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गो संरक्षण विशेष: अमेरिका और यूरोपीय देशों तक पहुंच रहा सीएम योगी के गो संरक्षण का प्रभाव

लखनऊ.  देश-दुनिया के लिए यूपी रोल मॉडल बनकर उभरा है। प्रदेश की देशी गायों के पंचगव्य और आयुर्वेदिक उत्पाद अब अमेरिका, जर्मनी, जापान, ऑस्ट्रेलिया और खाड़ी देशों तक पहुंच रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में गो संरक्षण को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की नीति उत्तर प्रदेश को देश-विदेश में नई पहचान दिला रही है। यही नहीं, गो संरक्षण में यूपी देश का पथप्रदर्शक बन चुका है। इसी का परिणाम है कि गुजरात, केरल, हरियाणा समेत 15 राज्यों के लोग यूपी से गो संरक्षण सीख रहे हैं। सात समंदर पार पहुंचे यूपी के दुग्ध उत्पाद उत्तर प्रदेश में देसी गायों के जरिए तैयार किए जा रहे करीब 200 प्रकार के उत्पाद आज अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान बना रहे हैं। पंचगव्य घृत, ब्राह्मी घृत, गोमूत्र अर्क, घनवटी, च्यवनप्राश, गो घृत, शतधौता घृत और आयुर्वेदिक काजल जैसे उत्पादों की मांग विदेश में लगातार बढ़ रही है। अमेरिका, कनाडा, यूएई, सिंगापुर, मलेशिया, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, जापान, सऊदी अरब और थाईलैंड समेत कई देशों में इन उत्पादों की पहुंच बनी है। प्राकृतिक जीवनशैली, आयुर्वेद और पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धति के प्रति बढ़ते आकर्षण ने यूपी के गो-आधारित उत्पादों के लिए नए बाजार तैयार किए हैं। गोशाला से ग्लोबल मार्केट का सफर उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी सफलता यह है कि यहां गो संरक्षण को आर्थिक मूल्य से जोड़ा गया। अब गोबर, गोमूत्र, घी और पंचगव्य आधारित उत्पादों को व्यवस्थित उद्योग का स्वरूप दिया जा रहा है। इस बदलाव ने देसी गाय को केवल पशुधन नहीं, बल्कि ग्रामीण आय और उद्यमिता के स्रोत के रूप में स्थापित किया है। गांवों में स्वयं सहायता समूह, गोशालाएं और छोटे उद्यमी भी इस क्षेत्र से जुड़कर आर्थिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं। आईटी इंजीनियर ने दिखाई नई राह गाजियाबाद के असीम रावत ने सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम करने के बाद देसी गायों के संरक्षण और उनसे जुड़े उत्पादों के निर्माण का क्षेत्र चुना। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा से शुरू हुई उनकी पहल आज 'हेता (HETHA)' के रूप में देश और विदेश के बाजारों तक पहुंच चुकी है। असीम रावत का मानना है कि यदि देसी गायों के उत्पादों को वैज्ञानिक तरीके से विकसित कर बाजार से जोड़ा जाए तो यह क्षेत्र ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था में बड़ी भूमिका निभा सकता है। देशभर के लिए बना मॉडल उत्तर प्रदेश का यह मॉडल अब अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है। गुजरात, हरियाणा, केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पंजाब, तेलंगाना, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गोवा, ओडिशा और आंध्र प्रदेश समेत 15 से अधिक राज्यों के लोगों को यहां असीम रावत प्रशिक्षण दे रहे हैं। इसके माध्यम से लोगों को गो संरक्षण की बारीकियां सिखाई जाती हैं। गो संरक्षण, नस्ल सुधार और गो आधारित उत्पादों के व्यावसायिक मॉडल को समझने के लिए लगातार अन्य राज्यों के दल प्रदेश का दौरा कर रहे हैं। साहीवाल, गिर, गंगातीरी और थारपारकर जैसी नस्लों के संरक्षण पर विशेष जोर : मुकेश मेश्राम पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम के अनुसार योगी सरकार उन्नत देसी नस्ल की गायों के पालन के लिए 50 प्रतिशत तक सब्सिडी उपलब्ध करा रही है। साहीवाल, गिर, गंगातीरी और  थारपारकर जैसी नस्लों के संरक्षण एवं संवर्धन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। योगी सरकार की विभिन्न योजनाओं ने डेयरी और गो आधारित उद्योग को नई गति दी है, जिससे किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने में मदद मिली है। आस्था के साथ अर्थव्यवस्था पर केंद्रित योजना जिस देसी गाय को कभी आर्थिक बोझ माना जाता था, वही आज सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में करोड़ों रुपये की गो इकोनॉमी की धुरी बन रही है। यही वजह है कि गो संरक्षण का यूपी मॉडल अब देश-दुनिया में चर्चा का विषय बन चुका है। गो संरक्षण को अर्थव्यवस्था से जोड़कर देखने का परिणाम है कि यूपी का मॉडल अब दूसरे राज्यों के साथ ही अन्य देशों के लिए भी मिसाल बन रहा है।

पहली बार कक्षा 6-8 के छात्र भी खेल प्रतियोगिताओं में शामिल, प्रदेशीय खेलों में बड़ा बदलाव

लखनऊ प्रदेश के विद्यालयों में खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग ने शैक्षिक सत्र 2026-27 का प्रदेशीय विद्यालयी खेलकूद कैलेंडर जारी कर दिया है। 30 जून से शुरू होकर 17 नवंबर तक चलने वाली इन प्रतियोगिताओं में 31 खेल शामिल किए गए हैं पहली बार बेसिक शिक्षा विभाग के कक्षा 6 से 8 तक के छात्र-छात्राओं को भी सभी स्तरों पर प्रतिभाग का अवसर मिलेगा, जिससे उन्हें राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का मौका मिल सकेगा शिक्षा निदेशक माध्यमिक की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, प्रदेश के राजकीय, सहायता प्राप्त, वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों, उच्च प्राथमिक विद्यालयों और कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों (केजीबीवी) के छात्र-छात्राएं प्रतियोगिताओं में भाग लेंगे। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों की छात्राओं को एक अलग यूनिट के रूप में प्रतियोगिताओं में शामिल किया जाएगा। इनके लिए जिला और मंडल स्तर पर अलग प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। अंतरमंडलीय प्रदर्शन के आधार पर प्रदेशीय टीम का चयन किया जाएगा। चयन प्रक्रिया का निर्धारण समग्र शिक्षा के बालिका प्रकोष्ठ द्वारा किया जाएगा। हर विद्यालय के लिए दो खेलों में भागीदारी अनिवार्य प्रत्येक विद्यालय के छात्र-छात्राओं को कम से कम दो अलग-अलग खेलों में प्रतिभाग करना होगा। इनमें एक टीम गेम और एक व्यक्तिगत खेल अथवा दोनों टीम गेम हो सकते हैं। खेलों का चयन विद्यालय अपनी सुविधा के अनुसार करेंगे। स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसजीएफआई) द्वारा सीबीएसई और सीआईएससीई बोर्ड को अलग यूनिट की मान्यता दिए जाने के कारण इन बोर्डों से संबद्ध विद्यालयों के खिलाड़ी उत्तर प्रदेश की विद्यालयी खेल प्रतियोगिताओं में भाग नहीं ले सकेंगे। नौ नए खेल ट्रायल आधार पर जारी वुशू, मलखम्भ, गतका, कलारीपयट्टू, शतरंज, योगासन, थांगता मार्शल आर्ट और कुराश आदि को ट्रायल आधार पर इस वर्ष भी प्रतियोगिताओं में शामिल किया गया है। इसके अलावा नेटबाल, रग्बी, स्केटिंग, तलवारबाजी, साइक्लिंग, टेनिस और मॉडर्न पेंटाथलॉन में चयन ट्रायल कराकर प्रदेशीय टीमों का गठन किया जाएगा। प्रतियोगिताएं 14 वर्ष से कम (सब जूनियर), 17 वर्ष से कम (जूनियर) और 19 वर्ष से कम (सीनियर) आयु वर्ग में आयोजित की जाएंगी। प्रदर्शन के आधार पर होगा प्रदेशीय टीम चयन टीम स्पर्धाओं में खिलाड़ियों का चयन राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा। तैराकी और एथलेटिक्स जैसी व्यक्तिगत स्पर्धाओं में प्रथम और द्वितीय स्थान प्राप्त खिलाड़ी प्रदेशीय टीम में शामिल किए जाएंगे। एथलेटिक्स की रिले टीम का चयन अलग से किया जाएगा। 25 जून तक तय करनी होगी मेजबानी शिक्षा विभाग ने सभी मंडलीय और जिला अधिकारियों को निर्देश दिया है कि अपने यहां आयोजित होने वाली प्रदेशीय प्रतियोगिताओं के स्थल और तिथि का निर्धारण कर 25 जून तक इसकी सूचना सहायक शिक्षा निदेशक खेल, लखनऊ और डॉ. भीमराव आंबेडकर राज्य विद्यालयी क्रीड़ा संस्थान, अयोध्या को उपलब्ध कराएं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि विषम परिस्थितियों को छोड़कर राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं की तिथियों में परिवर्तन नहीं किया जाएगा। प्रमुख प्रतियोगिताओं का कार्यक्रम     30 जून से तीन जुलाई : सब जूनियर व जूनियर नेहरू हाकी (झांसी)     5 से 8 अगस्त : तैराकी, डाइविंग व वाटर पोलो, अलीगढ़     17 से 20 अगस्त : तीरंदाजी (मिर्जापुर), कराटे (लखनऊ), शूटिंग (मेरठ), जिम्नास्टिक (आगरा)     21 से 25 अगस्त : हैंडबॉल (अयोध्या)     21 से 24 अगस्त : टेबल टेनिस व बैडमिंटन (कानपुर)     30 अगस्त से तीन सितंबर : फुटबॉल (वाराणसी) और कुश्ती (गोरखपुर)     नौ से 13 सितंबर : जूडो (बरेली) और बास्केटबॉल (गोरखपुर)     15 से 19 सितंबर : मलखम्भ (झांसी), हॉकी (मुरादाबाद), भारोत्तोलन (सहारनपुर), वॉलीबॉल (प्रयागराज)     19 से 21 सितंबर : कलारीपयट्टू (लखनऊ)     23 से 26 सितंबर : बॉक्सिंग (लखनऊ) और वुशू (वाराणसी)     29 सितंबर से दो अक्टूबर : कुराश (मेरठ)     एक से तीन अक्टूबर : सेपक टाकरा (बरेली)     तीन से छह अक्टूबर : गतका (अयोध्या)     नौ से 12 अक्टूबर : थांगता मार्शल आर्ट (अयोध्या) और योगासन (आजमगढ़)     15 से 18 अक्टूबर : शतरंज (आजमगढ़) और बालिका क्रिकेट (मुरादाबाद)     20 से 23 अक्टूबर : कबड्डी (आजमगढ़) और बालक क्रिकेट (कानपुर)     24 से 27 अक्टूबर : खो-खो (अयोध्या)     29 अक्टूबर से दो नवंबर : ताइक्वांडो (गोरखपुर)     13 से 17 नवंबर : एथलेटिक्स (प्रयागराज)  

वन्यजीव संरक्षण, जल सुरक्षा और हरित भविष्य की आधारशिला हैं वन: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण, वन संवर्धन और वन्यजीव संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सतत विकास के लक्ष्य की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। वन केवल हरियाली के स्रोत नहीं हैं, बल्कि वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास, जल संरक्षण का आधार और भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य धरोहर हैं। इसी संकल्प को साकार करते हुए दक्षिण पन्ना वनमंडल ने वन क्षेत्रों को स्वच्छ एवं प्लास्टिक मुक्त बनाने की दिशा में एक अभिनव पहल करते हुए वर्ष 2025 के विभिन्न पौधारोपण स्थलों से 11 हजार 260 किलोग्राम प्लास्टिक कचरे का संग्रहण कर उसका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया है। इस पहल से पौधारोपण स्थलों को प्लास्टिक मुक्त बनाने में सफलता मिली है, साथ ही 68 हजार किलोग्राम कार्बन-डाइ-ऑक्साइड के बराबर ग्रीन-हाउस गैसों के उत्सर्जन की रोकथाम भी हुई है। इतना ही नहीं, प्लास्टिक कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन से स्थानीय वन समितियों को लगभग 56 हजार 300 रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त हुई। वन विभाग द्वारा वर्ष-2025 के विभिन्न पौधरोपण स्थलों पर रोपण कार्य पूरा होने के बाद शेष बचे प्लास्टिक पॉलीबैगों के संग्रहण के लिए विशेष अभियान चलाया गया। स्थानीय वन समितियों और वनकर्मियों के सहयोग से व्यापक स्तर पर प्लास्टिक कचरे का संग्रहण किया गया। इसके उपरांत संग्रहित सामग्री को साफ कर उसमें मिश्रित मिट्टी, पत्थर तथा अन्य अशुद्धियों को पृथक किया गया, जिससे उसका सुरक्षित एवं वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके। संग्रहित प्लास्टिक कचरे को ऊर्जा पुनर्प्राप्ति (एनर्जी रिकवरी) के लिए अमानगंज स्थित जेके सीमेंट संयंत्र को विक्रय किया गया। सीमेंट संयंत्रों में उपलब्ध आधुनिक प्रदूषण नियंत्रण प्रणालियां तथा इलेक्ट्रो स्टैटिक प्रीसिपिटेटर (ईएसपी) जैसी उन्नत तकनीकों के कारण इस प्रकार के अपशिष्ट का निस्तारण सुरक्षित एवं पर्यावरण-अनुकूल तरीके से किया जा सकता है। यह व्यवस्था खुले में प्लास्टिक जलाने अथवा अवैज्ञानिक तरीके से फेंकने की तुलना में अधिक प्रभावी और सुरक्षित मानी जाती है। वन विभाग के अनुसार पौधरोपण के बाद पॉलीबैग्स् को वन क्षेत्रों में छोड़ देना, गड्ढों में दबा देना अथवा खुले में जला देना पर्यावरण और वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकता है। समय के साथ यह प्लास्टिक सूक्ष्म कणों में परिवर्तित होकर माइक्रोप्लास्टिक का रूप ले लेता है, जो मिट्टी की गुणवत्ता, जल स्रोतों, जैव-विविधता तथा मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। ऐसे में प्लास्टिक कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है। अभियान की विशेष उपलब्धि यह है कि अपशिष्ट समझी जाने वाली सामग्री को उपयोगी संसाधन में परिवर्तित किया गया है। इस प्रक्रिया से प्राप्त आय का उपयोग वन समितियों द्वारा स्थानीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण, वन संवर्धन, सामुदायिक विकास तथा जन-जागरूकता संबंधी गतिविधियों में किया जाएगा। इससे वन संरक्षण के प्रयासों में जनभागीदारी को भी और अधिक मजबूती मिलेगी। दक्षिण पन्ना वनमंडल की यह पहल जन-सहभागिता, स्वच्छता और वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह दर्शाती है कि सामूहिक प्रयासों एवं नवाचार आधारित कार्यप्रणाली के माध्यम से न केवल वन क्षेत्रों को स्वच्छ, सुरक्षित और प्लास्टिक मुक्त बनाया जा सकता है, बल्कि स्थानीय समुदायों को आर्थिक लाभ पहुंचाते हुए पर्यावरण संरक्षण, जलवायु संतुलन तथा वन्यजीव संवर्धन के लक्ष्यों को भी प्रभावी ढंग से प्राप्त किया जा सकता है।  

मध्य प्रदेश में गन्ना बनेगा तरक्की का इंजन, एथेनॉल से चलेंगी गाड़ियां; किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद

नई दिल्ली. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी द्वारा 100 प्रतिशत एथेनॉल ईंधन के उपयोग को कानूनी मंजूरी देने के बाद अब मध्य प्रदेश भी इस क्रांति में बड़ी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। आने वाले समय में प्रदेश की सड़कों पर गाड़ियां पेट्रोल-डीजल से नहीं, बल्कि खेतों में लहलहाने वाले गन्ने के रस से बने एथेनॉल से दौड़ती नजर आएंगी। भारत सरकार के इस फैसले से मध्य प्रदेश के गन्ना उत्पादक किसानों के लिए समृद्धि के नए द्वार खुलने जा रहे हैं। गन्ने के जूस से बनता है एथेनॉल, MP के इन जिलों को होगा सीधा फायदा एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने की फसल और चीनी उत्पादन के बाद बचे उप-उत्पाद (मोलासेस) से तैयार होने वाला एक प्रकार का अल्कोहल है। मध्य प्रदेश का एक बड़ा हिस्सा गन्ने की खेती के लिए जाना जाता है। महाकौशल और निमाड़ क्षेत्र: नरसिंहपुर (प्रदेश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक जिला), छिंदवाड़ा, बुरहानपुर, खंडवा और खरगोन जैसे जिलों में गन्ने की बंपर पैदावार होती है। मालवा और चंबल क्षेत्र: उज्जैन, धार, और ग्वालियर-दतिया के बेल्ट में भी किसान बड़े पैमाने पर गन्ना उगाते हैं। अब तक किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए केवल चीनी मिलों या स्थानीय गुड़ और खांडसारी उद्योग पर निर्भर रहना पड़ता था, जहां अक्सर भुगतान में देरी और सही दाम न मिलने की समस्या होती थी। लेकिन एथेनॉल की मांग 100% होने से अब गन्ने की सीधी खपत एथेनॉल प्लांटों में होगी। कच्चे तेल का आयात घटेगा, प्रदेश में पैदा होगा रोजगार मध्य प्रदेश में वर्तमान में कई चीनी मिलों के साथ डिस्टिलरी और एथेनॉल प्लांट जुड़े हुए हैं। गडकरी के इस फैसले के बाद राज्य में नए एथेनॉल मैन्युफैक्चरिंग प्लांटों में निवेश बढ़ेगा। सस्ता और घरेलू ईंधन: चूंकि एथेनॉल पूरी तरह से स्वदेशी और घरेलू स्तर पर तैयार होता है, इसलिए इसे खाड़ी देशों से आयात करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह पेट्रोल के मुकाबले काफी सस्ता भी पड़ेगा। प्रदूषण से मुक्ति: मध्य प्रदेश के इंदौर, भोपाल और जबलपुर जैसे बड़े शहरों में बढ़ते प्रदूषण को कम करने में यह ईंधन मील का पत्थर साबित होगा क्योंकि एथेनॉल से चलने वाले वाहनों से कार्बन उत्सर्जन बेहद कम होता है। डेढ़ महीने में आ रही हैं गाड़ियां, किसानों को मिलेगा 'ग्रीन गोल्ड' का दाम केंद्रीय मंत्री ने साफ किया है कि टोयोटा, सुजुकी और हुंडई जैसी दिग्गज कंपनियां अगले डेढ़ महीने में 100% एथेनॉल से चलने वाली गाड़ियां (फ्लेक्स फ्यूल व्हीकल) बाजार में उतार रही हैं। जैसे ही ये गाड़ियां सड़कों पर आएंगी, ईंधन की मांग बढ़ेगी। जानकारों का मानना है कि इस नीति से मध्य प्रदेश के किसानों के लिए गन्ना अब सिर्फ एक फसल नहीं, बल्कि 'ग्रीन गोल्ड' (हरा सोना) बन जाएगा, जिससे उनकी आय में रिकॉर्ड बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।

लैपटॉप से लेकर निःशुल्क शिक्षा तक, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड) बनी बच्चों का मजबूत सहारा

लखनऊ. कोविड महामारी में अपने माता-पिता को खो चुके बच्चों के लिए योगी सरकार अभिभावक की भूमिका निभा रही है। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड) के तहत अनाथ और बेसहारा बच्चों को न केवल आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, बल्कि उनके बेहतर भविष्य के लिए शिक्षा को भी प्राथमिकता दी गई है। महिला कल्याण विभाग के द्वारा सरकार 8085 बच्चों को लैपटॉप वितरित कर उन्हें डिजिटल शिक्षा से जोड़ चुकी है। डिजिटल युग में यह पहल बच्चों के लिए ज्ञान और अवसरों के नए द्वार खोल रही है। इससे वो ऑनलाइन अध्ययन, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और तकनीकी दक्षता हासिल करने में सक्षम हो रहे हैं। वहीं 11 से 18 वर्ष तक के बच्चों को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय और अटल आवासीय विद्यालयों में कक्षा 12 तक निःशुल्क प्रदान कर रही हैं। योजना के अंतर्गत प्रत्येक बच्चे को प्रतिमाह उसकी शिक्षा जारी रखने के लिए 4 हजार रुपये प्रतिमाह की सहायता भी दी जा रही है। यह पहल बच्चों के सपनों को नई उड़ान देने का माध्यम बन रही है। निःशुल्क शिक्षा के साथ आर्थिक संबल योगी सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि संसाधनों के अभाव में कोई भी बच्चा अपनी पढ़ाई अधूरी न छोड़े। योजना के अंतर्गत 11 से 18 वर्ष तक के बच्चों को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों और अटल आवासीय विद्यालयों में कक्षा 12 तक निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। इसके साथ ही प्रत्येक पात्र बच्चे को 4 हजार रुपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता भी प्रदान की जा रही है। यह सहायता बच्चों की शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इससे किताबें, स्टेशनरी और अन्य जरूरी शैक्षिक संसाधन जुटाने में मदद मिलती है। सरकार का यह प्रयास सामाजिक सुरक्षा और शिक्षा के समन्वित मॉडल के रूप में सामने आया है। प्रतिस्पर्धी माहौल से जुड़ रहे बच्चे लैपटॉप वितरण और आधुनिक शैक्षिक सुविधाओं के माध्यम से बच्चों को प्रतिस्पर्धी माहौल से जोड़ने की दिशा में भी प्रभावी कार्य किया जा रहा है। शिक्षा आधारित यह मॉडल बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए भी तैयार कर रहा है। योगी सरकार का प्रयास है कि ये बच्चे आत्मनिर्भर बनेः निदेशक योगी सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि महामारी से प्रभावित कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। निःशुल्क शिक्षा, आर्थिक सहायता और डिजिटल संसाधनों के माध्यम से बच्चों को आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। योगी सरकार का प्रयास है कि ये बच्चे आत्मनिर्भर बनें और अपने सपनों को साकार कर सकें। इसलिए प्रदेश के सभी जिला प्रोबेशन अधिकारियों को मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के पात्र बच्चों को समय पर लाभ प्रदान करने तथा ऐसे बच्चों का नियमित फॉलोअप लेकर उनके सम्पूर्ण विकास सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। सी. इंदुमती, निदेशक, महिला कल्याण विभाग

अलवर: केंद्र-राज्य योजनाओं और विकास कार्यों की मंत्री ने दी जानकारी

 जयपुर 12 साल विश्वास के, विकास के, जनकल्याण के विषय पर आधारित तीन दिवसीय प्रदर्शनी का जल संसाधन मंत्री श्री सुरेश सिंह रावत ने सूचना एवं जन सम्पर्क कार्यालय, धौलपुर में प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की प्रदर्शनी न केवल सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराती है, बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों को भी जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की व्यापकता एवं प्रभावशीलता को समझने का अवसर प्रदान करती है। प्रदर्शनी के माध्यम से यह स्पष्ट रूप से देखने को मिला कि सरकार की विभिन्न योजनाओं ने समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रदर्शनी में प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत योजना, उज्ज्वला योजना, जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन, डिजिटल इंडिया, किसान सम्मान निधि सहित विभिन्न केंद्रीय योजनाओं तथा राज्य सरकार की जनहितकारी पहल, सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों, शिक्षा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए सुधारों तथा विकास परियोजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदर्शित की गई। इसके अतिरिक्त महिला एवं बाल विकास, कौशल विकास, रोजगार संवर्धन तथा ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार से संबंधित उपलब्धियों को भी प्रमुखता से दर्शाया गया। उन्होंने प्रदर्शनी के सफल आयोजन के लिए सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन आमजन एवं प्रशासन के बीच संवाद स्थापित करने तथा विकास यात्रा को समझने का प्रभावी माध्यम हैं। उल्लेखनीय है कि सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित यह प्रदर्शनी केंद्र एवं राज्य सरकार की विकासोन्मुखी नीतियों, जनकल्याणकारी कार्यक्रमों तथा सुशासन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है। प्रदर्शनी के माध्यम से नागरिकों को सरकार द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें इन योजनाओं का लाभ उठाने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। इस दौरान जिला कलक्टर निधि बी टी, जिला अध्यक्ष राजवीर सिंह राजावत, गिर्राज सिंह, डॉ. शिवचरण कुशवाह, नीरजा शर्मा, मोतीलाल मीणा सहित अन्य जनप्रतिनिधि व कर्मचारी उपस्थित रहे।

रेल प्रोजेक्ट के तहत कक्षा 6 से 12 तक मासिक टेस्ट अनिवार्य, कंप्यूटर शिक्षा का भी होगा मूल्यांकन

 रांची  स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने रेल (रेगुलर असेसमेंट फार इंप्रूवमेंट इन लर्निंग) प्रोजेक्ट के तहत सरकारी स्कूलों में आयोजित होनेवाली मासिक परीक्षा को लेकर नया एसओपी लागू किया है। इसमें उन स्कूलों में कंप्यूटर और व्यावसायिक शिक्षा की भी परीक्षा आयोजित करने को कहा गया है, जहां समग्र शिक्षा अभियान के तहत क्रमश: आइसीटी तथा व्यावसायिक शिक्षा की पढ़ाई हो रही है। एसओपी में कहा गया है कि जिन स्कूलों में आइसीटी लैब उपलब्ध हैं, उन सभी स्कूलों में प्रत्येक माह के चौथे सप्ताह के किसी भी कार्यदिवस को कक्षा छह से 12 में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के लिए आइसीटी रेल मासिक परीक्षा आयोजित की जाएगी। इसमें छात्रों के कंप्यूटर से संबंधित दक्षता का मूल्यांकन किया जाएगा। उक्त परीक्षा के लिए प्रश्नपत्र एवं उत्तर कुंजी का निर्माण स्कूल स्तर पर करते हुए निर्धारित अवधि में परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। साथ ही विद्यार्थियों के प्राप्तांकों की प्रविष्टि की जाएगी। वहीं, जिन स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा से संबंधित कक्षाएं संचालित होती हैं, वहां प्रत्येक माह के तीसरे सप्ताह के किसी भी कार्यदिवस को छात्र-छात्राओं की व्यावसायिक शिक्षा की रेल मासिक परीक्षा आयोजित होगी। एसओपी में यह भी कहा गया है कि राज्य स्तर से निर्धारित मासिक जांच परीक्षा की तिथि का पूर्व से जिलों के लिए निर्धारित अवकाश/अन्य कारणों से मेल होने पर उस जिले के स्कूलों द्वारा अवकाश के बाद मासिक जांच परीक्षा अगले कार्यदिवस में अनिवार्य रूप से ली जाएगी। आइसीटी तथा व्यावसायिक परीक्षा के अलावा सभी विषयाें में भी मासिक परीक्षा में 50 प्रतिशत प्रश्न वस्तुनिष्ठ तथा इतने ही प्रश्न विषयनुष्ठ (लघु उत्तरीय एवं दीर्घ उत्तरीय पूछे जाएंगे)। कक्षा एक से आठ के लिए अर्द्धवार्षिक एवं वार्षिक परीक्षाओं के पूर्व प्रोजेक्ट रेल के तहत होने वाली मासिक जांच परीक्षाओं के औसत प्राप्तांक को रचनात्मक मूल्यांकन का प्राप्तांक माना जाएगा। साथ ही यह अंक छमाही और वार्षिक मूल्यांकन के कुल योग में जुड़ेगा। बताते चलें कि वर्तमान में राज्य के 5,886 स्कूलों में आइसीटी लैब की सुविधा बहाल है। 61 पीएम श्री स्कूलों तथा 108 माध्यमिक विद्यालयों में शीघ्र ही यह सुविधा बहाल होगी। वहीं, राज्य के कई स्कूलों में 11 विषयों में व्यावसायिक शिक्षा दी जा रही है। रेल प्रोजेक्ट का आया है बेहतर परिणाम रेल प्रोजेक्ट के तहत स्कूलों में आयोजित हो रही मासिक परीक्षा का बेहतर परिणाम आया है। इससे जैक की 10वीं तथा 12वीं की परीक्षा के परिणाम में सुधार हुआ है। राज्य के कितने स्कूलों में आइसीटी लैब स्कूलों की श्रेणी                               कुल स्कूल     स्वीकृत स्कूल     जहां सुविधा बहाल है उच्च प्राथमिक                              11,382           3,368            3,290 माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक     2,869            2,794              2,596

प्रधानमंत्री मोदी ने किया था देश की सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजनाओं में शामिल जेवर एयरपोर्ट का शुभारंभ

लखनऊ/नोएडा.  उत्तर प्रदेश के विकास इतिहास में 15 जून 2026 एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) से वाणिज्यिक उड़ान सेवाओं की शुरुआत होने जा रही है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े एविएशन, लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी हब के रूप में अपनी नई पहचान की ओर एक बड़ा कदम बढ़ाएगा। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो 15 जून से एयरपोर्ट पर अपनी सेवाएं शुरू करेगी और इस एयरपोर्ट की पहली लॉन्च कैरियर बनेगी। उद्घाटन दिवस पर पहली उड़ान सुबह 7:05 बजे लखनऊ से रवाना होकर 8:05 बजे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचेगी। इसके बाद नोएडा से बेंगलुरु के लिए पहली नियमित वाणिज्यिक उड़ान संचालित की जाएगी। प्रधानमंत्री मोदी ने किया था उद्घाटन नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट परियोजना को केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित विकास मॉडल का भी प्रतीक माना जा रहा है। एयरपोर्ट के उद्घाटन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर भारत की कनेक्टिविटी, व्यापार और आर्थिक विकास के लिए ऐतिहासिक परियोजना बताया था। प्रधानमंत्री ने कहा था कि जेवर एयरपोर्ट विकसित भारत के संकल्प को गति देने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेश, लॉजिस्टिक्स और पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विकसित यह परियोजना आज प्रदेश के तेजी से बदलते इंफ्रास्ट्रक्चर परिदृश्य की पहचान बन चुकी है। योगी सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल जेवर एयरपोर्ट गौतमबुद्ध नगर जिले में यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में विकसित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को उत्तर प्रदेश सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी आधारभूत संरचना परियोजनाओं में शामिल किया जाता है। एयरपोर्ट के लिए लगभग 1334 हेक्टेयर (करीब 3300 एकड़) भूमि का अधिग्रहण किया गया। परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाते हुए राज्य सरकार ने विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों से आवश्यक अनुमतियां प्राप्त कर निर्धारित समय में निर्माण कार्य पूरा कराया। पहले चरण में 1.2 करोड़ यात्रियों की क्षमता एयरपोर्ट का पहला चरण पूरी तरह तैयार हो चुका है। पहले चरण में यह एयरपोर्ट प्रतिवर्ष 1.2 करोड़ यात्रियों को संभालने की क्षमता रखेगा। डीजीसीए द्वारा 6 मार्च 2026 को एयरपोर्ट को एयरोड्रोम लाइसेंस भी जारी किया जा चुका है। वर्तमान चरण में एक रनवे, अत्याधुनिक टर्मिनल भवन और एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर सहित सभी आवश्यक सुविधाएं विकसित की गई हैं।  भविष्य में बनेगा दुनिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में से एक नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का विकास चार चरणों में किया जा रहा है। वर्ष 2031 तक इसकी क्षमता बढ़ाकर तीन करोड़ वार्षिक यात्रियों की जाएगी। वर्ष 2036 तक यह क्षमता पांच करोड़ और वर्ष 2040 तक सात करोड़ यात्रियों तक पहुंच जाएगी। अंतिम विस्तार के बाद एयरपोर्ट पर पांच रनवे होंगे और इसकी कुल क्षमता 22.5 करोड़ यात्रियों तक पहुंच जाएगी, जो इसे दुनिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में शामिल करेगी। पश्चिमी यूपी और एनसीआर का नया एविएशन गेटवे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के तीसरे एयरपोर्ट के रूप में विकसित यह प्रोजेक्ट पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, राजस्थान और उत्तराखंड के लाखों यात्रियों के लिए नया विकल्प बनेगा। इंडिगो चरणबद्ध तरीके से एयरपोर्ट को लखनऊ, बेंगलुरु, हैदराबाद, अमृतसर, चंडीगढ़, धर्मशाला, जयपुर, नवी मुंबई, पंतनगर और श्रीनगर सहित 16 से अधिक शहरों से जोड़ेगी। एक लाख रोजगार और निवेश का नया केंद्र राज्य सरकार के अनुसार एयरपोर्ट परियोजना से लगभग एक लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। एयरपोर्ट के आसपास औद्योगिक, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, हॉस्पिटैलिटी और सेवा क्षेत्र में बड़े निवेश की संभावनाएं भी तेजी से बढ़ रही हैं। आने वाले वर्षों में जेवर क्षेत्र उत्तर भारत के सबसे बड़े औद्योगिक और सेवा क्षेत्र केंद्र के रूप में विकसित होगा।

लोहरसी आयुर्वेदिक औषधालय में दर्द प्रबंधन हेतु कपिंग थेरेपी एवं विशेष आयुर्वेदिक उपचार सेवाओं का आरंभ

सियान जतन कार्यक्रम के अंतर्गत शासकीय आयुर्वेदिक औषधालय, लोहरसी में "Pain Management through Ayurveda" विषय पर दर्द प्रबंधन हेतु विशेष आयुर्वेदिक चिकित्सा सेवाओं का आरंभ किया गया है। इस पहल का उद्देश्य घुटने के दर्द (Knee Joint Pain), कमर दर्द, गर्दन दर्द, स्पॉन्डिलाइटिस, फ्रोजन शोल्डर तथा अन्य वातजन्य रोगों से पीड़ित मरीजों को प्रभावी एवं सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराना है। कार्यक्रम के अंतर्गत मरीजों के लिए कपिंग थेरेपी (Cupping Therapy) आरंभ की गई है, जो मांसपेशियों के तनाव, दर्द, सूजन एवं रक्त संचार में सुधार हेतु उपयोगी मानी जाती है। इसके अतिरिक्त औषधालय में ड्राय कपिंग, अग्निकर्म एवं विद्धकर्म जैसी विशेष आयुर्वेदिक उपचार प्रक्रियाओं का भी आरंभ किया जा रहा है। इन चिकित्सा पद्धतियों का उपयोग विभिन्न प्रकार के अस्थि-संधि एवं मांसपेशीय विकारों, स्पॉन्डिलाइटिस, फ्रोजन शोल्डर, साइटिका तथा पुराने दर्द संबंधी समस्याओं के प्रबंधन में किया जाएगा। सियान जतन कार्यक्रम के तहत विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों को इन सेवाओं का लाभ प्रदान किया जा रहा है, जिससे वे बढ़ती आयु के साथ होने वाली दर्द एवं गतिशीलता संबंधी समस्याओं से राहत प्राप्त कर सकें। आयुर्वेद की पारंपरिक ज्ञान-परंपरा एवं आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के समन्वय से यह पहल क्षेत्रवासियों को सुलभ, सुरक्षित तथा प्रभावी उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस अवसर पर आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी डॉ. वर्षा ने बताया कि वर्तमान समय में बदलती जीवनशैली, तनाव, अनियमित खान-पान एवं शारीरिक श्रम की कमी के कारण जोड़ों के दर्द, कमर दर्द, सर्वाइकल एवं अन्य वातजन्य रोगों के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे समय में आयुर्वेद केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि रोगों की रोकथाम एवं समग्र स्वास्थ्य संवर्धन की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद शरीर, मन एवं जीवनशैली के संतुलन पर आधारित चिकित्सा पद्धति है, जो रोग के मूल कारण को समझकर उपचार करने का प्रयास करती है। कपिंग थेरेपी, अग्निकर्म एवं विद्धकर्म जैसी प्रक्रियाएं दर्द प्रबंधन में प्रभावी सिद्ध हो रही हैं तथा कई मरीजों को दीर्घकालिक राहत प्रदान कर रही हैं। उन्होंने नागरिकों से नियमित दिनचर्या, संतुलित आहार, योग एवं आयुर्वेदिक परामर्श को अपनाकर स्वस्थ जीवनशैली विकसित करने का आग्रह किया। शासकीय आयुर्वेदिक औषधालय, लोहरसी द्वारा क्षेत्र के नागरिकों से अपील की गई है कि वे आयुर्वेद की इन विशेष उपचार सेवाओं का अधिकाधिक लाभ उठाएं तथा स्वस्थ, सक्रिय एवं रोगमुक्त जीवन की ओर अग्रसर हों।

मूक-बधिर नाबालिग से दुष्कर्म करने वाला आरोपी गिरफ्तार

पीथमपुर/धार. पीथमपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत एक संवेदनशील व मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। एक युवक ने अपने पड़ोस में रहने वाली मूक-बधिर नाबालिग के साथ कई बार दुष्कर्म किया। नाबालिग के गर्भवती होने पर बढ़ता पेट देख स्वजनों को शंका हुई और उससे इशारे में पूछा और फोटो दिखाने पर आरोपित के बारे में बताया। पुलिस ने आरोपित के खिलाफ दुष्कर्म, पक्सो एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज कर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। जानकारी के अनुसार नाबालिग मूक-बधिर किशोरी का युवक के घर आना-जाना था। युवक ने इसका फायदा उठाते हुए किशोरी से कई बार दुष्कर्म किया। इससे किशोरी गर्भवती हो गई। इस बात का खुलासा 3 जून को हुआ जब पिता ने बेटी का पेट असामान्य रूप से बढ़ा हुआ देखा। इशारों में उसने माता-पिता को पूरी बात बताई अनहोनी की आशंका होने पर जब माता-पिता ने इशारों में पूछताछ की, तो बेटी रोने लगी। इसके बाद इशारों में उसने माता-पिता को पूरी बात बताई। पिता ने किशोरी को आरोपित का फोटो दिखाया तो उसने पहचान की। पहले पीड़िता का परिवार सामाजिक बदनामी और डर के कारण शांत रहा, पर बाद में हिम्मत जुटा कर 11 जून को थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपित को हिरासत में लिया पीड़िता के नाबालिग और दिव्यांग होने के कारण पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपित को हिरासत में लिया और उसके खिलाफ प्रकरण दर्ज किया। वर्तमान में पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया जा रहा है। पीड़िता के मूक-बधिर होने के कारण उसका सटीक कानूनी बयान दर्ज कराने के लिए साइन लैंग्वेज एक्सपर्ट की मदद भी ली जा रही है। जिससे आरोपित को सख्त सजा दिलाई जा सके।