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सिंहस्थ 2028 को लेकर बड़ा फैसला, उपयोग न हुई जमीन दो साल बाद किसानों को लौटाई जाएगी

उज्जैन   उज्जैन सिंहस्थ वाले प्लान से सरकार ने लैंड पुलिंग को बाहर कर दिया है। सिंहस्थ 2028 के लिए इसी आधार पर प्लानिंग की थी, इस पर आगे बढ़ने से पहले कई बाधाएं आई, जिसका नए सिरे से परीक्षण कराया गया और लोगों से फीडबैक लिए। केंद्रीय नेतृत्व से भी राय ली, उसके बाद तय किया कि पहले की तरह ही मेला क्षेत्र में काम होंगे। इसके लिए दो साल के लिए ही जमीन ली जाएगी, उस पर अस्थाई काम होंगे। सिंहस्थ खत्म होने के बाद जमीन लौटा दी जाएगी। 2016 के सिंहस्थ के लिए करीब 3200 हेक्टेयर जमीन ली थी, इसमें से कुछ हेक्टेयर का उपयोग नहीं हुआ था। इस बार भी इतनी ही जमीन ली जाएगी और उसका 100 फीसद क्षेत्रफल उपयोग किया जाएगा। बन गई सहमति सरकार पूर्व की तरह अखाड़ों, धार्मिक संस्थाओं व साधु-संतों को पूरी तरह विकसित करके अस्थाई प्लाट देगी, लेकिन किसी को स्थाई तौर पर जमीन नहीं दी जाएगी। हालांकि इनके पास पूर्व से मौजूद निजी जमीन में से कुछ हिस्से पर स्थाई निर्माण की अनुमति विशेष शर्तों के तहत दी जाएगी। सरकार बीच का रास्ता निकाल रही है। किसानों व जमीन मालिकों को निराश नहीं किया जाएगा, जो जमीन प्लानिंग के लिए बहुत उपयोगी होगी, उसे ही आम अधिग्रहण की तरह लिया जाएगा। सरकार से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि सरकार ने उसी तर्ज पर काम किया और लगभग सहमति बन गई है। सरकार के सामने ये चुनौतियां बरकरार अस्थाई निर्माण में बांस: बल्लियों का उपयोग होता है। बड़ी मात्रा में टीन की चादरें लगती हैं। चूंकि सिंहस्थ का आयोजन गर्मियों में होता है, तब कई बार चक्त्रस्वात की स्थिति बनती है और अस्थायी निर्माण में शेड के लिए उपयोग किए टीन के चादर हवा के साथ उड़ जाते हैं, आम श्रद्धालुओं को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी रहती है। खानपान व स्वास्थ्य सुविधा: इसके लिए पक्के भवनों की जरुरत है। अस्थाई शेड व निर्माण स्थलों पर कई तरह का खतरा रहता है। आग लगने जैसी संभावित अप्रिय स्थिति पैदा होने का प्रबल खतरा रहता है। प्रयागराज कुंभ में आग लगने जैसी घटना हो चुकी है। ऐसे अस्थाई निर्माणों को तेजी से नुकसान पहुंचता है। सुझाव: कम से कम जमीन पर स्थाई निर्माण हो। जब इस फार्मूले पर अमल होगा तो स्वाभाविक है कि जमीन की जरुरत कम से कम होगी। सरकार ने ये किया: सरकार इसी दिशा में बढ़ी। किसानों की जमीन पर जबरन की प्लानिंग को हटा दिया है। सुझाव: अभी जो प्लानिंग खाली खेतों पर निर्माण को लेकर की थी, उसका स्थान बदला जाए। ताकि सिंहस्थ के लिए किसानों की जमीन की जरुरत कम से कम पड़े। सरकार ने ये किया: स्थाई निर्माण शिप्रा नदी के किनारों और श्रद्धालुओं के आवागमन क्षेत्र तक। सुझाव: सिंहस्थ में आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए आसपास के जिलों में भी प्रबंध हों, वहां से सिंहस्थ क्षेत्र तक आवागमन के ज्यादा विकल्प दिए जाएं। ताकि भीड़ प्रबंधन में आसानी हो। सरकार ने ये किया: उज्जैन से सटे जिलों में श्रद्धालुओं के लिए बड़े स्तर पर सुविधाएं विकसित करने का निर्णय लिया।

पहली बार लिंक रोड का कांक्रीटिंग काम शुरू, PWD की योजना 80% सड़कें सीसी बनाने की

भोपाल   पीडब्ल्यूडी की 80 फीसदी सड़कें एक से डेढ़ साल में सीमेंट कंक्रीट में बदल जाएंगी। विभाग की 560 किमी. की सड़कें हैं, इनमें से करीब 300 किमी. को पहले ही सीसी किया जा चुका है। 100 किमी. की डामर रोड को सीसी में बदलने के लिए अगले एक माह में काम होगा। हालांकि एक्सपर्ट्स से आपत्ति जताते हुए कहा कि सीसी रोड से प्रदूषण व तापमान बढे़गा। चीफ इंजीनियर पीडब्ल्यूडी संजय मस्के का कहना है कि सीसी रोड को लंबी गारंटी के साथ तैयार किया जा रहा है। ये 10 साल से 25 साल तक की गारंटी वाली सड़कें हैं। बारिश के दौरान गड्ढों से मुक्ति मिलेगी। यहां भी होगा निर्माण पहली बार लिंक रोड को सीसी करने का काम शुरू हुआ। लिंक रोड नंबर को सीसी किया जा रहा। इसी तरह लिंक रोड नंबर एक और नंबर दो को भी पीडब्ल्यूडी अब सीसी करने की योजना बना रहा है। विभाग के पास 20 रोड की सूची है जिन्हें सीसी करने का काम अगले एक से डेढ़ माह में शुरू कर किया जाएगा। यह हैं सीसी रोड -पीडब्ल्यूडी ने प्रदेश की पहली सीसी सिक्सलेन रोड कोलार में 15 किमी लंबाई में तैयार की है। -कोलार में ही सीआइ तिराहा से दानिश चौराहा होते हुए मनीषा मार्केट, देवी अहिल्या देवी तिराहा तक सात किमी. लंबाई की सीसी रोड अंतिम चरण में है। -हमीदिया रोड को करीब साढ़े पांच किमी लंबाई में मोतिया तालाब से पहले से लेकर रेलवे स्टेशन, करोद तक सीसी किया है। -भेल से लेकर प्रभात चौराहा, अशोका गार्डन, रेलवे स्टेशन तक करीब छह किमी लंबी पहली चार लेन सीसी रोड पीडब्ल्यूडी ने सबसे पहले बनाई थी। घरों से ऊंची हुई रोड तो सीएम से की शिकायत अरेरा कॉलोनी के रहवासियों ने मुख्यमंत्री समेत पीडब्ल्यूडी मंत्री, चीफ इंजीनियर पीडब्ल्यूडी से सीसी रोड का निर्माण रोकने को लेकर पत्र लिखा है। यहां बताया गया घरों से आठ इंच ऊंचाई में रोड बना रहे हैं। अन्य क्षेत्रों में सीसी से बढ़ने वाली दिक्कत बताकर काम रोकने का आह्वान किया। शिकायत में मैहर में एक सीसी रोड को बिना अध्ययन बनाने पर हाइकोर्ट की टिप्पणी का उल्लेख भी किया। नर्सिंग एसोसिएशन की ओर से भी एक शिकायत पत्र लिखकर सीसी रोड, इसकी ऊंचाई को नुकसानदायक बताते हुए रोकने की अपील की है।

मध्यप्रदेश स्थापना दिवस: पूरे राज्य में उत्सव और कार्यक्रमों की भरमार

प्रदेश में हर्षोल्लास से मनाया जायेगा मध्यप्रदेश स्थापना दिवस मुख्य कार्यक्रम लाल परेड ग्राउंड भोपाल में होगा जिला-स्तर पर भी आयोजित होंगे कार्यक्रम भोपाल मध्यप्रदेश स्थापना दिवस के अवसर पर राजधानी भोपाल सहित जिला मुख्यालयों पर एक से तीन नवम्बर तक 3 दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। एक नवम्बर को शासकीय भवनों पर रात्रि में प्रकाश व्यवस्था की जायेगी। अनेक नवाचारों का होगा शुभारंभ स्थापना दिवस समारोह का मुख्य कार्यक्रम एक नवम्बर को प्रात: 11 बजे से लाल परेड मैदान पर आयोजित किया जायेगा। कार्यक्रम में "विकसित मध्यप्रदेश @2047" दृष्टि पत्र का विमोचन, एमपीई-सेवा एवं 'इन्वेस्ट एमपी' पोर्टल का शुभारम्भ होगा। साथ ही प्रतिष्ठित कलाकारों द्वारा सुगम संगीत की प्रस्तुति तथा आतिशबाजी की जायेगी। सायंकाल में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी होगा। विभिन्न विभागों की लगेगी विकास प्रदर्शनी स्थापना दिवस पर 2 एवं 3 नवम्बर को स्व-सहायता समूह एवं प्रदेश के प्रतिष्ठित शिल्पियों की 'आर्ट एण्ड क्राफ्ट' प्रदर्शनी सह विक्रय स्टॉल के माध्यम से प्रदेश की बहुआयामी कला-संस्कृति का लोकव्यापीकरण और मंचीय कार्यक्रम में महाराजा विक्रमादित्य महानाट्य का मंचन एवं सुगम संगीत का कार्यक्रम होगा। कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न विभागों की जनकल्याणकारी योजनाओं की सतत प्रगति, विरासत से विकास, उद्योग/विज्ञान क्षेत्र की विशिष्ट उपलब्धियों पर केन्द्रित आकर्षक प्रदर्शनी एवं मध्यप्रदेश के विकास पर केन्द्रित फिल्म का प्रदर्शन प्रदेश, जिला एवं ब्लॉक स्तर पर होगा। स्कूल-कॉलेजों में होंगी विभिन्न प्रतियोगिताएँ युवाओं को जोड़ने के लिए मध्यप्रदेश की गौरवशाली विरासत, बहुआयामी संस्कृति, पर्यटन, उद्योग, विज्ञान के क्षेत्र से संबंधित सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता, वाद-विवाद, निबंध प्रतियोगिता, मध्यप्रदेश के विकास, पर्यटन एवं सांस्कृतिक महत्व के स्थलों पर आधारित चित्र/फोटो प्रदर्शनी/पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन विभिन्न स्कूलों एवं कॉलेजों में किया जायेगा। सेवा के क्षेत्र में कार्य करने वाली संस्थाएँ, विज्ञान और उद्योग व्यवसाय के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि अर्जित करने वाली संस्थाओं सहित संवाद, गोष्ठी, युवा वैज्ञानिक सम्मेलन भी आयोजित किये जायेंगे। जिला-स्तरीय समारोह जिला मुख्यालयों पर स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियाँ, जिलावार उत्कृष्ट कार्यों तथा जिला उत्पादों पर केन्द्रित प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। प्रभारी मंत्रियों के समन्वय से जिला स्तर पर कलेक्टर कार्यक्रम को अंतिम रूप देंगे। जिला मुख्यालय पर प्रमुख शासकीय भवनों पर एक नवम्बर की रात्रि को प्रकाश की व्यवस्था की जायेगी। स्थापना दिवस के कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों, उद्योगपतियों, व्यावसासियों, समाजसेवियों, धर्मगुरुओं, स्वयंसेवी संस्थाओं, हाईस्कूल एवं हायर सेकेण्ड्री विद्यालयों एवं महाविद्यालयीन छात्र/छात्राओं, शासकीय अधिकारी/कर्मचारियों, जिले के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, लोकतंत्र सेनानियों एवं शहीद सैनिकों के परिवारों तथा महत्वपूर्ण उपलब्धि अर्जित करने वाले स्व-सहायता समूह/स्टार्टअप के पदाधिकारियों को भी विशेष तौर पर आमंत्रित किया जायेगा। जिससे कार्यक्रम में समाज के सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।  

डॉ. यादव करेंगे ‘अनुगूँज’ कार्यक्रम की शुरुआत, सांस्कृतिक रंगों से रोशन होगा आयोजन

डॉ. यादव करेंगे 'अनुगूँज' कार्यक्रम की शुरुआत, सांस्कृतिक रंगों से रोशन होगा आयोजन सांस्कृतिक महोत्सव अनुगूँज का शुभारंभ, कार्यक्रम की शुरुआत मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे शासकीय विद्यालयों के 500 विद्यार्थी करेंगे अपनी सांस्‍कृतिक प्रतिभा का प्रदर्शन भोपाल स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों की सहभागिता से आयोजित किये जाने वाले सांस्‍कृतिक कार्यक्रम "अनुगूंज" का आयोजन मंगलवार 28 अक्‍टूबर को भोपाल स्थित शासकीय सुभाष उत्कृष्ट विद्यालय, शिवाजी नगर में शाम 5:30 बजे से होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कार्यक्रम के मुख्‍य अतिथि होंगे। जनजातीय कल्‍याण मंत्री कुँवर विजय शाह एवं स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री  उदय प्रताप सिंह कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। अनुगूँज के प्रथम भाग 'धनक' के अंतर्गत वाद्य संगीत के साथ ही भारत के विविध शास्‍त्रीय नृत्‍य ओडिसी, भरतनाट्यम, कथक और मणिपुरी नृत्‍य आदि की मनमोहक प्रस्‍तुतियाँ होंगी। कार्यक्रम के द्वितीय भाग 'रंगकार' के अंतर्गत 'नाटक ताना बाना टूट न जाए' का मंचन विद्यार्थियों द्वारा किया जा रहा है। कार्यक्रम के सहभागी विद्यार्थियों ने एक माह की अल्पावधि में इन प्रस्तुतियों के लिए खुद को तैयार किया है। आत्‍मानुशासन, लगन, उत्साह और जोश के साथ भोपाल सहित प्रदेश के विभिन्‍न अंचलों से शासकीय विद्यालयों के लगभग 500 विद्यार्थियों ने अपनी अभिव्यक्ति को नए सोपान देने का प्रयास अनुगूँज में किया है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा अनुगूँज के आकल्पन को आकार देने के लिए प्रदेश के राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय ख्‍यातिप्राप्‍त रंगकर्मी और कलाकारों को मेंटर्स के रूप में संयोजित किया गया है। इन मेंटर्स ने एक कुशल मार्गदर्शक के रूप में इस विशेष कार्यक्रम और भविष्य के लिए भी विद्यार्थियों को विभिन्न कलाओं में पारंगत कराया है। उल्‍लेखनीय है कि अनुगूँज समारोह स्कूल शिक्षा विभाग का एक रचनात्मक प्रयास है जो विद्यार्थियों की शिक्षा के साथ-साथ उनके रचनात्मक और सर्वांगीण विकास पर केंद्रित है। विद्यार्थियों के मार्गदर्शन के लिए प्रदेश के राष्‍ट्रीय और अंतर्राष्‍ट्रीय ख्‍याति प्राप्‍त कलाकार विद्यार्थियों का मार्गदर्शन कर रहे है। इनमें सुप्रसिद्ध संगीतकार मॉरिस लाजरस, ओडसी नृत्‍य की अंतर्राष्‍ट्रीय ख्‍याति प्राप्‍त नृत्‍य गुरू सु बिंदु जुनेजा, भरतनाट्यम शैली की शीर्षस्‍थ नृत्‍य गुरू सु भारती होम्‍बल, ख्‍याति प्राप्‍त कथक नृत्‍य गुरू मती पद्मजा रघुवंशी और मणिपुरी नृत्‍य शैली के प्रसिध्‍द आचार्य और राष्‍ट्रीय अंतर्राष्‍ट्रीय ख्‍याति प्राप्‍त नृत्‍य गुरू  एम.के. होजाइनगम्‍बा सिेंह, ख्‍यात रंग निदेशक  सादात भारती के साथ ही प्रसिद्ध मंच संचालक  विनय उपाध्‍याय जैसे शीर्षस्‍थ कला मनीषी शामिल हैं। एक भारत-श्रेष्‍ठ भारत की अवधारणा पर सजी अनुगूँज की इन प्रस्‍तुतियों को साकार करने के लिए देश की विभिन्‍न प्रदर्शनकारी सांस्‍कृतिक प्रस्‍तुतियों के प्रदर्शन के लिये विशाल मंच का निर्माण महाकाल की नगरी उज्‍जैन के महाकाल लोक के मॉडल पर तैयार किया गया है।  

नरसिंहपुर से 10 हजार का इनामी राजा हाशमी पकड़ा गया, इंदौर किन्नर विवाद में फिनाइल पिलाने का मामला

इंदौर    इंदौर पुलिस को किन्नर समाज से जुड़े एक विवादित में बड़ी सफलता हाथ लगी है. झगड़े के दौरान एक को फिनाइल पिलाने और मारपीट करने की घटना में फरार चल रहे 10 हजार रुपए के इनामी मुख्य आरोपी राजा हाशमी को गिरफ्तार कर लिया गया है.   किन्नर समाज से जुड़े विवाद में एक व्यक्ति को फिनाइल पिलाने और मारपीट करने का गंभीर आरोप. आरोपी राजा हाशमी घटना के बाद से पिछले एक हफ्ते से फरार चल रहा था, जिस पर डीसीपी जोन ने 10-10 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था. पुलिस टीम को तकनीकी जानकारी और मुखबिर की मदद से राजा हाशमी की लोकेशन गोटेगांव, जिला नरसिंहपुर (जबलपुर के पास) में मिली. पुलिस ने उसके बहनोई के घर पर दबिश देकर उसे गिरफ्तार किया. आरोपी को हिरासत में लेकर इंदौर लाया गया है और पुलिस पूछताछ के लिए उसे अदालत में पेश कर रिमांड की मांग करेगी. इस मामले में पुलिस ने कुल चार आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया था. एक आरोपी सपना हाजी को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका था. आरोपी अक्षय कुमायूं और पंकज जैन अब भी फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस के प्रयास लगातार जारी हैं. 

सड़क सुरक्षा के लिए कार्रवाई, उज्जैन में बुलेट साइलेंसर पर पुलिस ने चलाया रोडरोलर

उज्जैन  अपने वाहनों से कर्कश ध्वनि फैलाकर ध्वनि प्रदूषण और सार्वजनिक शांति भंग करने वालों पर उज्जैन पुलिस ने फिर सख्ती दिखाई. टॉवर इलाके में पुलिस ने 5 लाख रुपए से अधिक कीमत के 30 से ज्यादा मोडिफाइड साइलेंसरों पर रोडरोलर चलवाकर उन्हें नष्ट किया. इस कार्रवाई के जरिए पुलिस ने संदेश दिया कि नियमों के खिलाफ कार्य बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे और ऐसे कृत्यों पर सख्त कार्रवाई होगी.  दरअसल, शहर में तेज आवाज वाले साइलेंसरों से लोगों को परेशान करने, तेज रफ्तार से वाहन चलाकर पटाखे जैसी आवाज निकालने और राहगीरों को परेशानी में डालने वालों पर पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है. लंबे समय से चल रही इस कार्रवाई में पुलिस ने ऐसी बाइकों, खासकर बुलेट में लगे मोडिफाइड साइलेंसर निकलवाए और वाहन चालकों पर जुर्माना भी लगाया. जब्त किए गए साइलेंसरों को टॉवर चौक पर जनता के सामने नष्ट कर पुलिस ने स्पष्ट किया कि ऐसी गतिविधियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी. एएसपी नितेश भार्गव ने बताया कि उज्जैन ट्रैफिक पुलिस शहर में यातायात नियम तोड़ने वालों, तेज रफ्तार से वाहन चलाने वालों और गैर-मानक साइलेंसरों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है.  करीब 5 लाख रुपए कीमत के 30 साइलेंसरों को सार्वजनिक स्थान पर नष्ट किया गया, ताकि समाज को यह संदेश जाए कि ऐसी चीजें वैध नहीं हैं और इन पर पुलिस कानूनी रूप से सख्त कार्रवाई करती है. पिछले कुछ समय से लगातार कार्रवाई चल रही है और भविष्य में भी अलग-अलग तरह की कार्रवाइयां नियोजित हैं.

संतोष चौबे’ के कहानी संग्रह ‘ग़रीबनवाज़’ का हुआ लोकार्पण

भोपाल. वरिष्ठ कवि–कथाकार, निदेशक विश्व रंग एवं रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री संतोष चौबे के नए कहानी संग्रह 'ग़रीबनवाज़' का लोकार्पण एवं पुस्तक चर्चा का आयोजन रवीन्द्र भवन के गौरांजनी सभागार में समारोह पूर्वक किया गया। यह महत्वपूर्ण आयोजन रबीन्द्रनाथ टैगोर विशवविद्यालय, वनमाली सृजन पीठ एवं स्कोप ग्लोबल स्किल्स विश्वविद्यालय, भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। इस अवसर पर श्री संतोष चौबे ने अपने कहानी संग्रह से "मगर शेक्सपियर को याद रखना" कहानी का बेहतरीन पाठ किया। उन्होंने इस अवसर पर अपनी रचना प्रक्रिया पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि पठनीयता को लेकर मैं हमेशा सजगता बरतता हूँ। कहानी पढ़ते समय पाठक पहले ही वाक्य से कहानी के भीतर प्रवेश करें और फिर उसे पूरा पढ़कर ही रहें। मेरा मानना है कि लेखक की पवित्रता और उसका भोलापन हमेशा बना रहना चाहिए। मेरी कहानियों का मुख्य आधार उनमें दृश्यात्मकता और इंटेनसिटी का होना हैं।   समारोह की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कथाकार एवं वनमाली सृजन पीठ, भोपाल के अध्यक्ष श्री मुकेश वर्मा ने कहा ‘गरीबनवाज़’ कहानियाँ हमें जीवन के भीतर छिपे उस करुण पक्ष से जोड़ती हैं जो अक्सर हमारी दृष्टि से ओझल रह जाता है। संतोष चौबे की कहानियाँ सिर्फ घटनाएँ नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर चल रहे संवाद का दस्तावेज़ हैं। उनका कथा संसार हमारे समय का गहन आत्मपरिचय कराता है।   समारोह के मुख्य अतिथि वरिष्ठ कथाकार श्री शशांक ने कहा कि संतोष चौबे की कहानियों में जीवन की संवेदना, मानवीय द्वंद्व और सामाजिक सरोकार गहराई से जुड़े हुए हैं। उनके पात्र आम जन की जद्दोजहद और आशाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस संग्रह की कहानियाँ अपने शिल्प और कथ्य दोनों में उल्लेखनीय हैं।”   विशिष्ट अतिथि प्रतिष्ठित कथाकार डॉ. उर्मिला शिरीष ने अपने वक्तव्य में कहा कि कहानी संग्रह में स्त्री–पुरुष संबंधों, सामाजिक असमानताओं और नैतिक प्रश्नों की प्रस्तुति बेहद संवेदनशीलता के साथ की गई है। चौबे जी की कहानियाँ इस बात का प्रमाण हैं कि आधुनिक हिंदी कथा साहित्य अब भी मनुष्य की जड़ों और उसकी करुणा से जुड़ा हुआ है।   कार्यक्रम में साहित्यकार रेखा कस्तवार, भालचंद्र जोशी, पंकज सुबीर ने भी अपनी टिप्पणियाँ दीं। वक्ताओं ने कहा कि चौबे जी की कहानियाँ गहरी मानवीय दृष्टि से ओतप्रोत हैं और वे पाठक को भीतर तक झकझोर देती हैं। युवा कथाकार सुश्री प्रज्ञा रोहिणी (दिल्ली) ने कहा कि संतोष चौबे जी की कहानियां उत्तर आधुनिकता के शिफ्ट की कहानियां है। हमारे समय की नजर नहीं आने वाली बड़ी-बड़ी खाईयों को पाटने का महत्वपूर्ण कार्य संतोष चौबे तमाम द्वदों के बावजूद अपनी रचनाओं के माध्यम से करते हैं।   युवा आलोचक श्री अच्युतानंद मिश्र (केरल) ने कहा कि संतोष जी रचनाओं में विधाओं में आवाजाही सबसे महत्वपूर्ण पक्ष है। सामाजिक स्वरूप और सामाजिक आलोचना को लेकर चिंता और गहरी वैचारिकी दृष्टि उनकी कहानियों में विन्यस्त है।   अतिथियों का स्वागत वनमाली सृजन पीठ की राष्ट्रीय संयोजक एवं आईसेक्ट पब्लिकेशन की प्रबंधक सुश्री ज्योति रघुवंशी द्वारा किया गया। स्वागत उद्बोधन भी सुश्री ज्योति रघुवंशी द्वारा दिया गया। लोकार्पण समारोह का संचालन युवा कथाकार एवं वनमाली कथा के संपादक श्री कुणाल सिंह द्वारा किया गया। इस अवसर पर सैकड़ों की संख्या में वरिष्ठ रचनाकारों डॉ. विजय बहादुर सिंह, डॉ. विनीता चौबे, डॉ. करुणा शंकर उपाध्याय (मुंबई), आनंद प्रकाश त्रिपाठी, डॉ. नितिन वत्स, बलराम गुमास्ता, डॉ. जवाहर कर्नावट, मेजर जनरल श्री श्याम श्रीवास्तव, श्री हरि भटनागर, प्रज्ञा रावत, नीलेश रघुवंशी, देवीलाल पाटीदार, डॉ. रामवल्लभ आचार्य, डॉ. गिरजेश सक्सेना, करुणा राजुरकर राज, मोहन सगोरिया सहित युवा रचनाकारों, साहित्यप्रेमियों ने अपनी रचनात्मक उपस्थिति दर्ज की।

महिला एवं बाल विकास विभाग ने बच्चों के पोषण पर जारी की गाइडलाइन, छह महीने के बाद मांसाहारी परिवारों के लिए खास सलाह

भोपाल  मध्य प्रदेश में महिला और बाल विकास विभाग ने दो साल तक के बच्चों के आहार को लेकर नई सलाह जारी की है। विभाग का कहना है कि छह माह की उम्र पूरी होने के बाद यदि परिवार मांसाहारी है, तो बच्चों को अंडा, मांस और मछली खिलाना चाहिए।विभाग ने बच्चों के पोषण के पांच सूत्र जारी किए हैं और इनका प्रचार-प्रसार आंगनवाड़ी केंद्रों और जनजागरूकता अभियानों के जरिए करने को कहा है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि बाजार की चीजें जैसे बिस्किट, चिप्स, मिठाई, नमकीन और जूस बच्चों के लिए नुकसानदायक हैं, क्योंकि इनमें आवश्यक पोषक तत्व नहीं होते। पोषण अभियान के तहत दिए निर्देश केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के पोषण अभियान के तहत यह दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। मंत्रालय ने सभी राज्यों को इन सूत्रों को अपनाने को कहा है। मध्य प्रदेश में इन्हें राज्य की महिला एवं बाल विकास विभाग की वेबसाइट पर भी अपलोड किया गया है। पोषण के पांच सूत्र इस प्रकार हैं:     पहले 1000 सुनहरे दिन: बच्चे के जन्म से दो वर्ष तक का समय सबसे महत्वपूर्ण माना गया है, जिसमें पोषण और स्वास्थ्य पर खास ध्यान देने की जरूरत है।     पौष्टिक आहार: परिवार मांसाहारी हो तो बच्चे को अंडा, मांस और मछली देने की सलाह।     अनीमिया से बचाव: आयरन और प्रोटीन से भरपूर भोजन का सेवन बढ़ाने की सलाह।     डायरिया से बचाव: साफ पानी और स्वच्छ भोजन पर ध्यान।     स्वच्छता और साफ-सफाई: संक्रमण और बीमारियों से बचाव के लिए व्यक्तिगत व घरेलू स्वच्छता पर फोकस। बच्चों के लिए 1000 दिन बताए सुनहरे पोषण के पांच सूत्र बताते हुए कहा गया है कि पहले सौ दिनों में बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास तेजी से होता है। इसमें गर्भावस्था की अवधि से लेकर बच्चे के जन्म के दो साल तक की उम्र की अवधि शामिल है। इस दौरान उचित स्वास्थ्य, पर्याप्त पोषण, प्यार भरा व तनाव मुक्त माहौल और सही देखभाल होना चाहिए, ताकि बच्चे का पूरा विकास हो। इस दौरान मां और बच्चे को सही पोषण की सर्वाधिक जरूरत होती है। इन 1000 सुनहरे दिनों में 270 दिन गर्भावस्था, 365 दिन बच्चे के जन्म के पहले साल के और 365 दिन बच्चे के जन्म के दूसरे साल के शामिल होते हैं। पौष्टिक आहार में कहा- मांस, मछली, अंडा खाना चाहिए सभी उम्र के लोगों के साथ बच्चे को छह माह का होने पर पर्याप्त मात्रा में अलग-अलग आहार खिलाने की बात कही गई है। साथ ही कहा गया है कि विभिन्न खाद्य पदार्थ जैसे रोटी, चावल और पीले व काले रंग की दालें, हरी पत्तेदार सब्जियां मसलन पालक, मैथी, चौलाई, सरसों, पीले फल आम, पका पपीता आदि खाना चाहिए। विभाग ने इसमें यह भी कहा है कि यदि मांसाहारी हैं तो अंडा, मांस और मछली खाना चाहिए। विभाग के अनुसार खाने में दूध, मिल्क प्रोडक्ट, अखरोट आदि शामिल करने के साथ आंगनवाड़ी में मिलने वाले पोषाहार अवश्य खाना चाहिए। जब बच्चा छह माह का हो जाए तो मां के दूध के साथ घर का बना मसला और गाढ़ा ऊपरी आहार भी दिया जाना चाहिए। इसमें कद्दू, लौकी, गाजर, पालक, दाल शामिल हैं। अगर मांसाहारी हैं तो अंडा, मांस और मछली भी देना चाहिए। बच्चे के खाने में नमक, चीना और मसाला कम डालें और बच्चे को बाजार का बिस्कुट, चिप्स, मिठाई, नमकीन और जूस जैसी चीजें न पिलाएं। इससे बच्चे को सही पोषक तत्व नहीं मिलते। अनीमिया रोकने के लिए भी अंडा, मांस, मछली खाने को कहा पोषण का तीसरा सूत्र अनीमिया रोकने को लेकर किए जाने वाले प्रयास बताए गए हैं जिसमें कहा गया है कि अनीमिया रोकथाम के लिए आयरन युक्त भोजन जैसे दालें, हरी पत्तेदार सब्जियां, पालक, मैथी, सरसों, फल, दूध, दही, पनीर आदि बच्चे को खिलाएं। एमपी में हो चुका है अंडा खिलाने का विरोध प्रदेश में आंगनवाड़ी केंद्रों में जाने वाले बच्चों को अंडा खिलाने का प्रस्ताव पूर्व में भी महिला और बाल विकास विभाग में आ चुका है जिसका जमकर विरोध हुआ और इसके बाद सरकार ने इस फैसले को वापस ले लिया है। अब केंद्रीय महिला और बाल विकास विभाग के पोषण के पांच सूत्र बताए जाने के बाद इसे जिला अधिकारियों को लागू करने के लिए कहा गया है। हालांकि आंगनवाड़ी केंद्रों से इसकी सप्लाई को लेकर कोई बात नहीं कही गई है। बच्चे के माता पिता के लिए यह सलाह दी गई है।

मुख्यमंत्री साय ने जशपुर में दुलदुला छठ घाट में सूर्य को दिया अर्घ्य: प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय ने आज छठ महापर्व के अवसर पर दुलदुला छठ घाट में पहुँचकर सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया और प्रदेश की सुख-समृद्धि तथा खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशवासियों को छठ पूजा की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत सौभाग्य का अवसर है कि मुझे छठ पर्व में सम्मिलित होने का अवसर मिला।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जनता के विश्वास और स्नेह से ही उन्हें जनसेवा का अवसर मिला है, और वे क्षेत्र के विकास एवं जनता की अपेक्षाओं की पूर्ति के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। मुख्यमंत्री साय ने दुलदुला क्षेत्रवासियों की माँग पर छठ घाट के सौन्दर्यीकरण की घोषणा की। उन्होंने कहा कि आगामी छठ पर्व तक दुलदुला छठ घाट का सौन्दर्यीकरण कार्य पूर्ण कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कुनकुरी छठ घाट का सौन्दर्यीकरण लगभग ₹5 करोड़ 17 लाख की लागत से किया गया है, जहाँ इस वर्ष व्रती महिलाएँ पूर्ण श्रद्धा-भाव से पूजा-अर्चना कर रही हैं। इस अवसर पर जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, जनपद पंचायत दुलदुला अध्यक्ष रामकुमार सिंह, आईजी दीपक कुमार झा, कलेक्टर रोहित व्यास, पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह सहित छठ व्रत करने वाली महिलाएँ, जनप्रतिनिधिगण एवं ग्रामीणजन बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

महासमुंद जिले के 323 तीर्थयात्री मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के अंतर्गत निकल पड़े प्रयागराज-काशी यात्रा पर

विधायक श्री सिन्हा ने फूल माला पहनाकर तीर्थयात्रियों को दी शुभकामना महासमुंद मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के अंतर्गत महासमुंद जिले के पांचों विकासखंडों से आज कुल 323 श्रद्धालु 18 बसों के माध्यम से पवित्र तीर्थस्थलों — प्रयागराज, हनुमानगढ़ एवं काशी विश्वनाथ — के दर्शन हेतु रवाना हुए। यह पांच दिवसीय यात्रा 27 से 31 अक्टूबर 2025 तक आयोजित की गई है। रवाना होने के पूर्व सभी श्रद्धालुओं का मेडिकल चेक अप कराया गया। इस अवसर पर महासमुंद विधायक श्री योगेश्वर राजू सिन्हा ने ध्वज दिखाकर श्रद्धालुओं को यात्रा के लिए रवाना किया। कार्यक्रम में नगर पालिका उपाध्यक्ष श्री देवी चंद राठी, श्री येतराम साहू, श्री पवन पटेल, श्री महेंद्र सिक्का, श्री राजू चंद्राकर, श्री माखन पटेल, श्री मीना वर्मा, श्री रिंकू चंद्राकर, श्री शरद मराठा, श्री राकेश चंद्राकर सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, समाज कल्याण विभाग, जनपद पंचायत एवं नगरीय निकायों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। विधायक श्री सिन्हा ने अपने संबोधन में कहा कि मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह द्वारा आरंभ की गई थी, किंतु पूर्ववर्ती सरकार के पांच वर्ष के कार्यकाल में यह योजना बंद रही। वर्तमान में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में इस जनकल्याणकारी योजना को पुनः प्रारंभ किया गया है। उन्होंने श्रद्धालुओं को फूल माला पहनाकर और तिलक लगाकर शुभकामनाएं दी।  ज्ञातव्य है कि योजना अंतर्गत 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के श्रद्धालु तीर्थ यात्रा के पात्र हैं। यदि पति-पत्नी साथ यात्रा करना चाहें तो उनमें से एक को आयु सीमा में छूट दी जाती है। योजना के तहत प्रत्येक माह पात्र श्रद्धालुओं को शासन द्वारा निर्धारित तीर्थस्थलों का निःशुल्क दर्शन कराया जाएगा। यह योजना पूर्णतः निःशुल्क है । यात्रा के दौरान आवागमन, ठहरने एवं भोजन की सभी व्यवस्थाओं का वहन राज्य शासन द्वारा किया जाता है। इससे वरिष्ठ नागरिकों को न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव प्राप्त होगा, बल्कि समाज और संस्कृति से उनका आत्मिक जुड़ाव भी सुदृढ़ होगा। महासमुंद जनपद से 52, बागबाहरा से 47, पिथौरा से 50, बसना से 40, सरायपाली से 43, नगरपालिका महासमुंद से 50, बागबाहरा से 6, सरायपाली से 15, तुमगांव से 6, पिथौरा से 6 तथा नगर पंचायत बसना से 5 श्रद्धालु शामिल हैं। इनके साथ कुल 9 अनुरक्षक भी यात्रा पर गए हैं। इस तीर्थ यात्रा से श्रद्धालुओं में उत्साह एवं श्रद्धा का भाव देखा गया। श्रद्धालु सुखिया ध्रुव,मचेवा, दुलारी साहू, बागबाहरा से फौज सिंह और ठाकुर दीवान,पिथोरा की रेखा प्रधान सहित सभी श्रद्धालुओं ने राज्य सरकार का आभार व्यक्त करते हुए इस जनकल्याणकारी योजना को जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया।