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पंजाब में डर का माहौल: स्कॉर्पियो सवारों की ताबड़तोड़ फायरिंग, 1 की मौत

जालंधर/चंडीगढ़  पंजाब सरकार के विभिन्न विभागों और संस्थानों से संबंधित 5 कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ उनकी मांगों पर चर्चा करने के लिए हुई कई बैठकों के दौरान, पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा, जो कर्मचारी मुद्दों पर कैबिनेट सब-कमेटी के चेयरमैन भी हैं, ने घोषणा की कि पंजाब सरकार की ओर से आज ‘मेटरनिटी बेनिफिट्स एक्ट, 1961’ के अनुसार आशा और आशा फैसिलिटेटरों को मातृत्व अवकाश का लाभ देने के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। ‘आशा वर्कर ते फैसिलिटेटर यूनियन’ को बधाई देते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि इस नए नोटिफिकेशन के तहत, आशा और आशा फैसिलिटेटर मातृत्व अवकाश के दौरान निश्चित मासिक मानभत्ता प्राप्त करने के योग्य होंगे। इसके अतिरिक्त, भविष्य में ‘मेटरनिटी बैनिफिट्स एक्ट, 1961’ में होने वाले सभी संशोधन भी उन पर लागू होंगे। यूनियन ने इस लंबे समय से चली आ रही मांग को स्वीकार करने के लिए वित्त मंत्री का धन्यवाद किया। इस दौरान वित्त मंत्री ने पंजाब सचिवालय स्थित अपने कार्यालय में जंगलात वर्कर्स यूनियन, आशा वर्कर ते फैसिलिटेटर निरोल यूनियन, आदर्श स्कूल टीचिंग-नॉन टीचिंग मुलाजिम यूनियन, ई.टी.टी.-टी.ई.टी. पास अध्यापन एसोसिएशन (जय सिंह वाला), और बेरोजगार पी.एस.टी.ई.टी. पास आर्ट एंड क्राफ्ट संघर्ष यूनियन के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें कीं। उन्होंने इस अवसर पर नियमों के अनुसार जायज मांगों के जल्द समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों से विचार-विमर्श भी किया। विचार-विमर्श के दौरान, वित्त मंत्री चीमा ने संबंधित विभागों को यूनियन नेताओं द्वारा उठाई गई जाए जिन मांगों पर तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए। वित्त मंत्री ने संबंधित विभागों को यह भी निर्देश दिया कि वे वित्त विभाग से संबंधित मांगों के लिए प्रस्ताव तैयार कर तुरंत विचार और आवश्यक कार्रवाई हेतु वित्त विभाग को भेजें। कर्मचारियों की चिंताओं को हल करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, वित्त मंत्री चीमा ने यूनियनों को आश्वस्त किया कि बातचीत जारी रहेगी और उनके जायज मुद्दों के शीघ्र समाधान के लिए बैठकें होती रहेंगी।

कांग्रेस नेता राहुल पर विज का तगड़ा वार: ‘विदेश जाकर बोलना उनकी आदत’

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार में ऊर्जा व परिवहन मंत्री अनिल विज ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के कोलंबिया के ईआईए विश्वविद्यालय में दिए गए बयान पर तीखा हमला बोला है. विदेश में जाकर भारत के खिलाफ बयान देने को लेकर अनिल विज ने कहा है कि भारत मां के दो तरह के लाल हैं, एक विदेश में भारत का नाम रौशन करते हैं और एक वो हैं जो विदेशों में भारत का नाम डुबोते हैं. राहुल गांधी ने कोलंबिया के ईआईए विश्वविद्यालय में एक कार्यक्रम में कहा था कि लोकतंत्र पर हमला भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा है. राहुल के इस बयान पर अब अनिल विज ने कड़ी प्रतिक्रिया दी. अंबाला में मीडिया से बात करते हुए विज ने कहा कि विदेशों में जाकर भारत के खिलाफ बोलना राहुल गांधी जी की आदत है. उन्होंने कहा कि भारत मां के दो तरह के लाल है, एक वो है जो विदेशों में जाकर भारत का नाम रोशन करते है और एक वो है जो विदेशों में जाकर भारत का नाम डुबोने की कोशिश करते हैं. उन्होंने कहा कि अब फैसला लोगों को करना है कि कौन किस तरह का लाल है, प्रजातंत्र में तो फैसला लोगों को ही होता है. दरअसल, राहुल गांधी ने कोलंबिया की EIA यूनिवर्सिटी में ‘द फ्यूचर इज टुडे’ कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते बीजेपी और संघ पर हमला बोला था. उन्होंने कहा था कि भारत में लोकतंत्र पर हमले हो रहे हैं. ऐसा होना देश के लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा है. इससे देश में संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है और विपक्ष की आवाज को दबाया जा रहा है. भारत की ताकत उसकी विविधता और लोकतंत्र है, लेकिन वर्तमान हालात ऐसे हैं कि इन मूल्यों पर खतरा मंडराने लगा है. राहुल ने बीजेपी-संघ पर बोला था हमला इसके अलावा राहुल गांधी ने कार्यक्रम में बीजेपी और संघ और विदेश मंत्री एस जयशंकर पर भी हमला बोला था. उन्होंने कहा था कि संघ और बीजेपी की विचारधारा के मूल में कायरता है. वहीं, विदेश मंत्री को लेकर उन्होंने कहा था कि उनके बयान पर एक नजर डाले तो उन्होंने कहा था कि चीन हमसे कहीं ज्यादा ताकतवर है. हम उससे कैसे लड़ सकते हैं? इस विचारधारा के मूल में कायरता है. बीजेपी ने भी राहुल पर बोला हमला राहुल गांधी के बयान पर बीजेपी ने भी जमकर हमला बोला. बीजेपी ने कहा कि राहुल गांधी विदेश में बैठकर भारत की बदनामी कर रहे हैं. बीजेपी ने सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि 140 साल पुरानी पार्टी पर 100 साल से एक ही परिवार का आधिपत्य रखने वाले कांग्रेस के पतन और सत्ता नहीं मिलने के बदहवासी में अपनी आदत के अनुरूप विदेश की धरती से एक और आपत्तिजनक बयान दिए हैं. ये कोई आश्चर्यजनक नहीं है.

दवाओं की गुणवत्ता पर कार्रवाई: राजस्थान में कायसन फार्मा की सप्लाई पर रोक, ड्रग कंट्रोलर सस्पेंड

जयपुर राजस्थान सरकार ने कफ सिरप विवाद के बाद बड़ा कदम उठाते हुए राज्य ड्रग कंट्रोलर राजाराम शर्मा को निलंबित कर दिया है और जयपुर स्थित कायसन फार्मा द्वारा बनाई गई सभी 19 दवाओं का वितरण तत्काल प्रभाव से रोक दिया है। यह निर्णय तब लिया गया है जब मध्यप्रदेश और राजस्थान में कथित रूप से दूषित कफ सिरप से बच्चों की मौतों की खबरें आईं। स्वास्थ्य और चिकित्सा विभाग ने कहा कि दवा मानक तय करने की प्रक्रिया में कथित रूप से अनियमितता पाए जाने के कारण ड्रग कंट्रोलर को निलंबित किया गया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मामले की गहन जांच के निर्देश दिए हैं। इसके तहत एक विशेषज्ञ समिति गठित की जाएगी। '5 साल से बड़े बच्चों को ही यह दवा दी जाए' चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह ने भी मामले पर संज्ञान लेते हुए आमजनहित में जांच और रोकथाम के उपाय सुनिश्चित करने को कहा था। विभाग ने एडवाइजरी जारी कर डेक्सट्रोमैथोरपन दवा के इस्तेमाल को लेकर सख्ती बरती है। प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि केंद्र सरकार पहले ही 2021 में 4 साल से छोटे बच्चों को यह दवा नहीं देने की एडवाइजरी जारी कर चुकी है। अब ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया ने दोबारा स्पष्ट किया है कि सामान्यत: 5 साल से बड़े बच्चों को ही यह दवा दी जाए और 2 साल से छोटे बच्चों को किसी भी स्थिति में यह दवा नहीं दी जानी चाहिए। इसके अलावा, बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए हानिकारक दवाओं पर चेतावनी अंकित करने की कार्यवाही भी शुरू कर दी गई है। वहीं सीओपीडी जैसी गंभीर बीमारियों में उपयोग की जाने वाली दवाओं की खरीद-फरोख्त और आपूर्ति पर भी कड़ी निगरानी रखी जाएगी। सभी दवाओं के वितरण पर रोक आरएमएससीएल के प्रबंध निदेशक पुखराज सेन ने बताया कि 2012 से अब तक कायसन फार्मा की दवाओं के 10 हजार 119 सैंपल जांचे गए, जिनमें से 42 सैंपल अमानक पाए गए हैं। एहतियात के तौर पर इस कंपनी की सभी दवाओं के वितरण पर रोक लगाई गई है। इस मामले में विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।

चंडीगढ़ ग्रेनेड हमले की साजिश में पाकिस्तान-अमेरिका का कनेक्शन, NIA की चार्जशीट में दावा

चंडीगढ़  राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने चंडीगढ़ सेक्टर-10 में हुए ग्रेनेड अटैक केस में एक और अहम आरोपी के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल कर दी है. इस दौरान केंद्रीय एजेंसी ने बड़ा खुलासा किया. उसने बताया है कि इस हमले की साजिश पाकिस्तान और अमेरिका से रची गई थी. यह हमला बाबर खालसा इंटरनेशनल (BKI) से जुड़े आतंकियों ने रचा था. इस मामले में गिरफ्तार पंजाब निवासी अभिजोत सिंह उर्फ बाब्बा उर्फ गोपी को चार्जशीट किया गया है. जांच में पता चला है कि यह साजिश पाकिस्तान में बैठे BKI आतंकी हरविंदर सिंह उर्फ रिंदा और अमेरिका स्थित गैंगस्टर हैप्पी पासिया ने मिलकर रची थी. पासिया ने ही भारत में लोगों की भर्ती, फंडिंग और हथियार पहुंचाने का जिम्मा उठाया था. रिंदा और पासिया दोनों को एनआईए पहले ही भगोड़ा घोषित कर चुकी है. इनके साथ ही दो गिरफ्तार आरोपी रोहन मसीह और विशाल मसीह को भी मार्च 2024 में चार्जशीट किया गया था. आर्मेनिया में हुआ था संपर्क एनआईए की जांच में सामने आया है कि दिसंबर 2023 में अभिजोत सिंह आर्मेनिया गया था, जहां उसकी मुलाकात पासिया के करीबी शमशेर शेहरा से हुई. शेहरा ने ही उसे पासिया के आतंकी गिरोह में शामिल कराया. भारत लौटने के बाद, जुलाई 2024 में अभिजोत ने टारगेट की रेकी की और अगस्त 2024 में रोहन मसीह के साथ मिलकर रिटायर्ड पुलिस अफसर की हत्या की कोशिश की. इसके लिए उसे विदेश से पैसे भी मिले. सितंबर 2024 में रोहन और विशाल ने मिलकर ग्रेनेड अटैक को अंजाम दिया. एनआईए की तलाश जारी एनआईए अब भी उन बाकी आरोपियों और सहयोगियों की तलाश में है, जिन्होंने इस हमले के लिए लॉजिस्टिक सपोर्ट और हथियार उपलब्ध कराए थे. वहीं, पुलिस का कहना कि यह हमला रिटायर्ड पुलिस अधीक्षक जसकीरत सिंह चहल को निशाना बनाकर किया गया था, जो 1986 में नकोदर में स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) थे, जब पुलिस की गोलीबारी में चार सिख प्रदर्शनकारी मारे गए थे. 11 सितंबर, 2024 के हमले से दो साल पहले तक चहल सेक्टर 10 के मकान की पहली मंजिल पर किराए पर रह रहे थे. यह मकान हिमाचल प्रदेश के एक संस्थान के रिटायर्ड प्रिंसिपल केके मल्होत्रा ​​का है.  

भावांतर योजना में पंजीयन कराने लवकुशनगर में निकाली गई जागरूकता रैली

भावांतर योजना में पंजीयन कराने लवकुशनगर में निकाली गई जागरूकता रैली जनप्रतिनिधि, व्यापारी एवं किसान हुए शामिल  लवकुशनगर     म.प्र. सरकार द्वारा किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त एवं समृद्ध बनाने के लिए भावांतर योजना प्रारंभ की गई है। जिसका फायदा सोयाबीन का उत्पादन करने वाले कृषकों को मिलेगा। कलेक्टर पार्थ जैसवाल द्वारा जिले में अधिकारियों को योजना के प्रचार प्रसार करने के निर्देश दिए गए है। इसी क्रम में एसडीएम कौशल सिंह के नेतृत्व में लवकुशनगर में किसान जागरूकता रैली निकाली गई। जिसमें किसानों से  भावांतरा योजना में पंजीयन कराने एवं योजना के लाभ की जानकारी दी गई। किसान भाई एमपी ऑनलाइन एवं सीएससी केन्द्रों से आसानी से पंजीयन करा सकते है।

ग्रीन पटाखों की नई नीति: उत्पादन की अनुमति, लेकिन बेचने पर प्रतिबंध बरकरार

नई दिल्ली  दुर्गा पूजा और नवरात्रि के बाद अब दिवाली की तैयारियां शुरू हो गई हैं. इसके साथ ही दिल्ली-एनसीआर इलाके में हरियाणा और पंजाब में जलने वाले पराली से प्रदूषण का खतरा बढ़ने लगा है. वहीं, दिवाली में जलने वाले पटाखों से होने वाले प्रदूषण को लेकर भी चिंता बनी हुई है. राष्ट्रीय राजधानी में 1 जनवरी, 2025 से पूरे वर्ष के लिए सभी प्रकार के पटाखों पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध है. इसके साथ ही राजधानी में पटाखों की बिक्री, भंडारण और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध है, लेकिन हाल में सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन पटाखा निर्माताओं को बड़ी राहत दी है. सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली सीजन से पहले दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में ग्रीन पटाखों के निर्माण की अनुमति दे दी है, लेकिन एनसीआर क्षेत्र में उनकी बिक्री पर रोक लगा दी है. सीजेआई बीआर गवई की अगुवाई वाली पीठ ने राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान (नीरी) और पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पेसो) से वैध प्रमाणन वाले निर्माताओं को उत्पादन जारी रखने की अनुमति दी है, बशर्ते वे एक वचनबद्धता प्रस्तुत करें कि दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में कोई बिक्री नहीं होगी. लेकिन इससे यह असमंजस बना हुआ है कि ग्रीन पटाखे के बनाने की अनुमति तो मिल गई है, लेकिन बिक्री नहीं होगी, तो फिर बनाने का क्या मतलब है? इसे लेकर ग्रीन पटाखों के निर्माता सवाल उठा रहे हैं. 8 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, टिकीं निगाहें सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को दिल्ली सरकार, निर्माताओं और विक्रेताओं सहित सभी हितधारकों से परामर्श करने और 8 अक्टूबर, 2025 को होने वाली अगली सुनवाई पर अदालत के समक्ष एक संतुलित नीति पेश करने का भी निर्देश दिया गया है. इससे अब लोगों की निगाहें आठ अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी हुई है.   हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली से पहले पटाखों पर केवल राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र ही नहीं, बल्कि पूरे देश में प्रतिबंध लगाने का सुझाव दिया था. एमसी मेहता मामले की सुनवाई करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने टिप्पणी की, “अगर पटाखों पर प्रतिबंध लगाना है, तो उन्हें पूरे देश में प्रतिबंधित किया जाना चाहिए…” उन्होंने कहा था कि जो भी नीति होनी चाहिए, वह अखिल भारतीय स्तर पर होनी चाहिए. हम केवल दिल्ली के लिए नीति नहीं बना सकते क्योंकि वे देश के कुलीन नागरिक हैं. मैं पिछले साल सर्दियों में अमृतसर गया था, और वहां प्रदूषण बदतर था. इससे पहले नवंबर 2024 में, दिल्ली-एनसीआर में बिगड़ती वायु गुणवत्ता के बीच भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने टिप्पणी की थी कि ‘कोई भी धर्म ऐसी किसी भी गतिविधि को बढ़ावा नहीं देता, जो प्रदूषण में योगदान दे या लोगों के स्वास्थ्य से समझौता करे. जानें दिल्ली सरकार का क्या है आदेश दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी में 1 जनवरी, 2025 से पूरे वर्ष के लिए सभी प्रकार के पटाखों पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी. पटाखों की बिक्री, भंडारण और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध है. पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 5 के तहत, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीटी) दिल्ली में सभी प्रकार के पटाखों के निर्माण, भंडारण, बिक्री और फोड़ने पर स्थायी प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए गए हैं. आदेश में आगे कहा गया है, “दिल्ली में, विशेष रूप से सर्दियों के मौसम में, गंभीर वायु प्रदूषण होता है और पार्टिकुलेट मैटर सांद्रता (पीएम 2.5 और पीएम 10) जैसे प्रदूषकों का स्तर वायु गुणवत्ता के निर्धारित मानकों से कहीं अधिक है. वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 की धारा 19 की उप-धारा (1) के अंतर्गत संपूर्ण केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली को वायु प्रदूषण नियंत्रण क्षेत्र घोषित किया गया है.”   आदेश में कहा गया है कि त्योहारों के मौसम में पटाखे जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है. इसलिए, दिल्ली सरकार ने वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के अंतर्गत 2020 से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में सभी प्रकार के पटाखों की बिक्री और फोड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है. अक्टूबर से जनवरी के महीनों के दौरान वायु गुणवत्ता में गिरावट की पिछली घटनाओं को देखते हुए, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में सभी प्रकार के पटाखों के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर प्रतिबंध है. इसके साथ ही पटाखों के फोड़ने (ऑनलाइन मार्केटिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से वितरण सहित) और उन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है.  

पीएम मोदी का युवाओं से वर्चुअल संवाद: राजद के कुशासन में बिगाड़ी बिहार की स्थिति

पटना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कुछ देर में बिहार के युवाओं के साथ ऑनलाइन संवाद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले एक कार्यक्रम होना था। लेकिन, सोने पर सुहागा हो गया कि भारत सरकार के आईटीआई के कार्यक्रम के साथ बिहार सरकार के भी कई कार्यक्रम हो गए। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार नेतृत्व में बिहार का काफी विकास हुआ है। युवा आयोग, स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड समेत कई योजना बिहार के युवाओं के बेहतर भविष्य की गारंटी है। आज बिहार के युवाओं के सशक्तिकरण का यह मेगा प्रोग्राम है। यह दिखाता है कि एनडीए सरकार बिहार के नौजवानों और महिलाओं को कितनी प्राथमिकता देती है। आज 21वीं सदी की मांग है कि हम देश की जड़ों को ध्यान में रखें। लोकल टेलेंट, लोकल स्किल, लोकल नॉलेज को तेजी से आगे बढ़ाना हमारा कर्तव्य है। यह काम देश के आईटीआई कर रहा है। बीते 11 साल में डेढ़ करोड़ से ज्यादा नौजवान अलग-अलग ट्रेडों में प्रशिक्षित हो चुकी है। सबसे बड़ी बात यह है कि इन युवाओं को उनकी स्थानीय भाषाओं में उनकी स्किल सिखाई गई है। पीएम मोदी ने कहा कि इस साल भी 10 लाख से ज्यादा छात्र ऑल इंडिया ट्रेड में शामिल हुए। इनमें से 45 टॉपर्स साथियों को मुझे सम्मानित करते का अवसर मिला। इसमें बड़ी संख्या में वो नौजवान शामिल हैं, जो ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं। इन्हें देखकर मुझे इनमें लघु भारत नजर आता है। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह आत्मनिर्भर भारत की वर्कशॉप है। साल 2014 तक हमारे देश में 10 हजार आईटीआई बने थे। लेकिन, बीते एक दशक में करीब पांच हजार नए आईटीआई बने। यानी देश आजाद होने के बाद 2014 तक 10 हजार और मोदी के आने के बाद नई पांच हजार आईटीआई बने। आज पीएम सेतु योजना का भी शुभारंभ हुआ। यह योजना दुनिया की स्किल डिमांड से भारत के युवा साथियों को जोड़ेगी। पीएम नरेंद्र मोदी ने लालू-राबड़ी राज को याद करते हुए कहा कि दो दशक पहले राजद के कुशासन ने बिहार की हालत खराब कर दी थी। शिक्षा व्यवस्था का हाल ऐसा हो गया था कि मां-बाप को अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए बाहर भेजना पड़ता था। लेकिन, जनता ने नीतीश जी के नेतृत्व में एनडीए सरकार को चुना। आज बिहार के बच्चे अपने राज्य में बेहतर शिक्षा हासिल कर रहे हैं। 'आजकल लोग जननायक शब्द की भी चोरी कह रहे हैं' पीएम मोदी ने कहा कि आज सीएम नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने युवाओं के कौशल विकास के लिए जननायक कर्पूरी ठाकुर कौशल विश्वविद्यालय की स्थापना की है। यह विवि बिहार के युवाओं के भविष्य के मील का पत्थर साबित होगा। वहीं पिछले कुछ दिनों में राहुल गांधी और तेजस्वी यादव को जननायक कहने पर तंज कसते हुए पीएम मोदी ने कहा कि बिहार के लोगों को मैं कहन चाहता हूं कि आप चौकन्ने रहिए आजकल लोग जननायक शब्द की भी चोरी कह रहे हैं। मैं बिहार के लोगों से कहूंगा कि हमारे कर्पूरी ठाकुर जी के लिए जिस जननायक शब्द का उपयोग किया गया उसकी चोरी न हो। कर्पूरी ठाकुर ने समाज में अतुलनीय योगदान दिया। पीएम मोदी ने कहा कि बिहार ने स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना को ब्याज मुक्त कर दिया है। पीएम मोदी ने कहा कि बिहार के युवाओं का सामर्थ बढ़ाने के लिए एनडीए सरकार काम कर रही है। राजद-कांग्रेस की सरकार की तुलना में एनडीए सरकार ने शिक्षा का बजट कई गुना बढ़ा दिए हैं। 'कौशल और परिश्रम का कोई विकल्प नहीं हो सकता है' पीएम मोदी ने कहा कि 2014 से पहले भारत में ग्रोथ कम थे। रोजगार भी बहुत कम थे। लेकिन, आज भारत दुनिया के टॉप तीन अर्थव्यवस्था बनने की ओर बढ़ रहा है। बड़े उद्योग से लेकर हमारे एमएसएमई में अभूतपूर्व बदलाव हुआ। मुद्रा योजना ने करोड़ों युवाओं को अपना रोजगार शुरू करने में मदद की। पीएम मोदी ने कहा कि हर चीज का विकल्प हो चुका है लेकिन कौशल और परिश्रम का कोई विकल्प नहीं हो सकता है। आप सभी युवाओं की शक्ति देश की शक्ति बनेगी।   युवाओं से संवाद करने से पहले पीएम मोदी ने देश भर के चुनिंदा टॉपर्स को सम्मानित किया। इस दौरान वह युवाओं को 62 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की योजनाओं की सौगात दी। वहीं देशभर के एक हजार सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) के विकास के लिए पीएम-सेतु योजना का शुभारंभ भी किया। पीएम मोदी के कार्यक्रम में 200 से अधिक आईटीआई जुड़े। इसमें 50 से अधिक बिहार से हैं। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री बिहार के युवाओं के लिए मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना की भी शुरुआत की। इस योजना के तहत युवाओं को दो साल तक हर महीने एक हजार रुपए की मदद दी जाएगी। इससे प्रदेश के करीब पांच लाख युवाओं को फायदा मिलेगा। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि बिहार सरकार युवाओं की शिक्षा और कौशल विकास के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रही है। आज सुबह करीब 11 बजे नई दिल्ली के विज्ञान भवन में कई योजनाओं की शुरुआत के साथ ही एक ऐतिहासिक पहल ‘पीएम-सेतु’ के शुभारंभ का सौभाग्य मिला। इससे राज्य के मेरे युवा साथियों के लिए अवसरों के कई नए द्वार खुलने वाले हैं। छात्र-छात्राओं ने दिया सरकार को धन्यवाद पीएम मोदी के संवाद कार्यक्रम में सीएम नीतीश कुमार, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी समेत बिहार के कई वरिष्ठ मंत्री और सांसद इस कार्यक्रम में जुड़े। डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने नीतीश सरकार की उपलब्धियां गिनाई। कहा कि आने समय में एक करोड़ लोगों को बिहार सरकार सरकारी नौकरी और रोजगार देगी। मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना का लाभ लेने वाली कुमारी संजना ने कहा कि इस योजना के तहत हजार रुपये प्रतिमाह मिलने से काफी लाभ मिला। इसके लिए मैं पीएम मोदी और सीएम नीतीश कुमार को धन्यवाद देता हूं। वैशाली निवासी अतुल राज ने कहा कि मैंने पटना सायंस कॉलेज से स्नातक किया है। वर्तमान में मैं सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी कर रहा हूं।मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना का लाभ मुझे मिल रहा है। इसके लिए मैं सीएम नीतीश कुमार और पीएम मोदी को धन्यवाद दे रहा हूं। सहरसा निवासी शाकिब अहमद ने कहा कि मेरी आर्थिक … Read more

MP: कुरकुरे की ज़िद में बच्चे ने लगा दी 112 पर कॉल, शिकायत की – मम्मी मारती हैं

सिंगरौली मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है, जो सुनने में जितनी मजेदार है, उतनी ही दिल को छूने वाली भी। एक छोटे से बच्चे ने अपनी मां और बहन की शिकायत करने के लिए पुलिस की इमरजेंसी नंबर 112 पर कॉल कर दिया, क्योंकि उन्होंने उसे 20 रुपये के कुरकुरे मांगने पर रस्सी से बांधकर पिटाई कर दी। बच्चे की शिकायत का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। क्या है पूरा माजरा? यह मजेदार वाकया सिंगरौली के खुटार चौकी के अंतर्गत आने वाले चितरवई कला गांव का है। मासूम बच्चे ने जब अपनी मां से 20 रुपये मांगे ताकि वह अपने पसंदीदा कुरकुरे खरीद सके, तो मां और बहन को गुस्सा आ गया। गुस्से में दोनों ने बच्चे को रस्सी से बांध दिया और उसकी पिटाई कर दी। लेकिन इस छोटे से शेर ने हार नहीं मानी और सीधे पुलिस को फोन ठोक दिया। फोन पर बच्चे की शिकायत सुनकर ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी भी हैरान रह गए। बच्चा फोन पर रोने लगा, तो पुलिस ने बड़े ही प्यार से उसे ढांढस बंधाया और जल्दी पहुंचने का वादा किया। पुलिस का दिल जीतने वाला रिस्पॉन्स शिकायत मिलते ही डायल 112 के पुलिसकर्मी उमेश विश्वकर्मा तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने बच्चे और उसकी मां को बुलाकर दोनों की काउंसलिंग की। उमेश ने मां को समझाया कि बच्चे को मारना-पीटना सही नहीं है और उसे प्यार से समझाना चाहिए। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। पुलिसकर्मी ने अपने दिलदार अंदाज में बच्चे के लिए कुरकुरे खरीदकर उसे दे दिए। बस, फिर क्या था, बच्चे के चेहरे पर मुस्कान लौट आई और यह प्यारा सा किस्सा कैमरे में कैद होकर सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। सोशल मीडिया पर छाया वीडियो इस घटना का वीडियो, जिसमें बच्चा अपनी शिकायत दर्ज कराता है और पुलिसकर्मी उसे प्यार से समझाते हैं अब इंटरनेट पर वायरल हो रहा है। लोग इस वीडियो को देखकर हंस भी रहे हैं और पुलिस की संवेदनशीलता की तारीफ भी कर रहे हैं। कोई कह रहा है, 'ये बच्चा तो बड़ा होकर कुछ बड़ा करेगा।' तो कोई पुलिस के इस प्यारे अंदाज का कायल हो गया।

छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा हुई सुलभ, छात्रों के सपनों को मिली उड़ान

रायपुर छत्तीसगढ़ एक ऐसा राज्य है जहाँ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार में शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन और विकास का सबसे बड़ा माध्यम माना जाने लगा है। शिक्षा ही वह शक्ति है जो किसी भी व्यक्ति, समाज और राज्य को नई दिशा देती है। लेकिन उच्च शिक्षा तक पहुँचना हमेशा से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए एक चुनौती रहा है। आर्थिक तंगी के कारण कई मेधावी छात्र अपनी पढ़ाई अधूरी छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इस समस्या को गहराई से समझा और समाधान के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया — मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा ऋण ब्याज अनुदान योजना। इस योजना ने हजारों छात्रों के लिए उच्च शिक्षा की राह को आसान बना दिया है। अब छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के लिए लिए गए शिक्षा ऋण पर ब्याज की चिंता नहीं करनी पड़ती, क्योंकि सरकार वह बोझ अपने ऊपर ले रही है। मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा ऋण ब्याज अनुदान योजना की पृष्ठभूमि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद प्रभावित और पिछड़े क्षेत्रों के छात्र अक्सर आर्थिक कठिनाइयों के कारण तकनीकी व व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाते थे। उच्च शिक्षा तक पहुँचने में सबसे बड़ी रुकावट महँगी फीस और शिक्षा ऋण का बोझ था। इसी समस्या के समाधान के लिए राज्य सरकार ने यह योजना शुरू की।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का मानना है कि “शिक्षा में निवेश ही सबसे बड़ा निवेश है, क्योंकि शिक्षित युवा ही राज्य और राष्ट्र का भविष्य गढ़ते हैं।” इसी सोच के तहत यह योजना लागू की गई। इस योजना के अंतर्गत अधिकतम 4 लाख रुपए तक का शिक्षा ऋण ब्याज मुक्त उपलब्ध कराया जाता है। इस योजना का लाभ लेने के लिए छात्र के परिवार की वार्षिक आय 2 लाख रुपए से अधिक नहीं होनी चाहिए। बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, जशपुर आदि नक्सल प्रभावित जिलों के छात्रों को पूर्णत: ब्याज मुक्त ऋण मिलता है।अन्य जिलों के छात्रों को केवल 1% ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जाता है। शेष ब्याज सरकार वहन करती है।बैंक द्वारा लगाए जाने वाले ब्याज की पूरी या आंशिक राशि सरकार देती है।इससे छात्रों पर सिर्फ मूलधन  चुकाने की ही बाध्यता रहती है। इस योजना में 35 तकनीकी और व्यावसायिक पाठ्यक्रम शामिल हैं। इनमें डिप्लोमा, स्नातक (ग्रेजुएशन), स्नातकोत्तर (पोस्ट ग्रेजुएशन) और पेशेवर कोर्स सम्मिलित हैं।योजना के लिए पात्र छात्रों का छत्तीसगढ़ का निवासी होना आवश्यक है। उसकी वार्षिक पारिवारिक आय 2 लाख रुपए से अधिक नहीं होनी चाहिए। छात्र को किसी मान्यता प्राप्त संस्थान में प्रवेश लेना अनिवार्य है। इस योजना के लिए राज्य के किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक / सहकारी बैंक में शिक्षा ऋण के लिए आवेदन किया जा सकता है। आवेदन पत्र के साथ आवश्यक दस्तावेज़ (निवासी प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, प्रवेश पत्र, अंकसूची, आधार कार्ड आदि) जमा करना होता है। बैंक से ऋण स्वीकृत होने के बाद छात्र को योजना का लाभ पाने के लिए उच्च शिक्षा विभाग या जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में आवेदन करना होता है। योजना के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का योगदान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस योजना को बहुत ही कुशलता से धरातल पर उताराने का काम किया है। उनके नेतृत्व में इस योजना का विस्तार इस तरह से किया गया, जिससे नक्सल प्रभावित जिलों के छात्रों को विशेष लाभ मिला।इस योजना में ऑनलाइन प्रक्रिया को सरल बनाया गया ताकि छात्रों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।बजट में बढ़ोतरी करते हुए उच्च शिक्षा विभाग के बजट में इस योजना के लिए पर्याप्त प्रावधान किया गया। इस योजना के लिए एक निगरानी तंत्र बनाया गया है जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि बैंक समय पर छात्रों को ऋण दें और ब्याज अनुदान में देरी न हो। योजना के सामाजिक और आर्थिक प्रभाव छत्तीसगढ़ के मुखिया के नेतृत्व में मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा ऋण ब्याज अनुदान योजना से गरीब और पिछड़े वर्ग के छात्र उच्च शिक्षा तक पहुँच पा रहे हैं।नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी इस योजना के पहुँचने से काफ़ी उम्मीद बढ़ी है इससे शिक्षा से जुड़ने वाले युवाओं की संख्या बढ़ी है, जिससे नक्सलवाद से लड़ाई को नई ताक़त मिल रही है। तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा लेकर युवा नौकरी और स्वरोज़गार में आगे बढ़ रहे हैं और परिवारों पर ब्याज का बोझ घटने से वे बच्चों की शिक्षा के लिए और अधिक उत्साहित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की भावी योजनाएँ छत्तीसगढ़ सरकार इस योजना को और व्यापक बनाने की तैयारी में है। इस योजना में मिलने वाले ऋण सीमा को 4 लाख रुपए से बढ़ाकर 7 लाख रुपए तक करने पर विचार किया जा रहा है। इस योजना में नॉन-प्रोफेशनल कोर्स (जैसे BA, B.Sc, B.Com) को भी शामिल करने की योजना बनाई जा रही है। डिजिटल पोर्टल पर पूरी तरह से ऑनलाइन आवेदन और स्वीकृति की सुविधा बनाई जा रही है। छात्रवृत्ति और ऋण अनुदान को जोड़कर “डबल बेनिफिट स्कीम” बनाने पर विचार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा ऋण ब्याज अनुदान योजना छत्तीसगढ़ के युवाओं के सपनों को पंख देने वाली योजना है। यह न केवल छात्रों की आर्थिक समस्याएँ हल कर रही है बल्कि राज्य को ज्ञान और कौशल की शक्ति से सशक्त भी बना रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का यह कदम शिक्षा को लोकतांत्रिक और सुलभ बनाने की दिशा में ऐतिहासिक है। आज जब कोई भी छात्र यह महसूस करता है कि उसकी पढ़ाई सिर्फ पैसे की वजह से अधूरी नहीं रहेगी, तो यह योजना अपने उद्देश्य में सफल मानी जाती है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा का उद्घाटन, जनता को किया संबोधित

जगदलपुर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अपने दो दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे पर हैं। आज वह बस्तर दशहरा के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जगदलपुर पहुंच चुके है। बस्तर दौरे की शुरुआत केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने मां दंतेश्वरी मंदिर में दर्शन कर पूजा-अर्चना की और इसके बाद स्थानीय लोगों से संवाद किया। इसके पश्चात उन्होंने मूरिया दरबार में पारंपरिक प्रतिनिधियों मांझी, चालकी और गायता से भेंट की। अब वे लालबाग मैदान में आयोजित स्वदेशी मेला पहुंचे हैं, जहां वे जनसमूह को संबोधित कर रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंच से ‘महतारी वंदन योजना’ की 20वीं किस्त के रूप में 606 करोड़ रुपये से अधिक की राशि राज्य की महिलाओं के खातों में बटन दबाकर ट्रांसफर की। उन्होंने कहा कि यह योजना छत्तीसगढ़ की मातृशक्ति को सशक्त बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। नई बस योजना की शुरुआत, 250 गांवों को जोड़ेगा मुख्यालय से इस मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा योजना को हरी झंडी दिखाकर शुरू किया, जिसके तहत 250 गांवों को मुख्यालय से जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन आसान होगा और विकास की रफ्तार तेज होगी। मां दंतेश्वरी मंदिर में किये दर्शन केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने इससे पहले मां दंतेश्वरी मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना से की। इस दौरान उन्होंने मंदिर परिसर में मौजूद आमजनों से आत्मीय संवाद किया। अमित शाह ने जनता से सीधे संवाद कर यह संदेश दिया कि अब “बस्तर में भय नहीं, विश्वास है।” उन्होंने अपने संबोधन में इस विश्वास को 31 मार्च 2026 की उस डेडलाइन से जोड़ा, जब तक देश से नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। माई दंतेश्वरी मंदिर में श्रद्धालुओं ने ‘मुंडा बजा’ गाकर किया स्वागत मंदिर पहुंचने पर श्रद्धालुओं ने बस्तर की पारंपरिक भक्ति धुन ‘मुंडा बजा’ गाकर गृह मंत्री का स्वागत किया। शाह ने मां दंतेश्वरी का विधिवत पूजन किया और बस्तर की लोक परंपराओं के प्रति सम्मान व्यक्त किया। इसके बाद उन्होंने मूरिया दरबार में मांझी, चालकी और गायता जैसे पारंपरिक प्रतिनिधियों से मुलाकात की और उन्हें संबोधित किया।