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रोजगार की नई पहल: सेवा डेरा बना स्किल डेवलपमेंट सेंटर, कई हुनरों की मिलेगी ट्रेनिंग

जगदलपुर. नेतानार का सेवा डेरा सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था का नया मॉडल बन रहा है. वन मंत्री, विधायक और सांसद ने कैंप का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया. यहां आधार सेवा केंद्र, बैंक सखी, सिलाई प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं शुरू की गई हैं. इमली और राइस प्रोसेसिंग यूनिट से स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़ने की कोशिश है. महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर खास फोकस किया गया है. जनप्रतिनिधियों ने अधिकारियों को व्यवस्थाएं मजबूत रखने के निर्देश दिए. इस पहल से गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. ग्रामीणों को अब छोटे-छोटे काम के लिए शहर नहीं जाना पड़ेगा. सेवा डेरा एक मिनी सुविधा केंद्र की तरह काम करेगा. स्थानीय संसाधनों को स्थानीय स्तर पर ही उपयोग करने की योजना है. इससे पलायन पर भी रोक लगने की उम्मीद जताई जा रही है. बस्तर में विकास अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है. सुविधा, रोजगार और प्रशासन का नया केंद्र बनेगा बस्तर में सुरक्षा कैंप अब केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि विकास के केंद्र बनते दिखेंगे. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के संकल्प के तहत नेतानार में पहला सेवा डेरा शुरू होने जा रहा है. जगदलपुर से करीब 25 किमी दूर सीआरपीएफ कैंप में इसकी शुरुआत होगी. गृहमंत्री के हाथों इसका औपचारिक शुभारंभ तय है. दो दिवसीय बस्तर दौरे के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. इस पहल का उद्देश्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विश्वास और विकास को साथ लाना है. सेवा डेरा ग्रामीणों के लिए सुविधा, रोजगार और प्रशासन का नया केंद्र बनेगा. इससे सुरक्षा बलों और स्थानीय लोगों के बीच दूरी कम करने की कोशिश होगी. बस्तर में नक्सलवाद के बाद अब विकास की नई कहानी लिखने की तैयारी है. कार्यक्रम को लेकर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट हैं. स्थानीय स्तर पर भी इसे लेकर उत्साह का माहौल है. यह पहल बस्तर के सामाजिक-आर्थिक ढांचे में बदलाव का संकेत मानी जा रही है.

वोट कटवाने का आरोप लगाकर AAP ने BJP को घेरा, पंजाब में लड़ाई लड़ने का किया ऐलान

चंडीगढ़ आम आदमी पार्टी के लोकसभा सांसद मलविंदर सिंह कांग ने पंजाब में एसआईआर को लेकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसको लेकर बीजेपी पर भी हमला बोला है। X पर पोस्ट करते हुए सांसद ने कहा मेरे प्यारे पंजाबियों, अब समय आ गया है कि हम सब जागें। 2027 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले केंद्र सरकार  एसआईआर के नाम पर वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर बदलाव करने की तैयारी कर रही है। यह प्रक्रिया बिना किसी ठोस कारण के हमारे लोकतंत्र की जड़ों को हिला रही है।   हर वैध वोटर के लिए लड़ेंगे लड़ाई  बिहार में हाल ही में एसआईआर के दौरान 65 लाख से ज्यादा वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए। वहीं, बंगाल में 91 लाख वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए जो कुल वोटर के करीब 12% थे। उन्होंने कहा इसके बाद बीजेपी मुस्कराते हुए चली गई। अब वही मशीनरी पंजाब को निशाना बना रही है। उन्होंने कहा हम पंजाब में बिहार और बंगाल जैसा नहीं होने देंगे। हम हर एक वैध वोटर को लेकर लड़ाई लड़ेंगे।     बता दें कि पंजाब में 25 जून से मतदाता सूचियों की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) का काम शुरू हो जाएगा। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा इस संदर्भ में अधिसूचना जारी कर दी गई है। एसआईआर से पहले इसी संदर्भ पंजाब में चल रहे प्री मैपिंग का काम भी 83.69 प्रतिशत पूरा हो चुका है। बीएलओ एन्युमरेशन फॉर्म लेकर घर-घर तक जाएंगे। इसके लिए 24453 बीएलओ, 2476 सुपरवाइजर, 117 ईआरओ और 234 एईआरओ का सरकारी अमला भी तैयार है। एसआईआर की प्रक्रिया – एसआईआर के तहत पंजाब में 25 जून से 24 जुलाई तक बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं के एन्युमरेशन फॉर्म भरवाएंगे। – प्रत्येक बीएलओ को औसतन 300 घर और 1200 मतदाता एसआईआर के लिए दिए गए हैं। – बीएलओ को प्रशिक्षण देने और अन्य तैयारियों संबंधी काम 15 से 24 जून तक किया जाएगा। – सूबे के सभी मतदाताओं को एसआईआर के तहत संबंधित फॉर्म भरना होगा। – एसआईआर के तहत 1 जनवरी 2003 की मतदाता सूची से साल 2025 की मतदाता सूची का मिलान किया जाएगा। – पोलिंग स्टेशनों की रेशनलाइजेशन का काम 24 जुलाई को होगा और मतदाता सूची का मसौदा 31 जुलाई को प्रकाशित किया जाएगा। – मतदाता सूचियों संबंधी आपत्तियां और दावे 31 जुलाई से 30 अगस्त तक पेश जा सकते हैं। निपटारा 31 जुलाई से 28 सितंबर तक होगा। – अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 01 अक्तूबर को होगा।  

दसूहा रोड पर मिला ड्रोननुमा ऑब्जेक्ट, इलाके में दहशत; जांच में जुटी एजेंसियां

 होशियारपुर होशियारपुर-दसूहा रोड स्थित गांव सतौर के बाहरी क्षेत्र में उस समय हड़कंप मच गया जब खेतों में छोटे हवाई जहाज के आकार की एक संदिग्ध वस्तु पड़ी हुई दिखाई दी। दूर से यह वस्तु ड्रोन जैसी प्रतीत हो रही थी, जिसके चलते इलाके के लोगों में चिंता का माहौल बन गया। जानकारी के अनुसार खेतों की ओर गए कुछ ग्रामीणों ने इस वस्तु को देखा और तुरंत इसकी सूचना गांव की सरपंच कुलदीप कौर तथा समिति सदस्य परमजीत सिंह को दी। इसके बाद पुलिस को सूचित किया गया, जिसके उपरांत पुलिस टीम मौके पर पहुंच गई। पुलिस द्वारा की गई प्रारंभिक जांच के दौरान सामने आया कि यह हवाई जहाज के आकार का एक गर्म हवा वाला गुब्बारा था, जिस पर पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस का संक्षिप्त नाम “पीआईए” लिखा हुआ था। फिलहाल पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि यह गुब्बारा कहां से आया और क्या इसके जरिए कोई अन्य सामग्री भी इलाके में गिराई गई है। इस संबंध में पुलिस द्वारा आसपास के क्षेत्र में तलाशी अभियान भी चलाया जा रहा है।

मंच के पीछे चल रहा था शोषण का नेटवर्क! बेतिया में ऑर्केस्ट्रा ग्रुप पर रेड, 6 नाबालिग मुक्त

 बेतिया बिहार के बेतिया जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां ऑर्केस्ट्रा की आड़ में कथित तौर पर चल रहे मानव तस्करी और नाबालिग लड़कियों के शोषण से जुड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है. जिले के योगापट्टी प्रखंड के शनिचरी थाना क्षेत्र स्थित बहुअरवा गांव में जिला प्रशासन, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू) और चाइल्ड हेल्पलाइन की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर छह नाबालिग लड़कियों को रेस्क्यू किया है. मामले में ऑर्केस्ट्रा संचालक रामबाबू गुप्ता समेत करीब आधा दर्जन लोगों को गिरफ्तार किया गया है।  छापेमारी कर निकाली गई लड़कियां बताया जा रहा है कि इस कार्रवाई की शुरुआत एक गोपनीय सूचना के आधार पर हुई. चाइल्ड हेल्पलाइन सेंटर के डिस्ट्रिक्ट कॉर्डिनेटर आलोक कुमार ने बताया कि पटना स्थित मुक्ति फाउंडेशन से इस मामले की जानकारी मिली थी. सूचना मिलने के बाद विभिन्न संस्थाओं और प्रशासनिक इकाइयों की मदद से एक विशेष टीम का गठन किया गया।  इस टीम में प्रयास जैक संस्थान के डीसी पवन कुमार, सपोर्ट पर्सन शालिनी कुमारी और ग्राम नियोजन केंद्र नरकटियागंज के अरविंद कुमार पांडे समेत अन्य सदस्य शामिल थे. टीम ने स्थानीय प्रशासन और एएचटीयू के सहयोग से बहुअरवा गांव में छापेमारी की और वहां से लड़कियों को सुरक्षित बाहर निकाला।  रोजगार के बहाने धंधे में ढकेला रेस्क्यू की गई लड़कियों में पांच पश्चिम बंगाल और एक बिहार के सीतामढ़ी जिले की बताई जा रही है. प्रारंभिक पूछताछ में लड़कियों ने बताया कि उन्हें रोजगार दिलाने का झांसा देकर यहां बुलाया गया था. बाद में उन्हें कथित तौर पर जबरन गलत गतिविधियों में धकेला जाने लगा।  गर्भवती मिली एक नाबालिग रेस्क्यू अभियान में शामिल शालिनी कुमारी के मुताबिक, लड़कियां ऑर्केस्ट्रा संचालक और उसके सहयोगियों के साथ मिलीं. इस दौरान एक गर्भवती नाबालिग भी टीम को मिली, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।  फिलहाल सभी लड़कियों को प्रशासनिक संरक्षण में रखा गया है और उनकी काउंसलिंग कराई जा रही है. पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है और इस बात की जांच में जुटी है कि इस नेटवर्क से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं. इस कार्रवाई के बाद इलाके में चर्चा तेज हो गई है और पूरे मामले को लेकर प्रशासन सतर्क नजर आ रहा है। 

पंचायत चुनाव से पहले योगी सरकार का बड़ा कदम, सबसे बड़ी अड़चन दूर होने के संकेत

 लखनऊ, उत्तर प्रदेश में  गांव-गांव एक ही बात की चर्चा है कि पंचायत चुनाव कब होंगे? ग्राम प्रधान, बीडीसी और जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में हो रही देरी की सबसे बड़ी वजह यूपी में समर्पित ओबीसी आयोग का न होना है. हाईकोर्ट के सख्त तेवर अपनाए जाने के बाद यूपी की योगी सरकार इस दिशा में अपने कदम बढ़ा सकती है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता सोमवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक में समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी मिल सकती है?  यूपी पंचायत चुनाव को लेकर सस्पेंस बना हुआ, लेकिन अब तस्वीर साफ होती दिख रही है. पंचायत चुनाव में पिछड़ा वर्ग का आरक्षण तय करने के लिए ओबीसी आयोग के गठन पर कैबिनेट में मोहर लग सकती है. इसके साथ ही एक दर्जन से ज्यादा प्रस्ताव को मंजूरी देने का प्रस्ताव है।  यूपी में मौजूदा ओबीसी आयोग का कार्यकाल अक्टूबर 2025 में समाप्त हो गया था, जिसे सरकार ने अक्टूबर 2026 तक के लिए बढ़ा तो दिया है, लेकिन कानूनी रूप से उसके पास समर्पित आयोग के अधिकार नहीं हैं. ओबीसी आयोग अपने तीन साल के मूल कार्यकाल के रहते हुए ही आरक्षण का सर्वे कर सकता है. इसीलिए योगी सरकार सोमवार को कैबिनेट बैठक में ओबीसी आयोग गठन को अमलीजामा पहना सकती है।  ओबीसी आयोग गठन को मिलेगी मंजूरी?  वैश्विक संकट को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मितव्ययता की अपील के बाद सोमवार को पहली कैबिनेट बैठक होगी. इस लिहाज से इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है. सूबे में पंचायत चुनाव पर छाए सियासी बादल कैबिनेट की बैठक में छंटती हुई दिख सकती हैय कैबिनेट बैठक में ग्राम पंचायतों, ब्लॉक और जिला पंचायतों के निर्वाचन में पिछड़ा वर्ग का आरक्षण तय करने के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी दे सकती है।  ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ही पंचायत चुनावों में पिछड़ा वर्ग के आरक्षण का स्वरूप तय होगा. सूबे में समर्पित ओबीसी आयोग नहीं होने के चलते पंचायत चुनाव के आरक्षण की प्रक्रिया लटकी हुई है. हाईकोर्ट ने सख्त तेवर अपनाते हुए कहा था कि ओबीसी आयोग में क्यों देरी हो रही है, जिसके बाद ही समर्पित ओबीसी आयोग गठन को कैबिनेट में मंजबूरी देने ही।  यूपी में नए ओबीसी आयोग के बाद ही ओबीसी की आबादी का सामाजिक और राजनीतिक स्थिति का आकलन का सर्वे करेगी. ओबीसी आयोग के सर्वे के आधार पर यह तय होगा कि पंचायतों में ओबीसी आरक्षण कितने प्रतिशत और किन सीटों पर लागू होगा.ओबीसी के लिए 27 फीसदी आरक्षण पहले से ही निर्धारित है. इसके अलावा कौन सीट आरक्षित करनी है और कौन नहीं?  चारबाग से वसंतकुंज तक मेट्रो को मंजूरी? योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक में लखनऊ मेट्रो से जुड़ा एक महत्वपूर्ण फैसला हो सकता है.मेट्रो परियोजना में पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर (चारबाग से वसंतकुंज) के लिए समझौता ज्ञापन को मंजूरी दी जा सकती है. इसके अलावा आगरा मेट्रो के कॉरिडोर-2 (आगरा कैंट से कालिंदी विहार) में मेट्रो स्टेशन एवं वायडक्ट सेक्शन के निर्माण के लिए भूमि के हस्तांतरण के प्रस्ताव पर भी कैबिनेट विचार कर सकती है।  कैबिनेट बैठक में क्या-क्या होंगे फैसले लोक सेवा आयोग के कृत्यों के परिसीमन में बदलाव करने के लिए संशोधन प्रस्ताव भी कैबिनेट के सामने विचार के लिए रखा जाएगा. ग्राम्य विकास विभाग और एचसीएल फाउंडेशन के साथ चल रही समुदाय परियोजना को पांच साल के लिए और बढ़ाया जाएगा. परियोजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और बुनियादी ढांचे का विकास किया जा रहा है. वस्त्रोद्योग को बढ़ावा देने के लिए कौशल विकास परियोजनाओं को मंजूरी कैबिनेट दे सकती है।  आपातकाल के खिलाफ आंदोलन में हिस्सा लेने वाले लोकतंत्र सेनानियों को कैबिनेट कैशलेस इलाज की सुविधा देने जा रही है. सोमवार को कैबिनेट बैठक में इसका प्रस्ताव लाया जाएगा. इन्हें मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत कैशलेस इलाज की सुविधा दी जाएगी. कैबिनेट में जन्म और मृत्यु पंजीकरण से जुड़ी नई नियमावली को भी मंजूरी मिल सकती है।  हाथरस, बागपत और कासगंज में पीपीपी मोड पर मेडिकल कॉलेज बनाए जाने के प्रस्ताव को भी कैबिनेट सहमति देगी. वहीं, कैबिनेट के सामने ऊर्जा विभाग केनरा बैंक से निकाली गई 1500 करोड़ रुपये की राशि की कार्येत्तर इस्तेमाल के लिए प्रस्ताव रखा जाएगा. कैबिनेट की बैठक में राज्य सरकार और केंद्र सरकार की परियोजनाओं के संबंध में महत्वपूर्ण फैसला लिया जा सकता है।  राज्य सरकार की प्रतिभूतियों के संबंध में वर्ष 2007 में जारी किए गए जनरल नोटिफिकेशन में संशोधन का प्रस्ताव पर कैबिनेट विचार करेगी. इसके अलावा भारतीय स्टांप अधिनियम में भी संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी जा सकती है. वहीं, यूपी राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों पर लगने वाले अतिरिक्त कर को रेशनलाइज करने को भी कैबिनेट अपनी मुहर लगा सकती है। 

हजार साल पुरानी रहस्यमयी निशानियां मिलीं, जैन मुनियों से हो सकता है संबंध

रायसेन. मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के जंगलों में पुरातत्वविदों को एक बेहद प्राचीन और महत्वपूर्ण सफलता हाथ लगी है। रायसेन के जामगढ़ गांव में पथरीले रास्तों के बीच करीब 800 मीटर के दायरे में फैले पत्थरों पर उकेरी गई प्राचीन पदचिन्हों (पैरों के निशान) की खोज की गई है। इसके साथ ही वहां शुरुआती 'नागरी लिपि' में लिखा एक शिलालेख भी मिला है, जोकरीब 10वीं-11वीं शताब्दी (परमार काल) का माना जा रहा है। इतिहासकारों का मानना है कि पत्थरों पर बने ये कदम किसी महान संत या जैन मुनि के हो सकते हैं, जो एक हजार साल पहले इस क्षेत्र से गुजरे थे। यह महत्वपूर्ण खोज इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (INTACH) के भोपाल चैप्टर की पुरातत्वविद नैन्सी शर्मा और उनके सहयोगी मिलनाथ पेटेले द्वारा किए फील्ड सर्वे के दौरान हुई है। समय के साथ धुंधले हो गए हैं निशान सर्वे का नेतृत्व करने वाली नैन्सी शर्मा ने बताया कि स्थानीय ग्रामीणों की सूचना पर वे इस दुर्गम पहाड़ी स्थल पर पहुंचीं। समय के साथ कुछ निशान जरूर धुंधले हुए हैं, लेकिन अधिकांश पदचिह्न आज भी सुरक्षित हैं। इन्टेक (INTACH) मध्य प्रदेश के संयोजक एम.एम. उपाध्याय के अनुसार, पहले प्रमुख चरण चिह्न के पास पत्थरों पर दो लाइनों का एक प्राचीन शिलालेख खुदा हुआ है। इसमें 'सिद्ध', 'पद', 'पंडित' और 'कृत' जैसे शब्दों का उल्लेख है, जो पवित्र स्मारक परंपराओं से जुड़े हैं। एएसआई (ASI) के पूर्व एपिग्रैफी निदेशक रवि शंकर ने इस लिपि की पहचान परमार राजवंश के समय की आरंभिक नागरी लिपि के रूप में की है। इतिहास विशेषज्ञों का कहना है कि 10वीं-11वीं शताब्दी के दौरान मध्य प्रदेश में कई जैन मंदिरों और स्मारकों का निर्माण हुआ था, जिसके चलते इस खोज के तार सीधे जैन इतिहास से जुड़ रहे हैं।

बासुकीनाथ मेला क्षेत्र में सड़कों और पार्किंग के लिए करोड़ों की योजनाएं शुरू

 दुमका  श्रावणी मेला के मद्देनजर बासुकीनाथ में प्रशासनिक तैयारियों को धरातल पर उतारने की पहल तेज हो गई है। पथ निर्माण विभाग ने श्रावणी को ध्यान में रखते हुए बासुकीनाथ में स्थित शिवगंगा पहुंच पथ में नवनिर्मित आठ गुणा पांच मीटर बॉक्स कल्भर्ट के किनारे जोरिया में पीसीसी गार्डवाल एवं पहुंच पथ का निर्माण कराने के लिए टेंडर आमंत्रित किया है। इस योजना की प्राक्कलित राशि 30 लाख रुपये है। विभाग की ओर से दुमका-भागलपुर मुख्य पथ पर दुमका-हंसडीहा के बीच एनएच 17 के 25 वें, 44 वें, 49 वें एवं 51 वें किलोमीटर पर स्थित पुल पर मैस्टिक एसफाल्ट वेयरिंग कोर्स लेयिंग कार्य एवं मरम्मति के लिए भी टेंडर आमंत्रित किया गया है। इस योजना की प्राक्कलित राशि 25 लाख रुपये है। श्रावणी मेला को ध्यान में रखते हुए पथ निर्माण विभाग ने शनि मंदिर नोनीहाट-बासुकीनाथ-खैराबनी लिंक रोड के निकट बासुकीनाथ बस स्टैंड तक एप्रोच पथ निर्माण कराने के लिए टेंडर आमंत्रित किया है। दो साल है डेडलाइन इस योजना की प्राक्कलित राशि 60 लाख रुपये है। इस योजना को दो माह के अंदर पूर्ण कराने की मियाद तय की गई है। जबकि विभाग की ओर से नोनीहाट-बासुकीनाथ-कैराबनी रोड की विशेष मरम्मति के लिए भी एक करोड़ 25 लाख रुपये का टेंडर आमंत्रित किया गया है। इस कार्य को पूरा कराने के लिए भी दो माह का वक्त निर्धारित किया गया है। जबकि 75 लाख रुपये की लागत से बासुकीनाथ रिंग रोड में पार्किंग एरिया के निर्माण के लिए भी पथ निर्माण विभाग ने टेंडर आमंत्रित किया है। इस काम को पूरा करने की मियाद डेढ़ माह तय किया गया है। इसके अलावा 75 लाख रुपये की प्राक्कलित राशि से सतह नवीनीकरण, रोड मार्किंग, पेवर ब्लाक एवं साइन बोर्ड, कल्भर्ट की पेंटिंग एवं फ्लैंक मरम्मति का काम बासुकीनाथ मेला क्षेत्र में कराया जाएगा। इसके लिए भी विभागीय स्तर पर टेंडर आमंत्रित किया जा चुका है। इस काम को भी विभाग ने दो माह में पूरा कराने का वक्त तय किया है। एनएच करेगा काम चूंकि दुमका-देवघर मुख्य पथ अब पथ निर्माण विभाग के बजाए नेशनल हाइवे के जिम्मे है इसलिए इस बार श्रावणी मेला के नाम पर इस पथ पर किसी भी तरह का काम पथ निर्माण विभाग की ओर से संभवत: नहीं कराया जाएगा। इसके पीछे एक दूसरी वजह यह भी है कि दुमका से बासुकीनाथ तक फोर लेन का निर्माण काम एनएच के जरिए हो रहा है और बासुकीनाथ से दुमका तक फोर लेन सड़क निर्माण के लिए टेंडर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब जमीन अधिग्रहण का काम चल रहा है। ऐसे में इस पथ पर इस वर्ष श्रावणी मेला में विशेष मरम्मति का कार्य या तो एनएच के जरिए होगा या फिर नहीं होगा। श्रावणी मेला के दौरान बासुकीनाथ में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी स्तर पर कोई परेशानी नहीं हो इसके लिए प्रशासनिक कवायद शुरू कर दी गई है। मेला से जुड़े तमाम विभागों के साथ बैठक कर समय रहते तय कार्याें को पूरा कराने का निर्देश दिया गया है ताकि मेला में किसी तरह की कमी नहीं रहे।  

आम उत्पादन बढ़ाने की तैयारी, प्रदेश में बागवानों को दी जाएगी नई तकनीकों की ट्रेनिंग

लखनऊ उत्तर प्रदेश में आम की गुणवत्ता बढ़ाने और कम लागत में अधिक फल लेने के लिए रणनीति बन रही है। बागवानों को छोटे कद वाले आमों की फसल लगाने को प्रेरित किया जाएगा। पुराने पेड़ों की छंटाई होगी, जिससे आंधी-बारिश में नुकसान कम होगा। जुलाई से प्रशिक्षण अभियान चलेगा। प्रदेश में करीब 3.25 लाख हेक्टेयर में आम के बाग हैं। ज्यादातर बागवान पेड़ों की छंटाई नहीं करते, जिससे वे 20 से 30 फीट ऊंचे हो जाते हैं। ऐसे पेड़ों पर फल की देखरेख और दवा छिड़काव में अधिक खर्च आता है। उद्यान विभाग के सर्वे में सामने आया कि 10 से 15 साल बाद ये पेड़ कम फल देते हैं। आम बागवानी प्रबंधन पर चलेगा प्रशिक्षण अभियान इस वर्ष 50 फीसदी से ज्यादा फसल आंधी-तूफान से प्रभावित हुई है। अब बागवानी विकास मिशन में छोटे कद वाले पेड़ों पर जोर दिया जाएगा। सघन बागवानी से आम के बाग में दूसरी फसलें भी ली जा सकेंगी। प्रशिक्षण अभियान लखनऊ के मलिहाबाद स्थित औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र से शुरू होकर सभी 13 आम पट्टियों में चलेगा। बौनी किस्मों की जुटा रहे जानकारी उद्यान विभाग बौनी किस्मों की जानकारी जुटा रहा है। आम्रपाली, पूसा अरुणिमा, मल्लिका, अरुणा, पूसा प्रतिभा और अवध समृद्धि को बौनी किस्में माना जाता है। सघन बागवानी में इन्हीं किस्मों के पौधे बागवानों को दिए जा रहे हैं। विभाग ने केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान सहित अन्य संस्थानों से भी जानकारी मांगी है। नई किस्मों को प्रशिक्षण केंद्रों में लगाकर उनके फायदे देखे जाएंगे। सफल होने पर उनके पौधे किसानों को बांटे जाएंगे। 18 की जगह 30 मीट्रिक टन उत्पादन औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र के मुख्य विशेषज्ञ कृष्ण मोहन चौधरी ने बताया कि फल न देने वाली डालों को काटकर जड़ में वर्मी कंपोस्ट डालते हैं। इससे पुराने बागों का जीर्णोद्धार होता है। कटाई सितंबर से फरवरी तक होती है; जड़ में चूना लगाने से तना छेदक कीड़े नहीं लगते। कटे हुए पेड़ में कल्ले निकलते हैं और पौधे को छतरी का आकार दिया जाता है। शोध में पहले एक हेक्टेयर में 18 मीट्रिक टन पैदावार होती थी, जो कटाई के बाद 25 से 30 मीट्रिक टन तक पहुंच गई है। इस विधि का प्रशिक्षण जुलाई से अगस्त तक दिया जाएगा। मशीनीकरण और निर्यात को बढ़ावा उद्यान विभाग आम के पेड़ों की कटाई-छंटाई के लिए मशीन भी उपलब्ध करा रहा है। कृषि विभाग इस मशीन पर 50 फीसदी अनुदान देगा। यह मशीन किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के जरिये संचालित होगी। इससे बागवान किराये पर कटाई-छंटाई करा सकेंगे केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में 7 मई को आयोजित फ्रूट होराइजन 2026 में निर्यात योग्य फलों पर जोर दिया गया। उद्यान विशेषज्ञों ने छोटे पेड़ों को बढ़ावा देने की सलाह दी, जिससे देखभाल आसान होगी और कम लागत में अधिक मुनाफा मिलेगा।

मध्य प्रदेश को मिलेगी नई रेल रफ्तार, इंदौर-बुधनी लाइन परियोजना से सफर होगा आसान

भोपाल  इंदौर-बुधनी रेल परियोजना में मांगलिया रेलवे स्टेशन को बड़े जंक्शन के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां एक ओर यात्री सुविधाओं के विस्तार का काम तेज रफ्तार से चल रहा है तो दूसरी ओर माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने पर भी फोकस किया गया। पत्रिका न्यूज टुडे की टीम ने मौके पर काम का जायजा लेकर हकीकत जानी। स्टेशन परिसर में कई निर्माण कार्य तेजी से होते नजर आए तो कई काम अधूरे दिखाई दिए। वर्तमान में यात्रियों को मूलभूत सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है जो भविष्य में बड़ी सुविधा बन सकती है। टीम जब स्टेशन पहुंची तो प्लेटफॉर्म और बीच के हिस्से का निर्माण काफी हद तक पूरा नजर आया। नया एफओबी (फुट ओवर ब्रिज) भी लगभग तैयार हो चुका है। हालांकि स्टेशन परिसर में बनने वाला यात्री और गुड्स शेड अभी अधूरा है। लोहे का स्ट्रक्चर खड़ा कर दिया गया है, लेकिन उस पर छत नहीं डाली गई है। गर्मी के मौसम में यात्री खुले में ट्रेनों का इंतजार करने को मजबूर हैं। पेट्रोलियम और सोयाबीन सप्लाई के लिए हब स्टेशन के दोनों ओर नए गुड्स शेड बनाए जा रहे हैं ताकि माल ढुलाई का दबाव संभाला जा सके। यहां पेट्रोलियम डिपो और सोयाबीन बायप्रोड क्ट्स की सह्रश्वलाई के लिए माल परिवहन सुविधा को मजबूत किया जा रहा है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार मांगलिया आने वाले समय में माल ढुलाई का बड़ा केंद्र बन सकता है। इसके लिए ट्रैक कनेक्टिविटी और लोडिंग सुविधाओं को बढ़ाया जा रहा है। 10 नए क्रॉसिंग और 7 हाल्ट इंदौर के इस रेल मार्ग पर 10 नए क्रॉसिंग और 7 नए हाल्ट स्टेशन विकसित किए जा रहे हैं। वहीं आगे एक फ्लाईओवर भी बनाया जाना है, जिसके लिए पिलर निर्माण का काम शुरू हो चुका है। स्टेशन परिसर में बनने वाले कुछ कमरों का निर्माण अभी अधूरा है। कुल मिलाकर मांगलिया स्टेशन पर काम तेजी से चल रहा है, लेकिन यात्रियों को पूरी सुविधाएं मिलने में अभी समय लगेगा। इंदौर-बुधनी रेल लाइन पर जारी अर्थवर्क इंदौर-बुधनी रेल लाइन पर भी काम तेजी से जारी है। स्टेशन के आगे रेलवे क्रॉसिंग के पास नई लाइन डालने के लिए अर्थवर्क किया जा रहा है। मौके पर बड़ी मशीनों से मिट्टी भराई और जमीन समतल करने का काम चलता मिला। कई स्थानों पर गड्ढे खोदकर बेस मजबूत किया जा रहा है। रेलवे स्लीपर भी साइट पर पहुंच चुके हैं और ट्रैक बिछाने की तैयारी शुरू हो गई है। हालांकि अभी कुछ स्थानों पर किसानों के विरोध के कारण बीच-बीच में काम अटका हुआ है, आगे देवास जिले में भी काम चल रहा है। ये भी जानें- पहले कैसा था रूट     अभी इंदौर से भोपाल या जबलपुर जाने के लिए ट्रेनों को उज्जैन और सीहोर के साथ ही संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़) होकर जाना पड़ताहै। ऐसे में इस घुमावदार रास्ते की दूरी भी बढ़ जाती है।     वहीं उज्जैन-भोपाल रूट पहले से ही दिल्ली – मुंबई और अन्य रूट की ट्रेनों के कारण बेहद व्यस्त रहता है, इससे गाड़ियां लेट होती हैं। इससे ट्रेन के संचालन में कम से कम 20-30 मिनट का समय बर्बाद होता था। अब क्या बदलेगा, कैसे बचेंगे 2 घंटे     इंदौर-बुधनी प्रोजेक्ट यानी नई रेल लाइन करीब 204 किमी लंबी है। इसके बनने से इंदौर सीधे भोपाल-जबलपुर की मुख्य रेल लाइन से जुड़ेगा।     इंदौर बुधनी और आगे भोपाल या जबलपुर जाने की दूरी 45 किमी तक कम हो जाएगी। इसके बाद सीधे-सीधे 2 घंटे का सफर कम किया जा सकेगा।     मांगलिया को महा जंक्शन बनाया जाना है। यानी ये अब छोटा स्टेशन नहीं रहेगा। बल्कि मालवा और महाकौशल को जोड़ने एक विशाल बिजनेस और लॉजिस्टिक हब बन जाएगा। यहां से पेट्रोलियम और सोयाबीन सप्लाई पूरे देशभर में तेजी से की जा सकेगी।     10 नए क्रॉसिंग और 7 हाल्ट बनने से ग्रामीण इलाकों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी। स्थानीय व्यापार को पंख लग जाएंगे

हाई बीपी बना किडनी रोग का बड़ा कारण, युवाओं में तेजी से बढ़ रहा खतरा

 लखनऊ गुर्दे की बीमारी से जूझ रहे करीब 80 फीसदी रोगी उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं। राजधानी लखनऊ स्थित पीजीआई के गुर्दा रोग विभाग की जांच में यह खुलासा हुआ है। डेढ़ माह के दौरान ओपीडी में आए छह हजार मरीजों में से 4800 में उच्च रक्तचाप पाया गया। इनमें से अधिकांश को अपने बढ़े हुए रक्तचाप की जानकारी नहीं थी। नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. नारायण प्रसाद ने उच्च रक्तचाप को साइलेंट किलर बताया है। शुरुआत में इसके कोई लक्षण नहीं दिखते, जिससे रोगी अनजान रहते हैं। बढ़ा हुआ रक्तचाप दिल को खून पहुंचाने वाली धमनियों को नुकसान पहुंचाता है। इससे उनकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है। रोजाना लगभग 350 गुर्दा रोगी इलाज के लिए आते हैं लंबे समय तक अनियंत्रित रक्तचाप गुर्दा रोग, दिल का दौरा और मस्तिष्क आघात का खतरा बढ़ाता है। गुर्दे की बीमारी, थायराइड विकार और कुछ हार्मोन की अधिकता भी रक्तचाप बढ़ाने के लिए जिम्मेदार हैं। संस्थान के बाह्य रोगी विभाग में रोजाना लगभग 350 गुर्दा रोगी इलाज के लिए आते हैं। डॉ. नारायण प्रसाद ने बताया कि उच्च रक्तचाप के शुरुआती लक्षण अक्सर स्पष्ट नहीं होते हैं। यह स्थिति धीरे-धीरे दिल की धमनियों को नुकसान पहुंचाती है। इससे गुर्दे की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है और जानलेवा बीमारियों का जोखिम बढ़ता है। तनाव खराब कर रहा युवाओं की किडनी मड़ियांव निवासी एक 40 वर्षीय युवक की दोनों गुर्दे लंबे समय तक अनियंत्रित रक्तचाप के कारण खराब हो गए। वह अब हफ्ते में एक या दो बार डायलिसिस करवा रहा है। इसी तरह, अस्पतालों में 30 से 45 वर्ष तक के युवाओं में उच्च रक्तचाप के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। इस आयु वर्ग में कई लोगों में गुर्दे संबंधी बीमारियां भी बढ़ रही हैं। ये हैं कारण गुर्दा रोग, हार्मोनल और थायराइड विकार, मोटापा, गर्भावस्था तथा बिना डॉक्टर की सलाह दवाओं का सेवन इसके प्रमुख कारण हैं। बचाव के उपाय     रोजाना पांच ग्राम से ज्यादा नमक न खाएं और नियमित कसरत करें।     रक्तचाप, मधुमेह और मोटापे को काबू में रखें।     धूम्रपान व शराब से दूरी बनानी चाहिए। ओपीडी में आ रहे 40 फीसदी युवा केजीएमयू नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. विश्वजीत ने बताया कि पिछले पांच से दस वर्षों में युवाओं में हाइपरटेंशन के मामलों में करीब 15 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि देखी गई है। ओपीडी में रोज 150 मरीज आते हैं। इसमें से करीब 50 फीसदी से अधिक हाइपरटेंशन के मरीज होते हैं। इसमें 30 से 40 प्रतिशत मरीज 25 से 40 वर्ष के बीच में होते हैं। बड़ी संख्या में लोगों को यह पता ही नहीं चलता कि उन्हें हाई बीपी है। धिक स्क्रीन टाइम से भी बढ़ रही बीपी डॉ. विश्वजीत ने बताया लंबे समय तक मोबाइल और लैपटॉप इस्तेमाल करने से शरीर में स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल और एड्रेनालिन ज्यादा रिलीज होते हैं। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है। कम नींद और शारीरिक गतिविधि की कमी भी जोखिम बढ़ा रही है। इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज लगातार सिर दर्द, चक्कर आना, सांस फूलना, धुंधला दिखाई देना, थकान, बेचैनी और सीने में दर्द।