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छोटे कारोबारियों के लिए वरदान साबित हो रही पीएम स्वनिधि योजना : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

पीएम स्वनिधि योजना से देश के लाखों रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के सपनों को मिली नई उड़ान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने पीएम स्वनिधि योजना के सफलतम 6 वर्ष पूर्ण होने पर प्रधानमंत्री मोदी का माना आभार प्रदेश के 9 लाख से अधिक पथ-विक्रेता हो चुके हैं लाभांवित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के सम्मान का आधार बनी 'पीएम स्वनिधि' योजना के सफलतम 6 वर्ष पूर्ण होने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 'पीएम स्वनिधि' ने देशभर के लाखों रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के सपनों को नई उड़ान और सम्मानपूर्वक जीने का अधिकार दिलवाया है। उन्होंने कहा कि इस जनकल्याणकारी योजना से जुड़कर अब तक प्रदेश के 9 लाख से अधिक पथ-विक्रेता लाभान्वित हो चुके हैं।  

लू, आकाशीय बिजली और सर्पदंश से बचाव को लेकर एडवाइजरी जारी, लोगों से सतर्क रहने की अपील

लू-तापघात, आकाशीय बिजली एवं सर्पदंश से बचाव के लिये परामर्श जारी भोपाल  मध्यप्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, गृह विभाग, द्वारा प्रदेश में लू-तापघात, आकाशीय बिजली एवं सर्पदंश जैसी मौसमी एवं प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली जनहानि एवं दुर्घटनाओं में कमी लाने के उद्देश्य से संचार माध्यमों से जनजागरूकता करते हुए परामर्श दिया जा रहा है। सचिव (गृह) एवं समन्वयक मध्यप्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण श्रीमती कृष्णावेणी देशावतु ने बताया कि विभिन्न संचार माध्यमों के जरिए आमजन तक सुरक्षा संबंधी संदेश पहुँचाए जा रहे हैं, जिससे शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकाधिक नागरिकों को समय रहते आवश्यक जानकारी उपलब्ध हो सके। अभियान का उद्देश्य लोगों में जोखिमों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा आपदा की स्थिति में त्वरित एवं उचित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना है। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में ग्रीष्मकाल में बढ़ता तापमान लू-तापघात की स्थिति उत्पन्न कर सकता है। विशेष रूप से बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों, श्रमिकों तथा स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से ग्रसित व्यक्तियों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है। नागरिकों को पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, धूप में अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचने, हल्के एवं सूती वस्त्र पहनने तथा शरीर में जल की कमी न होने देने संबंधी आवश्यक सावधानियों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। मानसून अवधि में आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएँ अनेक बार गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बनती हैं। इस संबंध में नागरिकों को सलाह दी गई है कि मौसम में अचानक परिवर्तन, तेज गर्जना एवं बिजली की चमक को संभावित खतरे के संकेत के रूप में गंभीरता से लें। ऐसे समय में खुले स्थानों, खेतों, जलाशयों, विद्युत खंभों तथा बड़े वृक्षों के नीचे रुकने से बचें तथा सुरक्षित भवनों में शरण लें। नागरिकों को आकाशीय बिजली संबंधी पूर्व चेतावनी प्राप्त करने के लिए “दामिनी” मोबाइल ऐप के उपयोग के लिये भी प्रेरित किया जा रहा है। किसानों एवं पशुपालकों को विशेष सतर्कता बरतने तथा पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर रखने की सलाह दी गई है। वर्षा ऋतु के दौरान सर्पदंश की घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है। जलभराव एवं प्राकृतिक आवास प्रभावित होने के कारण साँप मानव बस्तियों के समीप आ सकते हैं। ऐसी परिस्थितियों में घर एवं आसपास स्वच्छता बनाए रखना, झाड़ियों एवं कबाड़ को हटाना, जूते एवं कपड़ों को उपयोग से पूर्व सावधानीपूर्वक जांचना तथा खेतों, जंगलों एवं जल स्रोतों के समीप अतिरिक्त सतर्कता बरतना आवश्यक है। सर्पदंश की स्थिति में प्रभावित व्यक्ति को तत्काल निकटतम स्वास्थ्य केंद्र ले जाने तथा किसी भी प्रकार के अंधविश्वास अथवा अप्रमाणित उपचार से बचने की सलाह दी गई है। मध्यप्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने नागरिकों से अपील की है कि वे मौसम विभाग एवं प्रशासन द्वारा समय-समय पर जारी चेतावनियों एवं परामर्शों का पालन करें तथा किसी भी आपात स्थिति, दुर्घटना अथवा संकट की स्थिति में तत्काल डायल-112 पर संपर्क कर सहायता प्राप्त करें। सतर्कता, जागरूकता एवं समय पर अपनाई गई सावधानियाँ जनहानि एवं दुर्घटनाओं की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसी उद्देश्य से राज्य स्तर पर निरंतर जनजागरूकता गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं।  

स्पीड पोस्ट से लेट पहुंचा आवेदन, उपभोक्ता आयोग ने डाक विभाग को ठहराया जिम्मेदार

बलौदा बाजार. स्पीड पोस्ट से भेजे गए संविदा नौकरी के एक नहीं बल्कि तीन-तीन आवेदनों को डाक विभाग समय पर नहीं पहुंचा सका. हताश-परेशान आवेदक ने उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में अर्जी दाखिल की. आयोग ने पूरा मामला सुनने के बाद डाक विभाग को सेवा में कमी का दोषी मान डाक शुल्क के साथ परिवादी को मानसिक क्षति पूर्ति राशि देने का आदेश दिया है. लवन निवासी परिवादिनी पूनम चौहान ने तीन अलग-अलग पदों पर संविदा नियुक्ति हेतु आवेदन पत्र लवन डाकघर से स्पीड पोस्ट के जरिए 12 मार्च 2025 को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जिला बलौदाबाजार -भाटापारा को भेजा था. आवेदन पत्र पहुंचने की अंतिम तिथि 17 मई 2025 थी, लेकिन समयावधि बीतने के बाद 19 मई को बंद लिफाफे में प्राप्त आवेदनों को सीएमएचओ कार्यालय ने लेने से इंकार करने हुए वापस भेज दिया. डाक विभाग की लापरवाही से परिवादिनी उक्त संविदा पदों में से एक पद में भर्ती होने का अवसर चूक गई. इस पर परिवादिनी ने समयावधि में डाक नहीं पहुंचने तथा डाक विभाग की लापरवाही के कारण मानसिक पीड़ा की क्षतिपूर्ति राशि के लिए बलौदाबाजार जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में परिवाद प्रस्तुत किया था. आयोग के अध्यक्ष रंजना दत्ता एवं सदस्यगण हरजीत सिंह चावला व शारदा सोनी ने पेश दस्तावेजों एवं संबंधित नियम आदि का सूक्ष्मता से अध्ययन कर पाया कि विरोधी पक्षकार द्वारा अनेक कारणों से डाक को तय समय पर नहीं पहुंचाया गया, जो विरोधी पक्षकार का उक्त तर्क मान्य करने योग्य नहीं है. विरोधी पक्षकार की ओर से समुचित साधनों का उपयोग न कर सेवा में कमी प्रमाणित किया है. इस पर आयोग ने उप डाकपाल लवन तथा मुख्य पोस्ट मास्टर जनरल, रायपुर को सेवा में कमी का आंशिक दोषी मानते हुए डाक के एवज में लिए शुल्क के तौर पर परिवादिनी को 123 रुपए एवं मानसिक एवं आर्थिक क्षतिपूर्ति के लिए 10,000 रुपए और वाद-व्यय के लिए 3000 रुपए प्रदाय करने का आदेश दिया है.

बेरोजगारी और नशे के मुद्दे पर युवाओं को साधने में जुटी कांग्रेस, 2027 चुनाव की तैयारी तेज

 चंडीगढ़  पंजाब निकाय चुनाव में इस बार कांग्रेस ने आप के कड़ी टक्कर देते हुए सीटों के मामले में दूसरा स्थान हासिल किया है। इन चुनावों को सभी पार्टी विधानसभा-2027 का सेमीफाइनल के तौर पर लेते हुए तैयारी में जुटी थी। पंजाब में युवाओं का वोट जीत-हार में काफी अहम भूमिका अदा करेगा। सूबे में इस समय युवाओं के बीच बेरोजगारी, नशा, पेपर लीक और क्वालिटी एजुकेशन जैसे अहम मुद्दे हैं। ऐसे में कांग्रेस ने युवाओं की नब्ज को टटोलते हुए युवा वोटर को लेकर खास मेनीफेस्ट तैयार करना शुरु कर दिया है। कांग्रेस की चुनावी टीम इस बार पहली बार वोटर और यूथ प्रोफेशनल पर खास तौर पर फोकस कर रही है। विधानसभा चुनावों में जेन-जी का वोट हार जीत का फैसला करने में अहम भूमिका निभाएगा। पंजाब में इस समय युवाओं से जुड़े मुद्दे सबसे अधिक चर्चा में हैं। विदेश भाग रहा पंजाब का यूथ पंजाब का यूथ लगातार विदेश की ओर भाग रहा है, लेकिन वहां भी अब पंजाब के युवाओं को पहले जैसे मौके नहीं मिल पा रहे हैं। कांग्रेस की ओर से जेन-जी को लेकर जल्द ही खास जागरुकता अभियान चलाया जाएगा,जिसे लेकर पार्टी की ओर से जमीनी स्तर पर तैयारियां शुरु कर दी गई हैं। युवाओं को पार्टी के साथ जोड़ने के लिए कांग्रेस का यूथ विंग खास तौर से अब कालेज और यूनिवर्सिटी स्तर के वोटर पर फोकस कर रहा है। 2022 चुनावों से ली सीख 2022 पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी ने भी यूथ वोटर के दम पर सरकार बनाई थी। पंजाब में इस समय बेरोजगारी सबसे बड़ा मुद्दा है। जिसे कांग्रेस आगामी चुनाव में भुनाने की कोशिश में है। मोहाली में आयोजित एक क्रिकेट टूर्नामेंट में पहुंचा पंजाब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने कहा कि कांग्रेस की ओर से एक प्रोग्राम तैयार किया जा रहा है जिसमें युवाओं की भागदारी सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की ओर से भी युवाओं की समस्याओं को उठाने के साथ ही उनके समाधान को लेकर काम करने के लिए कहा गया है ,इसी दिशा में अब पंजाब कांग्रेस युवाओं तक पहुंचकर उनके सुझाव लेगी और उन्हें सरकार आने पर लागू करेगी। वडिंग ने कहा कि अगले विधानसभा चुनाव में युवाओं की भागेदारी ही सबसे महत्वपूर्ण होगी और कांग्रेस हमेश से ही युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबध है। पंजाब में बेरोजगारी राष्ट्रीय औसत से दोगुणा पंजाब में बेरोजगारी का प्रतिशत राष्ट्रीय औसत से करीब दोगुणा है।15 से 29 वर्ष की उम्र में पंजाब में बेरोजगारी 17 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। जबिक राष्ट्रीय बेरोजगारी औसत का आंकड़ा 9.9 प्रतिशत है। प्रदेश में शिक्षित युवाओं को भे रोजगार नहीं मिल पा रहा है। जिसके कारण युवाओं को प्रदेश से बाहर ही नहीं विदेशों की तरफ बेहतर करियर के लिए जाना पड़ रहा है। लेकिन वहां भी पंजाब के युवाओं को बेहतर रोजगार नहीं मिल पा रहे हैं। दूसरी तरफ पंजाब में लोगों के खर्च देश में औसत खर्च से अधिक हैं। सेकेंडरी एजुकेशन का ग्राफ पंजाब में 49 प्रतिशत है,जबिक देश में यह ग्राफ 42.4 प्रतिशत है। ग्रेजुएट का प्रतिशत पंजाब में 8.7 प्रतिशत जबकि राष्ट्रीय औसत 10.8 प्रतिशत है। पोस्ट ग्रेजुएशन स्तर पर पंजाब में औसत 2.8 प्रतिशत जबकि राष्ट्रीय औसत 3.3 प्रतिशत है।

MP कैबिनेट विस्तार को दिल्ली से हरी झंडी, अगले महीने बदल सकता है कई मंत्रियों का समीकरण

भोपाल  मुख्यमंत्री मोहन यादव के दिल्ली दौरों और केंद्रीय नेतृत्व से लगातार मुलाकातों के बाद आखिरकार कैबिनेट विस्तार और फेरबदल का रास्ता साफ हो गया है। 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद बनने जा रही इस नई कैबिनेट में बड़ा उलटफेर देखने को मिलेगा। कयास लगाए जा रहे हैं कि 23 से 30 जून के बीच यह विस्तार हो सकता है। इस बड़े फेरबदल में बेहतर परफॉर्मेंस न देने वाले 5 से 6 मंत्रियों की छुट्टी की जा सकती है, जबकि 7 से 8 नए विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई जाएगी। फिलहाल मुख्यमंत्री समेत कैबिनेट की संख्या 31 है, जबकि 4 पद खाली चल रहे हैं। वरिष्ठ मंत्रियों को मिल सकती है नई जिम्मेदारी सियासी गलियारों में चर्चा है कि मोहन यादव कैबिनेट के कुछ बेहद सीनियर मंत्री मुख्यमंत्री से ज्यादा अपनी वरिष्ठता के कारण असहज महसूस कर रहे हैं। ऐसे में पूर्व राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को राज्यसभा भेजा जा सकता है, जबकि पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल को केंद्र में संगठन की कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसके अलावा, सेना की महिला अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी करने वाले जनजातीय कल्याण मंत्री विजय शाह की कुर्सी पर भी खतरा मंडरा रहा है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट कई बार सरकार को फटकार लगा चुका है। विभाग की समीक्षा रिपोर्ट के आधार पर राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार, राधा सिंह और प्रतिमा बागरी पर भी गाज गिर सकती है। मंत्रिमंडल का विस्तार और फेरबदल करना पूरी तरह से मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है। वे जब चाहें अपनी कैबिनेट का विस्तार कर सकते हैं। संगठन हमेशा सरकार के फैसलों के साथ खड़ा रहता है, क्योंकि जिसे भी जिम्मेदारी मिलेगी, उसका मुख्य काम केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को जनता तक पहुंचाना है।: अजय सिंह यादव, प्रदेश प्रवक्ता, बीजेपी इन नए चेहरों की हो सकती है एंट्री नए चेहरों की बात करें तो सागर से शैलेंद्र जैन या प्रदीप लारिया में से किसी एक को मौका मिल सकता है। बुंदेलखंड से पूर्व मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह का नाम भी रेस में आगे चल रहा है। वहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी की भी कैबिनेट में वापसी की पूरी उम्मीद है। सूत्रों के मुताबिक, इस बार केवल मंत्रियों के चेहरे ही नहीं बदलेंगे, बल्कि लगभग सभी मंत्रियों के विभागों में भी भारी फेरबदल किया जाएगा।

खतरनाक कैनाइन डिस्टेंपर बीमारी का खतरा, पेंच टाइगर रिजर्व में शुरू हुआ बड़ा वैक्सीनेशन अभियान

छिंदवाड़ा  पेंच टाइगर रिजर्व के बफर जोन से लगे गांव के पालतू और आवारा कुत्तों को पकड़कर वन और पशु विभाग के कर्मचारी इन दिनों इंजेक्शन लगाते हुए दिखाई दे रहे हैं. दरअसल कुछ दिनों पहले कान्हा टाइगर रिजर्व और दूसरे नेशनल पार्क में कैनाइन डिस्टेंपर बीमारी के इंफेक्शन देखे गए थे. जिसके बाद सुरक्षा के लिहाज ये कदम उठाए गए हैं।  छिंदवाड़ा सिवनी के 1500 कुत्तों का होगा वैक्सिनेशन पेंच टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर देव प्रसाद जे. ने बताया कि, ''वन्यजीव स्वास्थ्य की देखभाल के लिए पेंच टाइगर रिजर्व द्वारा सिवनी एवं छिंदवाड़ा जिलों के बफर क्षेत्र के गांवों में कैनाइन डिस्टेंपर की रोकथाम के लिए व्यापक टीकाकरण अभियान प्रारंभ किया गया है. इस अभियान के अंतर्गत पेंच टाइगर रिजर्व के फील्ड स्टाफ द्वारा बफर क्षेत्र के लगभग 1500 पालतू एवं आवारा कुत्तों की पहचान कर उनका टीकाकरण एवं निगरानी की कार्यवाही शुरू की गई है. टीकाकरण अभियान की शुरुआत 31 मई 2026 को सिवनी जिले के टुरिया एवं सावंगी ग्राम तथा छिंदवाड़ा जिले के कुंभपानी गांव से की गई है।  कुछ टाइगर रिजर्व में फैला इन्फेक्शन, बरती जा रही सावधानी हाल ही में कुछ टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर इंफेक्शन फैला था. जिसके बाद राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा सभी टाइगर रिजर्व को बीमारी की रोकथाम एवं कंट्रोल के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश एवं अलर्ट जारी किए गए हैं. इसी के चलते पेंच टाइगर रिजर्व प्रबंधन द्वारा यह टीकाकरण अभियान एक एहतियाती एवं सुरक्षा कदम के रूप में शुरू किया गया है, जिससे रिजर्व क्षेत्र एवं आसपास के वन्यजीवों को इंफेक्शन से सुरक्षित रखा जा सकेगा।  कैसे पहचाने कैनाइन डिस्टेंपर बीमारी पेंच टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने लोंगो से अपील की है कि यदि किसी कुत्ते में कैनाइन डिस्टेंपर रोग के लक्षण जैसे आंख, नाक अथवा मुंह से पानी का बहाव होना, असामान्य व्यवहार करना, दौरे आना, लगातार गोल-गोल घूमना या अन्य असामान्य गतिविधियां दिखाई दें, तो इसकी सूचना तत्काल वन विभाग के फील्ड स्टाफ अथवा निकटतम वन अधिकारी को दें, जिससे समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके।  बाघों के लिए खतरा है कैनाइन डिस्टेंपर इंफेक्शन पशु चिकित्सक डॉक्टर अंकित मेश्राम ने बताया कि, "यह बीमारी कुत्तों, सियार और लोमड़ियों में होने की वजह से फैलती है. जब जंगल या टाइगर रिजर्व में बाघ इन जानवरों का शिकार करके खाते हैं तो यह बीमारी बाघों में भी पहुंच जाती है. जिसकी वजह से बाघों की मौत होने की आशंका होती है. भारत में कान्हा नेशनल पार्क और राजस्थान के सरिस्का जैसे टाइगर रिजर्व में इस बीमारी से बाघों की मौत के मामले सामने आ चुके हैं. इसके बाद ही राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण यानी NTCA ने सुरक्षा के लिहाज से कदम उठाए हैं।  कैसे फैलता है कैनाइन डिस्टेंपर इंफेक्शन पशु चिकित्सक डॉक्टर अंकित मेश्राम ने बताया कि, ''यह बीमारी ज्यादातर कुत्तों से फैलती है. यह इन्फेक्शन वाली बीमारी बहुत जल्दी जानवरों में सर्कुलेट होती है जो जानवरों के लिए जानलेवा साबित होती है. जब कोई संक्रमित कुत्ता या जंगली जानवर खांसता, छींकता या भौंकता है, तो वायरस हवा में बूंदों के रूप में फैल जाते हैं. स्वस्थ कुत्ते सांस के जरिए इस वायरस को अंदर खींच लेते हैं।  इसके साथ ही संक्रमित कुत्ते के मूत्र, मल, लार, आंखों या नाक से निकलने वाली लार के संपर्क में आने से स्वस्थ कुत्ते भी संक्रमित हो सकते हैं. ये वायरस भोजन के बर्तन, पानी के कटोरे, खिलौनों और बिस्तर पर जीवित रह सकता है. यदि कोई गर्भवती फीमेल डॉगी इस वायरस से संक्रमित है, तो प्लेसेंटा के माध्यम से यह बीमारी उसके अजन्मे पिल्लों तक भी फैल सकती है। 

मोबाइल नंबर ब्लॉक करने पर हाईकोर्ट सख्त, पति की शिकायत को बताया गलत

प्रयागराज इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लखनऊ पुलिस को फटकार लगाई है। साथ ही साइबर सेल को निर्देश दिया है कि वह एक महिला के ब्लॉक किए गए मोबाइल नंबर को तुरंत बहाल करे। कोर्ट ने पुलिस की इस कार्रवाई को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए साफ किया कि राज्य की एजेंसियों की लापरवाही के कारण किसी नागरिक को इस तरह परेशान नहीं किया जा सकता। न्यूज़ वेबसाइट बार एंड बेंच के मुताबिक यह आदेश जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की डिवीजन बेंच ने महिला द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता महिला और उसके पति के बीच वैवाहिक विवाद चल रहा है। पति ने आपसी अनबन के कारण पत्नी के खिलाफ साइबर सेल में एक झूठी शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके आधार पर पुलिस ने बिना पूरी जांच किए महिला का मोबाइल नंबर ब्लॉक कर दिया। हाईकोर्ट ने पुलिस के रवैये पर जताई नाराजगी अदालत ने लखनऊ के साइबर सेल इंचार्ज द्वारा दाखिल व्यक्तिगत हलफनामे पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता और प्रतिवादी संख्या-5 (पति) के बीच स्पष्ट रूप से वैवाहिक विवाद है और शिकायत भी पति की ओर से की गई है। लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की साइबर सेल के प्रभारी अधिकारी द्वारा दाखिल व्यक्तिगत शपथपत्र में अपनाया गया रुख बेहद गैर-जिम्मेदाराना है। उन्होंने साइबर पोर्टल से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर खातों या सेवाओं को ब्लॉक, डेबिट अथवा फ्रीज करने संबंधी गृह मंत्रालय के आदेशों का हवाला दिया है। ऐसे आदेशों का दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए। बेंच ने आगे टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य की एजेंसियों की इस तरह की लापरवाही या दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई के कारण किसी भी नागरिक के अधिकारों का दमन नहीं किया जा सकता। जियो और पुलिस को एक हफ्ते का अल्टीमेटम हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की साइबर सेल के प्रभारी अधिकारी संबंधित टेलीकॉम सेवा प्रदाता, जो प्रथम दृष्टया जियो टेलीकॉम सर्विसेज लिमिटेड प्रतीत होती है। उससे संपर्क कर याचिकाकर्ता का मोबाइल नंबर तत्काल बहाल कराने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। साथ ही एक सप्ताह के भीतर इस संबंध में किए गए कार्यों का शपथ पत्र अदालत में दाखिल करें। अदालत ने महिला के पति को भी नोटिस जारी कर पूछा है कि निराधार और तुच्छ शिकायत दर्ज कराने के लिए उस पर हर्जाना क्यों न लगाया जाए। बता दें कि इस मामले में याचिकाकर्ता महिला की ओर से अधिवक्ता प्रशांत पांडेय ने पक्ष रखा था।

लाइट पॉल्यूशन का खतरा बढ़ा, भारत में 50% लोग कृत्रिम रोशनी के असर से प्रभावित

इंदौर  आर्टिफिशियल रोशनी की वजह से दुनिया का 80% हिस्सा प्रभावित है। 2014 से 2022 के बीच दुनिया में रात के समय आर्टिफिशियल रोशनी में लगभग 16% वृद्धि हुई। क्लाइमेट-टेक स्टार्टअप प्राणा एयर के मुताबिक भारत की 50% से अधिक आबादी हर रात आर्टिफिशियल रोशनी से होने वाले प्रदूषण का सामना करती है। बड़े शहरों की रातें 60 गुना ज्यादा चमकीली हो चुकी हैं। इंसानों, कीटों, जानवरों और पक्षियों पर भी इसका असर हो रहा है। इंसानों की नींद, फूल खिलने, पक्षियों के प्रजनन पर असर प्रकाश प्रदूषण पशु-पक्षियों में प्रवास, प्रजनन, घोंसला बनाने और अंडों से बच्चे निकलने जैसी कई जैविक प्रक्रियाओं को बदल देता है। कई रात्रिकालीन कीट विलुप्त हो रहे हैं। इंसानों की आंखों की रोशनी और नींद के साइकिल पर भी असर पड़ रहा है। रात में मेलाटोनिन हार्मोन का स्तर घट रहा। इससे डायबिटीज, डिप्रेशन, हार्ट डिजीज, कैंसर जैसे रोग बढ़ने का जोखिम। चेक रिपब्लिक में स्ट्रीट लाइट ऊपर दिखी तो 3 लाख जुर्माना चेक रिपब्लिक में स्ट्रीटलाइट्स को केवल जमीन पर फोकस नहीं करने पर 3 लाख रुपए से ज्यादा जुर्माना लग सकता है। फ्रांस में रात 1 बजे के बाद दुकानों, दफ्तरों की बाहरी लाइट बंद करना जरूरी। तीन हजार केल्विन से ज्यादा नहीं लगा सकते। जर्मनी में रिहायशी इलाकों में रात 10 बजे के बाद तेज रोशनी प्रतिबंधित की गई है।

यूपी पुलिस भर्ती बोर्ड का बड़ा फैसला, कलावा-मंगलसूत्र पहनकर भी दे सकेंगे एग्जाम

  लखनऊ उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने सिपाही भर्ती परीक्षा को लेकर इस बार एक बड़ा फैसला लिया है, जिससे परीक्षा देने जा रही लाखों शादीशुदा महिलाओं और अभ्यर्थियों ने राहत की सांस ली है. अक्सर परीक्षाओं में कड़े सुरक्षा नियमों के नाम पर कलावा काटने या मंगलसूत्र उतरवाने की तस्वीरें सामने आती हैं, जिससे अभ्यर्थियों को मानसिक तनाव से गुजरना पड़ता है. लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा. भर्ती बोर्ड ने साफ कर दिया है कि परीक्षा केंद्रों पर कलावा या मंगलसूत्र जैसे धार्मिक प्रतीकों को पहनने पर कोई पाबंदी नहीं होगी और चेकिंग के दौरान इन्हें जबरन हटवाया नहीं जाएगा।  स्मार्ट गैजेट्स पर 'डिजिटल' पहरा यह परीक्षा आठ जून से शुरू हो रही है. इस बार परीक्षा केंद्र में धार्मिक आस्था को सम्मान देने के साथ ही बोर्ड ने परीक्षा की शुचिता और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया है. इस बार नकल माफियाओं पर लगाम लगाने के लिए सुरक्षा एजेंसियां और भी हाईटेक हो चुकी हैं. बोर्ड ने विशेष तौर पर निर्देश दिए हैं कि 'स्मार्ट मेटा चश्मे', इलेक्ट्रॉनिक पेन और अन्य छिपे हुए स्मार्ट गैजेट्स पर कड़ी निगरानी रखी जाए. सख्ती का आलम यह होगा कि परीक्षा ड्यूटी में तैनात रहने वाले कर्मचारी और शिक्षक भी केंद्र के भीतर अपना मोबाइल फोन नहीं ले जा सकेंगे. सुरक्षा को देखते हुए एग्जाम सेंटर पर सीसीटीवी की नजरें लगी रहेंगी।  28 लाख अभ्यर्थी, 75 जिले और महापरीक्षा यह उत्तर प्रदेश की अब तक की सबसे बड़ी परीक्षाओं में से एक होने जा रही है. आगामी 8 से 10 जून के बीच होने वाली इस सिपाही भर्ती परीक्षा में 32,679 पदों के लिए प्रदेश भर से 28 लाख से अधिक अभ्यर्थी अपनी किस्मत आजमाएंगे. परीक्षा को पारदर्शी और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में कुल 1183 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहेंगे। 

UP फतह के लिए BJP का बड़ा प्लान, आधी टीम बदलने की चर्चा; कई नेताओं की छुट्टी तय?

लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव अभी भले दूर दिखाई देता हो, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उसकी तैयारी लगभग युद्धस्तर पर शुरू कर दी है। पार्टी के भीतर चल रही चर्चाओं और हालिया संगठनात्मक गतिविधियों से संकेत मिल रहे हैं कि यूपी बीजेपी में बड़ा फेरबदल होने वाला है। चर्चा यह भी है कि संगठन की लगभग आधी टीम बदली जा सकती है और ऐसे नेताओं को हटाया जा सकता है जो लंबे समय से एक साथ कई पदों पर बने हुए हैं। यह बदलाव केवल चेहरे बदलने का मामला नहीं है, बल्कि 2024 लोकसभा चुनाव में मिले झटके के बाद बीजेपी की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके जरिए वह 2027 में सत्ता की हैट्रिक लगाने की तैयारी कर रही है।  आखिर बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी? 2024 लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश बीजेपी के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक झटका साबित हुआ था। 80 सीटों वाले राज्य में बीजेपी और उसके सहयोगियों का प्रदर्शन अपेक्षा से कमजोर रहा, जबकि समाजवादी पार्टी के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन ने बड़ी बढ़त हासिल की। इसके बाद पार्टी नेतृत्व ने महसूस किया कि केवल सरकार के कामकाज के भरोसे चुनाव नहीं जीता जा सकता, संगठन को भी उतना ही मजबूत करना होगा। हालांकि बाद के उपचुनावों में बीजेपी ने वापसी की, लेकिन पार्टी नेतृत्व यह मानकर चल रहा है कि 2027 की लड़ाई कहीं ज्यादा कठिन होगी। इसी वजह से बूथ स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक संगठन की समीक्षा की जा रही है। दोहरे पदों पर बैठे नेताओं पर क्यों है नजर? बीजेपी की संगठनात्मक संस्कृति हमेशा "एक व्यक्ति, एक जिम्मेदारी" की बात करती रही है। लेकिन समय के साथ कई नेता ऐसे हो गए हैं जो संगठन और सत्ता दोनों में प्रभावशाली पदों पर बने हुए हैं। सूत्रों के अनुसार पार्टी अब ऐसे नेताओं की सूची तैयार कर रही है जो एक से अधिक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। पार्टी का मानना है कि चुनावी तैयारी के दौर में संगठन को पूरा समय देने वाले नेताओं की जरूरत होगी। ऐसे में कुछ नेताओं को संगठन से और कुछ को सरकार से हटाकर नई जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं। क्या आधी टीम बदल सकती है? हालिया रिपोर्टों में संकेत मिले हैं कि प्रदेश संगठन में 50 प्रतिशत तक बदलाव संभव है। क्षेत्रीय अध्यक्षों, मोर्चा अध्यक्षों और कई प्रमुख पदाधिकारियों को बदला जा सकता है। जिला स्तर पर इसकी शुरुआत भी दिखाई देने लगी है, जहां लगातार नए जिला अध्यक्षों की नियुक्तियां हो रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी 2027 से पहले संगठन में "एंटी-इन्कम्बेंसी" नहीं आने देना चाहती। लंबे समय से एक ही पद पर बैठे नेताओं को हटाकर नए चेहरों को मौका देना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। सभी 6 क्षेत्रीय अध्यक्ष भी बदले जा सकते हैं। ब्रज, अवध, काशी, गोरखपुर आदि क्षेत्रों के अध्यक्षों में बदलाव संभावित है। नए क्षेत्रीय अध्यक्षों को अपनी टीम खुद चुनने की छूट मिलेगी, ताकि स्थानीय स्तर पर नई ऊर्जा आए। युवा मोर्चा, महिला मोर्चा, किसान मोर्चा, OBC, SC, ST और अल्पसंख्यक मोर्चे सहित सातों मोर्चों के अध्यक्ष बदले जा सकते हैं। पंकज चौधरी के अध्यक्ष बनने के बाद करीब 70-95 जिलों में जिलाध्यक्ष बदले जा चुके हैं। गोरखपुर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी री-शफल हुआ है। यह राज्य स्तर के बदलाव की तैयारी माना जा रहा है। 61 'कठिन' सीटों पर सबसे ज्यादा फोकस बीजेपी ने 2027 के चुनावों के लिए एक खास रणनीति बनाई है। पार्टी सबसे पहले उन 61 विधानसभा सीटों पर काम कर रही है, जहां उसे 2012, 2017 और 2022 के लगातार तीन चुनावों में हार का सामना करना पड़ा है। इन 61 सीटों का भौगोलिक बंटवारा कुछ इस तरह है: इनमें से पूर्वी और पश्चिमी यूपी की 35 सीटों में से 27 सीटें 2022 में समाजवादी पार्टी (SP) ने जीती थीं। हालांकि, स्वार, रामपुर और कुंदरकी जैसे मुश्किल माने जाने वाले इलाकों में हुए उपचुनावों में जीत मिलने के बाद से बीजेपी का आत्मविश्वास काफी बढ़ा है। क्षेत्र                         कुल कठिन सीटें          प्रमुख जिले पूर्वी उत्तर प्रदेश             22                   आजमगढ़, मऊ, जौनपुर, गाजीपुर, मिर्जापुर पश्चिमी उत्तर प्रदेश         13                    सहारनपुर, मुरादाबाद, बिजनौर अन्य क्षेत्र                       26                   पूरे प्रदेश में फैली अन्य सीटें मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी बीजेपी के अध्यक्ष पंकज चौधरी ने पार्टी नेताओं को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे चुनाव प्रचार के शुरुआती चरण में इन्हीं 61 मुश्किल सीटों को प्राथमिकता दें। इनमें से पूर्वी और पश्चिमी यूपी की 35 सीटों में से 27 सीटें 2022 में समाजवादी पार्टी (SP) ने जीती थीं। हालांकि, स्वार, रामपुर और कुंदरकी जैसे मुश्किल माने जाने वाले इलाकों में हुए उपचुनावों में जीत मिलने के बाद से बीजेपी का आत्मविश्वास काफी बढ़ा है। जातीय समीकरण भी बड़ी वजह बीजेपी का सबसे बड़ा राजनीतिक संकट केवल संगठनात्मक नहीं, सामाजिक भी है। 2024 के चुनाव में समाजवादी पार्टी ने "PDA" (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के जरिए कई वर्गों में अपनी पकड़ मजबूत की थी। इसके बाद बीजेपी ने भी सामाजिक समीकरणों पर नए सिरे से काम शुरू किया है। हालिया कैबिनेट विस्तार और संगठनात्मक चर्चाओं में ओबीसी, दलित और गैर-यादव पिछड़े वर्गों को ज्यादा प्रतिनिधित्व देने पर जोर देखा गया है। योगी सरकार और संगठन में तालमेल पर फोकस बीजेपी नेतृत्व की एक बड़ी चिंता संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय भी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व के साथ हुई बैठकों के बाद कैबिनेट विस्तार और संगठनात्मक फेरबदल की चर्चाएं तेज हुई हैं। माना जा रहा है कि सरकार और संगठन के बीच जिम्मेदारियों का स्पष्ट बंटवारा किया जाएगा ताकि चुनावी तैयारियों में कोई भ्रम न रहे।