samacharsecretary.com

एचएसवीपी की बड़ी योजना, गुरुग्राम में 8 गांवों की 196 एकड़ जमीन से नया सेक्टर बनेगा

गुरुग्राम गुरुग्राम में अरावली पर्वत श्रृंखला के पास एक नया रिहायशी सेक्टर बसाने की तैयारी चल रही है। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) इस नए सेक्टर को विकसित करेगा। शिकोहपुर गांव के किसानों ने इसके लिए 107 एकड़ जमीन देने की इच्छा जाहिर की है। एचएसवीपी के संपदा अधिकारी ने प्रस्ताव तैयार करके मुख्यालय में भेज दिया है। मंजूरी मिलने के बाद जमीन मालिकों से जमीन खरीदने की प्रक्रिया को शुरू किया जाएगा। एचएसवीपी ने हरियाणा में करीब 1.67 लाख में नए सेक्टर विकसित करने की योजना बनाई है। इसके तहत जमीन मालिकों से आपसी सहमती के साथ जमीन खरीदी जाएगी। गुरुग्राम में सेक्टर विकसित करने के लिए करीब 17 हजार एकड़ जमीन की पहचान की गई है। एचएसवीपी ने ई-भूमि पोर्टल पर जमीन बेचने के इच्छुक जमींदारों से आवेदन करने का आग्रह किया था। संपदा अधिकारी एक कार्यालय के अधीन दिल्ली-जयपुर हाईवे स्थित गांव शिकोहपुर के जमीन मालिकों ने 107 एकड़ जमीन बेचने के बारे में आवेदन किया है। इस गांव में जमीन की कीमत 30 करोड़ रुपये प्रति एकड़ से अधिक है। एचएसवीपी में 8 गांव के जमीन मालिकों ने करीब 196 एकड़ जमीन बेचने के लिए आवेदन किया है, जिसमें से सबसे अधिक जमीन गांव शिकोहपुर की है। यदि शिकोहपुर की जमीन एचएसवीपी की तरफ से खरीदकर सेक्टर काटा जाता है तो यहां प्लॉट खरीदने वाले लोगों की होड़ लगेगी सुल्तानपुर झील के पास भी सेक्टर बसेगा सुल्तानपुर झील के 5 किमी क्षेत्र में किसी भी तरह का नया निर्माण प्रतिबंधित है। सुल्तानपुर झील के मद्देनजर पर्यावरण मंत्रालय ने यह आदेश जारी किए हुए हैं। इस गांव की करीब सात एकड़ जमीन के मालिकों ने जमीन बेचने की इच्छा जाहिर की है। यह जमीन फर्रुखनगर के सेक्टर-एक के अधीन आती है। कई गांव के लोग भूमि देने को तैयार गुरुग्राम-पटौदी रोड पर गांव मेवका और ढोरका के किसान भी जमीन देने को तैयार हैं। जमीन मालिकों ने करीब 42 एकड़ जमीन बेचने के लिए आवेदन किया है। एचएसवीपी की तरफ से कोई रिहायशी सेक्टर काटा जाता है तो उसमें एक एकड़ में 45 प्रतिशत क्षेत्र को बेचा जाता है। 55 प्रतिशत क्षेत्र में पार्क, हरित क्षेत्र, सड़क आदि बुनियादी सुविधाओं को मुहैया करवाया जाता है। राकेश सैनी, संपदा अधिकारी-एक, एचएसवीपी, ''नए सेक्टर विकसित करने के लिए ई-भूमि योजना के तहत जमीन खरीदने की योजना है। इसको लेकर गांवों में जाकर शिविर लगाए थे। 8 गांवों के जमीन मालिकों ने करीब 196 एकड़ जमीन बेचने की इच्छा जाहिर की है। उनके आवेदन को मुख्यालय भेज दिया है। मुख्यालय से मंजूरी मिलने के बाद जमीन खरीदने की प्रक्रिया को शुरू किया जाएगा।''

पंजाब सरकार का बड़ा तोहफा! मशरूम यूनिट शुरू करने पर ₹80 हजार तक की आर्थिक सहायता मिलेगी

अमृतसर  पंजाब सरकार फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने और किसानों की आय में वृद्धि करने के प्रयासों के तहत 'राज्य योजना' के अंतर्गत मशरूम उत्पादन इकाइयां स्थापित करने के लिए अधिकतम 80,000 रुपये तक की रियायत दे रही है। बागवानी मंत्री मोहिंदर भगत ने कहा कि किसान लगभग दो लाख रुपये की अनुमानित लागत से एक छोटी मशरूम उत्पादन इकाई स्थापित कर सकते हैं। इस योजना के तहत, बागवानी विभाग पात्र लाभार्थियों को 40 प्रतिशत की रियायत प्रदान करता है, और इसकी अधिकतम सीमा 80,000 रुपये तय की गई है। उन्होंने कहा कि मशरूम की खेती के लिए तुलनात्मक रूप से कम भूमि और पानी की आवश्यकता होती है, जबकि कम निवेश में इससे आकर्षक मुनाफा मिलता है। भगत ने बताया कि एक छोटी मशरूम उत्पादन इकाई को लगभग 1,800 वर्ग फुट क्षेत्र में स्थापित किया जा सकता है। इससे छोटे और सीमांत किसानों के लिए भी इस योजना का लाभ उठाना संभव हो सकेगा। योजना की प्रक्रिया की जानकारी देते हुए मंत्री ने कहा कि यह इकाई लगाने के इच्छुक किसान 'राज्य योजना' के तहत आवेदन करने के लिए अपने नजदीकी जिला बागवानी अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि विभाग किसानों को मशरूम की खेती सफलतापूर्वक शुरू करने में मदद करने के लिए तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और सभी आवश्यक सहायता भी प्रदान करता है। पंजाब के बागवानी मंत्री मोहिंदर भगत ने बताया कि किसान लगभग 2 लाख रुपये की अनुमानित लागत से एक छोटी मशरूम उत्पादन इकाई स्थापित कर सकते हैं। राज्य योजना के तहत बागवानी विभाग पात्र किसानों को परियोजना लागत का 40 प्रतिशत अनुदान देता है, जिसकी अधिकतम सीमा 80,000 रुपये निर्धारित की गई है। उन्होंने कहा कि मशरूम की खेती कम निवेश, कम पानी और सीमित भूमि में शुरू की जा सकती है, जबकि इसकी बाज़ार में अच्छी माँग होने के कारण किसानों को बेहतर आमदनी मिलने की संभावना रहती है। 1,800 वर्ग फुट में लग सकती है उत्पादन इकाई मोहिंदर भगत ने बताया कि एक छोटी मशरूम उत्पादन इकाई करीब 1,800 वर्ग फुट क्षेत्र में स्थापित की जा सकती है। यही वजह है कि छोटे और सीमांत किसान भी आसानी से इस व्यवसाय की शुरुआत कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार लंबे समय से किसानों को पारंपरिक फसल चक्र से बाहर निकालकर फसल विविधीकरण की दिशा में काम कर रही है और मशरूम उत्पादन पर दी जा रही सब्सिडी इसी रणनीति का हिस्सा है। सरकार का मानना है कि इससे किसानों को आय का एक अतिरिक्त और बेहतर स्रोत मिलेगा। आवेदन के साथ मिलेगा प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन योजना का लाभ लेने के इच्छुक किसान 'राज्य योजना' के तहत आवेदन करने के लिए अपने नज़दीकी ज़िला बागवानी अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। विभाग किसानों को आवेदन प्रक्रिया, पात्रता और आवश्यक दस्तावेज़ों की जानकारी उपलब्ध कराएगा। इसके अलावा सरकार केवल आर्थिक सहायता ही नहीं दे रही, बल्कि मशरूम उत्पादन शुरू करने वाले किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और उत्पादन इकाई के सफल संचालन के लिए विशेषज्ञ सहायता भी उपलब्ध कराएगी, ताकि नए किसान बिना किसी तकनीकी कठिनाई के मशरूम की खेती शुरू कर सकें।

WhatsApp हैक कर ठगों की नई चाल! छत्तीसगढ़ भाजपा के पूर्व संसदीय सचिव के नाम पर मांगे जा रहे रुपये

गरियाबंद. जिले में साइबर ठग लगातार भाजपा नेताओं को निशाना बना रहे हैं। अब वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व संसदीय सचिव गोवर्धन मांझी का व्हाट्सएप अकाउंट हैक कर लिया गया है। हैकर उनके कॉन्टैक्ट लिस्ट में मौजूद लोगों को मैसेज भेजकर 28 हजार रुपये यूपीआई के जरिए भेजने की मांग कर रहा है। तीन दिनों के भीतर यह दूसरे बड़े भाजपा नेता का व्हाट्सएप अकाउंट हैक होने का मामला है। जानकारी के अनुसार, हैकर गोवर्धन मांझी के नाम से लोगों को संदेश भेज रहा है कि नेटवर्क की समस्या के कारण तत्काल 28 हजार रुपये भेज दें, जिन्हें बाद में वापस कर दिया जाएगा। इसके लिए वह एक बार कोड भेजने जैसी प्रक्रिया भी अपना रहा है। जब मांझी के परिचितों ने उन्हें फोन कर इस बारे में जानकारी दी, तब उन्हें अकाउंट हैक होने का पता चला। गोवर्धन मांझी की लोगों से अपील गोवर्धन मांझी ने लोगों से अपील की है कि उनके नाम से आने वाले किसी भी मैसेज का जवाब न दें और न ही किसी प्रकार का पैसा ट्रांसफर करें। उन्होंने बताया कि उन्होंने गलती से एक एपीके (APK) फाइल पर क्लिक कर दिया था, जिसके बाद उनका व्हाट्सएप अकाउंट हैक होने की आशंका है। मामले की सूचना साइबर सेल और देवभोग पुलिस को दे दी गई है। हैकर ने स्टूडेंट होने का किया दावा हैकर व्हाट्सएप ग्रुप में मैसेज भेजकर खुद को छात्र बताते हुए लोगों से पैसे मांग रहा है। उसने लिखा है कि, “मैं स्टूडेंट हूं, मुझे पैसों की जरूरत है। कल कॉलेज की फीस जमा करनी है। कोई पैसे भेज दो। मैं किसी गरीब से पैसे नहीं ले रहा हूं। विधायक जी मुझे बहुत अच्छे लगते हैं, इसलिए मैंने उनका अकाउंट हैक किया है।” भाजपा जिला अध्यक्ष भी हुए थे शिकार इससे पहले भाजपा के जिला अध्यक्ष अनिल चंद्राकर का भी व्हाट्सएप अकाउंट हैक कर लिया गया था। साइबर ठग नेताओं की पहचान और पद का दुरुपयोग कर उनके परिचितों से ठगी करने की कोशिश कर रहे हैं।

Punjab Health Alert: शिशु मृत्यु दर बढ़ने से बढ़ी चिंता, अमृतसर में सबसे ज्यादा मामले, जालंधर-लुधियाना भी प्रभावित

 जालंधर/लुधियाना  पंजाब में शिशु मृत्यु दर में 17.56 फीसदी की बढ़ोतरी हो गई है। शहरों में स्थिति ज्यादा गंभीर है जहां शिशु मृत्यु दर के कुल मामलों में से 90% मौतें हो रही हैं। अमृतसर में शिशु मृत्यु दर अधिक है। उसके बाद जालंधर और लुधियाना में अधिक मौतें हो रही हैं। नागरिक पंजीकरण प्रणाली पर आधारित महत्वपूर्ण सांख्यिकी रिपोर्ट 2024 में यह बात सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार पिछले कुछ साल से प्रदेश में शिशु मृत्यु के मामले बढ़ते जा रहे हैं। वर्ष 2023 में शिशु मृत्यु के 2272 मामले सामने आए थे जो 2024 में बढ़कर 2671 हो गए हैं। वर्ष 2020 में 1884, 2021 में 1830, 2022 में 2336 बच्चों की मौत हुई। इनमें समय से पहले प्रसव, जन्म के समय ऑक्सीजन की कमी, संक्रमण और प्रसवपूर्व देखभाल की कमी है। इसके अलावा स्वास्थ्य सुविधाओं, स्वच्छता की कमी, कुपोषण और दस्त रोग भी शिशु मृत्यु दर के प्रमुख कारण हैं। वहीं, राष्ट्रीय स्तर पर शिशु मृत्यु दर में 17.12% की कमी आई है। वर्ष 2023 में जहां 1.45 लाख बच्चों की मौत हुई थी जो अब कम होकर 1.20 लाख हो गई है। शहरों में स्थिति अधिक गंभीर प्रदेश में गांवों के मुकाबले शहरों की स्थिति अधिक गंभीर है जहां शिशु मृत्यु दर के अधिक मामले सामने आ रहे हैं। वर्ष 2024 के दौरान जहां ग्रामीण क्षेत्रों में शिशु मृत्यु दर के 258 मामले सामने आए हैं। वहीं शहरों में 2413 बच्चों की मौत हुई है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार गांवों और शहरों में स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए प्रयास किया जा रहा है ताकि मृत्यु दर को कम किया जा सके। जिला, सब डिवीजनल अस्पतालों और कम्युनिटी हेल्थ सेंटरों पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती की जा रही है। पीजी कोर्स जॉइन करने के बॉन्ड सरकार सख्ती से लागू कर रही है। प्रदेश में शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए प्रसवपूर्व देखभाल में सुधार, कुपोषण को कम करना, स्वच्छता में सुधार और संक्रमण को रोकने के लिए विभिन्न उपायों पर काम किया जा रहा है।   अमृतसर में सबसे अधिक 835 व जालंधर में 368 मौतें  रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 के दौरान अमृतसर में सबसे अधिक 835 बच्चों की मौत हुई है। जालंधर 368 और लुधियाना में 348 बच्चों की मौत हुई है। यही कारण है कि इन जिलों में स्वास्थ्य विभाग की तरफ से विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विभाग की तरफ से यहां अस्पतालों में अधिक सुविधाएं दी जा रही हैं। साथ ही डॉक्टरों और स्टाफ की कमी पूरी किया जा रहा है। लोगों के बीच जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है ताकि इन शहरों में शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सके। बाकी जिलों में यह है स्थिति   जिला – मौतें अमृतसर – 835 बरनाला – 18 बठिंडा – 187 फरीदकोट – 169 फाजिल्का – 32 फतेहगढ़ साहिब – 5 फिरोजपुर – 8 गुरदासपुर – 32 होशियारपुर – 60 जालंधर – 368 कपूरथला – 12 लुधियाना – 348 मालेरकोटला – 12 मानसा – 5 मोगा – 55 श्री मुक्तसर साहिब – 15 पठानकोट – 36 पटियाला – 331 रूपनगर – 4 संगरूर – 16 मोहाली – 87 एसबीएस नगर – 25 तरनतारन – 11

एन्यूमेरेशन फॉर्म को लेकर भ्रम, लोग बूथों पर तलाश रहे BLO

नई दिल्ली  स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया में लोगों की परेशानियां कम नहीं हो रही हैं। अब कई इलाकों में बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) डोर टु डोर नहीं पहुंच रहे हैं। लोग उन्हें खोजते हुए बूथों पर पहुंच रहे हैं। यहां नंबर लेकर फोन लगा रहे हैं और अपने घर बुला रहे हैं। इससे समस्या और बढ़ती जा रही है। कई इलाकों में आरडब्ल्यूए ने बूथों पर बीएलओ के बैठने की व्यवस्था की है। ताकि लोगों को आसानी से समझाकर फॉर्म भरवाए जा सकें। यहीं उनको फॉर्म भी बांटे जा रहे हैं। लेकिन, पूरी व्यवस्था ऐसे नहीं चल रही है। कई बीएलओ डोर टु डोर सर्वे भी कर रहे हैं। इससे भ्रम पैदा हो रहा है। लोगों में नाराजगी, कॉल करके घर बुला रहे बीएलओ को     कई इलाकों के लोग दूसरे बूथों पर जाकर फॉर्म मांग रहे हैं। लेकिन, फॉर्म नहीं मिल रहे हैं।     मटियामहल विधानसभा के 78 नंबर वार्ड में बने बूथ में बुजुर्ग एजाज खान पहुंचे थे।     उन्होंने बताया कि हमें मालूम हुआ कि यहां एन्यूमेरेशन फॉर्म मिल रहे हैं। यहां आकर पता चला कि हमारे इलाके चमड़े वाली गली के बीएलओ यहां नहीं हैं।     इनसे नंबर लिया है और बीएलओ से बात की है। उन्होंने कहा है कि वह जल्द पहुंचकर फॉर्म देंगी।     लोगों को एन्यूमेरेशन फॉर्म भरने के बारे में जानकारी नहीं है। ऐसे में वह गलतियां कर रहे हैं।     वहीं बीएलओ एक-एक फॉर्म ही दे रहे हैं। लोगों को पता नहीं है कि उन्हें दो फॉर्म दिए जाने हैं।     ऐसे में वह बीएलओ से दूसरा फॉर्म मांग रहे हैं और विवाद की स्थिति बन रही है।     चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने कहा, बीएलओ को दो फॉर्म देने हैं।     अगर कोई फॉर्म नहीं भर पा रहा है तो पेंसिल से भरने को कहा जाना चाहिए।     उसको ठीक करके वापस पेन से भरना चाहिए। जरूरी है कि बीएलओ दो फॉर्म दे।  

जनगणना-2027 से पहले हरियाणा में फील्ड अभ्यास शुरू, डिजिटल सिस्टम की होगी जांच

 चंडीगढ़  भारत की जनगणना-2027 की तैयारियों के तहत हरियाणा सरकार ने राज्य में जनसंख्या गणना के प्री-टेस्ट (पूर्व परीक्षण) की प्रक्रिया शुरू कर दी है। राज्य सरकार ने इसके लिए चयनित क्षेत्रों को अधिसूचित कर दिया है, जहां छह से 18 जुलाई तक फील्ड अभ्यास कराया जाएगा। इससे पहले एक से पांच जुलाई तक पात्र नागरिकों को डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से स्वयं अपना विवरण दर्ज कराने (सेल्फ-एन्यूमरेशन) का अवसर दिया गया था। यह अभ्यास देशभर में होने वाली जनगणना-2027 की तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तायुक्त एवं हरियाणा जनगणना-2027 की नोडल अधिकारी डा. सुमिता मिश्रा ने बताया कि प्री-टेस्ट का उद्देश्य जनगणना की पूरी प्रक्रिया को अधिक सटीक, सुचारू और प्रभावी बनाना है। संभावित चुनौतियों की पहचान कर होगा समाधान इस दौरान डिजिटल डाटा संग्रह प्रणाली, फील्ड संचालन, प्रगणकों की कार्यप्रणाली तथा तकनीकी व्यवस्थाओं की व्यवहारिक जांच की जाएगी, ताकि वास्तविक जनगणना से पहले संभावित चुनौतियों की पहचान कर उनका समाधान किया जा सके। उन्होंने बताया कि फील्ड अभ्यास पूरा होने के बाद 19 और 20 जुलाई को पुनरीक्षण (रिविजनल राउंड) आयोजित किया जाएगा। इसमें प्री-टेस्ट के दौरान एकत्रित आंकड़ों का सत्यापन, अद्यतन और अंतिम पुष्टि की जाएगी। मिश्रा ने चयनित क्षेत्रों के लोगों से इस अभ्यास में सक्रिय भागीदारी करने और प्रगणकों को पूरा सहयोग देने की अपील की।

झारखंड में सामान्य से 50% कम बारिश, खेती और जलाशयों पर गहराया संकट

रांची झारखंड में अलनीनो का असर गहराता जा रहा है. बीते साल राज्य में मॉनसून बेहतर था. पिछले साल अब तक राज्य में 417 मिमी बारिश हो गई थी. इस वर्ष अब तक मात्र 129 मिमी ही बारिश हुई है. राज्य में कम बारिश का असर खेती-बारी के साथ-साथ जलाशयों में भी दिख रहा है. बीते साल इस समय से खरीफ में करीब 31 फीसदी खेतों में रोपा हो गया था. इस वर्ष अब तक जिलों में रोपा भी शुरू नहीं हो पाया है. विभागीय मंत्री हर 15 दिनों में खरीफ खेती की तैयारी की समीक्षा कर रही है. रांची में 205, गढ़वा जिले में सिर्फ 18 मिमी बारिश बीते साल रांची और पश्चिम सिंहभूम में जुलाई के पहले सप्ताह तक 600 मिमी से अधिक बारिश हो गयी थी. इस वर्ष रांची में अब तक 205 मिमी बारिश हुई है. वहीं, पश्चिम सिंहभूम में अब तक मात्र 136 मिमी ही बारिश हुई है. इस वर्ष तो गढ़वा में मात्र 18 मिमी ही बारिश हुई है. वहीं, इस वर्ष राज्य में सामान्य से भी करीब 45 मिमी बारिश हुई थी. राज्य के एक भी जिले में सामान्य बारिश नहीं हुई है. सभी जिलों की स्थिति खराब है. झारखंड में बारिश की कमी से धान की रोपाई हुई कम बीते साल (2025) में जुलाई के पहले सप्ताह में 95 हजार हेक्टेयर में धान लग गया था. इस वर्ष राज्य के अधिसंख्य जिलों में अब तक धान लगना चालू भी नहीं हुआ है. अब तक मात्र तीन हजार हेक्टेयर में ही धान लग पाया है. यह संताल परगना के जिले हैं. कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार 2025 में दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल में 70 हजार हेक्टेयर में धान का रोपा जुलाई के पहले सप्ताह में ही हो गया था. कोल्हान में भी करीब 14 हजार हेक्टेयर में धान लग गया था. क्या कहना है मंत्री का ? कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा है कि अलनीनो के कारण झारखंड में सामान्य से लगभग 50 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गयी है. यह चिंता का विषय है. हालांकि सरकार ने समय रहते सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. झारखंड देश का पहला राज्य है, जिसने संभावित सुखाड़ को देखते हुए सबसे पहले अपना कंटिन्जेसी प्लान केंद्र सरकार को उपलब्ध कराया है.

हरियाणा में भाजपा का शक्ति प्रदर्शन! अंबाला पहुंचे CM नायब सैनी, नड्डा और डॉ. अर्चना का भव्य स्वागत

अम्बाला. अम्बाला छावनी रेलवे स्टेशन पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा तथा भाजपा हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता के अम्बाला आगमन पर उनका पूर्व मंत्री असीम गोयल ने स्वागत एवं अभिनंदन किया। गोयल ने सभी वरिष्ठ नेताओं का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया और उनके साथ सौहार्दपूर्ण मुलाकात की। उन्होंने कहा कि प्रदेश के शीर्ष नेतृत्व का अम्बाला आगमन कार्यकर्ताओं के लिए उत्साहवर्धक है तथा इससे संगठन को और अधिक मजबूती मिलेगी। रेलवे स्टेशन पर भाजपा कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों में भी नेताओं के आगमन को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला।

बिहार के बड़े पुलों से गुजरना होगा महंगा, 94 पुलों पर टोल वसूली की तैयारी

पटना बिहार मं अब 250 मीटर से अधिक लंबे पुलों से गुजरने पर टोल टैक्स चुकाना होगा। जी हां, सरकार ने इसके लिए सर्वेे का काम शुरू भी कर दिया है। दरअसल सरकार स्टेट हाईवे के उन पुलों पर ही टोल टैक्स की वसूली करेगी, जो 250 मीटर से अधिक लंबे हैं। पथ निर्माण विभाग के अधीन ऐसे पुलों की संख्या 94 है। विभाग इन पुलों का सर्वे करा रहा है, जिसके बाद यह तय किया जाएगा कि इनमें किन-किन पुलों पर टोल टैक्स लिया जाएगा। पुलों की लंबाई के आधार पर टोल टैक्स की राशि तय की जाएगी। सर्वे के दौरान पुल के साथ-साथ उसके एप्रोच रोड की लंबाई भी मापी जाएगी। राज्य मंत्रिमंडल ने एक जुलाई की बैठक में राज्य की सड़कों और पुलों के बेहतर रखरखाव के लिए ‘बिहार पथ उपयोगकर्ता शुल्क (दरों का निर्धारण एवं संग्रहण) नियमावली’ को मंजूरी दी है। इसके तहत राष्ट्रीय उच्चपथ की तर्ज पर राज्य के स्वामित्व वाली सड़कों और बड़े पुलों पर भी टोल टैक्स वसूला जाएगा। छोटे वाहनों के लिए टोल की दर 1.25 रुपये प्रति किलोमीटर तय की गई है। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, हर एक पुल का अध्ययन किया जा रहा है। इसमें यह देखा जा रहा है कि कितने वाहन इन पुलों पर से रोज गुजरते हैं। इनमें कितने शहर में हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग के टोल प्लाजा से इन पुलों की दूरी कितनी है। इन सभी को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाएगा, किन-किन पुलों पर से टोल टैक्स लेना है। टोल टैक्स वसूलने की जिम्मेदारी निजी एजेंसियों को दी जाएगी। 250 मीटर से ज्यादा लंबाई वाले पुलों की संख्या गया और पटना जिले में ज्यादा हैं। पटना के आसपास ही दो बड़े पुल कच्ची दरगाह-बिदुपुर और बख्तियारपुर-ताजपुर पुल है। राज्य सरकार को सबसे अधिक राजस्व देने वाली एजेंसी को यह जिम्मेवारी मिलेगी। इसके लिए स्टेट हाईवे और बड़े पुलों की नीलामी होगी। अधिक दबाव वाली सड़क और पुलों का चयन टोल के लिए किया जाएगा। टोल प्लाजा के समीप रहने वालों को पथकर में रियायत देगी राज्य सरकार विभागीय पदाधिकारी के मुताबिक, भविष्य में सड़कों का रख-रखाव और बेहतरीन ढंग से हो, नई-नई सड़कें विकसित हों, इसी मकसद से टोल टैक्स वसूलने की नीति बनायी गई है। जहां भी टोल टैक्स के लिए केंद्र बनेगा, वहां के आस-पास के लोगों को इससे राहत दी जाएगी। टोल प्लाजा के 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोगों को रियायती पास जारी किये जाएंगे। नियमित दौर पर सफर करने वालों के वाहनों के लिए एकमुश्त राशि लेकर वार्षिक पास भी जारी किये जायेंगे। देश के सभी विकसित और बड़े राज्यों में उनकी अपनी टोल टैक्स की नीति लागू है। इनमें महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश आदि राज्य शामिल हैं। इन बड़े पुलों पर चुकाना होगा टोल 1. कच्चीदरगाह-बिदुपुर पुल 2.बख्तियारपुर-ताजपुर पुल 3.दरभंगा-करेह नदी पुल 4.नवगछिया- कोसी नदी पुल 5.फुलतौरा घाट-खगड़िया 6.गया-फल्गु नदी पुल 7.नालंदा – सकरी नदी पुल 8.आरा-छपरा गंगा नदी पुल 9.सहरसा में बलुआहा घाट 10.गोपालगंज और बेतिया

केंद्र ने ठुकराई ₹2.4 करोड़ की फंडिंग, अब चंडीगढ़ प्रशासन को अपने बजट से उठाना होगा खर्च

चंडीगढ़  केंद्र सरकार ने समग्र शिक्षा योजना 2026-27 के तहत चंडीगढ़ प्रशासन की स्पेशल एजुकेटर्स और क्लस्टर रिसोर्स सेंटर (CRC) कोऑर्डिनेटर्स के वेतन के लिए अतिरिक्त केंद्रीय सहायता बढ़ाने की मांग को ठुकरा दिया है।  प्रशासन ने 23 स्पेशल एजुकेटर्स के लिए प्रति शिक्षक वार्षिक सहायता 6.699 लाख रुपए से बढ़ाकर 10.5 लाख रुपए करने का प्रस्ताव भेजा था। प्रशासन का तर्क था कि वार्षिक वेतन वृद्धि, महंगाई भत्ता (DA) और एरियर के कारण खर्च बढ़ गया है। इस प्रस्ताव के अनुसार कुल 2.4 करोड़ रुपए की मांग की गई थी। हालांकि प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड (PAB) ने पुराने मानक के अनुसार ही प्रति शिक्षक 6.699 लाख रुपए मंजूर किए। इससे कुल स्वीकृत राशि करीब 1.5 करोड़ रुपए रही। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि अतिरिक्त राशि चंडीगढ़ प्रशासन अपने बजट से उपलब्ध कराए। CRC कोऑर्डिनेटर्स के लिए प्रस्ताव खारिज स्पेशल एजुकेटर्स के लिए अतिरिक्त केंद्रीय सहायता बढ़ाने का प्रस्ताव दूसरे साल खारिज हुआ है। वर्ष 2025-26 में भी प्रशासन ने प्रति शिक्षक सहायता 7.71 लाख रुपए करने की मांग की थी, लेकिन तब भी केंद्र ने 6.699 लाख रुपए के पुराने मानक को ही लागू रखा था। केंद्र ने CRC कोऑर्डिनेटर्स के वेतन बढ़ाने का प्रस्ताव भी स्वीकार नहीं किया। प्रशासन ने 20 CRC कोऑर्डिनेटर्स के लिए प्रति व्यक्ति 16.8 लाख रुपए वार्षिक सहायता के हिसाब से 3.3 करोड़ रुपए की मांग की थी। केंद्र ने केवल 1.1 करोड़ रुपए मंजूर किए। इसके तहत 15 कार्यरत कोऑर्डिनेटर्स का 12 महीने का वेतन और पांच खाली पदों के लिए नौ महीने का वेतन 48,708 रुपए प्रतिमाह की दर से स्वीकृत किया गया। एक करोड़ का फर्नीचर-कंप्यूटर ग्रांट भी नहीं मिली चंडीगढ़ प्रशासन ने 20 क्लस्टर रिसोर्स सेंटरों के लिए एक करोड़ रुपए का फर्नीचर और कंप्यूटर ग्रांट भी मांगा था, लेकिन PAB ने इसे यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि यह सहायता हर पांच साल में एक बार ही दी जाती है और वर्ष 2024-25 में पहले ही मंजूर की जा चुकी है। सभी 20 CRC के लिए रखरखाव, पढ़ाई का सामान, अन्य जरूरी खर्च, बैठक और यात्रा भत्ता तय नियमों के अनुसार मंजूर कर दिया गया है।