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RTO इंस्पेक्टर मीनाक्षी हत्याकांड: इंदौर शिफ्टिंग से नाराज था बॉयफ्रेंड पवन

भोपाल  भोपाल शहर में आरटीओ इंस्पेक्टर मीनाक्षी गोखले मर्डर मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। बताया जा रहा है कि मीनाक्षी का ब्वॉयफ्रेंड पवन मूलतः सीधी जिले के भनवारी गांव का रहने वाला था। पवन 4 बहनों 6 भाइयों में सबसे छोटा था। पिता दीनबंधुराम द्विवेदी का निधन पिछले साल फरवरी में हो गया था जबकि मां का देहांत नवंबर में हो गया था। घरवालों ने बताया कि उसकी शादी नहीं हुई थी। लंबे समय से भोपाल में ही शादी की बात चल रही थी। बड़े भाई विनय ने बताया कि उसने 15 साल दक्षिण अफ्रीका में नौकरी की थी। बाद में वापस लौट आया। पवन बीते 7 साल से भोपाल में रह रहा था। पुलिस के मुताबिक- इसी समय मीनाक्षी की दोस्त कृतिका ने मीनाक्षी और पवन को मकान के आंगन में तेज आवाज में बात करते देखा था। कुछ घंटे बाद मीनाक्षी का शव घर के हॉल में खून से लथपथ मिला। वहीं, मकान से करीब 20 मीटर दूर पवन का शव पेड़ पर फंदे से लटका मिला। कृतिका ने पुलिस को दिए बयान में कहा है कि उसने मीनाक्षी की हत्या होते हुए नहीं देखा। उसका कहना है कि घर में दो कूलर चल रहे थे, इसलिए बाद में अंदर से हो रही बहस की आवाज उसे सुनाई नहीं दी। ऐसे में रात 1:30 बजे के बाद दोनों के बीच क्या हुआ, यह अभी पुलिस जांच का विषय है। कृतिका ने पुलिस को बताया कि सोमवार सुबह करीब 5:30 बजे इंदौर के लिए निकलना पहले से तय था। सुबह अलार्म की आवाज से उसकी नींद खुली। उसे लगा कि मीनाक्षी सो रही होगी। उसने बिस्तर से ही मीनाक्षी के मोबाइल नंबर पर कॉल किया, लेकिन कॉल नहीं उठा। इसके बाद वह कमरे से बाहर आई तो हॉल में मीनाक्षी का खून से लथपथ शव देखा। कृतिका ने तुरंत 112 पर कॉल कर पुलिस को सूचना दी। पुलिस के घर पहुंचने से पहले ही कॉलोनी के वॉचमैन ने पवन का शव फंदे पर लटका देखा और पुलिस को इसकी जानकारी दी। इसके बाद पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पवन से मिलने के बाद खुश थीं मीनाक्षी, खुद खाना बनाया; रात में साथ टहले कृतिका ने पुलिस को बताया कि मीनाक्षी पवन से मिलने के बाद खुश थीं। मीनाक्षी ने अपने हाथों से खाना बनाया और सभी को खिलाया। खाना खाने के बाद मीनाक्षी, पवन, कृतिका और तीन साल की बच्ची कॉलोनी में वॉक करने निकले। रात करीब 10:30 बजे तक टहलने के बाद कृतिका सोने चली गई। वह मीनाक्षी की बेटी को भी अपने साथ सुलाने ले गई थी। कृतिका के मुताबिक, मीनाक्षी ने ही उसे बच्ची को अपने साथ सुलाने की बात कही थी। कृतिका ने पुलिस को बताया कि वह सफर के कारण काफी थकी हुई थी और कुछ ही देर में उसे नींद आ गई। हालांकि, देर रात उसकी नींद खुली तो उसने मीनाक्षी और पवन को आंगन में तेज आवाज में बातचीत करते आखिरी बार देखा। कृतिका का कहना है कि उसने दोनों के बीच पहले भी विवाद होते देखे थे। इसलिए उसने उस समय उनकी बातचीत में हस्तक्षेप नहीं किया और बच्ची के साथ वापस सो गई। रिश्ता खत्म हुआ तो बढ़ा झगड़ा पुलिस के अनुसार, मीनाक्षी और पवन की पहचान इंदौर में पढ़ाई के दौरान हुई थी। तब पवन कोचिंग क्लास चलाता था और मीनाक्षी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही थीं। दोनों शादी करना चाहते थे, लेकिन अलग जाति के कारण मीनाक्षी के परिवार की सहमति नहीं थी। बाद में मीनाक्षी ने दूसरे युवक से शादी की, लेकिन डेढ़ साल पहले उनका तलाक हो गया। इसके बाद भी पवन उससे शादी करना चाहता था। बताते हैं किराए का मकान छोड़कर इंदौर शिफ्ट होने की बात से वह नाराज था। सहेली और बेटी अंदर कमरे में सोई थी डीसीपी आदर्शकांत शुक्ला ने बताया कि मीनाक्षी रविवार शाम 7 बजे दतिया से सहेली कृतिका और तीन साल की बेटी के साथ भोपाल पहुंची थीं। रात में कृतिका और बच्ची घर के अंदर वाले कमरे में सो गए। मीनाक्षी बाहर वाले कमरे में थीं। सुबह 7 बजे कृतिका की नींद खुली तो मीनाक्षी को मृत हालत में देखा। इसके बाद पुलिस को सूचना दी। सोशल मीडिया पर एक्टिव थी मीनाक्षी  सोशल मीडिया पर काफी ज्यादा एक्टिव थी। वो अपनी 3 साल की बेटी के साथ लगातार रील और फोटो डालती रहती थी। सोशल मीडिया पर उसने वर्दी के साथ कई रील डाल रखी है। कुछ रीलों से समझ आता है कि मीनाक्षी कई चीजों के लेकर परेशान रहती थी। पति से तलाक के बाद बेटी को पूरी तरह से वहीं देखती थी। इंदौर में हुई थी दोस्ती मीनाक्षी से आरोपी पवन की दोस्ती इंदौर में हुई थी। वह पर कोचिंग क्लास चलाता था। साथ ही उससे शादी करना चाहता था। लेकिन मीनाक्षी इसके लिए तैयार नहीं थी। आशंका व्यक्त की जा रही है। इसी विवाद में उसकी हत्या हुई होगी। पति से हो चुका है तलाक वहीं, मृतक मीनाक्षी का दो साल पहले पति से तलाक हो चुका है। उसकी तीन साल की बेटी है। घटना के बाद पुलिस ने परिजनों को सूचना दे दी है। मामले की सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगा।

शिक्षकों के मानदेय में बढ़ोतरी को मंजूरी, अंशकालीन शिक्षकों को मिलेंगे 1000 रुपये ज्यादा

रांची  समग्र शिक्षा अभियान के तहत संचालित कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय सहित सभी आवासीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक-शिक्षिकाओं का मानदेय बढ़ेगा। इसके तहत संविदा पर कार्यरत शिक्षक-शिक्षिकाओं का मानदेय 10 प्रतिशत बढ़ेगा। वहीं, अंशकालीन शिक्षकों के मानदेय में एक हजार रुपये की वृद्धि होगी। समग्र शिक्षा अभियान की मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली राज्य कार्यकारिणी समिति ने इस प्रस्ताव पर इस शर्त के साथ अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है कि इसपर सक्षम प्राधिकार से भी अनुमोदन लिया जाएगा। इस तरह, वित्त विभाग की मंजूरी मिलने के बाद बढ़ा हुआ मानदेय लागू होगा। कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों में कक्षा आठ तक के लिए अनुबंध पर 1,015 शिक्षिकाएं कार्यरत हैं। वर्तमान में इनके मानदेय पर प्रतिवर्ष 3,410 लाख रुपये खर्च होते हैं। 10 प्रतिशत मानदेय वृद्धि होने पर प्रतिवर्ष 341 लाख रुपये का खर्च बढ़ेगा। इन विद्यालयों में कक्षा नौ से 12 के लिए 1,015 अंशकालीन शिक्षिकाएं कार्यरत हैं। इन्हें प्रति माह 14,400 रुपये मानदेय के रूप में दिए जाते हैं। इनके मानदेय में एक हजार रुपये की वृद्धि होगी। इन विद्यालयों में कक्षा आठ तक के लिए अनुबंध के स्वीकृत पदों में रिक्त पदों पर अंशकालीन शिक्षिकाओं की नियुक्ति होगी। इन्हें 14 हजार रुपये मानदेय देने का प्रस्ताव है। चूंकि यह राशि समग्र शिक्षा अभियान के तहत स्वीकृत है, इसलिए इसपर राज्य सरकार को अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। इसी तरह, झारखंड बालिका आवासीय विद्यालयों में कार्यरत 456 अंशकालीन शिक्षिकाओं को वर्तमान में 13,200 रुपये मानदेय दिए जाते हैं। मानदेय बढ़ने पर इन्हें प्रतिमाह 14,200 रुपये का भुगतान होगा। वहीं, नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालय में कार्यरत 78 शिक्षकों को अब प्रतिमाह 12 हजार की जगह 13 हजार रुपये मानदेय दिए जाएंगे। 851.95 लाख रुपये बढ़ेगा बोझ प्रस्ताव के अनुसार, मानदेय बढ़ाने से पड़नेवाले अतिरिक्त वित्तीय भार का वहन राज्य बजट से किया जाएगा। इसपर प्रतिवर्ष 851.95 लाख रुपये अतिरिक्त खर्च होंगे।  

रेस्टोरेंट की रसोई में गंदगी, आटे में मिले कीड़े; 10 प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई

लखनऊ  यूपी में शुद्ध ही शुभ है अभियान के तहत 38 टीमों ने अलग-अलग इलाकों में छापेमारी कर 52 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। इसी क्रम में प्रदेश की खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग की ओर से सोमवार को कानपुर समेत प्रदेश के पांच जिलों में अधिकारियों की विशेष टीम ने व्यापक छापेमारी की। इस दौरान मॉल और रेस्टोरेंट में गंदगी का अंबार मिला। कानपुर में खाद्य विभाग ने रेव मोती मॉल के फूड कोर्ट में छापेमारी की। जहां अत्यंत खराब हाइजीन एवं सैनिटरी कंडीशन, अत्यधिक गंदगी, क्षतिग्रस्त दीवारें और खाद्य सामग्री फर्श पर रखे जाने की स्थिति पाई गई। इसके तहत फूड कोर्ट में संचालित सभी 10 प्रतिष्ठानों को सुधार होने तक बंद रखने की कार्रवाई की गई। टीम ने ला पीनोज पिज्जा (सप्पायर मॉल) में इंसेक्ट इन्फेक्शन, एक्सपायर सॉस/ड्रेसिंग्स, वेज एवं नॉन वेज खाद्य पदार्थों के लिए एक ही बर्तनों के इस्तेमाल व खराब गुणवत्ता का पनीर पाए जाने पर लाइसेंस निलंबन की संस्तुति की गई। स्क्वायर मॉल के फूड कोर्ट में भी मिली खामियां स्वरूप नगर स्थित वेलफेल सैम/केशव राज एंड संस में प्रोपराइटरी फूड्स पर मैन्युफैक्चरिंग डेट, एक्सपायर डेट एवं इंग्रेडिएंट्स का विवरण अंकित नहीं पाया गया। उपभोक्ताओं को आवश्यक खाद्य संबंधी जानकारी उपलब्ध न कराने के कारण सुधार होने तक कारोबार बंद करने की संस्तुति की गई। स्क्वॉयर मॉल में नी हाउ में चोक्ड ड्रेनेज, अत्यंत खराब हाइजीन एवं सैनिटरी कंडीशन तथा वेज एवं नॉन वेज खाद्य पदार्थों के लिए एक ही बर्तनों के प्रयोग की स्थिति मिली। बिरयानी क्वीन के आटे में कीड़े इन कमियों के दृष्टिगत सुधार होने तक कारोबार बंद करने की संस्तुति की गई। बिरयानी क्वीन में आटे में कीड़े, निर्माण स्थल पर अत्यधिक गंदगी तथा खाद्य तेल के बार-बार इस्तेमाल के साथ तेल में अत्यधिक गंदगी पाई गई। किदवई नगर एम ब्लॉक स्थित स्पाइसी फास्ट फूड रेस्टोरेंट में खुले नाले के समीप प्रतिष्ठान का संचालन और किचन एरिया में दुर्गंध पाई गई। सोमवार को फूड विभाग की टीम ने छापेमारी कर सैंपल भरे। रेस्टोरेंटों की रसोई में नहीं मिली पर्याप्त साफ-सफाई उधर, वाराणसी में खाद्य विभाग की 20 टीमों ने फास्ट फूड रिटेल चेन और रेस्टोरेंट इकाइयों के खिलाफ अभियान चलाकर 40 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। टीमों ने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता के साथ रसोई की स्वच्छता, खाद्य भंडारण, कीट नियंत्रण और साफ-सफाई की जांच की। इस दौरान कहीं स्टोर में गंदगी मिली तो कहीं कीड़े मिले। एक रेस्टोरेंट में शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य पदार्थों की तैयारी के लिए अलग-अलग पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। महमूरगंज स्थित कैफे कॉफी डे ग्लोबल लिमिटेड के निरीक्षण में प्रतिष्ठान के बुनियादी ढांचे की स्थिति खराब मिली। फॉल्स सीलिंग क्षतिग्रस्त थी। उसके हिस्से टूटकर खाद्य पदार्थों में गिरने और उनके दूषित होने की आशंका सामने आई। स्टोरेज एरिया में अत्यधिक गंदगी मिली। टॉयलेट में भी साफ-सफाई नहीं थी। अर्दली बाजार के मियां महल स्थित ला पीनोज के निरीक्षण में डस्टबिन के आसपास कीटों का संक्रमण पाया गया। वहीं, शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य पदार्थों की तैयारी के लिए अलग-अलग व्यवस्था नहीं थी। विभाग की टीमों ने केवल तैयार खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता नहीं देखी, बल्कि रसोई की स्वच्छता, सेनिटेशन, पेस्ट कंट्रोल, ड्रेनेज, खाद्य भंडारण, कच्चे माल की गुणवत्ता, शाकाहारी-मांसाहारी खाद्य पदार्थों के अलगाव और खाद्य लेबलिंग की भी जांच की। अ

झारखंड का करम पर्व आज, करम डाल की पूजा से जुड़ी हैं सुख-समृद्धि की मान्यताएं

रांची  झारखंड की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं में करम पर्व का विशेष महत्व है. यह पर्व प्रकृति की पूजा, अच्छी फसल, सुख-समृद्धि और पारिवारिक खुशहाली से जुड़ा है. इस दिन बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं. 2026 में करम पर्व 22 सितंबर, मंगलवार को मनाया जा रहा है. आखिर क्या है करम पर्व एक हरी-भरी करम की डाल, मांदर की थाप पर झूमता गांव और पूजा में सराबोर लोग—यही करम पर्व की खूबसूरत तस्वीर है. लेकिन यह पर्व सिर्फ पूजा और उत्सव तक सीमित नहीं है. इसके पीछे प्रकृति, कृषि, मेहनत और समृद्धि से जुड़ी सदियों पुरानी मान्यताएं हैं. लोकविश्वास में करम वृक्ष को कर्म देवता का प्रतीक माना जाता है. इसलिए पर्व के दिन करम की डाल को विधि-विधान से स्थापित कर उसकी पूजा की जाती है. बुवाई के बाद मनाए जाने वाले इस पर्व में लोग अच्छी फसल और प्रकृति की कृपा की कामना करते हैं. पूजा में मिट्टी, बीज, पेड़ और फसल जीवन के प्रतीक माने जाते हैं. जावा के रूप में अंकुरित बीज नई जिंदगी और उर्वरता की उम्मीद जगाते हैं, जबकि करम की हरी डाल प्रकृति की शक्ति और समृद्धि का प्रतीक बनती है. कुछ आदिवासी परंपराओं में ‘करम रानी’ की पूजा का भी विशेष महत्व है. अलग-अलग क्षेत्रों में करम पर्व की मान्यताएं और पूजा की विधियां भले ही अलग हों, लेकिन इसके केंद्र में एक ही भावना है—प्रकृति का सम्मान और बेहतर जीवन की कामना. कैसे मनाया जाता है करम पर्व और क्या है इसकी परंपराएं ? इस त्योहार को कई अनुष्ठानों का पालन करके मनाया जाता है. करम पूजा की तैयारियों में एक हफ्ते का समय लगता है. नदी के किनारे से ताजा रेत लाकर गांव और हर घर में रखी जाती हैं. इसके बाद इसमें सात बीज- जौ, मक्का, गेहूं, चावल, चना, कुल्थी और मसूर बोए जाते हैं. यही नहीं करम वृक्ष के तीन शाखाओं को आंगन की मिट्टी या गांव के अखाड़े या कहे सामुदायिक केंद्र में लगाया जाता है. ये तीनों शाखाएं त्रिदेवों- ब्रह्मा, विष्णु, महेश्वर और आकाश, पृथ्वी, पाताल, भूत, वर्तमान, भविष्य का प्रतीक माना जाता है. इस दिन बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र और समृद्धि के लिए दुआएं मांगती हैं और करम वृक्ष की पूजा करती हैं. भेलवा की शाखाओं को धान की खेत में लगी फसलों को कीड़ों और अन्य हानिकारक तत्वों से बचाने के लिए डाला जाता है. करम पर्व से जुड़ी क्या है मान्यताएं ? आदिवासी समुदायों की मानें तो करम पूजा के बाद ही उनके लिए शुभ समय शुरू होता है. इस दौरान शादियां तय की जाती हैं. माना जाता है कि इससे मित्रता और मजबूत होती हैं. इस त्योहार से जुड़ी एक परंपरा ‘सहिया’ का लोग पालन करते हैं. सहिया का अर्थ है दोस्ती और समुदायों के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करना. आदिवासियों में ऐसी मान्यता है कि इस सहिया को मनाने से पीढ़ियों तक दोस्ती कायम रहती हैं. करम पूजा की सबसे आकर्षक विशेषताओं में से एक है “करम नृत्य”. पूजा के बाद लोग पारंपरिक गीत पर सामूहिक रूप से नृत्य करते हैं और करम गीत गाते हैं. इसमें केवल मनोरंजन नहीं होता बल्कि लोकगीतों के माध्यम से समाज की परंपरा, प्रेम, प्रकृति, खेती और जीवन का अनुभव अगली पीढ़ी तक पहुंचता है. यह एक सामाजिक एकता का पर्व हैं. ये पूजा या पर्व सामूहिक रूप से मनाया जाने वाला पर्व है. इस दिन गांव के लोग एक स्थान पर इकट्ठा होते हैं और पूजा करते हैं. इस पर्व को लेकर एक लोक कथा ये है बहुत समय पहले करम और धरम नाम के दो भाई रहते थे, दोनों स्वभाव से अलग थे. धरम मेहनत और अपने कर्तव्य को महत्व देता था, जबकि करम का विश्वास था कि जीवन में सुख-समृद्धि के लिए कर्म के साथ प्रकृति और परंपराओं का सम्मान भी जरूरी है एक बार दोनों भाइयों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया. गुस्से में करम ने करम वृक्ष की डाल को अपमानित कर दिया. इसके बाद उनके परिवार पर परेशानियां आने लगीं. घर की सुख-समृद्धि चली गई और जीवन कठिनाइयों से भर गया. धरम को अपनी गलती का एहसास हुआ फिर उसने करम देवता से क्षमा मांगी और करम वृक्ष की पूजा की, परिवार के लोगों ने भी श्रद्धा से करम देवता की आराधना की, इसके बाद धीरे-धीरे उनके जीवन में सुख-समृद्धि लौटने लगी,इसी लोकविश्वास के आधार पर करमा पर्व में करम वृक्ष की डाल को पवित्र मानकर उसकी पूजा की जाती है. माना जाता है कि करम देवता की पूजा करने से परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली आती है. प्रकृति संरक्षण का संदेश करम पर्व का सबसे बड़ा संदेश प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण से जुड़ा है. यह पर्व पेड़-पौधों, जंगल, खेती और प्रकृति के प्रति आदिवासी समाज की गहरी आस्था को दर्शाता है. साथ ही यह भाई-बहन के रिश्ते, दोस्ती, सामुदायिक एकता और आपसी सहयोग को मजबूत करने का अवसर भी है. यही वजह है कि करम पर्व आज भी झारखंड की लोक संस्कृति और परंपरा में अपनी खास पहचान बनाए हुए है.

मोहाली में BJP की नशा मुक्त पंजाब यात्रा का स्वागत, दो स्थानों पर सभाएं

मोहाली पंजाब में भाजपा द्वारा निकाली जा रही नशा मुक्त पंजाब यात्रा आज मोहाली पहुंचेगी। यहां यात्रा के दो प्रमुख पड़ाव होंगे। पहला कार्यक्रम फेज-11 में पेट्रोल पंप के पीछे होगा, जहां जनसभा को संबोधित किया जाएगा।  यात्रा का उद्देश्य नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाना है। आयोजकों ने कार्यक्रमों में लोगों से शामिल होने की अपील की है। पुलिस की तरफ से भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। यात्रा को लेकर बीजेपी की तरफ से उचित इंतजाम किए गए हैं। भव्य पंडाल लगाए गए हैं। भाजपा सांसद सतनाम सिंह संधू समेत कई हस्तियों के कार्यक्रम में शामिल होने की उम्मीद है। बीजेपी प्रधान केवल सिंह ढिल्लों भी हाजिरी लगा सकते हैं। मोहाली बीजेपी के नेता संजीव वशिष्ट बताते हैं कि इंतजाम पूरे कर लिए गए हैं। यात्रा राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से नशे के खिलाफ सोशल संदेश देने की कोशिश की जाएगी। 19 सितंबर को फतेहगढ़ साहिब से शुरू हुई यात्रा यात्रा 19 सितंबर को गुरुद्वारा श्री फतेहगढ़ साहिब में नतमस्तक होने के बाद शुरू हुई। जालंधर में संपन्न होने से पहले यह पंजाब के कई विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरेगी। यात्रा का रूट समराला, पायल, खन्ना, अमलोह, फतेहगढ़ साहिब, बस्सी पठाना, डेराबस्सी, एसएएस नगर, खरड़, चमकौर साहिब, रोपड़, आनंदपुर साहिब, गढ़शंकर, चब्बेवाल, होशियारपुर, शाम चौरासी, दसूहा, मुकेरियां, उड़मुड़, आदमपुर, बलाचौर, नवांशहर, बंगा और फगवाड़ा से होकर तय किया गया है।

SIR के बाद चंडीगढ़ की अंतिम वोटर लिस्ट आज होगी जारी, 56 हजार नामों पर नजर

चंडीगढ़  विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद मतदाता सूची में हुए बड़े बदलाव को लेकर मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रेरणा पुरी मंगलवार को प्रेस वार्ता करेंगी।दोपहर 1:15 बजे सेक्टर-18 स्थित निर्वाचन विभाग के नगर योजना भवन के सी-विंग के भूतल पर होने वाली प्रेस वार्ता में SIR की पूरी प्रक्रिया, अब तक हुए सत्यापन और मतदाता सूची में हुए बदलाव की जानकारी दी जाएगी। चंडीगढ़ में SIR के बाद मतदाताओं की संख्या में बड़ी गिरावट सामने आई है। पुनरीक्षण से पहले शहर में 5,16,427 मतदाता दर्ज थे, जबकि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अब यह संख्या करीब 4,60,109 रह गई है। हालांकि, अंतिम मतदाता सूची मंगलवार को जारी होने के बाद ही स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। किस वार्ड में कितने नाम घटे, आज मिल सकती है जानकारी प्रेस वार्ता में सबसे अहम सवाल यह रहेगा कि SIR के दौरान किस वार्ड में कितने नाम हटे, कितने नाम बरकरार रहे और कितने नए मतदाता जोड़े गए। डुप्लीकेट, मृत और दूसरे स्थान पर जा चुके मतदाताओं के नामों के सत्यापन के साथ दावे और आपत्तियों पर हुई कार्रवाई की जानकारी भी सामने आ सकती है। निगम चुनाव से पहले अहम सूची दिसंबर में प्रस्तावित नगर निगम चुनाव से पहले अंतिम मतदाता सूची महत्वपूर्ण होगी। चंडीगढ़ में 35 वार्डों में चुनाव होना है। ऐसे में वार्डवार मतदाता संख्या में हुए बदलाव से चुनावी समीकरण पर असर पड़ना स्वाभाविक है। 2024 के लोकसभा चुनाव में शहर में 6,59,696 मतदाता थे। इसके मुकाबले मौजूदा आंकड़ा करीब दो लाख कम है। मंगलवार को जारी होने वाली अंतिम सूची से ही यह साफ होगा कि वास्तविक कटौती कितनी हुई है। 3,521 पंजीकृत मतदाताओं की मृत्यु : विशेष पुनरीक्षण अभियान के दौरान ये भी सामने आया कि 3,521 पंजीकृत मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है, जबकि 43,878 मतदाता स्थायी रूप से अन्य स्थानों पर स्थानांतरित हो चुके हैं. इसके अलावा 12,886 मतदाता ऐसे मिले, जो सत्यापन के दौरान अनुपस्थित पाए गए और उनके एन्यूमरेशन फॉर्म निर्वाचन विभाग को प्राप्त नहीं हुए।  मतदाता सूची को सटीक बनाना लक्ष्य : निर्वाचन विभाग ने स्पष्ट किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना है, ताकि आगामी चुनावों में केवल पात्र और सत्यापित मतदाताओं के नाम ही सूची में शामिल हों। 

ग्वालियर HC सख्त, NHAI और PWD की बदहाल सड़कों पर अफसरों की जवाबदेही तय

 ग्वालियर खराब सड़कों के लिए कुख्यात नगर निगम की सड़कों की गुणवत्ता फेल सामने आई लेकिन अब भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण(एनएचएआई) और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) जैसी एजेंसियों की सड़कें भी मानकों पर खरी नहीं उतर पाईं। नगर निगम के बाद अब एनएचएआई की मेहरा टोल से सिकरौदा चौराहा तक और पीडब्ल्यूडी की एजी ऑफिस से विक्की फैक्ट्री की सड़क के अधिकांश नमूने फेल सामने आए। शहर की सड़कों की गुणवत्ता को लेकर दायर जनहित याचिका में सोमवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। सड़क निर्माण की गुणवत्ता की जांच के लिए गठित आयोग की रिपोर्ट में एनएचएआई के अधीन मेहरा टोल से सिकरौदा चौराहा मार्ग के अधिकांश नमूने फेल पाए गए हैं। आयोग की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि नेटवर्क सर्वे व्हीकल (एनएसवी) की अंतरिम रिपोर्ट के अनुसार भी सड़क निर्धारित मापदंडों के अनुरूप नहीं मिली। इसी तरह पीडब्ल्यूडी के अधीन एजी ऑफिस से विक्की फैक्ट्री मार्ग से लिए गए अधिकांश नमूनों का भी यही हाल मिला। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने की। कोर्ट ने दोनों रिपोर्ट संबंधित विभागों को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं और जवाब के लिए समय दिया है। कोर्ट ने आयोग के पूरे कार्य को रिकॉर्ड पर लेते हुए कहा कि अब संबंधित अधिकारियों और विभागों को भी अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए ग्वालियर शहर के हित में काम करना चाहिए। कोर्ट ने उम्मीद जताई कि अलग-अलग विभागों में पदस्थ अधिकारी भी शहर के हित में काम करने के लिए आगे आएंगे। छह माह में होना था सर्वे, दस्तावेज ही नहीं मिला एनएचएआई के अधीन सड़क की रिपोर्ट पर सुनवाई के दौरान आयोग की ओर से बताया गया कि एनएचएआई को प्रत्येक छह माह में सड़क का असंयोजित सर्वे कराना आवश्यक है। हालांकि, जांच के दौरान ऐसा कोई दस्तावेज नहीं मिला, जिससे यह प्रमाणित हो सके कि संबंधित सड़क का एनएसवी सर्वे कभी कराया गया था। रिपोर्ट में वार्षिकी भुगतान से संबंधित विभिन्न खामियां भी सामने आने की बात कही गई। हाई कोर्ट ने आयोग को रिपोर्ट की प्रति एनएचएआई के अधिवक्ता आशीष सरस्वत को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। सरस्वत ने जवाब प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया। सीलबंद लिफाफे में आई मूल जांच रिपोर्ट 18 सितंबर के आदेश के पालन में सोमवार को राजनंदिनी एंटरप्राइज एंड कंसल्टेंसी की मूल जांच रिपोर्ट भी कोर्ट में पेश की गई। अधिवक्ता गौरव मिश्रा ने सीलबंद लिफाफे में बिटुमिन टेस्ट रिपोर्ट, आरईसी क्रमांक 202409/07/13, दिनांक 11 जुलाई 2024 तथा डिजाइन मिक्स (डीबीएम) टेस्ट रिपोर्ट, आरईसी क्रमांक 202409/16/45, दिनांक 16 सितंबर 2024 पेश की। कोर्ट में सीलबंद लिफाफा खोला गया। इसके बाद कार्यालय को निर्देश दिया गया कि दोनों दस्तावेजों की छायाप्रति सड़क जांच आयोग को उपलब्ध कराई जाए और मूल दस्तावेजों को दोबारा सीलबंद कर सुरक्षित रखा जाए। आयोग को इन रिपोर्टों पर अपनी टिप्पणी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। निगम को पैचवर्क पूरा करने के लिए 24 घंटे नगर निगम की ओर से अधिवक्ता ने बताया कि सड़कों पर किए गए पैचवर्क को सही ठहराने का प्रयास किया गया है, लेकिन उन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए 24 घंटे का समय मांगा कि आयोग द्वारा नमूने लेने के लिए सड़क खोदे जाने के कारण जहां पैचवर्क किया गया है, वह निर्धारित मापदंडों के अनुसार हो। कोर्ट ने निगम को 24 घंटे का समय देते हुए निर्देश दिया कि आयोग द्वारा नमूने लेने के लिए खोदी गई सड़क के सभी हिस्सों का पैचवर्क निर्धारित विनिर्देशों के अनुसार किया जाए। इसमें 150 मिलीमीटर तक की गहराई में पैचवर्क करने संबंधी तकनीकी विनिर्देश का पालन करने को कहा गया। इस निर्देश के साथ संबंधित आवेदन का निराकरण कर दिया गया। स्मार्ट सिटी की सड़कों पर भी उठे सवाल याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अवधेश सिंह तोमर ने स्मार्ट सिटी की सड़कों की खराब स्थिति का मुद्दा उठाते हुए स्मार्ट सिटी ग्वालियर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को मामले में पक्षकार बनाए जाने की मांग की। इस संबंध में अंतरिम आवेदन प्रस्तुत किया गया था। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि स्मार्ट सिटी के अधीन सड़कों की स्थिति भी खराब होने का आरोप लगाया गया है, लेकिन अभी तक स्मार्ट सिटी के स्वामित्व और नियंत्रण वाली सड़कों से नमूने नहीं लिए गए हैं। इस बिंदु का उल्लेख आवेदन में नहीं होने पर कोर्ट ने तोमर को आवेदन में संशोधन के लिए एक सप्ताह का समय दिया। हर सड़क की जांच के लिए जनहित याचिका का दायरा नहीं बढ़ाएंगे सचिन तेंदुलकर मार्ग से भगवान सिंह माथुर सिटी एन्क्लेव को जोड़ने वाली संपर्क सड़क की खराब स्थिति को लेकर हस्तक्षेप आवेदन भी प्रस्तुत किया गया था। इसमें सड़क की स्थिति पूरी तरह खराब होने का आरोप लगाया गया, कोर्ट ने कहा कि नगर निगम को ग्वालियर शहर की सभी सड़कों के निर्माण और मरम्मत की अनुमति पहले ही दी जा चुकी है। कोर्ट प्रत्येक सड़क को लेकर अलग-अलग जांच कराकर उसका निर्माण कराने की स्थिति में नहीं है। कोर्ट ने हस्तक्षेप आवेदन को खारिज कर दिया। आयोग के काम की कोर्ट ने की सराहना सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने सड़क जांच आयोग के काम की विशेष रूप से सराहना की। बता दें कि इस आयोग में अध्यक्ष गौरव समाधिया, सदस्य पवन रघुवंशी और हिमांशु शर्मा हैं। कोर्ट ने कहा कि पहले एक सड़क से नमूने लेने में आयोग को 12 से 13 घंटे तक सड़क पर काम करना पड़ा था। बाद में आयोग द्वारा प्रस्तुत रिपोर्टों से स्पष्ट हुआ कि सदस्यों ने केवल मौके पर जाकर निर्धारित मानकों के अनुसार नमूने ही नहीं लिए, बल्कि तकनीकी पहलुओं और भ्रष्टाचार से जुड़े मुद्दों को समझने के लिए भी काफी मेहनत की। कोर्ट ने कहा कि शहर के हित में आयोग ने जिस स्तर पर मेहनत की है, वह सराहनीय है। सिकरौदा में हाईवे से सटी शराब दुकान पर भी सवाल सुनवाई के दौरान आयोग के अध्यक्ष गौरव समाधिया ने सिकरौदा चौराहा स्थित शराब दुकान का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि नियमानुसार शराब दुकान हाईवे से कम से कम 500 मीटर की दूरी पर होनी चाहिए, लेकिन सिकरौदा चौराहे पर शराब दुकान हाईवे … Read more

‘चुनाव हुआ नहीं और मंत्री पद बंटने लगे’, राजभर ने अखिलेश पर साधा निशाना

चुनाव हुआ नहीं, सपा में बंटने लगे मंत्री पद, राजभर ने अखिलेश पर कसा तंज इंद्रजीत सरोज के मंत्री बनने और बालू खनन वाले बयान को लेकर सुभासपा अध्यक्ष ने सपा प्रमुख को घेरा कहा, पहले जनता की अदालत का फैसला तो आने दीजिए, फिर बांटिए विभाग बोले, सरकार बनने से पहले ही मंत्री पद और बालू-मिट्टी का हिसाब-किताब लगाया जा रहा अखिलेश से पूछा, 2027 के लिए किस-किस नेता को कौन-कौन सा विभाग सपने में बांट रखा है  लखनऊ  सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने सपा के राष्ट्रीय महासचिव इंद्रजीत सरोज के बयान को लेकर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में अभी समय है और जनता का फैसला भी नहीं आया है, लेकिन सपा में अभी से मंत्री पद और विभाग बांटने के सपने देखे जाने लगे हैं। राजभर ने मंगलवार को एक्स पर पोस्ट कर कहा कि सपा नेता इंद्रजीत सरोज अभी से बता रहे हैं कि 2027 में सपा की सरकार बनी तो उन्हें मंत्री बनने से कोई नहीं रोक पाएगा। उन्होंने सरोज के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि जब वह पार्टी के बुरे दिनों के साथी रहे हैं तो बड़े मंत्री भी वही बनेंगे। राजभर ने सरोज की जेसीबी, डंपर और बालू खनन को लेकर की गई टिप्पणी पर भी अखिलेश यादव को घेरा। उन्होंने सवाल किया कि चुनाव होने में अभी समय है, लेकिन सपा में मंत्री कौन बनेगा और कार्यकर्ताओं को जेसीबी-डंपर लगाकर बालू-मिट्टी खोदने की छूट कैसे मिलेगी, इसकी तैयारी अभी से शुरू हो गई है क्या? सुभासपा अध्यक्ष ने तंज कसते हुए कहा कि ये चुनाव की तैयारी चल रही है या सरकार बनने से पहले ही मंत्री पद और बालू-मिट्टी का हिसाब-किताब लगाया जा रहा है? उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता कोई खाली कुर्सी नहीं है कि किसी ने चाहा और उस पर बैठ गया। पहले जनता की अदालत का फैसला आने देना चाहिए। राजभर ने पोस्ट के आखिर में अखिलेश से पूछा कि 2027 के लिए और किस-किस नेता को कौन-कौन सा विभाग सपने में बांट रखा है। उन्होंने तंज किया कि चच्चू भी अपने विभाग का इंतजार कर रहे हैं। सपने में ही सही, लेकिन बता दीजिए कि पीडब्ल्यूडी देंगे या सिंचाई, ताकि नींद अच्छी आए।

आदेश का पालन नहीं करने पर छिंदवाड़ा SP पर हाईकोर्ट सख्त, NBW जारी

जबलपुर जबलपुर हाईकोर्ट ने अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए छिंदवाड़ा एसपी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है। कोर्ट ने जबलपुर रेंज के आईजी को वारंट तामील कराने की जिम्मेदारी सौंपी है। साथ ही एसपी को 1 अक्टूबर 2026 को कोर्ट के समक्ष पेश होने का आदेश दिया।  मामला एक रिटायर्ड पुलिसकर्मी के निधन के बाद विभाग द्वारा की गई रिकवरी से जुड़ा है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि हाईकोर्ट के रिकवरी पर रोक लगाने और राशि लौटाने के आदेश के बावजूद उसका पालन नहीं किया गया। पति की मौत के बाद 2.24 लाख रुपए की रिकवरी जबलपुर निवासी सीता तिवारी ने अधिवक्ता सचिन पांडे के माध्यम से अवमानना याचिका दायर की है। याचिका के अनुसार उनके पति संतोष तिवारी छिंदवाड़ा में पुलिस विभाग में पदस्थ थे। सेवाकाल के दौरान 14 अगस्त 2020 को उनका निधन हो गया। इसके बाद विभाग ने उनके खिलाफ 2.24 लाख रुपए की रिकवरी निकाल दी। मामले की सुनवाई जस्टिस विवेक जैन की कोर्ट में हुई थी। कोर्ट ने रिकवरी का आदेश निरस्त करते हुए राशि 8 प्रतिशत ब्याज के साथ वापस करने का आदेश दिया था। 2025 में जारी हुआ था अवमानना नोटिस सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि वर्ष 2025 में अवमानना नोटिस जारी होने के बाद भी आदेश के पालन की रिपोर्ट पेश नहीं की गई। कोर्ट को बताया गया कि छिंदवाड़ा एसपी ने 11 फरवरी 2026 को गृह विभाग के अपर सचिव को पत्र लिखकर नोटिस मिलने और आवश्यक मंजूरी के संबंध में जानकारी दी थी, लेकिन इसके बाद भी आदेश के पालन की कार्रवाई नहीं हुई। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने छिंदवाड़ा एसपी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करते हुए उन्हें 1 अक्टूबर को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है।  

ग्वालियर अचलेश्वर न्यास चुनाव की तारीख तय, 30 सितंबर को प्रत्याशी सूची

ग्वालियर  श्री अचलेश्वर महादेव सार्वजनिक न्यास, ग्वालियर की कार्यकारिणी के चुनाव की तारीख तय हो गई है। न्यायालय के आदेश के पालन में मतदान 11 अक्टूबर 2026 को ही होगा। जिला न्यायालय के आदेश के बाद प्रशासन ने चुनाव की तैयारियां तेज कर दी हैं। शासकीय अधिवक्ता गजेन्द्र साहू द्वारा प्रस्तुत चुनाव समिति, निर्वाचन कार्यक्रम और नियमावली को कोर्ट ने अनुमोदित कर दिया है। मतदान एमएलबी कॉलेज में होगा। मतदाता सूची पर आपत्ति 23 सितंबर को दोपहर तीन बजे तक की जा सकेगी। आपत्ति निराकरण पश्चात उसी दिन अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी। 30 सितंबर को जारी होगी अंतिम प्रत्याशी सूची 24-25 सितंबर को सुबह नौ से शाम पांच बजे तक फार्म वितरण और जमा करने का कार्य होगा। नाम वापसी की अंतिम तारीख 28 सितंबर और अंतिम प्रत्याशी सूची 30 सितंबर को जारी होगी। चुनाव कराने के लिए नौ सदस्यीय समिति बनाई गई है। इसमें पांच अधिवक्ता-संजय द्विवेदी, राजू शर्मा, अनिल शर्मा, रामाधार चौबे और विशाल त्रिपाठी के साथ-साथ शासकीय अधिवक्ता गजेन्द्र साहू, तहसीलदार मनीष जैन, अपर तहसीलदार दिनेश चौरसिया और वंदना यादव शामिल हैं। निर्वाचन कार्यालय श्रीअचलेश्वर महादेव मंदिर के बगल में संत निवास का प्रथम तल का चयन किया गया है तो वहीं एमएलबी कॉलेज को मतदान स्थल बनाया गया है। चुनाव के मुख्य नियम एवं शर्तें… मतदाता सूची 1100 रुपये में मिलेगी। अध्यक्ष-पदाधिकारी का नामांकन फार्म 5100 रुपये और कार्यकारिणी सदस्य का फॉर्म 2500 रुपये का होगा। फीस वापस नहीं होगी। बैनर, पोस्टर, होर्डिंग और अखबार/टीवी पर प्रचार पूरी तरह प्रतिबंधित है। उल्लंघन पर उम्मीदवारी रद हो सकती है। सिर्फ 10×8 सेमी तक का विजिटिंग कार्ड बांट सकते हैं, उस पर भी देवी-देवताओं के फोटो पर रोक है। वोट डालने के लिए न्यास का परिचय पत्र या आधार कार्ड, वोटर आइडी, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस लाना अनिवार्य है। बिना आईडी के वोट नहीं डालने दिया जाएगा। मतदान कक्ष में मोबाइल फोन, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर पूरी तरह रोक रहेगी। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी चुनाव अधिकारी कराएंगे और सीसीटीवी से निगरानी होगी। महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग मतदान कक्ष होंगे। मतदान स्थल से 100 मीटर तक बेरीकेडिंग रहेगी, इस दायरे में प्रचार और प्रत्याशियों का घूमना प्रतिबंधित रहेगा। अगली सुनवाई 22 अक्टूबर को होगी तहसीलदार मनीष जैन ने बताया कि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि चुनाव की सूचना मंदिर परिसर में दो बड़े फ्लैक्स लगाकर और प्रेस नोट के माध्यम से दी जाएगी, किसी भी सदस्य को व्यक्तिगत सूचना नहीं भेजी जाएगी। अगली सुनवाई 22 अक्टूबर को जिला न्यायालय में होगी, जिसमें चुनाव प्रक्रिया की रिपोर्ट पेश की जाएगी। यह नहीं लड़ सकेंगे चुनाव… संतोष सिंह राठौर पुत्र रामदुलारे राठौर हरिप्रसाद अग्रवाल नरेन्द्र कुमार सिंहल पुत्र द्वारिका प्रसाद सिंघल उषा चौहान पत्नी यशपाल सिंह चौहान प्रदीप कुमार बंसल पुत्र घनश्याम दास बंसल नारायणदास बृजवासी पुत्र रामजीदास गोविन्दसिंह पाल पुत्र सरमनसिंह बीके शिवहरे पुत्र प्रीतमचन्द्र शिवहरे, प्रभात सिंह जादौन पुत्र महाबीर सिंह जादौन। हरिबाबू शिवहरे पुत्र मोतीलाल शिवहरे।