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सपनों का आशियाना बना प्रधानमंत्री आवास

सपनों का आशियाना बना प्रधानमंत्री आवास प्रधानमंत्री आवास योजना से राजकुमारी यादव को मिली सुरक्षित छत, अब परिवार के साथ सुकून से बीत रही जिंदगी मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जरूरतमंद परिवारों को मिल रहा सम्मानजनक जीवन का आधार रायपुर,  अपना घर हर परिवार के लिए केवल चार दीवारों का नाम नहीं, बल्कि सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य की उम्मीद होता है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की मंशा के अनुरूप संचालित प्रधानमंत्री आवास योजना जरूरतमंद परिवारों के इसी सपने को हकीकत में बदल रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में योजना के माध्यम से पात्र परिवारों को पक्के आवास का लाभ मिल रहा है, जिससे उनके जीवन में स्थायित्व और खुशियां आ रही हैं। जशपुर जिले के तपकरा निवासी राजकुमारी यादव के लिए भी अपने परिवार के साथ एक सुरक्षित और सुविधाजनक पक्के मकान में रहने का सपना लंबे समय से था। पहले उनका घर छोटा था और सीमित जगह में परिवार के सभी सदस्यों के साथ रहना चुनौतीपूर्ण होता था। बारिश और खराब मौसम के दौरान घर की स्थिति को लेकर चिंता और बढ़ जाती थी। परिवार के लिए एक बेहतर और सुरक्षित आशियाने की उम्मीद उनके मन में हमेशा बनी रही। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जब राजकुमारी यादव को आवास का लाभ मिला, तो उनके जीवन में बदलाव की नई शुरुआत हुई। योजना से मिली सहायता से पक्के मकान का निर्माण पूरा हुआ और परिवार को अपना सुरक्षित आशियाना मिल गया। अब वे अपने परिवार के साथ नए घर में सुकून और खुशी से जीवन बिता रही हैं। पक्के घर ने बढ़ाया आत्मविश्वास राजकुमारी यादव बताती हैं कि पहले छोटे घर में परिवार के साथ रहना काफी मुश्किल था। जगह की कमी के कारण रोजमर्रा के जीवन में कई परेशानियां आती थीं। अब अपना पक्का मकान मिलने से परिवार की यह चिंता दूर हो गई है। नए घर ने उन्हें न केवल सुरक्षित रहने की सुविधा दी है, बल्कि बेहतर और सम्मानजनक जीवन जीने का भरोसा भी दिया है। वे प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि अपने घर का सपना पूरा होना उनके परिवार के लिए बहुत बड़ी खुशी है। अब उनका परिवार मौसम की चिंता से मुक्त होकर अपने नए घर में सुरक्षित और सुकून से रह रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना जरूरतमंद परिवारों के लिए केवल एक आवास योजना नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और आत्मविश्वास के साथ जीवन की नई शुरुआत का माध्यम बन रही है। राजकुमारी यादव की कहानी इसी बदलाव की तस्वीर है—सीमित जगह और असुविधाओं से निकलकर अपने सपनों के पक्के आशियाने तक पहुंचने की कहानी। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार का प्रयास है कि पात्र परिवारों को आवास का लाभ देकर उनके जीवन को अधिक सुरक्षित और बेहतर बनाया जाए। जशपुर की राजकुमारी यादव जैसी हितग्राहियों के जीवन में आया बदलाव इस बात का प्रमाण है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं जब जरूरतमंदों तक पहुंचती हैं, तो वे केवल घर नहीं बनातीं, बल्कि परिवारों के सपनों और भविष्य की मजबूत नींव भी तैयार करती हैं।

बीकानेर में चुनाव से पहले शराब का जखीरा पकड़ा, कार से राजनीतिक दल का दुपट्टा भी मिला

जयपुर राजस्थान में जारी नगर पालिका और निकाय चुनावों की राजनीतिक सरगर्मियों के बीच बीकानेर जिले के देशनोक क्षेत्र में पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह से निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के उद्देश्य से पुलिस द्वारा की जा रही सख्त नाकेबंदी के दौरान देशनोक में एक लग्जरी कार से भारी मात्रा में अवैध देशी और अंग्रेजी शराब बरामद की गई है। पुलिस की इस मुस्तैद कार्रवाई से पूरे बीकानेर जिले के राजनीतिक और चुनावी गलियारों में हड़कंप मच गया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मौके से शराब के साथ-साथ संदिग्ध ब्लैक लग्जरी कार को भी जब्त कर लिया है। तलाशी के दौरान गाड़ी के अंदर से एक प्रमुख राजनीतिक दल का दुपट्टा और कुछ अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज मिलने का दावा भी किया जा रहा है। पुलिस प्रशासन अब इस पूरे मामले की जांच इस एंगल से कर रहा है कि कहीं इस अवैध शराब का इस्तेमाल निकाय चुनाव में मतदाताओं को लुभाने या बांटने के लिए तो नहीं किया जाना था। देशी-अंग्रेजी पव्वे और बोतलें बरामद देशनोक थानाधिकारी सुमन शेखावत के नेतृत्व में पुलिस टीम ने इलाके में विशेष चेकिंग अभियान चला रखा था। इसी दौरान एक संदिग्ध ब्लैक रंग की कार को रोककर जब उसकी बारीकी से तलाशी ली गई, तो पुलिस कर्मी भी हैरान रह गए। कार के अंदर अवैध शराब का जखीरा छिपाकर रखा गया था। पुलिस द्वारा की गई आधिकारिक जब्ती के अनुसार, गाड़ी से कुल 141 देशी शराब के पव्वे, 96 अंग्रेजी शराब के पव्वे और 12 बड़ी बोतलें बरामद की गई हैं। पुलिस ने मौके पर ही शराब की पूरी खेप को अपने कब्जे में लेकर वाहन को सीज कर दिया। चुनावी माहौल में शराब खपाने की आशंका थानाधिकारी सुमन शेखावत ने बताया कि देशनोक पालिका चुनाव के मद्देनजर क्षेत्र में किसी भी तरह की गैर-कानूनी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि चुनाव की वोटिंग से ठीक पहले इस शराब की सप्लाई की जानी थी ताकि मतदान को प्रभावित किया जा सके। पुलिस ने इस पूरे मामले में आबकारी अधिनियम (Excise Act) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। घटना के हर पहलू की गहराई से जांच की जा रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि शराब कहां से लाई गई थी और इसे कहां डिलीवर किया जाना था। पुलिस टीम ने की मुस्तैद कार्रवाई देशनोक में हुई इस बड़ी जब्ती को अंजाम देने में स्थानीय पुलिस टीम की सतर्कता की काफी तारीफ हो रही है। इस कार्रवाई को हेड कांस्टेबल अशोक, कांस्टेबल दिनेश और कांस्टेबल कैलाश की विशेष टीम ने अंजाम दिया। पुलिस की इस तत्परता से चुनाव में अवैध संसाधनों के इस्तेमाल की कोशिश कर रहे असामाजिक तत्वों में खौफ का माहौल है। देशनोक पुलिस का कहना है कि मतदान की प्रक्रिया पूरी होने तक क्षेत्र में 24 घंटे सघन चेकिंग और निगरानी जारी रहेगी।

अपराध की कमाई पर चलेगा बुलडोजर! बिहार में 4000 से अधिक अपराधियों की संपत्ति जब्ती की तैयारी

पटना बिहार में अपराधियों पर कड़ा प्रहार करने की तैयारी कर ली गई। दरअसल अपराध से संपत्ति अर्जित करने वाले बिहार के 4000 से अधिक अपराधी और माफियाओं की संपत्तियां अब जब्त होंगी। एसपी की अनुशंसा के आधार पर बिहार पुलिस मुख्यालय ने इससे संबंधित प्रस्ताव तैयार किया है। इनमें से 800 मामले न्यायालय के स्तर पर प्रक्रियाधीन हैं। सोमवार को बिहार पुलिस के एडीजी (मुख्यालय) सुनील कुमार और एडीजी (विधि-व्यवस्था) केएस अनुपम ने इसकी जानकारी दी। पुलिस मुख्यालय में एडीजी (विधि व्यवस्था) ने कहा कि बीएनएसएस की धारा 107 के तहत संपत्ति जब्ती का प्रस्ताव है। पुलिस पर हमले के 1166 आरोपित गिरफ्तार एडीजी (विधि व्यवस्था) ने बताया कि विगत तीन माह (जून से अगस्त माह) में 23,958 वांछित अभियुक्तों की गिरफ्तारी की गयी है। इनमें पुलिस पर हमला के मामलों में 1166, सांप्रदायिक हिंसा के मामलों में 42, भीड़ द्वारा हिंसा के मामलों में 11 एवं हर्ष फायरिंग के मामलों में 10 सहित कुल 1229 अभियुक्तों की गिरफ्तारी की गयी है। इसके अलावा, 1270 हत्या, 784 एससी-एसटी एक्ट, 214 डकैती और 473 लूट कांडों के अभियुक्त भी गिरफ्तार हुए। जांच के दौरान बिना निबंधन के मिले 400 महिला छात्रावास केएस अनुपम ने बताया कि राज्य भर में महिला हॉस्टल और कोचिंग संस्थान की जांच को लेकर अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के दौरान सिर्फ पटना में 400 महिला हॉस्टल बिना निबंधन के मिले हैं। पुलिस दीदी की मदद से निजी महिला हॉस्टलों पर नजर रखी जा रही है। इनमें सुरक्षा से संबंधित ऑडिट भी कराये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बक्सर में स्कूली छात्राओं के साथ गलत हरकत करने वाले आरोपित शिक्षकों के मामले में सभी आरोपितों की गिरफ्तारी कर ली गई है। जल्द ही इनके खिलाफ चार्जशीट दायर की जाएगी। पुलिस मुख्यालय इस मामले पर निरंतर नजर रखे हुए है। कांडों के निष्पादन को विशेष अभियान एडीजी (मुख्यालय) सुनील कुमार ने बताया कि लंबित कांडों के पर्यवेक्षण और निष्पादन को लेकर भी अभियान चलाया गया है। अभियान के दौरान दस दिन में 33,390 कांडों का निष्पादन किया गया। इनमें 10,875 कांड एसपी, 9159 कांड डीएसपी और 13356 कांड अंचल पुलिस निरीक्षक स्तर पर निष्पादित किए।

सीएमओ ने नगर का किया मैदानी भ्रमण, मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं के शीघ्र निराकरण के दिए निर्देश

सीएमओ ने नगर का किया मैदानी भ्रमण, मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं के शीघ्र निराकरण के दिए निर्देश शहडोल   मुख्य नगर पालिका अधिकारी शहडोल श्रीमती आशा जितेंद्र भंडारी ने सोमवार को वार्ड पार्षद शक्ति लक्ष्यकार के साथ चौधरी मोहल्ले सहित आसपास के क्षेत्रों का भ्रमण कर सड़क एवं नाली व्यवस्था का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान वार्डवासियों एवं जनप्रतिनिधियों ने क्षेत्र में सड़क, नाली एवं जल निकासी से संबंधित विभिन्न समस्याओं से सीएमओ को अवगत कराया। नागरिकों द्वारा बताई गई समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए सीएमओ ने मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने सड़क एवं नाली से संबंधित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर कराने के निर्देश दिए। उन्होंने सब इंजीनियर शरद द्विवेदी को क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप आवश्यक कार्यों का प्राक्कलन तैयार कर प्रस्तुत करने को कहा। उन्होंने निर्देशित किया कि प्राक्कलन तैयार करते समय क्षेत्र की वास्तविक आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाए तथा नियमानुसार आगामी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि नागरिकों को बेहतर सड़क सुविधा के साथ सुचारु जल निकासी की सुविधा मिल सके। सीएमओ ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वार्डवासियों से प्राप्त समस्याओं का गंभीरता से संज्ञान लेते हुए उनका समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित करें। उन्होंने मौके पर उपस्थित नागरिकों से क्षेत्र की अन्य समस्याओं की जानकारी भी ली और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान वार्ड पार्षद शक्ति लक्ष्यकार, मनोनीत पार्षद विनय केवट, निकाय कर्मचारी, सब इंजीनियर शरद द्विवेदी सहित वार्ड के नागरिक उपस्थित रहे।

संगठन की सदस्यता में भी भ्रष्टाचार, यही है कांग्रेस के डीएनए की सच्चाई – संजय श्रीवास्तव

संगठन की सदस्यता में भी भ्रष्टाचार, यही है कांग्रेस के डीएनए की सच्चाई – संजय श्रीवास्तव पैसे लेकर कांग्रेस की सदस्यता देने को लेकर श्रीवास्तव का तीखा हमला’’ रायपुर यूथ कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव में पैसे लेकर सदस्यता देने का मामला सामने आने पर छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ भाजपा नेता ’’श्री संजय श्रीवास्तव’’ ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। श्रीवास्तव ने कहा कि यूथ कांग्रेस के चुनाव में सदस्य बनाने के नाम पर पैसे लिए जाने के आरोप बेहद गंभीर हैं। यदि संगठन के चुनाव के लिए सदस्यता अभियान में ही आर्थिक लेन-देन के आरोप सामने आ रहे हैं, तो यह कांग्रेस की कार्यप्रणाली और संगठनात्मक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेता बड़े-बड़े घोटालों और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे रहे हैं और अब यदि उसी पार्टी के संगठनात्मक विस्तार एवं सदस्यता प्रक्रिया में भी पैसे लेने के आरोप सामने आते हैं, तो यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। कांग्रेस के लिए यह आत्ममंथन का विषय होना चाहिए। वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा कि ’’कांग्रेस देश में 58 वर्षो तक सत्ता में रही है। उनके इतने लंबे शासनकाल में उनके बड़े-बड़े नेताओं की भ्रष्टाचार और घोटालों के कई मामलों में संलिप्तता के सबूत मिले है। उन्होंने छत्तीसगढ़ प्रदेश में शराब घोटाले, कोयला घोटाले और डीएमएफ घोटाले से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर भ्रष्टाचार की राजनीति को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यूथ कांग्रेस जैसे संगठन में सदस्यता ही चुनावी प्रक्रिया का आधार होती है। जब सदस्यता के आधार पर संगठन के भीतर चुनाव होते हैं, तब सदस्य बनाने के लिए ही पैसे लिए जाने के आरोप लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करते हैं। श्रीवास्तव ने कहा कि ’’“यदि किसी राजनीतिक दल में सदस्यता से लेकर चुनाव तक पैसे का प्रभाव दिखाई देने लगे, तो यह लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है। कांग्रेस को यह बताना चाहिए कि यूथ कांग्रेस की सदस्यता प्रक्रिया में पैसे लिए जाने के आरोपों की सच्चाई क्या है और इस मामले में क्या कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आज देश के लिए नासूर बन चुकी है और जहां-जहां कांग्रेस की सरकारें हैं, वहां भ्रष्टाचार के आरोप लगातार सामने आते रहते हैं। श्रीवास्तव ने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि ’’कांग्रेस को अपने संगठन के भीतर झांककर देखना चाहिए और यह विचार करना चाहिए कि आखिर उसकी राजनीतिक एवं संगठनात्मक कार्यप्रणाली पर बार-बार भ्रष्टाचार के सवाल क्यों उठते हैं।’ उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक दलों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए राजनीतिक दलों की सदस्यता और चुनाव जैसी आंतरिक प्रक्रियाएं पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और भ्रष्टाचार से मुक्त होनी चाहिए। कांग्रेस को यूथ कांग्रेस सदस्यता में पैसे लेने के आरोपों पर तत्काल स्पष्टीकरण देना चाहिए।

पंजाब में बड़ी कार्रवाई, अर्श डल्ला गैंग के 2 सदस्य दबोचे; 5 पिस्टल और कारतूस मिले

मानसा. जिला पुलिस ने अर्श डल्ला गैंग के दो गुर्गो को पांच पिस्टल और कारतूस समेत गिरफ्तार किया है। पुलिस गिरफ्तार किए गए इन आरोपितों का अदालत से पुलिस रिमांड हासिल करके गहराई से जांच करेगी कि उनका आगे मकसद क्या था। एसएसपी वैभव चौधरी ने प्रेस काॅन्फ्रेंस दौरान बताया कि ऑपरेशन प्रहार मुहिम के तहत गश्त के दौरान पुलिस नेहरू काॅलेज की बैक साइड पहुंची तो दो आरोपित थैले से कुछ निकालकर अपने डब्ब और जेब में कुछ डालते दिखाई दिए। पुलिस पार्टी की ओर से काबू किए गए आरोपितों की पहचान शहर के वार्ड नंबर 9 वासी अमृत पाल सिंह उर्फ जैकी पुत्र गोरा सिंह और गांव मूसा वासी कुलदीप सिंह उर्फ घुग्गी पुत्र करनैल सिंह के रूप में हुई। पुलिस ने दोनों आरोपितों के कब्जे से 4 पिस्टल 32 बोर समेत 12  कारतूस और 315 बोर की देसी पिस्टल बरामद करके उनके खिलाफ थाना सिटी-2 में आर्म्स एक्ट तहत मामला दर्ज किया गया। एसएसपी ने बताया कि प्राथमिक पूछताछ के दौरान सामने आया कि वे अर्श डल्ला गैंग के लिए काम करते थे और अवैध तरीके से असले की सप्लाई वे मध्य प्रदेश से मंगवाते थे। अमृत पाल सिंह के खिलाफ 3 और कुलदीप सिंह के खिलाफ पहले 2 मामले एनडीपीएस,आर्म्ज और लूटपाट के दर्ज है। एसएसपी ने बताया कि पुलिस की मुस्तैदी से दोनों आरोपितों को गिरफ्तारी करने से बड़ी वारदात टल गई है। उन्होंने बताया कि पुलिस रिमांड के दौरान बरामद हथियारों का सोत्र और इससे जुड़े आरोपितों के बारे ओर जानकारी हासिल की जाएगी। पुलिस लोगों की सुरक्षा और शांति को यकीनी बनाने के लिए बचनबद्ध है और गैर कानूनी गतिविधियों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए लगातार कार्रवाई जारी रखेगी। इस दौरान एसपी जसबिंदर सिंह, डीएसपी जसविंदर सिंह और पुशपिंदर सिंह भी मौजूद थे।

7 साल से अटका PU अंडरपास प्रोजेक्ट अब आगे बढ़ा, ₹8.40 करोड़ की लागत से बनेगा रास्ता

चंडीगढ़ चंडीगढ़ स्थित पंजाब यूनिवर्सिटी से जुड़े दो बड़े अंडरपास प्रोजेक्ट अब फाइलों से निकलकर अगले चरण में पहुंच गए हैं। पीयू और पीजीआई के बीच बनने वाले अंडरपास का टेंडर जल्द आवंटित किया जाएगा। पीयू-पीजीआई अंडरपास का प्रस्ताव वर्ष 2019 में तैयार हुआ था। इसके बाद डिजाइन और सुविधाओं में कई बदलाव किए गए। अब करीब सात साल बाद इसका निर्माण शुरू करने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ी है। इस प्रोजेक्ट पर कुल 8.40 करोड़ रुपए खर्च होंगे। 25 हजार लोगों की रोजाना आवाजाही पंजाब यूनिवर्सिटी और PGI के बीच रोजाना करीब 25 हजार लोग पैदल आवाजाही करते हैं। इनमें PGI आने वाले मरीज, उनके परिजन, पीयू के छात्र और कर्मचारी शामिल हैं। पहले पीयू के गेट नंबर-1 के सामने सड़क पार करने के लिए एक रास्ता था, लेकिन वहां वाहनों की आवाजाही बढ़ने से जाम लगने लगा। इसके बाद यह रास्ता बंद कर दिया गया। अब लोगों को नेहरू अस्पताल के निकास द्वार के सामने से सड़क पार करनी पड़ती है। यहां दोनों तरफ भारी ट्रैफिक होने के कारण खासकर मरीजों और बुजुर्गों को परेशानी होती है। पीजीआई के मुख्य गेट से आने-जाने वालों को भी लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। मई में निकला टेंडर जल्द आवंटन पीयू और पीजीआई के बीच बनने वाले अंडरपास के लिए मई में टेंडर जारी किया गया था। टेंडर प्रक्रिया में शामिल कंपनियों के साथ शर्तों को लेकर बातचीत हुई। अब सहमति बनने के बाद टेंडर जल्द आवंटित करने की तैयारी है। अंडरपास प्रोजेक्ट की कुल लागत 8.40 करोड़ रुपए है। इसमें से 6.73 करोड़ रुपए निर्माण कार्य पर खर्च होंगे, जबकि 1.67 करोड़ रुपए भूमिगत सीवरेज और ड्रेनेज लाइनों को बदलने पर खर्च किए जाएंगे। अंडरपास निर्माण से पहले इलाके में मौजूद भूमिगत सीवरेज और ड्रेनेज व्यवस्था में बदलाव किया जाएगा। पीजीआई के एडवांस न्यूरो साइंस सेंटर की ओर जाने वाले गेट नंबर-3 के छोटे चौक से लेकर सेक्टर-14 और 15 के चौक तक लाइनों को बदला जाएगा। नई लाइनें बिछाने के बाद उन्हें मौजूदा सीवरेज और ड्रेनेज नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। पहले सिर्फ सीढ़ियां, सुविधा के लिए बदला प्लान इन सात वर्षों में अंडरपास के डिजाइन में कई बदलाव हुए। शुरुआती योजना में अंडरपास के अंदर केवल सीढ़ियों का प्रावधान था। बाद में पीजीआई आने वाले मरीजों और अन्य लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए डिजाइन में बदलाव किया गया। अंडरपास के अंदर बनने वाली दुकानों की संख्या भी कम की गई। पहले यहां 12 दुकानें बनाने की योजना थी, जिसे घटाकर 9 दुकानें कर दिया गया, ताकि दुकानों और आवाजाही के लिए अधिक जगह मिल सके। नॉर्थ-साउथ कैंपस के बीच जाम से समाधान पीयू के सेक्टर-25 स्थित साउथ कैंपस में पिछले डेढ़ दशक के दौरान काफी विस्तार हुआ है। वर्ष 2010 तक यहां मुख्य रूप से डेंटल कॉलेज और यूआईईटी थे, लेकिन बाद में पंजाब यूनिवर्सिटी के कई साइंस विभाग और तीन हॉस्टल भी यहां बनाए गए। इसके कारण नॉर्थ और साउथ कैंपस के बीच छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों की आवाजाही बढ़ी है। इलाके में जाम की समस्या भी बढ़ गई है दूसरी ओर, मध्य मार्ग और दक्षिण मार्ग पर भारी ट्रैफिक के कारण इस इलाके में जाम की समस्या भी बढ़ गई है। इसी को देखते हुए पीयू के गेट नंबर-3 के पास नॉर्थ और साउथ कैंपस को जोड़ने के लिए दूसरा अंडरपास बनाने की योजना तैयार की गई। चीफ आर्किटेक्ट के पास पहुंचा डिजाइन प्रशासनिक मंजूरी के बाद इंजीनियरिंग विभाग ने इस प्रोजेक्ट के लिए कंसल्टेंट नियुक्त किया था। कंसल्टेंसी रिपोर्ट तैयार होने के बाद अब प्रस्तावित डिजाइन को चंडीगढ़ टाउन प्लानिंग विभाग और चीफ आर्किटेक्ट कार्यालय की मंजूरी के लिए भेज दिया गया है। सेक्टर-25 स्थित साउथ कैंपस तक पहुंच बनाई जाए प्रस्तावित योजना के अनुसार, गेट नंबर-3 के पास टीचर फ्लैट्स के सामने से अंडरपास निकालकर सेक्टर-25 स्थित साउथ कैंपस तक पहुंच बनाई जाएगी। पार्क की ओर या टीचर फ्लैट्स की दूसरी साइड से अंडरपास बनाने के विकल्प पर योजना तैयार की गई है।

बंदियों ने गढ़ी आस्था और पर्यावरण संरक्षण की मिसाल, गणेश प्रतिमाओं में दिखा अनोखा संदेश

आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रही बंदियों की गणेश प्रतिमाएं केंद्रीय जेल रायपुर में बंदियों ने मिट्टी से तैयार की 500 पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाएं प्रतिमाओं में तुलसी एवं विभिन्न पौधों के बीज, विसर्जन के बाद अंकुरित होकर बनेंगे पौधे रायपुर गणेशोत्सव के पावन अवसर पर केंद्रीय जेल रायपुर के बंदियों ने आस्था, रचनात्मकता और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संगम प्रस्तुत किया है। आगामी गणेशोत्सव के लिए केंद्रीय जेल रायपुर में बंदियों द्वारा प्राकृतिक मिट्टी से लगभग 1 से 2 फीट आकार की 500 पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाएं तैयार की गई हैं। इन प्रतिमाओं की खासियत यह है कि इनके निर्माण में प्राकृतिक मिट्टी एवं रंगों का उपयोग किया गया है तथा प्रतिमाओं में तुलसी सहित विभिन्न पौधों के बीज भी डाले गए हैं।           गणेशोत्सव के पश्चात इन प्रतिमाओं का विसर्जन किए जाने पर इनमें मौजूद बीज अंकुरित होकर पौधों का रूप लेंगे। इस प्रकार ये प्रतिमाएं धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और हरित संदेश को भी जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बनेंगी। बंदियों की रचनात्मकता को मिला सकारात्मक दिशा           केंद्रीय जेल रायपुर में बंदियों द्वारा विभिन्न कौशल विकास एवं उत्पादन गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसी क्रम में लगभग 10 बंदियों ने अत्यंत लगन, मेहनत और रचनात्मकता के साथ भगवान गणेश की इन आकर्षक प्रतिमाओं का निर्माण किया है। यह पहल बंदियों के कौशल विकास, रचनात्मक अभिव्यक्ति और सकारात्मक सोच को प्रोत्साहित करने के साथ उन्हें समाजोपयोगी एवं पर्यावरण हितैषी गतिविधियों से जोड़ने का सार्थक प्रयास है। मिट्टी की प्रतिमाओं में बीजों का समावेश इस कार्य को और विशेष बनाता है। आस्था और प्रकृति संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं         जेल अधीक्षक रायपुर योगेश सिंह क्षत्री ने कहा कि केंद्रीय जेल रायपुर द्वारा बंदियों के पुनर्वास एवं आत्मनिर्भरता के लिए निरंतर विभिन्न कौशल विकास एवं उत्पादन गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसी क्रम में बंदियों द्वारा तैयार की गई ये बीजयुक्त पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाएं इस संदेश को साकार करती हैं कि आस्था और प्रकृति संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की रचनात्मक गतिविधियों से बंदियों को अपनी प्रतिभा और कौशल को सकारात्मक दिशा में उपयोग करने का अवसर मिलता है। साथ ही पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी ऐसे प्रयास महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

छत्तीसगढ़ में वायरल फीवर ने बढ़ाई चिंता, बुखार और बदन दर्द के मरीजों की अस्पतालों में भीड़

रायगढ़. जिले में वायरल बुखार ने अपना रूप बदल लिया है और इसके साथ ही शहर से लेकर गांव तक हर घर में लोग इसकी चपेट में हैं. जिला अस्पताल की ओपीडी में हर रोज करीब 100 से अधिक मरीज बुखार, बदन दर्द और कमजोरी की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं. मरीजों की संख्या हर रोज बढ़ती जा रही है. जिस कारण वार्डों में बिस्तर कम पड़ रहे हैं. डॉक्टरों के मुताबिक इस बार वायरस का व्यवहार पहले जैसा नहीं रहा. सामान्य वायरल बुखार जो पहले चार से पांच दिन में अपने आप उतर जाता था, अब दस दिन बीतने के बाद भी मरीजों का पीछा नहीं छोड़ रहा. बुखार बार-बार लौट आता है, शरीर में दर्द लंबे समय तक बना रहता है और मरीज हफ्तों तक कमजोरी से जूझते रहते हैं. यही वजह है कि अस्पताल में भर्ती मरीजों की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है. इस वायरल के साथ सबसे डरवाना पहलू यह सामने आ रहा है कि कई मरीजों का प्लेटलेट काउंट तेजी से गिर रहा है. सामान्य बुखार में प्लेटलेट पर इतना असर नहीं देखा जाता, लेकिन इस बार मरीजों की रिपोर्ट में यह गिरावट डेंगू जैसे लक्षणों की याद दिला रही है. इससे परिजनों के साथ-साथ अस्पताल प्रशासन की चिंता भी बढ़ गई है, क्योंकि प्लेटलेट कम होने पर मरीज की जान को खतरा बना रहता है. रोजाना बढ़ती मरीजों की संख्या ने जिला अस्पताल के संसाधनों पर सीधा दबाव डाला है. वार्डों में जगह की कमी, जांच के लिए लंबा इंतजार और स्टाफ पर बढ़ते बोझ के कारण कई परिवार निजी क्लीनिकों और झोलाछाप डॉक्टरों की शरण में जाने को मजबूर हो रहे हैं, क्योंकि सरकारी अस्पताल में भीड़ के चलते इलाज में देरी हो रही है. शहर के कई मोहल्लों की स्थिति यह है कि एक ही परिवार में दो-तीन सदस्य एक साथ बुखार की चपेट में हैं. बच्चों और बुजुर्गों पर इसका असर ज्यादा गंभीर देखा जा रहा है, जिससे अभिभावकों में डर का माहौल बना हुआ है. बाजारों, स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों पर भी बीमारी की चर्चा आम हो गई है. चिकित्सकों के अनुसार वायरस के म्यूटेट होने के कारण इसकी प्रकृति बदल गई है, जिसके चलते पुराने इलाज के तरीके और दवाइयां उतनी असरदार साबित नहीं हो पा रहीं. यही कारण है कि मरीजों को ठीक होने में सामान्य से कहीं ज्यादा वक्त लग रहा है और कई मामलों में जटिलताएं भी सामने आ रही हैं. जिला अस्पताल रायगढ़ के सिविल सर्जन दिनेश पटेल ने बताया कि वायरल फीवर अपना सायकल पूरा करता है. बुखार के कारण शरीर की इम्युनिटी कमजोर पड़ जाती है, जिससे तबीयत में सुधार होने में सामान्य से ज्यादा समय लग रहा है. वायरस की प्रकृति में बदलाव के कारण भी मरीजों को ठीक होने में लंबा वक्त लग रहा है. लोगों को सलाह है कि बुखार लगातार बना रहे या कमजोरी ज्यादा महसूस हो तो जांच कराने में देर न करें.

बिजली संकट पर इंजीनियरों ने CM भगवंत मान को भेजा SOS, राज्य में उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर जोर

पटियाला  पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को पत्र लिखा है। एसोसिएशन ने राज्य में थर्मल और सोलर बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने की मांग की है। महासचिव इंजीनियर अजयपाल सिंह अटवाल ने कहा कि पंजाब का बिजली क्षेत्र वित्तीय संकट और बिजली की कमी का सामना कर रहा है। बिजली की बढ़ती कमी से उद्योग, खेती और घरेलू खपतकर्ता प्रभावित हो रहे हैं। तत्काल कदम न उठाने पर आने वाले वर्षों में हालात गंभीर होंगे। पंजाब की अपनी बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ती मांग से बहुत कम है। इससे पावरकाॅम को ऊर्जा विनिमय से महंगी बिजली खरीदनी पड़ रही है। राजपुरा और तलवंडी साबो के निजी थर्मल प्लांट कोयला भंडार बनाए रखने में विफल रहे हैं। इन प्लांटों में कोयले की भारी कमी है। यह सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के नियमों का सीधा उल्लंघन है। निवेश में देरी से महंगी बिजली खरीद पर निर्भरता बढ़ेगी। इंजीनियरों के अनुसार पंजाब सरकार की ओर से सब्सिडी की राशि का भुगतान लंबित है। इसके अलावा कई सरकारी विभागों पर बिजली बिलों का भुगतान नहीं करने के कारण भी पावरकॉम पर वित्तीय दबाव बढ़ रहा है। एसोसिएशन ने दावा किया है कि एआरआर में खर्चों का अनुमान कम रखे जाने के कारण टैरिफ में अनुचित कटौती हुई है। इससे पावरकॉम के राजस्व पर असर पड़ रहा है। इंजीनियरों के मुताबिक मौजूदा वित्त वर्ष में पावरकॉम को करीब 7,800 करोड़ रुपये के राजस्व घाटे का सामना करना पड़ सकता है। संकट के प्रमुख कारण एसोसिएशन के अनुसार, पंजाब को गैर-सौर और रात की उच्चतम मांग पूरी करने के लिए थर्मल उत्पादन क्षमता तुरंत बढ़ानी होगी। ऐसा न करने पर राज्य हर गर्मी में गंभीर बिजली की कमी के चक्र में फंसा रहेगा। पंजाब बिजली की मांग पूरी करने के लिए राज्य के बाहर से खरीदी गई बिजली और निजी उत्पादकों पर तेजी से निर्भर हो रहा है। इस आर्थिक बोझ के कारण तत्काल नीति समीक्षा की आवश्यकता है। क्षमता बढ़ाने में लगातार देरी से बिजली मांग और इन-स्टेट उत्पादन क्षमता का अंतर बढ़ रहा है। वित्तीय चुनौतियां और भविष्य की मांग पावरकाॅम की वित्तीय स्थिति लगातार कमजोर हो रही है। इसका मुख्य कारण पंजाब सरकार का बकाया सब्सिडी का भुगतान न करना है। मौजूदा वित्तीय साल में पावरकाॅम को करीब 7,800 करोड़ रुपये के राजस्व की कमी का सामना करना पड़ सकता है। एसोसिएशन के सुझावों पर ध्यान नहीं दिया गया जबकि औद्योगिक विस्तार, खेती, घरेलू खपत और डेटा सेंटर जैसे उच्च-भार वाले क्षेत्रों से भविष्य में बिजली की जरूरत काफी बढ़ेगी। राज्य-क्षेत्र बिजली उत्पादन परियोजनाओं में निवेश से पंजाब के युवाओं को रोजगार का बड़ा मौका मिलेगा। गर्मियों में बढ़ जाती है मांग पत्र के अनुसार गर्मियों में बिजली की मांग बढ़ने के साथ ही पीक डिमांड के समय पंजाब का अपना बिजली उत्पादन अपेक्षाकृत कम हो जाता है। ऐसे में मांग पूरी करने के लिए बिजली एक्सचेंज से महंगी दरों पर बिजली खरीदनी पड़ती है। इससे पावरकॉम पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ता है। एसोसिएशन ने कहा कि हिमाचल प्रदेश जैसे जलविद्युत उत्पादन वाले राज्य भी अब बिजली बैंकिंग के बजाय खुले बाजार में बिजली बेचने को प्राथमिकता दे रहे हैं। इससे पंजाब के लिए सस्ती बिजली की उपलब्धता और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। निजी बिजली संयंत्रों पर निर्भरता पर सवाल इंजीनियरों ने निजी थर्मल प्लांटों पर बढ़ती निर्भरता को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इससे पंजाब का बड़ा पूंजी निवेश निजी क्षेत्र की ओर जा रहा है। एसोसिएशन ने सरकार से दीर्घकालिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सरकारी क्षेत्र में नए बिजली उत्पादन प्रोजेक्ट शुरू करने और प्रदेश की अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए तत्काल नीति बनाने की मांग की है।