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Major improvements in the power system under the Yogi government! Significant drop in distribution and AT&C losses.

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश की विद्युत व्यवस्था को मजबूत करने और बिजली वितरण में होने वाले नुकसान को कम करने के प्रयासों का असर आंकड़ों में साफ दिखाई दे रहा है। वर्ष 2020-21 में 20.63 प्रतिशत रही वितरण हानि वर्ष 2025-26 में घटकर 13.04 प्रतिशत रह गई। इसी अवधि में एटीएंडसी हानि भी 31.19 प्रतिशत से घटकर 17.83 प्रतिशत पर आ गई। कृषि फीडरों को छोड़कर प्रदेश में फीडरों की संख्या 18,351 से बढ़कर 21,463 हो गई है। इनमें लाभकारी फीडरों की संख्या 5,772 से बढ़कर 8,104 पहुंच गई। इसमें 2,332 अतिरिक्त फीडर लाभकारी श्रेणी में आए हैं। लाभकारी फीडरों की हिस्सेदारी भी 31 प्रतिशत से बढ़कर 38 प्रतिशत हो गई है। डिस्कॉमवार प्रदर्शन में पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम 53 प्रतिशत लाभकारी फीडरों के साथ प्रदेश में पहले स्थान पर रहा। केस्को 39 प्रतिशत, दक्षिणांचल और मध्यांचल 37-37 प्रतिशत तथा पूर्वांचल 22 प्रतिशत पर रहा। ये आंकड़े बताते हैं कि योगी सरकार के कार्यकाल में बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक कुशल, जवाबदेह और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में लगातार सुधार हुआ है। हाई लॉस क्लस्टर मॉडल से वसूली और नए कनेक्शन में तेजी योगी सरकार के नेतृत्व में बिजली वितरण व्यवस्था में सुधार के लिए लागू हाई लॉस क्लस्टर मॉडल के तहत प्रदेश में 703 क्लस्टर, 1703 फीडर, 42.21 लाख उपभोक्ता और 76,839 वितरण ट्रांसफार्मरों को कवर किया गया। यह कुल उपभोक्ताओं का करीब 11 प्रतिशत है। अभियान के तहत 654 करोड़ 31 लाख रुपये की बकाया वसूली की गई है, जबकि 1,01,548 नए विद्युत संयोजन जारी किए गए हैं। दक्षिणांचल डिस्कॉम में भी सुधार उल्लेखनीय रहा। यहां वितरण हानि 25.64 प्रतिशत से घटकर 14.78 प्रतिशत और एटीएंडसी हानि 31.03 प्रतिशत से घटकर 19.57 प्रतिशत रह गई। थ्रू-रेट 3.65 रुपये प्रति यूनिट से बढ़कर 4.06 रुपये हो गया। दक्षिणांचल में वर्ष 2025-26 में 105 करोड़ रुपये तथा चालू वित्तीय वर्ष में जुलाई तक 155 करोड़ रुपये की वसूली की गई। हाई लॉस फीडरों पर कार्रवाई का असर तालबेहट टाउन-2 ललितपुर में एटीएंडसी हानि 63 प्रतिशत से घटकर 11 प्रतिशत, मणिकापुर सीरी कासगंज में 87 से 53 प्रतिशत और राल मथुरा में 83.62 से 47.82 प्रतिशत तक आ गई। आगरा, मथुरा, चित्रकूट, राठ और कोसी के टॉप-10 हाई लॉस फीडरों का घाटा 22.53 करोड़ से घटकर 17.89 करोड़ रुपये रह गया, जो करीब 21 प्रतिशत की कमी है। फीडर स्तर पर मॉनिटरिंग से बढ़ा वित्तीय अनुशासन अधिकारियों के अनुसार, यह सुधार योगी सरकार और यूपीपीसीएल अध्यक्ष के मार्गदर्शन और लगातार मॉनिटरिंग का परिणाम है। फीडर स्तर पर दैनिक समीक्षा, डेटा आधारित निगरानी और फील्ड अधिकारियों की जवाबदेही तय किए जाने से विद्युत विभाग में वित्तीय अनुशासन मजबूत हुआ है और राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।  

दिल्ली बिल्डिंग हादसे के बाद पहली बार DC रैंक के अधिकारी पर गिरी गाज, MCD ने किया सस्पेंड

नई दिल्ली  सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD ने डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार और सुपरिटेंडिंग इंजीनियर रणवीर सिंह सहित पांच अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया। MCD के इतिहास में पहली बार किसी डिप्टी कमिश्नर रैंक के अधिकारी को सस्पेंड किया गया है। सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे में सस्पेंड किए गए साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं। वह करीब तीन साल पहले डेपुटेशन पर MCD में आए थे। पहले उन्हें सिविल लाइन जोन का डिप्टी कमिश्नर बनाया गया था। उनके कार्यकाल में ही जनवरी 2025 को बुराड़ी इलाके में पांच मंजिला बिल्डिंग ध्वस्त हुई थी। इस हादसे में भी 7-8 लोगों की मौत हुई थी। उन्हें करीब आठ महीने पहले साउथ जोन का डिप्टी कमिश्नर बनाया गया था। बुराड़ी में भी इनके रहते गिरी थी 5 मंजिला इमारत सस्पेंड किए गए सुपरिटेंडेंट इंजीनियर रणवीर सिंह को साल 2019 में 56जे के तहत नौकरी से निकाल दिया गया था। वह लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद कुछ महीने पहले ही बहाल हुए थे, उन्हें साउथ जोन में तैनात किया गया था। एग्जिक्यूटिव इंजीनियर ललित कुमार गोयल अभी कुछ महीने पहले ही असिस्टेंट इंजीनियर से प्रमोट होकर एग्जिक्यूटिव इंजीनियर बने थे। अप्रैल 2026 से वह साउथ जोन के बिल्डिंग विभाग दो में तैनात थे। सस्पेंड होने वाले असिस्टेंट इंजीनियर सुनील चौहान और जूनियर इंजीनियर आशीष कुमार लगभग तीन साल से बिल्डिंग विभाग दो में तैनात हैं। PMO ने तुरंत रिपोर्ट मांग ली थी MCD के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि हादसे के तुरंत बाद PMO ने रिपोर्ट मांग ली थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित स्टाफ को घर से बुलाकर बिल्डिंग हादसे की डिटेल रिपोर्ट तैयार कर रविवार रात में ही पीएमओ को भेजी गई। इसके बाद अधिकारियों के खिलाफ एक्शन लिया गया। यह मामला सीनियर स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

राजस्थान में निकाय चुनाव का पहला चरण आज, 57.52 लाख मतदाता करेंगे 20,623 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला

जयपुर राजस्थान के 39 जिलों के 5 हजार 393 वार्डों में नगरीय निकाय चुनाव के पहले चरण के लिए बुधवार को सुबह 7 से शाम 6 बजे तक मतदान होगा। इन 168 नगरीय निकाय क्षेत्रों में सोमवार शाम रैलियों, सभाओं, रोड शो और जुलूस का चुनावी शोर थम गया, अब घर-घर जाकर प्रचार हो सकेगा। प्रशिक्षण के बाद मंगलवार को मतदान दल रवाना होंगे, जो शाम तक संबंधित मतदान केंद्र पहुंचकर अगले दिन होने वाले मतदान की तैयारियां शुरू कर देंगे। लोकसभा और विधानसभा चुनाव के समान मतदाताओं तक पर्ची नहीं पहुंचने व बुजुर्ग मतदाताओं को होम वोटिंग सुविधा न मिलने से मतदान प्रतिशत में कमी का अंदेशा है। वहीं, 35 वर्ष आयु तक के 40% से अधिक मतदाताओं का जोश मतदान बढ़ाने में मदद करेगा। उधर, पहले चरण में 40 वर्ष तक के युवा प्रत्याशी 49% से अधिक जिनका जोश भी चुनाव मैदान में दिखाई देगा। पहले चरण में 39 जिलों के 5 हजार 393 वार्डों में मतदाता अपने पार्षद चुनेंगे, जबकि प्रदेशभर के कुल वार्डों की संख्या 10 हजार 245 है। पहले चरण में प्रदेश के चार नगर निगमों सहित 168 नगरीय निकायों में मतदान होगा, जिनमें से पाली, भरतपुर, भीलवाड़ा और अलवर नगर निगम शामिल हैं। 10 में से जयपुर नगर निगम सहित 6 नगर निगमों में 11 सितंबर को मतदान होगा। दोनों चरणों की मतगणना 14 सितंबर को होगी। पहला चरण: 20 हजार 623 प्रत्याशी और 7 हजार 683 मतदान केंद्र मतदाताओं को निर्धारित पहचान दस्तावेज लाना होगा। पहले चरण के चुनाव में 57 लाख 52 हजार 278 मतदाता, 20 हजार 623 प्रत्याशियों के लिए 7 हजार 683 मतदान केंद्रों पर अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। मतदाताओं का गणित     1 करोड़ 44 लाख 3 हजार 853 कुल मतदाता     कुल निकाय 309     पुरुष मतदाता 73 लाख 98 हजार 415     महिला मतदाता 70 लाख 04 हजार 927     511 थर्ड जेंडर     27.24% मतदाता बढ़े वर्ष 2019 की तुलना में वोट मैनेजमेंट पर जोर: भाजपा बूथ पर, कांग्रेस निर्दलीयों के साथ जोड़ रही समीकरण पहले चरण का प्रचार थमते ही भाजपा और कांग्रेस ने चुनावी रणनीति का फोकस वोट मैनेजमेंट पर कर दिया है। भाजपा ने कमजोर बूथों की पहचान कर कार्यकर्ताओं का नेटवर्क सक्रिय किया है। उधर, कांग्रेस 50 से 100 वोट काटने की क्षमता रखने वाले निर्दलीयों से संपर्क साध रही है। कंट्रोल रूम एक्टिव, बागियों और निर्दलीयों पर नजर प्रचार अभियान थमने के साथ ही भाजपा ने रणनीति का फोकस 'वोटिंग और प्रत्याशी मैनेजमेंट' पर कर दिया है। अब समर्थक मतदाताओं को घर से बूथ तक पहुंचाने पर जोर रहेगा। कमजोर बूथों की पहचान से लेकर मतदान के दिन कार्यकर्ताओं की सक्रियता तक की मॉनिटरिंग की जा रही है। निर्दलीय और बागियों की सूची भी तैयार की है, जिन्हें संगठन 'आगे' मान रहा है। जिला संगठनों ने यह सूची प्रदेश संगठन को भेज दी है। सोमवार से इनके साथ संपर्क का दौर भी तेज किया गया है। पार्टी इसे निकायों में बहुमत का आंकड़ा जुटाने की संभावित रणनीति के तौर पर देख रही है। कांग्रेसः बागियों को साध रहे, पोस्ट-पोल मैनेजमेंट की तैयारी राजस्थान में पहले चरण का मतदान समाप्त होते ही कांग्रेस ने अब चुनावी प्रबंधन का अगला चरण शुरू कर दिया है। पार्टी ने ऐसे निर्दलीय प्रत्याशियों की सूची पर काम शुरू किया है, जो खुद जीत की स्थिति में नहीं हैं, लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी के वोट काटने की क्षमता रखते हैं। कांग्रेस की रणनीति अब ऐसे उम्मीदवारों को अपने पक्ष में लाने और दूसरे चरण में पार्टी प्रत्याशियों के पक्ष में मतदान का माहौल मजबूत करने की है। कांग्रेस का मानना है कि निकाय चुनाव में मुकाबला कई वार्डों में बेहद करीबी है। ऐसे में 50 से 100 या इससे अधिक वोट लेने वाला निर्दलीय भी नतीजे को प्रभावित कर सकता है। पार्टी अब प्रभावित खासतौर पर कांग्रेस विचारधारा से जुड़े ऐसे उम्मीदवारों से संपर्क कर रही है। जिला स्तर के नेताओं को इनसे बातचीत की जिम्मेदारी दी गई है। जिलाध्यक्ष, विधायक और वरिष्ठ नेताओं को इन लोगों से संपर्क साधने की जिम्मेदारी दी जा रही है।  

हरियाणा में वेपन ट्रेनिंग पर सख्ती, ‘इन-प्रिंसिपल अप्रूवल’ के बिना नहीं मिलेगी मंजूरी

हरियाणा. हरियाणा सरकार ने आर्म्स लाइसेंस प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। गृह विभाग ने दो अलग-अलग आदेश जारी कर स्पष्ट किया है कि अब वेपन ट्रेनिंग सर्टिफिकेट (फॉर्म एस-1) के लिए ट्रेनिंग स्लॉट केवल उन्हीं आवेदकों को दिए जाएंगे, जिनके आर्म्स लाइसेंस आवेदन को पहले ‘इन-प्रिंसिपल अप्रूवल’ मिल चुका होगा। गृह विभाग द्वारा जारी पहले पत्र में कहा गया था कि वेपन ट्रेनिंग स्लॉट की भारी मांग को देखते हुए बिना सैद्धांतिक मंजूरी वाले आवेदकों को ट्रेनिंग स्लॉट आवंटित नहीं किए जाएं। इसके बाद 30 जुलाई 2026 को जारी दूसरे पत्र में एनआईसी हरियाणा को पोर्टल में आवश्यक बदलाव करने के निर्देश दिए गए, ताकि यह व्यवस्था ऑनलाइन प्रणाली में भी लागू की जा सके। गृह विभाग ने माना है कि मौजूदा व्यवस्था में ऐसे लोगों को भी हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी जा रही थी, जिन्हें बाद में आर्म्स लाइसेंस नहीं मिल पाता था। साथ ही, वास्तविक आवेदकों को ट्रेनिंग स्लॉट मिलने में दिक्कतें आ रही थीं। पोर्टल में होंगे बदलाव गृह विभाग ने एनआईसी को निर्देश दिए हैं कि पोर्टल में संशोधन कर केवल उन्हीं आवेदकों को ट्रेनिंग स्लॉट उपलब्ध कराए जाएं, जिनके मामलों को लाइसेंस देने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी हो। तब तक जारी रहेगी मैनुअल प्रक्रिया विभाग ने पुलिस महानिदेशक को भी निर्देश दिए हैं कि पोर्टल में बदलाव लागू होने तक वेपन ट्रेनिंग के लिए मैनुअल प्रक्रिया जारी रखी जाए। सरकार के इस फैसले से आर्म्स लाइसेंस प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ने और ट्रेनिंग संसाधनों का बेहतर उपयोग होने की उम्मीद जताई जा रही है।

विदिशा के पूर्व ADM डामोर का निधन, इसी महीने हुआ था भोपाल तबादला; नई पोस्टिंग ज्वाइन करने से पहले हार्ट अटैक

विदिशा  विदिशा के पूर्व अपर कलेक्टर और 2019 बैच के आईएएस अधिकारी अनिल कुमार डामोर का मंगलवार सुबह हार्ट अटैक से निधन हो गया। सुबह अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।  उनके निधन की खबर मिलते ही प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों में दुख फैल गया। जैसे ही यह खबर मिली, बड़ी संख्या में लोग मेडिकल कॉलेज पहुंचने लगे। अस्पताल परिसर में उनके परिचित अधिकारी, कर्मचारी और सहयोगी दुखी नजर आए। हर किसी के चेहरे पर अपने साथी अधिकारी को अचानक खोने का दुख साफ दिख रहा था। मेडिकल कॉलेज में उनके शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। इसी महीने भोपाल ट्रांसफर हुआ था अनिल कुमार डामोर विदिशा में अपर कलेक्टर के पद पर काम कर चुके थे। इसी महीने राज्य शासन ने उनका तबादला पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, भोपाल में उप सचिव के पद पर किया था। वे विदिशा से अपना काम छोड़कर नई जिम्मेदारी संभालने की तैयारी में थे। सहकर्मियों के अनुसार, डामोर बहुत हंसमुख, मिलनसार और सहज स्वभाव के अधिकारी थे। वे अधिकारियों के साथ-साथ कर्मचारियों से भी प्यार से बात करते थे। अच्छे व्यवहार के लिए जाने जाते थे उनके व्यवहार में कभी अधिकारी वाली औपचारिकता नहीं दिखती थी। इसी वजह से उन्होंने प्रशासनिक अमले में कम समय में ही अपनी अलग पहचान बनाई थी। मेडिकल कॉलेज पहुंचे अधिकारी-कर्मचारी एक-दूसरे से उनके साथ बिताए समय और यादें साझा करते दिखे। सहकर्मियों का कहना था कि उन्होंने सिर्फ एक अच्छे अधिकारी को ही नहीं, बल्कि एक अच्छे साथी को भी खो दिया है। झाबुआ के रहने वाले थे अनिल कुमार डामोर मूल रूप से झाबुआ जिले के रहने वाले थे। उनके परिवार में पत्नी और दो बच्चे हैं। उनका बेटा 11वीं कक्षा में पढ़ रहा है, जबकि बेटी भी पढ़ाई कर रही है।  

मोहाली की बेटी निहारिका का इंटरनेशनल डेब्यू, जापान में ट्रिपल जंप में दिखाएंगी दम

मोहाली. मोहाली की ट्रिपल जंप स्टार निहारिका वशिष्ठ अब एशियन गेम्स के बड़े मंच पर देश का नाम रोशन करेंगी। जापान के आइची प्रांत और नागोया शहर में होने वाले एशियन गेम्स-2026 के लिए उनका चयन भारतीय एथलेटिक्स टीम में हुआ है। पिछले दो वर्षों में निहारिका ने शानदार प्रदर्शन करते हुए छह पदक जीते हैं, जिनमें चार गोल्ड और दो सिल्वर शामिल हैं। उनका मुकाबला 24 सितंबर को होगा। इस महत्वपूर्ण प्रतियोगिता से पहले निहारिका भुवनेश्वर में नेशनल कैंप में तैयारी कर रही हैं। उनका लक्ष्य सिर्फ प्रतियोगिता में भाग लेना नहीं, बल्कि देश के लिए पदक जीतकर लौटना है। निहारिका के पिता राम कुमार वशिष्ठ ने बताया कि निहारिका ने 2011 में एथलेटिक्स की शुरुआत की थी। उस समय वह लाॅन्ग जंप खेलती थीं। कोच स्वर्ण सिंह ने उनकी प्रतिभा को पहचानते हुए उन्हें ट्रिपल जंप में हाथ आजमाने की सलाह दी। इसके बाद निहारिका ने ट्रिपल जंप को अपना मुख्य इवेंट बना लिया और लगातार सफलता हासिल की। वह कई बार नेशनल स्तर पर पदक जीत चुकी हैं और दो बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व भी कर चुकी हैं। इस साल उनका प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा है। अप्रैल में दिल्ली की इंडियन एथलेटिक्स सीरीज-3 में 13.41 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड जीता। संगरूर में सीरीज-5 में 13.13 मीटर के साथ पहला स्थान हासिल किया। रांची में 29वीं नेशनल सीनियर एथलेटिक्स फेडरेशन प्रतियोगिता में 13.64 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड जीता। पंजाब स्टेट एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 13.03 मीटर के साथ गोल्ड और पुणे में सीरीज-8 में 13.21 मीटर के साथ सिल्वर जीता। अब नजर जापान में पदक पर निहारिका इस समय 8 सितंबर तक भुवनेश्वर में नेशनल कैंप में रहेंगी। इसके बाद 10 सितंबर को दिल्ली में इंडियन एथलेटिक्स सीरीज में हिस्सा लेंगी और 12 सितंबर को टीम के साथ जापान रवाना होंगी। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों की मेहनत और लगातार अच्छे प्रदर्शन से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। अब उनका पूरा ध्यान एशियन गेम्स में देश के लिए पदक जीतने पर है। लाॅन्ग जंप से ट्रिपल जंप तक बदली किस्मत निहारिका की खेल यात्रा की सबसे खास बात यह है कि उन्होंने अपना करियर लान्ग जंप से शुरू किया था। कोच स्वर्ण सिंह की सलाह ने उनके खेल का रास्ता बदल दिया। अब 15 साल की मेहनत उन्हें एशियन गेम्स के मंच तक ले आई है। 24 सितंबर को जापान में उनकी हर छलांग के साथ मोहाली और देश की उम्मीदें भी जुड़ी होंगी।

धारवासियों का दशकों पुराना इंतजार खत्म, आज से शुरू होगी ट्रेन सेवा; PM मोदी वर्चुअली करेंगे शुभारंभ

धार  धार जिले के लिए 8 सितंबर का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज होने जा रहा है। मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिले को पहली रेल सेवा की सौगात देने जा रहे हैं। कुछ ही देर बाद वडोदरा में आयोजित कार्यक्रम से प्रधानमंत्री वर्चुअल माध्यम से धार जिले के 28 किलोमीटर लंबे नवनिर्मित रेलखंड का लोकार्पण करेंगे और यात्री रेल सेवा को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। इसके साथ ही पहली बार धार जिले के नक्शे पर रेल सेवा शुरू हो जाएगी और जिले की धरती पर ट्रेन दौड़ती नजर आएगी। धार में रेल सुविधा का सपना कई दशकों पुराना है। 8 फरवरी 2008 को झाबुआ में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने धार-छोटा उदयपुर रेल परियोजना का शिलान्यास किया था। उस समय उम्मीद थी कि वर्ष 2011 तक जिले को रेल सुविधा मिल जाएगी, लेकिन विभिन्न कारणों से परियोजना में लंबा समय लगा। आखिरकार 18 साल 7 महीने बाद यह इंतजार खत्म होने जा रहा है। रामकोट तक सफर करेंगी टांडा रोड रेलवे स्टेशन पर इस ऐतिहासिक अवसर को लेकर उत्सव जैसा माहौल है। केंद्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर भी यहां पहुंच चुकी हैं। वे टांडा रोड स्टेशन से ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगी और स्वयं रामकोट तक रेल सफर करेंगी। रेल सेवा शुरू होने से सबसे बड़ा लाभ टांडा और आसपास के आदिवासी अंचल के लोगों को मिलने की उम्मीद है। खासकर रोजगार के लिए गुजरात और अन्य क्षेत्रों में प्रवास करने वाले हजारों लोगों के लिए यह सस्ता, सुरक्षित और सुविधाजनक आवागमन का नया माध्यम बनेगा। जिले के ऐसे भी अनेक लोग हैं, जिन्होंने अब तक ट्रेन देखी तक नहीं है या रेल में सफर नहीं किया है। ऐसे लोगों के लिए आज का दिन किसी उत्सव से कम नहीं है।  

DA बकाया और नोटिस पर भड़के पंजाब के कर्मचारी, आज सामूहिक अवकाश पर रहेंगे सरकारी दफ्तरों के कर्मचारी

 चंडीगढ़ पंजाब में कर्मचारी संगठनों और सरकार के बीच गतिरोध अब आंदोलन के अगले दौर में पहुंच गया है। पंजाब साझा मुलाजिम मंच ने अपनी मांगों के समर्थन में मंगलवार को पंजाब और चंडीगढ़ के सरकारी कार्यालयों में सामूहिक अवकाश का एलान किया है। क्लेरिकल कर्मचारियों के इस कदम से विभिन्न विभागों में नियमित कामकाज प्रभावित होने की संभावना है। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि मांगों पर सरकार की ओर से ठोस पहल नहीं हुई तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से और तेज किया जाएगा। कर्मचारियों के मुताबिक, सरकार बनने से पहले आम आदमी पार्टी की ओर से पुरानी पेंशन योजना बहाल करने, लंबित महंगाई भत्ते का भुगतान करने और अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करने जैसे मुद्दों पर आश्वासन दिया गया था। अब कर्मचारी इन वादों को लागू करने की मांग को लेकर सरकार पर दबाव बना रहे हैं। मोहनजीत पर हमले को लेकर भी प्रदर्शन आंदोलन के तहत चंडीगढ़-मोहाली में मोहनजीत पर हुए हमले के विरोध को भी शामिल किया गया है। कर्मचारी काले कपड़े पहनकर भूख हड़ताल करेंगे। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि कर्मचारियों की मांगों को लगातार टालने से उनमें रोष बढ़ रहा है। उनका सवाल है कि जिन कर्मचारियों ने सरकार के गठन में समर्थन दिया, वही आज अपनी मांगों के लिए आंदोलन करने को मजबूर क्यों हैं। मंच ने विधायकों की पेंशन में हुई वृद्धि को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा है। कर्मचारियों का तर्क है कि यदि सरकार वित्तीय स्थिति का हवाला देकर उनकी मांगों पर निर्णय नहीं ले रही है तो दूसरी ओर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के वित्तीय लाभों को लेकर अलग नीति क्यों अपनाई जा रही है। हाई कोर्ट के फैसले पर भी सवाल कर्मचारी नेताओं ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के सरकार के कदम पर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि कर्मचारियों से जुड़े वित्तीय और सेवा लाभों के मामलों को अदालतों में ले जाने के बजाय सरकार को बातचीत के माध्यम से समाधान निकालना चाहिए। वेतनमान, डीए और पेंशन से जुड़े मामलों को कर्मचारियों का अधिकार बताते हुए मंच ने सरकार से तत्काल निर्णय लेने की मांग की है। मंच ने सरकार को 72 हजार नौकरियों के दावे, क्लास-1 अधिकारियों को मिलने वाले डीए और पंजाब की आर्थिक स्थिति सहित कई मुद्दों पर जवाब मांगा है। कर्मचारियों का कहना है कि रोजगार देने के दावों के साथ भर्ती किए गए कर्मचारियों को मिलने वाले शुरुआती वेतन और उनकी सेवा शर्तों की भी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। आंदोलन का अगला चरण     12-13 सितंबर: मंत्रियों के आवास के बाहर प्रदर्शन और घेराव।     19-20 सितंबर: अन्य मंत्रियों और विधायकों के खिलाफ प्रदर्शन।     30 सितंबर: चंडीगढ़ में प्रतीकात्मक कर्मचारी विधानसभा।     10 अक्टूबर: बड़ी कर्मचारी रैली।     21-22 अक्टूबर: दोबारा सामूहिक कैजुअल लीव। इससे पहले कर्मचारी संगठनों ने एक से सात सितंबर तक संयुक्त किसान मोर्चा के चंडीगढ़ आंदोलन में भी भाग लिया था। इन मांगों पर अड़े कर्मचारी लंबित डीए और एरियर जारी करने, पुरानी पेंशन योजना लागू करने, कांट्रैक्ट व आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित करने, एसीपी योजना बहाल करने और वेतन विसंगतियां दूर करने की मांग प्रमुख है। 17 जुलाई 2020 के बाद भर्ती कर्मचारियों को पुराने व संशोधित वेतनमान का पूरा लाभ देने के साथ मानदेय कर्मियों के लिए न्यूनतम वेतन लागू करने की मांग भी की जा रही है। पेंशनरों के लंबित वित्तीय लाभों के निपटारे की मांग भी मंच ने उठाई है। उधर, मान भत्ता वर्कर्स साझा मोर्चा की ओर से आशा कार्यकर्ताओं, फैसिलिटेटरों, मिड-डे मील वर्करों और सफाई कर्मचारियों की मांगों को लेकर मोहाली में रैली की जा रही है। डेमोक्रेटिक मुलाजिम फेडरेशन ने रैली को समर्थन देने की घोषणा की है। संगठन इन कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन के दायरे में लाने की मांग करेगा।

बस्तर में सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता! नक्सली डंप से विस्फोटक समेत सामान बरामद

सुकमा. सुकमा. छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में सुरक्षा बलों को नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में एक बार फिर बड़ी सफलता मिली है. चिंतलनार थाना क्षेत्र के चिन्नाबोड़केल के पहाड़ी-जंगल इलाके में सर्चिंग के दौरान जवानों ने नक्सलियों द्वारा पहले से छिपाकर रखे गए डंप का पता लगाया. यहां से हथियार, विस्फोटक, गोला-बारूद, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य नक्सली उपयोगी सामग्री बरामद की गई है. सुकमा पुलिस के मुताबिक, 5 सितंबर को मिले इंटेलिजेंस के आधार पर कैंप रायगुडेम से 223वीं वाहिनी सीआरपीएफ और जिला पुलिस बल की संयुक्त टीम को चिन्नाबोड़केल के जंगल-पहाड़ी क्षेत्र में एरिया डोमिनेशन और सर्चिंग के लिए रवाना किया गया था. सर्चिंग के दौरान संदिग्ध डंप मिला, जिसके बाद इलाके की सघन तलाशी ली गई. बरामद सामग्री में एक भरमार बंदूक, बीजीएल बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली 57 पाइप, तीन आईईडी कंटेनर, दो वायरलेस सेट, इलेक्ट्रिक डेटोनेटर समेत अन्य डेटोनेटर, करीब एक किलो गन पाउडर और तीन किलो यूरिया शामिल हैं. इसके अलावा बड़ी संख्या में बैटरियां, इलेक्ट्रिक तार, चार्जर, रेडियो सेट, सर्किट बोर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामग्री भी मिली है. सुरक्षा बलों को डंप से नक्सली साहित्य, झंडा, यूनिफॉर्म, तीर-कमान, लोहे की स्पाइक और अन्य दैनिक उपयोग की सामग्री भी बरामद हुई है. पुलिस का कहना है कि बरामद सामग्री को सुरक्षित कब्जे में लेकर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा रही है. अधिकारियों के मुताबिक, नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत जंगलों और दुर्गम इलाकों में पहले से छिपाकर रखे गए हथियारों और विस्फोटक डम्प की तलाश लगातार जारी है. सुकमा पुलिस का कहना है कि क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और विकास का माहौल कायम करने के लिए ऐसे अभियान आगे भी जारी रहेंगे.

MBBS इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन जारी, स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर आज सरकारी अस्पतालों में OPD ठप

भोपाल MBBS इंटर्न डॉक्टर्स के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब प्रदेशभर में फैलता नजर आ रहा है। सोमवार सुबह से चल रहे प्रदर्शन के बाद पुलिस की कार्रवाई से नाराज इंटर्न डॉक्टर्स ने मंगलवार को प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में OPD सेवाओं के बहिष्कार का ऐलान किया है।डॉक्टरों के मुताबिक, इस दौरान इमरजेंसी सेवाएं जारी रहेंगी, ताकि गंभीर मरीजों को तत्काल चिकित्सा सुविधा मिलती रहे। हालांकि OPD बंद रहने से सामान्य मरीजों की नियमित जांच और उपचार सेवाएं प्रभावित होने की संभावना है। भोपाल में रातभर सड़क पर डटे रहे इंटर्न डॉक्टर राजधानी भोपाल में इंटर्न डॉक्टरों का प्रदर्शन रातभर जारी रहा। डॉक्टर कमला पार्क की सड़क पर बैठकर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते रहे।प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने मुख्यमंत्री निवास की ओर जाने वाले रास्तों पर सुरक्षा बढ़ा दी है। CM हाउस की तरफ जाने वाले सभी प्रमुख रास्तों को बंद कर दिया गया है, जिससे प्रदर्शनकारियों को मुख्यमंत्री निवास की ओर आगे बढ़ने से रोका जा सके। इंदौर और रतलाम में भी असर भोपाल के अलावा इंदौर, रतलाम समेत प्रदेश के अन्य सरकारी अस्पतालों में भी इंटर्न डॉक्टर्स के काम नहीं करने की बात सामने आई है। इससे सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों को नियमित OPD सेवाओं के लिए परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।हालांकि आंदोलन के दौरान इमरजेंसी सेवाओं को जारी रखने की बात कही गई है। चिकित्सक समुदाय के लिए काला दिन जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन (जेडीए) ने समर्थन जताते हुए मंगलवार को हमीदिया अस्पताल की नियमित ओपीडी और इलेक्टिव ओटी का पूर्ण बहिष्कार कर दिया है। प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे एमटीए के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. राकेश मालवीय ने इसे चिकित्सक समुदाय के लिए काला दिन करार दिया और मांग पूरी न होने पर पूरे डॉक्टर समुदाय के आंदोलन में उतरने की चेतावनी दी। प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे जीतू पटवारी इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री को खुद आंदोलन कर रहे डॉक्टरों के बीच आकर उनकी मांग सुननी चाहिए। पटवारी ने CM हाउस जाने वाले रास्ते पर बैरिकेडिंग को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यहां भारत-पाकिस्तान की बॉर्डर बना दी गई है। उन्होंने सरकार से डॉक्टरों की मांगों पर गंभीरता से विचार कर जल्द समाधान निकालने की अपील की। कमला पार्क की सड़क पर रातभर डटे रहे इंटर्न डॉक्टर भोपाल में प्रदर्शन कर रहे MBBS इंटर्न डॉक्टर पुलिस कार्रवाई के बाद भी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। कई इंटर्न डॉक्टर रातभर कमला पार्क की सड़क पर बैठे रहे और अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करते रहे। डॉक्टरों का कहना है कि वे लंबे समय से स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के बावजूद पुलिस ने उनके खिलाफ वाटर कैनन और बल प्रयोग का इस्तेमाल किया। वहीं, प्रशासन ने मुख्यमंत्री निवास की ओर जाने वाले रास्ते को बंद कर दिया है। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिस ने इलाके में बैरिकेडिंग कर रास्तों पर निगरानी बढ़ा दी है। प्रदेशभर में OPD बंद, इमरजेंसी सेवा रहेगी चालू इंटर्न डॉक्टरों के आंदोलन को जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन का समर्थन मिलने के बाद इसका असर प्रदेश के कई सरकारी अस्पतालों में दिखाई दे रहा है। भोपाल के अलावा इंदौर, रतलाम और अन्य शहरों में भी डॉक्टरों के काम से दूर रहने की जानकारी सामने आई है। जूनियर डॉक्टर ने साफ किया है कि जब तक इंटर्न डॉक्टरों की मांगों पर समाधान नहीं होता, तब तक नियमित OPD और तय इलेक्टिव ऑपरेशन सेवाओं का बहिष्कार जारी रहेगा। हालांकि, मरीजों की परेशानी को देखते हुए इमरजेंसी सेवाओं को बंद नहीं किया गया है। गंभीर मरीजों को अस्पतालों में जरूरी चिकित्सा सुविधा मिलती रहेगी।  स्टाइपेंड बढ़ाने के साथ पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल जूनियर डॉक्टर मध्य प्रदेश के वाइस प्रेसिडेंट अनुराग भारती के मुताबिक, प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बातचीत हुई है, लेकिन इंटर्न डॉक्टर अपनी मांगों पर कायम हैं। डॉक्टरों की मुख्य मांगों में स्टाइपेंड में तत्काल बढ़ोतरी शामिल है। इसके साथ ही प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा कथित लाठीचार्ज और वाटर कैनन के इस्तेमाल को लेकर भी कार्रवाई की मांग की जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे मेडिकल छात्रों और इंटर्न डॉक्टरों के साथ हुई पुलिस कार्रवाई की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन भी समर्थन में मामले को लेकर मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन मध्यप्रदेश ने भी प्रदर्शनकारी डॉक्टरों का समर्थन किया है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राकेश मालवीय देर रात प्रदर्शन कर रहे इंटर्न डॉक्टरों से मिलने पहुंचे। उन्होंने पुलिस कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन के दौरान वाटर कैनन और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किए जाने से डॉक्टरों में आक्रोश है। उन्होंने इस घटना को चिकित्सक समुदाय के लिए दुखद बताया और कहा कि यदि इंटर्न डॉक्टरों की मांगों का समाधान नहीं हुआ तो पूरा चिकित्सक समुदाय उनके साथ खड़ा रहेगा। डॉक्टरों पर बल प्रयोग की निंदा   अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पुलिसिया कार्रवाई को असंवैधानिक बताते हुए घायल डॉक्टरों के नि:शुल्क इलाज और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। वहीं एफएआईएमए के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. आकाश सोनी ने कहा कि उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ की तर्ज पर सरकार को बल प्रयोग के बजाय बातचीत के जरिए इस मुद्दे का समाधान निकालना चाहिए। इंटर्न बोले- उप मुख्यमंत्री खुद आएं प्रशासनिक स्तर पर देर रात हुई कलेक्टर और सीएमई की वार्ता बेनतीजा रही। गांधी मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. कविता सिंह जब छात्रों को डिप्टी सीएम से मिलाने ले जाने पहुंचीं, तो डॉक्टरों ने वहां जाने से साफ इंकार कर दिया। इंटर्न डॉक्टरों की दो टूक मांग है कि स्टाइपेंड में तत्काल बढ़ोतरी के साथ-साथ उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल स्वयं आकर उनसे बात करें और लाठीचार्ज के जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाए। लाठीचार्ज और वॉटर कैनन के विरोध में JDA भी उतरा इंटर्न डॉक्टर्स के समर्थन में जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन (JDA) भी सामने आया है। सोमवार को मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च के दौरान पुलिस द्वारा लाठीचार्ज और वॉटर कैनन के इस्तेमाल का JDA ने विरोध किया है। स्टाइपेंड बढ़ोतरी … Read more