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महाराष्ट्र के इनपुट पर रायपुर में DGGI की छापेमारी, गोदाम से मिला भारी गुटखा स्टॉक

 रायपुर  राजधानी रायपुर में गुटखा कारोबार से जुड़े एक ठिकाने पर डायरेक्टरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (DGGI) की टीम ने मंगलवार को छापेमारी की। महाराष्ट्र से मिले इनपुट के आधार पर अधिकारियों की टीम तीन गाड़ियों में शदाणी दरबार मार्केट स्थित एक गोदाम पर पहुंची और वहां दस्तावेजों तथा गुटखा स्टॉक की जांच शुरू की। जानकारी के मुताबिक DGGI को सूचना मिली थी कि गोदाम में बड़ी मात्रा में सितार ब्रांड का गुटखा रखा हुआ है। टीम ने मौके पर पहुंचकर तलाशी ली तो 50 से अधिक बोरे गुटखा मिलने की बात सामने आई। अधिकारियों ने मौके पर मिले स्टॉक को जांच के दायरे में लिया है और यह पता लगाया जा रहा है कि गोदाम में रखा माल किस कारोबारी का है। कार्रवाई के दौरान गोदाम मालिक और वहां से जुड़े कुछ अन्य लोगों को भी मौके पर बुलाया गया। अधिकारियों ने उनसे स्टॉक, खरीद-बिक्री और परिवहन से संबंधित जानकारी मांगी। टीम ने मौके पर उपलब्ध दस्तावेजों की जांच शुरू की है। पूरी कार्रवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई गई। सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई महाराष्ट्र से मिले इनपुट के बाद की गई। DGGI अधिकारियों को गुटखा की आपूर्ति और स्टॉक से जुड़े कुछ अहम इनपुट मिले थे, जिसके आधार पर रायपुर स्थित गोदाम को चिन्हित किया गया। इसके बाद टीम ने अचानक दबिश दी। कार्रवाई के दौरान बरामद गुटखा किस नेटवर्क से जुड़ा है, इसकी भी जांच की जा रही है। सूत्रों का दावा है कि गोदाम से मिला माल एक बड़े गुटखा कारोबारी से जुड़ा हो सकता है।  हालांकि इस संबंध में DGGI की ओर से अभी तक आधिकारिक तौर पर नाम और मालिकाना संबंध की पुष्टि नहीं की गई है। बताया जा रहा है कि जांच एजेंसी अब सप्लाई चेन, स्टॉक रजिस्टर, बिलिंग और टैक्स भुगतान से जुड़े दस्तावेजों का मिलान कर रही है। अधिकारियों का फोकस इस बात पर है कि माल वैध बिलिंग के साथ गोदाम तक पहुंचा था या नहीं और संबंधित कारोबार में GST से जुड़े नियमों का पालन किया गया है या नहीं। इस कार्रवाई को करीब नौ दिन पहले दुर्ग जिले में हुई एक अन्य रेड से भी जोड़कर देखा जा रहा है। कुम्हारी के स्टेशन चौक क्षेत्र में सेंट्रल GST इंटेलिजेंस की टीम ने एक फैक्ट्री में दबिश दी थी। वहां सितार ब्रांड का गुटखा बनाए जाने की जानकारी सामने आई थी। कार्रवाई के दौरान दो मशीनें और करीब 30 बोरे गुटखा जब्त किए जाने की बात कही गई थी। अब रायपुर में 50 से अधिक बोरे मिलने के बाद एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुट गई हैं। जांच में यह भी देखा जा रहा है  कि रायपुर और दुर्ग में मिले स्टॉक के बीच कोई सीधा कारोबारी संबंध है या नहीं। फिलहाल DGGI की टीम दस्तावेजों और बरामद माल की जांच कर रही है। कार्रवाई पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि टैक्स चोरी या अवैध कारोबार से जुड़ा कोई मामला बनता है या नहीं और आगे किसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 3 गाड़ियों में पहुंची थी टीम बताया जा रहा है कि महाराष्ट्र से मिले इनपुट के बाद DGGI के अधिकारी रायपुर पहुंचे। इसके बाद 3 गाड़ियों में टीम कारोबारी के ठिकाने पर पहुंची और जांच शुरू की। मौके पर गोदाम मालिक और कुछ लोगों को भी बुलाया गया और पूछताछ की गई। पूरी कार्रवाई की DGGI की टीम ने वीडियो रिकार्डिंग भी की है। गुटखा किंग बंटी से जुड़ रहे तार DGGI सूत्रों के अनुसार जिस गोदाम में मंगलवार की दोपहर को दबिश देकर गुटखा जब्त किया गया। वो गुटखा कारोबारी बंटी का बताया जा रहा है। कारोबारी बंटी का दुर्ग में पाटर्नर है, जहां पहले भी कार्रवाई हो चुकी है। कारोबारी बंटी महाराष्ट्र से ऑपरेट कर रहा है। महाराष्ट्र में कल्याण के पास फैक्ट्री डाली है। वहीं से गुटखा बनवाकर छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, मुंबई और उत्तर प्रदेश के कई राज्यों में सप्लाई किया जा रहा है। 9 दिन पहले सेंट्रल GST ने दुर्ग में मारा था छापा 9 दिन पहले दुर्ग जिले में सेंट्रल GST इंटेलिजेंस की टीम ने छापा मारा था। कुम्हारी के स्टेशन चौक इलाके में एक फैक्ट्री के अंदर सितार कंपनी का गुटखा बनाया जा रहा था। इस दौरान गुटखा बनाने में इस्तेमाल होने वाली 2 मशीनें और करीब 30 बोरा गुटखा जब्त किया गया था। इसके बाद रायपुर में कार्रवाई हुई है।

रेल यात्रियों के लिए जरूरी खबर, बिलासपुर की 3 ट्रेनें कैंसिल; 4 राज्यों के यात्री प्रभावित

बिलासपुर महाराष्ट्र से झारखंड और ओडिशा जाने वाले ट्रेन यात्रियों की परेशानी बढ़ने वाली है। दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर मंडल में ट्रैक बदलने का काम किया जाएगा। यह काम सीनी-राजखरसावां सेक्शन की अप और डाउन लाइन पर चलेगा। इसके लिए 24 नवंबर से 15 जनवरी तक मेगा ब्लॉक लिया जाएगा। इस काम का असर बिलासपुर से होकर चलने वाली ट्रेनों पर भी पड़ेगा। रेलवे ने इस दौरान 3 ट्रेनों को रद्द और 2 ट्रेनों को बदले रूट से चलाने का फैसला किया है। ब्लॉक का सबसे ज्यादा असर 18109/18110 टाटानगर-नेताजी सुभाष चंद्र बोस इतवारी एक्सप्रेस पर पड़ेगा। इस ट्रेन के दोनों दिशाओं में 17-17 फेरे रद्द रहेंगे। इसके अलावा नांदेड़-संतरागाछी एक्सप्रेस और पुणे-संतरागाछी हमसफर एक्सप्रेस के भी निर्धारित फेरे रद्द किए गए हैं। वहीं उत्कल एक्सप्रेस और साउथ बिहार एक्सप्रेस को कुछ निर्धारित तारीखों पर बदले रूट से चलाया जाएगा। इससे महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा के बीच ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों को अपनी यात्रा की तारीख और ट्रेन की जानकारी पहले से जांचनी होगी। 14 अक्टूबर तक 18 एक्सप्रेस ट्रेनें रद्द इधर छत्तीसगढ़ से गुजरने वाली 18 एक्सप्रेस ट्रेनें 14 अक्टूबर 2026 तक पहले ही रद्द है। इसके अलावा उत्कल एक्सप्रेस अलग-अलग तारीखों पर बदले रूट से चलेगी, जबकि 13 अक्टूबर को गीतांजलि एक्सप्रेस 2 घंटे की देरी से रवाना होगी। दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर मंडल में काम होगा। रद्द होने वाली गाड़ियों में इतवारी-टाटानगर-इतवारी एक्सप्रेस, टाटानगर-बिलासपुर एक्सप्रेस, नांदेड़-सांतरागाछी एक्सप्रेस, हटिया-दुर्ग एक्सप्रेस, हावड़ा-CSMT दुरंतो एक्सप्रेस समेत 18 ट्रेनें शामिल हैं। इन एक्सप्रेस ट्रेनों के कैंसिल होने से झारखंड, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और बिहार जाने यात्रियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।

MP में सुगम परिवहन सेवा का होगा विस्तार, CM यादव ने दिए निर्देश

प्रदेश में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का होगा निरंतर विस्तार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव यात्रियों के लिए जिलों में सुविधायुक्त बस स्टैंड और अन्य प्रबंध किए जाएं मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की व्यवस्थाएं बेहतर बनाने के लिए कलेक्टर्स और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के नागरिकों के हित में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की शुरूआत की गई है। प्रदेश में वर्ष 2005 में राज्य परिवहन निगम बंद किया गया था। राष्ट्रवादी विचारक पं. दीनदयाल उपाध्याय की जयंती, 25 सितम्बर से प्रदेश में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अंतर्गत 351 इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों के संचालन की शुरूआत हुई है, जिसका निरंतर विस्तार किया जाएगा। अगले पांच वर्ष में 14 हजार 981 बसों के संचालन का लक्ष्य है। इस सेवा में पूर्व से संचालित फिट बसों का उपयोग भी किया जा रहा है, अत: नागरिकों सहित किसी को भी भ्रमपूर्ण जानकारी पर विश्वास नहीं करना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अंर्तगत नागरिकों की सुविधा के लिए आवश्यक सुविधाओं के विकास के संबंध में जिलों के कलेक्टर्स और पुलिस अधीक्षक को वीडियो कांफ्रेंसिंग द्वारा निर्देशित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में सेवा संकल्प माह के अंतर्गत प्रारंभ इस सुविधा से स्थानीय प्रशासन द्वारा यात्रियों को व्यवस्थित बस संचालन का लाभ दिलवाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं। संबंधित जिलों में प्रशासन के स्तर पर नागरिकों और बस आपरेटर्स को आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाए। सेवा के प्रदेशव्यापी विस्तार के साथ सभी जिलों में प्रशासनिक अमला नागरिकों की सुविधा के लिए सजग भूमिका का निर्वहन करेगा। वर्तमान में जिन रूट्स पर बसों का संचालन किया जा रहा है वहां मैदानी अमले द्वारा सहयोगी रवैया अपनाया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिन स्थानों पर बस डिपो या टर्मिनल बंद स्थिति में हो तो उन्हें स्वच्छता अभियान चलाकर और बैठक एवं अन्य सुविधाओं का विकास कर उपयोगी बनाया जाए। जहां स्टाप या बस स्टैंड खत्म हो चुके हैं वहां भूमि उपलब्ध करवाकर यह सुविधा विकसित की जाए। परमिट के अलावा जो बसें चल रही हैं उनके व्यवस्थित और अनुशासित संचालन को प्राथमिकता दी जाए। निजी बस ऑपरेटरों के फिटनेस, परमिट की शर्तें, ड्राइवर का बस संचालन और व्यवहार के लिए मजिस्ट्रेट एवं पुलिस अधिकारी से नियमित निरीक्षण की व्यवस्था की जाए। क्षेत्रीय कंपनियों के साथ शहरों में आवश्यक अधोसंरचना विकास के लिए स्थानीय प्रशासन सहयोग करे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बसों के बाधारहित संचालन के लिए थाना पुलिस और ट्रैफिक पुलिस का सहयोग दिलवाया जाए। इसके साथ ही जिला स्तरीय परिवहन सलाहकार समिति की नियमित बैठकें की जाएं। जिला कलेक्टर टीएल बैठक में क्षेत्रीय कंपनी के ईडी से भी प्रत्येक सप्ताह चर्चा करें।राज्य परिवहन उपक्रम की ओर से सभी जिला स्तरीय परिवहन सलाहकार समितियों के समक्ष रूट प्रस्तुतिकरण और सुझाव प्राप्त करने की काईवाई भी सुनिश्चित की जाए। आम जनता के हित में सभी एजेंसियों के बीच परस्पर आवश्यक संवाद रहे। परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का अधिक से अधिक नागरिकों को लाभ दिलवाने के लिए निजी बस ऑपरेटरों को आवश्यक प्रोत्साहन दिया जा रहा है। यात्रियों से प्राप्त सुझावों पर भी प्रशासन की ओर से जरूरी प्रबंध किए जाएं। मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा मध्यप्रदेश शासन की महत्वाकांक्षी योजना है। परिवहन क्षेत्र में यात्रियों को बेहतर सुविधा मिले इसलिए बस ऑपरेटर्स से प्रशासन का नियमित संवाद हो। विभिन्न तरह की भ्रांतियां को समाप्त किया जाए। जो पूर्व से संचालित फिट बसें हैं, उनका संचालन किया जा रहा है। अनेक आधुनिक तकनीक भी अपनाई गई हैं, जिसमें यात्री एप के माध्यम से यात्रा के संबंध में बेहतर प्लान कर यात्रा कर सकता है। परिवहन सचिव मनीष सिंह ने प्रजेंटेशन में बताया कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तीन प्रमुख स्तंभ हैं- बस संचालन, इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम और इंफ्रास्ट्रक्चर। वर्तमान में प्रारंभ की गई बसों की संख्या निरंतर बढ़ाई जाएगी। यात्रियों को लाभान्वित करने के साथ निजी ऑपरेटर को उसके कार्य और व्यवसाय का जायज लाभ हो, इसका ध्यान रखा गया है। राज्य परिवहन उपक्रम के लिए भोपाल में कार्यालय की व्यवस्था की गई है। आने वाले तीन माह में भोपाल, इंदौर, उज्जैन और सागर में क्षेत्रीय सहायक कंपनियों के लिए शत-प्रतिशत कार्यालय भवन उपलब्ध होंगे। इसके साथ ही जबलपुर, रीवा और ग्वालियर में भी क्षेत्रीय सहायक कंपनियों के लिए कार्यालय भवन की व्यवस्था की जा रही है। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के लिए आवश्यक कुल 1190 में से 400 पदों के लिए नियुक्ति की कार्रवाई भी पूर्ण की जाएगी। विशेषज्ञ पद भी भरे जाएंगे। प्रदेश में गत 10 माह में यात्री संख्या और रूट सर्वे के माध्यम से जो आकलन किया गया और आवश्यक बसों की संख्या का अनुमान लगाया गया उसके अनुसार प्रदेश में सात क्षेत्र में 3636 मार्गो पर 13006 बसों की व्यवस्था की जाना है। चरणबद्ध विस्तार भी किया जाएगा। वर्ष 2031 तक प्रदेश में 14981 बसों के संचालन में सफलता मिलेगी। राज्य स्तरीय आईटीएमएस प्लेटफार्म एक विशेष सुविधा है। चलो मोबिलिटी के अंतर्गत आईटीएमएस का अंतरिम रूप से प्रयोग करते हुए आवश्यक माड्यूल निर्धारित किए गए हैं। परिवहन सचिव मनीष सिंह ने सुगम बस संचालन के लिए अधोसंरचना विकास के लिए महत्वपूर्ण बिंदुओं की भी जानकारी दी।  

बड़गाईं-लेम सड़क बदहाल, टेंडर के बाद भी नहीं शुरू हुआ 122 करोड़ का काम

 रांची  बड़गाईं चौक से लेम चौक तक की जर्जर सड़क के दिन बहुरने का इंतजार चार साल बाद भी खत्म नहीं हुआ है। करीब चार किलोमीटर लंबी इस सड़क के चौड़ीकरण, मजबूतीकरण और पुनर्निर्माण के लिए करीब 122 करोड़ रुपये का डीपीआर तैयार है। टेंडर की प्रक्रिया भी हो चुकी है, लेकिन जमीन अधिग्रहण और पुल निर्माण से जुड़े मामले अटकने के कारण सड़क निर्माण अब तक शुरू नहीं हो सका है। नतीजा यह है कि रोजाना इस मार्ग से गुजरने वाले हजारों लोगों को गड्ढों, धूल और जाम के बीच आवाजाही करनी पड़ रही है। बड़गाईं से लेम तक सड़क की हालत खराब बड़गाईं चौक से लेम चौक तक सड़क कई जगह टूट चुकी है। बारिश के दिनों में गड्ढों में पानी भर जाने से स्थिति और खराब हो जाती है। दोपहिया वाहन चालकों को सबसे अधिक परेशानी होती है। सड़क की खराब स्थिति के कारण वाहनों की रफ्तार भी प्रभावित होती है। महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग होने के बावजूद लंबे समय से इसकी मरम्मत और पुनर्निर्माण का इंतजार किया जा रहा है। 122 करोड़ से होना है सड़क का निर्माण पथ निर्माण विभाग ने इस मार्ग के चौड़ीकरण और मजबूतीकरण के साथ पुनर्निर्माण की योजना तैयार की है। विभागीय दस्तावेज के अनुसार सड़क की लंबाई करीब 3.750 किलोमीटर है। इसमें बड़गाईं से लेम होते हुए आगे बोरेया तक सड़क का विकास प्रस्तावित है। वर्तमान में सड़क की चौड़ाई अलग-अलग हिस्सों में करीब 3.75 से सात मीटर तक है। परियोजना के तहत सड़क को सात मीटर चौड़ा किया जाना है। सड़क के साथ करीब 3750 मीटर पक्की नाली बनाने की भी योजना है। परियोजना में चार नए कलवर्ट और एक नए पुल के निर्माण का भी प्रस्ताव है। दस्तावेज के अनुसार सड़क के लिए करीब 10 से 12 मीटर चौड़ाई में भूमि उपलब्ध कराने की जरूरत है। जमीन नहीं मिली तो कैसे बनेगी सड़क सबसे बड़ी अड़चन भू-अर्जन को लेकर है। सड़क निर्माण के लिए जिन हिस्सों में अतिरिक्त जमीन की जरूरत है, वहां भू-अर्जन की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण निर्माण एजेंसी काम आगे नहीं बढ़ा पा रही है। इसके अलावा प्रस्तावित पुल से जुड़ा मामला भी अभी लंबित है। ऐसे में टेंडर होने के बावजूद जमीन और पुल निर्माण से जुड़े मामलों का समाधान नहीं होने के कारण सड़क पर काम शुरू नहीं हो सका है। चार साल से लोग कर रहे इंतजार वार्ड की पूर्व पार्षद हुस्ना आरा ने बताया कि सड़क निर्माण की योजना बनने और टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ने के बावजूद धरातल पर काम नहीं होने से उनकी परेशानी बढ़ती जा रही है। हर दिन इस मार्ग से बड़ी संख्या में लोग आवागमन करते हैं। सड़क की स्थिति खराब होने से वाहन चालकों को समय के साथ अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ रहा है। लोगों की मांग है कि भू-अर्जन और पुल निर्माण से जुड़े मामलों का जल्द समाधान कर निर्माण शुरू कराया जाए, ताकि 122 करोड़ की योजना कागज से निकलकर जमीन पर दिखाई दे सके।

2017 के नगर निकाय चुनाव का बकाया 9 साल बाद मंजूर, पटना को मिलेंगे ₹4.85 लाख

पटना  नगरपालिका आम चुनाव हुए नौ साल बीत गए, लेकिन चुनाव के दौरान किए गए काम का भुगतान अब जाकर होगा। वर्ष 2017 में हुए नगरपालिका आम निर्वाचन से जुड़े विभिन्न कार्यों के बकाये भुगतान के लिए पटना जिला प्रशासन को 4.85 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। नगर विकास एवं आवास विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में बकाया भुगतान की मंजूरी दी है। विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, नगर पालिका चुनाव 2017 के दौरान एजेंसियों ने कई तरह के काम किए थे। जिला निर्वाचन अधिकारी ने क‍िया था भुगतान का अनुरोध इन कार्यों से जुड़े कुछ बिल का भुगतान लंबित रह गया था। जिला निर्वाचन पदाधिकारी -सह-जिलाधिकारी, पटना की ओर से बकाया भुगतान के लिए राशि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था। इसके बाद विभाग ने कुल 4.85 लाख रुपये की स्वीकृति दी है। यह पूरी राशि पटना जिला निर्वाचन पदाधिकारी को आवंटित की जाएगी। इसके लिए सीएफएमएस के माध्यम से राशि उपलब्ध कराई जाएगी। विभाग के स्तर पर इस संबंध में आदेश जारी कर दिया गया है।  

लखनऊ में उद्योग बंधु की बैठक, जलभराव-सड़क की बदहाली पर डीएम ने अफसरों को लगाई फटकार

 लखनऊ  औद्योगिक क्षेत्रों में जलभराव और खराब सड़कों की समस्या पर जिलाधिकारी विशाख जी ने नाराजगी जाहिर की है। मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में हुई जिला स्तरीय उद्योग बंधु की बैठक में अमौसी-नादरगंज और सरोजनीनगर औद्योगिक क्षेत्र में जल निकासी और सड़कों की बदहाली व अन्य सुविधाओं को लेकर समीक्षा की गई। डीएम ने संबंधित विभागों को समस्याओं के शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए। सरोजनीनगर औद्योगिक क्षेत्र में लखनऊ-कानपुर मार्ग के किनारे एनएचएआई की ओर से बनाए जा रहे ड्रेन का लेवल औद्योगिक क्षेत्र के ड्रेन से ऊंचा होने के कारण जल निकासी प्रभावित होने का मामला बैठक में उठा। पूर्व में गठित संयुक्त समिति की रिपोर्ट शासन को बजट स्वीकृति के लिए भेजी गई थी। नगर निगम ने बताया कि ड्रेनेज व्यवस्था के विकास का प्रस्ताव स्वीकृत हो गया है। इसका कार्य सीएंडडीएस की ओर से कराया जाएगा। एसटीपी के दौरान खराब हुई सड़क, जांच के आदेश उद्यमियों ने औद्योगिक क्षेत्र की आंतरिक सड़कों पर गड्ढों और जलभराव की समस्या उठाई। इससे माल ढुलाई और औद्योगिक इकाइयों के कामकाज पर असर पड़ने की बात कही गई। यूपीसीडा ने बताया कि एसटीपी निर्माण के लिए पाइपलाइन डालने के दौरान सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। इस पर डीएम ने कहा कि एसटीपी निर्माण के स्वीकृत बजट में ही सड़क रेस्टोरेशन का प्रावधान किया जाना था। मामले की जांच के लिए लोक निर्माण विभाग और जल निगम के अधिशासी अभियंताओं की संयुक्त टीम गठित की गई। टीम को एसटीपी के मूल बजट में सड़क रेस्टोरेशन के लिए स्वीकृत धनराशि और जल निगम द्वारा अब तक सड़क की मरम्मत पर खर्च की गई राशि का विवरण जुटाकर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए। नादरगंज-अमौसी औद्योगिक क्षेत्र से सुनहरा रोड होते हुए रिंग रोड तक जाने वाली 5.7 किलोमीटर सड़क के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण का मामला भी बैठक में उठा। लोक निर्माण विभाग ने बताया कि सड़क को कार्ययोजना में शामिल कर लिया गया है। बैठक में चर्चा हुई कि तालकटोरा औद्योगिक क्षेत्र में नाली निर्माण का काम अभी शेष है। इसके अलावा निवेश मित्र पोर्टल 2.0 और 3.0 पर लंबित प्रकरणों की समीक्षा करते हुए डीएम ने संबंधित विभागों के नोडल अधिकारियों को साप्ताहिक समीक्षा करने और निर्धारित समय में मामलों का निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। खासकर हाउसिंग, फिल्म बंधु, कृषि, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, प्रदूषण और विद्युत विभाग से जुड़े समय सीमा पार कर चुके मामलों पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।

BHAVYA योजना के तहत इंटीग्रेटेड मल्टी-सेक्टर इंडस्ट्रियल पार्क, केंद्र को भेजा जाएगा प्रस्ताव

भारत औद्योगिक विकास योजना (BHAVYA)  के तहत इंटीग्रेटेड मल्टी-सेक्टर इंडस्ट्रियल पार्क  भारत सरकार को भेजा जाएगा प्रस्ताव मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में स्टेट लेवल कमेटी की बैठक आयोजित छत्तीसगढ़ कैपिटल रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी द्वारा नवा रायपुर में प्रस्तावित औद्योगिक पार्क को लेकर हुई चर्चा रायपुर, भारत औद्योगिक विकास योजना (BHAVYA) के तहत छत्तीसगढ़ में इंटीग्रेटेड मल्टी-सेक्टर इंडस्ट्रियल पार्क विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में स्टेट लेवल कमेटी की बैठक आयोजित की गई। बैठक में छत्तीसगढ़ कैपिटल रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (CRDA) द्वारा प्रस्तावित इंटीग्रेटेड मल्टी-सेक्टर इंडस्ट्रियल पार्क के प्रस्ताव पर चर्चा की गई।        बैठक में प्रस्तावित परियोजना के डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट, मास्टर प्लान, भूमि उपलब्धता, आवश्यक अधोसंरचना, परियोजना लागत, वित्तीय व्यवस्था तथा BHAVYA  की संचालन गाइडलाइन के संबंध में जानकारी प्रस्तुत की गई। समिति द्वारा प्रस्ताव को भारत सरकार के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग के माध्यम से प्रस्तुत करने का निर्णय लिया गया। नवा रायपुर अटल नगर में प्रस्तावित है औद्योगिक पार्क         CRDA द्वारा प्रस्तावित इंटीग्रेटेड मल्टी-सेक्टर इंडस्ट्रियल पार्क नवा रायपुर अटल नगर, जिला रायपुर में विकसित किया जाना प्रस्तावित है। लगभग 406.72 एकड़ क्षेत्र में प्रस्तावित इस औद्योगिक पार्क में विभिन्न औद्योगिक गतिविधियों के लिए आवश्यक अधोसंरचना एवं सुविधाओं का विकास किया जाएगा। भारत सरकार को भेजा जाएगा परियोजना प्रस्ताव         स्टेट लेवल कमेटी की बैठक में प्रस्ताव पर चर्चा के बाद इसे भारत सरकार को भेजे जाने के लिए अनुमोदित किया गया है। अब CRDA द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रस्ताव को DPIIT,  भारत सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। भारत सरकार से स्वीकृति प्राप्त होने के बाद परियोजना के आगामी चरणों पर कार्यवाही की जाएगी।         बैठक में नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद, श्रम विभाग के सचिव हिमशिखर गुप्ता, प्रबंध संचालक सीएसआईडीसी उमेश कुमार झा, एनआरडीए नवा रायपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी चंदन कुमार सहित कलेक्टर रायपुर वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से उपस्थित थे।

नगर निगम सेक्रेटरी पद के नियम बदले, 90% पद सुपरिंटेंडेंट ग्रेड-2 से होंगे भरे

चंडीगढ़ पंजाब सरकार ने नगर निगमों में कारपोरेशन सेक्रेटरी बनने के लिए पदोन्नति के नियम बदल दिए हैं। अब इस पद के 90 प्रतिशत पद कारपोरेशन सुपरिंटेंडेंट ग्रेड-2 के कर्मचारियों में से पदोन्नति करके भरे जाएंगे। वहीं 10 प्रतिशत पद सुपरिंटेंडेंट (सैनिटेशन) के कर्मचारियों को पदोन्नति देकर भरे जाएंगे। स्थानीय निकाय विभाग ने इस संबंध में 28 सितंबर को अधिसूचना जारी की है। नए नियम के अनुसार कारपोरेशन सेक्रेटरी के 90 प्रतिशत पदों पर पदोन्नति पाने के लिए कर्मचारी का ग्रेजुएट होना जरूरी होगा। साथ ही उसके पास संबंधित सेवा में कम से कम चार साल का अनुभव होना चाहिए। यह ग्रेजुएशन किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी या संस्थान से होना जरूरी है। इसी तरह 10 प्रतिशत पद सुपरिंटेंडेंट (सैनिटेशन) के कर्मचारियों के लिए रखे गए हैं। इस श्रेणी में पदोन्नति के लिए भी ग्रेजुएशन और चार साल का अनुभव जरूरी होगा। यानी नगर निगमों में सेक्रेटरी के पद पर पहुंचने के लिए अब दोनों श्रेणियों के कर्मचारियों के लिए शैक्षणिक योग्यता और अनुभव की शर्त पूरी करनी होगी। 1978 के नियम में संशोधन सरकार ने यह बदलाव पंजाब म्यूनिसिपल कारपोरेशन सर्विसेज के वर्ष 1978 में बनाए गए भर्ती और सेवा नियमों में किया है। इसके लिए नियमों के अपेंडिक्स-बी में बदलाव किया गया है। सरकार का यह संशोधन सरकारी गजट में प्रकाशित होने के साथ ही लागू हो गया है। सुपरिंटेंडेंट सैनिटेशन के लिए भी तय पद नए नियमों से यह भी साफ हो गया है कि कारपोरेशन सेक्रेटरी के पद पर पदोन्नति के लिए कितने पद किस कैडर से भरे जाएंगे। कुल पदों में से 90 प्रतिशत का हिस्सा सुपरिंटेंडेंट ग्रेड-2 और 10 प्रतिशत हिस्सा सुपरिंटेंडेंट (सैनिटेशन) के लिए तय किया गया है। स्थानीय निकाय विभाग के सचिव घनश्याम थोरी, आईएएस की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि नियमों में यह बदलाव सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद किया गया है। यह संशोधन पंजाब म्यूनिसिपल कारपोरेशन एक्ट, 1976 के तहत सरकार को मिले अधिकारों के आधार पर किया गया है।

भोपाल में रिटायर्ड IAS का मर्डर, गला रेतकर हत्या से सनसनी; नौकर लापता

भोपाल  राजधानी भोपाल में खौफनाक घटना सामने आई है। यहां 70 साल के रिटायर्ड आईएएस अधिकारी राकेश अग्रवाल की बुधवार को उनके घर में गला रेतकर हत्या कर दी गई। इस घटना की जानकारी देते हुए पुलिस ने बताया कि रातीबड़ थाना क्षेत्र के सूरज नगर में घटना की सूचना सुबह करीब पांच बजे पुलिस को मिली। रातीबड़ पुलिस थाने के एक अधिकारी ने बताया कि अग्रवाल अपनी पत्नी के साथ घर में रहते थे और घटना के समय उनकी पत्नी दूसरे कमरे में सो रही थीं। 2 दिन पहले ही रखा था नया नौकर इस घटना की जानकारी देते हुए एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि शुरुआती जांच में घर में काम करने वाले एक घरेलू सहायक पर संदेह जताया गया है, जो घटना के बाद से लापता है। उन्होंने बताया कि अग्रवाल के घर में दो दिन पहले ही नया नौकर रखा गया था और वह घटना के बाद से लापता है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और संदिग्ध की तलाश की जा रही है। हत्या के कारण और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं का पता लगाने के लिए भी जांच जारी है। घटना की सूचना मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की। इस मामले में भोपाल पुलिस घर में और घर के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की मदद भी ले रही है। इससे पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना के बाद से लापता चल रहा नौकर कहां गया और कब घर से निकला था। इस दौरान पुलिस घटना के समय हुई हरकतों के माध्यम से मामले का खुलासा करने की कोशिश कर रही है। नए नौकर पर शक, वारदात के बाद से गायब जानकारी के मुताबिक राकेश अग्रवाल अपनी पत्नी के साथ सूरजनगर स्थित घर में रहते थे. घर के अंदर ही उनका शव मिला. प्रारंभिक जानकारी में सामने आया है कि उनकी हत्या गला रेतकर की गई है. वारदात के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए।  पुलिस की शुरुआती जांच में घर पर काम करने वाले एक नौकर पर शक जताया जा रहा है. बताया जा रहा है कि राकेश अग्रवाल के घर पर करीब दो दिन पहले ही एक नया नौकर रखा गया था. वारदात के बाद से यह नौकर घर से गायब है. इसी वजह से पुलिस की जांच की दिशा फिलहाल उस नौकर के इर्द-गिर्द घूम रही है।  पड़ोसियों से भी पूछताछ कर रही पुलिस घटना की जानकारी मिलने के बाद फोरेंसिक और दूसरी पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं और मामले की जांच शुरू कर दी है। इसके लिए शहर में कई टीमों को जांच करने में लगा दिया गया है। पुलिस इस घटना के बाद से लापता चल रहे नौकर की तलाश कर रही है। इस दौरान पड़ोसियों के साथ भी पुलिस पूछताछ कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना के दौरान उनके घर में या आसपास कोई संदिग्ध गतिविधि दिखी थी या नहीं। घटना के बाद पहुंची पुलिस की टीम ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस का पूरा शक घर में दो दिन पहले आए नौकर पर ही है। ऐसे में अब पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या नौकर ने इस घटना को अकेले अंजाम दिया है या कोई और भी नौकर के साथ इस घटना को अंजाम देने में शामिल था। पुलिस की कार्रवाई और जांच गौरतलब है कि पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीमें फरार संदिग्ध नौकर की तलाश में जुटी हुई हैं। पुलिस हत्या के पीछे की असल वजह रंजिश, लूटपाट या कोई अन्य विवाद का पता लगाने के लिए हर एंगल से जांच कर रही है। इसके अलावा फॉरेंसिक टीम (FSL) ने मौके पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाए हैं और आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज को भी खंगाला जा रहा है।

पूर्व अग्निवीरों के लिए MP सरकार का बड़ा ऐलान, 20% आरक्षण

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार ने अग्निवीरों के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। सरकार ने पूर्व अग्निवीरों को वर्दी वाली सेवाओं में 20 फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया है। इसके साथ ही 24,500 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न योजनाओं एवं परियोजनाओं को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी है। ये फैसले मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में राज्य सचिवालय में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में किए गए। राज्य सरकार के इस फैसले का सीधा फायदा उन युवाओं को मिलेगा जो केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना के तहत भारतीय सशस्त्र बलों में अग्निवीर के रूप में अपनी सेवा पूरी करने के बाद नौकरी की तलाश करते हैं। राज्य सरकार ने क्या बताया? राज्य सरकार के एक अफसर ने बताया कि युवाओं के सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए पुलिस आरक्षक, विशेष सशस्त्र बल, जेल प्रहरी, वनरक्षक और आबकारी आरक्षक जैसी वर्दी वाली सेवाओं में पूर्व अग्निवीरों के लिए 20 फीसदी आरक्षण देने को मंजूरी दे दी गई। अफसर के मुताबिक, गृह विभाग के तहत आरक्षक (सामान्य ड्यूटी) के पदों पर भर्ती में होमगार्ड के लिए 10 प्रतिशत, पूर्व सैनिकों के लिए पांच प्रतिशत और पूर्व अग्निवीरों के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण होगा। किसे कितना आरक्षण मिलेगा? अफसर के मुताबिक, विशेष सशस्त्र बल में होमगार्ड के लिए 10 प्रतिशत, पूर्व सैनिकों के लिए पांच प्रतिशत और पूर्व अग्निवीरों के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, कारागार विभाग के तहत जेल प्रहरियों की नियुक्ति में होमगार्ड को 15 प्रतिशत, पूर्व सैनिकों को पांच प्रतिशत और पूर्व अग्निवीरों को 20 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। राज्य सरकार ने बताया है कि वनरक्षकों की नियुक्ति में भी होमगार्ड के लिए 15 प्रतिशत, पूर्व सैनिकों के लिए पांच प्रतिशत और पूर्व अग्निवीरों के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण होगा। अधिकारी ने बताया कि वाणिज्यिक कर विभाग के तहत आबकारी आरक्षकों की नियुक्ति में होमगार्ड को 10 फीसदी, पूर्व सैनिकों को पांच फीसदी और पूर्व अग्निवीरों को 20 फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया गया है। अग्निवीरों के लिए दो राज्यों से गुड न्यूज आई। मध्य प्रदेश सरकार ने ऐलान किया कि वह पूर्व अग्निवीरों को वर्दी वाली नौकरियों में 20 फीसदी आरक्षण देगी। वहीं महाराष्ट्र सरकार ने घोषणा की है कि नवंबर 2026 से जनवरी 2027 के बीच सेवा मुक्त हो रहे अग्निवीरों के पहले बैच को बिना किसी लिखित परीक्षा के सीधे पुलिस और सुरक्षा बलों में नौकरी दी जायेगी। महाराष्ट्र सरकार ने कहा है कि पहले बैच के सेवानिवृत्त अग्निवीरों को महाराष्ट्र पुलिस, राज्य रिजर्व पुलिस बल और अग्निशमन सेवाओं में सीधे समायोजित किया जाएगा। पात्र उम्मीदवारों को नयी लिखित परीक्षा से छूट मिलेगी, चार साल की आयु में छूट दी जाएगी और अगर जरूरी हुआ तो विशेष रूप से बनाए गए पदों पर समायोजित किया जाएगा। एमपी में कहां कहां अग्निवीरों को आरक्षण एमपी सरकार के अधिकारी ने बताया कि युवाओं के सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए पुलिस आरक्षक, विशेष सशस्त्र बल, जेल प्रहरी, वनरक्षक और आबकारी आरक्षक जैसी वर्दी वाली सेवाओं में पूर्व अग्निवीरों के लिए 20 फीसदी आरक्षण देने को मंजूरी दी गई। गृह विभाग के तहत आरक्षक (सामान्य ड्यूटी) के पदों पर भर्ती में होमगार्ड के लिए 10 प्रतिशत, पूर्व सैनिकों के लिए पांच प्रतिशत और पूर्व अग्निवीरों के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण होगा। उन्होंने बताया कि विशेष सशस्त्र बल में होमगार्ड के लिए 10 प्रतिशत, पूर्व सैनिकों के लिए पांच प्रतिशत और पूर्व अग्निवीरों के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। अधिकारी के अनुसार कारागार विभाग के तहत जेल प्रहरियों की नियुक्ति में होमगार्ड को 15 प्रतिशत, पूर्व सैनिकों को पांच प्रतिशत और पूर्व अग्निवीरों को 20 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि वनरक्षकों की नियुक्ति में भी होमगार्ड के लिए 15 प्रतिशत, पूर्व सैनिकों के लिए पांच प्रतिशत और पूर्व अग्निवीरों के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण होगा। अधिकारी ने बताया कि वाणिज्यिक कर विभाग के तहत आबकारी आरक्षकों की नियुक्ति में होमगार्ड को 10 फीसदी, पूर्व सैनिकों को पांच फीसदी और पूर्व अग्निवीरों को 20 फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया गया है। जनवरी 2027 तक 19 हजार से अधिक अग्निवीर घर लौट रहे केंद्र की ओर से 2022 में शुरू की गई अग्निपथ योजना के तहत सशस्त्र बलों में भर्ती होने वाले अग्निवीरों की सेवा अवधि चार वर्ष है। योजना के तहत 25 फीसदी अग्निवीरों को सशस्त्र बलों में बनाए रखने का प्रावधान है, जबकि बाकी 75 प्रतिशत को सेवा से मुक्त किया जाता है। यानी 75 फीसदी को वापस घर भेज दिया जाता है। अब सेना से अग्निवीरों का पहला बैच जनवरी 2027 में सेवामुक्त होने जा रहा है, जिसमें 19 हजार से अधिक अग्निवीर शामिल हैं। इनका चार साल का कार्यकाल पूरा हो रहा है। सेवामुक्त (75 प्रतिशत) होने वाले अग्निवीरों के लिए केंद्र और राज्य सरकारों ने अपने विभिन्न विभागों में ने आरक्षण और प्राथमिकताओं का प्रावधान किया है। अग्निवीरों को बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस और असम राइफल्स में सिपाही तथा राइफलमैन के पदों पर 50% आरक्षण। इन्हें लिखित परीक्षा, शारीरिक मानक परीक्षण, शारीरिक दक्षता परीक्षा से भी छूट मिलेगी। भारतीय रेलवे: श्रेणी-2 और उससे ऊपर के पदों में 5 प्रतिशत और श्रेणी-1 के पदों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण पूर्व अग्निवीरों के लिए निर्धारित किया गया है। अफसरों ने बताया कि हॉरिजॉन्टल आरक्षण सभी श्रेणियों यानी सामान्य वर्ग के साथ-साथ अनुसूचित जनजाति (एसटी), अनुसूचित जाति (एससी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में लागू होता है। 2022 में शुरू की गई थी अग्निपथ योजना केंद्र की ओर से 2022 में शुरू की गई अग्निपथ योजना के तहत सशस्त्र बलों में भर्ती होने वाले अग्निवीरों की सेवा अवधि चार वर्ष है, जिसमें छह महीने का प्रशिक्षण शामिल है। योजना के तहत 25 फीसदी अग्निवीरों को सशस्त्र बलों में बनाए रखने का प्रावधान है, जबकि बाकी 75 प्रतिशत को सेवा से मुक्त कर दिया जाता है। चार साल की सेवा पूरी कर दिसंबर 2026 में अग्निवीर अपने घरों, अपने परिवारों और अपने प्रियजनों के बीच लौटने वाले हैं। ये वे हजारों युवा पुरुष और महिलाएं हैं, जिन्होंने भारतीय सेना का हिस्सा बनने के लिए चार साल की अवधि के लिए भर्ती होने का विकल्प चुना था।