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बिना भेदभाव जरूरतमंदों तक पहुंची राहत, पांच वर्षों में 2.44 लाख लाभार्थियों को सहायता

बिना भेदभाव जरूरतमंदों तक पहुंचा मुख्यमंत्री राहत कोष का लाभ पांच साल में 2.44 लाख लाभार्थियों को मिली 4,324 करोड़ की सहायता, प्रदेश के सभी मंडलों और जिलों तक पहुंची राहत 2025-26 में 74,531 लाभार्थियों तक पहुंची मदद, पिछले पांच वर्षों में लाभार्थियों की संख्या में 4.5 गुना वृद्धि लखनऊ,   आर्थिक विपन्नता, गंभीर बीमारी और विपरीत परिस्थितियों में जरूरतमंदों के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष आर्थिक संबल का महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरा है। इस सहायता का दायरा लगातार विस्तृत हुआ है और प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बिना किसी भेदभाव समभाव से जरूरतमंदों तक राहत पहुंची है। उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक पांच पूर्ण वित्तीय वर्षों में 2,44,263 लाभार्थियों को कुल 4,324.60 करोड़ रुपये की सहायता स्वीकृत हुई। इस अवधि में वार्षिक लाभार्थियों की संख्या 16,640 से बढ़कर 74,531 हो गई, यानी करीब 4.5 गुना वृद्धि दर्ज की गई। मंडल और जिला स्तर के आंकड़े भी सहायता के व्यापक भौगोलिक विस्तार की तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। पांच साल में सहायता का दायरा बढ़ा  मुख्यमंत्री राहत कोष से सहायता पाने वाले लाभार्थियों की संख्या में पिछले वर्षों के दौरान उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2021-22 में 289.71 करोड़ रुपये की सहायता से 16,640 लाभार्थी लाभान्वित हुए थे। वर्ष 2022-23 में सहायता राशि बढ़कर 572.97 करोड़ रुपये रही और लाभार्थियों की संख्या 31,745 तक पहुंच गई। वर्ष 2023-24 में 1,008.50 करोड़ रुपये की सहायता से 54,473 लाभार्थियों को राहत मिली। वर्ष 2024-25 में सहायता राशि 1,344.94 करोड़ रुपये रही, जो पांच पूर्ण वित्तीय वर्षों में सर्वाधिक है। इसी वर्ष 66,874 लाभार्थियों को सहायता मिली और प्रति लाभार्थी औसत सहायता 2.01 लाख रुपये के उच्चतम स्तर पर रही। वर्ष 2025-26 में सहायता राशि 1,108.48 करोड़ रुपये रही, जबकि लाभार्थियों की संख्या बढ़कर 74,531 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। इस वर्ष प्रति लाभार्थी औसत सहायता 1.49 लाख रुपये रही। लाभार्थियों की संख्या में हुआ निरंतर विस्तार आंकड़ों में एक महत्वपूर्ण प्रवृत्ति यह भी सामने आती है कि सहायता राशि में वर्षवार बदलाव के बावजूद लाभार्थियों की संख्या में व्यापक वृद्धि हुई है। वर्ष 2025-26 में सहायता राशि पिछले वर्ष की तुलना में 17.6 प्रतिशत कम रही, लेकिन लाभार्थियों की संख्या 11.4 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। इससे स्पष्ट होता है कि अधिक संख्या में जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाने का क्रम लगातार जारी रहा। बिना भेदभाव सभी मंडलों तक पहुंची राहत वित्तीय वर्ष 2025-26 एवं 2026-27 के उपलब्ध रिकॉर्ड के मंडलवार विश्लेषण में लखनऊ मंडल में 19,507, गोरखपुर मंडल में 13,621, प्रयागराज मंडल में 12,019, अयोध्या मंडल में 10,427, वाराणसी में 9,364 और कानपुर में 8,433 लाभार्थियों को सहायता मिली है। देवीपाटन मंडल में 7,201, आजमगढ़ में 6,760, बस्ती में 3,740 और मिर्जापुर में 3,335 लाभार्थी दर्ज हैं। झांसी मंडल में 2,263, चित्रकूट में 1,894, आगरा में 1,617, मुरादाबाद में 1,441 तथा मेरठ में 1,308 लाभार्थी हैं। आंकड़ों से स्पष्ट है कि सहायता का वितरण प्रदेश के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में हुआ है और जरूरतमंदों तक राहत का दायरा केवल बड़े मंडलों तक सीमित नहीं रहा। छोटे जिलों से बड़े जिलों तक पहुंची सहायता जिला स्तर के आंकड़ों में लखनऊ में 7,491, प्रयागराज में 6,572, गोरखपुर में 5,463 और कानपुर नगर में 4,890 लाभार्थियों को सहायता मिली है। इसके बाद गोंडा में 3,647, आजमगढ़ में 3,417, प्रतापगढ़ में 3,240, वाराणसी में 3,220, जौनपुर में 3,219 और सीतापुर में 3,192 लाभार्थी दर्ज हैं। कुशीनगर में 3,179, देवरिया में 2,914, बाराबंकी में 2,911, रायबरेली में 2,701 और अयोध्या में 2,246 लाभार्थियों को सहायता मिली है। जिला स्तर पर उपलब्ध आंकड़ों में बड़े जिलों के साथ-साथ अपेक्षाकृत छोटे जिलों तक भी राहत पहुंचने का क्रम स्पष्ट दिखाई देता है। कम जनसंख्या वाले जिलों में भी जरूरतमंदों तक सहायता पहुंची है। यह वितरण इस बात को रेखांकित करता है कि मुख्यमंत्री राहत कोष के माध्यम से सहायता का दायरा प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों तक विस्तृत रहा है। जिला स्तर के आंकड़े भी व्यापक पहुंच और जरूरतमंदों को आर्थिक मदद उपलब्ध कराने की दिशा में जारी प्रयासों की तस्वीर सामने रखते हैं। समभाव के साथ जनकल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मुख्यमंत्री राहत कोष के आंकड़े बताते हैं कि पिछले पांच वर्षों में सहायता पाने वाले लाभार्थियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 2.44 लाख से अधिक लाभार्थियों को सहायता मिलना और प्रदेश के सभी मंडलों व जिलों तक राहत पहुंचना इस व्यवस्था की व्यापक पहुंच को रेखांकित करता है। आर्थिक संकट से जूझ रहे जरूरतमंदों को सहारा देने की यह व्यवस्था जनकल्याण और सामाजिक समभाव की दिशा में महत्वपूर्ण है। आंकड़ों में सहायता के बढ़ते दायरे के साथ यह संदेश भी स्पष्ट होता है कि जरूरतमंदों तक राहत पहुंचाने की प्रक्रिया को व्यापक बनाने पर जोर दिया गया है।

राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान प्राप्त डॉ. अर्चना शुक्ला ने बदली पढ़ाई की तस्वीर, कबाड़ से तैयार किए विज्ञान-गणित के मॉडल

भोपाल  पढ़ाई के लिए हमेशा महंगे मॉडल और नई सामग्री की जरूरत नहीं होती। जरूरत है तो सिर्फ नजरिए की। भोपाल के महात्मा गांधी हायर सेकेंडरी संदीपनी स्कूल की शिक्षिका डॉ. अर्चना शुक्ला ने स्कूल में पड़े कबाड़ को ही बच्चों की पढ़ाई का जरिया बना दिया। कहीं टूटी फॉल्स सीलिंग की टाइल्स विज्ञान के मॉडल में बदल गईं तो कहीं पुराने टायर और खाली पड़ी बेंच से गणित का ऐसा मॉडल तैयार हुआ, जो बच्चों के लिए पढ़ाई से ज्यादा खेल बन गया। डॉ. अर्चना शुक्ला को 2026 का राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान भी दिया गया है। उनका मानना है कि जब विद्यार्थी किसी चीज को सिर्फ पढ़ता नहीं, बल्कि उसे बनाता, छूता, रंगता और उसके साथ प्रयोग करता है, तो सीखना उसके लिए बोझ नहीं रहता। टूटी टाइल्स फेंकी नहीं, विज्ञान की प्रयोगशाला बना दी बारिश के दौरान एक खाली कक्षा की फॉल्स सीलिंग की टाइल्स टूट गई थीं। ये टाइल्स कबाड़ में रखी थीं। डॉ. अर्चना ने इन्हें फेंकने के बजाय बच्चों की रचनात्मकता से जोड़ दिया। हल्की और बोर्ड जैसी इन टाइल्स पर विद्यार्थियों ने रंगों के जरिए विज्ञान से जुड़े चित्र और मॉडल तैयार किए। इसका मकसद सिर्फ कबाड़ का इस्तेमाल करना नहीं था। बच्चों को परीक्षा में कॉपी पर बनाए जाने वाले चित्रों को रटने के बजाय उन्हें रंगों और रचनात्मक तरीके से तैयार करने का मौका दिया गया। इससे एक तरफ बेकार सामान का इस्तेमाल हुआ और दूसरी तरफ बच्चों की कल्पनाशक्ति भी पढ़ाई से जुड़ गई। मिट्टी और रंगों से विज्ञान, याद करने का तरीका बदला डॉ. अर्चना के अनुसार, जब बच्चा क्ले या मिट्टी से किसी वैज्ञानिक संरचना को खुद बनाता है, तो वह सिर्फ उसे देखता नहीं है। उसे छूता है, आकार देता है, रंग चुनता है और अलग-अलग हिस्सों को समझता है। यानी सीखने में कई तरह की संवेदी गतिविधियां एक साथ जुड़ती हैं। यही वजह है कि विज्ञान जैसे विषय को भी कला से जोड़ा जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में कला समेकित शिक्षा पर जोर दिए जाने के साथ स्कूल में इस तरीके को प्रयोग के रूप में अपनाया गया है। पुराने टायर और बेंच से बना 'गणित का खेल सबसे दिलचस्प प्रयोग गणित को लेकर किया गया। स्कूल में खाली पड़ी बेंच और बच्चों की ओर से लाए गए पुराने टायरों का इस्तेमाल कर ऐसा मॉडल तैयार किया गया, जिसमें जोड़, घटाव, गुणा और भाग जैसे सवालों को खेल से जोड़ा गया। यह मॉडल स्कूल में बाहर रखा जाता है। सुबह बच्चे आते हैं तो उस पर गणित का सवाल लगा मिलता है। बच्चे उत्सुकता से उसे हल करते हैं और अगली बार के लिए नया सवाल लगा देते हैं। यानी जिस गणित से कई बच्चों को डर लगता है, वही अब उनके लिए रोज का खेल बन गया है। छोटी कक्षाओं की समस्या खोजकर बड़े बच्चों ने बनाया समाधान डॉ. अर्चना का तरीका सिर्फ मॉडल बनाने तक सीमित नहीं है। स्कूल में परियोजना आधारित और समस्या आधारित शिक्षण पर भी काम किया जाता है। विद्यार्थियों को कहा जाता है कि वे छोटी कक्षाओं में जाकर देखें कि वहां बच्चों को किस विषय में परेशानी आती है। जब विद्यार्थियों ने पाया कि छोटी कक्षाओं के बच्चों को गणित के सवालों में दिक्कत होती है, तो उन्होंने समस्या का समाधान खोजने की कोशिश की। नतीजा पुराने टायर, खाली बेंच और दूसरे अनुपयोगी सामान से तैयार गणित का मॉडल रहा। यानी यहां बच्चे सिर्फ यह नहीं सीख रहे कि सवाल कैसे हल करना है, बल्कि यह भी सीख रहे हैं कि किसी समस्या का समाधान कैसे खोजा जाता है। अभाव को बनाया रचनात्मकता का मौका डॉ. अर्चना शुक्ला कहती हैं कि उनका उद्देश्य यही रहता है कि विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई बोझ न बने और वे चीजों को आसानी से याद कर सकें। उनके मुताबिक स्कूल में संसाधनों की कमी को भी रचनात्मकता में बदला जा सकता है। इसी सोच का नतीजा है कि कबाड़ यहां कचरा नहीं, पढ़ाई की सामग्री है; टायर खेल का हिस्सा नहीं, गणित का मॉडल हैं और टूटी टाइल्स बेकार सामान नहीं, विज्ञान समझाने का माध्यम बन गई हैं।  

बड़ा गणपति फ्लाईओवर का काम फिर रफ्तार में, आधी बाधा हटी; दिसंबर तक पूरी लाइन शिफ्ट करने का लक्ष्य

इंदौर  लंबे समय से बाधाओं में उलझे बड़ा गणपति फ्लाईओवर के निर्माण की राह अगले वर्ष तक ही साफ हो पाएगी। चौराहे पर आ रही सीवरेज और पानी की लाइन को हटाने का काम जारी है। फ्लाईओवर में सबसे बड़ी अड़चन बन रही 500 मीटर लंबी सीवरेज लाइन शिफ्टिंग के लिए अब तक 250 मीटर की नई लाइन डाली जा चुकी है। शेष 250 मीटर लंबी लाइन डालने का काम दिसंबर तक पूरा होगा। ऐसे में नए साल से फ्लाईओवर का निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है। इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) द्वारा बड़ा गणपति चौराहा पर बनाए जा रहे फ्लाईओवर का निर्माण एक साल से अधिक की देरी के बावजूद शुरू नहीं हो पाया है। चौराहे पर आ रही लाइन को हटाने में देरी के कारण सिंहस्थ से पहले फ्लाईओवर का निर्माण पूरा करना चुनौती होगा। सीवरेज लाइन हटने के बाद चौराहे पर ही 100 से 150 मीटर लंबी पानी की लाइन भी हटाई जाएगी। दोनों लाइनें हटने के बाद ही फ्लाईओवर के फाउंडेशन का काम शुरू किया जा सकेगा। बड़ा गणपति चौराहा पर 600 मीटर लंबा और 12 मीटर चौड़ा फ्लाईओवर बनाया जाना है। यह अंतिम चौराहे की तरफ से शुरू होकर जिंसी की ओर उतरेगा। इसकी लागत करीब 24 करोड़ रुपये है। हालांकि चौराहे पर आ रही ड्रेनेज और पानी की लाइन को हटाने में ही करीब 10 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च हो रहे हैं। आइडीए यह राशि नगर निगम को हस्तांतरित कर चुका है। पिलर की डिजाइन में कर रहे बदलाव फ्लाईओवर की राह में सिर्फ यूटिलिटी लाइनें ही नहीं, बल्कि मेट्रो का राइट आफ वे भी नई चुनौती बन गया है। राइट आफ वे की चौड़ाई बढ़ने के कारण फ्लाईओवर के पिलर की डिजाइन नए सिरे से तैयार की जा रही है। रिवाइज डिजाइन इसी महीने पूरा होने की उम्मीद है। डिजाइन में बदलाव के कारण करीब 1.36 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा, जिसकी स्वीकृति आइडीए बोर्ड बैठक में दी जा चुकी है। करीब एक लाख वाहनों की राह होगी आसान आइडीए के सर्वे में बड़ा गणपति चौराहे पर पीक आवर्स में सबसे ज्यादा ट्रैफिक दबाव सामने आया है। एयरपोर्ट रोड से आने वाले वाहनों का भी यहां भारी दबाव रहता है। फ्लाईओवर बनने के बाद एक लाख से अधिक वाहनों को रोजाना राहत मिलने की उम्मीद है। लंबे समय से अटकी परियोजना में अब पहले जमीन के नीचे की बाधाएं हटाई जा रही हैं, उसके बाद ही ऊपर फ्लाईओवर खड़ा करने का काम शुरू होगा।

पंजाब चुनाव से पहले ‘नशे’ पर सियासी घमासान, पार्टियों की रणनीति क्या? जानें पूरा प्लान

 चंडीगढ़ पंजाब में विधानसभा चुनावों की तैयारी तेज हो गई है। 17 सितंबर को मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने में मात्र छह माह का समय रह जाएगा और सितंबर माह का यही वह पखवाड़ा है, जब न सिर्फ दोनों राष्ट्रीय स्तर की प्रमुख पार्टियां, बल्कि पंजाब आधारित शिरोमणि अकाली दल भी अपनी राजनीतिक गतिविधियों को और रफ्तार देने की योजनाएं घोषित कर चुके हैं। सत्तासीन आम आदमी पार्टी भी चुनावी मोड में शिफ्ट हो चुकी है और न सिर्फ पार्टी में संगठनात्मक नियुक्तियां की जा रही हैं, बल्कि पंजाब में आम आदमी पार्टी के चेहरे मुख्यमंत्री भगवंत मान विभिन्न विधानसभा हलकों में कार्यक्रमों का आगाज कर चुके हैं। 'नशा' रहेगा सभी चुनावी पार्टियों का मुद्दा चुनावी तैयारियों के दौरान ही करीब सभी राजनीतिक पार्टियों के प्रचार का केंद्र बिंदु नशे का मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है। आम आदमी पार्टी पंजाब की सत्ता में आने के बाद से ही लगातार पंजाब में युद्ध नशे के विरुद्ध नाम से अभियान चला रही है और समय-समय पर इसके आंकड़े पेश करके अपने द्वारा किए जा रहे काम का क्रेडिट ले रही है। 18 सितंबर को BJP करेगी चुनावी शंखनाद राष्ट्रीय फलक पर बात करें तो बीते दिनों गृहमंत्री अमित शाह ने घोषणा की थी कि नक्सलवाद का खात्मा करने के बाद अब उनका मिशन देश में नशे की समस्या को खत्म करना है और भाजपा द्वारा पंजाब में अपने चुनावी शंखनाद के लिए 18 सितंबर से राज्य के सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों से गुजरने वाली चार हजार किलोमीटर लंबी नशा विरोधी जागरूकता के लिए यात्राओं व रैलियों का आयोजन करने की घोषणा की जा चुकी है। सचिन पायलट ने भी खोला मोर्चा वहीं, कांग्रेस के नवनियुक्त प्रभारी सचिन पायलट अपना पहला पंजाब दौरा 15 सितंबर को शुरू करने जा रहे हैं और दौरे के पहले ही दिन नशे के मामले में आत्महत्या करने वाले तूरबंजारा निवासी गुलजार सिंह को मुद्दा बनाकर न सिर्फ रोष मार्च व प्रदर्शन का एलान किया है, बल्कि कैबिनेट मंत्री हरपाल चीमा की रिहायश का घेराव करने का भी प्रोग्राम दिया गया है। कांग्रेस नेता सचिन पायलट अपने पहले ही दिन से सभी नेताओं को एक मंच पर दिखाकर कांग्रेस की एकजुटता का भी प्रदर्शन कराएंगे। खास बात यह है कि पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने भी खुद व अपने सभी समर्थकों के साथ इस प्रदर्शन में शामिल होने की घोषणा करके एकजुटता का संकेत दे दिया है।

मैहर के पोड़ी केंद्र में किसानों की भीड़, 53 लाख से ज्यादा मछली के बीज बिके; 2027 तक 2.50 करोड़ का लक्ष्य

मैहर  एशिया के सबसे बड़े मैहर जिले में स्थित पोड़ी मत्स्य बीज सेंटर में इस वर्ष अच्छे परिणाम सामने हैं. कलेक्टर मैहर विदिशा मुखर्जी के निर्देशन में जिले में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए शासकीय मत्स्य उत्पादन केंद्र पोड़ी में मछली बीज उत्पादन एवं वितरण का कार्य निरंतर किया जा रहा है. जिसका असर इस बार देखने को मिला है और 53 लाख से अधिक मछली के बीज की बिक्री की गई है।  पोड़ी में अलग अलग प्रकार के मिलते हैं मत्स्य बीज मैहर जिले के पोड़ी केंद्र पर इस वर्ष मुख्य रूप से कतला, रोहू एवं मृगल प्रजाति के मछली बीज (मिक्स फ्राई) का उत्पादन कर मत्स्य पालकों को उपलब्ध कराया जा रहा है. इन क्षेत्रों पर इस तरह के बीजों की बिक्री ज्यादा देखी जा रही है. जिसके फल स्वरूप आस पास के लोगों द्वारा इस प्रजाति की खेती ज्यादा की जाती है मैहर से लगे हुए कई जिलों में इसकी खेती चल रही है इसके साथ साथ उत्पादन भी चल रहा है।  2.50 करोड़ का लक्ष्य पोड़ी में स्थित शासकीय मत्स्य उत्पादन केंद्र में वर्ष 2026-27 के लिए 2.50 करोड़ मत्स्य बीज की बिक्री का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. मत्स्य बीज की बिक्री अगस्त 2026 के अंतिम सप्ताह से प्रारंभ की गई है. अब तक लगभग 53 लाख 28 हजार मत्स्य बीज की बिक्री की जा चुकी है. विभाग द्वारा निर्धारित लक्ष्य को मार्च 2027 तक शत-प्रतिशत पूर्ण किए जाने की संभावना है. वर्ष 2025-26 में केंद्र को 2.25 करोड़ मत्स्य बीज बिक्री का लक्ष्य निर्धारित गया था।  सहायक संचालक मत्स्य तरुण कांत पटेल एवं सहायक मत्स्य अधिकारी स्वरांजन सिंह बघेल ने बताया कि, ''केंद्र पर तैयार किए जा रहे मिक्स फ्राई में मुख्य रूप से कतला, रोहू एवं मृगल प्रजाति के मछली बीज शामिल हैं. इन बीजों को निर्धारित शासकीय दर पर मत्स्य पालकों को उपलब्ध कराया जाता है. किसान इन मछली बीजों को खरीदकर अपने तालाबों एवं पोखरों में संचय करते हैं।  अलग-अलग जिले से कृषक पहुंच रहे मैहर शासकीय मत्स्य उत्पादन केंद्र पोड़ी की मछली बीज की मांग जिले के साथ-साथ प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों सागर, दमोह, पन्ना, रीवा, मऊगंज एवं जबलपुर तक है. यहां से मत्स्य पालक एवं खरीदार मछली बीज क्रय करने के लिए केंद्र पहुंच रहे हैं. जहां उन्हें बेहतर व्यवस्था के साथ मत्स्य बीज उपलब्ध कराया जा रहा है. खरीदार द्वारा चालान के माध्यम से राशि का भुगतान किया जाता है. बिक्री के समय मत्स्य बीज अंतरण प्रमाण-पत्र की पर्ची भी जारी की जाती है, जिसमें मछली बीज की प्रजाति, संख्या, निर्धारित दर एवं कुल राशि का विवरण दर्ज रहता है. इस व्यवस्था के माध्यम से मत्स्य बीज के वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाती है जिससे कि आसानी से किसानों को मत्स्य बीज उपलब्ध हो। 

पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी के बीच शक्ति प्रदर्शन, चन्नी ने किया शामिल होने का ऐलान; पायलट करेंगे नेतृत्व

चंडीगढ़  पंजाब कांग्रेस के नए प्रभारी सचिन पायलट की अगुवाई में आज मंगलवार को चंडीगढ़ में होने वाले प्रदर्शन को लेकर पार्टी ने पूरी ताकत झोंक दी है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर स्पष्ट किया है कि वह मंगलवार को होने वाले प्रदर्शन में शामिल होंगे। उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों से भी बड़ी संख्या में प्रदर्शन में पहुंचने की अपील की है। कांग्रेस की ओर से आज मंगलवार सुबह 11 बजे सेक्टर-15 स्थित पंजाब कांग्रेस कार्यालय से आम आदमी पार्टी के मंत्री हरपाल सिंह चीमा के आवास की ओर मार्च निकाला जाएगा। कांग्रेस गुलजार सिंह की मौत के मामले में चीमा को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने और उनकी तत्काल गिरफ्तारी की मांग कर रही है। पार्टी का आरोप है कि गुलजार सिंह ने मंत्री से पंजाब में बढ़ते नशे के मुद्दे पर सवाल किया था और इसके बाद उन्हें मानसिक दबाव व उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। एक साथ दिखेंगे पंजाब कांग्रेस के नेता इस प्रदर्शन की सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक तस्वीर लंबे समय बाद देखने को मिल सकती है। चरणजीत सिंह चन्नी और पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग लंबे समय बाद एक ही मंच पर नजर आएंगे। इसके अलावा पार्टी के नए प्रभारी सचिन पायलट, प्रताप सिंह बाजवा, सुखजिंदर सिंह रंधावा समेत कांग्रेस के कई बड़े नेता प्रदर्शन में शामिल होंगे। पायलट ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से प्रदर्शन की जानकारी साझा करते हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं से इसमें शामिल होने की अपील की है। पंजाब की राजनीति में इस प्रदर्शन को कांग्रेस के लिए आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बड़े शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है। एकजुटता और ताकत का बड़ा इम्तिहान पिछले लंबे समय से पंजाब कांग्रेस में अलग-अलग नेताओं के बीच गुटबाजी और नेतृत्व को लेकर मतभेद चर्चा में रहे हैं। ऐसे में मंगलवार का प्रदर्शन यह संदेश देने का अवसर होगा कि पार्टी अब मतभेदों को पीछे छोड़कर चुनावी मैदान में एकजुट होकर उतरने की तैयारी कर रही है। प्रदर्शन में नेताओं और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी से कांग्रेस की वास्तविक एकजुटता और संगठनात्मक ताकत का भी संकेत मिलने की उम्मीद है।  

यूपी के पीएमश्री विद्यालयों में पढ़ाई के साथ होगी बागवानी की पढ़ाई, 49 स्कूलों को ₹20 हजार की मदद

 बांदा  अब सरकारी स्कूलों में किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक शिक्षा पर भी जोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में पीएमश्री विद्यालयों में एक नई पहल शुरू होने जा रही है। यहां पढ़ने वाले बच्चे अब पढ़ाई के साथ-साथ बागवानी के गुर भी सीखेंगे। बच्चों को प्रकृति और पोषण से जोड़ने के लिए हर स्कूल में किचन, सब्जी और औषधीय उद्यान बनाए जाएंगे। इसके लिए शासन ने प्रत्येक विद्यालय को 20-20 हजार रुपये की धनराशि भी जारी कर दी है। इस योजना से बच्चों में पर्यावरण संरक्षण की भावना तो विकसित होगी ही, साथ ही उन्हें जैविक खेती और स्वस्थ जीवनशैली की भी जानकारी मिलेगी। मंडल के चारों जिलों में कुल 49 पीएमश्री विद्यालय संचालित हैं। इनमें 36 बेसिक शिक्षा के व 13 माध्यमिक शिक्षा के पीएमश्री विद्यालय शामिल हैं। जिनमें करीब 42 हजार छात्र अध्ययनरत हैं। अब बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ बागवानी भी सीखेंगे। बच्चों को प्रकृति, पोषण और पर्यावरण से जोड़ने के लिए हर पीएमश्री स्कूल में किचन, सब्जी और औषधीय उद्यान विकसित किए जाएंगे। इसके लिए प्रत्येक विद्यालय को 20-20 हजार रुपये की धनराशि भेजी गई है। समग्र शिक्षा के राज्य परियोजना निदेशक ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। आदेश के अनुसार उद्यान का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि बच्चों को पौधों की पहचान, पोषण, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, जैविक खाद और अपशिष्ट प्रबंधन की व्यावहारिक जानकारी देना है। विद्यालयों में तुलसी, गिलोय, अश्वगंधा, एलोवेरा, नीम, आंवला, हल्दी, लेमनग्रास, पुदीना, धनिया, पालक, मेथी, सहजन जैसे उपयोगी एवं स्थानीय पौधे लगाए जाएंगे। कम भूमि वाले विद्यालयों में वर्टिकल गार्डन, प्लास्टिक बोतल, टायर, ग्रो बैग, कंटेनर व रेज्ड बेड माडल अपनाने के निर्देश दिए गए हैं।     बहुत अच्छी योजना है। बच्चे अभी तक सिर्फ किताबों में पौधों के बारे में पढ़ते थे, अब खुद पौधे लगाना सीखेंगे। इससे उन्हें सब्जियों और औषधीय पौधों का महत्व पता चलेगा और मोबाइल से दूर प्रकृति से जुड़ाव भी बढ़ेगा। -सुनील कुमार, अभिभावक, नरैनी।     स्कूल में बागवानी शुरू होने से हमारे बच्चों में मेहनत करने की आदत पड़ेगी। घर पर भी वे बागवानी में हमारी मदद कर सकते हैं। जो सब्जियां स्कूल में उगेंगी, उनसे मिड-डे-मील भी पौष्टिक होगा, यह हमारे लिए गर्व की बात है। -रीना देवी, अभिभावक, अतर्रा।     पीएमश्री विद्यालयों में बच्चों को बागवानी से रूबरू होने का अवसर मिलेगा। इसमें सबसे बेहतर बात यह होगी कि बच्चों को पौधों की पहचान हो सकेगी। औषधियों के होने वाले लाभों के बारे में जान सकेंगे। -राजेश कुमार, वर्मा, संयुक्त शिक्षा निदेशक, माध्यमिक शिक्षा, चित्रकूट धाम मंडल, बांदा। पीएमश्री विद्यालय की स्थिति एक नजर में जिला     बेसिक स्तर     माध्यमिक शिक्षा बांदा     07     05 चित्रकूट     07     02 हमीरपुर     16     04 महोबा     06     02 कुल     36     13

त्योहारी सीजन में यात्रियों को बड़ी राहत, भोपाल होकर गुजरेंगी स्पेशल ट्रेनें; IRCTC की एडवाइजरी जारी

भोपाल  आने वाले दिनों में दशहरा, दिवाली और छठ पूजा के दौरान रेल यात्रियों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मध्य प्रदेश के भोपाल रेल मंडल से तीन राज्यों के बीच दो जोड़ी विशेष ट्रेनें चलाने का फैसला हुआ है। भारतीय रेलवे के इस कदम से त्योहारों के मौसम में घर जाने वाले लोगों को कन्फर्म सीट प्राप्त करने में काफी सुविधा मिलेगी। यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए आईआरसीटीसी ने यात्रियों के लिए विशेष एडवाइजरी भी जारी की है।   ट्रेनों के मार्ग और फेरों का विवरण रेलवे द्वारा घोषित विशेष ट्रेनों में पहली ट्रेन पुणे और गोरखपुर के बीच संचालित होगी। यह ट्रेन अक्तूबर के दूसरे सप्ताह से शुरू होकर नवंबर तक दोनों दिशाओं में कुल 44 फेरे लगाएगी। वहीं दूसरी विशेष ट्रेन मुंबई सीएसएमटी से गोरखपुर के बीच चलाई जाएगी, जो अक्तूबर से नवंबर के दौरान कुल 43 फेरे पूरे करेगी। ये दोनों ट्रेनें अपने मार्ग में इटारसी, भोपाल, बीना, झांसी, कानपुर, लखनऊ और गोंडा जैसे प्रमुख रेलवे स्टेशनों से होकर गुजरेंगी। यात्री अपनी सुविधा के अनुसार इनमें से किसी भी स्टेशन से अपना रिजर्वेशन करवा सकते हैं।   टिकट बुकिंग और सीटों की स्थिति त्योहारों के समय यात्रा के लिए एडवांस टिकट बुकिंग की व्यवस्था यात्रा की तारीख से 60 दिन पहले शुरू होती है। सुबह 8 बजे जैसे ही टिकट बुकिंग विंडो खुलती है, एक मिनट के अंदर ही सीटें वेटिंग में पहुंच जाती हैं। यात्रियों को कन्फर्म सीट उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ही दो जोड़ी विशेष ट्रेनों का संचालन करने का निर्णय लिया गया है। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ कटारिया के अनुसार रेलवे प्रशासन त्योहारों के दौरान यात्रियों को सुगम यात्रा अनुभव प्रदान करने के लिए लगातार प्रयासरत है। आईआरसीटीसी की सलाह यात्रियों को फर्जी एजेंटों से बचाने के लिए रेलवे ने सलाह दी है कि टिकट केवल आईआरसीटीसी की आधिकारिक वेबसाइट irctc.co.in या 'आईआरसीटीसी रेल कनेक्ट' एप से ही बुक करें। किसी भी अनधिकृत दलाल या फर्जी एजेंट के झांसे में न आएं, क्योंकि उनसे लिया गया टिकट अवैध माना जा सकता है। बुकिंग के समय केवल अपना चालू मोबाइल नंबर ही दर्ज करें ताकि ट्रेन के समय और प्लेटफॉर्म की सटीक जानकारी एसएमएस पर मिलती रहे।   वेबसाइट पर अकाउंट रजिस्टर करके यूजरनेम और पासवर्ड से लॉगिन करें। इसके बाद यात्रियों का नाम, उम्र तथा सीट की प्राथमिकता दर्ज करके क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग या यूपीआई के माध्यम से भुगतान करें। भुगतान पूरा होने के बाद ई-टिकट ईमेल और एसएमएस पर प्राप्त हो जाएगा।  

मध्य प्रदेश में 500 वर्गमीटर तक के प्लॉट पर स्थानीय निकाय देगा मकान की मंजूरी, T&CP से मिली राहत

भोपाल / इंदौर  मध्य प्रदेश में 500 वर्गमीटर (करीब 5,382 वर्गफीट) तक के प्लॉट पर मकान बनाने की अनुमति अब स्थानीय निकाय के स्तर पर ही मिल सकेगी। इसके लिए T&CP से अलग डेवलपमेंट परमिशन लेने की जरूरत नहीं होगी। स्वीकृत लैंड यूज वाले प्लॉट का नक्शा नगर निगम, नगर पालिका या नगर परिषद 30 दिन में मंजूर कर सकेगा। पहले इस प्रक्रिया में तीन से चार महीने लगते थे।  500 वर्गमीटर तक के भूखंडों पर प्रक्रिया होगी सरल महापौर भार्गव ने कहा कि संशोधन से 500 वर्गमीटर तक के भूखंडों पर भवन निर्माण और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया अधिक सरल और सुगम होगी। इससे आम नागरिकों को निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाओं में राहत मिलने की उम्मीद है। विकास की गति बढ़ाने में मदद मिलेगी उन्होंने कहा कि नियमों में बदलाव से नागरिकों को सुविधा मिलेगी और शहरों में विकास की गति भी बढ़ेगी। साथ ही बेहतर शहरी नियोजन को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने इस निर्णय को जनसुविधा और सुगम विकास की दिशा में स्वागतयोग्य पहल बताया। मुख्यमंत्री और मंत्री का जताया आभार पुष्यमित्र भार्गव ने इस संशोधन के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का हृदय से धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि जनसुविधा को प्राथमिकता देते हुए लिए गए ऐसे फैसले नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण हैं। डिजिटल दस्तावेज ही होंगे मान्य मध्य प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में अब घर या अन्य भवन बनाने की अनुमति लेना पहले से आसान होगा। राज्य सरकार ने बिल्डिंग परमिशन के लिए कई विभागों से अनिवार्य रूप से अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) लाने की बाध्यता खत्म कर दी है। अब हाउसिंग सोसायटी, नजूल और बिजली विभाग समेत कई मामलों में आवेदकों को अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। साथ ही भवन अनुज्ञा की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी और केवल डिजिटल दस्तावेज ही स्वीकार किए जाएंगे। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने इस संबंध में सभी नगरीय निकायों को निर्देश जारी किए हैं। अपर मुख्य सचिव संजय दुबे द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, भवन अनुज्ञा प्रक्रिया को सरल, तेज और पारदर्शी बनाने के लिए यह बदलाव किए गए हैं। सरकार का कहना है कि इससे आम नागरिकों के साथ निवेशकों, बिल्डर्स और निर्माण एजेंसियों को भी राहत मिलेगी। कई विभागों की NOC से मिली राहत नई व्यवस्था के तहत सहकारिता विभाग एवं गृह निर्माण सहकारी समितियों, नजूल और बिजली विभाग से मांगी जाने वाली कई प्रकार की NOC की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। रक्षा प्रतिष्ठानों, मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल तथा विकास प्राधिकरणों से जुड़े मामलों में भी अब आवेदकों को स्वयं NOC लाने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। यदि किसी मामले में संबंधित विभाग की राय आवश्यक होगी तो सक्षम प्राधिकारी आवेदन मिलने के सात दिन के भीतर प्रकरण संबंधित विभाग को भेजेगा। विभाग को 21 दिन के भीतर अपनी अनापत्ति या आपत्ति देनी होगी। तय समय में जवाब नहीं मिलने पर भवन अनुमति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी। इन मामलों में अब भी NOC जरूरी सरकार ने स्पष्ट किया है कि एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI), राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण (NMA) और हेरिटेज क्षेत्रों से संबंधित NOC केवल उन्हीं मामलों में जरूरी होगी, जहां ऑनलाइन GIS आधारित जांच में भूखंड प्रतिबंधित या प्रभावित क्षेत्र में पाया जाएगा। अन्य मामलों में इनकी जरूरत नहीं होगी। पर्यावरण और फायर नियमों में भी स्पष्टता निर्धारित क्षेत्रफल से बड़े भवनों और परियोजनाओं के लिए ही पर्यावरणीय स्वीकृति जरूरी होगी। वृक्ष कटाई की अनुमति भी केवल उन्हीं मामलों में लेनी होगी, जहां वास्तव में पेड़ काटे जाने हों। अग्निशमन (फायर) अनापत्ति के नियम राष्ट्रीय भवन संहिता के अनुसार लागू रहेंगे। नियमों में 5 बड़े बदलाव     दायरा: छूट 500 वर्गमीटर (5,382 वर्गफीट) तक के प्लॉट पर ही लागू होगी।     T&CP की अनुमति खत्म: भवन निर्माण के लिए T&CP से अलग ‘डेवलपमेंट परमिशन’ लेने की जरूरत नहीं होगी।     मंजूरी का अधिकार: नक्शा पास करने और निर्माण की अनुमति देने का अधिकार स्थानीय निकाय-नगर निगम, नगर पालिका या नगर परिषद के पास होगा।     अनिवार्य शर्त: प्लॉट का लैंड यूज स्वीकृत डेवलपमेंट प्लान (मास्टर प्लान) के मुताबिक होना जरूरी है।     प्रक्रिया: सरकार ने 28 अगस्त को संशोधन का ड्राफ्ट जारी कर 5 दिन में आपत्तियां और सुझाव मांगे थे। अब फाइनल नोटिफिकेशन जारी किया जा रहा है। इंदौर में 3 साल से अटकी भवन अनुमतियों की प्रक्रिया फिर शुरू होने की उम्मीद मंत्रालय सूत्रों के अनुसार, इस बदलाव की पृष्ठभूमि इंदौर की भवन अनुमति से जुड़ी समस्या रही। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने यह मुद्दा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने उठाया था। बाणगंगा, भागीरथपुरा, न्यू देवास रोड और परदेशीपुरा समेत एक दर्जन से अधिक इलाकों में खसरा भूमि और प्लॉटों के लेआउट T&CP से स्वीकृत नहीं थे। यहां पहले ‘डाटा फॉर्म’ के आधार पर प्लॉट तैयार कर भवन अनुमति दी जाती थी, लेकिन जुलाई 2023 में इस व्यवस्था पर रोक लग गई। इसके बाद इन इलाकों में मकानों के नक्शे पास होने की प्रक्रिया रुक गई। नए नियम से इंदौर समेत प्रदेश के ऐसे भूखंड मालिकों को राहत मिलने की उम्मीद है।

चंडीगढ़ में सोलर एनर्जी को मिलेगा बढ़ावा, 8000 घरों की छतों पर लगेंगे सोलर प्लांट, ₹78 हजार तक सब्सिडी

चंडीगढ़  शहर को वर्ष 2030 तक मॉडल सोलर सिटी बनाने की दिशा में प्रशासन ने निजी घरों की छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने का अभियान तेज कर दिया है।चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी, साइंस एंड टेक्नोलाजी प्रमोशन सोसायटी (क्रेस्ट) ने मार्च 2027 तक शहर के आठ हजार निजी घरों की छतों पर सोलर प्लांट लगाने का लक्ष्य तय किया है। अभी तक प्रधानमंत्री सूर्य घर-मुफ्त बिजली योजना के तहत 1433 निजी घरों पर सोलर प्लांट लगाए जा चुके हैं, जबकि करीब दो हजार लोगों ने अपने स्तर पर संयंत्र स्थापित किए हैं। लक्ष्य हासिल करने के लिए क्रेस्ट की ओर से शहरभर में जागरूकता शिविर लगाए जा रहे हैं। इनमें लोगों को आवेदन प्रक्रिया, सब्सिडी, बैंक ऋण और सोलर प्लांट लगाने की तकनीकी जानकारी दी जा रही है। 12 सूचीबद्ध विक्रेता लोगों को संयंत्र की क्षमता और स्थापना संबंधी जानकारी दे रहे हैं। पंजाब एंड सिंध बैंक तथा पंजाब नेशनल बैंक के प्रतिनिधि ऋण संबंधी सवालों का जवाब दे रहे हैं। सरकारी भवनों पर पहले ही पूरा हुआ लक्ष्य चंडीगढ़ देश के उन शुरुआती शहरों में शामिल है, जहां सभी पात्र सरकारी भवनों और मकानों पर सोलर प्लांट लगाने का लक्ष्य पूरा किया जा चुका है। शहर के 6366 सरकारी भवनों पर सौर संयंत्र लगाए गए हैं। करीब 1400 सरकारी मकानों में बिजली खपत नेट-जीरो स्तर तक पहुंच गई है। इन संयंत्रों की कुल क्षमता 18.1 मेगावाट पीक है और इनसे सालाना करीब 2.35 करोड़ यूनिट बिजली उत्पादन होने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत अब तक 148 लाभार्थियों के बिजली बिल शून्य हो चुके हैं। योजना में तीन किलोवाट तक के घरेलू सोलर प्लांट के लिए केंद्र सरकार की ओर से अधिकतम 78 हजार रुपये की सब्सिडी दी जाती है। पात्र लोगों को छह प्रतिशत तक की ब्याज दर पर ऋण की सुविधा भी उपलब्ध है। 97 नगर निगम भवनों पर लगेगा सोलर प्लांट क्रेस्ट ने चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड से रेंट-ए-रूफ योजना के तहत छतों पर सोलर प्लांट लगाने का आग्रह किया है। वहीं नगर निगम के 97 भवनों, जिनमें सामुदायिक केंद्र भी शामिल हैं, पर सोलर प्लांट लगाने के लिए क्रेस्ट का समझौता हो चुका है। चंडीगढ़ फ्लोटिंग सोलर ऊर्जा के क्षेत्र में भी आगे बढ़ रहा है। सेक्टर-39 वाटरवर्क्स में उत्तर भारत का सबसे बड़ा 2.5 मेगावाट पीक क्षमता का फ्लोटिंग सोलर प्लांट पहले ही शुरू किया जा चुका है। अब तीन मेगावाट क्षमता का एक और फ्लोटिंग प्लांट तैयार है, जिसे जल्द शुरू किया जाएगा। सूर्य घर योजना में क्या मिलेगा     तीन किलोवाट तक के सोलर प्लांट पर अधिकतम 78 हजार रुपये की केंद्रीय सब्सिडी।     छह प्रतिशत तक की ब्याज दर पर बैंक ऋण की सुविधा।     क्रेस्ट की ओर से विक्रेता चयन और तकनीकी सहायता।     सब्सिडी सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में।     शिकायतों के समाधान के लिए एकल खिड़की व्यवस्था।     आवेदन के लिए प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के पोर्टल का इस्तेमाल किया जा सकता है।