र में तमिल, कन्नड़, मलयालम, तेलुगू , मराठी और बंगाली भाषाओं को पढ़ाए जाने की व्यवस्था की है। राज्य के वोकेशनल एजुकेशन के छात्र अपनी रुचि के अनुसार किसी एक भाषा का चयन करेंगे, सरकार उसका पूरा खर्च उठाएगी।  मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इस आयोजन का महत्व इस वर्ष तेनकाशी, तमिलनाडु से प्रारम्भ हो रही उस यात्रा से और बढ़ जाता है, जो सड़क मार्ग से कार रैली के माध्यम से 2000 किलोमीटर से अधिक की यात्रा तय करते हुए काशी की पवित्र धरती पर पहुंचने वाली है। यह यात्रा पांड्य वंश के महान शासक हरिकेसरी परिक्किराम पांड्यिम की यात्रा की पुनःस्मृति है। शिव मन्दिर और तेनकाशी की कथा सांस्कृतिक इतिहास में अंकित है।  मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में चल रहा काशी तमिल संगमम् अभियान ज्ञान, साधना, सांस्कृतिक एकता और हमारी साझा भारतीय सभ्यता को एक नई ऊंचाई पर स्थापित करेगा। ‘अयोध्या मथुरा माया काशी कांची अवन्तिका। पुरी द्वारावती चैव सप्तैते मोक्षदायकाः।’ यह सभी तीर्थ स्थल मोक्ष प्रदान करने वाले पावन तीर्थ हैं। महर्षि अगस्त्य द्वारा रचित आदित्य हृदय स्त्रोत भगवान सूर्य की स्तुति है, जिसे उन्होंने रावण से युद्ध करने से पहले भगवान श्री राम को सुनाया था। महर्षि अगस्त्य, आदि गुरु शंकराचार्य, संत तिरुवल्लुवर, जगतगुरु रामानुजाचार्य, सर्वपल्ली डॉ0 राधाकृष्णन ने दक्षिण की धरा से निकलकर सम्पूर्ण भारत में ज्ञान का प्रकाश स्थापित किया। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि नयनार और अलवार की शैव-वैष्णव भक्ति परम्परा तमिल सभ्यता की आध्यात्मिक समृद्धि को दर्शाती है। कैलाश, काशी तथा चिदम्बरम अपराजित शिव भक्ति के प्रतीक … Read more

मंत्रिपरिषद बैठक: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लिए गए प्रमुख निर्णय

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद द्वारा निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए :- जनपद अयोध्या में विश्वस्तरीय मंदिर संग्रहालय का  निर्माण एवं संचालन कराये जाने के सम्बन्ध में     मंत्रिपरिषद द्वारा प्रदत्त अनुमोदन के अनुपालन में जनपद अयोध्या स्थित तहसील सदर के ग्राम मांझा जमथरा की नजूल भूमि गाटा-57 मि0 क्षेत्रफल 25 एकड़ में टाटा ग्रुप के सहयोग से सी0एस0आर0 फण्ड के माध्यम से विश्वस्तरीय मंदिर संग्रहालय के निर्माण एवं संचालन हेतु 01 रुपये वार्षिक धनराशि की दर पर भूमि 90 वर्ष के लिये दिये जाने हेतु संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार, पर्यटन विभाग उत्तर प्रदेश शासन एवं टाटा संस प्रा0लि0 के मध्य त्रिपक्षीय एम0ओ0यू0 दिनांक 03 सितम्बर, 2024 को हस्ताक्षरित किया गया है। तदनुक्रम में ग्राम मांझा जमथरा, परगना हवेली अवध, तहसील सदर, जनपद अयोध्या की राजकीय नजूल भूमि गाटा संख्या गाटा-57 मि0 व 1 मि0 क्षेत्रफल 25 एकड़ के अतिरिक्त 27.102 एकड़, कुल 52.102 एकड़ भूमि का निःशुल्क हस्तांतरण आवास एवं शहरी नियोजन विभाग, उ0प्र0 से पर्यटन विभाग के पक्ष में किये जाने के प्रस्ताव को मंत्रिपरिषद द्वारा स्वीकृति प्रदान की गयी है। साथ ही, प्रकरण में आवश्यकतानुसार अग्रेतर निर्णय लिये जाने हेतु मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किये जाने का भी निर्णय मंत्रिपरिषद द्वारा लिया गया है।       उल्लेखनीय है कि भारत में घरेलू पर्यटकों एवं विदेशी पर्यटकों के आगमन की दृष्टि से उत्तर प्रदेश का क्रमशः द्वितीय एवं तृतीय स्थान है। अपनी गौरवशाली ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासतों तथा समृद्ध प्राकृतिक वनसम्पदा की दृष्टि से उत्तर प्रदेश में पर्यटन की असीम सम्भावनाएं विद्यमान हैं।     भगवान श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या वर्तमान में एक विश्वस्तरीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन गन्तव्य के रूप में विकसित हो रही है। दिनांक 22 जनवरी 2024 को श्रीराम जन्मभूमि प्रांगण में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के उपरान्त अयोध्या आने वाले पर्यटकों की संख्या में अभूतपूर्व गुणात्मक वृद्धि हुई है, अब प्रतिदिन लगभग 2 से 4 लाख पर्यटक अयोध्या धाम आ रहे हैं। नई पीढ़ी के युवाओं, विदेशी पर्यटकों, भारतीय सभ्यता और संस्कृति में रुचि रखने वाले पर्यटकों को अयोध्या के प्रति आकर्षित करने हेतु आवश्यक पर्यटक उपादानों का अभी अभाव है।     टाटा सन्स प्रा0लि0 द्वारा भारतीय मंदिर स्थापत्य कला तथा भारतीय मंदिरों से सम्बन्धित सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत से लोगों को परिचित कराने एवं प्राचीन काल से चली आ रही मंदिरों की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परम्परा व दर्शन के संरक्षण हेतु अपने सी0एस0आर0 फण्ड से एक विश्वस्तरीय मंदिर संग्रहालय का निर्माण एवं इसका सुचारु रूप से प्रबन्धन/संचालन करने हेतु इच्छा व्यक्त की गयी है। जिसमें यह प्रस्तावित किया गया कि इस कार्य हेतु एक गैर लाभकारी एस0पी0वी0 का गठन कम्पनी एक्ट 2013 की धारा 08 के अधीन किया जायेगा। इस संस्था में भारत सरकार तथा उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि भी सम्मिलित होंगे।     इस संग्रहालय की स्थापना से प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार का सृजन होगा व सरकार को राजस्व में प्राप्ति होगी।   सेवायोजित अंतर्राष्ट्रीय पदक विजेता खिलाड़ियों द्वारा  राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं, प्रशिक्षण शिविर आदि में प्रतिभाग करने  की अवधि एवं आवागमन में लगने वाले समय को ड्यूटी मानने का प्रस्ताव स्वीकृत मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश अंतर्राष्ट्रीय पदक विजेता सीधी भर्ती नियमावली-2022 के अन्तर्गत सेवायोजित खिलाड़ियों द्वारा राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं, प्रशिक्षण शिविर आदि में प्रतिभाग किये जाने की अवधि एवं आवागमन में लगने वाला समय कर्तव्यार्थ व्यतीत अवधि (ड्यूटी) माने जाने सम्बन्धी प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है।  ज्ञातव्य है कि उत्तर प्रदेश अंतर्राष्ट्रीय पदक विजेता सीधी भर्ती नियमावली-2022 के अन्तर्गत सेवायोजित खिलाड़ियों द्वारा राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं, प्रशिक्षण या खेल शिविरों में प्रतिभाग किये जाने को स्वीकृति देने तथा संगत अवधि को सेवाकाल माने जाने के सम्बन्ध में कोई व्यवस्था नहीं है, क्योंकि भर्ती/सेवा नियमावली में अवकाश सम्बन्धी व्यवस्था नहीं रखी जाती है। इससे सम्बन्धित खिलाड़ियों को अनुमति प्राप्त करने में समस्या होती है।  ऐसे खिलाड़ियों के नियोक्ता/प्रशासकीय विभागों को स्वीकृति प्रदान करने में कोई दुविधा न रहे, इसके दृष्टिगत सेवायोजित अंतर्राष्ट्रीय पदक विजेता खिलाड़ियों को केन्द्र सरकार की भांति समुचित व्यवस्था कार्यालय ज्ञाप के माध्यम से किया जाना अत्यन्त आवश्यक है। उपरोक्त स्थिति को दृष्टिगत रखते हुए नियमावली-2022 के अन्तर्गत सेवायोजित खिलाड़ियों द्वारा राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं, प्रशिक्षण, शिविर आदि में प्रतिभाग किये जाने की अवधि एवं आवागमन में लगने वाले समय सहित कर्तव्यार्थ व्यतीत अवधि (ड्यूटी) माने जाने के सम्बन्ध में कार्यालय ज्ञाप के माध्यम से व्यवस्था प्रस्तावित है। इस व्यवस्था के लागू हो जाने पर नियमावली-2022 के अन्तर्गत सेवायोजित खिलाड़ियों को राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं, प्रशिक्षण, खेल शिविरों में प्रतिभाग किये जाने की अनुमति प्राप्त करने में सुगमता होगी।   डॉ0 सम्पूर्णानन्द स्पोर्ट्स स्टेडियम, सिगरा, वाराणसी के संचालन,  प्रबन्धन तथा रख-रखाव एवं तत्सम्बन्धी राष्ट्रीय उत्कृष्टता केन्द्र हेतु भारतीय  खेल प्राधिकरण द्वारा उपलब्ध कराये गये एम0ओ0यू0 का आलेख्य स्वीकृत मंत्रिपरिषद ने डॉ0 सम्पूर्णानन्द स्पोर्ट्स स्टेडियम, सिगरा, वाराणसी के संचालन, प्रबन्धन तथा रख-रखाव एवं तत्सम्बन्धी राष्ट्रीय उत्कृष्टता केन्द्र हेतु भारतीय खेल प्राधिकरण द्वारा उपलब्ध कराये गये एम0ओ0यू0 के आलेख्य सम्बन्धी प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है।  ज्ञातव्य है कि प्रदेश के खेल विभाग के स्वामित्व में स्थित डॉ0 सम्पूर्णानन्द स्पोर्ट्स स्टेडियम, सिगरा, वाराणसी में खेल अवसंरचनाओं (भवन, ढ़ांचा, खेल मैदान और अन्य सुविधाएं) का निर्माण खेलो इण्डिया योजना के अन्तर्गत किया गया है। वहां पर राष्ट्रीय उत्कृष्टता केन्द्र की स्थापना एवं संचालन का कार्य भारतीय खेल प्राधिकरण द्वारा कराये जाने हेतु एम0ओ0यू0 का आलेख्य शासन के स्वीकृतार्थ उपलब्ध कराया गया है। डॉ0 सम्पूर्णानन्द स्पोर्ट्स स्टेडियम में राष्ट्रीय उत्कृष्टता केन्द्र की स्थापना के उद्देश्य से स्टेडियम की कतिपय खेल अवस्थापनाओं को, एम0ओ0यू0 में निहित शर्तां एवं प्रतिबन्धों के आधार पर, भारतीय खेल प्राधिकरण को दिये जाने का प्रस्ताव मंत्रिपरिषद द्वारा अनुमोदित किया गया है। राष्ट्रीय उत्कृष्टता केन्द्र के माध्यम से विभिन्न आयु वर्गों और खेल विधाओं में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान होगी और उन्हें राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन हेतु तैयार किया जा सकेगा। राष्ट्रीय उत्कृष्टता केन्द्र की स्थापना होने से राष्ट्र के उभरते हुए खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। जनपद बागपत में पी0पी0पी0 मोड पर अन्तरराष्ट्रीय योग एवं आरोग्य  केन्द्र विकसित, संचालित तथा अनुरक्षित करने का प्रस्ताव अनुमोदित मंत्रिपरिषद ने जनपद बागपत की तहसील व परगना बागपत के ग्राम हरिया खेड़ा में पर्यटन विभाग द्वारा उपलब्ध करायी जा रही कुल 70.885 हेक्टेयर भूमि पर गैर लाभकारी संगठन … Read more

इतिहास में नया अध्याय: दरगाह में खादिमों के लिए शुरू हुई लाइसेंस प्रक्रिया

अजमेर अजमेर ख्वाजा गरीब नवाज की विश्वप्रसिद्ध दरगाह में जल्द ही केवल लाइसेंसधारी खादिम ही जायरीन को जियारत करा सकेंगे। केंद्र सरकार के निर्देश पर दरगाह कमेटी ने 75 वर्षों में पहली बार खादिमों के लाइसेंस की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू कर दी है। सोमवार को दरगाह नाजिम मोहम्मद बिलाल खान ने इसका आधिकारिक विज्ञापन जारी किया। इसके लिए 5 जनवरी 2026 तक आवेदन जमा करवाए जा सकेंगे। नाजिम ने बताया कि यह प्रक्रिया केवल दरगाह ख्वाजा साहब से संबद्ध खादिम समुदाय सैयद जादगान एवं शेख जादगान के लिए लागू की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के आदेशों, केंद्र व राज्य सरकारों के निर्देशों, जिला प्रशासन की रिपोर्टों तथा दरगाह सुरक्षा अंकेक्षण की सिफारिशों के अनुपालन में लाइसेंस प्रणाली लागू की जा रही है। दरगाह ख्वाजा साहब अधिनियम 1955 की धारा 11(एफ) में खादिमों के कर्तव्यों, पहचान, मानक प्रक्रियाओं, सुविधाओं और जायरीन के हित सुनिश्चित करने के विशेष प्रावधान हैं, जिनके अनुसार इस पूरी कार्रवाई को आगे बढ़ाया जा रहा है। दरगाह कमेटी ने पात्र खादिमों से आवेदन आमंत्रित कर दिए हैं। आवेदन-पत्र, नियम और शर्तें कमेटी की वेबसाइट gharibnawaz.minorityaffairs.gov.in से डाउनलोड की जा सकती हैं। इच्छुक आवेदक नाजिम कार्यालय से भी आवेदन प्राप्त कर सकते हैं। पूर्ण रूप से भरे हुए प्रपत्र के साथ आवश्यक दस्तावेजों और स्वप्रमाणित प्रतियों को 5 जनवरी 2026 तक कार्यालय में जमा कराना अनिवार्य होगा। यह पहली बार है जब खादिमों को लाइसेंस देने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू की गई है। दरगाह कमेटी के गठन के बाद से अब तक तीन एडमिनिस्ट्रेटर और 37 नाजिम अपने-अपने कार्यकाल पूरे कर चुके हैं, लेकिन इस दौरान किसी ने भी लाइसेंस प्रक्रिया को लागू नहीं किया। कमेटी के पहले एडमिनिस्ट्रेटर अब्दुल रऊफ सिद्दीकी 9 जनवरी 1954 को नियुक्त हुए थे। उनके बाद अनीस मुज्तबा जुबैरी और आले मोहम्मद शाह यूपीएससी 1956 तक एडमिनिस्ट्रेटर रहे। बाद में एडमिनिस्ट्रेटर की जगह नाजिम का पद सृजित किया गया और 1 मार्च 1956 को आले मोहम्मद शाह को ही पहला नाजिम नियुक्त किया गया। मार्च 1956 से मार्च 2025 तक 37 नाजिम दरगाह कमेटी का कार्यभार संभाल चुके हैं, जबकि 28 अध्यक्ष भी अपनी सेवा दे चुके हैं। अंतिम सदर सैयद शाहिद हुसैन रिजवी 4 जून 2023 तक पद पर रहे। कई कार्यकालों में खादिमों को लाइसेंस देने की चर्चा और प्रस्ताव बने, लेकिन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। अब वर्तमान नाजिम, बीएसएफ से रिटायर्ड मोहम्मद बिलाल खान के प्रयासों से यह ऐतिहासिक कदम संभव हो पाया है। लाइसेंस के मुद्दे पर दरगाह नाजिम ने दो बार खादिमों के साथ बैठक बुलाने की कोशिश की। 24 और 27 नवंबर को आयोजित बैठकों में एक भी खादिम उपस्थित नहीं हुआ। दूसरी ओर, खादिम मोहल्ले में अंजुमन सदर की अध्यक्षता में खादिम समुदाय ने अलग बैठक की और मुद्दे पर चर्चा की। नए बदलाव के बाद दरगाह में जियारत व्यवस्था अधिक सुव्यवस्थित, पारदर्शी और सुरक्षित होने की उम्मीद जताई जा रही है। यह कदम जायरीन की सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता देने की दिशा में दरगाह प्रशासन का बड़ा प्रयास माना जा रहा है।

बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की पहल: झारखंड स्वास्थ्य मंत्री खुद पहुँचे OPD में

रांची  झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारीइन दिनों एक्शन मोड में है और राज्य के अलग-अलग अस्पतालों का निरीक्षण कर रहे हैं और ओपीडी वार्ड में खुद ही बैठकर मरीजों का भी इलाज कर रहे हैं।        आज जमशेदपुर में OPD का लेंगे जायजा डॉक्टर अंसारी ने आज कहा कि आज मैं जमशेदपुर में रहूंगा। ओपीडी की सभी व्यवस्थाओं का निरीक्षण करूंगा और यह सुनिश्चित करूँगा कि किसी भी मरीज को इलाज में ज़रा भी परेशानी न हो। मैं स्वयं स्थल पर मौजूद रहकर डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को पूरा सहयोग दूंगा। बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ जनता तक पहुँचाना-इसी मिशन के लिए हम पूरी तरह संकल्पित हैं।' स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने कहा कि नई उम्मीद, नया विश्वास – जनता से मिले संकल्प को जिला स्वास्थ्य व्यवस्था के ज़मीनी स्तर तक ले जाना हमारा प्रमुख लक्ष्य है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की दूरद्दष्टि और निष्ठा का परिणाम है कि झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था आज नई दिशा में आगे बढ़ रही है।

Z-Plus सुरक्षा विवाद: अभय चौटाला की याचिका पर हाईकोर्ट सख्त, केंद्र को नोटिस जारी

चंडीगढ़  Z Plus Security पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने इंडियन नेशनल लोकदल नेता अभय सिंह चौटाला की जेड-प्लस या जेड श्रेणी की केंद्रीय सुरक्षा की मांग वाली याचिका पर मंगलवार को केंद्र सरकार, हरियाणा सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया। जस्टिस त्रिभुवन दहिया ने मामले को गंभीर बताते हुए अगली सुनवाई 16 दिसंबर तय की। अदालत ने कहा कि चौटाला द्वारा जताए गए खतरे और राज्य की कथित ‘निष्क्रियता’ पर विस्तृत जवाब आवश्यक है। याचिका में कहा गया है कि आईएनएलडी के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व विधायक नफे सिंह राठी की हत्या के बाद चौटाला को अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय गैंगस्टरों से विश्वसनीय धमकियां मिली हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इन धमकियों की जानकारी बार-बार राज्य सरकार को दी गई, लेकिन ‘कोई कार्रवाई नहीं हुई’। चौटाला के अनुसार, न तो सुरक्षा आकलन किया गया, न कोई समिति गठित हुई और न ही उन्हें अंतरिम सुरक्षा दी गई। उन्होंने अदालत को बताया कि स्थितियां लगातार बिगड़ रही हैं और खतरा ‘गंभीर और बढ़ता हुआ’ है। राठी हत्याकांड पर मुखर रुख के बाद खतरा बढ़ा याचिका के अनुसार, अभय चौटाला ने राठी हत्याकांड के बाद सबसे पहले खुलकर सीबीआई जांच और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की। उन्होंने यह मुद्दा 27 फरवरी 2024 को विधानसभा के बजट सत्र में उठाया और अगले ही दिन मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा कि राठी की हत्या संगठित अपराध की ओर संकेत करती है।चौटाला का कहना है कि अपराध जगत के खिलाफ उनके लगातार रुख और सरकार पर दबाव की वजह से वे कई गैंगस्टर नेटवर्क के निशाने पर आ गए हैं। राजनीतिक प्रोफ़ाइल और सक्रिय भूमिका को बताया कारण एडवोकेट संदीप गोयत के माध्यम से दायर याचिका में बताया गया कि चौटाला वर्ष 2000 से लगातार राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं। वे कई बार एलनाबाद से विधायक चुने गए और नेता प्रतिपक्ष भी रहे हैं। याचिका में कहा गया कि किसान आंदोलन से लेकर कानून-व्यवस्था और राठी हत्याकांड तक, चौटाला ने कई संवेदनशील मुद्दों पर मुखर भूमिका निभाई है। उनकी ‘निर्भीक और स्पष्ट’ राजनीतिक कार्यशैली उन्हें ‘अपराधी गिरोहों के निशाने पर’ रखती है। परिवार भी खतरे में, आर्टिकल 21 का हवाला अभय चौटाला ने दावा किया है कि न सिर्फ वे, बल्कि उनका परिवार भी बढ़ते खतरे का सामना कर रहा है। याचिका में कहा गया है कि जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) के तहत राज्य का दायित्व है कि वह नागरिक को पर्याप्त सुरक्षा दे, खासकर तब जब खतरा ज्ञात हो और उसके प्रमाण मौजूद हों। चौटाला ने हाई कोर्ट से निवेदन किया है कि उन्हें केंद्रीय एजेंसी के माध्यम से जेड-प्लस या जेड श्रेणी की चौबीस घंटे सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए। ‘राज्य ने अनुरोधों पर विचार तक नहीं किया’ याचिका में आरोप लगाया गया है कि कई बार भेजे गए ‘स्पष्ट, तात्कालिक और विशिष्ट’ अनुरोधों के बावजूद राज्य सरकार ने सुरक्षा के आकलन पर विचार तक नहीं किया। उन्होंने कहा कि इस लगातार अनदेखी के बाद उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी, जहां अब केंद्र और राज्य दोनों को विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश जारी किए गए हैं।

MP में 76 हजार टीबी केस सामने आए, 2025 का लक्ष्य कमजोर; इंदौर में 1,833 मौतों ने बढ़ाई चिंता

इंदौर   प्रधानमंत्री द्वारा साल 2025 तक टीबीमुक्त भारत बनाने की घोषणा के सात वर्ष बाद भी इंदौर में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। 2018 में अभियान शुरू होने से अब तक इंदौर में 76,549 नए टीबी मरीज सामने आ चुके हैं, जो यह संकेत देता है कि लक्ष्य काफी पीछे छूट गया है। हर साल औसतन 7–8 हजार नए रोगी मिल रहे हैं। इनमें से 1,833 मरीजों की मौत भी दर्ज की जा चुकी है, जो अभियान की सफलता पर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि उपलब्ध इलाज और साधनों के बावजूद मौतों का यह आंकड़ा बेहद गंभीर है। देशभर में बढ़ता टीबी का बोझ, इंदौर का योगदान भी बड़ा इंदौर सहित पूरे देश में टीबीमुक्त भारत अभियान चलने के बावजूद राष्ट्रीय टीबी आंकड़ों में लगातार वृद्धि देखी गई है। वर्ष 2021 में जहां 21 लाख मरीज थे, वहीं 2022 में 28 लाख, 2023 में 25 लाख, 2024 में 26 लाख और 2025 में अब तक 26 लाख मरीज दर्ज किए जा चुके हैं। डाक्टरों की मानें तो वर्ष के अंत तक यह संख्या 30 लाख तक पहुंच सकती है। इन बढ़ते आंकड़ों में इंदौर का योगदान भी बड़ा है, क्योंकि यहां हर वर्ष हजारों मरीज सामने आ रहे हैं। उपलब्ध दवाएं और सुविधा केंद्र होने के बावजूद 1,833 मौतें अभियान को लगभग असफल साबित कर रही हैं। टीबी जांच के 44 केंद्र सक्रिय, इलाज और आर्थिक सहायता भी उपलब्ध इंदौर में सामान्य टीबी की जांच 44 माइक्रोस्कोपी सेंटरों में की जाती है। अभियान शुरू होने से अब तक 76,549 सामान्य टीबी मरीज मिले हैं। जांच से लेकर इलाज तक का सारा खर्च सरकार वहन करती है। साथ ही उपचार अवधि के दौरान मरीजों को 6 महीने तक हर माह 1,000 रुपये की सहायता भी दी जाती है। चिकित्सकों के अनुसार यदि मरीज बिना नागा 6 महीने तक नियमित दवा लेते रहें तो वे पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं। इसके बावजूद लापरवाही के कारण कई मरीज इलाज अधूरा छोड़ देते हैं, जिससे बीमारी गंभीर रूप ले लेती है। एमडीआर टीबी के 1,745 मरीज, सबसे ज्यादा मौतें इसी श्रेणी में सामान्य टीबी के अतिरिक्त इंदौर में 1,745 एमडीआर (मल्टीड्रग रेजिस्टेंस) मरीज भी मिले हैं। यह टीबी का सबसे खतरनाक रूप माना जाता है, जो आमतौर पर उन्हीं मरीजों में विकसित होता है जो बीच में दवा छोड़ देते हैं या इलाज पूरा नहीं करते। विशेषज्ञों का कहना है कि टीबी से होने वाली कुल मौतों में सबसे अधिक मौतें एमडीआर टीबी के कारण होती हैं। साल 2018 से 2025 तक मिलने वाले सामान्य और एमडीआर मरीजों के आधिकारिक आंकड़े भी यही दिखाते हैं कि बीमारी पर रोक नहीं लग सकी। सरकार का उद्देश्य यह है कि कोई भी मरीज बिना जांच और बिना इलाज के न रहे, न कि शहर में टीबी पूरी तरह खत्म हो। बड़ी संख्या में ठीक हो रहे मरीज जिला क्षय अधिकारी डाक्टर शैलेंद्र जैन ने बताया कि टीबीमुक्त भारत अभियान का मतलब यह नहीं है कि इंदौर में एक भी मरीज नहीं मिलेगा। सरकार का उद्देश्य है कि कोई भी मरीज बिना इलाज और बिना जांच के न रहे। इसके लिए हम हर तरह की सुविधा दे रहे हैं। बड़ी संख्या में मरीज ठीक हो रहे हैं और भविष्य में जल्द ही इस पर पूरी तरह से लगाम कसने में भी मदद मिलेगी।  

रतलाम मंडल के यात्रियों के लिए बुरी खबर, 60 दिनों के ट्रैक ब्लॉक से कई जरूरी ट्रेनें प्रभावित

रतलाम मुंबई सेंट्रल स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या 4 पर ट्रैक नवीनीकरण कार्य के चलते 23 नवंबर, 2025 से 60 दिनों का ब्लॉक लिया जा रहा है। इस ब्लॉक के कारण पश्चिम रेलवे की कई ट्रेनें प्रभावित होंगी। इस अवधि के दौरान, पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल से गुजरने वाली कुछ ट्रेनों को शॉर्ट-टर्मिनेट किया जाएगा या आंशिक रूप से रद्द किया जाएगा। यात्रियों को होने वाली असुविधा को कम करने के लिए रेलवे ने वैकल्पिक व्यवस्थाएं की हैं। ये ट्रेन हो रहीं प्रभावित प्रभावित होने वाली ट्रेनों में निम्नलिखित शामिल हैं: ट्रेन संख्या 22210 हजरत निजामुद्दीन – मुंबई सेंट्रल एक्सप्रेस दादर स्टेशन पर शॉर्ट-टर्मिनेट होगी और दादर तथा मुंबई सेंट्रल के बीच आंशिक रूप से रद्द रहेगी। इसी प्रकार, ट्रेन संख्या 09086 इंदौर – मुंबई सेंट्रल एक्सप्रेस भी दादर स्टेशन पर शॉर्ट-टर्मिनेट होगी और दादर-मुंबई सेंट्रल के बीच आंशिक रूप से रद्द रहेगी। ये ट्रेन भी रहेंगी रद्द अन्य प्रभावित ट्रेनों में ट्रेन संख्या 09076 काठगोदाम – मुंबई सेंट्रल एक्सप्रेस और ट्रेन संख्या 09186 कानपुर अनवरगंज – मुंबई सेंट्रल एक्सप्रेस शामिल हैं। ये दोनों ट्रेनें भी दादर स्टेशन पर शॉर्ट-टर्मिनेट होंगी तथा दादर और मुंबई सेंट्रल स्टेशनों के बीच आंशिक रूप से रद्द रहेंगी। मेंटिनेंस की वजह से ये रूट भी प्रभावित उत्तर पश्चिम रेलवे के चूरू-आसलू-दुधवाखारा स्टेशन के चूरू-सादुलपुर सेक्शन में पैच डबलिंग और ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग का कार्य किया जा रहा है। इस कार्य के कारण पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल से होकर गुजरने वाली कुछ ट्रेनों का संचालन प्रभावित रहेगा। ब्लॉक कार्य के चलते कई ट्रेनों के मार्ग में परिवर्तन किया गया है और कुछ स्टेशनों पर अतिरिक्त ठहराव भी दिए गए हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए प्रभावित ट्रेनों का विवरण जारी किया गया है। इन ट्रेनों का बदला गया रूट 20497 रामेश्वरम – फिरोजपुर एक्सप्रेस: 06, 13, 20 और 27 जनवरी, 2026 को रामेश्वरम से चलने वाली यह ट्रेन सीकर-लोहारू-सादुलपुर के परिवर्तित मार्ग से चलेगी। इसे झुंझुनू और लोहारू स्टेशनों पर अतिरिक्त ठहराव दिया गया है। 20498 फिरोजपुर – रामेश्वरम एक्सप्रेस: 24 जनवरी, 2026 को फिरोजपुर से चलने वाली यह ट्रेन सादुलपुर-लोहारू-सीकर के परिवर्तित मार्ग से चलेगी। इसे लोहारू और झुंझुनू स्टेशनों पर अतिरिक्त ठहराव दिया गया है। 04711 बीकानेर – बांद्रा टर्मिनस स्पेशल: 21 जनवरी, 2026 को बीकानेर से चलने वाली यह स्पेशल ट्रेन बीकानेर, मेरटा रोड बाईपास – जयपुर के परिवर्तित मार्ग से चलेगी। नोखा, नागौर, मेरटा रोड बाईपास, डेगाना, मकराना और फुलेरा स्टेशनों पर इसके अतिरिक्त ठहराव होंगे। 04712 बांद्रा टर्मिनस – बीकानेर स्पेशल: 22 जनवरी, 2026 को बांद्रा टर्मिनस से चलने वाली यह स्पेशल ट्रेन जयपुर – मेरटा रोड बाईपास – बीकानेर के परिवर्तित मार्ग से चलेगी। फुलेरा, मकराना, डेगाना, मेरटा रोड बाईपास, नागौर और नोखा स्टेशनों पर इसके अतिरिक्त ठहराव होंगे। 04715 बीकानेर – साईंनगर शिर्डी स्पेशल: 24 जनवरी, 2026 को बीकानेर से चलने वाली यह स्पेशल ट्रेन बीकानेर, मेरटा रोड बाईपास – जयपुर के परिवर्तित मार्ग से चलेगी। नोखा, नागौर, मेरटा रोड बाईपास, डेगाना, मकराना और फुलेरा स्टेशनों पर इसके अतिरिक्त ठहराव होंगे।  

भाजपा प्रदेश कार्यालय में सोमवार से शुक्रवार, दोपहर 1 से 3 बजे तक दो मंत्री करेंगे कार्यकर्ताओं से मुलाकात

भोपाल  कार्यकर्ताओं को क्षेत्र के काम से अब मंत्रियों से मिलने के लिए बंगले या मंत्रालय के चक्कर नहीं लगाने होंगे। सोमवार से शुक्रवार तक प्रदेश भाजपा कार्यालय में दो मंत्री दोपहर एक से तीन बजे तक बैठेंगे। कार्यकर्ताओं से संवाद कर उनकी समस्या का यथासंभव समाधान करेंगे। सत्ता और संगठन में समन्वय के लिए गठित समन्वय टोली की बैठक में हुए निर्णय के बाद इसकी शुरुआत भी सोमवार एक दिसंबर से हो गई। उप मुख्यमंत्री और राज्यमंत्री ने कार्यकर्ताओं से किया संवाद उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और राज्यमंत्री गौतम टेटवाल ने कार्यालय में कार्यकर्ताओं से संवाद किया। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि प्रदेश कार्यालय में मंत्रियों की उपलब्धता से संगठन और शासन के बीच समन्वय और मजबूत होगा तथा समस्याओं का समाधान त्वरित, प्रभावी और पारदर्शी तरीके से हो सकेगा। यह प्रयास संगठनात्मक गति, कार्यकर्ता संपर्क और समस्या-निराकरण को नई दिशा देगा। समाधान होने पर कार्यकर्ताओं को अवगत भी कराया जाएगा वहीं, उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि मंत्री-दिन प्रणाली का उद्देश्य कार्यकर्ताओं की समस्याओं का त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है। सोमवार को हमने और गौतम टेटवाल ने कार्यकर्ताओं की समस्याओं को सुना और समाधान भी कराया। प्राप्त आवेदनों को सूचीबद्ध कर संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। जिन समस्याओं का तत्काल समाधान नहीं हो सका, उनका फालोअप किया जाएगा। समाधान होने पर कार्यकर्ताओं को अवगत भी कराया जाएगा। यह व्यवस्था निरंतर जारी रहेगी कार्यकर्ताओं से मिलने की यह व्यवस्था निरंतर जारी रहेगी। केवल बड़े आयोजनों या विशेष कार्यक्रमों की स्थिति में ही इसे समायोजित किया जाएगा। इस निर्णय से भाजपा कार्यकर्ता भी बहुत खुश हैं। उनका कहना है कि क्षेत्र के कई कार्य ऐसे हैं जिनके लिए मंत्री से मिलना जरूरी होता है। इस व्यवस्था से अब सीधे मंत्री से मिलकर क्षेत्र की समस्या उठाई भी जा सकती है और उसका समाधान भी किया जा सकेगा। कब कौन मंत्री रहेगा कार्यालय में उपलब्ध     2 दिसंबर- राकेश सिंह, दिलीप अहिरवार     3 दिसंबर- विश्वास सारंग, लखन पटेल     4 दिसंबर- कैलाश विजयवर्गीय, प्रतिमा बागरी     5 दिसंबर- विजय शाह, नरेंद्र शिवाजी पटेल  

मध्यप्रदेश सरकार तीन किस्तों में लेगी 3 हजार करोड़ रुपये का कर्ज, कुल कर्ज बढ़कर 49,600 करोड़

भोपाल   मध्यप्रदेश की मोहन सरकार शीतकालीन सत्र के दौरान दूसरा अनुपूरक बजट पेश करने की तैयारी में है। इसके लिए सरकार एक बार फिर 3,000 करोड़ का कर्ज नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से लेने जा रही है, जिसका भुगतान बुधवार को किया जाएगा। ये सभी कर्ज रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के जरिए लिए जा रहे हैं, और इनका ब्याज हर छह महीने में 3 जून और 3 दिसंबर को चुकाया जाएगा। इस नए कर्ज के साथ चालू वित्तीय वर्ष में राज्य का कुल कर्ज बढ़कर 49,600 करोड़ पहुंच जाएगा। पहला कर्ज 1 हजार करोड़ रुपए का होगा वित्त विभाग के द्वारा नोटिफिकेशन जारी किया गया। जिसके अनुसार, पहला कर्ज एक हजार करोड़ रुपए का होगा। जिसका भुगतान सरकार के द्वारा आठ साल में किया जाएगा। इसके बाद एक हजार करोड़ का दूसरा कर्ज भी लिया जाएगा। जिसको सरकार 13 साल में चुकाएगी। तीसरे कर्ज की राशि भी 1 हजार करोड़ रुपए होगी। जिसका भुगतान ब्याज के साथ 23 साल में किया जाएगा। इन कर्जों का ब्याज जून और दिसंबर महीने में अदा किया जाएगा। नवंबर में सरकार ने लिया था कर्ज इससे पहले सरकार ने 11 नवंबर को ऑक्शन के बाद सरकार ने 12 नवंबर को 1500-1500 सौ करोड़ के दो कर्ज और 1 हजार करोड़ का दूसरा कर्ज लिया था। जो कि 16 साल, 22 साल और 19 साल के लिए हैं। इनके ब्याज का भुगतान सरकार को 6-6 महीने की अवधि में करना होगा। ऐसे ही 28 अक्टूबर को 5200 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था। उसमें पहली राशि 2700 करोड़ की थी, जो कि 21 साल के लिए ली गई थी। वहीं, दूसरी राशि 2500 करोड़ की, जो 22 साल के लिए ली गई थी। कर्ज लेने की लिमिट बरकरार सरकार ने अपनी रेवेन्यू को लेकर कहा है कि वित्त वर्ष 2023-24 में सरकार 12487.78 करोड़ के रेवेन्यू सरप्लस में थी। इसमें आमदनी 234026.05 करोड़ और खर्च 221538.27 करोड़ रहा। इसके विपरीत वित्त वर्ष 2024-25 में प्रदेश सरकार की रिवाइज्ड आमदनी 262009.01 करोड़ और खर्च 260983.10 करोड़ बताया है। इस तरह पिछले वित्त वर्ष में भी सरकार की आय 1025.91 करोड़ सरप्लस बताई गई है, जो भी कर्ज लिया जा रहा है वह लोन की लिमिट के भीतर है। ऐसे ही 30 सितंबर को 1500-1500 करोड़ के दो कर्ज लिए थे। जिसका भुगतान एक अक्टूबर को हुआ था। ये कर्ज 20 साल और 23 साल के अवधि के लिए हैं। इसका भुगतान एक अक्टूबर हो हुआ था। 

रायपुर: घर में पर्यटकों को ठहराकर कमाएं पैसा, होमस्टे नीति 2025-30 से ग्रामीणों को बड़ी मदद

रायपुर  छत्तीसगढ़ सरकार ने होमस्टे पॉलिसी लागू कर दी है,  सरकार ने 2025-30 के लिए नई छत्तीसगढ़ होमस्टे नीति 2025‑30 बनाई है, जिसका सबसे ज्यादा फायदा ग्रामीणों को मिलने वाला है, खास तौर पर बस्तर और सरगुजा संभाग के जिलों में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस दिशा में और काम किया जा रहा है. इस पॉलिसी का मकसद प्रदेश के ग्रामीण और आदिवासी बहुल इलाकों, विशेष रूप से बस्तर और सरगुजा संभागों में होने वाली होमस्टे में और इजाफा करने की तैयारी है, ताकि ज्यादा से ज्यादा पर्यटक इस दिशा में आ सके.  होम-स्टे की सुविधा बढ़ेगी  छत्तीसगढ़ सरकार की इस पॉलिसी के तहत ग्रामीण परिवारों को प्रोत्साहन मिलेगा जो अपना घर पर्यटकों के ठहरने के लिए होम-स्टे के रूप में उपलब्ध कराएंगे. सरकार होम-स्टे सेट-अप की सुविधा देने के लिए वित्तीय मदद देगी, जिससे परिवारों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिलेगा. यानि अब जो इस दिशा में का करना चाहते हैं उन्हें इसका सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा. नए होम‌स्टे पर 1 लाख रुपए तक की मदद भी सरकार की तरफ से मिलेगी, जिसके लिए रिनोवेशन पर 50 हजार और 100 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी भी ग्रामीणों को मिलेगी.  दरअसल, नीति के अनुसार होम-स्टे के लिए घर अपग्रेड करने के लिए 10 लाख रुपए तक की सहायता दी जाएगी. क्योंकि इससे स्थानीय लोग अपने घर को होम-स्टे में बदलकर स्थायी आय अर्जित कर सकेंगे, युवाओं, महिलाओं और स्थानीय कारीगरों के लिए स्वरोजगार व रोजगार के अवसर खुलेंगे. होम-स्टे की मदद से पर्यटक गांव की सादगी, प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति, लोक-कला, हस्तशिल्प, पारंपरिक व्यंजन आदि का अनुभव ले सकेंगे, जिससे स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा.   ग्रामीणों और पर्यटकों को फायदा कैसे रियल सरगुजिहा फीलिंग: सैलानियों को अब सरगुजा में रियल सरगुजिहा फीलिंग मिल सकेगी. जिस जंगल, पहाड़, गांव, घर खेत खलिहान, आदिवासी संकृति को देखने सैलानी यहां आते हैं. अब वो इन सबमें समाहित होकर उसका आनंद ले सकेंगे, क्योंकि सरकार की इस नीति के बाद सैलानियों को शहर के महंगे एसी वाले होटल में नहीं ठहरना पड़ेगा. पर्यटकों को मिलेगा होम स्टे का फायदा: होम स्टे के तहत पर्यटक गांव में ही ग्रामीणों के घर में रह सकेंगे. उनका खाना, उनकी चारपाई, खेत खलिहान, कुएं का पानी सहित तमाम लोकल कल्चर का आनंद उठा सकेंगे. सरकार होम स्टे को प्रमोट करने के लिए नीति बना चुकी है. इसे चरण बद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. सरकार होम स्टे के लिए प्रोत्साहन राशि और लोन लेने पर ब्याज में भी छूट की योजना बना चुकी है. पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा: सरगुजा के पर्यटक स्थलों और लोक संकृति पर शोध करने वाले अजय कुमार चतुर्वेदी कहते हैं कि होम स्टे से प्रदेश के दो संभाग बस्तर और सरगुजा के पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा. सरगुजा का पर्यटन, धार्मिक, साहित्यिक सभी दृष्टि से समृद्ध है. यहां रामगढ़ है, डीपाडीह है, मैनपाट, सोमरसोत, तमोर पिंगला अभयारण्य, ओडगी में कूदरगढ़, गुरु घासीदास टाइगर रिजर्व के कई इलाके हैं. बस्तर में होम स्टे कल्चर:  प्रभारी मंत्री ओपी चौधरी ने होम स्टे के सम्बन्ध में पूरी जानकारी दी. उन्होंने कहा कि बस्तर के कुछ गांव में होम स्टे कल्चर विकसित हो चुका है. इसे देखते हुए सरकार ने होम स्टे नीति बनाई है. पर्यटक हमारे घर के एक कमरे में हमारे साथ रहेगा, जो हम खायेंगे वही खायेगा. हमारे खेत बाड़ी घूमेगा. विदेशों में ये कल्चर कई जगह है. सरकार करेगी मदद: मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि पर्यटन विभाग ने चिन्हांकन का काम शुरू कर दिया है. हम एक कमरे पर एक लाख रुपये प्रोत्साहन देंगे. पहले वर्ष 50 हजार, फिर अगले वर्ष 30 हजार और तीसरे वर्ष 20 हजार दिया जाएगा. आप चाहें तो लोन भी ले सकते हैं. उसमें सरकार इंटरेस्ट सब्सिडी देगी. एक व्यक्ति 6 कमरे तक बना सकता है. पर्यटकों और ग्रामीणों को होगा फायदा: बहरहाल सरकार की नीति का फायदा सीधे तौर पर पर्यटकों और स्थनीय ग्रामीणों को होगा. गांव के कच्चे के मकान का कमरा किराये पर देकर ग्रामीण पैसा कमा सकेंगे. ना सिर्फ कमरा बल्कि खाना व अन्य सुविधाओं का भी चार्ज वो सैलानियों से कर सकेंगे. सैलानियों के लिए भी ये सुनहरा अवसर होगा, क्योंकि जिस संस्कृति को वो दूर से देखने और फोटो क्लिक करने आते थे, अब वो उसी संस्कृति में रह सकेंगे. सैलानियों का खर्च बचेगा: पर्यटक सरगुजा का लोकल जीराफूल, लाकरा की चटनी, पूटू, जंगली साग, कुएं का पानी, चारपाई में पैरावट का बिस्तर जैसे अनुभव को जी सकेंगे. इससे सैलानियों के बजट में भी कमी आयेगी क्योंकि सरगुजा घूमने के लिए वो पहले अंबिकापुर आकर किसी महंगे होटल में ठहरते हैं और फिर यहां से कैब बुक करके घूमने जाते हैं. शाम को वापस आते हैं और अगले दिन फिर निकलते हैं. इस तरह सैलानियों का ट्रेवलिंग और स्टे का खर्च काफी अधिक हो जाता है, लेकिन होम स्टे में वो उसी गांव में रुक सकेंगे, जहां उनको घूमना है. छत्तीसगढ़ में बढ़ा होम स्टे  बता दें कि बीते कुछ सालों में छत्तीसगढ़ में भी होम स्टे पर्यटन में तेजी से बढ़ावा आया है, क्योंकि राज्य के बस्तर और सरगुजा संभागों के जंगली इलाकों और ग्रामीण इलाकों में होम स्टे का कल्चर बढ़ा है, बाहर से आने वाले लोग शहर की थकान से दूर गांवों की शांति और सुकून में रहना पसंद करते हैं, ऐसे में छत्तीसगढ़ सरकार भी इस दिशा में काम कर रही है, ताकि पर्यटन के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की संस्कृति को भी बढ़ावा दिया जा सके.